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One Nation One Election: 2029 लोकसभा चुनाव के साथ 22 राज्यों/UTs में चुनाव कराने के विकल्प पर NDA में मंथन

नई दिल्ली: देश में ‘One Nation, One Election’ यानी लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराने की दिशा में राजनीतिक गतिविधियां तेज होती दिख रही हैं। एक ताजा रिपोर्ट के मुताबिक NDA अपने शासन वाले 22 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में विधानसभा चुनाव को 2029 के लोकसभा चुनाव के साथ कराने की संभावना पर विचार कर रहा है। हालांकि अभी इस संबंध में कोई अंतिम या औपचारिक फैसला घोषित नहीं किया गया है। मौजूदा One Nation One Election विधेयकों की व्यवस्था के हिसाब से देशभर में एक साथ चुनाव कराने की प्रक्रिया का सबसे शुरुआती व्यावहारिक समय 2034 बनता है। ऐसे में 2029 में ही NDA-शासित राज्यों के चुनाव लोकसभा के साथ कराने का विचार मौजूदा राजनीतिक चर्चा को नया मोड़ दे सकता है। 22 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों पर चर्चा इंडियन एक्सप्रेस की 23 अगस्त की रिपोर्ट के मुताबिक NDA के पास ऐसे 22 राज्य और केंद्र शासित प्रदेश हैं जहां उसके घटक दल सत्ता में हैं। इनमें से कई राज्यों के विधानसभा चुनाव 2027 और 2028 में होने हैं। चर्चा इस बात को लेकर है कि यदि संबंधित राज्य सरकारें तैयार होती हैं तो विधानसभा का कार्यकाल समय से पहले समाप्त कर 2029 के लोकसभा चुनाव के साथ नए चुनाव कराए जा सकते हैं। हालांकि ऐसा करने के लिए संबंधित राज्यों के राजनीतिक नेतृत्व की सहमति बेहद महत्वपूर्ण होगी। चार राज्यों में पहले से Lok Sabha के साथ होते हैं चुनाव NDA के शासन वाले आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम और ओडिशा में विधानसभा चुनाव पहले से ही लोकसभा चुनाव के साथ होते हैं। इसलिए इन राज्यों के चुनावी कैलेंडर को 2029 लोकसभा चुनाव से जोड़ने के लिए अलग से विधानसभा कार्यकाल घटाने जैसी स्थिति पैदा नहीं होगी। चुनौती उन राज्यों को लेकर होगी जहां विधानसभा चुनाव 2027 या 2028 में निर्धारित हैं। इन राज्यों को 2029 तक एक साथ चुनाव की व्यवस्था में लाने के लिए उनकी मौजूदा या अगली विधानसभा का कार्यकाल छोटा करना पड़ सकता है। किन राज्यों का कार्यकाल हो सकता है छोटा? रिपोर्ट के मुताबिक यदि 2029 में एक साथ चुनाव कराने का राजनीतिक फैसला होता है तो कई NDA-शासित राज्यों की विधानसभा का कार्यकाल कम करना पड़ सकता है। गोवा, गुजरात, मणिपुर, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड जैसे राज्यों में अगला विधानसभा चुनाव 2027 के आसपास निर्धारित है। ऐसे में वहां चुनी जाने वाली अगली विधानसभा को 2029 के लोकसभा चुनाव के साथ तालमेल बैठाने के लिए सामान्य पांच साल से काफी कम कार्यकाल मिल सकता है। इसी तरह छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, मेघालय, नागालैंड, राजस्थान और त्रिपुरा जैसे राज्यों में भी चुनावी समय-सारिणी को 2029 से जोड़ने के लिए कार्यकाल में बदलाव की जरूरत पड़ सकती है। फिलहाल यह केवल विचाराधीन राजनीतिक विकल्प है और संबंधित राज्यों की ओर से ऐसा कोई सामूहिक औपचारिक निर्णय नहीं लिया गया है। Constitution में विधानसभा भंग करने का क्या प्रावधान? भारतीय संविधान के अनुच्छेद 172 के मुताबिक किसी राज्य की विधानसभा सामान्य परिस्थितियों में अपनी पहली बैठक से पांच साल तक चलती है, जब तक कि उसे इससे पहले भंग न कर दिया जाए। वहीं संविधान का अनुच्छेद 174(2)(b) राज्यपाल को विधानसभा भंग करने की शक्ति प्रदान करता है। सामान्य संवैधानिक व्यवस्था में राज्यपाल मंत्रिपरिषद की सलाह के आधार पर इस शक्ति का प्रयोग करते हैं। यानी राजनीतिक और संवैधानिक प्रक्रिया पूरी होने की स्थिति में किसी विधानसभा का कार्यकाल पांच साल पूरा होने से पहले भी समाप्त हो सकता है। मौजूदा Bill में क्या है व्यवस्था? केंद्र सरकार ने दिसंबर 2024 में Constitution (One Hundred and Twenty-Ninth Amendment) Bill, 2024 और Union Territories से जुड़ा एक अन्य विधेयक लोकसभा में पेश किया था। इन विधेयकों का उद्देश्य लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के चुनावों को एक साथ कराने की संवैधानिक व्यवस्था तैयार करना है। प्रस्ताव के मुताबिक कानून लागू होने के बाद लोकसभा के आम चुनाव के बाद उसकी पहली बैठक की तारीख को राष्ट्रपति एक निर्धारित तारीख घोषित करेंगे। इसके बाद बनने वाली विधानसभाओं का कार्यकाल अगली लोकसभा के कार्यकाल के साथ समाप्त किया जा सकेगा, ताकि आगे लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराए जा सकें। मौजूदा समय-सारिणी के हिसाब से इस प्रक्रिया के जरिए nationwide simultaneous elections की स्थिति 2034 में बनने की संभावना है। Joint Parliamentary Committee कर रही Bill की जांच One Nation One Election से जुड़े दोनों विधेयक फिलहाल संसद की Joint Committee के विचाराधीन हैं। इस समिति के अध्यक्ष BJP सांसद पी.पी. चौधरी हैं। समिति अलग-अलग राज्यों, राजनीतिक प्रतिनिधियों, विशेषज्ञों और अन्य stakeholders से बातचीत कर रही है। 2029 में NDA-शासित राज्यों के चुनाव लोकसभा के साथ कराने के विकल्प पर पूछे जाने पर पी.पी. चौधरी ने इंडियन एक्सप्रेस से कहा कि यह फैसला संबंधित NDA मुख्यमंत्रियों का होगा और यह मुद्दा समिति के दायरे से बाहर है। कुछ NDA मुख्यमंत्रियों ने दिया समर्थन रिपोर्ट के मुताबिक One Nation One Election के सिद्धांत को कई NDA मुख्यमंत्री पहले ही समर्थन दे चुके हैं। गोवा, उत्तराखंड, हरियाणा और दिल्ली के मुख्यमंत्रियों ने Parliamentary Committee के साथ चर्चा के बाद simultaneous elections के विचार के प्रति सकारात्मक रुख दिखाया है। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने भी संकेत दिया था कि राष्ट्रीय चुनावी व्यवस्था के साथ तालमेल के लिए जरूरत होने पर दिल्ली सरकार अपने कार्यकाल में उचित बदलाव पर सकारात्मक रूप से विचार कर सकती है। Congress ने फिर जताया विरोध विपक्ष One Nation One Election प्रस्ताव का लगातार विरोध करता रहा है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि पार्टी का रुख नहीं बदला है और कांग्रेस इस प्रस्ताव को संविधान तथा संघीय लोकतांत्रिक व्यवस्था के खिलाफ मानती है। कांग्रेस और DMK समेत कई विपक्षी दलों ने 2024 में भी संसद में इन विधेयकों का विरोध किया था। विपक्ष का तर्क है कि अलग-अलग राज्यों की सरकारों का कार्यकाल चुनावी कैलेंडर के हिसाब से छोटा करना संघीय व्यवस्था और राज्यों के जनादेश को प्रभावित कर सकता है। वहीं One Nation One Election के समर्थकों का कहना है कि बार-बार होने वाले चुनावों से होने वाला खर्च, प्रशासनिक दबाव और Model Code of Conduct के कारण विकास कार्यों पर पड़ने वाले प्रभाव को एक साथ चुनाव कराकर कम किया जा सकता है। क्या 2029 से लागू हो…

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जम्मू-कश्मीर: Chenab नदी में फंसे 3 लोगों का रेस्क्यू, भारी बारिश से अचानक बढ़ा जलस्तर

जम्मू: जम्मू-कश्मीर के अखनूर में चिनाब नदी का जलस्तर अचानक बढ़ने से तीन युवकों की जान मुश्किल में पड़ गई। तीनों युवक नदी किनारे घूमने गए थे, लेकिन पानी तेजी से बढ़ने के कारण वे बीच में एक चट्टान पर फंस गए। सूचना मिलते ही पुलिस और बचाव एजेंसियों ने रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया और तीनों युवकों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। यह घटना शनिवार, 22 अगस्त की देर शाम हुई, जिसकी जानकारी रविवार 23 अगस्त 2026 को सामने आई। अखनूर के चडिया घाट पर हुआ हादसा मामला जम्मू जिले के अखनूर क्षेत्र में स्थित चडिया घाट का है। रिपोर्ट के मुताबिक तीन युवक शनिवार शाम चिनाब नदी के किनारे टहलने के लिए पहुंचे थे। इसी दौरान नदी का जलस्तर अचानक तेजी से बढ़ने लगा। युवकों को स्थिति समझने और सुरक्षित किनारे तक लौटने का पर्याप्त समय नहीं मिल पाया। पानी बढ़ता देख तीनों ने नदी के बीच मौजूद एक सुरक्षित चट्टान पर शरण ली। हालांकि लगातार बढ़ रहे जलस्तर के कारण वहां भी ज्यादा देर तक सुरक्षित रहना मुश्किल हो सकता था। स्थानीय लोगों ने पुलिस को दी सूचना नदी के आसपास मौजूद लोगों की नजर जब चट्टान पर फंसे युवकों पर पड़ी तो उन्होंने तुरंत इसकी जानकारी पुलिस को दी। सूचना मिलने के बाद अखनूर पुलिस मौके पर पहुंची। हालात को देखते हुए अन्य संबंधित बचाव एजेंसियों को भी बुलाया गया और तीनों युवकों को बाहर निकालने के लिए अभियान शुरू किया गया। तेज बहाव और बढ़ता जलस्तर रेस्क्यू टीम के सामने सबसे बड़ी चुनौती था। लंबे Rescue Operation के बाद तीनों सुरक्षित काफी प्रयास के बाद बचाव दल तीनों युवकों तक पहुंचने में सफल रहा और उन्हें सुरक्षित स्थान पर लाया गया। इस घटना में किसी युवक की जान जाने या गंभीर रूप से घायल होने की सूचना सामने नहीं आई है। समय रहते स्थानीय लोगों द्वारा पुलिस को जानकारी देने और बचाव अभियान शुरू होने से बड़ा हादसा टल गया। अचानक क्यों खतरनाक हो जाती है Chenab नदी? चिनाब हिमालयी क्षेत्र की प्रमुख नदियों में शामिल है। पहाड़ी इलाकों में बारिश और ऊपरी क्षेत्रों से आने वाले पानी के कारण नदी के जलस्तर में तेजी से बदलाव हो सकता है। विशेषकर मानसून के दौरान नदी के आसपास जाना जोखिम भरा हो सकता है। सामान्य दिखाई देने वाला किनारा थोड़े समय में तेज बहाव की चपेट में आ सकता है। अखनूर की घटना में भी पानी इतनी तेजी से बढ़ा कि घाट पर मौजूद तीनों युवक समय रहते किनारे तक नहीं पहुंच पाए। Police ने लोगों को दी चेतावनी घटना के बाद पुलिस ने आम लोगों से बरसात के मौसम में चिनाब नदी से सुरक्षित दूरी बनाए रखने की अपील की है। विशेष रूप से रात के समय नदी किनारे जाने से बचने की सलाह दी गई है। अधिकारियों के मुताबिक जलस्तर में अचानक वृद्धि होने की स्थिति में नदी के पास मौजूद लोगों के लिए खतरा बढ़ सकता है। लोगों को नदी में उतरने, नहाने या तेज बहाव वाली जगहों पर जाने से भी बचना चाहिए। पहले भी सामने आ चुके हैं हादसे चिनाब नदी में हाल के दिनों में हादसों की अन्य घटनाएं भी सामने आई हैं। 9 अगस्त को अखनूर के खौड़ इलाके के दो युवक नदी में नहाते समय लापता हो गए थे। पुलिस, SDRF, NDRF और स्थानीय स्वयंसेवकों ने उनकी तलाश में अभियान चलाया था। बाद में दोनों के शव बरामद किए गए थे। ऐसी घटनाएं बताती हैं कि बरसात के दौरान नदी के बहाव और जलस्तर को हल्के में लेना खतरनाक हो सकता है। प्रशासन की सलाह को नजरअंदाज न करें मानसून के दौरान जम्मू क्षेत्र में नदियों और नालों का जलस्तर अचानक बढ़ने का खतरा बना रहता है। ऐसे में प्रशासन द्वारा जारी weather और safety advisories का पालन करना बेहद जरूरी है। अगर नदी में अचानक पानी बढ़ता दिखाई दे तो तुरंत ऊंचे और सुरक्षित स्थान की ओर जाना चाहिए। नदी के बीच मौजूद पत्थरों या छोटे टापुओं तक पहुंचने की कोशिश भी जोखिम बढ़ा सकती है। अखनूर में हुए इस रेस्क्यू ऑपरेशन में राहत की बात यह रही कि तीनों युवकों को सुरक्षित बचा लिया गया। घटना एक बार फिर याद दिलाती है कि बरसात के मौसम में चिनाब जैसी तेज बहाव वाली नदियों के आसपास अतिरिक्त सावधानी बेहद जरूरी है। स्रोत – एबीपी न्यूज़ जय राष्ट्र न्यूज़

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राहुल गांधी का पुणे दौरा; ‘छात्रों की गूंज’ में छात्रों से सीधा संवाद

पुणे: लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने शनिवार, 22 अगस्त 2026 को पुणे में आयोजित ‘छात्रों की गूंज’ (Chhatron Ki Goonj) कार्यक्रम में युवाओं से सीधा संवाद किया। इस बार कार्यक्रम का खास फोकस छात्राओं और महिलाओं से जुड़े मुद्दों पर रहा। कार्यक्रम के दौरान शिक्षा, महिला सुरक्षा, रोजगार, प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और आदिवासी छात्रों की समस्याओं समेत कई विषय उठे। राहुल गांधी ने पारंपरिक राजनीतिक भाषण देने के बजाय छात्रों की बातें सुनने और उनके सवालों का जवाब देने पर जोर दिया। छात्राओं ने उनके सामने उच्च शिक्षा में आने वाली बाधाओं, परिवार और समाज के दबाव, आर्थिक समस्याओं तथा सुरक्षा से जुड़े अनुभव साझा किए। महिला छात्राओं पर रहा कार्यक्रम का खास फोकस ‘छात्रों की गूंज’ कांग्रेस की छात्र और युवा outreach initiative का हिस्सा है। पुणे में आयोजित इस संस्करण को मुख्य रूप से महिला छात्राओं के संवाद पर केंद्रित किया गया था। कार्यक्रम की शुरुआत में राहुल गांधी ने कहा कि वह लंबा राजनीतिक भाषण देने के बजाय वहां मौजूद महिलाओं और छात्राओं की समस्याओं को सुनना चाहते हैं। कार्यक्रम में छात्राओं ने sexual harassment, personal safety, शिक्षा जारी रखने में आर्थिक दिक्कत और विवाह तथा घरेलू जिम्मेदारियों के कारण पढ़ाई प्रभावित होने जैसे विषय उठाए। महिलाओं की स्वतंत्र पहचान पर राहुल गांधी का जोर अपने संबोधन के दौरान राहुल गांधी ने महिलाओं की स्वतंत्र पहचान का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि किसी महिला की पहचान केवल बेटी, बहन, पत्नी या मां के रूप में सीमित नहीं की जानी चाहिए। महिलाओं को अपने फैसले लेने, शिक्षा हासिल करने, रोजगार चुनने और सामाजिक जीवन में अपनी जगह बनाने की स्वतंत्रता मिलनी चाहिए। उन्होंने महिलाओं को भारत की बड़ी ताकत बताते हुए पितृसत्तात्मक सोच को चुनौती देने की बात कही। राहुल गांधी ने कार्यक्रम के दौरान Manusmriti का जिक्र करते हुए महिलाओं को पुरुष रिश्तेदारों पर निर्भर मानने वाली सोच की आलोचना भी की। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आईं। MPSC अभ्यर्थी ने राहुल गांधी के सामने रखी समस्या कार्यक्रम में महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग यानी MPSC की तैयारी कर रही एक छात्रा ने भी अपनी परेशानी राहुल गांधी के सामने रखी। छात्रा ने हालिया परीक्षा से जुड़े कथित paper leak और दोबारा परीक्षा कराने की मांग का जिक्र किया। उसने बताया कि प्रतियोगी परीक्षाओं में देरी और कथित अनियमितताओं के कारण महिला अभ्यर्थियों को परिवार और विवाह से जुड़े अतिरिक्त दबाव का सामना करना पड़ता है। राहुल गांधी ने MPSC उम्मीदवारों की मांग को समर्थन देने का भरोसा दिया। आदिवासी छात्राओं ने भी उठाए गंभीर मुद्दे पुणे कार्यक्रम में आदिवासी छात्रों से जुड़ी समस्याएं भी सामने आईं। एक आदिवासी छात्रा ने राहुल गांधी को बताया कि पुणे के मांजरी क्षेत्र में छात्र सरकारी आदिवासी हॉस्टलों से जुड़े नियमों और सुविधाओं में सुधार की मांग को लेकर भूख हड़ताल कर रहे हैं। छात्रा ने सरकारी हॉस्टलों में रहने की age limit बढ़ाने, बेहतर शिक्षा व्यवस्था, पीने के पानी, beds और healthcare facilities जैसे मुद्दे उठाए। उसने आश्रम स्कूलों में मिलने वाली सुविधाओं पर भी सवाल किए। इस पर राहुल गांधी ने प्रदर्शनकारी छात्रों के आंदोलन को समर्थन देने की बात कही और जरूरत पड़ने पर उनके साथ आंदोलन में शामिल होने की इच्छा जताई। शिक्षा और रोजगार भी चर्चा के केंद्र में कार्यक्रम में केवल राजनीतिक मुद्दों पर चर्चा नहीं हुई। छात्राओं और professional women ने शिक्षा, courses, employment opportunities और financial independence से जुड़े सवाल भी रखे। राहुल गांधी ने कहा कि महिलाओं के लिए शिक्षा और रोजगार के अवसर बढ़ाए जाने चाहिए और सामाजिक दबाव उनके करियर की राह में बाधा नहीं बनना चाहिए। कार्यक्रम में महिला सुरक्षा और सामाजिक भेदभाव भी प्रमुख विषय रहे। कार्यक्रम से पहले 30 शर्तों के साथ मिली थी अनुमति राहुल गांधी के पुणे कार्यक्रम को लेकर आयोजन से पहले भी राजनीतिक हलचल देखने को मिली थी। पुणे पुलिस ने 22 अगस्त के ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम को 30 शर्तों के साथ अनुमति दी थी। इनमें noise pollution नियमों का पालन, drones के इस्तेमाल पर रोक और आपत्तिजनक banners या सामग्री न लगाने जैसी शर्तें शामिल थीं। कांग्रेस की पुणे इकाई ने दावा किया था कि कार्यक्रम के लिए 30,000 से अधिक छात्रों ने ऑनलाइन registration कराया था। यह संख्या कांग्रेस की ओर से किया गया दावा था। BJP ने कार्यक्रम को लेकर उठाए सवाल राहुल गांधी के कार्यक्रम को लेकर BJP और Congress के बीच राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप भी देखने को मिला। महाराष्ट्र BJP ने कार्यक्रम की funding को लेकर सवाल उठाए और कांग्रेस पर आयोजन में लोगों को जुटाने के लिए पैसे खर्च करने के आरोप लगाए। कांग्रेस ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि कार्यक्रम को युवाओं से मजबूत प्रतिक्रिया मिल रही है। कार्यक्रम के एक दिन पहले पुणे की COEP Technological University के hostel के बाहर ABVP और NSUI कार्यकर्ताओं के बीच तनाव और झड़प की घटना भी सामने आई थी। इसके बाद पुलिस ने मामला दर्ज किया। युवा और महिला मतदाताओं तक पहुंच की कोशिश राजनीतिक दृष्टि से ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम को कांग्रेस की युवा और छात्र वर्ग से सीधे जुड़ने की रणनीति के रूप में भी देखा जा रहा है। पुणे के कार्यक्रम में खास तौर पर महिलाओं की शिक्षा, रोजगार, सुरक्षा और स्वतंत्रता को केंद्र में रखा गया। राहुल गांधी ने छात्राओं के सवालों को सीधे सुनकर उनके जवाब दिए और कुछ आंदोलनों को समर्थन देने का आश्वासन भी दिया। अब इस कार्यक्रम के बाद राहुल गांधी के Manusmriti, महिला अधिकारों और छात्र समस्याओं पर दिए गए बयानों को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। BJP नेताओं ने कार्यक्रम और राहुल गांधी के बयानों की आलोचना की है, जबकि कांग्रेस इसे युवाओं की समस्याओं को राष्ट्रीय स्तर पर उठाने की कोशिश बता रही है। फिलहाल 22 अगस्त को पुणे में हुआ ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम छात्राओं के साथ राहुल गांधी के सीधे संवाद, MPSC परीक्षा विवाद और आदिवासी विद्यार्थियों की मांगों के कारण चर्चा में बना हुआ है। स्रोत – पीटीआई, इंडिया टुडे, द न्यू इंडियन एक्सप्रेस, द इंडियन एक्सप्रेस जय राष्ट्र न्यूज़

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राम मंदिर चढ़ावा चोरी पर ‘मोदी समर्थक’ बताए जा रहे शख्स का बयान चर्चा में; VIDEO वायरल

नई दिल्ली/अयोध्या: अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी का मामला पिछले कई महीनों से चर्चा में है। इसी बीच सोशल मीडिया पर एक व्यक्ति का वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें वह राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले को लेकर ऐसा तर्क देता नजर आ रहा है जिसने नई बहस छेड़ दी है। सोशल मीडिया पोस्ट में इस व्यक्ति को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का समर्थक बताया जा रहा है। हालांकि वायरल वीडियो में दिखाई दे रहे व्यक्ति की पहचान और उसके किसी राजनीतिक दल से औपचारिक जुड़ाव की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। वीडियो में व्यक्ति कथित चोरी को भगवान कृष्ण द्वारा बचपन में मक्खन चुराने की पौराणिक कथाओं से जोड़कर समझाने की कोशिश करता दिखाई देता है। उसके इसी बयान पर सोशल मीडिया यूजर्स अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। वायरल VIDEO में क्या कहता दिख रहा है शख्स? सोशल मीडिया पर वायरल क्लिप में एक व्यक्ति से अयोध्या राम मंदिर में सामने आए चढ़ावा चोरी मामले के बारे में सवाल पूछा जाता है। जवाब में वह कथित तौर पर कहता है कि इसे सामान्य चोरी की तरह नहीं देखा जाना चाहिए। इसके बाद वह आरोपी के ‘यादव’ सरनेम का जिक्र करते हुए भगवान कृष्ण और उनकी बाल लीलाओं का उदाहरण देता दिखाई देता है। वीडियो में दिए गए इस तर्क को लेकर सोशल मीडिया पर बड़ी संख्या में लोग सवाल उठा रहे हैं। कई यूजर्स का कहना है कि किसी आपराधिक मामले को धार्मिक कथा से जोड़कर सही ठहराना उचित नहीं है। हालांकि यह स्पष्ट करना जरूरी है कि वायरल वीडियो में मौजूद व्यक्ति का बयान उसकी व्यक्तिगत राय है। इसका किसी सरकारी संस्था, BJP या राम मंदिर ट्रस्ट की आधिकारिक प्रतिक्रिया के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। क्या सच में राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी का मामला है? वायरल वीडियो से अलग, अयोध्या राम मंदिर के चढ़ावे से जुड़ा कथित चोरी का मामला वास्तविक पुलिस और न्यायिक जांच के दायरे में है। जून 2026 में श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की शिकायत पर आठ लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की गई थी। आरोपों में मंदिर में श्रद्धालुओं की ओर से दिए गए नकद और अन्य चढ़ावे में कथित हेराफेरी शामिल है। मामले में नामजद आरोपियों में रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव, मनीष कुमार यादव, अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, रामशंकर मिश्रा, करुणेश पांडे और सुभाष श्रीवास्तव शामिल हैं। CCTV फुटेज में क्या सामने आया? जांच के दौरान CCTV फुटेज भी अहम सबूत के तौर पर सामने आया। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार पुलिस जांच में करीब 45 दिनों की CCTV recording खंगाली गई थी। जांच से जुड़े सूत्रों ने दावा किया कि फुटेज में आठ गिरफ्तार आरोपियों में से कम से कम पांच लोग cash counting के दौरान नोटों की गड्डियां निकालकर अपने कपड़ों या मोजों में छिपाते दिखाई दिए। यह मामला सामने आने के बाद मंदिर में donation counting और उसके management system को लेकर भी गंभीर सवाल उठे। करीब 80 लाख रुपये की रिकवरी की खबर जांच के शुरुआती चरण में पुलिस ने गिरफ्तार आरोपियों से कथित रूप से चोरी से जुड़ी बड़ी रकम बरामद करने की जानकारी भी दी थी। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार आरोपियों से कुल करीब ₹79.85 लाख नकद बरामद किए गए थे। इसके बाद मामला केवल स्थानीय पुलिस जांच तक सीमित नहीं रहा और देश की राजनीति से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया। SIT की Final Report भी आई उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से गठित पहली Special Investigation Team ने अगस्त में अपनी final report राज्य सरकार को सौंप दी। इसके बाद Home Department ने रिपोर्ट को श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को आगे की कार्रवाई के लिए भेज दिया। रिपोर्ट में donation counting process में administrative और supervisory lapses का भी जिक्र सामने आया था। पहली SIT की रिपोर्ट में ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय और पूर्व सदस्य अनिल मिश्रा के खिलाफ चोरी में संलिप्तता का सबूत नहीं मिलने की जानकारी सामने आई। Supreme Court भी कर रहा मामले की निगरानी राम मंदिर donation case अब सुप्रीम कोर्ट के समक्ष भी है। 17 अगस्त 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने मामले की जांच कर रही एक अन्य SIT को जांच जल्द पूरी करने और status report दाखिल करने का निर्देश दिया। अदालत ने यह भी संकेत दिया कि भविष्य में मंदिर में आने वाले donations के management और transparency को बेहतर बनाने के लिए दिशा-निर्देश जारी किए जा सकते हैं। इससे साफ है कि मामला केवल सोशल मीडिया का दावा नहीं बल्कि गंभीर जांच और न्यायिक प्रक्रिया का विषय है। आठों आरोपी न्यायिक हिरासत में इस मामले में गिरफ्तार आठ आरोपियों की न्यायिक हिरासत को अगस्त में आगे बढ़ाया गया था। अयोध्या की विशेष अदालत ने सभी आठ आरोपियों की judicial custody को 24 अगस्त 2026 तक बढ़ाया था। बचाव पक्ष ने आरोपियों के खिलाफ लगाई गई धाराओं पर आपत्ति जताते हुए उन्हें गलत तरीके से फंसाए जाने का दावा किया है। इसलिए आरोपियों को दोषी मानने का अंतिम फैसला अदालत की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही होगा। वायरल बयान पर क्यों हो रही चर्चा? इस पूरे मामले के बीच वायरल हुआ नया वीडियो मुख्य रूप से व्यक्ति के असामान्य तर्क के कारण चर्चा में आया है। सोशल मीडिया पर शेयर किए जा रहे वीडियो में कथित चोरी को भगवान कृष्ण की मक्खन चोरी से जोड़ने की कोशिश पर कई लोगों ने आलोचना की है, जबकि कुछ लोग इसे केवल उस व्यक्ति की निजी और धार्मिक व्याख्या बता रहे हैं। यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि सोशल मीडिया पर वीडियो के साथ व्यक्ति को “मोदी समर्थक” बताया जा रहा है, लेकिन उसकी राजनीतिक पहचान की विश्वसनीय मीडिया या आधिकारिक स्रोत से पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में वीडियो में कही गई बातों को BJP, केंद्र सरकार या किसी हिंदू धार्मिक संस्था का आधिकारिक रुख मानना गलत होगा। चढ़ावा चोरी मामले की जांच अभी महत्वपूर्ण मोड़ पर राम मंदिर चढ़ावा मामले में पुलिस कार्रवाई, गिरफ्तारियां, CCTV फुटेज, रकम की बरामदगी और SIT जांच जैसे कई तथ्य आधिकारिक जांच प्रक्रिया का हिस्सा बन चुके हैं। वहीं वायरल वीडियो से पैदा हुई बहस…

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Indian Army ने बनाया पहला ‘Baaz Battalion’, drones से surveillance से लेकर deep strike तक बढ़ेगी ताकत

नई दिल्ली: भारतीय सेना ने आधुनिक युद्ध की बदलती जरूरतों को देखते हुए अपना पहला विशेष ‘Baaz Battalion’ operationalise कर दिया है। यह dedicated drone unit पंजाब में सेना की 11 Corps यानी Vajra Corps के तहत बनाई गई है। इसका उद्देश्य सीमा पर लगातार निगरानी, battlefield intelligence और जरूरत पड़ने पर लंबी दूरी के drone operations की क्षमता को मजबूत करना है। ‘Baaz’ का अर्थ बाज यानी hawk है। सेना की यह नई पहल unmanned aerial systems को एक dedicated formation के तहत लाकर surveillance से लेकर future battlefield operations तक उनकी भूमिका को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। Punjab में बनी पहली Baaz Battalion 22 अगस्त 2026 को सामने आई जानकारी के मुताबिक भारतीय सेना की Vajra Corps या 11 Corps पहली formation बन गई है जिसने Baaz Battalion को operationalise किया है। 11 Corps का मुख्यालय जालंधर में है और इसकी operational responsibility पश्चिमी मोर्चे से जुड़ी हुई है। आकाशवाणी की रिपोर्ट के अनुसार नई battalion का उद्देश्य भारतीय सेना की aerial agility, responsiveness और battlefield reach बढ़ाना है। सेना इसे भविष्य के battlefield में ‘eyes in the sky’ की भूमिका देने की तैयारी कर रही है, जहां drones वास्तविक समय में दुश्मन की गतिविधियों, terrain और battlefield developments की जानकारी दे सकेंगे। Surveillance से Deep Strike तक क्या होगी भूमिका? Baaz Battalions को केवल सीमित दूरी की निगरानी के लिए नहीं बनाया गया है। इस योजना की घोषणा जून 2026 में करते हुए भारतीय सेना ने संकेत दिया था कि ये specialised units long-range surveillance, intelligence gathering, reconnaissance, targeting और strike-related drone missions को संभालने में सक्षम होंगी। ऐसी units का उद्देश्य frontline commanders को battlefield की ज्यादा स्पष्ट और लगातार जानकारी उपलब्ध कराना है। लंबी दूरी वाले unmanned systems की मदद से सेना सीमा के पार गहराई तक surveillance कर सकती है और operational requirement के अनुसार targets की पहचान तथा अन्य battlefield systems के साथ coordination बेहतर हो सकता है। Operation Sindoor के बाद तेज हुआ बदलाव Baaz Battalion की योजना भारतीय सेना के व्यापक transformation programme का हिस्सा है। रिपोर्ट्स के अनुसार इसके पीछे हाल के सैन्य अनुभवों, चीन के साथ Line of Actual Control पर लंबे गतिरोध और Operation Sindoor के दौरान drone और loitering-munition systems से मिले lessons की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। आधुनिक युद्ध में drones का इस्तेमाल केवल निगरानी तक सीमित नहीं है। Russia-Ukraine war से लेकर कई हालिया संघर्षों में surveillance drones, kamikaze drones और loitering munitions ने battlefield tactics को तेजी से बदला है। भारतीय सेना भी इसी बदलाव को देखते हुए unmanned systems को अपने operational structure में ज्यादा गहराई से शामिल कर रही है। Army Aviation Corps के तहत होंगी specialised units जून में Baaz Battalions की योजना सामने आने के समय बताया गया था कि ये units Army Aviation Corps के तहत काम करेंगी। इनमें drone systems को operate करने, maintain करने और उनसे आने वाले बड़े पैमाने के intelligence data को analyse करने के लिए specialised personnel का pool तैयार किया जाएगा। इसका फायदा यह होगा कि अलग-अलग drone platforms के training, maintenance, deployment और battlefield integration को एक dedicated structure में manage किया जा सकेगा। Ashini Drone Platoons से कैसे अलग है Baaz Battalion? भारतीय सेना में अलग-अलग स्तर पर drones के इस्तेमाल के लिए अलग formations तैयार की जा रही हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार infantry battalions में Ashini drone platoons tactical और नजदीकी surveillance के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं। इनके विपरीत Baaz Battalion का focus अधिक दूरी और बड़े operational area में surveillance तथा drone operations पर होगा। इसके अलावा Artillery की Divyastra batteries loitering ammunition और one-way attack drones से जुड़ी भूमिका निभाती हैं। इस प्रकार Baaz Battalion को सेना के long-range drone ecosystem के एक centralized operational hub के रूप में देखा जा रहा है। किन drones का हो सकता है इस्तेमाल? Baaz Battalion में इस्तेमाल होने वाले exact platforms की पूरी operational जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है। हालांकि पहले सामने आई रिपोर्ट्स में संकेत दिया गया था कि future Baaz formations long-range UAV fleets के साथ काम कर सकती हैं। भारतीय सेना के पास पहले से Israeli-origin Heron जैसे UAV platforms मौजूद हैं और देश अपनी indigenous drone capabilities भी तेजी से बढ़ा रहा है। भारत अमेरिका से MQ-9B remotely piloted aircraft भी हासिल करने की प्रक्रिया में है, जबकि Indian private sector में कई कंपनियां surveillance और combat drone technologies पर काम कर रही हैं। Drone और Counter-Drone Systems पर भी बढ़ रहा निवेश भारतीय सेना केवल offensive और surveillance drones पर ही नहीं बल्कि counter-drone capabilities पर भी निवेश बढ़ा रही है। जुलाई 2026 में Defence Acquisition Council ने करीब ₹52,000 करोड़ के विभिन्न defence procurement proposals को Acceptance of Necessity प्रदान किया था। इनमें भारतीय सेना के लिए AKASH TARANG Anti-UAV Electronic Warfare System और Jet Based Kamikaze Drone System जैसे प्रस्ताव भी शामिल थे। यह बताता है कि भविष्य के युद्ध में drone और counter-drone warfare दोनों सेना की modernisation strategy का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुके हैं। भविष्य के युद्ध के लिए Army की नई तैयारी Baaz Battalion का गठन भारतीय सेना की उस रणनीति को दर्शाता है जिसमें manpower और traditional weapons के साथ-साथ technology-driven warfare पर तेजी से जोर दिया जा रहा है। Vajra Corps के General Officer Commanding ने battalion के raising day पर Baaz aviators और personnel से बातचीत करते हुए technology, innovation और operational excellence को भविष्य के battlefield के लिए महत्वपूर्ण बताया। पहली Baaz Battalion के operational होने के बाद अब आने वाले समय में सेना अन्य formations में भी ऐसी dedicated drone units का विस्तार कर सकती है। नई unit के साथ भारतीय सेना का लक्ष्य साफ है—सीमा पर ज्यादा बेहतर निगरानी, तेजी से intelligence जुटाना और जरूरत पड़ने पर drone-based long-range operations के जरिए battlefield पर technological edge हासिल करना। स्रोत – आकाशवाणी न्यूज़, टाइम्स ऑफ इंडिया, द ट्रिब्यून, बिजनेस स्टैंडर्ड जय राष्ट्र न्यूज़

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Karnataka में ‘Analogue Paneer’ पर एक साल का Ban, सरकार ने Public Health का दिया हवाला

बेंगलुरु: कर्नाटक सरकार ने राज्य में Analogue या Non-Dairy Paneer को सामान्य ‘Paneer’ के नाम से बनाकर, स्टोर करके, सप्लाई या बेचने पर एक साल के लिए प्रतिबंध लगा दिया है। खाद्य सुरक्षा विभाग के मुताबिक यह कदम सार्वजनिक स्वास्थ्य की सुरक्षा और ग्राहकों को भ्रामक तरीके से बेचे जा रहे उत्पादों से बचाने के उद्देश्य से उठाया गया है। प्रतिबंध से संबंधित आदेश 17 अगस्त 2026 को जारी किया गया था। Analogue Paneer आखिर होता क्या है? सामान्य पनीर दूध से बनाया जाता है। वहीं Analogue या Non-Dairy Paneer ऐसा उत्पाद है जिसमें दूध की वसा या milk solids को पूरी तरह या आंशिक रूप से vegetable oil, vegetable fat या अन्य non-dairy ingredients से बदल दिया जाता है। ऐसे उत्पाद अपने आप में हर स्थिति में प्रतिबंधित खाद्य पदार्थ नहीं होते, लेकिन उन्हें असली दूध से बने पनीर की तरह पेश करना या उपभोक्ता को बिना जानकारी दिए ‘Paneer’ के नाम से बेचना नियमों का उल्लंघन हो सकता है। किन गतिविधियों पर लगाया गया प्रतिबंध? Karnataka Food Safety and Drug Administration की ओर से जारी अधिसूचना के तहत analogue/non-dairy paneer को ‘Paneer’ के नाम से बेचने से जुड़ी पूरी सप्लाई चेन पर एक साल की रोक लागू की गई है। आदेश में इसके: पर रोक शामिल है, जब ऐसा उत्पाद सामान्य paneer के नाम से बाजार में पेश किया जा रहा हो। 17 अगस्त से लागू हुआ आदेश राज्य के खाद्य सुरक्षा विभाग के अनुसार यह अधिसूचना 17 अगस्त 2026 से प्रभावी है और एक साल तक लागू रहेगी। Food Safety and Drug Administration Commissioner Srinivas K ने कहा कि कदम का उद्देश्य उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करना और यह सुनिश्चित करना है कि non-dairy substitutes को असली paneer बताकर न बेचा जाए। Public Health का क्यों दिया गया हवाला? सरकार ने इस कार्रवाई के पीछे public health और consumer protection को प्रमुख वजह बताया है। समस्या मुख्य रूप से तब पैदा होती है जब ग्राहक को यह बताए बिना non-dairy या analogue product असली paneer के रूप में परोसा या बेचा जाता है। इससे उपभोक्ता उत्पाद की वास्तविक सामग्री और गुणवत्ता को लेकर भ्रमित हो सकता है। कर्नाटक सरकार का कहना है कि बाजार में बेचे जाने वाले paneer को निर्धारित food standards के अनुरूप होना चाहिए और ग्राहक को यह साफ पता होना चाहिए कि वह dairy product खरीद रहा है या उसका analogue substitute। FSSAI भी पहले जारी कर चुका है चेतावनी यह मामला केवल कर्नाटक तक सीमित नहीं है। Food Safety and Standards Authority of India (FSSAI) ने अप्रैल 2026 में cheese analogues की सही labeling को लेकर सार्वजनिक नोटिस जारी किया था। FSSAI ने साफ किया था कि किसी cheese analogue को ‘paneer’ के नाम से बेचना कानून का गंभीर उल्लंघन है। Food businesses और restaurants को निर्देश दिया गया था कि यदि किसी dish में analogue product का इस्तेमाल हो रहा है तो इसकी जानकारी ग्राहकों को स्पष्ट रूप से दी जाए। उदाहरण के तौर पर अगर किसी restaurant में असली dairy paneer की जगह analogue product इस्तेमाल किया जा रहा है, तो menu पर उसका वास्तविक स्वरूप स्पष्ट करना जरूरी है, ताकि ग्राहक informed choice कर सके। दूसरे राज्यों में भी हो चुकी है कार्रवाई Analogue paneer और अन्य dairy substitutes को लेकर पिछले कुछ समय से कई राज्यों में food safety authorities सक्रिय हुई हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक महाराष्ट्र, गुजरात, छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में भी ऐसे उत्पादों की बिक्री और गलत labeling के खिलाफ कार्रवाई देखने को मिली है। इससे साफ है कि analogue dairy products की सही पहचान और labeling अब देशभर में food regulators के लिए एक महत्वपूर्ण मुद्दा बनता जा रहा है। क्या Analogue Paneer पूरी तरह अवैध है? यहां एक महत्वपूर्ण अंतर समझना जरूरी है। कार्रवाई का मुख्य केंद्र non-dairy या analogue product को असली ‘paneer’ बताकर बेचने की प्रथा है। FSSAI के नियम analogue products के लिए स्पष्ट labeling और disclosure की मांग करते हैं। यानी ग्राहक को यह भ्रम नहीं होना चाहिए कि वह milk-based paneer खरीद रहा है, जबकि उत्पाद में milk fat या milk solids की जगह दूसरे ingredients का इस्तेमाल किया गया हो। इसलिए इसे केवल “हर तरह के analogue food पर प्रतिबंध” के रूप में समझना सही नहीं होगा। Restaurants और दुकानदारों पर बढ़ेगी निगरानी नए आदेश के बाद कर्नाटक में food safety officials के restaurants, hotels, caterers, manufacturers और retailers की जांच बढ़ाने की संभावना है। अधिकारियों का फोकस यह सुनिश्चित करने पर रहेगा कि असली paneer के नाम से कोई non-dairy substitute ग्राहक को न दिया जाए और food businesses product की सही पहचान तथा labeling से जुड़े नियमों का पालन करें। कर्नाटक सरकार का यह फैसला food adulteration और misleading labeling के खिलाफ बढ़ती कार्रवाई का हिस्सा माना जा रहा है। उपभोक्ताओं के लिए भी यह जरूरी है कि packaged paneer खरीदते समय ingredients और label की जांच करें और restaurant में संदेह होने पर इस्तेमाल किए जा रहे product के बारे में जानकारी मांगें। स्रोत – कर्नाटक खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन, FSSAI, इंडिया टुडे, मनीकंट्रोल जय राष्ट्र न्यूज़

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IBPS Clerk Recruitment 2026: 11,403 पदों पर भर्ती, आवेदन की अंतिम तारीख 28 अगस्त तक बढ़ी

नई दिल्ली: बैंकिंग सेक्टर में नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए बड़ी खबर है। Institute of Banking Personnel Selection (IBPS) ने Customer Service Associate यानी Clerk भर्ती 2026 के लिए आवेदन की अंतिम तारीख बढ़ा दी है। उम्मीदवार अब 28 अगस्त 2026 तक ऑनलाइन आवेदन और आवेदन शुल्क का भुगतान कर सकते हैं। पहले आवेदन की आखिरी तारीख 21 अगस्त थी। यह भर्ती CRP CSA-XVI के तहत की जा रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक विभिन्न राज्यों में उपलब्ध पदों की संख्या को जोड़ने पर करीब 11,403 रिक्तियां बनती हैं। हालांकि आधिकारिक नोटिफिकेशन में रिक्तियां राज्यवार और बैंकवार दी गई हैं और इन्हें indicative यानी संभावित रिक्तियां बताया गया है। 28 अगस्त तक कर सकेंगे आवेदन IBPS ने 21 अगस्त 2026 को CRP CSA-XVI से संबंधित corrigendum जारी किया। इसके बाद आवेदन की समय सीमा को बढ़ाकर 28 अगस्त 2026 कर दिया गया है। उम्मीदवारों को आवेदन IBPS की आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से ऑनलाइन करना होगा। अंतिम तारीख तक आवेदन फॉर्म जमा करने के साथ निर्धारित शुल्क का भुगतान भी पूरा करना जरूरी है। कौन कर सकता है आवेदन? IBPS Clerk Recruitment 2026 के लिए आवेदन करने वाले उम्मीदवार के पास किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से किसी भी विषय में Graduation Degree होनी चाहिए। आयु सीमा की बात करें तो 1 अगस्त 2026 को उम्मीदवार की न्यूनतम उम्र 20 वर्ष और अधिकतम उम्र 28 वर्ष निर्धारित की गई है। आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को नियमों के अनुसार अधिकतम आयु सीमा में छूट मिलेगी। SC और ST उम्मीदवारों को अधिकतम आयु सीमा में 5 साल, OBC-NCL उम्मीदवारों को 3 साल और Persons with Benchmark Disabilities को निर्धारित नियमों के तहत अतिरिक्त छूट मिलती है। Local Language की जानकारी भी जरूरी Customer Service Associate के पद के लिए केवल Graduation होना ही पर्याप्त नहीं है। जिस State या Union Territory के लिए उम्मीदवार आवेदन कर रहा है, वहां की निर्धारित स्थानीय भाषा को पढ़ने, लिखने, बोलने और समझने की क्षमता भी जरूरी हो सकती है। चयन प्रक्रिया में आवश्यक होने पर Local Language Proficiency Test भी लिया जा सकता है। इसके अलावा उम्मीदवार के पास कंप्यूटर संचालन से संबंधित जरूरी जानकारी होनी चाहिए। Application Fee कितनी है? IBPS Clerk 2026 के लिए आवेदन शुल्क श्रेणी के अनुसार अलग-अलग निर्धारित किया गया है। General, OBC और EWS उम्मीदवारों के लिए: ₹850 SC, ST, PwBD और पात्र Ex-Servicemen उम्मीदवारों के लिए: ₹175 शुल्क का भुगतान ऑनलाइन माध्यम से किया जा सकता है। उम्मीदवार Debit Card, Credit Card, Internet Banking, UPI और अन्य उपलब्ध डिजिटल भुगतान विकल्पों का इस्तेमाल कर सकते हैं। कब होगी Preliminary और Main परीक्षा? IBPS के 2026-27 tentative calendar के मुताबिक CSA-XVI की Preliminary Examination 10 और 11 अक्टूबर 2026 को आयोजित की जानी है। इसके बाद Preliminary Exam में सफल उम्मीदवार Main Examination में शामिल होंगे। Main Examination की तारीख 27 दिसंबर 2026 निर्धारित की गई है। परीक्षा की तारीखों में भविष्य में बदलाव होने की स्थिति में उम्मीदवारों को IBPS की आधिकारिक वेबसाइट पर जारी सूचना को अंतिम मानना चाहिए। कैसे होगा Selection? IBPS Clerk यानी Customer Service Associate भर्ती की चयन प्रक्रिया मुख्य रूप से दो ऑनलाइन परीक्षाओं पर आधारित होगी: इसके बाद लागू नियमों के अनुसार Local Language Proficiency Test जैसी प्रक्रिया भी पूरी करनी पड़ सकती है। Preliminary Examination में English Language, Numerical Ability और Reasoning Ability जैसे विषय शामिल होते हैं। Preliminary परीक्षा कुल 100 प्रश्न और 100 अंकों की होती है तथा उम्मीदवारों को इसे पूरा करने के लिए कुल 60 मिनट दिए जाते हैं। 11 Public Sector Banks में मिलेगा मौका CRP CSA-XVI के माध्यम से चयनित उम्मीदवारों को participating public sector banks में नियुक्ति का मौका मिलेगा। इस प्रक्रिया में Bank of Baroda, Bank of India, Bank of Maharashtra, Canara Bank, Central Bank of India, Indian Bank, Indian Overseas Bank, Punjab National Bank, Punjab & Sind Bank, UCO Bank और Union Bank of India शामिल हैं। रिक्तियां अलग-अलग राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में उपलब्ध हैं। उदाहरण के तौर पर वर्तमान state-wise tally में उत्तर प्रदेश, कर्नाटक, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, गुजरात समेत कई राज्यों में बड़ी संख्या में vacancies दिखाई गई हैं। आवेदन कैसे करें? उम्मीदवार सबसे पहले IBPS की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं। वहां CRP CSA-XVI सेक्शन पर क्लिक कर New Registration का विकल्प चुनना होगा। इसके बाद व्यक्तिगत और शैक्षणिक जानकारी भरें, जरूरी दस्तावेज अपलोड करें और आवेदन शुल्क का भुगतान करें। आवेदन सफलतापूर्वक जमा होने के बाद confirmation page या application form की copy सुरक्षित रखना बेहतर होगा। उम्मीदवारों को सलाह दी जाती है कि वे अंतिम दिन तक इंतजार न करें और समय रहते आवेदन पूरा कर लें। साथ ही eligibility, reservation, local language और अन्य नियमों के लिए आधिकारिक IBPS notification जरूर पढ़ें। स्रोत – इंस्टीट्यूट ऑफ बैंकिंग पर्सोनेल सिलेक्शन (IBPS), एनडीटीवी जय राष्ट्र न्यूज़

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Online Banking Scam पर बड़ा Action: भारत ने Google को सैकड़ों Firebase Accounts हटाने का निर्देश दिया

नई दिल्ली: ऑनलाइन बैंकिंग फ्रॉड और फर्जी मोबाइल ऐप के जरिए लोगों की वित्तीय जानकारी चुराने वाले साइबर अपराधियों पर भारत सरकार ने बड़ा एक्शन लिया है। भारतीय अधिकारियों ने Google को उसके Firebase प्लेटफॉर्म से सैकड़ों संदिग्ध अकाउंट हटाने का निर्देश दिया है, जिनका इस्तेमाल कथित तौर पर बैंक और सरकारी योजनाओं की नकल कर लोगों को ठगने के लिए किया जा रहा था। मामले का खुलासा Indian Cyber Crime Coordination Centre (I4C) की जांच में हुआ। अधिकारियों ने पाया कि साइबर अपराधी Firebase की सेवाओं का इस्तेमाल phishing websites, fake banking applications और malicious software को होस्ट करने के लिए कर रहे थे। SBI, ICICI और Axis Bank जैसे नामों की नकल रिपोर्ट के मुताबिक साइबर अपराधियों ने देश के बड़े बैंकों के नाम और डिजाइन की नकल करते हुए फर्जी वेबसाइट और ऐप बनाए। इनमें State Bank of India (SBI), ICICI Bank और Axis Bank जैसी संस्थाओं के नाम का इस्तेमाल किया गया। पहली नजर में ये पेज असली बैंकिंग वेबसाइट की तरह दिखाई देते थे, जिससे आम ग्राहक आसानी से इनके जाल में फंस सकते थे। ऐसे फर्जी पेज पर बैंक खाते की जानकारी, लॉगिन क्रेडेंशियल, मोबाइल नंबर और दूसरी संवेदनशील जानकारी दर्ज करने के बाद डेटा सीधे साइबर अपराधियों तक पहुंच सकता था। PM-KISAN के नाम से भी बनाए गए फर्जी Apps बैंकिंग सेवाओं के अलावा अपराधियों ने सरकारी योजनाओं का नाम भी इस्तेमाल किया। I4C को ऐसे fraudulent applications मिले जो PM-KISAN योजना से जुड़े होने का दावा कर रहे थे। ऐसे ऐप लोगों को सरकारी लाभ, KYC अपडेट या भुगतान से जुड़ी जानकारी देने के नाम पर डाउनलोड करवाए जा सकते थे। ऐप इंस्टॉल होने के बाद उपयोगकर्ता के फोन से संवेदनशील जानकारी चुराने या डिवाइस पर अनधिकृत नियंत्रण हासिल करने का खतरा बढ़ जाता है। अगस्त में कम से कम 57 Firebase Links पर Action Reuters की रिपोर्ट के अनुसार अगस्त 2026 में ही I4C ने कम से कम 57 Firebase-hosted websites और databases को हटाने के लिए notices जारी किए। व्यापक कार्रवाई में सैकड़ों Firebase accounts को निशाना बनाया गया है, जिनका कथित तौर पर अलग-अलग cyber fraud campaigns में इस्तेमाल किया जा रहा था। Firebase Google का cloud-based development platform है, जिसका इस्तेमाल वैध developers भी websites, databases और mobile applications तैयार करने के लिए करते हैं। सरकार की कार्रवाई Firebase सेवा के खिलाफ नहीं, बल्कि इसका दुरुपयोग करने वाले संदिग्ध accounts और content पर केंद्रित है। ‘Android God Mode’ Malware का इस्तेमाल जांच में एक खतरनाक malware का भी जिक्र सामने आया है, जिसे रिपोर्ट में “Android God Mode” कहा गया है। इसके जरिए साइबर अपराधी Android फोन तक व्यापक पहुंच हासिल करने की कोशिश कर सकते हैं। मालवेयर उपयोगकर्ता के फोन में मौजूद संवेदनशील जानकारी तक पहुंचने और financial fraud को अंजाम देने में मदद कर सकता है। इसी वजह से अनजान WhatsApp message, SMS या social media link से APK फाइल डाउनलोड करना बेहद जोखिम भरा हो सकता है। Google को तेजी से हटाना होगा संदिग्ध Content Reuters के मुताबिक भारतीय व्यवस्था के तहत takedown notice मिलने के बाद Google को ऐसे चिन्हित content पर तीन घंटे के भीतर कार्रवाई करनी होती है। Google ने कहा है कि वह अपने प्लेटफॉर्म पर abuse के खिलाफ कड़े नियम लागू करता है और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ सहयोग करता है। इस मामले में Google को खुद fraud के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया गया है। कार्रवाई उन अपराधियों के खिलाफ है जो कंपनी की तकनीकी सेवाओं का गलत इस्तेमाल कर रहे हैं। Cyber Criminals को Firebase क्यों पसंद आ रहा? Firebase developers को hosting, database और दूसरी cloud सुविधाएं उपलब्ध कराता है। इनमें कई सुविधाएं शुरुआती स्तर पर मुफ्त या आसानी से उपलब्ध होती हैं। इसी सुविधा का फायदा उठाकर cybercriminals तेजी से fake pages या fraudulent apps तैयार कर सकते हैं और किसी भरोसेमंद technology platform के infrastructure का इस्तेमाल करके पीड़ितों का विश्वास हासिल करने की कोशिश करते हैं। इस तरह के scams में अक्सर website का डिजाइन बिल्कुल वास्तविक बैंक या सरकारी पोर्टल जैसा बनाया जाता है। भारत में Digital Transactions बढ़ने के साथ Cyber Fraud भी चुनौती भारत दुनिया के सबसे बड़े digital payment markets में से एक बन चुका है। Reuters के मुताबिक पिछले साल देश में करीब 242 अरब digital transactions process किए गए। UPI और mobile banking के तेजी से बढ़ते इस्तेमाल के साथ cybercriminals के लिए भी संभावित targets की संख्या बढ़ी है। यही कारण है कि सरकार और cyber security agencies phishing, fake apps और banking fraud के खिलाफ निगरानी बढ़ा रही हैं। Fake Banking App से कैसे बचें? CERT-In की cyber safety guidance के अनुसार ग्राहकों को किसी unknown source या third-party platform से banking APK file डाउनलोड नहीं करनी चाहिए। बैंक आमतौर पर WhatsApp या social media के जरिए APK file भेजकर ग्राहकों को ऐप install करने के लिए नहीं कहते। उपयोगकर्ताओं को OTP, banking password और अन्य credentials भी किसी के साथ साझा नहीं करने चाहिए। अगर किसी suspicious link पर क्लिक करने के बाद बैंक खाते में असामान्य गतिविधि दिखाई दे तो तुरंत संबंधित बैंक को इसकी जानकारी देनी चाहिए। भारत सरकार की यह कार्रवाई साफ संकेत देती है कि online banking fraud में इस्तेमाल होने वाले digital infrastructure पर अब ज्यादा तेजी से कार्रवाई की जा रही है। हालांकि आम उपयोगकर्ताओं के लिए भी जरूरी है कि वे किसी भी बैंकिंग या सरकारी ऐप को डाउनलोड करने से पहले उसके आधिकारिक source की पुष्टि जरूर करें। स्रोत – रॉयटर्स, CERT-In जय राष्ट्र न्यूज़

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BWF World Championships: Treesa Jolly-Gayatri Gopichand ने भारत का Medal पक्का किया

नई दिल्ली: भारतीय बैडमिंटन के लिए BWF World Championships 2026 से बड़ी खुशखबरी सामने आई है। भारत की महिला डबल्स जोड़ी ट्रीसा जॉली और गायत्री गोपीचंद ने शानदार प्रदर्शन करते हुए सेमीफाइनल में जगह बना ली है। इसके साथ ही भारतीय जोड़ी ने टूर्नामेंट में कम से कम ब्रॉन्ज मेडल पक्का कर लिया है। नई दिल्ली के इंदिरा गांधी इंडोर स्टेडियम में खेले गए क्वार्टर फाइनल में भारतीय जोड़ी ने चीन की मजबूत जोड़ी जिया यी फान और झांग शू शियान को कड़े मुकाबले में मात दी। पहला गेम हारने के बाद शानदार वापसी क्वार्टर फाइनल मुकाबले की शुरुआत ट्रीसा और गायत्री के लिए आसान नहीं रही। चीन की चौथी वरीयता प्राप्त जोड़ी ने पहला गेम 21-16 से अपने नाम कर भारतीय खिलाड़ियों पर दबाव बना दिया। लेकिन दूसरे गेम में ट्रीसा और गायत्री ने शानदार वापसी की। भारतीय जोड़ी ने अपने खेल में आक्रामकता बढ़ाई और नेट पर बेहतर नियंत्रण दिखाते हुए दूसरा गेम 21-15 से जीत लिया। निर्णायक तीसरे गेम में भारतीय खिलाड़ियों ने चीन की अनुभवी जोड़ी को वापसी का ज्यादा मौका नहीं दिया और 21-13 से गेम जीतकर मुकाबला अपने नाम कर लिया। मैच करीब 69-70 मिनट तक चला। इस तरह भारतीय जोड़ी ने मुकाबला 16-21, 21-15, 21-13 से जीतकर BWF World Championships के सेमीफाइनल में प्रवेश किया। 15 साल बाद महिला डबल्स में भारत का मेडल ट्रीसा जॉली और गायत्री गोपीचंद की यह जीत भारतीय बैडमिंटन के लिए ऐतिहासिक है। BWF World Championships में भारत को महिला डबल्स में पिछला पदक 2011 में मिला था, जब ज्वाला गुट्टा और अश्विनी पोनप्पा की जोड़ी ने ब्रॉन्ज मेडल जीता था। अब करीब 15 साल बाद ट्रीसा और गायत्री ने महिला डबल्स में भारत का पदक सुनिश्चित किया है। वे World Championships में पदक हासिल करने वाली केवल दूसरी भारतीय महिला डबल्स जोड़ी बन गई हैं। चोट के बाद Treesa Jolly की जबरदस्त वापसी इस उपलब्धि को और खास बनाता है ट्रीसा जॉली का हालिया चोट से वापसी करना। ट्रीसा को इस साल Asia Badminton Championships और Uber Cup से पहले ट्रेनिंग के दौरान टखने में गंभीर चोट लगी थी। जांच में muscle tears और ligament injuries सामने आई थीं, जिसके बाद उन्हें लंबे rehabilitation से गुजरना पड़ा। इसके बाद ट्रीसा और गायत्री ने Indonesia Open और US Open जैसे टूर्नामेंट में वापसी की और धीरे-धीरे अपनी लय हासिल की। World Championships में उनका यह प्रदर्शन उनकी मजबूत वापसी का बड़ा उदाहरण बन गया है। घरेलू दर्शकों ने बढ़ाया हौसला नई दिल्ली में खेले जा रहे World Championships में भारतीय जोड़ी को घरेलू दर्शकों का भी जबरदस्त समर्थन मिला। क्वार्टर फाइनल मुकाबले के दौरान स्टेडियम में मौजूद दर्शकों ने ट्रीसा और गायत्री का लगातार उत्साह बढ़ाया। दोनों खिलाड़ियों ने जीत के बाद भी घरेलू दर्शकों के समर्थन को अपनी सफलता का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया। पहला गेम गंवाने के बाद भी दोनों खिलाड़ियों ने धैर्य बनाए रखा और लंबे rallies में चीन की जोड़ी को गलतियां करने पर मजबूर किया। Gayatri के लिए खास रहा यह पल गायत्री गोपीचंद के लिए यह उपलब्धि व्यक्तिगत रूप से भी बेहद खास है। वह भारत के दिग्गज बैडमिंटन खिलाड़ी और कोच पुलेला गोपीचंद की बेटी हैं। इस ऐतिहासिक मुकाबले के दौरान पुलेला गोपीचंद भी कोर्ट के पास मौजूद थे। जीत के बाद गायत्री ने अपने पिता के बतौर कोच साथ रहने को खास बताया। ट्रीसा और गायत्री इससे पहले भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल कर चुकी हैं। दोनों ने 2022 Commonwealth Games में ब्रॉन्ज मेडल जीता था और 2022 तथा 2023 में लगातार All England Open के सेमीफाइनल तक पहुंची थीं। अब नजर और बड़े मेडल पर सेमीफाइनल में जगह बनाने के साथ भारतीय जोड़ी ने कम से कम ब्रॉन्ज मेडल सुनिश्चित कर लिया है, लेकिन ट्रीसा और गायत्री की नजर इससे आगे जाने पर है। सेमीफाइनल में भारतीय जोड़ी का मुकाबला चीन की शीर्ष वरीयता प्राप्त Liu Sheng Shu और Tan Ning की मजबूत जोड़ी से निर्धारित है। विश्व की शीर्ष जोड़ियों में शामिल चीनी खिलाड़ियों के खिलाफ मुकाबला भारतीय जोड़ी के लिए बड़ी चुनौती है। हालांकि क्वार्टर फाइनल में चौथी वरीयता प्राप्त जोड़ी को हराने के बाद ट्रीसा और गायत्री का आत्मविश्वास काफी मजबूत होगा। BWF World Championships में भारत का महिला डबल्स मेडल पक्का होना देश के लिए बड़ी उपलब्धि है। अब करोड़ों भारतीय बैडमिंटन प्रशंसकों की नजर इस बात पर है कि ट्रीसा जॉली और गायत्री गोपीचंद अपने ऐतिहासिक अभियान को कितनी दूर तक ले जाती हैं। स्रोत – पीटीआई, एनडीटीवी स्पोर्ट्स, आकाशवाणी न्यूज़, टाइम्स ऑफ इंडिया जय राष्ट्र न्यूज़

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India Forex Reserves में बड़ी बढ़ोतरी, एक सप्ताह में $9 Billion से ज्यादा का उछाल

नई दिल्ली: भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में बड़ी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। 14 अगस्त 2026 को समाप्त सप्ताह में देश का Forex Reserve बढ़कर करीब 716.9 अरब डॉलर पर पहुंच गया। एक सप्ताह के भीतर इसमें करीब 10 अरब डॉलर की बढ़ोतरी हुई है और विदेशी मुद्रा भंडार अब लगभग छह महीने के उच्च स्तर पर पहुंच गया है। विदेशी मुद्रा भंडार में यह तेजी ऐसे समय आई है जब वैश्विक बाजारों में भू-राजनीतिक तनाव, कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और रुपये पर दबाव को लेकर चिंता बनी हुई है। Forex Reserve बढ़कर $716.9 Billion रिपोर्ट के मुताबिक 14 अगस्त तक भारत का कुल विदेशी मुद्रा भंडार 716.9 अरब डॉलर हो गया। पिछले सप्ताह की तुलना में इसमें लगभग 10 अरब डॉलर का उछाल देखने को मिला। इस बढ़ोतरी के पीछे विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों यानी Foreign Currency Assets (FCA) और सोने के भंडार में हुई वृद्धि की बड़ी भूमिका रही। विदेशी मुद्रा भंडार किसी भी देश की आर्थिक मजबूती के महत्वपूर्ण संकेतकों में से एक माना जाता है। इसका इस्तेमाल विदेशी भुगतान, आयात और मुद्रा बाजार में जरूरत पड़ने पर हस्तक्षेप के लिए किया जा सकता है। Foreign Currency Assets में $7.2 Billion की बढ़ोतरी भारत के Forex Reserve का सबसे बड़ा हिस्सा Foreign Currency Assets होता है। ताजा आंकड़ों में FCA में करीब 7.2 अरब डॉलर की बढ़ोतरी दर्ज की गई। FCA में अमेरिकी डॉलर के अलावा यूरो, पाउंड और जापानी येन जैसी दूसरी प्रमुख मुद्राओं में रखी गई परिसंपत्तियां भी शामिल होती हैं। अलग-अलग मुद्राओं की कीमत में बदलाव होने के कारण डॉलर में व्यक्त किए जाने वाले FCA के मूल्य में भी उतार-चढ़ाव हो सकता है। Gold Reserves ने भी दिया बड़ा योगदान विदेशी मुद्रा भंडार में इस सप्ताह आई बढ़ोतरी में सोने का योगदान भी महत्वपूर्ण रहा। भारत के Gold Reserves के मूल्य में करीब 2.7 अरब डॉलर की वृद्धि दर्ज की गई। FCA और Gold Reserves में हुई मजबूत बढ़ोतरी ने कुल Forex Reserve को छह महीने के उच्च स्तर तक पहुंचाने में मदद की। भारत के कुल विदेशी मुद्रा भंडार में Foreign Currency Assets और Gold के साथ Special Drawing Rights (SDR) तथा International Monetary Fund में भारत की Reserve Tranche Position भी शामिल होती है। 7 सप्ताह में करीब $50 Billion बढ़ा भंडार भारत के Forex Reserve में पिछले कुछ सप्ताह से लगातार मजबूत बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। Reuters की रिपोर्ट के मुताबिक करीब सात सप्ताह में विदेशी मुद्रा भंडार लगभग 50 अरब डॉलर बढ़ चुका है। अब भारत का Forex Reserve अपने रिकॉर्ड स्तर के भी काफी करीब पहुंच गया है। भारत का अब तक का उच्चतम विदेशी मुद्रा भंडार करीब 728.5 अरब डॉलर रहा है, जो फरवरी 2026 में दर्ज किया गया था। मौजूदा $716.9 billion का स्तर इस रिकॉर्ड से लगभग $11.6 billion कम है। RBI के कदमों से बढ़ा विदेशी मुद्रा प्रवाह विदेशी मुद्रा भंडार में आई तेजी के पीछे Reserve Bank of India की हालिया नीतियों को भी अहम माना जा रहा है। RBI ने जून में विदेशी उधारी और विदेशी मुद्रा जमा को आकर्षक बनाने के लिए कुछ उपाय किए थे। इनमें overseas borrowings के लिए discounted hedging तथा बैंकों द्वारा विदेशी मुद्रा जमा जुटाने से जुड़े प्रोत्साहन शामिल थे। इन उपायों के जरिए 13 अगस्त तक करीब 57 अरब डॉलर का विदेशी मुद्रा प्रवाह आकर्षित होने की जानकारी सामने आई। मजबूत डॉलर inflows के बाद RBI ने विदेशी मुद्रा जमा से जुड़ी अपनी एक hedging सुविधा को तय समय से पहले समाप्त करने का फैसला भी किया है। Rupee के लिए क्यों महत्वपूर्ण है बड़ा Forex Reserve? मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार RBI को मुद्रा बाजार में रुपये की अत्यधिक अस्थिरता को नियंत्रित करने के लिए ज्यादा क्षमता देता है। हाल के दिनों में अंतरराष्ट्रीय तेल की कीमतों और भू-राजनीतिक तनाव के कारण रुपये पर दबाव देखा गया है। 21 अगस्त को रुपया करीब 95.69 रुपये प्रति डॉलर पर बंद हुआ और सप्ताह के दौरान लगभग 0.3 प्रतिशत कमजोर हुआ। बाजार में RBI के हस्तक्षेप ने रुपये को 96 प्रति डॉलर के स्तर से नीचे जाने से रोकने में मदद की। हालांकि Forex Reserve का इस्तेमाल किसी निश्चित exchange rate को बनाए रखने की गारंटी नहीं देता, लेकिन बड़ा भंडार बाहरी आर्थिक झटकों से निपटने के लिए महत्वपूर्ण सुरक्षा कवच माना जाता है। अर्थव्यवस्था के लिए क्या संकेत? Forex Reserve में लगातार बढ़ोतरी भारत की external financial position के लिए सकारात्मक संकेत मानी जा सकती है। इससे देश को महंगे आयात, अंतरराष्ट्रीय भुगतान और विदेशी पूंजी के अचानक बाहर जाने जैसी परिस्थितियों से निपटने में मदद मिल सकती है। साथ ही बड़ा विदेशी मुद्रा भंडार निवेशकों के बीच देश की भुगतान क्षमता और आर्थिक स्थिरता को लेकर भरोसा मजबूत करने में भी भूमिका निभाता है। फिलहाल भारत का Forex Reserve 716.9 अरब डॉलर के स्तर पर पहुंच चुका है और अपने ऐतिहासिक रिकॉर्ड के करीब है। आने वाले सप्ताहों में विदेशी निवेश प्रवाह, कच्चे तेल की कीमतें, रुपये की चाल और RBI की नीतियां यह तय करने में अहम होंगी कि विदेशी मुद्रा भंडार में यह तेजी आगे भी जारी रहती है या नहीं। स्रोत – रॉयटर्स, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) जय राष्ट्र न्यूज़

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