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लॉरेंस बिश्नोई को ‘साहब’ कहने पर अभिजीत दीपके ने उठाए सवाल, दिल्ली पुलिस बोली—पुराना वीडियो, जुबान फिसली थी

नई दिल्ली, 20 अक्टूबर 2026: CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने दिल्ली पुलिस की एक पुरानी प्रेस कॉन्फ्रेंस का वीडियो साझा कर सवाल उठाए हैं। इस क्लिप में एक DCP गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई को कथित तौर पर “साहब” कहते सुनाई देते हैं। दीपके ने इस टिप्पणी को कार्यकर्ताओं और प्रदर्शनकारियों के साथ पुलिस के व्यवहार से जोड़ते हुए कथित दोहरे मापदंडों पर सवाल उठाए हैं। अभिजीत दीपके ने क्या सवाल उठाए? अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया पर वीडियो साझा करते हुए सवाल किया कि एक कुख्यात गैंगस्टर के लिए सम्मानसूचक शब्द का इस्तेमाल किया जाता है, जबकि छात्रों और प्रदर्शनकारियों के साथ कथित तौर पर सख्ती बरती जाती है। उन्होंने पुलिस की भाषा और व्यवहार में इस अंतर को लेकर सवाल उठाए। दिल्ली पुलिस ने क्या सफाई दी? दिल्ली पुलिस ने स्पष्ट किया कि सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रहा वीडियो एक साल से भी अधिक पुराना है। पुलिस के मुताबिक, DCP के मुंह से लॉरेंस बिश्नोई के नाम के साथ “साहब” शब्द निकलना केवल जुबान फिसलने का मामला था। पुलिस ने इस टिप्पणी को किसी विशेष सम्मान या तरजीही व्यवहार के तौर पर देखे जाने से इनकार किया। पुराना वीडियो अब क्यों चर्चा में है? टाइगर श्रॉफ के वाहन पर कथित गोलीबारी के मामले के बाद लॉरेंस बिश्नोई के नेटवर्क को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हुई है। इसी बीच दीपके द्वारा पुराना वीडियो साझा किए जाने के बाद पुलिस की भाषा और उसके व्यवहार को लेकर सोशल मीडिया पर बहस शुरू हो गई। साबरमती जेल में बंद है लॉरेंस बिश्नोई लॉरेंस बिश्नोई गुजरात की साबरमती सेंट्रल जेल में बंद है। उसके खिलाफ कई आपराधिक मामलों में आरोप हैं। उसके कथित गिरोह के नेटवर्क को लेकर विभिन्न राज्यों की जांच एजेंसियां भी जांच करती रही हैं। पुलिस के व्यवहार को लेकर फिर उठी बहस यह विवाद ऐसे समय सामने आया है, जब CJP और दिल्ली पुलिस के बीच हालिया विरोध प्रदर्शनों को लेकर भी तनाव की खबरें सामने आई हैं। अभिजीत दीपके को हाल ही में कनॉट प्लेस में तिरंगा मार्च के दौरान हिरासत में लिए जाने की खबर भी सामने आई थी। फिलहाल, इस मामले में दीपके की आलोचना और दिल्ली पुलिस की सफाई दोनों चर्चा में हैं। वीडियो में इस्तेमाल किए गए शब्द को लेकर उठे सवालों के बीच पुलिस ने इसे पुरानी रिकॉर्डिंग और जुबान फिसलने की घटना बताया है। स्रोत: द टाइम्स ऑफ इंडिया, द इंडियन एक्सप्रेस जय राष्ट्र न्यूज़

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रातभर हिरासत के बाद AISA अध्यक्ष Neha Bora रिहा, दिल्ली पुलिस की कार्रवाई पर उठाए सवाल

नई दिल्ली, 18 अक्टूबर 2026: All India Students’ Association (AISA) की अध्यक्ष Neha Bora को CJP के ‘Lehra Do Tiranga’ विरोध प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिए जाने के बाद शनिवार तड़के रिहा कर दिया गया। दिल्ली पुलिस के अनुसार, Delhi Police Act की धारा 65 के तहत आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करने के बाद उन्हें छोड़ा गया। रिहाई के बाद Bora ने प्रदर्शनकारियों, खासकर महिलाओं को रातभर हिरासत में रखने की आवश्यकता और पुलिस की कार्रवाई की प्रक्रिया पर सवाल उठाए। Neha Bora ने हिरासत पर क्या सवाल उठाए? रिहाई के बाद Neha Bora ने पूछा कि प्रदर्शनकारियों को पूरी रात हिरासत में रखने की कानूनी जरूरत क्या थी। उन्होंने आरोप लगाया कि हिरासत के दौरान उन्हें कई घंटों तक वकील तक पहुंच नहीं दी गई। उनके बयानों ने पुलिस हिरासत की प्रक्रिया, कानूनी सहायता तक पहुंच और नागरिक स्वतंत्रता से जुड़े सवालों को फिर चर्चा में ला दिया है। महिलाओं को रातभर हिरासत में रखने पर सवाल Bora ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि महिलाओं को सूर्यास्त के बाद हिरासत में रखने की प्रक्रिया पर स्पष्ट जवाब दिया जाना चाहिए। उनकी आपत्ति हिरासत की अवधि और उसके दौरान अपनाई गई प्रक्रिया को लेकर थी। हालांकि, हिरासत की वैधता और कानूनी प्रक्रिया से जुड़े सवालों पर संबंधित अधिकारियों का पक्ष भी महत्वपूर्ण होगा। ‘Lehra Do Tiranga’ प्रदर्शन के दौरान हुई थी हिरासत Neha Bora को 16 अक्टूबर को CJP के ‘Lehra Do Tiranga’ विरोध प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिया गया था। प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस ने कनॉट प्लेस और आसपास के इलाकों में निषेधाज्ञा तथा भीड़ नियंत्रण से जुड़े प्रतिबंध लागू किए थे। प्रदर्शन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई घटनाओं के बाद कई लोगों को हिरासत में लिया गया। प्रदर्शन से जुड़े मामलों में तीन FIR दर्ज दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन से जुड़ी घटनाओं के संबंध में कम से कम तीन प्राथमिकी (FIR) दर्ज की हैं। इनमें निषेधाज्ञा के उल्लंघन और सरकारी कर्मचारियों को उनके कर्तव्यों के निर्वहन से रोकने जैसे आरोप शामिल हैं। इन मामलों में दर्ज आरोपों की जांच जारी है। आरोप दर्ज होना अपने आप में किसी व्यक्ति के दोषी होने का प्रमाण नहीं है। Abhijeet Dipke भी रिहा CJP के संस्थापक Abhijeet Dipke को भी निवारक हिरासत के बाद विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया गया। रिपोर्टों के अनुसार, शांति बनाए रखने से संबंधित बॉन्ड भरने के बाद उन्हें रिहा कर दिया गया। यह कार्रवाई प्रदर्शन के बाद पुलिस की ओर से उठाए गए कदमों का हिस्सा थी। दिल्ली पुलिस का पक्ष दिल्ली पुलिस का कहना है कि कार्रवाई कानून-व्यवस्था बनाए रखने और सार्वजनिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से की गई थी। दूसरी ओर, Neha Bora और अन्य प्रदर्शनकारियों ने हिरासत की अवधि, वकील तक पहुंच और पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। इस घटनाक्रम ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार, सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी और हिरासत के दौरान कानूनी सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर बहस को फिर तेज कर दिया है। स्रोत: The Indian Express, The Times of India, Hindustan Times जय राष्ट्र न्यूज़

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CJP founder Abhijeet Dipke गिरफ्तार, ‘Lehra Do Tiranga’ rally से पहले preventive action; Neha Bora detention के बाद रिहा

नई दिल्ली, 17 अक्टूबर 2026: CJP founder Abhijeet Dipke को Delhi Police ने ‘Lehra Do Tiranga’ rally से पहले preventive action के तहत हिरासत में लेकर गिरफ्तार किया। Police का कहना है कि यह कदम law-and-order situation और संभावित breach of peace को देखते हुए उठाया गया। वहीं student activist Neha Bora को भी कुछ समय के लिए हिरासत में लिया गया, लेकिन बाद में उन्हें छोड़ दिया गया। Rally से पहले बढ़ी police कार्रवाई Connaught Place और Central Delhi में CJP की rally को लेकर पहले से heavy security deployment किया गया था। Police ने organisers को बिना permission gathering या march न करने की चेतावनी दी थी। इसी backdrop में Dipke के खिलाफ preventive action लिया गया। Abhijeet Dipke की गिरफ्तारी क्यों हुई? Police sources के मुताबिक Dipke को breach of peace रोकने के मकसद से पकड़ा गया। CJP ने इसे political suppression बताया है और कहा कि उनका programme peaceful था। Neha Bora को भी लिया गया detention में AISA president Neha Bora को भी police ने rally से जुड़े security arrangements के दौरान detention में लिया था। हालांकि कुछ समय बाद उन्हें release कर दिया गया। Connaught Place बना security zone Central Park, Rajiv Chowk, Parliament Street और आसपास के इलाकों में barricading, checking और police deployment बढ़ाई गई। ‘Lehra Do Tiranga’ programme के चलते Central Delhi में traffic restrictions भी लागू रहे। CJP की मुख्य मांगें क्या हैं? CJP Chief Election Commissioner Gyanesh Kumar के इस्तीफे, voter-list revision पर जवाबदेही और हाल के police action के खिलाफ protest कर रही है। Group ने Jantar Mantar और Connaught Place पर लगातार demonstrations की कोशिश की है। राजनीतिक विवाद और तेज Dipke की गिरफ्तारी के बाद opposition leaders ने police action पर सवाल उठाए हैं, जबकि Delhi Police का कहना है कि उसका focus public order और safety बनाए रखना है। source – Reuters, Delhi Police जय राष्ट्र न्यूज़

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अभिजीत दिपके आणि दिल्ली पोलिसांमध्ये घरातच शाब्दिक वाद? VIDEO व्हायरल

नवी दिल्ली, 17 ऑक्टोबर 2026: कॉकroach जनता पार्टी (CJP) चे संस्थापक अभिजीत दिपके यांच्या घरी दिल्ली पोलीस पोहोचल्यानंतर झालेल्या शाब्दिक वादाचा व्हिडिओ सोशल मीडियावर व्हायरल झाला आहे. CJP च्या ‘Lehra Do Tiranga’ कार्यक्रमापूर्वी हा प्रकार घडला. पोलिसांनी दिपके यांना कनॉट प्लेस येथे परवानगीशिवाय मोर्चा किंवा मोठा जमाव आयोजित न करण्याबाबत नोटीस दिली होती. “माझ्या घरी कोण येईल, हे तुम्ही ठरवणार नाही” व्हायरल व्हिडिओमध्ये अभिजीत दिपके आणि पोलीस अधिकाऱ्यांमध्ये तीव्र शाब्दिक वाद होताना दिसत आहे. दिपके पोलिसांच्या उपस्थितीवर आणि त्यांच्या कारवाईवर प्रश्न उपस्थित करताना दिसतात. दुसऱ्या व्हिडिओमध्ये दिपके यांनी “मी एकटाच आहे” असे सांगत ताब्यात घेण्याच्या कारवाईवर आक्षेप घेतल्याचे दिसते. या व्हिडिओंमुळे सोशल मीडियावर या प्रकरणाची चर्चा सुरू झाली आहे. दिल्ली पोलिसांनी दिली होती नोटीस दिल्ली पोलिसांनी दिपके यांना कनॉट प्लेस येथील सेंट्रल पार्कमध्ये प्रस्तावित तिरंगा कार्यक्रम आयोजित न करण्याबाबत नोटीस दिली होती. संबंधित परिसरात भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) च्या कलम 163 अंतर्गत प्रतिबंधात्मक आदेश लागू असल्याचे पोलिसांनी स्पष्ट केले होते. तिरंगा फडकवण्यावर बंदी नाही, मात्र मोर्चाला आक्षेप पोलिसांच्या नोटीसमध्ये तिरंगा फडकवण्यावर बंदी नसल्याचे स्पष्ट करण्यात आले होते. मात्र, आवश्यक परवानगीशिवाय मोठा जमाव किंवा मोर्चा आयोजित केल्यास कायदेशीर कारवाई होऊ शकते, असा इशाराही देण्यात आला होता. दिपके यांना प्रतिबंधात्मक कारवाईअंतर्गत ताब्यात घेतले 16 ऑक्टोबर रोजी कार्यक्रमासाठी घरातून बाहेर पडताना दिल्ली पोलिसांनी अभिजीत दिपके यांना प्रतिबंधात्मक कारवाईअंतर्गत ताब्यात घेतले. या कारवाईचा व्हिडिओही सोशल मीडियावर मोठ्या प्रमाणावर शेअर झाला. व्हिडिओमुळे राजकीय वादाला पुन्हा हवा CJP समर्थकांनी पोलिसांच्या कारवाईवर प्रश्न उपस्थित केले आहेत. दुसरीकडे, दिल्ली पोलिसांनी कायदा-सुव्यवस्था राखणे, वाहतूक सुरळीत ठेवणे आणि गर्दीवर नियंत्रण ठेवणे या कारणांचा हवाला दिला आहे. ‘Lehra Do Tiranga’ कार्यक्रमाच्या पार्श्वभूमीवर घडलेल्या या घटनांमुळे अभिजीत दिपके आणि दिल्ली पोलिसांमधील वाद पुन्हा चर्चेत आला आहे. स्रोत – Times of India, Aaj Tak जय राष्ट्र न्यूज़

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CJP की ‘लहरा दो तिरंगा’ रैली से पहले दिल्ली में कड़ी सुरक्षा, 28 हजार से अधिक सुरक्षाकर्मी तैनात

नई दिल्ली, 17 अक्टूबर 2026: कॉकroach जनता पार्टी (CJP) की ‘लहरा दो तिरंगा’ रैली को लेकर दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। कनॉट प्लेस और आसपास के नई दिल्ली जिले में 28,000 से अधिक पुलिसकर्मियों और अर्धसैनिक बलों के जवानों की तैनाती की गई। प्रशासन ने सेंट्रल पार्क को बंद रखा, जबकि संवेदनशील इलाकों में निषेधाज्ञा लागू रही। 28 हजार से अधिक सुरक्षाकर्मियों की तैनाती सुरक्षा व्यवस्था के तहत दिल्ली पुलिस के करीब 6,000 जवानों के साथ केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPF) की लगभग 220 कंपनियां तैनात की गईं। एक कंपनी में औसतन करीब 100 जवान होते हैं। इस तैनाती के चलते कुल सुरक्षाकर्मियों की संख्या 28,000 से अधिक बताई गई। सेंट्रल पार्क बंद, धारा 163 के तहत प्रतिबंध कनॉट प्लेस स्थित सेंट्रल पार्क को प्रशासनिक कारणों से बंद रखा गया। इलाके में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 के तहत प्रतिबंध लागू रहे। इन प्रतिबंधों का उद्देश्य बिना अनुमति बड़ी सभाओं और जुलूसों को रोकना तथा कानून-व्यवस्था बनाए रखना है। पुलिस ने रैली की अनुमति नहीं दी दिल्ली पुलिस ने CJP के संस्थापक अभिजीत दीप्ते को नोटिस जारी कर कनॉट प्लेस में रैली या प्रदर्शन आयोजित नहीं करने की हिदायत दी थी। पुलिस ने संभावित यातायात बाधा, भगदड़ के खतरे और आपातकालीन सेवाओं की आवाजाही प्रभावित होने जैसी चिंताओं का हवाला दिया। कनॉट प्लेस में CCTV निगरानी और बैरिकेडिंग सुरक्षा व्यवस्था के तहत सेंट्रल पार्क, राजीव चौक मेट्रो स्टेशन और आसपास के संवेदनशील स्थानों पर अतिरिक्त CCTV निगरानी और बैरिकेडिंग की गई। किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए हिरासत में लिए गए लोगों को ले जाने हेतु बसों की भी व्यवस्था की गई। CJP संस्थापक अभिजीत दीप्ते गिरफ्तार रैली से पहले दिल्ली पुलिस ने CJP संस्थापक अभिजीत दीप्ते को गिरफ्तार कर लिया। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, यह कार्रवाई शांति भंग होने की आशंका को रोकने के उद्देश्य से की गई। छात्र कार्यकर्ता नेहा बोरा को भी हिरासत में लिया गया था, हालांकि बाद में उन्हें रिहा कर दिया गया। क्यों बुलाई गई थी ‘लहरा दो तिरंगा’ रैली? CJP ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) से जुड़े आरोपों और पार्टी के गिरफ्तार नेताओं के समर्थन में रैली का आह्वान किया था। पार्टी ने मतदाता सूची में बदलाव को लेकर सवाल उठाए हैं। वहीं, निर्वाचन आयोग ने मतदाता सूची में संशोधन की प्रक्रिया में राजनीतिक पक्षपात किए जाने के आरोपों से इनकार किया है। रैली को लेकर सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक प्रतिबंधों के बीच दिल्ली पुलिस की प्राथमिकता कानून-व्यवस्था बनाए रखने, यातायात सुचारु रखने और आपातकालीन सेवाओं की आवाजाही सुनिश्चित करने की रही। स्रोत – Reuters, The New Indian Express, The Indian Express जय राष्ट्र न्यूज़

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दिल्ली में Neha Bora, Abhijeet Dipke और Prakash Raj की प्रेस कॉन्फ्रेंस, CEC और SIR प्रक्रिया पर उठाए सवाल

नई दिल्ली, 16 अक्टूबर 2026: दिल्ली के प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में CJP के सह-संस्थापक Abhijeet Dipke, AISA अध्यक्ष Neha Bora, अभिनेता और सामाजिक कार्यकर्ता Prakash Raj तथा वरिष्ठ अधिवक्ता Prashant Bhushan समेत कई लोगों ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इस दौरान मुख्य चुनाव आयुक्त Gyanesh Kumar, विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया और हालिया विरोध प्रदर्शनों के दौरान पुलिस की कार्रवाई को लेकर सवाल उठाए गए। Abhijeet Dipke ने केंद्र सरकार पर लगाए आरोप Abhijeet Dipke ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार मुख्य चुनाव आयुक्त Gyanesh Kumar को बचाने के लिए सरकारी तंत्र का इस्तेमाल कर रही है। उन्होंने प्रदर्शनकारियों और विपक्षी नेताओं की हिरासत, मेट्रो प्रतिबंधों तथा भारी सुरक्षा तैनाती की जरूरत पर भी सवाल उठाए। ये आरोप Dipke के राजनीतिक बयान का हिस्सा हैं और स्वतंत्र रूप से स्थापित तथ्य नहीं हैं। Neha Bora ने पत्रकारों के साथ व्यवहार पर उठाए सवाल AISA अध्यक्ष Neha Bora ने आरोप लगाया कि विरोध प्रदर्शनों की रिपोर्टिंग कर रहे पत्रकारों को परेशान किया गया और कुछ के कैमरे तक छीन लिए गए। उन्होंने हाल ही में एक महिला पत्रकार द्वारा दिल्ली पुलिस के एक अधिकारी पर लगाए गए उत्पीड़न के आरोपों का भी मुद्दा उठाया। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और संबंधित पक्षों का जवाब मामले के तथ्यों को समझने के लिए महत्वपूर्ण है। Prakash Raj ने मतदाता सूची से नाम हटाने का आरोप लगाया अभिनेता Prakash Raj ने दावा किया कि मतदाता सूची में नाम हटाने के लिए इस्तेमाल होने वाले Form 7 का उपयोग कुछ मुस्लिम मतदाताओं के नाम हटाने के लिए किया जा रहा है। उन्होंने कर्नाटक के 23 जिलों का भी उल्लेख किया। यह दावा SIR प्रक्रिया को लेकर चल रहे व्यापक विवाद का हिस्सा है। आरोपों की पुष्टि के लिए संबंधित मतदाता सूचियों, शिकायतों और निर्वाचन अधिकारियों के रिकॉर्ड की जांच आवश्यक है। CEC के इस्तीफे और प्रदर्शनकारियों की रिहाई की मांग प्रेस कॉन्फ्रेंस में कई प्रमुख मांगें रखी गईं। इनमें मुख्य चुनाव आयुक्त Gyanesh Kumar का इस्तीफा, हिरासत में लिए गए प्रदर्शनकारियों की रिहाई, कथित पुलिस ज्यादती रोकने और जंतर-मंतर को फिर से विरोध प्रदर्शनों के लिए उपलब्ध कराने की मांग शामिल थी। प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान हुआ हंगामा कार्यक्रम के दौरान कुछ समय के लिए माहौल तनावपूर्ण हो गया। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, Neha Bora के बोलने के दौरान कुछ लोगों ने “बंद करो” और “बाहर जाओ” जैसे नारे लगाए, जिससे प्रेस कॉन्फ्रेंस में हंगामे की स्थिति बन गई। Connaught Place में ‘Lehra Do Tiranga’ कार्यक्रम CJP ने 16 अक्टूबर को शाम 5 बजे कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क में ‘Lehra Do Tiranga’ कार्यक्रम आयोजित करने का आह्वान किया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, दिल्ली पुलिस की अनुमति से जुड़े सवालों के बीच दिल्ली हाई कोर्ट ने कार्यक्रम पर रोक लगाने से इनकार किया और पुलिस को सभा को नियंत्रित करने के निर्देश दिए। कार्यक्रम के संचालन और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर पुलिस की भूमिका महत्वपूर्ण रहेगी। स्रोत – The New Indian Express, ThePrint, ANI जय राष्ट्र न्यूज़

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CJP को लेकर कांग्रेस के रुख में बदलाव के संकेत? राहुल गांधी की हाई टी के लिए अभिजीत दिपके को मिला न्योता

नई दिल्ली, 15 अक्टूबर 2026: कांग्रेस नेता राहुल गांधी की ओर से आयोजित हाई टी बैठक के लिए कॉकroach जनता पार्टी (CJP) के नेता अभिजीत दिपके को आमंत्रित किए जाने से राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। इसे कांग्रेस और CJP के बीच संवाद बढ़ने के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, इस निमंत्रण से दोनों के बीच किसी औपचारिक राजनीतिक गठबंधन या रणनीतिक समझौते की पुष्टि नहीं होती। द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, यह बैठक विपक्षी गठबंधन INDIA के नेताओं के साथ-साथ नागरिक समाज और छात्र संगठनों से जुड़े लोगों को एक मंच पर लाने के उद्देश्य से आयोजित की गई थी। राहुल गांधी की हाई टी बैठक का क्या था उद्देश्य? यह बैठक ऐसे समय में हुई है, जब मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार और मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision—SIR) को लेकर विरोध प्रदर्शन जारी हैं। इन मुद्दों पर अलग-अलग छात्र संगठनों, नागरिक समूहों और विपक्षी दलों ने अपनी आपत्तियां उठाई हैं। ऐसे में हाई टी बैठक को विभिन्न समूहों के बीच संवाद और संभावित समन्वय बढ़ाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। कांग्रेस और CJP के बीच पहले क्यों थी दूरी? मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, कांग्रेस के भीतर CJP को लेकर पहले कुछ आरक्षण थे। पार्टी के एक वर्ग में इस संगठन के आम आदमी पार्टी (AAP) से संभावित संबंधों को लेकर भी सवाल उठाए गए थे। हालांकि, हाल के विरोध प्रदर्शनों और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों पर राजनीतिक गतिविधियां तेज होने के बीच कांग्रेस की ओर से अभिजीत दिपके तक पहुंचने की खबर सामने आई है। यह घटनाक्रम दोनों पक्षों के बीच संवाद की संभावना दिखाता है, लेकिन कांग्रेस की आधिकारिक नीति में व्यापक बदलाव हुआ है या नहीं, यह स्पष्ट होने के लिए पार्टी की ओर से औपचारिक बयान जरूरी होगा। CJP के प्रदर्शनों पर राहुल गांधी का रुख राहुल गांधी हाल के दिनों में विरोध प्रदर्शन कर रहे युवा नेताओं के खिलाफ पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठा चुके हैं। उन्होंने प्रदर्शनकारियों के साथ कथित दुर्व्यवहार के आरोपों को भी उठाया है। विपक्षी दलों और विभिन्न नागरिक समूहों की ओर से चुनावी प्रक्रिया, मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण और विरोध प्रदर्शन के अधिकार जैसे मुद्दों पर आवाज उठाई जा रही है। इन घटनाक्रमों के बीच CJP के नेता को आमंत्रित किया जाना विपक्षी नेताओं और स्वतंत्र रूप से सक्रिय युवा समूहों के बीच संपर्क बढ़ाने की कोशिश का हिस्सा हो सकता है। अभिजीत दिपके ने क्या संकेत दिया? रिपोर्टों के अनुसार, अभिजीत दिपके ने कांग्रेस की ओर से संपर्क किए जाने पर आभार जताया। साथ ही, CJP की स्वतंत्र पहचान बनाए रखने पर भी जोर दिया। CJP खुद को किसी राजनीतिक दल के विस्तार के बजाय एक स्वतंत्र दबाव समूह के रूप में पेश करना चाहता है। ऐसे में कांग्रेस के साथ संवाद बढ़ने के बावजूद संगठन की स्वतंत्र राजनीतिक पहचान और भविष्य की रणनीति महत्वपूर्ण बनी रहेगी। विपक्षी एकजुटता के लिए क्यों अहम है यह घटनाक्रम? CJP ने हाल के मुख्य निर्वाचन आयुक्त और SIR विरोधी प्रदर्शनों के दौरान युवा कार्यकर्ताओं की भागीदारी के जरिए सार्वजनिक चर्चा में जगह बनाई है। कांग्रेस की ओर से दिपके को आमंत्रित किया जाना इस संभावना की ओर संकेत करता है कि विपक्षी दल पारंपरिक राजनीतिक संगठनों के साथ-साथ छात्र समूहों और नागरिक समाज की आवाजों से भी संवाद बढ़ाना चाहते हैं। हालांकि, किसी बैठक का निमंत्रण अपने आप में साझा राजनीतिक कार्यक्रम, चुनावी गठबंधन या भविष्य के संयुक्त आंदोलन का प्रमाण नहीं है। इसके वास्तविक राजनीतिक महत्व का आकलन आगे होने वाली बातचीत और दोनों पक्षों के आधिकारिक रुख से किया जा सकेगा। आगे क्या होगा? फिलहाल, कांग्रेस और CJP के बीच संपर्क बढ़ने की खबर ने राजनीतिक बहस को नया विषय दिया है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या यह संवाद केवल एक बैठक तक सीमित रहता है या दोनों पक्ष चुनावी प्रक्रिया और नागरिक अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर आगे भी साथ काम करते हैं। Source – The Indian Express, Jansatta और The Times of India जय राष्ट्र न्यूज़

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CJP को प्रदर्शन की अनुमति क्यों नहीं मिली? दिल्ली पुलिस ने बताईं ये वजहें

नई दिल्ली: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के विरोध में कॉकroach जनता पार्टी (CJP) ने 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति मांगी थी। हालांकि, दिल्ली पुलिस ने आवेदन खारिज कर दिया। पुलिस के अनुसार, अनुमति नहीं देने के पीछे देर से आवेदन करना, पिछले प्रदर्शनों में निर्देशों का कथित उल्लंघन, सार्वजनिक सुरक्षा, यातायात प्रबंधन और कानून-व्यवस्था से जुड़ी चिंताएं शामिल थीं। निर्धारित समय से देर से दिया गया आवेदन दिल्ली पुलिस के मुताबिक, CJP ने प्रदर्शन की अनुमति के लिए निर्धारित प्रक्रिया के तहत पर्याप्त समय पहले आवेदन नहीं किया था। आवेदन कार्यक्रम की तारीख के काफी करीब जमा किया गया, जिससे आयोजन की तैयारियों और सुरक्षा व्यवस्था के आकलन के लिए समय सीमित रह गया। पुलिस ने समय पर आवेदन न मिलने को अनुमति अस्वीकार करने के प्रमुख कारणों में शामिल किया। पिछले प्रदर्शनों में निर्देशों के उल्लंघन का आरोप पुलिस ने CJP के पहले के प्रदर्शनों का रिकॉर्ड भी अपने फैसले का आधार बताया। अधिकारियों के अनुसार, पिछले आयोजनों के दौरान प्रदर्शन के लिए निर्धारित कुछ कानूनी निर्देशों और आयोजकों की ओर से दिए गए आश्वासनों का कथित रूप से पालन नहीं किया गया था। पुलिस ने इस कथित गैर-अनुपालन को भविष्य में कानून-व्यवस्था बनाए रखने से जुड़ी चिंताओं के आकलन में शामिल किया। सार्वजनिक सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन की चिंता दिल्ली पुलिस ने बड़े स्तर पर लोगों के जुटने से सार्वजनिक सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन के सामने आने वाली चुनौतियों का भी हवाला दिया। जंतर-मंतर मध्य दिल्ली में स्थित है और महत्वपूर्ण सरकारी तथा सुरक्षा प्रतिष्ठानों के निकट होने के कारण यहां बड़ी सभाओं के लिए अतिरिक्त सतर्कता बरती जाती है। अधिकारियों का तर्क था कि संभावित भीड़ को नियंत्रित करने और किसी अप्रिय स्थिति से बचने के लिए पहले से पर्याप्त इंतजाम जरूरी हैं। यातायात पर पड़ने वाले असर का हवाला पुलिस ने यातायात व्यवस्था को भी अनुमति न देने के कारणों में शामिल किया। अधिकारियों के अनुसार, बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारियों के पहुंचने से मध्य दिल्ली की सड़कों, कार्यालयों तक आने-जाने वाले मार्गों और सार्वजनिक परिवहन पर असर पड़ सकता था। पुलिस का कहना था कि विरोध प्रदर्शन के दौरान आम नागरिकों की आवाजाही और यातायात प्रबंधन को ध्यान में रखना आवश्यक है। गृह मंत्रालय ने भी जताई थी कानून-व्यवस्था की चिंता प्रदर्शन से पहले केंद्रीय गृह मंत्रालय ने राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को संभावित कानून-व्यवस्था संबंधी प्रभावों को लेकर सतर्क किया था। रिपोर्टों के अनुसार, मंत्रालय ने बड़ी संख्या में लोगों के जुटने की संभावना को देखते हुए दिल्ली पुलिस के साथ वास्तविक समय में खुफिया जानकारी साझा करने और एहतियाती समन्वय बनाए रखने पर जोर दिया था। खुफिया सूचनाओं के आधार पर निगरानी अधिकारियों के अनुसार, खुफिया सूचनाओं में बड़ी संख्या में समर्थकों के दिल्ली पहुंचने और प्रतिबंधों के बावजूद जुटान होने की आशंका जताई गई थी। इसके बाद दिल्ली आने वाले प्रमुख मार्गों, परिवहन केंद्रों और अन्य स्थानों पर निगरानी बढ़ाने जैसे एहतियाती कदम उठाए गए। हालांकि, ये चिंताएं प्रशासन की ओर से बताए गए आकलन का हिस्सा थीं; इन्हें किसी संभावित उल्लंघन का स्वतः प्रमाण नहीं माना जा सकता। जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की व्यवस्था में बदलाव रिपोर्टों के मुताबिक, दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर को निर्धारित प्रदर्शन स्थल के रूप में जारी रखने की व्यवस्था में बदलाव का फैसला किया है। इसके विकल्प के तौर पर रामलीला मैदान, बुराड़ी और CBD ग्राउंड जैसे स्थानों का उल्लेख किया गया है। यह कदम प्रदर्शन स्थलों के निर्धारण और प्रबंधन से जुड़ी समिति की सिफारिशों से संबंधित बताया गया है। इस बदलाव का उद्देश्य प्रदर्शनों को निर्धारित स्थानों पर आयोजित कराने और सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने से जुड़ा है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का भी हवाला प्रदर्शन की अनुमति और उसके नियमन के संबंध में अधिकारियों ने सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों तथा प्रक्रियात्मक नियमों का भी हवाला दिया। शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन लोकतांत्रिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है, लेकिन सार्वजनिक व्यवस्था और सुरक्षा के मद्देनजर प्रशासन इस पर उचित शर्तें लागू कर सकता है। हालांकि, किसी भी प्रतिबंध की वैधता और उचित सीमा का आकलन उसके आधार, प्रभाव और संबंधित कानूनी प्रावधानों के अनुसार किया जाना चाहिए। CJP ने फैसले को लोकतांत्रिक अधिकारों पर रोक बताया CJP ने अनुमति नहीं दिए जाने का विरोध करते हुए इसे शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार पर अनुचित प्रतिबंध बताया। पार्टी नेताओं अभिजीत दीपके और अन्य सदस्यों ने आरोप लगाया कि प्रशासन की कार्रवाई असहमति की आवाज को दबाने का प्रयास है। इस तरह मामले में पुलिस का पक्ष सार्वजनिक सुरक्षा और कानून-व्यवस्था पर केंद्रित है, जबकि CJP इसे लोकतांत्रिक विरोध के अधिकार से जोड़कर देख रही है। 13 अक्टूबर को फिर हिरासत में लिए गए CJP नेता 13 अक्टूबर को CJP नेताओं सौरव दास और आशुतोष रंका ने जंतर-मंतर पहुंचने की कोशिश की, जिसके बाद उन्हें फिर हिरासत में ले लिया गया। रिपोर्टों के अनुसार, पुलिस ने कहा कि वहां प्रतिबंध लागू थे और दोनों नेताओं पर हाल में रिहाई के दौरान शांति बनाए रखने से संबंधित शर्तें भी लागू थीं। इस घटनाक्रम ने प्रदर्शन की अनुमति, प्रशासनिक प्रतिबंधों और असहमति जताने के अधिकार को लेकर विवाद को और बढ़ा दिया। मामला न्यायालयों तक पहुंचा प्रदर्शन संबंधी प्रतिबंधों, आवाजाही पर असर और अनुमति नहीं दिए जाने के मुद्दों को लेकर न्यायालयों में भी याचिकाएं पहुंचने की खबरें सामने आई हैं। इस संदर्भ में मुख्य सवाल यह है कि सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए लगाए गए प्रतिबंध कितने आवश्यक और आनुपातिक हैं। प्रदर्शन को नियंत्रित करने का अधिकार और शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार—दोनों के बीच संतुलन बनाए रखना इस विवाद का प्रमुख कानूनी और लोकतांत्रिक पहलू है। CJP को अनुमति नहीं मिलने की मुख्य वजहें दिल्ली पुलिस के अनुसार, CJP के प्रदर्शन को अनुमति नहीं देने के प्रमुख कारण थे—देर से आवेदन, पिछले प्रदर्शनों में निर्देशों के कथित उल्लंघन, सार्वजनिक सुरक्षा संबंधी चिंताएं, यातायात पर संभावित असर और खुफिया सूचनाओं के आधार पर कानून-व्यवस्था का आकलन। दूसरी ओर, CJP इन कारणों को चुनौती देते हुए कार्रवाई को शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार पर अनुचित रोक बता रही है। मामले में प्रशासनिक सुरक्षा चिंताओं और लोकतांत्रिक अधिकारों के बीच संतुलन को लेकर बहस जारी है। Source: The Indian Express…

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प्रकाश राज का सरकार पर निशाना—“आखिर कब तक नदी को रोकोगे?” CJP आंदोलन के समर्थन में उठाई आवाज

नई दिल्ली: अभिनेता प्रकाश राज ने CJP आंदोलन के दौरान दिल्ली में प्रदर्शनकारियों की हिरासत और पुलिस कार्रवाई को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। 10 अक्टूबर को सोशल मीडिया पर साझा किए गए एक वीडियो में उन्होंने सवाल किया, “Fraand… how long will you stop a river?” यानी, “दोस्त, आखिर कब तक एक नदी को रोकोगे?” उनकी यह टिप्पणी विरोध प्रदर्शनों और उन्हें रोकने के लिए उठाए जा रहे कदमों के संदर्भ में सामने आई। (हिंदुस्तान) प्रदर्शनकारियों की हिरासत पर जताई नाराजगी प्रकाश राज ने दिल्ली में प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने और सुरक्षा व्यवस्था के तहत पुलिस की भारी तैनाती की आलोचना की। अपने वीडियो संदेश में उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार जनता की आवाज दबाने की कोशिश कर रही है। उनके अनुसार, पुलिस कार्रवाई और प्रतिबंधों के बावजूद विरोध की आवाज को रोकना आसान नहीं होगा। “आखिर कब तक नदी को रोकोगे?” प्रकाश राज ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट के कैप्शन में लिखा, “Fraand… how long will you stop a river…” इस रूपक के जरिए उन्होंने आंदोलन को रोकने की कोशिशों पर सवाल उठाया। उनका संदेश इस विचार को व्यक्त करता है कि लगातार बढ़ते जनविरोध को केवल पुलिस कार्रवाई और प्रतिबंधों के जरिए दबाना मुश्किल हो सकता है। सरकार पर डरने का लगाया आरोप प्रकाश राज ने अपने वीडियो में सत्ता पक्ष पर डरने का आरोप भी लगाया। उन्होंने प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए पुलिस, बैरिकेडिंग और हिरासत जैसी कार्रवाई का जिक्र किया। हालांकि, सरकार की मंशा को लेकर उनकी टिप्पणियां राजनीतिक आरोप हैं, न कि स्वतंत्र रूप से स्थापित तथ्य। Bengaluru में भी CJP प्रदर्शन में हुए थे शामिल प्रकाश राज इससे पहले बेंगलुरु के फ्रीडम पार्क में आयोजित CJP प्रदर्शन में शामिल हुए थे। इस दौरान उन्होंने SIR प्रक्रिया को समाप्त करने और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग का समर्थन किया था। (जनसत्ता) ध्रुव राठी और अभिजीत दिपके भी थे मौजूद बेंगलुरु में हुए प्रदर्शन में प्रकाश राज के साथ YouTuber ध्रुव राठी और CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके भी मौजूद थे। यह कार्यक्रम 10 अक्टूबर को दिल्ली में हुए प्रदर्शन से पहले चलाए जा रहे CJP अभियान का हिस्सा था। (जनसत्ता) “पूरा देश जंतर-मंतर बन जाएगा” दिल्ली में पुलिस कार्रवाई के बाद प्रकाश राज ने एक अन्य वीडियो संदेश में कहा कि यदि लोगों को जंतर-मंतर पर अपनी आवाज उठाने से रोका जाएगा, तो “पूरा देश जंतर-मंतर बन जाएगा।” उन्होंने सवाल उठाया कि सरकार आखिर किसे बचाने की कोशिश कर रही है—चुनाव आयोग को या अपनी सत्ता को। यह बयान उनकी राजनीतिक प्रतिक्रिया के रूप में सामने आया। (जनसत्ता) कई शहरों तक फैला CJP आंदोलन CJP और उससे जुड़े समूहों के प्रदर्शन दिल्ली के अलावा मुंबई, पुणे और बेंगलुरु सहित कई शहरों में भी हुए। इन प्रदर्शनों के दौरान प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने की खबरें सामने आईं। 11 अक्टूबर को भी दिल्ली में चुनाव प्रमुख के खिलाफ विरोध प्रदर्शन जारी रहने की सूचना दी गई। (रॉयटर्स) दिल्ली में प्रदर्शन और मार्च की कोशिश 12 अक्टूबर को दिल्ली में चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन जारी रहे। विपक्षी दलों और छात्र संगठनों से जुड़े प्रदर्शनकारियों ने सुप्रीम कोर्ट की ओर मार्च करने की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने उन्हें रास्ते में रोक दिया। विरोध प्रदर्शनों के मद्देनजर कुछ मेट्रो स्टेशन बंद करने और यातायात पर प्रतिबंध लगाने की भी खबरें आईं। (रॉयटर्स) CJP ने दिल्ली पुलिस को दिया 24 घंटे का अल्टीमेटम CJP से जुड़े सौरव दास और आशुतोष रंका ने दिल्ली पुलिस से जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन के लिए तारीख और समय तय करने की मांग की है। संगठन ने 24 घंटे का अल्टीमेटम देते हुए कहा कि यदि पुलिस की ओर से कोई तारीख तय नहीं की गई, तो वह दोबारा प्रदर्शन की घोषणा करेगा। (जनसत्ता) SIR प्रक्रिया को लेकर चुनाव आयोग पर सवाल CJP और विपक्षी दलों ने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूचियों से बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने को लेकर चुनाव आयोग पर सवाल उठाए हैं। दूसरी ओर, चुनाव आयोग ने पक्षपात और मतदाता सूची में हेरफेर के आरोपों से इनकार किया है। आयोग के अनुसार, यदि किसी पात्र मतदाता का नाम गलत तरीके से हट गया है, तो वह दोबारा पंजीकरण करा सकता है। (रॉयटर्स) प्रकाश राज की टिप्पणी राजनीतिक प्रतिक्रिया प्रकाश राज का “नदी को कब तक रोकोगे?” वाला बयान CJP आंदोलन और प्रदर्शन पर लगाई जा रही पाबंदियों के संदर्भ में उनकी राजनीतिक प्रतिक्रिया है। इसे उनके विचार और आंदोलन के समर्थन के रूप में देखा जाना चाहिए। स्रोत: हिंदुस्तान, रॉयटर्स, जनसत्ता जय राष्ट्र न्यूज़

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CJP Protest से पहले गृह मंत्रालय का अलर्ट, राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को दिल्ली पुलिस के साथ समन्वय के निर्देश

नई दिल्ली: 10 अक्टूबर को प्रस्तावित CJP प्रदर्शन से पहले केंद्रीय गृह मंत्रालय ने सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं। मंत्रालय ने आशंका जताई है कि इस प्रदर्शन के “गंभीर कानून-व्यवस्था संबंधी प्रभाव” हो सकते हैं। केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन ने राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के पुलिस प्रमुखों को दिल्ली पुलिस के साथ रियल-टाइम इंटेलिजेंस साझा करने और किसी भी संभावित स्थिति से निपटने के लिए समन्वय मजबूत करने को कहा है। गृह मंत्रालय के अनुसार, प्रदर्शन की अनुमति नहीं मिलने के बावजूद CJP समर्थक अलग-अलग राज्यों से दिल्ली पहुंचने की कोशिश कर सकते हैं। ऐसे में संभावित भीड़, यातायात बाधित होने और सार्वजनिक व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका को देखते हुए सुरक्षा एजेंसियों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं। गृह सचिव ने राज्यों के पुलिस प्रमुखों को लिखा पत्र केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन ने सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के पुलिस प्रमुखों को पत्र भेजकर CJP के प्रदर्शन से संबंधित खुफिया जानकारी तत्काल दिल्ली पुलिस के साथ साझा करने को कहा है। साथ ही, किसी भी संभावित कानून-व्यवस्था की समस्या को रोकने के लिए आपसी समन्वय बढ़ाने पर जोर दिया गया है। गृह मंत्रालय ने जताई कानून-व्यवस्था बिगड़ने की आशंका मंत्रालय ने 10 अक्टूबर को प्रस्तावित प्रदर्शन के सार्वजनिक व्यवस्था पर गंभीर असर पड़ने की आशंका जताई है। उपलब्ध खुफिया सूचनाओं का हवाला देते हुए कहा गया है कि बड़ी संख्या में समर्थक दिल्ली पहुंचने का प्रयास कर सकते हैं। इससे यातायात व्यवस्था प्रभावित होने, बिना अनुमति भीड़ जुटने और सार्वजनिक सुविधाओं पर अतिरिक्त दबाव पड़ने की आशंका जताई गई है। जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति नहीं दिल्ली पुलिस ने CJP को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने की अनुमति देने से इनकार कर दिया है। रिपोर्टों के अनुसार, आयोजकों ने 7 अक्टूबर को प्रदर्शन के लिए अनुरोध किया था, जबकि निर्धारित प्रक्रिया के तहत प्रस्तावित सभा से कम से कम 10 दिन पहले आवेदन देना आवश्यक बताया गया है। पुलिस ने पहले हुए प्रदर्शनों के दौरान कथित तौर पर शर्तों और आश्वासनों का उल्लंघन किए जाने को भी अनुमति नहीं देने के कारणों में शामिल किया है। राज्यों को समर्थकों की आवाजाही पर नजर रखने के निर्देश गृह मंत्रालय ने राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों से उन समूहों की आवाजाही पर नजर रखने को कहा है, जो प्रदर्शन में शामिल होने के लिए दिल्ली रवाना हो सकते हैं। अधिकारियों को आयोजकों, यात्रा योजनाओं, ठहरने की व्यवस्था और प्रदर्शन के लिए जुटाए जा रहे लोगों से संबंधित जानकारी दिल्ली पुलिस के साथ साझा करने के निर्देश दिए गए हैं। रियल-टाइम इंटेलिजेंस साझा करने पर जोर मंत्रालय के निर्देशों में तत्काल खुफिया जानकारी साझा करना प्रमुखता से शामिल है। यदि किसी राज्य से बड़ी संख्या में लोग दिल्ली के लिए रवाना होते हैं या प्रदर्शन से जुड़ी असामान्य गतिविधियां सामने आती हैं, तो इसकी जानकारी तुरंत दिल्ली पुलिस तक पहुंचाने को कहा गया है। इसका उद्देश्य संभावित भीड़ और कानून-व्यवस्था से जुड़ी चुनौतियों के बारे में समय रहते जानकारी जुटाना और संबंधित एजेंसियों के बीच तालमेल बनाए रखना है। निवारक कार्रवाई करने के भी निर्देश गृह मंत्रालय ने राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों से मौजूदा कानूनी प्रावधानों के तहत आवश्यक निवारक कदम उठाने को कहा है। रिपोर्टों के मुताबिक, इसमें नोटिस जारी करना, गतिविधियों की निगरानी करना और परिस्थितियों के अनुसार अन्य कानूनी कार्रवाई करना शामिल हो सकता है। 4 अक्टूबर की बैठक में भी हुई थी चर्चा द इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के अनुसार, 4 अक्टूबर को गृह मंत्रालय की समन्वय बैठक में भी CJP के प्रस्तावित प्रदर्शन और समर्थकों की लामबंदी को लेकर चर्चा हुई थी। रिपोर्ट में राज्यों को नोटिस देने, संभावित हिरासत और संगठन की फंडिंग से जुड़े पहलुओं की जांच जैसे मुद्दों पर चर्चा किए जाने का उल्लेख किया गया है। दिल्ली पुलिस ने तैयार किया व्यापक सुरक्षा प्लान प्रदर्शन को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए व्यापक योजना तैयार की है। रिपोर्टों के अनुसार, इसमें कई स्थानों पर नाकेबंदी, हिरासत केंद्रों की व्यवस्था और विभिन्न जिलों के बीच समन्वय बढ़ाने जैसे कदम शामिल हैं। नई दिल्ली जिले में बैरिकेडिंग और निगरानी व्यवस्था को भी मजबूत किया गया है, ताकि किसी संभावित भीड़ को नियंत्रित किया जा सके और सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखी जा सके। नई दिल्ली में BNSS की धारा 163 लागू नई दिल्ली क्षेत्र में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा लागू किए जाने की भी रिपोर्ट है। इस प्रावधान के तहत सक्षम अधिकारी सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए परिस्थितियों के अनुसार सभाओं, जुलूसों और लोगों की आवाजाही पर प्रतिबंध लगा सकते हैं। CJP की समर्थकों से शांति बनाए रखने की अपील दूसरी ओर, CJP ने अपने समर्थकों के लिए एडवाइजरी जारी कर शांतिपूर्ण व्यवहार करने की अपील की है। संगठन ने बैरिकेड तोड़ने, प्रतिबंधित क्षेत्रों में प्रवेश करने, हिंसा करने और सार्वजनिक या निजी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने से बचने को कहा है। अभिजीत दीपके समेत कई नेताओं को हिरासत में लिया गया 10 अक्टूबर को CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके, सौरव दास और आशुतोष रांका समेत कई नेताओं को दिल्ली पहुंचने के बाद हिरासत में लिए जाने की खबरें सामने आईं। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, प्रदर्शन को रोकने के लिए राजधानी में व्यापक सुरक्षा तैनाती की गई और कई लोगों को हिरासत में लिया गया। सुरक्षा और विरोध प्रदर्शन के अधिकार पर बहस गृह मंत्रालय और दिल्ली पुलिस का पक्ष है कि सुरक्षा संबंधी कदम सार्वजनिक व्यवस्था, यातायात और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उठाए जा रहे हैं। वहीं, CJP और उसके समर्थक इन प्रतिबंधों को शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन के संवैधानिक अधिकार पर अत्यधिक रोक के रूप में देख रहे हैं। यह मामला अब सार्वजनिक सुरक्षा और शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार के बीच संतुलन को लेकर बहस का विषय बन गया है। संविधान का अनुच्छेद 19(1)(b) नागरिकों को शांतिपूर्वक और बिना हथियार एकत्र होने का अधिकार देता है, हालांकि सार्वजनिक व्यवस्था सहित संवैधानिक आधारों पर इस अधिकार पर उचित प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं। स्रोत: द इंडियन एक्सप्रेस / हिंदुस्तान टाइम्स / रॉयटर्स जय राष्ट्र न्यूज़

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