Old Delhi Station Renaming Proposal by CM Rekha Gupta

पुरानी दिल्ली स्टेशन का नाम बदलने के लिए सीएम रेखा गुप्ता ने रेलमंत्री को लिखा पत्र, जानिए कौन थे महाराज अग्रसेन?

दिल्ली की भाजपा सरकार (BJP Government) अब 160 साल पुराने पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन (Old Delhi Railway Station) का नाम बदलने जा रही है। इस स्टेशन का नाम अब ‘महाराजा अग्रसेन रेलवे स्टेशन’ (Maharaja Agrasen Railway Station) रखने का विचार किया जा रहा है। इस संबंध में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता (Rekha Gupta) ने केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव (Ashwini Vaishnaw) को एक पत्र लिखा है। जिसमें उन्होंने पुरानी दिल्ली स्टेशन का नाम बदलने के लिए निवेदन किया है। भाजपा का कहना है कि सीएम रेखा गुप्ता (Rekha Gupta) ने यह फैसला सामाजिक न्याय और अहिंसा के प्रतीक माने जाने वाले हमारे महान राजा महाराजा अग्रसेन के सम्मान में लिया है।  स्टेशन के नाम में बदलाव (Maharaja Agrasen Railway Station) होने से यहां आने वाले लाखों लोग महाराजा अग्रसेन के बारे में बेहतर तरीके से जान सकेंगे, यह उनके लिए उचित श्रद्धांजलि होगी। भाजपा नेताओं का कहना है कि स्टेशन के नाम को बदलने के लिए लंबे समय से विचार किया जा रहा था। सीएम चाहती हैं कि इस मामले में रेल मंत्री खुद हस्तक्षेप करें, इसलिए उन्हें पत्र लिखा है।  महाराजा अग्रसेन के सामाजिक-आर्थिक विकास का दिल्ली पर गहरा प्रभाव  सीएम रेखा गुप्ता (Rekha Gupta) ने रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव (Ashwini Vaishnaw) को लिखे पत्र में नाम बदलने की वजह का भी जिक्र किया है। सीएम लिखती हैं कि, ‘महाराजा अग्रसेन के सम्मान में और उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि देने के लिए पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन (Old Delhi Railway Station) का नाम बदल कर उनके नाम पर रखना चाहते हैं। महाराजा अग्रसेन हमारे देश के एक सम्मानित और ऐतिहासिक व्यक्तित्व थे। उनकी विरासत का देश के सामाजिक-आर्थिक विकास पर और खास कर दिल्ली में बेहद गहरा प्रभाव पड़ा है।’ सीएम रेखा गुप्ता ने अपने पत्र में यह भी लिखा है कि ‘महाराजा अग्रसेन को सामाजिक न्याय, सामुदायिक कल्याण और आर्थिक दूरदर्शिता के प्रतीक के तौर पर जाना जाता है। उनके वंशज और अनगिनत अनुयायी आज भी दिल्ली को आर्थिक और सांस्कृतिक तरक्की दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। अगर पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन का नाम बदलकर उनके नाम पर रखा गया तो यह उनके योगदान के लिए उन्हें एक उचित श्रद्धांजलि होगी। मैं आपके मंत्रालय द्वारा स्टेशन का नाम बदलने के प्रस्ताव पर जल्द से जल्द विचार करने का निवदेन करती हूं।’ उत्तर भारत का पहला रेलवे स्टेशन है पुरानी दिल्ली  बता दें कि चांदनी चौक इलाके में मौजूद पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन (Old Delhi Railway Station) दिल्ली समेत पूरे उत्तर भारत का पहला रेलवे स्टेशन है। इस स्टेशन का निर्माण साल 1864 में किया गया था और 1 जनवरी 1867 को यहां पर पहली ट्रेन पहुंची थी। इस स्टेशन के मौजूदा भवन का निर्माण 1893 में शुरू किया गया था और यह 1903 में बन कर तैयार हुई। इस स्टेशन के बनने के बाद ही दिल्ली-कलकत्ता रेलवे लाइन की शुरुआत हुई थी। आज के समय में यहां पर 18 प्लेटफॉर्म्स बने हुए हैं और रोजाना यहां से होकर देश के विभिन्न हिस्सों में सैकड़ों ट्रेनें चलती हैं।  इसे भी पढ़ें:- गुजरात और पंजाब में आम आदमी पार्टी की जीत और 2027 के तूफान की आहट? भगवान राम के वंशज थे महाराजा अग्रसेन महाराजा अग्रसेन अग्रोहा रजवाड़े के राजा थे, जो हरियाणा में पड़ता है और आज के समय में हिसार जिले के तौर पर जाना जाता है। महाराजा अग्रसेन सूर्यवंशी क्षत्रिय वंश के थे और इन्हें शासन में समानता, न्याय और अहिंसा को प्राथमिकता देने वाले महान भारतीय राजा के तौर पर याद किया जाता है। कहा जाता है कि इनका वंश भगवान राम से जुड़ा है और वे राम पुत्र कुश की 34वीं पीढ़ी के वंशज थे। इन्हें अग्रवाल समुदाय का पितामह भी कहा जाता है। इन्होंने अपने राज्य में बसने वाले नए परिवार को मदद देने के लिए ‘एक ईंट, एक रुपया’ प्रथा शुरू की थी।   Latest News in Hindi Today Hindi news Rekha Gupta #OldDelhiStation #RekhaGupta #MaharajaAgrasen #IndianRailways #StationRenaming

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Motion Sickness

Motion Sickness: मोशन सिकनेस से हैं परेशान? जानिए इसके कारण और राहत पाने के आसान घरेलू उपाय

जब भी हम यात्रा करते हैं, तो कई बार चक्कर आना, उल्टी या जी मिचलाना जैसी समस्याओं का अनुभव करते हैं। यह समस्याएं कार, बस या जहाज कहीं भी हो सकती हैं। क्या आप जानते हैं कि यह सब मोशन सिकनेस के लक्षण (Symptoms of motion sickness) हैं? यह वो कंडीशन है जो तब होती है जब हमारे आंखें, अंदरूनी कान और शरीर हमारे ब्रेन को विपरीत संदेश देते हैं। जैसा की पहले ही बताया गया है कि यह समस्या उस समय परेशान करती है जब हमारा शरीर तो स्थिर होता है लेकिन हम किसी वाहन द्वारा मूव कर रहे होते हैं। यही नहीं,  कुछ लोग मोशन सिकनेस (Motion sickness) तब भी अनुभव कर सकते हैं जब वो वीडियो गेम या कोई अन्य गेम खेल रहे होते हैं। आइए जानें कि कुछ लोगों को मोशन सिकनेस क्यों होती है (Why some people get motion sickness) और इससे कैसे बचा जा सकता है? कुछ लोगों को मोशन सिकनेस क्यों होती है (Why some people get motion sickness)?  मोशन सिकनेस (Motion sickness) के कई कारण हो सकते हैं। अगर आपको यह समस्या है तो इसके कारण इस प्रकार हो सकते हैं: मोशन सिकनेस के लक्षण (Symptoms of motion sickness) क्लेवलैंडक्लिनिक (Clevelandclinic) के अनुसार मोशन सिकनेस के लक्षण (Symptoms of motion sickness) धीरे-धीरे भी विकसित हो सकते हैं या एकदम भी नजर आ सकते हैं। कुछ लोगों को मोशन सिकनेस क्यों होती है (Why some people get motion sickness), यह तो आप समझ ही गए होंगे। इसके कुछ सामान्य लक्षण इस प्रकार हैं: यह इस समस्या के सभी लक्षणों की लिस्ट नहीं है। इसके अलावा भी लोगों में मोशन सिकनेस (Motion sickness) के कुछ और लक्षण नजर आ सकते हैं।  इसे भी पढ़ें:-  महाराष्ट्र में तीन भाषा नीति पर सरकार का बड़ा फैसला: पुरानी नीतियां रद्द, नई समिति का गठन मोशन सिकनेस का उपचार मोशन सिकनेस (Motion sickness) के लक्षणों से राहत पाने के लिए यह उपाय काम में आ सकते हैं: मोशन सिकनेस से कैसे बचें? मोशन सिकनेस (Motion sickness) को नजरअंदाज करना संभव नहीं है लेकिन थोड़ी प्लानिंग से आप गंभीर लक्षणों से बच सकते हैं। जैसे अगर आप बस से सफर कर रहे हैं तो विंडो सीट लें और कार में आगे की सीट पर बैठे। यात्रा करते हुए हल्का भोजन और पेय पदार्थों का सेवन करें। भारी या मसालेदार भोजन का सेवन न करें। इसके साथ ही आप डॉक्टर की सलाह के बाद मोशन सिकनेस (Motion sickness) की दवाईयां ले सकते हैं। नोट:- यहां दी गई जानकारी केवल रिसर्च के आधार पर दी गई है। लेकिन अगर आप किसी भी शारीरिक समस्या से परेशान हैं, तो अपने हेल्थ एक्सपर्ट से सलाह लेना न भूलें। Latest News in Hindi Today Hindi news  Motion sickness #motionSickness #homeRemedies #naturalCure #travelTips #nauseaRelief #dizzinessRelief #healthTips

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SIM Shutdown Scam Govt Issues Warning & Safety Tips

SIM बंद होने के नाम पर हो रहा बड़ा घोटाला, सरकार की चेतावनी और बचाव के तरीके

पिछले कुछ सालों से ऑनलाइन फ्रॉड (Online Fraud) के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। यह एक ऐसा अपराध है जिसमें कोई व्यक्ति या ग्रुप ऑनलाइन प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर के लोगों को लुटते हैं और उन्हें फाइनेंशियल नुकसान पहुंचाते हैं। यही कारण है कि लोगों को सावधान रहने की सलाह दी जाती है। यही नहीं, लोगों यह भी बार-बार समझाया जाता है कि वो अपने पासवर्ड को सेफ रखें और अपनी पर्सनल जानकारी किसी के साथ भी शेयर न करें। आजकल एक और फ्रॉड चर्चा में है जिसका नाम है सिम स्वैप फ्रॉड (SIM swap fraud)। इसके बारे में डिपार्टमेंट ऑफ कम्युनिकेशन ने भी लोगों को सचेत रहने का आग्रह किया है। अब तक कई लोग इस फ्रॉड का शिकार बन चुके हैं। आइए जानें इस सिम स्वैप फ्रॉड के बारे में। सिम स्वैप फ्रॉड से कैसे बचें (How to avoid SIM swap fraud), यह भी जानें। क्या है सिम स्वैप फ्रॉड (SIM swap fraud)? टेलीकॉम डिपार्टमेंट ने अपने सोशल मीडिया पर एक जानकारी शेयर की है। इसमें उन्होंने लोगों को इस नए स्कैम से सावधान रहने की सलाह दी है। उन्होंने यह भी कहा है कि यूजर फर्जी मेसेज और कॉल्स को रिपोर्ट करें। हम लोग अक्सर अपने बैंक अकाउंट और अन्य पर्सनल इंफॉर्मेशंस को लोगों के साथ शेयर नहीं करते और उन्हें टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन के माध्यम से सेफ रखते हैं। इसमें बिना वन टाइम पासवर्ड या ओटीपी के बिना कोई भी यूजर के एकाउंट्स को एक्सेस नहीं कर पाता है। लेकिन, अब अपराधियों ने लोगों के बैंक अकाउंट से पैसा उड़ाने के लिए नया तरीका निकाला है जिसका नाम है सिम स्वैप फ्रॉड (SIM swap fraud)। जानिए क्या होता है इस फ्रॉड में? सिम स्वैप फ्रॉड से कैसे बचें (How to avoid SIM swap fraud)? इसे भी पढ़ें:- Govt Warns Online Shoppers: सरकार की यह सलाह नहीं मानने पर अपना सबकुछ गँवा सकते हैं ऑनलाइन शॉपिंग करने वाले सिम स्वैप फ्रॉड (SIM swap fraud) होने के बाद क्या करें?  अगर किन्ही कारणों से आप इस फ्रॉड का शिकार हो जाते हैं, तो तुरंत कार्यवाही करना जरूरी है। इसके लिए आपको यह पॉइंट्स ध्यान में रखना है: नोट:- यहां दी गई जानकारी रिसर्च के आधार पर दी गई है। अधिक जानकारी के लिए आप आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं या गूगल सर्च करें। Latest News in Hindi Today Hindi  SIM swap fraud #simscam #govtwarning #cyberfraud #scamalert #safetyfirst #mobilescam #simfraud #fraudprevention #indiaalerts #digitalsafety

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Elon Musk warns Trump of launching a new ‘American Party’

एलॉन मस्‍क की राष्ट्रपति ट्रंप को खुली धमकी- ‘वन बिग ब्यूटीफुल बिल’ पास हुआ तो बनाऊंगा नई ‘अमेरिकन पार्टी’

अरबपति एलॉन मस्क (Elon Musk) ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) के ‘वन बिग, ब्यूटीफुल बिल’ की एक बार फिर से जमकर आलोचना की है। इस आलोचना के दौरान एलॉन मस्क ने डोनाल्ड ट्रंप को खुली धमकी भी दे डाली। उन्‍होंने कहा कि इस बिल को अगर सीनेट मंजूरी देती है, तो वह बिल पास होने के अगले ही दिन ‘अमेरिकन पार्टी’ नाम से नई राजनीतिक पार्टी बनाएंगे। एलॉन मस्क ने इस बिल को ट्रंप का पागलपन बताते हुए कहा कि यह देश के करोड़ों  टैक्‍सपेयर्स पर एक बोझ की तरह होगा।   बता दें कि ‘वन बिग ब्यूटीफुल बिल’ ट्रंप का ड्रीम बिल है। इसमें टैक्स कटौती, अवैध प्रवासियों को देश से निकालने और सेना का बजट बढ़ाने जैसी अहम योजनाओं पर खर्च को कई गुना बढ़ाने का प्रस्ताव रखा गया है। डोनाल्ड ट्रंप इस खास बिल के जरिए साल 2017 में लागू किए गए टैक्स कटौती योजना को और आगे ले जाना चाहते हैं। साथ ही देश से प्रवासियों को निकालने के साथ सेना को और मजबूत बनाना चाहते हैं। इस बिल में 4.5 ट्रिलियन डॉलर खर्च करने का प्रावधान रखा गया है। इस भारी भरकम बिल के कारण ही आलोचक इसका विरोध कर रहे हैं। आलोचकों का कहना है कि अगर यह बिल पास होता है तो अमेरिका के राष्ट्रीय कर्ज में करीब 3.3 ट्रिलियन डॉलर की बढ़ोत्तरी होगी साथ ही गरीबों के हेल्थकेयर में 1 ट्रिलियन डॉलर की कटौती की जाएगी।  एलॉन मस्क ने सांसदों को भी दे दी खुली धमकी  एलॉन मस्क (Elon Musk) ने इस बिल का शुरू से ही तीखा विरोध कर रहे हैं। इस बिल की वजह से ही वो ट्रंप के दोस्त से उनके दुश्मन बन चुके हैं। ट्रंप प्रशासन का साथ छोड़ने के बाद से ही वो इस बिल का खुला विरोध करते आ रहे हैं। इस बार भी उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा, ‘देश का हर वो सांसद जो देश के पैसे का बर्बादी नहीं चाहता और खर्च कम करना चाहता है। अगर वो कर्ज बढ़ाने वाले इस ऐतिहासिक बिल के पक्ष में वोट देता है, उसे शर्म आनी चाहिए।’ इस के साथ मस्क ने यह भी धमकी दी कि, ‘अगर किसी सांसद ने इस बिल के पक्ष में वोट किया, तो उसे मैं अगले साल उनके प्राइमरी चुनाव में हराकर दम लूंगा, इसके लिए चाहे मुझे कुछ भी करना पड़े।’ लोगो को नया विकल्प देने के लिए बनाउंगा नई पार्टी- मस्क  एलॉन मस्क ने अपने एक दूसरे पोस्ट में राष्ट्रपति ट्रंप को चेतावनी देते हुए कहा कि, अगर ये ‘वन बिग ब्यूटीफुल बिल’ पास हुआ, तो वे अगले ही दिन ‘अमेरिकन पार्टी’ के नाम से नई पार्टी बनाएंगे। अब वक्त है कि अमेरिकी लोगों को रिपब्लिकन्स और डेमोक्रेट्स के अलावा एक तीसरी राजनीतिक पार्टी का भी विकल्प दिया जाए। इसके लिए प्रयास शुरू कर दिए गए हैं।   इसे भी पढ़ें:- अमेरिका ने कनाडा से तोड़े व्यापारिक रिश्ते, डिजिटल सर्विस टैक्स बना विवाद की जड़ सीनेट में वोटिंग शुरू, 7 घंटे में मात्र 14 वोट  बता दें कि, अमेरिकी सीनेट में इस बिल पर सोमवार को वोटिंग की गई। अमेरिका में किसी भी बिल के संशोधन पर अलग-अलग वोटिंग होती है। इस बिल पर पहले 7 घंटे के दौरान मात्र 14 वोट ही पड़े। ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी इस बिल को शुक्रवार तक सीनेट में पास कराना चाहती है, लेकिन यहां पर रिपब्लिकन पार्टी अल्पमत में है। जिसकी वजह से इस बिल के सीनेट में लटकने की संभावना ज्यादा है। अगर यहां से यह बिल पास हो जाता है तो इसे हाउस ऑफ रिप्रजेंटेटिव में रखा जाएगा, जहां रिपब्लिकन बहुमत में हैं। हालांकि डेमोक्रेट्स के साथ कुछ रिपब्लिकन भी इस बिल का खुल कर विरोध कर रहे हैं। ऐसे लोगों का दावा है कि अगर यह बिल आया तो लाखों नौकरियां खत्म हो जाएंगी। वहीं राष्ट्रपति ट्रंप इस बिल को अपनी नीतियों की बड़ी जीत के तौर पर पेश कर रहे हैं।  Latest News in Hindi Today Hindi news Elon Musk #ElonMusk #DonaldTrump #AmericanParty #USPolitics #OneBigBeautifulBill #MuskVsTrump #USElection2025

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AIMIM- Asaduddin owaisi and Akhtarul Iman

Bihar Assembly Election 2025: क्या है AIMIM की नई रणनीति और तीसरे मोर्चे की तैयारी?

जैसे-जैसे बिहार में विधानसभा चुनाव (Bihar Assembly Election) का समय करीब आ रहा है, राज्य का सियासी पारा बढ़ता जा रहा है। सभी राजनीतिक दल अपनी-अपनी  तैयारी में जुट गए हैं और इसी कड़ी में अब असदुद्दीन ओवैसी (Asaduddin Owaisi) की पार्टी ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) ने एक नई सियासी चाल चली है। AIMIM ने बिहार में फिर से राजनीतिक समीकरण बदलने की कोशिशें शुरू कर दी हैं और यह साफ कर दिया है कि पार्टी इस बार कोई बड़ा दांव खेलने को तैयार है। महागठबंधन को दिया प्रस्ताव AIMIM के बिहार प्रदेश अध्यक्ष अख्तरुल ईमान (Akhtarul Iman) ने मीडिया से बातचीत की और बताया कि उन्होंने करीब 15 दिन पहले राष्ट्रीय जनता दल (RJD), कांग्रेस (Congress) और वाम दलों (Wam Dal) को एक प्रस्ताव भेजा था। इस प्रस्ताव में AIMIM ने महागठबंधन में शामिल होने की इच्छा जताई थी। उन्होंने कहा कि बिहार के हित में खासकर युवाओं और सामाजिक दृष्ट्रिकों से यह कदम उठाया गया है। अख्तरुल ईमान ने कहा है कि सीटों के बंटवारे को लेकर अभी कोई बातचीत नहीं हुई है, लेकिन 2020 के चुनाव में हासिल सीटों और प्रदर्शन के आधार पर कोई फॉर्मूला तय किया जा सकता है। गौरतलब है कि 2020 के विधानसभा चुनाव (2020 Assembly Election) में महागठबंधन ने कुल 112 सीटें जीती थीं, जबकि AIMIM ने 20 में से 5 सीटें अपने नाम की थीं। तीसरे मोर्चे की अटकलें तेज हालांकि AIMIM की ओर से महागठबंधन में शामिल होने का प्रस्ताव भेजा गया है, लेकिन पार्टी ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि अगर गठबंधन में उन्हें जगह नहीं मिली, तो वे तीसरे मोर्चे का विकल्प भी तलाश सकते हैं। अख्तरुल ईमान (Akhtarul Iman) ने बताया कि कुछ अन्य दलों से बातचीत चल रही है, हालांकि उन्होंने इन दलों के नामों का खुलासा नहीं किया। यह संकेत इशारा करता है कि बिहार की राजनीति में एक नया मोर्चा उभर सकता है जो न तो एनडीए (NDA) का हिस्सा होगा और न ही महागठबंधन (UPA) का। AIMIM का यह रुख संभावित सहयोगी दलों के साथ एक अलग सेक्युलर फ्रंट खड़ा करने की मंशा दर्शाता है। वोटर लिस्ट पर सवाल और NRC का डर AIMIM ने चुनाव आयोग (Election Commission) द्वारा की जा रही वोटर लिस्ट पुनरीक्षण प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े किए हैं। अख्तरुल ईमान ने आरोप लगाया कि यह प्रक्रिया NRC जैसी है, जिसके जरिए दलित, महादलित और अल्पसंख्यकों को सूची से हटाने की कोशिश हो रही है। उन्होंने कहा कि AIMIM का प्रतिनिधिमंडल जल्द ही चुनाव आयोग से मुलाकात करेगा और इस मुद्दे पर अपना विरोध दर्ज कराएगा। AIMIM का बिहार में राजनीतिक दखल 2020 के विधानसभा चुनाव (2020 Assembly Election) से खासा बढ़ा है। उस चुनाव में पार्टी ने ग्रैंड डेमोक्रेटिक सेक्युलर फ्रंट के तहत 20 सीटों पर चुनाव लड़ा था और 5 सीटों पर जीत हासिल की थी। यह सीटें बिहार के सीमांचल क्षेत्र से थीं, जहाँ मुस्लिम आबादी अधिक है। पार्टी को कुल 5.23 लाख वोट मिले थे और उसका वोट शेयर लगभग 1.3% रहा था। हालांकि चुनाव के बाद AIMIM के चार विधायक RJD में शामिल हो गए थे, जिससे पार्टी को झटका लगा था। लेकिन इस बार पार्टी फिर से सीमांचल को केंद्र में रखकर चुनावी रणनीति बना रही है। AIMIM और पुराने सहयोगी दल 2020 में AIMIM ने जिन दलों के साथ गठबंधन कर चुनाव लड़ा था, उनमें उपेंद्र कुशवाहा की राष्ट्रीय लोकसमता पार्टी, बहुजन समाज पार्टी (BSP), समाजवादी जनता दल, सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी और जनवादी पार्टी (सोशलिस्ट) शामिल थे। आज इनमें से कई दल एनडीए का हिस्सा बन चुके हैं, जबकि कुछ ने खुद को नए राजनीतिक स्वरूप में ढाल लिया है। उदाहरण के तौर पर उपेंद्र कुशवाहा अब राष्ट्रीय लोक मंच बनाकर एनडीए में शामिल हैं, जबकि ओमप्रकाश राजभर की सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी भी एनडीए के साथ है। इसे भी पढ़ें:- गुजरात और पंजाब में आम आदमी पार्टी की जीत और 2027 के तूफान की आहट? बिहार विधानसभा चुनाव (Bihar Assembly Election) में AIMIM की सक्रियता और उसकी रणनीतिक पहल यह दर्शाती है कि पार्टी इस बार निर्णायक भूमिका निभाने की मंशा रखती है। महागठबंधन से प्रस्ताव स्वीकार नहीं होने की स्थिति में तीसरा मोर्चा बनाना AIMIM के लिए एक बड़ा राजनीतिक कदम हो सकता है, जिससे बिहार की चुनावी तस्वीर पूरी तरह बदल सकती है। जहां एक ओर AIMIM भाजपा को सत्ता से बाहर रखने के लिए विपक्षी दलों से हाथ मिलाने को तैयार है, वहीं दूसरी ओर वह अपने सीमांचल प्रभाव का इस्तेमाल कर एक स्वतंत्र शक्ति बनकर उभरना चाहती है। आने वाले हफ्ते और महीने यह तय करेंगे कि यह रणनीति AIMIM को चुनावी फायदे दिलाएगी या फिर सियासी नुकसान। लेकिन एक बात तो तय है कि इस बार बिहार की राजनीति में AIMIM एक बार फिर से सुर्खियों में है। Latest News in Hindi Today Hindi news AIMIM- Asaduddin owaisi and Akhtarul Iman #BiharAssemblyElection2025 #AssemblyElection #AIMIM #AsaduddinOwaisi #AkhtarulIman

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MP Chandrashekhar Azad Issues Warning

Bhim Army Protest: MP Chandrashekhar Azad Issues Threat: इस वजह से भीम आर्मी के कार्यकर्ताओं ने मचाया उत्पात, नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद ने दी धमकी 

दिन रात संविधान की दुहाई देने वाले नगीना से सांसद चंद्रशेखर आजाद को पुलिस ने इटौसी गांव जाने से क्या रोका, उनके कार्यकर्ताओं ने संविधान और कानून को हाथ में लेते हुए जमकर तोड़फोड़ की। दरअसल, इटौसी गांव के देवीशंकर नामक व्यक्ति की 13 अप्रैल को आग से झुलसकर मृत्यु हो गई थी। परिजनों का आरोप है कि देवीशंकर की जलाकर हत्या की गई (Bhim Army Protest: MP Chandrashekhar Azad Issues Threat) है। जानकारी के मुताबिक नगीना से सांसद चंद्रशेखर पीड़ित परिवार से मिलने आ रहे थे और वह सर्किट हाउस पहुंचे थे। पुलिस ने सुरक्षा कारणों से उन्हें इटौसी गांव जाने से रोक दिया। इसके अलावा कौशांबी में रेप पीड़ित मासूम बच्ची के घर भी जाने नहीं दिया। फिर क्या था गांव जाने से पुलिस प्रशासन द्वारा रोके जाने पर उनकी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने जमकर उत्पाद मचाया। और पुलिस के दो वाहनों में तोड़फोड़ की।  सभी के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया जा रहा है, कठोर कार्रवाई की जाएगी- डीसीपी यमुना नगर विवेक चंद्र यादव  इस पूरे मामले पर डीसीपी यमुना नगर विवेक चंद्र यादव ने बताया कि “करछना तहसील के इटौसी गांव में सांसद चंद्रशेखर के आने की सूचना थी, जिसको लेकर पार्टी के कार्यकर्ता बड़ी संख्या में इकट्ठा (Bhim Army Protest: MP Chandrashekhar Azad Issues Threat) थे तथा कार्यकर्ताओं को अपने नेता के नहीं आने की जानकारी मिलने पर कार्यकर्ताओं ने पथराव शुरू कर दिया। डीसीपी ने बताया कि “भीड़ द्वारा डायल 112 नंबर की गाड़ी और एक अन्य गाड़ी को क्षतिग्रस्त किया गया।” डीसीपी ने आगे कहा कि “उपद्रवियों ने पुलिस पर पथराव किया। स्थिति को काबू में करने के लिए कई थानों की फोर्स को तैनात किया गया। स्थानीय लोगों की मदद से भी स्थिति को कंट्रोल किया गया। उपद्रव करने वालों की पुलिस पहचान कर रही है। सीसीटीवी, वीडियो और फोटो के जरीए उपद्रवियों की पहचान की जा रही है। सभी के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया जा रहा है। कठोर कार्रवाई की जाएगी।  मैं नहीं जानता कि पुलिस ने वहां क्यों नहीं जाने (Bhim Army Protest: MP Chandrashekhar Azad Issues Threat) दिया- नगीना सांसद आजाद ने कहा कि “मैं कल प्रयागराज गया था। मैं वहां हमारी पाल समुदाय की बेटी के लिए न्याय मांगने गया था, लेकिन पुलिस ने मुझे इलाहाबाद सर्किट हाउस में रखा। मैं नहीं जानता कि पुलिस ने वहां क्यों नहीं जाने (Bhim Army Protest: MP Chandrashekhar Azad Issues Threat) दिया। मैंने कहा कि अगर आप मुझे वहां नहीं जाने दे रहे हैं तो कम से कम उनके परिजनों से बात करने दें। मेरा मानना है कि पुलिस और प्रशासन ने ऐसे अपराध किए और उनको छिपाने के लिए मुझे वहां जाने के लिए रोका। प्रयागराज में भड़की हिंसा के मामले में सांसद ने कहा कि “हमारे कार्यकर्ता, संविधान में विश्वास रखते हैं और वह हिंसा में शामिल नहीं होते। आज लोगों के लिए यह सामान्य बात हो गई है कि वह नीला पटका पहन कर घूमते हैं। मैं इस मामले में सीबीआई की जांच की मांग करता हूं। अगर सरकार, पुलिस या प्रशासन किसी को जानबूझकर निशाना बनाएगा, तो हम शांत नहीं बैठेंगे और लखनऊ में बड़ा आंदोलन करेंगे।”  इसे भी पढ़ें:-  महाराष्ट्र में तीन भाषा नीति पर सरकार का बड़ा फैसला: पुरानी नीतियां रद्द, नई समिति का गठन जब तक प्रशासन पीड़ित परिवार से मिलने नहीं देगा तब तक प्रयागराज छोड़कर नहीं (Bhim Army Protest: MP Chandrashekhar Azad Issues Threat) जाऊंगा नगीना के सांसद चंद्रशेखर आजाद का कहना है कि “जब तक प्रशासन उनको पीड़ित परिवार से मिलने नहीं देगा और गिरफ्तार किए हुए पार्टी कार्यकर्ताओं को छोड़ा नहीं जाएगा तब तक वो प्रयागराज छोड़कर नहीं (Bhim Army Protest: MP Chandrashekhar Azad Issues Threat) जाएंगे।” पार्टी के मुताबिक आज बवाल शुरू होने की बड़ी वजह चंद्रशेखर आजाद को प्रशासन ने कानून व्यवस्था का हवाला देकर कौशांबी में रेप पीड़ित मासूम बच्ची के घर जाने नहीं दिया। इसके बाद पार्टी के कार्यकर्ताओं ने जबरदस्त हंगामा किया। वहीं प्रयागराज में भीम आर्मी के बवाल पर कांग्रेस नेता अजय राय ने टिप्पणी की। मीडिया से बातचीत में अजय राय ने कहा कि “यह सरकार की मिली भगत है। चंद्रशेखर आजाद को जाने देना चाहिए। हम भी अपने सांसद के साथ वहां पर गए थे। पूरा सहयोग किया गया। सरकार ने जानबूझकर प्रवोग किया है।” Latest News in Hindi Today Hindi news  MP Chandrashekhar Azad #bhimarmy #chandrashekharazad #dalitrights #naginaprotest #azadthreat #bhimprotest

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Bangladesh gangrape

Outrage in Bangladesh Over Gangrape of Hindu Girl: मोहम्मद यूनुस के बांग्लादेश में हिंदू लड़की से गैंगरेप, भड़के लोग

मोहम्मद यूनुस के बांग्लादेश में लगातार हिंदुओं को निशाना बनाया जा रहा है। हिंदुओं के खिलाफ अत्याचार है कि कम होने का नाम ही नहीं ले रहा है। बांग्लादेशी हिंदुओं के खिलाफ लगातार हिंसा जारी है। पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के इस्तीफे के बाद आई हालिया मीडिया रिपोर्ट्स में हिंदुओं के खिलाफ अत्याचार की बात कही गई है। रिपोर्ट के मुताबिक उनके घरों के जलाया गया, हत्याएं की गई। यही नहीं, हिंदुओं को नौकरी से निकालने हेतु जबरन उनके इस्तीफे तक लिए गए हैं। हालिया मामला एक हिंदू लड़की के साथ हुए गैंगरेप से (Outrage in Bangladesh Over Gangrape of Hindu Girl) जुड़ा है। इस घटना के बाद लोगों में गुस्सा देखने मिल रहा है। जानकारी के मुताबिक हिंदू लड़की के साथ हैवानियत की यह घटना बांग्लादेश के कोमिला जिले में हुई है। हिंदू लड़की के साथ हुए गैंगरेप के बाद बांग्लादेश में लोगों का गुस्सा भड़क गया है और बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन भी हुए हैं। दरअसल, यह घटना 26 जून को हुई थी। 21 वर्षीय पीड़िता के साथ कोमिला में उसके घर पर एक स्थानीय नेता ने गैंगरेप किया था। गैंगरेप के दौरान लड़की का वीडियो भी बनाया गया था। सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद इस हैवानियत का खुलासा हुआ।  फजर अली (36) रात करीब 11 बजे पीड़िता के घर में जबरन घुस गया और उसके साथ (Outrage in Bangladesh Over Gangrape of Hindu Girl) बलात्कार किया बांग्लादेशी मीडिया आउटलेट न्यू एज के मुताबिक, बांग्लादेश नेशलिस्ट पार्टी (बीएनपी) के स्थानीय नेता फजर अली (36) रात करीब 11 बजे पीड़िता के घर में जबरन घुस गया और उसके साथ बलात्कार किया और पिटाई (Outrage in Bangladesh Over Gangrape of Hindu Girl) की। चीख पुकार सुनकर स्थानीय लोग जमा हो गए और आरोपियों को पकड़ लिया। इस घटना के बाद ढाका विश्वविद्यालय के छात्रों ने इसके विरोध में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन किये। इस दौरान छात्रों ने अपराधियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग भी की। ढाका विश्वविद्यालय के छात्रों ने गैंगरेप की निंदा करते हुए परिसर में मार्च निकाला। अल्पसंख्यक छात्रों के लिए समर्पित जगन्नाथ हॉल के छात्रावास के छात्रों ने न्याय की मांग करते हुए जुलूस निकाला तो वहीं, पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के बेटे साजिब अहमद वाजेद ने इस घटना को लेकर सोशल मीडिया मंच एक्स पर पोस्ट कर कहा कि पिछले 11 महीनों में भीड़ के हमलों, आतंकवाद और बलात्कार की घटनाओं में वृद्धि के लिए यूनुस प्रशासन को दोषी है। इसके अलावा इस पूरे मामले पर पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया की बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) के महासचिव मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर ने दोषियों के खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई की मांग की है।  इसे भी पढ़ें:- आरजी कर कांड के बाद अब कोलकाता के लॉ कॉलेज में छात्रा के साथ हुआ सामूहिक दुष्कर्म सोशल मीडिया पर महिला की तस्वीर और पहचान उजागर करने के आरोप में (Outrage in Bangladesh Over Gangrape of Hindu Girl) गिरफ्तार किया गया है मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने मुख्य आरोपी 36 वर्षीय फजोर अली, जो कि स्थानीय नेता है, सहित पांच लोगों को गिरफ्तार (Outrage in Bangladesh Over Gangrape of Hindu Girl) किया है। कोमिला जिले के पुलिस प्रमुख नजीर अहमद खान ने कहा कि “मुख्य आरोपी को ढाका के सईदाबाद इलाके से छापेमारी कर गिरफ्तार कर लिया गया है। चार अन्य को सोशल मीडिया पर महिला की तस्वीर और पहचान उजागर करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है।” खैर, इस दरम्यान उच्च न्यायालय ने अधिकारियों को निर्देश जारी किया है कि “सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो को तुरंत हटाया जाए।” बता दें कि दो न्यायाधीशों की पीठ ने संबंधित अधिकारियों से पीड़िता की सुरक्षा सुनिश्चित करने और उसे आवश्यक उपचार प्रदान करने को भी कहा है। गौरतलब हो कि पिछले साल अगस्त में हसीना के नेतृत्व वाली अवामी लीग सरकार का पतन होने के बाद बांग्लादेश में अल्पसंख्यक समुदायों के खिलाफ हिंसा की घटनाएं बढ़ी हैं। Latest News in Hindi Today Hindi Outrage in Bangladesh Over Gangrape of Hindu Girl #Bangladesh #HinduGirl #Gangrape #MohammadYunus #BangladeshNews #JusticeForVictim #HumanRights #OutrageInBangladesh

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4.96 Cr Bihar Voters Can Vote Without Any Document in 2025: बिहार चुनाव में इन 4.96 करोड़ वोटरों को नहीं देना होगा कोई भी दस्तावेज

बिहार में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले चुनाव आयोग ने वोटर सूची की प्रक्रिया को आसान और पारदर्शी बनाने हेतु एक नया कदम उठाया है। इस कदम के तहत आयोग ने स्पष्ट किया है कि “2003 की मतदाता सूची में जिन लोगों के नाम हैं। उन्हें अपनी जन्मतिथि या जन्मस्थान प्रमाणित करने के लिए किसी अतिरिक्त दस्तावेज की जरूरत नहीं (4.96 Cr Bihar Voters Can Vote Without Any Document in 2025) होगी। बता दें कि इस सूची में राज्य के कुल लगभग 60% यानी 4.96 करोड़ से अधिक मतदाता शामिल हैं। इस पूरे मामले पर चुनाव आयोग ने कहा कि बिहार की 2003 की वोटर लिस्ट दोबारा अपलोड होगी। इसमें जिनके नाम हैं, उन्हें जन्म प्रमाण नहीं देना होगा। बाकी 3 करोड़ को दस्तावेज देने होंगे, जिससे पारदर्शिता बढ़ेगी। बता दें कि अक्टूबर-नवंबर 2025 में विधानसभा चुनाव होने हैं। बिहार में कुल 243 विधानसभा सीटों पर 7.89 करोड़ से अधिक मतदाता हैं। निर्वाचन आयोग के निर्देशों के मुताबिक, प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र का निर्वाचक पंजीकरण अधिकारी यह सुनिश्चित करेगा कि पुनरीक्षण के दौरान सभी पात्र नागरिक मतदाता सूची में शामिल हों और कोई अपात्र व्यक्ति न रहे।  3 करोड़ मतदाताओं को 11 सूचीबद्ध दस्तावेजों में से एक दस्तावेज के साथ जन्म तिथि या स्थान प्रमाणित करना (4.96 Cr Bihar Voters Can Vote Without Any Document in 2025) होगा चुनाव आयोग के निर्देशानुसार, बिहार में 2003 की मतदाता सूची में शामिल 4.96 करोड़ मतदाताओं को जन्म तिथि या स्थान साबित करने के लिए दस्तावेज देने की जरूरत नहीं। लेकिन शर्त यह है कि वे पुनरीक्षण के बाद की मतदाता सूची का हिस्सा संलग्न करें। बाकी बचे 3 करोड़ मतदाताओं को 11 सूचीबद्ध दस्तावेजों में से एक दस्तावेज के साथ जन्म तिथि या स्थान प्रमाणित करना (4.96 Cr Bihar Voters Can Vote Without Any Document in 2025) होगा। ऐसे में जिनके माता-पिता 2003 की सूची में हैं, उन्हें केवल अपनी जन्म तिथि/स्थान का दस्तावेज देना होगा, माता-पिता का नहीं। बाकी मतदाताओं की पहचान सत्यापित होने के बाद ही उनके नाम सूची में शामिल होंगे। चुनाव आयोग के मुताबिक, यह दस्तावेज़ी प्रक्रिया राज्य के सभी 243 विधानसभा क्षेत्रों में लागू होगी। निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी यह सुनिश्चित करेंगे कि कोई भी पात्र नागरिक छूट न जाए और दस्तावेजों के बिना किसी को भी सूची में शामिल न किया जाए। इस प्रक्रिया के तहत प्रत्येक मतदाता की पात्रता सत्यापित की जाएगी। इसे भी पढ़ें:-  महाराष्ट्र में तीन भाषा नीति पर सरकार का बड़ा फैसला: पुरानी नीतियां रद्द, नई समिति का गठन कोई पात्र नागरिक मतदाता सूची से वंचित न हो और कोई अयोग्य नाम सूची में न (4.96 Cr Bihar Voters Can Vote Without Any Document in 2025) रहे मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कहा कि “इसका मकसद सभी पात्र नागरिकों को मतदाता सूची में शामिल करना और अपात्र लोगों को हटाना है।” मुख्य चुनाव आयुक्त ने बताया कि “यह निर्णय विशेष गहन पुनरीक्षण के तहत लिया गया है, जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि कोई पात्र नागरिक मतदाता सूची से वंचित न हो और कोई अयोग्य नाम सूची में न (4.96 Cr Bihar Voters Can Vote Without Any Document in 2025) रहे। आयोग ने 2003 की मतदाता सूची को पुनः वेबसाइट पर अपलोड करने के निर्देश दिए हैं, ताकि पुराने रिकॉर्ड का उपयोग किया जा सके।” जानकारी के लिए बता दें कि चुनाव आयोग जल्द ही 2003 की बिहार मतदाता सूची को अपनी वेबसाइट पर अपलोड करेगा। जिससे 4.96 करोड़ मतदाता अपने नाम की पुष्टि कर सकें। इस मुद्दे पर राजनीति भी शुरू हो गई है। विपक्षी दलों ने पुनरीक्षण प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए इसे मतदाताओं को हटाने की साजिश करार दे दिया। विपक्षी दलों के आरोपों का जवाब देते हुए आयोग ने कहा कि “यह अनुच्छेद 326 का पालन करता है, जो पात्र नागरिकों को वोटिंग का अधिकार देता है। आयोग ने राजनीतिक दलों से बूथ स्तरीय एजेंट नियुक्त करने को कहा, ताकि मतदाता सूची में खामियां न रहें। अब तक 1,54,977 बीएलए नियुक्त हो चुके हैं।” Latest News in Hindi Today Hindi news 4.96 Cr Bihar Voters Can Vote Without Any Document in 2025 #BiharElection2025 #VotersWithoutID #ElectionCommission #BiharNews #VotingRights

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Discover key symptoms of epilepsy

एपिलेप्सी: जानिए कैसे पहचानें इसके लक्षण, अपनाएं बचाव के तरीके और पाएं एक स्वस्थ जीवन

एपिलेप्सी (Epilepsy) यानी मिर्गी को सीजर डिसऑर्डर के नाम से भी जाना जाता है। यह दिमाग से सम्बन्धित वो समस्या है जिसके कारण रोगी को बार-बार दौरे (Seizures) पड़ते हैं। इसके कई कारण हो सकते हैं। कुछ लोगों में यह समस्या किस वजह से होती है, यह बारे में जानकारी नहीं है। हालांकि, कुछ लोगों में इसके कारण हो पहचाना जा सकता है। एपिलेप्सी (Epilepsy) की समस्या किसी भी उम्र, लिंग या बैकग्राउंड के लोगों को हो सकती है। इस दौरान होने वाले सिजर्स के लक्षण भी रोगियों में अलग-अलग हो सकते हैं। लेकिन, ऐसा जरूरी नहीं है कि एक बार दौरा पड़ने पर व्यक्ति को मिर्गी जैसी समस्या हो। इसके अन्य कारण भी हो सकते हैं। आइए जानें एपिलेप्सी (Epilepsy) के बारे में विस्तार से। एपिलेप्सी के लक्षण (Symptoms of Epilepsy) और इससे बचाव के बारे में भी इंफॉर्मेशन पाएं। एपिलेप्सी के लक्षण (Symptoms of Epilepsy) वर्ल्ड हेल्थ आर्गेनाईजेशन (WHO) के अनुसार एपिलेप्सी (Epilepsy) एक गंभीर नॉनकम्युनिकेबल डिजीज है, जिससे पूरी दुनिया भर में लगभग पांच करोड़ लोग प्रभावित हैं। एपिलेप्सी का मुख्य लक्षण है बार-बार दौर पड़ना। हालांकि, इसके लक्षण सीजर के टाइप पर भी निर्भर करते हैं। इस के लक्षण इस प्रकार हैं:  एपिलेप्सी के कारण एपिलेप्सी के लक्षण क्या हो सकते हैं (Symptoms of Epilepsy), यह जानने के बाद इसके कारणों के बारे में भी पता होना चाहिए। अधिकतर मामलों में इस परेशानी के कारणों के बारे में जानकारी नहीं होती। इसके कुछ कारण इस प्रकार हो सकते हैं: एपिलेप्सी (Epilepsy) के उपचार किसी व्यक्ति को एक दौरे (Seizures) के बाद उपचार की जरूरत नहीं होती। लेकिन, अगर किसी को बार-बार दौरे (Seizures) पड़ते हैं, तो उपचार जरूरी है। एपिलेप्सी (Epilepsy) के उपचार के विकल्प इस प्रकार हैं:  इसे भी पढ़ें:-  महाराष्ट्र में तीन भाषा नीति पर सरकार का बड़ा फैसला: पुरानी नीतियां रद्द, नई समिति का गठन एपिलेप्सी (Epilepsy) से कैसे बचें?  हालांकि, मिर्गी के अधिकतर कारण कंट्रोल से बाहर हैं और उनसे बचाव संभव नहीं है। लेकिन कुछ ऐसी स्थितियों के विकसित होने की संभावना को कम किया जा सकता है जो मिर्गी का कारण बन सकती हैं, जैसे: ट्रॉमेटिक ब्रेन इंजरी के रिस्क को कम करने के लिए हमेशा गाडी में सफर करते हुए सीटबेल्ट पहनें और बाइक चलाते हुए हेलमेट पहनें। इसके साथ ही ऐसी स्थितियों को भी नजरअंदाज करें जिसमें आपको चोट लग सकती है। स्ट्रोक के जोखिम को कम करने के लिए हेल्दी डायट लें, नियमित एक्सरसाइज करें और अपने वजन को सही बनाए रखें। एल्कोहॉल और अन्य इलीगल ड्रग्स ब्रेन को नुकसान पहुंचा सके हैं और एपिलेप्सी (Epilepsy) का कारण बन सकते हैं। इसलिए इनका सेवन करने से बचें। संक्षेप में कहा जाए तो एपिलेप्सी (Epilepsy) या मिर्गी ब्रेन में इलेक्ट्रिकल एक्टिविटी के अनियंत्रित होने को कहा जाता है। इसके कई कारण हो सकते हैं जैसे सिर में चोट या सही से न सोना आदि। इस समस्या का उपचार पूरी तरह से संभव है। अगर आपको इस समस्या का कोई भी लक्षण नजर आता है और इसके हल्के में न लें। तुरंत मेडिकल हेल्प लें और जांच कराएं। क्योंकि, मिर्गी और दौरों से रोगी का जीवन पूरी तरह से प्रभावित हो सकता है।  नोट:- यहां दी गई जानकारी केवल रिसर्च के आधार पर दी गई है। लेकिन अगर आप किसी भी शारीरिक समस्या से परेशान हैं, तो अपने हेल्थ एक्सपर्ट से सलाह लेना न भूलें। Latest News in Hindi Today Hindi news Epilepsy #epilepsy #epilepsysymptoms #seizuredisorder #neurologicalhealth #healthylifestyle #epilepsyawareness

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BJP leader Sudhanshu Trivedi asserts

हम संविधान को कुड़ेदान में फेंकने नहीं देंगे: सुधांशु त्रिवेदी

जैसे-जैसे बिहार विधानसभा चुनाव (Bihar Assembly Election) नजदीक आ रहे हैं, राज्य की सियासत भी गरमाती जा रही है। पटना के ऐतिहासिक गांधी मैदान में हाल ही में आयोजित एक बड़ी रैली ने इस राजनीतिक तापमान को और बढ़ा दिया है। यह रैली वक्फ संशोधन कानून (Wakf Amendment Act) के खिलाफ आयोजित की गई थी, जिसमें राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के नेता तेजस्वी यादव ने बड़ा ऐलान करते हुए कहा कि यदि उनकी सरकार बनती है, तो वे इस कानून को प्रदेश में लागू नहीं होने देंगे और उसे कूड़ेदान में फेंक देंगे। उनके इस बयान पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने पलटवार किया है। तेजस्वी का एलान और सियासी संदेश RJD नेता तेजस्वी यादव (Tejaswi Yadav) ने वक्फ संशोधन कानून (Wakf Amendment Act) को मुस्लिम समुदाय की जमीन और अधिकारों पर हमला बताते हुए इसे अस्वीकार्य बताया। उन्होंने मंच से कहा कि यह कानून प्रदेश के अल्पसंख्यकों के खिलाफ है और उनकी पार्टी इसे कतई बर्दाश्त नहीं करेगी। तेजस्वी ने इसे धर्मनिरपेक्षता और संविधान के मूल सिद्धांतों के खिलाफ बताया और आरोप लगाया कि केंद्र सरकार धार्मिक ध्रुवीकरण की राजनीति कर रही है। तेजस्वी यादव के इस बयान को न सिर्फ उनके मुस्लिम वोट बैंक को साधने की कोशिश माना जा रहा है, बल्कि इसे एक बड़े राजनीतिक दांव के तौर पर भी देखा जा रहा है, जिससे वे NDA के खिलाफ एक मज़बूत सेकुलर गठबंधन का नेतृत्व करना चाहते हैं। भाजपा का पलटवार: संविधान और संसद का अपमान? भाजपा ने इस बयान पर सख्त प्रतिक्रिया दी है। पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ. सुधांशु त्रिवेदी (Dr. Sudhanshu Trivedi) ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में तेजस्वी के बयान को संविधान और संसद का अपमान बताया। उन्होंने कहा कि जिस गांधी मैदान में कभी लोकतंत्र की रक्षा के लिए लाखों लोगों ने आंदोलन किया था, उसी जगह अब संविधान के विरुद्ध बयानबाजी हो रही है। सुधांशु त्रिवेदी (Sudhanshu Trivedi) ने कहा है कि तेजस्वी यादव ने संसद से पारित एक कानून को कूड़ेदान में फेंकने की बात कहकर न केवल लोकतांत्रिक व्यवस्था पर हमला किया है, बल्कि न्यायपालिका और संविधान का भी अनादर किया है। उन्होंने यह भी कहा कि वक्फ शब्द कुरान में नहीं है और यह एक बाद की व्याख्या है, जिसे मौलवियों और मुल्लाओं द्वारा गढ़ा गया है। उनके अनुसार इस्लाम देने और ज़कात की बात करता है, न कि संपत्ति इकट्ठा करने की। वक्फ कानून का संदर्भ वक्फ एक इस्लामिक व्यवस्था है, जिसके तहत मुसलमान अपनी संपत्ति को धार्मिक या सामाजिक उद्देश्य के लिए दान करते हैं। भारत में वक्फ संपत्तियों की देखरेख के लिए वक्फ बोर्ड (Wakf Amendment Act)  बनाए गए हैं और समय-समय पर इनसे संबंधित कानूनों में संशोधन होते रहे हैं। केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित वक्फ संशोधन कानून का उद्देश्य पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाना बताया जा रहा है, लेकिन विरोधी दलों का आरोप है कि इससे मुस्लिम समुदाय की संपत्तियों पर राज्य का नियंत्रण बढ़ेगा और अल्पसंख्यक अधिकारों का हनन होगा। नमाजवाद बनाम समाजवाद भाजपा प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी (BJP Spokesperson Sudhanshu Trivedi) ने तेजस्वी यादव पर कटाक्ष करते हुए कहा कि वे समाजवाद की बात नहीं कर रहे, बल्कि नमाजवाद का प्रचार कर रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या तेजस्वी बिहार में शरिया कानून लागू करना चाहते हैं? उन्होंने वक्फ प्रणाली को समाजवाद के विरोध में बताते हुए कहा कि यह कुछ लोगों को सारी संपत्तियों पर कब्जा करने का अधिकार देता है, जो सामाजिक न्याय की अवधारणा के खिलाफ है। इसे भी पढ़ें:-  महाराष्ट्र में तीन भाषा नीति पर सरकार का बड़ा फैसला: पुरानी नीतियां रद्द, नई समिति का गठन चुनावी रणनीति या सांप्रदायिक ध्रुवीकरण? इस पूरे घटनाक्रम को राजनीतिक विश्लेषक आगामी बिहार विधानसभा चुनाव (Bihar Assembly Election) से जोड़कर देख रहे हैं। तेजस्वी यादव का यह बयान उन्हें मुस्लिम मतदाताओं के बीच लोकप्रिय बना सकता है, लेकिन साथ ही यह भाजपा को भी मौका देता है कि वह धर्म और संविधान के मुद्दे को केंद्र में रखकर अपने कोर वोट बैंक को सक्रिय करे। यह पूरा विवाद आने वाले चुनाव में ध्रुवीकरण की राजनीति को और तेज कर सकता है। वक्फ संशोधन कानून (Wakf Amendment Act) पर तेजस्वी यादव और भाजपा के बीच टकराव ने बिहार की सियासत में नया मोड़ ला दिया है। जहां एक तरफ तेजस्वी इसे अल्पसंख्यक अधिकारों की रक्षा के रूप में प्रस्तुत कर रहे हैं, वहीं भाजपा इसे लोकतंत्र और संविधान पर हमला मान रही है। यह साफ है कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा न केवल कानूनी बल्कि चुनावी बहस का भी केंद्र बनेगा। बिहार का मतदाता अब देखेगा कि सियासी दल धार्मिक भावनाओं से ऊपर उठकर सामाजिक और विकास संबंधी मुद्दों पर कितना ध्यान देते हैं। Latest News in Hindi Today Hindi news Wakf Amendment Act #SudhanshuTrivedi #Constitution #BJP #IndianPolitics #ParliamentDebate #PoliticalNews

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