7 महीने में 3 घटनाएं, IIT Bombay में छात्र सुरक्षा पर गंभीर सवाल
मुंबई: देश के प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थान IIT Bombay में सात महीनों के भीतर तीन छात्रों की मौत ने छात्र सुरक्षा, मानसिक स्वास्थ्य सहायता और संस्थागत जवाबदेही को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सितंबर में दूसरे वर्ष के छात्र साहिल वाकोडे की मौत के बाद सैकड़ों छात्रों ने कैंपस में प्रदर्शन किया और प्रशासन से पारदर्शी जांच तथा बेहतर छात्र सहायता व्यवस्था की मांग की। सितंबर की घटना के बाद कैंपस में प्रदर्शन 18 सितंबर 2026 को Energy Science and Engineering विभाग के दूसरे वर्ष के छात्र साहिल वाकोडे की मौत हुई। इससे पहले उसी दिन परीक्षा के दौरान मोबाइल फोन के इस्तेमाल को लेकर उनसे पूछताछ हुई थी। IIT Bombay ने शुरुआती बयान में कहा था कि छात्र को समझाया गया था और उस समय कोई औपचारिक अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं की गई थी। घटना के बाद 400 से अधिक छात्र कैंपस में जुटे और संस्थान की प्रक्रिया, मानसिक स्वास्थ्य सहायता तथा जवाबदेही को लेकर सवाल उठाए। मध्य-सेमेस्टर परीक्षाएं भी स्थगित की गईं। फरवरी में भी हुई थी छात्र की मौत इससे पहले 4 फरवरी 2026 को IIT Bombay के दूसरे वर्ष के Civil Engineering छात्र नमन अग्रवाल की हॉस्टल परिसर में गिरने के बाद मौत हुई थी। पुलिस ने उस समय Accidental Death Report दर्ज की थी और कमरे से एक हस्तलिखित नोट मिलने के बाद परिस्थितियों की जांच शुरू की थी। जुलाई में दूसरे वर्ष के छात्र की मौत इसके करीब पांच महीने बाद जुलाई 2026 में 20 वर्षीय दूसरे वर्ष के छात्र सोहिल राजकुमार सांगवान अपने हॉस्टल कमरे में मृत पाए गए। पुलिस ने मामले में ADR दर्ज कर छात्र के मोबाइल फोन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड की जांच शुरू की थी। शुरुआती जांच में व्यक्तिगत और पारिवारिक परिस्थितियों समेत कई पहलुओं को देखा जा रहा था। सात महीने में तीन मामले सितंबर में हुई घटना के साथ IIT Bombay में सात महीनों के भीतर तीन छात्र मौतें दर्ज की गईं। इसी कारण कैंपस में छात्र कल्याण और मानसिक स्वास्थ्य समर्थन को लेकर बहस तेज हो गई है। छात्रों ने मांग की कि ऐसी घटनाओं की स्वतंत्र जांच हो, counselling व्यवस्था मजबूत की जाए और अकादमिक या अनुशासनात्मक मामलों में छात्रों के साथ अधिक संवेदनशील प्रक्रिया अपनाई जाए। छात्रों की 18 मांगों पर बनी सहमति साहिल वाकोडे की मौत के बाद तीन दिनों तक चले विरोध प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने कई मांगें रखीं। रिपोर्ट्स के मुताबिक संस्थान ने 18 मांगों पर सहमति जताई, जिनमें स्वतंत्र जांच, मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार, छात्र प्रतिनिधित्व और प्रदर्शन में शामिल छात्रों के खिलाफ कार्रवाई न करने जैसी बातें शामिल थीं। परिवार ने लगाए गंभीर आरोप साहिल वाकोडे के परिवार ने मानसिक उत्पीड़न और जातिगत भेदभाव के आरोप लगाए हैं। इन आरोपों के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज किया है और जांच मुंबई क्राइम ब्रांच को सौंपी गई है। IIT Bombay से जुड़े शिक्षकों के एक समूह ने संबंधित प्रोफेसर का बचाव भी किया है। ऐसे में मामले में अलग-अलग दावे सामने आए हैं और जांच जारी है। Crime Branch कर रही जांच मुंबई क्राइम ब्रांच CCTV फुटेज, छात्रों और शिक्षकों के बयान तथा डिजिटल सबूतों की जांच कर रही है। जांच एजेंसी छात्र के परीक्षा कक्ष से निकलने के बाद के घटनाक्रम की पूरी टाइमलाइन तैयार करने की कोशिश कर रही है। छात्र सुरक्षा पर बढ़े सवाल लगातार हुई इन घटनाओं ने IIT Bombay जैसे बड़े शिक्षण संस्थानों में academic pressure, counselling support, grievance redressal और student welfare mechanisms को लेकर व्यापक बहस को जन्म दिया है। फिलहाल सितंबर की घटना की जांच जारी है। अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएंगे, लेकिन सात महीनों में तीन छात्रों की मौत ने कैंपस में छात्र सुरक्षा और मानसिक स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर चिंता जरूर बढ़ा दी है। source – The Indian Express / NDTV / India Today / Hindustan Times जय राष्ट्र न्यूज़

