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आदिवासी स्कूल में ₹2.5 लाख की पानी की टंकी? वायरल वीडियो में उठे सवाल

जयपुर: राजस्थान के आदिवासी क्षेत्र के एक सरकारी स्कूल में लगी पानी की टंकी को लेकर सोशल मीडिया पर सवाल उठाए जा रहे हैं। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के सह-संयोजक आशुतोष रांका ने एक वीडियो साझा करते हुए दावा किया कि आदिवासी बच्चों के स्कूल में लगाई गई पानी की टंकी पर करीब ₹2.5 लाख खर्च किए गए, लेकिन इसके बावजूद बच्चों को पर्याप्त पानी नहीं मिल रहा। हालांकि ₹2.5 लाख की लागत के इस दावे की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। वायरल वीडियो में क्या दावा किया गया? 20 सितंबर को आशुतोष रांका के सोशल मीडिया अकाउंट से एक वीडियो साझा किया गया। रिपोर्ट के मुताबिक वीडियो में उन्होंने स्कूल परिसर में लगी एक पानी की टंकी दिखाते हुए दावा किया कि इसकी कीमत करीब ₹2.5 लाख है। उन्होंने कहा कि टंकी में तीन आउटलेट दिखाई देते हैं, लेकिन केवल एक नल लगा है और उससे भी पानी नहीं आ रहा। रांका ने सवाल उठाया कि यदि इस व्यवस्था पर वास्तव में इतनी राशि खर्च की गई है तो विद्यार्थियों को इसका लाभ क्यों नहीं मिल रहा और पैसा कहां खर्च हुआ। ‘आदिवासी स्कूल ठीक करो’ अभियान के दौरान सामने आया मामला यह मामला CJP के ‘आदिवासी स्कूल ठीक करो’ अभियान के दौरान सामने आया। सात सदस्यीय टीम ने राजस्थान के खेरवाड़ा विधानसभा क्षेत्र के आदिवासी गांवों में सरकारी स्कूलों का दौरा किया था। टीम ने देमत, पोंगली और बाबरी जैसे गांवों में स्कूल भवन, पीने के पानी और दूसरी बुनियादी सुविधाओं को लेकर सवाल उठाए। Indian Express की रिपोर्ट के अनुसार CJP ने आदिवासी विकास के लिए निर्धारित फंड के इस्तेमाल पर भी पारदर्शिता की मांग की और स्कूलों में जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने की बात कही। स्कूलों में पानी और शौचालय की समस्या का भी दावा उदयपुर क्षेत्र में किए गए निरीक्षणों के दौरान आशुतोष रांका और उनकी टीम ने कई सरकारी स्कूलों में स्वच्छ पेयजल, शौचालय, बिजली, पंखे और फर्नीचर जैसी सुविधाओं की कमी का आरोप लगाया। Amar Ujala की रिपोर्ट के अनुसार रांका ने जिला शिक्षा अधिकारी को ज्ञापन देकर सुधार की मांग भी की। इन निरीक्षणों को लेकर प्रकाशित दूसरी रिपोर्ट्स में कुछ स्कूलों में जर्जर भवन और पर्याप्त कक्षाओं की कमी जैसे मुद्दों का भी उल्लेख किया गया है। ₹2.5 लाख की कीमत की पुष्टि नहीं वायरल वीडियो में टंकी की कीमत ₹2.5 लाख बताए जाने के बावजूद अभी ऐसी कोई सार्वजनिक आधिकारिक दस्तावेजी जानकारी सामने नहीं आई है जिससे यह स्वतंत्र रूप से पुष्टि हो सके कि संबंधित टंकी की वास्तविक स्वीकृत या खर्च की गई लागत इतनी ही थी। The Nation Mirror ने भी अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया कि पानी की टंकी की कीमत और उससे जुड़े आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं की जा सकी है। इसलिए ₹2.5 लाख की राशि को फिलहाल रांका द्वारा किया गया दावा ही माना जाना चाहिए। राजस्थान के सरकारी स्कूल पहले भी रहे चर्चा में राजस्थान में सरकारी स्कूलों की स्थिति को लेकर हाल के महीनों में कई मामले सामने आए हैं। अगस्त में राज्य सरकार ने स्कूलों की सुरक्षा, पेयजल, शौचालय और भवनों की स्थिति की जांच करने के निर्देश दिए थे। अधिकारियों को स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं का भौतिक सत्यापन करने को भी कहा गया था। इसके अलावा जयपुर के रामपुरा गांव के एक सरकारी स्कूल की खराब स्थिति पर विवाद के बाद सरकार ने नए भवन के निर्माण के लिए करीब ₹18 लाख मंजूर किए थे। प्रशासन की प्रतिक्रिया का इंतजार ₹2.5 लाख की पानी की टंकी के विशेष दावे को लेकर उपलब्ध प्रमुख रिपोर्ट्स में संबंधित विभाग की कोई विस्तृत आधिकारिक सफाई सामने नहीं आई है। ऐसे में वायरल वीडियो ने सरकारी स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं और सार्वजनिक धन के इस्तेमाल को लेकर सवाल जरूर खड़े किए हैं, लेकिन टंकी की वास्तविक लागत और भुगतान से जुड़े निष्कर्ष आधिकारिक रिकॉर्ड सामने आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेंगे। source – The Indian Express / Amar Ujala / The Nation Mirror जय राष्ट्र न्यूज़

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जयपुर के सरकारी स्कूल की बदहाल तस्वीर; ‘भैंसों के बाड़े’ में लग रही कक्षाएं? CJP टीम पर कथित हमले के बाद Cross FIR

जयपुर: राजस्थान की राजधानी जयपुर के पास एक सरकारी स्कूल की हालत को लेकर शुरू हुआ विवाद अब शिक्षा व्यवस्था से लेकर कानून-व्यवस्था तक बड़े सवाल खड़े कर रहा है। बगरू क्षेत्र के रामपुरा-कंवरपुरा गांव में स्थित सरकारी प्राथमिक विद्यालय की मूल इमारत जर्जर घोषित होने के बाद बच्चों की कक्षाएं एक वैकल्पिक टीन शेड जैसी जगह पर लगाई जा रही हैं। मीडिया रिपोर्टों और CJP का दावा है कि यह जगह भैंसों के बाड़े या तबेले के रूप में इस्तेमाल होती रही है, जहां चारा और गोबर भी दिखाई दिया। स्कूल की स्थिति देखने पहुंची CJP की टीम और स्थानीय ग्रामीणों के बीच 21 अगस्त को विवाद और धक्का-मुक्की हुई थी। अब इस मामले में दोनों पक्षों ने एक-दूसरे के खिलाफ FIR दर्ज कराई है। 24 अगस्त की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक CJP के सह-संयोजक आशुतोष रांका और 50-60 कार्यकर्ताओं के खिलाफ भी SC/ST Act समेत विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। क्यों बाड़े जैसी जगह पर लग रही हैं कक्षाएं? राजस्थान सरकार के अधिकारियों के मुताबिक रामपुरा-कंवरपुरा के सरकारी प्राथमिक स्कूल की इमारत को सितंबर 2025 में किए गए सर्वे के बाद जर्जर और असुरक्षित घोषित किया गया था। स्कूल में फिलहाल करीब 18 विद्यार्थी और दो शिक्षक बताए गए हैं। पुरानी इमारत असुरक्षित होने के कारण बच्चों की पढ़ाई वैकल्पिक स्थान पर स्थानांतरित की गई। मीडिया रिपोर्टों में इस वैकल्पिक जगह को गौशाला, तबेला या buffalo shed जैसी जगह बताया गया है। तस्वीरों और रिपोर्टों में दावा किया गया कि जिस क्षेत्र में बच्चों की कक्षाएं लग रही थीं, वहां आसपास पशुओं का चारा और गोबर भी मौजूद था। यही तस्वीर सामने आने के बाद स्कूल की स्थिति सोशल मीडिया पर तेजी से चर्चा में आ गई। School Thik Karo अभियान के तहत पहुंची थी CJP CJP की टीम अपने ‘School Thik Karo’ अभियान के तहत 21 अगस्त को इस सरकारी स्कूल की स्थिति देखने रामपुरा-कंवरपुरा पहुंची थी। CJP का कहना है कि उसे सूचना मिली थी कि बच्चों की पढ़ाई उचित स्कूल भवन के बजाय पशुओं के बाड़े जैसी जगह पर हो रही है। इसी स्थिति की जांच और वीडियो रिकॉर्डिंग करने के लिए टीम गांव पहुंची थी। टीम में CJP के सह-संयोजक आशुतोष रांका समेत कई कार्यकर्ता मौजूद थे। गांव पहुंचते ही बढ़ा विवाद स्कूल तक पहुंचने की कोशिश के दौरान CJP टीम और कुछ स्थानीय ग्रामीणों के बीच कहासुनी शुरू हो गई। CJP का आरोप है कि टीम को स्कूल तक पहुंचने से रोका गया और फिर उस पर हमला किया गया। संगठन ने दावा किया कि उसके सदस्यों के साथ मारपीट हुई, पत्थर फेंके गए और वाहनों को नुकसान पहुंचाया गया। दूसरी तरफ ग्रामीणों ने CJP कार्यकर्ताओं पर ही अभद्रता और मारपीट करने के आरोप लगाए हैं। इसी वजह से मामला अब केवल एक कथित हमले की शिकायत तक सीमित नहीं है, बल्कि दोनों पक्षों की Cross FIR दर्ज हो चुकी है। Ashutosh Ranka समेत CJP कार्यकर्ताओं पर SC/ST Act में केस 24 अगस्त को सामने आई Indian Express की रिपोर्ट के मुताबिक स्थानीय निवासी भगवान सहाय धनका की शिकायत पर आशुतोष रांका और करीब 50-60 CJP कार्यकर्ताओं के खिलाफ FIR दर्ज की गई है। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि CJP कार्यकर्ताओं ने गांव में पहुंचकर ग्रामीणों से अभद्रता की, मारपीट की और जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल किया। पुलिस ने इस शिकायत के आधार पर BNS की मारपीट, गलत तरीके से रोकने, unlawful assembly और शांति भंग करने की मंशा से अपमान से जुड़ी धाराओं के साथ SC/ST Act की तीन धाराएं भी लगाई हैं। ये फिलहाल शिकायतकर्ता की ओर से लगाए गए आरोप हैं और पुलिस जांच के बाद ही उनकी सत्यता स्पष्ट होगी। CJP की तरफ से भी FIR दूसरी FIR CJP कार्यकर्ता रेखा शर्मा की शिकायत के आधार पर दर्ज की गई है। उनका आरोप है कि CJP की टीम स्कूल की स्थिति देखने जा रही थी, तभी उन्हें रास्ते में घेरकर अलग-अलग दिशाओं से हमला किया गया। CJP की ओर से यह भी आरोप लगाया गया है कि हमलावरों में कुछ लोग BJP से जुड़े थे। हालांकि BJP से जुड़े स्थानीय नेताओं और ग्रामीण पक्ष ने इन आरोपों को खारिज किया है। इसलिए कथित हमले के पीछे किसी राजनीतिक साजिश की बात अभी आरोप के स्तर पर है। स्कूल के नए भवन के लिए ₹18 लाख मंजूर विवाद के बीच बच्चों और अभिभावकों के लिए राहत की खबर भी सामने आई है। राजस्थान सरकार ने स्कूल के नए भवन के लिए कुल ₹18 लाख उपलब्ध होने की जानकारी दी है। इसमें ₹12 लाख District Mineral Foundation Trust (DMFT) और ₹6 लाख MLA Fund से दिए जाने हैं। सरकार के मुताबिक नए भवन का निर्माण 1 सितंबर 2026 से शुरू किया जाना है। CJP ने इस घोषणा का स्वागत करते हुए कहा कि बच्चों को सुरक्षित और उचित स्कूल भवन उपलब्ध कराना ही उसके अभियान की मुख्य मांग थी। CJP ने CM Bhajan Lal Sharma को कहा धन्यवाद नए भवन के निर्माण की घोषणा सामने आने के बाद आशुतोष रांका ने राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को धन्यवाद दिया। रांका ने कहा कि उनकी मांग यही थी कि बच्चों को उचित जगह पर पढ़ने की सुविधा मिले। हालांकि उन्होंने कथित हमले के मामले में निष्पक्ष जांच की मांग भी दोहराई और कहा कि दोषी चाहे किसी भी पक्ष के हों, उनके खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए। Rajasthan में 611 सरकारी स्कूलों के पास अपनी इमारत नहीं रामपुरा-कंवरपुरा का मामला सामने आने के बाद राजस्थान के सरकारी स्कूलों के infrastructure पर भी चर्चा तेज हो गई है। राज्य सरकार द्वारा विधानसभा में दिए गए UDISE आधारित आंकड़ों के मुताबिक राजस्थान में 611 सरकारी स्कूल ऐसे हैं जिनके पास अपनी इमारत नहीं है। इसके अलावा अपनी building वाले सरकारी स्कूलों में भी: होने की जानकारी सामने आई है। ये आंकड़े राज्य में school infrastructure की चुनौती को बड़े स्तर पर दिखाते हैं। Rajasthan सरकार ने बनाया बड़ा Infrastructure Plan राज्य सरकार ने सरकारी स्कूलों की इमारतों की मरम्मत और नए निर्माण के लिए बड़े स्तर पर राशि उपलब्ध कराने की बात कही है। सरकार के मुताबिक जर्जर प्राथमिक और उच्च माध्यमिक स्कूल भवनों के निर्माण, मरम्मत और maintenance के…

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जयपुर में CJP नेता आशुतोष रांका और टीम पर हमले का आरोप; VIDEO चर्चा में, दोनों पक्षों ने दर्ज कराई FIR

जयपुर: राजस्थान की राजधानी जयपुर के बगरू इलाके में सरकारी स्कूल का निरीक्षण करने पहुंची CJP की टीम के साथ कथित मारपीट और पथराव का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। CJP के नेता और सह-संयोजक आशुतोष रांका ने आरोप लगाया है कि उनकी टीम पर हमला किया गया, वाहनों में तोड़फोड़ की गई और उनके कपड़े तक फाड़ दिए गए। घटना से जुड़े वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर चर्चा में हैं। मामला जयपुर जिले के रामपुरा-कंवरपुरा गांव का है, जहां CJP की टीम अपने ‘School Thik Karo’ अभियान के तहत एक सरकारी प्राथमिक विद्यालय की स्थिति देखने पहुंची थी। सरकारी स्कूल देखने पहुंची थी CJP की टीम मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, रामपुरा-कंवरपुरा का सरकारी प्राथमिक विद्यालय पर्याप्त भवन और सुविधाओं की समस्या से जूझ रहा है। स्कूल से जुड़ी बदहाल परिस्थितियों को लेकर CJP की टीम वहां पहुंची थी। टीम का आरोप है कि जब वे स्कूल की स्थिति देखने पहुंचे तो कुछ ग्रामीणों ने उन्हें अंदर जाने से रोक दिया। देखते ही देखते विवाद बढ़ गया और मामला धक्का-मुक्की तथा कथित मारपीट तक पहुंच गया। आशुतोष रांका ने आरोप लगाया कि विरोध कर रहे लोगों ने टीम पर पत्थर फेंके और गाड़ियों के शीशे भी तोड़ दिए। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक रांका ने दावा किया कि इस दौरान उनके कपड़े भी फाड़े गए। आशुतोष रांका ने लगाया सुनियोजित हमले का आरोप घटना के बाद आशुतोष रांका ने इसे अचानक हुआ विवाद मानने से इनकार करते हुए आरोप लगाया कि हमला पहले से योजनाबद्ध था। उन्होंने दावा किया कि हमला करने वालों में कुछ ऐसे लोग शामिल थे जिन्हें एक दिन पहले स्थानीय भाजपा विधायक के साथ देखा गया था। CJP की ओर से सोशल मीडिया पर कुछ तस्वीरें भी साझा की गईं और इन तस्वीरों के आधार पर राजनीतिक संबंध होने का दावा किया गया। हालांकि इन आरोपों को संबंधित भाजपा विधायक की ओर से खारिज किया गया है। BJP विधायक ने आरोपों पर किया पलटवार बगरू से भाजपा विधायक कैलाश वर्मा ने CJP के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि ग्रामीण पहले ही बाहरी लोगों के गांव और स्कूल में प्रवेश को लेकर आपत्ति जता चुके थे। विधायक ने कहा कि CJP कार्यकर्ताओं को ग्रामीणों से बैठकर बातचीत करनी चाहिए थी और स्थिति को तनावपूर्ण नहीं बनाना चाहिए था। NDTV की रिपोर्ट के अनुसार विधायक ने यह भी स्वीकार किया कि जिस लालचंद नाम के व्यक्ति को लेकर CJP भाजपा से संबंध का दावा कर रही है, वह भाजपा कार्यकर्ता है, लेकिन उन्होंने हमले की किसी राजनीतिक साजिश के आरोप से इनकार किया। दोनों पक्षों की ओर से FIR मामले में अब कानूनी कार्रवाई भी शुरू हो चुकी है। पुलिस के पास दोनों पक्षों की ओर से शिकायतें दर्ज कराई गई हैं। CJP की शिकायत में टीम को रोकने, मारपीट, धमकी और तोड़फोड़ जैसे आरोप लगाए गए हैं। दूसरी ओर ग्रामीण पक्ष ने भी CJP कार्यकर्ताओं के खिलाफ शिकायत दर्ज कराते हुए आरोप लगाया कि कुछ लोग गांव में आकर हंगामा करने की कोशिश कर रहे थे और रोकने पर विवाद हुआ। जयपुर पुलिस का कहना है कि मामले की जांच की जा रही है और जांच के आधार पर उचित कार्रवाई की जाएगी। CJP ने दिया 48 घंटे का अल्टीमेटम हमले के आरोपों के बाद CJP ने राजस्थान सरकार के सामने कड़ा रुख अपनाया है। आशुतोष रांका और पार्टी से जुड़े नेताओं ने मांग की है कि घटना में शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाए और संबंधित सरकारी स्कूल में सुधार तथा निर्माण का काम शुरू कराया जाए। CJP ने इसके लिए 48 घंटे का अल्टीमेटम देते हुए चेतावनी दी है कि मांगें पूरी नहीं होने की स्थिति में आंदोलन को आगे बढ़ाया जाएगा। स्कूल की स्थिति भी बनी बड़ा मुद्दा मारपीट और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बीच उस सरकारी स्कूल की स्थिति भी चर्चा में आ गई है, जिसे देखने CJP की टीम पहुंची थी। रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि स्कूल पर्याप्त भवन उपलब्ध नहीं होने के कारण बेहद खराब परिस्थितियों में संचालित हो रहा है। CJP का कहना है कि उसका अभियान सरकारी स्कूलों की ऐसी समस्याओं को सामने लाने के लिए चलाया जा रहा है। इस घटना के बाद राजनीतिक विवाद के साथ-साथ राजस्थान में सरकारी स्कूलों के बुनियादी ढांचे और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। वीडियो और तस्वीरों को लेकर बढ़ी चर्चा घटना से जुड़े कई वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया तथा समाचार माध्यमों में सामने आए हैं। इनमें मौके पर विवाद और तनाव की स्थिति दिखाई देने का दावा किया जा रहा है। हालांकि पूरे घटनाक्रम की जिम्मेदारी किस पक्ष की थी और हमला योजनाबद्ध था या विवाद के दौरान स्थिति बिगड़ी, इसका अंतिम निष्कर्ष पुलिस जांच के बाद ही स्पष्ट होगा। फिलहाल CJP और स्थानीय ग्रामीण एक-दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं और मामले ने राजस्थान की राजनीति को भी गरमा दिया है। नोट: इस खबर में लगाए गए हमले और राजनीतिक साजिश से जुड़े आरोप संबंधित पक्षों के दावों पर आधारित हैं। मामले की पुलिस जांच जारी है। स्रोत – टाइम्स ऑफ इंडिया, एनडीटीवी, नवभारत टाइम्स जय राष्ट्र न्यूज़

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“CJP को मिली पूरी फंडिंग PM CARES Fund से!”—आशुतोष रांका का दावा, ऑडिट की मांग

नई दिल्ली: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के सह-संयोजक आशुतोष रांका का PM CARES Fund को लेकर दिया गया एक बयान चर्चा में है। एक लाइव डिबेट के दौरान CJP आंदोलन की फंडिंग को लेकर सवाल पूछे जाने पर रांका ने दावा किया कि CJP को मिलने वाली पूरी फंडिंग PM CARES Fund से मिली है। इसके साथ ही उन्होंने PM CARES Fund के ऑडिट की मांग भी उठाई। फंडिंग के सवाल पर आशुतोष रांका का जवाब मामला उस समय चर्चा में आया जब एक पत्रकार ने आशुतोष रांका से CJP के आंदोलन के लिए फंडिंग के स्रोत को लेकर सवाल किया। रिपोर्ट के अनुसार, रांका ने जवाब में दावा किया कि आंदोलन की पूरी फंडिंग PM CARES Fund से हुई है और इसी के साथ उन्होंने फंड की जांच और ऑडिट कराने की मांग रखी। उनका यह बयान सोशल मीडिया पर भी तेजी से चर्चा में आया है और इसे लेकर अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। PM CARES Fund के ऑडिट की मांग आशुतोष रांका ने अपने बयान में केवल फंडिंग का दावा ही नहीं किया, बल्कि PM CARES Fund के ऑडिट की मांग भी उठाई। CJP की ओर से पहले भी PM CARES Fund को लेकर सार्वजनिक ऑडिट और पारदर्शिता की मांग की जाती रही है। संगठन की वेबसाइट पर आंदोलन की प्रमुख मांगों में PM CARES Fund का सार्वजनिक ऑडिट शामिल है। CJP आंदोलन पहले से चर्चा में CJP का आंदोलन पिछले कुछ समय से परीक्षा व्यवस्था और छात्रों से जुड़े मुद्दों को लेकर चर्चा में रहा है। संगठन ने NEET और अन्य परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं, बेरोजगारी और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को लेकर सरकार के सामने कई मांगें रखी हैं। संगठन की ओर से केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग भी आंदोलन का प्रमुख हिस्सा रही है। PM CARES Fund को लेकर पहले से उठते रहे हैं सवाल PM CARES Fund की स्थापना कोविड-19 महामारी के दौरान मार्च 2020 में की गई थी। इसके संचालन, पारदर्शिता और सूचना उपलब्धता को लेकर समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं। फंड को एक public charitable trust के रूप में स्थापित किया गया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार इसकी ऑडिटिंग के लिए एक स्वतंत्र चार्टर्ड अकाउंटेंट फर्म नियुक्त की गई थी। इसलिए CJP की ओर से अब जिस तरह के सार्वजनिक ऑडिट की मांग की जा रही है, वह इसी पारदर्शिता की बहस से जुड़ी हुई है। क्या वास्तव में CJP की फंडिंग PM CARES से हुई? यहां एक महत्वपूर्ण बात ध्यान देने वाली है। आशुतोष रांका का PM CARES Fund से CJP की पूरी फंडिंग होने वाला बयान एक दावा है। उपलब्ध रिपोर्टिंग में इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि या ऐसा कोई आधिकारिक दस्तावेज सामने नहीं आया है, जिससे यह साबित हो कि CJP आंदोलन को वास्तव में PM CARES Fund से फंडिंग मिली। इसलिए इस दावे को तथ्य के रूप में नहीं बल्कि रांका के बयान/दावे के रूप में देखना उचित होगा। सोशल मीडिया पर भी बयान की चर्चा रांका के बयान का वीडियो और उसके अंश सोशल मीडिया पर शेयर किए जा रहे हैं। कई यूजर्स इस बयान को लेकर सवाल उठा रहे हैं, जबकि कुछ लोग इसे PM CARES Fund की पारदर्शिता पर बहस से जोड़ रहे हैं। हालांकि सोशल मीडिया प्रतिक्रियाओं को किसी वित्तीय लेनदेन या फंडिंग के आधिकारिक प्रमाण के तौर पर नहीं देखा जा सकता। CJP की मुख्य मांगों में PM CARES ऑडिट भी शामिल CJP की आधिकारिक वेबसाइट पर आंदोलन से जुड़ी मांगों में PM CARES Fund के सार्वजनिक ऑडिट की मांग भी दर्ज है। संगठन ने इसके साथ बेरोजगारी, NEET जवाबदेही, प्रधानमंत्री की प्रेस कॉन्फ्रेंस और अन्य मुद्दों को भी अपनी मांगों में शामिल किया है। निष्कर्ष CJP के सह-संयोजक आशुतोष रांका के PM CARES Fund से आंदोलन की पूरी फंडिंग मिलने वाले दावे ने नई चर्चा शुरू कर दी है। रांका ने इसी के साथ PM CARES Fund के ऑडिट की मांग भी उठाई है। हालांकि, CJP को PM CARES Fund से फंडिंग मिलने के दावे की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल उपलब्ध नहीं है, इसलिए इसे रांका के बयान के तौर पर ही देखा जाना चाहिए। अब इस मुद्दे पर सबसे अहम सवाल यही है कि क्या भविष्य में इस दावे के समर्थन में कोई आधिकारिक वित्तीय दस्तावेज या प्रमाण सामने आता है। Source: Patrika / CJP official website / Latest reports जय राष्ट्र न्यूज़

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