कोलकाता, 8 नवंबर 2026: पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) से जुड़े अपीलीय ट्रिब्यूनल को बड़ा झटका लगा है। कलकत्ता हाई कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश बिश्वजीत बसु ने व्यक्तिगत कारणों का हवाला देते हुए इस्तीफा दे दिया है। वह ट्रिब्यूनल से इस्तीफा देने वाले चौथे न्यायाधीश हैं। उनके फैसले से मतदाता सूची से हटाए गए लोगों की लंबित अपीलों के निपटारे को लेकर चिंता बढ़ गई है।
चौथे न्यायाधीश ने दिया इस्तीफा
न्यायमूर्ति बिश्वजीत बसु ने कलकत्ता हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रवींद्र वी. घुगे को अपना इस्तीफा भेजा।
इससे पहले पूर्व मुख्य न्यायाधीश टी.एस. शिवगणनम और सेवानिवृत्त न्यायाधीश रंजीत कुमार बाग भी ट्रिब्यूनल छोड़ चुके हैं।
न्यायमूर्ति इंद्रजीत चटर्जी ने भी लंबी यात्रा और तकनीकी समस्याओं का हवाला देते हुए इस्तीफा दिया था। हालांकि बाद में चुनाव आयोग के आश्वासन पर उन्होंने काम जारी रखने पर सहमति जताई।
38 लाख से ज्यादा अपीलों का मामला
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर मार्च 2026 में चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल में 19 अपीलीय ट्रिब्यूनल गठित किए थे।
इनका उद्देश्य मतदाता सूची में नाम हटाए जाने या शामिल किए जाने से संबंधित शिकायतों का निपटारा करना था।
चुनाव आयोग द्वारा सितंबर में सुप्रीम कोर्ट को दी गई जानकारी के अनुसार, ट्रिब्यूनल के सामने लगभग 38.31 लाख अपीलें दाखिल हुई थीं।
इनमें नाम हटाए जाने के खिलाफ और मतदाता सूची में नाम शामिल किए जाने पर आपत्ति से जुड़ी अपीलें शामिल थीं।
मुर्शिदाबाद में बढ़ सकती है परेशानी
न्यायमूर्ति बिश्वजीत बसु को मुर्शिदाबाद जिले से संबंधित मामलों की सुनवाई की जिम्मेदारी दी गई थी।
इस जिले में SIR प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाए गए थे।
उनके इस्तीफे के बाद लंबित अपीलों के निपटारे की रफ्तार प्रभावित होने की आशंका है।
चुनाव आयोग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने भी स्वीकार किया कि न्यायाधीशों के इस्तीफों से अपीलों की सुनवाई प्रभावित हो सकती है।
तकनीकी समस्याओं को लेकर भी विवाद
SIR ट्रिब्यूनल के कामकाज में चुनाव आयोग के ऑनलाइन पोर्टल को लेकर भी परेशानियां सामने आई हैं।
कुछ न्यायाधीशों ने आधार आधारित लॉगिन और दस्तावेजों से संबंधित प्रतिबंधों पर आपत्ति जताई थी।
रिपोर्टों के अनुसार, सितंबर के बाद से पोर्टल संबंधी विवाद के कारण कई फैसले औपचारिक रूप से अपलोड नहीं हो सके।
चुनाव आयोग ने तकनीकी व्यवस्था में बदलाव करने का आश्वासन दिया है।
मतदाताओं की अपीलों पर क्या होगा असर?
पश्चिम बंगाल में SIR के दौरान करीब 91 लाख नाम मतदाता सूची से हटाए गए थे। इनमें अलग-अलग श्रेणियों और कारणों से हटाए गए नाम शामिल हैं।
प्रभावित मतदाताओं को अपनी शिकायत दर्ज कराने के लिए अपीलीय ट्रिब्यूनल का विकल्प दिया गया है।
हालांकि लगातार इस्तीफों और बड़ी संख्या में लंबित मामलों के कारण अपीलों के समय पर निपटारे को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
अब चुनाव आयोग और संबंधित न्यायिक प्रशासन के सामने ट्रिब्यूनल की कार्यप्रणाली सुचारु रखने की चुनौती है।
स्रोत: PTI, द टेलीग्राफ, हिंदुस्तान टाइम्स, द इंडियन एक्सप्रेस (7–8 नवंबर 2026)।
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