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CJP प्रदर्शन से पहले दिल्ली में बड़ा सुरक्षा अभियान, अभिजीत दीपके, सौरव दास और आशुतोष रांका हिरासत में

नई दिल्ली: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया के विरोध में 10 अक्टूबर को प्रस्तावित CJP प्रदर्शन से पहले दिल्ली में व्यापक सुरक्षा इंतजाम किए गए। इस दौरान CJP के प्रमुख नेता अभिजीत दीपके, सौरव दास और आशुतोष रांका को दिल्ली पहुंचने के बाद हिरासत में लिए जाने की खबर सामने आई। वहीं, मध्य दिल्ली के कई इलाकों में मेट्रो सेवाओं तक पहुंच, यातायात और मोबाइल इंटरनेट पर भी प्रतिबंध लगाए गए। दिल्ली पहुंचते ही हिरासत में लिए गए CJP नेता रिपोर्टों के मुताबिक, अभिजीत दीपके, सौरव दास और आशुतोष रांका को दिल्ली एयरपोर्ट पर विमान उतरने के बाद हिरासत में लिया गया। CJP नेताओं ने इस कार्रवाई का विरोध करते हुए कहा कि वे शांतिपूर्ण प्रदर्शन में शामिल होने के लिए दिल्ली आए थे। इस कार्रवाई के बाद प्रस्तावित प्रदर्शन और पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चर्चा तेज हो गई। कई अन्य प्रदर्शनकारी भी हिरासत में दिल्ली पुलिस ने CJP समर्थकों के अलावा अन्य प्रदर्शनकारियों को भी हिरासत में लिया। Reuters की रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली में बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया। जंतर-मंतर और आसपास के क्षेत्रों में अनधिकृत जमावड़े को रोकने के लिए सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ाई गई थी। दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन की अनुमति देने से किया इनकार दिल्ली पुलिस ने 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन की अनुमति देने से इनकार कर दिया था। पुलिस के अनुसार, प्रदर्शन के लिए आवेदन निर्धारित 10 दिन की समयसीमा के बजाय केवल तीन दिन पहले दिया गया था। अधिकारियों ने पिछले प्रदर्शनों के दौरान कानून-व्यवस्था से जुड़ी कथित समस्याओं का भी हवाला दिया। इसके बाद प्रदर्शन की अनुमति और पुलिस की कार्रवाई को लेकर सवाल उठे। 45 मेट्रो स्टेशनों के प्रवेश और निकास द्वार बंद सुरक्षा संबंधी निर्देशों के बाद दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) ने 45 मेट्रो स्टेशनों के प्रवेश और निकास द्वार बंद करने की घोषणा की थी। यह प्रतिबंध 9 अक्टूबर रात 9 बजे से 10 अक्टूबर शाम 6 बजे तक लागू रखने की जानकारी दी गई थी। हालांकि, प्रभावित स्टेशनों में से अधिकांश पर इंटरचेंज की सुविधा जारी रहने की बात कही गई। इन प्रतिबंधों का उद्देश्य संवेदनशील इलाकों में लोगों की आवाजाही नियंत्रित करना बताया गया। पहले 57 मेट्रो स्टेशनों पर प्रतिबंध की योजना शुरुआत में 57 मेट्रो स्टेशनों पर प्रतिबंध लगाने की योजना सामने आई थी। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट में इस व्यवस्था को चुनौती दी गई और व्यापक परिवहन प्रतिबंधों को लेकर चिंता जताई गई। रिपोर्टों के अनुसार, बाद में प्रतिबंधित स्टेशनों की संख्या घटाकर 45 कर दी गई। इस घटनाक्रम ने सुरक्षा व्यवस्था और आम यात्रियों की सुविधा के बीच संतुलन का सवाल खड़ा किया। मध्य दिल्ली में मोबाइल इंटरनेट सेवाएं निलंबित प्रदर्शन से पहले जनपथ-कर्तव्य पथ चौराहे के आसपास करीब चार किलोमीटर के दायरे में मोबाइल इंटरनेट सेवाएं 24 घंटे के लिए निलंबित किए जाने की जानकारी सामने आई थी। यह प्रतिबंध 9 अक्टूबर रात 10 बजे से 10 अक्टूबर रात 10 बजे तक लागू रखने की घोषणा की गई थी। अधिकारियों ने इस कदम को सार्वजनिक सुरक्षा और कानून-व्यवस्था से जुड़ी चिंताओं के संदर्भ में बताया। मध्य दिल्ली में यातायात पर भी प्रतिबंध दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने मध्य दिल्ली के करीब 30 स्थानों पर यातायात डायवर्जन और आवाजाही संबंधी प्रतिबंधों की व्यवस्था की थी। धौला कुआं से मंडी हाउस तक कई प्रमुख मार्गों पर अतिरिक्त जांच और बैरिकेडिंग की गई। यात्रियों को संभावित जाम और असुविधा को देखते हुए गैर-जरूरी यात्रा से बचने की सलाह भी दी गई थी। हजारों सुरक्षाकर्मी किए गए तैनात जंतर-मंतर, संसद मार्ग और निर्वाचन आयोग के मुख्यालय के आसपास पुलिस तथा अर्धसैनिक बलों की व्यापक तैनाती की गई। मीडिया रिपोर्टों में सुरक्षा बलों की संख्या करीब 25,000 तक बताई गई। नई दिल्ली जिले को अलग-अलग सुरक्षा क्षेत्रों में बांटकर निगरानी और आवाजाही नियंत्रण की व्यवस्था की गई थी। BNSS की धारा 163 के तहत प्रतिबंध संवेदनशील इलाकों में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा लागू किए जाने की भी खबरें सामने आईं। इस प्रावधान के तहत निर्धारित परिस्थितियों में सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रतिबंधात्मक आदेश जारी किए जा सकते हैं। इन आदेशों का उल्लंघन करने पर लागू कानून के अनुसार कार्रवाई हो सकती है। सुप्रीम कोर्ट ने व्यापक प्रतिबंधों पर जताई चिंता सुप्रीम कोर्ट में मेट्रो और रेल सेवाओं पर व्यापक प्रतिबंध लगाने के मुद्दे पर सुनवाई के दौरान चिंता जताई गई। अदालत ने सुरक्षा संबंधी जरूरतों और आम लोगों की आवाजाही के बीच संतुलन बनाए रखने पर जोर दिया। सुनवाई में यह सवाल भी उठा कि संभावित कानून-व्यवस्था की स्थिति से निपटने के लिए परिवहन सेवाओं को बड़े पैमाने पर प्रभावित करना कितना आवश्यक और आनुपातिक है। CJP की प्रमुख मांग क्या है? CJP मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR प्रक्रिया को लेकर विरोध कर रही है। संगठन का आरोप है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाए गए, जिससे चुनावी निष्पक्षता प्रभावित हो सकती है। वहीं, निर्वाचन आयोग और भाजपा ने इन आरोपों को खारिज किया है। ऐसे में मतदाता सूची में बदलाव और उसकी प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक विवाद जारी है। अभिजीत दीपके ने आंदोलन जारी रखने की बात कही रिपोर्टों के मुताबिक, हिरासत से पहले अभिजीत दीपके ने कहा था कि प्रतिबंधों और गिरफ्तारियों के बावजूद आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने समर्थकों से शांतिपूर्ण तरीके से विरोध प्रदर्शन करने की अपील भी की थी। CJP के नेताओं का रुख है कि मतदाता सूची और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े सवालों को सार्वजनिक रूप से उठाया जाना चाहिए। सुरक्षा कार्रवाई पर नागरिक अधिकारों की बहस तेज CJP प्रदर्शन से पहले हिरासत में लिए जाने, मेट्रो स्टेशनों पर प्रतिबंध, मोबाइल इंटरनेट सेवाओं के निलंबन और व्यापक सुरक्षा तैनाती ने शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार तथा कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी के बीच संतुलन पर बहस तेज कर दी है। प्रशासन इन कदमों को सुरक्षा संबंधी एहतियाती कार्रवाई के रूप में देख रहा है, जबकि CJP और उसके समर्थक इन्हें लोकतांत्रिक असहमति पर जरूरत से ज्यादा प्रतिबंध बता रहे हैं। इस विवाद में प्रतिबंधों की आवश्यकता, उनका दायरा और आम…

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अभिजीत दीपके का सत्ता को संदेश—“सत्ता आपकी, लेकिन सड़क हमारी”; बोले, लोकतंत्र वापस हासिल करेंगे

नई दिल्ली, 10 अक्टूबर 2026: जंतर-मंतर पर प्रस्तावित CJP प्रदर्शन से पहले संगठन के संस्थापक अभिजीत दीपके ने केंद्र सरकार और प्रशासन पर निशाना साधते हुए कहा कि सत्ता भले ही सरकार के पास हो, लेकिन सड़कें भारत के लोगों की हैं। उन्होंने कहा कि जनता लोकतांत्रिक अधिकारों और संस्थाओं की जवाबदेही के लिए अपना संघर्ष जारी रखेगी। यह बयान ऐसे समय आया है, जब दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी है और राजधानी में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं। “सत्ता आपकी, लेकिन सड़क हमारी” अभिजीत दीपके ने कहा कि सरकार के पास सत्ता और संस्थागत ताकत हो सकती है, लेकिन सार्वजनिक स्थानों पर नागरिकों के लोकतांत्रिक अधिकार भी महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने अपने आंदोलन को लोकतांत्रिक संस्थाओं की जवाबदेही और मतदान के अधिकारों से जुड़ा बताया। उनका कहना है कि जनता की आवाज को दबाया नहीं जाना चाहिए। “लोकतंत्र वापस हासिल करेंगे” दीपके ने कहा कि CJP का आंदोलन किसी एक दिन या स्थान तक सीमित नहीं है। उनके अनुसार, यह लोकतंत्र की रक्षा और नागरिक अधिकारों के लिए संघर्ष है। उन्होंने संकेत दिया कि यदि प्रदर्शनकारियों को जंतर-मंतर तक पहुंचने से रोका गया, तो वे उस स्थान पर भी अपना विरोध दर्ज कराएंगे जहां उन्हें रोका जाएगा। 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन का ऐलान CJP ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची की विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया (SIR) को वापस लेने की मांग को लेकर 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन का आह्वान किया था। संगठन ने मतदाता सूची के संशोधन के दौरान कथित अनियमितताओं को लेकर सवाल उठाए हैं। वहीं, निर्वाचन आयोग इस प्रक्रिया को मतदाता सूचियों को दुरुस्त करने की कवायद बताता रहा है। दिल्ली पुलिस ने नहीं दी अनुमति दिल्ली पुलिस ने प्रस्तावित प्रदर्शन को अनुमति नहीं दी। पुलिस के अनुसार, प्रदर्शन की अनुमति के लिए निर्धारित प्रक्रिया और समयसीमा का पालन नहीं किया गया। इसी बीच, नई दिल्ली और मध्य दिल्ली के संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की गई तथा आवाजाही को नियंत्रित करने के लिए कदम उठाए गए। मेट्रो स्टेशनों और परिवहन पर असर प्रदर्शन को देखते हुए मध्य दिल्ली में व्यापक सुरक्षा इंतजाम किए गए। कई मेट्रो स्टेशनों के प्रवेश और निकास द्वार बंद किए जाने की सूचना भी सामने आई। CJP ने इन प्रतिबंधों को प्रदर्शन स्थल तक पहुंचने से लोगों को रोकने की कोशिश बताया, जबकि प्रशासन की ओर से सुरक्षा और कानून-व्यवस्था बनाए रखने को प्राथमिकता दी गई। दीपके बोले—“गिरफ्तार करना है तो करिए” पुलिस कार्रवाई की आशंका के बीच दीपके ने कहा था कि वह गिरफ्तारी से नहीं डरते। उन्होंने समर्थकों से अपने लोकतांत्रिक अधिकारों के लिए आवाज उठाते रहने की अपील की। उनका कहना है कि शांतिपूर्ण विरोध और अपनी मांगें उठाना नागरिकों के लोकतांत्रिक अधिकारों का हिस्सा है। दिल्ली पहुंचते ही हिरासत में लिए गए CJP नेता 10 अक्टूबर को अभिजीत दीपके, सौरव दास और आशुतोष रांका को दिल्ली पहुंचने के बाद कथित तौर पर विमान के अंदर ही हिरासत में ले लिया गया। इस घटना का वीडियो भी सामने आया, जिसमें CJP के नेता पुलिस कार्रवाई का विरोध करते और हिरासत में लिए जाने की बात कहते दिखाई दिए। इस घटनाक्रम ने प्रस्तावित प्रदर्शन को लेकर जारी तनाव को और बढ़ा दिया। हजारों सुरक्षाकर्मियों की तैनाती जंतर-मंतर और मध्य दिल्ली के आसपास पुलिस तथा अन्य सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ाई गई है। प्रशासन का कहना है कि सुरक्षा उपायों का उद्देश्य कानून-व्यवस्था बनाए रखना है। दूसरी ओर, प्रदर्शन आयोजकों ने इन कदमों पर सवाल उठाते हुए इन्हें विरोध प्रदर्शन को रोकने की कोशिश बताया है। SIR को लेकर CJP के आरोप CJP का आरोप है कि विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए। संगठन ने इसे चुनावी पारदर्शिता और मतदान के अधिकार से जुड़ा गंभीर मुद्दा बताया है। हालांकि, इन आरोपों और उनसे जुड़े आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है। निर्वाचन आयोग ने मतदाता सूची संशोधन प्रक्रिया का बचाव किया है। आंदोलन जारी रखने का ऐलान हिरासत और प्रतिबंधों के बावजूद CJP ने अपना आंदोलन जारी रखने की बात कही है। दीपके का कहना है कि यदि उन्हें जंतर-मंतर तक पहुंचने से रोका जाता है, तो भी संगठन लोकतांत्रिक अधिकारों और अपनी मांगों को लेकर विरोध जारी रखने के अन्य तरीके तलाशेगा। लोकतांत्रिक अधिकार बनाम कानून-व्यवस्था की बहस इस घटनाक्रम ने शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार और प्रशासन की कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी के बीच बहस को फिर से सामने ला दिया है। एक ओर CJP अपने प्रदर्शन को लोकतांत्रिक अधिकारों की लड़ाई बता रही है, वहीं पुलिस सुरक्षा व्यवस्था और अनुमति संबंधी नियमों का हवाला दे रही है। आगे की स्थिति इस बात पर निर्भर करेगी कि प्रशासन और प्रदर्शन आयोजक इन परिस्थितियों से कैसे निपटते हैं। स्रोत: Reuters, The Indian Express, Hindustan, Jansatta, NDTV जय राष्ट्र न्यूज़

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CJP के मंच पर पहुंचे ध्रुव राठी, बोले—“यह लोकतंत्र बचाने की लड़ाई”; SIR और चुनाव आयोग पर उठाए सवाल

बेंगलुरु: YouTuber ध्रुव राठी ने 8 अक्टूबर 2026 को बेंगलुरु के Freedom Park में आयोजित CJP के विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लिया। यह प्रदर्शन Special Intensive Revision (SIR) और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आयोजित किया गया था। ध्रुव राठी ने मंच से कहा कि वह किसी सरकार को बदलने के लिए नहीं, बल्कि लोकतंत्र और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े सवाल उठाने के लिए आए हैं। Freedom Park में हुआ बड़ा प्रदर्शन CJP ने बेंगलुरु के Freedom Park में “People’s Tribunal” और प्रतीकात्मक “चप्पल प्रदर्शन” आयोजित किया। इसमें ध्रुव राठी के साथ अभिनेता और सामाजिक कार्यकर्ता प्रकाश राज, CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके और सौरव दास समेत कई लोग शामिल हुए। “लोकतंत्र बचाने की लड़ाई” ध्रुव राठी ने प्रदर्शन से पहले भी लोगों से इसमें शामिल होने की अपील की थी। उन्होंने इसे लोकतंत्र की रक्षा से जुड़ी लड़ाई बताया और बेंगलुरु के साथ-साथ 10 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर होने वाले प्रदर्शन में भी लोगों से पहुंचने की अपील की थी। “Regime change के लिए नहीं आया” CJP के मंच से ध्रुव राठी ने कहा कि उनका उद्देश्य सरकार बदलना नहीं है। उन्होंने कहा कि वह चुनाव आयोग की पारदर्शिता और जवाबदेही से जुड़े सवाल उठाने आए हैं। Election Commission पर उठाए सवाल ध्रुव राठी ने अपने भाषण में चुनाव आयोग के कामकाज पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि SIR से जुड़े मामलों में पारदर्शिता और जवाबदेही की कमी है। ये प्रदर्शनकारियों के आरोप हैं। वहीं, चुनाव आयोग SIR को मतदाता सूचियों को अधिक सटीक बनाने की प्रक्रिया बताता रहा है। SIR से कथित रूप से प्रभावित लोगों ने रखी बात People’s Tribunal में ऐसे लोगों को अपनी बात रखने का मौका दिया गया, जिन्होंने दावा किया कि SIR प्रक्रिया के दौरान उनके नाम गलत तरीके से मतदाता सूची से हटा दिए गए। आयोजकों ने इन बयानों के जरिए मतदाता सूची से नाम हटाए जाने को लेकर उठ रहे सवालों को सामने रखने की कोशिश की। प्रकाश राज भी पहुंचे मंच पर अभिनेता और सामाजिक कार्यकर्ता प्रकाश राज ने भी प्रदर्शन में हिस्सा लिया। उन्होंने SIR को समाप्त करने और चुनावी प्रक्रिया में जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग का समर्थन किया। ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग CJP और प्रदर्शन में शामिल अन्य संगठन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। प्रदर्शन के दौरान “SIR रद्द करो” और “ज्ञानेश कुमार गद्दी छोड़ो” जैसे नारे भी लगाए गए। अभिजीत दिपके ने गिरफ्तारी से न डरने को कहा CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके ने समर्थकों से कहा कि वे 10 अक्टूबर को दिल्ली में होने वाले प्रदर्शन के दौरान गिरफ्तारी से न डरें। उन्होंने आंदोलन को मतदाताओं के अधिकारों और लोकतांत्रिक संस्थाओं की जवाबदेही से जोड़ा। 10 अक्टूबर के Delhi protest की तैयारी बेंगलुरु में हुए प्रदर्शन को 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर प्रस्तावित बड़े प्रदर्शन की तैयारी के रूप में भी देखा जा रहा है। CJP और उससे जुड़े छात्र संगठनों ने लोगों से दिल्ली के प्रदर्शन में शामिल होने की अपील की है। आंदोलन को मिला नया चेहरा ध्रुव राठी और प्रकाश राज की मौजूदगी से CJP के प्रदर्शन को राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा मिली। सोशल मीडिया पर दोनों की भागीदारी और प्रदर्शन से जुड़े वीडियो भी तेजी से प्रसारित हुए। आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष नहीं SIR के दौरान मतदाता सूची से नाम हटाए जाने और चुनाव आयोग की कथित भूमिका को लेकर प्रदर्शनकारी कई गंभीर आरोप लगा रहे हैं। हालांकि, इन आरोपों की सत्यता का अंतिम निर्धारण संबंधित रिकॉर्ड, आधिकारिक जांच और न्यायिक समीक्षा के आधार पर ही किया जा सकता है। Source – The Indian Express, India Today, The Times of India, Jansatta, Loksatta जय राष्ट्र न्यूज़

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CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर मुंबई में CJP का प्रदर्शन, SIR विवाद फिर केंद्र में

मुंबई: Special Intensive Revision यानी SIR को लेकर जारी विवाद के बीच Cockroach Janta Party (CJP) ने मुंबई में Chief Election Commissioner ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन का आह्वान किया है। शिवाजी पार्क में प्रस्तावित इस प्रदर्शन से पहले सुरक्षा बढ़ा दी गई, हालांकि मुंबई पुलिस ने कार्यक्रम को अनुमति नहीं दी। CJP ने कहा है कि उसका आंदोलन ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे तक जारी रहेगा। शिवाजी पार्क में प्रदर्शन का ऐलान CJP ने 2 अक्टूबर को मुंबई के शिवाजी पार्क से अपने विरोध अभियान की शुरुआत करने की घोषणा की। संगठन के संस्थापक अभिजीत दीपके ने कहा कि यह आंदोलन केवल मुंबई तक सीमित नहीं रहेगा और आगे गोवा, बेंगलुरु, कोलकाता समेत अन्य शहरों में भी प्रदर्शन किए जाएंगे। ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग CJP की मुख्य मांग Chief Election Commissioner ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा है। संगठन का आरोप है कि SIR प्रक्रिया और मतदाता सूची से जुड़े फैसलों में पारदर्शिता को लेकर गंभीर सवाल हैं। ये आरोप CJP और अन्य प्रदर्शनकारी समूहों के राजनीतिक दावे हैं और चुनाव आयोग का इस पर अलग आधिकारिक रुख रहा है। SIR प्रक्रिया को रोकने की भी मांग CJP ने Special Intensive Revision प्रक्रिया को रोकने की मांग भी उठाई है। संगठन चाहता है कि पिछली मतदाता सूची को बहाल किया जाए और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली तथा नियुक्ति प्रक्रिया में अधिक पारदर्शिता लाई जाए। मुंबई पुलिस ने नहीं दी अनुमति मुंबई पुलिस ने शिवाजी पार्क में प्रस्तावित प्रदर्शन को अनुमति नहीं दी। पुलिस ने सार्वजनिक व्यवस्था, ट्रैफिक और आपातकालीन वाहनों की आवाजाही से जुड़ी चिंताओं का हवाला दिया। इसके बावजूद प्रदर्शन की घोषणा के बाद इलाके में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत कर दी गई। दादर स्टेशन पर भी सुरक्षा बढ़ी प्रदर्शन को देखते हुए दादर रेलवे स्टेशन पर अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए गए। Railway Protection Force और अन्य स्टाफ की संख्या बढ़ाई गई ताकि बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने की स्थिति में भीड़ और आवाजाही को नियंत्रित किया जा सके। दिल्ली में भी हुआ विरोध मुंबई के साथ-साथ दिल्ली में भी CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन हुआ। जंतर-मंतर के आसपास भारी सुरक्षा तैनात की गई और पुलिस ने बिना अनुमति प्रदर्शन करने पहुंचे कई लोगों को हिरासत में लिया। इससे SIR और चुनाव आयोग से जुड़ा विवाद राष्ट्रीय स्तर पर फिर चर्चा में आ गया। विपक्षी दल भी उठा रहे SIR का मुद्दा SIR विवाद केवल CJP तक सीमित नहीं है। INDIA Bloc समेत कई विपक्षी दल और छात्र संगठन भी मतदाता सूची और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठा रहे हैं। विपक्ष ने अलग-अलग शहरों में विरोध कार्यक्रमों की घोषणा की है। दूसरे शहरों में भी आंदोलन की तैयारी CJP ने संकेत दिया है कि आने वाले दिनों में आंदोलन का दायरा बढ़ाया जाएगा। गोवा, बेंगलुरु और कोलकाता समेत कई शहरों में मार्च और प्रदर्शन की योजना बनाई गई है। संगठन का कहना है कि CEC के इस्तीफे तक आंदोलन जारी रहेगा। SIR विवाद पर राजनीतिक टकराव तेज SIR को लेकर चुनाव आयोग और विरोधी दलों के बीच राजनीतिक टकराव लगातार बढ़ रहा है। प्रदर्शनकारी जहां मतदाता सूची और चुनावी प्रक्रिया में अधिक पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं, वहीं आरोपों और कानूनी मांगों की अंतिम स्थिति संबंधित संस्थाओं और न्यायिक प्रक्रियाओं से तय होगी। source – The Indian Express / The New Indian Express / India Today / The Times of India / PTI जय राष्ट्र न्यूज़

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शिवाजी पार्क में CJP के 2 अक्टूबर के प्रदर्शन को अनुमति नहीं, अभिजीत दीपके ने किया ‘जेल भरो आंदोलन’ का ऐलान

मुंबई: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) को 2 अक्टूबर 2026 को मुंबई के शिवाजी पार्क में प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन के लिए अनुमति नहीं मिली है। मुंबई पुलिस ने कहा कि मौजूदा अदालती आदेशों और महाराष्ट्र सरकार के दिशा-निर्देशों के तहत वह शिवाजी पार्क में इस तरह के सार्वजनिक प्रदर्शन की अनुमति देने के लिए अधिकृत नहीं है। CJP मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और चुनाव आयोग से जुड़े सुधारों की मांग को लेकर यह प्रदर्शन आयोजित करना चाहती थी। 2 अक्टूबर को शिवाजी पार्क में होना था प्रदर्शन CJP ने गांधी जयंती के दिन मुंबई से अपने देशव्यापी आंदोलन की शुरुआत करने की घोषणा की थी। संगठन की योजना शिवाजी पार्क में प्रदर्शन कर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे समेत अपनी मांगें उठाने की थी। पुलिस के मुताबिक प्रदर्शन के लिए आवेदन 26 सितंबर को कार्यकर्ता अजिंक्य शिंदे की ओर से जमा किया गया था। इसके बाद शिवाजी पार्क पुलिस स्टेशन ने आयोजकों को लिखित जवाब भेजा। पुलिस ने 2013 के हाई कोर्ट आदेश का दिया हवाला मुंबई पुलिस ने अपनी प्रतिक्रिया में 4 जनवरी 2013 के बॉम्बे हाई कोर्ट के आदेश और उसके बाद महाराष्ट्र सरकार की ओर से जारी दिशा-निर्देशों का हवाला दिया। पुलिस का कहना है कि शिवाजी पार्क का इस्तेमाल मुख्य रूप से खेल गतिविधियों के लिए निर्धारित है और वहां सार्वजनिक कार्यक्रमों पर सीमाएं लागू हैं। आयोजकों ने मैदान के इस्तेमाल के लिए आवश्यक BMC अनुमति भी जमा नहीं की थी। ट्रैफिक और ‘साइलेंस जोन’ भी बना वजह पुलिस ने कहा कि शिवाजी पार्क एक आवासीय क्षेत्र और silence zone के अंतर्गत आता है। बड़े प्रदर्शन से ध्वनि प्रदूषण और यातायात जाम की स्थिति पैदा हो सकती है। पुलिस ने यह भी कहा कि भीड़ और ट्रैफिक के कारण आसपास के अस्पतालों तक मरीजों की आवाजाही प्रभावित होने की आशंका है। आयोजकों को मुंबई में किसी दूसरे स्थान पर प्रदर्शन की अनुमति के लिए आवेदन करने की सलाह दी गई है। अभिजीत दीपके ने जताई नाराजगी CJP संस्थापक अभिजीत दीपके ने पुलिस के फैसले की आलोचना करते हुए इसे नागरिकों की आवाज दबाने की कोशिश बताया। दीपके ने सोशल मीडिया पर कहा कि यदि संगठन को शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने का अधिकार नहीं दिया जाता है तो CJP गांधी जयंती के दिन मुंबई में ‘जेल भरो आंदोलन’ करेगी। यह CJP का राजनीतिक आरोप और घोषित विरोध कार्यक्रम है। ‘2 अक्टूबर को आंदोलन होकर रहेगा’ अनुमति नहीं मिलने के बाद भी CJP ने प्रदर्शन का कार्यक्रम वापस लेने की घोषणा नहीं की है। दीपके ने कहा कि जरूरत पड़ी तो कार्यकर्ता गिरफ्तारी देंगे। 28 सितंबर को उन्होंने दोबारा पोस्ट कर “Jail Bharo Andolan in Mumbai, October 2, Shivaji Park” का ऐलान किया। क्या हैं CJP की प्रमुख मांगें? CJP मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रही है। इसके अलावा संगठन ने Special Intensive Revision (SIR) प्रक्रिया रोकने और मतदाता सूची से जुड़ी पूर्व स्थिति बहाल करने की मांग भी रखी है। CJP ने 2023 में चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से जुड़े कानून में बदलाव और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली में संस्थागत सुधार की भी मांग की है। ये संगठन की राजनीतिक मांगें हैं। चुनाव आयोग के भीतर मतभेद की रिपोर्ट के बाद बढ़ा विवाद इस पूरे आंदोलन की पृष्ठभूमि में चुनाव आयोग की आंतरिक प्रक्रियाओं से जुड़ी एक जांच रिपोर्ट भी है। रिपोर्ट में कहा गया था कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने करीब 10 महीनों में विभिन्न प्रक्रियात्मक मुद्दों पर कई बार लिखित टिप्पणियां या आपत्तियां दर्ज की थीं। चुनाव आयोग का कहना है कि अलग-अलग विचार किसी बहु-सदस्यीय संवैधानिक संस्था में सामान्य निर्णय प्रक्रिया का हिस्सा हैं और प्रमुख SIR फैसले सर्वसम्मति से लिए गए थे। अब 2 अक्टूबर पर नजर मुंबई पुलिस ने आयोजकों को वैकल्पिक स्थान तलाशने की सलाह दी है, जबकि CJP ने शिवाजी पार्क से ही जेल भरो आंदोलन शुरू करने की घोषणा कर दी है। ऐसे में अब नजर इस बात पर रहेगी कि 2 अक्टूबर को CJP अपने घोषित कार्यक्रम के साथ आगे बढ़ती है या प्रशासन और आयोजकों के बीच किसी वैकल्पिक स्थल पर सहमति बनती है। फिलहाल शिवाजी पार्क में प्रस्तावित प्रदर्शन के लिए पुलिस की अनुमति उपलब्ध नहीं है। source – The Indian Express / Hindustan Times / Times of India / Mumbai Police जय राष्ट्र न्यूज़

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CEC ज्ञानेश कुमार को CJP का 48 घंटे का अल्टीमेटम, इस्तीफा नहीं तो देशव्यापी आंदोलन की चेतावनी

नई दिल्ली: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से इस्तीफे की मांग करते हुए उन्हें 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया था। पार्टी ने चेतावनी दी कि मांग पूरी नहीं होने पर देशभर में आंदोलन शुरू किया जाएगा। यह अल्टीमेटम 24 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में दिया गया था। 26 सितंबर को समयसीमा समाप्त होने के बाद CJP ने अब 2 अक्टूबर से मुंबई से देशव्यापी आंदोलन शुरू करने की घोषणा की है। SIR विवाद को लेकर CJP ने खोला मोर्चा CJP ने यह कदम मतदाता सूचियों के Special Intensive Revision (SIR) को लेकर चल रहे विवाद के बीच उठाया है। पार्टी के संस्थापक और संयोजक अभिजीत दिपके, सह-संयोजक सौरव दास और आशुतोष रांका ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए और ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की। CJP का आरोप है कि SIR की प्रक्रिया में मतदाता अधिकार प्रभावित हो रहे हैं। ये CJP के आरोप हैं और इन्हें किसी स्वतंत्र जांच में स्थापित तथ्य नहीं माना गया है। 48 घंटे में इस्तीफा देने की रखी मांग 24 सितंबर को CJP ने कहा कि यदि ज्ञानेश कुमार 48 घंटे के भीतर पद नहीं छोड़ते हैं तो संगठन देशव्यापी विरोध प्रदर्शन करेगा। अभिजीत दिपके ने दिल्ली में फिर से बड़े प्रदर्शन की चेतावनी देते हुए इसे ‘Jantar Mantar 2.0’ तक ले जाने की बात कही थी। आगामी चुनाव रोकने की भी मांग CJP ने केवल CEC के इस्तीफे की मांग नहीं की। संगठन ने आगामी राज्य विधानसभा चुनावों को फिलहाल रोकने, SIR प्रक्रिया को वापस लेने और मतदाता सूची को पहले की स्थिति में बहाल करने जैसी मांगें भी रखीं। India Today के मुताबिक संगठन ने SIR से जुड़े रिकॉर्ड को स्वतंत्र निगरानी में रखने और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से संबंधित 2023 के कानून में बदलाव की मांग भी की। चुनाव आयोग के भीतर मतभेद की रिपोर्ट से बढ़ा विवाद यह अल्टीमेटम उस रिपोर्ट के बाद आया जिसमें कहा गया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने करीब 10 महीनों में विभिन्न मामलों पर कम से कम 14 बार लिखित आपत्तियां दर्ज की थीं। इन आपत्तियों में मतदाता सूची, Form 6, electoral database तक पहुंच और SIR प्रक्रिया से जुड़े विषय शामिल बताए गए। चुनाव आयोग ने क्या कहा? चुनाव आयोग ने इस विवाद पर कहा है कि एक बहु-सदस्यीय संवैधानिक संस्था में अलग-अलग राय और लिखित टिप्पणियां निर्णय प्रक्रिया का सामान्य हिस्सा हैं। 26 सितंबर को जारी स्पष्टीकरण में आयोग ने कहा कि SIR से जुड़े अंतिम फैसले तीनों चुनाव आयुक्तों की सर्वसम्मति से लिए गए थे। आयोग ने यह भी कहा कि कैबिनेट सचिव को भेजे गए कुछ पत्र किसी नीति विवाद से नहीं, बल्कि एक अधिकारी के कामकाज से जुड़े थे। SIR प्रक्रिया पर आयोग ने दी सफाई चुनाव आयोग के अनुसार 24 जून 2025 को पूरे देश में SIR कराने का निर्णय सर्वसम्मति से लिया गया था। बाद में अलग-अलग राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के लिए जारी चरणबद्ध कार्यक्रमों को भी आयोग ने सामूहिक रूप से मंजूरी दी। आयोग ने यह भी कहा कि SIR के दौरान नागरिकों को दस्तावेज जमा करने और मतदाता सूची में अपना नाम शामिल कराने के लिए अतिरिक्त सुविधाएं दी जा रही हैं। 48 घंटे की समयसीमा खत्म, अब 2 अक्टूबर से आंदोलन CJP का दिया 48 घंटे का अल्टीमेटम 26 सितंबर को खत्म हो गया। इसके बाद संगठन ने 2 अक्टूबर, गांधी जयंती से मुंबई में आंदोलन शुरू करने की घोषणा की है। रिपोर्ट्स के मुताबिक मुंबई का आजाद मैदान संभावित स्थल है, हालांकि प्रदर्शन के लिए पुलिस अनुमति अभी अंतिम रूप से सुनिश्चित नहीं हुई है। CJP का कहना है कि मुंबई से शुरू होने वाला आंदोलन बाद में देश के अन्य शहरों तक ले जाया जाएगा। चुनाव आयोग विवाद पर राजनीतिक बहस तेज SIR और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर CJP के अलावा कई विपक्षी दलों ने भी सवाल उठाए हैं। वहीं चुनाव आयोग ने प्रक्रिया में अनियमितता के आरोपों को स्वीकार नहीं किया है और अपने फैसलों को कानून और तय प्रक्रिया के अनुरूप बताया है। फिलहाल CJP का आंदोलन 2 अक्टूबर से शुरू करने की घोषणा की गई है। आगे इस विवाद का असर चुनावी और राजनीतिक बहस में किस तरह दिखाई देता है, इस पर नजर रहेगी। source – India Today / Hindustan Times / The Economic Times / The Statesman जय राष्ट्र न्यूज़

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जमानत बनाम लंबा ट्रायल: न्यायिक प्रक्रिया पर अभिजीत दिपके ने उठाए सवाल

नई दिल्ली, 15 सितंबर 2026: Cockroach Janta Party (CJP) के संस्थापक Abhijeet Dipke ने Jantar Mantar assault case में आरोपी Swatantra Bhardwaj को तीन हफ्ते की interim bail मिलने के बाद criminal justice system में bail और लंबे pre-trial detention को लेकर सवाल उठाए हैं। Dipke ने Bhardwaj के मामले की तुलना 2020 Delhi riots conspiracy case में आरोपी Umar Khalid की लगभग छह साल की incarceration से की। ‘Same Justice System, Very Different Approach’ Dipke ने social media पर लिखा कि एक व्यक्ति कथित घटना से जुड़े video के बावजूद कुछ दिनों में bail पा जाता है, जबकि दूसरा छह साल से जेल में है और substantive trial शुरू नहीं हुआ। उन्होंने इसे “Same justice system. Very different approach” बताते हुए न्यायिक प्रक्रिया में अलग-अलग मामलों के treatment पर सवाल उठाया। यह Dipke का अपना आकलन है। Swatantra Bhardwaj को 3 Weeks की Interim Bail Delhi की Patiala House Court के Additional Sessions Judge Saurabh Pratap Singh Laler ने Swatantra Bhardwaj को तीन सप्ताह की interim bail दी। Bhardwaj पर CJP protest के दौरान एक student activist के पिता के साथ कथित assault का आरोप है। उनके खिलाफ SC/ST Act से जुड़ी provisions भी जोड़ी गई थीं। आरोपों पर अंतिम निर्णय trial के बाद ही होगा। Court ने Bail के साथ दी सख्त चेतावनी Court ने bail देते हुए Bhardwaj के conduct पर भी टिप्पणी की और कहा कि bail को उपलब्धि की तरह प्रदर्शित नहीं किया जाना चाहिए। Court ने यह भी संकेत दिया कि interim bail के दौरान उनका व्यवहार आगे regular bail plea पर विचार करते समय महत्वपूर्ण होगा। उनकी regular bail application पर आगे सुनवाई होनी है। Umar Khalid के 6 साल पूरे Former JNU student Umar Khalid को 13 September 2020 को 2020 northeast Delhi riots से जुड़े larger conspiracy case में UAPA के तहत गिरफ्तार किया गया था। September 2026 में उनकी custody को छह साल पूरे हो गए हैं। Charges और bail को लेकर कई judicial proceedings हुई हैं, लेकिन prosecution evidence वाला substantive trial अभी शुरू नहीं हुआ है। Delhi Police ने उनके खिलाफ conspiracy के गंभीर आरोप लगाए हैं, जिन्हें Khalid ने contest किया है। ‘बिना Hearing’ वाली बात पूरी तरह सही नहीं Dipke के statement में “छह साल बिना trial या hearing” का जिक्र किया गया, लेकिन उपलब्ध court records के मुताबिक Umar Khalid की कई bail applications पर hearings और judicial orders हो चुके हैं। इसलिए ज्यादा accurate स्थिति यह है कि वह लगभग छह साल से undertrial custody में हैं और मामले का substantive trial अभी लंबित है। Long Incarceration पर Courts भी कर चुके हैं टिप्पणी हाल के एक अलग मामले में Delhi High Court ने कहा है कि किसी offence की seriousness अपने आप bail रोकने का absolute ground नहीं हो सकती, खासकर जब trial reasonable pace से आगे नहीं बढ़ रहा हो। यह ruling Dipke या Khalid के मामले का फैसला नहीं है, लेकिन लंबी undertrial detention को लेकर broader judicial debate को दिखाती है। source – The Indian Express / LiveLaw / Hindustan / ABP Live जय राष्ट्र न्यूज़

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अभिजीत दीपके के ‘School Thik Karo’ अभियान के बीच योगी सरकार का बड़ा फैसला; 14,429 सरकारी स्कूल बनेंगे Smart

लखनऊ, 17 सितंबर 2026: Cockroach Janta Party (CJP) के संस्थापक Abhijeet Dipke के ‘School Thik Karo’ अभियान के बीच Uttar Pradesh की Yogi Adityanath government ने 14,429 परिषदीय प्राथमिक विद्यालयों को smart schools के रूप में विकसित करने की योजना को मंजूरी दी है। इसके लिए करीब ₹300 करोड़ का budget approved किया गया है। फैसला 15 सितंबर को CM Yogi Adityanath की अध्यक्षता में हुई Cabinet meeting में लिया गया था। 14,429 Schools में Smart Classes और ICT Labs योजना के तहत selected government schools में internet connectivity, smart classes और Information and Communication Technology (ICT) labs जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। Government के मुताबिक हर selected school पर करीब ₹2.07 लाख खर्च करने का प्रावधान है। Tender में लागत कम होने पर बाकी budget से और schools को scheme में शामिल किया जा सकता है। Dipke के Campaign के बीच आया फैसला Abhijeet Dipke और CJP पिछले कुछ समय से ‘School Thik Karo’ campaign के जरिए government schools में drinking water, toilets, classrooms और infrastructure की स्थिति को लेकर सवाल उठा रहे हैं। CJP ने Uttar Pradesh के Noida समेत कई इलाकों में schools की स्थिति दिखाने की कोशिश की है। हालांकि UP Government ने Cabinet के smart-school decision को CJP campaign की प्रतिक्रिया के रूप में officially नहीं बताया है। Abhijeet Dipke ने किया तंज UP Government के announcement के बाद Dipke ने social media पर प्रतिक्रिया देते हुए Dharmendra Pradhan के इस्तीफे का जिक्र कर तंज कसा। CJP के Saurav Das ने भी सरकार के ₹300 करोड़ के budget को लेकर सवाल उठाए और कहा कि केवल digital facilities नहीं, बल्कि सरकारी schools की basic infrastructure problems पर भी काम होना चाहिए। ये CJP के राजनीतिक/अभियान संबंधी दावे हैं। UP में पहले से 32 हजार से ज्यादा Smart Classes Government data के मुताबिक Uttar Pradesh के 32,000 से ज्यादा schools में smart classes पहले से संचालित हैं, जबकि 15,000 से अधिक schools में ICT labs और 1,129 schools में digital libraries उपलब्ध हैं। प्रदेश में 2.61 लाख से ज्यादा teachers को tablets भी उपलब्ध कराए गए हैं। नई योजना का उद्देश्य digital education network को और बढ़ाना बताया गया है। Yogi ने Dipke का नाम लेकर नहीं दिया जवाब Social media और कुछ videos में इस Cabinet decision को Abhijeet Dipke के campaign का “Yogi का जवाब” बताया जा रहा है। लेकिन उपलब्ध official और mainstream reports में CM Yogi Adityanath की ओर से Dipke को संबोधित करते हुए कोई direct statement या warning दर्ज नहीं है। इसलिए इसे सीधे “योगी का सख्त संदेश” बताने के बजाय government policy decision और CJP reaction के रूप में देखना अधिक तथ्यात्मक है। source – Uttar Pradesh Cabinet / PTI / Hindustan Times / ABP News जय राष्ट्र न्यूज़

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आदिवासी बस्तियों में पेयजल व्यवस्था पर सवाल, CJP ने दिखाई जमीनी हकीकत

बालाघाट, 14 सितंबर 2026: Madhya Pradesh के Balaghat जिले की आदिवासी बस्तियों में पेयजल, स्वास्थ्य और बुनियादी सुविधाओं की स्थिति को लेकर Cockroach Janta Party (CJP) के संस्थापक Abhijeet Dipke ने गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने प्रभावित गांवों के दौरे के बाद social media पर videos और तस्वीरें साझा करते हुए स्थानीय पानी की quality और tribal families को मिल रही basic facilities पर सरकार से जवाब मांगा। यह मामला ऐसे समय उठा है जब जिले में 30 से ज्यादा बच्चों की मौत की reports पहले ही प्रशासनिक और judicial scrutiny के दायरे में हैं। नल के पानी का Video Share कर उठाया सवाल Abhijeet Dipke ने एक tribal village में उपलब्ध tap water का video share करते हुए सवाल किया कि क्या राज्य के मंत्री और विधायक अपने बच्चों को ऐसा पानी पिलाना चाहेंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रभावित इलाकों में लोगों को सुरक्षित drinking water जैसी basic facility भी पर्याप्त रूप से नहीं मिल रही है। कुछ tribal families के अब भी river water पर निर्भर होने का दावा भी उन्होंने किया। Handpump से पीला पानी आने का भी दावा Balaghat child deaths से जुड़ी PIL में भी प्रभावित इलाकों के handpumps से पीले रंग का पानी निकलने की शिकायत सामने आई है। हालांकि बच्चों की मौतों को केवल contaminated water से जोड़ने की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। Centre की investigation में measles, malaria, co-infections, respiratory distress, dehydration, malnutrition, anaemia और shock समेत कई clinical causes सामने आए हैं। Schools और ASHA Workers की स्थिति पर भी सवाल Dipke ने tribal children के एक school का दौरा कर उसकी infrastructure condition पर भी सवाल उठाए। उन्होंने school में बच्चों को दिए जा रहे food और उपलब्ध basic facilities का जायजा लिया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि इलाके की ASHA workers को पिछले छह महीने से salary नहीं मिली है, जिससे ग्रामीण health system की स्थिति को लेकर नई चिंता पैदा हुई है। 30 से ज्यादा बच्चों की मौत के बाद बढ़ी चिंता Balaghat के remote tribal villages, खासकर Baiga community से जुड़े इलाकों में पिछले कुछ समय में 30 से ज्यादा बच्चों की मौत की reports सामने आई हैं। इन मौतों की एक single confirmed वजह अभी तय नहीं हुई है और जांच जारी है। कई बच्चों को hospitals में भर्ती भी कराया गया है। High Court ने सरकार से मांगा जवाब Madhya Pradesh High Court की Jabalpur Bench ने मामले में state government, Health Department, Women and Child Development Department और Balaghat Collector समेत संबंधित authorities को notices जारी किए हैं। PIL में आरोप लगाया गया है कि करीब 400 बच्चों का इलाज 50-bed capacity वाले hospital में किया जा रहा था और प्रभावित क्षेत्रों में nutrition तथा drinking water की स्थिति भी खराब है। सरकार ने परिवारों को दी आर्थिक सहायता Balaghat administration के मुताबिक अब तक 24 मृत बच्चों के परिवारों को ₹4-4 लाख की financial assistance दी जा चुकी है और बाकी eligible families को सहायता देने की प्रक्रिया जारी है। source – Times of India / Jansatta / Madhya Pradesh High Court Proceedings जय राष्ट्र न्यूज़

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PM CARES Fund के पैसे से स्कूल बनाने की मांग! ₹8,452 करोड़ के फंड पर उठे सवाल

नई दिल्ली: PM CARES Fund में मौजूद ₹8,452 करोड़ की राशि को ग्रामीण सरकारी स्कूलों की स्थिति सुधारने और नए आधुनिक स्कूल बनाने में इस्तेमाल करने की मांग उठी है। Cockroach Janta Party (CJP) के संस्थापक अभिजीत डिपके ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अपील की है कि फंड की राशि का इस्तेमाल बच्चों के लिए बेहतर स्कूल इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने में किया जाए। ग्रामीण स्कूलों की बदहाली का मुद्दा डिपके ने अपनी ‘School Thik Karo’ मुहिम के तहत ग्रामीण इलाकों के सरकारी स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं की कमी का मुद्दा उठाया। उनका कहना है कि कई स्कूलों में बच्चों को बेहतर सड़क, बैठने के लिए पर्याप्त बेंच और पीने के पानी जैसी मूलभूत सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि एक तरफ ग्रामीण स्कूलों में फंड की कमी बताई जाती है और दूसरी तरफ PM CARES Fund में हजारों करोड़ रुपये मौजूद हैं। ₹8,500 करोड़ से 1,000 से ज्यादा स्कूलों का दावा डिपके के मुताबिक अगर एक आधुनिक और सुविधायुक्त मॉडल स्कूल बनाने में करीब ₹8 करोड़ खर्च हों, तो ₹8,500 करोड़ की राशि से 1,000 से ज्यादा हाईटेक मॉडल स्कूल बनाए जा सकते हैं। उन्होंने सरकार से इस दिशा में कदम उठाने की अपील की। हालांकि, यह आंकड़ा डिपके का अनुमान है और इसे सरकार की स्वीकृत स्कूल-निर्माण योजना नहीं माना जाना चाहिए। PM CARES Fund में कितनी रकम है? नवीनतम ऑडिट आंकड़ों के अनुसार 31 मार्च 2025 को PM CARES Fund का बैलेंस ₹8,452.06 करोड़ था। यह राशि 2023-24 के करीब ₹7,173 करोड़ के बैलेंस से काफी अधिक है। फंड की करीब 93% राशि यानी ₹7,846.65 करोड़ फिक्स्ड डिपॉजिट में थी। वित्त वर्ष 2024-25 में फंड से कुल भुगतान करीब ₹87.85 लाख दर्ज हुआ, जिससे फंड के इस्तेमाल को लेकर राजनीतिक और सार्वजनिक बहस तेज हुई है। क्या PM CARES का पैसा स्कूलों पर खर्च किया जा सकता है? यह सबसे महत्वपूर्ण सवाल है। PM CARES Fund का घोषित उद्देश्य मुख्य रूप से आपात स्थितियों, आपदाओं, स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों और प्रभावित लोगों को सहायता प्रदान करना है। इसके उद्देश्यों में इंफ्रास्ट्रक्चर और अन्य सहायता से जुड़े प्रावधान भी हैं, लेकिन सामान्य स्कूल निर्माण या नियमित शिक्षा इंफ्रास्ट्रक्चर को अलग से मुख्य उद्देश्य के रूप में नहीं बताया गया है। इसलिए PM CARES की राशि से सामान्य स्कूल निर्माण किया जा सकता है या नहीं, यह फंड के घोषित उद्देश्यों और Board of Trustees की स्वीकृति पर निर्भर करेगा। BJP ने मांग पर जताई आपत्ति इस मांग के बाद राजनीतिक प्रतिक्रिया भी सामने आई। BJP ने कहा कि PM CARES Fund का उद्देश्य आपातकालीन और आपदा राहत है और इसे सामान्य स्कूल निर्माण के लिए इस्तेमाल करने की मांग फंड के मूल उद्देश्य को नहीं समझती। यानी फिलहाल यह सरकार की घोषित योजना नहीं, बल्कि अभिजीत डिपके की मांग है। PM CARES Fund फिर चर्चा में ₹8,452 करोड़ के बड़े कॉर्पस, FY25 में बेहद कम भुगतान और अब ग्रामीण स्कूलों के लिए इस राशि के इस्तेमाल की मांग ने PM CARES Fund को एक बार फिर राष्ट्रीय बहस के केंद्र में ला दिया है। आगे यह देखना अहम होगा कि क्या सरकार या PM CARES Fund का ट्रस्ट बोर्ड इस सुझाव पर कोई विचार करता है या स्कूल इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए मौजूदा सरकारी योजनाओं के जरिए ही फंड उपलब्ध कराया जाता है। स्रोत: PM CARES Fund Audit Report, PTI, Hindustan Times, New Indian Express, Times of India Jai Rashtra News

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