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उत्तराखंड, हिमाचल और पूर्वोत्तर राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट, राहत एवं बचाव दल तैनात

देहरादून/शिमला/गुवाहाटी, 4 जुलाई। भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और पूर्वोत्तर भारत के कई हिस्सों में अगले 24 से 48 घंटों के दौरान भारी से बहुत भारी वर्षा की चेतावनी जारी की है। लगातार बारिश की आशंका को देखते हुए संबंधित राज्य सरकारों और जिला प्रशासन ने राहत एवं बचाव दलों को अलर्ट पर रखा है तथा संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी बढ़ा दी गई है। पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन का खतरा उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के पर्वतीय इलाकों में लगातार बारिश के कारण भूस्खलन, चट्टान गिरने और सड़क मार्ग बाधित होने की आशंका जताई गई है। चारधाम यात्रा मार्ग सहित कई संवेदनशील क्षेत्रों में प्रशासन स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है। पूर्वोत्तर राज्यों में भी भारी वर्षा की संभावना असम, अरुणाचल प्रदेश, मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा के कई जिलों में तेज बारिश के साथ गरज-चमक और तेज हवाएं चलने का पूर्वानुमान है। निचले इलाकों में जलभराव और कुछ स्थानों पर बाढ़ जैसी स्थिति बनने की आशंका भी व्यक्त की गई है। राहत एवं बचाव दल अलर्ट पर राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (SDMA), राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) और राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF) की टीमों को संवेदनशील क्षेत्रों में तैनात किया गया है। जिला प्रशासन को किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए आवश्यक संसाधन तैयार रखने के निर्देश दिए गए हैं। लोगों के लिए जारी की गई सलाह मौसम विभाग ने लोगों से अनावश्यक यात्रा से बचने, नदी-नालों और भूस्खलन संभावित क्षेत्रों से दूर रहने तथा स्थानीय प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करने की अपील की है। बिजली गिरने की संभावना वाले क्षेत्रों में खुले स्थानों पर न जाने की भी सलाह दी गई है। किसानों और यात्रियों के लिए विशेष निर्देश किसानों को मौसम के अनुसार कृषि कार्य करने तथा खेतों में जल निकासी की उचित व्यवस्था बनाए रखने की सलाह दी गई है। वहीं यात्रियों से यात्रा शुरू करने से पहले मौसम और सड़क की स्थिति की जानकारी लेने को कहा गया है। प्रशासन लगातार कर रहा निगरानी राज्य सरकारों ने जिला अधिकारियों को 24 घंटे निगरानी रखने और किसी भी आपात स्थिति में तुरंत राहत कार्य शुरू करने के निर्देश दिए हैं। मौसम विभाग द्वारा जारी नए बुलेटिन के अनुसार आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। आगे की राह विशेषज्ञों का कहना है कि मानसून की सक्रियता अगले कुछ दिनों तक बनी रह सकती है। ऐसे में प्रभावित राज्यों के लोगों को केवल आधिकारिक मौसम बुलेटिन पर भरोसा करना चाहिए और किसी भी आपात स्थिति में प्रशासन द्वारा जारी निर्देशों का पालन करना चाहिए। स्रोत:भारतीय मौसम विभाग (IMD), राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (SDMA) एवं संबंधित राज्य प्रशासन। मूल रिपोर्ट:4 जुलाई 2026 को जारी आधिकारिक मौसम बुलेटिन और राज्य सरकारों की तैयारियों के आधार पर। जय राष्ट्र न्यूज़

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मुंबई में ऑरेंज अलर्ट, उत्तराखंड और पूर्वोत्तर के कई हिस्सों में भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी

नई दिल्ली, 3 जुलाई। भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने देश के कई हिस्सों में मानसून के सक्रिय रहने के बीच मुंबई के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। वहीं उत्तराखंड और पूर्वोत्तर भारत के कई राज्यों में अगले कुछ दिनों के दौरान भारी से बहुत भारी वर्षा की संभावना जताई गई है। मौसम विभाग ने लोगों से सतर्क रहने और स्थानीय प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करने की अपील की है। मुंबई में तेज बारिश की संभावना IMD के अनुसार मुंबई और आसपास के क्षेत्रों में अगले 24 घंटों के दौरान तेज बारिश हो सकती है। कुछ स्थानों पर अत्यधिक वर्षा के कारण जलभराव, ट्रैफिक जाम और स्थानीय परिवहन सेवाएं प्रभावित होने की आशंका है। निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है। उत्तराखंड में भूस्खलन का खतरा उत्तराखंड के कई जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है। लगातार वर्षा के कारण पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन, चट्टान गिरने और नदियों-नालों के जलस्तर में वृद्धि की आशंका है। चारधाम यात्रा और अन्य पर्वतीय मार्गों पर यात्रा करने वाले लोगों को मौसम अपडेट देखकर ही यात्रा करने की सलाह दी गई है। पूर्वोत्तर राज्यों में भी अलर्ट असम, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा के कई हिस्सों में भी भारी बारिश का पूर्वानुमान जारी किया गया है। कुछ क्षेत्रों में तेज हवाओं और गरज-चमक के साथ वर्षा होने की संभावना है। प्रशासन अलर्ट मोड पर संभावित खराब मौसम को देखते हुए राज्य सरकारों और स्थानीय प्रशासन ने आपदा प्रबंधन टीमों को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं। राहत एवं बचाव दलों को संवेदनशील क्षेत्रों में तैयार रखा गया है ताकि आवश्यकता पड़ने पर तुरंत सहायता उपलब्ध कराई जा सके। लोगों के लिए महत्वपूर्ण सलाह मौसम विभाग ने लोगों से अपील की है कि वे अनावश्यक यात्रा से बचें, जलभराव वाले इलाकों में जाने से परहेज करें और बिजली चमकने के दौरान खुले स्थानों में न रहें। यात्रा से पहले स्थानीय मौसम बुलेटिन और प्रशासन द्वारा जारी एडवाइजरी अवश्य देखें। किसानों के लिए भी सलाह IMD ने किसानों को स्थानीय मौसम पूर्वानुमान के अनुसार कृषि कार्य करने की सलाह दी है। जिन क्षेत्रों में भारी वर्षा की संभावना है, वहां फसलों की सुरक्षा, जल निकासी और कृषि उपकरणों को सुरक्षित रखने के लिए आवश्यक कदम उठाने की अपील की गई है। आगे की राह मौसम विभाग अगले कुछ दिनों तक मानसून की स्थिति पर लगातार निगरानी रखेगा और आवश्यकता अनुसार नए मौसम बुलेटिन जारी करेगा। विशेषज्ञों का कहना है कि जिन क्षेत्रों में भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है, वहां लोगों को केवल आधिकारिक मौसम संबंधी सूचनाओं पर भरोसा करना चाहिए और किसी भी आपात स्थिति में स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का पालन करना चाहिए। स्रोत:भारतीय मौसम विभाग (IMD) मूल रिपोर्ट:3 जुलाई 2026 को जारी IMD के आधिकारिक मौसम बुलेटिन और वर्षा पूर्वानुमान के आधार पर। जय राष्ट्र न्यूज़

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IMD का कई राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट, मुंबई में ऑरेंज अलर्ट; उत्तराखंड के कई जिलों में भारी से बहुत भारी वर्षा की चेतावनी नई दिल्ली, 2 जुलाई। भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने देश के विभिन्न हिस्सों में मानसून के सक्रिय होने के बीच कई राज्यों के लिए भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। विभाग ने मुंबई और आसपास के क्षेत्रों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है, जबकि उत्तराखंड के कई जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी दी है। लोगों को सतर्क रहने और स्थानीय प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करने की सलाह दी गई है। मुंबई में ऑरेंज अलर्ट IMD के अनुसार मुंबई और आसपास के इलाकों में अगले 24 घंटों के दौरान तेज बारिश के साथ कुछ स्थानों पर अत्यधिक वर्षा हो सकती है। इसके चलते जलभराव, यातायात प्रभावित होने और निचले इलाकों में पानी भरने की आशंका जताई गई है। उत्तराखंड में भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी मौसम विभाग ने उत्तराखंड के कई पर्वतीय जिलों में भारी से बहुत भारी वर्षा की संभावना व्यक्त की है। लगातार बारिश के कारण भूस्खलन, चट्टान गिरने और नदियों-नालों के जलस्तर में वृद्धि का खतरा बना रह सकता है। पर्वतीय क्षेत्रों में यात्रा करने वाले लोगों से विशेष सावधानी बरतने की अपील की गई है। अन्य राज्यों पर भी नजर IMD ने बताया कि मानसून की सक्रियता के कारण पश्चिमी तट, मध्य भारत और उत्तर भारत के कुछ हिस्सों में भी अगले कुछ दिनों तक हल्की से भारी बारिश का दौर जारी रह सकता है। संबंधित राज्यों के मौसम केंद्र समय-समय पर ताजा पूर्वानुमान जारी करेंगे। प्रशासन अलर्ट मोड पर संभावित खराब मौसम को देखते हुए स्थानीय प्रशासन और आपदा प्रबंधन एजेंसियों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं। आवश्यक होने पर राहत एवं बचाव दलों को भी तैयार रखा गया है, ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत कार्रवाई की जा सके। लोगों के लिए सलाह मौसम विभाग ने लोगों से अपील की है कि वे खराब मौसम के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचें, जलभराव वाले क्षेत्रों में जाने से परहेज करें और बिजली चमकने के समय खुले स्थानों या पेड़ों के नीचे खड़े न हों। यात्रा से पहले स्थानीय मौसम अपडेट अवश्य देखें। आगे क्या? IMD आने वाले दिनों में मानसून की स्थिति और वर्षा की तीव्रता के आधार पर नए मौसम बुलेटिन जारी करेगा। विशेषज्ञों का कहना है कि जिन क्षेत्रों में भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है, वहां लोगों को सतर्क रहने और केवल आधिकारिक मौसम संबंधी सूचनाओं पर भरोसा करना चाहिए। स्रोत:भारतीय मौसम विभाग (IMD) मूल रिपोर्ट:2 जुलाई 2026 को जारी IMD के आधिकारिक मौसम बुलेटिन और वर्षा पूर्वानुमान के आधार पर। जय राष्ट्र न्यूज़

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उत्तर भारत में मानसून ने पकड़ी रफ्तार, कई राज्यों में अच्छी बारिश की संभावना; किसानों के लिए IMD की सलाह

नई दिल्ली, 2 जुलाई। भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने कहा है कि मानसून उत्तर भारत के कई हिस्सों में तेजी से आगे बढ़ रहा है। विभाग के अनुसार आने वाले दिनों में कई राज्यों में अच्छी बारिश होने की संभावना है, जिससे खरीफ फसलों की बुवाई और कृषि गतिविधियों को गति मिल सकती है। साथ ही किसानों को सलाह दी गई है कि वे स्थानीय मौसम बुलेटिन और कृषि परामर्श के आधार पर ही खेती से जुड़े निर्णय लें। कई राज्यों में बारिश की संभावना मौसम विभाग के अनुसार उत्तर भारत के विभिन्न क्षेत्रों में अगले कुछ दिनों के दौरान हल्की से मध्यम और कुछ स्थानों पर भारी बारिश हो सकती है। इससे तापमान में गिरावट आने के साथ कृषि और जल संसाधनों को भी लाभ मिलने की उम्मीद है। खरीफ फसलों को मिलेगा फायदा विशेषज्ञों का मानना है कि समय पर होने वाली वर्षा धान, मक्का, बाजरा, सोयाबीन, कपास और दालों जैसी खरीफ फसलों की बुवाई और शुरुआती वृद्धि के लिए महत्वपूर्ण होती है। पर्याप्त बारिश से खेतों में नमी बनी रहेगी और सिंचाई पर निर्भरता कम हो सकती है। किसानों के लिए IMD की सलाह मौसम विभाग ने किसानों से अपील की है कि वे अपने जिले और क्षेत्र के मौसम पूर्वानुमान पर नियमित नजर रखें। बुवाई, उर्वरक का उपयोग, सिंचाई और अन्य कृषि कार्य स्थानीय मौसम बुलेटिन तथा कृषि विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार ही करें, ताकि मौसम में बदलाव से होने वाले नुकसान को कम किया जा सके। जलभराव और बिजली गिरने से रहें सतर्क जहां अच्छी बारिश की संभावना है, वहीं कुछ क्षेत्रों में तेज बारिश, आंधी और बिजली गिरने की घटनाएं भी हो सकती हैं। ऐसे में किसानों और ग्रामीणों को खराब मौसम के दौरान खुले स्थानों पर जाने से बचने और स्थानीय प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करने की सलाह दी गई है। कृषि और जल संसाधनों को मिलेगा लाभ विशेषज्ञों का कहना है कि यदि जुलाई के दौरान मानसून सामान्य गति से सक्रिय रहता है, तो जलाशयों का जलस्तर बेहतर होगा और कृषि उत्पादन को भी सकारात्मक समर्थन मिलेगा। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था और खाद्यान्न उत्पादन पर भी अनुकूल प्रभाव पड़ सकता है। आगे की राह IMD आने वाले दिनों में मानसून की प्रगति और वर्षा की स्थिति पर लगातार अपडेट जारी करेगा। किसानों को सलाह दी गई है कि वे केवल आधिकारिक मौसम बुलेटिन और कृषि विभाग की सलाह पर भरोसा करें तथा मौसम के अनुसार अपनी कृषि योजनाओं में आवश्यक बदलाव करें। स्रोत:भारतीय मौसम विभाग (IMD) मूल रिपोर्ट:2 जुलाई 2026 को जारी मौसम विभाग के आधिकारिक पूर्वानुमान और कृषि संबंधी सलाह के आधार पर। जय राष्ट्र न्यूज़

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IMD का अनुमान: जुलाई में सामान्य से कम बारिश की आशंका, खरीफ फसलों की बुवाई पर पड़ सकता है असर

नई दिल्ली, 1 जुलाई। भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने चेतावनी दी है कि जून में अपेक्षाकृत कमजोर मानसून के बाद जुलाई में भी देश के कई हिस्सों में सामान्य से कम वर्षा होने की संभावना है। मौसम विभाग के इस पूर्वानुमान ने खरीफ फसलों की बुवाई को लेकर किसानों और कृषि विशेषज्ञों की चिंता बढ़ा दी है। जुलाई के लिए क्या है पूर्वानुमान? IMD के अनुसार जुलाई के दौरान कई क्षेत्रों में बारिश सामान्य से कम रह सकती है। हालांकि कुछ हिस्सों में समय-समय पर अच्छी वर्षा होने की संभावना भी जताई गई है। मौसम विभाग ने किसानों को स्थानीय मौसम पूर्वानुमान के आधार पर कृषि कार्यों की योजना बनाने की सलाह दी है। खरीफ बुवाई पर असर की आशंका धान, सोयाबीन, मक्का, कपास, दालें और अन्य खरीफ फसलें समय पर होने वाली मानसूनी वर्षा पर काफी हद तक निर्भर करती हैं। यदि पर्याप्त वर्षा नहीं होती है तो बुवाई में देरी, सिंचाई लागत में वृद्धि और उत्पादन पर असर पड़ सकता है। किसानों के लिए सलाह कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को मौसम की ताजा जानकारी पर लगातार नजर रखने, उपलब्ध सिंचाई संसाधनों का बेहतर उपयोग करने और आवश्यकता के अनुसार कम पानी वाली फसलों या वैकल्पिक कृषि पद्धतियों पर विचार करने की सलाह दी है। कृषि अर्थव्यवस्था पर संभावित प्रभाव भारत की अर्थव्यवस्था में कृषि क्षेत्र की महत्वपूर्ण भूमिका है। कमजोर मानसून का असर केवल फसल उत्पादन तक सीमित नहीं रहता, बल्कि खाद्य आपूर्ति, ग्रामीण आय और कृषि आधारित उद्योगों पर भी पड़ सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि जुलाई में वर्षा सामान्य से कम रहती है तो कुछ क्षेत्रों में कृषि उत्पादन प्रभावित हो सकता है। सरकार और एजेंसियां सतर्क केंद्र और राज्य सरकारें मानसून की स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। कृषि एवं मौसम विभाग किसानों तक समय पर मौसम संबंधी जानकारी पहुंचाने और आवश्यक सलाह जारी करने की प्रक्रिया को मजबूत कर रहे हैं। आगे क्या? मौसम विभाग आने वाले दिनों में मानसून की प्रगति के आधार पर नए पूर्वानुमान जारी करेगा। विशेषज्ञों का कहना है कि जुलाई के शेष दिनों में होने वाली वर्षा खरीफ सीजन की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। किसानों को सलाह दी गई है कि वे केवल आधिकारिक मौसम बुलेटिन के आधार पर ही कृषि संबंधी निर्णय लें। स्रोत:भारतीय मौसम विभाग (IMD) मूल रिपोर्ट:1 जुलाई 2026 को जारी IMD के मानसून पूर्वानुमान और उपलब्ध आधिकारिक जानकारी के आधार पर। जय राष्ट्र न्यूज़

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IMD ने कई राज्यों में भारी बारिश, आंधी और बिजली गिरने का अलर्ट जारी किया, उत्तर-पश्चिम और पूर्वोत्तर भारत में मानसून होगा सक्रिय

नई दिल्ली, 30 जून। भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने देश के कई हिस्सों के लिए मौसम को लेकर ताज़ा चेतावनी जारी की है। विभाग के अनुसार अगले कुछ दिनों में उत्तर-पश्चिम भारत, पूर्वोत्तर भारत और कुछ मध्य एवं पूर्वी क्षेत्रों में मानसून की गतिविधियां तेज़ होंगी। इसके चलते कई स्थानों पर भारी से बहुत भारी बारिश, तेज़ आंधी, गरज-चमक और बिजली गिरने की घटनाएं हो सकती हैं। इन क्षेत्रों में बढ़ेगी मानसूनी गतिविधि IMD के अनुसार उत्तर-पश्चिम भारत में मानसून आगे बढ़ रहा है, जबकि पूर्वोत्तर राज्यों में पहले से सक्रिय मानसून और अधिक मजबूत हो सकता है। इससे कई स्थानों पर लगातार वर्षा दर्ज होने की संभावना है। मौसम विभाग ने स्थानीय पूर्वानुमानों पर नजर बनाए रखने की सलाह दी है। भारी बारिश का अलर्ट विभाग ने बताया कि कुछ क्षेत्रों में कम समय में अत्यधिक वर्षा होने की संभावना है। इससे निचले इलाकों में जलभराव, स्थानीय बाढ़, यातायात प्रभावित होने और पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन जैसी स्थितियां उत्पन्न हो सकती हैं। आंधी और बिजली गिरने की चेतावनी बारिश के साथ कई स्थानों पर तेज़ हवाएं और गरज-चमक की गतिविधियां भी देखने को मिल सकती हैं। IMD ने लोगों से खुले मैदान, ऊंचे पेड़ों और बिजली के खंभों के पास जाने से बचने तथा खराब मौसम के दौरान सुरक्षित स्थानों पर रहने की सलाह दी है। किसानों के लिए महत्वपूर्ण सलाह मौसम विभाग और कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को सलाह दी है कि वे स्थानीय मौसम पूर्वानुमान को ध्यान में रखते हुए बुवाई, सिंचाई और कटाई जैसे कृषि कार्यों की योजना बनाएं। भारी बारिश की आशंका वाले क्षेत्रों में फसलों की सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाने की भी सलाह दी गई है। प्रशासन अलर्ट मोड पर संभावित खराब मौसम को देखते हुए कई राज्यों के आपदा प्रबंधन विभाग और स्थानीय प्रशासन को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं। संवेदनशील क्षेत्रों में राहत एवं बचाव दलों को भी तैयार रखा गया है ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत कार्रवाई की जा सके। लोगों के लिए सावधानियां आगे क्या? IMD अगले कुछ दिनों तक मानसून की प्रगति पर लगातार नजर रखेगा और आवश्यकतानुसार नए मौसम बुलेटिन जारी करेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि सक्रिय मानसून से खरीफ खेती को लाभ मिल सकता है, लेकिन भारी वर्षा वाले क्षेत्रों में सतर्कता बनाए रखना भी उतना ही आवश्यक है। स्रोत:भारतीय मौसम विभाग (IMD) मूल रिपोर्ट:30 जून 2026 को जारी IMD के आधिकारिक मौसम बुलेटिन और ताज़ा पूर्वानुमान के आधार पर। जय राष्ट्र न्यूज़

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कमजोर मानसून के बीच राहत की उम्मीद, IMD ने अगले कुछ दिनों में बारिश बढ़ने का पूर्वानुमान जताया

नई दिल्ली, 30 जून। देश के कई हिस्सों में जून के दौरान सामान्य से कम वर्षा होने के कारण खरीफ फसलों की बुवाई प्रभावित हुई है। इसी बीच भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने राहत भरा पूर्वानुमान जारी करते हुए कहा है कि अगले कुछ दिनों में मानसून की गतिविधियों में तेजी आने की संभावना है। विभाग के अनुसार उत्तर, पूर्व, मध्य और पूर्वोत्तर भारत के कई क्षेत्रों में अच्छी बारिश हो सकती है, जिससे कृषि कार्यों को गति मिलने की उम्मीद है। खरीफ बुवाई पर पड़ा असर बारिश की कमी के कारण कई राज्यों में धान, दालें, तिलहन और अन्य खरीफ फसलों की बुवाई समय पर नहीं हो सकी। खेतों में पर्याप्त नमी नहीं होने से किसानों को बुवाई टालनी पड़ी, जिससे शुरुआती कृषि गतिविधियां प्रभावित हुई हैं। IMD का ताजा पूर्वानुमान मौसम विभाग के अनुसार बंगाल की खाड़ी और अरब सागर से आने वाली नमी के कारण मानसून के फिर से सक्रिय होने के संकेत हैं। इसके प्रभाव से अगले कुछ दिनों में कई क्षेत्रों में मध्यम से भारी वर्षा होने की संभावना है। विभाग ने स्थानीय मौसम बुलेटिन पर नजर रखने और आवश्यक सावधानी बरतने की सलाह भी दी है। किसानों के लिए राहत की उम्मीद यदि पूर्वानुमान के अनुसार पर्याप्त बारिश होती है तो खरीफ फसलों की बुवाई में तेजी आने की संभावना है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि जुलाई का पहला पखवाड़ा खरीफ सीजन के लिए बेहद महत्वपूर्ण होता है और इसी अवधि में अच्छी वर्षा होने पर शुरुआती नुकसान की काफी हद तक भरपाई की जा सकती है। कृषि विभाग की तैयारी राज्य सरकारें और कृषि विभाग किसानों को मौसम आधारित सलाह, गुणवत्तापूर्ण बीज और तकनीकी सहायता उपलब्ध कराने की दिशा में काम कर रहे हैं। किसानों से स्थानीय कृषि अधिकारियों और मौसम विभाग की सलाह के अनुसार खेती की योजना बनाने का आग्रह किया गया है। जलभराव और बिजली गिरने का भी खतरा जहां एक ओर अच्छी बारिश से खेती को लाभ मिलेगा, वहीं IMD ने कुछ क्षेत्रों में भारी वर्षा, आंधी और बिजली गिरने की संभावना भी जताई है। ऐसे इलाकों में लोगों को सतर्क रहने और प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करने की सलाह दी गई है। विशेषज्ञों की राय मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि मानसून की सक्रियता बढ़ने से कृषि क्षेत्र को राहत मिल सकती है, लेकिन वर्षा का वितरण भी उतना ही महत्वपूर्ण होगा। यदि बारिश संतुलित और समय पर होती है तो खरीफ उत्पादन पर सकारात्मक असर पड़ सकता है। आगे की स्थिति मौसम विभाग अगले कुछ दिनों तक मानसून की प्रगति पर लगातार नजर रखेगा और समय-समय पर नए पूर्वानुमान जारी करेगा। किसानों और आम लोगों को सलाह दी गई है कि वे केवल आधिकारिक मौसम बुलेटिन पर भरोसा करें और मौसम की बदलती परिस्थितियों के अनुसार आवश्यक सावधानी बरतें। स्रोत:भारतीय मौसम विभाग (IMD), कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय मूल रिपोर्ट:30 जून 2026 को जारी IMD के मौसम पूर्वानुमान और कृषि विभाग की उपलब्ध जानकारी के आधार पर। जय राष्ट्र न्यूज़

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जलवायु परिवर्तन के दौर में चरम मौसम की घटनाएं: क्या भारत का आपदा प्रबंधन तंत्र पर्याप्त रूप से तैयार है?

संपादकीय | 28 जून।पिछले कुछ वर्षों में भारत ने मौसम के बदलते स्वरूप को करीब से महसूस किया है। कहीं कुछ घंटों की बारिश से शहर जलमग्न हो जाते हैं, कहीं लंबे समय तक चलने वाली हीटवेव जनजीवन को प्रभावित करती है, तो कहीं चक्रवात और भूस्खलन बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचाते हैं। वैज्ञानिक लगातार चेतावनी दे रहे हैं कि जलवायु परिवर्तन के कारण ऐसी चरम मौसमीय घटनाओं की आवृत्ति और तीव्रता दोनों बढ़ सकती हैं। ऐसे में सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न यह है कि क्या भारत का आपदा प्रबंधन तंत्र इन नई चुनौतियों का सामना करने के लिए पर्याप्त रूप से तैयार है? बदलता मौसम, बढ़ती चुनौतियां मानसून का अनिश्चित व्यवहार, अत्यधिक वर्षा, लंबे सूखे, हीटवेव और अचानक आने वाली बाढ़ अब अपवाद नहीं रह गए हैं। जलवायु परिवर्तन के प्रभाव कृषि, स्वास्थ्य, ऊर्जा, परिवहन और शहरी जीवन पर स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहे हैं। इससे केवल आर्थिक नुकसान ही नहीं, बल्कि लाखों लोगों के जीवन और आजीविका पर भी असर पड़ रहा है। भारत ने कई क्षेत्रों में की है प्रगति पिछले एक दशक में भारत ने आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में महत्वपूर्ण सुधार किए हैं। मौसम पूर्वानुमान प्रणाली पहले की तुलना में अधिक सटीक हुई है। राष्ट्रीय और राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF और SDRF) की क्षमता बढ़ाई गई है। चक्रवातों के दौरान समय पर निकासी और बेहतर समन्वय के कारण जनहानि में उल्लेखनीय कमी आई है। यह दर्शाता है कि सही योजना और तकनीक के उपयोग से आपदाओं के प्रभाव को काफी हद तक कम किया जा सकता है। लेकिन चुनौतियां अभी भी बाकी हैं इसके बावजूद कई समस्याएं अब भी सामने हैं। शहरी क्षेत्रों में अनियोजित विकास, जल निकासी व्यवस्था की कमी, पहाड़ी इलाकों में अतिक्रमण, नदियों के बाढ़ क्षेत्र में निर्माण और पर्यावरणीय नियमों की अनदेखी कई बार प्राकृतिक आपदाओं को और गंभीर बना देती है। केवल राहत और बचाव पर ध्यान देना पर्याप्त नहीं है; जोखिम को पहले से कम करना भी उतना ही आवश्यक है। तकनीक और स्थानीय तैयारी की जरूरत आधुनिक तकनीक—जैसे कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), उपग्रह निगरानी, ड्रोन और रियल-टाइम डेटा विश्लेषण—आपदा प्रबंधन को अधिक प्रभावी बना सकती है। साथ ही ग्राम पंचायतों, नगर निकायों और स्थानीय समुदायों को प्रशिक्षण देकर उन्हें आपदा से पहले और बाद की स्थिति से निपटने के लिए सक्षम बनाना भी जरूरी है। जलवायु अनुकूल विकास की दिशा में कदम विशेषज्ञों का मानना है कि अब विकास योजनाओं में जलवायु जोखिम को शामिल करना अनिवार्य हो गया है। मजबूत बुनियादी ढांचा, वर्षा जल प्रबंधन, हरित शहरीकरण, जल संरक्षण और पर्यावरण-अनुकूल निर्माण भविष्य में आपदाओं के प्रभाव को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। जनजागरूकता भी उतनी ही महत्वपूर्ण आपदा प्रबंधन केवल सरकारी एजेंसियों की जिम्मेदारी नहीं है। नागरिकों की जागरूकता, समय पर चेतावनियों का पालन, स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का सम्मान और सामुदायिक सहयोग किसी भी आपदा के दौरान नुकसान को कम करने में अहम भूमिका निभाते हैं। निष्कर्ष भारत ने आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है, लेकिन जलवायु परिवर्तन की बदलती चुनौतियां लगातार नई तैयारियों की मांग कर रही हैं। भविष्य की रणनीति केवल आपदा आने के बाद राहत पहुंचाने तक सीमित नहीं रह सकती। जोखिम कम करना, जलवायु अनुकूल विकास को बढ़ावा देना, आधुनिक तकनीक का प्रभावी उपयोग और स्थानीय स्तर पर मजबूत तैयारी ही भारत को आने वाली प्राकृतिक चुनौतियों के प्रति अधिक सक्षम बना सकती है। अस्वीकरण (Editorial Note):यह एक संपादकीय लेख है। इसमें व्यक्त विचार उपलब्ध तथ्यों, विशेषज्ञों के विश्लेषण और समसामयिक परिस्थितियों पर आधारित हैं। इसका उद्देश्य किसी व्यक्ति, संस्था या सरकार के पक्ष या विपक्ष में मत व्यक्त करना नहीं, बल्कि सार्वजनिक विमर्श को प्रोत्साहित करना है। जय राष्ट्र न्यूज़

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महाराष्ट्र के कई हिस्सों में लगातार बारिश से जलभराव, प्रशासन ने राहत दल तैनात किए

मुंबई, 28 जून। महाराष्ट्र में दक्षिण-पश्चिम मानसून की सक्रियता लगातार बनी हुई है। राज्य के कई जिलों में पिछले 24 घंटों से जारी भारी बारिश के कारण सड़कों, निचले इलाकों और कुछ रिहायशी क्षेत्रों में जलभराव की स्थिति उत्पन्न हो गई है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने कई जिलों के लिए भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। इसके बाद राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन ने राहत एवं बचाव दलों को अलर्ट मोड पर तैनात कर दिया है। मुंबई, ठाणे और कोंकण क्षेत्र में सबसे अधिक असर मुंबई, ठाणे, पालघर, रायगढ़, रत्नागिरी और सिंधुदुर्ग सहित कोंकण क्षेत्र के कई हिस्सों में लगातार बारिश दर्ज की गई। कई सड़कों पर जलभराव होने से यातायात प्रभावित हुआ, जबकि कुछ निचले इलाकों में पानी घरों तक पहुंच गया। स्थानीय प्रशासन ने पंपिंग स्टेशनों के माध्यम से पानी निकालने का काम तेज कर दिया है। NDRF और SDRF की टीमें तैनात संभावित बाढ़ और आपात स्थिति से निपटने के लिए राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) और राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF) की टीमों को संवेदनशील जिलों में तैनात किया गया है। जिला प्रशासन लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है और जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त राहत दल भेजने की तैयारी कर रहा है। IMD ने जारी किया अलर्ट भारत मौसम विज्ञान विभाग ने अगले 48 घंटों तक महाराष्ट्र के कई हिस्सों में भारी से बहुत भारी वर्षा की संभावना जताई है। मौसम विभाग ने मछुआरों को समुद्र में न जाने की सलाह दी है तथा पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन की आशंका को देखते हुए विशेष सतर्कता बरतने की अपील की है। यातायात और जनजीवन प्रभावित भारी बारिश के कारण कई स्थानों पर सड़क यातायात धीमा हो गया है। कुछ इलाकों में पेड़ गिरने और बिजली आपूर्ति बाधित होने की भी सूचना मिली है। रेलवे और स्थानीय प्रशासन ने स्थिति पर निगरानी बढ़ा दी है ताकि यात्रियों को किसी प्रकार की असुविधा न हो। नागरिकों के लिए प्रशासन की सलाह प्रशासन ने लोगों से अनावश्यक यात्रा से बचने, जलभराव वाले क्षेत्रों में प्रवेश न करने और मौसम विभाग द्वारा जारी चेतावनियों का पालन करने की अपील की है। आपात स्थिति में स्थानीय नियंत्रण कक्ष और हेल्पलाइन से संपर्क करने के निर्देश भी जारी किए गए हैं। किसानों के लिए राहत और चुनौती दोनों विशेषज्ञों का कहना है कि मानसून की यह बारिश खरीफ फसलों के लिए लाभदायक हो सकती है, लेकिन अत्यधिक वर्षा वाले क्षेत्रों में जलभराव और फसल नुकसान का खतरा भी बना हुआ है। कृषि विभाग ने किसानों को खेतों से अतिरिक्त पानी की निकासी सुनिश्चित करने की सलाह दी है। प्रशासन लगातार कर रहा निगरानी राज्य सरकार ने सभी जिला अधिकारियों को 24 घंटे निगरानी रखने और किसी भी आपात स्थिति में तुरंत कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। राहत एवं बचाव दलों को आवश्यक उपकरणों और संसाधनों के साथ तैयार रखा गया है ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से प्रभावी ढंग से निपटा जा सके। स्रोत:भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD), महाराष्ट्र राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण मूल रिपोर्ट:IMD की आधिकारिक मौसम बुलेटिन तथा राज्य सरकार और राष्ट्रीय समाचार एजेंसियों के आधार पर। जय राष्ट्र न्यूज़

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IMD ने अगले 5 दिनों के लिए पूर्वोत्तर भारत, पश्चिम बंगाल और सिक्किम में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया

नई दिल्ली, 28 जून। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने देश के पूर्वोत्तर राज्यों, उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम के लिए अगले पांच दिनों तक भारी से बहुत भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। मौसम विभाग के अनुसार सक्रिय मानसून और अनुकूल मौसमी परिस्थितियों के कारण इन क्षेत्रों में तेज बारिश, गरज-चमक और कुछ स्थानों पर अत्यधिक वर्षा होने की संभावना है। प्रशासन को सतर्क रहने और लोगों को आवश्यक सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। कई राज्यों में भारी बारिश की चेतावनी IMD के पूर्वानुमान के अनुसार असम, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा, उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम में अगले पांच दिनों तक भारी से बहुत भारी वर्षा हो सकती है। कुछ स्थानों पर अत्यधिक वर्षा दर्ज होने की भी संभावना जताई गई है। भूस्खलन और जलभराव का खतरा लगातार हो रही बारिश को देखते हुए पर्वतीय क्षेत्रों में भूस्खलन और निचले इलाकों में जलभराव की आशंका बढ़ गई है। सिक्किम और उत्तर बंगाल के संवेदनशील इलाकों में प्रशासन को विशेष निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं। लोगों को अनावश्यक यात्रा से बचने की सलाह दी गई है। प्रशासन को अलर्ट रहने के निर्देश राज्य सरकारों और जिला प्रशासन को आपदा प्रबंधन की तैयारियां पूरी रखने के लिए कहा गया है। राहत एवं बचाव दलों को संवेदनशील क्षेत्रों में तैनात किया गया है तथा नदी-नालों के जलस्तर पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। मानसून की गतिविधियां हुईं तेज मौसम विभाग के अनुसार दक्षिण-पश्चिम मानसून लगातार सक्रिय बना हुआ है और आने वाले दिनों में देश के अन्य हिस्सों में भी आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियां अनुकूल हैं। इसके प्रभाव से पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में वर्षा की तीव्रता बनी रह सकती है। यात्रियों और स्थानीय लोगों के लिए सलाह IMD ने लोगों से अपील की है कि खराब मौसम के दौरान नदी-नालों के किनारे जाने से बचें। पहाड़ी मार्गों पर यात्रा करने वाले लोग मौसम की ताज़ा जानकारी लेकर ही सफर करें। तेज बारिश और बिजली गिरने की आशंका के दौरान सुरक्षित स्थानों पर रहने की सलाह दी गई है। कृषि पर भी रहेगा असर विशेषज्ञों के अनुसार यह बारिश खरीफ फसलों के लिए लाभदायक हो सकती है, लेकिन अत्यधिक वर्षा वाले क्षेत्रों में जलभराव से फसलों को नुकसान पहुंचने की आशंका भी बनी हुई है। किसानों को स्थानीय कृषि विभाग और मौसम विभाग की सलाह के अनुसार खेतों में जल निकासी की व्यवस्था करने की सलाह दी गई है। मौसम विभाग ने सतर्क रहने की अपील की IMD ने कहा है कि मौसम की स्थिति लगातार बदल रही है और आवश्यकता पड़ने पर नए अलर्ट जारी किए जाएंगे। नागरिकों से अपील की गई है कि वे केवल आधिकारिक मौसम बुलेटिन पर भरोसा करें और स्थानीय प्रशासन द्वारा जारी निर्देशों का पालन करें। स्रोत:भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) मूल रिपोर्ट:IMD की आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति एवं राष्ट्रीय समाचार एजेंसियों के आधार पर। जय राष्ट्र न्यूज़

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