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कनॉट प्लेस में प्रदर्शनकारियों से मारपीट का आरोप, IYC ने तस्वीरें साझा कर मांगी संदिग्धों की पहचान

नई दिल्ली: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ 10 अक्टूबर को हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान दिल्ली के कनॉट प्लेस और आसपास के इलाकों में कुछ प्रदर्शनकारियों के साथ कथित मारपीट के वीडियो सामने आए हैं। इंडियन यूथ कांग्रेस (IYC) ने सोशल मीडिया पर तस्वीरें और वीडियो साझा करते हुए आरोप लगाया कि युवाओं और महिलाओं को निशाना बनाया गया, जबकि मौके पर पुलिस की मौजूदगी थी। संगठन ने वीडियो में दिखाई दे रहे लोगों की पहचान से जुड़ी जानकारी मांगी है। (द टाइम्स ऑफ इंडिया) वीडियो में प्रदर्शनकारियों के साथ मारपीट के दृश्य मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, सामने आए वीडियो में कुछ पुरुष प्रदर्शनकारियों को धक्का देते, थप्पड़ मारते और लात-घूंसे चलाते दिखाई दे रहे हैं। एक वीडियो में काली, फटी हुई टी-शर्ट पहने एक युवक को कई लोगों से घिरा हुआ देखा गया। वहीं, एक अन्य क्लिप में एक पुरुष और महिला के साथ कथित मारपीट के दृश्य सामने आए। इन वीडियो को लेकर सोशल मीडिया पर सवाल उठाए जा रहे हैं। (द टाइम्स ऑफ इंडिया) महिला को जमीन पर गिराने का आरोप इंडियन यूथ कांग्रेस की ओर से साझा किए गए एक वीडियो में एक महिला को कथित तौर पर धक्का देकर जमीन पर गिराते और उसके साथ मारपीट करते हुए दिखाया गया है। IYC ने सवाल उठाया कि भारी पुलिस तैनाती के बावजूद ऐसी घटना कैसे हुई। हालांकि, घटना की पूरी परिस्थितियों और इसमें शामिल लोगों की भूमिका की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। IYC ने तस्वीरें साझा कर मांगी पहचान इंडियन यूथ कांग्रेस ने सोशल मीडिया पर कुछ संदिग्ध व्यक्तियों की तस्वीरें साझा करते हुए लोगों से उनकी पहचान के संबंध में जानकारी देने की अपील की। संगठन ने कथित हमलावरों के खिलाफ कार्रवाई की मांग भी की। (फ्री प्रेस जर्नल) दिल्ली पुलिस ने शुरू की जांच मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, दिल्ली पुलिस ने कहा कि वह वीडियो में दिखाई दे रहे लोगों और कथित पीड़ितों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, पुलिस ने शिकायत मिलने पर आवश्यक कार्रवाई करने की बात कही थी। (द टाइम्स ऑफ इंडिया) वायरल वीडियो से जुड़े मामले में चार लोग पकड़े गए फ्री प्रेस जर्नल की एक बाद की रिपोर्ट के अनुसार, वायरल वीडियो से जुड़े कथित हमले के मामले में दिल्ली पुलिस ने चार लोगों को पकड़ा था। पुलिस ने घटनास्थल को डीडीयू मार्ग के उस हिस्से से जोड़ा, जो कमला मार्केट पुलिस स्टेशन के अधिकार क्षेत्र में आता है। शुरुआती रिपोर्टों में यह भी कहा गया था कि उस समय कथित पीड़ित या किसी संगठन की ओर से औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं कराई गई थी। इसके बावजूद, वीडियो सामने आने के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की। (फ्री प्रेस जर्नल) सुरक्षा के लिए 35 हजार से अधिक कर्मियों की तैनाती की रिपोर्ट 10 अक्टूबर के विरोध प्रदर्शन को देखते हुए दिल्ली में व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की गई थी। द टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली पुलिस, अर्धसैनिक बलों और उत्तर प्रदेश तथा हरियाणा पुलिस सहित 35,000 से अधिक सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की गई थी। ऐसे में कथित मारपीट के वीडियो सामने आने के बाद यह सवाल उठाया गया कि सुरक्षा बलों की मौजूदगी के बावजूद ऐसी घटनाएं कैसे हुईं। कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया 10 अक्टूबर को विरोध प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारियों को एहतियातन हिरासत में लिए जाने और जंतर-मंतर पर बड़ी सभा को रोकने की खबरें सामने आई थीं। अधिकारियों ने सुरक्षा प्रतिबंधों को कानून-व्यवस्था बनाए रखने के उपाय बताया, जबकि विपक्षी दलों और छात्र संगठनों ने पुलिस कार्रवाई की आलोचना की। (रॉयटर्स) 12 अक्टूबर को भी दिल्ली में प्रदर्शन 12 अक्टूबर को इंडियन यूथ कांग्रेस ने ज्ञानेश कुमार के खिलाफ बाराखंभा रोड से मार्च निकाला। अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, कनॉट प्लेस से मंडी हाउस जाने वाले मार्ग पर छात्र और राजनीतिक कार्यकर्ता बैठकर विरोध प्रदर्शन करते दिखाई दिए। (अमर उजाला) कथित मारपीट के मामले में जांच अहम IYC और कुछ प्रदर्शनकारियों ने इन घटनाओं को सुनियोजित हिंसा बताया है। हालांकि, इस व्यापक आरोप की स्वतंत्र पुष्टि सामने नहीं आई है। उपलब्ध मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, मारपीट से जुड़े वीडियो सामने आए और पुलिस ने मामले की जांच शुरू की। कुछ लोगों को पकड़े जाने की भी खबर है। घटना की वास्तविक परिस्थितियों, कथित पीड़ितों के बयानों और आरोपित व्यक्तियों की भूमिका के संबंध में जांच के निष्कर्ष महत्वपूर्ण होंगे। स्रोत: द टाइम्स ऑफ इंडिया, फ्री प्रेस जर्नल, रॉयटर्स, अमर उजाला जय राष्ट्र न्यूज़

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नेहा बोरा की हिरासत पर उठे सवाल, महिला प्रदर्शनकारियों से पुलिस के व्यवहार का वीडियो वायरल

नई दिल्ली | 12 अक्टूबर: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जारी विरोध प्रदर्शनों के बीच ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा को हिरासत में लेने के तरीके पर सवाल उठे हैं। दिल्ली में अलग-अलग स्थानों पर हुई पुलिस कार्रवाई के वीडियो सामने आने के बाद प्रदर्शनकारियों के साथ पुलिस के व्यवहार और हिरासत की परिस्थितियों को लेकर बहस तेज हो गई है। नेहा बोरा और अन्य कार्यकर्ताओं ने पुलिस पर जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग करने और हिरासत के दौरान असुविधाजनक परिस्थितियों में रखने के आरोप लगाए हैं। हालांकि, इन सभी आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। कई पुलिसकर्मियों ने प्रदर्शनकारियों को बस तक पहुंचाया 11 अक्टूबर को आरके आश्रम और मध्य दिल्ली के कुछ इलाकों में हुए प्रदर्शनों के दौरान पुलिस ने कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया। द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, कुछ प्रदर्शनकारियों को एक साथ कई पुलिसकर्मियों ने पकड़कर बसों तक पहुंचाया। इन घटनाओं के दृश्य सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद पुलिस की कार्रवाई के तरीके और प्रदर्शनकारियों को संभालने में इस्तेमाल किए गए बल की आवश्यकता को लेकर सवाल उठे। नेहा बोरा दोबारा हिरासत में ली गईं नेहा बोरा को 10 अक्टूबर को दिल्ली हाट के पास हुए मार्च के दौरान हिरासत में लिया गया था। अगले दिन विरोध प्रदर्शन के दौरान उन्हें फिर से हिरासत में लिए जाने की खबर सामने आई। वह मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के विरोध में चल रहे प्रदर्शनों की प्रमुख आवाजों में शामिल हैं। हिरासत की परिस्थितियों पर नेहा बोरा के आरोप 11 अक्टूबर को हिरासत में लिए जाने के बाद नेहा बोरा ने आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारियों को पुलिस बसों में बेहद तंग परिस्थितियों में रखा गया था। उन्होंने दावा किया कि बस के भीतर लोगों के लिए सांस लेने तक की पर्याप्त जगह नहीं थी। ये आरोप नेहा बोरा की ओर से लगाए गए हैं। उपलब्ध रिपोर्टों में इन विशिष्ट दावों पर दिल्ली पुलिस का विस्तृत जवाब स्पष्ट नहीं है। महिला पुलिसकर्मियों की भूमिका पर भी सवाल सोशल मीडिया पर प्रसारित दृश्यों में महिला पुलिसकर्मियों को महिला प्रदर्शनकारियों को पकड़कर ले जाते देखा गया। कुछ कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि कार्रवाई के दौरान जरूरत से ज्यादा बल का इस्तेमाल किया गया। वहीं, पुलिस का पक्ष है कि बिना अनुमति आयोजित सभाओं को रोकने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए कार्रवाई की गई। वायरल वीडियो के आधार पर किसी घटना की पूरी परिस्थितियों या बल प्रयोग की आवश्यकता के बारे में अंतिम निष्कर्ष निकालने के लिए स्वतंत्र जांच जरूरी है। पहले की हिरासत में भी प्रक्रिया पर विवाद 4 अक्टूबर को नेहा बोरा की एक अन्य हिरासत के दौरान AISA ने आरोप लगाया था कि उन्हें जिस वाहन में ले जाया गया, उसमें कोई महिला पुलिसकर्मी मौजूद नहीं थी। संगठन ने इसे निर्धारित प्रक्रिया का उल्लंघन बताया था। हालांकि, दिल्ली पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने उस आरोप को निराधार बताया था। इस प्रकार, घटना को लेकर दोनों पक्षों के दावे अलग-अलग रहे हैं। फोन और बैग को लेकर भी सामने आए दावे AISA ने पहले की हिरासत के बाद आरोप लगाया था कि नेहा बोरा का फोन और बैग उन्हें वापस नहीं किया गया। दिल्ली पुलिस ने इस दावे से इनकार किया था। इस मामले में भी आरोप और पुलिस के जवाब को अलग-अलग देखना जरूरी है। उपलब्ध जानकारी के आधार पर सामान को लेकर विवाद का स्वतंत्र निष्कर्ष स्थापित नहीं होता। महिला कंटेंट क्रिएटर ने भी लगाया था आरोप नेहा बोरा की पहले की हिरासत का वीडियो बना रही एक महिला कंटेंट क्रिएटर ने दिल्ली पुलिस के एक सहायक पुलिस आयुक्त (ACP) पर मारपीट और अनुचित तरीके से छूने का आरोप लगाया था। रिपोर्टों के अनुसार, पुलिस ने शिकायत दर्ज होने की पुष्टि की थी। हालांकि, आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और मामले की अंतिम स्थिति स्पष्ट नहीं है। इस घटना ने प्रदर्शन के दौरान महिलाओं की सुरक्षा और पुलिस के व्यवहार को लेकर चिंताएं बढ़ाईं। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस बस को घेरा 10 अक्टूबर को नेहा बोरा को हिरासत में लिए जाने के बाद प्रदर्शनकारियों ने उस पुलिस बस को घेर लिया, जिसमें उन्हें ले जाया जा रहा था। प्रदर्शनकारी उनकी रिहाई की मांग करते हुए नारे लगाने लगे, जिससे इलाके में कुछ समय के लिए तनाव की स्थिति बनी। पुलिस ने अनुमति नहीं मिलने का दिया हवाला दिल्ली पुलिस का कहना है कि प्रस्तावित प्रदर्शन को अनुमति नहीं दी गई थी और प्रतिबंधित या संवेदनशील क्षेत्रों में भीड़ एकत्र होने से रोकना जरूरी था। अधिकारियों ने सुरक्षा तैनाती, बैरिकेडिंग और हिरासत की कार्रवाई को कानून-व्यवस्था बनाए रखने के उपायों के रूप में बताया। ‘गलत नेहा’ को हिरासत में लेने का मामला 11 अक्टूबर को पुलिस कार्रवाई के दौरान पहचान को लेकर भ्रम की घटना भी सामने आई। रिपोर्टों के अनुसार, आरके आश्रम इलाके में पुलिस ने पहले नेहा बोरा जैसी दिखने वाली दूसरी महिला को हिरासत में ले लिया। बाद में पता चला कि नेहा बोरा उस समय कनॉट प्लेस में प्रदर्शन कर रही थीं। उन्हें बाद में विजय चौक के पास हिरासत में लिए जाने की खबर सामने आई। पुलिस की प्रदर्शन-प्रबंधन रणनीति पर बढ़ी निगरानी लगातार हिरासत, बसों में प्रदर्शनकारियों को रखे जाने की परिस्थितियों और महिला प्रदर्शनकारियों के साथ व्यवहार को लेकर उठे सवालों ने दिल्ली पुलिस की कार्रवाई पर ध्यान केंद्रित किया है। दूसरी ओर, पुलिस का कहना है कि प्रदर्शनकारी प्रतिबंधों और बैरिकेडिंग के बावजूद एकत्र होने की कोशिश कर रहे थे, जिसके चलते एहतियाती कार्रवाई आवश्यक थी। निष्पक्ष जांच की मांग कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने सामने आए वीडियो तथा पुलिस के व्यवहार से जुड़े आरोपों की स्वतंत्र जांच की मांग की है। मामले में निष्पक्ष निष्कर्ष तक पहुंचने के लिए संबंधित वीडियो, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और पुलिस का पक्ष महत्वपूर्ण होंगे। जब तक किसी आधिकारिक या स्वतंत्र जांच में निष्कर्ष सामने नहीं आते, हिरासत के दौरान दुर्व्यवहार और जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग से जुड़े दावों को आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए। स्रोत: द इंडियन एक्सप्रेस, टाइम्स ऑफ इंडिया, द प्रिंट, द ट्रिब्यून, इंडिया टुडे जय राष्ट्र न्यूज़

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CJP Protest से पहले गृह मंत्रालय का अलर्ट, राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को दिल्ली पुलिस के साथ समन्वय के निर्देश

नई दिल्ली: 10 अक्टूबर को प्रस्तावित CJP प्रदर्शन से पहले केंद्रीय गृह मंत्रालय ने सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं। मंत्रालय ने आशंका जताई है कि इस प्रदर्शन के “गंभीर कानून-व्यवस्था संबंधी प्रभाव” हो सकते हैं। केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन ने राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के पुलिस प्रमुखों को दिल्ली पुलिस के साथ रियल-टाइम इंटेलिजेंस साझा करने और किसी भी संभावित स्थिति से निपटने के लिए समन्वय मजबूत करने को कहा है। गृह मंत्रालय के अनुसार, प्रदर्शन की अनुमति नहीं मिलने के बावजूद CJP समर्थक अलग-अलग राज्यों से दिल्ली पहुंचने की कोशिश कर सकते हैं। ऐसे में संभावित भीड़, यातायात बाधित होने और सार्वजनिक व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका को देखते हुए सुरक्षा एजेंसियों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं। गृह सचिव ने राज्यों के पुलिस प्रमुखों को लिखा पत्र केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन ने सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के पुलिस प्रमुखों को पत्र भेजकर CJP के प्रदर्शन से संबंधित खुफिया जानकारी तत्काल दिल्ली पुलिस के साथ साझा करने को कहा है। साथ ही, किसी भी संभावित कानून-व्यवस्था की समस्या को रोकने के लिए आपसी समन्वय बढ़ाने पर जोर दिया गया है। गृह मंत्रालय ने जताई कानून-व्यवस्था बिगड़ने की आशंका मंत्रालय ने 10 अक्टूबर को प्रस्तावित प्रदर्शन के सार्वजनिक व्यवस्था पर गंभीर असर पड़ने की आशंका जताई है। उपलब्ध खुफिया सूचनाओं का हवाला देते हुए कहा गया है कि बड़ी संख्या में समर्थक दिल्ली पहुंचने का प्रयास कर सकते हैं। इससे यातायात व्यवस्था प्रभावित होने, बिना अनुमति भीड़ जुटने और सार्वजनिक सुविधाओं पर अतिरिक्त दबाव पड़ने की आशंका जताई गई है। जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति नहीं दिल्ली पुलिस ने CJP को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने की अनुमति देने से इनकार कर दिया है। रिपोर्टों के अनुसार, आयोजकों ने 7 अक्टूबर को प्रदर्शन के लिए अनुरोध किया था, जबकि निर्धारित प्रक्रिया के तहत प्रस्तावित सभा से कम से कम 10 दिन पहले आवेदन देना आवश्यक बताया गया है। पुलिस ने पहले हुए प्रदर्शनों के दौरान कथित तौर पर शर्तों और आश्वासनों का उल्लंघन किए जाने को भी अनुमति नहीं देने के कारणों में शामिल किया है। राज्यों को समर्थकों की आवाजाही पर नजर रखने के निर्देश गृह मंत्रालय ने राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों से उन समूहों की आवाजाही पर नजर रखने को कहा है, जो प्रदर्शन में शामिल होने के लिए दिल्ली रवाना हो सकते हैं। अधिकारियों को आयोजकों, यात्रा योजनाओं, ठहरने की व्यवस्था और प्रदर्शन के लिए जुटाए जा रहे लोगों से संबंधित जानकारी दिल्ली पुलिस के साथ साझा करने के निर्देश दिए गए हैं। रियल-टाइम इंटेलिजेंस साझा करने पर जोर मंत्रालय के निर्देशों में तत्काल खुफिया जानकारी साझा करना प्रमुखता से शामिल है। यदि किसी राज्य से बड़ी संख्या में लोग दिल्ली के लिए रवाना होते हैं या प्रदर्शन से जुड़ी असामान्य गतिविधियां सामने आती हैं, तो इसकी जानकारी तुरंत दिल्ली पुलिस तक पहुंचाने को कहा गया है। इसका उद्देश्य संभावित भीड़ और कानून-व्यवस्था से जुड़ी चुनौतियों के बारे में समय रहते जानकारी जुटाना और संबंधित एजेंसियों के बीच तालमेल बनाए रखना है। निवारक कार्रवाई करने के भी निर्देश गृह मंत्रालय ने राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों से मौजूदा कानूनी प्रावधानों के तहत आवश्यक निवारक कदम उठाने को कहा है। रिपोर्टों के मुताबिक, इसमें नोटिस जारी करना, गतिविधियों की निगरानी करना और परिस्थितियों के अनुसार अन्य कानूनी कार्रवाई करना शामिल हो सकता है। 4 अक्टूबर की बैठक में भी हुई थी चर्चा द इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के अनुसार, 4 अक्टूबर को गृह मंत्रालय की समन्वय बैठक में भी CJP के प्रस्तावित प्रदर्शन और समर्थकों की लामबंदी को लेकर चर्चा हुई थी। रिपोर्ट में राज्यों को नोटिस देने, संभावित हिरासत और संगठन की फंडिंग से जुड़े पहलुओं की जांच जैसे मुद्दों पर चर्चा किए जाने का उल्लेख किया गया है। दिल्ली पुलिस ने तैयार किया व्यापक सुरक्षा प्लान प्रदर्शन को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए व्यापक योजना तैयार की है। रिपोर्टों के अनुसार, इसमें कई स्थानों पर नाकेबंदी, हिरासत केंद्रों की व्यवस्था और विभिन्न जिलों के बीच समन्वय बढ़ाने जैसे कदम शामिल हैं। नई दिल्ली जिले में बैरिकेडिंग और निगरानी व्यवस्था को भी मजबूत किया गया है, ताकि किसी संभावित भीड़ को नियंत्रित किया जा सके और सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखी जा सके। नई दिल्ली में BNSS की धारा 163 लागू नई दिल्ली क्षेत्र में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा लागू किए जाने की भी रिपोर्ट है। इस प्रावधान के तहत सक्षम अधिकारी सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए परिस्थितियों के अनुसार सभाओं, जुलूसों और लोगों की आवाजाही पर प्रतिबंध लगा सकते हैं। CJP की समर्थकों से शांति बनाए रखने की अपील दूसरी ओर, CJP ने अपने समर्थकों के लिए एडवाइजरी जारी कर शांतिपूर्ण व्यवहार करने की अपील की है। संगठन ने बैरिकेड तोड़ने, प्रतिबंधित क्षेत्रों में प्रवेश करने, हिंसा करने और सार्वजनिक या निजी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने से बचने को कहा है। अभिजीत दीपके समेत कई नेताओं को हिरासत में लिया गया 10 अक्टूबर को CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके, सौरव दास और आशुतोष रांका समेत कई नेताओं को दिल्ली पहुंचने के बाद हिरासत में लिए जाने की खबरें सामने आईं। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, प्रदर्शन को रोकने के लिए राजधानी में व्यापक सुरक्षा तैनाती की गई और कई लोगों को हिरासत में लिया गया। सुरक्षा और विरोध प्रदर्शन के अधिकार पर बहस गृह मंत्रालय और दिल्ली पुलिस का पक्ष है कि सुरक्षा संबंधी कदम सार्वजनिक व्यवस्था, यातायात और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उठाए जा रहे हैं। वहीं, CJP और उसके समर्थक इन प्रतिबंधों को शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन के संवैधानिक अधिकार पर अत्यधिक रोक के रूप में देख रहे हैं। यह मामला अब सार्वजनिक सुरक्षा और शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार के बीच संतुलन को लेकर बहस का विषय बन गया है। संविधान का अनुच्छेद 19(1)(b) नागरिकों को शांतिपूर्वक और बिना हथियार एकत्र होने का अधिकार देता है, हालांकि सार्वजनिक व्यवस्था सहित संवैधानिक आधारों पर इस अधिकार पर उचित प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं। स्रोत: द इंडियन एक्सप्रेस / हिंदुस्तान टाइम्स / रॉयटर्स जय राष्ट्र न्यूज़

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CJP प्रदर्शन से पहले दिल्ली में बड़ा सुरक्षा अभियान, अभिजीत दीपके, सौरव दास और आशुतोष रांका हिरासत में

नई दिल्ली: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया के विरोध में 10 अक्टूबर को प्रस्तावित CJP प्रदर्शन से पहले दिल्ली में व्यापक सुरक्षा इंतजाम किए गए। इस दौरान CJP के प्रमुख नेता अभिजीत दीपके, सौरव दास और आशुतोष रांका को दिल्ली पहुंचने के बाद हिरासत में लिए जाने की खबर सामने आई। वहीं, मध्य दिल्ली के कई इलाकों में मेट्रो सेवाओं तक पहुंच, यातायात और मोबाइल इंटरनेट पर भी प्रतिबंध लगाए गए। दिल्ली पहुंचते ही हिरासत में लिए गए CJP नेता रिपोर्टों के मुताबिक, अभिजीत दीपके, सौरव दास और आशुतोष रांका को दिल्ली एयरपोर्ट पर विमान उतरने के बाद हिरासत में लिया गया। CJP नेताओं ने इस कार्रवाई का विरोध करते हुए कहा कि वे शांतिपूर्ण प्रदर्शन में शामिल होने के लिए दिल्ली आए थे। इस कार्रवाई के बाद प्रस्तावित प्रदर्शन और पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चर्चा तेज हो गई। कई अन्य प्रदर्शनकारी भी हिरासत में दिल्ली पुलिस ने CJP समर्थकों के अलावा अन्य प्रदर्शनकारियों को भी हिरासत में लिया। Reuters की रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली में बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया। जंतर-मंतर और आसपास के क्षेत्रों में अनधिकृत जमावड़े को रोकने के लिए सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ाई गई थी। दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन की अनुमति देने से किया इनकार दिल्ली पुलिस ने 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन की अनुमति देने से इनकार कर दिया था। पुलिस के अनुसार, प्रदर्शन के लिए आवेदन निर्धारित 10 दिन की समयसीमा के बजाय केवल तीन दिन पहले दिया गया था। अधिकारियों ने पिछले प्रदर्शनों के दौरान कानून-व्यवस्था से जुड़ी कथित समस्याओं का भी हवाला दिया। इसके बाद प्रदर्शन की अनुमति और पुलिस की कार्रवाई को लेकर सवाल उठे। 45 मेट्रो स्टेशनों के प्रवेश और निकास द्वार बंद सुरक्षा संबंधी निर्देशों के बाद दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) ने 45 मेट्रो स्टेशनों के प्रवेश और निकास द्वार बंद करने की घोषणा की थी। यह प्रतिबंध 9 अक्टूबर रात 9 बजे से 10 अक्टूबर शाम 6 बजे तक लागू रखने की जानकारी दी गई थी। हालांकि, प्रभावित स्टेशनों में से अधिकांश पर इंटरचेंज की सुविधा जारी रहने की बात कही गई। इन प्रतिबंधों का उद्देश्य संवेदनशील इलाकों में लोगों की आवाजाही नियंत्रित करना बताया गया। पहले 57 मेट्रो स्टेशनों पर प्रतिबंध की योजना शुरुआत में 57 मेट्रो स्टेशनों पर प्रतिबंध लगाने की योजना सामने आई थी। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट में इस व्यवस्था को चुनौती दी गई और व्यापक परिवहन प्रतिबंधों को लेकर चिंता जताई गई। रिपोर्टों के अनुसार, बाद में प्रतिबंधित स्टेशनों की संख्या घटाकर 45 कर दी गई। इस घटनाक्रम ने सुरक्षा व्यवस्था और आम यात्रियों की सुविधा के बीच संतुलन का सवाल खड़ा किया। मध्य दिल्ली में मोबाइल इंटरनेट सेवाएं निलंबित प्रदर्शन से पहले जनपथ-कर्तव्य पथ चौराहे के आसपास करीब चार किलोमीटर के दायरे में मोबाइल इंटरनेट सेवाएं 24 घंटे के लिए निलंबित किए जाने की जानकारी सामने आई थी। यह प्रतिबंध 9 अक्टूबर रात 10 बजे से 10 अक्टूबर रात 10 बजे तक लागू रखने की घोषणा की गई थी। अधिकारियों ने इस कदम को सार्वजनिक सुरक्षा और कानून-व्यवस्था से जुड़ी चिंताओं के संदर्भ में बताया। मध्य दिल्ली में यातायात पर भी प्रतिबंध दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने मध्य दिल्ली के करीब 30 स्थानों पर यातायात डायवर्जन और आवाजाही संबंधी प्रतिबंधों की व्यवस्था की थी। धौला कुआं से मंडी हाउस तक कई प्रमुख मार्गों पर अतिरिक्त जांच और बैरिकेडिंग की गई। यात्रियों को संभावित जाम और असुविधा को देखते हुए गैर-जरूरी यात्रा से बचने की सलाह भी दी गई थी। हजारों सुरक्षाकर्मी किए गए तैनात जंतर-मंतर, संसद मार्ग और निर्वाचन आयोग के मुख्यालय के आसपास पुलिस तथा अर्धसैनिक बलों की व्यापक तैनाती की गई। मीडिया रिपोर्टों में सुरक्षा बलों की संख्या करीब 25,000 तक बताई गई। नई दिल्ली जिले को अलग-अलग सुरक्षा क्षेत्रों में बांटकर निगरानी और आवाजाही नियंत्रण की व्यवस्था की गई थी। BNSS की धारा 163 के तहत प्रतिबंध संवेदनशील इलाकों में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा लागू किए जाने की भी खबरें सामने आईं। इस प्रावधान के तहत निर्धारित परिस्थितियों में सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रतिबंधात्मक आदेश जारी किए जा सकते हैं। इन आदेशों का उल्लंघन करने पर लागू कानून के अनुसार कार्रवाई हो सकती है। सुप्रीम कोर्ट ने व्यापक प्रतिबंधों पर जताई चिंता सुप्रीम कोर्ट में मेट्रो और रेल सेवाओं पर व्यापक प्रतिबंध लगाने के मुद्दे पर सुनवाई के दौरान चिंता जताई गई। अदालत ने सुरक्षा संबंधी जरूरतों और आम लोगों की आवाजाही के बीच संतुलन बनाए रखने पर जोर दिया। सुनवाई में यह सवाल भी उठा कि संभावित कानून-व्यवस्था की स्थिति से निपटने के लिए परिवहन सेवाओं को बड़े पैमाने पर प्रभावित करना कितना आवश्यक और आनुपातिक है। CJP की प्रमुख मांग क्या है? CJP मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR प्रक्रिया को लेकर विरोध कर रही है। संगठन का आरोप है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाए गए, जिससे चुनावी निष्पक्षता प्रभावित हो सकती है। वहीं, निर्वाचन आयोग और भाजपा ने इन आरोपों को खारिज किया है। ऐसे में मतदाता सूची में बदलाव और उसकी प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक विवाद जारी है। अभिजीत दीपके ने आंदोलन जारी रखने की बात कही रिपोर्टों के मुताबिक, हिरासत से पहले अभिजीत दीपके ने कहा था कि प्रतिबंधों और गिरफ्तारियों के बावजूद आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने समर्थकों से शांतिपूर्ण तरीके से विरोध प्रदर्शन करने की अपील भी की थी। CJP के नेताओं का रुख है कि मतदाता सूची और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े सवालों को सार्वजनिक रूप से उठाया जाना चाहिए। सुरक्षा कार्रवाई पर नागरिक अधिकारों की बहस तेज CJP प्रदर्शन से पहले हिरासत में लिए जाने, मेट्रो स्टेशनों पर प्रतिबंध, मोबाइल इंटरनेट सेवाओं के निलंबन और व्यापक सुरक्षा तैनाती ने शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार तथा कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी के बीच संतुलन पर बहस तेज कर दी है। प्रशासन इन कदमों को सुरक्षा संबंधी एहतियाती कार्रवाई के रूप में देख रहा है, जबकि CJP और उसके समर्थक इन्हें लोकतांत्रिक असहमति पर जरूरत से ज्यादा प्रतिबंध बता रहे हैं। इस विवाद में प्रतिबंधों की आवश्यकता, उनका दायरा और आम…

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अभिजीत दीपके का सत्ता को संदेश—“सत्ता आपकी, लेकिन सड़क हमारी”; बोले, लोकतंत्र वापस हासिल करेंगे

नई दिल्ली, 10 अक्टूबर 2026: जंतर-मंतर पर प्रस्तावित CJP प्रदर्शन से पहले संगठन के संस्थापक अभिजीत दीपके ने केंद्र सरकार और प्रशासन पर निशाना साधते हुए कहा कि सत्ता भले ही सरकार के पास हो, लेकिन सड़कें भारत के लोगों की हैं। उन्होंने कहा कि जनता लोकतांत्रिक अधिकारों और संस्थाओं की जवाबदेही के लिए अपना संघर्ष जारी रखेगी। यह बयान ऐसे समय आया है, जब दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी है और राजधानी में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं। “सत्ता आपकी, लेकिन सड़क हमारी” अभिजीत दीपके ने कहा कि सरकार के पास सत्ता और संस्थागत ताकत हो सकती है, लेकिन सार्वजनिक स्थानों पर नागरिकों के लोकतांत्रिक अधिकार भी महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने अपने आंदोलन को लोकतांत्रिक संस्थाओं की जवाबदेही और मतदान के अधिकारों से जुड़ा बताया। उनका कहना है कि जनता की आवाज को दबाया नहीं जाना चाहिए। “लोकतंत्र वापस हासिल करेंगे” दीपके ने कहा कि CJP का आंदोलन किसी एक दिन या स्थान तक सीमित नहीं है। उनके अनुसार, यह लोकतंत्र की रक्षा और नागरिक अधिकारों के लिए संघर्ष है। उन्होंने संकेत दिया कि यदि प्रदर्शनकारियों को जंतर-मंतर तक पहुंचने से रोका गया, तो वे उस स्थान पर भी अपना विरोध दर्ज कराएंगे जहां उन्हें रोका जाएगा। 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन का ऐलान CJP ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची की विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया (SIR) को वापस लेने की मांग को लेकर 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन का आह्वान किया था। संगठन ने मतदाता सूची के संशोधन के दौरान कथित अनियमितताओं को लेकर सवाल उठाए हैं। वहीं, निर्वाचन आयोग इस प्रक्रिया को मतदाता सूचियों को दुरुस्त करने की कवायद बताता रहा है। दिल्ली पुलिस ने नहीं दी अनुमति दिल्ली पुलिस ने प्रस्तावित प्रदर्शन को अनुमति नहीं दी। पुलिस के अनुसार, प्रदर्शन की अनुमति के लिए निर्धारित प्रक्रिया और समयसीमा का पालन नहीं किया गया। इसी बीच, नई दिल्ली और मध्य दिल्ली के संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की गई तथा आवाजाही को नियंत्रित करने के लिए कदम उठाए गए। मेट्रो स्टेशनों और परिवहन पर असर प्रदर्शन को देखते हुए मध्य दिल्ली में व्यापक सुरक्षा इंतजाम किए गए। कई मेट्रो स्टेशनों के प्रवेश और निकास द्वार बंद किए जाने की सूचना भी सामने आई। CJP ने इन प्रतिबंधों को प्रदर्शन स्थल तक पहुंचने से लोगों को रोकने की कोशिश बताया, जबकि प्रशासन की ओर से सुरक्षा और कानून-व्यवस्था बनाए रखने को प्राथमिकता दी गई। दीपके बोले—“गिरफ्तार करना है तो करिए” पुलिस कार्रवाई की आशंका के बीच दीपके ने कहा था कि वह गिरफ्तारी से नहीं डरते। उन्होंने समर्थकों से अपने लोकतांत्रिक अधिकारों के लिए आवाज उठाते रहने की अपील की। उनका कहना है कि शांतिपूर्ण विरोध और अपनी मांगें उठाना नागरिकों के लोकतांत्रिक अधिकारों का हिस्सा है। दिल्ली पहुंचते ही हिरासत में लिए गए CJP नेता 10 अक्टूबर को अभिजीत दीपके, सौरव दास और आशुतोष रांका को दिल्ली पहुंचने के बाद कथित तौर पर विमान के अंदर ही हिरासत में ले लिया गया। इस घटना का वीडियो भी सामने आया, जिसमें CJP के नेता पुलिस कार्रवाई का विरोध करते और हिरासत में लिए जाने की बात कहते दिखाई दिए। इस घटनाक्रम ने प्रस्तावित प्रदर्शन को लेकर जारी तनाव को और बढ़ा दिया। हजारों सुरक्षाकर्मियों की तैनाती जंतर-मंतर और मध्य दिल्ली के आसपास पुलिस तथा अन्य सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ाई गई है। प्रशासन का कहना है कि सुरक्षा उपायों का उद्देश्य कानून-व्यवस्था बनाए रखना है। दूसरी ओर, प्रदर्शन आयोजकों ने इन कदमों पर सवाल उठाते हुए इन्हें विरोध प्रदर्शन को रोकने की कोशिश बताया है। SIR को लेकर CJP के आरोप CJP का आरोप है कि विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए। संगठन ने इसे चुनावी पारदर्शिता और मतदान के अधिकार से जुड़ा गंभीर मुद्दा बताया है। हालांकि, इन आरोपों और उनसे जुड़े आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है। निर्वाचन आयोग ने मतदाता सूची संशोधन प्रक्रिया का बचाव किया है। आंदोलन जारी रखने का ऐलान हिरासत और प्रतिबंधों के बावजूद CJP ने अपना आंदोलन जारी रखने की बात कही है। दीपके का कहना है कि यदि उन्हें जंतर-मंतर तक पहुंचने से रोका जाता है, तो भी संगठन लोकतांत्रिक अधिकारों और अपनी मांगों को लेकर विरोध जारी रखने के अन्य तरीके तलाशेगा। लोकतांत्रिक अधिकार बनाम कानून-व्यवस्था की बहस इस घटनाक्रम ने शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार और प्रशासन की कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी के बीच बहस को फिर से सामने ला दिया है। एक ओर CJP अपने प्रदर्शन को लोकतांत्रिक अधिकारों की लड़ाई बता रही है, वहीं पुलिस सुरक्षा व्यवस्था और अनुमति संबंधी नियमों का हवाला दे रही है। आगे की स्थिति इस बात पर निर्भर करेगी कि प्रशासन और प्रदर्शन आयोजक इन परिस्थितियों से कैसे निपटते हैं। स्रोत: Reuters, The Indian Express, Hindustan, Jansatta, NDTV जय राष्ट्र न्यूज़

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जंतर-मंतर पर धारा 163 लागू, अब 10 अक्टूबर के प्रदर्शन का क्या होगा? पुलिस ने साफ किया रुख

नई दिल्ली: 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर CJP, AISA और अन्य छात्र संगठनों के प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले नई दिल्ली जिले में BNSS की धारा 163 लागू है। इसके तहत बिना पूर्व लिखित अनुमति पांच या उससे अधिक लोगों के एकत्र होने, जुलूस निकालने, प्रदर्शन करने, धरना देने और पिकेटिंग पर रोक लगाई जा सकती है। दिल्ली पुलिस का कहना है कि प्रस्तावित प्रदर्शन को अनुमति नहीं दी गई है। ऐसे में बिना अनुमति सभा आयोजित करने पर कानूनी कार्रवाई हो सकती है। 10 अक्टूबर का प्रदर्शन अभी आधिकारिक रूप से मंजूर नहीं CJP के सह-संयोजक सौरव दास ने Parliament Street Police Station में प्रस्तावित प्रदर्शन की औपचारिक सूचना दी थी। हालांकि, उन्होंने कहा था कि उन्होंने अनुमति नहीं मांगी, बल्कि केवल पुलिस को सूचना दी है। दूसरी ओर, दिल्ली पुलिस का कहना है कि धारा 163 लागू होने के कारण केवल सूचना देना पर्याप्त नहीं है और प्रदर्शन के लिए पूर्व अनुमति जरूरी है। Section 163 में क्या-क्या प्रतिबंधित है? धारा 163 के तहत जारी आदेश के अनुसार, बिना लिखित अनुमति निम्न गतिविधियों पर प्रतिबंध लगाया जा सकता है: इन प्रतिबंधों का सटीक दायरा संबंधित आदेश की शर्तों पर निर्भर करता है। प्रदर्शन होने पर पुलिस रोक सकती है जमावड़ा अगर आयोजक 10 अक्टूबर को अनुमति के बिना जंतर-मंतर पहुंचते हैं, तो दिल्ली पुलिस उन्हें वहां एकत्र होने से रोक सकती है। स्थिति के अनुसार पुलिस बैरिकेडिंग, लोगों को हिरासत में लेने और भीड़ को तितर-बितर करने जैसी कार्रवाई कर सकती है। इससे पहले भी प्रदर्शनों के दौरान प्रतिबंधात्मक आदेशों के उल्लंघन को लेकर FIR दर्ज होने की खबरें सामने आई हैं। 40 Metro stations तक बंद करने की तैयारी सुरक्षा व्यवस्था से जुड़ी रिपोर्टों के मुताबिक, 10 अक्टूबर के प्रदर्शन के दौरान जरूरत पड़ने पर 40 मेट्रो स्टेशनों तक अस्थायी रूप से बंद करने पर विचार किया जा सकता है। इसके अलावा, कुछ क्षेत्रों में ऐप आधारित कैब की आवाजाही पर प्रतिबंध, ट्रैफिक डायवर्जन और भीड़ नियंत्रण के उपाय भी लागू किए जा सकते हैं। इन व्यवस्थाओं का वास्तविक क्रियान्वयन प्रशासन के फैसलों पर निर्भर करेगा। 10 detention centres तैयार संभावित बड़े जमावड़े और हिरासत की स्थिति से निपटने के लिए दिल्ली पुलिस ने 10 डिटेंशन सेंटर तैयार किए हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, केंद्रीय सुरक्षा बलों को भी तैनाती के लिए तैयार रखा गया है। पुलिस को आशंका है कि बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी दिल्ली पहुंच सकते हैं। दिल्ली के प्रवेश मार्गों पर निगरानी पुलिस उत्तर प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान से दिल्ली आने वाले मार्गों पर भी नजर रख रही है। बड़े समूहों की आवाजाही को देखते हुए सीमावर्ती इलाकों में बैरिकेडिंग और जांच बढ़ाई जा सकती है। CJP का दावा—प्रदर्शन होकर रहेगा CJP ने कहा है कि वह 10 अक्टूबर के कार्यक्रम को वापस नहीं ले रहा है। अभिजीत दिपके ने दावा किया है कि हिरासत और पुलिस कार्रवाई के बावजूद समर्थक दिल्ली पहुंचेंगे। संगठन ने देशभर में बड़ी संख्या में समर्थकों को हिरासत में लिए जाने का भी दावा किया है, हालांकि इन सभी आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। नेहा बोरा और सौरव दास ने क्या कहा? नेहा बोरा और सौरव दास ने कहा है कि आंदोलन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे, SIR पर रोक और चुनावी सुधारों की मांग को लेकर जारी रहेगा। आयोजकों का कहना है कि जंतर-मंतर निर्धारित प्रदर्शन स्थलों में शामिल है और लोगों को शांतिपूर्ण विरोध करने का अधिकार है। हालांकि, प्रदर्शन के लिए लागू प्रशासनिक आदेशों और अनुमति संबंधी शर्तों का पालन करना भी जरूरी है। मामला Delhi High Court भी पहुंचा Indian Youth Congress ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन संबंधी प्रतिबंधों को चुनौती देते हुए दिल्ली हाई कोर्ट का रुख किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, अदालत ने याचिका पर सुनवाई के लिए सहमति दी है। इस मामले में होने वाली सुनवाई और आदेश प्रदर्शन की अनुमति से जुड़े घटनाक्रम को प्रभावित कर सकते हैं। अगर Court या Police से अनुमति मिली तो? अगर 10 अक्टूबर से पहले अदालत या दिल्ली पुलिस प्रदर्शन को सीमित अनुमति देती है, तो कार्यक्रम निर्धारित शर्तों के साथ आयोजित किया जा सकता है। इन शर्तों में भीड़ की सीमा, निश्चित समय, निर्धारित स्थान और मार्च निकालने पर रोक जैसी व्यवस्थाएं शामिल हो सकती हैं। हालांकि, वास्तविक शर्तें संबंधित आदेश में स्पष्ट होंगी। अनुमति नहीं मिली तो क्या होगा? अगर प्रदर्शन के लिए अनुमति नहीं मिलती और कोई न्यायिक राहत भी नहीं मिलती, तो आयोजकों के लिए जंतर-मंतर पर सभा करना कानूनी जोखिम पैदा कर सकता है। ऐसी स्थिति में पुलिस लोगों को निर्धारित स्थल तक पहुंचने से रोक सकती है, उन्हें हिरासत में ले सकती है और लागू आदेशों के उल्लंघन पर कानूनी कार्रवाई कर सकती है। 10 अक्टूबर पर टिकी नजर फिलहाल स्थिति यह है कि आयोजकों ने प्रदर्शन वापस लेने की घोषणा नहीं की है, लेकिन पुलिस की ओर से अनुमति नहीं मिलने की बात सामने आई है। इसलिए 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर क्या स्थिति बनेगी, यह पुलिस की कार्रवाई, अदालत के संभावित आदेश और आयोजकों के अगले कदम पर निर्भर करेगा। Source – The Indian Express, The New Indian Express, Reuters, The Times of India जय राष्ट्र न्यूज़

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राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के खिलाफ FIR, दिल्ली पुलिस ने पुलिसकर्मियों से कथित मारपीट और ड्यूटी में बाधा का लगाया आरोप

नई दिल्ली: दिल्ली पुलिस ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा के खिलाफ INDIA bloc के विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिसकर्मियों से कथित मारपीट और सरकारी काम में बाधा डालने के आरोप में FIR दर्ज की है। यह कार्रवाई 7 अक्टूबर को हुए उस प्रदर्शन के बाद हुई, जिसमें विपक्ष CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहा था। 7 अक्टूबर के प्रदर्शन से जुड़ा मामला मामला बुधवार को हुए INDIA bloc के विरोध प्रदर्शन से जुड़ा है। Opposition MPs और नेताओं ने Election Commission तथा CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन किया था, जिसके दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच कई जगह धक्का-मुक्की हुई। राहुल-प्रियंका पर क्या आरोप हैं? Delhi Police की FIR में राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा पर पुलिसकर्मियों से कथित मारपीट और उन्हें सरकारी ड्यूटी करने से रोकने के आरोप लगाए गए हैं। Police sources के मुताबिक FIR में assault और obstruction से जुड़े प्रावधान शामिल किए गए हैं। कई FIR दर्ज होने की बात पूरे protest episode से जुड़े मामलों में कम से कम तीन FIRs दर्ज की गई हैं। इनमें राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के अलावा कुछ अन्य प्रदर्शनकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में है। पुलिसकर्मी ने हमले का लगाया आरोप Delhi Police के constable Ankit Kasana ने आरोप लगाया कि protest के दौरान करीब 30-35 लोगों ने उन्हें घेर लिया। उन्होंने दावा किया कि उनकी uniform फाड़ी गई, उन्हें scratch किया गया और bite भी किया गया। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। Viral videos की हो रही जांच Delhi Police protest के कई mobile और social media videos की जांच कर रही है। Police यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि किन लोगों ने कथित तौर पर personnel को obstruct या assault किया और किसकी क्या भूमिका थी। Akashvani Bhavan मामले में भी अलग FIR राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के खिलाफ एक अलग FIR उस घटना को लेकर भी दर्ज की गई है जिसमें वे पुलिस द्वारा Election Commission march रोके जाने के बाद Akashvani Bhavan परिसर में चले गए थे। Delhi Police ने उस मामले में भी unauthorized entry और related allegations की जांच शुरू की है। कांग्रेस ने पुलिस पर लगाए जवाबी आरोप Congress ने Delhi Police के आरोपों को एकतरफा बताया है। पार्टी नेताओं का कहना है कि police ने opposition MPs और workers के साथ force का इस्तेमाल किया और कई महिला नेताओं व कार्यकर्ताओं के साथ कथित बदसलूकी हुई। राहुल गांधी के कथित push पर भी विवाद एक viral video में राहुल गांधी और एक महिला police personnel के बीच interaction को लेकर भी विवाद हुआ। BJP ने इसे police officer को push करने का मामला बताया, जबकि Congress का कहना है कि राहुल गांधी एक महिला worker को बचाने की कोशिश कर रहे थे। CEC विरोध से जुड़ा पूरा मामला यह FIR उस व्यापक आंदोलन के बीच दर्ज हुई है जिसमें INDIA bloc Chief Election Commissioner Gyanesh Kumar के इस्तीफे की मांग कर रहा है। Opposition SIR और voter-list revision को लेकर Election Commission पर सवाल उठा रहा है, जबकि BJP और Election Commission इन आरोपों को खारिज करते रहे हैं। राहुल गांधी बोले—FIR से नहीं रुकेंगे Rahul Gandhi ने संकेत दिया है कि FIRs के बावजूद आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि वह CEC के इस्तीफे की मांग से पीछे नहीं हटेंगे और FIRs को लेकर भी चुनौतीपूर्ण रुख दिखाया। आरोप अभी साबित नहीं राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के खिलाफ दर्ज FIRs में लगाए गए आरोप अभी जांच के स्तर पर हैं। आगे police investigation, video evidence और judicial process के बाद ही किसी criminal liability पर अंतिम निष्कर्ष निकलेगा। Source – The Indian Express, India Today, Reuters, The Times of India जय राष्ट्र न्यूज़

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“मोदी-शाह, अपनी पुलिस को झंडे और डंडे का फर्क समझाओ!” EC मार्च के दौरान कांग्रेस का तीखा हमला

नई दिल्ली: Election Commission के खिलाफ INDIA bloc के मार्च के दौरान तिरंगे को लेकर पुलिस और विपक्षी नेताओं के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। इसी घटनाक्रम के बाद कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह पर हमला बोलते हुए कहा—“मोदी-शाह, अपनी पुलिस को झंडे और डंडे का फर्क समझाओ!” पार्टी ने साथ ही कहा कि विपक्ष को “बल या छल” से नहीं रोका जा सकता। Election Commission की ओर जा रहा था मार्च INDIA bloc के सांसद संसद परिसर से Election Commission headquarters की ओर मार्च कर रहे थे। प्रदर्शनकारी SIR, voter list revision और Chief Election Commissioner ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध दर्ज करा रहे थे। पुलिस ने आगे बढ़ने से रोका Opposition MPs को Nirvachan Sadan पहुंचने से पहले barricades लगाकर रोक दिया गया। इसके बाद कई नेताओं और पुलिसकर्मियों के बीच बहस और धक्का-मुक्की की स्थिति बनी। तिरंगे को लेकर हुई नोकझोंक प्रदर्शन के दौरान राहुल गांधी barricade के पास तिरंगा लेकर नजर आए। इसी दौरान एक पुलिसकर्मी ने डंडे से चोट लगने की आशंका जताते हुए उसे हटाने की बात कही। विपक्षी नेताओं ने जवाब दिया कि यह “डंडा नहीं, झंडा” है। कांग्रेस ने मोदी-शाह पर साधा निशाना इसके बाद कांग्रेस के official social media account से तीखी प्रतिक्रिया सामने आई। पार्टी ने लिखा कि प्रधानमंत्री मोदी और गृह मंत्री अमित शाह को अपनी पुलिस को “झंडे और डंडे का फर्क” समझाना चाहिए। “बल या छल से नहीं रोक पाएंगे” Congress ने अपने पोस्ट में यह भी कहा कि विपक्ष को “बल या छल” से नहीं रोका जा सकता। यह बयान Election Commission के खिलाफ चल रहे विरोध और पुलिस कार्रवाई के संदर्भ में दिया गया। राहुल गांधी ने भी पुलिस से की बहस वायरल वीडियो में राहुल गांधी पुलिस अधिकारी से पूछते दिखे कि अगर उन्हें वहां बैठने की अनुमति नहीं है तो आखिर वे विरोध कहां करें। उन्होंने यह भी कहा कि पुलिस संविधान के प्रति जवाबदेह है और प्रदर्शन का अधिकार लोकतांत्रिक व्यवस्था का हिस्सा है। प्रियंका गांधी भी हुईं मुखर प्रियंका गांधी वाड्रा भी मौके पर पुलिस से बहस करती नजर आईं। Reports में यह लाइन उनके विरोध और कांग्रेस के social media messaging दोनों से जोड़कर सामने आई है। Akashvani Bhavan में हुआ धरना मार्च रोके जाने के बाद राहुल गांधी और प्रियंका गांधी Akashvani Bhavan परिसर में चले गए। वहीं विपक्षी नेताओं ने कई घंटे तक धरना जारी रखा और Election Commission से मिलने की मांग दोहराई। कई विपक्षी नेता हिरासत में लिए गए लंबे विरोध के बाद Delhi Police ने राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और कई अन्य नेताओं को हिरासत में लिया। इसके बाद देर शाम प्रदर्शन खत्म कराया गया। SIR विवाद बना मुख्य मुद्दा विपक्ष का आरोप है कि Special Intensive Revision के जरिए eligible voters के नाम electoral rolls से हटाए जा सकते हैं। Election Commission इन आरोपों को खारिज करता रहा है और प्रक्रिया को voter lists की accuracy सुधारने से जोड़ता है। राजनीतिक बयानबाजी और तेज “झंडे और डंडे” वाली टिप्पणी के बाद कांग्रेस और BJP के बीच बयानबाजी और तेज हो गई है। विपक्ष इसे लोकतांत्रिक विरोध पर रोक लगाने का मामला बता रहा है, जबकि BJP ने Congress पर constitutional institutions को बदनाम करने का आरोप लगाया है। source – Times Now Navbharat / Aaj Tak / Prabhat Khabar / The Daily Jagran जय राष्ट्र न्यूज़

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महिला पत्रकार के आरोपों के बीच ACP विवेक भगत का प्रमोशन विवादों में, Additional DCP का charge रोका गया

नई दिल्ली: जंतर-मंतर प्रदर्शन की कवरेज के दौरान एक महिला पत्रकार द्वारा कथित यौन उत्पीड़न का आरोप लगाए जाने के बीच Delhi Police के ACP विवेक भगत को Additional DCP का current duty charge दिए जाने पर विवाद खड़ा हो गया। आलोचना के बाद भगत ने खुद जांच पूरी होने तक नया charge न लेने का अनुरोध किया, जिसके बाद दिल्ली सरकार ने उनके संबंध में 5 अक्टूबर का आदेश modify करने का फैसला किया। 12 DANIPS अधिकारियों के साथ मिला था नया charge दिल्ली सरकार के Home Department ने 5 अक्टूबर को 12 Selection Grade DANIPS अधिकारियों को Additional DCP पद का current duty charge देने का आदेश जारी किया था। इस सूची में Connaught Place के ACP Vivek Bhagat का नाम भी शामिल था। Regular promotion नहीं था यह आदेश दिल्ली सरकार ने स्पष्ट किया कि यह regular promotion नहीं बल्कि temporary current duty charge था। इस arrangement से कोई अतिरिक्त financial benefit नहीं मिलता और ऐसे अधिकारी regular Additional DCP की सभी statutory powers का इस्तेमाल भी नहीं कर सकते। महिला पत्रकार की शिकायत के बाद विवाद यह आदेश ऐसे समय आया जब 3 अक्टूबर को जंतर-मंतर के पास हुए प्रदर्शन की coverage कर रही महिला पत्रकार ने Vivek Bhagat पर कथित sexual harassment और inappropriate touching का आरोप लगाया था। ये आरोप अभी जांच के स्तर पर हैं और किसी अदालत ने इन्हें साबित नहीं किया है। तीन महिला पत्रकारों ने दी शिकायत मामला केवल एक शिकायत तक सीमित नहीं है। तीन महिला पत्रकारों ने Delhi Police personnel के खिलाफ harassment और manhandling से जुड़ी शिकायतें दी हैं। इन complaints को Crime Branch को आगे की जांच के लिए भेजा गया है। Promotion order पर उठे सवाल Bhagat का नाम Additional DCP charge वाली सूची में सामने आते ही social media, journalists और activists ने सवाल उठाए। आलोचकों ने पूछा कि गंभीर आरोपों और ongoing inquiry के बीच उन्हें higher responsibility कैसे दी जा सकती है। सरकार ने दिया clarification Delhi Government ने कहा कि Additional DCP charge देने की administrative process 25 अगस्त 2026 को शुरू हो गई थी। यह तारीख 3 अक्टूबर की कथित घटना से काफी पहले की है। इसलिए सरकार का कहना है कि इस charge का महिला पत्रकार की complaint से कोई संबंध नहीं था। Vivek Bhagat ने खुद लिखा पत्र विवाद बढ़ने के बाद Vivek Bhagat ने Delhi Police Commissioner को पत्र लिखकर request की कि जब तक महिला पत्रकारों की शिकायत की पूरी जांच नहीं हो जाती, तब तक उन्हें Additional DCP का current duty charge न दिया जाए। सरकार के अनुसार यह अनुरोध उन्होंने “अपने स्वयं के निर्णय” से किया। सरकार ने रोका Additional DCP charge इसके बाद Delhi Government ने 5 अक्टूबर के आदेश को Vivek Bhagat के संबंध में modify करने की घोषणा की। अब Additional DCP का current duty charge बाकी 11 अधिकारियों के लिए लागू रहेगा, जबकि Bhagat का assignment inquiry पूरी होने तक रोक दिया गया है। Crime Branch कर रही है जांच तीन महिला पत्रकारों की complaints को Crime Branch को transfer किया गया है। जांच के दौरान CCTV footage, mobile videos, witnesses और मौके पर मौजूद police personnel की भूमिका की पड़ताल की जा सकती है। FIR को लेकर भी उठ रहे सवाल महिला पत्रकार और उनका समर्थन कर रहे groups FIR दर्ज किए जाने की मांग करते रहे हैं। मामले में पुलिस की ओर से complaint को Crime Branch inquiry में भेजा गया है और आगे की कानूनी कार्रवाई जांच के निष्कर्षों पर निर्भर करेगी। आरोप अभी साबित नहीं यह स्पष्ट करना जरूरी है कि Vivek Bhagat के खिलाफ आरोप अभी जांच के अधीन हैं। जब तक जांच या न्यायिक प्रक्रिया में आरोप स्थापित नहीं हो जाते, उन्हें दोषी नहीं माना जा सकता। Promotion controversy ने बढ़ाई जवाबदेही की बहस पूरे घटनाक्रम ने police accountability और sensitive complaints के दौरान administrative promotions या additional responsibilities को लेकर बहस तेज कर दी है। सरकार द्वारा charge रोकने के बाद अब निगाह Crime Branch की जांच और उसके निष्कर्षों पर रहेगी। source – ThePrint / Hindustan Times / The New Indian Express / The Times of India / Delhi Government जय राष्ट्र न्यूज़

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जंतर-मंतर प्रदर्शन के दौरान महिला पत्रकारों के गंभीर आरोप, मामला Crime Branch को सौंपा गया

नई दिल्ली: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन की कवरेज के दौरान तीन महिला पत्रकारों ने दिल्ली पुलिस के अधिकारियों पर कथित यौन उत्पीड़न और दुर्व्यवहार के गंभीर आरोप लगाए हैं। दिल्ली पुलिस ने शिकायतों को विस्तृत जांच के लिए Crime Branch को भेज दिया है। 6 अक्टूबर तक मामले में FIR दर्ज नहीं होने को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। 3 अक्टूबर के प्रदर्शन से जुड़ा मामला यह मामला 3 अक्टूबर को जंतर-मंतर के पास हुए उस प्रदर्शन से जुड़ा है, जिसमें CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और voter-list revision से जुड़े मुद्दों को लेकर विरोध किया जा रहा था। पुलिस का कहना है कि इलाके में BNSS की धारा 163 के तहत प्रतिबंध लागू थे और प्रदर्शनकारियों को हटाने की कार्रवाई के दौरान विवाद हुआ। तीन महिला पत्रकारों ने लगाए आरोप प्रदर्शन की रिपोर्टिंग कर रहीं तीन महिला पत्रकारों ने दावा किया कि पुलिस कार्रवाई के दौरान उनके साथ कथित तौर पर अनुचित शारीरिक व्यवहार और यौन उत्पीड़न हुआ। ये आरोप अभी जांच के अधीन हैं और किसी अधिकारी की आपराधिक जिम्मेदारी तय नहीं हुई है। ACP विवेक भगत का नाम आया सामने एक महिला पत्रकार की शिकायत में Connaught Place के ACP विवेक भगत का नाम सामने आया। पत्रकार ने आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान उनके साथ कथित रूप से अनुचित व्यवहार किया गया। ACP या अन्य अधिकारियों के खिलाफ लगे आरोपों की जांच Crime Branch कर रही है। Crime Branch को ट्रांसफर हुई शिकायत Delhi Police ने कहा कि तीनों महिला पत्रकारों की शिकायतें Crime Branch को भेज दी गई हैं। जांच टीम CCTV footage, mobile videos, eyewitness statements और मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों की भूमिका की पड़ताल कर रही है। मेडिकल जांच भी कराई गई रिपोर्टों के मुताबिक शिकायत करने वाली महिला पत्रकारों का medical examination भी कराया गया। इसके साथ ही पुलिस ने घटनास्थल के CCTV और सार्वजनिक रूप से उपलब्ध video footage की जांच शुरू की है। 6 अक्टूबर तक FIR दर्ज नहीं मामले में एक बड़ा सवाल यह है कि शिकायत के कई दिन बाद तक FIR दर्ज नहीं हुई थी। महिला पत्रकार और समर्थक लगातार FIR दर्ज करने तथा संबंधित अधिकारियों के खिलाफ निष्पक्ष कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। आरोपी ACP का promotion बना विवाद मामला तब और चर्चा में आया जब ACP विवेक भगत को routine order में Additional DCP का current charge दिया गया। इसके बाद आलोचना तेज हुई। बाद में दिल्ली सरकार ने बताया कि विवेक भगत ने जांच पूरी होने तक नया charge न लेने का अनुरोध किया, जिसके बाद आदेश को modify करने की प्रक्रिया शुरू की गई। Delhi Police ने कुछ आरोपों को किया खारिज दिल्ली पुलिस ने सोशल मीडिया पर महिला प्रदर्शनकारियों के साथ physical assault से जुड़े कुछ दावों को “baseless and misleading” बताया है। पुलिस का कहना है कि महिला प्रदर्शनकारियों को female personnel द्वारा कानून के मुताबिक संभाला गया। हालांकि महिला पत्रकारों की sexual harassment complaints की अलग से Crime Branch जांच जारी है। पत्रकारों और संगठनों ने उठाए सवाल मामले को लेकर पत्रकार संगठनों, छात्र समूहों और राजनीतिक नेताओं ने पारदर्शी जांच की मांग की है। उनका कहना है कि protest coverage के दौरान journalists की सुरक्षा और पुलिस accountability सुनिश्चित की जानी चाहिए। जांच के बाद ही तय होगी जिम्मेदारी फिलहाल सभी आरोप शिकायत और जांच के स्तर पर हैं। Crime Branch की जांच, CCTV footage, medical evidence और प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों के आधार पर ही यह स्पष्ट होगा कि किसी पुलिस अधिकारी के खिलाफ FIR या आगे की कानूनी कार्रवाई बनती है या नहीं। source – The Indian Express / Hindustan Times / Delhi Police जय राष्ट्र न्यूज़

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