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हसन मुश्रीफ को बड़ी राहत! ED का मनी लॉन्ड्रिंग केस बंद, तीन बेटों को भी राहत; मुंबई की विशेष अदालत ने स्वीकार की क्लोजर रिपोर्ट

मुंबई, महाराष्ट्र, 7 नवंबर 2026: महाराष्ट्र की राजनीति से जुड़ी एक महत्वपूर्ण खबर सामने आई है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के वरिष्ठ नेता और महाराष्ट्र सरकार में मंत्री हसन मुश्रीफ को मनी लॉन्ड्रिंग मामले में बड़ी कानूनी राहत मिली है। मुंबई की विशेष पीएमएलए अदालत ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) की क्लोजर रिपोर्ट स्वीकार करते हुए मुश्रीफ, उनके तीन बेटों और अन्य संबंधित आरोपियों के खिलाफ चल रहा मनी लॉन्ड्रिंग मामला बंद कर दिया है। यह मामला कोल्हापुर स्थित सर सेनापति संताजी घोरपड़े सहकारी चीनी कारखाने से जुड़ी कथित वित्तीय अनियमितताओं का था। अदालत ने स्पष्ट किया कि जब संबंधित मूल अपराध ही कानूनी रूप से समाप्त हो चुके हैं, तो उनके आधार पर मनी लॉन्ड्रिंग की कार्यवाही जारी नहीं रखी जा सकती। मुंबई की विशेष अदालत ने ED की क्लोजर रिपोर्ट स्वीकार की मुंबई की विशेष धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) अदालत ने हसन मुश्रीफ और उनके परिवार से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले को बंद करने का आदेश दिया है। विशेष न्यायाधीश एस. वी. सहारे ने प्रवर्तन निदेशालय की ओर से प्रस्तुत क्लोजर रिपोर्ट स्वीकार की। अदालत का आदेश मंगलवार, 3 नवंबर को पारित हुआ था, जिसकी जानकारी गुरुवार, 5 नवंबर को सार्वजनिक हुई। अदालत ने कहा कि मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में कार्रवाई के लिए किसी निर्धारित मूल अपराध का अस्तित्व आवश्यक है। चूंकि इस मामले से जुड़े मूल आपराधिक मामलों में पहले ही न्यायिक आदेश पारित हो चुके हैं और संबंधित कार्यवाहियां समाप्त हो गई हैं, इसलिए पीएमएलए के तहत मामला आगे जारी रखने का कानूनी आधार नहीं बचता। हसन मुश्रीफ और तीन बेटों को मिली राहत इस फैसले से महाराष्ट्र सरकार में मंत्री हसन मुश्रीफ के साथ उनके तीन बेटों को भी राहत मिली है। मामले में कोल्हापुर स्थित सर सेनापति संताजी घोरपड़े शुगर फैक्ट्री लिमिटेड और उसके निदेशकों के नाम भी शामिल थे। ईडी ने चीनी कारखाने की शेयर पूंजी और वित्तीय लेन-देन में कथित अनियमितताओं को लेकर जांच शुरू की थी। मामले में मुश्रीफ परिवार और संबंधित कंपनियों के वित्तीय लेन-देन की जांच की गई थी। अब अदालत द्वारा क्लोजर रिपोर्ट स्वीकार किए जाने के बाद संबंधित मनी लॉन्ड्रिंग कार्यवाही बंद हो गई है। क्या था संताजी घोरपड़े चीनी कारखाना मामला? यह मामला कोल्हापुर जिले में स्थित सर सेनापति संताजी घोरपड़े चीनी कारखाने से जुड़ा था। जांच एजेंसी का आरोप था कि वर्ष 2013-14 के दौरान कारखाने में निवेश के नाम पर विभिन्न कंपनियों और अन्य संस्थाओं से बड़ी रकम प्राप्त की गई। ईडी के अनुसार, कुछ निवेश ऐसी कंपनियों के माध्यम से किए गए थे, जिन्हें कथित तौर पर फर्जी या वास्तविक कारोबारी गतिविधियों से रहित माना गया था। इनमें कोलकाता की कुछ कंपनियों और बाद में रजिस्ट्रेशन से हटाई गई संस्थाओं का भी उल्लेख किया गया था। जांच एजेंसी ने आरोप लगाया था कि शेयर पूंजी के नाम पर प्राप्त धनराशि के लेन-देन में अनियमितताएं थीं। हालांकि ये जांच एजेंसी के आरोप थे, जिन्हें संबंधित आरोपियों ने कानूनी प्रक्रिया में चुनौती दी थी। ₹11.35 करोड़ के लेन-देन पर उठे थे सवाल ईडी ने अपनी जांच में दावा किया था कि चीनी कारखाने से जुड़े वित्तीय विवरणों में ₹11.35 करोड़ से अधिक का निवेश दर्शाया गया था। जांच एजेंसी के अनुसार, कुछ निवेश के संबंध में बैंकिंग रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं थे। इसके अलावा कथित तौर पर विभिन्न कंपनियों, संबंधित संस्थाओं और निदेशकों के खातों के बीच रकम स्थानांतरित किए जाने का मामला भी सामने आया था। ईडी का आरोप था कि इन लेन-देन के माध्यम से धन के वास्तविक स्रोत को छिपाने का प्रयास किया गया। हालांकि अदालत ने वर्तमान फैसला इन आरोपों की विस्तृत सुनवाई के बाद दोष या निर्दोषता तय करके नहीं, बल्कि मूल अपराधों से संबंधित कानूनी कार्यवाहियां समाप्त होने के आधार पर दिया है। 2022 में शुरू हुई थी मनी लॉन्ड्रिंग की जांच इस मामले की शुरुआत मार्च 2022 में पुणे स्थित रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज (RoC) की एक शिकायत से हुई थी। शिकायत में कंपनी अधिनियम के कथित उल्लंघन का मामला उठाया गया था। इसके बाद प्रवर्तन निदेशालय ने 4 अप्रैल 2022 को प्रवर्तन मामला सूचना रिपोर्ट यानी ECIR दर्ज की। फरवरी 2023 में कोल्हापुर के मुरगुड पुलिस स्टेशन में भी शेयर पूंजी से संबंधित कथित धोखाधड़ी और अनियमितताओं को लेकर प्राथमिकी दर्ज की गई। इन्हीं मामलों के आधार पर ईडी ने धन शोधन निवारण अधिनियम के तहत जांच आगे बढ़ाई थी। ED ने कई स्थानों पर की थी छापेमारी मनी लॉन्ड्रिंग की जांच के दौरान ईडी ने वर्ष 2023 की शुरुआत में कई स्थानों पर तलाशी अभियान चलाया था। जांच एजेंसी ने संबंधित वित्तीय दस्तावेजों, बैंक खातों और अन्य रिकॉर्ड की जांच की थी। जुलाई 2024 में ईडी ने लगभग ₹2.07 करोड़ की सावधि जमा रसीदों और ₹7.70 लाख की नकदी को अस्थायी रूप से कुर्क किया था। बाद में दिसंबर 2024 में नई दिल्ली स्थित निर्णायक प्राधिकरण ने इस कुर्की की पुष्टि की थी। हालांकि अब संबंधित मनी लॉन्ड्रिंग मामला बंद होने के बाद इन पूर्व कार्रवाइयों की कानूनी स्थिति लागू आदेशों और संबंधित प्रक्रियाओं के अनुसार तय होगी। बॉम्बे हाई कोर्ट के फैसलों से बदली मामले की दिशा हसन मुश्रीफ और अन्य संबंधित पक्षों ने मामले से जुड़ी आपराधिक कार्यवाहियों को बॉम्बे हाई कोर्ट में चुनौती दी थी। जून 2025 में उच्च न्यायालय ने मुरगुड पुलिस स्टेशन में दर्ज मामले से संबंधित याचिका का निपटारा किया। इस दौरान अदालत ने पाया कि जांच अधिकारी ने स्थानीय अदालत में सी-समरी रिपोर्ट दाखिल की थी, जिसे स्वीकार कर लिया गया था। सी-समरी रिपोर्ट आम तौर पर ऐसे मामलों में प्रस्तुत की जाती है, जहां जांच के बाद आरोपों की सत्यता के संबंध में निष्कर्ष निकालना संभव नहीं होता। इसके बाद 6 नवंबर 2025 को बॉम्बे हाई कोर्ट ने रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज की शिकायत से संबंधित पुणे अदालत की प्रक्रिया को भी रद्द कर दिया। उच्च न्यायालय ने इस बात पर ध्यान दिया कि आरोप वर्ष 2013-14 से संबंधित थे, जबकि कंपनी अधिनियम में संबंधित संशोधन अप्रैल 2021 से प्रभावी हुआ था। अदालत के अनुसार, उस संशोधन को पिछली अवधि के कथित मामलों पर पूर्वव्यापी रूप से लागू नहीं किया जा सकता था। मूल अपराध समाप्त होने के बाद ED ने मांगी थी केस बंद करने की अनुमति बॉम्बे…

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महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ी हलचल! क्या फिर एकजुट होगा पवार परिवार? शरद पवार और प्रफुल्ल पटेल की मुलाकात से दोनों NCP गुटों के विलय की चर्चा तेज

मुंबई, महाराष्ट्र, 7 नवंबर 2026: महाराष्ट्र की राजनीति में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के दोनों गुटों के संभावित विलय को लेकर एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। एनसीपी के कार्यकारी अध्यक्ष प्रफुल्ल पटेल ने मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में एनसीपी (शरदचंद्र पवार) प्रमुख शरद पवार से मुलाकात की। इस मुलाकात के बाद दोनों नेताओं के बीच 10 नवंबर के बाद फिर बातचीत होने की संभावना जताई जा रही है। इसी बीच एनसीपी के प्रदेश अध्यक्ष सुनील तटकरे ने दावा किया है कि यदि अजित पवार जीवित होते तो दोनों गुटों का विलय इसी साल 12 फरवरी को हो गया होता। हालांकि अभी किसी भी गुट ने नए विलय की आधिकारिक घोषणा नहीं की है। अस्पताल में शरद पवार से मिले प्रफुल्ल पटेल गुरुवार, 5 नवंबर को एनसीपी के वरिष्ठ नेता प्रफुल्ल पटेल मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल पहुंचे। यहां उन्होंने 85 वर्षीय शरद पवार से मुलाकात कर उनके स्वास्थ्य की जानकारी ली। शरद पवार को सीने में संक्रमण और स्वास्थ्य संबंधी परेशानी के कारण अस्पताल में भर्ती कराया गया था। मुलाकात के दौरान दोनों नेताओं के बीच देश और महाराष्ट्र की मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों पर भी बातचीत हुई। इस मुलाकात का एक वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद एनसीपी के दोनों गुटों के फिर एक होने की अटकलें तेज हो गईं। 10 नवंबर के बाद फिर हो सकती है मुलाकात शरद पवार और प्रफुल्ल पटेल की बातचीत से जुड़ा एक वीडियो राजनीतिक चर्चा का विषय बना हुआ है। वीडियो में शरद पवार आगे बातचीत के लिए साथ बैठने की बात करते दिखाई देते हैं। इस पर प्रफुल्ल पटेल ने कहा कि वह 10 नवंबर के बाद मुंबई में मौजूद रहेंगे और उस समय मुलाकात की जा सकती है। दोनों नेताओं के बीच आगे बातचीत पर सहमति बनने के बाद राजनीतिक गलियारों में विलय की संभावना को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई हैं। हालांकि प्रफुल्ल पटेल ने स्पष्ट किया कि अस्पताल में उनकी मुलाकात मुख्य रूप से शरद पवार के स्वास्थ्य का हाल जानने के लिए हुई थी। उन्होंने कहा कि बातचीत में सामान्य राजनीतिक मुद्दों पर चर्चा हुई, लेकिन एनसीपी के आंतरिक मामलों पर कोई औपचारिक निर्णय नहीं लिया गया। सुनील तटकरे का दावा- 12 फरवरी को होना था विलय एनसीपी के महाराष्ट्र प्रदेश अध्यक्ष सुनील तटकरे ने दोनों गुटों के संभावित विलय को लेकर महत्वपूर्ण बयान दिया है। उन्होंने दावा किया कि अजित पवार के जीवित रहते हुए दोनों एनसीपी गुटों के विलय पर गंभीर बातचीत हुई थी। तटकरे के अनुसार, अजित पवार ने दोनों दलों को एकजुट करने की इच्छा जताई थी और इस संबंध में 12 फरवरी 2026 की तारीख पर सहमति बनने की स्थिति थी। उन्होंने कहा कि यदि अजित पवार जीवित होते तो दोनों गुट संभवतः फरवरी में ही एक हो चुके होते। हालांकि तटकरे ने यह भी स्पष्ट किया कि वर्तमान में दोनों गुटों के विलय को लेकर कोई औपचारिक बातचीत नहीं चल रही है। उनके इस बयान ने महाराष्ट्र की राजनीति में नई चर्चा को जन्म दिया है। अजित पवार के निधन के बाद बदले राजनीतिक समीकरण महाराष्ट्र के पूर्व उपमुख्यमंत्री अजित पवार का 28 जनवरी 2026 को पुणे जिले के बारामती में एक विमान दुर्घटना में निधन हो गया था। उनके निधन के बाद एनसीपी की राजनीतिक और संगठनात्मक स्थिति में महत्वपूर्ण बदलाव हुए। अजित पवार के नेतृत्व वाला एनसीपी गुट महाराष्ट्र की महायुति सरकार का हिस्सा था। उनके निधन के बाद उनकी पत्नी सुनेत्रा पवार ने पार्टी की कमान संभाली और उपमुख्यमंत्री का पद भी ग्रहण किया। वहीं, शरद पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी (शरदचंद्र पवार) अलग राजनीतिक दल के रूप में सक्रिय रही। ऐसे में दोनों गुटों के संभावित विलय की चर्चा महाराष्ट्र के राजनीतिक समीकरणों के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। रोहित पवार ने कहा- अजित पवार चाहते थे परिवार एक रहे एनसीपी (शरदचंद्र पवार) के नेता रोहित पवार ने भी दोनों गुटों के विलय के मुद्दे पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने दावा किया कि अजित पवार चाहते थे कि पवार परिवार और एनसीपी के दोनों गुट एकजुट हों। रोहित पवार ने सुनील तटकरे के बयानों में बदलाव को लेकर सवाल उठाए। उनका कहना है कि अजित पवार के निधन के बाद पहले विलय की बातचीत से इनकार किया गया था, लेकिन अब वरिष्ठ नेता स्वीकार कर रहे हैं कि दोनों दलों को एक करने पर चर्चा हुई थी। रोहित पवार ने दावा किया कि विलय की प्रक्रिया को लेकर पहले से बातचीत चल रही थी। हालांकि दोनों गुटों के बीच वर्तमान में किसी औपचारिक समझौते की पुष्टि नहीं हुई है। अमित शाह से मिले एनसीपी के वरिष्ठ नेता महाराष्ट्र में राजनीतिक हलचल के बीच एनसीपी के कुछ वरिष्ठ नेताओं ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से भी मुलाकात की थी। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, 2 नवंबर को दिल्ली में हुई बैठक में प्रफुल्ल पटेल, सुनील तटकरे, छगन भुजबल, हसन मुश्रीफ, दिलीप वलसे पाटिल और धनंजय मुंडे जैसे नेता शामिल थे। इस बैठक में एनसीपी प्रमुख सुनेत्रा पवार और उनके बेटे पार्थ पवार मौजूद नहीं थे। सूत्रों के हवाले से आई रिपोर्टों में दावा किया गया कि कुछ वरिष्ठ नेताओं ने पार्टी के भीतर निर्णय लेने की प्रक्रिया और पार्थ पवार की बढ़ती भूमिका को लेकर असंतोष जताया। हालांकि एनसीपी ने पार्टी के भीतर किसी तरह की बड़ी फूट या बगावत की खबरों से इनकार किया है। पार्टी नेताओं के अनुसार, अमित शाह से मुलाकात पहले से निर्धारित कार्यक्रम का हिस्सा थी। क्या सुनेत्रा और पार्थ पवार के नेतृत्व पर उठ रहे सवाल? अजित पवार के निधन के बाद सुनेत्रा पवार ने पार्टी नेतृत्व की जिम्मेदारी संभाली थी। उनके बेटे पार्थ पवार भी पार्टी की राजनीतिक गतिविधियों में सक्रिय हैं। हालांकि हालिया मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया है कि एनसीपी के कुछ वरिष्ठ नेता संगठन से जुड़े फैसलों में पर्याप्त सलाह-मशविरा नहीं होने से असंतुष्ट हैं। कुछ रिपोर्टों में यह भी कहा गया कि पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का एक वर्ग शरद पवार के नेतृत्व वाले गुट के साथ फिर बातचीत शुरू करने के पक्ष में है। लेकिन इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। एनसीपी ने संगठन में किसी बड़े मतभेद की बात को खारिज किया है और नेतृत्व…

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