Tejashwi Yadav Slams BJP Over ‘Maulana’ Remark

Tejashwi Yadav Slams BJP Over ‘Maulana’ Remark: मौलाना कहे जाने पर भड़के तेजस्वी यादव ने बीजेपी को लेकर कही यह बात 

इन दिनों वक्फ कानून को लेकर बिहार की राजनीति खासी गरमाई हुई है। जिसे लेकर नेताओं में बयानबाजी जारी है। आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने इस मुद्दे पर केंद्र सरकार और बीजेपी पर निशाना साधते हुए स्पष्ट कहा है कि “वे धर्म नहीं, कर्म की राजनीति में विश्वास रखते हैं। साथ ही उन्होंने बीजेपी के प्रवक्ताओं की ओर से लगाए गए आरोपों का भी मंच से जवाब देते हुए कहा कि “लगातार दिल्ली में बीजेपी के चिरकुट सब… संघी वाले, दो दिन से हमको गाली दे रहे (Tejashwi Yadav Slams BJP Over ‘Maulana’ Remark) हैं। कभी नमाजवादी कह रहे हैं कभी ‘मौलाना’ कह रहे हैं।” दरअसल, तेजस्वी यादव मंगलवार को पटना के बापू सभागार में आयोजित अब्दुल कय्यूम अंसारी की 120वीं जयंती के मौके पर आयोजित समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस मौके पर उन्होंने कहा कि “हम मुद्दों की बात करते हैं, वे मुर्दों की बात करते हैं। नफरत फैलाने की कोशिश हो रही है।” हम धर्म के नाम पर नहीं, कर्म के नाम पर (Tejashwi Yadav Slams BJP Over ‘Maulana’ Remark) बनाएंगे पहचान- तेजस्वी यादव  बीजेपी की आड़े हाथों लेते हुए तेजस्वी यादव ने कहा कि “हम धर्म के नाम पर नहीं, कर्म के नाम पर पहचान बनाएंगे। मंदिर भी सजाएंगे और मस्जिद भी, हमारा और जनता का रिश्ता सिर्फ राजनीति का नहीं, जज्बात का (Tejashwi Yadav Slams BJP Over ‘Maulana’ Remark) है। जब हमारी तकलीफ एक है तो हम अलग कैसे हो सकते हैं? अगर जनता का साथ मिला तो नागपुर से चल रही सरकार और नागपुरिया कानून को सत्ता से बेदखल करने का काम करेंगे।” जानकारी के मुताबिक इस पूरे विवाद की शुरुआत बीते रविवार को तब हुई जब तेजस्वी यादव ने पटना के गांधी मैदान में आयोजित वक्फ बचाओ, संविधान बचाओ रैली को संबोधित करते हुए केंद्र सरकार की ओर से लागू वक्फ कानून पर तीखा बयान देते हुए कहा कि “बिहार में मौजूदा सरकार सत्ता से बाहर होने की राह पर है। अगर राज्य में विपक्षी दलों की सरकार बनती है तो वक्फ कानून को कूड़ेदान में फेंक देंगे।”  तेजस्वी यादव इस देश को इस्लामिक मुल्क बनाना चाहते (Tejashwi Yadav Slams BJP Over ‘Maulana’ Remark) हैं- गौरव भाटिया (बीजेपी प्रवक्ता)  इसी बात को लेकर बीजेपी तेजस्वी यादव पर हमलावर है। तेजस्वी यादव के बयान के बाद बीजेपी के प्रवक्ता गौरव भाटिया ने बीते मंगलवार को दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर तेजस्वी यादव पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि “तेजस्वी यादव इस देश को इस्लामिक मुल्क बनाना चाहते (Tejashwi Yadav Slams BJP Over ‘Maulana’ Remark) हैं। ये शरिया कानून लागू करना चाहते हैं। मौलाना तेजस्वी यादव संविधान को जानते नहीं हैं। आरजेडी बिहार में अगले 50 साल सत्ता में आने वाली नहीं है। हमारे लिए अंबेडकर जी पूजनीय हैं। तेजस्वी यादव और लालू यादव सांप्रदायिक राजनीति करते हैं। हिंदू और मुस्लिम राजनीति कर रहे हैं।” इसे भी पढ़ें:- विजय दिवस के पहले नारायण राणे ने राज को याद दिलाया उद्धव का किया अपमान, कही यह बात  मुझे मौलाना बोल रहे हैं, इसका मतलब तो विद्वान होता (Tejashwi Yadav Slams BJP Over ‘Maulana’ Remark) है- तेजस्वी यादव  इसके बाद पलटवार करते हुए आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने कहा कि “भाजपा के लोग दो दिन से मुझे गाली दे रहे हैं। ऐसे लोगों के लिए हमारे प्रवक्ता ही काफी हैं। मुझे मौलाना बोल रहे हैं, इसका मतलब तो विद्वान होता (Tejashwi Yadav Slams BJP Over ‘Maulana’ Remark) है।” यही नहीं, जेडीयू दफ्तर में पीएम मोदी की तस्वीर लगाये जाने पर तेजस्वी ने कहा कि “जेडीयू बीजेपी का प्रकोष्ठ बन गया है। जेडीयू को बीजेपी ने हाईजैक कर लिया है। जदयू को तोड़ने की कोशिश तो शुरू से ही हो रही थी, अब यह दिखने लगा है। चाचा जब हमारे पास आए थे उसी समय बीजेपी ने जेडीयू को तोड़ना शुरू कर दिया था।  झारखंड-महाराष्ट्र में जब ऑपरेशन लोटस चल रहा था, उस समय बिहार में भी चल रहा था।” Latest News in Hindi Today Hindi news Tejashwi Yadav Slams BJP Over ‘Maulana’ Remark #TejashwiYadav #BJP #MaulanaRemark #BiharPolitics #PoliticalNews

आगे और पढ़ें
caffeine anti-aging

क्या कैफीन एजिंग प्रोसेस को स्लो कर सकता है और रख सकता है आपको हमेशा यंग

अगर आप भी उन लोगों में से एक हैं जिन्हें सुबह उठते ही कैफीन (Caffeine) की जरूरत होती है, तो याद रखें आप अकेले नहीं हैं क्योंकि अधिकतर लोगों के लिए सुबह उठते ही चाय या कॉफी पीना उनकी एक जरूरत है। कैफीन एक नेचुरल केमिकल है, जिसमें स्टीमुलेंट इफेक्ट्स होते हैं। यह चाय, कॉफी, कोकोआ आदि में पाया जाता है। कैफीन (Caffeine) से हमारा सेंट्रल नर्वस सिस्टम, हार्ट, मसल्स और वो सेंटर्स स्टिमुलेट होते हैं जो ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करते हैं। कैफीन (Caffeine) से ब्लड प्रेशर बढ़ता है और यह वाटर पिल की तरह काम करता है जिससे यूरिन फ्लो बढ़ता है। एक सवाल यह है कि क्या कैफीन उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को धीमा करने और यंग बनाए रखने में मदद कर सकता है? तो आइए जानें कैफीन और एजिंग के बीच में संबंध (Connection between caffeine and aging) के बारे में। कैफीन और एजिंग के बीच में संबंध (Connection between caffeine and aging): पाएं जानकारी मायो क्लिनिक (MayoClinic) के अनुसार एक स्वस्थ वयस्क के लिए दिन में 400 मिलीग्राम कैफीन लेना सुरक्षित माना गया है। इसलिए, इस बात को ध्यान रखें कि कैफीन (Caffeine) का सेवन बहुत सावधानी से करना चाहिए खासतौर पर एनर्जी ड्रिंक्स का। आइए कैफीन और एजिंग के बीच में संबंध (Connection between caffeine and aging) के बारे में और जानें कि क्या कैफीन (Caffeine) उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को धीमा करने और यंग बनाए रखने में मदद कर सकता है?  क्या कैफीन उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को धीमा कर सकता है? साइंटिस्ट के अनुसार कैफीन (Caffeine) सिर्फ एनर्जी को बढ़ाने का ही काम नहीं करती है बल्कि यह और भी बहुत सी चीजों में फायदेमंद है। यह हेल्दी एजिंग (Aging) में मददगार है। शोध के अनुसार कैफीन एएमपी को एक्टिव रखता है, जो स्ट्रेस और चिंता आदि से लड़ने में मददगार है। एएमपीके का अर्थ है एक्टिवेटेड प्रोटीन किनेज, जो एक सेलुलर एनर्जी सेंसर है और सेल्स के अंदर एनर्जी बैलेंस बनाये रखने में मदद करता है।  कैफीन (Caffeine) सेल्स के डिवीजन और डेवलपमेंट को भी प्रभावित करता है। इससे हमारे सेल्स को लम्बे समय तक सर्वाइव करने में मदद मिलती है और तनाव से बचाव होता है। तनाव से हमारे शरीर और दिमाग नेगेटिव प्रभाव पड़ता है लेकिन इससे बचाव से समय से पहले एजिंग (Aging) से भी बचा जा सकता है और यंग रहने में मदद मिलती है। लेकिन, इसके बारे में और शोध करने की जरूरत है। इसे भी पढ़ें:-  महाराष्ट्र में तीन भाषा नीति पर सरकार का बड़ा फैसला: पुरानी नीतियां रद्द, नई समिति का गठन कैफीन के अन्य फायदे क्या हैं? कैफीन हमें सतर्क रखने और एनर्जी को सुधारने का काम करता है। इसके अन्य फायदे इस प्रकार हैं: कैफीन (Caffeine) को दर्द दूर करने वाली दवाईयों के साथ लेने से माइग्रेन के उपचार के लिए प्रभावी है।  कॉग्निटिव परफॉरमेंस को सुधारने में भी इसे फायदेमंद माना गया है। मूड को सुधारने और डिप्रेशन के रिस्क को कम करने में भी कैफीन लाभदायक है। लेकिन, इसका सेवन सही मात्रा में ही करना चाहिए। कुछ स्टडीज यह बताती है कि नियमित रूप से कैफीन (Caffeine) का सेवन करने से टाइप 2 डायबिटीज, पर्किंसन,स डिजीज आदि के डेवलप करने के जोखिम कम होता है। ऐसा माना गया है कि इसे लेने से हार्ट फेलियर के रिस्क को कम किया जा सकता है। लेकिन, कैफीन का सेवन सही और संतुलित मात्रा में ही करना चाहिए। कैफीन को पीने से लिवर डैमेज और सिरोसिस के रिस्क के साथ भी लिंक किया जाता है। कैफीन (Caffeine) में एंटीऑक्सीडेंट और एंटी-इंफ्लेटरी प्रॉपर्टीज होती हैं जो सर्कुलेशन को सुधारने और झुर्रियों को कम करने में फायदेमंद हैं। नोट:- यहां दी गई जानकारी केवल रिसर्च के आधार पर दी गई है। लेकिन अगर आप किसी भी शारीरिक समस्या से परेशान हैं, तो अपने हेल्थ एक्सपर्ट से सलाह लेना न भूलें। Latest News in Hindi Today Hindi news Caffeine #caffeine #antiaging #stayyoung #youthfulskin #coffeehealth #skincare #healthtips

आगे और पढ़ें
Raj Thackeray news

राज ठाकरे की धमकी, ‘हिंदी को मराठी से बेहतर दिखाने की कोशिश कर रहे लोग ध्यान रखें चुनाव और गठबंधन होते रहते हैं, लेकिन…’

महाराष्ट्र में तीसरी भाषा पर छिड़ा विवाद (Maharashtra Three Language Policy) अभी भी थमने का नाम नहीं ले रहा है। राज्य सरकार ने प्राथमिक स्कूलों में तीसरी भाषा के तौर पर हिंदी को लागू करने का आदेश वापस ले लिया है, लेकिन विपक्ष अभी भी इस मुद्दे पर सरकार को घेरने में जुटा है। मनसे (MNS) प्रमुख राज ठाकरे (Raj Thackeray) ने एक बार फिर राज्य सरकार पर प्रहार करते हुए कहा, ‘मराठी भाषा (Marathi Language) के मुद्दे को राजनीति का नाम न दें। राज्य में राजनीतिक गठबंधन और चुनाव होते आए हैं और होते रहेंगे, लेकिन अगर एक बार मराठी भाषा (Marathi Language) खत्म हो गई तो समझ लीजिए सब कुछ खत्म हो जाएगा। इस मुद्दे को सभी राजनीतिक पार्टियों को एक चुनौती के रूप में देखना चाहिए।”  मनसे (MNS) अध्यक्ष राज ठाकरे (Raj Thackeray) मुंबई में मीडिया से बातचीत कर रहे थे। उन्होंने इसी दौरान कहा कि, “मराठी भाषा को खत्म करने या इससे समझौता करने वाले किसी भी व्यक्ति का मैं खुलकर विरोध करूंगा। भले ही वह व्यक्ति किसी भी पार्टी का ही क्यों न हो, मैं उसके खिलाफ खड़ा होऊंगा और पूरी ताकत से लड़ंगा।” राज ठाकरे (Raj Thackeray) ने मराठी भाषा पर अपनी बात रखते हुए यह भी कहा, ”हिंदी भाषा देश में व्यापक रूप से बोली जाती है, लेकिन इसे अन्य राज्यों पर जबरन नहीं थोपा जाना चाहिए, क्योंकि यह राष्ट्रीय भाषा नहीं है। इस भाषा को प्राचीन मराठी भाषा से ऊपर रखने का कोई भी प्रयास कभी भी बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।  मराठी भाषा का इतिहास 3,000 साल पुराना  राजा ठाकरे ने कहा कि हम किसी भाषा का विरोध नहीं कर रहे हैं, हम सिर्फ मराठी भाषा की रक्षा कर रहे हैं। हिन्दी भाषा का इतिहास 150 से लेकर 200 साल पुराना है, लेकिन इसे उस भाषा से बेहतर दिखाने की कोशिश की जा रही है, जिसका इतिहास 3000 साल पुराना है। कुछ लोग अपने राजनीतिक स्वार्थ को पूरा करने के लिए साजिश रच रहे हैं और हिन्दी भाषा को सर्वश्रेण दिखा रहे हैं। यह अस्वीकार्य है और महराष्ट्र की जनता यह नहीं होने देगी। सरकार अगर फिर से हिन्दी थोपने का प्रयास करेगी तो उसे इससे भी ज्यादा कड़ा जवाब मिलेगा।  हिंदी भाषा का विरोध बढ़ता देख सरकारी आदेश रद्द बता दें कि महाराष्ट्र सरकार ने प्राइमरी स्कूलों में पहली कक्षा से पांचवी कक्षा तक तीसरी भाषा के तौर पर हिंदी (Maharashtra Three Language Policy) को शामिल किया था। सरकार के इस फैसले का राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे की पार्टी ने जमकर विरोध किया। मनसे कार्यकर्ताओं ने कई जगह पर हिन्दी भाषी लोगों के साथ मारपीट भी की। हिन्दी के खिलाफ विरोध बढ़ता देख देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व वाली महायुती सरकार ने ‘त्रि-भाषा’ नीति पर रोक लगाने के साथ एक समिति का गठन कर दिया, जो हिन्दी भाषा को लागू करना है या नहीं, इस बात का फैसला करेगी। राज ठाकरे (Raj Thackeray) ने इस समिति को लेकर भी राज्य सरकार को धमकी दी है। उन्होंने कहा, ‘मैं फडणवीस सरकार को साफ शब्दों में कहना चाहता हूं, उनकी समिति की रिपोर्ट पक्ष में आए या विपक्ष में, लेकिन हिन्दी को दोबारा बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यह बात सरकार को हमेशा अपने दिमाग में रखनी चाहिए।”  इसे भी पढ़ें:- विजय दिवस के पहले नारायण राणे ने राज को याद दिलाया उद्धव का किया अपमान, कही यह बात  राज ठाकरे के कार्यकर्ताओं ने मराठी न बोलने पर बुजुर्ग दुकानदार को पीटा  महाराष्ट्र में हिंदी को लेकर जारी विवाद में राज ठाकरे के कार्यकर्ता अब सरेआम गुंडागर्दी करते नजर आ रहे हैं। सोशल मीडिया पर इस समय एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें मनसे कार्यकर्ता मराठी न बोलने पर एक बुजुर्ग दुकानदार को पीटते नजर आ रहे हैं। बताया जा रहा है कि जिस दुकानदार को पीटा गया, वह मुंबई के मीरा रोड पर स्थित जोधपुर स्वीट्स का मालिक है। दुकानदार की सरेआम पिटाई के बाद पूरे इलाके में तनाव और दहशत पैदा हो गया है। पुलिस ने मामले की गंभीर को देखते मनसे कार्यकर्ताओं के खिलाफ विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।  Latest News in Hindi Today Hindi news Raj Thackeray #RajThackeray #MarathiPride #MNS #MaharashtraPolitics #HindiVsMarathi #PoliticalWarning #LatestNews

आगे और पढ़ें
Trump Gaza ceasefire

Trump Proposes 60-Day Ceasefire in Gaza, Israel Agrees: ट्रंप का ऐलान, गाजा में 60 दिन का युद्धविराम होगा, इजरायल तैयार लेकिन हमास 

इजरायल और ईरान में सीजफायर कराने के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इजरायल और हमास में भी सीजफायर (GazaCeasefire) कराने का प्रयास कर रहे हैं। जानकारी के मुताबिक इजरायल और हमास में 60 दिन का युद्धविराम हो सकता है। हालाँकि इससे पहले भी जनवरी 2025 में 15 महीने की जंग के बाद इजरायल और हमास के बीच 6 सप्ताह का युद्धविराम हुआ (Trump Proposes 60-Day Ceasefire in Gaza, Israel Agrees) था। खैर, इजरायल सीजफायर के लिए तैयार है, बात हमास को लेकर अटकी है। दोनों के बीच सीजफायर हो सके इसलिए वाशिंगटन में व्हाइट हाउस के अधिकारियों ने इजरायल के रणनीतिक मामलों के मंत्री रान डर्मर से बातचीत भी की। बड़ी बात यह कि इस मुलाकात में इजरायल के मंत्री हमास के साथ सीजफायर की शर्तों को मानने के लिए राजी हो गए हैं। इस मुलाकात के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने ]सोशल अकाउंट पर एक पोस्ट लिखकर इजरायल और हमास में सीजफायर होने की उम्मीद जताई। गौरतलब हो कि “दोनों पक्षों में संघर्ष विराम की बात तब उठी, जब गाजा को खाली करने नया आदेश जारी हुआ।” जरायल ने 60 दिन के युद्धविराम के प्रस्ताव को फाइनल करने के लिए जरूरी शर्तों पर जता (Trump Proposes 60-Day Ceasefire in Gaza, Israel Agrees) दी है सहमति  राष्ट्रपति ट्रंप ने इस बात की जानकारी अपने ट्रूथ सोशल अकाउंट पर एक पोस्ट के रूप में दी। उन्होंने पोस्ट में लिखा कि “अमेरिका के प्रतिनिधियों ने आज गाजा के साथ युद्धविराम के मुद्दे पर इजरायलियों के साथ लंबी बैठक की। इजरायल ने 60 दिन के युद्धविराम (GazaCeasefire) के प्रस्ताव को फाइनल करने के लिए जरूरी शर्तों पर सहमति जता (Trump Proposes 60-Day Ceasefire in Gaza, Israel Agrees) दी है। दोनों पक्षों में संघर्ष विराम तभी होगा, जब सभी मिलकर एक साथ प्रयास करेंगे। कतर और मिस्र सीजफायर के अंतिम प्रस्ताव को पेश करेंगे। उम्मीद है कि मध्य पूर्व की भलाई के लिए हमास सीजफायर के समझौते को स्वीकार करेगा, क्योंकि अगर युद्ध चलता रहा तो हालात और बदतर होते जाएंगे। इसलिए हमास भी संघर्ष विराम के लिए आगे आए।” इसे भी पढ़ें:- महाराष्ट्र में मराठी बनाम हिंदी विवाद फिर गरमाया 7 अक्टूबर 2023 को हमास ने इजरायल पर किया था (Trump Proposes 60-Day Ceasefire in Gaza, Israel Agrees) हमला  कहने की जरूरत नहीं कि गाजा में सीजफायर हेतु दुनिया की नजरें अब हमास के रुख पर (GazaCeasefire) टिकी हैं। हमास ने इससे पहले कहा था कि “वह इजरायली सैनिकों की पूर्ण वापसी और गाजा में युद्ध खत्म करने के बदले सभी बंधकों को रिहा करने को तैयार है।” लेकिन इजरायल ने अपनी सेना की वापसी और युद्ध पूरी तरह खत्म करने के हमास के प्रस्ताव को खारिज कर दिया (Trump Proposes 60-Day Ceasefire in Gaza, Israel Agrees) था। बता दें कि पिछले 20 महीने से इजरायल-हमास युद्ध चल रहा है। लगातार जारी युद्ध की वजह से हालात दिन-ब-दिन ख़राब होते जा रहे हैं। इस जंग का मकसद हमास के नेतृत्व वाले आतंकवादी संगठनों को खत्म करना हैं। 7 अक्टूबर 2023 को हमास ने इजरायल पर हमला किया था, जिसमें 1200 इजरायली मारे गए और 250 से अधिक लोग बंधक बनाए गए। जवाबी कार्रवाई करते हुए इजरायल ने गाजा में हवाई और जमीनी हमला किया। आज तक चले संघर्ष में गाज में रहने वाले 56000 से अधिक फिलिस्तीनी मारे जा चुके हैं। इस युद्ध में इजरायल के 726 सैनिक और 1200 लोगों ने जान गंवाई। खैर, ऐसे में एक पक्ष सीजफायर के लिए तैयार है। दूसरे पक्ष को अपना फैसला करना है। अब अमेरिका की शांति कराने की कोशिश किस हद तक सफल होती है, यह तो आनेवाला वक्त ही बताएगा, लेकिन बड़ी बात यह कि अमेरिका ने संघर्ष विराम के लिए इजरायल को मना लिया है। Latest News in Hindi Today Hindi news  Trump Proposes 60-Day Ceasefire in Gaza, Israel Agrees #trump #gaza #ceasefire #israel #hamas #middleeast #gazawar #gazaceasefire #trumpnews #breakingnews

आगे और पढ़ें
Indore digital city

इंदौर बनेगा देश का पहली डिजिटल सिटी: हर घर को मिलेगा यूनिक डिजिटल एड्रेस

भारत के सबसे स्वच्छ शहर के रूप में प्रसिद्ध इंदौर अब एक और बड़ी उपलब्धि की ओर अग्रसर है। मध्य प्रदेश का यह शहर देश की पहली डिजिटल सिटी (Digital City) बनने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रहा है। स्वच्छता में छह बार नंबर वन रह चुके इंदौर ने अब टेक्नोलॉजी और स्मार्ट गवर्नेंस को मिलाकर नागरिक सुविधाओं को पूरी तरह डिजिटल और पारदर्शी बनाने की योजना शुरू कर दी है। यह परियोजना न केवल प्रशासनिक व्यवस्था को आधुनिक बनाएगी, बल्कि प्रत्येक नागरिक को डिजिटल पहचान देने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है। क्या है डिजिटल सिटी प्रोजेक्ट? इस परियोजना के तहत इंदौर के हर घर को एक यूनिक डिजिटल एड्रेस (Digital Address) दिया जाएगा, जो GPS आधारित होगा। इस यूनिक एड्रेस (Unique Address) को एक QR कोड (QR Code) के माध्यम से घर के बाहर लगाया जाएगा। इस क्यूआर कोड (QR Code) को कोई भी व्यक्ति अपने स्मार्टफोन से स्कैन (Scan) करेगा तो संबंधित संपत्ति की विस्तृत जानकारी तुरंत मोबाइल स्क्रीन (Mobile Screen) पर दिखेगी। इस डिजिटल पते में शामिल होगी: यह सभी जानकारी डिजिटल प्लेटफॉर्म (Digital Platform) पर उपलब्ध होगी, जिससे नागरिकों को सेवाएं पाने में सुविधा होगी और नगर निगम की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता आएगी। वार्ड 82 से शुरुआत, पूरे शहर को कवर करने की तैयारी इंदौर में इस डिजिटल सिटी प्रोजेक्ट (Digital City Project) की शुरुआत वार्ड 82 से की गई है। पहले दिन इस योजना के तहत 20 घरों को जोड़ा गया और इसकी शुरुआत सुदामा नगर में साहित्यकार सदाशिव कौतुक के घर से की गई। महापौर पुष्यमित्र भार्गव के अनुसार अगले 20 दिनों में पूरे वार्ड के लगभग 7,000 घरों को इस योजना के तहत शामिल कर लिया जाएगा। इसके बाद इंदौर के बाकी 81 वार्डों में यह योजना एक साथ लागू की जाएगी, जिससे अगले दो महीनों में इंदौर पूरी तरह डिजिटल सिटी (Digital City Indore) बन जाएगा। दावा-आपत्ति और नागरिक शिकायतों के लिए भी तय समय सीमा के भीतर समाधान का प्रावधान रखा जाएगा, जिससे जनता की सहभागिता सुनिश्चित हो सके। डिजिटल एड्रेस (Digital Address) का क्या होगा फायदा? स्मार्ट गवर्नेंस (Smart Governance): नगर निगम को अब घर-घर जाकर जानकारी जुटाने की ज़रूरत नहीं होगी। QR कोड स्कैन (QR Code Scan) कर अधिकारी सीधे डिजिटल डेटा देख सकेंगे। नागरिकों को सुविधा: लोगों को अब सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। पानी-बिजली के बिल, टैक्स की स्थिति, अस्पताल से संबंधित सेवाएं एक क्लिक पर मिलेंगी। ट्रांसपरेंसी: डिजिटल रिकॉर्ड (Digital Record) होने से टैक्स चोरी पर रोक लगेगी और शहरी विकास में वास्तविक आंकड़ों के आधार पर निर्णय लिए जा सकेंगे। आपातकालीन सेवाएं तेज़: किसी भी मकान की सही लोकेशन को क्यूआर कोड (QR Code) के ज़रिए तत्काल साझा किया जा सकेगा, जिससे एम्बुलेंस या फायर सर्विस जैसी सेवाएं जल्दी पहुंच सकेंगी। डिजिपिन से कनेक्टिविटी: यह पूरा प्रोजेक्ट केंद्र सरकार के डिजिपिन प्लेटफॉर्म (Digipin Platform) से जुड़ा है। डिजिपिन यानी डिजिटल पिन (Digital Pin) के ज़रिए नागरिकों की पहचान और लोकेशन को एक साथ जोड़ दिया जाएगा। इसे भी पढ़ें:- विजय दिवस के पहले नारायण राणे ने राज को याद दिलाया उद्धव का किया अपमान, कही यह बात  डिजिटल भारत की दिशा में अहम कदम इंदौर का यह प्रयास प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) की डिजिटल इंडिया मुहिम (Digital India campaign) के तहत एक बड़ा मॉडल बन सकता है। जहां देशभर के शहर डिजिटल गवर्नेंस को लेकर योजनाएं बना रहे हैं, वहीं इंदौर इस पर वास्तविक काम कर रहा है और उदाहरण पेश कर रहा है। इससे पहले इंदौर ने स्मार्ट वेस्ट मैनेजमेंट, सफाई ऐप्स और डिजिटल बिलिंग जैसी कई योजनाओं को सफलतापूर्वक लागू किया है। अब डिजिटल एड्रेसिंग प्रणाली से यह शहर न सिर्फ स्मार्ट बनेगा, बल्कि यह भारत के अन्य शहरों को भी नई दिशा दिखाएगा। इंदौर का डिजिटल सिटी (Digital City) बनने का यह प्रयास सिर्फ एक तकनीकी पहल नहीं है, बल्कि यह सिटी गवर्नेंस और नागरिक सुविधा का आधुनिक मॉडल बन रहा है। हर घर का डिजिटल एड्रेस (Digital Address) न केवल प्रशासनिक प्रक्रियाओं को आसान बनाएगा, बल्कि नागरिकों के लिए भी जीवन अधिक सुगम और सुविधाजनक होगा। अगर यह मॉडल सफल रहता है, तो आने वाले समय में देश के अन्य शहर भी इस दिशा में आगे बढ़ सकते हैं। डिजिटल युग में इंदौर एक बार फिर देश को रास्ता दिखा रहा है और इस बार स्वच्छता नहीं, स्मार्ट नागरिक सेवाओं के जरिए। Latest News in Hindi Today Hindi news  Prime Minister Narendra Modi #indoredigitalcity #firstdigitalcity #smartcityindia #digitaladdress #indorenews

आगे और पढ़ें
Man Lives 2 Days with Dead Lover After Murder in Love Fight

Man Lives with Dead Lover 2 Days After Murder in Love Row: 3 साल का प्यार, 8 महीने का लिव-इन और अफेयर का शक, प्रेमिका की हत्‍या कर 2 दिन तक शव के साथ सोता रहा हत्यारा 

लोकबाग कहते हैं कि शक जानलेवा होता है। शक के चक्कर में न सिर्फ रिश्ते टूटते हैं बल्कि रिश्तों का खून भी हो जाता है। ऐसा ही एक सनसनीखेज मामला प्रकाश में आया है, जहाँ एक प्रेमी ने बॉस से अफेयर के शक में प्रेमिका की हत्‍या कर दी। हत्या के बाद  शव को कंबल में लपेटकर बेड पर रखा और उसके साथ सोता रहा। एक दिन उसने शराब के नशे में अपने दोस्त को प्रेमिका की हत्या वाली (Man Lives with Dead Lover 2 Days After Murder in Love Row) बात बताई। मामले की जानकारी मिलते ही पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। इस घटना के बाद से पूरे इलाके में हड़कंप मच गया है। दिल को दहला देने वाला यह मामला है मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल स्थित बजरिया थाना क्षेत्र का। जहाँ, 29 साल की रितिका सेन की उसके लिव-इन पार्टनर सचिन राजपूत ने गला घोंटकर हत्या कर दी। और हत्या के बाद आरोपी सचिन ने न सिर्फ शव को कंबल में लपेटकर बेड पर रखा, बल्कि दो दिनों तक उसी कमरे में शव के पास सोता रहा, जैसे मानो कुछ हुआ ही न हो।   सचिन को लगता था कि रितिका का उसके बॉस के साथ अफेयर (Man Lives with Dead Lover 2 Days After Murder in Love Row) है जानकारी के मुताबिक गायत्री नगर, यह बात है 27 जून की रात की, जब कररिया फार्म इलाके में रहने वाले दोनों के बीच उस रात किसी बात को लेकर दोनों के बीच जमकर बहस हुई। दरअसल, रितिका एक प्राइवेट फर्म में काम करती थीं और सचिन इन दिनों बेरोजगार था। उसे लगता था कि रितिका का उसके बॉस के साथ अफेयर है। इसी के चलते वो शक करता था। इसी बात को लेकर बात इतनी बढ़ गई कि गुस्से में आकर सचिन ने रितिका का गला दबा दिया और उसकी मौत हो गई। हैरत की बात यह कि हत्या के बाद सचिन ने रितिका के शव को कंबल और चादर में लपेटकर बेड पर रख दिया। उससे भी बड़ी बात यह कि वो उसी कमरे में रहा और शराब पीता (Man Lives with Dead Lover 2 Days After Murder in Love Row) रहा। दो दिनों तक उसने न सिर्फ वहीं शराब पी बल्कि उसी शव के पास सोया भी।  सचिन ने अपने दोस्त अनुज को शराब के नशे में हत्या की बात (Man Lives with Dead Lover 2 Days After Murder in Love Row) बताई इस बीच रविवार को सचिन ने अपने दोस्त अनुज को शराब के नशे में हत्या की बात बताई, लेकिन दोस्त ने उसे मजाक में लिया। सोमवार सुबह, जब फिर से वही बात दोहराई, तो अनुज को शक हुआ। उसने उसी दिन शाम 5 बजे डायल-112 पर कॉल कर पुलिस को सूचना दी। बजरिया थाना पुलिस जब मौके पर पहुंची तो दरवाजा खोलते ही कंबल में लिपटी रितिका की लाश बेड पर (Man Lives with Dead Lover 2 Days After Murder in Love Row) मिली। पुलिस के मुताबिक सचिन पहले से शादीशुदा है और उसके दो बच्चे हैं। आरोपी पिछले कई वर्षों से युवती के साथ रिलेशनशिप में था। और कुछ महीने पहले ही दोनों साथ रहने लगे थे। इसे भी पढ़ें:- आरजी कर कांड के बाद अब कोलकाता के लॉ कॉलेज में छात्रा के साथ हुआ सामूहिक दुष्कर्म आठ महीने पहले दोनों ने साथ रहने का फैसला किया और भोपाल में ही लिव-इन में रहने (Man Lives with Dead Lover 2 Days After Murder in Love Row) लगे थे बजरिया थाना पुलिस के डीसीपी शशांक के मुताबिक  29 वर्षीय मृतका रितिका सेन बजरिया की कुशीनगर कॉलोनी की रहने वाली है तो वहीं, 32 वर्षीय आरोपी सचिन का संबंध विदिशा के सिरोंज से है। चार साल पहले दोनों एक प्राइवेट कंपनी में नौकरी करते थे। इस दौरान दोनों की मुलाकात हुई और फिर दोस्ती हो गई। दोस्ती देखते ही देखते प्यार में बदल गई और दोनों रिलेशनशिप में आ गए। दोनों साढ़े तीन साल से रिलेशनशिप में थे। आठ महीने पहले दोनों ने साथ रहने का फैसला किया और भोपाल में ही लिव-इन में रहने लगे। रितिका एक प्राइवेट कंपनी में नौकरी करती थी। ऐसे में सचिन को शक था कि रितिका का उसके बॉस से अफेयर चल रहा है, जिसके कारण उसने रितिका की हत्या कर (Man Lives with Dead Lover 2 Days After Murder in Love Row) दी।” पूछताछ में सचिन ने पुलिस को बताया, रितिका अक्सर अपने बॉस से फोन पर बात करती रहती थी। इसे लेकर दोनों के बीच में झगड़े होने लगे। 27 जून की शाम को भी इसी बात को लेकर दोनों में लड़ाई हुई।  Latest News in Hindi Today Hindi Man Lives with Dead Lover 2 Days After Murder in Love Row #loveTriangleMurder #liveInCrime #DelhiMurder #affairSuspicion #girlfriendKilled

आगे और पढ़ें
Priyank Kharge Vows RSS Ban if Govt

केंद्र की सत्ता में आने के बाद RSS को बैन किया जाएगा: प्रियांक खड़गे

कर्नाटक के कैबिनेट मंत्री और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के बेटे प्रियांक खड़गे (Priyank Kharge) ने हाल ही में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) को लेकर जो टिप्पणी की है, उसने देश की सियासत में एक बार फिर तीखा मोड़ ला दिया है। प्रियांक ने RSS को राष्ट्रविरोधी मशीनरी बताते हुए कहा कि अगर उन्हें मौका मिला तो वे इस संगठन पर प्रतिबंध लगाएंगे और इसे खत्म करने के लिए हर तरीका अपनाएंगे। यह बयान ऐसे समय में आया है जब देश में राजनीतिक ध्रुवीकरण तेजी से बढ़ रहा है और चुनावी माहौल में तमाम पार्टियां अपनी विचारधारा को मजबूती से जनता के सामने रखने की कोशिश कर रही हैं। प्रियांक खड़गे का बयान: राजनैतिक रणनीति या वैचारिक विरोध? प्रियांक खड़गे (Priyank Kharge) ने साफ तौर पर कहा कि RSS पर कभी कोई गंभीर जांच नहीं हुई है और अगर उन्हें सत्ता में आने का अवसर मिला, तो वे इसकी जांच कराएंगे और कार्रवाई भी करेंगे। उन्होंने यह आरोप भी लगाया कि यह संगठन भारत के लोकतांत्रिक ढांचे के खिलाफ काम करता है और सांप्रदायिकता फैलाने का काम करता है। हालांकि कांग्रेस पार्टी की ओर से अभी तक इस बयान को लेकर कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन प्रियांक का यह रुख कांग्रेस की लंबे समय से चली आ रही आरएसएस-विरोधी विचारधारा से मेल खाता है। विशेष रूप से इंदिरा गांधी के दौर में, जब RSS पर आपातकाल के दौरान प्रतिबंध लगाया गया था, तब कांग्रेस और संघ के रिश्ते और भी कटु हो गए थे। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की स्थापना 27 सितंबर 1925 को नागपुर में डॉ. केशव बलराम हेडगेवार ने की थी। दशहरे के दिन शुरू हुआ यह संगठन आज भारत के सबसे बड़े गैर-सरकारी संगठनों में शामिल है। इसका प्रमुख उद्देश्य हिंदू समाज में एकता और अनुशासन लाना रहा है। वर्तमान में मोहन भागवत इसके सरसंघचालक हैं, जो 2009 से इस पद पर कार्यरत हैं। संघ की कार्यप्रणाली पूरी तरह से स्वयंसेवकों पर आधारित है। इसके स्वयंसेवक शिक्षा, सेवा, समाज सुधार और राष्ट्र निर्माण जैसे क्षेत्रों में सक्रिय रहते हैं। हालांकि, आलोचकों का आरोप है कि आरएसएस एक सांप्रदायिक एजेंडा चलाता है और इसका अंतिम लक्ष्य “हिंदू राष्ट्र” की स्थापना है, जो भारत के धर्मनिरपेक्ष संविधान के खिलाफ माना जाता है। पहले भी संघ पर लग चुका है प्रतिबंध RSS पर भारत सरकार ने अब तक तीन बार प्रतिबंध लगाया है: हालांकि हर बार संघ पर लगे प्रतिबंध को बाद में हटा लिया गया और संघ ने अपने संगठनात्मक ढांचे को और अधिक मजबूत कर लिया। कौन हैं प्रियांक खड़गे? प्रियांक खड़गे  (Priyank Kharge) का राजनीतिक करियर कांग्रेस के छात्र संगठन NSUI से शुरू हुआ। उन्होंने 1998 में राजनीति में कदम रखा और धीरे-धीरे प्रदेश युवा कांग्रेस से होते हुए विधानसभा चुनावों (Assembly Elections) तक पहुंचे। वे कर्नाटक के कलबुर्गी जिले की चित्तपुर सीट से तीन बार विधायक रह चुके हैं और वर्तमान में सिद्धारमैया सरकार में कैबिनेट मंत्री हैं। उनके बयानों को न केवल एक युवा नेता की मुखरता के रूप में देखा जा रहा है, बल्कि कांग्रेस (Congress) की उस पुरानी लाइन के तौर पर भी देखा जा रहा है जो संघ के विचारधारा से टकराव रखती है। इसे भी पढ़ें:- विजय दिवस के पहले नारायण राणे ने राज को याद दिलाया उद्धव का किया अपमान, कही यह बात  राजनीतिक नतीजे  प्रियांक खड़गे (Priyank Kharge) का बयान निश्चित रूप से कांग्रेस और भाजपा (Congress and BJP) समर्थकों के बीच एक नई बहस को जन्म देगा। जहां एक पक्ष इसे अभिव्यक्ति की आजादी और लोकतंत्र की रक्षा के रूप में देखेगा, वहीं दूसरा पक्ष इसे ‘हिंदू विरोधी’ एजेंडा बताएगा। खासकर चुनावी मौसम में इस तरह के बयान मतदाताओं को प्रभावित कर सकते हैं। आरएसएस (RSS) का समर्थक वर्ग काफी बड़ा है और यह संगठन भाजपा (BJP) के लिए वैचारिक रीढ़ की हड्डी के समान है। ऐसे में किसी भी नेता द्वारा संघ को खत्म करने या उस पर प्रतिबंध लगाने की बात करना गंभीर राजनीतिक नतीजे ला सकता है। प्रियांक खड़गे  (Priyank Kharge) का RSS को लेकर बयान सिर्फ एक बयान नहीं, बल्कि भारत की राजनीति में विचारधारा की उस जंग का हिस्सा है जो दशकों से चली आ रही है। एक ओर जहां RSS खुद को राष्ट्र सेवा में समर्पित मानता है, वहीं विरोधी उसे सांप्रदायिक और विभाजनकारी ताकत बताते हैं। इस बहस का अंत फिलहाल कहीं नजर नहीं आता, लेकिन इससे देश की लोकतांत्रिक चर्चा और विचार विमर्श और भी गंभीर रूप लेता जा रहा है। Latest News in Hindi Today Hindi news  Priyank Kharge #PriyankKharge #RSSBan #CongressStatement #PoliticalNews #BreakingNews #IndianPolitics #BJPvsCongress

आगे और पढ़ें
India won’t bow to Pakistan’s nuclear blackmail

India Won’t Fear Pakistan’s Nuclear Blackmail: पाकिस्तान के न्यूक्लियर ब्लैकमेल से नहीं डरेंगे- विदेश मंत्री एस. जयशंकर

ऑपेरशन सिंदूर के बाद से भारत पाकिस्तान पर हमलावर है। पाकिस्तान की करतूतों को उजागर करने का एक भी मौका भारत जाने नहीं देता। इस कड़ी में पाकिस्तान को खरी-खरी सुनाते हुए विदेश मंत्री एस. जयशंकर (External Affairs Minister S Jaishankar) ने कहा कि “पहलगाम आतंकवादी हमला आर्थिक युद्ध का नया कृत्य था। जिसका मकसद कश्मीर में पर्यटन खत्म करना था। इसका उद्देश्य धार्मिक हिंसा को भड़काना भी था क्योंकि लोगों को मारने से पहले उनसे उनके धर्म के बारे में पूछा गया था।” पाकिस्तान को आइना दिखाते हुए उन्होंने कहा कि “भारत ने यह स्पष्ट कर दिया है कि परमाणु ब्लैकमेल (nuclear blackmail) की पाकिस्तान की नीति भारत को पड़ोसी देश से उत्पन्न आतंकवाद का जवाब देने से नहीं रोक (India Won’t Fear Pakistan’s Nuclear Blackmail) पाएगी।” दरअसल, समाचार पत्रिका न्यूजवीक के सीईओ देव प्रगाद के साथ मैनहट्टन में 9/11 स्मारक के पास वन वर्ल्ड ट्रेड सेंटर स्थित प्रकाशन के मुख्यालय में आयोजित एक बातचीत के दौरान उन्होंने यह टिप्पणी की।  पहलगाम हमला एक आर्थिक युद्ध का कृत्य था, इसका उद्देश्य कश्मीर में पर्यटन को तबाह (India Won’t Fear Pakistan’s Nuclear Blackmail) करना था जयशंकर ने कहा कि “भारत में पिछले कुछ वर्षों में पाकिस्तान से प्रेरित कई आतंकवादी हमले हुए हैं और 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले के बाद देश में यही भावना है कि अब बहुत हो गया।” विदेश मंत्री जयशंकर (External Affairs Minister S Jaishankar) ने कहा कि “पहलगाम हमला एक आर्थिक युद्ध का कृत्य था। इसका उद्देश्य कश्मीर में पर्यटन को तबाह करना था, जो वहां की अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार (India Won’t Fear Pakistan’s Nuclear Blackmail) है। इसलिए हमने तय किया कि हम आतंकवादियों को दंडित किए बिना नहीं छोड़ सकते। वे सीमा के उस तरफ हैं और इसलिए उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं की जा सकती, मुझे लगता है कि इस तरह के विचार को चुनौती देने की आवश्यकता है और हमने यही किया।” जयशंकर ने कहा कि “हम यह भी बहुत लंबे समय से सुनते आ रहे हैं कि भारत और पाकिस्तान दोनों परमाणु संपन्न देश हैं और इसलिए कोई और शख्स आएगा और खौफनाक चीजें करेगा, लेकिन आप कुछ नहीं कर सकते क्योंकि इससे दुनिया चिंतित हो जाती है। अब हम इसके झांसे में नहीं आने (nuclear blackmail) वाले हैं। अगर वे आकर कुछ करेंगे तो हम वहां जाएंगे और जिन्होंने ऐसा किया है, उन्हें निशाना बनाएंगे। हम परमाणु ब्लैकमेल के आगे नहीं झुकने वाले हैं, आतंकवादियों को कोई छूट नहीं मिलेगी, उनके छिप छिपकर हमलों को बख्शा नहीं जाएगा। हमें अपने लोगों की रक्षा के लिए जो करना है, करेंगे।” उन्होंने कहा कि हम बहुत स्पष्ट हैं कि आतंकवादियों को कोई छूट नहीं दी जाएगी। हम अब उन पर परोक्ष रूप से नहीं बल्कि सीधा सीधा हमला करेंगे और उस सरकार को नहीं बख्शेंगे जो उनका समर्थन, वित्तपोषण और कई तरीकों से उन्हें बढ़ावा देती है। परमाणु ब्लैकमेल की नीति हमें जवाब देने से नहीं रोकेगी।  इसे भी पढ़ें:- महाराष्ट्र में मराठी बनाम हिंदी विवाद फिर गरमाया ऑपरेशन सिंदूर पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में आतंकी ढांचे को निशाना बनाने के लिए शुरू किया गया था-जयशंकर   गौरतलब हो कि जयशंकर (External Affairs Minister S Jaishankar) अमेरिका की आधिकारिक यात्रा पर हैं। इस बीच मंगलवार को चतुष्पक्षीय सुरक्षा संवाद क्वाड के विदेश मंत्रियों की बैठक में भाग लेने के लिए वाशिंगटन डीसी जाएंगे। क्वाड चार देशों – भारत, ऑस्ट्रेलिया, जापान और अमेरिका का समूह है। विदेश मंत्री ने अपनी यात्रा की शुरुआत संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में भारत के स्थायी मिशन द्वारा आयोजित आतंकवाद की मानवीय कीमत शीर्षक वाली एक प्रदर्शनी का उद्घाटन करके (India Won’t Fear Pakistan’s Nuclear Blackmail) की। इस दौरान जयशंकर ने कहा कि “भारत के खिलाफ हमलों को अंजाम देने वाले पाकिस्तान के आतंकवादी गुप्त रूप से काम नहीं करते हैं और इन आतंकी संगठनों के पाकिस्तान के घनी आबादी वाले शहरों में कॉरपोरेट मुख्यालय सरीखे ठिकाने हैं। हर कोई जानता है कि संगठन ‘ए’ और संगठन ‘बी’ का मुख्यालय क्या है और ये वे इमारतें, मुख्यालय हैं जिन्हें भारत ने ऑपरेशन सिंदूर में नष्ट कर दिया।” बता दें कि ऑपरेशन सिंदूर पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में आतंकी ढांचे को निशाना बनाने के लिए शुरू किया गया था, जिसका उद्देश्य पहलगाम हमले का बदला लेना था। पहलगाम आतंकवादी हमले में 26 निर्दोष नागरिक मारे गए थे और पाकिस्तान के आतंकवादी समूह लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े संगठन द रेजिस्टेंस फ्रंट ने जिम्मेदारी ली थी।  Latest News in Hindi Today Hindi news  S Jaishankar #India #Pakistan #NuclearThreat #SJaishankar #NationalSecurity #IndiaForeignPolicy

आगे और पढ़ें
Marathi vs Hindi Row Heats Up

भाषा पर राजनीति: महाराष्ट्र में मराठी बनाम हिंदी विवाद फिर गरमाया

महाराष्ट्र में भाषा को लेकर एक बार फिर सियासत गर्मा (Language controversy) गई है। बीती रात मुंबई के मीरा रोड इलाके में महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) के कार्यकर्ताओं ने कथित तौर पर एक नॉर्थ इंडियन फेरीवाले की पिटाई कर दी वो भी सिर्फ इसलिए क्योंकि वह मराठी बोलने से इनकार कर रहा था। यह घटना मीरा रोड (Mira Road) के बालाजी होटल के सामने हुई, जहां पीड़ित मसाला डोसा बेचने का काम करता है। इस घटना ने ना सिर्फ भाषा की अस्मिता पर बहस छेड़ दी है, बल्कि राज्य की राजनीति को भी एक बार फिर उबाल पर ला दिया है। मनसे की सख्त प्रतिक्रिया मनसे प्रमुख राज ठाकरे (Raj Thakre) ने इस मामले पर खुलकर बयान दिया और हिंदी के बढ़ते प्रभाव पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि हिंदी एक बड़ी भाषा ज़रूर है, लेकिन उसे राष्ट्रीय भाषा (National Language) के रूप में जबरन थोपना स्वीकार नहीं किया जाएगा। राज ठाकरे ने जोर देकर कहा कि मराठी का इतिहास 3,000 वर्षों से भी पुराना है, जबकि हिंदी एक अपेक्षाकृत नई भाषा है। उनका यह बयान स्पष्ट रूप से यह संकेत देता है कि मनसे राज्य में मराठी (Marathi) को सर्वोपरि रखने की नीति पर अडिग है। राज ठाकरे (Raj Thakre) ने यह भी कहा कि कुछ लोग हिंदी को मराठी से श्रेष्ठ दिखाने की कोशिश कर रहे हैं, जो उन्हें किसी भी कीमत पर मंजूर नहीं है। उनके अनुसार यह मराठी अस्मिता पर सीधा हमला है। हिंदी अनिवार्यता का फैसला रद्द भाषा विवाद (Language controversy) के इसी बढ़ते दबाव के बीच राज्य सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस (Chief Minister Devendra Fadnavis) ने रविवार को घोषणा की कि पहली कक्षा से हिंदी को अनिवार्य करने का जो निर्णय लिया गया था, उसे वापस लिया जा रहा है। इस फैसले का विरोध शिवसेना (UBT) और मनसे दोनों ने ही किया था। 5 जुलाई को इन दोनों दलों ने मिलकर “महामोर्चा” निकालने की घोषणा की थी, जिसे अब सरकार के फैसले के बाद रद्द किया जा सकता है। फडणवीस सरकार के इस कदम को विपक्ष ने सरकार की कमजोरी और दबाव में लिया गया फैसला बताया है। वहीं, मराठी समर्थकों का कहना है कि यह फैसला राज्य की सांस्कृतिक पहचान को बनाए रखने की दिशा में सही कदम है। उद्धव ठाकरे का तीखा हमला शिवसेना (UBT) के प्रमुख उद्धव ठाकरे (Uddhav Thackeray) ने भी इस पूरे मसले पर सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि मौजूदा सरकार यह मानती है कि जो भी भाजपा या सरकार की नीतियों का विरोध करता है, वह देशद्रोही है। ठाकरे ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार को स्वतंत्रता संग्राम की भावना का कोई ज्ञान नहीं है। उद्धव ठाकरे (Uddhav Thackeray) ने दावा किया कि त्रिभाषा फार्मूले के तहत हिंदी (Hindi) को थोपने के विरोध में जो एकजुटता दिख रही थी, उसे देखते हुए ही सरकार को अपना फैसला वापस लेना पड़ा। यह विपक्ष की एकजुटता और जन भावना की जीत है। इसे भी पढ़ें:- विजय दिवस के पहले नारायण राणे ने राज को याद दिलाया उद्धव का किया अपमान, कही यह बात  मराठी अस्मिता बनाम राष्ट्रीय एकता? यह पहला मौका नहीं है जब महाराष्ट्र में भाषा को लेकर विवाद हुआ है। मनसे और शिवसेना (UBT) (MNS and Shiv Sena UBT) वर्षों से राज्य में मराठी भाषा (Marathi Language) और संस्कृति को लेकर सख्त रुख अपनाते आए हैं। हालांकि, हर बार यह बहस इस सवाल पर खत्म होती है कि क्या किसी राज्य में एक विशेष भाषा को थोपना जायज़ है, और क्या ऐसा करना देश की बहुभाषी और बहुसांस्कृतिक पहचान के खिलाफ नहीं है? वहीं, दूसरी ओर यह भी जरूरी है कि देश की राजभाषा के रूप में हिंदी का सम्मान किया जाए, लेकिन जबरदस्ती नहीं। संविधान के अनुच्छेद 343 और 351 के अनुसार, हिंदी को बढ़ावा दिया जाना चाहिए, लेकिन अन्य भाषाओं के अधिकारों का उल्लंघन किए बिना। महाराष्ट्र में भाषा को लेकर चल रहा यह विवाद (Language controversy) सिर्फ शब्दों की लड़ाई नहीं है, बल्कि इससे जुड़ी है राज्य की सांस्कृतिक अस्मिता और राजनीतिक समीकरण। जहां एक ओर राजनीतिक दल अपने-अपने हितों को साधने में जुटे हैं, वहीं आम नागरिकों को ऐसी घटनाओं में नुकसान उठाना पड़ता है। जरूरत इस बात की है कि भाषा को विभाजन का नहीं, एकता का माध्यम बनाया जाए। सम्मान सभी भाषाओं को मिले और यही सच्चे लोकतंत्र की पहचान है। Latest News in Hindi Today Hindi news  Language #marathi #hindi #maharashtra #languagepolitics #marathivsHindi #marathipride #hindipolitics #maharashtranews

आगे और पढ़ें
Narayan Rane reignites old feud by recalling Uddhav's

Narayan Rane Targets Uddhav Before Vijay Diwas: विजय दिवस के पहले नारायण राणे ने राज को याद दिलाया उद्धव का किया अपमान, कही यह बात 

बीते दिनों हिंदी भाषा को लेकर छिड़े विवाद और लंबी चली बहस के बाद आखिरकार महाराष्ट्र की देवेंद्र फडणवीस सरकार को अपना फैसला वापस लेना ही पड़ा। भाषा विवाद पर भले राज्य सरकार ने बीएमसी इलेक्शन और मराठी वोटो के छिटकने एक डर से पूर्व के अपने दोनों आदेश रद्द कर दिए हों, लेकिन ठाकरे बंधु इस मुद्दे को हाथ से जाने देना नहीं (Narayan Rane Targets Uddhav Before Vijay Diwas) चाहते। हालाँकि राज्य सरकार ने साफ कर दिया है कि एक नई समिति बनाई जाएगी जो हिंदी भाषा को प्राथमिक स्कूलों में कक्षा पहली से पांचवी तक तीसरी भाषा के रूप में पढ़ाया जाना है या नहीं इसपर निर्णय लेगी। मजे की बात यह कि सूबे की भाजपा सरकार भले ही मुद्दे को भटकाने की कोशिश कर रही है, लेकिन ठाकरे बंधु 5 जुलाई को एक मंच पर साथ दिखेंगे। दरअसल, राज्य सरकार के इस फैसले को दोनों ठाकरे बंधू अपनी लड़ाई की जीत बता रहे हैं। दोनों का कहना है कि “महाराष्ट्र का मराठी मानुष साथ आया ये देख सरकार डर गई। ये मराठी मानुष की जीत है। इसका विजय दिवस जुलूस मनाया जाएगा।”  ठाकरे गुट और मनसे के वरिष्ठ नेताओं के बीच लगातार बैठकें हो (Narayan Rane Targets Uddhav Before Vijay Diwas) रही हैं मीडिया रिपोर्ट की माने तो 5 जुलाई को दोनों ठाकरे भाई एक साथ एक मंच पर कई वर्षों के बाद आएंगे। पहले इस विजय दिवस के लिए शिवाजी पार्क और गिरगांव चौपाटी पर विचार चल रहा था। रिपोर्ट के मुताबिक दोनों नेताओं की आपसी सहमति से वर्ली डोम संभागृह को फाइनल किया गया है। ध्यान देने वाली बात यह कि 5 जुलाई को होने वाले विजय दिवस को लेकर ठाकरे गुट और मनसे के वरिष्ठ नेताओं के बीच लगातार बैठकें हो (Narayan Rane Targets Uddhav Before Vijay Diwas) रही हैं। शिवसेना की ओर से संजय राऊत, अनिल परब और मनसे की ओर से बाला नांदगावकर और अभिजीत पानसे के बीच हाल ही में करीब 40 मिनट तक की अहम बैठक हुई है। एक तरह से कारगर रणनीति पर मंथन हो रहा है। पार्टी से जुड़े करीबी सूत्रों की माने तो इस बैठक में विजय दिवस की संपूर्ण रूपरेखा, आयोजन स्थल, भीड़ प्रबंधन और भाषणों की रणनीति पर चर्चा हुई। दोनों पक्ष इस बात पर सहमत हैं कि यह सिर्फ मराठी भाषा, मराठी अस्मिता और सरकार के निर्णय वापसी का उत्सव होगा। इसमें कोई राजनीतिक झंडा या एजेंडा नहीं होगा। वरली डोम को आयोजन स्थल के रूप में चुना गया है। दोनों दलों में इसे लेकर सहमति बन चुकी है। आयोजकों का कहना है कि यह पूरी तरह से मराठी भाषा और संस्कृति की विजय के रूप में मनाया जाएगा।  इसे भी पढ़ें:- गुजरात और पंजाब में आम आदमी पार्टी की जीत और 2027 के तूफान की आहट? यही उद्धव ठाकरे थे, जिन्होंने राज ठाकरे को अपमानित किया, तंग किया और पार्टी से बाहर जाने के लिए (Narayan Rane Targets Uddhav Before Vijay Diwas) मजबूर किया इस पूरे मामले पर अब राजनीति भी शुरू हो गई है। बीजेपी नेता और केंद्रीय मंत्री नारायण राणे ने सोशल मीडिया हैंडल एक्स पर पोस्ट करते हुए (Narayan Rane Targets Uddhav Before Vijay Diwas) कहा कि “उद्धव ठाकरे आज राज ठाकरे को भाईचारे के नाते वापस आने की अपील कर रहे हैं। लेकिन मुझे याद है, यही उद्धव ठाकरे थे, जिन्होंने राज ठाकरे को अपमानित किया, तंग किया और पार्टी से बाहर जाने के लिए मजबूर किया। क्या उन्हें यह सब याद नहीं है? अब वे क्यों इतनी मिन्नतें कर रहे हैं? उद्धव को आड़े हाथों लेते हुए नारायण राणे ने कहा कि “राज ठाकरे, नारायण राणे, गणेश नाईक और एकनाथ शिंदे जैसे नेताओं ने शिवसेना को खड़ा करने के लिए अपना जीवन समर्पित किया, लेकिन इन्हीं लोगों को उद्धव ने बाहर का रास्ता दिखाया। जिस शिवसेना को माननीय बालासाहेब ठाकरे ने सत्ता तक पहुंचाया, उसी सत्ता को उद्धव ठाकरे ने गंवा दिया। शिवसेना की इस गिरावट के लिए पूरी तरह से उद्धव ठाकरे जिम्मेदार हैं।” उन्होंने आगे कहा, मराठी जनता और हिंदू समाज ने इन्हें घर बिठा दिया है। जो चीज एक बार हाथ से निकल जाती है, वो फिर से वापस नहीं आती जो बूंद से गई, वो हौद से नहीं आती! उद्धव ठाकरे में न तो वह हिम्मत है और न ही वह क्षमता कि वो फिर से सब कुछ हासिल कर सकें। Latest News in Hindi Today Hindi news Narayan Rane #NarayanRane #UddhavThackeray #VijayDiwas #RajThackeray #MaharashtraPolitics #ShivSena

आगे और पढ़ें
Translate »