प्रमुख खबरें

प्रेस क्लब में ‘मोदी चालीसा’ का अनावरण; VIDEO वायरल होते ही मचा बवाल, आयोजकों से अलग हुआ प्रेस क्लब

नई दिल्ली: दिल्ली के प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रशंसा में आयोजित एक कार्यक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद विवाद खड़ा हो गया है। वायरल वीडियो में प्रधानमंत्री मोदी के कटआउट के सामने आरती और ‘मोदी चालीसा’ का पाठ करते लोग दिखाई दे रहे हैं। कार्यक्रम में ‘जय जय मोदी’ और ‘हर हर मोदी’ जैसे नारे भी लगाए गए। वीडियो में क्या दिखा? सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में नरेंद्र मोदी की तस्वीर/कटआउट को भगवान राम के स्वरूप में दिखाया गया है। मंच पर इसी तस्वीर के सामने आरती की गई और ‘भगवान श्री नरेंद्र मोदी चालीसा’ का पाठ किया गया। कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने धार्मिक अंदाज में नारे भी लगाए। वीडियो वायरल होने के बाद इसे लेकर सोशल मीडिया पर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आने लगीं और प्रेस क्लब परिसर में हुए इस आयोजन को लेकर सवाल उठने लगे। बिहार किन्नर कल्याण बोर्ड से जुड़े पदाधिकारी रहे मौजूद रिपोर्टों के मुताबिक कार्यक्रम में बिहार किन्नर कल्याण बोर्ड के उपाध्यक्ष राजन सिंह प्रमुख रूप से मौजूद थे। राजन सिंह इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम पर पटना में मंदिर बनाने की घोषणा को लेकर भी चर्चा में रहे हैं। आयोजन में ‘मोदी चालीसा’ को प्रस्तुत करने के साथ उसका पाठ भी किया गया। कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री मोदी को भगवान श्रीराम के स्वरूप में प्रदर्शित करने वाली तस्वीर भी दिखाई गई। प्रेस क्लब ऑफ इंडिया ने किया किनारा विवाद बढ़ने के बाद प्रेस क्लब ऑफ इंडिया ने स्पष्ट किया कि यह कार्यक्रम उसकी ओर से आयोजित नहीं किया गया था। क्लब के अनुसार, एक संगठन ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के लिए हॉल किराये पर लिया था, लेकिन वहां आयोजित गतिविधि ने बुकिंग की शर्तों का उल्लंघन किया। जानकारी मिलते ही क्लब अधिकारियों ने हस्तक्षेप कर कार्यक्रम को रुकवा दिया। इस स्पष्टीकरण के बाद यह साफ हो गया कि वायरल वीडियो में दिखाई दे रहा आयोजन प्रेस क्लब ऑफ इंडिया का आधिकारिक कार्यक्रम नहीं था। VIDEO वायरल होने के बाद राजनीतिक बहस ‘मोदी चालीसा’ के वीडियो के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर इसे लेकर राजनीतिक और वैचारिक बहस शुरू हो गई है। आलोचक इसे राजनीतिक व्यक्तिपूजा का उदाहरण बता रहे हैं, जबकि समर्थकों की ओर से इसे प्रधानमंत्री के प्रति सम्मान और समर्थन से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि, प्रेस क्लब की ओर से कार्यक्रम से दूरी बनाए जाने के बाद विवाद का केंद्र अब आयोजकों द्वारा क्लब की बुकिंग की शर्तों के कथित उल्लंघन और कार्यक्रम की प्रकृति पर है। सोशल मीडिया पर क्यों ट्रेंड कर रहा है मामला? प्रधानमंत्री की तस्वीर के सामने आरती, धार्मिक शैली में ‘मोदी चालीसा’ का पाठ और ‘जय जय मोदी’ जैसे नारों वाले वीडियो ने कुछ ही समय में सोशल मीडिया पर काफी ध्यान आकर्षित किया। इसी वजह से यह मामला आज की Trending Political News में शामिल हो गया है। फिलहाल प्रेस क्लब ने साफ कर दिया है कि उसने इस आयोजन का समर्थन या आयोजन नहीं किया था और नियमों के उल्लंघन के बाद कार्यक्रम को रोक दिया गया। स्रोत: प्रेस क्लब ऑफ इंडिया, लाइव हिन्दुस्तान, द लल्लनटॉप, अमर उजाला Jai Rashtra News

आगे और पढ़ें

PM CARES Fund के पैसे से स्कूल बनाने की मांग! ₹8,452 करोड़ के फंड पर उठे सवाल

नई दिल्ली: PM CARES Fund में मौजूद ₹8,452 करोड़ की राशि को ग्रामीण सरकारी स्कूलों की स्थिति सुधारने और नए आधुनिक स्कूल बनाने में इस्तेमाल करने की मांग उठी है। Cockroach Janta Party (CJP) के संस्थापक अभिजीत डिपके ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अपील की है कि फंड की राशि का इस्तेमाल बच्चों के लिए बेहतर स्कूल इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने में किया जाए। ग्रामीण स्कूलों की बदहाली का मुद्दा डिपके ने अपनी ‘School Thik Karo’ मुहिम के तहत ग्रामीण इलाकों के सरकारी स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं की कमी का मुद्दा उठाया। उनका कहना है कि कई स्कूलों में बच्चों को बेहतर सड़क, बैठने के लिए पर्याप्त बेंच और पीने के पानी जैसी मूलभूत सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि एक तरफ ग्रामीण स्कूलों में फंड की कमी बताई जाती है और दूसरी तरफ PM CARES Fund में हजारों करोड़ रुपये मौजूद हैं। ₹8,500 करोड़ से 1,000 से ज्यादा स्कूलों का दावा डिपके के मुताबिक अगर एक आधुनिक और सुविधायुक्त मॉडल स्कूल बनाने में करीब ₹8 करोड़ खर्च हों, तो ₹8,500 करोड़ की राशि से 1,000 से ज्यादा हाईटेक मॉडल स्कूल बनाए जा सकते हैं। उन्होंने सरकार से इस दिशा में कदम उठाने की अपील की। हालांकि, यह आंकड़ा डिपके का अनुमान है और इसे सरकार की स्वीकृत स्कूल-निर्माण योजना नहीं माना जाना चाहिए। PM CARES Fund में कितनी रकम है? नवीनतम ऑडिट आंकड़ों के अनुसार 31 मार्च 2025 को PM CARES Fund का बैलेंस ₹8,452.06 करोड़ था। यह राशि 2023-24 के करीब ₹7,173 करोड़ के बैलेंस से काफी अधिक है। फंड की करीब 93% राशि यानी ₹7,846.65 करोड़ फिक्स्ड डिपॉजिट में थी। वित्त वर्ष 2024-25 में फंड से कुल भुगतान करीब ₹87.85 लाख दर्ज हुआ, जिससे फंड के इस्तेमाल को लेकर राजनीतिक और सार्वजनिक बहस तेज हुई है। क्या PM CARES का पैसा स्कूलों पर खर्च किया जा सकता है? यह सबसे महत्वपूर्ण सवाल है। PM CARES Fund का घोषित उद्देश्य मुख्य रूप से आपात स्थितियों, आपदाओं, स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों और प्रभावित लोगों को सहायता प्रदान करना है। इसके उद्देश्यों में इंफ्रास्ट्रक्चर और अन्य सहायता से जुड़े प्रावधान भी हैं, लेकिन सामान्य स्कूल निर्माण या नियमित शिक्षा इंफ्रास्ट्रक्चर को अलग से मुख्य उद्देश्य के रूप में नहीं बताया गया है। इसलिए PM CARES की राशि से सामान्य स्कूल निर्माण किया जा सकता है या नहीं, यह फंड के घोषित उद्देश्यों और Board of Trustees की स्वीकृति पर निर्भर करेगा। BJP ने मांग पर जताई आपत्ति इस मांग के बाद राजनीतिक प्रतिक्रिया भी सामने आई। BJP ने कहा कि PM CARES Fund का उद्देश्य आपातकालीन और आपदा राहत है और इसे सामान्य स्कूल निर्माण के लिए इस्तेमाल करने की मांग फंड के मूल उद्देश्य को नहीं समझती। यानी फिलहाल यह सरकार की घोषित योजना नहीं, बल्कि अभिजीत डिपके की मांग है। PM CARES Fund फिर चर्चा में ₹8,452 करोड़ के बड़े कॉर्पस, FY25 में बेहद कम भुगतान और अब ग्रामीण स्कूलों के लिए इस राशि के इस्तेमाल की मांग ने PM CARES Fund को एक बार फिर राष्ट्रीय बहस के केंद्र में ला दिया है। आगे यह देखना अहम होगा कि क्या सरकार या PM CARES Fund का ट्रस्ट बोर्ड इस सुझाव पर कोई विचार करता है या स्कूल इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए मौजूदा सरकारी योजनाओं के जरिए ही फंड उपलब्ध कराया जाता है। स्रोत: PM CARES Fund Audit Report, PTI, Hindustan Times, New Indian Express, Times of India Jai Rashtra News

आगे और पढ़ें

UN में भारत का बड़ा बयान! Terror Listings में राजनीतिक दखल के खिलाफ उठाई आवाज

न्यूयॉर्क: संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में आतंकवाद से जुड़े प्रतिबंधों और terror listings की प्रक्रिया को लेकर भारत ने बुधवार को बड़ा बयान दिया। भारत ने UNSC से अपील की कि आतंकवादियों की सूची में नाम जोड़ने या हटाने की प्रक्रिया पारदर्शी, निष्पक्ष और नियमों पर आधारित होनी चाहिए और किसी भी देश को परिषद की सदस्यता का इस्तेमाल आतंकवादियों को राजनीतिक संरक्षण देने के लिए नहीं करना चाहिए। आतंकियों को राजनीतिक संरक्षण देने पर भारत की आपत्ति भारत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि UNSC की सदस्यता का इस्तेमाल किसी आतंकवादी को “legitimise” करने या उसे राजनीतिक कारणों से संरक्षण देने के लिए नहीं होना चाहिए। भारत की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब सुरक्षा परिषद के प्रतिबंधों और आतंकवाद से जुड़े निर्णयों में पारदर्शिता तथा राजनीतिक प्रभाव को लेकर बहस चल रही है। भारत ने आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक व्यवस्था में objectivity और transparency को मजबूत करने की जरूरत पर जोर दिया। Terror Listing प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग भारत का कहना है कि आतंकवादी संगठनों और व्यक्तियों को UNSC sanctions lists में शामिल करने की प्रक्रिया स्पष्ट और तथ्य आधारित होनी चाहिए। इसी तरह किसी नाम को सूची से हटाने का फैसला भी राजनीतिक हितों से प्रभावित नहीं होना चाहिए। UN Security Council के तहत आतंकवाद और counter-terrorism से संबंधित कई sanctions regimes पहले से लागू हैं। पाकिस्तान पर परोक्ष निशाना? भारत के बयान को पाकिस्तान के संदर्भ में भी देखा जा रहा है। भारत लंबे समय से पाकिस्तान पर सीमा पार आतंकवाद और आतंकवादी संगठनों के खिलाफ पर्याप्त कार्रवाई न करने का आरोप लगाता रहा है। हालांकि, ताजा बयान में भारत ने किसी एक देश का नाम लेकर आरोप लगाने के बजाय UN sanctions mechanism को मजबूत करने और राजनीतिक हस्तक्षेप रोकने पर जोर दिया। भारत पहले भी उठा चुका है मुद्दा आतंकवादी संगठनों की listing और delisting में राजनीतिक या धार्मिक आधार पर दोहरे मानदंडों के खिलाफ भारत पहले भी आवाज उठाता रहा है। भारत ने UN में यह रुख रखा है कि ऐसी प्रक्रिया objective होनी चाहिए और आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक कार्रवाई में किसी तरह का double standard नहीं होना चाहिए। भारत ने UNSC 1267 sanctions regime के तहत आतंकवादियों की listing को लेकर भी सक्रिय भूमिका निभाई है। संसद की विदेश मामलों की समिति के अनुसार, भारत ने कई आतंकवादियों को सूचीबद्ध कराने के लिए प्रस्ताव आगे बढ़ाए हैं। UNSC में सुधार की मांग भी तेज भारत का यह बयान व्यापक UN Security Council reforms की उसकी मांग से भी जुड़ा है। नई दिल्ली लंबे समय से UNSC को ज्यादा प्रतिनिधित्व वाला, पारदर्शी और प्रभावी बनाने की मांग करती रही है। भारत का तर्क है कि वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए परिषद की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाना जरूरी है। आतंकवाद के खिलाफ भारत का सख्त रुख भारत ने दोहराया है कि आतंकवाद को किसी भी राजनीतिक, वैचारिक या अन्य आधार पर सही नहीं ठहराया जा सकता। नई दिल्ली का कहना है कि आतंकवाद के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय कार्रवाई बिना भेदभाव और बिना राजनीतिक दबाव के होनी चाहिए। आज के बयान के बाद एक बार फिर यह सवाल प्रमुख हो गया है कि UNSC की sanctions प्रक्रिया को कितना पारदर्शी बनाया जा सकता है और क्या सदस्य देश राजनीतिक हितों से ऊपर उठकर आतंकवाद के खिलाफ एक समान नीति अपना पाएंगे। स्रोत: United Nations, Moneycontrol, Times of India, Indian diplomatic statements Jai Rashtra News

आगे और पढ़ें

Samsung का बड़ा ऐलान! 27 अगस्त को Galaxy Event, Galaxy S26 FE से उठ सकता है पर्दा

नई दिल्ली: Samsung ने अपने अगले Galaxy Event की तारीख का आधिकारिक ऐलान कर दिया है। कंपनी 27 अगस्त 2026 को एक ऑनलाइन लॉन्च इवेंट आयोजित करेगी, जिसमें Galaxy S26 सीरीज के “नए सदस्य” को पेश करने की घोषणा की गई है। Samsung ने अभी डिवाइस का नाम स्पष्ट नहीं किया है, लेकिन मौजूदा रिपोर्ट्स और लीक्स के आधार पर Galaxy S26 FE के लॉन्च की सबसे ज्यादा उम्मीद है। 27 अगस्त को होगा बड़ा Galaxy Event Samsung का यह इवेंट 27 अगस्त को शाम 5:30 बजे IST से लाइव होगा। कंपनी इसे अपनी आधिकारिक वेबसाइट और YouTube चैनल पर स्ट्रीम करेगी। Samsung ने अपने निमंत्रण में कहा है कि नया डिवाइस Galaxy S26 के कैमरा और AI अनुभवों को ज्यादा यूजर्स तक पहुंचाने के लिए डिजाइन किया गया है। Samsung की आधिकारिक Galaxy Event जानकारी Galaxy S26 FE पर क्यों है सबसे ज्यादा चर्चा? Samsung ने आधिकारिक तौर पर Galaxy S26 FE का नाम नहीं लिया है। हालांकि, पिछले कई महीनों से सामने आ रहे लीक्स और अब Galaxy S26 परिवार में नए मॉडल की घोषणा को देखते हुए S26 FE को इस इवेंट का सबसे संभावित डिवाइस माना जा रहा है। FE यानी Fan Edition सीरीज का मकसद आमतौर पर फ्लैगशिप Galaxy S सीरीज के प्रमुख फीचर्स को अपेक्षाकृत कम कीमत वाले फोन में उपलब्ध कराना होता है। 6.7-इंच डिस्प्ले और 120Hz स्क्रीन की उम्मीद लीक्स के मुताबिक Galaxy S26 FE में 6.7-इंच FHD+ AMOLED डिस्प्ले और 120Hz रिफ्रेश रेट मिल सकता है। फोन में एल्युमिनियम फ्रेम और IP68 रेटिंग भी मिलने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि, ये सभी स्पेसिफिकेशन अभी लीक्स और रिपोर्ट्स पर आधारित हैं। Samsung ने लॉन्च से पहले इनकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। Exynos 2500 और 4,900mAh बैटरी की चर्चा रिपोर्ट्स के अनुसार Galaxy S26 FE में Samsung का Exynos 2500 प्रोसेसर दिया जा सकता है। फोन में 4,900mAh बैटरी और 45W वायर्ड चार्जिंग सपोर्ट की भी उम्मीद है। सॉफ्टवेयर के मामले में फोन के Android 17 आधारित One UI 9 के साथ आने और लंबे समय तक सॉफ्टवेयर अपडेट मिलने की संभावना है। कैमरा सेटअप भी हो सकता है दमदार लीक्स के मुताबिक Galaxy S26 FE में ट्रिपल रियर कैमरा सेटअप मिल सकता है। इसमें: शामिल होने की उम्मीद है। टेलीफोटो कैमरे में 3x ऑप्टिकल जूम और OIS मिलने की भी रिपोर्ट है। कीमत पर भी बढ़ी उत्सुकता Galaxy S26 FE की भारतीय कीमत अभी Samsung ने घोषित नहीं की है। कुछ रिपोर्ट्स में अमेरिकी बाजार के लिए करीब $799 की शुरुआती कीमत का अनुमान लगाया गया है, लेकिन इसे भारतीय कीमत मानना सही नहीं होगा। स्थानीय टैक्स, लॉन्च ऑफर और Samsung की भारत-विशिष्ट कीमत के कारण वास्तविक कीमत अलग हो सकती है। अगर कीमत उम्मीद से ज्यादा रहती है, तो S26 FE को प्रीमियम स्मार्टफोन सेगमेंट में कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ सकता है। 27 अगस्त को साफ होगी पूरी तस्वीर फिलहाल Samsung ने सिर्फ इतना आधिकारिक रूप से बताया है कि Galaxy S26 परिवार में एक नया सदस्य 27 अगस्त को पेश किया जाएगा। Galaxy S26 FE का नाम और उसके स्पेसिफिकेशन अभी आधिकारिक तौर पर सामने नहीं आए हैं। अब भारतीय टेक यूजर्स की नजर 27 अगस्त, शाम 5:30 बजे होने वाले Galaxy Event पर है। अगर लीक्स सही साबित होते हैं, तो यह Samsung Galaxy S26 FE की आधिकारिक एंट्री हो सकती है। स्रोत: Samsung Newsroom, India Today, Samsung-focused reports Jai Rashtra News

आगे और पढ़ें

शेयर बाजार में जोरदार वापसी! Sensex 592 अंक चढ़ा, Nifty ने 24,200 का स्तर फिर हासिल किया

नई दिल्ली: लगातार कई कारोबारी सत्रों की गिरावट के बाद भारतीय शेयर बाजार ने 20 अगस्त 2026 को जोरदार वापसी की। शुरुआती कारोबार में Sensex 592.55 अंक चढ़कर 77,504.80 के स्तर पर पहुंच गया, जबकि Nifty 50 करीब 147 अंक बढ़कर 24,200 के ऊपर पहुंच गया। बाद में तेजी और मजबूत हुई और Sensex करीब 700 अंक तथा Nifty 24,265 के आसपास तक पहुंच गया। सात दिन की गिरावट पर लगा ब्रेक बाजार में यह तेजी खास तौर पर इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि Nifty इससे पहले लगातार सात कारोबारी सत्रों में गिरावट दर्ज कर चुका था। 19 अगस्त को Nifty 24,078.30 और Sensex 76,909.68 पर बंद हुए थे। आज की तेजी ने निवेशकों को राहत दी और बाजार में फिर से खरीदारी का माहौल देखने को मिला। IT और बैंकिंग शेयरों में जोरदार खरीदारी आज की तेजी में IT और वित्तीय शेयर प्रमुख भूमिका निभा रहे हैं। शुरुआती कारोबार में IT इंडेक्स करीब 1.4% चढ़ा, जबकि वित्तीय शेयरों में भी मजबूती रही। व्यापक बाजार में भी Midcap और Smallcap इंडेक्स हरे निशान में रहे। इससे संकेत मिला कि निवेशक हालिया गिरावट के बाद चुनिंदा शेयरों में दोबारा खरीदारी कर रहे हैं। US Bond Yields में गिरावट से बाजार को सहारा आज की तेजी का एक बड़ा कारण अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में नरमी रहा। अमेरिका के Treasury Department ने लंबी अवधि के सरकारी बॉन्ड की buyback operations का आकार बढ़ाने की घोषणा की, जिससे वैश्विक बॉन्ड बाजार में sentiment बेहतर हुआ। US 10-year और 30-year Treasury yields में गिरावट ने emerging markets समेत जोखिम वाली परिसंपत्तियों के प्रति निवेशकों का रुझान बेहतर किया। Global Markets से भी मिले सकारात्मक संकेत भारतीय बाजार को एशियाई और अमेरिकी बाजारों से भी सकारात्मक संकेत मिले। वैश्विक बाजारों में sentiment सुधरने के बाद घरेलू निवेशकों ने भी खरीदारी बढ़ाई। Reuters के अनुसार आज Sensex करीब 0.66% और Nifty करीब 0.50% ऊपर खुला। Crude Oil और Iran तनाव पर नजर हालांकि बाजार की पूरी तस्वीर अभी भी जोखिम से मुक्त नहीं है। Iran-US तनाव और ऊंचे crude oil prices भारतीय बाजार के लिए बड़ी चिंता बने हुए हैं। पिछले दिनों Brent crude करीब $92 प्रति बैरल तक पहुंच गया था, जिससे inflation और भारत के import bill को लेकर चिंता बढ़ी थी। इसलिए आज की तेजी को फिलहाल strong rebound के रूप में देखा जा रहा है, न कि लंबी अवधि की तेजी की पक्की शुरुआत के रूप में। निवेशकों के लिए राहत, लेकिन सावधानी जरूरी आज की तेजी ने बाजार में भरोसा जरूर लौटाया है, लेकिन लगातार ऊंचे तेल दाम, वैश्विक बॉन्ड यील्ड और Middle East geopolitical tensions अभी भी बाजार की दिशा प्रभावित कर सकते हैं। अगर Nifty 24,200 के ऊपर मजबूती बनाए रखता है, तो बाजार में recovery का momentum आगे बढ़ सकता है। वहीं इस स्तर से नीचे फिसलने पर हालिया volatility दोबारा बढ़ सकती है। स्रोत: Reuters, Business Standard, Amar Ujala Jai Rashtra News

आगे और पढ़ें

ईरान के साथ कारोबार पर Trump की चेतावनी! भारत के एक्सपोर्ट और तेल कारोबार पर बढ़ सकती है मुश्किल

नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने ईरान के साथ आर्थिक संबंध रखने वाले देशों, कंपनियों और वित्तीय संस्थानों को कड़ी चेतावनी दी है। Trump ने ईरान के खिलाफ नए अभियान को “Economic D-Day” बताते हुए कहा कि जो भी देश Tehran को आर्थिक मदद या किसी तरह की “lifeline” देगा, उसे गंभीर आर्थिक परिणामों का सामना करना पड़ सकता है। भारत के लिए क्यों अहम है Trump की चेतावनी? भारत और ईरान के बीच व्यापार पिछले कुछ वर्षों में काफी कम हुआ है, लेकिन दोनों देशों के बीच अभी भी महत्वपूर्ण कारोबारी संबंध हैं। 2025-26 में भारत का ईरान को निर्यात करीब $1.25 बिलियन रहा, जबकि भारत ने ईरान से करीब $370 मिलियन का आयात किया। यानी भारत का ईरान के साथ लगभग $880 मिलियन का व्यापार अधिशेष रहा। Trump की नई चेतावनी ऐसे समय आई है जब अमेरिका ईरान की अर्थव्यवस्था और तेल कारोबार पर दबाव बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। यदि भविष्य में secondary sanctions या अन्य प्रतिबंधों का दायरा बढ़ता है, तो ईरान के साथ कारोबार करने वाली भारतीय कंपनियों के लिए भुगतान और लॉजिस्टिक्स मुश्किल हो सकते हैं। भारत ईरान को क्या-क्या भेजता है? भारत का ईरान को निर्यात केवल तेल से जुड़ा नहीं है। भारतीय कंपनियां ईरान को बासमती चावल, चाय, चीनी, फल, मसाले, अनाज और दवाइयां समेत कई उत्पाद भेजती हैं। ऐसे में अमेरिकी दबाव बढ़ने पर कृषि उत्पादों और फार्मास्यूटिकल्स से जुड़े निर्यातकों पर भी असर पड़ने की आशंका है। सबसे बड़ी चिंता भुगतान व्यवस्था और शिपिंग को लेकर है। यदि अमेरिकी प्रतिबंधों का enforcement और कड़ा होता है, तो भारतीय कारोबारियों को ईरानी खरीदारों से भुगतान प्राप्त करने और माल भेजने में अतिरिक्त मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है। तेल कारोबार पर भी नजर ईरान से जुड़ा संकट भारत के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि Strait of Hormuz वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का बेहद महत्वपूर्ण मार्ग है। वहां जारी तनाव और समुद्री यातायात में व्यवधान के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है। 19 अगस्त को Brent crude करीब $92 प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया था। भारत दुनिया के बड़े तेल आयातकों में शामिल है। इसलिए लंबे समय तक ऊंची crude prices रहने पर देश के import bill, पेट्रोल-डीजल की कीमतों और महंगाई पर दबाव बढ़ सकता है। भारत के लिए एक राहत भी हालांकि, भारतीय निर्यातकों के लिए पूरी तस्वीर नकारात्मक नहीं है। वैश्विक सप्लाई में व्यवधान के बीच भारतीय रिफाइनरियां और ईंधन निर्यातक बढ़ी हुई मांग का फायदा भी उठा रहे हैं। Reuters के अनुसार भारतीय रिफाइनरियां वैश्विक तेल आपूर्ति में व्यवधान के बीच उच्च क्षमता पर काम कर रही हैं और एशियाई बाजारों में ईंधन की आपूर्ति बढ़ा रही हैं। इसके अलावा, भारत का ईरान के साथ मौजूदा व्यापार आकार देश की कुल अर्थव्यवस्था की तुलना में सीमित है। इसलिए तत्काल बड़ा झटका तय नहीं है, लेकिन तेल कीमतों और शिपिंग लागत में लगातार बढ़ोतरी भारत के लिए ज्यादा महत्वपूर्ण जोखिम बन सकती है। Trump ने क्या कहा? Trump ने कहा है कि जो देश या संस्थाएं ईरान को वित्तीय या कारोबारी मदद उपलब्ध कराती हैं, उन्हें “TREMENDOUS Economic Consequences” का सामना करना पड़ सकता है। उन्होंने ईरानी तेल की कथित तस्करी, cash transfers, currency swaps, exchange houses, ship registries और front companies पर भी कार्रवाई की बात कही है। अभी Trump ने यह स्पष्ट नहीं किया है कि भारत समेत किन देशों पर किस तरह की नई कार्रवाई होगी। इसलिए फिलहाल भारत के लिए संभावित जोखिम को लेकर चिंता है, लेकिन किसी तत्काल भारतीय व्यापार पर नए अमेरिकी प्रतिबंध की घोषणा नहीं हुई है। आगे क्या होगा? अमेरिका के अगले कदम और Strait of Hormuz की स्थिति भारत के लिए सबसे अहम फैक्टर होंगे। अगर तनाव लंबा चलता है और crude oil लगातार महंगा रहता है, तो भारत के आयात बिल और महंगाई पर दबाव बढ़ सकता है। वहीं अमेरिकी प्रतिबंधों का दायरा बढ़ने पर ईरान के साथ व्यापार करने वाले भारतीय निर्यातकों को भी नई compliance और payment चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। फिलहाल भारत के लिए सबसे बड़ी चुनौती तेल की कीमत, शिपिंग सुरक्षा और ईरान के साथ व्यापार को अमेरिकी प्रतिबंधों से अलग बनाए रखना होगी। स्रोत: Reuters, NDTV, Times of India, AP Jai Rashtra News

आगे और पढ़ें

कश्मीर पर अमेरिकी राजदूत का बड़ा बयान! J&K को बताया ‘भारत का महत्वपूर्ण हिस्सा’, पाकिस्तान ने जताई कड़ी आपत्ति

श्रीनगर: जम्मू-कश्मीर को लेकर भारत, अमेरिका और पाकिस्तान के बीच कूटनीतिक हलचल तेज हो गई है। भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने बुधवार को श्रीनगर दौरे के दौरान जम्मू-कश्मीर को “भारत का महत्वपूर्ण हिस्सा” बताया। उनके इस बयान के बाद पाकिस्तान ने अमेरिकी राजनयिक को तलब कर औपचारिक विरोध दर्ज कराया। पहली बार जम्मू-कश्मीर पहुंचे अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने जम्मू-कश्मीर के अपने पहले दौरे के दौरान मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला से मुलाकात की। बैठक के बाद उन्होंने क्षेत्र की सुरक्षा स्थिति में सुधार की सराहना की और कहा कि केंद्र तथा जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने सुरक्षा बेहतर करने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। गोर ने जम्मू-कश्मीर की प्राकृतिक सुंदरता की भी तारीफ की और संकेत दिया कि अमेरिका क्षेत्र को लेकर अपनी मौजूदा ट्रैवल एडवाइजरी की समीक्षा कर सकता है, ताकि अधिक अमेरिकी पर्यटक यहां आ सकें। पाकिस्तान ने अमेरिकी राजनयिक को किया तलब अमेरिकी राजदूत के बयान पर पाकिस्तान ने कड़ा रुख अपनाया। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने इस्लामाबाद में अमेरिकी चार्ज डी’अफेयर्स नताली बेकर को तलब कर विरोध दर्ज कराया। पाकिस्तान ने जम्मू-कश्मीर को भारत का हिस्सा बताए जाने वाली टिप्पणी को खारिज करते हुए इसे “तथ्यात्मक रूप से गलत” बताया। इस्लामाबाद ने कहा कि जम्मू-कश्मीर की अंतिम स्थिति को लेकर उसका अपना दावा है और उसने अमेरिकी राजदूत की टिप्पणी को स्वीकार करने से इनकार किया है। भारत-अमेरिका संबंधों के लिए क्यों अहम है बयान? सर्जियो गोर का बयान इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि यह ऐसे समय आया है जब अमेरिका भारत और पाकिस्तान दोनों के साथ संवेदनशील कूटनीतिक संबंधों को संभाल रहा है। जम्मू-कश्मीर लंबे समय से दोनों देशों के बीच विवाद का प्रमुख मुद्दा रहा है। हालांकि, एक राजदूत की टिप्पणी को पूरी अमेरिकी विदेश नीति में औपचारिक बदलाव मानना जल्दबाजी होगी। फिलहाल उपलब्ध रिपोर्टों में गोर के बयान और ट्रैवल एडवाइजरी की समीक्षा की बात सामने आई है। कश्मीर में पर्यटन को लेकर भी बड़ा संकेत गोर ने जम्मू-कश्मीर की सुरक्षा स्थिति में सुधार का उल्लेख करते हुए अमेरिकी यात्रा चेतावनी को कम करने की संभावना जताई। यदि भविष्य में एडवाइजरी का स्तर बदला जाता है, तो इससे जम्मू-कश्मीर में विदेशी पर्यटन को बढ़ावा मिलने की उम्मीद की जा सकती है। पाकिस्तान की आपत्ति से बढ़ी कूटनीतिक हलचल अमेरिकी राजदूत की टिप्पणी और पाकिस्तान के विरोध ने जम्मू-कश्मीर को एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक चर्चा के केंद्र में ला दिया है। भारत की ओर से जम्मू-कश्मीर को अपना अभिन्न हिस्सा बताया जाता रहा है, जबकि पाकिस्तान इस स्थिति को स्वीकार नहीं करता। फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अमेरिकी राजदूत ने श्रीनगर में J&K को भारत का “महत्वपूर्ण हिस्सा” बताया और इसके तुरंत बाद पाकिस्तान ने अमेरिकी राजनयिक को तलब कर विरोध दर्ज कराया। स्रोत: Indian Express, Hindustan Times, Reuters/BDNews24, Anadolu, Economic Times Jai Rashtra News

आगे और पढ़ें

भारत-पाकिस्तान हॉकी महामुकाबला खत्म! India ने Pakistan को 5-3 से हराकर Hockey World Cup के दूसरे दौर में बनाई जगह

अम्स्टेलवीन: भारत ने हॉकी विश्व कप 2026 के सबसे बहुप्रतीक्षित मुकाबलों में पाकिस्तान को 5-3 से हराकर टूर्नामेंट के दूसरे दौर में जगह बना ली। नीदरलैंड्स के अम्स्टेलवीन स्थित वागेनर स्टेडियम में खेले गए पूल-D के इस मुकाबले में भारतीय टीम ने शुरुआत से ही आक्रामक हॉकी खेली। इस जीत के साथ भारत ने पूल-D में दूसरा स्थान हासिल किया, जबकि पाकिस्तान का विश्व कप अभियान यहीं समाप्त हो गया। हरमनप्रीत और अभिषेक का शानदार प्रदर्शन भारत की जीत में कप्तान हरमनप्रीत सिंह और फॉरवर्ड अभिषेक सबसे बड़े सितारे रहे। दोनों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए दो-दो गोल किए। हरमनप्रीत ने 5वें और 21वें मिनट में पेनल्टी कॉर्नर को गोल में बदला। वहीं अभिषेक ने 11वें और 24वें मिनट में फील्ड गोल करके भारत को मजबूत स्थिति में पहुंचाया। हार्दिक सिंह ने बढ़ाई भारत की बढ़त भारत के लिए पांचवां गोल उपकप्तान हार्दिक सिंह ने किया। उन्होंने 35वें मिनट में मिले पेनल्टी स्ट्रोक को गोल में बदलकर भारत की बढ़त को 5-2 कर दिया। इसके बाद पाकिस्तान ने वापसी की कोशिश जरूर की, लेकिन भारतीय टीम ने आखिरी क्वार्टर में दबाव को संभालते हुए मुकाबला 5-3 से अपने नाम कर लिया। पाकिस्तान की वापसी की कोशिश नाकाम भारत ने शुरुआत में ही पाकिस्तान पर दबाव बनाते हुए बढ़त हासिल कर ली थी। पाकिस्तान ने हन्नान शाहिद और सुफयान खान के गोलों के जरिए मुकाबले में वापसी की कोशिश की, लेकिन भारतीय टीम ने महत्वपूर्ण मौकों पर अपनी बढ़त बनाए रखी। पाकिस्तान को इस मुकाबले में हर हाल में जीत की जरूरत थी। हार के साथ उसका विश्व कप अभियान समाप्त हो गया। टीम टूर्नामेंट के पूल चरण में एक भी मैच नहीं जीत सकी। भारत दूसरे दौर में पहुंचा 5-3 की जीत के बाद भारत ने पूल-D में 6 अंकों के साथ दूसरा स्थान हासिल किया और दूसरे दौर यानी Pool E में जगह बनाई। इंग्लैंड 9 अंकों के साथ पूल में शीर्ष पर रहा। दूसरे दौर में भारत के सामने अब और भी कड़ी चुनौती होगी। मौजूदा विश्व चैंपियन नीदरलैंड्स भारत के Pool E में निश्चित प्रतिद्वंद्वी हैं, जबकि दूसरे प्रतिद्वंद्वी का निर्धारण अन्य मुकाबलों के परिणाम से होगा। जीत के बावजूद डिफेंस चिंता का विषय भारत ने मुकाबला जीत लिया, लेकिन पाकिस्तान के तीन गोल भारतीय टीम के लिए चिंता का कारण भी रहे। टीम ने शुरुआती मुकाबलों में भी कुछ रक्षात्मक कमजोरियां दिखाई थीं। अब दूसरे दौर में मजबूत टीमों के खिलाफ भारत को डिफेंस में सुधार करना होगा। टूर्नामेंट के अगले चरण में एक छोटी गलती भी टीम की सेमीफाइनल की राह मुश्किल कर सकती है। भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ अपनी शानदार बढ़त को बरकरार रखते हुए एक और यादगार जीत दर्ज की है। अब भारतीय टीम की नजर Hockey World Cup के सेमीफाइनल में जगह बनाने पर होगी। स्रोत: FIH, Olympics.com, NDTV Sports, PTI Jai Rashtra News

आगे और पढ़ें

PM CARES Fund: ₹8,452 करोड़ का फंड, FY25 में खर्च सिर्फ ₹87.85 लाख!

नई दिल्ली: PM CARES Fund एक बार फिर चर्चा में है। ताजा ऑडिट स्टेटमेंट के मुताबिक 31 मार्च 2025 तक फंड का कुल बैलेंस ₹8,452.06 करोड़ था, जबकि वित्त वर्ष 2024-25 में इससे सिर्फ ₹87.85 लाख के भुगतान दर्ज हुए। आंकड़े सामने आने के बाद फंड के इस्तेमाल को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। 93% रकम फिक्स्ड डिपॉजिट में ऑडिट आंकड़ों के अनुसार फंड की करीब ₹7,846.65 करोड़ राशि फिक्स्ड डिपॉजिट में थी, जबकि लगभग ₹605.41 करोड़ सेविंग बैंक खातों में रखे गए थे। यानी कुल बैलेंस का लगभग 93% हिस्सा फिक्स्ड डिपॉजिट में था। FY2024-25 में फिक्स्ड डिपॉजिट से करीब ₹469.38 करोड़ ब्याज भी मिला। ब्याज आय फंड की वित्तीय स्थिति मजबूत होने की प्रमुख वजहों में शामिल रही। ₹87.85 लाख में ज्यादातर रकम बच्चों की योजना पर वित्त वर्ष 2024-25 में PM CARES से कुल ₹87.85 लाख का भुगतान हुआ। इसमें लगभग पूरी राशि यानी ₹87.84 लाख PM CARES for Children Scheme के तहत खर्च हुई। पिछले वित्त वर्ष में कुल भुगतान करीब ₹15.6 करोड़ था। ₹8,452 करोड़ के क्लोजिंग बैलेंस की तुलना में FY25 का यह भुगतान करीब 0.01% है। हालांकि, यह सिर्फ एक वित्त वर्ष के भुगतान और उस वर्ष के अंत में मौजूद बैलेंस की तुलना है; इसे फंड की स्थापना से अब तक के कुल खर्च का प्रतिशत नहीं माना जाना चाहिए। फंड का बैलेंस एक साल में बढ़ा PM CARES का बैलेंस FY2023-24 में करीब ₹7,173 करोड़ था, जो मार्च 2025 तक बढ़कर ₹8,452 करोड़ से ज्यादा हो गया। इसी अवधि में घरेलू स्वैच्छिक योगदान करीब ₹479 करोड़ रहा, जबकि पिछले साल यह करीब ₹682 करोड़ था। बैलेंस बढ़ने में ब्याज आय और अन्य वित्तीय मदों की भी अहम भूमिका रही। खर्च को लेकर राजनीतिक बहस तेज ताजा आंकड़े सार्वजनिक होने के बाद विपक्ष और अन्य आलोचकों ने सवाल उठाए हैं कि इतने बड़े फंड के मुकाबले FY25 में खर्च इतनी कम क्यों रही। कांग्रेस नेता रणदीप सुरजेवाला ने भी ₹87.85 लाख के खर्च और फिक्स्ड डिपॉजिट में रखी बड़ी राशि को लेकर सवाल उठाए हैं। वहीं, फंड के समर्थक पक्ष से यह तर्क सामने आया है कि PM CARES का उद्देश्य आपात स्थितियों के लिए वित्तीय संसाधन उपलब्ध रखना है और किसी एक वित्त वर्ष में कम खर्च होना अपने आप में वित्तीय अनियमितता साबित नहीं करता। PM CARES Fund क्या है? Prime Minister’s Citizen Assistance and Relief in Emergency Situations (PM CARES) Fund की स्थापना मार्च 2020 में कोविड-19 महामारी के दौरान की गई थी। यह एक सार्वजनिक धर्मार्थ ट्रस्ट के रूप में काम करता है और इसका उद्देश्य आपातकालीन परिस्थितियों में सहायता प्रदान करना है। ताजा ऑडिट आंकड़ों ने एक बार फिर फंड के बड़े कॉर्पस, कम वार्षिक भुगतान और निवेश पैटर्न को राष्ट्रीय बहस के केंद्र में ला दिया है। स्रोत: PM CARES Fund Audit Statement, India Today, PTI, Tribune India Jai Rashtra News

आगे और पढ़ें

मुंबई 3.0 की तैयारी! 124 गांवों को मिलाकर बनेगी ‘थर्ड मुंबई’, सिंगापुर-हांगकांग जैसी हाईटेक सिटी!

मुंबई: मुंबई महानगर क्षेत्र में एक नए शहरी केंद्र को विकसित करने की योजना तेजी से आगे बढ़ रही है। ‘थर्ड मुंबई’ या Karnala-Sai-Chirner (KSC) New Town के नाम से प्रस्तावित यह शहर रायगढ़ जिले के 124 गांवों और करीब 323.44 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में विकसित किया जा रहा है। इसका उद्देश्य मुंबई और नवी मुंबई पर बढ़ते शहरी दबाव को कम करना और एक आधुनिक आर्थिक एवं लॉजिस्टिक्स हब तैयार करना है। 124 गांवों में बनेगा नया शहरी केंद्र थर्ड मुंबई में उरण, पनवेल और पेण तहसीलों के 124 गांव शामिल हैं। महाराष्ट्र सरकार ने अक्टूबर 2024 में इस क्षेत्र को KSC New Town के रूप में अधिसूचित किया था और MMRDA को New Town Development Authority बनाया गया है। यह इलाका अटल सेतु, नवी मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट और जवाहरलाल नेहरू पोर्ट जैसे प्रमुख इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के बेहद करीब है। यही कनेक्टिविटी इस नए शहर को भविष्य के बड़े आर्थिक केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना का आधार है। सिंगापुर की कंपनी तैयार करेगी मास्टर प्लान महाराष्ट्र सरकार ने थर्ड मुंबई के मास्टर प्लान के लिए सिंगापुर की Surbana Jurong को कंसल्टेंट के तौर पर मंजूरी दी है। योजना में आधुनिक शहरी नियोजन, लॉजिस्टिक्स, बिजनेस डिस्ट्रिक्ट, आवासीय क्षेत्र और बेहतर परिवहन कनेक्टिविटी पर जोर दिया जा रहा है। हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि सिंगापुर या हांगकांग जैसी हाईटेक सिटी बनना अभी एक विजन/लक्ष्य के रूप में देखा जा रहा है, न कि पूरी तरह तैयार योजना के रूप में। विस्तृत मास्टर प्लान अभी विकास प्रक्रिया में है। ₹4,000 करोड़ का बड़ा बजट MMRDA के 2026-27 बजट में KSC New Town के लिए करीब ₹4,000 करोड़ का प्रावधान किया गया है। परियोजना का फोकस बड़े पैमाने पर इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने पर है, ताकि नए शहरी क्षेत्र को मुंबई और नवी मुंबई के मौजूदा नेटवर्क से बेहतर तरीके से जोड़ा जा सके। प्रस्तावित शहर में लॉजिस्टिक्स, डेटा सेंटर, IT/ITeS, शिक्षा, स्वास्थ्य, आवासीय और व्यावसायिक गतिविधियों के लिए जगह विकसित करने की योजना बताई गई है। जमीन अधिग्रहण को लेकर किसानों की चिंता परियोजना को लेकर जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है। MMRDA ने 124 गांवों के जमीन मालिकों से सहमति और संबंधित दस्तावेज जमा करने की प्रक्रिया शुरू की है। वहीं, कुछ स्थानीय किसान और सामाजिक कार्यकर्ता परियोजना का विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि विकास के नाम पर किसानों की जमीन और स्थानीय हितों की पर्याप्त सुरक्षा होनी चाहिए। मुंबई के भविष्य की नई तस्वीर? थर्ड मुंबई का लक्ष्य मौजूदा मुंबई और नवी मुंबई पर बढ़ते दबाव को कम करना है। एयरपोर्ट, पोर्ट और अटल सेतु से कनेक्टिविटी के कारण यह क्षेत्र भविष्य में कारोबार, लॉजिस्टिक्स और टेक्नोलॉजी के लिए महत्वपूर्ण केंद्र बन सकता है। फिलहाल परियोजना अभी निर्माण और नियोजन के चरण में है। आने वाले समय में मास्टर प्लान, जमीन अधिग्रहण और इंफ्रास्ट्रक्चर विकास की प्रगति तय करेगी कि ‘मुंबई 3.0’ वास्तव में देश के सबसे आधुनिक नए शहरों में अपनी जगह बना पाती है या नहीं। स्रोत: MMRDA, Indian Express, NDTV, Times of India Jai Rashtra News

आगे और पढ़ें
Translate »