INDIA गठबंधन की बैठक से पहले दिल्ली में ममता बनर्जी और अरविंद केजरीवाल की मुलाकात।

INDIA गठबंधन बैठक से पहले ममता बनर्जी और अरविंद केजरीवाल की अहम मुलाकात

नई दिल्ली, 8 जून 2026 — INDIA गठबंधन की महत्वपूर्ण बैठक से पहले पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल की मुलाकात ने राजनीतिक गलियारों में हलचल बढ़ा दी है। दोनों नेताओं की यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब विपक्षी दल आगामी राजनीतिक चुनौतियों और चुनावी रणनीति को लेकर लगातार मंथन कर रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मुलाकात केवल एक औपचारिक बैठक नहीं, बल्कि विपक्षी एकता को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखी जा रही है। विपक्षी एकता पर फोकस ममता बनर्जी और अरविंद केजरीवाल लंबे समय से विभिन्न राष्ट्रीय मुद्दों पर विपक्षी दलों के बीच बेहतर समन्वय की वकालत करते रहे हैं। दोनों नेताओं की मुलाकात को INDIA गठबंधन के भीतर सहयोग और संवाद बढ़ाने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, बैठक में गठबंधन के भविष्य, राजनीतिक रणनीति और विभिन्न राज्यों में विपक्षी दलों के बीच बेहतर तालमेल पर चर्चा हुई। INDIA गठबंधन की बैठक से पहले बढ़ा महत्व इस मुलाकात का समय बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इसके तुरंत बाद INDIA गठबंधन की व्यापक बैठक आयोजित की जानी है। इस बैठक में कई विपक्षी दलों के वरिष्ठ नेता शामिल हो रहे हैं और आगामी राजनीतिक एजेंडा पर चर्चा होने की संभावना है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि बड़े नेताओं के बीच इस तरह की बैठकें गठबंधन के भीतर विश्वास और सहयोग को मजबूत करने में मदद करती हैं। चुनावी रणनीति पर चर्चा देश में आने वाले चुनावों को देखते हुए विपक्षी दल अपनी रणनीतियों को अंतिम रूप देने में जुटे हुए हैं। ऐसे में ममता बनर्जी और अरविंद केजरीवाल की मुलाकात को चुनावी दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बैठक में जनसंपर्क अभियान, साझा राजनीतिक मुद्दों और विपक्षी दलों के बीच बेहतर समन्वय जैसे विषयों पर विचार-विमर्श होने की संभावना जताई जा रही है। राजनीतिक महत्व ममता बनर्जी और अरविंद केजरीवाल दोनों ही अपने-अपने राज्यों में प्रभावशाली राजनीतिक नेता माने जाते हैं। ऐसे में उनकी मुलाकात को राष्ट्रीय राजनीति में महत्वपूर्ण संकेत के रूप में देखा जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि विपक्षी दलों के बीच संवाद और सहयोग बढ़ाने के प्रयास आने वाले समय में राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित कर सकते हैं।

आगे और पढ़ें
ईरान द्वारा मिसाइल हमले किए जाने के बाद इजरायल में सुरक्षा अलर्ट बढ़ाया गया, जिससे मध्य पूर्व में तनाव और युद्ध की आशंका बढ़ गई।

ईरान के मिसाइल हमलों के बाद इजरायल अलर्ट, मध्य पूर्व में युद्ध का खतरा गहराया

8 जून 2026 | विश्व समाचार मध्य पूर्व में तनाव एक बार फिर खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। ईरान द्वारा इजरायल की ओर बैलिस्टिक मिसाइलें दागे जाने के बाद पूरे क्षेत्र में सुरक्षा चिंताएं बढ़ गई हैं। इस घटनाक्रम ने न केवल ईरान और इजरायल के बीच टकराव को तेज किया है, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी चिंता पैदा कर दी है। इजरायल की सुरक्षा एजेंसियों ने मिसाइल हमलों के बाद देशभर में हाई अलर्ट घोषित कर दिया है। कई इलाकों में चेतावनी सायरन बजाए गए और नागरिकों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी गई। कैसे बढ़ा तनाव? हाल के दिनों में लेबनान की राजधानी बेरूत और आसपास के क्षेत्रों में हुए सैन्य हमलों के बाद क्षेत्रीय तनाव लगातार बढ़ रहा था। ईरान ने इन घटनाओं पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की और इसे क्षेत्रीय स्थिरता के लिए खतरा बताया। इसके बाद ईरान की ओर से मिसाइल हमले किए गए, जिन्हें क्षेत्रीय विश्लेषक दोनों देशों के बीच बढ़ते टकराव का गंभीर संकेत मान रहे हैं। इजरायल की प्रतिक्रिया मिसाइल हमलों के बाद इजरायली सुरक्षा बलों को पूरी तरह सतर्क कर दिया गया है। देश की रक्षा प्रणालियों को सक्रिय किया गया और संभावित खतरों से निपटने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा उपाय लागू किए गए। सरकारी अधिकारियों ने कहा है कि राष्ट्रीय सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी भी चुनौती का उचित जवाब दिया जाएगा। संयुक्त राष्ट्र की चिंता संयुक्त राष्ट्र ने इस पूरे घटनाक्रम पर गहरी चिंता व्यक्त की है। संगठन ने दोनों देशों से संयम बरतने और कूटनीतिक रास्ते अपनाने की अपील की है। UN अधिकारियों का मानना है कि यदि तनाव इसी तरह बढ़ता रहा तो इसका असर केवल मध्य पूर्व तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था, ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा पर भी पड़ सकता है। वैश्विक प्रभाव की आशंका विशेषज्ञों का कहना है कि ईरान और इजरायल के बीच संघर्ष बढ़ने से तेल की कीमतों में तेजी आ सकती है। मध्य पूर्व दुनिया के प्रमुख ऊर्जा उत्पादक क्षेत्रों में से एक है, इसलिए किसी भी बड़े संघर्ष का प्रभाव अंतरराष्ट्रीय बाजारों पर पड़ सकता है। इसके अलावा महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों पर भी असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है, जिससे वैश्विक सप्लाई चेन प्रभावित हो सकती है। दुनिया की नजरें मध्य पूर्व पर अमेरिका, यूरोपीय देशों और अन्य प्रमुख शक्तियों ने स्थिति पर नजर बनाए रखी है। कई देशों ने दोनों पक्षों से शांति और संवाद का रास्ता अपनाने की अपील की है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय की कोशिश है कि बढ़ते तनाव को कूटनीतिक प्रयासों के माध्यम से नियंत्रित किया जाए और क्षेत्र को बड़े युद्ध की स्थिति में जाने से रोका जाए। आगे क्या? विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले कुछ दिन बेहद महत्वपूर्ण होंगे। यदि दोनों पक्ष संयम नहीं बरतते हैं तो संघर्ष और व्यापक रूप ले सकता है। फिलहाल पूरी दुनिया की निगाहें मध्य पूर्व पर टिकी हुई हैं। संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय समुदाय लगातार शांति प्रयासों में जुटे हुए हैं ताकि क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखी जा सके। ईरान और इजरायल के बीच बढ़ता तनाव केवल क्षेत्रीय मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि यह वैश्विक सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता के लिए भी एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है।

आगे और पढ़ें

अर्जुन एरिगैसी ने रचा इतिहास: दुनिया के टॉप-10 शतरंज खिलाड़ियों में शामिल होकर बढ़ाया भारत का मान

नई दिल्ली: भारतीय शतरंज के लिए गर्व का क्षण आया है। युवा ग्रैंडमास्टर अर्जुन एरिगैसी ने FIDE की नवीनतम विश्व रैंकिंग में टॉप-10 खिलाड़ियों में जगह बनाकर इतिहास रच दिया है। इस उपलब्धि के साथ वह विश्व शतरंज के सबसे प्रतिष्ठित खिलाड़ियों की सूची में शामिल हो गए हैं और भारत के लिए एक नई उम्मीद बनकर उभरे हैं। भारत लंबे समय से शतरंज की दुनिया में अपनी मजबूत पहचान रखता है। विश्वनाथन आनंद के बाद अब नई पीढ़ी के खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम रोशन कर रहे हैं और अर्जुन एरिगैसी इस नई पीढ़ी के सबसे चमकदार सितारों में से एक बन चुके हैं। लगातार शानदार प्रदर्शन का मिला इनाम पिछले कुछ वर्षों में अर्जुन एरिगैसी ने अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंटों में शानदार प्रदर्शन किया है। उनकी आक्रामक शैली, सटीक रणनीति और दबाव में बेहतर फैसले लेने की क्षमता ने उन्हें दुनिया के शीर्ष खिलाड़ियों के बीच पहुंचा दिया है। शतरंज विशेषज्ञों का मानना है कि अर्जुन की सफलता किसी एक टूर्नामेंट का परिणाम नहीं है, बल्कि वर्षों की मेहनत, अनुशासन और निरंतर सुधार का नतीजा है। भारत के लिए क्यों खास है यह उपलब्धि? भारत में शतरंज की लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है। विश्वनाथन आनंद के बाद कई युवा खिलाड़ियों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई है। अर्जुन एरिगैसी का टॉप-10 में पहुंचना इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि यह दिखाता है कि भारत अब केवल प्रतिभाशाली खिलाड़ियों का देश नहीं बल्कि विश्व शतरंज की महाशक्ति बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह उपलब्धि देशभर के लाखों युवा खिलाड़ियों को प्रेरित करेगी। बचपन से दिखी असाधारण प्रतिभा अर्जुन एरिगैसी ने बहुत कम उम्र में शतरंज खेलना शुरू किया था। शुरुआती दिनों से ही उन्होंने अपनी प्रतिभा का परिचय देना शुरू कर दिया था। लगातार मेहनत और कोचों के मार्गदर्शन ने उन्हें राष्ट्रीय स्तर से अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचाया। उन्होंने कई प्रतिष्ठित टूर्नामेंटों में जीत हासिल कर दुनिया का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया। भारतीय शतरंज का स्वर्णिम दौर वर्तमान समय को भारतीय शतरंज का स्वर्णिम दौर कहा जा रहा है। देश के कई युवा खिलाड़ी लगातार विश्व रैंकिंग में ऊपर आ रहे हैं। अर्जुन एरिगैसी, डी. गुकेश, आर. प्रज्ञानानंद और अन्य युवा खिलाड़ियों ने यह साबित कर दिया है कि भारत आने वाले वर्षों में विश्व शतरंज पर अपना दबदबा कायम कर सकता है। सोशल मीडिया पर बधाइयों की बाढ़ अर्जुन की इस उपलब्धि के बाद सोशल मीडिया पर बधाइयों का सिलसिला शुरू हो गया। खेल प्रेमियों, पूर्व खिलाड़ियों और विभिन्न क्षेत्रों के लोगों ने उन्हें शुभकामनाएं दीं। #ArjunErigaisi और #IndianChess जैसे हैशटैग सोशल मीडिया पर तेजी से ट्रेंड करने लगे। आगे की चुनौतियां टॉप-10 में पहुंचना बड़ी उपलब्धि है, लेकिन अब अर्जुन के सामने अपनी स्थिति को बनाए रखने और और भी ऊंचाइयों तक पहुंचने की चुनौती होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वह इसी तरह का प्रदर्शन जारी रखते हैं तो आने वाले वर्षों में विश्व चैंपियनशिप की दौड़ में भी मजबूत दावेदार बन सकते हैं। युवाओं के लिए प्रेरणा अर्जुन एरिगैसी की कहानी उन लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा है जो खेलों में करियर बनाना चाहते हैं। उनकी सफलता यह साबित करती है कि समर्पण, मेहनत और सही दिशा में प्रयास करने से विश्व स्तर पर पहचान बनाई जा सकती है। jairashtranews

आगे और पढ़ें

भारत-रूस के बीच बड़ा आर्थिक समझौता: ऊर्जा, IT और व्यापार में खुलेगा नए अवसरों का द्वार

नई दिल्ली/सेंट पीटर्सबर्ग: वैश्विक आर्थिक चुनौतियों और बदलते भू-राजनीतिक समीकरणों के बीच भारत और रूस ने अपने आर्थिक संबंधों को नई मजबूती देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया है। दोनों देशों ने व्यापार, ऊर्जा, सूचना प्रौद्योगिकी (IT), विज्ञान, शिक्षा और परिवहन जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह साझेदारी आने वाले वर्षों में भारत और रूस दोनों की अर्थव्यवस्थाओं के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। यह समझौता केवल व्यापार तक सीमित नहीं है, बल्कि तकनीकी विकास, निवेश और रोजगार के नए अवसर भी पैदा कर सकता है। व्यापार को नई ऊंचाई पर ले जाने की तैयारी भारत और रूस लंबे समय से रणनीतिक साझेदार रहे हैं। हाल के वर्षों में दोनों देशों के बीच व्यापार में तेजी आई है। अब दोनों देशों का लक्ष्य व्यापारिक संबंधों को और मजबूत करना और द्विपक्षीय व्यापार को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाना है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि मौजूदा गति बरकरार रहती है तो आने वाले वर्षों में व्यापार का स्तर रिकॉर्ड ऊंचाई तक पहुंच सकता है। ऊर्जा क्षेत्र रहेगा सबसे बड़ा आधार ऊर्जा क्षेत्र भारत-रूस संबंधों की सबसे मजबूत कड़ी माना जाता है। भारत अपनी बढ़ती ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए विभिन्न देशों के साथ सहयोग बढ़ा रहा है, जबकि रूस दुनिया के प्रमुख ऊर्जा उत्पादकों में शामिल है। दोनों देशों के बीच तेल, गैस और परमाणु ऊर्जा परियोजनाओं में पहले से सहयोग चल रहा है। नए समझौते के बाद इस सहयोग के और विस्तार की संभावना है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे भारत की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी और उद्योगों को स्थिर ऊर्जा आपूर्ति मिल सकेगी। IT सेक्टर में नए अवसर सूचना प्रौद्योगिकी (IT) और डिजिटल नवाचार भी इस साझेदारी का अहम हिस्सा बनकर उभरे हैं। भारत की IT कंपनियां वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बना चुकी हैं। वहीं रूस तकनीकी अनुसंधान और इंजीनियरिंग क्षमताओं के लिए जाना जाता है। दोनों देशों के बीच तकनीकी सहयोग बढ़ने से: शिक्षा और विज्ञान में सहयोग भारत और रूस ने शिक्षा और वैज्ञानिक अनुसंधान को भी प्राथमिकता दी है। दोनों देशों के विश्वविद्यालयों और अनुसंधान संस्थानों के बीच सहयोग बढ़ाने पर चर्चा हुई है। छात्र आदान-प्रदान कार्यक्रम और संयुक्त रिसर्च प्रोजेक्ट्स को बढ़ावा देने की योजना बनाई जा रही है। इससे छात्रों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सीखने और शोध करने के अवसर मिल सकते हैं। भारतीय उद्योगों को क्या होगा फायदा? व्यापार विशेषज्ञों का मानना है कि इस आर्थिक सहयोग का लाभ कई भारतीय उद्योगों को मिल सकता है। संभावित फायदे: ✔ ऊर्जा लागत में स्थिरता✔ निर्यात के नए अवसर✔ निवेश में वृद्धि✔ रोजगार सृजन✔ तकनीकी सहयोग में विस्तार✔ औद्योगिक विकास को गति विशेष रूप से विनिर्माण, ऊर्जा, IT और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र को इससे बड़ा लाभ मिल सकता है। वैश्विक चुनौतियों के बीच मजबूत साझेदारी दुनिया इस समय कई आर्थिक और भू-राजनीतिक चुनौतियों का सामना कर रही है। ऐसे समय में भारत और रूस का सहयोग दोनों देशों के लिए रणनीतिक महत्व रखता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह साझेदारी केवल आर्थिक लाभ तक सीमित नहीं रहेगी बल्कि वैश्विक मंच पर दोनों देशों की स्थिति को भी मजबूत कर सकती है। निवेशकों की बढ़ी उम्मीदें इस समझौते के बाद निवेशकों की नजर भारत और रूस के बीच होने वाली भविष्य की परियोजनाओं पर टिकी हुई है। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि यदि प्रस्तावित योजनाएं सफलतापूर्वक लागू होती हैं तो इससे निवेश माहौल को सकारात्मक संकेत मिलेगा। jairashtranews

आगे और पढ़ें

दिल्ली यूनिवर्सिटी प्रोफेसर मर्डर केस में बड़ा खुलासा, पश्चिम बंगाल से दंपति गिरफ्तार

नई दिल्ली: दिल्ली यूनिवर्सिटी के एक प्रोफेसर की हत्या के मामले में पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। जांच एजेंसियों ने पश्चिम बंगाल से एक दंपति को गिरफ्तार किया है, जिन पर हत्या में शामिल होने का आरोप है। इस गिरफ्तारी के बाद मामले में कई नए खुलासे होने की उम्मीद जताई जा रही है। क्या है पूरा मामला? दिल्ली यूनिवर्सिटी से जुड़े प्रोफेसर की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत के बाद पुलिस ने जांच शुरू की थी। शुरुआती जांच में कई पहलुओं पर संदेह जताया गया था। पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों, कॉल रिकॉर्ड और अन्य सुरागों के आधार पर जांच को आगे बढ़ाया। जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ी, पुलिस को कुछ महत्वपूर्ण सुराग मिले, जिसके आधार पर पश्चिम बंगाल में कार्रवाई की गई। पश्चिम बंगाल से हुई गिरफ्तारी पुलिस टीम ने विशेष अभियान चलाकर पश्चिम बंगाल से एक दंपति को हिरासत में लिया। पूछताछ के बाद दोनों को गिरफ्तार कर लिया गया। अधिकारियों का कहना है कि मामले की गहन जांच जारी है और कई महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आ सकती हैं। पुलिस की जांच जारी जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि हत्या के पीछे की असली वजह क्या थी। पुलिस विभिन्न कोणों से मामले की जांच कर रही है, जिसमें व्यक्तिगत संबंध, आर्थिक लेन-देन और अन्य संभावित कारण शामिल हैं। अधिकारियों का कहना है कि सभी तथ्यों की पुष्टि होने के बाद ही विस्तृत जानकारी सार्वजनिक की जाएगी। विश्वविद्यालय समुदाय में चिंता घटना के बाद विश्वविद्यालय समुदाय में चिंता का माहौल है। छात्रों और शिक्षकों ने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। कई लोगों ने दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल इस घटना के बाद राजधानी में शिक्षकों और शिक्षण संस्थानों की सुरक्षा को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों की गहन जांच और सुरक्षा उपायों को मजबूत करना आवश्यक है। आगे क्या? गिरफ्तार दंपति से पूछताछ जारी है और पुलिस को उम्मीद है कि मामले से जुड़े कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आएंगे। अदालत में पेशी के बाद आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू की जाएगी। निष्कर्ष दिल्ली यूनिवर्सिटी प्रोफेसर हत्याकांड में हुई गिरफ्तारी को जांच की बड़ी सफलता माना जा रहा है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि पूछताछ में कौन-कौन से नए खुलासे सामने आते हैं और पुलिस इस मामले को किस दिशा में आगे बढ़ाती है। jairashtranews

आगे और पढ़ें
महाराष्ट्र नगर निगम चुनाव 2026: बीएमसी चुनाव की ताजा अपडेट्स, उम्मीदवार और मतदान की पूरी जानकारी

महाराष्ट्र नगर निगम चुनाव 2026: बीएमसी चुनाव की ताजा अपडेट्स, उम्मीदवार और मतदान की पूरी जानकारी

जयराष्ट्र न्यूज रिपोर्टरदिनांक: 12 जनवरी 2026 महाराष्ट्र में राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं क्योंकि राज्य की 29 नगर निगमों के चुनाव नजदीक आ गए हैं। इनमें सबसे ज्यादा ध्यान मुंबई की ब्रिहनमुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) चुनाव पर है, जो 15 जनवरी 2026 को होने वाला है। यह चुनाव न केवल मुंबई की सत्ता तय करेगा बल्कि पूरे महाराष्ट्र की राजनीति पर असर डालेगा। महायुति गठबंधन, जिसमें भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और एकनाथ शिंदे वाली शिवसेना शामिल हैं, ने मुंबई को फिर से ‘सफरन’ बनाने का दावा किया है। वहीं, उद्धव ठाकरे वाली शिवसेना और कांग्रेस जैसी पार्टियां मजबूत चुनौती दे रही हैं। इस लेख में हम महाराष्ट्र नगर निगम चुनाव 2026 की पूरी जानकारी, ताजा अपडेट्स, उम्मीदवारों की सूची, मतदान प्रक्रिया और चुनाव के महत्व पर विस्तार से चर्चा करेंगे। यह लेख एसईओ फ्रेंडली है और सरल भाषा में लिखा गया है ताकि आम जनता आसानी से समझ सके। महाराष्ट्र नगर निगम चुनाव 2026 का महत्व क्यों है? महाराष्ट्र भारत का आर्थिक केंद्र है, और मुंबई जैसे शहर की नगर निगम सत्ता पर कब्जा करना हर राजनीतिक दल के लिए सपना होता है। बीएमसी का बजट हजारों करोड़ रुपये का है, जो सड़कें, सफाई, पानी, स्वास्थ्य और परिवहन जैसी सेवाओं को संभालता है। 2026 के चुनाव में करीब 1 करोड़ से ज्यादा मतदाता हिस्सा लेंगे, जो इसे देश का सबसे बड़ा स्थानीय चुनाव बनाता है। राज्य चुनाव आयोग (एसईसी) ने घोषणा की है कि 29 नगर निगमों में से धुले, अहमदनगर, जलगांव, सांगली जैसे शहर शामिल हैं। लेकिन मुंबई का बीएमसी चुनाव सबसे हॉट टॉपिक है क्योंकि यहां ठाकरे भाइयों की एकता की अपील सुर्खियां बटोर रही है। पिछले कुछ सालों में महाराष्ट्र की राजनीति में बड़े बदलाव हुए हैं। 2019 में शिवसेना टूट गई थी, जिसके बाद एकनाथ शिंदे ने बीजेपी के साथ सरकार बनाई। अब 2026 के चुनाव में ‘मराठी मानूस’ का मुद्दा फिर से उभरा है। राज ठाकरे की महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (एमएनएस) भी मैदान में है, जो स्थानीय मुद्दों पर जोर दे रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह चुनाव 2029 के लोकसभा चुनावों की दिशा तय कर सकता है। अगर महायुति जीतती है, तो मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की स्थिति मजबूत होगी। वहीं, विपक्ष की जीत से उद्धव ठाकरे का राजनीतिक करियर नई ऊंचाई छू सकता है। बीएमसी चुनाव 2026 की तारीख और शेड्यूल राज्य चुनाव आयोग ने चुनाव की पूरी समय-सारणी जारी कर दी है। मतदान 15 जनवरी 2026 को सुबह 7:30 बजे से शाम 5:30 बजे तक होगा। परिणाम 18 जनवरी 2026 को घोषित किए जाएंगे। मुंबई में 227 वार्ड हैं, जहां से पार्षद चुने जाएंगे। कुल 1700 से ज्यादा उम्मीदवार मैदान में हैं। नामांकन की प्रक्रिया दिसंबर 2025 में पूरी हो चुकी है, और अब प्रचार अभियान जोरों पर है। चुनाव आयोग ने कोविड-19 जैसी महामारी से सबक लेते हुए सख्त नियम बनाए हैं। मतदान केंद्रों पर मास्क, सैनिटाइजर और सोशल डिस्टेंसिंग अनिवार्य है। बुजुर्ग और दिव्यांग मतदाताओं के लिए घर से वोटिंग की सुविधा भी उपलब्ध है। प्रमुख पार्टियां और उनके वादे इस चुनाव में मुख्य मुकाबला महायुति गठबंधन और महा विकास अघाड़ी (एमवीए) के बीच है। महायुति में बीजेपी, शिंदे शिवसेना और अजीत पवार वाली एनसीपी शामिल हैं। उन्होंने मुंबई को ‘विश्व स्तरीय शहर’ बनाने का वादा किया है। उनके मुख्य वादे हैं: वहीं, एमवीए में उद्धव ठाकरे वाली शिवसेना, कांग्रेस और शरद पवार वाली एनसीपी हैं। वे ‘मराठी अस्मिता’ पर जोर दे रहे हैं। उनके वादे: राज ठाकरे की एमएनएस ‘मराठी मानूस’ को केंद्र में रखकर चुनाव लड़ रही है। उन्होंने कहा है कि गैर-मराठी लोगों को शहर से बाहर करने की नीति अपनाएंगे। ठाकरे भाइयों (उद्धव और राज) ने हाल ही में एक संयुक्त रैली में एकता की अपील की, जो सोशल मीडिया पर वायरल हो गई। ताजा अपडेट्स: क्या हो रहा है मैदान में? 12 जनवरी 2026 तक की ताजा खबरों के अनुसार, ठाकरे भाइयों की संयुक्त रैली ने राजनीतिक माहौल गर्मा दिया है। रैली में उन्होंने कहा, “मुंबई हमारी है, और इसे बचाने के लिए एकजुट हों।” बीजेपी ने इसका जवाब देते हुए कहा कि मुंबई और ठाणे ‘सफरन’ रहेंगे। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा, “हम विकास पर चुनाव लड़ रहे हैं, न कि परिवारवाद पर।” एक और अपडेट: शिवसेना (शिंदे) ने अजीत पवार पर आरोप लगाया कि वे अपराधिक पृष्ठभूमि वाले उम्मीदवारों को टिकट दे रहे हैं। वहीं, एनडीटीवी की पावर प्ले में चुनावी विश्लेषण में कहा गया कि मतदान प्रतिशत 50% से ऊपर जा सकता है। विकिपीडिया के अनुसार, यह चुनाव मुंबई की सिविक सेवाओं को नियंत्रित करेगा। मिड-डे रिपोर्ट के मुताबिक,नागरिक तैयार हैं वोट डालने के लिए। फाइनेंशियल एक्सप्रेस ने लाइव अपडेट्स में बताया कि प्रचार में ‘मराठी बनाम बाहरी’ का मुद्दा छाया हुआ है। हिंदुस्तान टाइम्स ने कहा कि महायुति मुंबई की पुरानी गरिमा वापस लाएगी। मतदाता सूची कैसे चेक करें? अगर आप मुंबई या अन्य नगर निगम क्षेत्र में रहते हैं, तो अपनी मतदाता सूची चेक करना जरूरी है। इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, आप ऑनलाइन चेक कर सकते हैं: करीब 1 करोड़ मतदाता हैं, इसलिए पहले से तैयारी करें। चुनाव के प्रभाव और भविष्य यह चुनाव महाराष्ट्र की राजनीति का टर्निंग पॉइंट हो सकता है। अगर बीजेपी जीतती है, तो केंद्र सरकार के प्रोजेक्ट जैसे बुलेट ट्रेन और मेट्रो तेज होंगे। वहीं, विपक्ष की जीत से स्थानीय मुद्दों पर फोकस बढ़ेगा। पर्यावरण विशेषज्ञ कहते हैं कि चुनाव में ग्रीन इश्यूज जैसे प्रदूषण नियंत्रण को महत्व मिलना चाहिए। आम जनता के लिए यह चुनाव मौका है अपनी समस्याएं उठाने का। सड़कें खराब हैं? पानी की कमी है? वोट से बदलाव लाएं। जयराष्ट्र न्यूज रिपोर्टर वेबसाइट आपको लगातार अपडेट्स देती रहेगी। निष्कर्ष: वोट दें, बदलाव लाएं महाराष्ट्र नगर निगम चुनाव 2026 लोकतंत्र का बड़ा उत्सव है। 15 जनवरी को मतदान करें और अपने शहर को बेहतर बनाएं। सरल शब्दों में कहें तो यह चुनाव विकास, एकता और अस्मिता का है। अधिक जानकारी के लिए हमारी वेबसाइट पर विजिट करें।

आगे और पढ़ें

महाराष्ट्र 2026 चुनाव: वर्तमान स्थिति और प्रमुख गठबंधन

10 जनवरी 2026 को महाराष्ट्र में राजनीतिक माहौल गरम है, क्योंकि 29 नगर निगमों (जिसमें BMC मुंबई, पुणे, नागपुर, नासिक आदि शामिल हैं) के चुनाव 15 जनवरी 2026 को होने वाले हैं। मतगणना 16 जनवरी को होगी। ये चुनाव 2017-2018 के बाद पहली बार हो रहे हैं, जो OBC आरक्षण विवाद के कारण लंबे समय से लंबित थे। ये स्थानीय निकाय चुनाव महाराष्ट्र की राजनीति के लिए महत्वपूर्ण टेस्ट हैं और 2029 विधानसभा चुनाव की झलक दिखा सकते हैं। मुख्य गठबंधन और पार्टियां राज्य स्तर पर महायुति (सत्तारूढ़) और महा विकास अघाड़ी (MVA) (विपक्ष) के बीच मुख्य मुकाबला है, लेकिन स्थानीय स्तर पर गठबंधन काफी बदल गए हैं। विचारधारा से ज्यादा सत्ता की गणित और स्थानीय हित हावी हैं। महायुति गठबंधन (BJP + शिवसेना शिंदे गुट + अजित पवार NCP): महा विकास अघाड़ी (MVA) (कांग्रेस + उद्धव शिवसेना UBT + शरद पवार NCP): स्थानीय स्तर पर बदलते गठबंधन (क्रॉस-ओवर अलायंस) पिछले परिणाम और वर्तमान ट्रेंड प्रमुख मुद्दे ये चुनाव महाराष्ट्र की राजनीति में मजबूती और कमजोरी को और साफ कर सकते हैं। 15 जनवरी को मतदान होगा, और परिणाम 16 जनवरी को आएंगे। राज्य स्तर पर अगला बड़ा चुनाव 2029 में विधानसभा का होगा।

आगे और पढ़ें

फरीदाबाद गैंगरेप पीड़िता एक सप्ताह बाद अस्पताल से डिस्चार्ज, घर लौटीं: न्याय की उम्मीद में परिवार

जय राष्ट्र न्यूज रिपोर्टरद्वारा: विशेष संवाददातादिनांक: 07 जनवरी, 2026फरीदाबाद, हरियाणा: फरीदाबाद में हुए दिल दहला देने वाले गैंगरेप मामले में पीड़िता को अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया है। एक सप्ताह तक अस्पताल में इलाज कराने के बाद वह अब घर लौट आई हैं। यह घटना दिसंबर 30, 2025 को हुई थी, जब दो आरोपियों ने एक 25 वर्षीय महिला को लिफ्ट देने के बहाने अपनी गाड़ी में बिठाया, उसका गैंगरेप किया और फिर चलती गाड़ी से फेंक दिया। पीड़िता तीन बच्चों की मां हैं और इस घटना ने पूरे देश में महिला सुरक्षा पर फिर से सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना का पूरा विवरण यह दर्दनाक घटना फरीदाबाद के मेट्रो चौक के पास शुरू हुई। पीड़िता अपने पति से झगड़े के बाद मायके में रह रही थीं। घटना वाले दिन, वह अपनी मां से बहस के बाद घर से निकलीं और सेक्टर 23 में एक दोस्त के घर गईं। देर रात होने पर वह घर लौटने के लिए सार्वजनिक परिवहन की तलाश में थीं, लेकिन कोई बस या ऑटो नहीं मिला। ठंड और कोहरे के कारण सड़कें सूनी थीं। तभी एक सफेद मारुति सुजुकी ईको वैन (जो कुछ रिपोर्ट्स में एम्बुलेंस के रूप में बताई गई है) में सवार दो युवकों ने उन्हें लिफ्ट ऑफर की। पीड़िता ने सोचा कि यह सुरक्षित होगा, लेकिन यह उनकी सबसे बड़ी गलती साबित हुई। आरोपी उन्हें गुरुग्राम-फरीदाबाद रोड पर एक सुनसान जगह ले गए, जहां उन्होंने बारी-बारी से लगभग 2-3 घंटे तक उनका गैंगरेप किया। एक आरोपी अंदर अपराध कर रहा था, जबकि दूसरा बाहर पहरा दे रहा था। अपराध के बाद, उन्होंने पीड़िता को राजा चौक के पास संजय गांधी मेमोरियल नगर में 90 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से चलती गाड़ी से फेंक दिया। गिरने से पीड़िता को गंभीर चोटें आईं और वह खून से लथपथ हो गईं। कोहरे के कारण कोई मदद नहीं मिली, लेकिन उन्होंने किसी तरह अपनी बहन को फोन किया। बहन ने उन्हें उठाया और पहले बादशाह खान सिविल अस्पताल ले गईं, जहां से गंभीर हालत देखते हुए उन्हें फरीदाबाद के एक प्राइवेट अस्पताल में शिफ्ट किया गया। पीड़िता की चोटें और अस्पताल में इलाज डॉक्टरों के अनुसार, पीड़िता की हालत बेहद गंभीर थी। उनकी दाहिनी आंख की सॉकेट फ्रैक्चर हो गई थी, कंधा फ्रैक्चर और डिस्लोकेट हो गया था। चेहरे पर दो गहरे कट लगे थे, जिनमें 20 से ज्यादा टांके लगाए गए। सूजन और खून बहने के कारण वह आईसीयू में भर्ती रहीं। इलाज करने वाले डॉक्टर अमित यादव ने बताया कि चोटें अपराध के दौरान विरोध करने और गाड़ी से फेंके जाने से लगीं। कंधे की सर्जरी की योजना थी, लेकिन पीड़िता की हालत स्थिर होने के बाद उन्हें डिस्चार्ज कर दिया गया। अस्पताल में एक सप्ताह तक रहने के दौरान पीड़िता का परिवार उनके साथ था। बहन ने मीडिया को बताया कि यह घटना उनके परिवार के लिए सदमा थी, लेकिन पीड़िता की हिम्मत ने उन्हें मजबूती दी। डॉक्टरों ने कहा कि पीड़िता अब खतरे से बाहर हैं, लेकिन पूरी तरह ठीक होने में समय लगेगा। मानसिक सदमे से उबरने के लिए काउंसलिंग की सलाह दी गई है। अस्पताल से डिस्चार्ज और घर वापसी 7 जनवरी, 2026 को पीड़िता को अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया, जो घटना के ठीक एक सप्ताह बाद था। घर लौटने पर परिवार ने राहत की सांस ली। हालांकि, सुरक्षा के कारण उनका घर बदल दिया गया है और पुलिस सुरक्षा प्रदान कर रही है। पीड़िता की बहन ने कहा, “वह अब घर पर हैं, लेकिन डर अभी भी है। हम न्याय की उम्मीद कर रहे हैं।” यह घर वापसी पीड़िता के लिए नई शुरुआत है, लेकिन न्याय की लड़ाई अभी बाकी है। आरोपियों की पहचान और पुलिस कार्रवाई डिस्चार्ज होने के अगले दिन, 8 जनवरी को पीड़िता ने टेस्ट आइडेंटिफिकेशन परेड में दोनों आरोपियों को पहचान लिया। परेड ड्यूटी मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में हुई। आरोपी उत्तर प्रदेश के मथुरा और झांसी के रहने वाले हैं, जो एक प्राइवेट अस्पताल की एम्बुलेंस में ड्राइवर और हेल्पर के रूप में काम करते थे। पुलिस ने उन्हें घटना के दिन ही गिरफ्तार कर लिया था और कोर्ट में पेश कर ज्यूडिशियल कस्टडी में भेज दिया। कोतवाली पुलिस स्टेशन में गैंगरेप, हमला और अन्य धाराओं में एफआईआर दर्ज की गई। पुलिस पीआरओ यशपाल यादव ने कहा कि गाड़ी बरामद कर ली गई है और फॉरेंसिक सैंपल लिए गए हैं। आरोपियों के ब्लड सैंपल से नशे की जांच की जा रही है। सीसीटीवी फुटेज से भी सबूत मिले हैं। पुलिस जल्द चार्जशीट दाखिल करने की योजना बना रही है। महिला सुरक्षा पर बड़ा सवाल यह घटना भारत में महिलाओं की सुरक्षा पर फिर से सवाल उठाती है। हरियाणा जैसे राज्य में जहां महिलाओं के खिलाफ अपराध की दर ऊंची है, ऐसी घटनाएं आम हो गई हैं। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के अनुसार, 2024 में भारत में 31,000 से ज्यादा रेप केस दर्ज हुए, जिनमें से कई गैंगरेप थे। निर्भया मामले के बाद 2013 में कानून सख्त किए गए, जिसमें गैंगरेप के लिए उम्रकैद या मौत की सजा का प्रावधान है। लेकिन अमल में कमी दिखती है। महिला अधिकार कार्यकर्ता सुनीता शर्मा कहती हैं, “ऐसी घटनाओं में पीड़िता को न्याय मिलना चाहिए, लेकिन समाज का रवैया बदलना जरूरी है। पुलिस को रात में गश्त बढ़ानी चाहिए और महिलाओं के लिए सुरक्षित परिवहन सुनिश्चित करना चाहिए।” फरीदाबाद में इस घटना के खिलाफ प्रदर्शन हुए, जहां लोग न्याय की मांग कर रहे हैं। परिवार की प्रतिक्रिया और समाज का समर्थन पीड़िता का परिवार अब न्याय की लड़ाई लड़ रहा है। बहन ने बताया कि घटना के बाद पूरे परिवार को सदमा लगा, लेकिन पीड़िता की हिम्मत ने उन्हें संभाला। “वह बच्चों के लिए जीना चाहती हैं,” बहन ने कहा। स्थानीय एनजीओ ने पीड़िता को कानूनी और आर्थिक मदद देने का वादा किया है। सोशल मीडिया पर #JusticeForFaridabadVictim ट्रेंड कर रहा है, जहां लोग समर्थन जता रहे हैं। निष्कर्ष: न्याय की राह फरीदाबाद गैंगरेप पीड़िता की घर वापसी एक सकारात्मक कदम है, लेकिन यह अंत नहीं है। न्यायपालिका पर अब दबाव है कि आरोपियों को सख्त सजा मिले। यह घटना हमें याद दिलाती है कि महिलाओं की सुरक्षा के लिए ठोस कदम… Read More

आगे और पढ़ें

यूक्रेन-रूस शांति वार्ता: ९०% समझौता तैयार, लेकिन खतरे बरकरार

जय राष्ट्र न्यूज रिपोर्टर, ३ जनवरी २०२६ यूक्रेन और रूस के बीच युद्ध अब तीसरे साल में है। हाल ही में शांति की उम्मीद जगी है। राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने कहा है कि समझौता ९०% तैयार है। लेकिन चुनौतियां अभी भी हैं। रूस की तरफ से झूठे हमले की चेतावनी दी गई है। यह खबर दुनिया भर में चर्चा का विषय बनी हुई है। इस लेख में हम नवीनतम घटनाओं पर नजर डालेंगे। हम शांति वार्ता की प्रगति देखेंगे। साथ ही, बाधाओं पर भी बात करेंगे। यह जानकारी आपको अपडेट रखेगी। शांति समझौते की प्रगति जेलेंस्की ने नए साल के संबोधन में अच्छी खबर दी। उन्होंने कहा कि यूक्रेन और अमेरिका के बीच समझौता लगभग पूरा है। यह युद्ध खत्म करने की दिशा में बड़ा कदम है। हालांकि, रूस को इसमें शामिल करना बाकी है। ट्रंप ने दावा किया कि पुतिन शांति चाहते हैं। लेकिन रूसी अधिकारी सहमत नहीं दिखते। यूक्रेन ने सुरक्षा सहयोगियों से बात की। ये वार्ताएं महत्वपूर्ण हैं। वे समझौते को मजबूत बनाती हैं। रूस का दावा है कि यूक्रेन कमजोर हो रहा है। लेकिन यूक्रेन मजबूती से खड़ा है। इसके अलावा, परमाणु संयंत्र एक बड़ी समस्या है। जपोरिजिया परमाणु संयंत्र: मुख्य बाधा जपोरिजिया संयंत्र यूक्रेन में है। लेकिन रूस ने इसे कब्जा कर रखा है। यह यूरोप का सबसे बड़ा परमाणु संयंत्र है। जेलेंस्की ने कहा कि यह शांति योजना में अटकाव है। यदि रूस इसे नहीं छोड़ेगा, तो खतरा बढ़ेगा। संयंत्र में कोई दुर्घटना हो सकती है। यह पूरे क्षेत्र को प्रभावित करेगी। संयुक्त राष्ट्र ने चिंता जताई है। वे सुरक्षा चाहते हैं। यूक्रेन का कहना है कि रूस इसे हथियार की तरह इस्तेमाल कर रहा है। इसलिए, समझौते में इसका समाधान जरूरी है। अन्यथा, शांति मुश्किल होगी। रूस की संभावित साजिश यूक्रेन की खुफिया एजेंसी ने चेतावनी दी है। वे कहते हैं कि रूस झूठा हमला कर सकता है। यह हमला रूस में ही होगा। इसका उद्देश्य शांति वार्ता बिगाड़ना है। यह फॉल्स फ्लैग ऑपरेशन होगा। इसमें बड़ी संख्या में लोग मारे जा सकते हैं। चेतावनी के अनुसार, यह हमला चर्च पर हो सकता है। रूसी ऑर्थोडॉक्स क्रिसमस से पहले। यह ७ जनवरी को है। यूक्रेन ने कहा कि रूस ऐसा करके दोष यूक्रेन पर डालेगा। इससे वार्ता रुक जाएगी। दुनिया को सतर्क रहना चाहिए। इसके अलावा, रूस लगातार हमले कर रहा है। हाल ही में एक मिसाइल हमले में दो लोग मारे गए। इसमें एक तीन साल का बच्चा भी था। ३१ लोग घायल हुए। यह दिखाता है कि युद्ध थमा नहीं है। फ्रंटलाइन पर स्थिति यूक्रेन ने फ्रंटलाइन से निकासी का आदेश दिया। हजारों लोगों को सुरक्षित जगह जाना होगा। रूसी सेना आगे बढ़ रही है। खारकीव क्षेत्र में ड्रोन हमले हो रहे हैं। यूक्रेन की सेना नियमों का पालन कर रही है। वे नागरिकों की रक्षा कर रही हैं। हालांकि, रूस का दावा अलग है। वे कहते हैं कि यूक्रेन हार रहा है। लेकिन यूक्रेन ने कहा कि वे लड़ते रहेंगे। शांति के लिए तैयार हैं। लेकिन आत्मसमर्पण नहीं करेंगे। अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया दुनिया इस पर नजर रखे हुए है। अमेरिका यूक्रेन का समर्थन कर रहा है। ट्रंप प्रशासन वार्ता को बढ़ावा दे रहा है। यूरोपीय संघ भी शामिल है। वे सुरक्षा गारंटी चाहते हैं। रूस ने कहा कि वे वार्ता के लिए तैयार हैं। लेकिन शर्तें उनकी होंगी। पुतिन ने कोई टिप्पणी नहीं की। लेकिन उनके अधिकारी सक्रिय हैं। इसके अलावा, चीन और भारत जैसे देश मध्यस्थता कर सकते हैं। वे शांति चाहते हैं। २०२६ में शांति की संभावना नए साल में शांति की उम्मीद है। लेकिन बाधाएं हैं। यदि झूठे हमले हुए, तो सब बिगड़ सकता है। विशेषज्ञ कहते हैं कि वार्ता जारी रखनी चाहिए। दोनों पक्षों को समझौता करना होगा। यूक्रेन ने कहा कि वे ९०% तैयार हैं। बाकी १०% पर काम हो रहा है। लेकिन रूस की मंशा साफ नहीं है। इसलिए, सावधानी जरूरी है। भारत की भूमिका भारत ने हमेशा शांति की वकालत की है। प्रधानमंत्री ने दोनों पक्षों से बात की। भारत मध्यस्थ बन सकता है। यह क्षेत्रीय स्थिरता के लिए अच्छा होगा। इसके अलावा, युद्ध से ऊर्जा कीमतें प्रभावित होती हैं। भारत को फायदा होगा यदि शांति हो। निष्कर्ष यूक्रेन-रूस शांति वार्ता महत्वपूर्ण मोड़ पर है। ९०% समझौता तैयार है। लेकिन रूस की साजिश चिंता का विषय है। दुनिया को एकजुट होना चाहिए। शांति से सभी को फायदा होगा। हम आगे की खबरों पर नजर रखेंगे। यह स्थिति तेजी से बदल रही है। अधिक जानकारी के लिए जय राष्ट्र न्यूज पर बने रहें। यदि आपके कोई सवाल हैं, तो कमेंट करें।

आगे और पढ़ें
दिल्ली: 14 साल की दिव्या ने कराटे की ताकत से चेन स्नैचर को दौड़ाकर पकड़ा, मां को धक्का देकर भाग रहा था चोर

14 साल की दिव्या ने कराटे की ताकत से चेन स्नैचर को दौड़ाकर पकड़ा

नई दिल्ली, 01 जनवरी 2026: दिल्ली के उत्तम नगर में एक 14 साल की लड़की ने अपनी बहादुरी और कराटे की ट्रेनिंग से सभी को चौंका दिया। उसने अपनी मां से चेन छीनकर उन्हें धक्का देने वाले चोर का करीब आधा किलोमीटर तक पीछा किया और आखिरकार उसे पकड़कर गिरा दिया। यह घटना उत्तम नगर के ओम विहार फेज-5 इलाके में हुई। केरल मूल की साठी अपनी बेटी दिव्या के साथ ट्यूशन से घर लौट रही थीं। रात लगभग 8 बजे घर के पास पहुंचते ही एक व्यक्ति ने साठी को धक्का देकर उनकी सोने की चेन छीन ली और तेजी से भागने लगा। चेन में लगा लॉकेट करीब एक सोवरिन का था। दिव्या ने बिल्कुल भी घबराए बिना तुरंत चोर का पीछा शुरू कर दिया। व्यस्त सड़क पर वाहनों के बीच दौड़ते हुए उसने करीब आधा किलोमीटर तक चोर को खदेड़ा। फिर अपनी पांच साल की कराटे ट्रेनिंग का इस्तेमाल कर उसे पकड़ लिया और जमीन पर पटक दिया। आसपास के लोगों ने पुलिस को सूचना दी, लेकिन चेन वापस मिल जाने के कारण साठी ने चोर के खिलाफ शिकायत दर्ज नहीं कराई। हालांकि चेन का लॉकेट गायब था। दिव्या नवादा स्थित पंजाजन्यम भारतम कल्चरल सेंटर में शीलू जोसेफ से कराटे सीख रही हैं। वह विकसित पुरी के केरल स्कूल में कक्षा 9 की छात्रा हैं। मां साठी ने कहा, “चेन से ज्यादा बेटी की सुरक्षा की चिंता थी।” यह घटना एक बार फिर साबित करती है कि लड़कियों के लिए सेल्फ-डिफेंस ट्रेनिंग कितनी जरूरी है। दिव्या की बहादुरी की सोशल मीडिया पर खूब प्रशंसा हो रही है। (जय राष्ट्र न्यूज़ ब्यूरो)

आगे और पढ़ें
Translate »