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CJP Protest से पहले गृह मंत्रालय का अलर्ट, राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को दिल्ली पुलिस के साथ समन्वय के निर्देश

नई दिल्ली: 10 अक्टूबर को प्रस्तावित CJP प्रदर्शन से पहले केंद्रीय गृह मंत्रालय ने सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं। मंत्रालय ने आशंका जताई है कि इस प्रदर्शन के “गंभीर कानून-व्यवस्था संबंधी प्रभाव” हो सकते हैं। केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन ने राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के पुलिस प्रमुखों को दिल्ली पुलिस के साथ रियल-टाइम इंटेलिजेंस साझा करने और किसी भी संभावित स्थिति से निपटने के लिए समन्वय मजबूत करने को कहा है। गृह मंत्रालय के अनुसार, प्रदर्शन की अनुमति नहीं मिलने के बावजूद CJP समर्थक अलग-अलग राज्यों से दिल्ली पहुंचने की कोशिश कर सकते हैं। ऐसे में संभावित भीड़, यातायात बाधित होने और सार्वजनिक व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका को देखते हुए सुरक्षा एजेंसियों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं। गृह सचिव ने राज्यों के पुलिस प्रमुखों को लिखा पत्र केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन ने सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के पुलिस प्रमुखों को पत्र भेजकर CJP के प्रदर्शन से संबंधित खुफिया जानकारी तत्काल दिल्ली पुलिस के साथ साझा करने को कहा है। साथ ही, किसी भी संभावित कानून-व्यवस्था की समस्या को रोकने के लिए आपसी समन्वय बढ़ाने पर जोर दिया गया है। गृह मंत्रालय ने जताई कानून-व्यवस्था बिगड़ने की आशंका मंत्रालय ने 10 अक्टूबर को प्रस्तावित प्रदर्शन के सार्वजनिक व्यवस्था पर गंभीर असर पड़ने की आशंका जताई है। उपलब्ध खुफिया सूचनाओं का हवाला देते हुए कहा गया है कि बड़ी संख्या में समर्थक दिल्ली पहुंचने का प्रयास कर सकते हैं। इससे यातायात व्यवस्था प्रभावित होने, बिना अनुमति भीड़ जुटने और सार्वजनिक सुविधाओं पर अतिरिक्त दबाव पड़ने की आशंका जताई गई है। जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति नहीं दिल्ली पुलिस ने CJP को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने की अनुमति देने से इनकार कर दिया है। रिपोर्टों के अनुसार, आयोजकों ने 7 अक्टूबर को प्रदर्शन के लिए अनुरोध किया था, जबकि निर्धारित प्रक्रिया के तहत प्रस्तावित सभा से कम से कम 10 दिन पहले आवेदन देना आवश्यक बताया गया है। पुलिस ने पहले हुए प्रदर्शनों के दौरान कथित तौर पर शर्तों और आश्वासनों का उल्लंघन किए जाने को भी अनुमति नहीं देने के कारणों में शामिल किया है। राज्यों को समर्थकों की आवाजाही पर नजर रखने के निर्देश गृह मंत्रालय ने राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों से उन समूहों की आवाजाही पर नजर रखने को कहा है, जो प्रदर्शन में शामिल होने के लिए दिल्ली रवाना हो सकते हैं। अधिकारियों को आयोजकों, यात्रा योजनाओं, ठहरने की व्यवस्था और प्रदर्शन के लिए जुटाए जा रहे लोगों से संबंधित जानकारी दिल्ली पुलिस के साथ साझा करने के निर्देश दिए गए हैं। रियल-टाइम इंटेलिजेंस साझा करने पर जोर मंत्रालय के निर्देशों में तत्काल खुफिया जानकारी साझा करना प्रमुखता से शामिल है। यदि किसी राज्य से बड़ी संख्या में लोग दिल्ली के लिए रवाना होते हैं या प्रदर्शन से जुड़ी असामान्य गतिविधियां सामने आती हैं, तो इसकी जानकारी तुरंत दिल्ली पुलिस तक पहुंचाने को कहा गया है। इसका उद्देश्य संभावित भीड़ और कानून-व्यवस्था से जुड़ी चुनौतियों के बारे में समय रहते जानकारी जुटाना और संबंधित एजेंसियों के बीच तालमेल बनाए रखना है। निवारक कार्रवाई करने के भी निर्देश गृह मंत्रालय ने राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों से मौजूदा कानूनी प्रावधानों के तहत आवश्यक निवारक कदम उठाने को कहा है। रिपोर्टों के मुताबिक, इसमें नोटिस जारी करना, गतिविधियों की निगरानी करना और परिस्थितियों के अनुसार अन्य कानूनी कार्रवाई करना शामिल हो सकता है। 4 अक्टूबर की बैठक में भी हुई थी चर्चा द इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के अनुसार, 4 अक्टूबर को गृह मंत्रालय की समन्वय बैठक में भी CJP के प्रस्तावित प्रदर्शन और समर्थकों की लामबंदी को लेकर चर्चा हुई थी। रिपोर्ट में राज्यों को नोटिस देने, संभावित हिरासत और संगठन की फंडिंग से जुड़े पहलुओं की जांच जैसे मुद्दों पर चर्चा किए जाने का उल्लेख किया गया है। दिल्ली पुलिस ने तैयार किया व्यापक सुरक्षा प्लान प्रदर्शन को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए व्यापक योजना तैयार की है। रिपोर्टों के अनुसार, इसमें कई स्थानों पर नाकेबंदी, हिरासत केंद्रों की व्यवस्था और विभिन्न जिलों के बीच समन्वय बढ़ाने जैसे कदम शामिल हैं। नई दिल्ली जिले में बैरिकेडिंग और निगरानी व्यवस्था को भी मजबूत किया गया है, ताकि किसी संभावित भीड़ को नियंत्रित किया जा सके और सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखी जा सके। नई दिल्ली में BNSS की धारा 163 लागू नई दिल्ली क्षेत्र में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा लागू किए जाने की भी रिपोर्ट है। इस प्रावधान के तहत सक्षम अधिकारी सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए परिस्थितियों के अनुसार सभाओं, जुलूसों और लोगों की आवाजाही पर प्रतिबंध लगा सकते हैं। CJP की समर्थकों से शांति बनाए रखने की अपील दूसरी ओर, CJP ने अपने समर्थकों के लिए एडवाइजरी जारी कर शांतिपूर्ण व्यवहार करने की अपील की है। संगठन ने बैरिकेड तोड़ने, प्रतिबंधित क्षेत्रों में प्रवेश करने, हिंसा करने और सार्वजनिक या निजी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने से बचने को कहा है। अभिजीत दीपके समेत कई नेताओं को हिरासत में लिया गया 10 अक्टूबर को CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके, सौरव दास और आशुतोष रांका समेत कई नेताओं को दिल्ली पहुंचने के बाद हिरासत में लिए जाने की खबरें सामने आईं। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, प्रदर्शन को रोकने के लिए राजधानी में व्यापक सुरक्षा तैनाती की गई और कई लोगों को हिरासत में लिया गया। सुरक्षा और विरोध प्रदर्शन के अधिकार पर बहस गृह मंत्रालय और दिल्ली पुलिस का पक्ष है कि सुरक्षा संबंधी कदम सार्वजनिक व्यवस्था, यातायात और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उठाए जा रहे हैं। वहीं, CJP और उसके समर्थक इन प्रतिबंधों को शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन के संवैधानिक अधिकार पर अत्यधिक रोक के रूप में देख रहे हैं। यह मामला अब सार्वजनिक सुरक्षा और शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार के बीच संतुलन को लेकर बहस का विषय बन गया है। संविधान का अनुच्छेद 19(1)(b) नागरिकों को शांतिपूर्वक और बिना हथियार एकत्र होने का अधिकार देता है, हालांकि सार्वजनिक व्यवस्था सहित संवैधानिक आधारों पर इस अधिकार पर उचित प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं। स्रोत: द इंडियन एक्सप्रेस / हिंदुस्तान टाइम्स / रॉयटर्स जय राष्ट्र न्यूज़

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CJP प्रदर्शन से पहले दिल्ली में बड़ा सुरक्षा अभियान, अभिजीत दीपके, सौरव दास और आशुतोष रांका हिरासत में

नई दिल्ली: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया के विरोध में 10 अक्टूबर को प्रस्तावित CJP प्रदर्शन से पहले दिल्ली में व्यापक सुरक्षा इंतजाम किए गए। इस दौरान CJP के प्रमुख नेता अभिजीत दीपके, सौरव दास और आशुतोष रांका को दिल्ली पहुंचने के बाद हिरासत में लिए जाने की खबर सामने आई। वहीं, मध्य दिल्ली के कई इलाकों में मेट्रो सेवाओं तक पहुंच, यातायात और मोबाइल इंटरनेट पर भी प्रतिबंध लगाए गए। दिल्ली पहुंचते ही हिरासत में लिए गए CJP नेता रिपोर्टों के मुताबिक, अभिजीत दीपके, सौरव दास और आशुतोष रांका को दिल्ली एयरपोर्ट पर विमान उतरने के बाद हिरासत में लिया गया। CJP नेताओं ने इस कार्रवाई का विरोध करते हुए कहा कि वे शांतिपूर्ण प्रदर्शन में शामिल होने के लिए दिल्ली आए थे। इस कार्रवाई के बाद प्रस्तावित प्रदर्शन और पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चर्चा तेज हो गई। कई अन्य प्रदर्शनकारी भी हिरासत में दिल्ली पुलिस ने CJP समर्थकों के अलावा अन्य प्रदर्शनकारियों को भी हिरासत में लिया। Reuters की रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली में बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया। जंतर-मंतर और आसपास के क्षेत्रों में अनधिकृत जमावड़े को रोकने के लिए सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ाई गई थी। दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन की अनुमति देने से किया इनकार दिल्ली पुलिस ने 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन की अनुमति देने से इनकार कर दिया था। पुलिस के अनुसार, प्रदर्शन के लिए आवेदन निर्धारित 10 दिन की समयसीमा के बजाय केवल तीन दिन पहले दिया गया था। अधिकारियों ने पिछले प्रदर्शनों के दौरान कानून-व्यवस्था से जुड़ी कथित समस्याओं का भी हवाला दिया। इसके बाद प्रदर्शन की अनुमति और पुलिस की कार्रवाई को लेकर सवाल उठे। 45 मेट्रो स्टेशनों के प्रवेश और निकास द्वार बंद सुरक्षा संबंधी निर्देशों के बाद दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) ने 45 मेट्रो स्टेशनों के प्रवेश और निकास द्वार बंद करने की घोषणा की थी। यह प्रतिबंध 9 अक्टूबर रात 9 बजे से 10 अक्टूबर शाम 6 बजे तक लागू रखने की जानकारी दी गई थी। हालांकि, प्रभावित स्टेशनों में से अधिकांश पर इंटरचेंज की सुविधा जारी रहने की बात कही गई। इन प्रतिबंधों का उद्देश्य संवेदनशील इलाकों में लोगों की आवाजाही नियंत्रित करना बताया गया। पहले 57 मेट्रो स्टेशनों पर प्रतिबंध की योजना शुरुआत में 57 मेट्रो स्टेशनों पर प्रतिबंध लगाने की योजना सामने आई थी। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट में इस व्यवस्था को चुनौती दी गई और व्यापक परिवहन प्रतिबंधों को लेकर चिंता जताई गई। रिपोर्टों के अनुसार, बाद में प्रतिबंधित स्टेशनों की संख्या घटाकर 45 कर दी गई। इस घटनाक्रम ने सुरक्षा व्यवस्था और आम यात्रियों की सुविधा के बीच संतुलन का सवाल खड़ा किया। मध्य दिल्ली में मोबाइल इंटरनेट सेवाएं निलंबित प्रदर्शन से पहले जनपथ-कर्तव्य पथ चौराहे के आसपास करीब चार किलोमीटर के दायरे में मोबाइल इंटरनेट सेवाएं 24 घंटे के लिए निलंबित किए जाने की जानकारी सामने आई थी। यह प्रतिबंध 9 अक्टूबर रात 10 बजे से 10 अक्टूबर रात 10 बजे तक लागू रखने की घोषणा की गई थी। अधिकारियों ने इस कदम को सार्वजनिक सुरक्षा और कानून-व्यवस्था से जुड़ी चिंताओं के संदर्भ में बताया। मध्य दिल्ली में यातायात पर भी प्रतिबंध दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने मध्य दिल्ली के करीब 30 स्थानों पर यातायात डायवर्जन और आवाजाही संबंधी प्रतिबंधों की व्यवस्था की थी। धौला कुआं से मंडी हाउस तक कई प्रमुख मार्गों पर अतिरिक्त जांच और बैरिकेडिंग की गई। यात्रियों को संभावित जाम और असुविधा को देखते हुए गैर-जरूरी यात्रा से बचने की सलाह भी दी गई थी। हजारों सुरक्षाकर्मी किए गए तैनात जंतर-मंतर, संसद मार्ग और निर्वाचन आयोग के मुख्यालय के आसपास पुलिस तथा अर्धसैनिक बलों की व्यापक तैनाती की गई। मीडिया रिपोर्टों में सुरक्षा बलों की संख्या करीब 25,000 तक बताई गई। नई दिल्ली जिले को अलग-अलग सुरक्षा क्षेत्रों में बांटकर निगरानी और आवाजाही नियंत्रण की व्यवस्था की गई थी। BNSS की धारा 163 के तहत प्रतिबंध संवेदनशील इलाकों में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा लागू किए जाने की भी खबरें सामने आईं। इस प्रावधान के तहत निर्धारित परिस्थितियों में सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रतिबंधात्मक आदेश जारी किए जा सकते हैं। इन आदेशों का उल्लंघन करने पर लागू कानून के अनुसार कार्रवाई हो सकती है। सुप्रीम कोर्ट ने व्यापक प्रतिबंधों पर जताई चिंता सुप्रीम कोर्ट में मेट्रो और रेल सेवाओं पर व्यापक प्रतिबंध लगाने के मुद्दे पर सुनवाई के दौरान चिंता जताई गई। अदालत ने सुरक्षा संबंधी जरूरतों और आम लोगों की आवाजाही के बीच संतुलन बनाए रखने पर जोर दिया। सुनवाई में यह सवाल भी उठा कि संभावित कानून-व्यवस्था की स्थिति से निपटने के लिए परिवहन सेवाओं को बड़े पैमाने पर प्रभावित करना कितना आवश्यक और आनुपातिक है। CJP की प्रमुख मांग क्या है? CJP मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR प्रक्रिया को लेकर विरोध कर रही है। संगठन का आरोप है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाए गए, जिससे चुनावी निष्पक्षता प्रभावित हो सकती है। वहीं, निर्वाचन आयोग और भाजपा ने इन आरोपों को खारिज किया है। ऐसे में मतदाता सूची में बदलाव और उसकी प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक विवाद जारी है। अभिजीत दीपके ने आंदोलन जारी रखने की बात कही रिपोर्टों के मुताबिक, हिरासत से पहले अभिजीत दीपके ने कहा था कि प्रतिबंधों और गिरफ्तारियों के बावजूद आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने समर्थकों से शांतिपूर्ण तरीके से विरोध प्रदर्शन करने की अपील भी की थी। CJP के नेताओं का रुख है कि मतदाता सूची और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े सवालों को सार्वजनिक रूप से उठाया जाना चाहिए। सुरक्षा कार्रवाई पर नागरिक अधिकारों की बहस तेज CJP प्रदर्शन से पहले हिरासत में लिए जाने, मेट्रो स्टेशनों पर प्रतिबंध, मोबाइल इंटरनेट सेवाओं के निलंबन और व्यापक सुरक्षा तैनाती ने शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार तथा कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी के बीच संतुलन पर बहस तेज कर दी है। प्रशासन इन कदमों को सुरक्षा संबंधी एहतियाती कार्रवाई के रूप में देख रहा है, जबकि CJP और उसके समर्थक इन्हें लोकतांत्रिक असहमति पर जरूरत से ज्यादा प्रतिबंध बता रहे हैं। इस विवाद में प्रतिबंधों की आवश्यकता, उनका दायरा और आम…

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जंतर-मंतर प्रदर्शन से पहले सुरक्षा व्यवस्था पर प्रशांत भूषण के सवाल, बोले—पूरी दिल्ली को बंद नहीं किया जा सकता

नई दिल्ली: 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले दिल्ली में सुरक्षा प्रतिबंधों को लेकर वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने सवाल उठाए। सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान उन्होंने अन्य वकीलों के साथ मेट्रो स्टेशनों को बंद करने, ट्रेनों को रद्द करने और शहर में व्यापक बैरिकेडिंग किए जाने पर आपत्ति जताई। उनका तर्क था कि कानून-व्यवस्था बिगड़ने की आशंका के आधार पर पूरे शहर की आवाजाही को प्रभावित करना उचित नहीं है। सुप्रीम कोर्ट में उठा दिल्ली की आवाजाही पर प्रतिबंधों का मुद्दा 9 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट में 10 अक्टूबर के प्रदर्शन से पहले लगाए गए प्रतिबंधों को चुनौती देने वाली याचिकाओं का मुद्दा उठाया गया। कपिल सिब्बल, अभिषेक मनु सिंघवी और प्रशांत भूषण समेत कई वकीलों ने मेट्रो स्टेशनों को बंद करने, ट्रेन सेवाओं को प्रभावित करने और व्यापक बैरिकेडिंग को लेकर अदालत से हस्तक्षेप की मांग की। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि सुरक्षा व्यवस्था के नाम पर लगाए गए प्रतिबंधों का असर केवल प्रदर्शनकारियों पर नहीं, बल्कि आम नागरिकों पर भी पड़ सकता है। प्रशांत भूषण ने पूछा—पूरी दिल्ली को बंद क्यों किया जा रहा है? प्रशांत भूषण ने प्रतिबंधों की व्यापकता पर सवाल उठाते हुए कहा कि किसी संभावित कानून-व्यवस्था की स्थिति से निपटने के लिए लक्षित और सीमित कदम उठाए जाने चाहिए। उनका तर्क था कि किसी एक स्थान पर प्रदर्शन की आशंका के कारण पूरे शहर की आवाजाही प्रभावित करना जरूरत से ज्यादा सख्त कदम हो सकता है। उन्होंने सुरक्षा संबंधी चिंताओं और नागरिकों की सामान्य आवाजाही के अधिकार के बीच संतुलन बनाए रखने पर जोर दिया। 57 मेट्रो स्टेशनों पर प्रतिबंध को लेकर चिंता सुनवाई के दौरान बताया गया कि अधिकारियों ने 57 दिल्ली मेट्रो स्टेशनों पर प्रतिबंध या बंदी की योजना बनाई थी। इस व्यवस्था को लेकर याचिकाकर्ताओं ने चिंता जताई। उनका कहना था कि ऐसे प्रतिबंधों से छात्रों, कर्मचारियों, कारोबारियों और रोजाना मेट्रो से यात्रा करने वाले यात्रियों को परेशानी हो सकती है। याचिकाकर्ताओं ने सवाल उठाया कि सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए क्या इतने व्यापक प्रतिबंध जरूरी थे। दिल्ली आने वाली ट्रेनों पर भी उठे सवाल प्रदर्शन से पहले कुछ दिल्ली आने वाली ट्रेनों को रद्द करने या उनके समय में बदलाव किए जाने का मुद्दा भी अदालत के सामने रखा गया। याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि किसी प्रदर्शन को नियंत्रित करने के लिए अंतरशहरी परिवहन सेवाओं को बड़े स्तर पर प्रभावित करने से आम यात्रियों को अनावश्यक परेशानी हो सकती है। सुप्रीम कोर्ट ने प्रतिबंधों की व्यापकता पर जताई चिंता सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने आवाजाही पर व्यापक प्रतिबंध लगाने को लेकर चिंता जताई। अदालत की टिप्पणियों में आवाजाही पूरी तरह रोकने और उसे नियंत्रित करने के बीच अंतर पर जोर दिया गया। अदालत ने अधिकारियों को ऐसा समाधान तलाशने की आवश्यकता बताई, जिससे सुरक्षा व्यवस्था भी बनी रहे और आम जनता को कम से कम असुविधा हो। सुरक्षा के नाम पर अत्यधिक प्रतिबंधों पर सवाल सुनवाई के दौरान प्रतिबंधों की आनुपातिकता का मुद्दा प्रमुखता से उठा। अदालत ने संकेत दिया कि किसी संभावित गड़बड़ी से निपटने के लिए उठाए जाने वाले कदम परिस्थिति के अनुरूप होने चाहिए। मेट्रो और ट्रेन सेवाओं पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने के बजाय नियंत्रित आवाजाही की संभावनाओं पर विचार करने का मुद्दा भी सामने आया। प्रदर्शन के मद्देनजर 20 हजार से अधिक सुरक्षाकर्मियों की तैनाती 10 अक्टूबर के प्रदर्शन को देखते हुए दिल्ली में व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की गई थी। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, मध्य दिल्ली समेत कई इलाकों में 20 हजार से अधिक पुलिस और अर्धसैनिक बलों के जवान तैनात किए गए। कुछ रिपोर्टों में तैनाती की संख्या लगभग 23 हजार से 25 हजार तक बताई गई। प्रशासन का उद्देश्य संभावित कानून-व्यवस्था की स्थिति से निपटना और संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा बनाए रखना था। सैकड़ों बसें और बॉडी कैमरे भी सुरक्षा योजना में शामिल रिपोर्टों के मुताबिक, दिल्ली पुलिस ने संभावित हिरासत की स्थिति से निपटने के लिए सैकड़ों बसों की व्यवस्था की थी। पुलिसकर्मियों के लिए बॉडी-वॉर्न कैमरों के इस्तेमाल की योजना भी सुरक्षा प्रबंधों का हिस्सा थी। इसके अलावा, शहर के विभिन्न इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था को अलग-अलग क्षेत्रों में बांटकर वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी में तैनाती की गई। प्रशांत भूषण पहले भी प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिए गए थे 3 अक्टूबर को मुख्य निर्वाचन आयुक्त के खिलाफ हुए प्रदर्शन के दौरान प्रशांत भूषण भी हिरासत में लिए गए लोगों में शामिल थे। रिपोर्टों के अनुसार, उनके साथ योगेंद्र यादव, नेहा बोरा और अन्य प्रदर्शनकारियों को भी हिरासत में लिया गया था। इस घटनाक्रम के बाद प्रदर्शनकारियों की आवाजाही और पुलिस की कार्रवाई को लेकर बहस तेज हुई थी। शांतिपूर्ण प्रदर्शन का अधिकार और कानून-व्यवस्था इस मामले में प्रमुख सवाल शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार और सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी के बीच संतुलन का है। एक ओर प्रशासन को संभावित गड़बड़ी रोकने और लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी निभानी होती है। दूसरी ओर, शांतिपूर्ण विरोध और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता भी लोकतांत्रिक व्यवस्था के महत्वपूर्ण अधिकार हैं। ऐसे मामलों में प्रतिबंधों की आवश्यकता, उनका दायरा और आम नागरिकों पर पड़ने वाले प्रभाव पर विचार करना जरूरी होता है। व्यापक प्रतिबंधों के बजाय नियंत्रित आवाजाही पर जोर सुप्रीम कोर्ट में उठाए गए मुद्दों ने इस बहस को केंद्र में ला दिया कि सुरक्षा संबंधी चिंताओं का समाधान आवश्यक सेवाओं और सार्वजनिक परिवहन को पूरी तरह बाधित किए बिना कैसे किया जा सकता है। प्रशांत भूषण और अन्य वकीलों ने प्रतिबंधों की व्यापकता पर सवाल उठाए, जबकि अधिकारियों की ओर से सुरक्षा व्यवस्था को संभावित कानून-व्यवस्था की स्थिति से निपटने के उपाय के रूप में देखा गया। नागरिक स्वतंत्रता को लेकर बढ़ी बहस जंतर-मंतर प्रदर्शन से पहले लगाए गए सुरक्षा प्रतिबंधों ने नागरिक स्वतंत्रता, शांतिपूर्ण विरोध और सार्वजनिक सुरक्षा के बीच संतुलन पर बहस तेज कर दी है। प्रशांत भूषण का मुख्य सवाल यही रहा कि किसी निर्धारित स्थान पर होने वाले प्रदर्शन की आशंका के कारण पूरे शहर की आवाजाही को किस हद तक प्रभावित किया जाना चाहिए। इस मामले ने सुरक्षा उपायों की आवश्यकता के साथ-साथ उनके दायरे और आम लोगों पर पड़ने वाले प्रभाव की समीक्षा को भी महत्वपूर्ण बना दिया है। स्रोत: The Indian Express / Supreme Court proceedings /…

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अभिजीत दीपके का सत्ता को संदेश—“सत्ता आपकी, लेकिन सड़क हमारी”; बोले, लोकतंत्र वापस हासिल करेंगे

नई दिल्ली, 10 अक्टूबर 2026: जंतर-मंतर पर प्रस्तावित CJP प्रदर्शन से पहले संगठन के संस्थापक अभिजीत दीपके ने केंद्र सरकार और प्रशासन पर निशाना साधते हुए कहा कि सत्ता भले ही सरकार के पास हो, लेकिन सड़कें भारत के लोगों की हैं। उन्होंने कहा कि जनता लोकतांत्रिक अधिकारों और संस्थाओं की जवाबदेही के लिए अपना संघर्ष जारी रखेगी। यह बयान ऐसे समय आया है, जब दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी है और राजधानी में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं। “सत्ता आपकी, लेकिन सड़क हमारी” अभिजीत दीपके ने कहा कि सरकार के पास सत्ता और संस्थागत ताकत हो सकती है, लेकिन सार्वजनिक स्थानों पर नागरिकों के लोकतांत्रिक अधिकार भी महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने अपने आंदोलन को लोकतांत्रिक संस्थाओं की जवाबदेही और मतदान के अधिकारों से जुड़ा बताया। उनका कहना है कि जनता की आवाज को दबाया नहीं जाना चाहिए। “लोकतंत्र वापस हासिल करेंगे” दीपके ने कहा कि CJP का आंदोलन किसी एक दिन या स्थान तक सीमित नहीं है। उनके अनुसार, यह लोकतंत्र की रक्षा और नागरिक अधिकारों के लिए संघर्ष है। उन्होंने संकेत दिया कि यदि प्रदर्शनकारियों को जंतर-मंतर तक पहुंचने से रोका गया, तो वे उस स्थान पर भी अपना विरोध दर्ज कराएंगे जहां उन्हें रोका जाएगा। 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन का ऐलान CJP ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची की विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया (SIR) को वापस लेने की मांग को लेकर 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन का आह्वान किया था। संगठन ने मतदाता सूची के संशोधन के दौरान कथित अनियमितताओं को लेकर सवाल उठाए हैं। वहीं, निर्वाचन आयोग इस प्रक्रिया को मतदाता सूचियों को दुरुस्त करने की कवायद बताता रहा है। दिल्ली पुलिस ने नहीं दी अनुमति दिल्ली पुलिस ने प्रस्तावित प्रदर्शन को अनुमति नहीं दी। पुलिस के अनुसार, प्रदर्शन की अनुमति के लिए निर्धारित प्रक्रिया और समयसीमा का पालन नहीं किया गया। इसी बीच, नई दिल्ली और मध्य दिल्ली के संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की गई तथा आवाजाही को नियंत्रित करने के लिए कदम उठाए गए। मेट्रो स्टेशनों और परिवहन पर असर प्रदर्शन को देखते हुए मध्य दिल्ली में व्यापक सुरक्षा इंतजाम किए गए। कई मेट्रो स्टेशनों के प्रवेश और निकास द्वार बंद किए जाने की सूचना भी सामने आई। CJP ने इन प्रतिबंधों को प्रदर्शन स्थल तक पहुंचने से लोगों को रोकने की कोशिश बताया, जबकि प्रशासन की ओर से सुरक्षा और कानून-व्यवस्था बनाए रखने को प्राथमिकता दी गई। दीपके बोले—“गिरफ्तार करना है तो करिए” पुलिस कार्रवाई की आशंका के बीच दीपके ने कहा था कि वह गिरफ्तारी से नहीं डरते। उन्होंने समर्थकों से अपने लोकतांत्रिक अधिकारों के लिए आवाज उठाते रहने की अपील की। उनका कहना है कि शांतिपूर्ण विरोध और अपनी मांगें उठाना नागरिकों के लोकतांत्रिक अधिकारों का हिस्सा है। दिल्ली पहुंचते ही हिरासत में लिए गए CJP नेता 10 अक्टूबर को अभिजीत दीपके, सौरव दास और आशुतोष रांका को दिल्ली पहुंचने के बाद कथित तौर पर विमान के अंदर ही हिरासत में ले लिया गया। इस घटना का वीडियो भी सामने आया, जिसमें CJP के नेता पुलिस कार्रवाई का विरोध करते और हिरासत में लिए जाने की बात कहते दिखाई दिए। इस घटनाक्रम ने प्रस्तावित प्रदर्शन को लेकर जारी तनाव को और बढ़ा दिया। हजारों सुरक्षाकर्मियों की तैनाती जंतर-मंतर और मध्य दिल्ली के आसपास पुलिस तथा अन्य सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ाई गई है। प्रशासन का कहना है कि सुरक्षा उपायों का उद्देश्य कानून-व्यवस्था बनाए रखना है। दूसरी ओर, प्रदर्शन आयोजकों ने इन कदमों पर सवाल उठाते हुए इन्हें विरोध प्रदर्शन को रोकने की कोशिश बताया है। SIR को लेकर CJP के आरोप CJP का आरोप है कि विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए। संगठन ने इसे चुनावी पारदर्शिता और मतदान के अधिकार से जुड़ा गंभीर मुद्दा बताया है। हालांकि, इन आरोपों और उनसे जुड़े आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है। निर्वाचन आयोग ने मतदाता सूची संशोधन प्रक्रिया का बचाव किया है। आंदोलन जारी रखने का ऐलान हिरासत और प्रतिबंधों के बावजूद CJP ने अपना आंदोलन जारी रखने की बात कही है। दीपके का कहना है कि यदि उन्हें जंतर-मंतर तक पहुंचने से रोका जाता है, तो भी संगठन लोकतांत्रिक अधिकारों और अपनी मांगों को लेकर विरोध जारी रखने के अन्य तरीके तलाशेगा। लोकतांत्रिक अधिकार बनाम कानून-व्यवस्था की बहस इस घटनाक्रम ने शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार और प्रशासन की कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी के बीच बहस को फिर से सामने ला दिया है। एक ओर CJP अपने प्रदर्शन को लोकतांत्रिक अधिकारों की लड़ाई बता रही है, वहीं पुलिस सुरक्षा व्यवस्था और अनुमति संबंधी नियमों का हवाला दे रही है। आगे की स्थिति इस बात पर निर्भर करेगी कि प्रशासन और प्रदर्शन आयोजक इन परिस्थितियों से कैसे निपटते हैं। स्रोत: Reuters, The Indian Express, Hindustan, Jansatta, NDTV जय राष्ट्र न्यूज़

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जंतर-मंतर पर धारा 163 लागू, अब 10 अक्टूबर के प्रदर्शन का क्या होगा? पुलिस ने साफ किया रुख

नई दिल्ली: 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर CJP, AISA और अन्य छात्र संगठनों के प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले नई दिल्ली जिले में BNSS की धारा 163 लागू है। इसके तहत बिना पूर्व लिखित अनुमति पांच या उससे अधिक लोगों के एकत्र होने, जुलूस निकालने, प्रदर्शन करने, धरना देने और पिकेटिंग पर रोक लगाई जा सकती है। दिल्ली पुलिस का कहना है कि प्रस्तावित प्रदर्शन को अनुमति नहीं दी गई है। ऐसे में बिना अनुमति सभा आयोजित करने पर कानूनी कार्रवाई हो सकती है। 10 अक्टूबर का प्रदर्शन अभी आधिकारिक रूप से मंजूर नहीं CJP के सह-संयोजक सौरव दास ने Parliament Street Police Station में प्रस्तावित प्रदर्शन की औपचारिक सूचना दी थी। हालांकि, उन्होंने कहा था कि उन्होंने अनुमति नहीं मांगी, बल्कि केवल पुलिस को सूचना दी है। दूसरी ओर, दिल्ली पुलिस का कहना है कि धारा 163 लागू होने के कारण केवल सूचना देना पर्याप्त नहीं है और प्रदर्शन के लिए पूर्व अनुमति जरूरी है। Section 163 में क्या-क्या प्रतिबंधित है? धारा 163 के तहत जारी आदेश के अनुसार, बिना लिखित अनुमति निम्न गतिविधियों पर प्रतिबंध लगाया जा सकता है: इन प्रतिबंधों का सटीक दायरा संबंधित आदेश की शर्तों पर निर्भर करता है। प्रदर्शन होने पर पुलिस रोक सकती है जमावड़ा अगर आयोजक 10 अक्टूबर को अनुमति के बिना जंतर-मंतर पहुंचते हैं, तो दिल्ली पुलिस उन्हें वहां एकत्र होने से रोक सकती है। स्थिति के अनुसार पुलिस बैरिकेडिंग, लोगों को हिरासत में लेने और भीड़ को तितर-बितर करने जैसी कार्रवाई कर सकती है। इससे पहले भी प्रदर्शनों के दौरान प्रतिबंधात्मक आदेशों के उल्लंघन को लेकर FIR दर्ज होने की खबरें सामने आई हैं। 40 Metro stations तक बंद करने की तैयारी सुरक्षा व्यवस्था से जुड़ी रिपोर्टों के मुताबिक, 10 अक्टूबर के प्रदर्शन के दौरान जरूरत पड़ने पर 40 मेट्रो स्टेशनों तक अस्थायी रूप से बंद करने पर विचार किया जा सकता है। इसके अलावा, कुछ क्षेत्रों में ऐप आधारित कैब की आवाजाही पर प्रतिबंध, ट्रैफिक डायवर्जन और भीड़ नियंत्रण के उपाय भी लागू किए जा सकते हैं। इन व्यवस्थाओं का वास्तविक क्रियान्वयन प्रशासन के फैसलों पर निर्भर करेगा। 10 detention centres तैयार संभावित बड़े जमावड़े और हिरासत की स्थिति से निपटने के लिए दिल्ली पुलिस ने 10 डिटेंशन सेंटर तैयार किए हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, केंद्रीय सुरक्षा बलों को भी तैनाती के लिए तैयार रखा गया है। पुलिस को आशंका है कि बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी दिल्ली पहुंच सकते हैं। दिल्ली के प्रवेश मार्गों पर निगरानी पुलिस उत्तर प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान से दिल्ली आने वाले मार्गों पर भी नजर रख रही है। बड़े समूहों की आवाजाही को देखते हुए सीमावर्ती इलाकों में बैरिकेडिंग और जांच बढ़ाई जा सकती है। CJP का दावा—प्रदर्शन होकर रहेगा CJP ने कहा है कि वह 10 अक्टूबर के कार्यक्रम को वापस नहीं ले रहा है। अभिजीत दिपके ने दावा किया है कि हिरासत और पुलिस कार्रवाई के बावजूद समर्थक दिल्ली पहुंचेंगे। संगठन ने देशभर में बड़ी संख्या में समर्थकों को हिरासत में लिए जाने का भी दावा किया है, हालांकि इन सभी आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। नेहा बोरा और सौरव दास ने क्या कहा? नेहा बोरा और सौरव दास ने कहा है कि आंदोलन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे, SIR पर रोक और चुनावी सुधारों की मांग को लेकर जारी रहेगा। आयोजकों का कहना है कि जंतर-मंतर निर्धारित प्रदर्शन स्थलों में शामिल है और लोगों को शांतिपूर्ण विरोध करने का अधिकार है। हालांकि, प्रदर्शन के लिए लागू प्रशासनिक आदेशों और अनुमति संबंधी शर्तों का पालन करना भी जरूरी है। मामला Delhi High Court भी पहुंचा Indian Youth Congress ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन संबंधी प्रतिबंधों को चुनौती देते हुए दिल्ली हाई कोर्ट का रुख किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, अदालत ने याचिका पर सुनवाई के लिए सहमति दी है। इस मामले में होने वाली सुनवाई और आदेश प्रदर्शन की अनुमति से जुड़े घटनाक्रम को प्रभावित कर सकते हैं। अगर Court या Police से अनुमति मिली तो? अगर 10 अक्टूबर से पहले अदालत या दिल्ली पुलिस प्रदर्शन को सीमित अनुमति देती है, तो कार्यक्रम निर्धारित शर्तों के साथ आयोजित किया जा सकता है। इन शर्तों में भीड़ की सीमा, निश्चित समय, निर्धारित स्थान और मार्च निकालने पर रोक जैसी व्यवस्थाएं शामिल हो सकती हैं। हालांकि, वास्तविक शर्तें संबंधित आदेश में स्पष्ट होंगी। अनुमति नहीं मिली तो क्या होगा? अगर प्रदर्शन के लिए अनुमति नहीं मिलती और कोई न्यायिक राहत भी नहीं मिलती, तो आयोजकों के लिए जंतर-मंतर पर सभा करना कानूनी जोखिम पैदा कर सकता है। ऐसी स्थिति में पुलिस लोगों को निर्धारित स्थल तक पहुंचने से रोक सकती है, उन्हें हिरासत में ले सकती है और लागू आदेशों के उल्लंघन पर कानूनी कार्रवाई कर सकती है। 10 अक्टूबर पर टिकी नजर फिलहाल स्थिति यह है कि आयोजकों ने प्रदर्शन वापस लेने की घोषणा नहीं की है, लेकिन पुलिस की ओर से अनुमति नहीं मिलने की बात सामने आई है। इसलिए 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर क्या स्थिति बनेगी, यह पुलिस की कार्रवाई, अदालत के संभावित आदेश और आयोजकों के अगले कदम पर निर्भर करेगा। Source – The Indian Express, The New Indian Express, Reuters, The Times of India जय राष्ट्र न्यूज़

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राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के खिलाफ FIR, दिल्ली पुलिस ने पुलिसकर्मियों से कथित मारपीट और ड्यूटी में बाधा का लगाया आरोप

नई दिल्ली: दिल्ली पुलिस ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा के खिलाफ INDIA bloc के विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिसकर्मियों से कथित मारपीट और सरकारी काम में बाधा डालने के आरोप में FIR दर्ज की है। यह कार्रवाई 7 अक्टूबर को हुए उस प्रदर्शन के बाद हुई, जिसमें विपक्ष CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहा था। 7 अक्टूबर के प्रदर्शन से जुड़ा मामला मामला बुधवार को हुए INDIA bloc के विरोध प्रदर्शन से जुड़ा है। Opposition MPs और नेताओं ने Election Commission तथा CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन किया था, जिसके दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच कई जगह धक्का-मुक्की हुई। राहुल-प्रियंका पर क्या आरोप हैं? Delhi Police की FIR में राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा पर पुलिसकर्मियों से कथित मारपीट और उन्हें सरकारी ड्यूटी करने से रोकने के आरोप लगाए गए हैं। Police sources के मुताबिक FIR में assault और obstruction से जुड़े प्रावधान शामिल किए गए हैं। कई FIR दर्ज होने की बात पूरे protest episode से जुड़े मामलों में कम से कम तीन FIRs दर्ज की गई हैं। इनमें राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के अलावा कुछ अन्य प्रदर्शनकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में है। पुलिसकर्मी ने हमले का लगाया आरोप Delhi Police के constable Ankit Kasana ने आरोप लगाया कि protest के दौरान करीब 30-35 लोगों ने उन्हें घेर लिया। उन्होंने दावा किया कि उनकी uniform फाड़ी गई, उन्हें scratch किया गया और bite भी किया गया। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। Viral videos की हो रही जांच Delhi Police protest के कई mobile और social media videos की जांच कर रही है। Police यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि किन लोगों ने कथित तौर पर personnel को obstruct या assault किया और किसकी क्या भूमिका थी। Akashvani Bhavan मामले में भी अलग FIR राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के खिलाफ एक अलग FIR उस घटना को लेकर भी दर्ज की गई है जिसमें वे पुलिस द्वारा Election Commission march रोके जाने के बाद Akashvani Bhavan परिसर में चले गए थे। Delhi Police ने उस मामले में भी unauthorized entry और related allegations की जांच शुरू की है। कांग्रेस ने पुलिस पर लगाए जवाबी आरोप Congress ने Delhi Police के आरोपों को एकतरफा बताया है। पार्टी नेताओं का कहना है कि police ने opposition MPs और workers के साथ force का इस्तेमाल किया और कई महिला नेताओं व कार्यकर्ताओं के साथ कथित बदसलूकी हुई। राहुल गांधी के कथित push पर भी विवाद एक viral video में राहुल गांधी और एक महिला police personnel के बीच interaction को लेकर भी विवाद हुआ। BJP ने इसे police officer को push करने का मामला बताया, जबकि Congress का कहना है कि राहुल गांधी एक महिला worker को बचाने की कोशिश कर रहे थे। CEC विरोध से जुड़ा पूरा मामला यह FIR उस व्यापक आंदोलन के बीच दर्ज हुई है जिसमें INDIA bloc Chief Election Commissioner Gyanesh Kumar के इस्तीफे की मांग कर रहा है। Opposition SIR और voter-list revision को लेकर Election Commission पर सवाल उठा रहा है, जबकि BJP और Election Commission इन आरोपों को खारिज करते रहे हैं। राहुल गांधी बोले—FIR से नहीं रुकेंगे Rahul Gandhi ने संकेत दिया है कि FIRs के बावजूद आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि वह CEC के इस्तीफे की मांग से पीछे नहीं हटेंगे और FIRs को लेकर भी चुनौतीपूर्ण रुख दिखाया। आरोप अभी साबित नहीं राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के खिलाफ दर्ज FIRs में लगाए गए आरोप अभी जांच के स्तर पर हैं। आगे police investigation, video evidence और judicial process के बाद ही किसी criminal liability पर अंतिम निष्कर्ष निकलेगा। Source – The Indian Express, India Today, Reuters, The Times of India जय राष्ट्र न्यूज़

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महिला पत्रकार के आरोपों के बीच ACP विवेक भगत का प्रमोशन विवादों में, Additional DCP का charge रोका गया

नई दिल्ली: जंतर-मंतर प्रदर्शन की कवरेज के दौरान एक महिला पत्रकार द्वारा कथित यौन उत्पीड़न का आरोप लगाए जाने के बीच Delhi Police के ACP विवेक भगत को Additional DCP का current duty charge दिए जाने पर विवाद खड़ा हो गया। आलोचना के बाद भगत ने खुद जांच पूरी होने तक नया charge न लेने का अनुरोध किया, जिसके बाद दिल्ली सरकार ने उनके संबंध में 5 अक्टूबर का आदेश modify करने का फैसला किया। 12 DANIPS अधिकारियों के साथ मिला था नया charge दिल्ली सरकार के Home Department ने 5 अक्टूबर को 12 Selection Grade DANIPS अधिकारियों को Additional DCP पद का current duty charge देने का आदेश जारी किया था। इस सूची में Connaught Place के ACP Vivek Bhagat का नाम भी शामिल था। Regular promotion नहीं था यह आदेश दिल्ली सरकार ने स्पष्ट किया कि यह regular promotion नहीं बल्कि temporary current duty charge था। इस arrangement से कोई अतिरिक्त financial benefit नहीं मिलता और ऐसे अधिकारी regular Additional DCP की सभी statutory powers का इस्तेमाल भी नहीं कर सकते। महिला पत्रकार की शिकायत के बाद विवाद यह आदेश ऐसे समय आया जब 3 अक्टूबर को जंतर-मंतर के पास हुए प्रदर्शन की coverage कर रही महिला पत्रकार ने Vivek Bhagat पर कथित sexual harassment और inappropriate touching का आरोप लगाया था। ये आरोप अभी जांच के स्तर पर हैं और किसी अदालत ने इन्हें साबित नहीं किया है। तीन महिला पत्रकारों ने दी शिकायत मामला केवल एक शिकायत तक सीमित नहीं है। तीन महिला पत्रकारों ने Delhi Police personnel के खिलाफ harassment और manhandling से जुड़ी शिकायतें दी हैं। इन complaints को Crime Branch को आगे की जांच के लिए भेजा गया है। Promotion order पर उठे सवाल Bhagat का नाम Additional DCP charge वाली सूची में सामने आते ही social media, journalists और activists ने सवाल उठाए। आलोचकों ने पूछा कि गंभीर आरोपों और ongoing inquiry के बीच उन्हें higher responsibility कैसे दी जा सकती है। सरकार ने दिया clarification Delhi Government ने कहा कि Additional DCP charge देने की administrative process 25 अगस्त 2026 को शुरू हो गई थी। यह तारीख 3 अक्टूबर की कथित घटना से काफी पहले की है। इसलिए सरकार का कहना है कि इस charge का महिला पत्रकार की complaint से कोई संबंध नहीं था। Vivek Bhagat ने खुद लिखा पत्र विवाद बढ़ने के बाद Vivek Bhagat ने Delhi Police Commissioner को पत्र लिखकर request की कि जब तक महिला पत्रकारों की शिकायत की पूरी जांच नहीं हो जाती, तब तक उन्हें Additional DCP का current duty charge न दिया जाए। सरकार के अनुसार यह अनुरोध उन्होंने “अपने स्वयं के निर्णय” से किया। सरकार ने रोका Additional DCP charge इसके बाद Delhi Government ने 5 अक्टूबर के आदेश को Vivek Bhagat के संबंध में modify करने की घोषणा की। अब Additional DCP का current duty charge बाकी 11 अधिकारियों के लिए लागू रहेगा, जबकि Bhagat का assignment inquiry पूरी होने तक रोक दिया गया है। Crime Branch कर रही है जांच तीन महिला पत्रकारों की complaints को Crime Branch को transfer किया गया है। जांच के दौरान CCTV footage, mobile videos, witnesses और मौके पर मौजूद police personnel की भूमिका की पड़ताल की जा सकती है। FIR को लेकर भी उठ रहे सवाल महिला पत्रकार और उनका समर्थन कर रहे groups FIR दर्ज किए जाने की मांग करते रहे हैं। मामले में पुलिस की ओर से complaint को Crime Branch inquiry में भेजा गया है और आगे की कानूनी कार्रवाई जांच के निष्कर्षों पर निर्भर करेगी। आरोप अभी साबित नहीं यह स्पष्ट करना जरूरी है कि Vivek Bhagat के खिलाफ आरोप अभी जांच के अधीन हैं। जब तक जांच या न्यायिक प्रक्रिया में आरोप स्थापित नहीं हो जाते, उन्हें दोषी नहीं माना जा सकता। Promotion controversy ने बढ़ाई जवाबदेही की बहस पूरे घटनाक्रम ने police accountability और sensitive complaints के दौरान administrative promotions या additional responsibilities को लेकर बहस तेज कर दी है। सरकार द्वारा charge रोकने के बाद अब निगाह Crime Branch की जांच और उसके निष्कर्षों पर रहेगी। source – ThePrint / Hindustan Times / The New Indian Express / The Times of India / Delhi Government जय राष्ट्र न्यूज़

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जंतर-मंतर प्रदर्शन के दौरान महिला पत्रकारों के गंभीर आरोप, मामला Crime Branch को सौंपा गया

नई दिल्ली: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन की कवरेज के दौरान तीन महिला पत्रकारों ने दिल्ली पुलिस के अधिकारियों पर कथित यौन उत्पीड़न और दुर्व्यवहार के गंभीर आरोप लगाए हैं। दिल्ली पुलिस ने शिकायतों को विस्तृत जांच के लिए Crime Branch को भेज दिया है। 6 अक्टूबर तक मामले में FIR दर्ज नहीं होने को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। 3 अक्टूबर के प्रदर्शन से जुड़ा मामला यह मामला 3 अक्टूबर को जंतर-मंतर के पास हुए उस प्रदर्शन से जुड़ा है, जिसमें CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और voter-list revision से जुड़े मुद्दों को लेकर विरोध किया जा रहा था। पुलिस का कहना है कि इलाके में BNSS की धारा 163 के तहत प्रतिबंध लागू थे और प्रदर्शनकारियों को हटाने की कार्रवाई के दौरान विवाद हुआ। तीन महिला पत्रकारों ने लगाए आरोप प्रदर्शन की रिपोर्टिंग कर रहीं तीन महिला पत्रकारों ने दावा किया कि पुलिस कार्रवाई के दौरान उनके साथ कथित तौर पर अनुचित शारीरिक व्यवहार और यौन उत्पीड़न हुआ। ये आरोप अभी जांच के अधीन हैं और किसी अधिकारी की आपराधिक जिम्मेदारी तय नहीं हुई है। ACP विवेक भगत का नाम आया सामने एक महिला पत्रकार की शिकायत में Connaught Place के ACP विवेक भगत का नाम सामने आया। पत्रकार ने आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान उनके साथ कथित रूप से अनुचित व्यवहार किया गया। ACP या अन्य अधिकारियों के खिलाफ लगे आरोपों की जांच Crime Branch कर रही है। Crime Branch को ट्रांसफर हुई शिकायत Delhi Police ने कहा कि तीनों महिला पत्रकारों की शिकायतें Crime Branch को भेज दी गई हैं। जांच टीम CCTV footage, mobile videos, eyewitness statements और मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों की भूमिका की पड़ताल कर रही है। मेडिकल जांच भी कराई गई रिपोर्टों के मुताबिक शिकायत करने वाली महिला पत्रकारों का medical examination भी कराया गया। इसके साथ ही पुलिस ने घटनास्थल के CCTV और सार्वजनिक रूप से उपलब्ध video footage की जांच शुरू की है। 6 अक्टूबर तक FIR दर्ज नहीं मामले में एक बड़ा सवाल यह है कि शिकायत के कई दिन बाद तक FIR दर्ज नहीं हुई थी। महिला पत्रकार और समर्थक लगातार FIR दर्ज करने तथा संबंधित अधिकारियों के खिलाफ निष्पक्ष कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। आरोपी ACP का promotion बना विवाद मामला तब और चर्चा में आया जब ACP विवेक भगत को routine order में Additional DCP का current charge दिया गया। इसके बाद आलोचना तेज हुई। बाद में दिल्ली सरकार ने बताया कि विवेक भगत ने जांच पूरी होने तक नया charge न लेने का अनुरोध किया, जिसके बाद आदेश को modify करने की प्रक्रिया शुरू की गई। Delhi Police ने कुछ आरोपों को किया खारिज दिल्ली पुलिस ने सोशल मीडिया पर महिला प्रदर्शनकारियों के साथ physical assault से जुड़े कुछ दावों को “baseless and misleading” बताया है। पुलिस का कहना है कि महिला प्रदर्शनकारियों को female personnel द्वारा कानून के मुताबिक संभाला गया। हालांकि महिला पत्रकारों की sexual harassment complaints की अलग से Crime Branch जांच जारी है। पत्रकारों और संगठनों ने उठाए सवाल मामले को लेकर पत्रकार संगठनों, छात्र समूहों और राजनीतिक नेताओं ने पारदर्शी जांच की मांग की है। उनका कहना है कि protest coverage के दौरान journalists की सुरक्षा और पुलिस accountability सुनिश्चित की जानी चाहिए। जांच के बाद ही तय होगी जिम्मेदारी फिलहाल सभी आरोप शिकायत और जांच के स्तर पर हैं। Crime Branch की जांच, CCTV footage, medical evidence और प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों के आधार पर ही यह स्पष्ट होगा कि किसी पुलिस अधिकारी के खिलाफ FIR या आगे की कानूनी कार्रवाई बनती है या नहीं। source – The Indian Express / Hindustan Times / Delhi Police जय राष्ट्र न्यूज़

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जंतर-मंतर विवाद के बाद महिला पत्रकार समेत 17 लोग हिरासत में, पत्रकारों की शिकायत Crime Branch को ट्रांसफर

नई दिल्ली: जंतर-मंतर पर हालिया प्रदर्शन की कवरेज के दौरान महिला पत्रकारों द्वारा पुलिस अधिकारियों पर लगाए गए कथित दुर्व्यवहार और यौन उत्पीड़न के आरोपों को लेकर विवाद बढ़ गया है। 5 अक्टूबर को Parliament Street Police Station के बाहर कार्रवाई की मांग करने पहुंचे लोगों में से 17 लोगों को पुलिस ने हिरासत में लिया, जिनमें एक महिला पत्रकार भी शामिल थीं। दिल्ली पुलिस ने महिला पत्रकारों की शिकायतों को जांच के लिए Crime Branch को ट्रांसफर कर दिया है। Parliament Street Police Station के बाहर जुटे प्रदर्शनकारी प्रदर्शनकारी महिला पत्रकारों की शिकायतों पर FIR और संबंधित पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर थाने के बाहर पहुंचे थे। मौके पर पुलिस ने बैरिकेडिंग की और भीड़ को आगे बढ़ने से रोका। इसके बाद कई लोगों को हिरासत में लिया गया। 17 लोगों को हिरासत में लिया गया रिपोर्टों के अनुसार कुल 17 लोगों को हिरासत में लिया गया। इनमें एक महिला पत्रकार और प्रदर्शन से जुड़े अन्य लोग शामिल थे। पुलिस ने कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए कार्रवाई की गई। महिला पत्रकारों ने लगाए गंभीर आरोप मामला जंतर-मंतर पर CEC ज्ञानेश कुमार और SIR के खिलाफ चल रहे प्रदर्शन की कवरेज से जुड़ा है। तीन महिला पत्रकारों ने आरोप लगाया कि पुलिस कार्रवाई के दौरान उनके साथ कथित यौन उत्पीड़न और अनुचित व्यवहार हुआ। ये आरोप फिलहाल शिकायत और जांच के स्तर पर हैं। शिकायत Crime Branch को सौंपी गई दिल्ली पुलिस ने महिला पत्रकारों की शिकायतों को New Delhi District से Crime Branch को ट्रांसफर कर दिया है। पुलिस का कहना है कि इससे जांच अधिक स्वतंत्र तरीके से की जा सकेगी और उपलब्ध वीडियो, बयान तथा अन्य साक्ष्यों की समीक्षा होगी। पत्रकार रोजी का मामला भी चर्चा में इस पूरे विवाद में स्वतंत्र पत्रकार रोजी का नाम प्रमुख रूप से सामने आया है। उन्होंने एक पुलिस अधिकारी पर कथित अनुचित स्पर्श और दुर्व्यवहार का आरोप लगाया था तथा on-camera apology और कानूनी कार्रवाई की मांग की थी। आरोपों की पुष्टि अभी जांच में होनी बाकी है। Press Club में भी उठा मामला महिला पत्रकारों के आरोपों के बाद पत्रकार संगठनों और स्वतंत्र मीडिया समूहों ने भी प्रतिक्रिया दी। Press Club of India में भी इस मामले को लेकर चर्चा और कार्रवाई की मांग सामने आई। पत्रकारों ने कहा कि protest coverage के दौरान media professionals की सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए। दिल्ली पुलिस ने कहा- जांच जारी दिल्ली पुलिस ने कहा है कि शिकायतों की जांच Crime Branch करेगी और उपलब्ध material के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी। पुलिस ने यह भी साफ किया कि केवल आरोप लगाए जाने से किसी अधिकारी की जिम्मेदारी तय नहीं हो जाती; जांच के बाद ही निष्कर्ष निकलेगा। Jantar Mantar Protest से जुड़ा बड़ा विवाद यह विवाद उस व्यापक राजनीतिक और छात्र आंदोलन से जुड़ा है जिसमें SIR और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली के खिलाफ प्रदर्शन हो रहे हैं। पिछले कुछ दिनों में जंतर-मंतर और आसपास कई लोगों को हिरासत में लिया गया है, जिससे पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तनाव बढ़ा है। महिला पत्रकारों की सुरक्षा पर सवाल इस घटना ने protest coverage के दौरान महिला पत्रकारों की सुरक्षा और पुलिस व्यवहार पर भी सवाल खड़े किए हैं। मीडिया संगठनों ने मांग की है कि ऐसे मामलों में शिकायतों की पारदर्शी और समयबद्ध जांच की जाए। जांच के बाद तय होगी जिम्मेदारी फिलहाल मामला Crime Branch के पास है और जांच जारी है। महिला पत्रकारों के आरोपों, पुलिस अधिकारियों के पक्ष और उपलब्ध वीडियो तथा अन्य साक्ष्यों की समीक्षा के बाद ही यह तय होगा कि किसी तरह की कानूनी या विभागीय कार्रवाई बनती है या नहीं। Source – The Indian Express / Delhi Police / PTI / Press Club of India जय राष्ट्र न्यूज़

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पत्रकार रोजी के साथ कथित दुर्व्यवहार का आरोप, जवाब मांगने पहुंचे प्रदर्शनकारियों को थाने के बाहर रोका गया

नई दिल्ली: जंतर-मंतर पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ चल रहे प्रदर्शन की कवरेज के दौरान स्वतंत्र पत्रकार रोजी ने दिल्ली पुलिस के एक ACP पर कथित यौन उत्पीड़न और दुर्व्यवहार का आरोप लगाया है। मामले में FIR और कार्रवाई की मांग को लेकर Parliament Street Police Station पहुंचे प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने थाने के बाहर ही रोक दिया और कई लोगों को हिरासत में लिया। दिल्ली पुलिस ने महिला पत्रकारों की शिकायत को Crime Branch को जांच के लिए भेज दिया है। जंतर-मंतर प्रदर्शन के दौरान का है मामला घटना 3 अक्टूबर को उस समय की बताई जा रही है जब जंतर-मंतर के आसपास CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और SIR के खिलाफ प्रदर्शन चल रहा था। रोजी वहां प्रदर्शन की कवरेज कर रही थीं और AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा की हिरासत को रिकॉर्ड कर रही थीं। इसी दौरान उन्होंने एक पुलिस अधिकारी पर उनके साथ कथित तौर पर आपत्तिजनक व्यवहार करने का आरोप लगाया। ACP विवेक भगत पर लगाया आरोप रोजी ने आरोप लगाया कि ACP विवेक भगत ने उन्हें कथित तौर पर अनुचित तरीके से छुआ और पीछे की ओर धक्का दिया। उन्होंने कहा कि वह महिला प्रदर्शनकारियों को पुरुष पुलिसकर्मियों द्वारा हिरासत में लिए जाने पर सवाल उठा रही थीं। ये आरोप पत्रकार की शिकायत पर आधारित हैं और अभी जांच के अधीन हैं। तीन महिला पत्रकारों ने दी शिकायत मामला केवल रोजी तक सीमित नहीं रहा। दिल्ली पुलिस के मुताबिक 3 अक्टूबर की law-and-order situation के दौरान तीन महिला पत्रकारों ने पुलिस अधिकारियों के खिलाफ sexual harassment के आरोप लगाए और लिखित शिकायतें दीं। Crime Branch को सौंपी गई जांच दिल्ली पुलिस ने शिकायतों को New Delhi District से Crime Branch को ट्रांसफर कर दिया है। पुलिस का कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच की जाएगी और उपलब्ध वीडियो, बयान तथा अन्य साक्ष्यों की समीक्षा की जाएगी। FIR की मांग को लेकर थाने पहुंचे प्रदर्शनकारी रोजी और अन्य महिला पत्रकारों की शिकायत पर FIR दर्ज करने की मांग को लेकर पत्रकार, छात्र कार्यकर्ता और सामाजिक संगठनों से जुड़े लोग Parliament Street Police Station के बाहर पहुंचे। प्रदर्शनकारियों ने संबंधित अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई और शिकायत की औपचारिक FIR दर्ज करने की मांग की। पुलिस ने थाने के बाहर रोका सोमवार, 5 अक्टूबर को Parliament Street Police Station के बाहर प्रदर्शन कर रहे लोगों को पुलिस ने आगे बढ़ने से रोक दिया। इसके बाद कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया। मौके पर भारी पुलिस बल भी तैनात रहा। रोजी भी हिरासत में रिपोर्टों के अनुसार पत्रकार रोजी को भी FIR की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन करने के दौरान हिरासत में लिया गया। AISA अध्यक्ष नेहा बोरा ने भी दावा किया कि रोजी समेत प्रदर्शन से जुड़े कई लोगों को Delhi Cantonment Police Station ले जाया गया। कैमरे पर माफी की मांग रोजी ने ACP विवेक भगत से on-camera apology और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने कहा कि उनकी शिकायत को उसी तरह लिया जाना चाहिए जैसे किसी भी sexual harassment complaint को लिया जाता है। पत्रकार संगठनों में भी नाराजगी मामले के बाद पत्रकार संगठनों और स्वतंत्र पत्रकारों ने पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। 5 अक्टूबर को Press Club of India में भी इस मामले को लेकर पत्रकारों के जुटने और न्याय की मांग उठाने की खबर सामने आई। पुलिस अधिकारी के खिलाफ आरोप अभी साबित नहीं रोजी और अन्य पत्रकारों द्वारा लगाए गए आरोप गंभीर हैं, लेकिन फिलहाल ये शिकायत और जांच के स्तर पर हैं। Crime Branch की जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि आरोपों के समर्थन में क्या साक्ष्य हैं और किसी पुलिस अधिकारी के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई बनती है या नहीं। source – Delhi Police / The Indian Express / Times Now Navbharat / Daily Jagran / PTI जय राष्ट्र न्यूज़

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