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दिल्ली की वोटर लिस्ट से 47.6 लाख नाम हटे, दोबारा जुड़वाने के लिए सिर्फ 2.5 लाख आवेदन; SIR पर नए सवाल

नई दिल्ली, 24 अक्टूबर 2026: दिल्ली में चल रही स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। 31 अगस्त को जारी ड्राफ्ट मतदाता सूची में करीब 47.6 लाख नाम हटाए गए, लेकिन इसके बाद 22 अक्टूबर तक वोटर लिस्ट में नाम जुड़वाने के लिए सिर्फ 2,50,754 फॉर्म-6 आवेदन मिले। यह आंकड़ा दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय ने जारी किया है। 1.45 करोड़ से घटकर 97.5 लाख रह गए मतदाता SIR शुरू होने से पहले दिल्ली में करीब 1.45 करोड़ मतदाता दर्ज थे। 31 अगस्त को प्रकाशित ड्राफ्ट सूची में यह संख्या घटकर लगभग 97.5 लाख रह गई। करीब 47.5 से 47.6 लाख मतदाताओं को अनुपस्थित, दूसरी जगह शिफ्ट, मृत या डुप्लीकेट जैसी श्रेणियों में रखा गया। सिर्फ 2,50,754 लोगों ने भरा फॉर्म-6 CEO कार्यालय के अनुसार, 31 अगस्त से 22 अक्टूबर के बीच कुल 2,50,754 फॉर्म-6 आवेदन प्राप्त हुए। इसमें पहली बार वोटर बनने वाले लोग भी शामिल हैं और ऐसे लोग भी जिनका नाम SIR के दौरान हट गया था। इसलिए यह नहीं माना जा सकता कि सभी 2.5 लाख आवेदन सिर्फ हटाए गए मतदाताओं के हैं। इतनी बड़ी संख्या में नाम हटे, आवेदन इतने कम क्यों? यही अंतर अब सबसे बड़ा सवाल बन गया है। अधिकारियों का कहना है कि हटाए गए मतदाताओं में बड़ी संख्या ऐसे लोगों की भी हो सकती है जो दूसरी जगह शिफ्ट हो चुके हैं, जिनकी मृत्यु हो चुकी है या जिनके नाम दो जगह दर्ज थे। वहीं आलोचकों का सवाल है कि क्या सभी योग्य मतदाताओं तक दोबारा नाम जुड़वाने की जानकारी ठीक से पहुंची है। 33 लाख रिकॉर्ड में मिली थीं गड़बड़ियां SIR के दौरान करीब 33 लाख मतदाताओं के रिकॉर्ड में अलग-अलग तरह की विसंगतियां पाई गई थीं। इनमें लगभग 13.79 लाख ऐसे मतदाता थे जिनका रिकॉर्ड 2002 की पिछली SIR सूची से लिंक नहीं हो पाया, जबकि करीब 19.33 लाख मामलों में तार्किक गड़बड़ियां सामने आईं। CEO कार्यालय के अनुसार करीब 29.5 लाख मामलों का समाधान कर लिया गया है या उन्हें अंतिम सूची के लिए विचाराधीन रखा गया है। पश्चिमी दिल्ली से सबसे ज्यादा आवेदन 31 अगस्त से 22 अक्टूबर के बीच पश्चिमी दिल्ली से 30,361 फॉर्म-6 आवेदन आए, जो सभी जिलों में सबसे ज्यादा हैं। वहीं नई दिल्ली जिले से सिर्फ 4,341 आवेदन मिले, जो सबसे कम हैं। 30 अक्टूबर तक दर्ज करा सकते हैं दावा दिल्ली में SIR के तहत दावे और आपत्तियां दाखिल करने की अंतिम तारीख 30 अक्टूबर 2026 है। चुनाव अधिकारियों ने 25 अक्टूबर को राजधानी के सभी 14,947 मतदान केंद्रों पर विशेष नामांकन शिविर लगाने की भी घोषणा की है। अंतिम मतदाता सूची 4 दिसंबर 2026 को प्रकाशित किए जाने की योजना है। विपक्ष ने उठाए सवाल 47.6 लाख नाम हटने और उसके मुकाबले बेहद कम फॉर्म-6 आवेदन आने को लेकर राजनीतिक सवाल भी उठने लगे हैं। विपक्षी नेताओं और सामाजिक संगठनों ने SIR प्रक्रिया की पारदर्शिता तथा पात्र मतदाताओं के नाम सूची से बाहर होने की आशंका जताई है। हालांकि चुनाव अधिकारियों का कहना है कि दावे और आपत्तियों की प्रक्रिया अभी जारी है और पात्र मतदाताओं को नाम जुड़वाने का अवसर दिया जा रहा है। जय राष्ट्र न्यूज़

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यूपी वोटर लिस्ट में अजीबोगरीब नामों की वजह आई सामने, ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन की तकनीकी गलती बनी कारण

लखनऊ, 24 अक्टूबर 2026: उत्तर प्रदेश विधान परिषद चुनाव की मतदाता सूची में “राम ने यादव को मारा”, “राम ने शर्मा को मारा” और पिता के नाम की जगह “B.Com” जैसी अजीब प्रविष्टियां सामने आने के बाद चुनाव अधिकारियों ने इसकी वजह स्पष्ट की है। उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिनवा के मुताबिक पहली बार शुरू किए गए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन सिस्टम में अंग्रेजी नामों को हिंदी में लिप्यंतरित करने के बजाय कुछ मामलों में उनका अर्थानुवाद हो गया, जिससे ये गलतियां पैदा हुईं। ‘Ramhit Yadav’ कैसे बना ‘राम ने यादव को मारा’? अधिकारियों ने उदाहरण देते हुए बताया कि यदि Ramhit Yadav को गलती से “Ram hit Yadav” टाइप किया गया, तो सॉफ्टवेयर ने “hit” शब्द को नाम का हिस्सा मानने के बजाय उसका अर्थ निकाल लिया। नतीजतन हिंदी में प्रविष्टि “राम ने यादव को मारा” बन गई। 14.81 लाख में 158 प्रविष्टियों में गड़बड़ी मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय के मुताबिक विधान परिषद की पांच स्नातक और छह शिक्षक सीटों की मतदाता सूची में कुल 14,81,310 प्रविष्टियां थीं। इनमें 158 entries में मतदाता या उनके रिश्तेदारों के नाम असामान्य या गलत पाए गए। ‘B.Com’ पिता का नाम कैसे बन गया? कुछ मामलों को सिर्फ software translation की गलती नहीं माना गया। उदाहरण के लिए एक मतदाता के पिता के नाम की जगह “B.Com” लिखा मिला। CEO ने इसे मानव लापरवाही बताते हुए कहा कि verification के दौरान ऐसी प्रविष्टि ठीक की जानी चाहिए थी। सुधार का विकल्प था, फिर भी रह गई गलतियां ऑनलाइन सिस्टम में entries को edit और correct करने की सुविधा मौजूद थी। इसके बावजूद संबंधित स्तर पर entries को ठीक से verify नहीं किए जाने के कारण कुछ गलतियां final voter list में बनी रहीं। अब Jhansi और Prayagraj के divisional commissioners से स्पष्टीकरण और रिपोर्ट मांगी गई है। वोट डालने से नहीं रोके जाएंगे मतदाता Election authorities ने district officials को निर्देश दिया है कि पिता के नाम या अन्य clerical errors की वजह से किसी eligible voter को मतदान से वंचित न किया जाए। मामले में जिम्मेदार अधिकारियों पर जांच रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की जा सकती है। सोशल मीडिया पर वायरल हुई थीं प्रविष्टियां अजीब नामों वाली voter-list entries सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुई थीं। इसके बाद election administration को सार्वजनिक clarification देना पड़ा। मामला electoral-roll verification में technology के साथ human checking की जरूरत पर भी सवाल खड़े करता है। जय राष्ट्र न्यूज़

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