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बिहार सीएम नीतीश कुमार हिजाब विवाद

बिहार सीएम नीतीश कुमार हिजाब विवाद: पटना कार्यक्रम में मुस्लिम महिला डॉक्टर का नकाब हटाने पर भारी बवाल

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार एक बार फिर विवादों में घिर गए हैं। पटना में एक सरकारी कार्यक्रम के दौरान नीतीश कुमार ने नव नियुक्त आयुष डॉक्टर नुसरत परवीन का हिजाब (नकाब) खींच दिया, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है। इस घटना ने देशभर में आक्रोश पैदा कर दिया है और महिलाओं की गरिमा तथा धार्मिक स्वतंत्रता पर सवाल उठाए जा रहे हैं। नीतीश कुमार हिजाब घटना के विवरण यह घटना 15 दिसंबर 2025 को पटना के मुख्यमंत्री सचिवालय ‘संवाद’ में हुई, जहां 1,283 से अधिक आयुष डॉक्टरों (आयुर्वेद, होम्योपैथी और यूनानी) को नियुक्ति पत्र वितरित किए जा रहे थे। मंच पर डॉक्टर नुसरत परवीन नियुक्ति पत्र लेने आईं, जो चेहरे पर नकाब पहने हुई थीं। वीडियो में दिख रहा है कि नीतीश कुमार ने पहले पत्र सौंपा, फिर नकाब की ओर इशारा करते हुए “ये क्या है?” कहा और खुद इसे नीचे खींच दिया। डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी ने उन्हें रोकने की कोशिश की, लेकिन कुछ अधिकारी हंसते नजर आए। डॉक्टर नुसरत इस घटना से इतनी आहत हुईं कि उन्होंने बिहार छोड़ दिया और कोलकाता अपने परिवार के पास चली गईं। उनके परिवार ने कहा कि वे अब सरकारी नौकरी जॉइन नहीं करेंगी। यह घटना महिलाओं की निजता, सहमति और धार्मिक अधिकारों का उल्लंघन मानी जा रही है। राजनीतिक प्रतिक्रियाएं और बिहार मुख्यमंत्री विवाद विपक्षी दलों ने नीतीश कुमार की कड़ी निंदा की है। राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) ने वीडियो शेयर कर पूछा, “नीतीश जी को क्या हो गया? उनकी मानसिक स्थिति अब दयनीय हो गई है या नीतीश बाबू अब 100% संघी हो गए?” कांग्रेस ने इसे “घृणित कृत्य” बताते हुए नीतीश का तत्काल इस्तीफा मांगा। कश्मीर की पार्टियों ने भी निंदा की। महबूबा मुफ्ती ने कहा कि नीतीश को पद छोड़ देना चाहिए। उमर अब्दुल्लाह ने इसे गलत बताया। पूर्व अभिनेत्री जायरा वसीम ने बिना शर्त माफी की मांग की। एमनेस्टी इंटरनेशनल ने इसे महिला की गरिमा पर हमला बताया। पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार ने इसे “शर्मनाक” कहा। जावेद अख्तर ने भी नीतीश से माफी मांगने को कहा। नीतीश की पार्टी जदयू और सहयोगी भाजपा का बचाव: अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री जमा खान ने कहा कि नीतीश ने “पिता जैसा स्नेह” दिखाया, ताकि अल्पसंख्यक समुदाय की बेटी की सफलता दुनिया देखे। सोशल मीडिया बैकलैश और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर भारी आक्रोश है। कई सेलेब्रिटी और एक्टिविस्ट्स ने इसे महिलाओं की गरिमा पर हमला बताया। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान और मानवाधिकार संगठनों ने निंदा की। कुछ जगहों पर प्रदर्शन भी हुए। नीतीश कुमार और भाजपा गठबंधन का राजनीतिक संदर्भ नीतीश कुमार पिछले दो दशकों से अधिकतर बिहार के मुख्यमंत्री रहे हैं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भाजपा के प्रमुख सहयोगी हैं। हालिया विधानसभा चुनाव में एनडीए की जीत हुई। बिहार में 18% मुस्लिम आबादी है, इसलिए ऐसे मुद्दे संवेदनशील हैं। भाजपा का हिजाब पर पहले से विवादित रुख रहा है, जैसे कर्नाटक में बैन। फिलहाल नीतीश कुमार ने कोई माफी या बयान नहीं दिया है। जांच और प्रतिक्रियाएं जारी हैं। यह नीतीश कुमार मुस्लिम महिला डॉक्टर नकाब घटना भारत में धार्मिक पोशाक और महिलाओं के अधिकारों पर चल रही बहस को और गहरा कर रही है। जय राष्ट्र न्यूज पर इस विकासशील कहानी और अन्य ट्रेंडिंग भारतीय समाचारों के लिए बने रहें।

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समस्तीपुर से होगा PM मोदी का चुनावी शंखनाद, 24 अक्टूबर को शाह भी करेंगे महागठबंधन पर वार

समस्तीपुर से होगा प्रधानमंत्री मोदी का चुनावी शंखनाद, 24 अक्टूबर को शाह भी करेंगे महागठबंधन पर वार

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की जुबानी जंग तेज हो गई है. एनडीए ने अपना ‘मिशन बिहार’ चरम पर पहुंचा दिया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 24 अक्टूबर को बिहार के दौरे पर पहुंचेंगे और समस्तीपुर जिले के कर्पूरी ग्राम से प्रधानमंत्री मोदी चुनावी शंखनाद करेंगे. यह उनका चुनाव घोषणा के बाद पहला दौरा होगा, जो एनडीए के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण साबित हो सकता है. उसी दिन वे बेगूसराय में भी एक चुनावी सभा को संबोधित करेंगे. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अलावा केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी बिहार में सक्रिय रहेंगे, जो सीवान और बक्सर में रैलियां करेंगे. दोनों नेताओं का यह समन्वित प्रयास एनडीए की मजबूत पकड़ को दर्शाता है. समस्तीपुर: हारी हुई सीटों पर पीएम का फोकस समस्तीपुर का चयन सोच-समझकर किया गया है. 2020 के चुनाव में इस जिले की 10 विधानसभा सीटों पर एनडीए और महागठबंधन ने 5-5 सीटें जीती थीं. एनडीए के रणनीतिकार अब उन 5 हारी हुई सीटों – हसनपुर, मोरवा, उजियारपुर, समस्तीपुर और विभूतिपुर – पर नजरें गड़ाए हैं. कर्पूरी ग्राम में रैली का आयोजन सामाजिक न्याय के प्रतीक कर्पूरी ठाकुर से जुड़ाव को मजबूत करेगा. उम्मीदवारों में जेडीयू के राजकुमार राय (हसनपुर) से लेकर रवीना कुशवाहा (विभूतिपुर) तक एनडीए मजबूत दावेदार उतार चुका है. पीएम मोदी की उपस्थिति से इन सीटों पर बहुजन वोटों को एकजुट करने की उम्मीद है. बेगूसराय में रैली पूर्वी बिहार के मतदाताओं को लुभाने का प्रयास होगा. शाह की रणनीति: सीवान-बक्सर में पकड़ मजबूत अमित शाह का यह दूसरा दौरा होगा. हाल ही में वे छपरा के तारैया में रैली कर चुके हैं. 24 अक्टूबर को सीवान और बक्सर की सभाओं के बाद 25 अक्टूबर को वे नालंदा, मुंगेर और खगड़िया जाएंगे. भाजपा अध्यक्ष दिलीप जायसवाल ने महागठबंधन को ‘महालठबंधन’ कहकर तंज कसा, दावा किया कि माहौल एनडीए के पक्ष में है. एनडीए ने सीट बंटवारा पूरा कर लिया है, हालांकि हम और आरएलएसपी के साथ शुरुआती खींचतान हुई. दूसरी ओर, 30 अक्टूबर को पीएम मोदी मुजफ्फरपुर और छपरा में रैलियां करेंगे. विपक्ष (India) में हलचल: डैमेज कंट्रोल की कोशिश महागठबंधन में सीट बंटवारे को लेकर कांग्रेस और आरजेडी के बीच तनाव चरम पर है. दोनों ने एक-दूसरे के खिलाफ उम्मीदवार उतारे हैं. 23 अक्टूबर को पटना में अशोक गहलोत और तेजस्वी यादव की संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस होगी, जो डैमेज कंट्रोल का प्रयास है. जन सुराज के प्रशांत किशोर ने भाजपा पर तीन नेताओं के पर्चे वापस कराने का आरोप लगाया. एनडीए का स्लोगन ‘2025 में एनडीए 225’ जोर पकड़ रहा है, जबकि विपक्ष को एकजुट होने की चुनौती है. बिहार की 243 सीटों पर यह जंग दिलचस्प मोड़ ले रही है. कुल मिलाकर, 24 अक्टूबर एनडीए के लिए टर्निंग पॉइंट साबित हो सकता है.

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NDA सीट बंटवारे पर कुशवाहा का छलका दर्द, कहा- मन के अनुकूल सीटें नहीं मिलीं, विवशता को समझिए

NDA सीट बंटवारे पर कुशवाहा का छलका दर्द, कहा- मन के अनुकूल सीटें नहीं मिलीं, विवशता को समझिए

बिहार में सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के सहयोगी दलों के बीच सीट शेयरिंग पर सहमति बन गई है. जिसपर राष्ट्रीय लोक मोर्चा (रालोमो) के राष्ट्रीय अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा ने प्रतिक्रिया दी है. उपेंद्र कुशवाहा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट कर कहा कि प्रिय मित्रों/साथियों, आप सभी से क्षमा चाहता हूं. आपके मन के अनुकूल सीटों की संख्या नहीं हो पाई. मैं समझ रहा हूं, इस निर्णय से अपनी पार्टी के उम्मीदवार होने की इच्छा रखने वाले साथियों सहित हजारों-लाखों लोगों का मन दुखी होगा. आज कई घरों में खाना नहीं बना होगा, परन्तु आप सभी मेरी एवं पार्टी की विवशता और सीमा को बखूबी समझ रहे होंगे. अंदर कुछ और बाहर कुछ और उन्होंने कहा कि किसी भी निर्णय के पीछे कुछ परिस्थितियां ऐसी होती हैं जो बाहर से दिखती हैं मगर कुछ ऐसी भी होती हैं जो बाहर से नहीं दिखतीं. हम जानते हैं कि अन्दर की परिस्थितियों से अनभिज्ञता के कारण आपके मन में मेरे प्रति गुस्सा भी होगा, जो स्वाभाविक भी है. समर्थकों को शांत होने का किया आग्रह उपेंद्र कुशवाहा ने आगे कहा कि आपसे विनम्र आग्रह है कि आप गुस्से को शांत होने दीजिए, फिर आप स्वयं महसूस करेंगे कि फैसला कितना उचित है या अनुचित. फिर कुछ आने वाला समय बताएगा. फिलहाल इतना ही. फायदे में चिराग एनडीए सीट शेयरिंग के अनुसार, भाजपा और जदयू 101-101 सीटों पर विधानसभा चुनाव लड़ेगी, जबकि सहयोगी दल लोजपा (रामविलास) को 29 सीटें और आरएलएम एवं हम को 6-6 सीटें मिली हैं. वहीं, भाजपा के चुनाव प्रभारी और केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इसकी घोषणा करते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट कर लिखा, “एनडीए के साथियों ने सौहार्दपूर्ण वातावरण में सीटों का वितरण पूर्ण किया है. जदयू 101, भाजपा 101, लोजपा (रामविलास) 29, राष्ट्रीय लोक मोर्चा 6 और हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा 6.” चिराग का 100 फीसदी का स्ट्राइक रेट चिराग पासवान अपने पिता राम विलास पासवान की राजनीतिक विरासत को संभाल रहे हैं. उनकी पार्टी का दलित वोट बैंक पर मजबूत पकड़ है. 2024 के लोकसभा चुनाव में उनकी पार्टी ने शानदार प्रदर्शन किया था और पांचों सीटों पर जीत हासिल की थी.

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पटना मेट्रो का उद्घाटन आज, नीतीश कुमार करेंगे आईएसबीटी से भूतनाथ तक ब्लू लाइन की शुरुआत

बिहार की राजधानी पटना को सोमवार को बड़ी सौगात मिलने जा रही है. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार आज पटना मेट्रो के पहले चरण का उद्घाटन करेंगे. यह मेट्रो कॉरिडोर ISBT (पाटलिपुत्र अंतरराज्यीय बस टर्मिनल) से भूतनाथ तक फैला हुआ है और इसे ब्लू लाइन कहा जा रहा है. इस लाइन के तीन प्रमुख स्टेशन हैं- आईएसबीटी, जीरो माइल और भूतनाथ, जो यात्रियों को शहर के अहम हिस्सों से जोड़ेंगे. अगस्त महीने में ट्रायल में हुई देरी के बाद आखिरकार अधिकारियों ने मेट्रो सेवाओं को हरी झंडी दे दी है. पटना मेट्रो कल, यानी 7 अक्टूबर से जनता के लिए दौड़ेगी. इस ब्लू लाइन कॉरिडोर की लंबाई 4.3 किलोमीटर है और इसे बिहार सरकार के सहयोग से दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (DMRC) ने तैयार किया है. मेट्रो सेवा शुरू होने के बाद शहर की बढ़ती भीड़ और ट्रैफिक की समस्या में काफी राहत मिलने की उम्मीद है. कॉरिडोर-2 और इसकी सुविधाएं पटना मेट्रो का कॉरिडोर-2 हिस्सा 14.5 किलोमीटर लंबा है और इसमें पांच एलिवेटेड तथा सात अंडरग्राउंड स्टेशन शामिल हैं. यह कॉरिडोर पटना जंक्शन को आईएसबीटी से जोड़ता है. प्रत्येक मेट्रो ट्रेन में तीन डिब्बे होंगे जो आईएसबीटी से भूतनाथ तक जाएगी और फिर डिपो लौटेगी. ट्रेन की रफ्तार 40 किलोमीटर प्रति घंटे है और मेट्रो सेवा सुबह 8 बजे से रात 10 बजे तक चलेगी. डिब्बों में 158 यात्रियों के बैठने की क्षमता है, जिसमें महिलाओं और दिव्यांगों के लिए 12 आरक्षित सीटें हैं. खड़े होने की जगह 940 लोगों के लिए है. आधुनिक डिब्बों में मोबाइल और लैपटॉप चार्जिंग पॉइंट, एमर्जेंसी गेट और दो हिस्सों में बंटे स्लाइडिंग दरवाजे जैसी सुविधाएं हैं. यात्रियों को स्टेशन पर मेट्रो कार्ड और टोकन मिलेंगे, जिनका किराया 15 रुपये से 30 रुपये तक रहेगा. बिहार की सांस्कृतिक छाप पटना मेट्रो में बिहार की सांस्कृतिक विरासत को भी प्रदर्शित किया गया है. हर कोच में गोलघर, महावीर मंदिर और बुद्ध की आकृतियों जैसी झलकियाँ हैं, जिन्हें केसरिया रंग में रंगा गया है. यह न केवल एक यातायात सुविधा है, बल्कि पटना की सांस्कृतिक पहचान को भी उजागर करता है. पटना देश का 24वां ऐसा शहर बन गया है, जहाँ मेट्रो सेवा शुरू हो चुकी है. अब शहरवासियों को तेज, सुरक्षित और आरामदायक यात्रा का अनुभव मिलने वाला है.

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पीएम मोदी का बिहार दौरा

पीएम मोदी का बिहार दौरा

पीएम मोदी का बिहार दौरा: पूर्णिया में बड़े विकास प्रोजेक्ट्स का उद्घाटन, एयरपोर्ट व मखाना बोर्ड शामिल पूर्णिया (बिहार), 15 सितंबर 2025: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज पूर्णिया के दौरे पर रहे और यहां राज्य के लिए कई बड़े विकास परियोजनाओं का उद्घाटन तथा शिलान्यास किया। केंद्रीय नेतृत्व के अनुसार इन परियोजनाओं का उद्देश्य स्थानीय बुनियादी ढांचे, परिवहन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देना है।  पीएम ने इस दौरे के दौरान उत्तर बिहार के एक लंबे समय से प्रतीक्षित कदम के रूप में पूर्णिया एयरपोर्ट के नए टर्मिनल का भी उद्धाटन किया, जिसे क्षेत्र की हवाई कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण बताया जा रहा है। साथ ही केंद्र और राज्य के सहयोग से कई लोक-कल्याणकारी और अवसंरचनात्मक परियोजनाओं की घोषणा की गई, जिनकी कुल लागत मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक करीब ₹36,000–40,000 करोड़ के आसपास बताई जा रही है।  प्रधानमंत्री का यह दौरा उस राजनीतिक और विकासात्मक संदर्भ में भी महत्वपूर्ण है जिसमें बिहार अगले कुछ महीनों में निर्वाचन की तैयारियों के बीच है; केन्द्र की नीतियों और प्रोजेक्ट्स को स्थानीय स्तर पर दिखाने का यह एक रणनीतिक अवसर भी माना जा रहा है। पदयात्रा के एजेंडे में कृषि, ऊर्जा, रेल व महिला-समर्थन से जुड़े कई प्रोजेक्ट शामिल थे, जिनके जरिए रोजगार और कनेक्टिविटी में बढ़ोतरी का दावा किया गया है।  इस यात्रा से पहले प्रधानमंत्री ने पश्चिम बंगाल (कोलकाता) में 16वीं कम्बाइंड कमांडर्स कॉन्फ्रेंस का उद्घाटन भी किया — केंद्रीय कार्यक्रमों और राज्य यात्राओं का यह समन्वय बताता है कि इसी दिन पीएम कई राज्यों के कार्यक्रमों में जुड़े हुए थे। केंद्र सरकार की आधिकारिक वेबसाइट पर भी 13-15 सितंबर के बीच कई पूर्वनिर्धारित राज्यों के दौरे का बयान जारी किया गया था।  स्थानीय प्रतिक्रिया के संदर्भ में, क्षेत्रीय राजनीतिक दलों व नागरिकों ने परियोजनाओं के लाभ-हानि दोनों पहलुओं पर अपने-अपने विचार व्यक्त किए हैं — जहां कुछ लोगों ने विकास और कनेक्टिविटी की उम्मीद जताई, वहीं आलोचक परियोजनाओं की प्राथमिकता व चुनावी मकसद पर सवाल उठा रहे हैं। ऐसे समय में यह देखना बाकी है कि घोषित निवेश स्थानीय लोगों तक कितनी तेजी और पारदर्शिता के साथ पहुंचेगा। 

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Chirag Paswan's Bold Move in Bihar 2025 Polls

Chirag Paswan: राजनीतिक विरासत के युवा चेहरे की मजबूत दस्तक, बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में LJP की भूमिका

जनता के बीच चिराग पासवान (Chirag Paswan) का नाम हमेशा से ही युवा ऊर्जा और राजनीतिक बदलाव का पर्याय रहा है। राम विलास पासवान के बेटे और केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण मंत्री, चिराग ने अपनी अगुआई में लोक जनशक्ति पार्टी (Lok Janshakti Party) को नई ऊँचाइयों पर पहुँचाया है। 2025 के बिहार विधानसभा चुनावों में उनकी सक्रियता और रणनीति ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। युवा चेहरे की मजबूती चिराग पासवान (Chirag Paswan) ने मीडिया से बात करते हुए कहा है कि वह बिहार फर्स्ट, बिहारी फर्स्ट (Bihar First and Bihari First) सोच को 2025 विधानसभा चुनाव (Bihar Assembly Election 2025) में अगली पंक्ति की लड़ाई में बदलना चाहते हैं । उन्होंने आरा में नव संकल्प महासभा (Nav Sankalp Mahasabha) आयोजन किया, जिसमें उन्होंने घोषणा की कि वे खुद चुनाव लड़ेंगे, हालांकि अभी यह तय नहीं कि वे किस सीट से मैदान में उतरेंगे। उन्होंने यह भी कहा, “मैं बिहार से चुनाव नहीं लड़ूंगा, बल्कि बिहार के लिए लड़ूंगा।”   243 सीटों की चुनौती छपरा में आयोजित विशाल रैली में चिराग पासवान (Chirag Paswan) ने ऐलान किया कि उनकी पार्टी सभी 243 विधानसभा सीटों पर प्रत्याशी उतारने की तैयारी कर रही है। उनका मानना है कि इस कदम से एनडीए गठबंधन (NDA alliance) को मजबूती मिलेगी, लेकिन इससे बीजेपी–जेडीयू गठबंधन (BJP-JDU Alliance) को सीट शेयरिंग में कड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है  LJP(RV) की रणनीति और गठबंधन समन्वय चिराग पासवान (Chirag Paswan) ने खुद को नए बिहार के एजेंट के रूप में प्रस्तुत करते हुए, दलित–पिछड़ा वोट बैंक को अपनी ओर आकर्षित करने की योजना बनाई है। उन्होंने नालंदा में बहुजन भीम संकल्प समागम (Bahujan Bhim Sankalp Samagam) की शुरुआत की जिसका मकसद जनता के बीच मजबूत पैठ बनाना है। BJP उन्हेंNDA में सीटों के लिए दबाव बनाते हुए देख रही है – 30 से 40 सीटों की उनकी मांग चर्चा में है। जेडीयू भी सतर्क है और गठबंधन पर फिर से बातचीत की संभावना संकेत दे रहा है। नीतीश–चिराग का गठबंधन राजनीतिक समीकरण के मुताबिक, चिराग ने संकेत दिए हैं कि यदि NDA सहयोगी बने रहें, तो मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (CM Nitish Kumar) ही मुख्यमंत्री का चेहरे होंगे।  हालांकि उनका इरादा सिर्फ मुख्यमंत्री बनने का नहीं है बल्कि दलित, युवा और पिछड़े वर्गों की आवाज़ बनकर उनकी परेशानियों को दूर करना है। युवा और दलित वोट बैंक आकर्षित चिराग पासवान (Chirag Paswan) की अपील में यह स्पष्ट झलकता है कि वे युवा और दलित मतदाताओं को सबसे पहले प्राथमिकता देंगे। बिहार में दलित लगभग 19% आबादी बनाते हैं, और इस समूह पर उनकी पकड़ मजबूत होती दिख रही है । दलित वर्ग को जोड़ने के लिए उनके बहुजन–भीम समूह अभियान पीछे नहीं रहे। इसे भी पढ़ें:- महाराष्ट्र में हिंदी के विरोध में एकजुट दिखे उद्धव और राज ठाकरे, 20 साल बाद एक ही मंच पर आए साथ  नई रणनीतिक योजना उनकी रणनीति में शामिल हैं: चिराग पासवान बिहार की राजनीति में अब तक केंद्र में रहे युवा नेता के रूप में सामने आए हैं – उन्होंने दिल्ली वाली राजनीति से ध्यान हटाकर बिहार की जमीन पर आकर मजबूत स्वरुप अपनाया है। उनका बिहार फर्स्ट, बिहारी फर्स्ट (Bihar First and Bihari First) विजन बड़े बदलाव की ओर इशारा करता है। 2025 के विधानसभा चुनाव (Bihar Assembly Election 2025) तक चिराग का राजनीतिक जोर बढ़ा हुआ दिखता है। अगर वे गठबंधन और सीट वितरण की कवायद में संतुलन बनाए रखते हुए, अपनी रणनीति को धरातल पर ला पाए, तो बिहार की राजनीति (Bihar Politics) में उनका हस्ताक्षर आनेवाला है। चिराग पासवान (Chirag Paswan) केवल चुनाव लड़ने की तैयारी नहीं कर रहे, वे बिहार में राजनीतिक नवप्रवर्तन लाना चाहते हैं। उनका युवा नेतृत्व, ‘दलित–युवा’ आधारित नीतियां और गठबंधन की चालबाजी 2025 के चुनावी समीकरण को नए स्वरूप देने वाली है। Latest News in Hindi Today Hindi news Chirag Paswan #ChiragPaswan #BiharElection2025 #LJP #YouthLeader #BiharPolitic

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4.96 Cr Bihar Voters Can Vote Without Any Document in 2025: बिहार चुनाव में इन 4.96 करोड़ वोटरों को नहीं देना होगा कोई भी दस्तावेज

बिहार में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले चुनाव आयोग ने वोटर सूची की प्रक्रिया को आसान और पारदर्शी बनाने हेतु एक नया कदम उठाया है। इस कदम के तहत आयोग ने स्पष्ट किया है कि “2003 की मतदाता सूची में जिन लोगों के नाम हैं। उन्हें अपनी जन्मतिथि या जन्मस्थान प्रमाणित करने के लिए किसी अतिरिक्त दस्तावेज की जरूरत नहीं (4.96 Cr Bihar Voters Can Vote Without Any Document in 2025) होगी। बता दें कि इस सूची में राज्य के कुल लगभग 60% यानी 4.96 करोड़ से अधिक मतदाता शामिल हैं। इस पूरे मामले पर चुनाव आयोग ने कहा कि बिहार की 2003 की वोटर लिस्ट दोबारा अपलोड होगी। इसमें जिनके नाम हैं, उन्हें जन्म प्रमाण नहीं देना होगा। बाकी 3 करोड़ को दस्तावेज देने होंगे, जिससे पारदर्शिता बढ़ेगी। बता दें कि अक्टूबर-नवंबर 2025 में विधानसभा चुनाव होने हैं। बिहार में कुल 243 विधानसभा सीटों पर 7.89 करोड़ से अधिक मतदाता हैं। निर्वाचन आयोग के निर्देशों के मुताबिक, प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र का निर्वाचक पंजीकरण अधिकारी यह सुनिश्चित करेगा कि पुनरीक्षण के दौरान सभी पात्र नागरिक मतदाता सूची में शामिल हों और कोई अपात्र व्यक्ति न रहे।  3 करोड़ मतदाताओं को 11 सूचीबद्ध दस्तावेजों में से एक दस्तावेज के साथ जन्म तिथि या स्थान प्रमाणित करना (4.96 Cr Bihar Voters Can Vote Without Any Document in 2025) होगा चुनाव आयोग के निर्देशानुसार, बिहार में 2003 की मतदाता सूची में शामिल 4.96 करोड़ मतदाताओं को जन्म तिथि या स्थान साबित करने के लिए दस्तावेज देने की जरूरत नहीं। लेकिन शर्त यह है कि वे पुनरीक्षण के बाद की मतदाता सूची का हिस्सा संलग्न करें। बाकी बचे 3 करोड़ मतदाताओं को 11 सूचीबद्ध दस्तावेजों में से एक दस्तावेज के साथ जन्म तिथि या स्थान प्रमाणित करना (4.96 Cr Bihar Voters Can Vote Without Any Document in 2025) होगा। ऐसे में जिनके माता-पिता 2003 की सूची में हैं, उन्हें केवल अपनी जन्म तिथि/स्थान का दस्तावेज देना होगा, माता-पिता का नहीं। बाकी मतदाताओं की पहचान सत्यापित होने के बाद ही उनके नाम सूची में शामिल होंगे। चुनाव आयोग के मुताबिक, यह दस्तावेज़ी प्रक्रिया राज्य के सभी 243 विधानसभा क्षेत्रों में लागू होगी। निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी यह सुनिश्चित करेंगे कि कोई भी पात्र नागरिक छूट न जाए और दस्तावेजों के बिना किसी को भी सूची में शामिल न किया जाए। इस प्रक्रिया के तहत प्रत्येक मतदाता की पात्रता सत्यापित की जाएगी। इसे भी पढ़ें:-  महाराष्ट्र में तीन भाषा नीति पर सरकार का बड़ा फैसला: पुरानी नीतियां रद्द, नई समिति का गठन कोई पात्र नागरिक मतदाता सूची से वंचित न हो और कोई अयोग्य नाम सूची में न (4.96 Cr Bihar Voters Can Vote Without Any Document in 2025) रहे मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कहा कि “इसका मकसद सभी पात्र नागरिकों को मतदाता सूची में शामिल करना और अपात्र लोगों को हटाना है।” मुख्य चुनाव आयुक्त ने बताया कि “यह निर्णय विशेष गहन पुनरीक्षण के तहत लिया गया है, जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि कोई पात्र नागरिक मतदाता सूची से वंचित न हो और कोई अयोग्य नाम सूची में न (4.96 Cr Bihar Voters Can Vote Without Any Document in 2025) रहे। आयोग ने 2003 की मतदाता सूची को पुनः वेबसाइट पर अपलोड करने के निर्देश दिए हैं, ताकि पुराने रिकॉर्ड का उपयोग किया जा सके।” जानकारी के लिए बता दें कि चुनाव आयोग जल्द ही 2003 की बिहार मतदाता सूची को अपनी वेबसाइट पर अपलोड करेगा। जिससे 4.96 करोड़ मतदाता अपने नाम की पुष्टि कर सकें। इस मुद्दे पर राजनीति भी शुरू हो गई है। विपक्षी दलों ने पुनरीक्षण प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए इसे मतदाताओं को हटाने की साजिश करार दे दिया। विपक्षी दलों के आरोपों का जवाब देते हुए आयोग ने कहा कि “यह अनुच्छेद 326 का पालन करता है, जो पात्र नागरिकों को वोटिंग का अधिकार देता है। आयोग ने राजनीतिक दलों से बूथ स्तरीय एजेंट नियुक्त करने को कहा, ताकि मतदाता सूची में खामियां न रहें। अब तक 1,54,977 बीएलए नियुक्त हो चुके हैं।” Latest News in Hindi Today Hindi news 4.96 Cr Bihar Voters Can Vote Without Any Document in 2025 #BiharElection2025 #VotersWithoutID #ElectionCommission #BiharNews #VotingRights

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Rashtriya Janata Dal: इन 5 नेताओं ने बनाई पार्टी की पहचान

बिहार की राजनीति (Bihar Politics) में राष्ट्रीय जनता दल (Rashtriya Janata Dal {RJD}) लंबे समय से एक मजबूत और प्रभावशाली राजनीतिक शक्ति के रूप में स्थापित है। इस पार्टी की नींव सामाजिक न्याय, पिछड़े वर्गों और वंचित समुदायों की आवाज़ उठाने के उद्देश्य से रखी गई थी। पार्टी के संस्थापक और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव (Former Chief Minister Lalu Prasad Yadav)ने जिस राजनीतिक विचारधारा और रणनीति से इस दल को खड़ा किया, वह आज भी राज्य की सियासत में अहम भूमिका निभा रही है। RJD सुप्रीमों और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव  लालू प्रसाद यादव (Lalu Prasad Yadav) का नाम बिहार की राजनीति में एक विचारधारा, एक आंदोलन और एक साहसिक नेतृत्व का प्रतीक बन चुका है। उन्होंने 1990 के दशक में बिहार की राजनीति को पूरी तरह बदलकर रख दिया। पिछड़े वर्गों, दलितों और अल्पसंख्यकों को सत्ता की मुख्यधारा में लाकर उन्होंने एक नया राजनीतिक समीकरण तैयार किया। भले ही लालू प्रसाद यादव कानूनी मामलों के चलते सक्रिय राजनीति से कुछ दूर हैं, लेकिन उनकी राजनीतिक पकड़ और विचारधारा आज भी RJD की रीढ़ बनी हुई है। तेजस्वी यादव: युवा नेतृत्व की नई पहचान लालू प्रसाद यादव के छोटे बेटे और बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव (Former Deputy Chief Minister Tejaswi Yadav)ने अब पार्टी की कमान संभाल रखी है। 2020 के बिहार विधानसभा चुनावों (Bihar Assembly Election) में तेजस्वी ने आरजेडी (RJD) को सबसे बड़ी पार्टी बनाकर यह साबित कर दिया कि वे राज्य की जनता, खासकर युवाओं और वंचित वर्गों के बीच लोकप्रिय हैं। आगामी 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव (Bihar Assembly Election 2025) के लिए भी पार्टी ने तेजस्वी को अपना चेहरा घोषित कर दिया है। उनका फोकस रोजगार (Employment), शिक्षा (Education) और स्वास्थ्य (Health) जैसे मुद्दों पर है, जो युवाओं को सीधे तौर पर प्रभावित करते हैं। पांच प्रमुख नेता जो बना रहे हैं RJD की रणनीति मजबूत RJD की मजबूती सिर्फ लालू या तेजस्वी तक सीमित नहीं है। पार्टी के कई वरिष्ठ नेता हैं जो नीति निर्माण, संगठन संचालन और चुनावी रणनीति में अहम भूमिका निभा रहे हैं। इनमें से पांच प्रमुख नेता निम्नलिखित हैं: स्व. रघुवंश प्रसाद सिंह – भले ही वे अब हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उन्होंने पार्टी की नीतिगत संरचना में जो योगदान दिया, उसके लिए उन्होंने हमेशा याद किया जाएगा। उनके विचार आज भी पार्टी की रणनीति में झलकते हैं। अब्दुल बारी सिद्दीकी – RJD के वरिष्ठ मुस्लिम चेहरे के रूप में सिद्दीकी न केवल पार्टी के अंदरूनी निर्णयों में शामिल रहते हैं, बल्कि राज्य में मुस्लिम वोट बैंक (Muslim Vote Bank) को भी पार्टी के पक्ष में संगठित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। शिवानंद तिवारी – लंबे समय तक लालू यादव के करीबी रहे शिवानंद तिवारी ने पार्टी को वैचारिक मजबूती दी है। वे मीडिया और सार्वजनिक बहसों में पार्टी का मुखर पक्ष रखते हैं। जगदानंद सिंह – वर्तमान में RJD के प्रदेश अध्यक्ष, जगदानंद सिंह संगठन को ज़मीनी स्तर पर मज़बूत करने का कार्य कर रहे हैं। उनका प्रशासनिक अनुभव पार्टी के लिए एक बड़ी ताकत है। मनोज झा – राज्यसभा सांसद और पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता के रूप में मनोज झा ने RJD की छवि को राष्ट्रीय स्तर पर प्रखर और विचारशील पार्टी के रूप में प्रस्तुत किया है। उनकी वक्तृत्व शैली और सामाजिक न्याय के मुद्दों पर पकड़ उन्हें पार्टी का प्रमुख चेहरा बनाती है। सामाजिक समीकरणों में RJD की पकड़ बिहार में जातीय और सामाजिक समीकरण राजनीति को काफी हद तक प्रभावित करते हैं। RJD का परंपरागत समर्थन यादव, मुस्लिम और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के बीच रहा है। पार्टी ने समय के साथ महादलित और अति पिछड़ा वर्गों को भी अपने पाले में लाने की कोशिश की है। इसके अलावा महिलाओं और युवाओं को लेकर भी पार्टी नई रणनीतियाँ बना रही है, जिसमें डिजिटल माध्यम, युवाओं के लिए रोजगार योजनाएँ और शिक्षा पर ज़ोर शामिल हैं। इसे भी पढ़ें:- गुजरात और पंजाब में आम आदमी पार्टी की जीत और 2027 के तूफान की आहट? 2025 विधानसभा चुनाव: तैयारी ज़ोरों पर 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव (Bihar Assembly Election 2025) को लेकर RJD ने पहले से ही अपनी रणनीति पर काम शुरू कर दिया है। पार्टी ने हाल ही में अपना कैंपेन सॉन्ग भी लॉन्च किया है, जिसमें तेजस्वी यादव (Tejaswi Yadav) को मुख्य चेहरा बताया गया है। यह सॉन्ग रोजगार, बदलाव और न्याय के मुद्दों को प्रमुखता देता है। पार्टी की जमीनी पकड़, मजबूत संगठन और नेतृत्व के अनुभव ने उसे एक बार फिर से सत्ता के करीब ला दिया है। गठबंधन की संभावनाओं को लेकर भी बातचीत चल रही है, जिसमें कांग्रेस और वाम दलों के साथ तालमेल की कोशिशें हो रही हैं। RJD न सिर्फ बिहार की एक प्रमुख राजनीतिक पार्टी है, बल्कि यह राज्य की सामाजिक और राजनीतिक चेतना को प्रभावित करने वाली विचारधारा भी है। लालू यादव से लेकर तेजस्वी यादव तक, और अब्दुल बारी सिद्दीकी से लेकर मनोज झा तक, पार्टी एक संतुलित मिश्रण है अनुभव और युवा ऊर्जा का। 2025 के चुनाव में RJD का प्रदर्शन यह तय करेगा कि बिहार की राजनीति में सामाजिक न्याय की यह धारा कितनी प्रभावी बनी रहती है। Latest News in Hindi Today Hindi news Tejaswi Yadav #RJD #RashtriyaJanataDal #BiharPolitics #IndianPolitics #RJDLoyalists

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Kanhaiya Kumar Reveals CM Face

Kanhaiya Kumar Reveals Mahagathbandhan’s CM Face in Bihar: कन्हैया कुमार ने बता दिया कौन होगा महागठबंधन से बिहार का मुख्यमंत्री?

इस साल अक्टूबर-नवंबर में बिहार में विधानसभा के चुनाव होने की संभावना है। हालांकि बिहार विधानसभा चुनाव से पहले ही महागठबंधन का मुख्यमंत्री चेहरा कौन होगा, इसको लेकर कांग्रेस ने तस्वीर पूरी तरह साफ कर दी है। दरअसल, 27 जून को न्यूज एजेंसी पीटीआई को दिए एक साक्षात्कार में कांग्रेस नेता कन्हैया कुमार ने कहा कि “महागठबंधन की तरफ से मुख्यमंत्री पद के लिए तेजस्वी यादव के प्रमुख चेहरा होने को लेकर कोई असमंजस और विवाद (Kanhaiya Kumar Reveals Mahagathbandhan’s CM Face in Bihar) नहीं है।” उन्होंने कहा कि “विधानसभा चुनाव में विपक्षी गठबंधन के जीतने पर सबसे बड़े घटक दल के रूप में राष्ट्रीय जनता दल का नेता ही स्वाभाविक रूप से मुख्यमंत्री होगा। उन्होंने आगे कहा कि चुनाव में मुद्दे महत्वपूर्ण हैं, लेकिन एक साजिश के तहत इनसे ध्यान भटकाने के लिए बार-बार चेहरे की बात की जा रही है।  बीजेपी नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री पद से हटाकर, इस पद पर अपना चेहरा लाने की कोशिश (Kanhaiya Kumar Reveals Mahagathbandhan’s CM Face in Bihar) में है कन्हैया कुमार ने कहा कि “मेरे खयाल से पिछली बार भी बदलाव का माहौल था। थोड़े अंतर से महागठबंधन की सरकार नहीं बन पाई। पिछले पांच वर्षों से बिहार की जो स्थिति है, उससे लगता है कि इस बार बदलाव की हवा पहले से कहीं  ज्यादा मजबूत है।” इस दौरान कन्हैया कुमार ने दावा किया (Kanhaiya Kumar Reveals Mahagathbandhan’s CM Face in Bihar) कि “बीजेपी नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री पद से हटाकर, इस पद पर अपना चेहरा लाने की कोशिश में है।” उन्होंने कहा कि “ऐसा नहीं है कि वे नीतीश जी के अस्वस्थ होने पर यह कोशिश कर रहे हैं। वह पहले भी प्रयास कर चुके हैं। भाजपा पिछले कई दशकों से बिहार में वही करना चाहती है जो दूसरी जगह करने में सफल रही है। मतलब पहले क्षेत्रीय दल का साथ पकड़ो और फिर धीरे-धीरे उसे निगल जाओ। बिहार में ऐसा न कर पाने की वजह से बीजेपी नीतीश का साथ लेने को मजबूर हुई।” सीएम कौन होगा इस पर हमारे यहां कोई कोई संकट या संदेह नहीं (Kanhaiya Kumar Reveals Mahagathbandhan’s CM Face in Bihar) है  सीएम के सवाल पर कन्हैया ने कहा कि “सीएम कौन बनेगा, इस जनता तय करती है, जिनके पास संख्या बल होगा, वह सीएम बनेगा। आरजेडी ज्यादा सीटों पर चुनाव लड़ेगी तो जाहिर है कि वह ज्यादा सीटें जीतेगी। संख्या बल उसके पास होगा। सीएम कौन होगा इस पर हमारे यहां कोई कोई संकट या संदेह नहीं है। इसे लेकर एनडीए में (Kanhaiya Kumar Reveals Mahagathbandhan’s CM Face in Bihar) है। वे तय नहीं कर पा रहे हैं कि कौन कितने सीटों पर चुनाव लड़ेगा। इस चुनाव में नीतीश चेहरा होंगे या नहीं, यह भी स्पष्ट नहीं है। लेकिन लोकतंत्र में चेहरा महत्वपूर्ण नहीं होता, मुद्दे महत्वपूर्ण होते हैं।” बीजेपी को आड़े हाथों लेते हुए कन्हैया कुमार ने कहा कि “सत्ता पक्ष के लोग जानबूझकर सीएम फेस के नाम पर जनता का ध्यान भटकाना चाहते हैं। इसलिए महत्वपूर्ण मुद्दों को छोड़कर इंडिया गठबंधन के मुख्यमंत्री चेहरे के मामले को उठाकर ध्यान भटकाने की साजिश रच रहे हैं। जैसे ही भाजपा को मौका मिलेगा, वह मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को हटाकर अपने नेता को बिहार में स्थापित करेगी। बिहार की जनता इस बार बदलाव चाहती है। वह एनडीए सरकार के छल को समझ चुकी है। संविधान विरोधी लोगों को जनता पसंद नहीं करती है।” इसे भी पढ़ें:- गुजरात और पंजाब में आम आदमी पार्टी की जीत और 2027 के तूफान की आहट? बिहार में इंडिया गठबंधन के घटक दलों के गठजोड़ को महागठबंधन के नाम से जाना (Kanhaiya Kumar Reveals Mahagathbandhan’s CM Face in Bihar) जाता है बता दें कि बिहार में इंडिया (इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इन्क्लूसिव अलायंस) गठबंधन के घटक दलों के गठजोड़ को महागठबंधन के नाम से जाना (Kanhaiya Kumar Reveals Mahagathbandhan’s CM Face in Bihar) जाता है। इस गठबंधन में वाम दलों के साथ ही राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी), कांग्रेस और विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) शामिल हैं। उसका मुकाबला राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) से है। एनडीए में बीजेपी, नीतीश कुमार की जेडीयू, चिराग पासवान की एलजेपी (आर), जीतन राम मांझी की हम, और उपेंद्र कुशवाहा की आरएलएम शामिल है। गौरतलब हो कि पिछले विधानसभा चुनाव में महागठबंधन के सबसे बड़े घटक राजद ने 144 सीटों पर चुनाव लड़ा था और 52 प्रतिशत की सफलता दर से 75 सीटें हासिल की थी तो वहीं कांग्रेस 70 सीटों पर चुनाव लड़ी थी और उसमे से सिर्फ 19 सीटें जीती थीं। इसके आलावा भाकपा (माले) लिबरेशन ने 19 सीट पर चुनाव लड़ा और 12 पर जीत हासिल की थी। प्राप्त जानकारी के मुताबिक कांग्रेस इस बार भी पिछली बार इतनी सीटों पर चुनाव लड़ना चाहती है, लेकिन राजद इस बार उसे उतनी सीटें देने के लिए तैयार नहीं है। फिर भी कांग्रेस इस बार ज्यादा मजबूती से चुनाव लड़ने की तैयारी में है। Latest News in Hindi Today Hindi news Kanhaiya Kumar Reveals Mahagathbandhan’s CM Face in Bihar #kanhaiyakumar #biharpolitics #mahagathbandhan #biharcmface #2025elections #cmcandidate

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बिहार चुनाव से पहले आयोग कर रहा वोटर लिस्ट की एसआईआर, मतदाताओं को दिखाने होंगे ये खास दस्तावेज

बिहार में इस साल के अंत तक होने वाले विधानसभा चुनाव (Bihar Assembly Elections) को लेकर एक तरफ जहां राजनीतिक पार्टियां अपनी तैयारी में जुटी हैं, तो वहीं दूसरी तरफ चुनाव आयोग भी अपनी तैयारी को पुख्ता कर रहा है। चुनाव आयोग (Election Commission) इस समय वोटर लिस्ट का विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) कर रहा है। इस दौरान चुनाव आयोग के कर्मचारी घर-घर जाकर मतदाताओं का सर्वे कर रहे हैं। इसके आधार पर ही वोटर लिस्ट में नए मतदाताओं को जोड़ने और फर्जी मतदाताओं को हटाने का कार्य किया जाएगा। एसआईआर (SIR) अभियान को लेकर बिहार के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के ऑफिस (Election Commission) द्वारा एक विस्तृत गाइडलाइन जारी की गई है। जिसमें बताया गया है कि ग्राउंड पर लिस्ट तैयार होने के बाद उसकी जांच बूथ लेवल अधिकारी (बीएलओ) करेंगे। इस दौरान मतदाताओं के वैध दस्तावेजों की जांच होगा, फिर लिस्ट की सत्यापन कर उसे वोटर लिस्ट में अपडेट किया जाएगा। इसके बाद लिस्ट में सुधार के लिए मतदाताओं को भी कुछ समय दिया जाएगा और फिर फाइनल लिस्ट जारी कर मतदान के चुनाव तारीखों (Bihar Assembly Elections) का ऐलान कर दिया जाएगा। चुनाव आयोग (Election Commission) द्वारा बिहार में मतदाता सूची का एसआईआर करीब 22 साल बाद किया जा रहा है। इससे पहले यह काम साल 2003 में किया गया था। ऐसे में मतदाताओं के मन में भी यह सवाल है कि चुनाव आयोग के कर्मचारी जब उनके घ्घर आएंगे तो उन्हें क्या-क्या दस्तावेज दिखाना होगा? 27 जुलाई तक होगा सत्यापन चुनाव आयोग के अनुसार एसआईआर (SIR) का कार्य शुरू हो गया है और यह अगले कुछ सप्ताह में पूरा हो जाएगा। इसके बाद बीएलओ 27 जुलाई तक मतदाताओं द्वारा दिए गए दस्तावेजों का सत्यापन करेंगे। एसआईआर के दौरान आयोग के कर्मचारी जब घर पहुंचेंगे तो हर वोटर को एक फॉर्म देंगे, जिसे उन्हें भरना होगा। मतदाता इस फॉर्म को भरकर अपने सभी डॉक्यूमेंट के साथ वापस बीएलओ को देंगे। अगर मतदाता चाहे तो इस फॉर्म को भरने के बाद उसे निर्वाचन विभाग की वेबसाइट पर ऑनलाइन भी अपलोड कर सकता है। आइये जानते हैं कि मतदाताओं को क्या-क्या दस्तावेज देना होगा।  1 जुलाई 1987 से पहले जन्म लेने वाले मतदाता जिन मतदाताओं का जन्म भारत में 1 जुलाई 1987 से पहले हुआ है, उन्हें अपनी जन्म तिथि और  स्थान की सत्यापन के लिए कोई भी एक वैध दस्तावेज देना होगा।  1987 से 2004 के बीच जन्में मतदाता जिन मतदाताओं का जन्म 1 जुलाई 1987 के बाद और 2 दिसंबर 2004 से पहले भारत में हुआ है, उन्हें अपने पहचान पत्र के साथ अपने माता-पिता में से भी किसी एक का पहचान पत्र देना होगा।  2 दिसंबर 2004 के बाद जन्मे मतदाता वहीं, जिन मतदाताओं (Election Commission) का जन्म 2 दिसंबर 2004 के बाद भारत में हुआ है उन्हें अपने साथ अपने माता-पिता (दोनों) का वैध दस्तावेज देना होगा। अगर माता-पिता में से कोई या फिर दोनों विदेशी नागरिक है, तो उसे अपने जन्म प्रमाण पत्र के साथ  विदेशी नागरिक के वैध पासपोर्ट और वीजा की सेल्फ अटेस्टेड प्रति भी जमा करनी होगी।  इसे भी पढ़ें:- गुजरात और पंजाब में आम आदमी पार्टी की जीत और 2027 के तूफान की आहट? चुनाव आयोग को देने होंगे ये दस्तावेज 1. आम मतदाता कोई भी वैध पहचान पत्र दे सकता है। वहीं केंद्र/राज्य सरकार के कर्मचारी अपने वेतन या पेंशन भुगतान आदेश की प्रति भी लगा सकते हैं।  2. सरकार द्वारा जारी 1 जुलाई 1987 से पहले जारी कोई भी पहचान पत्र/प्रमाण पत्र, स्थानीय निकाय, बैंक, पोस्ट ऑफिस, एलआईसी या पीएसयू द्वारा जारी कोई भी दस्तावेज मान्य होगा।  3. जन्म प्रमाण पत्र  4. विदेशी नागरिकों के लिए पासपोर्ट जरूरी  5. मान्यता प्राप्त किसी भी विश्वविद्यालय या बोर्ड द्वारा जारी शैक्षणिक प्रमाण पत्र या मैट्रिक का सर्टिफिकेट भी मान्य  6. केंद्र सरकार और राज्य सरकार की किसी संस्था द्वारा जारी मूल निवास प्रमाण पत्र मान्य है।  7. ओबीसी, एससी और एसटी का जाति प्रमाण पत्र 8. वन अधिकार प्रमाण पत्र 9. राज्य सरकार या किसी स्थानीय निकाय का फैमिली रजिस्टर में शामिल नाम का पत्र  10. सरकार द्वारा जारी किसी जमीन का या फिर घर का प्रमाण पत्र Latest News in Hindi Today Hindi news Election Commission #bihar2025 #voterlistupdate #elections2025 #voterverification #biharnews

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