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CJP की बैठक के लिए दिल्ली में हॉल नहीं मिला? अभिजीत दीपके का गंभीर आरोप, BJP पर लगाया दबाव बनाने का दावा

नई दिल्ली: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने दिल्ली में पार्टी की प्रस्तावित बैठक के लिए हॉल नहीं मिलने को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। दीपके का दावा है कि पार्टी ने कई जगहों पर हॉल की तलाश की, लेकिन कई संचालकों ने कथित तौर पर “ऊपर से दबाव” होने की बात कहते हुए जगह देने से इनकार कर दिया। उनका आरोप है कि आखिरकार जिस हॉल को बुक किया गया था, उसके मालिक को भी कथित तौर पर धमकी दी गई। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल नहीं हुई है। करीब 10 जगहों पर तलाशने का दावा अभिजीत दीपके के अनुसार, CJP को 12 अगस्त को दिल्ली में अपने वॉलंटियर्स की बैठक करनी थी। इसके लिए पार्टी की ओर से कई स्थानों पर हॉल तलाशे गए। दीपके का कहना है कि करीब 10 जगहों पर संपर्क करने के बावजूद उन्हें हॉल नहीं मिला। उनके मुताबिक, कुछ हॉल मालिकों ने कथित तौर पर कहा कि उन पर “ऊपर से दबाव” है। बुकिंग के बाद भी रद्द हुई बैठक दीपके ने दावा किया कि काफी कोशिशों के बाद आखिरकार एक हॉल बुक किया गया और उसके लिए भुगतान भी किया गया। उनके पास बुकिंग की रसीद होने की बात भी उन्होंने कही। हालांकि, उनका आरोप है कि बैठक से ठीक पहले हॉल मालिक को कथित तौर पर धमकी भरे फोन आए और इसके बाद बैठक आयोजित करने में परेशानी खड़ी हो गई। “उल्टा लटका दिया जाएगा” का लगाया आरोप CJP संस्थापक ने आरोप लगाया कि हॉल मालिक को धमकी दी गई कि अगर वहां CJP की बैठक होने दी गई तो उसे “उल्टा लटका दिया जाएगा।” दीपके ने इन कथित धमकियों के पीछे भाजपा का हाथ होने का आरोप लगाया है। हालांकि, उपलब्ध रिपोर्टों में भाजपा की ओर से इस आरोप का कोई आधिकारिक जवाब सामने नहीं आया है। दीपके बोले—धमकियों से नहीं डरेंगे अभिजीत दीपके ने कहा कि इस तरह की कथित धमकियों से CJP के कार्यकर्ता पीछे नहीं हटेंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि अगर किसी राजनीतिक संगठन की सामान्य बैठक के लिए निजी स्थान उपलब्ध कराने वालों पर दबाव बनाया जा रहा है, तो यह लोकतांत्रिक माहौल को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है। उन्होंने यह भी दावा किया कि पार्टी की गतिविधियों को रोकने की कोशिशों के बावजूद CJP अपने कार्यक्रम जारी रखेगी। CJP ने दिल्ली पुलिस पर भी उठाए सवाल CJP के राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष रांका ने भी मामले को लेकर दिल्ली पुलिस पर सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि यदि हॉल मालिकों को धमकियां दी गईं, तो पुलिस इस मामले में क्या कार्रवाई कर रही है। रांका ने दिल्ली की कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए यह भी पूछा कि क्या दिल्ली पुलिस केवल भाजपा के लिए काम कर रही है। फिलहाल दिल्ली पुलिस की ओर से इन आरोपों पर आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। “जंतर-मंतर सीजन-2” का ऐलान हॉल विवाद के बीच अभिजीत दीपके ने CJP के आंदोलन को लेकर भी बड़ा संकेत दिया है। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर लोग लगातार पूछ रहे हैं कि “जंतर-मंतर सीजन-2” कब शुरू होगा। दीपके ने दावा किया कि इसका दूसरा चरण जल्द शुरू किया जाएगा। इससे संकेत मिलता है कि CJP आने वाले दिनों में दिल्ली में फिर से सार्वजनिक आंदोलन शुरू करने की तैयारी कर रही है। देशभर में ‘लिसनिंग टूर’ की भी तैयारी CJP के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास ने बताया कि पार्टी अब देशभर में ‘लिसनिंग टूर’ शुरू करने की तैयारी कर रही है। इसका उद्देश्य अलग-अलग क्षेत्रों में जाकर लोगों की समस्याओं और सुझावों को सुनना बताया गया है। पार्टी ने शिक्षा को प्रमुख मुद्दा बताते हुए सरकारी स्कूलों की स्थिति को लेकर सोशल ऑडिट और स्थानीय समस्याओं को रिकॉर्ड करने की अपील भी की है। आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि हॉल मालिकों को धमकी देने और भाजपा की ओर से दबाव बनाए जाने के आरोप फिलहाल CJP और अभिजीत दीपके की ओर से लगाए गए हैं। उपलब्ध रिपोर्टों में इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। भाजपा और दिल्ली पुलिस की आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आने के बाद ही मामले की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी। निष्कर्ष दिल्ली में CJP की प्रस्तावित बैठक के लिए हॉल बुकिंग को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। अभिजीत दीपके ने आरोप लगाया है कि कई हॉल मालिकों पर दबाव बनाया गया और बुक किए गए हॉल के मालिक को भी कथित तौर पर धमकी दी गई। मामले ने अब राजनीतिक रंग ले लिया है। जहां CJP ने इसे दबाव और लोकतांत्रिक अधिकारों से जोड़कर सवाल उठाए हैं, वहीं भाजपा और दिल्ली पुलिस की आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है। इसी बीच CJP ने “जंतर-मंतर सीजन-2” और देशव्यापी ‘लिसनिंग टूर’ की तैयारी का संकेत दिया है। Source: अमर उजाला / जनसत्ता / NDTV / आजतक रिपोर्ट्स जय राष्ट्र न्यूज़

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जय की ‘पसंदीदा’ तृषा को डिप्टी CM कब बनाएंगे? AIADMK नेता का तंज, सियासत गरम

चेन्नई: तमिलनाडु की राजनीति में अभिनेता से नेता बने विजय को लेकर AIADMK नेता आरबी उदयकुमार की एक टिप्पणी चर्चा में है। उन्होंने तंज कसते हुए सवाल किया कि आखिर विजय की कथित “पसंदीदा” अभिनेत्री तृषा कृष्णन को डिप्टी मुख्यमंत्री कब बनाया जाएगा। यह बयान तमिलनाडु की मौजूदा राजनीतिक बयानबाजी के बीच सामने आया है। AIADMK नेता ने विजय पर साधा निशाना AIADMK नेता आरबी उदयकुमार ने पार्टी कार्यक्रम के दौरान विजय पर निशाना साधते हुए तृषा का नाम लिया। उन्होंने कटाक्ष करते हुए पूछा कि तमिलनाडु को यह देखना बाकी है कि विजय की “प्रिय” तृषा को डिप्टी मुख्यमंत्री कब बनाया जाएगा। उनकी टिप्पणी को विजय की राजनीति और उनके निजी जीवन से जुड़े सार्वजनिक चर्चाओं पर राजनीतिक हमला माना जा रहा है। तृषा का नाम लेकर क्यों किया गया तंज? तृषा कृष्णन और विजय दोनों तमिल फिल्म इंडस्ट्री के जाने-माने चेहरे हैं और दोनों कई फिल्मों में साथ नजर आ चुके हैं। इसी सार्वजनिक पहचान का इस्तेमाल करते हुए AIADMK नेता ने विजय पर राजनीतिक कटाक्ष किया। हालांकि, तृषा को डिप्टी मुख्यमंत्री बनाए जाने की बात किसी आधिकारिक नियुक्ति या प्रस्ताव के रूप में सामने नहीं आई है। यह टिप्पणी राजनीतिक तंज के तौर पर की गई थी। विजय अब तमिलनाडु के मुख्यमंत्री हैं 2026 के विधानसभा चुनाव के बाद विजय के नेतृत्व वाली Tamilaga Vettri Kazhagam (TVK) सत्ता में आई और विजय ने 10 मई 2026 को तमिलनाडु के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। विजय के सत्ता में आने के बाद तमिलनाडु की राजनीति में नई राजनीतिक परिस्थितियां बनी हैं। AIADMK और DMK जैसे पुराने राजनीतिक दल अब TVK सरकार को लेकर लगातार प्रतिक्रिया दे रहे हैं। डिप्टी CM का पद अभी खाली मौजूदा विधानसभा व्यवस्था के अनुसार तमिलनाडु में डिप्टी मुख्यमंत्री का पद फिलहाल खाली है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक विजय सरकार में इस पद पर अभी किसी व्यक्ति की नियुक्ति नहीं हुई है। इसी राजनीतिक स्थिति के बीच AIADMK नेता की तृषा को लेकर की गई टिप्पणी ने सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में चर्चा बढ़ा दी है। तमिलनाडु की राजनीति में बढ़ी बयानबाजी विजय के मुख्यमंत्री बनने के बाद AIADMK और TVK के बीच राजनीतिक दूरी और बयानबाजी लगातार चर्चा में है। हाल ही में AIADMK ने विजय द्वारा बुलाई गई सर्वदलीय सांसद बैठक से भी दूरी बनाई थी। बैठक का मुद्दा लोकसभा सीटों के परिसीमन से जुड़ा था। ऐसे माहौल में AIADMK नेताओं की ओर से विजय पर किए जा रहे राजनीतिक हमले राज्य की बदलती सियासत को दर्शाते हैं। विजय सरकार के सामने कई राजनीतिक चुनौतियां मुख्यमंत्री के तौर पर विजय के सामने सरकार चलाने के साथ-साथ विधानसभा में राजनीतिक संतुलन बनाए रखने की चुनौती भी है। 2026 के चुनाव के बाद TVK सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी थी और बाद में सहयोगी दलों के समर्थन से सरकार बनी। अब सरकार के सामने प्रशासन, परिसीमन और विपक्ष के साथ राजनीतिक टकराव जैसे कई मुद्दे हैं। निष्कर्ष तमिलनाडु की राजनीति में AIADMK नेता आरबी उदयकुमार का विजय और तृषा को लेकर किया गया तंज चर्चा में आ गया है। उन्होंने सवाल किया कि विजय की “पसंदीदा” तृषा को डिप्टी मुख्यमंत्री कब बनाया जाएगा। हालांकि, यह स्पष्ट करना जरूरी है कि तृषा को डिप्टी मुख्यमंत्री बनाने का कोई आधिकारिक प्रस्ताव सामने नहीं आया है और यह बयान राजनीतिक कटाक्ष के रूप में दिया गया है। Source: NDTV / Navbharat Times / Latest political reports जय राष्ट्र न्यूज़

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सोनम वांगचुक का सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप, बोले—“तस्वीरें सार्वजनिक न करने का वादा तोड़ा”

नई दिल्ली: सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने केंद्र सरकार के कुछ मंत्रियों पर वादा तोड़ने और उनका भरोसा तोड़ने का आरोप लगाया है। वांगचुक के मुताबिक, 26 दिन के अनशन को खत्म करने के दौरान हुई बातचीत में यह सहमति बनी थी कि उनके अनशन समाप्त करने की तस्वीरें तब तक सार्वजनिक नहीं की जाएंगी, जब तक पूरे घटनाक्रम में विपक्ष और छात्र प्रतिनिधियों की भागीदारी को भी शामिल नहीं किया जाता। उनका आरोप है कि इसके बावजूद तस्वीरें सार्वजनिक कर दी गईं। 26 दिन के अनशन के बाद खत्म हुआ आंदोलन सोनम वांगचुक ने 26 दिनों तक चले अनशन के बाद अपना अनशन समाप्त किया था। रिपोर्टों के मुताबिक, यह घटनाक्रम गुरुग्राम के एक अस्पताल में हुआ, जहां केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह के साथ उनकी बातचीत हुई थी। वांगचुक का कहना है कि अनशन खत्म करने का फैसला बातचीत और सरकार की ओर से दिए गए आश्वासनों के बाद लिया गया था। तस्वीरें सार्वजनिक करने को लेकर विवाद वांगचुक ने दावा किया कि बैठक के दौरान इस बात पर स्पष्ट सहमति बनी थी कि उनके अनशन खत्म करने या मंत्रियों के साथ हुई बैठक की तस्वीरें तुरंत सार्वजनिक नहीं की जाएंगी। उनके अनुसार, तस्वीरें तभी जारी की जानी थीं जब इस पूरे घटनाक्रम को केवल सरकार की उपलब्धि के तौर पर पेश करने के बजाय विपक्षी नेताओं और छात्र प्रतिनिधियों की भागीदारी भी दिखाई जाए। लेकिन वांगचुक का आरोप है कि तस्वीरें इससे पहले ही जारी कर दी गईं। “भरोसा टूट गया” वांगचुक ने इस घटनाक्रम पर निराशा जताते हुए कहा कि इस तरह तस्वीरें जारी किए जाने से उनका सरकार और राजनीतिक नेतृत्व पर भरोसा प्रभावित हुआ है। उन्होंने इसे सिर्फ तस्वीरों का मामला नहीं, बल्कि आपसी सहमति और विश्वास का सवाल बताया। उनके मुताबिक, यदि किसी बातचीत में कोई शर्त तय होती है तो दोनों पक्षों को उसका सम्मान करना चाहिए। सरकार, विपक्ष और छात्रों की भागीदारी चाहते थे वांगचुक वांगचुक के अनुसार, लद्दाख में जब सरकार प्रदर्शनकारियों की मांगों को स्वीकार करती है, तो आमतौर पर सरकारी प्रतिनिधि प्रदर्शनकारी को जूस या सूप पिलाकर अनशन समाप्त करवाते हैं। उनका कहना है कि इस बार भी प्रक्रिया ऐसी हो सकती थी, लेकिन इसे केवल सत्तारूढ़ पक्ष की उपलब्धि के रूप में प्रस्तुत करने के बजाय सभी पक्षों की भागीदारी दिखाई जानी चाहिए थी। सरकार से लिखित आश्वासन पूरा करने की मांग वांगचुक इससे पहले भी सरकार से उन लिखित आश्वासनों को पूरा करने की मांग कर चुके हैं, जिनके बाद उन्होंने अपना आंदोलन समाप्त किया था। उन्होंने प्रदर्शन में शामिल छात्रों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई नहीं करने के आश्वासन को भी पूरा करने की अपील की है। साथ ही उन्होंने प्रदर्शन के दौरान जान गंवाने वाले छात्रों के परिवारों के लिए मुआवजे की मांग भी उठाई थी। मुद्दा अब राजनीतिक बहस में भी पहुंचा तस्वीरों को लेकर वांगचुक के आरोप के बाद यह मामला राजनीतिक चर्चा में आ गया है। जहां वांगचुक इसे भरोसे और वादे का मुद्दा बता रहे हैं, वहीं पूरे घटनाक्रम को लेकर सरकार की ओर से सामने आने वाली आधिकारिक प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण होगी। फिलहाल उपलब्ध रिपोर्टों में तस्वीरें जारी किए जाने और वांगचुक के आरोप का विवरण सामने आया है, लेकिन दोनों पक्षों के बीच हुई बातचीत की पूरी रिकॉर्डिंग या लिखित सहमति का विस्तृत सार्वजनिक विवरण सामने नहीं आया है। निष्कर्ष सोनम वांगचुक ने केंद्र सरकार के मंत्रियों पर वादाखिलाफी और भरोसा तोड़ने का आरोप लगाया है। उनका दावा है कि 26 दिन का अनशन खत्म करने के दौरान तस्वीरें सार्वजनिक न करने पर सहमति बनी थी, लेकिन इसके बावजूद तस्वीरें जारी कर दी गईं। अब नजर इस बात पर है कि सरकार इस आरोप पर क्या आधिकारिक जवाब देती है और वांगचुक द्वारा उठाए गए अन्य आश्वासनों पर आगे क्या कार्रवाई होती है। Source: India Today / The Lallantop / Prabhat Khabar / ANI reports जय राष्ट्र न्यूज़

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मतदाता सूची से मेरा नाम गायब!” प्रकाश राज का दावा, चुनाव अधिकारियों ने दिया स्पष्टीकरण

बेंगलुरु: अभिनेता और पूर्व लोकसभा उम्मीदवार प्रकाश राज ने दावा किया है कि कर्नाटक में चल रही Special Intensive Revision (SIR) प्रक्रिया के दौरान बेंगलुरु की मतदाता सूची से उनका नाम गायब हो गया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर इसे लेकर सवाल उठाए और कहा कि वह उन मतदाताओं में शामिल हैं जिनका नाम सूची से हट गया है। हालांकि, चुनाव अधिकारियों की ओर से इस मामले में स्पष्टीकरण सामने आया है। बेंगलुरु सेंट्रल सिटी कॉरपोरेशन के मुताबिक प्रकाश राज का नाम मतदाता सूची से डिलीट नहीं किया गया है, बल्कि सत्यापन के दौरान उन्हें उनके पुराने पते से “Shifted” के रूप में दर्ज किया गया है। प्रकाश राज ने वीडियो जारी कर उठाए सवाल प्रकाश राज ने मंगलवार को सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा करते हुए दावा किया कि SIR प्रक्रिया के बाद बेंगलुरु की मतदाता सूची में उनका नाम नहीं दिख रहा है। उन्होंने कहा कि उनका जन्म इसी निर्वाचन क्षेत्र में हुआ, उन्होंने यहीं पढ़ाई की और थिएटर से अपने करियर की शुरुआत भी यहीं की। उन्होंने यह भी बताया कि वह 2019 में बेंगलुरु सेंट्रल लोकसभा सीट से निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ चुके हैं। उन्होंने अपने वीडियो में सवाल किया कि मतदाता सूची में अपना नाम वापस दर्ज कराने के लिए उन्हें अब कौन-कौन से दस्तावेज जमा करने होंगे। चुनाव अधिकारियों ने क्या कहा? मामले में बेंगलुरु सेंट्रल सिटी कॉरपोरेशन ने स्पष्ट किया कि प्रकाश राज का नाम डिलीट नहीं किया गया है। अधिकारियों के अनुसार, SIR के दौरान बूथ लेवल अधिकारियों (BLOs) द्वारा घर-घर सत्यापन किया गया। इस प्रक्रिया में यह पाया गया कि प्रकाश राज अपने पुराने पते पर अब नहीं रह रहे हैं। इसके बाद उनके रिकॉर्ड को “Shifted” के तौर पर चिह्नित किया गया। पुराने पते पर दर्ज था नाम अधिकारियों के मुताबिक 16 जून 2026 को SIR के लिए मतदाता सूची का डेटा फ्रीज किए जाने के समय प्रकाश राज का नाम 163-शांतिनगर विधानसभा क्षेत्र के एक पते पर दर्ज था। BLO के सत्यापन में उनके पुराने पते पर स्थायी रूप से स्थानांतरित होने की जानकारी मिलने के बाद रिकॉर्ड में बदलाव किया गया। इसका मतलब यह है कि चुनाव अधिकारियों के स्पष्टीकरण के अनुसार मामला मतदाता का नाम पूरी तरह समाप्त करने का नहीं, बल्कि पते में बदलाव/स्थानांतरण की स्थिति दर्ज करने का है। SIR प्रक्रिया के बीच सामने आया मामला कर्नाटक में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR की प्रक्रिया चल रही है। इस प्रक्रिया के दौरान BLOs घर-घर जाकर मतदाताओं के विवरण का सत्यापन कर रहे हैं। राज्य में बड़ी संख्या में मतदाताओं को ASDDO—Absent, Shifted, Duplicate, Dead and Others जैसी श्रेणियों में चिह्नित किया गया है। हालांकि किसी मतदाता का ASDDO श्रेणी में होना अपने आप में अंतिम रूप से मतदाता सूची से नाम हटने के बराबर नहीं है। प्रकाश राज ने सरकार पर साधा निशाना प्रकाश राज ने अपने बयान में सरकार पर सीधे तौर पर निशाना साधते हुए सवाल किया कि क्या सत्ता में बैठे लोग ऐसे नागरिकों को मतदान से रोक सकते हैं जो उन्हें दोबारा सत्ता में नहीं चुनना चाहते। उन्होंने अपने अंदाज में कहा कि वोट देने के अधिकार को प्रभावित करने की कोशिश की जा सकती है, लेकिन लोगों को सत्ता से हटाने से नहीं रोका जा सकता। उनके बयान के बाद यह मामला राजनीतिक बहस में भी आ गया है। 2019 में चुनाव लड़ चुके हैं प्रकाश राज प्रकाश राज का बेंगलुरु से राजनीतिक जुड़ाव पुराना है। उन्होंने 2019 लोकसभा चुनाव में बेंगलुरु सेंट्रल से निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ा था। इसी राजनीतिक पृष्ठभूमि का हवाला देते हुए उन्होंने मतदाता सूची में अपने नाम की स्थिति पर सवाल उठाया है। SIR की प्रक्रिया अभी जारी कर्नाटक में SIR प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है। उपलब्ध कार्यक्रम के अनुसार घर-घर सत्यापन का चरण 17 अगस्त तक चलेगा। इसके बाद 24 अगस्त को ड्राफ्ट मतदाता सूची प्रकाशित की जानी है। ड्राफ्ट सूची पर दावे और आपत्तियां दर्ज कराने का अवसर 24 अगस्त से 23 सितंबर तक रहेगा। इसके बाद प्रक्रिया पूरी होने पर 27 अक्टूबर 2026 को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित की जानी है। नाम को लेकर आगे क्या होगा? प्रकाश राज के मामले में चुनाव अधिकारियों के स्पष्टीकरण के बाद अब मुख्य मुद्दा उनके मतदाता रिकॉर्ड को सही पते पर अपडेट करने का है। यदि किसी मतदाता का नाम या पता गलत तरीके से दर्ज हुआ है, तो SIR की निर्धारित प्रक्रिया के तहत संबंधित व्यक्ति दावा या आपत्ति दर्ज कर सकता है और आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध करा सकता है। निष्कर्ष प्रकाश राज ने दावा किया कि SIR प्रक्रिया के दौरान बेंगलुरु की मतदाता सूची से उनका नाम गायब हो गया, जिसके बाद उन्होंने चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाए। हालांकि, चुनाव अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि उनका नाम डिलीट नहीं किया गया, बल्कि BLO के सत्यापन के बाद पुराने पते से “Shifted” के रूप में दर्ज किया गया है। अब SIR प्रक्रिया के अगले चरण में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रकाश राज का मतदाता रिकॉर्ड किस तरह अपडेट होता है। साथ ही, ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी होने के बाद वह अपने रिकॉर्ड को लेकर दावा या आपत्ति दर्ज करा सकते हैं। Source: Bengaluru Central City Corporation / Election-related reports / Latest reports जय राष्ट्र न्यूज़

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संसद में ‘मंगल मिलन’! PM मोदी समेत NDA नेताओं ने लहराया तिरंगा, एकजुटता का दिया संदेश

नई दिल्ली: संसद के मानसून सत्र के बीच मंगलवार को NDA संसदीय दल की ‘मंगल मिलन’ बैठक आयोजित हुई। संसद भवन परिसर में हुई इस बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत NDA के कई सांसद और केंद्रीय मंत्री शामिल हुए। बैठक के दौरान नेताओं ने हाथों में तिरंगा लहराकर देशभक्ति और गठबंधन की एकजुटता का संदेश दिया। PM मोदी का हुआ जोरदार स्वागत ‘मंगल मिलन’ बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पहुंचने पर NDA सांसदों और केंद्रीय मंत्रियों ने उनका स्वागत किया। इस दौरान ‘वंदे मातरम्’ और ‘भारत माता की जय’ जैसे देशभक्ति के नारे भी लगाए गए। बैठक का उद्देश्य संसद सत्र के दौरान NDA के घटक दलों और सांसदों के बीच बेहतर समन्वय और एकजुटता बनाए रखना है। नेताओं ने हाथों में थामा तिरंगा बैठक की सबसे खास तस्वीरें उस समय सामने आईं जब PM मोदी और NDA के कई नेताओं ने तिरंगा हाथों में लेकर एक साथ अपनी एकजुटता प्रदर्शित की। तिरंगा लहराते नेताओं के वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहे हैं। संसद भवन परिसर में हुआ कार्यक्रम यह ‘मंगल मिलन’ कार्यक्रम संसद भवन परिसर के GMC Balayogi Auditorium में आयोजित किया गया। NDA की ऐसी बैठकें संसद सत्र के दौरान गठबंधन के सांसदों के बीच संवाद और रणनीतिक समन्वय के लिए आयोजित की जाती हैं। NDA की एकजुटता पर जोर बैठक में तिरंगा लेकर एक साथ खड़े होना राजनीतिक तौर पर भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। NDA नेतृत्व की ओर से लगातार गठबंधन की एकजुटता और सरकार के एजेंडे को लेकर सांसदों के बीच समन्वय पर जोर दिया जाता रहा है। संसद के मानसून सत्र में विभिन्न मुद्दों को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच लगातार बहस और राजनीतिक टकराव देखने को मिल रहा है। ऐसे समय में NDA सांसदों का यह सामूहिक कार्यक्रम गठबंधन की एकता दिखाने वाला संदेश माना जा रहा है। ‘वंदे मातरम्’ के नारों से गूंजा परिसर कार्यक्रम के दौरान देशभक्ति के नारों से माहौल उत्साहपूर्ण नजर आया। रिपोर्टों के अनुसार NDA सांसदों ने ‘वंदे मातरम्’ और ‘भारत माता की जय’ के नारे लगाए। तिरंगा लहराने की तस्वीरों ने कार्यक्रम को और खास बना दिया और इसकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर चर्चा में आ गईं। संसद सत्र के बीच राजनीतिक गतिविधियां तेज मानसून सत्र के दौरान संसद में कई मुद्दों पर लगातार हंगामा और राजनीतिक बयानबाजी हो रही है। विपक्ष सरकार से विभिन्न मुद्दों पर जवाब मांग रहा है, जबकि NDA सांसद सरकार की नीतियों और उपलब्धियों को लेकर अपना पक्ष रख रहे हैं। ऐसे माहौल में NDA की ‘मंगल मिलन’ बैठक को सांसदों के बीच समन्वय और रणनीति मजबूत करने के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। निष्कर्ष संसद भवन परिसर में हुई NDA की ‘मंगल मिलन’ बैठक में PM नरेंद्र मोदी समेत गठबंधन के कई नेताओं ने तिरंगा लहराकर एकजुटता और देशभक्ति का संदेश दिया। ‘वंदे मातरम्’ और ‘भारत माता की जय’ के नारों के बीच हुए इस कार्यक्रम की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा में हैं। Source: DD News / News On AIR / Economic Times जय राष्ट्र न्यूज़

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“शिक्षा शेरनी का दूध है, लेकिन आरक्षण कुतिया का वो दूध है…” — आचार्य सूर्य सागर जी

आचार्य सूर्य सागर जी का एक कथित बयान सोशल मीडिया पर चर्चा में है, जिसमें उन्होंने शिक्षा और आरक्षण की तुलना करते हुए बेहद आपत्तिजनक और विवादित भाषा का इस्तेमाल किया है। उनके बयान को लेकर सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कुछ लोग इसे आरक्षण व्यवस्था पर टिप्पणी बता रहे हैं, जबकि कई लोगों ने इस तरह की भाषा और तुलना पर आपत्ति जताई है। नोट: यह कथन आचार्य सूर्य सागर जी के नाम से सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रहा है। इसके मूल वीडियो और संदर्भ की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है। #AcharyaSuryaSagar#Reservation#Education#SocialJustice#ControversialStatement BreakingNews JayRashtraNews

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“राहुल गांधी किसी भी जन्म में प्रधानमंत्री नहीं बन सकते!”—साक्षी महाराज का विवादित बयान, सियासत गरमाई

उन्नाव: भारतीय जनता पार्टी (BJP) के उन्नाव से सांसद साक्षी महाराज ने कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी को लेकर विवादित बयान दिया है। हाल ही में मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने राहुल गांधी की प्रधानमंत्री बनने की संभावना पर सवाल उठाते हुए कहा कि “राहुल गांधी किसी भी जन्म में प्रधानमंत्री नहीं बन सकते।” उनके इस बयान के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। राहुल गांधी के PM बनने पर साक्षी महाराज का बड़ा दावा साक्षी महाराज ने राहुल गांधी के राजनीतिक भविष्य पर टिप्पणी करते हुए कहा कि राहुल गांधी एक बड़े राजनीतिक परिवार से आते हैं और उन्हें बचपन से ही प्रधानमंत्री बनने की बात बताई जाती रही है। उन्होंने दावा किया कि राहुल गांधी को सत्ता की विरासत मिलने की उम्मीद रही है, लेकिन वह किसी भी जन्म में देश के प्रधानमंत्री नहीं बन सकते। यह बयान अब राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया है। राहुल गांधी की राजनीतिक विरासत पर निशाना बीजेपी सांसद ने राहुल गांधी के परिवार और उनकी राजनीतिक पृष्ठभूमि को लेकर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी ऐसे परिवार में पैदा हुए हैं जहां राजनीति और सत्ता लंबे समय से मौजूद रही है। साक्षी महाराज का यह हमला ऐसे समय आया है जब संसद में सरकार और विपक्ष के बीच कई मुद्दों को लेकर लगातार टकराव चल रहा है। जंतर-मंतर छात्र आंदोलन पर भी बोले साक्षी महाराज साक्षी महाराज ने सिर्फ राहुल गांधी पर ही हमला नहीं किया, बल्कि जंतर-मंतर पर हुए छात्र आंदोलन को लेकर भी विपक्ष पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि आंदोलन में कुछ ऐसे तत्व शामिल थे जिनकी भूमिका की जांच होनी चाहिए। उन्होंने आंदोलन में कथित विदेशी हाथ और फंडिंग की जांच की मांग भी उठाई। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि सामने नहीं आई है। पुलिस कार्रवाई और आंदोलन को लेकर भी बयान छात्र आंदोलन के दौरान पुलिस कार्रवाई को लेकर उठ रहे सवालों पर साक्षी महाराज ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई का बचाव करते हुए कहा कि पुलिसकर्मियों पर भी पथराव और हमले हुए थे। उन्होंने आंदोलन में शामिल लोगों की भूमिका को लेकर जांच की जरूरत बताई और कहा कि पूरे मामले की सच्चाई सामने आनी चाहिए। सोनम वांगचुक के बयान का भी किया जिक्र साक्षी महाराज ने सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के एक कथित बयान का उल्लेख करते हुए दावा किया कि आंदोलन में बड़ी संख्या में ऐसे लोग शामिल थे जो वास्तविक छात्र नहीं थे। हालांकि, इस संबंध में भी साक्षी महाराज द्वारा किए गए दावों को स्वतंत्र रूप से सत्यापित किए बिना तथ्य के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। बयान के बाद सोशल मीडिया पर चर्चा साक्षी महाराज का राहुल गांधी को लेकर दिया गया बयान सोशल मीडिया पर भी तेजी से चर्चा में आया। उनके बयान के वीडियो और छोटे क्लिप सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर शेयर किए जा रहे हैं। समर्थक इसे राहुल गांधी पर राजनीतिक तंज बता रहे हैं, जबकि विरोधी इसे व्यक्तिगत और गैर-जिम्मेदाराना टिप्पणी बता रहे हैं। संसद में पहले से जारी है राजनीतिक टकराव राहुल गांधी और केंद्र सरकार के बीच राजनीतिक टकराव लगातार चर्चा में रहता है। संसद में छात्र प्रदर्शन, परीक्षा व्यवस्था और पुलिस कार्रवाई जैसे मुद्दों को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने हैं। ऐसे माहौल में साक्षी महाराज की यह टिप्पणी राजनीतिक बयानबाजी को और तेज करने वाली मानी जा रही है। निष्कर्ष बीजेपी सांसद साक्षी महाराज के “राहुल गांधी किसी भी जन्म में प्रधानमंत्री नहीं बन सकते” वाले बयान ने राजनीतिक बहस को गर्म कर दिया है। उन्होंने राहुल गांधी की राजनीतिक विरासत और प्रधानमंत्री बनने की संभावनाओं पर तीखा हमला किया है। साथ ही उन्होंने जंतर-मंतर छात्र आंदोलन में कथित विदेशी फंडिंग और अन्य लोगों की भूमिका की जांच की मांग भी की। हालांकि, विदेशी फंडिंग और आंदोलन में बाहरी तत्वों से जुड़े उनके दावों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है। Source: Navbharat Times / Khabargaon / Latest Political Reports जय राष्ट्र न्यूज़

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“CJP को मिली पूरी फंडिंग PM CARES Fund से!”—आशुतोष रांका का दावा, ऑडिट की मांग

नई दिल्ली: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के सह-संयोजक आशुतोष रांका का PM CARES Fund को लेकर दिया गया एक बयान चर्चा में है। एक लाइव डिबेट के दौरान CJP आंदोलन की फंडिंग को लेकर सवाल पूछे जाने पर रांका ने दावा किया कि CJP को मिलने वाली पूरी फंडिंग PM CARES Fund से मिली है। इसके साथ ही उन्होंने PM CARES Fund के ऑडिट की मांग भी उठाई। फंडिंग के सवाल पर आशुतोष रांका का जवाब मामला उस समय चर्चा में आया जब एक पत्रकार ने आशुतोष रांका से CJP के आंदोलन के लिए फंडिंग के स्रोत को लेकर सवाल किया। रिपोर्ट के अनुसार, रांका ने जवाब में दावा किया कि आंदोलन की पूरी फंडिंग PM CARES Fund से हुई है और इसी के साथ उन्होंने फंड की जांच और ऑडिट कराने की मांग रखी। उनका यह बयान सोशल मीडिया पर भी तेजी से चर्चा में आया है और इसे लेकर अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। PM CARES Fund के ऑडिट की मांग आशुतोष रांका ने अपने बयान में केवल फंडिंग का दावा ही नहीं किया, बल्कि PM CARES Fund के ऑडिट की मांग भी उठाई। CJP की ओर से पहले भी PM CARES Fund को लेकर सार्वजनिक ऑडिट और पारदर्शिता की मांग की जाती रही है। संगठन की वेबसाइट पर आंदोलन की प्रमुख मांगों में PM CARES Fund का सार्वजनिक ऑडिट शामिल है। CJP आंदोलन पहले से चर्चा में CJP का आंदोलन पिछले कुछ समय से परीक्षा व्यवस्था और छात्रों से जुड़े मुद्दों को लेकर चर्चा में रहा है। संगठन ने NEET और अन्य परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं, बेरोजगारी और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को लेकर सरकार के सामने कई मांगें रखी हैं। संगठन की ओर से केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग भी आंदोलन का प्रमुख हिस्सा रही है। PM CARES Fund को लेकर पहले से उठते रहे हैं सवाल PM CARES Fund की स्थापना कोविड-19 महामारी के दौरान मार्च 2020 में की गई थी। इसके संचालन, पारदर्शिता और सूचना उपलब्धता को लेकर समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं। फंड को एक public charitable trust के रूप में स्थापित किया गया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार इसकी ऑडिटिंग के लिए एक स्वतंत्र चार्टर्ड अकाउंटेंट फर्म नियुक्त की गई थी। इसलिए CJP की ओर से अब जिस तरह के सार्वजनिक ऑडिट की मांग की जा रही है, वह इसी पारदर्शिता की बहस से जुड़ी हुई है। क्या वास्तव में CJP की फंडिंग PM CARES से हुई? यहां एक महत्वपूर्ण बात ध्यान देने वाली है। आशुतोष रांका का PM CARES Fund से CJP की पूरी फंडिंग होने वाला बयान एक दावा है। उपलब्ध रिपोर्टिंग में इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि या ऐसा कोई आधिकारिक दस्तावेज सामने नहीं आया है, जिससे यह साबित हो कि CJP आंदोलन को वास्तव में PM CARES Fund से फंडिंग मिली। इसलिए इस दावे को तथ्य के रूप में नहीं बल्कि रांका के बयान/दावे के रूप में देखना उचित होगा। सोशल मीडिया पर भी बयान की चर्चा रांका के बयान का वीडियो और उसके अंश सोशल मीडिया पर शेयर किए जा रहे हैं। कई यूजर्स इस बयान को लेकर सवाल उठा रहे हैं, जबकि कुछ लोग इसे PM CARES Fund की पारदर्शिता पर बहस से जोड़ रहे हैं। हालांकि सोशल मीडिया प्रतिक्रियाओं को किसी वित्तीय लेनदेन या फंडिंग के आधिकारिक प्रमाण के तौर पर नहीं देखा जा सकता। CJP की मुख्य मांगों में PM CARES ऑडिट भी शामिल CJP की आधिकारिक वेबसाइट पर आंदोलन से जुड़ी मांगों में PM CARES Fund के सार्वजनिक ऑडिट की मांग भी दर्ज है। संगठन ने इसके साथ बेरोजगारी, NEET जवाबदेही, प्रधानमंत्री की प्रेस कॉन्फ्रेंस और अन्य मुद्दों को भी अपनी मांगों में शामिल किया है। निष्कर्ष CJP के सह-संयोजक आशुतोष रांका के PM CARES Fund से आंदोलन की पूरी फंडिंग मिलने वाले दावे ने नई चर्चा शुरू कर दी है। रांका ने इसी के साथ PM CARES Fund के ऑडिट की मांग भी उठाई है। हालांकि, CJP को PM CARES Fund से फंडिंग मिलने के दावे की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल उपलब्ध नहीं है, इसलिए इसे रांका के बयान के तौर पर ही देखा जाना चाहिए। अब इस मुद्दे पर सबसे अहम सवाल यही है कि क्या भविष्य में इस दावे के समर्थन में कोई आधिकारिक वित्तीय दस्तावेज या प्रमाण सामने आता है। Source: Patrika / CJP official website / Latest reports जय राष्ट्र न्यूज़

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राष्ट्रीय | छात्रों पर पुलिस कार्रवाई को लेकर संसद में हंगामा, अमित शाह के बयान की मांग पर लोकसभा फिर स्थगित

नई दिल्ली: संसद के मानसून सत्र के दौरान मंगलवार, 11 अगस्त 2026 को छात्रों के प्रदर्शन पर कथित पुलिस कार्रवाई का मुद्दा एक बार फिर गरमा गया। विपक्षी सांसदों ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से इस मामले पर सदन में बयान देने की मांग की। लगातार नारेबाजी और हंगामे के कारण लोकसभा की कार्यवाही शुरू होने के कुछ ही मिनट बाद दोपहर 2 बजे तक स्थगित करनी पड़ी। प्रश्नकाल शुरू होते ही विपक्ष ने उठाया छात्र प्रदर्शन का मुद्दा लोकसभा की कार्यवाही मंगलवार सुबह 11 बजे शुरू हुई। जैसे ही अध्यक्ष ओम बिरला ने प्रश्नकाल शुरू करने की कोशिश की, विपक्षी सांसदों ने छात्रों के प्रदर्शन के दौरान हुई कथित पुलिस कार्रवाई का मुद्दा उठाना शुरू कर दिया। विपक्ष की मांग थी कि गृह मंत्री अमित शाह स्वयं सदन में आकर इस पूरे मामले पर जवाब दें। लगातार नारेबाजी के कारण प्रश्नकाल सामान्य तरीके से आगे नहीं बढ़ सका। अमित शाह के बयान पर अड़ा विपक्ष विपक्षी सांसदों का मुख्य जोर गृह मंत्री अमित शाह के व्यक्तिगत बयान पर है। विपक्ष का आरोप है कि छात्रों के प्रदर्शन के दौरान पुलिस की कार्रवाई को लेकर सरकार को सदन में स्पष्ट जवाब देना चाहिए। हिंदुस्तान टाइम्स के अनुसार, विपक्ष 20 जुलाई को परीक्षा में कथित अनियमितताओं के खिलाफ हुए छात्र प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई और कथित तौर पर पेलेट गन के इस्तेमाल को लेकर चर्चा और शाह के बयान की मांग कर रहा है। सरकार ने कहा—गृह मंत्री जवाब देने को तैयार संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू की ओर से पहले ही कहा गया था कि सरकार इस मुद्दे पर सदन में चर्चा के लिए तैयार है और अमित शाह भी छात्रों से जुड़े पुलिस कार्रवाई के मुद्दे पर जवाब देने के लिए तैयार हैं। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने भी सदन में विपक्षी सांसदों को यही जानकारी दी और उनसे प्रश्नकाल को चलने देने की अपील की। स्पीकर ओम बिरला ने की बार-बार अपील हंगामे के बीच लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने विपक्षी सांसदों से सदन की कार्यवाही चलने देने की अपील की। उन्होंने कहा कि प्रश्नकाल सरकार से जवाबदेही सुनिश्चित करने का महत्वपूर्ण माध्यम है और सांसदों को सदन में चर्चा तथा बहस के जरिए अपनी बात रखनी चाहिए। बिरला ने सदस्यों से पोस्टर और बैनर दिखाने के बजाय संसदीय प्रक्रिया के तहत चर्चा करने की अपील की। इसके बावजूद नारेबाजी जारी रही। कुछ ही मिनट में लोकसभा स्थगित विपक्ष के लगातार विरोध के चलते लोकसभा की कार्यवाही शुरू होने के लगभग चार मिनट बाद ही स्थगित कर दी गई। अब सदन की कार्यवाही दोपहर 2 बजे दोबारा शुरू होने के लिए निर्धारित की गई है। राज्यसभा में भी इसी मुद्दे को लेकर हंगामा हुआ। वहां की कार्यवाही भी बाधित हुई और सदन को दोपहर 12 बजे तक स्थगित किया गया। दो सप्ताह से जारी है संसद में गतिरोध छात्र प्रदर्शन से जुड़े इस मुद्दे को लेकर संसद में पिछले करीब दो सप्ताह से राजनीतिक गतिरोध बना हुआ है। विपक्ष लगातार पुलिस कार्रवाई पर चर्चा और गृह मंत्री के बयान की मांग कर रहा है। वहीं, सरकार का कहना है कि वह इस विषय पर चर्चा के लिए तैयार है और गृह मंत्री सदन में जवाब देने को तैयार हैं। इसके बावजूद दोनों पक्षों के बीच सहमति नहीं बन पा रही है। 20 जुलाई के प्रदर्शन पर है विवाद विवाद का मुख्य केंद्र 20 जुलाई का छात्र प्रदर्शन है। यह प्रदर्शन परीक्षा में कथित अनियमितताओं और तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर हुआ था। विपक्ष का आरोप है कि प्रदर्शन के दौरान छात्रों के खिलाफ पुलिस ने जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग किया। इसी कार्रवाई को लेकर गृह मंत्री से संसद में जवाब मांगा जा रहा है। सरकार और विपक्ष के बीच बढ़ता टकराव सोमवार को सरकार की ओर से छात्रों से जुड़े मुद्दे और पुलिस कार्रवाई पर चर्चा कराने की पेशकश की गई थी। हालांकि विपक्ष ने केवल सामान्य चर्चा के बजाय गृह मंत्री अमित शाह से सीधे जवाब की मांग पर जोर दिया। इसी मुद्दे पर मंगलवार को भी संसद की कार्यवाही प्रभावित हुई और दोनों पक्षों के बीच गतिरोध जारी रहा। मानसून सत्र पर भी असर लगातार हंगामे का असर संसद के मानसून सत्र के कामकाज पर भी पड़ रहा है। सरकार और विपक्ष के बीच कई मुद्दों पर पहले से मतभेद हैं और छात्र प्रदर्शन का मुद्दा अब इस राजनीतिक टकराव का प्रमुख केंद्र बन गया है। संसदीय कार्यवाही सुचारु रूप से चलाने को लेकर लोकसभा अध्यक्ष लगातार दोनों पक्षों से सहयोग की अपील कर रहे हैं। निष्कर्ष छात्र प्रदर्शन पर कथित पुलिस कार्रवाई को लेकर संसद में जारी गतिरोध मंगलवार को भी खत्म नहीं हो सका। विपक्ष अमित शाह से सदन में स्पष्ट बयान की मांग पर अड़ा रहा, जबकि सरकार का कहना है कि गृह मंत्री इस मुद्दे पर जवाब देने के लिए तैयार हैं। लगातार नारेबाजी के कारण लोकसभा को कुछ ही मिनटों में दोपहर 2 बजे तक स्थगित करना पड़ा। अब नजर इस बात पर है कि दोपहर बाद सदन की कार्यवाही सुचारु हो पाती है या छात्र प्रदर्शन का मुद्दा एक बार फिर संसद में हंगामे का कारण बनता है। Source: News On AIR / Hindustan Times / Economic Times जय राष्ट्र न्यूज़

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एथेनॉल विवाद पर भाजपा सांसद जनार्दन मिश्रा का बयान—“शुद्ध पेट्रोल तुम्हारे बाप के घर से आएगा?”

मध्य प्रदेश के रीवा से भाजपा सांसद जनार्दन मिश्रा अपने एक बयान को लेकर चर्चा में हैं। रीवा एयरपोर्ट पर एक कार्यक्रम के दौरान एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल का विरोध करने वालों पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा—“आंदोलन हो रहा है एथेनॉल नहीं चलेगा, शुद्ध पेट्रोल चलेगा। शुद्ध पेट्रोल तुम्हारे बाप के घर से आएगा?” सांसद मिश्रा रीवा से भोपाल और कोलकाता के लिए शुरू हुई नई उड़ानों के उद्घाटन कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने देश की आर्थिक स्थिति और एथेनॉल नीति पर भी अपनी बात रखी। #JanardanMishra#RewaNews#MadhyaPradesh#Ethanol#BJPNews BreakingNews JayRashtraNews

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