नई UNEP Report: Air-Quality Norms पूरे हुए तो Delhi का PM2.5 Exposure Burden 2040 तक 20% घट सकता है

नई दिल्ली, 8 सितंबर 2026: दिल्ली में वायु प्रदूषण से जूझ रहे लोगों के लिए नई UNEP report में महत्वपूर्ण संभावना सामने आई है। रिपोर्ट के मुताबिक अगर Delhi मौजूदा national air-quality standards को 2026 से तय समय पर हासिल और लागू करता है, तो 2040 तक PM2.5 exposure burden करीब 20% कम किया जा सकता है। वहीं implementation में लगभग आठ साल की देरी होने पर यह फायदा घटकर करीब 10% रह सकता है। क्या है नई UNEP Report? United Nations Environment Programme (UNEP) और Climate and Clean Air Coalition (CCAC) ने “Hidden Assets: The Economic and Health Case for Climate and Clean Air Action” नाम से नया global assessment जारी किया है। UNEP इसे climate change और air pollution पर integrated action के economic benefits का अब तक का सबसे comprehensive global assessment बताता है। Delhi के लिए 20% Reduction का अनुमान Report के Delhi-specific assessment के मुताबिक अगर मौजूदा national air-quality standards को समय पर लागू किया जाता है, तो 2040 तक लोगों का PM2.5 exposure burden करीब 20% कम हो सकता है। लेकिन अगर implementation में global average के मुताबिक लगभग 7.5 से 8 साल की देरी होती है, तो reduction सिर्फ करीब 10% रह सकता है। देरी से आधा हो सकता है फायदा UNEP assessment में कहा गया है कि institutional, economic, technological और social barriers की वजह से clean-air solutions लागू करने में औसतन कई साल की देरी हो सकती है। रिपोर्ट के मुताबिक करीब आठ साल की delay 2035 तक हासिल की जा सकने वाली emissions reduction को लगभग आधा कर सकती है। 25 Solutions सुझाए गए Report ने climate change और air pollution दोनों से एक साथ निपटने के लिए 25 solutions चिन्हित किए हैं। इनमें प्रमुख रूप से: जैसे उपाय शामिल हैं। Air Pollution का Health Burden बेहद बड़ा UNEP के मुताबिक 2025 में human-caused outdoor air pollution यानी PM2.5 और ozone exposure से दुनिया भर में अनुमानित 6.4 million premature deaths जुड़ी थीं। Household air pollution से अलग से करीब 2 million premature deaths जुड़ी थीं, जिनमें लगभग 300,000 बच्चे शामिल थे। Integrated Action से 60–70% Health Burden घट सकता है Global level पर UNEP का अनुमान है कि सभी 25 clean-air और climate solutions पूरी तरह लागू किए जाएं तो air pollution के annual health burden में 60 से 70% तक कमी लाई जा सकती है। इसके साथ 2050 तक carbon dioxide emissions लगभग आधी और methane emissions करीब 60% तक कम हो सकती हैं। हर $1 Investment पर $15 Benefit UNEP assessment का बड़ा economic finding यह है कि climate और clean-air action में लगाया गया हर $1 लगभग $15 तक economic benefit दे सकता है। इसमें healthcare costs में कमी, बेहतर labour productivity, कम premature deaths और healthier population जैसे benefits शामिल हैं। हर साल की देरी से $1.5 Trillion का नुकसान Report में चेतावनी दी गई है कि clean-air और climate measures लागू करने में हर साल की देरी से दुनिया $1.5 trillion से अधिक के संभावित annual benefits गंवा सकती है। 2035 तक इन measures से मिलने वाला annual economic benefit global GDP के करीब 2.8% के बराबर हो सकता है। Delhi के लिए क्यों महत्वपूर्ण है Report? Delhi लंबे समय से PM2.5 pollution की गंभीर समस्या का सामना कर रहा है। नई UNEP analysis यह दिखाती है कि केवल नए pollution targets घोषित करना पर्याप्त नहीं होगा—implementation की speed भी health benefits तय करने में बेहद महत्वपूर्ण होगी। अगर existing standards समय पर हासिल किए गए तो 2040 तक exposure burden में संभावित 20% reduction लाखों residents के लिए बेहतर air quality और health outcomes की दिशा में महत्वपूर्ण बदलाव हो सकता है। source – UNEP / Climate and Clean Air Coalition / India Todayजय राष्ट्र न्यूज़

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फ्रांस और स्पेन में जंगल की आग का संकट जारी, राहत अभियान तेज; लाखों लोग प्रभावित

पेरिस/मैड्रिड: फ्रांस और स्पेन में भीषण जंगल की आग (Wildfires) का संकट लगातार गहराता जा रहा है। भीषण गर्मी, तेज़ हवाओं और लंबे सूखे के कारण आग तेजी से फैल रही है। ताज़ा आधिकारिक जानकारी के अनुसार, फ्रांस और स्पेन में लगभग तीन लाख लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है, जबकि हजारों दमकलकर्मी आग पर काबू पाने के लिए लगातार अभियान चला रहे हैं। फ्रांस के बोर्दो (Bordeaux) के आसपास का क्षेत्र सबसे अधिक प्रभावित है, जहां आग शहर की बाहरी सीमा तक पहुंच चुकी है। वहीं स्पेन में मैड्रिड, अविला और वेलेंसिया के आसपास कई बड़े जंगलों में आग अब भी सक्रिय है। कई गांवों और पर्यटन स्थलों को खाली कराया गया है तथा लोगों को अस्थायी राहत शिविरों में रखा गया है। राहत एवं बचाव अभियान तेज फ्रांस और स्पेन की सरकारों ने हजारों दमकलकर्मियों, सैन्य कर्मियों और आपदा राहत टीमों को प्रभावित इलाकों में तैनात किया है। आग बुझाने के लिए हेलीकॉप्टर, जल बमवर्षक विमान और आधुनिक अग्निशमन उपकरणों का उपयोग किया जा रहा है। यूरोपीय संघ के कई देशों ने भी राहत सामग्री, अग्निशमन विमान और विशेषज्ञ दल भेजकर सहायता की है। बढ़ता तापमान बना बड़ी चुनौती मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में तापमान और बढ़ने की चेतावनी दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि तेज़ गर्मी और शुष्क हवाएं आग को नियंत्रित करने के प्रयासों को और कठिन बना रही हैं। कई क्षेत्रों में धुएं के कारण वायु गुणवत्ता भी बेहद खराब हो गई है। जलवायु परिवर्तन पर फिर बहस यूरोपीय नेताओं और पर्यावरण विशेषज्ञों ने इन भीषण जंगल की आग को जलवायु परिवर्तन से जुड़ी चरम मौसम घटनाओं का उदाहरण बताया है। उनका कहना है कि बढ़ते तापमान और लंबे सूखे की अवधि भविष्य में ऐसी घटनाओं की आवृत्ति और गंभीरता दोनों बढ़ा सकती है। निष्कर्ष फ्रांस और स्पेन में जारी जंगल की आग यूरोप के लिए बड़ी मानवीय और पर्यावरणीय चुनौती बन गई है। राहत एवं बचाव अभियान लगातार जारी है, लेकिन मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों के कारण आग पर पूरी तरह नियंत्रण पाने में अभी समय लग सकता है। Source: Reuters | Associated Press | European Civil Protection जय राष्ट्र न्यूज़

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फ्रांस और स्पेन में भीषण जंगल की आग से लाखों लोग प्रभावित, कई देशों ने सहायता की पेशकश

पेरिस/मैड्रिड: यूरोप के दो प्रमुख देशों फ्रांस और स्पेन इन दिनों भीषण जंगल की आग (Wildfires) की चपेट में हैं। लगातार पड़ रही भीषण गर्मी, तेज़ हवाओं और सूखे मौसम के कारण आग तेजी से फैल रही है। दोनों देशों में 2.5 लाख से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है, जबकि कई कस्बों और ग्रामीण इलाकों में आपातकाल जैसी स्थिति बनी हुई है। फ्रांस के दक्षिण-पश्चिमी क्षेत्रों और स्पेन के मध्य भागों में आग ने हजारों हेक्टेयर जंगलों को अपनी चपेट में ले लिया है। कई घर, पर्यटन स्थल और कृषि क्षेत्र भी प्रभावित हुए हैं। अधिकारियों के अनुसार राहत एवं बचाव अभियान युद्धस्तर पर जारी है और आग पर काबू पाने के लिए हजारों दमकलकर्मी लगातार प्रयास कर रहे हैं। यूरोपीय देशों ने बढ़ाया सहयोग स्थिति की गंभीरता को देखते हुए कई यूरोपीय देशों ने सहायता की पेशकश की है। यूरोपीय संघ के सिविल प्रोटेक्शन मैकेनिज्म के तहत क्रोएशिया, पुर्तगाल, चेक गणराज्य, स्लोवाकिया, इटली और ग्रीस सहित कई देशों ने अग्निशमन विमान, हेलीकॉप्टर और विशेषज्ञ दल भेजे हैं। आपातकालीन कदम फ्रांस ने प्रभावित क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर निकासी अभियान चलाया है और सेना की भी मदद ली जा रही है। स्पेन ने भी कई इलाकों में राष्ट्रीय आपातकाल लागू कर अतिरिक्त आपदा राहत बल तैनात किए हैं। स्वास्थ्य विभाग ने धुएँ के कारण लोगों को घरों के भीतर रहने और आवश्यक होने पर ही बाहर निकलने की सलाह दी है। जलवायु परिवर्तन पर फिर बढ़ी चिंता विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार बढ़ती गर्मी, सूखा और चरम मौसम की घटनाएँ जंगल की आग को और गंभीर बना रही हैं। पर्यावरण वैज्ञानिकों ने जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए वैश्विक स्तर पर समन्वित प्रयासों की आवश्यकता पर जोर दिया है। निष्कर्ष फ्रांस और स्पेन में लगी भीषण जंगल की आग ने लाखों लोगों के जीवन को प्रभावित किया है। अंतरराष्ट्रीय सहयोग के बावजूद आग पर पूरी तरह नियंत्रण पाने की चुनौती बनी हुई है। प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं बचाव अभियान लगातार जारी है और प्रशासन लोगों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रहा है। Source: Reuters | Associated Press | European Union Civil Protection जय राष्ट्र न्यूज़

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जलवायु परिवर्तन के दौर में चरम मौसम की घटनाएं: क्या भारत का आपदा प्रबंधन तंत्र पर्याप्त रूप से तैयार है?

संपादकीय | 28 जून।पिछले कुछ वर्षों में भारत ने मौसम के बदलते स्वरूप को करीब से महसूस किया है। कहीं कुछ घंटों की बारिश से शहर जलमग्न हो जाते हैं, कहीं लंबे समय तक चलने वाली हीटवेव जनजीवन को प्रभावित करती है, तो कहीं चक्रवात और भूस्खलन बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचाते हैं। वैज्ञानिक लगातार चेतावनी दे रहे हैं कि जलवायु परिवर्तन के कारण ऐसी चरम मौसमीय घटनाओं की आवृत्ति और तीव्रता दोनों बढ़ सकती हैं। ऐसे में सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न यह है कि क्या भारत का आपदा प्रबंधन तंत्र इन नई चुनौतियों का सामना करने के लिए पर्याप्त रूप से तैयार है? बदलता मौसम, बढ़ती चुनौतियां मानसून का अनिश्चित व्यवहार, अत्यधिक वर्षा, लंबे सूखे, हीटवेव और अचानक आने वाली बाढ़ अब अपवाद नहीं रह गए हैं। जलवायु परिवर्तन के प्रभाव कृषि, स्वास्थ्य, ऊर्जा, परिवहन और शहरी जीवन पर स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहे हैं। इससे केवल आर्थिक नुकसान ही नहीं, बल्कि लाखों लोगों के जीवन और आजीविका पर भी असर पड़ रहा है। भारत ने कई क्षेत्रों में की है प्रगति पिछले एक दशक में भारत ने आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में महत्वपूर्ण सुधार किए हैं। मौसम पूर्वानुमान प्रणाली पहले की तुलना में अधिक सटीक हुई है। राष्ट्रीय और राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF और SDRF) की क्षमता बढ़ाई गई है। चक्रवातों के दौरान समय पर निकासी और बेहतर समन्वय के कारण जनहानि में उल्लेखनीय कमी आई है। यह दर्शाता है कि सही योजना और तकनीक के उपयोग से आपदाओं के प्रभाव को काफी हद तक कम किया जा सकता है। लेकिन चुनौतियां अभी भी बाकी हैं इसके बावजूद कई समस्याएं अब भी सामने हैं। शहरी क्षेत्रों में अनियोजित विकास, जल निकासी व्यवस्था की कमी, पहाड़ी इलाकों में अतिक्रमण, नदियों के बाढ़ क्षेत्र में निर्माण और पर्यावरणीय नियमों की अनदेखी कई बार प्राकृतिक आपदाओं को और गंभीर बना देती है। केवल राहत और बचाव पर ध्यान देना पर्याप्त नहीं है; जोखिम को पहले से कम करना भी उतना ही आवश्यक है। तकनीक और स्थानीय तैयारी की जरूरत आधुनिक तकनीक—जैसे कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), उपग्रह निगरानी, ड्रोन और रियल-टाइम डेटा विश्लेषण—आपदा प्रबंधन को अधिक प्रभावी बना सकती है। साथ ही ग्राम पंचायतों, नगर निकायों और स्थानीय समुदायों को प्रशिक्षण देकर उन्हें आपदा से पहले और बाद की स्थिति से निपटने के लिए सक्षम बनाना भी जरूरी है। जलवायु अनुकूल विकास की दिशा में कदम विशेषज्ञों का मानना है कि अब विकास योजनाओं में जलवायु जोखिम को शामिल करना अनिवार्य हो गया है। मजबूत बुनियादी ढांचा, वर्षा जल प्रबंधन, हरित शहरीकरण, जल संरक्षण और पर्यावरण-अनुकूल निर्माण भविष्य में आपदाओं के प्रभाव को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। जनजागरूकता भी उतनी ही महत्वपूर्ण आपदा प्रबंधन केवल सरकारी एजेंसियों की जिम्मेदारी नहीं है। नागरिकों की जागरूकता, समय पर चेतावनियों का पालन, स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का सम्मान और सामुदायिक सहयोग किसी भी आपदा के दौरान नुकसान को कम करने में अहम भूमिका निभाते हैं। निष्कर्ष भारत ने आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है, लेकिन जलवायु परिवर्तन की बदलती चुनौतियां लगातार नई तैयारियों की मांग कर रही हैं। भविष्य की रणनीति केवल आपदा आने के बाद राहत पहुंचाने तक सीमित नहीं रह सकती। जोखिम कम करना, जलवायु अनुकूल विकास को बढ़ावा देना, आधुनिक तकनीक का प्रभावी उपयोग और स्थानीय स्तर पर मजबूत तैयारी ही भारत को आने वाली प्राकृतिक चुनौतियों के प्रति अधिक सक्षम बना सकती है। अस्वीकरण (Editorial Note):यह एक संपादकीय लेख है। इसमें व्यक्त विचार उपलब्ध तथ्यों, विशेषज्ञों के विश्लेषण और समसामयिक परिस्थितियों पर आधारित हैं। इसका उद्देश्य किसी व्यक्ति, संस्था या सरकार के पक्ष या विपक्ष में मत व्यक्त करना नहीं, बल्कि सार्वजनिक विमर्श को प्रोत्साहित करना है। जय राष्ट्र न्यूज़

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यूरोप में रिकॉर्ड हीटवेव के बीच फ्रांस में चार दिनों में 1,000 मौतों की रिपोर्ट, स्वास्थ्य एजेंसियों ने सतर्क रहने की सलाह दी

पेरिस, 28 जून। यूरोप इन दिनों भीषण हीटवेव की चपेट में है और इसका सबसे अधिक असर फ्रांस सहित कई पश्चिमी एवं दक्षिणी यूरोपीय देशों में देखा जा रहा है। फ्रांसीसी स्वास्थ्य एजेंसियों के प्रारंभिक आकलन के अनुसार, पिछले चार दिनों में अत्यधिक गर्मी से जुड़ी घटनाओं में लगभग 1,000 लोगों की मौत दर्ज की गई है। लगातार बढ़ते तापमान को देखते हुए सरकार और स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से विशेष सावधानी बरतने की अपील की है। कई शहरों में रिकॉर्ड तापमान फ्रांस के कई शहरों में तापमान सामान्य से काफी अधिक दर्ज किया गया। कुछ क्षेत्रों में पारा 42 से 45 डिग्री सेल्सियस के बीच पहुंच गया, जिससे जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ। मौसम विभाग ने कई इलाकों में रेड और ऑरेंज अलर्ट जारी किया है तथा लोगों को दिन के समय घरों से बाहर न निकलने की सलाह दी है। बुजुर्ग और बच्चे सबसे अधिक प्रभावित स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि अत्यधिक गर्मी का सबसे अधिक खतरा बुजुर्गों, छोटे बच्चों, गर्भवती महिलाओं और पहले से गंभीर बीमारियों से जूझ रहे लोगों को है। अस्पतालों में हीट स्ट्रोक, डिहाइड्रेशन और सांस संबंधी समस्याओं वाले मरीजों की संख्या में तेजी से वृद्धि दर्ज की गई है। स्वास्थ्य एजेंसियों ने जारी की एडवाइजरी फ्रांस की सार्वजनिक स्वास्थ्य एजेंसियों ने नागरिकों से पर्याप्त मात्रा में पानी पीने, हल्के कपड़े पहनने, धूप के समय बाहर निकलने से बचने और अकेले रहने वाले बुजुर्गों का विशेष ध्यान रखने की अपील की है। स्थानीय प्रशासन ने कई शहरों में अस्थायी कूलिंग सेंटर भी खोले हैं। अन्य यूरोपीय देश भी प्रभावित स्पेन, इटली, पुर्तगाल, जर्मनी और बेल्जियम सहित कई अन्य यूरोपीय देशों में भी रिकॉर्ड तापमान दर्ज किया जा रहा है। कई स्थानों पर जंगलों में आग लगने की घटनाएं बढ़ी हैं, जबकि बिजली की मांग में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। जलवायु परिवर्तन पर फिर बढ़ी चिंता जलवायु विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार बढ़ रही चरम मौसम की घटनाएं जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को दर्शाती हैं। उनका मानना है कि भविष्य में ऐसी हीटवेव की आवृत्ति और तीव्रता दोनों बढ़ सकती हैं, इसलिए दीर्घकालिक अनुकूलन रणनीतियों पर तेजी से काम करने की आवश्यकता है। सरकार ने निगरानी बढ़ाई फ्रांस सरकार ने स्वास्थ्य सेवाओं, आपातकालीन सहायता और स्थानीय प्रशासन को अलर्ट पर रखा है। प्रभावित क्षेत्रों में मेडिकल टीमों की संख्या बढ़ाई गई है और लगातार स्थिति की समीक्षा की जा रही है। अधिकारियों ने लोगों से केवल आधिकारिक मौसम और स्वास्थ्य संबंधी सलाह का पालन करने की अपील की है। विशेषज्ञों की सलाह डॉक्टरों का कहना है कि तेज धूप के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचना, नियमित रूप से पानी पीना, कैफीन और शराब का सीमित सेवन करना तथा शरीर में गर्मी बढ़ने के शुरुआती लक्षण दिखाई देने पर तुरंत चिकित्सकीय सहायता लेना आवश्यक है। हीटवेव के दौरान थोड़ी-सी लापरवाही भी गंभीर स्वास्थ्य समस्या का कारण बन सकती है। स्रोत:फ्रांस स्वास्थ्य मंत्रालय, यूरोपीय मौसम एजेंसियां मूल रिपोर्ट:फ्रांस सरकार, यूरोपीय स्वास्थ्य एजेंसियों एवं अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसियों के आधार पर। जय राष्ट्र न्यूज़

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यूरोप में हीटवेव का कहर जारी, कई देशों में रेड अलर्ट

पेरिस, 24 जून 2026। यूरोप के कई देशों में भीषण गर्मी का दौर लगातार जारी है। फ्रांस, स्पेन, इटली, पुर्तगाल और अन्य यूरोपीय देशों में तापमान सामान्य से काफी ऊपर पहुंच गया है, जिसके चलते स्थानीय प्रशासन ने रेड अलर्ट जारी कर लोगों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है। मौसम एजेंसियों के अनुसार कई क्षेत्रों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के करीब या उससे अधिक दर्ज किया जा रहा है। अत्यधिक गर्मी के कारण जनजीवन प्रभावित हो रहा है और स्वास्थ्य विभागों ने बुजुर्गों, बच्चों तथा गंभीर बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए विशेष एडवाइजरी जारी की है। फ्रांस और स्पेन के कई शहरों में गर्मी के कारण सार्वजनिक स्थानों पर विशेष राहत केंद्र स्थापित किए गए हैं। वहीं इटली में स्वास्थ्य अधिकारियों ने नागरिकों को दिन के समय अनावश्यक रूप से घर से बाहर न निकलने की सलाह दी है। कई क्षेत्रों में जंगलों में आग लगने की घटनाओं को लेकर भी सतर्कता बढ़ा दी गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार बढ़ते तापमान और जलवायु परिवर्तन के प्रभाव के कारण यूरोप में हीटवेव की घटनाएं अधिक गंभीर होती जा रही हैं। वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि यदि तापमान इसी तरह बढ़ता रहा तो आने वाले वर्षों में ऐसे मौसम संबंधी संकट और अधिक देखने को मिल सकते हैं। ऊर्जा क्षेत्र पर भी इस भीषण गर्मी का असर दिखाई दे रहा है। एयर कंडीशनर और कूलिंग सिस्टम के बढ़ते उपयोग के कारण बिजली की मांग में तेजी आई है। कई देशों में बिजली आपूर्ति व्यवस्था को बनाए रखने के लिए अतिरिक्त कदम उठाए जा रहे हैं। पर्यटन उद्योग पर भी गर्मी का असर पड़ा है। कई लोकप्रिय पर्यटन स्थलों पर पर्यटकों की संख्या में कमी दर्ज की गई है, जबकि कुछ स्थानों पर प्रशासन ने सुरक्षा कारणों से गतिविधियों पर अस्थायी प्रतिबंध लगाए हैं। मौसम विशेषज्ञों का अनुमान है कि आने वाले दिनों में भी यूरोप के कई हिस्सों में गर्मी का असर बना रह सकता है। प्रशासन ने लोगों से पर्याप्त मात्रा में पानी पीने, धूप से बचने और स्वास्थ्य संबंधी निर्देशों का पालन करने की अपील की है। स्रोत:यूरोपीय मौसम एजेंसियां एवं अंतरराष्ट्रीय मौसम रिपोर्ट मूल रिपोर्ट:अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसियों और मौसम विशेषज्ञों से प्राप्त जानकारी के आधार पर जय राष्ट्र न्यूज़

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यूरोप में हीटवेव संकट गहराया, कई देशों में रेड अलर्ट और आपात कदम

जय राष्ट्र न्यूज़ | अंतरराष्ट्रीय डेस्क | 23 जून 2026 मुख्य समाचार यूरोप इस समय वर्ष की सबसे भीषण गर्मी की लहर (Heatwave) का सामना कर रहा है। फ्रांस, स्पेन, इटली, जर्मनी और ब्रिटेन सहित कई देशों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंच गया है। हालात इतने गंभीर हो गए हैं कि कई देशों ने रेड अलर्ट जारी कर दिया है और सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं को हाई अलर्ट पर रखा गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह हीटवेव सामान्य मौसमी घटना नहीं बल्कि हाल के वर्षों में देखी गई सबसे गंभीर गर्मी की लहरों में से एक है। कई क्षेत्रों में रिकॉर्ड तापमान दर्ज किए जा रहे हैं और स्थिति आने वाले दिनों में और गंभीर हो सकती है। फ्रांस सबसे ज्यादा प्रभावित फ्रांस में 50 से अधिक प्रशासनिक क्षेत्रों में रेड अलर्ट लागू किया गया है। कई स्थानों पर तापमान 42 से 43 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने का अनुमान है। हजारों स्कूल बंद किए गए हैं और सार्वजनिक परिवहन सेवाओं पर भी असर पड़ा है। फ्रांसीसी अधिकारियों के अनुसार अत्यधिक गर्मी से बचने के लिए लोग नदियों और झीलों की ओर रुख कर रहे हैं, जिसके चलते कई दुर्घटनाएं भी सामने आई हैं। स्पेन, इटली और ब्रिटेन में भी चेतावनी स्पेन के कई हिस्सों में तापमान 44 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है। वहीं इटली ने रोम और मिलान समेत कई शहरों में उच्चतम स्तर का हीट अलर्ट जारी किया है। ब्रिटेन में भी रिकॉर्ड जून तापमान दर्ज होने की आशंका जताई गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि रात के समय भी तापमान सामान्य से काफी अधिक बना हुआ है, जिससे लोगों को राहत नहीं मिल पा रही है। जनजीवन पर व्यापक असर भीषण गर्मी के कारण कई देशों में स्कूल बंद किए गए हैं, रेल सेवाएं प्रभावित हुई हैं और अस्पतालों में अतिरिक्त तैयारियां की जा रही हैं। कई शहरों में लोगों को घरों के भीतर रहने और दोपहर के समय बाहर न निकलने की सलाह दी गई है। व्यापार और उद्योग क्षेत्र भी प्रभावित हो रहे हैं। कई कंपनियों ने कर्मचारियों के काम करने का समय बदल दिया है ताकि उन्हें तेज गर्मी से बचाया जा सके। जलवायु परिवर्तन पर फिर बहस मौसम वैज्ञानिकों और जलवायु विशेषज्ञों का मानना है कि बार-बार आने वाली ऐसी चरम मौसम घटनाएं वैश्विक तापमान वृद्धि और जलवायु परिवर्तन से जुड़ी हुई हैं। यूरोप को दुनिया का सबसे तेजी से गर्म होने वाला महाद्वीप माना जाता है। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि वैश्विक तापमान वृद्धि पर नियंत्रण नहीं किया गया तो भविष्य में ऐसी हीटवेव और अधिक तीव्र और लंबी हो सकती हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सलाह स्वास्थ्य एजेंसियों ने लोगों को पर्याप्त पानी पीने, धूप में लंबे समय तक रहने से बचने और बुजुर्गों तथा बच्चों का विशेष ध्यान रखने की सलाह दी है। कई देशों में सार्वजनिक स्थानों पर अस्थायी कूलिंग सेंटर भी बनाए गए हैं। स्रोत: Reuters मूल रिपोर्ट:https://www.reuters.com/business/environment/cool-boxes-dawn-starts-europe-inc-adapts-heatwave-2026-06-23/ जय राष्ट्र न्यूज़

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