Maharashtra Made Liquor - MML

महाराष्ट्र में एल्कोहॉल की कीमतों में 30% से 50% तक की होगी बढ़त

महाराष्ट्र सरकार ने हाल ही में एक बड़ा और प्रभावशाली कदम उठाते हुए राज्य की आबकारी नीति में महत्वपूर्ण बदलाव किया है। नए निर्णय के तहत शराब पर उत्पाद शुल्क (Excise duty) में भारी बढ़ोतरी की गई है, जिसका सीधा असर शराब की खुदरा कीमतों पर पड़ेगा। इस बदलाव का उद्देश्य सरकारी राजस्व बढ़ाना और स्थानीय शराब उद्योग को प्रोत्साहन देना है, लेकिन इसके साथ-साथ इससे उपभोक्ताओं और स्थानीय व्यापारियों के सामने नई चुनौतियाँ भी खड़ी हो सकती हैं। उत्पाद शुल्क में भारी बढ़ोतरी कैबिनेट के इस नए फैसले के अनुसार भारत में बनी अंग्रेजी शराब (Indian Made Foreign Liquor – IMFL) पर अब उत्पाद शुल्क को उसकी विनिर्माण लागत के तीन गुना से बढ़ाकर 4.5 गुना कर दिया गया है। इसका सबसे अधिक असर उन ब्रांड्स पर पड़ेगा जिनकी विनिर्माण लागत लगभग 260 रुपये प्रति बल्क लीटर है। साथ ही देशी शराब पर भी शुल्क बढ़ा दिया गया है, जो पहले 180 रुपये प्रति प्रूफ लीटर था, उसे अब 205 रुपये प्रति प्रूफ लीटर कर दिया गया है। इस बदलाव के कारण शराब की कीमतों में औसतन 30-50% तक की बढ़ोतरी हो सकती है। उदाहरण के लिए, देशी शराब की 180 ml बोतल अब 60-70 रुपये की बजाय 80 रुपये में बिकेगी। IMFL की सामान्य श्रेणी की बोतल 115-130 रुपये से बढ़कर 205 रुपये की हो सकती है, जबकि प्रीमियम विदेशी शराब की कीमत 210 रुपये से बढ़कर 360 रुपये तक पहुंचने की संभावना है। नई शराब श्रेणी – महाराष्ट्र निर्मित शराब (MML) सरकार ने एक नई श्रेणी की घोषणा भी की है, जिसे “महाराष्ट्र निर्मित शराब” (Maharashtra Made Liquor – MML) नाम दिया गया है। यह श्रेणी देशी और अंग्रेजी शराब के बीच की कड़ी के रूप में विकसित की जाएगी। इसका निर्माण केवल अनाज आधारित शराब से किया जाएगा, और केवल वे उत्पाद ही इसमें शामिल होंगे जो महाराष्ट्र के भीतर निर्मित और पंजीकृत हैं। इससे राज्य के स्थानीय उद्योगों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है, जबकि इसमें विदेशी या राष्ट्रीय ब्रांडों को शामिल नहीं किया जाएगा। सरकार का मानना है कि इससे एक नई बाजार श्रेणी विकसित होगी, जिससे उत्पादों की विविधता बढ़ेगी और उपभोक्ताओं के पास स्थानीय विकल्प उपलब्ध होंगे। सरकार की उम्मीदें और संभावित लाभ सरकार को इस नई नीति से सालाना आबकारी संग्रह में 14,000 करोड़ रुपये (Maharashtra Made Liquor – MML) की बढ़ोतरी की उम्मीद है। इसके अलावा, MML श्रेणी से अलग से 3,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त राजस्व जुटाए जाने की संभावना भी जताई गई है। एक अन्य लाभ स्थानीय किसानों को हो सकता है, क्योंकि MML श्रेणी के तहत अनाज आधारित शराब का उत्पादन बढ़ेगा। इससे कृषि उत्पादों की मांग बढ़ेगी और किसानों की आय में भी इज़ाफा हो सकता है। इसके अलावा राज्य में जिन 38 शराब निर्माण इकाइयों की गतिविधियाँ फिलहाल ठप हैं, उन्हें भी इस नई नीति के माध्यम से पुनर्जीवित किया जा सकता है। इसे भी पढ़ें:- कौन सा रिचार्ज प्लान आपके लिए हो सकता है बेस्ट? आलोचना और चुनौतियाँ हालांकि सरकार इस नीति को राजस्व और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए फायदेमंद मान रही है, लेकिन उद्योग विशेषज्ञ और कई व्यापारिक संगठनों ने इसकी आलोचना की है। उनका कहना है कि इतनी बड़ी दर से उत्पाद शुल्क बढ़ाने से शराब की तस्करी बढ़ सकती है, खासकर पड़ोसी राज्यों से, जहां शराब सस्ती है। इससे राज्य को राजस्व में अपेक्षित लाभ नहीं मिलेगा और स्थानीय व्यवसायों को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। इसके अतिरिक्त, उपभोक्ताओं पर भी इसका नकारात्मक असर पड़ेगा। मध्यम और निम्न आय वर्ग के लोग, जो पहले ही महंगाई से जूझ रहे हैं, उनके लिए शराब अब और अधिक महंगी हो जाएगी। इससे अवैध शराब की बिक्री या उत्पादन बढ़ने का खतरा भी है, जो जनस्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन सकता है। महाराष्ट्र सरकार की नई आबकारी नीति दूरगामी आर्थिक लक्ष्यों और राजस्व बढ़ाने की दिशा में एक साहसिक कदम है। हालांकि इससे राज्य को वित्तीय रूप से लाभ मिल सकता है और स्थानीय उद्योगों को नई ऊर्जा मिल सकती है, लेकिन इसके साथ जुड़ी चुनौतियों को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता। यह आवश्यक है कि सरकार इस नई नीति के क्रियान्वयन के दौरान तस्करी, अवैध व्यापार और उपभोक्ता हितों पर विशेष ध्यान दे। साथ ही, शराब के दुरुपयोग को रोकने के लिए सामाजिक जागरूकता और स्वास्थ्य सेवाओं को भी मजबूत करना होगा। केवल राजस्व बढ़ाना ही नहीं, बल्कि संतुलित और जिम्मेदार नीति ही इस बदलाव को सफल बना सकती है। Latest News in Hindi Today Hindi Maharashtra Made Liquor – MML #maharashtra #alcoholpricehike #liquornews #taxincrease #2025news #alcoholnews #maharashtranews

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India's No.1 Management Institute

रैंक नंबर 1, उत्कृष्टता की पहचान, जानिए आईआईएम अहमदाबाद के बारे में कुछ रोचक बातें

आईआईएम (IIM) यानी इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ मैनेजमेंट (Indian Institute of Management) भारत के मुख्य मैनेजमेंट इंस्टीट्यूट हैं। यह इंस्टीट्यूट बेहतरीन बिजनेस स्टडी और रिसर्च के लिए प्रसिद्ध हैं। आईआईएम (IIM) में कई अन्य कोर्स भी किए जा सकते हैं जैसे पोस्टग्रेज्यूटेड प्रोग्राम, पीएचडी आदि। इन इंस्टिस्टिट्यूट्स में स्टूडेंट्स को अच्छी शिक्षा मिलती है, यहां की फैकल्टी अच्छी है और इसके साथ ही यहां से पढ़ाई करने के बाद नौकरी के अच्छे मौके भी मिलते हैं। भारत में कुल 21 आईआईएम (IIM) हैं, जो पूरे देश में अलग-अलग जगहों में स्थित हैं। इन इंस्टीट्यूट्स में एडमिशन पाना आसान नहीं होता। इसके लिए छात्रों को एक कठिन प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। आईआईएम अहमदाबाद (IIM Ahmedabad) भारत का सबसे पुराना और प्रतिष्ठित इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ मैनेजमेंट (Indian Institute of Management) है। आइए जानें आईआईएम अहमदाबाद के बारे में रोचक बातें (Interesting facts about IIM Ahmedabad)। आईआईएम अहमदाबाद (IIM Ahmedabad): कुछ खास बातें जिनके बारे में जानकारी है जरूरी आईआईएम अहमदाबाद (IIM Ahmedabad) भारत का सबसे प्रतिष्ठित बिजनेस स्कूल है। इसका टीचिंग मॉडल, फैकल्टी, प्लेसमेंट आदि सभी बेहतरीन हैं। आइए जानें आईआईएम अहमदाबाद के बारे में रोचक बातें (Interesting facts about IIM Ahmedabad):  भारत का नंबर 1 इंस्टीट्यूट जैसा की पहले ही बताया गया है कि यह इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ मैनेजमेंट (Indian Institute of Management) इंस्टिट्यूट भारत का सबसे बेहतरीन यानी नंबर 1 बिजनेस स्कूल है। यह संस्थान अपनी अच्छी शिक्षा और रिसर्च के लिए प्रसिद्ध है। यह देश और दुनिया में अपनी अच्छी रैंकिंग के लिए भी जाना जाता है। आईआईएम अहमदाबाद के बारे में रोचक बातें (Interesting facts about IIM Ahmedabad) इस प्रकार हैं: कैंपस क्या आप जानते हैं कि आईआईएम अहमदाबाद (IIM Ahmedabad) के कैंपस को वास्तुकार लुई कान द्वारा डिजाइन किया गया था? इसमें रेड ब्रिक आर्किटेक्चर का इस्तेमाल किया गया है जो इसे अनोखा और सुंदर बनाता है। इस कैंपस में हर सुविधा प्रदान की गई है। स्टूडेंट्स के डेवलपमेंट के लिए यह एक बेहतरीन स्थान है। यहां अच्छे होस्टल्स, खेल सुविधाओं के साथ ही हेल्थ सेंटर भी है। यहां छात्रों के लिए स्क्वैश कोर्ट, स्विमिंग पूल और जिम की सुविधा भी है। बेहतरीन प्लेसमेंट  आईआईएम अहमदाबाद (IIM Ahmedabad) में छात्रों को अच्छी प्लेसमेंट दीं जाती है। यहां के छात्रों को नेशनल के साथ ही इंटरनेशनल कंपनियों में प्लेसमेंट मिलती है। इन कंपनियों में अमेजॉन, गूगल,  बीसीजी आदि शामिल हैं। यहां के छात्रों को एक अच्छा सैलरी पैकेज मिलता है, जो भारत के अन्य इंस्टीट्यूट्स के मुकाबले अधिक है। हार्वर्ड केस मेथड  आईआईएम अहमदाबाद (IIM Ahmedabad) में मुख्यतया हार्वर्ड केस मेथड का इस्तेमाल किया जाता है। इसमें रियल बिजनेस प्रॉब्लम्स का एनालिसिस कर के उनका सलूशन निकाला जाता है। इससे छात्रों को प्रैक्टिकल एक्सपीरियंस मिलता है। पूर्व आरबीआई गवर्नर रघुराम राजन और प्रबंधन गुरु सीके प्रहलाद आदि इसी इंस्टीट्यूट से पढ़े हुए हैं। यह पूर्व छात्र इंस्टीट्यूट की उत्कृष्टता का प्रतीक हैं और इससे यह भी पता चलता है कि यह इंस्टीट्यूट अपने छात्रों को सफल बनाने में मदद करता है।  इसे भी पढ़ें:- भारत में जल्द ही लांच होगी वजन कम करने की यह दवा  विदेशी कैंपस आईआईएम अहमदाबाद (IIM Ahmedabad) ने अपना पहला विदेश कैंपस दुबई में स्थापित किया है, जहां इस साल सितम्बर से प्रवेश मिलेगा। यानी नहीं, इस इंस्टीट्यूट की दुनिया भर में मुख्य इंस्टीट्यूट्स के साथ पार्टनरशिप है। इससे यहां से छात्रों को विदेश में एक समेस्टर बिताने का मौका मिलता है। इससे छात्रों को न केवल इंटरनेशनल एक्सपीरियंस मिलता है बल्कि उन्हें दुनिया को व्यापक दृष्टिकोण से देखने का अवसर भी मिलता है। संक्षेप में कहा जाए तो इस इंस्टीयूट में दाखिला ले कर छात्र अपने करियर को सफल बना सकते हैं बल्कि अच्छा अनुभव भी प्राप्त कर सकते हैं। नोट:- यहां दी गई जानकारी रिसर्च के आधार पर दी गई है। अधिक जानकारी के लिए आप आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं या गूगल सर्च करें। Latest News in Hindi Today Hindi IIM Ahmedabad #IIMAhmedabad #IIMA #TopManagementInstitute #IIMAFacts #BestIIMIndia #IIMRanking #BusinessSchoolIndia

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CM Mohan Yadav convoy halted

CM Mohan Yadav Convoy Halted, Petrol Pump Sealed: सीएम मोहन यादव के काफिले की गाड़ियां अचनाक हुईं बंद, इस वजह से पेट्रोल पंप हुआ सीज

क्या हो यदि आप पेट्रोल पंप से डीजल भरवाएं और कुछ दूरी पर जाने के बाद अचानक से आपकी गाड़ी बंद पड़ जाए? निश्चित आप इसे तकनीकी खरीब समझकर धक्का मारने पर मजबूर होंगे। ये तो बात रही आम इंसान की। यही घटना अगर सूबे के मुख्यमंत्री के साथ हो तो? निश्चित ही सरकारी अमले में हड़कंप मचना तय है। दरअसल, मध्य प्रदेश के रतलाम में इंडस्ट्रियल कॉन्क्लेव के दौरान एक बड़ी लापरवाही सामने आई है। मुख्यमंत्री मोहन यादव के काफिले में शामिल एक दर्जन से ज्यादा गाड़ियां अचानक रास्ते में बंद हो गईं। पहले तो मामला तकनीकी खराबी का लगा, लेकिन जब जांच हुई तो सामने आया कि इन गाड़ियों में पानी मिला डीजल भरा गया था। सीएम के दौरे को देखते हुए प्रशासन को सीएम काफिले के लिए तत्काल इंतजाम करना (CM Mohan Yadav Convoy Halted, Petrol Pump Sealed) पड़ा। सीएम काफिले के लिए इंदौर से गाड़ियों का दूसरा रैक भेजा गया। मुख्यमंत्री मोहन आज रतलाम के पोलो ग्राउंड में आयोजित रीजनल इंडस्ट्री स्किल एंड इम्पलॉयमेंट कॉन्क्लेव 2025 में शिकरत करेंगे। जानकारी के मुताबिक, इन सभी वाहनों में डोसीगांव स्थित पेट्रोल पंप से डीजल भरवाया गया था। घटना के बाद प्रशासन में हड़कंप मच गया। तत्काल कार्रवाई करते हुए संबंधित पेट्रोल पंप को सील कर दिया गया है और ईंधन के सैंपल जांच के लिए भेजे गए हैं।  चलते-चलते काफिले की 19 गाड़ियां अचानक बंद हो (CM Mohan Yadav Convoy Halted, Petrol Pump Sealed) गईं रिपोर्ट के मुताबिक गुरुवार शाम सीएम मोहन के रतलाम दौरे से पहले रतलाम के लिए रवाना हुईं सीएम काफिले की 19 गाड़ियों ने एक पेट्रोल पंप से डीजल भरवाया था। मुख्यमंत्री का काफिला रतलाम जा रहा था, लेकिन चलते-चलते काफिले की 19 गाड़ियां अचानक बंद हो (CM Mohan Yadav Convoy Halted, Petrol Pump Sealed) गईं, जिससे चालकों का गाड़ियों से उतरकर धक्का लगाना पड़ गया। आशंका जताई जा रही है कि गईं कि पेट्रोल पंप का डीजल मिलावटी होने के कारण काफिले की गाड़ियां बंद पड़ गई। सीएल काफिले की 19 गाड़ियों के अचानक बंद होने की सूचना मिलते ही जिले में हड़कंप मच गया। मौके पर पहुंचे पुलिस अधिकारियों ने आनन-फानन में उस पेट्रोल पंप को सील कर दिया, जहां से काफिले की गाड़ियों में तेल भऱवाया गया था। बता दें कि डीजल में मिलावट की पुष्टि की है, जिसके बाद प्रशासन ने पेट्रोल पंप के खिलाफ एक्शन लिया। गौरतलब है मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव आज रतलाम दौरे पर है। सीएम मोहन दोपहर भोपाल से रतलाम पहुंच रहे हैं।   इसे भी पढ़ें:- हिंदी अनिवार्यता पर बोले शरद पवार, कहा राजनीति नहीं, समझदारी है ज़रूरी काफिले की गाड़ियों में डीजल डालने के दौरान आया (CM Mohan Yadav Convoy Halted, Petrol Pump Sealed) पानी  मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक जांच में यह बात पता चली है कि जिन गाड़ियों में 20 लीटर डीजल डलवाया गया था, उनमें से लगभग 10 लीटर पानी निकला है। सभी वाहनों में लगभग यह स्थिति (CM Mohan Yadav Convoy Halted, Petrol Pump Sealed) है। यही नहीं, एक ट्रक चालक ने भी 200 लीटर डीजल भरवाया था। वो भी थोड़ी दूरी पर ही बंद हो गया। प्रशासन की शुरुआती जांच में आशंका जताई गई है कि बारिश के चलते डीजल टैंक में पानी का रिसाव हो सकता है। फिलहाल, कलेक्टर और जिला प्रशासन की टीम पूरे मामले की जांच में जुट गई है। रिपोर्ट आने के बाद दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की बात कही गई है। तहसीलदार ने कहा, काफिले की गाड़ियों में डीजल डालने के दौरान पानी आया है। ऐसे में बड़ा सवाल यह कि आखिर पेट्रोल पंप पर ईंधन की गुणवत्ता जांचने के क्या इंतजाम हैं? क्या सच में आम लोगों को भी ऐसा ही मिलावटी ईंधन दिया जा रहा है? Latest News in Hindi Today Hindi news CM Mohan Yadav #cmMohanyadav #convoyhalted #petrolpumpsealed #madhyapradeshnews #fuelqualityissue

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Sharad Pawar says imposition of Hindi

हिंदी अनिवार्यता पर बोले शरद पवार, कहा राजनीति नहीं, समझदारी है ज़रूरी

हाल ही में देशभर में हिंदी भाषा (Hindi Language) को अनिवार्य किए जाने को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। महाराष्ट्र में हिंदी को तीसरी भाषा के रूप अनिवार्य किये जाने पर सभी राजनीतिक पार्टियों की अपनी-अपनी सोच है। कुछ राजनीतिक दल इसका विरोध कर रहे हैं, तो कुछ इसका समर्थन। अब इसी मुद्दे पर महाराष्ट्र के वरिष्ठ नेता और एनसीपी (एसपी) के प्रमुख शरद पवार (NCP (SP) Sharad Pawar) का बड़ा बयान सामने आया है। शरद पवार ने न सिर्फ हिंदी के महत्व को स्वीकार किया, बल्कि यह भी समझाने की कोशिश की कि भाषा के सवाल पर संतुलन और संवेदनशीलता ज़रूरी है। हिंदी को पूरी तरह इग्नोर नहीं किया जा सकता शरद पवार (Sharad Pawar) ने कहा है कि हिंदी को देश की एक महत्वपूर्ण भाषा के रूप में नकारा नहीं जा सकता। मीडिया से बात करते हुए उन्होंने यह भी माना कि देश में सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषा हिंदी (Sharad Pawar) है और इसे अनदेखा करना उचित नहीं होगा। हालांकि उन्होंने इस विषय को भावनात्मक नहीं बल्कि तर्कसंगत तरीके से देखने की सलाह दी है। पांचवी कक्षा के बाद हिंदी अनिवार्य करने का सुझाव शरद पवार (Sharad Pawar) ने कहा है कि पहली से चौथी कक्षा तक हिंदी को अनिवार्य करने से बच्चों पर दबाव पड़ सकता है। उनके अनुसार इस उम्र में मातृभाषा और स्थानीय भाषाओं पर अधिक ध्यान देना चाहिए ताकि बच्चे अपनी मूल भाषा में मजबूत आधार बना सकें। उन्होंने यह सुझाव दिया कि पांचवीं कक्षा के बाद हिंदी को अनिवार्य किया जा सकता है, जिससे बच्चे बिना मानसिक दबाव के हिंदी सीखने में सक्षम हो सकते हैं। महाराष्ट्र के लोग हिंदी विरोधी नहीं शरद पवार (Sharad Pawar) ने ये भी कहा कि महाराष्ट्र के लोग हिंदी के विरोध में नहीं हैं। महाराष्ट्र की जनता अन्य भाषाओं के प्रति भी उतना ही स्नेह रखते हैं जितना मराठी के प्रति। उन्होंने यह भी कहा कि हिंदी को लेकर जो विरोध दिखाई देता है, वह भाषा से अधिक राजनीतिक भावनाओं और क्षेत्रीय अस्मिता से जुड़ा है। ठाकरे परिवार की बातों पर गौर शरद पवार ने यह भी बताया कि उन्होंने उद्धव ठाकरे (Uddhav Thackeray) और राज ठाकरे (Raj Thackeray) दोनों की इस मुद्दे पर राय सुनी है। उन्होंने कहा कि दोनों नेताओं के विचारों को समझना और उनका विश्लेषण करना ज़रूरी है। पवार ने यह संकेत दिया कि वह किसी भी कार्यक्रम में शामिल होने से पहले उसके उद्देश्य और एजेंडे को पूरी तरह से समझना चाहेंगे। राज ठाकरे के मोर्चे पर प्रतिक्रिया जब पवार से पूछा गया कि क्या वे राज ठाकरे के हिंदी-विरोधी मोर्चे में शामिल होंगे, तो उन्होंने कहा कि उन्होंने अभी तक कोई निर्णय नहीं लिया है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि किसी के बुलावे पर सिर्फ़ इसलिए शामिल नहीं हो सकते कि वह कोई बड़ा नेता है। यदि मुद्दा वाकई में जनहित का है और गंभीरता से उठाया गया है, तो ही वह उसका समर्थन करेंगे। इसे भी पढ़ें:- गुजरात और पंजाब में आम आदमी पार्टी की जीत और 2027 के तूफान की आहट? सभी राजनीतिक दलों से समझदारी की अपील शरद पवार ने सभी राजनीतिक दलों से अपील की कि भाषा जैसे संवेदनशील मुद्दे पर जल्दबाज़ी या भावनात्मक बयानबाज़ी से बचें। उन्होंने कहा कि किसी भी भाषा को थोपना या किसी भाषा को नीचा दिखाना देश की एकता और विविधता के लिए ठीक नहीं है। क्योंकि भाषा संस्कृति से जुड़ी होती है और इस पर संवाद, समझ और सम्मान की ज़रूरत होती है। शरद पवार (Sharad Pawar) का बयान ऐसे वक्त में महत्वपूर्ण है जब देशभर में भाषायी पहचान और राष्ट्रीय एकता के सवाल पर बहस चल रही है। उनका दृष्टिकोण संतुलित, व्यावहारिक और भविष्य को ध्यान में रखकर है। भाषा का सवाल केवल शिक्षा या प्रशासन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समाज और सांस्कृतिक दोनों के लिए महत्वपूर्ण है। ऐसे में शरद पवार जैसे अनुभवी नेताओं की भूमिका इस बहस को सही दिशा देने में अहम हो सकती है। वैसे अब यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या केंद्र सरकार (Central Government) इस दिशा में कोई नई नीति अपनाती है और क्या राज्य सरकारें इस पर सहयोग करती हैं।  Latest News in Hindi Today Hindi news Sharad Pawar #sharadpawar #hindiimposition #languagepolitics #indianpolitics #hindidebate

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A Shiv Sena MP's driver received a ₹150 crore gift deed

Shiv Sena Driver Gets ₹150 Cr Gift, EOW Launches Probe: शिवसेना सांसद के ड्राइवर को मिली 150 करोड़ रुपये की गिफ्ट डीड, EOW हुई एक्टिव

उपहार देने में कोई बुराई नहीं है। अक्सर लोग अपने परिचितों को उपहार भेंट स्वरूप देते हैं। लेकिन क्या हो यदि कोई अनजान शख्स किसी को करोड़ों की जमीन गिफ्ट में दे दे? आप कहेंगे आज के इस दौर में कौन दानवीर है जो करोड़ों की जमीन गैर परिचित शख्स को दान कर रहा है? जाहिर सी बात है जब देने और लेनेवाले में किसी भी तरह का कोई संबंध ही न हो, तो ऐसे में शक होना स्वाभाविक है। दरअसल, पूर्ववर्ती हैदराबाद के निजाम से नजदीकी संबंध रखने वाले परिवार के वंशज ने शिवसेना सांसद के ड्राइवर को तकरीबन 150 करोड़ रुपये मूल्‍य की तीन एकड़ जमीन गिफ्ट कर दी है। इसकी शिकायत मिलते ही आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्लू) की टीम जांच में जुट (Shiv Sena Driver Gets ₹150 Cr Gift, EOW Launches Probe) गई है। टीम यह पता लगाने में जुटी है कि गिफ्ट देने और लेने वाले में दूर-दूर तक कोई संबंध नहीं है।  फिर भी ड्राइवर को प्राइम लोकेशन पर तीन एकड़ जमीन उपहार के तौर पर क्‍यों दी गई? शिकायत के बाद संबंधित ड्राइवर और सांसद के विधायक बेटे से पूछताछ की गई है।  सालार जंग परिवार से ताल्‍लुक रखने वाले मीर मजहर अली खान और उनके 6 अन्‍य संबंधियों ने किए (Shiv Sena Driver Gets ₹150 Cr Gift, EOW Launches Probe) हैं हस्‍ताक्षर  बता दें कि 150 करोड़ रुपये की जमीन गिफ्ट देने का यह मामला हैदराबद के मशहूर सालार जंग फैमिली और शिवसेना सांसद संदीपनराव भुमरे के ड्राइवर जावेद रसूल शेख से जुड़ा है। रसूल शेख सांसद के साथ ही उनके विधायक बेटे विलास भुमरे से पिछले 13 साल से जुड़े हैं। गौरतलब हो कि सालार जंग पूर्ववर्ती हैदराबाद के निजाम के काल में दीवान थे। सालार जंग परिवार की बड़ी प्रतिष्‍ठा है। जानकारी के मुताबिक इस गिफ्ट डीड पर सालार जंग परिवार से ताल्‍लुक रखने वाले मीर मजहर अली खान और उनके 6 अन्‍य संबंधियों ने हस्‍ताक्षर किए (Shiv Sena Driver Gets ₹150 Cr Gift, EOW Launches Probe) हैं। हालांकि, इन लोगों ने ईओडब्लू की ओर से जारी नोटिस का अभी तक जवाब नहीं दिया है। उनसे अपना बयान दर्ज करवाने को कहा गया है। बता दें कि मुजाह‍िद खान के एक वकील ने इस बाबत शिकायत की थी, जिसके बाद जांच शुरू की गई है। कहने की जरूरत नहीं, हैदराबाद के प्रतिष्ठित सालार जंग परिवार द्वारा महाराष्ट्र में स्थित तकरीबन 150 करोड़ रुपये मूल्य की तीन एकड़ ज़मीन शिवसेना सांसद संदीपनराव भुमरे के ड्राइवर के नाम गिफ्ट किए जाने के मामले ने सियासी और प्रशासनिक हलकों में खलबली मचा दी है। यह मामला तब सुर्खियों में आया जब छत्रपति संभाजीनगर पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा को एक वकील की शिकायत मिली कि सांसद के ड्राइवर जावेद रसूल शेख के नाम गिफ्ट डीड के जरिए कीमती ज़मीन ट्रांसफर कर दी गई है।  सालार जंग परिवार के सदस्य क्यों उसके नाम इतनी बड़ी संपत्ति गिफ्ट करना (Shiv Sena Driver Gets ₹150 Cr Gift, EOW Launches Probe) चाहेंगे? जांच अधिकारियों की माने तो यह ज़मीन संभाजीनगर के दौलतपुरा इलाके में जलना रोड पर स्थित है। इसे प्राइम लोकेशन माना जाता है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक ईओडब्लू के इंस्पेक्टर संभाजी पवार ने इस पूरे मामले पर कहा कि “हम जावेद के इनकम टैक्स रिटर्न और आय के अन्य स्रोतों की जांच करेंगे। उसे यह स्पष्ट करना होगा कि सालार जंग परिवार के सदस्य क्यों उसके नाम इतनी बड़ी संपत्ति गिफ्ट करना (Shiv Sena Driver Gets ₹150 Cr Gift, EOW Launches Probe) चाहेंगे। इंस्पेक्टर ने बताया कि जावेद जांच में पूरा सहयोग कर रहा है। जावेद का कहना है कि वह सालार जंग परिवार के वंशजों से अच्छे संबंध रखता है। इसलिए उन्होंने उसे यह ज़मीन तोहफे में दी। दस्तावेजों के मुताबिक, गिफ्ट डीड उसी समय बनाई गई जब मजहर अली और अन्य ने एक लंबी कानूनी लड़ाई के बाद 12 में से 3 एकड़ ज़मीन पर अपना दावा साबित किया था। फ़िलहाल पुलिस ने गिफ्ट डीड पर हस्ताक्षर करने वाले सालार जंग परिवार के सदस्य मीर मजहर अली खान और उनके छह रिश्तेदारों को बयान दर्ज करने के लिए नोटिस भेजा है, लेकिन अब तक कोई जवाब नहीं मिला है।  इसे भी पढ़ें:- गुजरात और पंजाब में आम आदमी पार्टी की जीत और 2027 के तूफान की आहट? दोनों में न तो कोई संबंध है और न ही ये इस्लाम के एक ही सेक्‍ट से ताल्लुक रखते (Shiv Sena Driver Gets ₹150 Cr Gift, EOW Launches Probe हैं टाइम्‍स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, शिकायतकर्ता वकील मुजाहिद खान ने सवाल उठाया कि बिना किसी पारिवारिक या रिश्तेदारी के इतनी कीमती ज़मीन किसी ड्राइवर को क्यों दी जाएगी। उन्होंने कहा कि गिफ्ट डीड सिर्फ रक्त संबंधियों के बीच मान्य होती है। यहां दोनों में न तो कोई संबंध है और ये इस्लाम के अलग-अलग सेक्‍ट से ताल्लुक रखते (Shiv Sena Driver Gets ₹150 Cr Gift, EOW Launches Probe हैं। फिलहाल यह पहेली बनी हुई है कि ड्राइवर जावेद का सालार जंग परिवार से क्या वास्तविक संबंध है और यह ज़मीन उसे गिफ्ट क्यों की गई? हालांकि इस मामले में सांसद संदीपनराव भुमरे और उनके बेटे विलास भुमरे ने सफाई देते हुए कहा कि “ड्राइवर हमारे यहां काम करता है, लेकिन इसका यह मतलब नहीं कि हम उसके हर फैसले के लिए जिम्मेदार हैं। इस बीच उन्होंने यह भी बताया कि “पुलिस ने उनसे और उनके पिता से भी पूछताछ की है।” Latest News in Hindi Today Hindi news Shiv Sena Driver Gets ₹150 Cr Gift, EOW Launches Probe #shivsenanews #150crgift #eowprobe #maharashtrapolitics #driverscandal #politicalnews #mumbainews #indianpolitics

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PM Modi and President Trump

डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा दावा, बोले- ‘भारत के साथ ट्रेड डील लगभग फाइनल, चीन को लेकर भी कर दी बड़ी घोषणा

अमेरिका और भारत के बीच हो रहे ट्रेड डील (Indo-US Trade Deal) को लेकर अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने बड़ा संकेत दिया है। डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने व्हाइट हाउस में हो रहे बिग ब्यूटीफुल बिल इवेंट में बोलते हुए कहा कि वो जल्द ही भारत के साथ एक बहुत बड़ी डील (Indo-US Trade Deal) करने जा रहे हैं। यह डील अमेरिका और भारत दोनों के लिए फायदेमंद रहने वाला है। इसी इवेंट में ट्रंप ने यह भी बताया कि अमेरिका और चीन के बीच ट्रेड डील हो चुकी है। बता दें कि ट्रंप प्रशासन ने इसी साल 2 अप्रैल को कई देशों पर भारी भरकम टैक्स लगाने की घोषणा की थी। इसी दौरान भारत से आने वाले कई सामानों पर भी 26 फीसदी तक एक्स्ट्रा टैरिफ लगाने की घोषणा की गई थी। हालांकि, दबाव बढ़ने पर ट्रंप प्रशासन ने नए ट्रैरिफ पर 90 दिनों की रोक लगाते हुए कहा था कि यह टैक्स 9 जुलाई से दोबारा लागू होगा। इसके बाद से ही ट्रंप प्रशासन के अधिकारी कई देशों के साथ बातचीत कर इस ट्रेड डील करने में जुटा है। पिछले कई दिनों से अमेरिकी अधिकारी भारत से भी ट्रेड डील (Indo-US Trade Deal) करने में जुटे हैं। भारत चाहता है कि उसे अमेरिका द्वारा थोपे गए इस एक्स्ट्रा टैक्स से पूरी तरह छूट मिले। वहीं, अमेरिका चाहता है कि उसके कृषि उत्पादों के लिए  भारत अपने बाजार को पूरी तरह खोले और कुछ खास प्रोडक्ट्स पर टैक्स छूट दे। ट्रंप ने ट्रेड डील के बारे में क्या कहा? बिग ब्यूटीफुल बिल इवेंट में डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने इसी मुद्दे पर बात करते हुए कहा कि, “हर कोई हमारे साथ सौदा करना चाहता है और ट्रेड डील का हिस्सा बनना चाहता है। आप लोग याद कीजिए कुछ महीने पहले मीडिया कहती थी कि, क्या वाकई कोई देश है जिसकी हमारे साथ ट्रेड डील करने में कोई दिलचस्पी हो? छोड़ो, हमने कल ही खास ट्रेड डील पर चीन के साथ हस्ताक्षर किए हैं। हमने पिछले कुछ दिनों में कई बेहतरीन सौदे किए हैं। हमारे पास एक और बड़ा सौदा करने वाले हैं, शायद भारत (Indo-US Trade Deal) के साथ। यह बहुत बड़ा होने वाला है। जहां हम एक तरफ भारत के दरवाजे अपने लिए खोलने जा रहे हैं, वहीं चीन के दरवाजे अपने लिए खोल चुके हैं।”  ट्रंप ने इस दौरान यह भी कहा कि इस तरह का खास सौदा हर देश के साथ नहीं किया जाएगा। इस तरह का सौदा कुछ खास देशों के लिए ही है। उन्होंने जोर देकर कहा, “हम हर किसी के साथ इस तरह का सौदा नहीं करेंगे। कुछ देशों को हम सिर्फ पत्र भेजकर उनका धन्यवाद करेंगे। ऐसे देशों को अमेरिका में अपना प्रोडेक्ट बेचने के लिए 25, 35, 45 फीसदी टैरिफ का भुगतान करना ही होगा। यह तरीका सभी के लिए आसान होगा।  इसे भी पढ़ें:- गुजरात और पंजाब में आम आदमी पार्टी की जीत और 2027 के तूफान की आहट? भारत और चीन से डील के बारे विस्तार से नहीं बताया  ट्रंप ने अपने भाषण के दौरान न तो यह बताया कि अमेरिका ने चीन के साथ किस तरह की डील की है और न ही यह बताया कि भारत के साथ किस तरह की डील करने जा रहे हैं। हालांकि इसी माह के शुरुआत में CNN ने चीन के साथ ट्रेड डील को लेकर एक रिपोर्ट लिखी थी, जिसमें बताया था कि दोनों देश एक नया व्यापार समझौता करने के बेहद करीब हैं। यह डील अमेरिका के लिए ज्यादा फायदेमंद होने वाला है। इसी रिपोर्ट में यह भी बताया गया था कि भारत और अमेरिका भी ट्रेड डील पर चर्चा कर रहे हैं, लेकिन भारत और पाकिस्तान में सीजफायर कराने का जबरन श्रेय लेने के कारण भारत इस डील को धीमा कर दिया है। हालांकि ट्रंप के बयान से ऐसा लग रहा है कि दोनों देश इस डील के करीब पहुंच गए हैं।  Latest News in Hindi Today Hindi news Indo-US Trade Deal #donaldtrump #indiatradedeal #usindiarelations #chinaannouncement #trumplatestnews

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voter list update

बिहार चुनाव से पहले आयोग कर रहा वोटर लिस्ट की एसआईआर, मतदाताओं को दिखाने होंगे ये खास दस्तावेज

बिहार में इस साल के अंत तक होने वाले विधानसभा चुनाव (Bihar Assembly Elections) को लेकर एक तरफ जहां राजनीतिक पार्टियां अपनी तैयारी में जुटी हैं, तो वहीं दूसरी तरफ चुनाव आयोग भी अपनी तैयारी को पुख्ता कर रहा है। चुनाव आयोग (Election Commission) इस समय वोटर लिस्ट का विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) कर रहा है। इस दौरान चुनाव आयोग के कर्मचारी घर-घर जाकर मतदाताओं का सर्वे कर रहे हैं। इसके आधार पर ही वोटर लिस्ट में नए मतदाताओं को जोड़ने और फर्जी मतदाताओं को हटाने का कार्य किया जाएगा। एसआईआर (SIR) अभियान को लेकर बिहार के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के ऑफिस (Election Commission) द्वारा एक विस्तृत गाइडलाइन जारी की गई है। जिसमें बताया गया है कि ग्राउंड पर लिस्ट तैयार होने के बाद उसकी जांच बूथ लेवल अधिकारी (बीएलओ) करेंगे। इस दौरान मतदाताओं के वैध दस्तावेजों की जांच होगा, फिर लिस्ट की सत्यापन कर उसे वोटर लिस्ट में अपडेट किया जाएगा। इसके बाद लिस्ट में सुधार के लिए मतदाताओं को भी कुछ समय दिया जाएगा और फिर फाइनल लिस्ट जारी कर मतदान के चुनाव तारीखों (Bihar Assembly Elections) का ऐलान कर दिया जाएगा। चुनाव आयोग (Election Commission) द्वारा बिहार में मतदाता सूची का एसआईआर करीब 22 साल बाद किया जा रहा है। इससे पहले यह काम साल 2003 में किया गया था। ऐसे में मतदाताओं के मन में भी यह सवाल है कि चुनाव आयोग के कर्मचारी जब उनके घ्घर आएंगे तो उन्हें क्या-क्या दस्तावेज दिखाना होगा? 27 जुलाई तक होगा सत्यापन चुनाव आयोग के अनुसार एसआईआर (SIR) का कार्य शुरू हो गया है और यह अगले कुछ सप्ताह में पूरा हो जाएगा। इसके बाद बीएलओ 27 जुलाई तक मतदाताओं द्वारा दिए गए दस्तावेजों का सत्यापन करेंगे। एसआईआर के दौरान आयोग के कर्मचारी जब घर पहुंचेंगे तो हर वोटर को एक फॉर्म देंगे, जिसे उन्हें भरना होगा। मतदाता इस फॉर्म को भरकर अपने सभी डॉक्यूमेंट के साथ वापस बीएलओ को देंगे। अगर मतदाता चाहे तो इस फॉर्म को भरने के बाद उसे निर्वाचन विभाग की वेबसाइट पर ऑनलाइन भी अपलोड कर सकता है। आइये जानते हैं कि मतदाताओं को क्या-क्या दस्तावेज देना होगा।  1 जुलाई 1987 से पहले जन्म लेने वाले मतदाता जिन मतदाताओं का जन्म भारत में 1 जुलाई 1987 से पहले हुआ है, उन्हें अपनी जन्म तिथि और  स्थान की सत्यापन के लिए कोई भी एक वैध दस्तावेज देना होगा।  1987 से 2004 के बीच जन्में मतदाता जिन मतदाताओं का जन्म 1 जुलाई 1987 के बाद और 2 दिसंबर 2004 से पहले भारत में हुआ है, उन्हें अपने पहचान पत्र के साथ अपने माता-पिता में से भी किसी एक का पहचान पत्र देना होगा।  2 दिसंबर 2004 के बाद जन्मे मतदाता वहीं, जिन मतदाताओं (Election Commission) का जन्म 2 दिसंबर 2004 के बाद भारत में हुआ है उन्हें अपने साथ अपने माता-पिता (दोनों) का वैध दस्तावेज देना होगा। अगर माता-पिता में से कोई या फिर दोनों विदेशी नागरिक है, तो उसे अपने जन्म प्रमाण पत्र के साथ  विदेशी नागरिक के वैध पासपोर्ट और वीजा की सेल्फ अटेस्टेड प्रति भी जमा करनी होगी।  इसे भी पढ़ें:- गुजरात और पंजाब में आम आदमी पार्टी की जीत और 2027 के तूफान की आहट? चुनाव आयोग को देने होंगे ये दस्तावेज 1. आम मतदाता कोई भी वैध पहचान पत्र दे सकता है। वहीं केंद्र/राज्य सरकार के कर्मचारी अपने वेतन या पेंशन भुगतान आदेश की प्रति भी लगा सकते हैं।  2. सरकार द्वारा जारी 1 जुलाई 1987 से पहले जारी कोई भी पहचान पत्र/प्रमाण पत्र, स्थानीय निकाय, बैंक, पोस्ट ऑफिस, एलआईसी या पीएसयू द्वारा जारी कोई भी दस्तावेज मान्य होगा।  3. जन्म प्रमाण पत्र  4. विदेशी नागरिकों के लिए पासपोर्ट जरूरी  5. मान्यता प्राप्त किसी भी विश्वविद्यालय या बोर्ड द्वारा जारी शैक्षणिक प्रमाण पत्र या मैट्रिक का सर्टिफिकेट भी मान्य  6. केंद्र सरकार और राज्य सरकार की किसी संस्था द्वारा जारी मूल निवास प्रमाण पत्र मान्य है।  7. ओबीसी, एससी और एसटी का जाति प्रमाण पत्र 8. वन अधिकार प्रमाण पत्र 9. राज्य सरकार या किसी स्थानीय निकाय का फैमिली रजिस्टर में शामिल नाम का पत्र  10. सरकार द्वारा जारी किसी जमीन का या फिर घर का प्रमाण पत्र Latest News in Hindi Today Hindi news Election Commission #bihar2025 #voterlistupdate #elections2025 #voterverification #biharnews

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Shocking data breach!

Privacy Leaked for ₹99 via App, Mobile Numbers Exposed: इस ऐप पर आपकी प्राइवेसी की कीमत सिर्फ 99 रूपये है, मोबाइल नंबर से डिटेल्स हो रही हैं लीक

आज के डिजिटल युग में कुछ भी सेफ नहीं है। यदि आपको लगता है कि आपकी प्राइवेसी को कोई भेद नहीं सकता, तो यह आपकी सबसे बड़ी भूल है। कहने की जरूरत नहीं, आज के दौर में साइबर सुरक्षा सबसे बड़े संकट के रूप में देखी जा रही है। आपको जानकर हैरत होगी कि हालिया रिपोर्ट के मुताबिक सिर्फ किसी भी शख्स के मोबाइल नंबर के जरिये उसका नाम, पता, वैकल्पिक नंबर, और आधार कार्ड जैसी पहचान पत्र डिटेल्स महज कुछ सेकंड में ही प्राप्त की जा सकती है। वो भी महज 99 रुपए में। ये सच है, आपकी प्राइवेसी की कीमत सिर्फ 99 रुपए (Privacy Leaked for ₹99 via App, Mobile Numbers Exposed) है। यानी कि कोई भी चाहे तो सिर्फ 99 रुपये में आपकी निजी जानकारी हथिया सकता है। सोचनीय बात यह है कि आपको पता भी नहीं चलेगा कि कोई आपका डाटा सिर्फ 99 रूपये में खरीद ले रहा है। ऐसे में सबसे बड़ी चिंतावाली बात यह है कि आपके डेटा का इस्तेमाल यदि कोई अपराधी कर ले, तो वह फर्जी केवाईसी, बैंक लोन, फ्रॉड ट्रांजैक्शन कर सकता है। यही नहीं, वह आपकी पहचान का गलत इस्तेमाल भी कर सकता है। लोगों की प्राइवेसी को लेकर कई सवाल उठने लगे (Privacy Leaked for ₹99 via App, Mobile Numbers Exposed) हैं दरअसल, आपका यह डाटा टेलीग्राम बॉट बेच रहा है। जानकारी के मुताबिक टेलीग्राम बॉट लोगों की पर्सनल जानकारी को बेच रहा है। चौंका देने वाले हुए इस खुलासे से अब ऐप का इस्तेमाल करने वाले लोगों की प्राइवेसी को लेकर सवाल उठने लगे (Privacy Leaked for ₹99 via App, Mobile Numbers Exposed) हैं। बेशक रिपोर्ट ये सोचने पर मजबूर करती है कि क्या ऐप बनाने वाली कंपनी के पास डेटा वाकई सुरक्षित है भी या नहीं? वैसे तो ऐप्स यूजर्स की सेफ्टी और प्राइवेसी को लेकर बड़े-बड़े दावे करते हैं, लेकिन क्या वाकई में उनके दावों पर आँख मूंदकर यकीन किया जा सकता है? वो बात और है कि लोगों की सेफ्टी के लिए ऐप में टू स्टेप वेरिफिकेशन का फीचर दिया जाता है, लेकिन बड़ा सवाल वही कि क्या इस फीचर को ऑन करने के बाद भी आप डिजिटल दुनिया में सेफ हैं? हालिया रिपोर्ट्स की माने तो किसी व्यक्ति का मोबाइल नंबर डालने पर उसकी निजी जानकारी टेलीग्राम बॉट द्वारा उजागर की जा रही है।  बॉट यूजर्स की संवेदनशील जानकारी को लीक कर (Privacy Leaked for ₹99 via App, Mobile Numbers Exposed) रहा है मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक टेलीग्राम के पास एक ऐसा बॉट है, जो खरीदारों को भारतीय यूजर्स की संवेदनशील निजी डेटा को बेच रहा है। ये बॉट यूजर्स का नाम, पिता का नाम, पता, आधार नंबर, पैन कार्ड नंबर और वोटर आईडी नंबर जैसी जानकारी को लीक कर (Privacy Leaked for ₹99 via App, Mobile Numbers Exposed) रहा है। बॉट इन सभी जरूरी जानकारी को उपलब्ध कराने से पहले प्लान खरीदने के लिए कहता है। इसके प्लान की कीमत 99 रुपए से 4999 रुपए तक है। प्लान खरीदने के बाद ये बॉट खरीदार से 10 अंकों का मोबाइल नंबर भेजने के लिए कहता है। 10 अंकों का मोबाइल नंबर भेजते ही महज दो सेकंड के भीतर ये बॉट नंबर से जुड़ी व्यक्ति की पूरी प्रोफाइल डिटेल दे देता है। जिसमें नाम, ऑल्टरनेट फोन नंबर, पता और सारी डॉक्यूमेंट्स की डिटेल शामिल होती है।  गौर करनेवाली बात यह कि बॉट टेलीग्राम की एक प्रमुख विशेषता है। बॉट को कोई भी बना सकता है।  इसे भी पढ़ें:-  इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन पहुंचे शुभांशु शुक्‍ला, अब अंतरिक्ष में रहकर करेंगे रिसर्च  ऐसे में लाख टके का सवाल यह कि इससे (Privacy Leaked for ₹99 via App, Mobile Numbers Exposed) बचें कैसे?  Latest News in Hindi Today Hindi Privacy Leaked for ₹99 via App, Mobile Numbers Exposed #privacybreach #dataleak #mobileleak #cybersecurity #indiadata #techalert #privacyviolation #appsecurity

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magic mushroom depression

क्या जादुई मशरूम की सिर्फ एक खुराक से आ सकती है डिप्रेशन के लक्षणों में कमी

डिप्रेशन (Depression) या स्ट्रेस एक ऐसी समस्या है, जिससे बड़ी संख्या में आजकल लोग प्रभावित हैं। अन्य शब्दों में कहें तो आजकल यह समस्या आम है। इसका कारण खराब जीवनशैली और व्यस्त जीवन को माना जा सकता है। इस समस्या से राहत पाने के लिए सही आहार का सेवन करना, एक्सरसाइज करना और योगा आदि को फायदेमंद माना गया है। कुछ फूड से भी डिप्रेशन (Depression) की समस्या से आराम मिल सकता है। इन्हीं में से एक है एक तरह की मशरूम जिसे मैजिक मशरूम (Magic mushroom) के नाम से जाना जाता है। एक नई स्टडी यह बताती है जी कि मैजिक मशरूम (Magic mushroom) में पाया जाने वाला कंपाउंड स्ट्रेस और डिप्रेशन (Depression) के इलाज में फायदेमंद हो सकता है। आइए जानें इसके बारे में और अधिक। मैजिक मशरूम और डिप्रेशन में संबंध नई स्टडी के अनुसार मैजिक मशरूम (Magic mushroom) में पाए जाने वाले कंपाउंड सिलोसाइबिन (Psilocybin) की सिर्फ एक डोज डिप्रेशन (Depression) और स्ट्रेस के इलाज में प्रभावी है, खासतौर पर कैंसर के मरीजों में। यही नहीं यह भी पाया गया है कि इस डोज का प्रभाव रोगियों में दो साल से भी अधिक समय तक रहता है। यह स्टडी उन लोगों के लिए एक उम्मीद की किरण की तरह है, जो कैंसर से जूझ रहे हैं। ट्रायल यह बताते हैं की सिलोसाइबिन (Psilocybin) की एक डोज को थेरेपी के साथ लेने से इमोशनल डिस्ट्रेस कम हो सकता है। मैजिक मशरूम और डिप्रेशन में संबंध के बारे में की गयी स्टडी इस स्टडी में 28 कैंसर के रोगियों को एक डोज सिलोसाइबिन (Psilocybin) की दी गई और इसके साथ ही उन्हें साइकोलॉजिकल सपोर्ट भी दिया गया। दो साल के बाद इनमे से पचास प्रतिशत से भी अधिक लोगों में डिप्रेशन (Depression) की कमी पाई गई। यह भी पाया गया है कि लगभग पचास प्रतिशत लोगों में यह समस्या पूरी तरह से खत्म हो गयी है, जबकि लगभग 40 प्रतिशत लोगों में इसकी कमी पायी गई। अभी इसके बारे में स्टडी चल रही है और इसकी दो डोजेज की तुलना प्लेसबो से की जा रही है, जो एक नकली ट्रीटमेंट है जो वास्तव में कोई थेराप्यूटिक इफेक्ट नहीं डालता, लेकिन रोगी के मन पर इसका प्रभाव हो सकता है। इस मशरूम की डोज के बारे में की गई और अधिक स्टडी से यह पता चल सकता है कि क्या रोगी इसके इस्तेमाल से डिप्रेशन (Depression) और स्ट्रेस से राहत पा सकता है या नहीं। इसे भी पढ़ें:- भारत में जल्द ही लांच होगी वजन कम करने की यह दवा  क्या है मैजिक मशरूम (Magic mushroom)  मैजिक मशरूम (Magic mushroom) प्राकृतिक रूप से पाए जाने वाले मशरूम हैं, जो अपने हैलुसिनोजेनिक इफेक्ट्स के लिए जानी जाती हैं। इसका प्रमुख कंपाउंड है सिलोसाइबिन (Psilocybin)। जब इसका सेवन किया जाता है, तो सिलोसाइबिन (Psilocybin) शरीर में सिलोसिन में बदल जाता है जो एक साइकोएक्टिव केमिकल है। यह मशरूम आम मशरूम की तरह दिखती है। इसके कई इफेक्ट हो सकते हैं: कई देशों में मैजिक मशरूम (Magic mushroom) का इस्तेमाल पूरी तरह से इलीगल माना गया है। रीसर्चर इसके लाभों आदि पर अभी और शोध कर रहे हैं और इसके लाभों के बारे में अभी और अधिक रिसर्च की जानी बहुत जरूरी है। अगर इस पर किए जाने वाले शोधों का परिणाम सही रहता है, तो आने वाले समय में सिलोसाइबिन (Psilocybin) का इस्तेमाल कैंसर के रोगियों में डिप्रेशन (Depression) और स्ट्रेस के उपचार के लिए एक स्टैंडर्ड ट्रीटमेंट बन सकता है। नोट:- यहां दी गई जानकारी केवल रिसर्च के आधार पर दी गई है। लेकिन अगर आप किसी भी शारीरिक समस्या से परेशान हैं, तो अपने हेल्थ एक्सपर्ट से सलाह लेना न भूलें। Latest News in Hindi Today Hindi Psilocybin #magicmushroom #psilocybin #depressionrelief #mentalhealth #psychedelictherapy

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Khamenei statement

Khamenei Breaks Silence After Iran Ceasefire: सीजफायर के बाद ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई ने पहली बार चुप्पी तोड़ते हुए कही यह बात

ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई ने इजरायल के साथ लड़ाई में अपने देश की जीत का दावा (Khamenei Breaks Silence After Iran Ceasefire) किया है। जीत का दावा करते हुए खामेनेई ने कहा कि “ईरानी हमलों से इजरायल घुटनों पर आ गया और सीजफायर के लिए मजबूर हुआ।” गुरुवार को ईरानी सरकारी मीडिया में देश के नाम संदेश जारी खामेनेई ने कहा कि “मैं महान राष्ट्र ईरान और उसके लोगों को बधाई देता हूं। इजरायली सरकार अपने सभी शोर और दावों के बावजूद तेहरान के मिसाइल हमलों के सामने हार गया। हमने इस लड़ाई में उनको कुचल कर रख दिया है।” सरकारी मीडिया के मुताबिक फिलहाल  खामेनेई का छोटा वीडियो जारी किया गया है। उनका पूरा वीडियो संदेश बाद में जारी किया जाएगा। इस वीडियो में हमले को लेकर और भी जानकारी खामनेई देंगे और देश की रणनीति को सामने रखेंगे। ईरान के सुप्रीम लीडर ने पहली बार देश की जनता को संबोधित (Khamenei Breaks Silence After Iran Ceasefire) किया दरअसल, 24 जून को ईरान-इजराइल युद्ध में सीजफायर होने के बाद ईरान के सुप्रीम लीडर ने पहली बार देश की जनता को संबोधित (Khamenei Breaks Silence After Iran Ceasefire) किया है। उन्होंने अपने संबोधन में ईरान की जनता को जीत की बधाई दी। साथ ही कहा कि ईरान ने जायनी दुश्मन को ध्वस्त कर दिया है। इस संदेश से पहले ईरान के अधिकारियों के हवाले से न्यूयॉर्क टाइम्स ने रिपोर्ट की है कि इजराइल और अमेरिकी हमले से बचने के लिए सुरक्षाबल खामेनेई को तेहरान के एक सुरक्षित बंकर में ले गए थे। खामेनेई की ओर से सार्वजनिक बयान ना आने की वजह से लगातार कई सवाल उठ रहे थे। ऐसे में उनके संदेश से एक बात तो साफ़ जो गई है कि वो देश छोड़कर भागे नहीं हैं। अयातुल्ला अली खामेनेई का दावा है कि अमेरिका ने युद्ध में इसलिए प्रवेश किया क्योंकि उसे लगा कि अगर वह ऐसा नहीं करता तो इजरायल पूरी तरह से नष्ट हो जाता। खामेनेई ने यह भी कहा कि “यहां भी, इस्लामिक रिपब्लिक विजयी हुआ और बदले में अमेरिका के चेहरे पर जोरदार तमाचा मारा।” इजरायली हमलों में ईरान के कई शीर्ष सैन्य कमांडर और कई परमाणु वैज्ञानिकों की मौत हो (Khamenei Breaks Silence After Iran Ceasefire) गई थी 13 जून को इजरायल और ईरान के बीच लड़ाई तब शुरू हुई जब इजरायल ने ईरान पर यकायक ताबड़तोड़ हवाई हमले शुरू कर दिए। इन हमलों में ईरान के कई शीर्ष सैन्य कमांडर और कई परमाणु वैज्ञानिकों की मौत हो (Khamenei Breaks Silence After Iran Ceasefire) गई थी। इसके बाद ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई का ऐलान किया और इजरायल पर मिसाइल से हमले शुरू कर दिए। 12 दिन तक दोनों के बीच भीषण लड़ाई देखने मिली। इस बीच 22 जून को इस लड़ाई में अमेरिका भी कूद गया। अमेरिका ने इजरायल के समर्थन में ईरान के परमाणु ठिकानों पर हमले किए थे। इसमें अमेरिका ने बंकर बस्टर बमों का इस्तेमाल किया और ईरान की तीन न्यूक्लियर साइट को तबाह कर देने का दावा किया। इसके बाद ईरान ने कतर में अमेरिकी एयरबेस पर भी 14 मिसाइलें दाग दीं। इसे भी पढ़ें:- अमेरिकी बमों से नष्ट नहीं हुए ईरानी परमाणु ठिकानें, पेंटागन के खुफिया रिपोर्ट से हुआ चौंकाने वाला बड़ा खुलासा राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अचानक ईरान और इजरायल के बीच संघर्ष विराम का ऐलान (Khamenei Breaks Silence After Iran Ceasefire) किया जारी इस लड़ाई के बीच 24 जून को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अचानक ईरान और इजरायल के बीच संघर्ष विराम का ऐलान किया। पहले तो इजरायल और ईरान ने शुरू में सीजफायर पर सहमति ना बनने के बात कही, लेकिन बाद में दोनों देशों ने इसे मान लिया। गौरतलब हो कि 24 जून को सुप्रीम लीडर ने कहा था कि जो लोग ईरानी लोगों और उनके इतिहास को जानते (Khamenei Breaks Silence After Iran Ceasefire) हैं, वे जानते हैं कि ईरानी राष्ट्र आत्मसमर्पण करने वाला राष्ट्र नहीं है।” दरअसल, ये ट्रंप के उस धमकी का जवाब था जिसमें कहा गया था कि “ईरान बिनाशर्त सरेंडर करे। मजे की बात यह कि सीजफायर के बाद अमेरिका, इजरायल और ईरान की ओर से अपने-अपने दावे किए जा रहे हैं।  Latest News in Hindi Today Hindi Khamenei Breaks Silence After Iran Ceasefire #khamenei #iran #ceasefire #iranisupremeleader #irannews #middleeast #iranisraelconflict #breakingnews

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