नई दिल्ली, 6 नवंबर 2026: राजधानी दिल्ली के चावड़ी बाजार इलाके में गुरुवार सुबह एक बड़ा हादसा हो गया। यहां निर्माणाधीन तीन मंजिला इमारत अचानक भरभराकर गिर गई। इस दर्दनाक हादसे में दो मजदूरों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य लोगों के मलबे में दबे होने की आशंका जताई गई। घटना चावड़ी बाजार मेट्रो स्टेशन के पास गली शीश महल इलाके में हुई। सूचना मिलते ही दिल्ली पुलिस, दमकल विभाग और राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) की टीमें मौके पर पहुंचीं। मामले में पुलिस ने तीन ठेकेदारों को गिरफ्तार किया है, जबकि दिल्ली नगर निगम (MCD) ने लापरवाही के आरोप में दो इंजीनियरों को निलंबित कर दिया है।
सुबह करीब 9:50 बजे अचानक ढही इमारत
घटना गुरुवार, 5 नवंबर की सुबह करीब 9:50 बजे हुई। पुरानी दिल्ली के व्यस्त चावड़ी बाजार इलाके में एक तीन मंजिला इमारत में निर्माण कार्य चल रहा था।
इसी दौरान इमारत का एक हिस्सा अचानक गिर गया। देखते ही देखते पूरी जगह मलबे और धूल के गुबार से भर गई।
हादसे के समय इमारत में कई मजदूर काम कर रहे थे। मलबे में लोगों के दबे होने की आशंका के बाद आसपास के लोगों ने तुरंत बचाव कार्य शुरू किया।
घटना की सूचना दिल्ली अग्निशमन सेवा को दी गई, जिसके बाद दमकल की छह इकाइयों सहित अन्य बचाव दल मौके पर पहुंचे।
हादसे में दो मजदूरों की मौत, कई घायल
हादसे में दो मजदूरों की मौत की पुष्टि हुई है। मृतकों की पहचान किशोरी (40 वर्ष) और संजीत (45 वर्ष) के रूप में हुई है।
दोनों दिल्ली के मंडावली इलाके की रेलवे कॉलोनी के निवासी बताए गए हैं।
बचाव दल ने मलबे से दोनों मजदूरों को बाहर निकाला, लेकिन उनकी जान नहीं बचाई जा सकी।
घायलों में 25 वर्षीय सहदेव चौधरी और 37 वर्षीय फिरोज भी शामिल हैं। पुलिस के अनुसार, दोनों को अस्पताल में भर्ती कराया गया और उनकी हालत खतरे से बाहर बताई गई।
कुछ रिपोर्टों में घायलों की संख्या चार से पांच बताई गई है। अधिकारियों ने आशंका जताई कि हादसे के समय इमारत में करीब 10 से 15 मजदूर मौजूद थे।
तंग गलियों के कारण बचाव कार्य में परेशानी
चावड़ी बाजार पुरानी दिल्ली के सबसे व्यस्त और घनी आबादी वाले इलाकों में शामिल है।
यहां की गलियां काफी संकरी हैं, जिसके कारण बड़ी मशीनों और भारी बचाव उपकरणों को घटनास्थल तक पहुंचाने में मुश्किल हुई।
दिल्ली पुलिस, एनडीआरएफ, दमकल विभाग और एमसीडी की टीमों ने संयुक्त रूप से राहत एवं बचाव अभियान चलाया।
बचावकर्मियों ने मलबे को हटाकर फंसे लोगों की तलाश की। पांच नवंबर की देर रात तक उपलब्ध जानकारी के अनुसार, मलबे में और लोगों के दबे होने की आशंका बनी हुई थी।
आसपास की इमारतों को संभावित खतरे से बचाने के लिए प्रशासन ने कुछ स्थानों को खाली भी कराया।
अवैध निर्माण की आशंका, बिना मंजूरी चल रहा था काम
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि जिस इमारत में हादसा हुआ, वहां निर्माण कार्य के लिए आवश्यक अनुमति नहीं ली गई थी।
एमसीडी अधिकारियों के मुताबिक, इमारत लगभग 50 वर्ग मीटर के भूखंड पर बनाई जा रही थी।
तीन मंजिलों का निर्माण हो चुका था और चौथी मंजिल से संबंधित काम चल रहा था।
अधिकारियों ने आशंका जताई कि निर्माण के दौरान पर्याप्त सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया गया।
बताया गया कि हादसे के समय मजदूर छत के नीचे लगे अस्थायी सहारों को हटाने का काम कर रहे थे।
हालांकि इमारत गिरने के वास्तविक कारणों का पता विस्तृत तकनीकी जांच के बाद ही चलेगा।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने दिए जांच के आदेश
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने घटना की जानकारी मिलने के बाद घटनास्थल का दौरा किया और अधिकारियों से राहत एवं बचाव कार्य की जानकारी ली।
मुख्यमंत्री ने हादसे की जांच के आदेश दिए और निर्माण कार्य में लापरवाही बरतने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने के निर्देश दिए।
उन्होंने स्पष्ट किया कि निर्माण संबंधी सुरक्षा नियमों की अनदेखी करने वाले अधिकारियों और जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
दिल्ली नगर निगम ने मामले में संबंधित कनिष्ठ अभियंता (JE) और सहायक अभियंता (AE) को निलंबित कर दिया है।
फरीदाबाद से तीन ठेकेदार गिरफ्तार
दिल्ली पुलिस ने मामले में कार्रवाई करते हुए तीन ठेकेदारों को हरियाणा के फरीदाबाद से गिरफ्तार किया है।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान सिराज, ताजुद्दीन और फुरकान के रूप में हुई है।
पुलिस के अनुसार, तीनों आरोपी पुरानी दिल्ली के अजमेरी गेट इलाके के निवासी हैं और उन्हें फरीदाबाद के सिरोही गांव से पकड़ा गया।
आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 105 के तहत मामला दर्ज किया गया है। यह धारा हत्या की श्रेणी में नहीं आने वाले गैर इरादतन मानव वध से संबंधित है।
पुलिस अब निर्माण कार्य की अनुमति, सुरक्षा मानकों और हादसे के लिए जिम्मेदार परिस्थितियों की जांच कर रही है।
पहले भी अवैध निर्माण की मिली थी जानकारी
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, दिल्ली पुलिस ने जून 2026 में ही संबंधित संपत्ति पर कथित अवैध निर्माण को लेकर एमसीडी को जानकारी दी थी।
इसके बावजूद निर्माण कार्य जारी रहने से संबंधित विभागों की निगरानी और कार्रवाई पर सवाल उठ रहे हैं।
जांच के दौरान यह भी पता लगाया जाएगा कि पहले दी गई सूचना पर क्या कार्रवाई हुई और निर्माण कार्य को रोकने के लिए पर्याप्त कदम क्यों नहीं उठाए गए।
पुराने भवनों की सुरक्षा पर उठे सवाल
चावड़ी बाजार की घटना ने एक बार फिर पुरानी दिल्ली के घनी आबादी वाले इलाकों में भवन निर्माण और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
पुरानी दिल्ली के कई इलाकों में संकरी गलियों के बीच पुराने भवनों के पुनर्निर्माण और अतिरिक्त मंजिलों के निर्माण का काम होता रहता है।
ऐसी जगहों पर निर्माण के दौरान सुरक्षा मानकों की अनदेखी आसपास के निवासियों और मजदूरों के लिए गंभीर खतरा बन सकती है।
विशेषज्ञों के अनुसार, निर्माण कार्य शुरू करने से पहले भवन की संरचनात्मक क्षमता, स्वीकृत नक्शे और निर्माण सामग्री की गुणवत्ता की जांच बेहद जरूरी है।
हादसे की जांच जारी, जिम्मेदार लोगों पर होगी कार्रवाई
चावड़ी बाजार में हुए इस हादसे के बाद प्रशासन ने निर्माण से संबंधित दस्तावेजों और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की जांच शुरू कर दी है।
फिलहाल दो मजदूरों की मौत की पुष्टि हुई है और तीन ठेकेदार गिरफ्तार किए जा चुके हैं।
पुलिस और संबंधित विभाग यह पता लगाने में जुटे हैं कि क्या निर्माण कार्य निर्धारित नियमों के अनुसार किया जा रहा था और सुरक्षा व्यवस्था में किस स्तर पर लापरवाही हुई।
जांच के बाद हादसे के वास्तविक कारणों और जिम्मेदार व्यक्तियों की भूमिका स्पष्ट हो सकेगी।
स्रोत: प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया (PTI), द इंडियन एक्सप्रेस, अमर उजाला, दैनिक जागरण, एनडीटीवी, दिल्ली पुलिस और दिल्ली अग्निशमन सेवा से संबंधित प्रकाशित रिपोर्ट्स।
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