भोपाल, 25 अक्टूबर 2026: मध्य प्रदेश के नगरीय निकायों में पिछले तीन वर्षों में हुई सरकारी खरीद की जांच में कीमतों का चौंकाने वाला अंतर सामने आया है। कहीं एक लीटर फिनॉलिक डिसइन्फेक्टेंट यानी फिनाइल ₹5 में खरीदा गया, तो कहीं इसी तरह के उत्पाद की कीमत ₹33,500 दर्ज हुई। इसी तरह 60 वॉट की एलईडी लाइट कहीं ₹306 में खरीदी गई, जबकि भोपाल में उसी क्षमता की एलईडी की कीमत ₹11,800 दर्ज की गई। अब इस पूरे मामले में मध्य प्रदेश लोकायुक्त ने जांच शुरू कर दी है।
तीन साल में ₹1,134 करोड़ की खरीद
सरकारी प्रस्तुति के मुताबिक मध्य प्रदेश के 374 नगरीय निकायों ने पिछले तीन साल में सरकारी ई-मार्केटप्लेस यानी GeM के जरिए करीब ₹1,134 करोड़ की खरीद की। अधिकारियों के विश्लेषण में दावा किया गया कि अगर सामान औसत दरों के आसपास खरीदा जाता, तो करीब ₹250 करोड़ की बचत हो सकती थी। हालांकि यह अनुमान अपने-आप भ्रष्टाचार साबित नहीं करता; अंतिम निष्कर्ष के लिए सामान की गुणवत्ता, स्पेसिफिकेशन और खरीद दस्तावेजों की जांच जरूरी होगी।
₹5 से ₹33,500 तक पहुंचा फिनाइल का रेट
प्रस्तुति में बताया गया कि एक निकाय में फिनॉलिक डिसइन्फेक्टेंट की कीमत ₹5 प्रति लीटर दर्ज हुई, जबकि दूसरे स्थान पर इसी श्रेणी के उत्पाद की कीमत ₹33,500 तक दिखाई गई। अधिकारियों ने इस भारी अंतर पर सवाल उठाए हैं और अब यह जांच का विषय है कि क्या दोनों उत्पाद वास्तव में समान थे या उनमें तकनीकी अंतर था।
भोपाल में ₹11,800 की 60-वॉट एलईडी
इसी तरह एक नगरीय निकाय ने 60 वॉट की एलईडी लाइट ₹306 में खरीदी, जबकि भोपाल में इसी क्षमता की लाइट का रेट ₹11,800 दर्ज हुआ। भोपाल की इस खरीद का कुल मूल्य करीब ₹3.78 लाख बताया गया है। अधिकारी यह भी जांच रहे हैं कि इसमें installation, accessories या अन्य अतिरिक्त लागत शामिल थी या नहीं।
कचरा वाहन की कीमत में भी तीन गुना अंतर
सरकारी बैठक में कचरा संग्रहण वाहनों की खरीद का उदाहरण भी दिया गया। एक नगरीय निकाय ने ऐसा वाहन करीब ₹2 लाख में खरीदा, जबकि दूसरे निकाय ने चार डस्टबिन के साथ उसी तरह के वाहन के लिए ₹6 लाख खर्च किए। अपर मुख्य सचिव संजय दुबे ने इस तरह की खरीद पर अधिकारियों को सख्त चेतावनी दी।
₹65 करोड़ डंपर पर, ₹49 करोड़ स्ट्रीट लाइट पर खर्च
तीन वर्षों के आंकड़ों में करीब ₹65 करोड़ गारबेज टिपर और डंपर, ₹49 करोड़ स्ट्रीट लाइट, ₹27 करोड़ ऑक्टागोनल पोल और ₹18 करोड़ डिसइन्फेक्टेंट पर खर्च किए जाने की जानकारी सामने आई है।
लोकायुक्त ने शुरू की जांच
मामला सार्वजनिक होने और वीडियो वायरल होने के बाद मध्य प्रदेश लोकायुक्त ने कथित अनियमितताओं की जांच शुरू कर दी है। विशेष पुलिस स्थापना के महानिदेशक योगेश देशमुख ने कहा कि संबंधित विभाग से रिपोर्ट मांगी जाएगी और रिकॉर्ड की जांच की जाएगी।
अधिकारियों को दी गई सख्त चेतावनी
नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के अपर मुख्य सचिव संजय दुबे ने बैठक में साफ कहा कि विभाग अब यह देख सकता है कि कौन-सा निकाय क्या खरीद रहा है और किस दर पर खरीद रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि आगे ऐसी अनियमितताएं मिलीं तो कार्रवाई की जाएगी।
क्या ₹250 करोड़ का घोटाला साबित हो गया?
फिलहाल इसे सीधे ₹250 करोड़ का घोटाला कहना सावधानी के बिना सही नहीं होगा। ₹250 करोड़ वह अनुमानित राशि है जो अधिकारियों के विश्लेषण के मुताबिक औसत दरों पर खरीद करने से बचाई जा सकती थी। यह तय करना कि वास्तविक वित्तीय अनियमितता या भ्रष्टाचार कितना हुआ, लोकायुक्त और विभागीय जांच के बाद ही संभव होगा।
जय राष्ट्र न्यूज़

