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INDIA bloc की आज virtual meeting, CEC Gyanesh Kumar और SIR विवाद पर बनेगी आगे की रणनीति

नई दिल्ली, 22 अक्टूबर 2026: INDIA bloc के नेताओं की आज शाम virtual meeting होने जा रही है, जिसकी अध्यक्षता Congress president Mallikarjun Kharge करेंगे। बैठक में Chief Election Commissioner Gyanesh Kumar, Special Intensive Revision (SIR) से जुड़ी कथित irregularities और 1 नवंबर को दिल्ली में होने वाली बड़ी rally की रणनीति पर चर्चा होगी। CEC Gyanesh Kumar के इस्तीफे की मांग Opposition alliance पिछले कई हफ्तों से CEC Gyanesh Kumar के खिलाफ campaign चला रहा है। INDIA bloc का आरोप है कि SIR process में voter deletions और electoral transparency को लेकर गंभीर सवाल हैं। Bloc के नेता meeting में CEC के इस्तीफे की मांग को आगे कैसे बढ़ाया जाए, इस पर roadmap तय करेंगे। 1 नवंबर की rally पर focus आज की meeting में 1 November Delhi rally की preparations भी review की जाएंगी। Opposition इस rally को अपने “vote chori” campaign का अगला बड़ा चरण मान रहा है और इसे national-level mobilisation में बदलने की तैयारी कर रहा है। SIR पर क्या है विपक्ष की आपत्ति? INDIA bloc का आरोप है कि SIR के दौरान बड़ी संख्या में voters के नाम electoral rolls से हटे और process में पर्याप्त transparency नहीं रही। हालांकि Election Commission इन आरोपों को खारिज करता रहा है और उसका कहना है कि revision का उद्देश्य voter rolls को accurate और updated बनाना है। Jantar Mantar और recent protests भी agenda में Reports के मुताबिक हाल के Jantar Mantar protests और opposition नेताओं तथा activists के खिलाफ police action भी meeting में चर्चा का विषय बन सकते हैं। Bloc आगे protests को coordinated तरीके से चलाने की रणनीति पर विचार करेगा। Delimitation और women’s reservation भी background में Meeting ऐसे समय हो रही है जब delimitation और Women’s Reservation Act को लेकर भी political discussion तेज है। Opposition इन मुद्दों को electoral reforms और representation की wider debate से जोड़कर देख रहा है। Meeting के बाद हो सकती है बड़ी घोषणा आज की virtual meeting के बाद INDIA bloc protest calendar, 1 November rally और Election Commission के खिलाफ आगे की political/legal strategy पर कोई joint announcement कर सकता है। Source – PTI, The Tribune, The New Indian Express, Times of India जय राष्ट्र न्यूज़

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राहुल गांधी का बड़ा दावा—“मोदी सरकार के 200 अधिकारी हमारे संपर्क में”, ED-CBI और विदेश मंत्रालय के अफसरों का भी किया जिक्र

नई दिल्ली: कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष Rahul Gandhi ने दावा किया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार के करीब 200 अधिकारी विपक्ष के संपर्क में हैं और अंदरूनी जानकारी साझा कर रहे हैं। राहुल गांधी के मुताबिक, इन अधिकारियों में प्रवर्तन निदेशालय (ED), केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) और विदेश मंत्रालय से जुड़े लोग भी शामिल हैं। उन्होंने यह बयान 12 अक्टूबर को दिल्ली में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान दिया था। राहुल गांधी ने क्या कहा? Rahul Gandhi ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को संबोधित करते हुए कहा कि केंद्र सरकार के करीब 200 अधिकारी विपक्ष के संपर्क में हैं और लगातार जानकारी दे रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि उन्हें अधिकारियों की ओर से नियमित रूप से संदेश और इनपुट मिल रहे हैं। हालांकि, राहुल गांधी के इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि के लिए अब तक कोई सार्वजनिक साक्ष्य सामने नहीं आया है। अधिकारियों की पहचान भी सार्वजनिक नहीं की गई है। ED, CBI और विदेश मंत्रालय के अधिकारियों का जिक्र राहुल गांधी ने कहा कि उनके संपर्क में रहने वाले अधिकारियों में Enforcement Directorate (ED), Central Bureau of Investigation (CBI) और Ministry of External Affairs (MEA) से जुड़े लोग शामिल हैं। उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि इन अधिकारियों ने किस तरह की जानकारी साझा की है या वे किन विभागों में कार्यरत हैं। इसलिए इस दावे को फिलहाल कांग्रेस नेता के बयान के रूप में ही देखा जा रहा है। CEC और ‘वोट चोरी’ विवाद के बीच आया बयान यह बयान उस प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान आया, जिसमें राहुल गांधी ने INDIA गठबंधन के साथ मुख्य चुनाव आयुक्त Gyanesh Kumar और मतदाता सूची के पुनरीक्षण से जुड़े मुद्दों पर सुप्रीम कोर्ट जाने की बात कही थी। इस दौरान उन्होंने केंद्र सरकार पर विरोध प्रदर्शनों को दबाने का आरोप भी लगाया और दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था तथा प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई पर सवाल उठाए। सरकार की ओर से दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं राहुल गांधी के 200 अधिकारियों के संपर्क में होने संबंधी दावे को लेकर फिलहाल कोई सार्वजनिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है। अधिकारियों के नाम, साझा की गई जानकारी और संपर्क की प्रकृति का विवरण भी सामने नहीं आया है। ऐसे में इस बयान को एक राजनीतिक दावा मानना जरूरी है, जिसकी पुष्टि के लिए स्वतंत्र साक्ष्य और संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया अहम होगी। स्रोत – The Indian Express, Hindustan Times जय राष्ट्र न्यूज़

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CJP को लेकर कांग्रेस के रुख में बदलाव के संकेत? राहुल गांधी की हाई टी के लिए अभिजीत दिपके को मिला न्योता

नई दिल्ली, 15 अक्टूबर 2026: कांग्रेस नेता राहुल गांधी की ओर से आयोजित हाई टी बैठक के लिए कॉकroach जनता पार्टी (CJP) के नेता अभिजीत दिपके को आमंत्रित किए जाने से राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। इसे कांग्रेस और CJP के बीच संवाद बढ़ने के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, इस निमंत्रण से दोनों के बीच किसी औपचारिक राजनीतिक गठबंधन या रणनीतिक समझौते की पुष्टि नहीं होती। द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, यह बैठक विपक्षी गठबंधन INDIA के नेताओं के साथ-साथ नागरिक समाज और छात्र संगठनों से जुड़े लोगों को एक मंच पर लाने के उद्देश्य से आयोजित की गई थी। राहुल गांधी की हाई टी बैठक का क्या था उद्देश्य? यह बैठक ऐसे समय में हुई है, जब मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार और मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision—SIR) को लेकर विरोध प्रदर्शन जारी हैं। इन मुद्दों पर अलग-अलग छात्र संगठनों, नागरिक समूहों और विपक्षी दलों ने अपनी आपत्तियां उठाई हैं। ऐसे में हाई टी बैठक को विभिन्न समूहों के बीच संवाद और संभावित समन्वय बढ़ाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। कांग्रेस और CJP के बीच पहले क्यों थी दूरी? मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, कांग्रेस के भीतर CJP को लेकर पहले कुछ आरक्षण थे। पार्टी के एक वर्ग में इस संगठन के आम आदमी पार्टी (AAP) से संभावित संबंधों को लेकर भी सवाल उठाए गए थे। हालांकि, हाल के विरोध प्रदर्शनों और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों पर राजनीतिक गतिविधियां तेज होने के बीच कांग्रेस की ओर से अभिजीत दिपके तक पहुंचने की खबर सामने आई है। यह घटनाक्रम दोनों पक्षों के बीच संवाद की संभावना दिखाता है, लेकिन कांग्रेस की आधिकारिक नीति में व्यापक बदलाव हुआ है या नहीं, यह स्पष्ट होने के लिए पार्टी की ओर से औपचारिक बयान जरूरी होगा। CJP के प्रदर्शनों पर राहुल गांधी का रुख राहुल गांधी हाल के दिनों में विरोध प्रदर्शन कर रहे युवा नेताओं के खिलाफ पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठा चुके हैं। उन्होंने प्रदर्शनकारियों के साथ कथित दुर्व्यवहार के आरोपों को भी उठाया है। विपक्षी दलों और विभिन्न नागरिक समूहों की ओर से चुनावी प्रक्रिया, मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण और विरोध प्रदर्शन के अधिकार जैसे मुद्दों पर आवाज उठाई जा रही है। इन घटनाक्रमों के बीच CJP के नेता को आमंत्रित किया जाना विपक्षी नेताओं और स्वतंत्र रूप से सक्रिय युवा समूहों के बीच संपर्क बढ़ाने की कोशिश का हिस्सा हो सकता है। अभिजीत दिपके ने क्या संकेत दिया? रिपोर्टों के अनुसार, अभिजीत दिपके ने कांग्रेस की ओर से संपर्क किए जाने पर आभार जताया। साथ ही, CJP की स्वतंत्र पहचान बनाए रखने पर भी जोर दिया। CJP खुद को किसी राजनीतिक दल के विस्तार के बजाय एक स्वतंत्र दबाव समूह के रूप में पेश करना चाहता है। ऐसे में कांग्रेस के साथ संवाद बढ़ने के बावजूद संगठन की स्वतंत्र राजनीतिक पहचान और भविष्य की रणनीति महत्वपूर्ण बनी रहेगी। विपक्षी एकजुटता के लिए क्यों अहम है यह घटनाक्रम? CJP ने हाल के मुख्य निर्वाचन आयुक्त और SIR विरोधी प्रदर्शनों के दौरान युवा कार्यकर्ताओं की भागीदारी के जरिए सार्वजनिक चर्चा में जगह बनाई है। कांग्रेस की ओर से दिपके को आमंत्रित किया जाना इस संभावना की ओर संकेत करता है कि विपक्षी दल पारंपरिक राजनीतिक संगठनों के साथ-साथ छात्र समूहों और नागरिक समाज की आवाजों से भी संवाद बढ़ाना चाहते हैं। हालांकि, किसी बैठक का निमंत्रण अपने आप में साझा राजनीतिक कार्यक्रम, चुनावी गठबंधन या भविष्य के संयुक्त आंदोलन का प्रमाण नहीं है। इसके वास्तविक राजनीतिक महत्व का आकलन आगे होने वाली बातचीत और दोनों पक्षों के आधिकारिक रुख से किया जा सकेगा। आगे क्या होगा? फिलहाल, कांग्रेस और CJP के बीच संपर्क बढ़ने की खबर ने राजनीतिक बहस को नया विषय दिया है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या यह संवाद केवल एक बैठक तक सीमित रहता है या दोनों पक्ष चुनावी प्रक्रिया और नागरिक अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर आगे भी साथ काम करते हैं। Source – The Indian Express, Jansatta और The Times of India जय राष्ट्र न्यूज़

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Odisha में INDIA bloc का 12 घंटे का statewide bandh, mining law, textbook errors और SIR को लेकर विरोध

भुवनेश्वर: ओडिशा में 8 अक्टूबर 2026 को INDIA bloc की विभिन्न पार्टियों ने 12 घंटे का statewide bandh बुलाया। बंद सुबह 6 बजे से शाम 6 बजे तक रखा गया है। प्रदर्शनकारी MMDR Amendment Act, school textbooks में कथित errors और electoral rolls की Special Intensive Revision यानी SIR को लेकर विरोध कर रहे हैं। बंद का असर कई जिलों में transport, shops, petrol pumps और educational institutions पर दिखाई दिया। सुबह 6 बजे से शुरू हुआ bandh Odisha bandh सुबह 6 बजे शुरू हुआ और शाम 6 बजे तक चलना है। Congress, CPI, CPI(M), CPI(ML) Liberation, Forward Bloc, NCP (Sharad Pawar), Samajwadi Party, RJD और JMM समेत INDIA bloc की कई पार्टियां इसमें शामिल हैं। कई जिलों में सड़कें जाम Bhubaneswar, Cuttack, Bargarh, Bhadrak, Balasore, Rayagada, Kendrapara, Bolangir, Berhampur और Sambalpur समेत कई जगह demonstrations और road blockades किए गए। कुछ स्थानों पर protesters ने buses, trucks, taxis और autorickshaws को रोकने की कोशिश की और tyres भी जलाए गए। Public transport पर पड़ा असर Bandh का सबसे ज्यादा असर public transport पर देखने को मिला। कई जगह buses और autorickshaws कम चले, जिससे commuters, students और office-goers को परेशानी हुई। कुछ routes पर Ama Bus services भी प्रभावित हुईं। Shops और educational institutions भी बंद राज्य के कुछ हिस्सों में shops, business establishments, petrol pumps और educational institutions बंद रहे। हालांकि बंद का असर हर जिले में एक जैसा नहीं रहा। Essential services को रखा गया बाहर Hospitals, ambulances, fire services, pharmacies और milk supply जैसी essential services को bandh से बाहर रखा गया। Opposition parties ने कहा कि emergency services बाधित नहीं की जाएंगी। Mining law को वापस लेने की मांग INDIA bloc की प्रमुख मांगों में MMDR Amendment Act, 2026 को वापस लेना शामिल है। Opposition का आरोप है कि नया mining framework mineral-rich states के taxation rights को सीमित करता है। केंद्र इस कानून को uniform national framework से जोड़ता है। CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग Bandh में Chief Election Commissioner Gyanesh Kumar के इस्तीफे की मांग भी उठाई गई। Opposition SIR को लेकर voter-list irregularities के आरोप लगा रहा है। Election Commission इन आरोपों को खारिज करता रहा है और revision को electoral rolls की accuracy सुधारने की प्रक्रिया बताता है। Textbook errors भी बड़ा मुद्दा Odisha school textbooks में बड़ी संख्या में errors को लेकर भी विपक्ष ने सरकार को घेरा है। एक जांच panel ने करीब 1,700 से अधिक mistakes के पीछे weak academic scrutiny और unrealistic timelines जैसे कारण बताए थे। Nityananda Gond के इस्तीफे की मांग Opposition ने Odisha School and Mass Education Minister Nityananda Gond के इस्तीफे की भी मांग की है। यह मांग school textbooks में कथित गलतियों को लेकर उठाई गई है। BJD ने bandh से बनाई दूरी Biju Janata Dal ने इस bandh में हिस्सा नहीं लिया। BJD ने कहा कि वह BJP और Congress दोनों से समान दूरी बनाए रखेगी, हालांकि पार्टी mining law और textbook errors जैसे मुद्दों पर अलग से सरकार का विरोध कर चुकी है। पुलिस ने बढ़ाई सुरक्षा Odisha सरकार ने district collectors और police अधिकारियों को preventive measures लेने और law and order बनाए रखने के निर्देश दिए हैं। Bhubaneswar-Cuttack Police Commissioner ने कहा कि protesters को constitutional rights के दायरे में प्रदर्शन करने की अनुमति है, लेकिन हिंसा या जबरन disruption बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। बंद का राजनीतिक असर यह bandh केवल state-level issues तक सीमित नहीं है। Mining rights, education और electoral roll revision जैसे मुद्दों को जोड़कर INDIA bloc ने इसे broader political protest के रूप में पेश किया है, जिससे Odisha की राजनीति में BJP सरकार और विपक्ष के बीच टकराव और तेज हो गया है। Source – India Today, The Economic Times, The Indian Express जय राष्ट्र न्यूज़

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INDIA Bloc की बैठक में विपक्षी एकता पर जोर, राहुल गांधी और ममता बनर्जी समेत नेताओं ने आगे की रणनीति पर चर्चा की

नई दिल्ली: SIR और चुनाव आयोग को लेकर जारी राजनीतिक विवाद के बीच INDIA Bloc के शीर्ष नेताओं ने दिल्ली में बैठक कर विपक्षी एकता और आगे की संयुक्त रणनीति पर चर्चा की। बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, सोनिया गांधी, राहुल गांधी और ममता बनर्जी समेत कई विपक्षी दलों के नेता शामिल हुए। बैठक का मुख्य फोकस चुनावी प्रक्रिया, मतदाता सूची में बदलाव और संयुक्त विरोध कार्यक्रमों पर रहा। दिल्ली में हुई विपक्षी दलों की अहम बैठक INDIA Bloc की इस बैठक में कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, CPI, CPI(M), NCP(SP), शिवसेना (UBT), RJD, JMM और अन्य विपक्षी दलों के प्रतिनिधि शामिल हुए। बैठक का उद्देश्य चुनाव आयोग और SIR से जुड़े विवाद पर एक साझा राजनीतिक रणनीति तैयार करना और विपक्षी दलों के बीच समन्वय मजबूत करना था। राहुल गांधी और ममता बनर्जी रहे प्रमुख चेहरों में कांग्रेस नेता राहुल गांधी और तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी बैठक के प्रमुख नेताओं में शामिल रहे। दोनों नेताओं ने मतदाता सूची और चुनावी प्रक्रिया को लेकर अपनी-अपनी चिंतियां सामने रखीं और विपक्षी दलों के संयुक्त अभियान की जरूरत पर जोर दिया। विपक्ष द्वारा लगाए गए आरोपों को चुनाव आयोग और सत्तारूढ़ पक्ष ने स्वीकार नहीं किया है। SIR बना बैठक का मुख्य मुद्दा Special Intensive Revision यानी SIR को लेकर विपक्ष लगातार सवाल उठा रहा है। INDIA Bloc के नेताओं ने आरोप लगाया है कि मतदाता सूची में नाम हटाने और जोड़ने की प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी रही है। विपक्ष ने pre-SIR electoral rolls बहाल करने और बाहर हुए मतदाताओं के लिए प्रभावी appeal mechanism की मांग भी रखी। Paper Ballot की मांग फिर उठी बैठक में विपक्षी दलों ने EVM की जगह paper ballot से चुनाव कराने की मांग भी दोहराई। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि बैठक में शामिल दलों के बीच इस मुद्दे पर व्यापक सहमति बनी। विपक्ष इसे चुनावी पारदर्शिता से जोड़ रहा है, जबकि भारत में EVM की वैधता और उपयोग पर चुनाव आयोग का अलग आधिकारिक रुख रहा है। 2 अक्टूबर से देशव्यापी विरोध की रणनीति बैठक के बाद INDIA Bloc ने 2 अक्टूबर से देशव्यापी विरोध अभियान शुरू करने की घोषणा की। विपक्ष ने अलग-अलग राज्यों और जिलों में प्रदर्शन, जनसभाएं और मार्च आयोजित करने की योजना बनाई है। इन कार्यक्रमों का केंद्र SIR और चुनाव आयोग से जुड़े मुद्दे रहेंगे। चुनाव आयोग तक मार्च की तैयारी INDIA Bloc के सांसदों ने दिल्ली में चुनाव आयोग मुख्यालय तक मार्च करने की भी योजना बनाई है। इस कार्यक्रम के जरिए विपक्ष अपने सवाल और मांगें सीधे चुनाव आयोग के सामने रखने की तैयारी कर रहा है। विपक्ष की रणनीति आने वाले दिनों में SIR विवाद को राष्ट्रीय राजनीतिक बहस के केंद्र में बनाए रखने की है। CEC ज्ञानेश कुमार को लेकर भी चर्चा बैठक में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर विपक्षी दलों ने कड़ा रुख अपनाया। कुछ विपक्षी नेताओं ने उनके इस्तीफे की मांग की, जबकि इससे पहले उनके खिलाफ संसदीय कार्रवाई की संभावना पर भी चर्चा हुई थी। हालांकि कुछ रिपोर्टों के अनुसार विपक्ष इस विकल्प को फिलहाल टाल भी सकता है। विपक्षी एकता दिखाने की कोशिश बैठक को INDIA Bloc के लिए राजनीतिक एकता दिखाने के प्रयास के रूप में भी देखा जा रहा है। अलग-अलग राज्यों में विपक्षी दलों के बीच सीट बंटवारे और स्थानीय राजनीतिक मतभेद मौजूद हैं, लेकिन SIR और चुनाव आयोग से जुड़े मुद्दे पर कई दल साझा मंच पर दिखाई दिए। आगे भी जारी रह सकता है संयुक्त अभियान INDIA Bloc ने संकेत दिया है कि उसका अभियान केवल एक दिन के प्रदर्शन तक सीमित नहीं रहेगा। आने वाले हफ्तों में विपक्ष अलग-अलग राज्यों में कार्यक्रम आयोजित कर सकता है और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों को राजनीतिक एजेंडे में प्रमुखता से उठाने की तैयारी कर रहा है। source – The Indian Express / Hindustan Times / Times of India / India Today जय राष्ट्र न्यूज़

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CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ फिर Removal Notice की तैयारी, SIR विवाद पर विपक्ष का विरोध तेज

नई दिल्ली: Special Intensive Revision (SIR) को लेकर जारी विवाद के बीच विपक्षी दल मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने के लिए संसद में नया Removal Notice लाने की तैयारी कर रहे हैं। कांग्रेस सूत्रों के मुताबिक प्रस्ताव का मसौदा कानूनी विशेषज्ञों की मदद से तैयार किया जा रहा है और विपक्ष इसे लोकसभा तथा राज्यसभा दोनों में उठाने की योजना बना रहा है। इस मुद्दे पर INDIA bloc के नेताओं के बीच भी चर्चा तेज हो गई है। संसद में नया Notice लाने की तैयारी विपक्षी दलों की योजना मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने के लिए संसद के दोनों सदनों में प्रस्ताव का नोटिस देने की है। कांग्रेस से जुड़े सूत्रों के अनुसार प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है और इसे संयुक्त विपक्ष की ओर से पेश करने पर बातचीत चल रही है। हालांकि अभी संसद में नया नोटिस औपचारिक रूप से स्वीकार या विचार के लिए सूचीबद्ध नहीं हुआ है। SIR विवाद के बाद बढ़ा राजनीतिक दबाव यह पूरा विवाद मतदाता सूचियों के Special Intensive Revision को लेकर बढ़ा है। विपक्ष का आरोप है कि SIR की प्रक्रिया में मतदाताओं के नाम हटाने और verification के नियमों को लेकर गंभीर सवाल हैं। कांग्रेस, TMC, समाजवादी पार्टी, AAP, DMK और वाम दलों समेत कई विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने या उनके इस्तीफे की मांग की है। आयोग के भीतर आपत्तियों की रिपोर्ट से बढ़ा विवाद हालिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले करीब 10 महीनों में मतदाता सूची, Form-6, डेटा प्रबंधन और SIR से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर कई औपचारिक आपत्तियां या टिप्पणियां दर्ज की थीं। इन रिपोर्ट्स के सामने आने के बाद विपक्ष ने सवाल उठाया कि क्या चुनाव आयोग में महत्वपूर्ण फैसले पूरी सहमति से लिए जा रहे थे। Election Commission ने मतभेद के दावे को किया खारिज चुनाव आयोग ने आंतरिक मतभेद को लेकर उठ रहे सवालों पर कहा है कि किसी multi-member constitutional body में अलग-अलग मुद्दों पर चर्चा और आपत्तियां सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा हैं। आयोग के मुताबिक SIR समेत अंतिम निर्णय सर्वसम्मति से लिए गए और दोनों चुनाव आयुक्त अंतिम फैसलों का हिस्सा थे। Voter Roll Software की समीक्षा भी शुरू विवाद के बीच चुनाव आयोग ने मतदाता सूची से जुड़े अपने software system की समीक्षा शुरू करने का फैसला किया है। आयोग ने तकनीकी और कानूनी प्रक्रियाओं की समीक्षा तथा discrepancies वाले मतदाताओं तक स्थानीय अधिकारियों की पहुंच बेहतर करने जैसे कदमों पर काम शुरू किया है। Congress ने देशभर में तेज किए प्रदर्शन ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कांग्रेस ने कई राज्यों और जिलों में विरोध प्रदर्शन किए हैं। प्रदर्शनकारियों ने SIR प्रक्रिया और चुनाव आयोग की निष्पक्षता को लेकर सवाल उठाते हुए CEC को हटाने की मांग की। कुछ स्थानों पर पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प तथा हिरासत की घटनाएं भी सामने आई हैं। BJP और NDA ने किया Election Commission का बचाव BJP और NDA के कई नेताओं ने चुनाव आयोग के पक्ष में बयान दिए हैं। उनका कहना है कि आयोग के भीतर अलग-अलग विचार सामने आना संस्थागत प्रक्रिया का हिस्सा है और अंतिम फैसले सर्वसम्मति से लिए गए हैं। NDA नेताओं ने विपक्ष के आरोपों को खारिज किया है। CEC को हटाने की प्रक्रिया आसान नहीं संविधान के अनुच्छेद 324(5) के तहत मुख्य चुनाव आयुक्त को उसी तरह और उन्हीं आधारों पर हटाया जा सकता है, जैसे सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश को हटाया जाता है। इस प्रक्रिया के लिए संसद के दोनों सदनों में निर्धारित विशेष बहुमत से प्रस्ताव पारित होना जरूरी है। इसके बाद ही राष्ट्रपति द्वारा पद से हटाने की कार्रवाई की जा सकती है। विपक्षी बैठक पर नजर INDIA bloc के नेताओं की बैठक में SIR, चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और CEC को हटाने के प्रस्ताव पर संयुक्त रणनीति पर चर्चा होने की संभावना है। विपक्षी नेताओं ने संकेत दिया है कि ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग आने वाले दिनों में उनके अभियान का प्रमुख मुद्दा बनी रह सकती है। SIR विवाद बना बड़ा राजनीतिक मुद्दा SIR को लेकर विवाद अब केवल मतदाता सूची संशोधन तक सीमित नहीं है। यह चुनाव आयोग की निर्णय प्रक्रिया, पारदर्शिता और संस्थागत स्वतंत्रता को लेकर बड़े राजनीतिक टकराव में बदल चुका है। एक ओर विपक्ष CEC को हटाने की तैयारी कर रहा है, वहीं चुनाव आयोग का कहना है कि उसकी प्रक्रियाएं कानून के अनुसार हैं और अंतिम निर्णय सर्वसम्मति से लिए गए हैं। फिलहाल नए Removal Notice पर संसद की औपचारिक कार्रवाई सामने आने का इंतजार है। source – The Indian Express / Reuters / India Today / Election Commission of India जय राष्ट्र न्यूज़

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NDA राज्यसभा में दो-तिहाई बहुमत के करीब, राजनीतिक हलचल तेज

जय राष्ट्र न्यूज़ | पॉलिटिक्स डेस्क | 22 जून 2026 मुख्य समाचार हालिया राज्यसभा चुनावों में शानदार प्रदर्शन के बाद भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेतृत्व वाला राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) राज्यसभा में दो-तिहाई बहुमत के और करीब पहुंच गया है। NDA ने हाल में संपन्न चुनावों में 26 में से 19 सीटों पर जीत दर्ज कर अपनी स्थिति मजबूत की है, जिसके बाद राजनीतिक गलियारों में नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं। विश्लेषकों का मानना है कि ऊपरी सदन में बढ़ती ताकत आने वाले संसदीय सत्रों और महत्वपूर्ण विधायी प्रस्तावों के लिए NDA को रणनीतिक बढ़त दे सकती है। राज्यसभा चुनावों ने बदला समीकरण हालिया चुनावों में NDA के मजबूत प्रदर्शन ने राज्यसभा के राजनीतिक गणित को बदल दिया है। कांग्रेस नेतृत्व वाले INDIA गठबंधन को कुछ सीटों पर सफलता मिली, लेकिन कुल मिलाकर NDA का पलड़ा भारी रहा। राजनीतिक पर्यवेक्षकों के अनुसार इन परिणामों ने संसद में शक्ति संतुलन को लेकर नई बहस छेड़ दी है। क्यों महत्वपूर्ण है दो-तिहाई बहुमत? राज्यसभा में दो-तिहाई बहुमत कई महत्वपूर्ण संवैधानिक संशोधनों और विशेष विधायी प्रक्रियाओं के लिए अहम माना जाता है। इसी कारण NDA की बढ़ती संख्या पर राजनीतिक दलों और विशेषज्ञों की नजर बनी हुई है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि गठबंधन आगे भी अपनी संख्या बढ़ाने में सफल रहता है तो संसद में उसका प्रभाव और मजबूत हो सकता है। विपक्ष की बढ़ी चिंता NDA की बढ़ती ताकत के बीच विपक्षी दल भी अपनी रणनीति तैयार करने में जुट गए हैं। INDIA गठबंधन के नेताओं का मानना है कि संसद में प्रभावी भूमिका बनाए रखने के लिए विपक्षी एकजुटता आवश्यक होगी। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार आगामी संसद सत्र में सरकार और विपक्ष के बीच कई मुद्दों पर तीखी बहस देखने को मिल सकती है। क्षेत्रीय दलों की भूमिका अहम राज्यसभा के वर्तमान समीकरण में कई क्षेत्रीय दलों की भूमिका भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। संसद में किसी भी बड़े विधायी कदम के दौरान इन दलों का रुख निर्णायक साबित हो सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले महीनों में क्षेत्रीय राजनीति राष्ट्रीय राजनीति को प्रभावित कर सकती है। संसद के आगामी सत्र पर नजर राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि संसद के आगामी सत्र में कई महत्वपूर्ण विधेयकों और नीतिगत प्रस्तावों पर चर्चा हो सकती है। ऐसे में राज्यसभा की संख्या शक्ति एक महत्वपूर्ण कारक बनकर उभर सकती है। सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों अपनी-अपनी रणनीतियों को अंतिम रूप देने में जुटे हुए हैं। राजनीतिक चर्चा का केंद्र बना राज्यसभा गणित राज्यसभा में NDA की बढ़ती ताकत को लेकर मीडिया, राजनीतिक दलों और विशेषज्ञों के बीच लगातार चर्चा हो रही है। संसद के दोनों सदनों में संख्या बल को लेकर नए आकलन सामने आ रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में राज्यसभा का गणित राष्ट्रीय राजनीति का प्रमुख मुद्दा बना रह सकता है। निष्कर्ष राज्यसभा चुनावों में मजबूत प्रदर्शन के बाद NDA दो-तिहाई बहुमत के और करीब पहुंच गया है। इस घटनाक्रम ने राष्ट्रीय राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है और संसद के आगामी सत्र को लेकर उत्सुकता बढ़ा दी है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि आने वाले महीनों में संसद का राजनीतिक समीकरण किस दिशा में आगे बढ़ता है। स्रोत: Times of India मूल रिपोर्ट:https://timesofindia.indiatimes.com/india/nda-bags-19-out-of-26-how-close-is-the-ruling-coalition-to-rajya-sabha-two-third-majority/articleshow/131853587.cms जय राष्ट्र न्यूज़

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