AI और Cyber Security सेक्टर में बढ़ी नौकरियों की मांग, भारतीय युवाओं का तकनीकी करियर की ओर रुझान तेज

नई दिल्ली: भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी (IT) और कॉर्पोरेट जगत में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। जहां एक तरफ पारंपरिक आईटी नौकरियों में ठहराव की स्थिति है, वहीं दूसरी तरफ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और साइबर सुरक्षा (Cyber Security) के क्षेत्र में नौकरियों की मांग में रिकॉर्ड तोड़ उछाल आया है। नैसकॉम (Nasscom) और प्रमुख जॉब पोर्टल्स द्वारा जारी ताजा छमाही रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले वर्ष के मुकाबले इस साल एआई और साइबर डिफेंस सेक्टर में नई वैकेंसियों (Job Openings) में 45% से अधिक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। डिजिटल क्रांति और साइबर हमलों के बढ़ते खतरों के बीच, कंपनियों के लिए अपना डेटा सुरक्षित रखना और एआई को अपनाना सबसे बड़ी जरूरत बन गया है। यही वजह है कि देश के युवाओं का रुझान भी अब पारंपरिक इंजीनियरिंग को छोड़कर इन एडवांस डोमेन्स की तरफ तेजी से बढ़ रहा है। इन 4 प्रमुख पदों के लिए मिल रहे हैं लाखों के पैकेज इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स के अनुसार, इस समय टेक कंपनियों से लेकर बैंक, ई-कॉमर्स और सरकारी विभागों तक में एक्सपर्ट्स की भारी कमी है। सबसे ज्यादा डिमांड इन चार प्रोफेशन्स की है: युवाओं में क्यों बढ़ रहा है इसका क्रेज? इस सेक्टर में युवाओं के बढ़ते रुझान के पीछे सिर्फ नौकरी की उपलब्धता नहीं, बल्कि शानदार सैलरी पैकेज और करियर ग्रोथ भी है। रिपोर्ट के मुताबिक, एआई या साइबर सिक्योरिटी में सिर्फ 2 से 3 साल का अनुभव रखने वाले प्रोफेशन्स को ₹12 लाख से ₹25 लाख सालाना तक का शुरुआती पैकेज आसानी से मिल रहा है। विशेषज्ञों की राय: टेक महिंद्रा और इंफोसिस जैसी दिग्गज कंपनियों के मानव संसाधन (HR) प्रबंधकों का कहना है कि आज कंपनियां डिग्री से ज्यादा ‘स्किल’ (हुनर) को तवज्जो दे रही हैं। यदि किसी युवा के पास सर्टिफिकेशन (जैसे CEH, CISSP या AI/ML नैनो-डिग्री) है, तो उसके लिए अवसरों की कोई कमी नहीं है। देश के बड़े शिक्षण संस्थानों ने बदले कोर्स बढ़ती मांग को देखते हुए आईआईटी (IITs), एनआईटी (NITs) और देश के प्रमुख केंद्रीय विश्वविद्यालयों ने अपने बीटेक और एमसीए पाठ्यक्रमों में बदलाव किए हैं। अब छात्रों को डेटा साइंस, एआई और एथिकल हैकिंग जैसे विषयों में स्पेशलाइजेशन (Specialization) ऑफर किया जा रहा है। सरकार की ‘डिजिटल इंडिया’ मुहिम के तहत भी युवाओं को इन सेक्टर्स में मुफ्त और किफायती ट्रेनिंग देने के लिए कई कदम उठाए जा रहे हैं ताकि भारत को दुनिया का ‘ग्लोबल टेक टैलेंट हब’ बनाया जा सके। Source: Business Standard Original report: Business Standard – Demand for AI and Cyber Security jobs rises by 45 percent, highlights Nasscom report Publication: jairashtranews

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‘Drishyam 3’ आज OTT पर रिलीज, थिएटर्स में ₹330 करोड़ पीटने के बाद प्राइम वीडियो पर जॉर्जकुट्टी का धमाका, फैंस में भारी उत्साह

मनोरंजन डेस्क: सस्पेंस, थ्रिलर और सस्पेंस प्रेमियों का इंतजार आखिरकार खत्म हो गया है। भारतीय सिनेमा इतिहास की सबसे सफल और लोकप्रिय सस्पेंस फ्रेंचाइजी ‘दृश्यम’ का तीसरा और सबसे महत्वपूर्ण चैप्टर यानी ‘दृश्यम 3’ (Drishyam 3) आज से ओटीटी (OTT) प्लेटफॉर्म पर रिलीज हो गया है। सुपरस्टार मोहनलाल (Mohanlal) और निर्देशक जीथू जोसेफ (Jeethu Joseph) की इस जोड़ी ने सिनेमाघरों के बाद अब डिजिटल दुनिया में भी तहलका मचाने के लिए दस्तक दे दी है। थिएटर्स में रिलीज होने के महज एक महीने के भीतर इस ब्लॉकबस्टर फिल्म को अमेज़न प्राइम वीडियो (Amazon Prime Video) पर स्ट्रीम कर दिया गया है। फिल्म अपनी मूल भाषा मलयालम के साथ-साथ हिंदी, तमिल, तेलुगु और कन्नड़ भाषाओं में भी डबिंग के साथ उपलब्ध है। बॉक्स ऑफिस पर तोड़े सारे रिकॉर्ड, कमाए ₹330 करोड़ बता दें कि ‘दृश्यम 3’ सिनेमाघरों में रिलीज होते ही बॉक्स ऑफिस पर सुनामी लेकर आई थी। फिल्म ने रिलीज के महज 30 दिनों के भीतर दुनिया भर में 330 करोड़ रुपये से अधिक का ऐतिहासिक ग्रॉस कलेक्शन किया, जिसने इसे साल की सबसे कमाऊ मलयालम फिल्मों की सूची में शामिल कर दिया है। इस सफलता पर आभार जताते हुए मोहनलाल ने सोशल मीडिया पर लिखा: “केरल की एक छोटी सी कहानी ने भाषाओं, सरहदों और करोड़ों दिलों में अपनी जगह बनाई। 13 साल और 3 चैप्टर्स के बाद भी यह सफर इतिहास रच रहा है। इस कहानी को अपना बनाने के लिए दुनिया भर के दर्शकों का धन्यवाद।” क्या है इस बार की कहानी? (बिना स्पॉइलर के) ‘दृश्यम 2’ के अंत में जहां दर्शकों को लगा था कि जॉर्जकुट्टी ने अपने परिवार को हमेशा के लिए सुरक्षित कर लिया है और अपनी कहानी पर एक फिल्म भी बना ली है, ‘दृश्यम 3’ की कहानी वहीं से नया मोड़ लेती है: क्यों खास है ‘दृश्यम 3’? निर्देशक जीथू जोसेफ ने बताया कि इस बार उनका ध्यान सिर्फ सस्पेंस और ट्विस्ट पर नहीं था, बल्कि वे जॉर्जकुट्टी के दिमाग की गहराइयों में उतरना चाहते थे। लगातार डर, संशय और पुलिस के खौफ के साए में जीने के कारण एक पिता और उसके परिवार पर क्या मनोवैज्ञानिक असर (Psychological Toll) पड़ता है, इसे फिल्म में बेहद भावुक और संजीदा तरीके से दिखाया गया है। फिल्म में मीना (Rani), अंसिबा हसन (Anju), एस्तेर अनिल (Anu) और सिद्दीकी ने एक बार फिर अपनी बेहतरीन अदाकारी से दर्शकों को बांध रखा है। यदि आप भी वीकेंड से पहले किसी बेहतरीन क्राइम-थ्रिलर का लुत्फ उठाना चाहते हैं, तो प्राइम वीडियो पर ‘दृश्यम 3’ आपके लिए बेस्ट चॉइस है। Source: The Times of India Original report: The Times of India – ‘Drishyam 3’ OTT release: Mohanlal and Jeethu Joseph’s thriller starts streaming Publication: jairashtranews

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अमेरिका-ईरान संबंधों और पश्चिम एशिया की स्थिति पर वैश्विक चर्चा जारी, संयुक्त राष्ट्र ने शांति बहाली की अपील की

वाशिंगटन / तेहरान / नई दिल्ली: पश्चिम एशिया (Middle East) में लंबे समय से चला आ रहा भू-राजनीतिक तनाव एक बार फिर वैश्विक कूटनीति के केंद्र में आ गया है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य गतिरोध, परमाणु कार्यक्रम पर मचे घमासान और क्षेत्रीय सुरक्षा के मुद्दों को लेकर अंतरराष्ट्रीय मंचों पर चर्चाएं तेज हो गई हैं। हाल ही में संपन्न हुए वैश्विक सम्मेलनों और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की आपातकालीन बैठकों में इस बात पर गहरी चिंता जताई गई है कि दोनों देशों के बीच बढ़ता अविश्वास पूरे क्षेत्र को अस्थिर कर सकता है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस कूटनीतिक खींचतान का सीधा असर वैश्विक तेल आपूर्ति (Global Oil Supply) और अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक मार्गों पर पड़ रहा है, जिससे दुनिया भर के बाजार सहमे हुए हैं। कूटनीतिक टकराव के 3 सबसे बड़े कारण वाशिंगटन और तेहरान के बीच जारी इस ताजा विवाद के पीछे मुख्य रूप से तीन बड़े कारण काम कर रहे हैं, जिन पर वैश्विक मंचों पर बहस जारी है: संयुक्त राष्ट्र और वैश्विक महाशक्तियों का रुख इस गंभीर होती स्थिति पर संयुक्त राष्ट्र के महासचिव ने दोनों पक्षों से अधिकतम संयम बरतने की अपील की है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बैठक में यह स्पष्ट किया गया कि पश्चिम एशिया में किसी भी तरह का नया सैन्य टकराव दुनिया के लिए विनाशकारी साबित होगा। वैश्विक कूटनीति: जहाँ एक तरफ यूरोपीय संघ (EU) दोनों देशों के बीच मध्यस्थता की कोशिशों में जुटा है, वहीं दूसरी तरफ भारत, चीन और रूस जैसी महाशक्तियां लगातार बातचीत और कूटनीतिक माध्यमों से विवाद सुलझाने पर जोर दे रही हैं। भारत ने विशेष रूप से ऊर्जा सुरक्षा और खाड़ी देशों में रहने वाले लाखों भारतीय प्रवासियों की सुरक्षा के लिहाज से शांति बहाली को आवश्यक बताया है। वैश्विक अर्थव्यवस्था पर मंडराता खतरा ओपेक (OPEC) देशों के आर्थिक विश्लेषकों के अनुसार, यदि अमेरिका और ईरान के बीच यह कूटनीतिक गतिरोध सैन्य झड़प में तब्दील होता है, तो कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतें आसमान छू सकती हैं। स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज, जहां से दुनिया का लगभग 20% तेल गुजरता है, इस पूरे विवाद का सबसे संवेदनशील बिंदु बना हुआ है। दुनिया भर के उद्योग जगत की निगाहें अब आने वाले दिनों में होने वाली अंतरराष्ट्रीय वार्ताओं पर टिकी हैं, जिससे इस संकट का कोई शांतिपूर्ण समाधान निकल सके। Source: Reuters Original report: Reuters – Global powers hold talks over West Asia security and US-Iran ties Publication: jairashtranews

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FIFA World Cup 2026: रोमांचक मैच में इंग्लैंड ने क्रोएशिया को 4-2 से रौंदा, हैरी केन ने दागे दो ऐतिहासिक गोल

डलास (टेक्सास): फीफा वर्ल्ड कप 2026 (FIFA World Cup 2026) में ग्रुप L के अपने शुरुआती मुकाबले में इंग्लैंड (Three Lions) ने एक बेहद रोमांचक और हाई-स्कोरिंग मैच में क्रोएशिया को 4-2 से शिकस्त दे दी है। डलास स्टेडियम में खेले गए इस मुकाबले में दोनों टीमों के बीच कांटे की टक्कर देखने को मिली, लेकिन दूसरे हाफ में इंग्लैंड के आक्रामक खेल और स्टार खिलाड़ियों के जादुई प्रदर्शन के आगे क्रोएशियाई टीम टिक नहीं सकी। इंग्लैंड की इस धमाकेदार जीत के नायक कप्तान हैरी केन (Harry Kane) रहे, जिन्होंने दो शानदार गोल दागकर अपनी टीम की जीत की नींव रखी। इसके अलावा जूड बेलिंगहैम और मार्कस रशफोर्ड ने भी एक-एक गोल का योगदान दिया। पहला हाफ: चार गोल का रोमांचक ड्रामा मैच की शुरुआत बेहद नाटकीय अंदाज में हुई। खेल के 12वें मिनट में इंग्लैंड के विंगर नोनी मदुएके को पेनाल्टी बॉक्स में गिराए जाने के बाद रेफरी ने पेनल्टी दी। क्रोएशिया के गोलकीपर डोमिनिक लिवाकोविच ने हैरी केन की पहली पेनल्टी रोक दी थी, लेकिन रीप्ले में उनके लाइन से आगे बढ़ने के कारण पेनल्टी दोबारा ली गई। इस बार केन ने कोई गलती नहीं की और गेंद को सीधे नेट में डालकर इंग्लैंड को 1-0 की बढ़त दिला दी। इसके बाद मैच में रोमांच बढ़ता गया: दूसरे हाफ में बेलिंगहैम और रशफोर्ड का जादू हाफ टाइम के बाद इंग्लैंड की टीम बिल्कुल बदले हुए इरादों के साथ मैदान पर उतरी। खेल के 47वें मिनट में ही युवा सनसनी जूड बेलिंगहैम (Jude Bellingham) ने राइट विंग से ड्रिबल करते हुए क्रोएशिया के डिफेंस को भेद दिया और लिवाकोविच को छकाते हुए लो-क्रॉस फिनिश के साथ स्कोर 3-3 के बजाय 3-2 कर दिया। इसके बाद इंग्लैंड ने लगातार क्रोएशियाई गोल पोस्ट पर हमले जारी रखे। मैच के 85वें मिनट में सबस्टीट्यूट के रूप में मैदान पर आए बुकायो साका के बेहतरीन पास पर मार्कस रशफोर्ड (Marcus Rashford) ने एक बेहद शांत और नपा-तुला शॉट खेलकर चौथा गोल दागा और इंग्लैंड की 4-2 से जीत सुनिश्चित कर दी। आज के अन्य मुकाबलों पर एक नजर फीफा वर्ल्ड कप 2026 के आठवें दिन ग्रुप ए और ग्रुप बी के दूसरे दौर के कड़े मुकाबले खेले जाने हैं: Source: FIFA Original report: FIFA – Kane double helps England overpower Croatia Publication: jairashtranews

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QS World University Rankings 2027 में IIT Delhi बना भारत का शीर्ष संस्थान, वैश्विक स्तर पर लगाई लंबी छलांग

नई दिल्ली: भारतीय उच्च शिक्षा और अनुसंधान के क्षेत्र के लिए एक बेहद गौरवशाली खबर सामने आई है। वैश्विक स्तर पर प्रतिष्ठित ‘क्यूएस वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग 2027’ (QS World University Rankings 2027) की घोषणा हो गई है, जिसमें भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान दिल्ली (IIT Delhi) ने एक बार फिर इतिहास रचते हुए भारत में पहला स्थान हासिल किया है। आईआईटी दिल्ली ने वैश्विक सूची में 5 पायदान की छलांग लगाते हुए 118वां स्थान हासिल किया है। यह न केवल संस्थान का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है, बल्कि क्यूएस वर्ल्ड रैंकिंग के इतिहास में किसी भी भारतीय संस्थान द्वारा हासिल की गई अब तक की सबसे ऊंची रैंक की बराबरी है। भारत का अब तक का सबसे दमदार प्रदर्शन, 52 संस्थान शामिल इस साल की रैंकिंग भारत के लिए ऐतिहासिक रही है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) के लागू होने के बाद से यह भारत का सबसे मजबूत प्रदर्शन माना जा रहा है। भारत के टॉप 5 शिक्षण संस्थान और उनकी वैश्विक रैंक भारतीय संस्थान वैश्विक रैंक 2027 स्थिति (पिछले वर्ष के मुकाबले) IIT Delhi 118 ⬆️ 5 पायदान का सुधार (पहले 123) IIT Bombay 134 ⬇️ 5 पायदान की गिरावट (पहले 129) IIT Madras 170 ⬆️ 10 पायदान का सुधार (पहले 180) IIT Kharagpur 205 ⬆️ बड़ा सुधार IISc Bengaluru 221 📊 शीर्ष अनुसंधान संस्थान किन पैमानों पर IIT Delhi ने मारी बाजी? क्यूएस रैंकिंग की रिपोर्ट के अनुसार, आईआईटी दिल्ली के इस शानदार प्रदर्शन के पीछे मुख्य रूप से तीन बड़े संकेतक (Indicators) रहे हैं: “रैंकिंग एक परिणाम है, उद्देश्य नहीं” आईआईटी दिल्ली के रैंकिंग सेल के प्रमुख और डीन प्रो. सोमनाथ बैद्य रॉय ने इस उपलब्धि पर खुशी जताते हुए कहा: “आईआईटी दिल्ली दुनिया भर के विद्वानों के लिए एक पसंदीदा डेस्टिनेशन बनने और किफायती तकनीकी शिक्षा देने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारा नया पाठ्यक्रम और बेहतर बुनियादी ढांचा आने वाले वर्षों में हमारे प्रभाव को और बढ़ाएगा। हम रैंकिंग को एक परिणाम के रूप में देखते हैं, उद्देश्य के रूप में नहीं। अगर हम सही कारणों के लिए सही काम करेंगे, तो रैंकिंग स्वाभाविक रूप से मिलेगी।” गैर-आईआईटी (Non-IIT) और निजी विश्वविद्यालयों का भी जलवा इस बार की खास बात यह रही कि भारत की इस सफलता में केवल आईआईटी ही नहीं, बल्कि निजी और राज्य विश्वविद्यालय भी आगे रहे। वेलोर इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (VIT) ने रिकॉर्ड 94 पायदान का सुधार करते हुए 597वीं रैंक हासिल की। वहीं बिट्स पिलानी (BITS Pilani) 93 पायदान चढ़कर 575वें और शूलिनी यूनिवर्सिटी 51 पायदान के सुधार के साथ 452वें स्थान पर पहुंच गई है। वैश्विक स्तर पर बात करें तो अमेरिका का मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MIT) लगातार 15वें साल दुनिया का नंबर-1 विश्वविद्यालय बना हुआ है, जबकि इंपीरियल कॉलेज लंदन और स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी संयुक्त रूप से दूसरे स्थान पर हैं। Source: Times of India Original report: Times of India – IIT Delhi becomes India’s top-ranked institution in QS World University Rankings 2027 Publication: jairashtranews

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OpenAI में शामिल हुए AI विशेषज्ञ Noam Shazeer, गूगल को लगा $2.7 बिलियन का झटका, एआई इंडस्ट्री में नई हलचल

सिलिकॉन वैली / नई दिल्ली: वैश्विक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) इंडस्ट्री में इस साल का सबसे बड़ा और चौंकाने वाला फेरबदल देखने को मिला है। गूगल (Google) के वाइस प्रेसिडेंट ऑफ इंजीनियरिंग और जेमिनी (Gemini AI) प्रोजेक्ट के को-लीड नोआम शेज़ीर (Noam Shazeer) ने कंपनी छोड़ दी है। वह अब गूगल की सबसे बड़ी प्रतिद्वंदी और चैटजीपीटी (ChatGPT) निर्माता कंपनी OpenAI में शामिल हो गए हैं। यह खबर इसलिए भी पूरी टेक दुनिया में तहलका मचा रही है क्योंकि महज दो साल पहले (2024 में) गूगल ने नोआम शेज़ीर को अपनी कंपनी में वापस लाने के लिए $2.7 बिलियन (करीब 22,500 करोड़ रुपये) की भारी-भरकम डील की थी। उनके अचानक OpenAI में जाने को गूगल के लिए एक बहुत बड़े झटके के रूप में देखा जा रहा है। नोआम शेज़ीर ने सोशल मीडिया पर दी जानकारी नोआम शेज़ीर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर अपनी इस नई पारी की घोषणा करते हुए लिखा: “मैं यह साझा करने के लिए उत्साहित हूँ कि मैं OpenAI में शामिल हो रहा हूँ और वहाँ की असाधारण टीम के साथ काम करने के लिए उत्सुक हूँ। आगे बढ़ने का फैसला कठिन था। मुझे गूगल की अद्भुत टीम और हमने मिलकर जो कुछ भी बनाया है, उस पर अविश्वसनीय रूप से गर्व है।” ओपनएआई के सीईओ सैम ऑल्टमैन (Sam Altman) ने भी इस पर खुशी जताते हुए लिखा कि वह OpenAI की शुरुआत (10 साल पहले) से ही नोआम के साथ काम करना चाहते थे, और आखिरकार वह पल आ गया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, OpenAI में नोआम शेज़ीर ‘AI आर्किटेक्चर रिसर्च’ के प्रमुख के तौर पर काम करेंगे, जहां वह नए शक्तिशाली एआई मॉडल्स के निर्माण पर रिसर्च करेंगे। कौन हैं नोआम शेज़ीर और क्यों हैं इतने कीमती? नोआम शेज़ीर को एआई इंडस्ट्री का ‘जीनियस’ या भगवान माना जाता है। उनके इस रूतबे के पीछे मुख्य रूप से 3 बड़ी वजहें हैं: क्यों मची है एआई इंडस्ट्री में हलचल? विशेषज्ञों के अनुसार, एआई की इस रेस में सिर्फ कंप्यूटर या पैसा मायने नहीं रखता, बल्कि नोआम शेज़ीर जैसे मुट्ठी भर ‘एलीट रिसर्चर्स’ सबसे महत्वपूर्ण एसेट हैं। नोआम का ऐसे समय में OpenAI से जुड़ना जब कंपनी अपने आईपीओ (IPO) लाने की तैयारी कर रही है, इसकी कूटनीतिक और तकनीकी ताकत को दोगुना कर देता है। दूसरी तरफ, जेमिनी मॉडल के मुख्य आर्किटेक्ट को खोने के बाद गूगल को अपनी एआई रणनीति पर नए सिरे से विचार करना होगा। Source: Outlook Business Original report: Outlook Business – Noam Shazeer Exits Google For OpenAI — Check His Career & Net Worth Publication: jairashtranews

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19 जून को आगरा में होगा पहला BRICS MSME Forum, भारतीय उद्योग जगत की नजरें कार्यक्रम पर

आगरा / नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश की ऐतिहासिक नगरी आगरा 19 जून को एक और वैश्विक इतिहास रचने के लिए तैयार है। भारत की रणनीतिक पहल और मेजबानी के तहत ताजनगरी में पहले ब्रिक्स एमएसएमई फोरम (First BRICS MSME Forum) का आयोजन होने जा रहा है। सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) क्षेत्र को वैश्विक स्तर पर मजबूती देने के उद्देश्य से आयोजित होने वाले इस भव्य कार्यक्रम पर पूरे भारतीय उद्योग जगत (Indian Industry) की नजरें टिकी हुई हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ब्रिक्स देशों (ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका) के साथ-साथ हाल ही में जुड़े नए सदस्य देशों के छोटे उद्योगों के लिए यह मंच एक गेम-चेंजर साबित होगा। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य: वैश्विक सप्लाई चेन में हिस्सेदारी केंद्रीय सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, इस एक-दिवसीय फोरम का मुख्य फोकस ब्रिक्स देशों के बीच व्यापारिक बाधाओं को कम करना और छोटे व्यवसायों को डिजिटल रूप से सशक्त बनाना है। भारतीय उद्योग जगत इस आयोजन को निम्नलिखित 3 बड़े फायदों के रूप में देख रहा है: आगरा का चयन क्यों है बेहद खास? आगरा न केवल पर्यटन का केंद्र है, बल्कि यह देश के सबसे बड़े एमएसएमई क्लस्टर्स (MSME Clusters) में से एक है। यहाँ का जूता उद्योग (Leather Goods), पेठा उद्योग और हस्तशिल्प (Handicraft) हजारों छोटे व्यवसायों को जीवन देता है। उद्योगपतियों का नजरिया: आगरा चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के प्रतिनिधियों का कहना है कि इस वैश्विक मंच के आगरा में सजने से स्थानीय उद्योगों को अंतरराष्ट्रीय खरीदारों (Global Buyers) से सीधे जुड़ने की अनूठी अपॉर्चुनिटी मिलेगी। ‘ग्लोबल इकोनॉमिक रिकवरी’ में MSME की भूमिका वर्तमान आर्थिक परिदृश्य और वैश्विक सप्लाई चेन में आ रहे बदलावों के बीच, ब्रिक्स देश दुनिया की कुल आबादी का 40% से अधिक और वैश्विक जीडीपी का करीब एक-तिहाई हिस्सा संभालते हैं। भारतीय वाणिज्य मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक, इस फोरम के जरिए भारत यह संदेश देना चाहता है कि आर्थिक मंदी से निपटने के लिए बड़े कॉर्पोरेट्स के साथ-साथ जमीनी स्तर के लघु उद्योगों (MSMEs) को वित्तीय और ढांचागत सहायता देना सबसे जरूरी है। कार्यक्रम में ब्रिक्स देशों के सरकारी प्रतिनिधियों के अलावा, फिक्की (FICCI), सीआईआई (CII) और विभिन्न औद्योगिक संगठनों के शीर्ष पदाधिकारी हिस्सा लेंगे। Source: The Economic Times Original report: The Economic Times – India to host first BRICS MSME Forum in Agra to boost small businesses Publication: jairashtranews

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ओडिशा की पाठ्यपुस्तकों में 1600 से अधिक त्रुटियां मिलने पर शिक्षा व्यवस्था पर सवाल, सीएम माझी ने दिए उच्च स्तरीय जांच के आदेश

भुवनेश्वर / नई दिल्ली: ओडिशा के शिक्षा विभाग की एक बहुत बड़ी लापरवाही सामने आई है। नए शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) और ओडिशा करिकुलम फ्रेमवर्क-2025 के तहत तैयार की गई कक्षा 1 से 8 तक की नई संशोधित पाठ्यपुस्तकों में 1,678 गंभीर त्रुटियां (गलतियां) पाई गई हैं। किताबों में छपे गलत तथ्यों, व्याकरण की अशुद्धियों और गलत तस्वीरों के सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद राज्य की शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने एक उच्च स्तरीय आपातकालीन बैठक बुलाई और इस पूरे ब्लंडर की जांच के लिए 3-सदस्यीय उच्च स्तरीय समिति का गठन कर दिया है। मुख्यमंत्री ने विकास आयुक्त (Development Commissioner) की अध्यक्षता वाली इस समिति को 7 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपने और जिम्मेदार अधिकारियों व संस्थानों पर सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। किताबों में मिलीं 4 सबसे हैरान करने वाली बड़ी भूलें ‘प्राइमरी टीचर्स एसोसिएशन’ के अध्यक्ष ब्रह्मानंद महाराणा और ‘ओडिशा पेरेंट्स फेडरेशन’ द्वारा उठाई गई आपत्तियों के मुताबिक, किताबों में ऐसी बुनियादी और ऐतिहासिक गलतियां हैं जिन्हें देखकर हर कोई हैरान है: बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़: पैरेंट्स फेडरेशन ओडिशा पेरेंट्स फेडरेशन के अध्यक्ष वासुदेव भट्ट ने इस पर कड़ी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा: “ये सिर्फ छपाई की सामान्य गलतियां नहीं हैं, बल्कि एक कृत्य (अपराध) है। सरकार को इसकी पूरी जिम्मेदारी लेनी चाहिए। अगर अब किताबों को दोबारा संशोधित कर छापा जाता है, तो छपाई और वितरण में कम से कम 6 महीने का समय लगेगा। तब तक बच्चे गलत तथ्य पढ़ने को मजबूर होंगे या बिना किताबों के रहेंगे।” विपक्ष ने घेरा, बताया ‘राष्ट्रीय शर्मिंदगी’ इस मामले पर राज्य की राजनीति भी गरमा गई है। मुख्य विपक्षी दल बीजू जनता दल (BJD) के प्रवक्ता लेनिन मोहंती ने इसे ‘राष्ट्रीय शर्मिंदगी’ करार दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार राज्य की शिक्षा व्यवस्था, ओड़िया भाषा, साहित्य और संस्कृति को कमजोर कर रही है। बीजद ने सभी त्रुटिपूर्ण पाठ्यपुस्तकों को तुरंत वापस लेने की मांग की है। दूसरी ओर, स्कूल और जनशिक्षा मंत्री नित्यानंद गोंड ने माना कि विभाग इस मामले को लेकर चिंतित है और उन्होंने आश्वासन दिया है कि गलतियों को जल्द से जल्द ठीक करने के लिए जिला स्तर पर शिक्षकों को शुद्धि-पत्र (Correction Slips) जारी किए जा रहे हैं। Source: The Hindu Original report: The Hindu – Odisha CM orders inquiry into 1,678 errors in school textbooks Publication: jairashtranews

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PM मोदी की वैश्विक नेताओं से मुलाकातों पर चर्चा तेज, भारत की कूटनीतिक सक्रियता पर दुनिया की नजर

नई दिल्ली / एविंया (फ्रांस): वैश्विक कूटनीति के मंच पर भारत का कद लगातार बड़ा होता जा रहा है। फ्रांस के एविंया में आयोजित 52वें G7 शिखर सम्मेलन (G7 Summit 2026) के इतर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दुनिया के सबसे शक्तिशाली देशों के राष्ट्राध्यक्षों के साथ हुई बैक-टू-बैक द्विपक्षीय मुलाकातों ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल तेज कर दी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी, जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ और यूरोपीय संघ के शीर्ष नेताओं के साथ पीएम मोदी की इन मुलाकातों पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हुई हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की यह बढ़ती ‘कूटनीतिक सक्रियता’ (Strategic Autonomy) आने वाले दिनों में वैश्विक अर्थव्यवस्था और सुरक्षा समीकरणों को बदलने वाली साबित होगी। अमेरिका और भारत के बीच ‘COMPACT’ समझौते पर बड़ी प्रगति G7 समिट के इतर सबसे बहुप्रतीक्षित मुलाकात प्रधानमंत्री मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच हुई। दोनों नेताओं ने भारत-अमेरिका कॉम्पेक्ट (INDIA-U.S. COMPACT) समझौते की समीक्षा की, जिसके तहत रक्षा, रणनीतिक तकनीक, ऊर्जा और द्विपक्षीय व्यापार में ऐतिहासिक प्रगति देखी जा रही है। भारत-यूरोपियन यूनियन (EU) फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) पर ऐतिहासिक मुहर प्रधानमंत्री मोदी ने यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन से भी मुलाकात की। बड़ी सफलता: इस बैठक में भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते (India-EU FTA) के वार्ताओं के निष्कर्ष का स्वागत किया गया। इस ऐतिहासिक समझौते से भारत और यूरोप के बीच व्यापार और निवेश के असीमित अवसर खुलेंगे और सप्लाई चेन को और मजबूती मिलेगी। जर्मनी के साथ रक्षा और वीज़ा नियमों पर बड़ी डील जर्मनी के नए चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ के साथ पीएम मोदी की बैठक में भारत-जर्मनी रणनीतिक साझेदारी को एक नए स्तर पर ले जाने पर चर्चा हुई। दोनों देशों के बीच ‘डिफेंस इंडस्ट्रियल कोऑपरेशन रोडमैप’ पर हस्ताक्षर किए गए। इसके अलावा, भारतीय नागरिकों के लिए जर्मनी से होकर गुजरने वाले ट्रांजिट वीज़ा की छूट को लागू करने का स्वागत किया गया, जिससे भारतीयों के लिए यूरोपीय यात्रा और आसान हो जाएगी। ‘ग्लोबल साउथ’ की बुलंद आवाज बना भारत शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने स्पष्ट किया कि भारत दुनिया में केवल अपने हितों की बात नहीं कर रहा, बल्कि वह ‘ग्लोबल साउथ’ (विकासशील और गरीब देशों) की मजबूत आवाज बनकर उभरा है। भारत ने वैश्विक मंचों पर विकसित देशों से डोनर-बेनिफिशियरी (दाता और लाभार्थी) की मानसिकता से बाहर निकलकर समानता के आधार पर साझेदारी करने का आह्वान किया है। यूक्रेन संकट और पश्चिम एशिया के तनाव के बीच, पीएम मोदी ने एक बार फिर दोहराया कि “भारत हमेशा शांति के पक्ष में है और मानवता को सबसे ऊपर रखता है।” फ्रांस में ‘विवाटेक 2026’ में भारत का डंका G7 समिट के तुरंत बाद प्रधानमंत्री मोदी पेरिस (फ्रांस) पहुंचे हैं, जहां प्रवासी भारतीयों ने उनका भव्य स्वागत किया। पीएम मोदी फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन के साथ यूरोप के सबसे बड़े स्टार्टअप और टेक्नोलॉजी इवेंट VivaTech 2026 में हिस्सा लेंगे। इस साल विवाटेक में ‘इंडिया पवेलियन’ सबसे बड़ा है, जो यह दर्शाता है कि भारत अब दुनिया का नया डिजिटल और इनोवेशन हब बन चुका है। Source: The Hindu Original report: The Hindu – PM Modi arrives in Paris to attend VivaTech 2026 Publication: jairashtranews

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राष्ट्रीय संग्रहालयों और ऐतिहासिक स्थलों के डिजिटल अनुभव को बढ़ावा देने की पहल

जय राष्ट्र न्यूज़ | धरोहर डेस्क | 17 जून 2026 मुख्य समाचार भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने और पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से राष्ट्रीय संग्रहालयों और ऐतिहासिक स्थलों के डिजिटलीकरण पर विशेष जोर दिया जा रहा है। विभिन्न संस्थानों द्वारा डिजिटल तकनीकों के माध्यम से आगंतुकों के अनुभव को अधिक आधुनिक, इंटरैक्टिव और आकर्षक बनाने की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल तकनीक के उपयोग से देश की ऐतिहासिक धरोहरों को न केवल बेहतर तरीके से संरक्षित किया जा सकेगा, बल्कि दुनिया भर के लोगों तक उनकी पहुंच भी बढ़ेगी। बदल रहा है संग्रहालयों का स्वरूप पारंपरिक संग्रहालय अब धीरे-धीरे डिजिटल अनुभव केंद्रों में बदलते नजर आ रहे हैं। कई स्थानों पर इंटरैक्टिव स्क्रीन, वर्चुअल टूर, ऑडियो गाइड और डिजिटल प्रदर्शनी जैसी सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। इन तकनीकों की मदद से आगंतुक किसी ऐतिहासिक वस्तु या स्मारक के बारे में अधिक विस्तृत जानकारी प्राप्त कर सकते हैं और इतिहास को अधिक रोचक तरीके से समझ सकते हैं। वर्चुअल टूर की बढ़ती लोकप्रियता डिजिटल पहल के तहत कई संग्रहालय और ऐतिहासिक स्थल वर्चुअल टूर की सुविधा भी विकसित कर रहे हैं। इससे देश और विदेश के लोग अपने घरों से ही भारत की सांस्कृतिक धरोहरों का अनुभव प्राप्त कर सकते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि वर्चुअल टूर विशेष रूप से छात्रों, शोधकर्ताओं और अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों के लिए उपयोगी साबित हो सकते हैं। युवाओं को जोड़ने का प्रयास इतिहास और संस्कृति के प्रति युवाओं की रुचि बढ़ाने के लिए डिजिटल माध्यमों का उपयोग महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ऑगमेंटेड रियलिटी (AR), वर्चुअल रियलिटी (VR) और 3D मॉडलिंग जैसी तकनीकों के माध्यम से ऐतिहासिक घटनाओं और स्मारकों को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया जा सकता है। इससे युवा पीढ़ी को देश की सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने में मदद मिलने की उम्मीद है। पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा पर्यटन विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल अनुभव सुविधाओं के विस्तार से घरेलू और विदेशी पर्यटकों की संख्या में वृद्धि हो सकती है। आधुनिक तकनीक के उपयोग से पर्यटन स्थलों को अधिक आकर्षक बनाया जा सकता है। इसके साथ ही डिजिटल जानकारी और ऑनलाइन बुकिंग जैसी सुविधाएं भी पर्यटकों के अनुभव को बेहतर बनाने में मदद कर सकती हैं। संरक्षण कार्यों में भी मदद डिजिटलीकरण केवल आगंतुकों के अनुभव तक सीमित नहीं है। विशेषज्ञों के अनुसार ऐतिहासिक दस्तावेजों, मूर्तियों, कलाकृतियों और स्मारकों के डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करने से संरक्षण कार्यों को भी मजबूती मिलेगी। डिजिटल अभिलेख भविष्य में शोध और पुनर्स्थापन कार्यों के लिए महत्वपूर्ण संसाधन साबित हो सकते हैं। वैश्विक स्तर पर पहचान मजबूत करने का प्रयास भारत दुनिया की सबसे समृद्ध सांस्कृतिक विरासतों में से एक का प्रतिनिधित्व करता है। डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से भारतीय इतिहास, कला और संस्कृति को वैश्विक दर्शकों तक पहुंचाने की दिशा में भी प्रयास किए जा रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे भारत की सांस्कृतिक पहचान और सॉफ्ट पावर को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और मजबूती मिल सकती है। विशेषज्ञों की राय धरोहर संरक्षण विशेषज्ञों का कहना है कि तकनीक और परंपरा का संतुलित उपयोग समय की आवश्यकता है। डिजिटलीकरण से विरासत संरक्षण और जनसंपर्क दोनों क्षेत्रों में सकारात्मक परिणाम मिल सकते हैं। हालांकि विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि डिजिटल सुविधाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक स्थलों की मौलिकता और प्रामाणिकता को बनाए रखना भी उतना ही आवश्यक है। निष्कर्ष राष्ट्रीय संग्रहालयों और ऐतिहासिक स्थलों के डिजिटल अनुभव को बढ़ावा देने की पहल भारत की सांस्कृतिक विरासत को आधुनिक तकनीक से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। इससे न केवल संरक्षण और शोध कार्यों को लाभ मिलेगा, बल्कि पर्यटन, शिक्षा और सांस्कृतिक जागरूकता को भी नई गति मिलने की उम्मीद है। जय राष्ट्र न्यूज़ के साथ जुड़े रहें भारत की सांस्कृतिक धरोहर और इतिहास से जुड़ी हर बड़ी खबर के लिए।

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