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जंतर-मंतर पर छात्र प्रदर्शन के बीच AISA की नेहा बोरा हिरासत में, CEC के खिलाफ प्रदर्शन में सैकड़ों डिटेन

नई दिल्ली: दिल्ली के जंतर-मंतर पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ 2 अक्टूबर को हुए प्रदर्शन के दौरान All India Students’ Association यानी AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में लिया। उनके साथ पूर्व दिल्ली मुख्यमंत्री आतिशी, AAP नेता सौरभ भारद्वाज, कार्यकर्ता योगेंद्र यादव और कई छात्र व राजनीतिक कार्यकर्ता भी हिरासत में लिए गए। प्रदर्शनकारी SIR और मतदाता सूची से जुड़े कथित अनियमितताओं को लेकर CEC के इस्तीफे की मांग कर रहे थे। जंतर-मंतर पहुंचने की कोशिश के दौरान हिरासत प्रदर्शनकारी जंतर-मंतर की ओर बढ़ने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन पुलिस ने उन्हें कई स्थानों पर रोक दिया। नेहा बोरा और AISA के अन्य कार्यकर्ता भी प्रदर्शन स्थल की ओर बढ़ रहे थे, तभी पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया। करीब 500 से 700 लोगों को हिरासत में लेने की रिपोर्ट अलग-अलग मीडिया रिपोर्टों में हिरासत में लिए गए लोगों की संख्या अलग बताई गई है। The Indian Express ने करीब 500 लोगों को हिरासत में लिए जाने की जानकारी दी, जबकि अन्य रिपोर्टों में यह संख्या लगभग 700 बताई गई। हिरासत में लिए गए प्रदर्शनकारियों को बसों के जरिए विभिन्न पुलिस स्टेशनों पर ले जाया गया। नेहा बोरा ने प्रदर्शन जारी रखने की अपील की हिरासत में लिए जाने के बाद भी नेहा बोरा ने प्रदर्शनकारियों से आंदोलन जारी रखने की अपील की। उन्होंने समर्थकों से जंतर-मंतर लौटने और कथित मतदाता अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन जारी रखने को कहा। आतिशी और सौरभ भारद्वाज भी डिटेन पुलिस कार्रवाई में केवल छात्र संगठन के सदस्य ही नहीं बल्कि कई राजनीतिक नेता भी हिरासत में लिए गए। पूर्व दिल्ली मुख्यमंत्री आतिशी, AAP दिल्ली प्रमुख सौरभ भारद्वाज और सामाजिक कार्यकर्ता योगेंद्र यादव भी उन प्रमुख लोगों में शामिल थे जिन्हें पुलिस ने डिटेन किया। SIR विवाद बना प्रदर्शन का मुख्य मुद्दा प्रदर्शनकारी Special Intensive Revision यानी SIR और मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं को लेकर सवाल उठा रहे थे। उनकी प्रमुख मांगों में CEC ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा और मतदाता सूची संशोधन प्रक्रिया को लेकर जवाबदेही शामिल थी। ये प्रदर्शनकारियों के आरोप और मांगें हैं; चुनाव आयोग का इन आरोपों पर अलग आधिकारिक रुख है। दिल्ली पुलिस ने पहले नहीं दी थी अनुमति दिल्ली पुलिस ने प्रस्तावित प्रदर्शन के लिए पहले अनुमति देने से इनकार कर दिया था। इसके बावजूद विभिन्न छात्र संगठनों और राजनीतिक समूहों से जुड़े लोग जंतर-मंतर और आसपास के क्षेत्रों में पहुंचे। पुलिस ने दस या उससे अधिक लोगों के समूहों को रोकते हुए कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया। AISA और अन्य छात्र संगठन रहे सक्रिय AISA के अलावा SFI, NSUI और दूसरे छात्र संगठनों से जुड़े कार्यकर्ता भी प्रदर्शन में शामिल हुए। छात्र संगठनों ने इसे मतदाता अधिकार और लोकतांत्रिक प्रक्रिया से जुड़ा मुद्दा बताया, जबकि पुलिस ने कानून-व्यवस्था और बिना अनुमति जुटने को कार्रवाई का आधार बताया। हिरासत के खिलाफ वाम दलों ने जताई नाराजगी वाम दलों ने छात्रों और युवा प्रदर्शनकारियों की हिरासत की आलोचना की। CPM ने बयान जारी कर हिरासत में लिए गए प्रदर्शनकारियों को लेकर आपत्ति जताई और SIR तथा CEC के खिलाफ उठाई जा रही मांगों का समर्थन किया। 3 अक्टूबर को भी जंतर-मंतर पर हलचल 2 अक्टूबर की पुलिस कार्रवाई के बाद 3 अक्टूबर को भी प्रदर्शनकारी और कार्यकर्ता जंतर-मंतर लौटते दिखाई दिए। इसके चलते दिल्ली पुलिस फिर सतर्क रही और इलाके में सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखी गई। SIR विवाद पर जारी है राजनीतिक टकराव SIR और चुनाव आयोग की भूमिका को लेकर विपक्षी दलों, छात्र संगठनों और सामाजिक समूहों का विरोध जारी है। वहीं इन आरोपों की तथ्यात्मक और कानूनी स्थिति संबंधित संस्थाओं और अदालतों में उपलब्ध रिकॉर्ड तथा आगे की प्रक्रिया से तय होगी। source – The Indian Express / The Times of India / PTI / The Week जय राष्ट्र न्यूज़

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नई दिल्ली | जंतर-मंतर पर छात्रों की गिरफ्तारी का सिलसिला जारी, प्रदर्शनकारियों में नाराजगी!

नई दिल्ली: जंतर-मंतर पर SIR और चुनाव आयोग से जुड़े मुद्दों को लेकर आयोजित प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में छात्रों और कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया। रिपोर्टों के अनुसार 700 से ज्यादा लोगों को पुलिस ने डिटेन किया, जिनमें AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा और AAP के कुछ नेता भी शामिल हैं। प्रदर्शन की अनुमति नहीं मिलने और बड़े स्तर पर पुलिस कार्रवाई से प्रदर्शनकारियों में नाराजगी देखी गई। सुबह से ही जंतर-मंतर पर भारी सुरक्षा 2 अक्टूबर की सुबह से ही जंतर-मंतर और आसपास के इलाकों में सुरक्षा कड़ी कर दी गई थी। दिल्ली पुलिस के साथ Central Armed Police Forces के जवान भी तैनात किए गए और कई स्थानों पर बैरिकेडिंग की गई। पुलिस को हजारों लोगों के प्रदर्शन में पहुंचने की संभावना थी। प्रदर्शन की अनुमति नहीं मिली दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन को अनुमति नहीं दी थी। इसके बावजूद छात्र संगठनों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और राजनीतिक नेताओं से जुड़े लोग मौके पर पहुंचे। प्रदर्शन का मुख्य मुद्दा Special Intensive Revision यानी SIR और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर उठाए जा रहे सवाल थे। 700 से ज्यादा लोगों को हिरासत में लेने की रिपोर्ट दिन बढ़ने के साथ पुलिस ने प्रदर्शन स्थल से बड़ी संख्या में लोगों को हिरासत में लेना शुरू किया। रिपोर्टों के अनुसार 700 से अधिक प्रदर्शनकारियों को डिटेन किया गया। इनमें छात्र नेता, सामाजिक कार्यकर्ता और कई राजनीतिक चेहरे शामिल रहे। AISA की नेहा बोरा भी हिरासत में All India Students’ Association यानी AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा भी हिरासत में लिए गए लोगों में शामिल रहीं। AISA और अन्य संगठनों ने SIR तथा चुनाव आयोग से जुड़े मुद्दों पर प्रदर्शन का आह्वान किया था। AAP नेताओं को भी पुलिस ने डिटेन किया AAP नेता सौरभ भारद्वाज और विधायक संजीव झा को भी पुलिस ने हिरासत में लिया। सौरभ भारद्वाज ने पुलिस वैन से जारी एक वीडियो में लोगों से जंतर-मंतर पहुंचने की अपील की और दावा किया कि उनका प्रदर्शन शांतिपूर्ण था। यह उनका राजनीतिक दावा है। कई मेट्रो स्टेशनों के एंट्री-एग्जिट बंद सुरक्षा कारणों से दिल्ली मेट्रो के कई स्टेशनों के entry और exit gates बंद किए गए। रिपोर्टों के अनुसार 11 मेट्रो स्टेशनों पर आवाजाही सीमित की गई, जबकि Rajiv Chowk, Central Secretariat और कुछ अन्य interchange stations पर ट्रेन बदलने की सुविधा जारी रही। ट्रैफिक डायवर्जन भी लागू दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने Connaught Place, Parliament Street, Tolstoy Marg और जंतर-मंतर के आसपास ट्रैफिक डायवर्जन लागू किए। लोगों को इन इलाकों से बचकर वैकल्पिक मार्ग इस्तेमाल करने की सलाह दी गई। प्रदर्शनकारियों में नाराजगी हिरासत और प्रतिबंधों के बाद प्रदर्शनकारियों ने पुलिस कार्रवाई पर नाराजगी जताई। आयोजकों का कहना है कि लोकतांत्रिक मुद्दों पर शांतिपूर्ण विरोध उनका अधिकार है, जबकि पुलिस प्रशासन का तर्क है कि अनुमति नहीं होने और कानून-व्यवस्था की स्थिति को देखते हुए कार्रवाई की गई। SIR बना प्रदर्शन का मुख्य मुद्दा प्रदर्शनकारी मतदाता सूची के Special Intensive Revision और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहे हैं। कई विपक्षी दलों और छात्र संगठनों ने Chief Election Commissioner ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग भी उठाई है। चुनाव आयोग और सरकार इन आरोपों से सहमत नहीं हैं। दिल्ली में पूरे दिन तनावपूर्ण माहौल जंतर-मंतर और आसपास पूरे दिन भारी पुलिस बल तैनात रहा। प्रदर्शनकारियों की गिरफ्तारी, मेट्रो स्टेशन बंद होने और यातायात प्रतिबंधों के कारण मध्य दिल्ली के कई हिस्सों में सामान्य आवाजाही प्रभावित हुई। source – The Times of India / The Indian Express / Hindustan Times / PTI जय राष्ट्र न्यूज़

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जंतर-मंतर पर प्रदर्शन, कई प्रदर्शनकारी हिरासत में; CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग

नई दिल्ली: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और गिरफ्तारी की मांग को लेकर 25 सितंबर 2026 को दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन हुआ। इस दौरान दिल्ली पुलिस ने AISA से जुड़े छात्रों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और कुछ राजनीतिक नेताओं समेत कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया। पुलिस का कहना है कि प्रदर्शन के लिए आवश्यक अनुमति नहीं ली गई थी। AISA और सिविल सोसाइटी समूहों ने किया प्रदर्शन प्रदर्शन का आयोजन All India Students’ Association (AISA) की दिल्ली इकाई और कुछ सिविल सोसाइटी समूहों ने किया था। प्रदर्शनकारी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और उन्हें पद से हटाने की मांग कर रहे थे। प्रदर्शन के दौरान “ज्ञानेश कुमार को गिरफ्तार करो” जैसे नारे भी लगाए गए। कई प्रदर्शनकारी हिरासत में रिपोर्ट्स के मुताबिक दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन के दौरान कई लोगों को हिरासत में लिया। हिरासत में लिए गए या पुलिस द्वारा रोके गए प्रमुख लोगों में AISA अध्यक्ष नेहा बोरा, सामाजिक कार्यकर्ता योगेंद्र यादव और CPI(ML) Liberation के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य शामिल थे। कुछ रिपोर्ट्स में करीब 40 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने की बात कही गई है। मनोज झा और प्रशांत भूषण भी प्रदर्शन में शामिल आयोजकों के मुताबिक प्रदर्शन में RJD सांसद मनोज झा, वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण, सामाजिक कार्यकर्ता अंजलि भारद्वाज और कई अन्य लोग भी शामिल हुए। इसके अलावा SFI और Indian Youth Congress से जुड़े कार्यकर्ताओं ने भी चुनाव आयोग और SIR प्रक्रिया के खिलाफ अलग-अलग विरोध कार्यक्रमों में हिस्सा लिया। पुलिस ने क्यों रोका प्रदर्शन? दिल्ली पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के लिए कोई आवेदन या अनुमति नहीं ली गई थी। पुलिस का कहना है कि इसी वजह से प्रदर्शनकारियों को वहां से हटाया गया और कई लोगों को हिरासत में लिया गया। जंतर-मंतर के आसपास बैरिकेडिंग भी की गई थी ताकि प्रदर्शनकारी आगे न बढ़ सकें। SIR विवाद बना प्रदर्शन की बड़ी वजह यह विरोध प्रदर्शन चुनाव आयोग की Special Intensive Revision (SIR) प्रक्रिया और आयोग के भीतर मतभेदों से जुड़ी हालिया रिपोर्ट्स के बाद हुआ। The Indian Express की एक जांच रिपोर्ट में दावा किया गया था कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने मतदाता पंजीकरण, नाम हटाने और electoral roll data management से जुड़े कुछ मामलों पर लिखित आपत्तियां दर्ज की थीं। चुनाव आयोग ने बाद में कहा कि अलग-अलग राय किसी बहु-सदस्यीय संवैधानिक संस्था की निर्णय प्रक्रिया का हिस्सा हैं और SIR से जुड़े अंतिम निर्णय सर्वसम्मति से लिए गए थे। युवा कांग्रेस ने भी किया विरोध इसी दिन भारतीय युवा कांग्रेस के कार्यकर्ता भी ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर चुनाव आयोग के कार्यालय की ओर मार्च करने निकले। पुलिस ने उन्हें जंतर-मंतर मार्ग पर रोक दिया और कुछ कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया। हिरासत को लेकर भी उठा विवाद कुछ प्रदर्शनकारियों ने पुलिस कार्रवाई को लेकर आपत्ति जताई और आरोप लगाया कि उन्हें जंतर-मंतर तक पहुंचने से पहले ही रोक दिया गया। पुलिस की ओर से कहा गया कि कार्रवाई अनुमति न होने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के कारण की गई। हिरासत की परिस्थितियों को लेकर दोनों पक्षों के बयान अलग-अलग हैं। चुनाव आयोग पर जारी है राजनीतिक बहस CEC ज्ञानेश कुमार और SIR प्रक्रिया को लेकर विपक्षी दलों, छात्र संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं की ओर से सवाल उठाए जा रहे हैं। वहीं चुनाव आयोग ने अपने फैसलों को तय कानूनी और संस्थागत प्रक्रिया के अनुरूप बताया है। ऐसे में जंतर-मंतर का प्रदर्शन चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची संशोधन को लेकर जारी व्यापक राजनीतिक बहस का हिस्सा बन गया है। source – Hindustan / ThePrint / The Tribune / Amar Ujala / ABP News जय राष्ट्र न्यूज़

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CEC ज्ञानेश कुमार को CJP का 48 घंटे का अल्टीमेटम, इस्तीफा नहीं तो देशव्यापी आंदोलन की चेतावनी

नई दिल्ली: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से इस्तीफे की मांग करते हुए उन्हें 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया था। पार्टी ने चेतावनी दी कि मांग पूरी नहीं होने पर देशभर में आंदोलन शुरू किया जाएगा। यह अल्टीमेटम 24 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में दिया गया था। 26 सितंबर को समयसीमा समाप्त होने के बाद CJP ने अब 2 अक्टूबर से मुंबई से देशव्यापी आंदोलन शुरू करने की घोषणा की है। SIR विवाद को लेकर CJP ने खोला मोर्चा CJP ने यह कदम मतदाता सूचियों के Special Intensive Revision (SIR) को लेकर चल रहे विवाद के बीच उठाया है। पार्टी के संस्थापक और संयोजक अभिजीत दिपके, सह-संयोजक सौरव दास और आशुतोष रांका ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए और ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की। CJP का आरोप है कि SIR की प्रक्रिया में मतदाता अधिकार प्रभावित हो रहे हैं। ये CJP के आरोप हैं और इन्हें किसी स्वतंत्र जांच में स्थापित तथ्य नहीं माना गया है। 48 घंटे में इस्तीफा देने की रखी मांग 24 सितंबर को CJP ने कहा कि यदि ज्ञानेश कुमार 48 घंटे के भीतर पद नहीं छोड़ते हैं तो संगठन देशव्यापी विरोध प्रदर्शन करेगा। अभिजीत दिपके ने दिल्ली में फिर से बड़े प्रदर्शन की चेतावनी देते हुए इसे ‘Jantar Mantar 2.0’ तक ले जाने की बात कही थी। आगामी चुनाव रोकने की भी मांग CJP ने केवल CEC के इस्तीफे की मांग नहीं की। संगठन ने आगामी राज्य विधानसभा चुनावों को फिलहाल रोकने, SIR प्रक्रिया को वापस लेने और मतदाता सूची को पहले की स्थिति में बहाल करने जैसी मांगें भी रखीं। India Today के मुताबिक संगठन ने SIR से जुड़े रिकॉर्ड को स्वतंत्र निगरानी में रखने और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से संबंधित 2023 के कानून में बदलाव की मांग भी की। चुनाव आयोग के भीतर मतभेद की रिपोर्ट से बढ़ा विवाद यह अल्टीमेटम उस रिपोर्ट के बाद आया जिसमें कहा गया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने करीब 10 महीनों में विभिन्न मामलों पर कम से कम 14 बार लिखित आपत्तियां दर्ज की थीं। इन आपत्तियों में मतदाता सूची, Form 6, electoral database तक पहुंच और SIR प्रक्रिया से जुड़े विषय शामिल बताए गए। चुनाव आयोग ने क्या कहा? चुनाव आयोग ने इस विवाद पर कहा है कि एक बहु-सदस्यीय संवैधानिक संस्था में अलग-अलग राय और लिखित टिप्पणियां निर्णय प्रक्रिया का सामान्य हिस्सा हैं। 26 सितंबर को जारी स्पष्टीकरण में आयोग ने कहा कि SIR से जुड़े अंतिम फैसले तीनों चुनाव आयुक्तों की सर्वसम्मति से लिए गए थे। आयोग ने यह भी कहा कि कैबिनेट सचिव को भेजे गए कुछ पत्र किसी नीति विवाद से नहीं, बल्कि एक अधिकारी के कामकाज से जुड़े थे। SIR प्रक्रिया पर आयोग ने दी सफाई चुनाव आयोग के अनुसार 24 जून 2025 को पूरे देश में SIR कराने का निर्णय सर्वसम्मति से लिया गया था। बाद में अलग-अलग राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के लिए जारी चरणबद्ध कार्यक्रमों को भी आयोग ने सामूहिक रूप से मंजूरी दी। आयोग ने यह भी कहा कि SIR के दौरान नागरिकों को दस्तावेज जमा करने और मतदाता सूची में अपना नाम शामिल कराने के लिए अतिरिक्त सुविधाएं दी जा रही हैं। 48 घंटे की समयसीमा खत्म, अब 2 अक्टूबर से आंदोलन CJP का दिया 48 घंटे का अल्टीमेटम 26 सितंबर को खत्म हो गया। इसके बाद संगठन ने 2 अक्टूबर, गांधी जयंती से मुंबई में आंदोलन शुरू करने की घोषणा की है। रिपोर्ट्स के मुताबिक मुंबई का आजाद मैदान संभावित स्थल है, हालांकि प्रदर्शन के लिए पुलिस अनुमति अभी अंतिम रूप से सुनिश्चित नहीं हुई है। CJP का कहना है कि मुंबई से शुरू होने वाला आंदोलन बाद में देश के अन्य शहरों तक ले जाया जाएगा। चुनाव आयोग विवाद पर राजनीतिक बहस तेज SIR और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर CJP के अलावा कई विपक्षी दलों ने भी सवाल उठाए हैं। वहीं चुनाव आयोग ने प्रक्रिया में अनियमितता के आरोपों को स्वीकार नहीं किया है और अपने फैसलों को कानून और तय प्रक्रिया के अनुरूप बताया है। फिलहाल CJP का आंदोलन 2 अक्टूबर से शुरू करने की घोषणा की गई है। आगे इस विवाद का असर चुनावी और राजनीतिक बहस में किस तरह दिखाई देता है, इस पर नजर रहेगी। source – India Today / Hindustan Times / The Economic Times / The Statesman जय राष्ट्र न्यूज़

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जंतर-मंतर विवाद पर CJP प्रवक्ता सौरव दास ने दिल्ली पुलिस से कार्रवाई की मांग की

नई दिल्ली, 6 सितंबर 2026: जंतर-मंतर पर हुए कथित मारपीट मामले को लेकर Cockroach Janta Party (CJP) के प्रवक्ता सौरव दास ने Delhi Police की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए स्वतंत्र भारद्वाज के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की। मामला CJP के प्रदर्शन से जुड़े संजय कुमार पर कथित हमले से संबंधित है। सौरव दास ने पुलिस कार्रवाई पर उठाए सवाल सौरव दास ने आरोप लगाया कि संजय कुमार को गंभीर चोट लगने के बावजूद शुरुआत में मामले में पर्याप्त सख्त धाराएं नहीं लगाई गईं। उन्होंने पुलिस से मामले की दोबारा गंभीरता से जांच करने और सभी जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई करने की मांग की। स्वतंत्र भारद्वाज की गिरफ्तारी की मांग लेकर पहुंची CJP 4 सितंबर को सौरव दास, CJP के co-convenor Ashutosh Ranka और अन्य समर्थक Patel Chowk से Parliament Street Police Station पहुंचे। प्रदर्शनकारियों ने स्वतंत्र भारद्वाज की गिरफ्तारी और FIR में गंभीर धाराएं जोड़ने की मांग की। Viral Video के बाद बढ़ा विवाद मामला उस समय फिर चर्चा में आया जब स्वतंत्र भारद्वाज का एक कथित podcast/video clip सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। CJP का आरोप था कि वीडियो में कथित हमले को लेकर किए गए दावों के बाद पुलिस को आरोपी के खिलाफ अधिक कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए। Delhi Police ने आरोपों को किया था खारिज Delhi Police ने CJP के कुछ आरोपों से असहमति जताई। पुलिस के मुताबिक RML Hospital की medical examination में संजय कुमार की चोट को simple injury बताया गया और skull fracture के दावे को MLC से मेल न खाने वाला बताया गया। पुलिस ने यह भी कहा कि किसी राजनीतिक दबाव या अनुचित हस्तक्षेप का आरोप तथ्यात्मक रूप से गलत है। बाद में FIR में जोड़ा गया SC/ST Act CJP के विरोध और पुलिस अधिकारियों के साथ बातचीत के बाद संबंधित FIR में Scheduled Castes and Scheduled Tribes (Prevention of Atrocities) Act की धाराएं जोड़ी गईं। इसके अलावा नाबालिग को कथित धमकियों से जुड़े मामले में अलग POCSO case दर्ज किया गया। निष्पक्ष जांच की मांग सौरव दास और CJP नेताओं का कहना है कि मामले में केवल एक व्यक्ति ही नहीं, बल्कि घटना में कथित रूप से शामिल अन्य लोगों और उसके बाद सोशल मीडिया पर दी गई धमकियों की भी जांच होनी चाहिए। मामला अब पुलिस जांच और न्यायिक प्रक्रिया के अधीन है। source – The Indian Express / NDTVजय राष्ट्र न्यूज़

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चिराग पासवान की पार्टी ने स्वतंत्र भारद्वाज के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई, नाम के गलत इस्तेमाल का लगाया आरोप

नई दिल्ली, 6 सितंबर 2026: केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान की Lok Janshakti Party (Ram Vilas) ने सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर स्वतंत्र भारद्वाज के खिलाफ दिल्ली के Parliament Street Police Station में शिकायत दर्ज कराई है। पार्टी का आरोप है कि भारद्वाज ने जंतर-मंतर पर छात्र कार्यकर्ता के पिता से कथित मारपीट के मामले में चिराग पासवान का नाम लेकर राजनीतिक संरक्षण होने का गलत दावा किया। पार्टी के Legal Cell ने दर्ज कराई शिकायत शिकायत LJP (Ram Vilas) के legal cell की ओर से दी गई है। इसमें कहा गया है कि न तो चिराग पासवान और न ही उनकी पार्टी का स्वतंत्र भारद्वाज से कोई ऐसा संबंध है, जैसा उनके वायरल interview में दावा किया गया। पार्टी ने इन सार्वजनिक बयानों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। Viral Interview में लिया था चिराग पासवान का नाम विवाद उस समय बढ़ा जब स्वतंत्र भारद्वाज का एक interview clip सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। इसमें उन्होंने कई राजनीतिक नेताओं के नाम लेते हुए उनसे करीबी संबंध होने का दावा किया था और चिराग पासवान को अपना “बड़ा भाई” बताया था। हालांकि इन दावों के समर्थन में कोई स्वतंत्र प्रमाण सामने नहीं आया है। चिराग पासवान ने दावे से बनाई दूरी चिराग पासवान ने साफ कहा कि भारद्वाज ने उनके नाम का गलत इस्तेमाल किया है। उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच और कानून के अनुसार कार्रवाई की मांग की। LJP (Ram Vilas) ने भी कहा कि पार्टी कथित हमले में घायल व्यक्ति और उसके परिवार के साथ खड़ी है। Complaint और FIR में अंतर पुलिस अधिकारियों ने 5 सितंबर तक बताया था कि पार्टी की शिकायत की जांच की जा रही है और इस specific complaint पर अलग case/FIR अभी दर्ज नहीं हुई थी। इसलिए इसे “LJP ने FIR दर्ज कराई” लिखने के बजाय “शिकायत दर्ज कराई” लिखना अधिक सही है। आज Judicial Custody में भेजे गए स्वतंत्र भारद्वाज मामले में आज, 6 सितंबर, एक नई कानूनी development सामने आई है। दिल्ली की एक अदालत ने स्वतंत्र भारद्वाज को कथित assault और अन्य आरोपों से जुड़े मामले में एक दिन की judicial custody में भेज दिया। इससे पहले पुलिस को एक दिन की custodial interrogation की अनुमति मिली थी। SC/ST Act और अन्य धाराएं भी जोड़ी गईं दिल्ली पुलिस ने संबंधित assault case में SC/ST (Prevention of Atrocities) Act और criminal intimidation से जुड़े provisions जोड़े हैं। इसके अलावा minor activist की शिकायत पर online threats और harassment से संबंधित अलग POCSO case भी दर्ज किया गया है। ये मामले अभी जांच और न्यायिक प्रक्रिया के अधीन हैं। source – PTI / The Week / The New Indian Expressजय राष्ट्र न्यूज़

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निशु आजाद के पिता से मारपीट मामले में चिराग पासवान की सफाई, बोले- स्वतंत्र भारद्वाज ने मेरे नाम का गलत इस्तेमाल किया

नई दिल्ली, 5 सितंबर 2026: जंतर-मंतर पर CJP कार्यकर्ता निशु आजाद के पिता संजय कुमार से कथित मारपीट के मामले में केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान की प्रतिक्रिया सामने आई है। उन्होंने सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर स्वतंत्र भारद्वाज द्वारा अपने नाम का इस्तेमाल किए जाने पर आपत्ति जताते हुए कहा कि उनका नाम गलत तरीके से इस विवाद से जोड़ा गया है। स्वतंत्र भारद्वाज के खिलाफ शिकायत दर्ज चिराग पासवान ने कहा कि मामले की गंभीरता को देखते हुए उन्होंने स्वतंत्र भारद्वाज के खिलाफ औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है। साथ ही दिल्ली पुलिस से निष्पक्ष जांच करने और पूरे घटनाक्रम की सच्चाई सामने लाने की मांग की है। ‘ऐसी घटना बेहद गंभीर’ पासवान ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति खुले तौर पर किसी को इतनी गंभीर चोट पहुंचाने का दावा करता है और उसके खिलाफ कार्रवाई नहीं होती, तो इससे समाज में गलत संदेश जाएगा। उन्होंने कहा कि किसी भी तरह की हिंसा के मामले में कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए। Podcast में लिया गया था चिराग पासवान का नाम विवाद उस समय बढ़ा जब स्वतंत्र भारद्वाज का एक podcast clip सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। इसमें वह कथित तौर पर निशु आजाद के पिता पर हमला करने की बात कहते हुए कई राजनीतिक नेताओं का नाम लेते नजर आए। इसी दौरान उन्होंने चिराग पासवान को भी अपना ‘बड़ा भाई’ बताया था। LJP ने किसी संबंध से किया इनकार Lok Janshakti Party (Ram Vilas) ने भी भारद्वाज के साथ किसी तरह के संबंध से इनकार किया है। पार्टी की शिकायत में कहा गया कि केंद्रीय मंत्री के नाम का इस्तेमाल कथित राजनीतिक प्रभाव दिखाने के लिए किया गया, जिसे पार्टी ने गलत और भ्रामक बताया है। दिल्ली पुलिस से निष्पक्ष जांच की मांग चिराग पासवान ने स्पष्ट किया कि वह चाहते हैं कि पुलिस बिना किसी दबाव के मामले की जांच करे। उन्होंने कहा कि उनके या अन्य नेताओं के नाम का सहारा लेकर किसी कानूनी कार्रवाई से बचने का दावा स्वीकार नहीं किया जा सकता। हिरासत में लिया जा चुका है स्वतंत्र भारद्वाज विवाद बढ़ने और प्रदर्शन के बाद दिल्ली पुलिस ने स्वतंत्र भारद्वाज को उत्तर प्रदेश से हिरासत में लिया। मामले में जांच जारी है और पुलिस पहले ही राजनीतिक हस्तक्षेप से जुड़े आरोपों को खारिज कर चुकी है। source – Times of India / Moneycontrolजय राष्ट्र न्यूज़

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स्वतंत्र भारद्वाज के इंटरव्यू में गंभीर दावे, वायरल वीडियो के बाद उठे नए सवाल; पुलिस ने राजनीतिक दबाव के आरोप नकारे

नई दिल्ली, 5 सितंबर 2026: सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर स्वतंत्र भारद्वाज के एक पॉडकास्ट इंटरव्यू के वीडियो सामने आने के बाद जंतर-मंतर पर हुई मारपीट का मामला फिर चर्चा में आ गया है। इंटरव्यू में भारद्वाज ने एक प्रदर्शनकारी के पिता पर हमला करने और राजनीतिक संपर्कों को लेकर कई गंभीर दावे किए। इसके बाद विपक्षी नेताओं और Cockroach Janta Party (CJP) ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए। प्रदर्शनकारी के पिता पर हमले को लेकर दावा वायरल पॉडकास्ट में भारद्वाज ने दावा किया कि जंतर-मंतर प्रदर्शन के दौरान उन्होंने छात्र कार्यकर्ता निशु आजाद के पिता संजय कुमार को मारा था। उन्होंने चोट की गंभीरता को लेकर भी बड़ा दावा किया, जिसके बाद वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ। राजनीतिक संरक्षण को लेकर भी कही बातें इंटरव्यू में भारद्वाज ने कुछ राजनीतिक नेताओं के साथ अपने संबंधों का दावा किया और कथित तौर पर कहा कि इन संपर्कों के कारण उन्हें जेल नहीं जाना पड़ा। इन्हीं बयानों के बाद राजनीतिक विवाद बढ़ा और कई नेताओं ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की। दिल्ली पुलिस ने दावों को बताया बेबुनियाद दिल्ली पुलिस ने राजनीतिक हस्तक्षेप के आरोपों से साफ इनकार किया है। पुलिस के मुताबिक जांच कानूनी प्रक्रिया के अनुसार की गई और किसी नेता के दबाव में कार्रवाई रोकने का दावा तथ्यों पर आधारित नहीं है। पुलिस ने यह भी कहा कि medical reports में संजय कुमार की skull fracture की पुष्टि नहीं हुई और चोट को simple injury बताया गया। भारद्वाज ने बाद में कहा—Self Defence में किया था हमला विवाद बढ़ने के बाद भारद्वाज ने NDTV को दिए एक इंटरव्यू में कहा कि वह भीड़ से घिर गए थे और उन्होंने जो किया, वह self-defence में किया था। उन्होंने अपने ऊपर लगाए जा रहे कई आरोपों से भी इनकार किया। गिरफ्तारी की मांग को लेकर दिल्ली में प्रदर्शन शुक्रवार को CJP समर्थकों और अन्य प्रदर्शनकारियों ने Parliament Street Police Station के बाहर प्रदर्शन कर भारद्वाज के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की। इसके बाद पुलिस ने उन्हें उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर से हिरासत में लिया। आरोप और पुलिस के बयान में बड़ा अंतर मामले में सबसे बड़ा सवाल भारद्वाज के वायरल इंटरव्यू में किए गए दावों और दिल्ली पुलिस के आधिकारिक version के बीच अंतर को लेकर है। जहां भारद्वाज ने गंभीर चोट और राजनीतिक संरक्षण जैसी बातें कहीं, वहीं पुलिस ने skull fracture और political interference—दोनों दावों को नकार दिया है। अब आगे की जांच और कानूनी प्रक्रिया से ही आरोपों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी। source – The Indian Express / Delhi Police / NDTVजय राष्ट्र न्यूज़

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“मोदी जी, आपने मेरी जिंदगी नरक बना दी”; 15 वर्षीय किशोरी का नया Video Viral, Kejriwal-Congress ने उठाए सवाल

नई दिल्ली: जुलाई में Jantar Mantar पर हुए youth protest के दौरान प्रधानमंत्री Narendra Modi के खिलाफ कथित आपत्तिजनक टिप्पणी को लेकर विवादों में आई 15 वर्षीय किशोरी एक नए viral video के बाद फिर चर्चा में है। वीडियो में किशोरी आरोप लगाती दिखाई देती है कि controversy के बाद उसकी जिंदगी बुरी तरह प्रभावित हुई और उसे लगातार harassment का सामना करना पड़ा। यह video 30 अगस्त से social media पर circulate होना शुरू हुआ था। Congress और Aam Aadmi Party ने इसे share किया, जबकि आज 1 सितंबर 2026 को AAP chief Arvind Kejriwal ने भी video साझा कर मामले में BJP को घेरा। “मेरी जिंदगी नरक बना दी” करीब एक मिनट के viral video में किशोरी प्रधानमंत्री को संबोधित करते हुए कहती है कि controversy के बाद उसकी जिंदगी मुश्किल हो गई है और अब वह पीछे नहीं हटेगी। उसने कहा कि उसे हर जगह अपना चेहरा छिपाना पड़ रहा है और उसके पास अब खोने के लिए कुछ नहीं बचा। वीडियो में उसने PM Modi के खिलाफ और भी तीखे शब्दों का इस्तेमाल किया। ये किशोरी के आरोप हैं। प्रधानमंत्री या उनके कार्यालय द्वारा उसे personally harass करवाने का कोई independently established evidence उपलब्ध reports में सामने नहीं आया है। July में Jantar Mantar Protest से शुरू हुआ था विवाद मामला 23 जुलाई 2026 के Jantar Mantar protest से जुड़ा है, जहां एक viral clip में एक युवती को PM Modi के खिलाफ कथित आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल करते दिखाया गया था। इसके बाद Ghaziabad की एक lawyer की complaint पर 29 जुलाई को Noida Expressway Police Station में Zero FIR दर्ज की गई। FIR में Bharatiya Nyaya Sanhita की Sections 352, 353(1) और 356(1) लगाई गईं, जो intentional insult, public mischief और defamation से संबंधित हैं। बाद में case Delhi Police को transfer किया गया। उम्र को लेकर FIR में भी हुआ था विवाद शुरुआती police और media reports में संबंधित व्यक्ति की उम्र 25 साल बताई गई थी। बाद में उसके lawyer Anil Singh ने दावा किया कि FIR में नाम, उम्र और occupation से जुड़ी जानकारियां गलत थीं और लड़की असल में 15 साल की है तथा Class 10 की पढ़ाई कर रही है। इसके बाद सामने आए apology video में भी किशोरी ने खुद को 15 वर्ष का बताया था। पहले Folded Hands के साथ मांगी थी माफी 1 अगस्त को एक apology video सामने आया था जिसमें किशोरी ने अपने पहले बयान को गलती बताते हुए कहा था कि ऐसा दोबारा नहीं होगा। उसने कहा था कि वह दोस्तों के साथ protest में पहुंची थी और आसपास के लोगों से प्रभावित होकर उसने वे बातें कही थीं। इसके बाद PM Modi ने भी एक social-media message में कहा था कि छात्रों को गलतियों के लिए समझाया और सही दिशा दिखाई जानी चाहिए। अब Apology से Defiance तक पहुंचा मामला करीब एक महीने बाद आए नए video का tone पहले वाले apology clip से बिल्कुल अलग है। इस बार किशोरी कहती दिखाई देती है कि controversy के बाद उसने अपनी freedom खो दी और online तथा offline harassment का सामना किया। Scroll की report के मुताबिक उसने आरोप लगाया कि BJP supporters द्वारा उसके परिवार से जुड़ी details और phone number social media पर circulate किए गए। इन harassment allegations की अलग-अलग घटनाओं की independent verification उपलब्ध public reporting में पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। Kejriwal ने आज Video Share कर BJP को घेरा आज 1 सितंबर को Arvind Kejriwal ने किशोरी का नया video share करते हुए कहा कि उसे controversy के बाद लंबे समय तक harassment झेलना पड़ा। Kejriwal ने लोगों से किशोरी का साथ देने की अपील की और उसके पहले apology video तथा अब सामने आए defiant statement के बीच बदलाव को लेकर सरकार पर सवाल उठाए। Congress ने भी इससे पहले video अपने official social-media handle से share कर BJP और PM Modi पर राजनीतिक हमला किया था। क्या नया Video Genuine है? नए video की authenticity पर भी सवाल उठे। The Tribune के मुताबिक किशोरी के lawyer ने कहा कि clip AI-generated नहीं है, लेकिन उन्होंने video में मौजूद व्यक्ति की identity की पुष्टि नहीं की। इसी कारण इसे definitive identification के साथ publish करना सावधानीपूर्ण नहीं होगा। Scroll ने भी लिखा कि वह independently यह verify नहीं कर पाया कि video कब और कहां record किया गया था। 1 September की Latest Situation आज 1 सितंबर 2026 तक verified स्थिति यह है: इसलिए सबसे accurate headline होगी: “मोदी जी, आपने मेरी जिंदगी नरक बना दी”; 15 वर्षीय किशोरी का नया Video Viral, Kejriwal-Congress ने उठाए सवाल नोट: “Ruchika Singh” नाम को कुछ reports में बदला हुआ नाम बताया गया है। Minor की privacy और identity verification को देखते हुए headline/body में “15 वर्षीय किशोरी” लिखना ज्यादा सुरक्षित और accurate है। स्रोत – The Tribune, ThePrint, Scroll, Times of India, India Today जय राष्ट्र न्यूज़

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आरक्षण आंदोलन पर चर्चा के दौरान डॉ. आंबेडकर और चंद्रशेखर आजाद पर कथित आपत्तिजनक टिप्पणी; अजीत भारती पर FIR, कोर्ट पहुंचे YouTuber

नई दिल्ली: दिल्ली के जंतर-मंतर पर जाति-आधारित आरक्षण व्यवस्था में बदलाव की मांग को लेकर हुए ‘Reservation Hatao Andolan’ के बाद विवाद अब कानूनी लड़ाई में बदल गया है। YouTuber और commentator अजीत भारती के खिलाफ दिल्ली पुलिस ने एक FIR दर्ज की है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि उन्होंने अपने YouTube कार्यक्रम में नागीना सांसद चंद्रशेखर आजाद और संविधान निर्माता डॉ. भीमराव आंबेडकर को लेकर जातिगत, अपमानजनक और आपत्तिजनक टिप्पणियां कीं। मामले की जांच जारी है और आरोप अभी अदालत में साबित नहीं हुए हैं। FIR दिल्ली के North Avenue Police Station में 23 अगस्त को दर्ज की गई। शिकायत Azad Samaj Party (Kanshi Ram) की ओर से दी गई थी। पुलिस ने SC/ST (Prevention of Atrocities) Act के साथ Bharatiya Nyaya Sanhita और Information Technology Act की धाराएं भी लगाई हैं। क्या Jantar Mantar के मंच पर हुई थी कथित टिप्पणी? इस मामले में सबसे जरूरी clarification यही है। 21 अगस्त को जंतर-मंतर पर बड़ी संख्या में लोग caste-based reservation system में बदलाव की मांग को लेकर जुटे थे। आंदोलन में अजीत भारती ने भी हिस्सा लिया और reservation system की समीक्षा, white paper तथा economic criteria जैसे मुद्दे उठाए थे। लेकिन डॉ. आंबेडकर और चंद्रशेखर आजाद को लेकर जिस कथित आपत्तिजनक भाषा पर FIR हुई, वह शिकायत के मुताबिक 22 अगस्त को जारी YouTube show ‘SB79: Reservation Hatao Andolan Nautanki & More | Saptahik Bakaiti’ से संबंधित है। इसलिए इसे सीधे “जंतर-मंतर के मंच पर आंबेडकर पर टिप्पणी” कहना अभी उपलब्ध रिकॉर्ड के मुताबिक सही नहीं होगा। शिकायत में क्या आरोप लगाए गए? Indian Express द्वारा देखी गई FIR के मुताबिक शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि YouTube video में चंद्रशेखर आजाद और डॉ. बी.आर. आंबेडकर को लेकर कथित तौर पर caste-based, abusive और humiliating statements की गईं। शिकायत में महिलाओं को लेकर कथित रूप से sexually degrading language और कुछ statements को inflammatory तथा threatening बताने के आरोप भी लगाए गए हैं। हालांकि इन आरोपों की सत्यता अभी investigation और judicial process में तय होनी है। इसलिए कथित आपत्तिजनक शब्दों को बिना जरूरत दोहराना उचित नहीं है। किसकी शिकायत पर दर्ज हुई FIR? मामला Balakram Bauddh, Delhi State President, Azad Samaj Party (Kanshi Ram) की शिकायत पर दर्ज हुआ। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और Nagina MP Chandrashekhar Azad हैं। शिकायत के साथ कथित video और social-media screenshots को electronic evidence के रूप में पुलिस को दिया गया। शिकायतकर्ता ने investigating agency से original platform data, video URL, upload details, metadata, views, comments और reposts जैसी digital information हासिल करने की भी मांग की। किन धाराओं में दर्ज हुआ Case? रिपोर्ट्स के मुताबिक FIR में: समेत संबंधित प्रावधान लगाए गए हैं। Police investigation के बाद ही यह साफ होगा कि उपलब्ध evidence के आधार पर कौन-सी धाराएं आगे कायम रहती हैं। Ajeet Bharti ने आरोपों को किया खारिज अजीत भारती ने सार्वजनिक रूप से इन आरोपों का विरोध किया है। उन्होंने FIR को pressure-driven बताया और दावा किया कि उनके खिलाफ SC/ST Act के तहत मामला नहीं बनता। उनका कहना है कि उनके statements को context से अलग करके पेश किया गया और वे अपने video पर आई कथित आपत्तिजनक टिप्पणी का जवाब दे रहे थे। यह उनका पक्ष है; अदालत और जांच एजेंसी अभी इसकी जांच कर रही हैं। गिरफ्तारी की आशंका के बीच Court पहुंचे इस मामले में 25 अगस्त को अजीत भारती ने Delhi के Patiala House Court में anticipatory bail petition दाखिल की। उनके वकीलों ने दलील दी कि FIR में बताए गए facts के आधार पर SC/ST Act का offence prima facie नहीं बनता। उन्होंने यह भी कहा कि पुलिस ने अभी BNSS की Section 35(3) के तहत appearance notice जारी नहीं किया है। Additional Sessions Judge Saurabh Pratap Singh Laler ने मामले की सुनवाई की। Court ने Police को क्या कहा? Court ने कहा कि अगर investigating officer अजीत भारती को BNSS Section 35(3) के तहत कोई notice जारी करता है, तो उसकी copy Court के सामने भी रखी जाए। अदालत उस notice की तारीख और SC/ST Act के alleged offence के prima facie ingredients को देखते हुए anticipatory bail application पर विचार करेगी। Court ने investigating officer को notice जारी किया है और मामले को आगे की arguments के लिए 31 अगस्त 2026 को listed किया है। इसका मतलब अभी anticipatory bail पर final फैसला नहीं हुआ है। Jantar Mantar पर क्या था Reservation Hatao Andolan? 21 अगस्त को दिल्ली के Jantar Mantar पर बड़ी संख्या में लोग reservation policy में reform की मांग को लेकर पहुंचे थे। प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगों में caste-based quota की समीक्षा, economic condition को greater weight देने, reservation पर white paper जारी करने और UGC equity rules पर पुनर्विचार जैसी बातें शामिल थीं। कुछ प्रदर्शनकारियों ने SC/ST Act में बदलाव या इसे समाप्त करने की मांग भी उठाई। यह मांग विवाद का बड़ा कारण बनी। Police Permission को लेकर भी हुआ विवाद Delhi Police ने शुरुआत में स्पष्ट किया था कि Jantar Mantar पर उस protest के लिए permission नहीं दी गई थी। बाद में Ramlila Maidan में सीमित संख्या में लोगों के लिए peaceful protest की NOC जारी किए जाने की रिपोर्ट सामने आई, लेकिन प्रदर्शनकारी Jantar Mantar से हटने को तैयार नहीं हुए। इसके बाद सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ाई गई और अलग-अलग दिनों में प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेने की घटनाएं भी हुईं। Chandrashekhar Azad ने भी आंदोलन पर साधा निशाना Nagina MP और Bhim Army प्रमुख Chandrashekhar Azad ने anti-reservation protest की आलोचना की और आंदोलन के उद्देश्य पर सवाल उठाए। इसके बाद social media और political discourse में reservation के पक्ष और विरोध में बहस और तेज हो गई। इसी broader controversy के बीच अजीत भारती का YouTube programme सामने आया और उसके बाद Azad Samaj Party की शिकायत पर FIR दर्ज हुई। यह मामला क्यों Sensitive है? यह मामला तीन बेहद संवेदनशील मुद्दों को एक साथ जोड़ता है: पहला, भारत की reservation policy और social justice debate। दूसरा, SC/ST Act और caste-based speech से जुड़े criminal-law provisions। तीसरा, public figures और historical personalities पर online speech की कानूनी सीमाएं। ऐसे मामलों में किसी statement के words,…

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