सूरत: गुजरात के सूरत में स्थित खजोद कचरा निस्तारण स्थल पर 1 नवंबर 2026 की सुबह भीषण आग लग गई। कचरे और अत्यधिक ज्वलनशील प्लास्टिक के ढेर में लगी आग ने कुछ ही देर में विकराल रूप ले लिया। आसमान में काले धुएं का बड़ा गुबार छा गया, जो दूर-दूर तक दिखाई दे रहा था। सूचना मिलते ही दमकल विभाग की कई टीमें मौके पर पहुंचीं और आग बुझाने का अभियान शुरू किया।
सुबह करीब 6:45 बजे लगी आग
सूरत अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवा को आग की सूचना सुबह करीब 6:45 बजे मिली। दमकलकर्मियों के पहुंचने तक आग कचरे में पड़े प्लास्टिक के बड़े ढेर तक फैल चुकी थी।
आग से उठने वाले घने काले धुएं के कारण आसपास के इलाके में भी चिंता का माहौल बन गया।
हॉटफिक्स प्लास्टिक के ढेर में लगी थी आग
दमकल विभाग के अनुसार आग मुख्य रूप से हॉटफिक्स प्रक्रिया से निकलने वाली प्लास्टिक शीट के कचरे में लगी थी। सूरत के कपड़ा उद्योग में कपड़ों पर चमकीले पत्थर लगाने के लिए इस सामग्री का इस्तेमाल किया जाता है।
यह प्लास्टिक अत्यधिक ज्वलनशील होता है और आग लगने पर तेजी से जलता है, जिससे दमकलकर्मियों के लिए स्थिति को नियंत्रित करना चुनौतीपूर्ण हो गया।
35 दमकलकर्मी और सात गाड़ियां लगीं
आग बुझाने के लिए करीब 35 दमकलकर्मियों और सात दमकल गाड़ियों को लगाया गया। अभियान के दौरान 3 लाख लीटर से ज्यादा पानी का इस्तेमाल किया गया।
दमकल टीम को आग पूरी तरह नियंत्रित करने में करीब छह घंटे लगे और दोपहर लगभग 1 बजे तक स्थिति काबू में आई।
जेसीबी और फोर्कलिफ्ट की भी ली गई मदद
कचरे के बड़े ढेर के अंदर आग लगातार सुलग रही थी। इसलिए सिर्फ ऊपर से पानी डालना पर्याप्त नहीं था।
दमकलकर्मियों ने जेसीबी और फोर्कलिफ्ट मशीनों की मदद से प्लास्टिक की परतों को अलग किया और अंदर तक पानी पहुंचाया, ताकि दोबारा आग भड़कने का खतरा कम किया जा सके।
आधा किलोमीटर दूर तक दिखा धुएं का गुबार
आग इतनी भीषण थी कि काले धुएं का गुबार करीब आधा किलोमीटर दूर तक दिखाई दे रहा था। इससे आसपास के क्षेत्रों में वायु प्रदूषण को लेकर भी चिंता बढ़ी।
सूरत डायमंड बोर्स के पास है डंपिंग साइट
खजोद का यह कचरा निस्तारण स्थल सूरत डायमंड बोर्स के बेहद करीब स्थित है। बार-बार आग लगने की घटनाओं के कारण स्थानीय उद्योग प्रतिनिधियों ने इस स्थल को दूसरी जगह स्थानांतरित करने की मांग दोहराई है।
उनका कहना है कि लगातार धुआं, दुर्गंध और आग की घटनाएं आसपास के क्षेत्र और डायमंड बोर्स की छवि को प्रभावित कर रही हैं।
एक साल से भी कम समय में तीसरी बड़ी आग
रिपोर्ट के अनुसार खजोद डंपिंग स्थल पर एक साल से भी कम समय में यह तीसरी बड़ी आग है। इससे पहले फरवरी और मार्च में भी यहां आग लग चुकी है।
लगातार घटनाओं के बाद गुजरात प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने अप्रैल में सूरत महानगरपालिका को नोटिस भी जारी किया था।
तीन-चार महीनों में हॉटफिक्स कचरे से 50 से ज्यादा आग की घटनाएं
दमकल अधिकारियों के अनुसार पिछले तीन से चार महीनों में सूरत के अलग-अलग इलाकों में हॉटफिक्स प्लास्टिक से जुड़ी 50 से अधिक आग की घटनाएं सामने आ चुकी हैं।
इससे ऐसे औद्योगिक कचरे के सुरक्षित निस्तारण को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
औद्योगिक कचरा डंपिंग साइट तक कैसे पहुंचा?
ताजा आग के बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि औद्योगिक और अत्यधिक ज्वलनशील हॉटफिक्स प्लास्टिक सामान्य नगर कचरे के निस्तारण स्थल तक कैसे पहुंचा।
स्थानीय स्तर पर यह भी मांग उठ रही है कि इस बात की जांच की जाए कि ऐसे कचरे को साइट तक कौन पहुंचा रहा है और इसकी निगरानी की जिम्मेदारी किसकी थी।
कचरा प्रबंधन एजेंसी भी सवालों के घेरे में
सूरत शहर से रोज करीब 2,500 मीट्रिक टन कचरा निकलता है। इसके निस्तारण की जिम्मेदारी एक निजी एजेंसी को दी गई थी।
एजेंसी पर पहले भी वैज्ञानिक तरीके से कचरा निस्तारण न करने और दूसरी जगह अवैध रूप से कचरा फेंकने के आरोप लगे हैं। इस मामले में पुलिस शिकायत भी दर्ज की गई थी। ये आरोप जांच के अधीन हैं।
बड़ी मात्रा में कचरा अब भी जमा
रिपोर्टों के मुताबिक खजोद स्थल पर बड़ी मात्रा में कचरा अब भी जमा है। विपक्षी पार्षदों ने कचरे के निस्तारण में अनियमितताओं के आरोप लगाए हैं, हालांकि इन आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष जांच के बाद ही निकलेगा।
किसी जनहानि की सूचना नहीं
आग के कारण बड़े स्तर पर धुआं और प्रदूषण जरूर फैला, लेकिन उपलब्ध रिपोर्टों में किसी मौत या घायल होने की पुष्टि नहीं हुई है।
दमकल विभाग ने आग पर नियंत्रण पाने के बाद भी अंदर सुलग रहे कचरे की जांच जारी रखी, ताकि दोबारा आग न भड़के।
बार-बार आग से उठे सुरक्षा के सवाल
खजोद डंपिंग स्थल पर लगातार आग लगने की घटनाओं ने कचरा प्रबंधन, औद्योगिक कचरे के निस्तारण और अग्नि सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
अब स्थानीय लोगों और उद्योग जगत की नजर इस बात पर है कि सूरत महानगरपालिका बार-बार होने वाली इन घटनाओं को रोकने के लिए क्या स्थायी कदम उठाती है।
स्रोत – सूरत अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवा, टाइम्स ऑफ इंडिया, गुजरात समाचार, स्थानीय मीडिया रिपोर्ट
जय राष्ट्र न्यूज़

