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तमिलनाडु जेलब्रेक के बाद 13 कैदी पकड़े गए, चार की तलाश जारी; 9 जेलकर्मी निलंबित

थेनी: तमिलनाडु के थेनी जिले की Thekkampatti Sub-Jail से फरार हुए 17 कैदियों में से 13 को पुलिस ने दोबारा पकड़ लिया है, जबकि चार कैदी अब भी फरार हैं। पुलिस ने बड़े स्तर पर तलाशी अभियान चलाया, जिसमें ड्रोन surveillance, स्थानीय पुलिस और विशेष टीमों की मदद ली गई। कैसे फरार हुए थे 17 कैदी? प्रारंभिक जांच के मुताबिक एक कैदी ने कथित तौर पर मिर्गी का दौरा पड़ने का नाटक किया। जैसे ही जेलकर्मी मदद के लिए पहुंचे, दूसरे कैदियों ने उन पर हमला कर चाबियां छीन लीं और मुख्य रास्ते से बाहर निकल गए। ड्रोन से जंगलों में हुई तलाश फरार कैदियों की तलाश के लिए थेनी के आसपास के जंगलों में बड़े पैमाने पर combing operation चलाया गया। पुलिस ने घने इलाकों में छिपे कैदियों को खोजने के लिए drones का इस्तेमाल किया, जिससे कई फरार कैदियों को पकड़ने में मदद मिली। अब भी चार कैदी फरार पुलिस के मुताबिक चार कैदी अब भी गिरफ्त से बाहर हैं। उनकी पहचान K Meenakshi Sundaram, R Rejin, K Thirupathy और P Ponmuthuselvam के रूप में की गई है। उनकी तलाश के लिए विशेष टीमों को लगाया गया है। केरल सीमा पर बढ़ाई गई निगरानी पुलिस को आशंका है कि फरार कैदी पड़ोसी केरल की ओर भागने की कोशिश कर सकते हैं। इसी वजह से inter-state border पर निगरानी बढ़ाई गई है और केरल पुलिस से भी सहयोग मांगा गया है। 9 जेलकर्मियों को किया गया निलंबित जेलब्रेक के बाद जेल प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठे हैं। 9 जेलकर्मियों को negligence के आरोप में निलंबित किया गया है। इनमें दो head wardens भी शामिल हैं। DGP ने माना ‘human error’ Tamil Nadu DGP (Prisons) Sandeep Rai Rathore ने शुरुआती जांच में घटना के पीछे human error और security protocol breach को जिम्मेदार बताया है। घटना की विस्तृत जांच जारी है। 30 साल का सबसे बड़ा jailbreak Times of India ने इस घटना को तमिलनाडु का करीब तीन दशकों में सबसे बड़ा jailbreak बताया है। घटना के बाद राज्य की जेल सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी प्रणाली पर राजनीतिक सवाल भी खड़े हो गए हैं। स्रोत – Hindustan Times, Times of India, NDTV जय राष्ट्र न्यूज़

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जलगांव में RSS के पथ संचलन पर पथराव, किरीट सोमैया ने की कड़ी कार्रवाई की मांग

जलगांव: महाराष्ट्र के जलगांव जिले के यावल तालुका के किनगांव में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के विजयादशमी पथ संचलन के दौरान हुए पथराव का मामला अब राजनीतिक रूप से गरमा गया है। BJP नेता और पूर्व सांसद किरीट सोमैया ने घटना के आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने और दोषियों को क्षेत्र से तड़ीपार करने की मांग की है। 25 अक्टूबर को हुआ था विवाद घटना 25 अक्टूबर 2026 की है। किनगांव में RSS का पारंपरिक विजयादशमी पथ संचलन निकाला जा रहा था। निर्धारित मार्ग पर स्थित एक धार्मिक स्थल के सामने से पथ संचलन निकालने को लेकर कुछ लोगों ने विरोध किया और महिलाएं सड़क पर बैठ गईं। इसके बाद विवाद बढ़ गया और पथराव की घटना सामने आई। पुलिस को करना पड़ा लाठीचार्ज विवाद बढ़ने के बाद दोनों पक्षों के बीच तनाव पैदा हो गया। हालात नियंत्रित करने और भीड़ को हटाने के लिए पुलिस ने हल्का लाठीचार्ज किया। अतिरिक्त पुलिस बल भी मौके पर तैनात किया गया और बाद में स्थिति को नियंत्रण में लाया गया। पुलिसकर्मी और RSS कार्यकर्ता के घायल होने की खबर स्थानीय रिपोर्टों के मुताबिक पथराव में एक पुलिसकर्मी और RSS से जुड़े एक कार्यकर्ता के घायल होने की भी सूचना सामने आई। पुलिस ने मामले की जांच शुरू की और संदिग्ध लोगों को हिरासत में लिया। किरीट सोमैया ने क्या कहा? किरीट सोमैया ने 27 अक्टूबर को जलगांव में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर घटना को गंभीर बताया। उन्होंने सवाल उठाया कि मुख्य सड़क से किसी शांतिपूर्ण जुलूस को गुजरने से कैसे रोका जा सकता है। सोमैया ने दोषियों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई के साथ उन्हें तड़ीपार करने की मांग की। गिरीश महाजन ने भी दी सख्त चेतावनी महाराष्ट्र सरकार के मंत्री गिरीश महाजन ने भी घटना की निंदा की। उन्होंने कहा कि किसी भी धार्मिक या सामाजिक जुलूस पर हमला करना या कानून हाथ में लेना स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने पुलिस को मामले में दोषी पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। गिरफ्तारियों की संख्या को लेकर अलग-अलग रिपोर्ट मामले में पुलिस कार्रवाई और गिरफ्तारियों को लेकर अलग-अलग रिपोर्ट सामने आई हैं। शुरुआती खबरों में करीब 15 से 20 संदिग्धों को हिरासत में लेने की बात कही गई थी, जबकि बाद की कुछ रिपोर्टों में गिरफ्तार लोगों की संख्या इससे अधिक बताई गई है। पुलिस की आधिकारिक अंतिम संख्या स्पष्ट होने तक इन आंकड़ों को सावधानी से देखना जरूरी है। इलाके में पुलिस की निगरानी जारी घटना के बाद किनगांव और आसपास के संवेदनशील क्षेत्रों में पुलिस बल तैनात किया गया। प्रशासन ने लोगों से शांति बनाए रखने और सोशल मीडिया पर फैलने वाली अपुष्ट सूचनाओं या अफवाहों पर विश्वास नहीं करने की अपील की है। स्रोत – Loksatta, Sakal, Aaj Tak, Amar Ujala, ABP News जय राष्ट्र न्यूज़

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गुजरात सरकार ने कच्छ, जामनगर, पोरबंदर और देवभूमि द्वारका को सूखाग्रस्त घोषित किया

गांधीनगर: गुजरात सरकार ने कम मानसूनी बारिश के कारण कच्छ, जामनगर, पोरबंदर और देवभूमि द्वारका को सूखाग्रस्त घोषित कर दिया है। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने कहा कि यह फैसला केंद्र सरकार की Drought Manual Guidelines 2016 के आधार पर लिया गया है। राहत उपाय 1 नवंबर 2026 से लागू होंगे और सूखा घोषणा छह महीने तक प्रभावी रहेगी। चार जिलों में कितनी कम हुई बारिश? राज्य में इस मानसून औसतन करीब 89% बारिश हुई, लेकिन इन चार जिलों में स्थिति काफी खराब रही। देवभूमि द्वारका में सामान्य बारिश का सिर्फ 16.5%, पोरबंदर में 30.9%, जामनगर में 43.3% और कच्छ में 57.6% बारिश दर्ज की गई। किसानों को ₹8,500 प्रति हेक्टेयर सहायता सरकार ने फसल खराब होने वाले किसानों को SDRF के तहत ₹8,500 प्रति हेक्टेयर सहायता देने की घोषणा की है। यह मदद अधिकतम दो हेक्टेयर भूमि तक दी जाएगी। पशुपालकों को भी मिलेगी मदद सूखा प्रभावित इलाकों में पशुपालकों के लिए रियायती दर पर चारा उपलब्ध कराया जाएगा। सरकार पहले ही ₹2 प्रति किलो की दर से 1.21 करोड़ किलो चारा वितरित कर चुकी है और करीब तीन करोड़ किलो अतिरिक्त स्टॉक उपलब्ध होने की बात कही है। पशु शिविरों को प्रति पशु ₹80 प्रतिदिन सहायता भी दी जाएगी। 150 दिन का रोजगार देने का ऐलान सूखा प्रभावित जिलों में ग्रामीण परिवारों को VB-G RAM-G योजना के तहत 150 दिन का रोजगार उपलब्ध कराने की घोषणा की गई है। यह व्यवस्था 1 नवंबर से लागू की जाएगी। किन इलाकों में स्थिति सबसे गंभीर? देवभूमि द्वारका के कल्याणपुर तालुका में सिर्फ करीब 8% मौसमी बारिश दर्ज की गई। खंभालिया में 15%, पोरबंदर में 19% और द्वारका तालुका में करीब 20% बारिश हुई। कच्छ के अबडासा, लखपत और नखत्राणा में भी बारिश सामान्य के आधे से कम रही। सिंचाई और पेयजल की भी तैयारी राज्य के 206 बड़े बांधों में फिलहाल करीब 66% जल भंडारण है। रबी सीजन के लिए 76 बांधों से सिंचाई पानी देने की योजना बनाई गई है, जबकि पेयजल के लिए पानी को 30 जून 2027 तक सुरक्षित रखने की तैयारी है। किसान संगठनों ने राहत राशि पर उठाए सवाल गुजरात किसान कांग्रेस ने ₹8,500 प्रति हेक्टेयर की सहायता को अपर्याप्त बताया है और सरकार से राहत राशि बढ़ाने की मांग की है। संगठन का कहना है कि कई तालुकों में फसलों को भारी नुकसान हुआ है। स्रोत – Indian Express, Times of India, Gujarat Government जय राष्ट्र न्यूज़

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राजस्थान ने 14 जिलों की 80 तहसीलों को सूखाग्रस्त घोषित किया, 69 तहसीलें गंभीर श्रेणी में

जयपुर: राजस्थान सरकार ने कम बारिश, जल उपलब्धता में कमी और खरीफ फसलों को हुए नुकसान के बाद 14 जिलों की 80 तहसीलों को सूखाग्रस्त घोषित कर दिया है। इनमें 69 तहसीलों को गंभीर सूखा प्रभावित और 11 तहसीलों को मध्यम श्रेणी में रखा गया है। सरकार की यह घोषणा छह महीने तक प्रभावी रहेगी। किन जिलों को किया गया सूखाग्रस्त घोषित? सूखा प्रभावित जिलों में बांसवाड़ा, बाड़मेर, बालोतरा, बीकानेर, चूरू, डूंगरपुर, ब्यावर, जैसलमेर, जालौर, जोधपुर, फलोदी, नागौर, पाली और सिरोही शामिल हैं। सरकार ने 24 और 25 अक्टूबर को दो अलग-अलग अधिसूचनाएं जारी कर इन क्षेत्रों को सूखा प्रभावित घोषित किया। जोधपुर सबसे ज्यादा प्रभावित सूखा प्रभावित तहसीलों में जोधपुर सबसे ऊपर है, जहां 12 तहसीलें प्रभावित हैं। इसके बाद बाड़मेर और जालौर में 10-10, बालोतरा में 9 और पाली में 8 तहसीलें सूखा प्रभावित घोषित की गई हैं। 69 तहसीलें गंभीर सूखे की चपेट में सरकारी वर्गीकरण के मुताबिक 80 में से 69 तहसीलों में गंभीर सूखे की स्थिति है, जबकि 11 तहसीलों में मध्यम स्तर का सूखा दर्ज किया गया है। यह आकलन बारिश की कमी, सतही और भूजल की उपलब्धता तथा फसलों की स्थिति के आधार पर किया गया। मानसून में सामान्य से कम हुई बारिश राज्य के जल संसाधन विभाग के अनुसार 1 जून से 30 सितंबर के बीच राजस्थान में 350.83 मिमी बारिश दर्ज की गई, जबकि सामान्य बारिश 424.71 मिमी होती है। यानी राज्य में करीब 74 मिमी की कमी दर्ज की गई। जलाशयों में भी कम हुआ पानी राजस्थान के 693 निगरानी वाले बांधों में कुल जल भंडारण उनकी क्षमता का करीब 62.16% दर्ज किया गया, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह लगभग 90.19% था। खासतौर पर जोधपुर क्षेत्र में जल भंडारण में बड़ी गिरावट सामने आई है। किसानों और पशुपालकों के लिए राहत की तैयारी सूखा घोषित होने के बाद प्रभावित क्षेत्रों में राहत कार्यों का रास्ता खुल गया है। बाड़मेर जैसे जिलों में पशुपालकों के लिए रियायती दर पर चारा उपलब्ध कराने के लिए चारा डिपो खोलने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। छह महीने तक लागू रहेगी घोषणा राजस्थान सरकार की अधिसूचना के मुताबिक सूखाग्रस्त घोषित क्षेत्रों में यह स्थिति अधिसूचना के प्रकाशन से छह महीने तक प्रभावी रहेगी। इस दौरान सूखा राहत, कृषि सहायता और जल प्रबंधन से जुड़े कदम उठाए जा सकते हैं। स्रोत – राजस्थान सरकार, Hindustan Times, Times of India, Amar Ujala जय राष्ट्र न्यूज़

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गंभीर चक्रवाती तूफान की आशंका के बीच ओडिशा हाई अलर्ट पर, 302 बचाव दल तैयार; 28 अक्टूबर को आंध्र तट से टकराने का अनुमान

भुवनेश्वर, 25 अक्टूबर 2026: बंगाल की खाड़ी में बन रहा मौसम तंत्र तेजी से मजबूत हो रहा है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) के ताजा अनुमान के मुताबिक यह सिस्टम पहले चक्रवाती तूफान और फिर गंभीर से बहुत गंभीर चक्रवाती तूफान में बदल सकता है। फिलहाल इसके 28 अक्टूबर की पूर्वाह्न तक आंध्र प्रदेश और यानम तट के बीच, बापटला से विशाखापत्तनम के बीच टकराने की संभावना जताई गई है। ओडिशा में भी भारी बारिश और तेज हवाओं की आशंका को देखते हुए राज्य सरकार ने बड़े स्तर पर तैयारी शुरू कर दी है। ओडिशा में 302 बचाव दल तैयार ओडिशा सरकार ने कुल 302 बचाव एवं राहत दल तैयार रखे हैं। इनमें करीब 60 ODRAF टीमें, 17 NDRF टीमें और 225 फायर सर्विस यूनिट शामिल हैं। संवेदनशील जिलों में इन टीमों को तैनात या स्टैंडबाय पर रखा गया है। पांच जिलों में स्कूल-कॉलेज बंद गंजाम, गजपति, रायगढ़ा, कोरापुट और मलकानगिरी जिलों में 28 और 29 अक्टूबर को स्कूल, कॉलेज और आंगनवाड़ी केंद्र बंद रखने का आदेश दिया गया है। दूसरे जिलों में स्थानीय स्थिति के आधार पर जिला कलेक्टर छुट्टी का फैसला करेंगे। दक्षिण ओडिशा पर ज्यादा असर की आशंका राज्य सरकार के मुताबिक दक्षिणी ओडिशा के गंजाम, गजपति, रायगढ़ा, कोरापुट और मलकानगिरी जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश और तेज हवाओं का सबसे ज्यादा असर हो सकता है। कुछ इलाकों में हवा की रफ्तार 80 से 90 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंचने की आशंका है। IMD का ताजा अनुमान क्या है? IMD के अनुसार मौजूदा डिप्रेशन 25 अक्टूबर को डीप डिप्रेशन, 26 अक्टूबर तक चक्रवाती तूफान और 27 अक्टूबर तक गंभीर चक्रवाती तूफान में बदल सकता है। ताजा पूर्वानुमान में इसके 28 अक्टूबर को बापटला और विशाखापत्तनम के बीच आंध्र प्रदेश-यानम तट से बहुत गंभीर चक्रवाती तूफान के रूप में गुजरने की संभावना है। अधिकतम निरंतर हवा की गति 115-125 किमी प्रति घंटे, जबकि झोंके 140 किमी प्रति घंटे तक पहुंच सकते हैं। लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के निर्देश मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने निचले और बाढ़ संभावित इलाकों से लोगों को पहले ही सुरक्षित आश्रय स्थलों पर पहुंचाने के निर्देश दिए हैं। गर्भवती महिलाओं, मरीजों और बुजुर्गों को स्वास्थ्य केंद्रों या सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित करने को प्राथमिकता दी जा रही है। मछुआरों को समुद्र में न जाने की सलाह मछुआरों को समुद्र में न जाने और पहले से गहरे समुद्र में मौजूद नावों को तट पर लौटने की सलाह दी गई है। बड़े ट्रॉलर और जहाज संचालकों को भी अलर्ट किया गया है। बिजली, सड़क और स्वास्थ्य सेवाओं को भी अलर्ट सरकार ने इंजीनियरिंग विभागों को बिजली, सड़क और पेयजल व्यवस्था प्रभावित होने की स्थिति में तुरंत बहाली के लिए तैयार रहने को कहा है। स्वास्थ्य केंद्रों में जरूरी दवाएं, मेडिकल किट और एंटी-स्नेक वेनम का पर्याप्त स्टॉक रखने के निर्देश भी दिए गए हैं। ‘जीरो कैजुअल्टी’ पर सरकार का जोर ओडिशा सरकार ने सभी विभागों को समन्वय के साथ काम करने और ‘जीरो कैजुअल्टी’ के लक्ष्य पर ध्यान देने को कहा है। चक्रवात और बाढ़ आश्रय केंद्रों को तैयार रखा गया है और संवेदनशील इलाकों में प्रशासन लगातार निगरानी कर रहा है। जय राष्ट्र न्यूज़

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आंध्र प्रदेश में डीजल ट्रांसफर के दौरान भीषण विस्फोट, 7 लोगों की मौत

अल्लूरी सीताराम राजू, 25 अक्टूबर 2026: आंध्र प्रदेश के अल्लूरी सीताराम राजू जिले में सड़क निर्माण स्थल पर डीजल एक वाहन से दूसरे वाहन में ट्रांसफर किए जाने के दौरान भीषण आग और विस्फोट हो गया। हादसे में 7 लोगों की मौत हो गई, जिनमें एक सरकारी स्कूल की शिक्षिका भी शामिल हैं। कहां हुआ हादसा? यह घटना अनंतगिरी मंडल के पीचुमामिडी/बिसिमामिडी क्षेत्र में शनिवार सुबह करीब 8:30 बजे हुई। सड़क निर्माण के काम में लगी मशीनों और वाहनों के लिए डीजल ड्रमों में भरकर लाया गया था। डीजल ट्रांसफर के दौरान लगी आग पुलिस के अनुसार, मजदूर पिकअप वाहन में रखे डीजल को दूसरे वाहन में ट्रांसफर करने की तैयारी कर रहे थे। इसी दौरान आग लग गई, जिसने तेजी से आसपास खड़े वाहनों को अपनी चपेट में ले लिया। इसके बाद जोरदार विस्फोट हुआ। तीन वाहन पूरी तरह जले आग की चपेट में एक पिकअप ट्रक, एक डंपर और पास खड़ी एक दोपहिया गाड़ी आ गई। तीनों वाहन पूरी तरह जल गए। जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि शुरुआती चिंगारी किस वजह से पैदा हुई। मृतकों में स्कूल शिक्षिका भी शामिल मृतकों की पहचान जगरापु सुनीता (44), मनिकंठा, गुरु पवन, पंगी चिरंजीवी, टिंकू चंद्रवंशी सिंह, नज़ीर और नारायण राव के रूप में की गई है। सुनीता एक सरकारी स्कूल में शिक्षिका थीं और घटना के समय स्कूल जाने के रास्ते में थीं। विस्फोटक सामग्री की बात पुलिस ने नकारी घटना के शुरुआती चरण में कुछ रिपोर्टों में gelatin sticks की बात कही गई थी, लेकिन बाद में जिला पुलिस अधीक्षक अमित बरदार ने स्पष्ट किया कि जांच में gelatin sticks या gelatin explosive के अवशेष नहीं मिले। पुलिस ने इसे फिलहाल accidental fire बताया है। परिजनों को ₹5 लाख की सहायता जिला प्रशासन ने बताया कि ठेकेदार की ओर से मृतकों के परिवारों को ₹5-5 लाख की अनुग्रह राशि दी जाएगी। पात्र परिवारों को बीमा सहायता दिलाने की प्रक्रिया भी की जाएगी। सुरक्षा मानकों पर उठे सवाल हादसे के बाद सड़क निर्माण स्थलों पर डीजल के भंडारण और ट्रांसफर की सुरक्षा प्रक्रिया को लेकर सवाल उठे हैं। पुलिस और फॉरेंसिक टीम यह जांच रही है कि ईंधन संभालते समय निर्धारित सुरक्षा मानकों का पालन किया गया था या नहीं। जय राष्ट्र न्यूज़

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₹5 का फिनाइल ₹33,500 में, ₹306 की एलईडी ₹11,800 में! मध्य प्रदेश में ₹1,134 करोड़ की सरकारी खरीद पर उठे गंभीर सवाल

भोपाल, 25 अक्टूबर 2026: मध्य प्रदेश के नगरीय निकायों में पिछले तीन वर्षों में हुई सरकारी खरीद की जांच में कीमतों का चौंकाने वाला अंतर सामने आया है। कहीं एक लीटर फिनॉलिक डिसइन्फेक्टेंट यानी फिनाइल ₹5 में खरीदा गया, तो कहीं इसी तरह के उत्पाद की कीमत ₹33,500 दर्ज हुई। इसी तरह 60 वॉट की एलईडी लाइट कहीं ₹306 में खरीदी गई, जबकि भोपाल में उसी क्षमता की एलईडी की कीमत ₹11,800 दर्ज की गई। अब इस पूरे मामले में मध्य प्रदेश लोकायुक्त ने जांच शुरू कर दी है। तीन साल में ₹1,134 करोड़ की खरीद सरकारी प्रस्तुति के मुताबिक मध्य प्रदेश के 374 नगरीय निकायों ने पिछले तीन साल में सरकारी ई-मार्केटप्लेस यानी GeM के जरिए करीब ₹1,134 करोड़ की खरीद की। अधिकारियों के विश्लेषण में दावा किया गया कि अगर सामान औसत दरों के आसपास खरीदा जाता, तो करीब ₹250 करोड़ की बचत हो सकती थी। हालांकि यह अनुमान अपने-आप भ्रष्टाचार साबित नहीं करता; अंतिम निष्कर्ष के लिए सामान की गुणवत्ता, स्पेसिफिकेशन और खरीद दस्तावेजों की जांच जरूरी होगी। ₹5 से ₹33,500 तक पहुंचा फिनाइल का रेट प्रस्तुति में बताया गया कि एक निकाय में फिनॉलिक डिसइन्फेक्टेंट की कीमत ₹5 प्रति लीटर दर्ज हुई, जबकि दूसरे स्थान पर इसी श्रेणी के उत्पाद की कीमत ₹33,500 तक दिखाई गई। अधिकारियों ने इस भारी अंतर पर सवाल उठाए हैं और अब यह जांच का विषय है कि क्या दोनों उत्पाद वास्तव में समान थे या उनमें तकनीकी अंतर था। भोपाल में ₹11,800 की 60-वॉट एलईडी इसी तरह एक नगरीय निकाय ने 60 वॉट की एलईडी लाइट ₹306 में खरीदी, जबकि भोपाल में इसी क्षमता की लाइट का रेट ₹11,800 दर्ज हुआ। भोपाल की इस खरीद का कुल मूल्य करीब ₹3.78 लाख बताया गया है। अधिकारी यह भी जांच रहे हैं कि इसमें installation, accessories या अन्य अतिरिक्त लागत शामिल थी या नहीं। कचरा वाहन की कीमत में भी तीन गुना अंतर सरकारी बैठक में कचरा संग्रहण वाहनों की खरीद का उदाहरण भी दिया गया। एक नगरीय निकाय ने ऐसा वाहन करीब ₹2 लाख में खरीदा, जबकि दूसरे निकाय ने चार डस्टबिन के साथ उसी तरह के वाहन के लिए ₹6 लाख खर्च किए। अपर मुख्य सचिव संजय दुबे ने इस तरह की खरीद पर अधिकारियों को सख्त चेतावनी दी। ₹65 करोड़ डंपर पर, ₹49 करोड़ स्ट्रीट लाइट पर खर्च तीन वर्षों के आंकड़ों में करीब ₹65 करोड़ गारबेज टिपर और डंपर, ₹49 करोड़ स्ट्रीट लाइट, ₹27 करोड़ ऑक्टागोनल पोल और ₹18 करोड़ डिसइन्फेक्टेंट पर खर्च किए जाने की जानकारी सामने आई है। लोकायुक्त ने शुरू की जांच मामला सार्वजनिक होने और वीडियो वायरल होने के बाद मध्य प्रदेश लोकायुक्त ने कथित अनियमितताओं की जांच शुरू कर दी है। विशेष पुलिस स्थापना के महानिदेशक योगेश देशमुख ने कहा कि संबंधित विभाग से रिपोर्ट मांगी जाएगी और रिकॉर्ड की जांच की जाएगी। अधिकारियों को दी गई सख्त चेतावनी नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के अपर मुख्य सचिव संजय दुबे ने बैठक में साफ कहा कि विभाग अब यह देख सकता है कि कौन-सा निकाय क्या खरीद रहा है और किस दर पर खरीद रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि आगे ऐसी अनियमितताएं मिलीं तो कार्रवाई की जाएगी। क्या ₹250 करोड़ का घोटाला साबित हो गया? फिलहाल इसे सीधे ₹250 करोड़ का घोटाला कहना सावधानी के बिना सही नहीं होगा। ₹250 करोड़ वह अनुमानित राशि है जो अधिकारियों के विश्लेषण के मुताबिक औसत दरों पर खरीद करने से बचाई जा सकती थी। यह तय करना कि वास्तविक वित्तीय अनियमितता या भ्रष्टाचार कितना हुआ, लोकायुक्त और विभागीय जांच के बाद ही संभव होगा। जय राष्ट्र न्यूज़

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मणिपुर में हजारों लोगों का ‘साउंड प्रोटेस्ट’, बर्तन-हॉर्न और ड्रम बजाकर सरकार के खिलाफ जताया गुस्सा

इंफाल, 24 अक्टूबर 2026: मणिपुर में लंबे समय से जारी जातीय हिंसा और सामान्य स्थिति बहाल न होने से नाराज हजारों लोग शुक्रवार शाम सड़कों पर उतर आए। राज्य के पांच घाटी जिलों में लोगों ने बर्तन बजाए, ड्रम पीटे, वाहन के हॉर्न और सायरन बजाए और बिजली के खंभों पर हथौड़े मारकर करीब आधे घंटे तक ‘साउंड प्रोटेस्ट’ किया। शाम 7:30 से 8 बजे तक चला विरोध यह विरोध प्रदर्शन फेडरेशन ऑफ हाओमी के आह्वान पर किया गया। लोगों से शाम 7:30 बजे से 8 बजे तक आवाज़ के जरिए अपना विरोध दर्ज कराने की अपील की गई थी। इंफाल समेत कई इलाकों में बड़ी संख्या में लोगों ने इसमें हिस्सा लिया। कांगला किले के पास बढ़ा तनाव इंफाल का ऐतिहासिक कांगला किला प्रदर्शन का प्रमुख केंद्र रहा। बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी वहां पहुंचे और सरकार के खिलाफ नारे लगाए। राजभवन की ओर जाने वाले रास्ते पर सुरक्षा बढ़ाई गई और पुलिस ने बैरिकेड लगाए। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने आंसू गैस के गोले भी छोड़े। किसी के घायल होने की सूचना नहीं है। प्रदर्शनकारियों की क्या मांगें हैं? प्रदर्शनकारियों ने मणिपुर में जारी हिंसा और हत्याओं को रोकने के साथ-साथ राज्य में जल्द सामान्य स्थिति बहाल करने की मांग की। इसके अलावा कुछ प्रदर्शनकारियों ने NRC लागू करने, कथित अवैध प्रवासियों की पहचान करने और सशस्त्र समूहों के साथ Suspension of Operations समझौते को खत्म करने की मांग भी उठाई। ‘नेताओं तक हमारी आवाज पहुंचे’ प्रदर्शन में शामिल लोगों का कहना था कि लंबे समय से उनकी मांगों और पीड़ा पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। इसी वजह से उन्होंने प्रतीकात्मक रूप से इतनी तेज आवाज पैदा की, ताकि सरकार और नेताओं तक उनकी नाराजगी पहुंचे। हाल की हत्याओं के बाद बढ़ा गुस्सा यह विरोध ऐसे समय हुआ है जब हाल के दिनों में राज्य में हत्याओं की घटनाओं को लेकर तनाव बढ़ा है। रिपोर्टों के मुताबिक 19 अक्टूबर को तीन मैतेई लकड़हारों की हत्या के बाद कई इलाकों में धरने और विरोध प्रदर्शन तेज हुए हैं। 2023 से जारी है मणिपुर का संकट मणिपुर मई 2023 से जातीय संघर्ष और हिंसा का सामना कर रहा है। लगातार घटनाओं और राजनीतिक समाधान में देरी को लेकर लोगों में नाराजगी बनी हुई है। शुक्रवार का ‘साउंड प्रोटेस्ट’ इसी बढ़ती असंतुष्टि का नया रूप माना जा रहा है। जय राष्ट्र न्यूज़

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गहरी खाई में लटक गई यात्रियों से भरी बस, पेड़ों पर अटकने से बची 30 लोगों की जान

पौड़ी, 24 अक्टूबर 2026: उत्तराखंड के कोटद्वार-पौड़ी हाईवे पर भदालीखाल के पास एक बड़ा हादसा टल गया। कोटद्वार से पौड़ी-श्रीनगर जा रही गढ़वाल मोटर ओनर्स यूनियन (GMOU) की बस अनियंत्रित होकर सड़क से नीचे खाई की ओर चली गई, लेकिन नीचे मौजूद पेड़ों से टकराकर अटक गई। बस में चालक समेत करीब 30 यात्री सवार थे और सभी को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। कैसे हुआ हादसा? चालक के अनुसार, दुगड्डा से आगे गुमखाल और भदालीखाल के बीच बस का प्रेशर पाइप अचानक फट गया। इसके बाद बस आगे नहीं बढ़ सकी और सड़क पर ढलान होने के कारण पीछे की ओर खिसकते हुए खाई की तरफ चली गई। पेड़ बना यात्रियों के लिए ढाल बस खाई में पूरी तरह गिरने से पहले एक पेड़ से टकराकर रुक गई। कुछ स्थानीय रिपोर्ट्स में बताया गया कि बस दो चीड़ के पेड़ों के बीच फंस गई थी। अगर बस वहां नहीं रुकती तो हादसा बेहद गंभीर हो सकता था। 30 यात्री थे सवार बस में चालक सहित करीब 30 लोग मौजूद थे। हादसे के बाद यात्रियों में चीख-पुकार मच गई, लेकिन राहत की बात यह रही कि सभी को सुरक्षित निकाल लिया गया। एक-दो यात्रियों को हल्की चोटें आईं, किसी के गंभीर रूप से घायल होने की सूचना नहीं है। पुलिस ने चलाया बचाव अभियान घटना की सूचना मिलते ही दुगड्डा चौकी, गुमखाल चौकी और लैंसडौन कोतवाली से पुलिस टीमें मौके पर पहुंचीं। पुलिसकर्मियों ने राहत एवं बचाव अभियान चलाकर यात्रियों को बस से सुरक्षित सड़क तक पहुंचाया। कोटद्वार से श्रीनगर जा रही थी बस GMOU की ‘हिमगिरी’ बस बुधवार दोपहर करीब एक बजे कोटद्वार से पौड़ी होते हुए श्रीनगर के लिए रवाना हुई थी। भदालीखाल के पास तकनीकी खराबी आने के बाद यह दुर्घटना हुई। बड़ा हादसा टला पहाड़ी मार्ग और गहरी खाई को देखते हुए यह हादसा जानलेवा हो सकता था। पेड़ों पर बस के अटक जाने और समय पर बचाव अभियान के कारण करीब 30 यात्रियों की जान बच गई। जय राष्ट्र न्यूज़

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पोकलेन मशीन से लदा ट्रक गुजरते ही टूटा बेली ब्रिज, नदी में जा गिरा वाहन

पिथौरागढ़, 24 अक्टूबर 2026: उत्तराखंड के मुनस्यारी क्षेत्र में एक बेली ब्रिज उस समय अचानक टूट गया, जब उस पर पोकलेन मशीन से लदा भारी ट्रक गुजर रहा था। पुल टूटते ही ट्रक नीचे नदी में जा गिरा। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। भारी वजन पड़ते ही ढह गया पुल वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि पोकलेन मशीन लेकर ट्रक जैसे ही बेली ब्रिज के बीच हिस्से पर पहुंचता है, पुल अचानक नीचे की ओर झुकता है और कुछ ही सेकंड में टूट जाता है। इसके बाद ट्रक नदी में गिर जाता है। सीमांत क्षेत्र की आवाजाही पर असर यह पुल सीमांत क्षेत्र में स्थानीय आवाजाही के लिए महत्वपूर्ण बताया जा रहा है। हादसे के बाद उस मार्ग पर यातायात प्रभावित हुआ है और वैकल्पिक रास्तों की व्यवस्था पर काम किया जा रहा है। क्षमता से अधिक भार की आशंका प्रारंभिक तौर पर आशंका जताई जा रही है कि भारी पोकलेन मशीन के साथ ट्रक का कुल वजन पुल की क्षमता से अधिक हो सकता है। हालांकि पुल टूटने की वास्तविक वजह तकनीकी जांच के बाद ही स्पष्ट होगी। वीडियो हुआ वायरल घटना का वीडियो सामने आने के बाद बेली ब्रिज की मजबूती, भारी वाहनों की आवाजाही और सीमांत क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे की सुरक्षा को लेकर सवाल उठ रहे हैं। प्रशासनिक जांच और पुल की मरम्मत से जुड़ी आगे की जानकारी का इंतजार है। किसी के हताहत होने की पुष्टि नहीं उपलब्ध शुरुआती रिपोर्ट में किसी मौत या गंभीर चोट की स्पष्ट पुष्टि नहीं की गई है। इसलिए casualty से जुड़े किसी भी दावे को आधिकारिक जानकारी आने तक सावधानी से देखना चाहिए। जय राष्ट्र न्यूज़

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