प्रमुख खबरें

ज्ञानेश कुमार के खिलाफ मुंबई में ठाकरे परिवार का जोरदार प्रदर्शन, आदित्य-अमित ने संभाला मोर्चा

मुंबई: मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और Special Intensive Revision (SIR) के विरोध में मुंबई में प्रदर्शन तेज हो गया है। 11 अक्टूबर को शिवाजी पार्क और दादर इलाके में हुए विरोध प्रदर्शन में आदित्य ठाकरे, तेजस ठाकरे और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) के नेता अमित ठाकरे समर्थकों के साथ नजर आए। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, प्रदर्शन के दौरान करीब 300 लोगों को पुलिस ने हिरासत में लिया। इसके बाद ठाकरे परिवार के नेताओं ने आंदोलन और तेज करने की चेतावनी दी।

शिवाजी पार्क में बड़ा प्रदर्शन

11 अक्टूबर को शिवाजी पार्क के आसपास CJP समर्थकों और विपक्षी कार्यकर्ताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन किया। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोका और बड़ी संख्या में लोगों को हिरासत में लिया। इस कार्रवाई के बाद विरोध प्रदर्शन ने राजनीतिक रूप ले लिया और ठाकरे परिवार के नेताओं की सक्रियता बढ़ गई।

आदित्य और अमित ठाकरे ने संभाला मोर्चा

पुलिस की कार्रवाई के बाद शिवसेना (UBT) नेता आदित्य ठाकरे और MNS नेता अमित ठाकरे प्रदर्शन स्थल पर पहुंचे। दोनों नेताओं ने समर्थकों के साथ विरोध जताया और मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग दोहराई। उनके प्रदर्शन में शामिल होने के बाद मामला महाराष्ट्र की राजनीति में चर्चा का विषय बन गया।

तेजस ठाकरे भी प्रदर्शन में शामिल

आदित्य ठाकरे के भाई तेजस ठाकरे भी विरोध प्रदर्शन में मौजूद रहे। परिवार के अलग-अलग सदस्यों की भागीदारी के कारण सोशल मीडिया पर इसे ‘ठाकरे परिवार का प्रदर्शन’ कहा गया। हालांकि, सभी सदस्यों की मौजूदगी और उनकी गतिविधियों को एक ही समय की घटना मानने के बजाय संबंधित रिपोर्टों के संदर्भ में देखना जरूरी है।

अमित ठाकरे गाड़ी की छत पर चढ़े

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, प्रदर्शन के दौरान अमित ठाकरे एक वाहन की छत पर चढ़कर समर्थकों को संबोधित करते दिखाई दिए। उन्होंने पुलिस कार्रवाई और प्रदर्शन पर लगाई गई पाबंदियों को लेकर नाराजगी जताई। इस घटना के दृश्य भी सोशल मीडिया पर चर्चा में रहे।

आदित्य ठाकरे ने दी महाराष्ट्र बंद की चेतावनी

आदित्य ठाकरे ने पुलिस कार्रवाई पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए चेतावनी दी कि यदि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ इसी तरह कार्रवाई जारी रही, तो महाराष्ट्र में आंदोलन का दायरा बढ़ाया जा सकता है। रिपोर्टों में उनके हवाले से यह बयान भी सामने आया कि प्रदर्शनकारियों को हाथ लगाया गया तो महाराष्ट्र बंद कराया जा सकता है।

करीब 300 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया

रिपोर्टों के अनुसार, मुंबई पुलिस ने शिवाजी पार्क और आसपास के इलाकों से करीब 300 लोगों को एहतियातन हिरासत में लिया। बाद में बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारियों को रिहा कर दिया गया। पुलिस की कार्रवाई को लेकर विपक्षी नेताओं ने सवाल उठाए, जबकि प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन की जिम्मेदारी का हिस्सा रहा।

आदित्य और अमित ठाकरे समेत 25 लोगों पर मामला दर्ज

12 अक्टूबर को सामने आई रिपोर्टों के मुताबिक, मुंबई पुलिस ने शिवाजी पार्क में हुए विरोध प्रदर्शन से जुड़े मामले में आदित्य ठाकरे और अमित ठाकरे समेत 25 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया। यह मामला शिवाजी पार्क पुलिस स्टेशन के बाहर हुए प्रदर्शन और पुलिस आदेशों के कथित उल्लंघन से संबंधित बताया गया है। आरोप दर्ज होना अपने आप में किसी व्यक्ति के दोषी साबित होने का प्रमाण नहीं है।

4 अक्टूबर को राज और उद्धव ठाकरे भी साथ आए थे

इस आंदोलन से पहले 4 अक्टूबर को राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे ने मुंबई में संयुक्त मार्च का नेतृत्व किया था। दोनों नेताओं ने समर्थकों से पार्टी के झंडों के बजाय केवल तिरंगा लेकर आने की अपील की थी। मार्च के दौरान मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और चुनाव प्रक्रिया से जुड़े सवालों को उठाया गया।

राज ठाकरे ने दिल्ली में पुलिस कार्रवाई की आलोचना की

10 अक्टूबर को राज ठाकरे ने दिल्ली में CJP के प्रदर्शन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई की आलोचना की थी। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर विरोध की आवाज दबाने का आरोप लगाया और शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार को लेकर सवाल उठाए। ये उनके राजनीतिक आरोप और बयान थे।

SIR के मुद्दे पर एकजुट दिखे ठाकरे गुट

शिवसेना (UBT) और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठाए हैं। विपक्षी नेताओं का आरोप है कि मतदाता सूची में गंभीर अनियमितताएं हुई हैं और आयोग की निष्पक्षता पर सवाल खड़े होते हैं।

दूसरी ओर, चुनाव आयोग का कहना है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण का उद्देश्य सूची को अधिक सटीक बनाना और मृत, डुप्लिकेट तथा अपात्र प्रविष्टियों को हटाना है। इसलिए दोनों पक्षों के दावों को राजनीतिक आरोपों और आधिकारिक पक्ष के रूप में अलग-अलग समझना जरूरी है।

पार्टी झंडों के बजाय तिरंगा लाने की अपील

4 अक्टूबर के संयुक्त मार्च में राज और उद्धव ठाकरे ने पार्टी के झंडों के बजाय तिरंगा लेकर आने की अपील की थी। उनका कहना था कि यह मुद्दा किसी एक राजनीतिक दल तक सीमित नहीं है, बल्कि चुनाव आयोग और चुनावी प्रक्रिया से जुड़ा है।

आंदोलन का दायरा बढ़ाने की चेतावनी

आदित्य और अमित ठाकरे की सक्रियता तथा प्रदर्शनकारियों की हिरासत के बाद महाराष्ट्र में आंदोलन को और व्यापक बनाने की चेतावनी सामने आई। ठाकरे नेताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे और SIR से जुड़े सवालों पर जवाब मांगे हैं। हालांकि, आगे आंदोलन किस रूप में होगा, यह संबंधित नेताओं की आगामी घोषणाओं पर निर्भर करेगा।

आरोपों पर राजनीतिक विवाद जारी

विपक्षी दल मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयोग पर पक्षपात के आरोप लगा रहे हैं। चुनाव आयोग इन आरोपों से असहमति जताता है। उपलब्ध विवरणों के आधार पर इन आरोपों को राजनीतिक विवाद के हिस्से के रूप में प्रस्तुत करना उचित है; इन्हें न्यायिक रूप से सिद्ध तथ्य नहीं माना जाना चाहिए।

स्रोत: The Indian Express / Reuters / The Times of India / Navbharat Times

जय राष्ट्र न्यूज़

Leave a Reply

Translate »