India Census 2025

India Census 2025: Start Date & Key Questions to Expect: जानिए कब शुरू होगी जनगणना और कौन-कौन से पूछे जाएंगे सवाल? 

भारत में जनगणना का काम फिर से शुरू होने वाला है। वैसे भी लंबे समय से  देश में जनगणना की मांग उठ रही थी। अब सरकार ने जनगणना को लेकर पूरा प्लान जारी कर दिया है। रजिस्ट्रार जनरल ऑफ इंडिया ने बताया कि एक अप्रैल 2026 से घरों की लिस्टिंग का काम शुरू (India Census 2025: Start Date & Key Questions to Expect) होगा। जनगणना में लोगों के घरों, उनकी सुविधाओं और उनकी सामाजिक-आर्थिक जानकारी को इकट्ठा किया जाएगा। ऐसे में जनगणना से पता चलेगा कि देश में किस जाति के कितने लोग हैं। इससे सरकार को नीतियां बनाने में मदद मिलेगी। ऐसे में बड़ा सवाल यह कि इस बार जनगणना में नया क्या होगा और कौन-कौन से सवाल पूछे जाएंगे? लोगों के मन में अभी से कौतुहल बढ़ने लगा है। लोगों की जिज्ञासा को देखते हुए सरकार ने जनगणना को लेकर पूरी जानकारी दी है। रजिस्ट्रार जनरल ऑफ इंडिया ने बताया कि एक अप्रैल 2026 से घरों की लिस्टिंग का काम शुरू होगा। यह जनगणना का पहला चरण होगा।  दो चरणों में किया (India Census 2025: Start Date & Key Questions to Expect) जाएगा पूरा  बता दें कि राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को लिखे पत्र में, भारत के जनगणना आयुक्त और महापंजीयक मृत्युंजय कुमार नारायण ने कहा कि “घरों का सूचीकरण अभियान और आवास गणना एक अप्रैल, 2026 से शुरू होगी।” यही नहीं, पत्र में यह भी कहा गया है कि “उससे पहले राज्यों एवं जिला प्रशासन के सहयोग से पर्यवेक्षकों एवं गणकों की नियुक्ति की जाएगी तथा उनके बीच कामों का विभाजन किया जाएगा।” यह कार्य भारत के महापंजीयक और जनगणना आयुक्त मृत्युंजय कुमार नारायण की देखरेख में दो चरणों में पूरा किया (India Census 2025: Start Date & Key Questions to Expect) जाएगा।  प्रत्येक घर की आवासीय स्थिति, संपत्ति और सुविधाओं के बारे में जानकारी की (India Census 2025: Start Date & Key Questions to Expect) जाएगी एकत्र  प्राप्त जानकारी के मुताबिक जनगणना दो चरणों में होगी। पहले चरण में यानी घरों के सूचीकरण अभियान में प्रत्येक घर की आवासीय स्थिति, संपत्ति और सुविधाओं के बारे में जानकारी एकत्र की (India Census 2025: Start Date & Key Questions to Expect) जाएगी। यही नहीं, इसके बाद दूसरे चरण यानी जनसंख्या गणना में हर घर में प्रत्येक व्यक्ति का जनसांख्यिकीय, सामाजिक-आर्थिक, सांस्कृतिक और अन्य विवरण भी एकत्र किया जाएगा और यह चरण एक फरवरी, 2027 से शुरू होगा। मीडिया रिपोर्ट्स की माने तो जनगणना में जातियों की भी गिनती की जाएगी। जनगणना कार्य इस के लिए कुछ नहीं तो तकरीबन 34 लाख से अधिक गणक और पर्यवेक्षक के साथ-साथ लगभग 1.3 लाख जनगणना कार्यकर्ता तैनात किए जाएंगे। बता दें कि यह अब तक की 16वीं और आजादी के बाद की आठवीं जनगणना है। इसे भी पढ़ें:- ‘लालू परिवार की जमीन पर होगा सरकार का कब्जा, बनेगा भूमिहीन गरीबों का घर’, JDU नेता के बयान से सियासी हलचल तेज निम्नलिखित प्रश्न पूछे जा (India Census 2025: Start Date & Key Questions to Expect) सकते हैं Latest News in Hindi Today Hindi news India Census 2025 #IndiaCensus2025 #CensusQuestions #PopulationSurvey #GovernmentData #DemographicSurvey #CensusIndia #India2025 #CensusUpdate

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Maharashtra Govt Scraps Old Language Policies

3-Language Policy: महाराष्ट्र में तीन भाषा नीति पर सरकार का बड़ा फैसला: पुरानी नीतियां रद्द, नई समिति का गठन

महाराष्ट्र सरकार (Maharashtra Government) ने तीन भाषा नीति (3-Language policy) को लेकर एक बड़ा फैसला लिया है। राज्य में पहले जारी किए गए दोनों सरकारी आदेश (GR) 16 अप्रैल 2025 और 17 जून 2025 के फैसले को अब औपचारिक रूप से रद्द कर दिया गया है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस (Chief Minister Devendra Fadnavis) ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान इस फैसले की जानकारी दी। इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे (Dy. CM Eknath Shinde) और अजित पवार (Ajit Pawar) भी मौजूद थे। यह फैसला राज्य में तीन भाषा नीति (3-Language policy) को लेकर बढ़ते विरोध और भ्रम की स्थिति के बाद लिया गया है। तीन भाषा नीति (3-Language policy) पर बढ़ता विवाद दरअसल, महाराष्ट्र सरकार (Maharashtra Government) ने 16 अप्रैल 2025 को एक सरकारी आदेश जारी किया था, जिसके अंतर्गत अंग्रेजी और मराठी माध्यम के स्कूलों (English and Marathi Medium School) में कक्षा 1 से 5 तक के छात्रों के लिए हिंदी भाषा को तीसरी अनिवार्य भाषा के रूप में पढ़ाना अनिवार्य किया गया था। इस निर्णय के खिलाफ विभिन्न शिक्षाविदों, सामाजिक संगठनों और क्षेत्रीय राजनीतिक दलों ने विरोध दर्ज किया था। उनका तर्क था कि इससे मराठी भाषा (Marathi Language) और स्थानीय संस्कृति पीछे छूट सकती है। शिवसेना यूबीटी (Shivsena-UBT), एमएनएस (MNS), एनसीपी-एसपी (NCP-SP) और अन्य राजनीतिक पार्टियां एकजुट होकर विरोध कर रही हैं। वहीं राजनीतिक पार्टियों द्वारा किये जा रहे विरोध को ध्यान में रखते हुए सरकार ने 17 जून को दूसरा सरकारी आदेश जारी कर हिंदी को वैकल्पिक भाषा बना दिया, लेकिन इससे स्थिति साफ होने के बजाय और अधिक जटिल हो गई। कई स्कूलों और अभिभावकों में भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो गई कि कौन-सी भाषा अनिवार्य है और कौन-सी वैकल्पिक। मुख्यमंत्री फडणवीस का बयान मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस (Chief Minister Devendra Fadnavis) ने कहा है कि हम मराठी केंद्रित और मराठी छात्रों की जरूरतों को प्राथमिकता देने वाली भाषा नीति बनाएंगे। इस मुद्दे को लेकर किसी भी प्रकार की राजनीति नहीं की जाएगी। उन्होंने यह भी बताया कि उद्धव ठाकरे के मुख्यमंत्री रहते हुए डॉ. रघुनाथ माशेलकर समिति की सिफारिशों के आधार पर तीन भाषा नीति लागू करने का निर्णय लिया गया था। हालांकि, वर्तमान सरकार का मानना है कि भाषा नीति पर ऐसा कोई भी फैसला व्यापक संवाद और विचार-विमर्श के बिना लागू नहीं किया जा सकता। इसे भी पढ़ें:- गुजरात और पंजाब में आम आदमी पार्टी की जीत और 2027 के तूफान की आहट? नई समिति का गठन राज्य सरकार ने इस विषय पर समीक्षा की और भविष्य की दिशा तय करने के लिए एक्सपर्ट डॉ. नरेंद्र जाधव की अध्यक्षता में एक नई समिति के गठन की घोषणा की है। यह समिति त्रिभाषा सूत्र पर अध्ययन करेगी, राज्य के सभी वर्गों के विचारों को ध्यान में रखेगी और सरकार को एक सर्वमान्य रिपोर्ट सौंपेगी। डॉ. नरेंद्र जाधव इस क्षेत्र में अनुभव रखते हैं और नीति विशेषज्ञ हैं। वे पहले भी शिक्षा और सामाजिक विकास से संबंधित कई महत्वपूर्ण नीतिगत सलाह दे चुके हैं। उनके नेतृत्व में बनी यह समिति यह सुनिश्चित करेगी कि भाषा नीति (Language policy) बच्चों की शिक्षा में सहायक हो, न कि बाधा। मराठी भाषा को प्राथमिकता महाराष्ट्र की नई नीति का फोकस मराठी भाषा (Marathi Language) को सुदृढ़ करना है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि मराठी भाषा राज्य की आत्मा है और इसे शिक्षा व्यवस्था में प्राथमिक स्थान दिया जाएगा। साथ ही, यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि छात्रों को अन्य भाषाओं के ज्ञान से भी वंचित न किया जाए। त्रिभाषा नीति (3-Language policy )का उद्देश्य विद्यार्थियों को भाषाई दृष्टि से समृद्ध बनाना है, लेकिन यह तभी संभव है जब नीति क्षेत्रीय आवश्यकताओं और सामाजिक संवेदनशीलता के अनुरूप बनाई जाए। महाराष्ट्र सरकार (Maharashtra Government) का यह फैसला भाषा नीति पर एक संतुलित और सोच-समझकर उठाया गया कदम माना जा सकता है। जहां एक ओर इससे मराठी भाषा और संस्कृति की सुरक्षा होती है, वहीं दूसरी ओर नई समिति के गठन से यह भी सुनिश्चित किया जा रहा है कि भाषा नीति विद्यार्थियों के हित में हो। यह निर्णय राजनीति से ऊपर उठकर लिया गया है और इसका उद्देश्य राज्य की शैक्षिक नींव को मजबूत बनाना है। अब सबकी निगाहें डॉ. नरेंद्र जाधव समिति की रिपोर्ट पर टिकी हैं, जो भविष्य की भाषा नीति (Language policy) का खाका तैयार करेगी। उम्मीद की जा सकती है कि यह नीति राज्य के बहुभाषिक समाज के लिए लाभकारी सिद्ध होगी और शिक्षा के क्षेत्र में एक सकारात्मक बदलाव लाएगी। Latest News in Hindi Today Hindi news Devendra Fadnavis #educationnews #3languagepolicy #governmentdecision #marathi #hindipolicy #englishpolicy

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Anti-Aging Medicines

एंटी एजिंग मेडिसिन का सच, यंग दिखने के हैं कुछ फायदे और बहुत से नुकसान

अभिनेत्री शैफाली जरीवाला की कार्डियक अटैक के कारण हुई मृत्यु आजकल चर्चा का विषय बनी हुई है। ऐसा माना जा रहा है कि इस कार्डियक अटैक की वजह है एंटी एजिंग दवाईयां और इंजेक्शंस हो सकते हैं। शेफाली पिछले कई सालों से यंग दिखने के लिए इन्हें ले रही थी। सिर्फ शैफाली ही नहीं बहुत से सेलेब्रिटीज हमेशा जवान दिखने के लिए इन दवाईयों का इस्तेमाल करते हैं। एंटी एजिंग मेडिसिन (Anti aging medicine) में इंजेक्शन और कई अन्य ट्रीटमेंट्स शामिल हैं। इनका उद्देश्य बढ़ती उम्र के लक्षणों को कम करके यंग दिखना है। इनके जहां कुछ फायदे हैं लेकिन बहुत से साइड इफेक्ट्स भी हो सकते हैं। आइए जानें एंटी एजिंग मेडिसिन के बेनिफिट्स (Benefits of anti-aging medicine) और इनके साइड इफेक्ट्स के बारे में।  एंटी एजिंग मेडिसिन के बेनिफिट्स (Benefits of anti-aging medicine): पाएं जानकारी नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन (National library of medicine) के अनुसार एंटी एजिंग मेडिसिन (Anti aging medicine) का उद्देश्य शारीरिक और मानसिक रूप से युवा बनाए रखना है। इनसे उम्र बढ़ने की प्रक्रिया धीमी होती है और जीवन की गुणवत्ता बढ़ती है। एंटी एजिंग मेडिसिन के बेनिफिट्स (Benefits of anti-aging medicine) इस प्रकार हैं: झुर्रियों को करे कम  एंटी एजिंग इंजेक्शंस जैसे बोटॉक्स और फिलर्स से झुर्रियां और फाइन लाइंस कम होती है जिससे स्किन स्मूद बनती हैं और कॉम्प्लेक्शन में सुधार होता है। स्किन टेक्सचर में सुधार:  फिलर्स से स्किन टेक्सचर में सुधार होता है। इनके उपयोग से त्वचा में फुलाव आता है जिससे फाइन लाइन्स त्वचा की बनावट में इम्प्रूवमेंट होती है। यही नहीं एंटी एजिंग मेडिसिन के बेनिफिट्स (Benefits of anti-aging medicine) में से एक यह भी है कि फिलर चेहरे के खोये वॉल्यूम को वापस लाने में मदद करती हैं जिससे चेहरे की झुर्रियां कम होती हैं और यंग दिखते हैं।  नॉन-सर्जिकल एंटी एजिंग मेडिसिन (Anti aging medicine) और इंजेक्शंस का इस्तेमाल नॉन सर्जिकल होता है। इनसे कोई नुकसान नहीं होता और आप बहुत जल्दी अपनी सामान्य दिनचर्या शुरू कर सकते हैं। यही नहीं, इनके इस्तेमाल से चेहरे के फीचर्स को बढ़ाया जा सकता है। इसे भी पढ़ें:- भारत में जल्द ही लांच होगी वजन कम करने की यह दवा  एंटी एजिंग मेडिसिन के साइड इफेक्ट्स (Side Effects of Anti Aging Medicines) एंटी एजिंग मेडिसिन के साइड इफेक्ट्स (Side Effects of Anti Aging Medicines) भी हो सकते हैं। ऐसा माना गया है कि यह साइड इफेक्ट्स आमतौर पर माइल्ड और टेम्पररी होते हैं। जानिए इनके बारे में:  यह तो थे एंटी एजिंग मेडिसिन के साइड इफेक्ट्स (Side Effects of Anti Aging Medicines)।  एंटी एजिंग मेडिसिन (Anti aging medicine) के कुछ दुर्लभ और गंभीर साइड इफेक्ट्स भी हो सकते हैं जैसे अन्धपन या आंखों की रोशनी का कम होना। यही नहीं, अगर फिलर्स ब्लड वेसल्स तक पहुंच जाएं तो इससे स्ट्रोक या ब्रेन डैमेज का रिस्क बढ़ सकता है। याद रखें, इनका इस्तेमाल करने से पहले अपनी व्यक्तिगत आवश्यकताओं और संभावित रिस्क के बारे में किसी क्वालिफाइड डॉक्टर से बात करें और उसके बाद ही इन्हें लें। (Anti aging medicine) नोट:- यहां दी गई जानकारी केवल रिसर्च के आधार पर दी गई है। लेकिन अगर आप किसी भी शारीरिक समस्या से परेशान हैं, तो अपने हेल्थ एक्सपर्ट से सलाह लेना न भूलें। Latest News in Hindi Today Hindi Anti aging medicine #antiaging #lookyoung #skincare #youthfulglow #beautytruth #antiagingrisks #antiagingfacts

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Iran Cleric Calls Trump, Netanyahu Enemies of Allah: ट्रंप और नेतन्याहू के खिलाफ ईरान के शिया धर्मगुरु ने जारी किया फतवा, दोनों को बताया अल्लाह का दुश्मन

ईरान का परमाणु कार्यक्रम मुसीबत ईरान की जान का दुश्मन बना हुआ है। दरअसल, इजरायल और अमेरिका नहीं चाहते कि ईरान परमाणु हथियार बनाए। इसी के चलते इसलिए इजरायल ने गत 12 जून को ईरान के परमाणु ठिकानों पर हमला किया था। इसके बाद जवाबी कार्रवाई करते हुए ईरान ने भी इजरायल पर मिसाइलें दागीं। दोनों के बीच यह जंग 12 दिन चली। फिर 13वें दिन अमेरिका ने कतर के जरिए ईरान और इजरायल में सीजफायर करा दिया। महत्वपूर्ण बात यह कि सीजफायर के बाद इजरायल तो चुप है, लेकिन ईरान और अमेरिका में जबानी जंग चल रही है। अमेरिका की पहल के चलते भले ही इजरायल और ईरान में सीज फायर हो गया है लेकिन जुबानी जंग है कि थमने का नाम नहीं ले रही है। अब ईरान के शिया धर्मगुरु ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के खिलाफ फतवा (Iran Cleric Calls Trump, Netanyahu Enemies of Allah) जारी किया है।  दुनियाभर के मुसलमानों से दोनों जान से मारने का किया (Iran Cleric Calls Trump, Netanyahu Enemies of Allah) आह्वान  दरअसल, शिया गुरु देश के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई को चेतावनी दिए जाने से काफी नाराज हैं। फतवा जारी करके ट्रंप और नेतन्याहू को दुश्मन करार देकर जान से मारने का आह्वान किया गया है। इस फतवे के बाद दुनिया भर में हड़कंप मच गया है। जानकारी के लिए बता दें कि ईरान के शिया धार्मिक नेता ग्रैंड अयातुल्ला नासेर मकारिम शिराजी ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के खिलाफ एक फतवा जारी किया है। जारी फतवे में उन्होंने ट्रंप और नेतन्याहू को अल्लाह का दुश्मन घोषित (Iran Cleric Calls Trump, Netanyahu Enemies of Allah) किया गया। और दुनियाभर के मुसलमानों से दोनों जान से मारने का आह्वान किया गया है। जो भी व्यक्ति या सरकार ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई को धमकी देगी, उसे अल्लाह का दुश्मन माना (Iran Cleric Calls Trump, Netanyahu Enemies of Allah) जाएगा यही नहीं, ग्रैंड अयातुल्ला नूरी हमदानी ने भी फतवा जारी किया है और कहा है कि “जो भी व्यक्ति या सरकार ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई को धमकी देगी, उसे अल्लाह का दुश्मन माना (Iran Cleric Calls Trump, Netanyahu Enemies of Allah) जाएगा।” मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई अपने परिवार के साथ एक बंकर में छिपकर बैठे हैं। उन्होंने वहीं से अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को चेतावनी देते हुए कहा कि “अगर ईरान के परमाणु ठिकानों पर अब इजरायल और अमेरिका ने हमला किया तो अंजाम बुरा होगा। ईरान अपनी पूरी ताकत के साथ जवाब देगा और मध्य पूर्व में अमेरिका के सैन्य ठिकानों पर हमला करेगा।” इसके अलावा खामेनेई ने इजरायल पर ईरान की जीत का ऐलान करके देशवासियों को जश्न मनाने को भी कहा है।” मेहर न्यूज़ एजेंसी के मुताबिक, मकारिम ने फैसले में कहा कि “अगर कोई व्यक्ति जो मरजा को धमकी देता है वह वॉरलॉर्ड या मोहरेब माना जाता है।” बता दें कि मोहरेब वह व्यक्ति होता है, जो ईश्वर के खिलाफ युद्ध छेड़ता है। ईरानी कानून के मुताबिक ऐसे व्यक्ति को मौत की सजा दी जाती है।  इसे भी पढ़ें:- अमेरिका ने कनाडा से तोड़े व्यापारिक रिश्ते, डिजिटल सर्विस टैक्स बना विवाद की जड़ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने खामेनेई को बताया एहसान (Iran Cleric Calls Trump, Netanyahu Enemies of Allah) फरामोश खैर, इस बीच खामेनेई की इस चेतावनी के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उन्हें करार जवाब देते हुए उन्हें एहसान (Iran Cleric Calls Trump, Netanyahu Enemies of Allah) फरामोश कहा। और चेतावनी दी कि अगर ईरान ने फिर से परमाणु हथियार बनाने की कोशिश की या सोचा भी तो अमेरिका पहले से ज्यादा हमले करेगा।” ट्रंप ने कहा कि “खामेनेई कहां छिपकर बैठे हैं, इजरायल और अमेरिका दोनों को पता है, लेकिन उन्होंने खामेनेई को भयानक मौत से बचाया है और खामेनेई जान बचाने का आभार जताने की बजाय धमकियां दे रहे हैं।” Latest News in Hindi Today Hindi news  #iran #fatwa #trump #netanyahu #enemyofallah #israeliran #middleeastnews #religiousnews

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Defense Attaché's 'Operation Sindoor'

डिफेंस अताशे के ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर बयान ने मचाया हंगामा, कांग्रेस के आरोप पर भारतीय दूतावास ने दी सफाई

इंडोनेशिया में एक सेमिनार को संबोधित करते हए भारतीय डिफेंस अताशे (Indian Defence Attaché) कैप्टन शिव कुमार (नौसेना) द्वारा ऑपरेशन सिंदूर (Operation Sindoor) पर दिए गए एक बयान से विवाद खड़ा हो गया है। नौसेना कैप्टन शिव कुमार ने सेमिनार में दावा किया था कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ (Operation Sindoor) के प्रथम चरण में 7 मई को भारतीय वायुसेना को “कुछ लड़ाकू विमानों का नुकसान हुआ था”। क्योंकि हमारे राजनीतिक नेतृत्व ने पाकिस्तान के किसी भी सैन्य प्रतिष्ठान पर हमला न करने को कहा था। सेना को सिर्फ आतंकवादी ठिकानों को ध्वस्त करने का आदेश मिला था। जिसका वो पालन कर रही थी।   कैप्टन शिव कुमार ने इंडोनेशिया में यह बयान 10 जून को दिया था, जिसका वीडियो अब वायरल हुआ। इस वीडियो में कैप्टन शिव कुमार यह कहते दिख रहे हैं कि, “भारत को प्रारंभिक चरण में सिर्फ इसलिए नुकसान उठाना पड़ा क्योंकि हमारे राजनीतिक नेतृत्व ने पाकिस्तान की किसी भी सैन्य संरचना या एयर डिफेंस को निशाना न बनाने का निर्देश दिया था। लेकिन शुरूआती नुकसान के बाद हमारी सेना इस रणनीति पर फिर से विचार किया और उसमें बदलाव करते हुए दुश्मन की एयर डिफेंस को निशाना बनाना शुरू किया। ब्रह्मोस मिसाइलों से सफल हमला कर दुश्मन को भारी नुकसान पहुंचाया गया। हमारी सेना ने दुश्मन को पंगु बना दिया था।”  कांग्रेस ने लगाया राष्ट्रीय सुरक्षा से समझौता करने का आरोप  कैप्टन का यह बयान वायरल होने के बाद अब विवाद शुरू हो गया है। कांग्रेस (Congress) ने इसे मुद्दा बनाते हुए सरकार पर हमला बोल दिया है। कांग्रेस (Congress) प्रवक्ता पवन खेड़ा ने इसे मोदी सरकार की विफलता करार देते हुए कहा कि, ”प्रधानमंत्री मोदी (PM Modi) इस मुद्दे पर जानकारी देने के लिए ऑल-पार्टी मीटिंग क्यों नहीं बुला रहे हैं। हमारे डिफेंस अताशे का यह बयान सीधे तौर पर सरकार की जवाबदेही तय करती है।” पवन खेड़ा ने पीएम मोदी (PM Modi) और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह समेत पूरी केंद्र सरकार पर देश की सुरक्षा से समझौता करने का गंभीर आरोप लगाते हुए चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जनरल अनिल चौहान के उस बयान का भी हवाला दिया, जिसमें जिन्होंने ऑपरेशन सिंदूर के प्रथम चरण में नुकसान की बात स्वीकार की थी। बता दें कि, पिछले महीने सीडीएस ने सिंगापुर में ब्लूमबर्ग न्यूज को एक इंटरव्यू देते हुए बताया था कि भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के शुरुआती चरण में विमान खोने के बाद अपनी रणनीति बदली और पाकिस्तान को करारा जवाब दिया। हालांकि इस दौरान सीडीएस ने पाकिस्तान के उस दावे को पूरी तरह से खारिज कर दिया, जिसमें वो छह भारतीय फाइटर जेट को मार गिराने की बात कह रहा है।  इसे भी पढ़ें:- ‘लालू परिवार की जमीन पर होगा सरकार का कब्जा, बनेगा भूमिहीन गरीबों का घर’, JDU नेता के बयान से सियासी हलचल तेज भारतीय दूतावास ने आरोप लगता देख जारी की सफाई डिफेंस अताशे (Indian Defence Attaché) के बयान पर विवाद बढ़ता देख भारतीय दूतावास (जकार्ता) ने भी सफाई दी है। दूतावास ने अपने X पोस्ट में कहा, ”हमारे डिफेंस अताशे के बयान को बिना किसी संदर्भ पेश किया गया और मीडिया में भी गलत तरीके से दिखाया जा रहा है। कैप्टन कुमार ने सिर्फ यह बताने की कोशिश की है कि हमारी सेना राजनैतिक नेतृत्व के अधीन काम करती है, जो भारतीय लोकतांत्र की शानदार परंपरा को दिखाती है।” दूतावास के बयान में यह भी कहा गया कि ऑपरेशन सिंदूर का मकसद सिर्फ आतंकी अड्डों को ध्वस्त करना था। भारत की कार्रवाई न तो उकसावे वाली थी और न ही किसी देश को नुकसान पहुंचाने वाली।  आपको बता दे कि डिफेंस अताशे किसी भी देश का एक वरिष्ठ सैन्य अधिकारी होता है, जो उस देश के दूतावास में तैनात होता है। यह अपने देश के रक्षा प्रतिष्ठान का प्रतिनिधित्व करने के साथ डिफेंस से जुड़े सभी कार्यों को देखता है। इसके माध्यम से ही रक्षा उत्पादों की खरीद-बिक्री की जाती है।   Latest News in Hindi Today Hindi news Congress सीडीएस #OperationSindoor #DefenseAttaché #Congress #IndianEmbassy #DiplomaticRow #IndiaNews

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Lalu Yadav land

‘लालू परिवार की जमीन पर होगा सरकार का कब्जा, बनेगा भूमिहीन गरीबों का घर’, JDU नेता के बयान से सियासी हलचल तेज

बिहार में इस साल होने जा रहे विधानसभा चुनाव (Bihar Assembly Elections) को लेकर राजनीतिक सरगर्मी अपने चरम पर पहुंच गई है। चुनाव में उतर रही राजनीतिक पार्टियां एक दूसरे को घेरने के साथ अपनी सियासी जमीन तैयार करने में जुटी है। इस बीच जदयू (JDU) ने घोषणा की है कि अगर राज्य में सरकार बनती है तो राजद (RJD) अध्यक्ष लालू प्रसाद (Lalu Prasad) की पटना के फुलवारीशरीफ में मौजूद जमीन को जब्त किया जाएगा। इस जमीन पर सरकारी खर्च पर घर बनाए जाएंगे और वो घर राज्य के भूमिहीन गरीब लोगों को दिया जाएगा।  यह घोषणा जदयू (JDU) के मुख्य प्रवक्ता नीरज कुमार ने फुलवारीशरीफ में आयोजित पार्टी के एक कार्यक्रम में कही। नीरज कुमार ने लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि लालू परिवार जब भी सत्ता में आई, जनता को सिर्फ लूटने का कार्य किया। इस परिवार ने राज्य के गरीब लोगों को लूटकर पटना और इसके आसपास के इलाकों में करीब 40 एकड़ जमीन बनाई है। इनमें से 6 एकड़ जमीन तो सिर्फ फुलवारशरीफ में ही मौजूद है। नीरज कुमार ने कहा कि लालू प्रसाद (Lalu Prasad) और उनका परिवार जनता को लूटकर पटना का सबसे बड़े शहरी जमींदार बन चुका है। लालू परिवार ने अपने पूरे शासनकाल में भ्रष्टाचार का केवल धन का ही अर्जन किया। इनकी सरकार के एजेंडे में जन कल्याण कभी नहीं रहा। बता दें कि नीरज कुमार राज्य कैबिनेट में सूचना एवं जनसंपर्क मंत्री भी रह चुके हैं। अभी वो विधान परिषद के सदस्य हैं।  कानून बनाकर ली जाएगी लालू परिवार की जमीन- नीरज  लालू प्रसाद (Lalu Prasad) की जमीन को सरकार के अधीन कर उस पर गरीबों के लिए घर बनावाने की घोषणा जदयू की तरफ से किसी नेता ने पहली बार की है। नीरज के इस घोषणा ने राजनीतिक हलचल बढ़ा दी है। नीरज ने अपनी घोषणा में यह भी कहा कि लालू की जमीन का गरीबों को देने के लिए राज्य सरकार द्वारा बकायदा कानून लाया जाएगा। राजद (RJD) ने अपने 15 साल के शासन में गरीबों को खूब लूटा है। केंद्र सरकार में मंत्री रहते भी लालू यादव ने नौकरी के बदले लोगों की जमीन हड़पी। अब समय आ गया है कि गरीब जनता को उनका हक वापस दिया जाए और यह काम हमारी सरकार करेगी।  राजद प्रवक्ता ने भी किया नीरज पर तीखा पलटवार   जदयू प्रवक्ता नीरज कुमार के इस बयान पर राजद (RJD) ने तीखा पलटवार किया है। राजद के मुख्य प्रवक्ता चितरंजन गगन ने कहा कि इस साल के अंत में होने जा रहे विधानसभा चुनाव (Bihar Assembly Elections) में जीत कर तेजस्वी यादव के नेतृत्व में राजद नई सरकार बनाने जा रही है। जिसके बाद एनडीए शासनकाल के दौरान इनके सभी नेताओं का भ्रष्टाचार से अर्जित संपत्ति की जांच होगी। जिन्होंने भी जनता और राज्य को लूटा है उन्हें माफ नहीं किया जाएगा। चितरंजन गगन ने यह भी कहा कि नीरज कुमार जागते हुए सपना देख रहे हैं कि फिर से उनकी सरकार (Bihar Assembly Elections) बनने जा रही है। लेकिन सच यह है कि बिहार की जनता ने नीतीश सरकार को इस बार जड़ से उखाड़ फेकने का मन बना लिया है। इस सरकार में भ्रष्टाचार और अपराध जिस स्तर तक पहुंचा है, वह अपने आप में एक शर्मनाक रिकॉर्ड है। यह सरकार आम जनता का शोषण कर रही है और यह हमारी जनता भी अब समझ चुकी है। इनके सपने सिर्फ सपने ही रह जाएंगे।  इसे भी पढ़ें:- गुजरात और पंजाब में आम आदमी पार्टी की जीत और 2027 के तूफान की आहट? वोटर लिस्ट को लेकर बिहार का सियासी घमासान तेज  चुनाव आयोग बिहार विधानसभा चुनाव से पहले मतदाता सूचियों के विशेष सघन पुनरीक्षण अभियान चला रहा है। इसको लेकर भी यहां खूब हंगामा मचा हुआ है। विपक्ष  दल इसे भाजपा का षडयंत्र बता इसके खिलाफ राजनीतिक लड़ाई के साथ कानून लड़ाई लड़ने की बात कह रही हैं। महागठबंधन में शामिल पार्टियों का कहना है कि चुनाव आयोग के इस अभियान का मकसद विपक्ष के वोट को काटना है। इसके खिलाफ जल्द ही राजनीतिक अभियान शुरू किया जाएगा।  Latest News in Hindi Today Hindi news Lalu Prasad #LaluYadav #JDULeader #BiharPolitics #LandDispute #PoorHousingScheme #LaluFamily #PoliticalControversy

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Know the harmful effects of Giloy juice

गिलोय के जूस के हो सकते हैं बहुत से नुकसान, जानिए किन लोगों को नहीं करना चाहिए इसका सेवन

आयुर्वेद में ऐसी कई हर्ब्स हैं जिन्हें हेल्थ के लिए लाभदायक माना जाता है। उन्हीं में से एक है गिलोय (Giloy)। इसे अमृता या गुडुची के नाम से भी जाना जाता है। ऐसा माना गया है कि यह हर्ब डायजेशन के लिए अच्छी है और इसके साथ ही इम्युनिटी को भी बढ़ाती है। यही नहीं, इस हर्ब में एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं। इसके सेवन से बुखार कम करने में मदद मिलती है और शरीर को कई तरह के इंफेक्शंस से बचाव में भी मदद मिलती है। यही कारण है कि आजकल गिलोय का जूस (Giloy juice) बड़ी सख्या में लोगों द्वारा इस्तेमाल किया जा रहा है। इसमें कोई संदेह नहीं है कि इसके बहुत से फायदे हैं लेकिन क्या आप जानते हैं कि इसके कुछ नुकसान भी हो सकते हैं? आइए जानें कि किन लोगों को गिलोय के जूस का सेवन नहीं करना चाहिए (Who should not consume Giloy juice)? किन लोगों को गिलोय के जूस का सेवन नहीं करना चाहिए (Who should not consume Giloy juice)? हेल्थलाइन (Healthline) के अनुसार गिलोय (Giloy) सीजनल एलर्जीज में फायदेमंद होती है। इससे स्किन रैशेज कम हो सकते हैं। इसके साथ ही डायबिटीज और हाई कोलेस्ट्रॉल आदि को मैनेज करने में भी यह मदद कर सकती है। लेकिन, कुछ लोगों को इनका सेवन करने से बचना चाहिए। जानें किन लोगों को गिलोय के जूस का सेवन नहीं करना चाहिए (Who should not consume Giloy juice)? ऑटोइम्यून डिजीज के रोगी:  गिलोय का जूस (Giloy juice) इम्यून सिस्टम को स्टिमुलेट करता है जिससे ल्यूपस, रुमेटीइड गठिया या क्रोहन रोग  से पीड़ित लोगों के लिए इसका सेवन उनकी स्थिति को और बदतर बना सकता है। गर्भवती महिलाएं गर्भवती महिलाओं को इस स्थिति में गिलोय का जूस (Giloy juice) पीने की सलाह नहीं दी जाती है। यही नहीं उन्हें इस दौरान कुछ भी खाने या पीने से पहले डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए। इसका सेवन करना गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है। ब्लड प्रेशर कम करने वाली दवाईयां लेने वाले लोग  गिलोय का जूस (Giloy juice) उन लोगों को भी नहीं पीना चाहिए, जो ब्लड प्रेशर लो करने वाली दवाईयां ले रहे हैं। क्योंकि गिलोय (Giloy) भी ब्लड प्रेशर को कम कर सकता है। ऐसे में इन दोनों के कॉम्बिनेशन से रोगी का ब्लड प्रेशर लेवल बहुत अधिक कम हो सकता है। इससे उनकी समस्या बढ़ सकती है। इसे भी पढ़ें:- भारत में जल्द ही लांच होगी वजन कम करने की यह दवा  लिवर की समस्या से पीड़ित रोगी ऐसा पाया गया है कि गिलोय (Giloy) लिवर को नुकसान पहुंचा सकता है। इसलिए जिन लोगों को लिवर संबंधी समस्याएं हैं या जिन्हें पीलिया के के लक्षणों का अनुभव हो रहा हो, उन्हें इनका सेवन करने से बचना चाहिए। यह तो आप जान ही गए होंगे कि किन लोगों को गिलोय के जूस का सेवन नहीं करना चाहिए (Who should not consume Giloy juice)। यह भी सलाह दी जाती है कि गिलोय (Giloy) या गिलोय का जूस (Giloy juice) पीने से पहले किसी एक्सपर्ट या डॉक्टर कि सलाह लें खासतौर पर अगर आप किसी अंडरलाइंग हेल्थ कंडीशन से गुजर रहे हों या कोई दवा ले रहे हैं।  गिलोय (Giloy) के कई साइड इफेक्ट्स भी हो सकते हैं। कुछ लोग इसके सेवन के बाद पेट में परेशानी या जी मिचलाना जैसी समस्याओं का अनुभव करते हैं। ऐसा आमतौर पर इसकी अधिक मात्रा लेने से होता है। इस बात का खास ध्यान रखें कि गिलोय या गिलोय का जूस (Giloy juice) किसी भी बीमारी का मेडिकल ट्रीटमेंट का विकल्प नहीं है। इसलिए, कोई भी समस्या होने पर डॉक्टर की सलाह लेना आवश्यक है। नोट:- यहां दी गई जानकारी केवल रिसर्च के आधार पर दी गई है। लेकिन अगर आप किसी भी शारीरिक समस्या से परेशान हैं, तो अपने हेल्थ एक्सपर्ट से सलाह लेना न भूलें। Latest News in Hindi Today Hindi  Giloy #giloyjuice #sideeffects #ayurvedichealth #immunitybooster #healthalert #naturalremedies #giloywarning

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Vivo T4 Lite 5G

Vivo ने लॉन्च किया 10,000 रुपये में दमदार 5G स्मार्टफोन: जानिए फीचर्स, कीमत और खासियत 

भारतीय स्मार्टफोन बाजार में 5G तकनीक की मांग तेजी से बढ़ रही है। इसी को ध्यान में रखते हुए चीनी स्मार्टफोन निर्माता Vivo ने एक बड़ा कदम उठाते हुए अपनी T-सीरीज में एक नया और किफायती 5G फोन लॉन्च कर दिया है। Vivo का यह नया मॉडल Vivo T4 Lite 5G है, जिसे कंपनी ने उन यूज़र्स को ध्यान में रखकर तैयार किया है जो कम बजट में दमदार फीचर्स वाले 5G फोन (5G Phone) की तलाश कर रहे हैं। Vivo T4 Lite 5G: कीमत और वेरिएंट Vivo T4 Lite 5G को तीन स्टोरेज वेरिएंट्स में पेश किया गया है: Vivo T4 Lite 5G फोन की पहली सेल 2 जुलाई को दोपहर 12 बजे से Flipkart, Vivo के ऑफिशियल ई-स्टोर और अन्य रिटेल स्टोर्स पर शुरू होगी। Vivo ने इसे दो आकर्षक रंगों में पेश किया है प्रिज्म ब्लू और टाइटेनियम गोल्ड, जो इसे एक प्रीमियम लुक प्रदान करते हैं। Vivo T4 Lite 5G: डिस्प्ले और डिजाइन Vivo T4 Lite 5G में 6.74 इंच का LCD डिस्प्ले है, जो HD+ (720×1600 पिक्सल) रेजोलूशन और 90Hz रिफ्रेश रेट को सपोर्ट करता है। इस डिस्प्ले की 1000 निट्स पीक ब्राइटनेस इसे तेज धूप में भी पढ़ने लायक बनाती है, जो कि इस प्राइस रेंज में कम ही देखने को मिलता है। इसका स्लीक डिजाइन और बड़ी स्क्रीन इसे मल्टीमीडिया और गेमिंग के लिए आदर्श बनाता है। प्रोसेसर और सॉफ्टवेयर फोन में MediaTek Dimensity 6300 चिपसेट दिया गया है, जो कि एक किफायती लेकिन शक्तिशाली 5G प्रोसेसर है। इसके साथ 8GB तक की RAM और 256GB तक की इंटरनल स्टोरेज मिलती है, जिसे microSD कार्ड के जरिए 2TB तक बढ़ाया जा सकता है। यह फोन Android 15 पर आधारित FuntouchOS 15 पर चलता है, जो कि एक क्लीन और यूज़र फ्रेंडली इंटरफेस के लिए जाना जाता है। Vivo T4 Lite 5G: कैमरा फीचर्स कैमरा की बात करें तो Vivo T4 Lite 5G में डुअल रियर कैमरा सेटअप है, जिसमें 50MP का प्राइमरी सेंसर और 2MP का सेकेंडरी सेंसर दिया गया है। फ्रंट में 5MP का सेल्फी कैमरा मौजूद है जो बेसिक वीडियो कॉलिंग (Basic Video Calling) और सोशल मीडिया (Social Media) के लिए पर्याप्त है। यह कैमरा (Camera) सेटअप इस प्राइस रेंज में अच्छी डिटेल और कलर रिप्रोडक्शन प्रदान करता है। Vivo T4 Lite 5G: बैटरी और चार्जिंग फोन की सबसे बड़ी खासियत इसकी 6000mAh की विशाल बैटरी है। कंपनी का दावा है कि यह इस सेगमेंट का सबसे सस्ता फोन है जिसमें इतनी बड़ी बैटरी दी गई है। फोन 15W USB Type-C फास्ट चार्जिंग को सपोर्ट करता है, जिससे लंबी बैटरी लाइफ के साथ चार्जिंग भी सुविधाजनक हो जाती है। Vivo T4 Lite 5G: कनेक्टिविटी और सेफ़्टी  फोन में डुअल 5G, डुअल-बैंड Wi-Fi, और Bluetooth जैसे कनेक्टिविटी फीचर्स मौजूद हैं। सिक्योरिटी के लिए इसमें साइड माउंटेड फिंगरप्रिंट सेंसर दिया गया है जो तेज और सटीक है। यह फोन IP64 रेटेड है यानी यह धूल और हल्के पानी की बूंदों से सुरक्षित रहेगा। इसके अलावा इसमें SGS 5 स्टार एंटी फॉल प्रोटेक्शन और MIL-STD-810H मिलिट्री ग्रेड शॉक रेसिस्टेंस सर्टिफिकेशन भी है, जिससे यह हल्की गिरावट में भी सुरक्षित रह सकता है। इसे भी पढ़ें:- Govt Warns Online Shoppers: सरकार की यह सलाह नहीं मानने पर अपना सबकुछ गँवा सकते हैं ऑनलाइन शॉपिंग करने वाले Vivo T4 Lite 5G: किसके लिए है यह फोन? Vivo T4 Lite 5G खासतौर पर उन यूज़र्स के लिए है जो बजट में रहते हुए भी लेटेस्ट तकनीक और मजबूत फीचर्स चाहते हैं। छात्र, नौकरीपेशा और पहली बार स्मार्टफोन (Smartphone) खरीदने वाले यूज़र्स के लिए यह एक आदर्श विकल्प हो सकता है। 10,000 रुपये से कम की कीमत में 5G, बड़ी बैटरी, 90Hz डिस्प्ले, और मजबूत डिज़ाइन जैसी खूबियों के साथ Vivo T4 Lite 5G इस सेगमेंट में एक शानदार विकल्प बनकर उभरा है। Vivo का यह कदम निश्चित ही बाजार में बजट 5G स्मार्टफोन्स की प्रतिस्पर्धा को और तेज करेगा। अगर आप कम बजट में एक भरोसेमंद और भविष्य-प्रूफ फोन की तलाश में हैं, तो Vivo T4 Lite 5G पर नज़र डालना फायदेमंद हो सकता है। Latest News in Hindi Today Hindi Vivo T4 Lite 5G #VivoT4Lite5G #5Gsmartphone #BudgetPhone #Vivo #SmartPhone

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rashtriya janata dal bihar

Rashtriya Janata Dal: इन 5 नेताओं ने बनाई पार्टी की पहचान

बिहार की राजनीति (Bihar Politics) में राष्ट्रीय जनता दल (Rashtriya Janata Dal {RJD}) लंबे समय से एक मजबूत और प्रभावशाली राजनीतिक शक्ति के रूप में स्थापित है। इस पार्टी की नींव सामाजिक न्याय, पिछड़े वर्गों और वंचित समुदायों की आवाज़ उठाने के उद्देश्य से रखी गई थी। पार्टी के संस्थापक और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव (Former Chief Minister Lalu Prasad Yadav)ने जिस राजनीतिक विचारधारा और रणनीति से इस दल को खड़ा किया, वह आज भी राज्य की सियासत में अहम भूमिका निभा रही है। RJD सुप्रीमों और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव  लालू प्रसाद यादव (Lalu Prasad Yadav) का नाम बिहार की राजनीति में एक विचारधारा, एक आंदोलन और एक साहसिक नेतृत्व का प्रतीक बन चुका है। उन्होंने 1990 के दशक में बिहार की राजनीति को पूरी तरह बदलकर रख दिया। पिछड़े वर्गों, दलितों और अल्पसंख्यकों को सत्ता की मुख्यधारा में लाकर उन्होंने एक नया राजनीतिक समीकरण तैयार किया। भले ही लालू प्रसाद यादव कानूनी मामलों के चलते सक्रिय राजनीति से कुछ दूर हैं, लेकिन उनकी राजनीतिक पकड़ और विचारधारा आज भी RJD की रीढ़ बनी हुई है। तेजस्वी यादव: युवा नेतृत्व की नई पहचान लालू प्रसाद यादव के छोटे बेटे और बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव (Former Deputy Chief Minister Tejaswi Yadav)ने अब पार्टी की कमान संभाल रखी है। 2020 के बिहार विधानसभा चुनावों (Bihar Assembly Election) में तेजस्वी ने आरजेडी (RJD) को सबसे बड़ी पार्टी बनाकर यह साबित कर दिया कि वे राज्य की जनता, खासकर युवाओं और वंचित वर्गों के बीच लोकप्रिय हैं। आगामी 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव (Bihar Assembly Election 2025) के लिए भी पार्टी ने तेजस्वी को अपना चेहरा घोषित कर दिया है। उनका फोकस रोजगार (Employment), शिक्षा (Education) और स्वास्थ्य (Health) जैसे मुद्दों पर है, जो युवाओं को सीधे तौर पर प्रभावित करते हैं। पांच प्रमुख नेता जो बना रहे हैं RJD की रणनीति मजबूत RJD की मजबूती सिर्फ लालू या तेजस्वी तक सीमित नहीं है। पार्टी के कई वरिष्ठ नेता हैं जो नीति निर्माण, संगठन संचालन और चुनावी रणनीति में अहम भूमिका निभा रहे हैं। इनमें से पांच प्रमुख नेता निम्नलिखित हैं: स्व. रघुवंश प्रसाद सिंह – भले ही वे अब हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उन्होंने पार्टी की नीतिगत संरचना में जो योगदान दिया, उसके लिए उन्होंने हमेशा याद किया जाएगा। उनके विचार आज भी पार्टी की रणनीति में झलकते हैं। अब्दुल बारी सिद्दीकी – RJD के वरिष्ठ मुस्लिम चेहरे के रूप में सिद्दीकी न केवल पार्टी के अंदरूनी निर्णयों में शामिल रहते हैं, बल्कि राज्य में मुस्लिम वोट बैंक (Muslim Vote Bank) को भी पार्टी के पक्ष में संगठित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। शिवानंद तिवारी – लंबे समय तक लालू यादव के करीबी रहे शिवानंद तिवारी ने पार्टी को वैचारिक मजबूती दी है। वे मीडिया और सार्वजनिक बहसों में पार्टी का मुखर पक्ष रखते हैं। जगदानंद सिंह – वर्तमान में RJD के प्रदेश अध्यक्ष, जगदानंद सिंह संगठन को ज़मीनी स्तर पर मज़बूत करने का कार्य कर रहे हैं। उनका प्रशासनिक अनुभव पार्टी के लिए एक बड़ी ताकत है। मनोज झा – राज्यसभा सांसद और पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता के रूप में मनोज झा ने RJD की छवि को राष्ट्रीय स्तर पर प्रखर और विचारशील पार्टी के रूप में प्रस्तुत किया है। उनकी वक्तृत्व शैली और सामाजिक न्याय के मुद्दों पर पकड़ उन्हें पार्टी का प्रमुख चेहरा बनाती है। सामाजिक समीकरणों में RJD की पकड़ बिहार में जातीय और सामाजिक समीकरण राजनीति को काफी हद तक प्रभावित करते हैं। RJD का परंपरागत समर्थन यादव, मुस्लिम और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के बीच रहा है। पार्टी ने समय के साथ महादलित और अति पिछड़ा वर्गों को भी अपने पाले में लाने की कोशिश की है। इसके अलावा महिलाओं और युवाओं को लेकर भी पार्टी नई रणनीतियाँ बना रही है, जिसमें डिजिटल माध्यम, युवाओं के लिए रोजगार योजनाएँ और शिक्षा पर ज़ोर शामिल हैं। इसे भी पढ़ें:- गुजरात और पंजाब में आम आदमी पार्टी की जीत और 2027 के तूफान की आहट? 2025 विधानसभा चुनाव: तैयारी ज़ोरों पर 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव (Bihar Assembly Election 2025) को लेकर RJD ने पहले से ही अपनी रणनीति पर काम शुरू कर दिया है। पार्टी ने हाल ही में अपना कैंपेन सॉन्ग भी लॉन्च किया है, जिसमें तेजस्वी यादव (Tejaswi Yadav) को मुख्य चेहरा बताया गया है। यह सॉन्ग रोजगार, बदलाव और न्याय के मुद्दों को प्रमुखता देता है। पार्टी की जमीनी पकड़, मजबूत संगठन और नेतृत्व के अनुभव ने उसे एक बार फिर से सत्ता के करीब ला दिया है। गठबंधन की संभावनाओं को लेकर भी बातचीत चल रही है, जिसमें कांग्रेस और वाम दलों के साथ तालमेल की कोशिशें हो रही हैं। RJD न सिर्फ बिहार की एक प्रमुख राजनीतिक पार्टी है, बल्कि यह राज्य की सामाजिक और राजनीतिक चेतना को प्रभावित करने वाली विचारधारा भी है। लालू यादव से लेकर तेजस्वी यादव तक, और अब्दुल बारी सिद्दीकी से लेकर मनोज झा तक, पार्टी एक संतुलित मिश्रण है अनुभव और युवा ऊर्जा का। 2025 के चुनाव में RJD का प्रदर्शन यह तय करेगा कि बिहार की राजनीति में सामाजिक न्याय की यह धारा कितनी प्रभावी बनी रहती है। Latest News in Hindi Today Hindi news Tejaswi Yadav #RJD #RashtriyaJanataDal #BiharPolitics #IndianPolitics #RJDLoyalists

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Artificial Intelligence Specialist

Artificial Intelligence Specialists: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस स्पेशलिस्ट कैसे बनें?

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (Artificial Intelligence) आज के वक्त में सबसे ज्यादा डिमांडिंग फिल्ड है क्योंकि हर क्षेत्र में इसकी जरूरत है अब चाहे वह स्वास्थ्य सेवा हो, शिक्षा, व्यापार या फिर परिवहन। जैसे-जैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (Artificial Intelligence) का प्रभाव बढ़ रहा है, वैसे-वैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस स्पेशलिस्ट (Artificial Intelligence Specialists) की मांग भी तेजी से बढ़ रही है। यदि आप इस क्षेत्र में करियर बनाना चाहते हैं, तो आपको एक योजनाबद्ध तरीके से शिक्षा, कौशल और अनुभव हासिल करना होगा। आज इस आर्टिकल में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस स्पेशलिस्ट (Artificial Intelligence Specialists) बनने के लिए क्या-क्या जरूरी है ये समझेंगे।  कैसे बन सकते हैं आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस स्पेशलिस्ट?  आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस स्पेशलिस्ट (AI Specialists) बनने के लिए निन्मलिखित बातों को ध्यान रखें –  1. शैक्षणिक योग्यता (Educational Qualifications) AI विशेषज्ञ बनने के लिए सबसे पहले एक मजबूत शैक्षणिक आधार होना आवश्यक है। आप कंप्यूटर साइंस, डेटा साइंस, गणित, सांख्यिकी या सूचना प्रौद्योगिकी जैसे विषयों में स्नातक (Bachelor’s) की डिग्री प्राप्त करें। यह डिग्री आपके लिए AI की मूलभूत अवधारणाओं को समझने का आधार तैयार करती है। अधिकांश कंपनियाँ ऐसे उम्मीदवारों को वरीयता देती हैं जिन्होंने-  2. तकनीकी कौशल (Technical Skills) AI विशेषज्ञ बनने के लिए कुछ खास टेक्निकल स्किल का होना अत्यंत आवश्यक है: 3. ऑनलाइन कोर्स और सर्टिफिकेशन AI सीखने के लिए कई फ्री और पेड ऑनलाइन कोर्स आसानी से मिल जाते हैं, जो आपको इस क्षेत्र से जुड़ी सभी जरूरी जानकारी को शेयर करते हैं-  4. प्रोजेक्ट्स और प्रैक्टिकल अनुभव सिर्फ किताबी पढ़ाई से AI स्पेशियलिस्ट (AI Specialists) नहीं बना जा सकता। इसके लिए प्रैक्टिकल नॉलेज भी जरूरी है। इसलिए-  5. इंटर्नशिप और इंडस्ट्री अनुभव इंटर्नशिप करने से आपको उद्योग की वास्तविक समस्याओं को समझने और हल करने का अनुभव मिलता है। कॉलेज के दौरान या उसके बाद किसी कंपनी में AI से जुड़ी इंटर्नशिप करना लाभकारी होगा। इससे न केवल आपके स्किल्स में सुधार होगा, बल्कि नेटवर्किंग और करियर अवसर भी मिलेंगे। 6. नवीनतम तकनीकों से अपडेट रहना AI एक तेजी से बदलता हुआ क्षेत्र है। नई-नई तकनीकों, शोध पत्रों और टूल्स के बारे में जानकारी रखना जरूरी है। इसके लिए आप निम्न संसाधनों का उपयोग कर सकते हैं: इसे भी पढ़ें:- रैंक नंबर 1, उत्कृष्टता की पहचान, जानिए आईआईएम अहमदाबाद के बारे में कुछ रोचक बातें 7. सॉफ्ट स्किल (Soft Skills) AI विशेषज्ञ  (AI Expert) को तकनीकी ज्ञान के साथ-साथ अच्छे संप्रेषण कौशल (Communication skills), समस्या सुलझाने की क्षमता, टीमवर्क और विश्लेषणात्मक सोच भी होनी चाहिए। AI का उपयोग अक्सर अन्य टीमों के साथ मिलकर समस्याओं के समाधान में होता है, इसलिए इंटरडिसिप्लिनरी सहयोग जरूरी होता है। AI विशेषज्ञ (AI Expert) बनना कठिन हो सकता है, लेकिन सीखने पर आसानी से समझा जा सकता है और ये एक बेहतर करियर ऑप्शन भी है। इसके लिए आपको तकनीकी तौर से मजबूत, निरंतर सीखने की इच्छा और व्यावहारिक अनुभव की आवश्यकता होती है। यदि आप सही दिशा में मेहनत करते हैं और लगातार सीखते रहते हैं, तो आप इस तेजी से बढ़ते क्षेत्र में एक सफल करियर बना सकते हैं। Latest News in Hindi Today Hindi AI Expert #artificialintelligence #aispecialist #aicareer #techjobs #futureofwork

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