देवशयनी एकादशी पर देशभर के प्रमुख मंदिरों में विशेष आयोजन, श्रद्धालुओं की उमड़ी भारी भीड़

नई दिल्ली: आषाढ़ शुक्ल पक्ष की देवशयनी एकादशी के अवसर पर शनिवार को देशभर के प्रमुख मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना, धार्मिक अनुष्ठान और भजन-कीर्तन का आयोजन किया गया। सुबह से ही मंदिरों में श्रद्धालुओं की लंबी कतारें देखने को मिलीं। भगवान विष्णु की विशेष पूजा के साथ चातुर्मास का शुभारंभ भी हुआ, जिसे सनातन परंपरा में अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।

उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र, उत्तराखंड और अन्य राज्यों के प्रसिद्ध विष्णु मंदिरों में बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचे। कई स्थानों पर प्रशासन ने भीड़ को देखते हुए अतिरिक्त सुरक्षा और यातायात व्यवस्था की गई।

क्या है देवशयनी एकादशी का महत्व?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, देवशयनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु क्षीरसागर में योगनिद्रा में चले जाते हैं और चार माह बाद देवउठनी एकादशी पर जागते हैं। इसी अवधि को चातुर्मास कहा जाता है। इस दौरान विवाह और अन्य मांगलिक कार्य पारंपरिक रूप से नहीं किए जाते, जबकि पूजा, जप, दान और व्रत का विशेष महत्व माना जाता है।

देशभर के मंदिरों में विशेष आयोजन

आज कई प्रमुख मंदिरों में—

  • भगवान विष्णु का विशेष अभिषेक।
  • तुलसी और पीले पुष्पों से आकर्षक श्रृंगार।
  • विष्णु सहस्रनाम और भजन-कीर्तन।
  • प्रसाद वितरण और सामूहिक आरती।
  • धार्मिक प्रवचन एवं सत्संग।

का आयोजन किया गया।

श्रद्धालुओं की भारी भीड़

सुबह से ही हजारों श्रद्धालु मंदिरों में दर्शन के लिए पहुंचे। कई स्थानों पर ऑनलाइन दर्शन और विशेष व्यवस्था भी की गई ताकि अधिक भीड़ के बावजूद श्रद्धालुओं को सुविधा मिल सके।

प्रशासन रहा सतर्क

बढ़ती भीड़ को देखते हुए पुलिस और स्थानीय प्रशासन ने प्रमुख मंदिरों के आसपास सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की। यातायात नियंत्रण, चिकित्सा सहायता और पेयजल जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध कराई गईं।

धार्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व

देवशयनी एकादशी केवल धार्मिक पर्व ही नहीं बल्कि भारतीय सांस्कृतिक परंपरा का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है। इस दिन दान-पुण्य, व्रत और आध्यात्मिक साधना का विशेष महत्व माना जाता है और श्रद्धालु परिवार की सुख-समृद्धि एवं मंगलकामना के लिए भगवान विष्णु की आराधना करते हैं।

निष्कर्ष

देवशयनी एकादशी के अवसर पर देशभर में श्रद्धा और आस्था का वातावरण देखने को मिला। प्रमुख मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना, धार्मिक कार्यक्रम और बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की उपस्थिति ने इस पर्व की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक महत्ता को एक बार फिर उजागर किया।

Source:

Ministry of Culture | विभिन्न मंदिर प्रशासन | PTI

जय राष्ट्र न्यूज़

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