चंदौली: उत्तर प्रदेश के चंदौली जिले के पंडित दीनदयाल उपाध्याय नगर में सड़क चौड़ीकरण परियोजना के तहत करीब 200 साल पुराने काली मंदिर को ध्वस्त करने के दौरान बड़ा हादसा हो गया। मंदिर का भारी गुंबद अचानक गिरने से मलबे में दबकर 45 वर्षीय मजदूर बलदेव यादव की मौत हो गई, जबकि एक अन्य व्यक्ति घायल हो गया। मंदिर को हटाने का काम लोक निर्माण विभाग (PWD) की परियोजना के तहत एक निजी ठेकेदार द्वारा कराया जा रहा था।
सड़क चौड़ीकरण के लिए हटाया जा रहा था मंदिर
यह मंदिर जीटी रोड के चौड़ीकरण परियोजना के निर्धारित मार्ग में आ रहा था। सड़क विस्तार का काम पिछले कई महीनों से चल रहा था। इसी परियोजना के तहत पुराने मंदिर को हटाने का निर्णय लिया गया था।
अचानक गिरा मंदिर का गुंबद
मंदिर के ध्वस्तीकरण के दौरान बुलडोजर की मदद से संरचना का एक हिस्सा तोड़ा जा रहा था। इसी बीच मंदिर का ऊपरी गुंबद अचानक नीचे गिर गया। इसकी चपेट में आने से दो लोग मलबे में दब गए।
बलदेव यादव की मौत, एक अन्य व्यक्ति घायल
हादसे में जान गंवाने वाले मजदूर की पहचान 45 वर्षीय बलदेव यादव के रूप में हुई। बताया गया कि वह ध्वस्तीकरण के दौरान गाइड रोप संभाल रहे थे। हादसे में गंभीर चोट लगने के बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां उनकी मौत हो गई।
वहीं, घटना में घायल हुए दूसरे व्यक्ति को भी बचाव दल ने मलबे से बाहर निकालकर अस्पताल पहुंचाया।
मंदिर को पहले ही किया गया था स्थानांतरित
प्रशासन के अनुसार, पुराने मंदिर को हटाने से पहले पास में नया मंदिर बनाया गया था। पुरानी संरचना से मूर्तियों को नए मंदिर में स्थानांतरित करने के बाद प्राण प्रतिष्ठा की गई थी। इसके बाद मंदिर समिति की सहमति से पुराने मंदिर को हटाने की प्रक्रिया शुरू की गई थी।
प्रशासन और पुलिस को नहीं दी गई थी पूर्व सूचना
जिला प्रशासन के अधिकारियों के अनुसार, मंदिर का ध्वस्तीकरण शुरू करने से पहले स्थानीय प्रशासन और पुलिस को इसकी पूर्व सूचना नहीं दी गई थी। हादसे के बाद यह पहलू भी जांच के दायरे में आया।
सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
घटना के बाद ध्वस्तीकरण स्थल पर सुरक्षा इंतजामों को लेकर गंभीर सवाल उठे। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, करीब 35 फीट ऊंचे मंदिर के आसपास लगभग 20 फीट तक ही बैरिकेडिंग की गई थी। मजदूरों के हेलमेट और सुरक्षा जैकेट जैसे जरूरी उपकरण नहीं पहनने की बात भी सामने आई।
ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया पर भी सवाल
रिपोर्टों के अनुसार, मंदिर की संरचना को चरणबद्ध तरीके से तोड़ने की योजना थी। हालांकि, आरोप है कि ठेकेदार ने मशीनरी की मदद से संरचना को एक साथ गिराने की कोशिश की, जिससे हादसे का खतरा बढ़ गया। ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया और सुरक्षा इंतजामों की जांच महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
DM ने PWD अधिकारियों को किया तलब
हादसे के बाद चंदौली के जिलाधिकारी ने लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों को तलब कर घटना की वजह और ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया के बारे में जानकारी मांगी। घटना के तुरंत बाद ध्वस्तीकरण का काम भी रोक दिया गया।
मृतक PWD का नियमित कर्मचारी नहीं था
कुछ स्थानीय रिपोर्टों में बलदेव यादव को PWD कर्मचारी बताया गया, लेकिन विस्तृत रिपोर्टों के अनुसार वह विभाग के निजी ठेकेदार के साथ काम कर रहे मजदूर थे। इसलिए उन्हें PWD का नियमित कर्मचारी बताने के बजाय विभाग की परियोजना में कार्यरत मजदूर कहना अधिक सटीक है।
सड़क परियोजनाओं में मजदूरों की सुरक्षा पर फिर सवाल
इस हादसे ने सड़क चौड़ीकरण और ध्वस्तीकरण परियोजनाओं में मजदूरों की सुरक्षा, पर्याप्त बैरिकेडिंग और सुरक्षात्मक उपकरणों की उपलब्धता पर सवाल खड़े किए हैं। पुराने और ऊंचे भवनों या धार्मिक संरचनाओं को गिराते समय नियंत्रित ध्वस्तीकरण प्रक्रिया, प्रशिक्षित कर्मचारियों और उचित सुरक्षा व्यवस्था की जरूरत एक बार फिर सामने आई है।
स्रोत: The Indian Express / Dainik Jagran / Prabhat Khabar
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