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Rahul Gandhi Slams Bihar Govt Over Dalit Girl’s Death

Rahul Gandhi Slams Bihar Govt Over Dalit Girl’s Death: PMCH में दलित लड़की की मौत पर राहुल गांधी ने बिहार की डबल इंजन सरकार पर साधा निशाना, कही यह बात

रायबरेली के सांसद और लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी ने रविवार को पटना मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (पीएमसीएच) में एक नाबालिग दलित लड़की की मौत पर बिहार की राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) नेतृत्व वाली नीतीश सरकार पर जमकर निशाना (Rahul Gandhi Slams Bihar Govt Over Dalit Girl’s Death) साधा। इलाज में लापरवाही का आरोप लगाते हुए राहुल ने कहा, डबल इंजन सरकार की लापरवाही के कारण दलित लड़की की मौत हुई। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में आरोप लगाया कि मुजफ्फरपुर में नाबालिग दलित लड़की के साथ हुई क्रूरता और उसके बाद उसके इलाज में बरती गई लापरवाही बेहद शर्मनाक है। यदि उसे समय पर इलाज मिल जाता तो उसकी जान बच सकती थी। लेकिन डबल इंजन की सरकार ने न सिर्फ सुरक्षा देने में बल्कि उसकी जान बचाने में भी लापरवाही बरती।  जब तक पीड़ित परिवार को न्याय नहीं मिल जाता, हम चुप नहीं (Rahul Gandhi Slams Bihar Govt Over Dalit Girl’s Death) बैठेंगे- राहुल गांधी कांग्रेस नेता ने अपने पोस्ट में आगे आश्वासन दिया कि पीड़ित परिवार को न्याय (Rahul Gandhi Slams Bihar Govt Over Dalit Girl’s Death) मिलेगा। पोस्ट में लिखा कि जब तक पीड़ित परिवार को न्याय नहीं मिल जाता, हम चुप नहीं बैठेंगे। दोषियों और लापरवाह अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। हालांकि इससे पहले रविवार को कई कांग्रेसी कार्यकर्ताओं ने मामले में न्याय की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन किया था। विरोध प्रदर्शन में बोलते हुए बिहार कांग्रेस प्रमुख राजेश राम ने कहा, इस मामले के दो पहलू हैं। पहला, उसके साथ बलात्कार हुआ। बलात्कार के बाद उसकी हत्या की नृशंस कोशिश की गई और दूसरा, सरकार ने लापरवाही में कोई कसर नहीं छोड़ी। इलाज में देरी के कारण वह लड़की अब ज़िंदा नहीं है। इसके लिए सीधे तौर पर स्वास्थ्य सेवा प्रणाली की विफलता के लिए सरकार ज़िम्मेदार है। आप खुद जाकर देख लीजिए। आरोपी ने लड़की को कुरकुरे और चॉकलेट का लालच देकर किया (Rahul Gandhi Slams Bihar Govt Over Dalit Girl’s Death) दुष्कर्म  दरअसल, मुजफ्फरपुर के कुंडली की एक नाबालिग लड़की के साथ दिल दहला देने वाला दुष्कर्म (Rahul Gandhi Slams Bihar Govt Over Dalit Girl’s Death) हुआ था। प्राप्त जानकारी के मुताबिक 30 वर्षीय आरोपी रोहित कुमार साहनी ने लड़की को कुरकुरे और चॉकलेट का लालच देकर घर से बुलाया और फिर तालाब के पास एक सुनसान जगह ले जाकर दुष्कर्म किया। अपनी हवस मिटाने के बाद चाकू से हमला कर उसकी गर्दन काट दी। इस बीच लड़की को शाम करीब 7 बजे बेहोशी की हालत में तालाब के पास पाया गया। आरोपी को उसी रात गिरफ्तार कर लिया गया। खैर, एम्स, पटना द्वारा इलाज से इनकार किए जाने के चार दिन बाद पीएमसीएच लाया गया था। इस बीच दुष्कर्म का शिकार हुई नाबालिग लड़की को पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल के बाहर घंटों तक एंबुलेंस में इंतजार कराया गया। कड़ी मशक्कत के बाद पीड़ित को आखिरकार अस्पताल में भर्ती कराया गया। लेकिन चोट इतनी गंभीर थी कि नाबालिग ने अगली सुबह दम ही तोड़ दिया। इस बीच सिस्टम की संवेदनहीनता और प्रशासन की विफलता पर उठे सवाल। दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग।  इसे भी पढ़ें:- अमेरिका में इस वजह से एक सनकी ने यहूदी भीड़ पर फेंका पेट्रोल बम, लगाया ‘फ्री फिलिस्तीन’ का नारा नाबालिग लड़की बलात्कार की शिकार (Rahul Gandhi Slams Bihar Govt Over Dalit Girl’s Death) थी अधिकारियों के मुताबिक नाबालिग लड़की बलात्कार की शिकार (Rahul Gandhi Slams Bihar Govt Over Dalit Girl’s Death) थी। हालांकि, पीएमसीएच के प्रभारी अधीक्षक अभिजीत सिंह ने इलाज में देरी के पीड़ित परिवार के दावों को नकारते हुए कहा, गंभीर रूप से घायल अवस्था में पीएमसीएच लाई गई लड़की को उचित चिकित्सा सुविधा दी गई थी। इस अधिक प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा, जब उसे यहां भर्ती कराया गया था, तब हमने अपनी तरफ से पूरी चिकित्सा देखभाल प्रदान की थी। परिवार द्वारा लगाए गए दावे कि इलाज में देरी हुई, निराधार हैं। हमने वह सब कुछ किया जो हम कर सकते थे। हमने सभी विभागों से परामर्श किया, जिनकी आवश्यकता थी और यह सुनिश्चित किया कि उसे आईसीयू में भी उपचार मिले। मुजफ्फरपुर ग्रामीण पुलिस अधीक्षक विद्या सागर ने बताया कि पीड़िता के शरीर पर कई गंभीर चोटें थीं। गले की चोट की वजह से वह बोल नहीं पा रही थी, लेकिन उसने इशारों से हमसे पूरी बात बताई। आरोपी का पिछले रिकॉर्ड खराब है और वह लड़कियों को परेशान करता रहा है। Latest News in Hindi Today Hindi news Rahul Gandhi Slams Bihar Govt Over Dalit Girl’s Death #RahulGandhi #BiharNews #DalitRights #PMCH #BreakingNews #BiharGovernment #JusticeForDalitGirl #PoliticsToday

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CM Nitish Kumar

बिहार सरकार का बड़ा फैसला: सभी वर्गों को मिलेगा सम्मान

बिहार की राजनीति और प्रशासनिक व्यवस्था में एक नया अध्याय जुड़ गया है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (CM Nitish Kumar) की सरकार ने सामाजिक समावेशिता और सभी वर्गों के न्यायोचित विकास को सुनिश्चित करने के लिए दो नए आयोगों का गठन किया है। यह कदम समाज के हर तबके की समस्याओं को समझने और उन्हें हल करने की दिशा में एक बड़ा प्रयास माना जा रहा है। समाज के हर वर्ग के लिए सुनवाई और समाधान बिहार सरकार (Bihar Government) ने उच्च जाति विकास आयोग (Upper Caste Development Commission) और राज्य अनुसूचित जनजाति आयोग (State Scheduled Tribe Commission) का गठन करके यह स्पष्ट कर दिया है कि वह राज्य के हर नागरिक को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए प्रतिबद्ध है। इन दोनों आयोगों का कार्य केवल समस्याएं पहचानना नहीं होगा, बल्कि यह आयोग सरकार को नीतिगत सुझाव भी देंगे ताकि हर वर्ग को उसका अधिकार मिल सके। उच्च जाति विकास आयोग की भूमिका सरकार द्वारा गठित उच्च जाति विकास आयोग का नेतृत्व भाजपा नेता और पूर्व मंत्री महाचंद्र प्रसाद सिंह को सौंपा गया है। आयोग के उपाध्यक्ष राजीव रंजन प्रसाद होंगे और इसके अन्य सदस्य दयानंद राय, जय कृष्ण झा और राजकुमार सिंह हैं। इनका कार्यकाल तीन वर्षों का निर्धारित किया गया है। यह आयोग बिहार में उच्च जातियों की शैक्षिक, सामाजिक और आर्थिक स्थिति का मूल्यांकन करेगा। इसके आधार पर आयोग राज्य सरकार को सुझाव देगा कि इस वर्ग के उत्थान के लिए किन योजनाओं और संसाधनों की आवश्यकता है। अक्सर यह धारणा बनी रहती है कि केवल पिछड़े वर्गों को ही सहायता की आवश्यकता है, लेकिन इस आयोग के गठन से यह संदेश गया है कि हर वर्ग की जरूरतें अलग हैं और उन्हें ध्यान में रखते हुए नीति बनानी चाहिए। अनुसूचित जनजाति आयोग: अधिकारों की रक्षा की ओर कदम बिहार सरकार (Bihar Government) ने अनुसूचित जनजातियों के हितों की रक्षा और उनके सतत विकास को ध्यान में रखते हुए राज्य अनुसूचित जनजाति आयोग की स्थापना की है। इस आयोग के अध्यक्ष शैलेंद्र कुमार बनाए गए हैं, जबकि उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी सुरेंद्र उरांव को दी गई है। अन्य सदस्य प्रेमशिला गुप्ता, तल्लू बासकी और राजू कुमार हैं। इस आयोग का मुख्य उद्देश्य बिहार की आदिवासी आबादी की समस्याओं की गहराई से पड़ताल करना और उनके समाधान के लिए सरकार को व्यावहारिक और प्रभावी सुझाव देना है। यह आयोग भी तीन वर्षों तक कार्य करेगा और एक माध्यम बनेगा जिससे आदिवासी समुदाय की आवाज सीधे प्रशासन तक पहुंचे। समावेशी विकास की ओर निर्णायक कदम इन दोनों आयोगों का गठन बिहार सरकार की एक रणनीतिक सोच का परिणाम है, जिसमें समावेशी विकास को प्राथमिकता दी गई है। नीतीश कुमार (Nitish Kumar) का यह कदम स्पष्ट करता है कि सरकार अब केवल किसी एक वर्ग के विकास पर ध्यान नहीं देगी, बल्कि हर समाज, जाति और समुदाय को विकास के पथ पर साथ लेकर चलेगी। यह प्रयास इस बात का भी संकेत है कि समाज में समानता और न्याय की स्थापना बिना समग्र दृष्टिकोण के संभव नहीं है। यदि राज्य का हर नागरिक अपने आप को प्रशासनिक निर्णयों में सहभागी और प्रतिनिधित्व प्राप्त महसूस करेगा, तो सामाजिक ताना-बाना और मजबूत होगा। इसे भी पढ़ें:- एमपी-हरियाणा में जिलाध्यक्षों की नियुक्ति, ऑब्जर्वरों की टीम तैनात ऐसे में कई महत्वपूर्ण सवाल भी खड़े होते हैं। जैसे: 1. क्या इन दोनों आयोगों द्वारा दिए गए सुझावों को कानूनी रूप से लागू करने की कोई गारंटी या स्पष्ट नीति बनाई गई है? 2. क्या इन आयोगों के गठन के बाद अन्य वर्गों (जैसे पिछड़ा वर्ग, अल्पसंख्यक समुदाय) के लिए भी समान रूप से ठोस और प्रभावी नीतिगत प्रयास किए जाएंगे? 3. आयोगों द्वारा प्राप्त रिपोर्टों और सिफारिशों को सार्वजनिक किया जाएगा या नहीं, ताकि पारदर्शिता बनी रहे और जनता भी निगरानी रख सके? इस नई पहल के साथ बिहार सरकार (Bihar Government) ने यह संकेत दिया है कि सामाजिक संतुलन और हर वर्ग को विकास में सहभागी बनाना उसकी प्राथमिकता है। यदि यह प्रयास ईमानदारी से लागू किए जाते हैं, तो यह राज्य के सामाजिक और आर्थिक ढांचे में एक क्रांतिकारी परिवर्तन ला सकते हैं। Latest News in Hindi Today Hindi news #BiharGovernment #NitishKumar #CMNitishKumar #BiharPolitics

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Lalu Yadav expels son

Lalu Expels Son from Party: इस वजह से लालू ने अपने बड़े बेटे को निकाला पार्टी से, तेजस्वी यादव ने कही यह बात

अक्सर अपने बड़बोलेपन की वजह से अक्सर विवादों में रहने वाले राष्ट्रिय जनता दल के मुखिया लालू प्रसाद यादव के बड़े लाल इन दिनों सुर्ख़ियों में बने हुए हैं।  राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव ने अपने बड़े बेटे तेज प्रताप यादव को पार्टी और परिवार दोनों से दूर करने की घोषणा की (Lalu Expels Son from Party) है। दरअसल, एक दिन पहले शनिवार को तेज प्रताप यादव के सोशल मीडिया अकाउंट का कथित पोस्ट वायरल हुआ था। सोशल मीडिया पर वायरल हुए इस पोस्ट में दावा किया गया था कि यह पोस्ट तेज प्रताप यादव ने किया हैं। उक्त पोस्ट में उन्हें एक युवती के साथ देखा गया था। इसमें लिखा गया था, “मैं तेज प्रताप यादव और मेरे साथ इस तस्वीर में जो दिख रही हैं, उनका नाम अनुष्का यादव है। हम दोनों पिछले 12 सालों से एक-दूसरे को जानते हैं और प्यार भी करते हैं। हम लोग पिछले 12 साल से एक रिलेशनशिप में रह रहे हैं।” हालांकि, इस पोस्ट से जुड़े स्क्रीनशॉट के वायरल होने के कुछ घंटे बाद तेज प्रताप यादव की तरफ से सफाई भी आई। उन्होंने अपनी सफाई में कहा कि “मेरे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को हैक एवं मेरे तस्वीरों को गलत तरीके से एडिट कर मुझे और मेरे परिवार वालों को परेशान और बदनाम किया जा रहा है, मैं अपने शुभचिंतकों और फॉलोअर्स से अपील करता हूं कि वे सतर्क रहें और किसी भी अफवाह पर ध्यान न दें।” हम ऐसी चीजों को पसंद नहीं करते हैं और न बर्दाश्त हम कर सकते (Lalu Expels Son from Party) हैं- तेजस्वी यादव खैर, इस बीच तेज प्रताप यादव के पार्टी से निष्कासित करने को लेकर जब तेजस्वी यादव से पूछा गया (Lalu Expels Son from Party) तो जवाब में उन्होंने कहा कि “ऐसी चीजें को वो अनदेखा नहीं कर सकते हैं। बर्दास्त भी नहीं कर सकते हैं।” तेजस्वी यादव ने अपनी बात रखते हुए कहा कि “एक बात स्पष्ट है, जहां तक मेरी बात है, हमें ये सब चीजें न तो अच्छा लगती हैं, न बर्दाश्त करते हैं। दूसरी बात हम अपना काम कर रहे हैं, बिहार के प्रति समर्पित हैं और जनता के दुख-सुख में भाग ले रहे हैं। जनता के मुद्दे को उठा रहे हैं। हम नेता विरोधी दल हैं। जहां तक मेरे बड़े भाई की बात है। राजनीतिक जीवन में, निजी जीवन भी अलग होता है, तो निजी जीवन के फैसले और निर्णय, क्योंकि वो बालिग हैं, बड़े हैं, उनको अधिकार है। वो अपना निर्णय, क्या उनका सही होगा, क्या नुकसान होगा, ये अपना निर्णय वो खुद लें और राष्ट्रीय अध्यक्ष जी दल के नेता हैं, उन्होंने अपने ट्वीट के माध्यम से स्पष्ट कर दिया है, जो उनकी भावनाएं थीं। हम ऐसी चीजों को पसंद नहीं करते हैं और न बर्दाश्त हम कर सकते हैं।” तेजप्रताप यादव को गैरजिम्मेदाराना (Lalu Expels Son from Party) व्यवहार के कारण छह साल के लिए पार्टी से किया निष्कासित  तो वहीं लालू प्रसाद ने रविवार को अपने बड़े बेटे तेजप्रताप यादव को गैरजिम्मेदाराना (Lalu Expels Son from Party) व्यवहार के कारण छह साल के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया है। यही नहीं, उनके साथ सभी पारिवारिक संबंध भी तोड़ दिए हैं। अपने फैसले पर लालू प्रसाद ने कहा कि “ज्येष्ठ पुत्र की गतिविधि, लोक आचरण तथा गैर जिम्मेदाराना व्यवहार हमारे पारिवारिक मूल्यों और संस्कारों के अनुरूप नहीं है। उपरोक्त परिस्थितियों के चलते उसे पार्टी और परिवार से दूर करता हूं। अब से पार्टी और परिवार में उसकी किसी भी प्रकार की कोई भूमिका नहीं रहेगी। उसे पार्टी से छह साल के लिए निष्कासित किया जाता है। अपने निजी जीवन का भला-बुरा और गुण-दोष देखने में तेजप्रताप स्वयं सक्षम हैं। उससे जो भी लोग संबंध रखेंगे वो स्वविवेक से निर्णय लें। लोकजीवन में लोकलाज का सदैव हिमायती रहा हूं। परिवार के आज्ञाकारी सदस्यों ने सावर्जनिक जीवन में इसी विचार को अंगीकार कर अनुसरण किया है।” इसे भी पढ़ें:-लालू की पार्टी आरजेडी के नेता शंभू गुप्ता 2 करोड़ रुपये की अफीम के साथ गिरफ्तार तेज प्रताप यादव और अनुष्का यादव की तस्वीरें सोशल मीडिया पर (Lalu Expels Son from Party) हो रही हैं वायरल  बता दें कि तेज प्रताप यादव, लालू यादव के बड़े बेटे हैं। हाल के दिनों में वो अपनी दूसरी (Lalu Expels Son from Party) शादी और प्रेम संबंधों को लेकर विवादों में रह चुके हैं। अभी एक दिन पहले ही तेज प्रताप यादव के फेसबुक पेज से नए रिश्ते के बारे में जानकारी दी गई थी। हालांकि तेज प्रताप ने इससे साफ़ इनकार कर दिया है। यह तो ठीक, लेकिन जिस तरह से तेज प्रताप यादव और अनुष्का यादव की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं, उससे तो ऐसा लगता है कि लालू परिवार सकते में आ गया है। कारण यही जो, लालू यादव ने पार्टी और परिवार दोनों से अपने बड़े बेटे को दूर कर दिया।  Latest News in Hindi Today Hindi news Lalu Expels Son from Party #LaluYadav #TejashwiYadav #TejPratapYadav #RJD #BiharPolitics #LaluExpelsSon #PoliticalDrama

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Nitish Hit in Survey, BJP & Tejashwi Gain Momentum

Nitish Hit in Survey, BJP & Tejashwi Gain Momentum: ताजा सर्वे में नितीश को लगा झटका, बीजेपी और तेजस्वी की बल्ले-बल्ले 

इस साल बिहार में चुनाव होना है। फ़िलहाल भारतीय चुनाव आयोग चुनावी तैयारियों की समीक्षा कर रहा है। अभी तक चुनाव की तारीखों की घोषणा नहीं की है। अक्टूबर-नवंबर होने वाले बिहार चुनाव में भाजपा-जदयू (एनडीए गठबंधन) का मुकाबला राजद-कांग्रेस के महागठबंधन से होगा। खैर, चुनाव होने में अभी तो महीनो बाकी है। इस बीच इंकइनसाइट द्वारा मई के शुरू में जारी एक नए ओपिनियन पोल ने नेताओं की नींद हराम कर दी है। सर्वे के मुताबिक सूबे की महिलाएं राज्य में सरकार बनाने के लिए सत्तारूढ़ गठबंधन को अपनी पहली पसंद बता (Nitish Hit in Survey, BJP & Tejashwi Gain Momentum) रही हैं। दरअसल, सर्वे में शामिल 45 प्रतिशत महिलाओं ने कहा कि वे नीतीश को फिर से सूबे के मुखिया के तौर पर देखना चाहती हैं। यही नहीं, सर्वे के मुताबिक बिहार में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व वाला राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन, राजद के नेतृत्व वाले महागठबंधन से अधिक लोकप्रिय है। इस सर्वे में 60.4 प्रतिशत महिलाओं ने दावा किया है कि वो सत्तारूढ़ गठबंधन को वोट देना पसंद करेंगी, जबकि 28.4 प्रतिशत ने महागठबंधन का समर्थन किया है।  18-29 आयु वर्ग के 42 प्रतिशत लोगों ने अगले सीएम के तौर पर तेजस्वी यादव को किया (Nitish Hit in Survey, BJP & Tejashwi Gain Momentum) पसंद   एक तरफ जहाँ नितीश कुमार बतौर महिलाओं की पहली पसंद बने हुए हैं तो वहीं आरजेडी नेता तेजस्वी यादव युवाओं के बीच पहली पसंद बनकर उभरे हैं।  इंकइनसाइट के सर्वे में शामिल 18-29 आयु वर्ग के 42 प्रतिशत लोगों ने अगले सीएम के तौर पर नीतीश की जगह उन्हें पसंद किया (Nitish Hit in Survey, BJP & Tejashwi Gain Momentum) है। हालांकि, एनडीए अभी भी युवाओं के बीच पहली पसंद बनी हुई है। 18-29 आयु वर्ग के 44.6 प्रतिशत लोगों ने कहा कि “वो एनडीए को वोट देंगे, वहीं 39.5 प्रतिशत ने कहा कि वे महागठबंधन को सत्ता में देखना पसंद करेंगे।” सिर्फ 0.76 प्रतिशत ने कहा कि “वो प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी को वोट देंगे।” इस ओपिनियन पोल में शामिल 39 प्रतिशत लोगों ने कहा कि “वो तेजस्वी यादव को बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में देखना चाहते (Nitish Hit in Survey, BJP & Tejashwi Gain Momentum) हैं तो वहीं 34 प्रतिशत लोगों ने कहा कि “वो इस पद पर नीतीश कुमार को पसंद करेंगे।” बता दें कि ये दूसरा ओपिनियन पोल है जिसमें आरजेडी के तेजस्वी यादव को सीएम पद की पहली पसंद बताया गया है। गौरतलब हो कि “सी-वोटर के पहले के प्री-पोल सर्वे में तेजस्वी यादव को सीएम पद के लिए शीर्ष पसंद बताया गया था। उसमें प्रशांत किशोर दूसरे स्थान पर थे और उसके बाद नीतीश कुमार तीसरे स्थान पर थे।  इसे भी पढ़ें:-लालू की पार्टी आरजेडी के नेता शंभू गुप्ता 2 करोड़ रुपये की अफीम के साथ गिरफ्तार तेजस्वी यादव सीएम के रूप में शीर्ष बने हुए (Nitish Hit in Survey, BJP & Tejashwi Gain Momentum) हैं पसंद  गौर करने वाली बड़ी बात यह कि “सर्वे के मुताबिक, 30-39 वर्ष आयु वर्ग और 60 वर्ष से अधिक आयु वर्ग के लोगों के बीच तेजस्वी यादव सीएम के रूप में शीर्ष पसंद बने हुए (Nitish Hit in Survey, BJP & Tejashwi Gain Momentum) हैं। दूसरी ओर, 40-49 वर्ष और 50-59 वर्ष आयु वर्ग के मतदाताओं के बीच नीतीश कुमार शीर्ष पसंद हैं। दिलचस्प बात ये है कि अधिकांश 45.8 प्रतिशत पुरुषों ने कहा कि “वो तेजस्वी यादव को मुख्यमंत्री के रूप में पसंद करेंगे।” कुल-मिलाकर इस सर्वे के मुताबिक महिलाओं के बीच, राज्य में एक और कार्यकाल के लिए सरकार बनाने हेतु एनडीए शीर्ष विकल्प बना हुआ है। इस सर्वे में 60.4 प्रतिशत ने दावा किया है कि वो सत्तारूढ़ गठबंधन को वोट देना पसंद करेंगी, तो वहीं 28.4 प्रतिशत ने महागठबंधन का समर्थन किया है। Latest News in Hindi Today Hindi news Nitish Hit in Survey, BJP & Tejashwi Gain Momentum #NitishKumar #BiharPolitics #BJPVictory #TejashwiYadav #ElectionSurvey #PoliticalTwist #BJPvsJDU #IndiaElections #BiharUpdates #VoterMood

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Midday meal snake incident

Midday meal snake: यहाँ मिड डे मील में मिला सांप, बच्चों को जबरन खिलाया गया, 50 से अधिक बीमार, मचा हड़कंप

बच्चों को जरूरी पोषक तत्व मिल सके इस लिए सरकार ने स्कूलों में मिड-डे मिल की व्यवस्था की है। यह तो ठीक लेकिन मिड-डे मिल को लेकर स्थानीय प्रशासन अधिक सजग नहीं (Midday meal snake) रहती। आये दिन मिड-डे मिल में बरती गई लापरवाहियों की खबरें सुर्खियां बनती रहती हैं। ताजा मामला है बिहार की राजधानी पटना का, जहाँ पटना के मोकामा प्रखंड के मेकरा गांव स्थित उत्क्रमित मध्य विद्यालय में शुक्रवार को मिड डे मील का खाना खाकर 50 से अधिक बच्चों की तबियत खराब हो गई। मिड-डे मिल खाने के बाद सभी बच्चे चक्कर, उल्टी, पेट में मरोड़ की शिकायत कर रहे थे। दरअसल, प्राप्त जानकारी के मुताबिक स्कूल में दोपहर को जब मिड डे मील परोसा जा रहा था, तब कुछ बच्चों ने देखा कि सब्जी में सांप पड़ा हुआ है।  रसोइया ने सांप निकाल कर बोरे में फेंक (Midday meal snake) दिया खैर इस बीच जब बच्चों में इसकी जानकारी शिक्षकों व रसोइया को दी। आदतन शिक्षकों ने इस पर ध्यान नहीं दिया। बड़ी बात यह कि रसोइया ने सांप निकाल कर बोरे में फेंक दिया। इसके बाद वही खाना सभी को परोसा (Midday meal snake) दिया गया। स्कूल में करीब पांच सौ बच्चे थे लेकिन सौ ने खाना खाने से इंकार कर दिया। सूचना पाकर शिक्षक व स्कूल के अन्य कर्मचारी ताला बंद कर चले गए थे। लगभग पचास बच्चों को करीब चार घंटे तक अस्पताल में रख कर उपचार किया गया। डाक्टरों के अनुसार सभी बच्चे अब स्वस्थ और खतरे से बाहर हैं। मामले की जानकारी होते ही ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। आक्रोशित ग्रामीण सड़कों पर उतर आए और हंगामा करने लगे। इस बीच लोगों का हंगामा बढ़ता देख मौके पर पहुंची पुलिस और जिला प्रशासन के अधिकारियों ने कार्रवाई का आश्वासन देकर उन्हें शांत करवा दिया। इसके अलावा आनन-फानन में बच्चों को रेफरल अस्पताल में भर्ती करवा दिया।  इसे भी पढ़ें:- मधुबनी में गरजते हुए पीएम मोदी ने कहा, आतंकियों को उनकी सोच से भी ज्यादा दी जाएगी बड़ी सजा मिड डे मील में परोसी जाने वाली सब्जी में सांप गिरा हुआ (Midday meal snake) था खैर, डा. पंकज कुमार ने बताया कि “फिलहाल सभी बच्चों की हालत खतरे से बाहर है।” जानकारी के मुताबिक बच्चों ने बताया कि मिड डे मील में परोसी जाने वाली सब्जी में सांप गिरा हुआ (Midday meal snake) था। इसकी जानकारी उन्होंने शिक्षकों व रसोइयां को दी। शिकायत सुनकर कार्रवाई करने के बजाय उन्होंने डांट-डपट जबरन बच्चों को खाना खाने पर मजबूर किया। गौरतलब हो कि स्कूल में पांच सौ बच्चे थे। पांच सौ में से चार सौ ने मिड-डे खाया था।  जिन बच्चों ने खाना खाया था, घर पहुंचने के बाद उन्हें उल्टी व पेट में दर्द होने लगा। इसकी वजह बताते हुए बच्चों ने अपने परिजनों को खाने में सांप होने की जानकारी दी। फिर क्या था, परिजन स्कूल के सामने सड़क जाम कर हंगामा करने लगे।  Latest News in Hindi Today Hindi Midday meal snake #MiddayMeal #SnakeInMeal #SchoolFoodScandal #IndiaNews #ChildSafety #MiddayMealHorror #FoodPoisoning #SchoolNews #HealthCrisis #BreakingNews

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