नई दिल्ली: विश्व स्वास्थ्य विशेषज्ञों और भारत के चिकित्सा विशेषज्ञों ने हेपेटाइटिस-B (Hepatitis-B) संक्रमण को लेकर नई चेतावनी जारी करते हुए लोगों से समय पर जांच और उपचार कराने की अपील की है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह संक्रमण शुरुआती चरण में अक्सर बिना किसी स्पष्ट लक्षण के रहता है, लेकिन समय पर पहचान न होने पर यह लिवर सिरोसिस, लिवर फेलियर और लिवर कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का कारण बन सकता है। (who.int)
डॉक्टरों के अनुसार भारत में लाखों लोग हेपेटाइटिस-B से संक्रमित हैं, लेकिन बड़ी संख्या में मरीजों को इसकी जानकारी ही नहीं होती। इसी कारण नियमित स्वास्थ्य जांच और समय पर स्क्रीनिंग को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
हेपेटाइटिस-B क्या है?
हेपेटाइटिस-B एक वायरल संक्रमण है, जो मुख्य रूप से लिवर (यकृत) को प्रभावित करता है। यह संक्रमित रक्त, असुरक्षित चिकित्सा उपकरण, संक्रमित व्यक्ति के शारीरिक द्रव तथा जन्म के दौरान मां से बच्चे में भी फैल सकता है। (who.int)
किन लक्षणों को नजरअंदाज न करें?
विशेषज्ञों ने निम्न लक्षण दिखाई देने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करने की सलाह दी है—
- लगातार थकान महसूस होना।
- भूख कम लगना।
- मतली या उल्टी।
- पेट के दाहिने हिस्से में दर्द।
- आंखों और त्वचा का पीला पड़ना (पीलिया)।
- गहरे रंग का पेशाब।
हालांकि कई मरीजों में लंबे समय तक कोई लक्षण दिखाई नहीं देते, इसलिए जोखिम वाले लोगों को नियमित जांच कराने की सलाह दी जाती है।
समय पर जांच क्यों जरूरी है?
विशेषज्ञों का कहना है कि समय रहते संक्रमण का पता चलने पर दवाओं और नियमित निगरानी से गंभीर जटिलताओं के जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है। आधुनिक उपचार से वायरस को नियंत्रित रखा जा सकता है और मरीज सामान्य जीवन जी सकते हैं। (cdc.gov)
बचाव के उपाय
डॉक्टरों ने हेपेटाइटिस-B से बचाव के लिए लोगों को सलाह दी है—
- हेपेटाइटिस-B का टीकाकरण अवश्य कराएं।
- केवल सुरक्षित और स्टरलाइज्ड इंजेक्शन व चिकित्सा उपकरणों का उपयोग करें।
- संक्रमित रक्त चढ़ाने से बचने के लिए प्रमाणित ब्लड बैंक का ही उपयोग करें।
- व्यक्तिगत रेजर और टूथब्रश साझा न करें।
- नियमित स्वास्थ्य जांच कराएं, विशेषकर यदि संक्रमण का जोखिम अधिक हो।
विश्व स्वास्थ्य संगठन का लक्ष्य
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) का लक्ष्य वर्ष 2030 तक वायरल हेपेटाइटिस को सार्वजनिक स्वास्थ्य खतरे के रूप में समाप्त करना है। इसके लिए समय पर जांच, टीकाकरण और उपचार को सबसे प्रभावी उपाय माना गया है। (who.int)
निष्कर्ष
विशेषज्ञों का मानना है कि हेपेटाइटिस-B की समय पर पहचान और उचित इलाज से गंभीर लिवर रोगों से बचा जा सकता है। इसलिए यदि किसी व्यक्ति में जोखिम कारक मौजूद हैं या लक्षण दिखाई देते हैं, तो बिना देरी किए जांच कराना और चिकित्सकीय सलाह लेना आवश्यक है।
Source:
World Health Organization (WHO) | Centers for Disease Control and Prevention (CDC)
जय राष्ट्र न्यूज़






