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मार्को रुबियो भारत पहुंचे, जयशंकर से ट्रेड डील, रूसी तेल और रक्षा सहयोग पर अहम बातचीत

मुंबई, 20 अक्टूबर 2026: अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो दो दिवसीय भारत दौरे पर मुंबई पहुंचे हैं। विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ उनकी बैठक में भारत-अमेरिका व्यापार समझौते, रूसी कच्चे तेल के आयात, ऊर्जा सुरक्षा, रक्षा सहयोग और महत्वपूर्ण तकनीकों जैसे मुद्दों पर चर्चा होनी है। Reuters की रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों देश व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के करीब हैं। ट्रेड डील पर बड़ी प्रगति भारत और अमेरिका के बीच व्यापक व्यापार समझौते को लेकर बातचीत तेज हो गई है। भारत पहुंचने से पहले रुबियो ने कहा कि दोनों देश समझौते को अंतिम रूप देने के काफी करीब हैं। वार्ता में टैरिफ, बाजार तक पहुंच और ऊर्जा खरीद जैसे मुद्दे अहम बने हुए हैं। हालांकि, समझौते की अंतिम शर्तों और औपचारिक घोषणा को लेकर अभी स्थिति स्पष्ट होना बाकी है। रूसी तेल का आयात रहेगा अहम मुद्दा भारत के रूसी कच्चे तेल के आयात का मुद्दा भी इस दौरे के प्रमुख एजेंडे में शामिल है। रूस से तेल खरीद, अमेरिकी प्रतिबंधों और संभावित अतिरिक्त टैरिफ को लेकर दोनों देशों के बीच चर्चा होती रही है। रुबियो ने संकेत दिया है कि भारत जैसे देशों के लिए ऊर्जा आपूर्ति के स्रोतों में बदलाव करना आसान नहीं है। भारत के लिए ऊर्जा सुरक्षा और किफायती आयात महत्वपूर्ण हैं, जबकि अमेरिका रूस से होने वाली ऊर्जा खरीद को लेकर अपनी चिंताएं जताता रहा है। रक्षा और रणनीतिक सहयोग पर भी चर्चा विदेश मंत्रालय के अनुसार, बातचीत में रक्षा, ऊर्जा, निवेश, महत्वपूर्ण एवं उभरती तकनीकों और क्षेत्रीय तथा वैश्विक घटनाक्रमों पर विचार-विमर्श शामिल है। भारत और अमेरिका अपनी व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने के लिए भी काम कर रहे हैं। रक्षा सहयोग और तकनीकी साझेदारी दोनों देशों के संबंधों के महत्वपूर्ण हिस्से हैं। ऐसे में इस बैठक से इन क्षेत्रों में आगे सहयोग की संभावनाओं पर चर्चा होने की उम्मीद है। मुंबई में ही क्यों हो रही है मुलाकात? रुबियो के दौरे में नई दिल्ली के बजाय मुंबई को बैठक के प्रमुख स्थल के रूप में चुना गया है। इस फैसले को लेकर विपक्ष की ओर से सवाल उठाए गए थे। हालांकि, विदेश मंत्रालय ने कहा कि विदेशी प्रतिनिधियों के साथ बैठकें पहले भी देश के अलग-अलग शहरों में आयोजित होती रही हैं। जामनगर भी जाएंगे रुबियो Reuters की रिपोर्ट के मुताबिक, रुबियो के कार्यक्रम में मुंबई के साथ गुजरात का जामनगर भी शामिल है। जामनगर में रिलायंस इंडस्ट्रीज का बड़ा रिफाइनरी परिसर स्थित है। ऐसे में दौरे के दौरान ऊर्जा क्षेत्र और औद्योगिक सहयोग से जुड़े पहलुओं पर भी ध्यान रहने की संभावना है। भारत-अमेरिका संबंधों के लिए अहम दौरा रुबियो का यह दौरा ऐसे समय हो रहा है, जब दोनों देशों के बीच व्यापार वार्ता, टैरिफ और रूसी तेल की खरीद जैसे मुद्दे चर्चा में हैं। व्यापार समझौते पर सहमति बनने से निवेश, ऊर्जा और अन्य आर्थिक क्षेत्रों में सहयोग को नई दिशा मिल सकती है। हालांकि, किसी संभावित समझौते के प्रभाव का आकलन उसकी अंतिम शर्तों और आधिकारिक घोषणा के बाद ही किया जा सकेगा। स्रोत: Reuters, India Today और विदेश मंत्रालय (MEA) जय राष्ट्र न्यूज़

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India-US Trade Deal की पहली Phase Final Drafting में, Sergio Gor बोले—“Big Items Are Done”

नई दिल्ली, 16 अक्टूबर 2026: भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते की पहली phase अब अंतिम कानूनी मसौदा तैयार करने के चरण में पहुंच गई है। भारत में अमेरिकी राजदूत Sergio Gor ने कहा कि बातचीत तेजी से आगे बढ़ी है और समझौते के बड़े मुद्दों पर सहमति बन चुकी है। उन्होंने कहा, “Big items are done”, जबकि शेष तकनीकी बिंदुओं को अंतिम रूप दिया जा रहा है। Piyush Goyal ने भी कहा—पहला चरण लगभग फाइनल केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री Piyush Goyal ने 15 अक्टूबर को कहा था कि व्यापार समझौते का पहला चरण लगभग अंतिम रूप ले चुका है। फिलहाल कानूनी मसौदे और अंतिम समीक्षा पर काम चल रहा है। भारत की कोशिश है कि समझौता लागू होने के बाद उसके निर्यातकों को बांग्लादेश, वियतनाम और इंडोनेशिया जैसे प्रतिस्पर्धी देशों के मुकाबले टैरिफ के मामले में नुकसान न उठाना पड़े। “Big Items Are Done”: Sergio Gor Bloomberg New Economy Forum में Sergio Gor ने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच बातचीत असाधारण तेजी से आगे बढ़ी है। उनके अनुसार, समझौते के प्रमुख मुद्दों पर पर्याप्त सहमति बन चुकी है और अब बाकी बिंदुओं को सुलझाने पर ध्यान दिया जा रहा है। Tariffs और Market Access रहे अहम मुद्दे भारत और अमेरिका के बीच व्यापार वार्ता में टैरिफ, बाजार तक पहुंच और नियामकीय मुद्दे लंबे समय से प्रमुख विषय रहे हैं। इससे पहले अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि Jamieson Greer ने कहा था कि बातचीत अंतिम चरण में है, लेकिन कुछ मुद्दे अब भी अनसुलझे हैं। इसी वजह से उस समय समझौते को तत्काल अंतिम रूप दिए जाने की संभावना नहीं मानी गई थी। भारतीय निर्यातकों के लिए क्या बदल सकता है? भारत का मुख्य उद्देश्य अमेरिकी बाजार में अपने निर्यातकों के लिए अधिक अनुकूल और अनुमानित टैरिफ व्यवस्था हासिल करना है। अमेरिका भारत के सबसे बड़े निर्यात बाजारों में शामिल है। रिपोर्टों के अनुसार, अप्रैल से सितंबर की अवधि में अमेरिका को भारत का वस्तु निर्यात सालाना आधार पर बढ़ा है। व्यापार समझौते के पहले चरण से निर्यातकों को बेहतर बाजार पहुंच और व्यापारिक अनिश्चितताओं में कमी मिलने की उम्मीद है। हालांकि, वास्तविक लाभ समझौते की अंतिम शर्तों और उनके लागू होने पर निर्भर करेगा। Marco Rubio की भारत यात्रा भी अहम अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio की भारत यात्रा भी दोनों देशों के संबंधों के लिहाज से महत्वपूर्ण है। इस दौरान आर्थिक सहयोग, ऊर्जा और व्यापक रणनीतिक साझेदारी से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है। यह बातचीत व्यापार समझौते को आगे बढ़ाने के लिए अतिरिक्त गति प्रदान कर सकती है। व्यापक व्यापार समझौते पर बातचीत अभी बाकी पहले चरण का अंतिम कानूनी मसौदा तैयार होना महत्वपूर्ण प्रगति है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि भारत-अमेरिका के व्यापक व्यापार समझौते से जुड़े सभी मुद्दे सुलझ गए हैं। दोनों देशों को टैरिफ, बाजार पहुंच और नियामकीय नियमों सहित कई व्यापक विषयों पर आगे भी बातचीत करनी होगी। समझौते की अंतिम शर्तें और लागू होने की समय-सीमा आधिकारिक घोषणा के बाद ही स्पष्ट होंगी। स्रोत: Reuters, The Indian Express जय राष्ट्र न्यूज़

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India-US Trade Deal लगभग Final: अमेरिकी राजदूत Sergio Gor बोले—‘In Principle’ ज्यादातर समझौता पूरा

नई दिल्ली: भारत और अमेरिका के बीच लंबे समय से चर्चा में चल रहा Bilateral Trade Agreement अब अंतिम चरण के बेहद करीब पहुंच गया है। भारत में अमेरिकी राजदूत Sergio Gor ने कहा है कि समझौते के लगभग सभी प्रमुख हिस्सों पर दोनों देशों के बीच “in principle” सहमति बन चुकी है और अब मुख्य रूप से कानूनी तथा तकनीकी भाषा को अंतिम रूप देने का काम बाकी है। यह बयान ऐसे समय आया है जब दोनों देश व्यापार, ऊर्जा, रक्षा और रणनीतिक सहयोग को तेजी से आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं। Gor ने भरोसा जताया कि बाकी तकनीकी काम पूरा होने के बाद समझौते को अंतिम रूप दिया जा सकेगा। Sergio Gor ने Trade Deal पर क्या कहा? Economic Times World Leaders Forum में बोलते हुए अमेरिकी राजदूत Sergio Gor ने कहा कि India-US Trade Deal के अधिकांश हिस्सों पर सैद्धांतिक सहमति बन चुकी है। उन्होंने कहा कि अब बातचीत बड़े नीतिगत मतभेदों को सुलझाने के बजाय मुख्य रूप से legal और technical language को व्यवस्थित करने पर केंद्रित है। समझौते के कुछ हिस्सों के text को दोबारा तैयार किया जा रहा है। Gor ने समझौते को लेकर आशावादी रुख दिखाया और संकेत दिया कि दोनों देशों के बीच अब बड़ी बाधाओं के बजाय अंतिम दस्तावेजी प्रक्रिया पर काम चल रहा है। क्यों बदला जा रहा Trade Agreement का कुछ Text? Sergio Gor ने कार्यक्रम में बताया कि पहले एक समय दोनों पक्ष समझौते के काफी करीब पहुंच चुके थे, लेकिन अमेरिका में हुए कानूनी घटनाक्रम के बाद deal के कुछ हिस्सों की भाषा को दोबारा तैयार करना पड़ा। उन्होंने कहा कि Washington अब agreement के कुछ text को “reconfigure” कर रहा है। हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट किया कि इससे पूरी trade negotiation दोबारा शुरू नहीं हुई है और अधिकांश प्रमुख मुद्दों पर सहमति बनी हुई है। इसका मतलब यह है कि मौजूदा चरण में दोनों पक्ष नए सिरे से पूरा समझौता नहीं बना रहे, बल्कि पहले तय किए गए framework को कानूनी रूप से लागू करने योग्य रूप देने पर काम कर रहे हैं। India-US Trade तेजी से बढ़ा अमेरिकी राजदूत ने भारत और अमेरिका के बीच बढ़ते व्यापारिक रिश्तों का भी जिक्र किया। उनके मुताबिक करीब 15 साल पहले दोनों देशों के बीच bilateral trade लगभग 20 अरब डॉलर था, जबकि आज यह बढ़कर करीब 240 अरब डॉलर तक पहुंच चुका है। भारत और अमेरिका ने आने वाले वर्षों में द्विपक्षीय व्यापार को 500 अरब डॉलर तक ले जाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए tariff barriers कम करना, market access बढ़ाना और दोनों देशों की कंपनियों के लिए व्यापार करना आसान बनाना महत्वपूर्ण माना जा रहा है। Trade Deal से भारत को क्या फायदा हो सकता है? India-US Trade Agreement का अंतिम स्वरूप अभी सार्वजनिक नहीं हुआ है, इसलिए सभी sector-wise benefits को निश्चित रूप से बताना जल्दबाजी होगी। लेकिन किसी व्यापक trade deal से भारतीय exporters को अमेरिकी बाजार में बेहतर access मिलने, कुछ products पर tariffs कम होने और investment flows बढ़ने की संभावना रहती है। अमेरिका भारत के सबसे महत्वपूर्ण export markets में शामिल है। ऐसे में textiles, engineering goods, pharmaceuticals, electronics और अन्य manufacturing sectors के लिए किसी tariff relief का बड़ा प्रभाव हो सकता है। हालांकि किन products को कितनी राहत मिलेगी, इसका स्पष्ट जवाब final agreement जारी होने के बाद ही मिलेगा। Russian Oil खरीदने वाले देशों पर 100% Tariff की भी चर्चा Sergio Gor ने कार्यक्रम में एक अलग मुद्दे पर भी स्थिति स्पष्ट की। अमेरिकी संसद में ऐसे देशों पर 100 प्रतिशत tariff लगाने के प्रस्ताव की चर्चा चल रही है जो रूस से तेल खरीदते हैं। भारत दुनिया के बड़े Russian crude buyers में शामिल रहा है, इसलिए ऐसे किसी प्रस्ताव का भारत पर प्रभाव पड़ सकता है। हालांकि Gor ने कहा कि यह प्रस्ताव अमेरिकी Congress में bipartisan स्तर पर आगे बढ़ाया जा रहा है और इसे सीधे President Donald Trump या White House की घोषित नीति नहीं माना जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि Trump administration की प्राथमिकता Russia-Ukraine युद्ध को समाप्त कराने की दिशा में काम करना है। Trump-Modi संबंधों पर भी बोले Sergio Gor अमेरिकी राजदूत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump के रिश्तों को भी दोनों देशों की partnership के लिए महत्वपूर्ण बताया। Gor ने कहा कि Trump और Modi के बीच गहरा व्यक्तिगत संबंध और आपसी भरोसा है। उनके मुताबिक दोनों नेता तेजी से परिणाम चाहते हैं और bilateral relationship को आगे बढ़ाने पर केंद्रित हैं। उन्होंने कहा कि India-US relationship केवल trade तक सीमित नहीं है, बल्कि defence, energy, technology और Indo-Pacific cooperation जैसे क्षेत्रों तक फैला हुआ है। Marco Rubio अक्टूबर में फिर आ सकते हैं भारत India-US संबंधों में बढ़ती diplomatic engagement का संकेत देते हुए Sergio Gor ने बताया कि अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio अक्टूबर में भारत का दौरा कर सकते हैं। यह Rubio की इस साल भारत की दूसरी यात्रा होगी। इससे पहले वह मई में पांच दिन के दौरे पर भारत आए थे। Gor ने कहा कि अमेरिकी सरकार के शीर्ष अधिकारियों की लगातार भारत यात्राएं यह दिखाती हैं कि Washington भारत के साथ रिश्तों को कितनी प्राथमिकता देता है। क्या Trade Deal अब Final हो चुकी है? फिलहाल यह कहना सही नहीं होगा कि India-US Trade Deal पूरी तरह final और लागू हो चुकी है। Sergio Gor के मुताबिक मुख्य मुद्दों पर “in principle” सहमति लगभग पूरी है, लेकिन legal और technical drafting अभी जारी है। इसके बाद दोनों सरकारों को final text पर औपचारिक सहमति देनी होगी और agreement को लागू करने के लिए जरूरी administrative और legal processes पूरी करनी होंगी। इसलिए वर्तमान स्थिति को “लगभग अंतिम चरण में पहुंचा समझौता” कहना ज्यादा सटीक होगा। India-US संबंधों के लिए बड़ा संकेत Trade deal का पूरा होना दोनों देशों के आर्थिक रिश्तों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। भारत दुनिया की तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है, जबकि अमेरिका उसका प्रमुख trading और strategic partner है। दोनों देशों की कंपनियों के बीच technology, energy, pharmaceuticals, manufacturing और defence sectors में सहयोग लगातार बढ़ रहा है। Sergio Gor…

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भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर बाजार की नजर, निवेशकों में उत्साह

नई दिल्ली, 24 जून 2026। भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते को लेकर देश के कारोबारी और निवेशक वर्ग की नजरें टिकी हुई हैं। दोनों देशों के बीच जारी उच्चस्तरीय वार्ताओं के बीच बाजार में सकारात्मक माहौल देखने को मिल रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह समझौता अंतिम रूप लेता है तो इसका सीधा लाभ व्यापार, निवेश और औद्योगिक विकास को मिल सकता है। व्यापार जगत के जानकारों का कहना है कि इस समझौते से भारतीय निर्यातकों के लिए अमेरिकी बाजार में नए अवसर खुल सकते हैं। इसके अलावा कई क्षेत्रों में शुल्क संबंधी राहत मिलने की संभावना भी जताई जा रही है, जिससे भारतीय उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ सकती है। शेयर बाजार में भी इस संभावित समझौते का असर दिखाई दे रहा है। निवेशकों के बीच सकारात्मक धारणा बनी हुई है और कई सेक्टरों में खरीदारी का रुख देखा जा रहा है। विशेष रूप से विनिर्माण, ऑटोमोबाइल, फार्मास्युटिकल, आईटी और निर्यात आधारित कंपनियों पर निवेशकों की नजर बनी हुई है। विश्लेषकों का मानना है कि भारत और अमेरिका के बीच मजबूत व्यापारिक संबंध दोनों देशों की अर्थव्यवस्था के लिए लाभदायक साबित हो सकते हैं। इससे विदेशी निवेश आकर्षित होने के साथ-साथ रोजगार सृजन और औद्योगिक उत्पादन को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। सरकारी सूत्रों के अनुसार दोनों देशों के प्रतिनिधि कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर लगातार चर्चा कर रहे हैं। इनमें व्यापार संतुलन, बाजार पहुंच, निवेश सहयोग और आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत बनाने जैसे विषय शामिल हैं। वार्ता के सकारात्मक परिणाम आने की उम्मीद जताई जा रही है। उद्योग संगठनों ने भी इस संभावित समझौते का स्वागत किया है। उनका मानना है कि इससे भारत के वैश्विक व्यापारिक संबंध और मजबूत होंगे तथा घरेलू उद्योगों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने के अधिक अवसर मिलेंगे। आर्थिक विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले दिनों में व्यापार वार्ताओं से जुड़ी हर गतिविधि पर बाजार की नजर बनी रहेगी। निवेशकों को उम्मीद है कि यह समझौता भारत की आर्थिक वृद्धि को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। स्रोत:भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता से संबंधित सार्वजनिक एवं आधिकारिक जानकारी मूल रिपोर्ट:विभिन्न आर्थिक विशेषज्ञों, व्यापारिक स्रोतों एवं समाचार एजेंसियों से प्राप्त जानकारी के आधार पर जय राष्ट्र न्यूज़

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भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता निर्णायक चरण में, अंतरिम समझौते पर बढ़ी उम्मीदें

जय राष्ट्र न्यूज़ | बिजनेस डेस्क | 23 जून 2026 मुख्य समाचार भारत और अमेरिका के बीच लंबे समय से चल रही व्यापार वार्ता अब निर्णायक चरण में पहुंचती दिखाई दे रही है। नई दिल्ली में दोनों देशों के वरिष्ठ व्यापार अधिकारियों के बीच हुई हालिया बैठकों के बाद अंतरिम व्यापार समझौते (Interim Trade Deal) को लेकर उम्मीदें बढ़ गई हैं। अमेरिका और भारत दोनों ने संकेत दिए हैं कि वे एक ऐसे समझौते की दिशा में काम कर रहे हैं जो दोनों देशों के लिए लाभकारी और संतुलित हो। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमीसन ग्रीर और केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल के बीच हुई चर्चा में बाजार पहुंच, शुल्क व्यवस्था और व्यापारिक सहयोग को लेकर महत्वपूर्ण मुद्दों पर विचार-विमर्श किया गया। क्यों महत्वपूर्ण है यह समझौता? भारत और अमेरिका दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हैं। दोनों देशों के बीच व्यापार लगातार बढ़ रहा है, लेकिन कई क्षेत्रों में शुल्क, बाजार पहुंच और नियामकीय बाधाओं को लेकर मतभेद भी बने हुए हैं। प्रस्तावित अंतरिम समझौते का उद्देश्य इन बाधाओं को कम करना और द्विपक्षीय व्यापार को नई गति देना है। विशेषज्ञों का मानना है कि समझौता होने पर दोनों देशों के उद्योगों और निवेशकों को लाभ मिल सकता है। भारत की प्रमुख मांगें भारत अमेरिकी बाजार में अपने निर्यातकों के लिए बेहतर और वरीयता प्राप्त बाजार पहुंच चाहता है। विशेष रूप से इंजीनियरिंग उत्पादों, वस्त्र, फार्मास्यूटिकल्स और अन्य विनिर्माण क्षेत्रों के लिए अधिक अवसरों की मांग की जा रही है। भारतीय पक्ष का मानना है कि यदि व्यापारिक बाधाएं कम होती हैं तो निर्यात और निवेश दोनों में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है। अमेरिका का फोकस अमेरिका कृषि, ऊर्जा, रक्षा और औद्योगिक उत्पादों के लिए भारतीय बाजार में अधिक अवसर चाहता है। अमेरिकी प्रशासन ने कहा है कि वह ऐसा समझौता चाहता है जो दोनों देशों के लिए “निष्पक्ष और पारस्परिक लाभकारी” हो। विशेषज्ञों का कहना है कि दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी आर्थिक सहयोग को भी मजबूत बना रही है। निवेशकों की नजर व्यापार वार्ता में प्रगति की खबरों पर निवेशक भी नजर बनाए हुए हैं। यदि समझौता अंतिम रूप लेता है तो कई क्षेत्रों में विदेशी निवेश और व्यापारिक गतिविधियों को बढ़ावा मिल सकता है। बाजार विश्लेषकों के अनुसार व्यापार समझौता भारतीय निर्यातकों के लिए नई संभावनाएं खोल सकता है, जबकि अमेरिकी कंपनियों को भी भारत के विशाल उपभोक्ता बाजार तक बेहतर पहुंच मिल सकती है। वैश्विक परिप्रेक्ष्य वैश्विक व्यापार व्यवस्था में जारी अनिश्चितताओं और बदलते आर्थिक समीकरणों के बीच भारत और अमेरिका दोनों अपने आर्थिक संबंधों को मजबूत करने पर जोर दे रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता व्यापक भारत-अमेरिका आर्थिक साझेदारी की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है। स्रोत: Reuters मूल रिपोर्ट:https://www.reuters.com/world/india/us-focused-fair-trade-deal-with-india-that-benefits-both-countries-us-embassy-2026-06-23/ जय राष्ट्र न्यूज़

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