प्रमुख खबरें

राष्ट्रीय | छात्रों पर पुलिस कार्रवाई को लेकर संसद में हंगामा, अमित शाह के बयान की मांग पर लोकसभा फिर स्थगित

नई दिल्ली: संसद के मानसून सत्र के दौरान मंगलवार, 11 अगस्त 2026 को छात्रों के प्रदर्शन पर कथित पुलिस कार्रवाई का मुद्दा एक बार फिर गरमा गया। विपक्षी सांसदों ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से इस मामले पर सदन में बयान देने की मांग की। लगातार नारेबाजी और हंगामे के कारण लोकसभा की कार्यवाही शुरू होने के कुछ ही मिनट बाद दोपहर 2 बजे तक स्थगित करनी पड़ी। प्रश्नकाल शुरू होते ही विपक्ष ने उठाया छात्र प्रदर्शन का मुद्दा लोकसभा की कार्यवाही मंगलवार सुबह 11 बजे शुरू हुई। जैसे ही अध्यक्ष ओम बिरला ने प्रश्नकाल शुरू करने की कोशिश की, विपक्षी सांसदों ने छात्रों के प्रदर्शन के दौरान हुई कथित पुलिस कार्रवाई का मुद्दा उठाना शुरू कर दिया। विपक्ष की मांग थी कि गृह मंत्री अमित शाह स्वयं सदन में आकर इस पूरे मामले पर जवाब दें। लगातार नारेबाजी के कारण प्रश्नकाल सामान्य तरीके से आगे नहीं बढ़ सका। अमित शाह के बयान पर अड़ा विपक्ष विपक्षी सांसदों का मुख्य जोर गृह मंत्री अमित शाह के व्यक्तिगत बयान पर है। विपक्ष का आरोप है कि छात्रों के प्रदर्शन के दौरान पुलिस की कार्रवाई को लेकर सरकार को सदन में स्पष्ट जवाब देना चाहिए। हिंदुस्तान टाइम्स के अनुसार, विपक्ष 20 जुलाई को परीक्षा में कथित अनियमितताओं के खिलाफ हुए छात्र प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई और कथित तौर पर पेलेट गन के इस्तेमाल को लेकर चर्चा और शाह के बयान की मांग कर रहा है। सरकार ने कहा—गृह मंत्री जवाब देने को तैयार संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू की ओर से पहले ही कहा गया था कि सरकार इस मुद्दे पर सदन में चर्चा के लिए तैयार है और अमित शाह भी छात्रों से जुड़े पुलिस कार्रवाई के मुद्दे पर जवाब देने के लिए तैयार हैं। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने भी सदन में विपक्षी सांसदों को यही जानकारी दी और उनसे प्रश्नकाल को चलने देने की अपील की। स्पीकर ओम बिरला ने की बार-बार अपील हंगामे के बीच लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने विपक्षी सांसदों से सदन की कार्यवाही चलने देने की अपील की। उन्होंने कहा कि प्रश्नकाल सरकार से जवाबदेही सुनिश्चित करने का महत्वपूर्ण माध्यम है और सांसदों को सदन में चर्चा तथा बहस के जरिए अपनी बात रखनी चाहिए। बिरला ने सदस्यों से पोस्टर और बैनर दिखाने के बजाय संसदीय प्रक्रिया के तहत चर्चा करने की अपील की। इसके बावजूद नारेबाजी जारी रही। कुछ ही मिनट में लोकसभा स्थगित विपक्ष के लगातार विरोध के चलते लोकसभा की कार्यवाही शुरू होने के लगभग चार मिनट बाद ही स्थगित कर दी गई। अब सदन की कार्यवाही दोपहर 2 बजे दोबारा शुरू होने के लिए निर्धारित की गई है। राज्यसभा में भी इसी मुद्दे को लेकर हंगामा हुआ। वहां की कार्यवाही भी बाधित हुई और सदन को दोपहर 12 बजे तक स्थगित किया गया। दो सप्ताह से जारी है संसद में गतिरोध छात्र प्रदर्शन से जुड़े इस मुद्दे को लेकर संसद में पिछले करीब दो सप्ताह से राजनीतिक गतिरोध बना हुआ है। विपक्ष लगातार पुलिस कार्रवाई पर चर्चा और गृह मंत्री के बयान की मांग कर रहा है। वहीं, सरकार का कहना है कि वह इस विषय पर चर्चा के लिए तैयार है और गृह मंत्री सदन में जवाब देने को तैयार हैं। इसके बावजूद दोनों पक्षों के बीच सहमति नहीं बन पा रही है। 20 जुलाई के प्रदर्शन पर है विवाद विवाद का मुख्य केंद्र 20 जुलाई का छात्र प्रदर्शन है। यह प्रदर्शन परीक्षा में कथित अनियमितताओं और तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर हुआ था। विपक्ष का आरोप है कि प्रदर्शन के दौरान छात्रों के खिलाफ पुलिस ने जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग किया। इसी कार्रवाई को लेकर गृह मंत्री से संसद में जवाब मांगा जा रहा है। सरकार और विपक्ष के बीच बढ़ता टकराव सोमवार को सरकार की ओर से छात्रों से जुड़े मुद्दे और पुलिस कार्रवाई पर चर्चा कराने की पेशकश की गई थी। हालांकि विपक्ष ने केवल सामान्य चर्चा के बजाय गृह मंत्री अमित शाह से सीधे जवाब की मांग पर जोर दिया। इसी मुद्दे पर मंगलवार को भी संसद की कार्यवाही प्रभावित हुई और दोनों पक्षों के बीच गतिरोध जारी रहा। मानसून सत्र पर भी असर लगातार हंगामे का असर संसद के मानसून सत्र के कामकाज पर भी पड़ रहा है। सरकार और विपक्ष के बीच कई मुद्दों पर पहले से मतभेद हैं और छात्र प्रदर्शन का मुद्दा अब इस राजनीतिक टकराव का प्रमुख केंद्र बन गया है। संसदीय कार्यवाही सुचारु रूप से चलाने को लेकर लोकसभा अध्यक्ष लगातार दोनों पक्षों से सहयोग की अपील कर रहे हैं। निष्कर्ष छात्र प्रदर्शन पर कथित पुलिस कार्रवाई को लेकर संसद में जारी गतिरोध मंगलवार को भी खत्म नहीं हो सका। विपक्ष अमित शाह से सदन में स्पष्ट बयान की मांग पर अड़ा रहा, जबकि सरकार का कहना है कि गृह मंत्री इस मुद्दे पर जवाब देने के लिए तैयार हैं। लगातार नारेबाजी के कारण लोकसभा को कुछ ही मिनटों में दोपहर 2 बजे तक स्थगित करना पड़ा। अब नजर इस बात पर है कि दोपहर बाद सदन की कार्यवाही सुचारु हो पाती है या छात्र प्रदर्शन का मुद्दा एक बार फिर संसद में हंगामे का कारण बनता है। Source: News On AIR / Hindustan Times / Economic Times जय राष्ट्र न्यूज़

आगे और पढ़ें

अमित शाह की राष्ट्रपति से मुलाकात के बाद केंद्रीय मंत्रिमंडल फेरबदल की अटकलें तेज

नई दिल्ली, 26 जून। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से हुई मुलाकात के बाद राजनीतिक गलियारों में केंद्रीय मंत्रिमंडल में संभावित फेरबदल को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। हालांकि केंद्र सरकार या भारतीय जनता पार्टी की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। राष्ट्रपति भवन में हुई मुलाकात बनी चर्चा का विषय अमित शाह ने गुरुवार को राष्ट्रपति भवन पहुंचकर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से मुलाकात की। इससे दो दिन पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी राष्ट्रपति से मुलाकात की थी। इन लगातार बैठकों के बाद राजनीतिक हलकों में संभावित मंत्रिमंडल विस्तार या फेरबदल को लेकर अटकलों का दौर शुरू हो गया है। संगठन और सरकार दोनों में बदलाव की चर्चा राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आगामी विधानसभा चुनावों और सरकार के प्रदर्शन को ध्यान में रखते हुए संगठन और मंत्रिमंडल दोनों स्तरों पर कुछ बदलाव किए जा सकते हैं। हालांकि भाजपा नेतृत्व ने अब तक किसी भी संभावित फेरबदल की पुष्टि नहीं की है। कई मंत्रालयों को लेकर चल रही अटकलें राजनीतिक चर्चाओं में कुछ मंत्रालयों में बदलाव और नए चेहरों को जिम्मेदारी मिलने की संभावनाएं जताई जा रही हैं। साथ ही सहयोगी दलों को भी अधिक प्रतिनिधित्व दिए जाने की अटकलें लगाई जा रही हैं। लेकिन इन दावों की आधिकारिक पुष्टि फिलहाल नहीं हुई है। सरकार की ओर से नहीं आया कोई आधिकारिक बयान अब तक केंद्र सरकार, राष्ट्रपति भवन या भाजपा की ओर से मंत्रिमंडल फेरबदल की तारीख या स्वरूप को लेकर कोई आधिकारिक जानकारी जारी नहीं की गई है। ऐसे में राजनीतिक हलकों में चल रही चर्चाओं को केवल अटकलों के रूप में ही देखा जा रहा है। आगे क्या? राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि मंत्रिमंडल में बदलाव होता है तो इसका उद्देश्य आगामी चुनावों से पहले सरकार और संगठन को और मजबूत करना हो सकता है। फिलहाल सभी की नजर केंद्र सरकार की अगली आधिकारिक घोषणा पर बनी हुई है। जब तक सरकार की ओर से औपचारिक सूचना जारी नहीं होती, तब तक किसी भी संभावित फेरबदल की पुष्टि नहीं मानी जा सकती। स्रोत:राष्ट्रपति भवन से जारी सार्वजनिक जानकारी एवं विभिन्न राष्ट्रीय समाचार रिपोर्ट मूल रिपोर्ट:सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी, राजनीतिक घटनाक्रम और विभिन्न विश्वसनीय समाचार स्रोतों के आधार पर जय राष्ट्र न्यूज़

आगे और पढ़ें
रैली में बोले अमित शाह- अब 100 बख्तियार खिलजी भी आ जाएं, नालंदा विवि को कोई हाथ नहीं लगा सकता

रैली में बोले अमित शाह- अब 100 बख्तियार खिलजी भी आ जाएं, नालंदा विवि को कोई हाथ नहीं लगा सकता

बिहार में विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी सरगर्मियां तेज हो गई हैं. राजनीतिक दलों ने चुनाव प्रचार में अपनी पूरी ताकत झोंक दी है. इसी क्रम में खगड़िया और मुंगेर के बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह बिहार के नालंदा पहुंचे, जहां उन्होंने जनसभा को संबोधित किया. अमित शाह ने लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि नालंदा की पावापुरी में ही 24वें तीर्थंकर महावीर स्वामी ने निर्वाण प्राप्ति की थी. यहीं पर नालंदा का विश्व प्रसिद्ध विश्वविद्यालय कुमारगुप्त ने बनाया था, जिसको 12वीं शताब्दी में बख्तियार खिलजी ने जला दिया था. उन्होंने कहा कि जब बख्तियार खिलजी ने नालंदा विद्यापीठ जलाई, तब इसके पुस्तकालय से 6 माह तक पुस्तकों के जलने का धुआं उठता रहता था. ये विनाश का काम बख्तियार खिलजी ने किया था, मगर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फिर से नालंदा विश्वविद्यालय बनाकर हमारे नालंदा की विरासत को गौरव देने का काम किया है. 10 साल से बिहार में कोई नरसंहार नहीं हुआ है केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि ये एनडीए का शासन है, अब 100 बख्तियार खिलजी भी आ जाएं, नालंदा विश्वविद्यालय को कोई हाथ नहीं लगा सकता. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने तय किया है- विकास भी, विरासत भी. यहीं पर एआई और डेटा का नया युग हम शुरू करने वाले हैं. उन्होंने कहा कि बिहार में अनेक बड़े कारखाने और एग्रो प्रोसेसिंग इंडस्ट्री हम लगाएंगे, जो किसानों की आय भी बढ़ाएगी और औद्योगिक विकास भी होगा. अमित शाह ने आगे कहा कि इस बार बिहार में 2 चरण में चुनाव होने वाले हैं. लालू और राबड़ी के जमाने में यहां कानून-व्यवस्था इतनी गिर गई थी कि चुनाव 6-6 चरण में कराने पड़ते थे. मैं आपसे कहना चाहता हूं कि पीएम मोदी और सीएम नीतीश के शासन में 6 चरण की जगह 2 चरण में चुनाव हो रहे हैं. इस बार फिर एनडीए सरकार बना दो, अगली बार एक ही चरण में चुनाव होगा. उन्होंने आगे कहा कि लालू के बेटे बिहार की कानून व्यवस्था की बात कर रहे थे. मैं उनसे कहना चाहता हूं कि जरा अपने गिरेबान में झांककर देखिए. 2005 की तुलना में 2024 में हत्याओं में 20 प्रतिशत की कमी, डकैती की घटनाओं में 80 प्रतिशत की कमी और फिरौती की घटनाओं में 80 प्रतिशत की कमी आई है और 10 साल से बिहार में कोई नरसंहार नहीं हुआ है. बिहार अब सुरक्षित हुआ है. लालू अपने बेटे को बिहार का मुख्यमंत्री बनाना चाहते हैं गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि अभी-अभी पीएम मोदी और सीएम नीतीश ने बिहार की 1.21 करोड़ जीविका दीदी के खातों में 10-10 हजार रुपए एक ही बटन दबाकर ट्रांसफर करने का काम किया है. सभी के लिए 125 यूनिट बिजली फ्री की. युवाओं को ग्रेजुएट होने के बाद 2 वर्ष तक 1 हजार रुपए भत्ता मिलेगा. उन्होंने कहा कि विधवा पेंशन 400 से बढ़ाकर 1100 किया, बुढ़ापे का पेंशन 400 से बढ़ाकर 1100 किया, आंगनबाड़ी सेविका का मानदेय 7 हजार से बढ़ाकर 9 हजार किया और ममता कार्यकर्ताओं का मानदेय भी डबल कर दिया गया है. शाह ने आगे कहा कि लालू अपने बेटे को बिहार का मुख्यमंत्री बनाना चाहते हैं और सोनिया अपने बेटे को देश का प्रधानमंत्री बनाना चाहती हैं. जो परिवार की राजनीति करते हैं, वे अपने बेटे-बेटियों के लिए सरकार चलाते हैं. वहीं, पीएम नरेंद्र मोदी और सीएम नीतीश कुमार भारत और बिहार के गरीबों के लिए सरकार चलाते हैं. उन्होंने कहा कि आपने 20 साल तक आशीर्वाद दिया है, एक और 5 साल आशीर्वाद दीजिए. हम बिहार को विकसित बिहार बनाकर रहेंगे.

आगे और पढ़ें
Translate »