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उज्जैन में प्रशासन से सहमति के बाद मस्जिद का हिस्सा हटाने की कार्रवाई, भारी सुरक्षा के बीच काम जारी

उज्जैन: मध्य प्रदेश के उज्जैन में सिंहस्थ 2028 की तैयारियों के तहत सड़क चौड़ीकरण की जद में आ रही शाही मस्जिद के एक हिस्से को हटाने की कार्रवाई प्रशासन और मस्जिद कमेटी के बीच बनी सहमति के बाद आगे बढ़ रही है। तय व्यवस्था के अनुसार मस्जिद कमेटी से जुड़े लोग स्वयं प्रभावित हिस्से को हटा रहे हैं। इससे पहले कार्रवाई के दौरान विरोध, पथराव और पुलिस के साथ झड़प के कारण इलाके में तनाव पैदा हो गया था। करीब तीन फीट हिस्सा हटाने पर बनी सहमति मस्जिद पक्ष और प्रशासन के बीच हुई बातचीत के बाद करीब तीन फीट हिस्से को हटाने पर सहमति बनी। इससे पहले प्रशासन की ओर से लगभग 9.5 फीट हिस्से की जरूरत बताई गई थी। बातचीत के बाद हटाए जाने वाले हिस्से को सीमित करने की व्यवस्था सामने आई। मस्जिद कमेटी खुद करा रही कार्रवाई उज्जैन प्रशासन के मुताबिक सड़क चौड़ीकरण की जद में आने वाले हिस्से को मस्जिद कमेटी स्वयं हटा रही है। मौके पर scaffolding लगाई गई है और निर्माण के प्रभावित हिस्सों को चरणबद्ध तरीके से हटाया जा रहा है। प्रशासन का कहना है कि पूरी मस्जिद को नहीं हटाया जा रहा, बल्कि केवल सड़क के निर्धारित alignment में आने वाला हिस्सा प्रभावित है। मीनार को परिसर में ही किया जाएगा Shift सहमति के तहत प्रभावित मीनार के हिस्से को पूरी तरह समाप्त करने के बजाय मस्जिद परिसर के भीतर दूसरी जगह स्थानांतरित करने की व्यवस्था भी तय की गई है। इसके अलावा प्रभावित दुकानों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था, अतिरिक्त Floor Area Ratio और नियमों के अनुसार मुआवजे जैसे मुद्दों पर भी प्रशासन की ओर से आश्वासन दिया गया है। High Court में भी पहुंचा था मामला मस्जिद के हिस्से को हटाने का मामला मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर बेंच तक पहुंचा था। पहले एकल पीठ ने सड़क चौड़ीकरण के खिलाफ दायर याचिकाओं को खारिज कर दिया था। इसके बाद मस्जिद पक्ष की ओर से अपील दाखिल की गई। दोनों पक्षों के बीच व्यवस्था बनने के बाद हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने अपीलों का निपटारा कर दिया। अदालत ने नगर निगम की ओर से दिए गए आश्वासनों और संबंधित शर्तों का पालन करने को कहा। सिंहस्थ 2028 के लिए चौड़ी हो रही सड़क उज्जैन में कंठाल चौराहे से गोपाल मंदिर तक करीब 900 मीटर सड़क को चौड़ा करने का काम चल रहा है। सड़क को लगभग 15 मीटर चौड़ा किया जाना है ताकि सिंहस्थ 2028 के दौरान बड़ी संख्या में आने वाले श्रद्धालुओं की आवाजाही बेहतर तरीके से हो सके। सिर्फ मस्जिद नहीं, कई दूसरे ढांचे भी प्रभावित सड़क चौड़ीकरण परियोजना के दायरे में केवल शाही मस्जिद नहीं है। इस परियोजना से कुल 272 के आसपास संरचनाएं प्रभावित होने की बात सामने आई है। इनमें कई धार्मिक स्थल भी शामिल हैं। प्रशासन के अनुसार 80 से अधिक धार्मिक स्थलों के प्रभावित हिस्सों को हटाने की प्रक्रिया पहले ही शुरू की जा चुकी है और इनमें अधिकांश मंदिर हैं। कार्रवाई के दौरान हुआ था पथराव 28 सितंबर की सुबह मस्जिद के प्रभावित हिस्से को हटाने की प्रक्रिया शुरू होने के दौरान कुछ लोगों की भीड़ जमा हो गई थी। पुलिस के मुताबिक भीड़ में शामिल कुछ लोगों ने बैरिकेडिंग की ओर बढ़ने की कोशिश की और बाद में पुलिस पर पथराव किया। हालात को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने आंसू गैस का इस्तेमाल और हल्का बल प्रयोग किया। शहर काजी ने की शांति की अपील घटना के बाद शहर काजी ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान नहीं देने और मौके पर अनावश्यक रूप से जमा नहीं होने की अपील की। उन्होंने कहा कि मस्जिद से जुड़े मामले में बातचीत के जरिए सहमति बन चुकी है और लोगों को शांति बनाए रखनी चाहिए। ढाई हजार से ज्यादा सुरक्षाकर्मी तैनात तनाव को देखते हुए उज्जैन के संवेदनशील इलाकों में पुलिस और Rapid Action Force की भारी तैनाती की गई। करीब 2,500 पुलिस और सुरक्षा कर्मियों को अलग-अलग क्षेत्रों में लगाया गया। पुलिस ने flag march भी किया और CCTV तथा drone footage के जरिए पथराव में शामिल लोगों की पहचान शुरू की। पथराव मामले में पुलिस की कार्रवाई पुलिस ने पथराव और उपद्रव से जुड़े मामलों में कई लोगों को हिरासत में लिया और गिरफ्तारियां भी की हैं। सोशल मीडिया पर कथित तौर पर भड़काऊ सामग्री फैलाने वालों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि उपलब्ध वीडियो और CCTV फुटेज के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। अब इलाके में स्थिति शांत झड़प के अगले दिन शाही मस्जिद और आसपास के क्षेत्र में स्थिति सामान्य होती दिखाई दी। प्रशासन के मुताबिक मस्जिद कमेटी के सदस्य सहमति के अनुसार प्रभावित हिस्से को हटा रहे हैं और काम के दौरान सुरक्षा व्यवस्था बरकरार रखी गई है। फिलहाल प्रशासन ने लोगों से किसी भी अफवाह पर विश्वास न करने और सड़क चौड़ीकरण से जुड़े काम में शांति बनाए रखने की अपील की है। source – PTI / The Indian Express / The New Indian Express / Aaj Tak / Madhya Pradesh High Court The New Indian Express जय राष्ट्र न्यूज़

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उज्जैन में शाही मस्जिद के हिस्से को हटाने के दौरान तनाव, पुलिस से झड़प; पथराव के बाद छोड़े आंसू गैस के गोले

उज्जैन: मध्य प्रदेश के उज्जैन में सिंहस्थ 2028 की तैयारियों के तहत सड़क चौड़ीकरण के लिए शाही मस्जिद के एक हिस्से को हटाने की प्रक्रिया के दौरान तनाव हो गया। 28 सितंबर को बड़ी संख्या में लोग मौके पर जमा हो गए और पुलिस के साथ झड़प हुई। पुलिस के मुताबिक भीड़ की ओर से पथराव किया गया, जिसके बाद स्थिति नियंत्रित करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े गए और हल्का बल प्रयोग किया गया। मामले में पुलिस ने कई FIR दर्ज की हैं और अब तक 20 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। सिंहस्थ 2028 के लिए हो रहा सड़क चौड़ीकरण उज्जैन में कंथल चौराहा से गोपाल मंदिर तक करीब 900 मीटर लंबी सड़क को 15 मीटर चौड़ा करने का काम चल रहा है। यह परियोजना 2028 में होने वाले सिंहस्थ महाकुंभ की तैयारियों का हिस्सा है। सड़क चौड़ीकरण की जद में कई मकान, दुकानें और धार्मिक स्थल आए हैं। शाही मस्जिद का हिस्सा भी आया दायरे में सड़क चौड़ीकरण के निर्धारित alignment में शाही मस्जिद का कुछ हिस्सा भी आ रहा था। मस्जिद कमेटी ने नगर निगम की कार्रवाई को अदालत में चुनौती दी थी। इस मामले में मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर बेंच ने पहले नगर निगम की प्रक्रिया को कानून के अनुरूप माना था। तीन फीट हिस्सा हटाने पर बनी सहमति बाद में प्रशासन और मस्जिद कमेटी के बीच बातचीत के बाद समझौता हुआ। समझौते के मुताबिक सड़क की ओर से मस्जिद का करीब तीन फीट हिस्सा हटाया जाना है। इससे पहले प्रशासन की मांग इससे अधिक हिस्से को खाली कराने की थी। मस्जिद कमेटी से जुड़े लोगों ने प्रभावित हिस्से को स्वयं हटाने पर सहमति जताई। रविवार रात से जमा होने लगी थी भीड़ कार्रवाई से पहले रविवार रात बड़ी संख्या में लोग शाही मस्जिद के आसपास जमा हो गए थे। लोगों के बीच यह आशंका फैल गई थी कि पूरी मस्जिद को गिराया जा सकता है। इसके बाद रातभर इलाके में लोगों की मौजूदगी बनी रही और प्रशासन ने भारी पुलिस बल तैनात कर दिया। पुलिस और प्रदर्शनकारियों में हुई झड़प सोमवार सुबह सड़क चौड़ीकरण से जुड़ी कार्रवाई शुरू होने के दौरान कुछ लोगों ने विरोध प्रदर्शन और चक्काजाम किया। पुलिस के अनुसार भीड़ को समझाने का प्रयास किया गया, लेकिन बाद में कुछ लोगों ने सुरक्षाकर्मियों पर पत्थर फेंके। इसके जवाब में पुलिस ने भीड़ को हटाने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े। करीब 2,000 से ज्यादा पुलिसकर्मी रहे तैनात तनाव को देखते हुए शाही मस्जिद और आसपास के इलाके में भारी सुरक्षा व्यवस्था की गई। पुलिस ने बैरिकेडिंग की और करीब 500 मीटर के क्षेत्र में आवाजाही पर भी पाबंदियां लगाई गईं। CCTV और ड्रोन कैमरों के जरिए इलाके की निगरानी की गई। ‘पूरी मस्जिद गिराने’ की अफवाह पर पुलिस का दावा पुलिस का कहना है कि सोशल मीडिया पर शाही मस्जिद को पूरी तरह गिराए जाने से जुड़ी गलत सूचनाएं और भ्रामक सामग्री फैलाई गई थी। अधिकारियों के मुताबिक कुछ AI-generated पोस्ट और वीडियो ने लोगों के बीच भ्रम पैदा किया। पुलिस अब सोशल मीडिया पर वायरल सामग्री की भी जांच कर रही है। शहर काजी ने की थी शांति की अपील उज्जैन के शहर काजी ने लोगों से किसी भी तरह की अफवाह पर ध्यान नहीं देने और मौके पर भीड़ नहीं लगाने की अपील की थी। उन्होंने कहा था कि मस्जिद से जुड़ा मामला प्रशासन और कमेटी के बीच बातचीत से सुलझा लिया गया है और प्रभावित हिस्से को सहमति के अनुसार हटाया जाएगा। हाई कोर्ट में भी हुआ समझौता मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर बेंच में मामले की सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों ने समझौते की जानकारी दी। इसके बाद अदालत ने संबंधित याचिकाओं का निपटारा कर दिया। समझौते में मस्जिद के सीमित हिस्से को हटाने, कुछ दुकानों को स्थानांतरित करने और सड़क चौड़ीकरण का काम जारी रखने पर सहमति बनी। 8 FIR, 20 लोगों की गिरफ्तारी पथराव और उपद्रव के मामले में पुलिस ने अब तक 8 FIR दर्ज की हैं। 30 से अधिक लोगों को मामलों में नामजद किया गया है और 20 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है। इनमें से नौ आरोपियों को 30 सितंबर को अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया। फिलहाल शांतिपूर्ण तरीके से चल रहा काम तनाव के बाद प्रशासन और पुलिस की निगरानी में शाही मस्जिद के प्रभावित हिस्से को हटाने की प्रक्रिया जारी है। मस्जिद कमेटी से जुड़े लोग स्वयं निर्माण का प्रभावित हिस्सा हटा रहे हैं। इलाके में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात है और फिलहाल स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही है। दूसरे धार्मिक स्थल और मकान भी आए दायरे में प्रशासन का कहना है कि सड़क चौड़ीकरण का असर केवल शाही मस्जिद पर नहीं पड़ा है। परियोजना की जद में कई अन्य धार्मिक स्थल, दुकानें और मकान भी आए हैं। प्रशासन का दावा है कि सड़क चौड़ीकरण की कार्रवाई सभी प्रभावित निर्माणों पर तय प्रक्रिया के अनुसार की जा रही है। source – The Indian Express / DW / PTI / Navbharat Times / Ujjain Police The Indian Express जय राष्ट्र न्यूज़

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‘सुगम परिवहन’ पर विवाद, पुरानी बसों को लेकर उठे सवाल! नई रंगत में पुरानी बसें चलाने का आरोप

भोपाल: मध्य प्रदेश में करीब 21 साल बाद शुरू हुई मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा लॉन्च होने के एक दिन बाद ही विवादों में आ गई है। 25 सितंबर को केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भोपाल से 351 बसों को हरी झंडी दिखाई थी। इनमें 180 इलेक्ट्रिक बसें हैं, जबकि 171 ऐसी बसें हैं जो पहले से अलग-अलग शहरों में सिटी बस सेवा के तहत चल रही थीं। इन्हीं पुरानी बसों को नए रंग-रूप में शामिल किए जाने को लेकर कांग्रेस ने सरकार पर सवाल उठाए हैं। वीडियो वायरल होने के बाद शुरू हुआ विवाद सेवा शुरू होने के बाद सोशल मीडिया पर कुछ बसों के वीडियो सामने आए। इनमें बसों पर लगाई गई नई रंगीन रेडियम स्ट्रिप उखड़ती दिखाई दे रही है, जबकि कुछ वीडियो में बसों के अंदरूनी हिस्सों की स्थिति पर भी सवाल उठाए गए। इसके बाद यह चर्चा शुरू हो गई कि क्या पहले से चल रही पुरानी सिटी बसों को केवल रंग-रोगन कर नई योजना के तहत पेश किया गया है। 351 में से 171 बसें पहले से थीं संचालन में रिपोर्ट्स के अनुसार लॉन्च की गई 351 बसों में 180 वातानुकूलित इलेक्ट्रिक बसें पीएम ई-बस सेवा से जुड़ी हैं, जबकि बाकी 171 बसें पहले से शहरी क्षेत्रों में संचालित सिटी बसें हैं। नई व्यवस्था में इन बसों को एमपी यात्री परिवहन कंपनी के तहत लाकर एक समान branding और रंग देने का काम किया गया है। कांग्रेस ने बसों की हालत पर उठाए सवाल मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने सोशल मीडिया पर बस की बाहरी परत उखड़ने का वीडियो शेयर करते हुए सरकार पर निशाना साधा। कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि पुरानी बसों को नया रंग देकर योजना के तहत उतारा गया है और उनकी वास्तविक स्थिति, फिटनेस तथा यात्रियों की सुरक्षा की जांच होनी चाहिए। ये कांग्रेस के राजनीतिक आरोप हैं; उपलब्ध रिपोर्ट्स में ऐसा कोई आधिकारिक निष्कर्ष सामने नहीं आया है कि सभी पुरानी बसें असुरक्षित या अनफिट हैं। बसों की उम्र और मेंटेनेंस भी चर्चा में कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि योजना में शामिल पुरानी डीजल बसों में कई लगभग 7 से 8 वर्ष पुरानी हैं और पहले भी उनके खराब होने या रखरखाव से जुड़ी शिकायतें सामने आती रही हैं। कुछ बसों की सीट, हैंडल, ड्राइवर एरिया, CCTV और पैनिक बटन जैसी सुविधाओं को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। हालांकि प्रत्येक बस की तकनीकी फिटनेस से जुड़ा विस्तृत सरकारी ऑडिट सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आया है। सरकार का उद्देश्य क्या है? राज्य सरकार का कहना है कि मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा का उद्देश्य गांवों और शहरों के बीच सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को मजबूत करना है। पहले चरण में भोपाल, इंदौर, जबलपुर, रीवा, देवास, कटनी और भिंड को इंटरसिटी और इंट्रासिटी बस सेवाओं से जोड़ा गया है। सरकार का लक्ष्य पहले साल करीब 1,500 और 2031 तक 15 हजार बसों का नेटवर्क तैयार करना है। बसों में GPS और पैनिक बटन की भी योजना सरकार के अनुसार नई व्यवस्था में बसों की निगरानी के लिए GPS, लाइव लोकेशन ट्रैकिंग, CCTV और पैनिक बटन जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। एक Command and Control Centre के जरिए बसों की लोकेशन और समय पर भी निगरानी रखने की योजना है। पुरानी बसों को नया रंग क्यों दिया गया? रिपोर्ट्स के मुताबिक पुरानी सिटी बसें पहले अलग-अलग रंग और स्थानीय व्यवस्थाओं के तहत संचालित होती थीं। नई सेवा में उन्हें एक समान पहचान देने के लिए नया रंग और branding दी गई। भोपाल स्मार्ट सिटी से जुड़ी अधिकारी अंजू अरुण कुमार के हवाले से प्रकाशित रिपोर्ट में कहा गया कि बसों को एकरूपता देने के लिए संबंधित कंपनी ने रंग और branding का काम किया है। अब फिटनेस और सुरक्षा पर जवाब का इंतजार विवाद का मुख्य सवाल यह नहीं है कि कुछ बसें पहले से चल रही थीं, बल्कि यह है कि नई व्यवस्था में शामिल करने से पहले उनकी fitness, maintenance और safety standards की जांच किस स्तर पर की गई। फिलहाल वायरल वीडियो और कांग्रेस के आरोपों के बाद यह मुद्दा चर्चा में है। सरकार की ओर से पुरानी बसों की तकनीकी स्थिति पर विस्तृत सार्वजनिक स्पष्टीकरण सामने आने के बाद ही तस्वीर और साफ होगी। source – Akashvani News / Dainik Jagran / Free Press Journal / Hindusthan Samachar जय राष्ट्र न्यूज़

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बैगा बच्चों की मौत पर बालाघाट में बड़ा आंदोलन, आज राष्ट्रीय महाधरना; 18 राज्यों के आदिवासी संगठनों के जुटने का दावा

बालाघाट, 5 सितंबर 2026: मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले के बैगा बहुल इलाकों में बच्चों की लगातार मौतों और स्वास्थ्य सुविधाओं की स्थिति को लेकर आदिवासी संगठनों का आंदोलन तेज हो गया है। सर्व आदिवासी समाज ने आज बालाघाट के आंबेडकर चौक पर राष्ट्रीय महाधरना आयोजित करने की घोषणा की है। आयोजकों का दावा है कि इसमें देश के करीब 18 आदिवासी बहुल राज्यों के संगठनों के प्रतिनिधि शामिल होंगे। बच्चों की मौत का आंकड़ा 30 तक पहुंचा 4 सितंबर की ताज़ा रिपोर्ट में 10 वर्षीय बैगा बच्चे गजेंद्र की मौत के बाद मृत बच्चों की संख्या 30 बताई गई है। इससे पहले अलग-अलग रिपोर्टों में यह संख्या 26 से 29 के बीच बताई जा रही थी। प्रभावित इलाकों में खसरा, मलेरिया और दूसरी बीमारियों के मामलों के बीच स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठे हैं। स्वास्थ्य व्यवस्था और जवाबदेही पर सवाल आदिवासी संगठनों का आरोप है कि बैहर-बिरसा सहित दूरदराज के बैगा इलाकों में समय पर इलाज, स्वच्छ पेयजल और पर्याप्त स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं। प्रदर्शनकारी बच्चों की मौतों की विस्तृत जांच, जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही और प्रभावित परिवारों को आर्थिक सहायता देने की मांग कर रहे हैं। 3 सितंबर को भी हुआ था बालाघाट बंद इससे पहले 3 सितंबर को बालाघाट बंद आयोजित किया गया था। बाजार और कई व्यावसायिक गतिविधियां प्रभावित रहीं, जबकि आवश्यक सेवाओं को बंद से अलग रखा गया था। प्रदर्शन के बीच तत्कालीन CMHO को पद से हटाए जाने की भी रिपोर्ट सामने आई थी। 18 राज्यों के संगठनों के पहुंचने का दावा आयोजकों के अनुसार दिल्ली में राष्ट्रीय आदिवासी समन्वय समिति की बैठक में बैगा बच्चों की मौत का मुद्दा उठाया गया था। इसके बाद मामले को राष्ट्रीय स्तर पर ले जाने और 5 सितंबर को बालाघाट में महाधरना आयोजित करने का फैसला किया गया। संगठन ने भविष्य में इस मुद्दे को संसद के शीतकालीन सत्र तक पहुंचाने की बात भी कही है। स्वास्थ्य, पानी और बुनियादी सुविधाएं भी आंदोलन का मुद्दा महाधरना केवल बच्चों की मौत की जांच तक सीमित नहीं है। आदिवासी संगठन बैगा क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा, पेयजल और दूसरी बुनियादी सुविधाओं में सुधार की भी मांग कर रहे हैं। संगठनों का कहना है कि विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह के क्षेत्रों में सरकारी योजनाओं का वास्तविक लाभ जमीन तक पहुंचना चाहिए। source – Amar Ujala / Balaghat Expressजय राष्ट्र न्यूज़

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