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30 अक्टूबर को CEC ज्ञानेश कुमार का ‘पब्लिक इम्पीचमेंट’, 1 नवंबर को INDIA ब्लॉक का ‘दिल्ली चलो’ मार्च

नई दिल्ली, 25 अक्टूबर 2026: विपक्षी दलों के INDIA ब्लॉक ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ अपना आंदोलन तेज करने का फैसला किया है। गठबंधन ने घोषणा की है कि 30 अक्टूबर को दिल्ली में ‘पब्लिक इम्पीचमेंट’ की प्रतीकात्मक कार्यवाही आयोजित की जाएगी और इसके बाद 1 नवंबर को ‘दिल्ली चलो’ मार्च निकाला जाएगा, जो रामलीला मैदान में बड़ी रैली के साथ समाप्त होगा। क्या है ‘पब्लिक इम्पीचमेंट’? यह कोई संवैधानिक या कानूनी महाभियोग प्रक्रिया नहीं है। विपक्ष इसे ‘मॉक पार्लियामेंट’ या प्रतीकात्मक जन-कार्यवाही के रूप में आयोजित करेगा। रिपोर्टों के मुताबिक कार्यक्रम दिल्ली के होटल अशोक में होगा, जहां विपक्षी सांसदों और वरिष्ठ नेताओं के शामिल होने की योजना है। विपक्ष क्यों कर रहा है यह कार्यक्रम? कांग्रेस और INDIA ब्लॉक चुनाव आयोग पर मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और कथित चुनावी अनियमितताओं को लेकर सवाल उठाते रहे हैं। विपक्ष ने इन मुद्दों को ‘वोट चोरी’ से जोड़ते हुए CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की है। ये विपक्ष के आरोप हैं; चुनाव आयोग ऐसे आरोपों को पहले खारिज कर चुका है। केसी वेणुगोपाल ने किया ऐलान कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने कहा कि 30 अक्टूबर को होने वाली इस प्रतीकात्मक कार्यवाही में जनता का कथित फैसला CEC को हटाने की मांग के रूप में सामने रखा जाएगा। उन्होंने इसे संविधान और चुनावी प्रक्रिया की रक्षा के लिए विपक्ष के अभियान का हिस्सा बताया। 1 नवंबर को ‘दिल्ली चलो’ मार्च ‘पब्लिक इम्पीचमेंट’ के बाद INDIA ब्लॉक 1 नवंबर को दिल्ली चलो मार्च आयोजित करेगा। यह मार्च दिल्ली के रामलीला मैदान में समाप्त होगा। कांग्रेस का दावा है कि इस रैली में बड़ी संख्या में लोग शामिल होंगे और पार्टी ने करीब 10 लाख लोगों की भागीदारी का लक्ष्य रखा है। यह विपक्ष का अनुमान है, वास्तविक उपस्थिति कार्यक्रम के दिन ही स्पष्ट होगी। खड़गे ने सहयोगी दलों से की अपील कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने INDIA ब्लॉक के सहयोगी दलों से 30 अक्टूबर और 1 नवंबर को दिल्ली में अपनी मजबूत मौजूदगी सुनिश्चित करने की अपील की है। कांग्रेस अपने राज्य संगठनों और फ्रंटल संगठनों को भी रैली के लिए सक्रिय कर रही है। दिल्ली में सुरक्षा भी बढ़ाई गई 1 नवंबर की प्रस्तावित रैली और हाल के विरोध प्रदर्शनों के बीच दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर उच्च स्तर पर समीक्षा की गई है। रिपोर्टों के मुताबिक गृह मंत्री अमित शाह ने भी दिल्ली पुलिस मुख्यालय में सुरक्षा तैयारियों की समीक्षा की। संवैधानिक महाभियोग से अलग है यह कार्रवाई यह स्पष्ट करना जरूरी है कि 30 अक्टूबर का ‘पब्लिक इम्पीचमेंट’ संवैधानिक रूप से CEC को पद से हटाने की वैधानिक प्रक्रिया नहीं है। यह विपक्ष द्वारा आयोजित एक राजनीतिक और प्रतीकात्मक कार्यक्रम है, जिसका उद्देश्य चुनाव आयोग पर सार्वजनिक और राजनीतिक दबाव बढ़ाना है। जय राष्ट्र न्यूज़

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“Gen Z की सोच अलग है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि वे गलत हैं”: पूर्व सेना प्रमुख एम.एम. नरवणे

पुणे, 25 अक्टूबर 2026: भारतीय सेना के पूर्व प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे (सेवानिवृत्त) ने Gen Z को लेकर चल रही राजनीतिक और सामाजिक बहस के बीच कहा है कि नई पीढ़ी का सोचने का तरीका अलग हो सकता है, लेकिन सिर्फ इसी वजह से उन्हें गलत नहीं ठहराया जा सकता। उन्होंने युवाओं की बात सुनने, उनकी समस्याओं को समझने और संवाद के जरिए समाधान खोजने पर जोर दिया। “नई पीढ़ी का नजरिया अलग है” नरवणे ने कहा कि हर पीढ़ी अपने समय और परिस्थितियों के हिसाब से अलग सोच विकसित करती है। नई पीढ़ी भी चीजों को अपने तरीके से देखती है और यह जरूरी नहीं कि उसका नजरिया पुरानी पीढ़ी से पूरी तरह मेल खाए। उनके मुताबिक, अलग सोच का मतलब गलत सोच नहीं है। युवाओं को समझना जरूरी पूर्व सेना प्रमुख ने कहा कि युवाओं को सिर्फ डांटने या उनकी बात खारिज करने से समस्या हल नहीं होगी। पहले यह समझना जरूरी है कि उन्हें क्या परेशान कर रहा है, उनकी क्या मुश्किलें हैं और वे किस बदलाव की मांग कर रहे हैं। “वे देश का नुकसान नहीं चाहते” नरवणे ने कहा कि युवाओं की मंशा देश को नुकसान पहुंचाने की नहीं होती। वे भी मानते हैं कि जो मुद्दे वे उठा रहे हैं या जिन बदलावों की मांग कर रहे हैं, वे देश की बेहतरी के लिए हैं। उन्होंने युवाओं की ऊर्जा को सकारात्मक दिशा में लगाने की जरूरत बताई। ‘Regime Change’ बहस के बीच आया बयान नरवणे की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर युवाओं के नेतृत्व में विरोध प्रदर्शन हुए हैं। कुछ नेताओं और कार्यकर्ताओं द्वारा “regime change” जैसे शब्द इस्तेमाल किए जाने के बाद राजनीतिक विवाद तेज हुआ था। राजनाथ सिंह ने विपक्ष पर लगाए थे आरोप रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कांग्रेस और उसके सहयोगियों पर आरोप लगाया था कि वे युवाओं के विरोध प्रदर्शनों का इस्तेमाल अराजकता फैलाने और बांग्लादेश जैसे सत्ता परिवर्तन की स्थिति पैदा करने के लिए कर रहे हैं। दूसरी ओर विपक्ष ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि विरोध का उद्देश्य निष्पक्ष चुनाव और संवैधानिक संस्थाओं की जवाबदेही सुनिश्चित करना है। संवाद को बताया सबसे जरूरी रास्ता नरवणे ने कहा कि पीढ़ियों के बीच मतभेद होना स्वाभाविक है, लेकिन समाधान का रास्ता बातचीत से ही निकलता है। उन्होंने समाज और संस्थाओं से युवाओं के नजरिए को समझने और उनकी बात सुनने की अपील की। जय राष्ट्र न्यूज़

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