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Mathura-Vrindavan में Ayodhya-Kashi की तर्ज पर बनेंगे भव्य मंदिर complexes, CM Yogi का बड़ा ऐलान

मथुरा, 5 सितंबर 2026: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने Mathura और Vrindavan को Ayodhya और Kashi की तर्ज पर विकसित करने का बड़ा ऐलान किया है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार के सहयोग से दोनों धार्मिक नगरों में भव्य temple complexes और बेहतर devotee infrastructure विकसित करने की योजना है। Janmashtami पर किया ऐलान CM Yogi ने Janmashtami के अवसर पर Shri Krishna Janmabhoomi Temple में पूजा-अर्चना के बाद श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए यह घोषणा की। उन्होंने कहा कि सरकार का प्रयास है कि Mathura-Vrindavan में भी Ayodhya और Kashi जैसी सुविधाएं विकसित की जाएं। श्रद्धालुओं के लिए बेहतर सुविधाओं पर जोर योगी आदित्यनाथ ने कहा कि Braj क्षेत्र के धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व को देखते हुए ऐसा infrastructure विकसित किया जाएगा जिससे श्रद्धालुओं को किसी तरह की असुविधा न हो। इस दिशा में Braj Teerth Vikas Parishad और जनप्रतिनिधियों के साथ काम किया जा रहा है। Ayodhya के विकास का दिया उदाहरण मुख्यमंत्री ने Ayodhya के बदलाव का जिक्र करते हुए कहा कि वहां सड़क, रेलवे, एयरपोर्ट और अन्य बुनियादी सुविधाओं में बड़े स्तर पर सुधार हुआ है। उन्होंने दावा किया कि अब सामान्य दिनों में भी करीब एक लाख श्रद्धालु प्रतिदिन Ayodhya पहुंचते हैं, जबकि विशेष अवसरों पर यह संख्या कई गुना बढ़ जाती है। Kashi और Ayodhya जैसा मॉडल सरकार का लक्ष्य Mathura-Vrindavan में धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ मंदिर परिसरों के आसपास बेहतर connectivity, crowd management और pilgrim facilities विकसित करना है। CM Yogi ने इसे Braj क्षेत्र की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को और मजबूत करने की दिशा में कदम बताया। विरासत संरक्षण के साथ विकास मुख्यमंत्री ने कहा कि विकास केवल सड़क, बिजली और पानी तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण भी जरूरी है। सरकार Mathura-Vrindavan को इसी दृष्टिकोण से विकसित करने पर जोर दे रही है। source – The Economic Times / Times of Indiaजय राष्ट्र न्यूज़

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बारिश में धंसा ₹36,000 करोड़ का गंगा एक्सप्रेसवे? उन्नाव में Repair के बाद फिर पड़ी बड़ी दरारें, Akhilesh ने सरकार को घेरा

उन्नाव: उत्तर प्रदेश के महत्वाकांक्षी गंगा एक्सप्रेसवे पर बारिश के बाद एक बार फिर सड़क में दरारें सामने आने से निर्माण और drainage व्यवस्था को लेकर सवाल उठने लगे हैं। 27 अगस्त 2026 को उन्नाव के आसपास repaired stretch पर fresh cracks की तस्वीरें और वीडियो सामने आए। रिपोर्ट्स के मुताबिक बशीरतगंज क्षेत्र में किलोमीटर 421 से 422 के बीच करीब 25 मीटर लंबी दरार देखी गई है। हालांकि सोशल मीडिया पर इसे पूरे ₹36,230 करोड़ के एक्सप्रेसवे के “धंस जाने” के रूप में पेश किया जा रहा है, जबकि उपलब्ध जानकारी के मुताबिक damage एक सीमित stretch पर है और expressway पर traffic जारी है। आज क्या हुआ? आज सामने आई reports के मुताबिक उन्नाव में पहले repair किए गए हिस्से पर फिर cracks दिखाई दीं। Times Now Navbharat ने बशीरटगंज के पास kilometre 421-422 के बीच करीब 25 metre लंबी और लगभग 3 inch चौड़ी दरार report की है। आसपास slope protection और मिट्टी वाले हिस्से में भी rainwater erosion का असर बताया गया है। Maintenance team ने प्रभावित स्थान पर barricading और corrective work शुरू किया है। फिलहाल traffic को पूरी तरह बंद किए जाने की सूचना नहीं है। एक सप्ताह पहले बना था 10 मीटर गहरा Crater मौजूदा controversy इसलिए ज्यादा गंभीर हो गई क्योंकि इसी महीने गंगा एक्सप्रेसवे पर एक और बड़ा damage सामने आया था। 17-18 अगस्त के आसपास उन्नाव क्षेत्र में kilometre 421 के पास भारी बारिश के बाद road और adjoining embankment का हिस्सा प्रभावित हुआ और करीब 10 metre गहरा crater बनने की reports आई थीं। उस समय UPEIDA और project agency की teams ने मौके पर repair work किया था। 19 अगस्त तक संबंधित अधिकारियों ने बताया था कि प्रभावित section को repair कर दिया गया है और traffic normal तरीके से चल रहा है। अब उसी broader area में fresh cracks सामने आने से repair की durability को लेकर सवाल उठ रहे हैं। क्या आज पूरा Expressway धंस गया? नहीं। यह खबर publish करते समय यह distinction बेहद जरूरी है। 594-km लंबे गंगा एक्सप्रेसवे का पूरा हिस्सा collapse नहीं हुआ है। Fresh damage उन्नाव के एक specific stretch में report हुआ है। इसलिए headline: “₹36,000 करोड़ का गंगा एक्सप्रेसवे धंस गया” अपने आप में misleading impression दे सकती है। बेहतर framing होगी: “₹36,230 करोड़ के गंगा एक्सप्रेसवे पर फिर दरारें; बारिश के बाद उन्नाव में repaired stretch प्रभावित” बारिश के पानी से Soil Erosion की बात Reports में damage के पीछे heavy rainfall, soil settlement और embankment erosion को प्रमुख factors के रूप में बताया गया है। 19 अगस्त को project head R.K. Mishra ने पहले damage पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा था कि नई construction में पहली बारिश के दौरान बड़े स्तर पर भरी गई मिट्टी के settlement से ऐसी स्थिति पैदा हो सकती है। उन्होंने कहा था कि sensitive sections की monitoring और patrolling बढ़ाई गई है। लेकिन 27 अगस्त की fresh cracks का final technical cause अभी किसी विस्तृत independent investigation से establish नहीं हुआ है। इसलिए construction corruption या substandard material को proven cause के तौर पर लिखना अभी सही नहीं होगा। July में भी उन्नाव में हुआ था नुकसान गंगा एक्सप्रेसवे पर monsoon-related damage की यह पहली report नहीं है। July में भी Unnao के Sonic Toll Plaza को expressway से जोड़ने वाली करीब 7-metre approach road heavy rainfall के बाद प्रभावित हुई थी। Embankment की मिट्टी बहने और carriageway के हिस्से को नुकसान पहुंचने की reports सामने आई थीं। इसके बाद repair work कराया गया था। यानी July, mid-August और अब 27 August—तीनों developments ने monsoon के दौरान कुछ sections की drainage और slope stability पर ध्यान खींचा है। Hardoi में भी सामने आया था Subsidence July में Hardoi के Mallawan क्षेत्र में भी heavy rainfall के बाद Ganga Expressway के करीब 60 metre हिस्से में subsidence की report सामने आई थी। Technical team ने वहां repair शुरू किया और अधिकारियों ने उस समय लगातार 48 घंटे हुई rainfall को संभावित कारण बताया था। इन घटनाओं को देखते हुए expressway के अलग-अलग vulnerable stretches की long-term durability अब scrutiny में है। कितना बड़ा है Ganga Expressway? UPEIDA की official information के मुताबिक Ganga Expressway की लंबाई करीब 594 kilometres है। यह: Prime Minister Narendra Modi ने इसका उद्घाटन 29 अप्रैल 2026 को Hardoi जिले में किया था। Current media reports project cost को करीब ₹36,230 करोड़ बताती हैं। उद्घाटन के चार महीने के भीतर सवाल Expressway को शुरू हुए अभी करीब चार महीने ही हुए हैं। इतने कम समय में अलग-अलग जगहों पर soil erosion, approach-road damage, crater और cracks जैसी reports आने के कारण इसकी construction quality और drainage planning पर public scrutiny बढ़ना स्वाभाविक है। हालांकि हर incident का cause समान हो, यह जरूरी नहीं है। किसी location पर drainage, दूसरी पर soil settlement और किसी अन्य जगह embankment erosion जिम्मेदार हो सकता है। Technical audit के बिना सभी घटनाओं को एक ही construction defect से जोड़ना जल्दबाजी होगी। Akhilesh Yadav ने सरकार पर लगाया Corruption का आरोप Fresh cracks सामने आने के बाद Samajwadi Party प्रमुख Akhilesh Yadav ने social media पर एक video share करते हुए BJP सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने cracks को corruption से जोड़ते हुए commuters की safety पर सवाल उठाए। यह स्पष्ट करना जरूरी है कि corruption का आरोप Akhilesh Yadav का राजनीतिक दावा है। उपलब्ध reports में fresh cracks को corruption का परिणाम साबित करने वाली कोई final technical inquiry सामने नहीं आई है। Traffic बंद हुआ या जारी है? Latest reports के अनुसार affected portion की सुरक्षा के लिए barricading और corrective work किया जा रहा है, लेकिन पूरे Ganga Expressway का traffic बंद नहीं हुआ है। 27 अगस्त की दोपहर तक वाहनों का आवागमन जारी बताया गया। इसलिए social media पर “expressway बंद” या “पूरा highway collapse” जैसे claims को official confirmation के बिना publish नहीं करना चाहिए। UPEIDA ने पहले Damage पर क्या कहा था? पिछले week’s crater के बाद UPEIDA और project team ने affected section को तेजी से repair करने की बात कही थी। Project management ने दावा किया था कि rain-sensitive stretches की regular patrolling और…

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राष्ट्रगान के दौरान विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना का VIDEO वायरल; बोले- भ्रामक तरीके से पेश किया जा रहा मामला

लखनऊ: उत्तर प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो को लेकर दावा किया गया कि उन्नाव में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान वह राष्ट्रगान पूरा होने से पहले ही वहां से चले गए। वीडियो सामने आने के बाद कांग्रेस और समाजवादी पार्टी समेत विपक्षी दलों ने उन पर निशाना साधा। हालांकि सतीश महाना ने पूरे विवाद पर सफाई देते हुए कहा है कि सोशल मीडिया पर घटनाक्रम को भ्रामक तरीके से पेश किया जा रहा है और जिस समय राष्ट्रगान चल रहा था, वह उस प्रेक्षागृह में मौजूद ही नहीं थे। उन्नाव के कार्यक्रम से जुड़ा है Viral Video मामला उत्तर प्रदेश के उन्नाव का है। सतीश महाना यहां एक शैक्षिक संगोष्ठी कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे थे। कार्यक्रम के दौरान उन्हें Guard of Honour दिया गया। सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में एक तरफ राष्ट्रगान की आवाज सुनाई देती है और दूसरी तरफ सतीश महाना सलामी मंच से नीचे उतरते और वहां से आगे बढ़ते दिखाई देते हैं। इसी वीडियो के आधार पर सोशल मीडिया पर दावा किया गया कि विधानसभा अध्यक्ष राष्ट्रगान पूरा होने से पहले ही कार्यक्रम स्थल से निकल गए। VIDEO Viral होते ही शुरू हुआ विवाद वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर इस घटना को लेकर बहस तेज हो गई। कई यूजर्स ने वीडियो शेयर करते हुए सवाल उठाया कि जब राष्ट्रगान चल रहा था तो विधानसभा अध्यक्ष ने वहां रुककर उसे पूरा क्यों नहीं किया। मामले ने जल्द ही राजनीतिक रूप भी ले लिया और कांग्रेस तथा समाजवादी पार्टी के नेताओं ने BJP और सतीश महाना पर निशाना साधना शुरू कर दिया। हालांकि केवल वायरल वीडियो के आधार पर घटना का पूरा संदर्भ स्पष्ट नहीं था। Satish Mahana ने क्या सफाई दी? विवाद बढ़ने के बाद सतीश महाना ने रविवार शाम सोशल मीडिया पर अपना पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर प्रसारित किसी भी वीडियो के बारे में सही तथ्य जानना जरूरी है और लोगों के बीच भ्रम न फैले, इसलिए वह घटनाक्रम स्पष्ट कर रहे हैं। महाना के अनुसार शनिवार को उन्नाव में उन्हें जिस समय Guard of Honour दिया जा रहा था, उसी समय संयोग से प्रेक्षागृह के अंदर राष्ट्रगान शुरू हुआ था। उन्होंने दावा किया कि दोनों कार्यक्रम अलग-अलग थे और जिस प्रेक्षागृह के भीतर राष्ट्रगान चल रहा था, उस समय वह वहां मौजूद नहीं थे। ‘दोनों कार्यक्रम पूरी तरह अलग थे’ सतीश महाना ने अपने स्पष्टीकरण में कहा कि Guard of Honour और auditorium के भीतर चल रहा कार्यक्रम दो अलग-अलग कार्यक्रम थे। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर दोनों घटनाओं की तस्वीरों और आवाज को इस तरह प्रस्तुत किया जा रहा है जिससे ऐसा प्रतीत हो कि वह राष्ट्रगान के दौरान रुके नहीं और वहां से चले गए। विधानसभा अध्यक्ष ने इस interpretation को खारिज करते हुए कहा कि ऐसा नहीं हुआ। ‘राष्ट्रगान का हमेशा सम्मान किया’ महाना ने कहा कि उत्तर प्रदेश विधानसभा से लेकर अपने विधानसभा क्षेत्र तक हर अवसर पर उन्होंने और उनके सहयोगियों ने संविधान तथा राष्ट्रगान का सर्वोच्च सम्मान किया है। उन्होंने मीडिया और सोशल मीडिया यूजर्स से भी अपील की कि किसी वीडियो या घटना पर टिप्पणी करने से पहले उसके तथ्यों की जांच जरूर की जाए। Congress ने BJP को घेरा वायरल वीडियो को कांग्रेस नेताओं और पार्टी से जुड़े सोशल मीडिया हैंडल्स ने भी शेयर किया। कांग्रेस की ओर से सवाल उठाए गए कि राष्ट्रगान के दौरान विधानसभा अध्यक्ष के कथित तौर पर चले जाने की घटना पर BJP नेतृत्व क्या कार्रवाई करेगा। कुछ नेताओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से भी जवाब मांगा। विपक्ष ने इसे राष्ट्रगान के सम्मान से जोड़ते हुए महाना से जवाब और माफी की मांग की। Akhilesh Yadav ने भी उठाया सवाल समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी इस मामले को लेकर BJP सरकार पर हमला बोला। उन्होंने वायरल वीडियो का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से पूछा कि इस मामले में क्या कार्रवाई की जाएगी। इससे वीडियो को लेकर शुरू हुआ सोशल मीडिया विवाद उत्तर प्रदेश की राजनीतिक बहस में भी बदल गया। आयोजक पक्ष ने क्या कहा? कुछ मीडिया रिपोर्टों में कार्यक्रम से जुड़े आयोजकों का पक्ष भी सामने आया है। उनका कहना है कि जिस स्थान पर सतीश महाना को Guard of Honour दिया जा रहा था, वहां अलग से राष्ट्रगान नहीं बजाया जा रहा था। प्रेक्षागृह के भीतर चल रहे राष्ट्रगान की आवाज बाहर तक सुनाई दे रही थी। यह स्पष्टीकरण सतीश महाना के उस दावे से मेल खाता है जिसमें उन्होंने Guard of Honour और auditorium में चल रहे कार्यक्रम को अलग-अलग बताया है। Viral VIDEO में क्या दिखता है? वीडियो में सतीश महाना सलामी की मुद्रा में खड़े दिखाई देते हैं और कुछ समय बाद मंच से नीचे उतरते नजर आते हैं। Background में राष्ट्रगान की आवाज सुनाई देने के कारण वीडियो को लेकर सवाल उठे। लेकिन वीडियो का छोटा हिस्सा अपने आप यह साबित नहीं करता कि राष्ट्रगान उसी Guard of Honour ceremony का हिस्सा था या किसी दूसरी जगह से उसकी आवाज आ रही थी। इसी बिंदु पर सतीश महाना और उनके आलोचकों के दावे अलग हैं। घटना कब हुई? यह घटनाक्रम 22 अगस्त 2026 को उन्नाव में आयोजित कार्यक्रम के दौरान हुआ था। इसके बाद 23 अगस्त को वीडियो सोशल मीडिया और समाचार माध्यमों में बड़े स्तर पर वायरल हुआ। रविवार शाम तक सतीश महाना ने अपना विस्तृत स्पष्टीकरण भी जारी कर दिया। इसलिए 24 अगस्त तक उपलब्ध latest update यह है कि विधानसभा अध्यक्ष ने राष्ट्रगान का अपमान करने के आरोप को स्पष्ट रूप से खारिज कर दिया है। Viral Claim को तथ्य मानने से पहले जरूरी है पूरा Context सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में राष्ट्रगान की आवाज के बीच सतीश महाना को आगे बढ़ते हुए देखा जा सकता है। इसी आधार पर उनके खिलाफ राष्ट्रगान छोड़कर जाने का आरोप लगाया गया। हालांकि विधानसभा अध्यक्ष का कहना है कि राष्ट्रगान auditorium के भीतर दूसरे कार्यक्रम में चल रहा था और वह उस समय वहां मौजूद नहीं थे। ऐसे में उपलब्ध जानकारी के आधार पर इसे सीधे…

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BJP विधायक जय देवी कौशल का गंभीर आरोप—‘मुझे मंदिर में पूजा करने से रोका गया’, जातिगत भेदभाव का दावा

लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में मंदिर के भूमिपूजन कार्यक्रम को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। मलिहाबाद विधानसभा सीट से भारतीय जनता पार्टी की विधायक जय देवी कौशल ने आरोप लगाया है कि काकोरी स्थित शीतला माता मंदिर के जीर्णोद्धार से जुड़े कार्यक्रम में उन्हें पूजा-अर्चना में शामिल नहीं होने दिया गया। विधायक ने इसे जातिगत भेदभाव से जोड़ते हुए गंभीर सवाल उठाए हैं। क्या है पूरा मामला? मामला लखनऊ के काकोरी क्षेत्र स्थित शीतला माता मंदिर का है। मंदिर के जीर्णोद्धार और निर्माण कार्य को लेकर भूमिपूजन एवं शिलान्यास कार्यक्रम आयोजित किया गया था। कार्यक्रम में विधायक जय देवी कौशल के साथ भाजपा के कई स्थानीय नेता और कार्यकर्ता भी पहुंचे थे। जय देवी कौशल का आरोप है कि कार्यक्रम के दौरान पूजा शुरू हो गई, लेकिन उन्हें उसमें विधिवत शामिल नहीं किया गया। उनके मुताबिक वह पूजा के दौरान खड़ी रहीं और उन्हें पूजा-अर्चना से जुड़े कई धार्मिक कार्यों में भाग लेने का अवसर नहीं मिला। विधायक का कहना है कि उन्हें ईंट छूने, रोली लगाने, अगरबत्ती जलाने और नारियल फोड़ने जैसे भूमिपूजन से जुड़े कार्यों से भी दूर रखा गया। विधायक ने लगाया जातिगत भेदभाव का आरोप जय देवी कौशल पासी समुदाय से आती हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके साथ हुआ व्यवहार उनकी जाति से जुड़ा हुआ था। विधायक ने इस घटना को गंभीर बताते हुए कहा कि यदि एक निर्वाचित जनप्रतिनिधि के साथ इस तरह का व्यवहार होता है तो यह सामाजिक समानता को लेकर कई सवाल खड़े करता है। जय देवी कौशल ने यह भी संकेत दिया है कि वह मामले को भाजपा के वरिष्ठ नेतृत्व के सामने उठाएंगी। मंदिर के जीर्णोद्धार के लिए स्वीकृत हुई थी राशि मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक शीतला माता मंदिर के जीर्णोद्धार के लिए करीब ₹78 लाख की सरकारी राशि स्वीकृत कराए जाने में विधायक की भूमिका रही है। विधायक के पति और पूर्व केंद्रीय मंत्री कौशल किशोर ने भी घटना पर नाराजगी जाहिर की है। रिपोर्टों के अनुसार एक अन्य धार्मिक स्थल के लिए भी लगभग ₹70 लाख की राशि स्वीकृत कराई गई थी। दोनों परियोजनाओं की रकम को मिलाकर कुछ रिपोर्टों में लगभग ₹1.5 करोड़ की राशि का उल्लेख किया गया है। ऐसे में विवाद इसलिए भी अधिक चर्चा में है क्योंकि विधायक ने मंदिर के विकास के लिए सरकारी धन स्वीकृत कराने में अपनी भूमिका का दावा किया है और उसी कार्यक्रम में स्वयं के साथ भेदभाव होने का आरोप लगाया है। परिवार ने भी जताई नाराजगी मामले पर जय देवी कौशल के बेटे विकास किशोर ने भी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने जाति के आधार पर किसी भी व्यक्ति या जनप्रतिनिधि के साथ भेदभाव को गलत बताया। उनका कहना है कि धार्मिक स्थल पूरे समाज की आस्था के केंद्र होते हैं और वहां किसी व्यक्ति के साथ उसकी जाति के आधार पर अलग व्यवहार नहीं होना चाहिए। राजनीतिक विवाद भी हुआ तेज विधायक के आरोप सामने आने के बाद मामला राजनीतिक चर्चा का विषय भी बन गया है। विपक्ष की ओर से भी घटना को लेकर भाजपा पर सवाल उठाए गए हैं। हालांकि पूरे मामले में यह ध्यान रखना जरूरी है कि जातिगत भेदभाव के आरोप विधायक की ओर से लगाए गए हैं। घटना को लेकर संबंधित पुजारी या मंदिर प्रबंधन का विस्तृत आधिकारिक पक्ष सामने आने पर स्थिति और स्पष्ट हो सकती है। सामाजिक भेदभाव पर फिर उठे सवाल इस विवाद ने एक बार फिर धार्मिक स्थलों पर सामाजिक समानता और जातिगत भेदभाव के मुद्दे को चर्चा में ला दिया है। भारतीय संविधान सभी नागरिकों को समानता का अधिकार देता है और धर्म, जाति तथा अन्य आधारों पर भेदभाव के खिलाफ संवैधानिक सुरक्षा प्रदान करता है। ऐसे में किसी सार्वजनिक धार्मिक कार्यक्रम में जाति के आधार पर भेदभाव का आरोप सामने आना संवेदनशील मामला माना जा रहा है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि भाजपा नेतृत्व, स्थानीय प्रशासन और मंदिर प्रबंधन की ओर से मामले पर आगे क्या प्रतिक्रिया आती है। नोट: यह खबर विधायक जय देवी कौशल और उनके परिवार की ओर से लगाए गए आरोपों तथा उपलब्ध मीडिया रिपोर्टों पर आधारित है। आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि होना बाकी है।

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कन्नौज में स्कूल को लेकर छात्रों का प्रदर्शन! प्रधानाध्यापक पर दुर्व्यवहार, मारपीट और जातीय भेदभाव के आरोप

कन्नौज, उत्तर प्रदेश: उत्तर प्रदेश के कन्नौज जिले के कंपोजिट विद्यालय गुगरापुर में छात्रों और अभिभावकों ने प्रभारी प्रधानाध्यापक के खिलाफ प्रदर्शन किया। छात्रों ने स्कूल का बहिष्कार करते हुए प्रधानाध्यापक की गाड़ी का घेराव किया और कई गंभीर आरोप लगाए। छात्रों ने लगाए गंभीर आरोप प्रदर्शन कर रहे छात्रों और अभिभावकों का आरोप है कि प्रधानाध्यापक बच्चों के साथ दुर्व्यवहार, भेदभाव और मारपीट करते हैं। कुछ छात्रों ने जाति और समुदाय के आधार पर भेदभाव किए जाने का भी आरोप लगाया है। हालांकि, ये फिलहाल छात्रों और अभिभावकों द्वारा लगाए गए आरोप हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि या जांच के अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आए हैं। प्रदर्शन के दौरान बच्चों ने प्रधानाध्यापक को हटाने की मांग करते हुए नारेबाजी की। अभिभावक भी बच्चों के समर्थन में प्रदर्शन में शामिल हुए। स्कूल का बहिष्कार और गाड़ी का घेराव रिपोर्टों के अनुसार, छात्रों ने कक्षाओं का बहिष्कार किया और प्रधानाध्यापक की गाड़ी को घेर लिया। प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन से शिकायतों पर कार्रवाई करने की मांग की। स्कूल में करीब 200 छात्र पढ़ते हैं। छात्रों ने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें पढ़ाई के बजाय दूसरे कामों में लगाया जाता है। एक रिपोर्ट में कंप्यूटर शिक्षा को लेकर भी छात्रों की शिकायत का उल्लेख है। गणित शिक्षक की कमी का मुद्दा भी उठा प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने स्कूल में गणित शिक्षक की कमी का मुद्दा भी उठाया। छात्रों के अनुसार, विज्ञान विषय के शिक्षक द्वारा गणित पढ़ाया जा रहा है और वे गणित के लिए अलग शिक्षक की मांग कर रहे हैं। यह मुद्दा केवल प्रधानाध्यापक के खिलाफ लगाए गए आरोपों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि छात्रों ने स्कूल की पढ़ाई और व्यवस्था से जुड़ी शिकायतें भी प्रशासन के सामने रखीं। शिक्षकों और अभिभावकों ने भी उठाई आवाज रिपोर्टों में दावा किया गया है कि स्कूल के कुछ शिक्षक भी प्रधानाध्यापक के खिलाफ शिकायतों को लेकर आपत्ति जता चुके हैं। अभिभावकों ने बच्चों की सुरक्षा और बेहतर शिक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए जिला प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग की है। प्रधानाध्यापक पर स्कूल परिसर में लगे पेड़ों को कटवाने के आरोप भी प्रदर्शन के दौरान सामने आए हैं। इन आरोपों की भी जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी। प्रशासन की कार्रवाई पर नजर मामला सामने आने के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिला प्रशासन छात्रों और अभिभावकों की शिकायतों की किस तरह जांच करता है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित अधिकारी कार्रवाई कर सकते हैं, जबकि जांच पूरी होने तक आरोपों को आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए। कन्नौज की यह घटना उत्तर प्रदेश के सरकारी स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता, छात्र सुरक्षा और स्कूल प्रशासन की जवाबदेही को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े कर रही है। स्रोत: Careers360, Times Now Navbharat, Navbharat Times, IANS Jai Rashtra News

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