कैनबरा, 10 जुलाई। भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच जारी उच्चस्तरीय वार्ताओं में दोनों देशों ने आर्थिक, रणनीतिक और शैक्षणिक सहयोग को नई गति देने पर विशेष जोर दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज़ के नेतृत्व में हुई बैठकों में व्यापार, निवेश, रक्षा, शिक्षा, स्वच्छ ऊर्जा और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सहयोग को भविष्य की साझेदारी का प्रमुख आधार बताया गया।
व्यापार और निवेश पर बढ़ेगा सहयोग
दोनों देशों ने द्विपक्षीय व्यापार को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने के लिए निवेश के अवसरों का विस्तार करने पर सहमति व्यक्त की। बुनियादी ढांचे, हरित ऊर्जा, महत्वपूर्ण खनिज (Critical Minerals), डिजिटल अर्थव्यवस्था, विनिर्माण और उन्नत प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर विशेष चर्चा हुई। दोनों पक्षों ने निजी क्षेत्र की भागीदारी को प्रोत्साहित करने पर भी जोर दिया।
शिक्षा और कौशल विकास बने प्रमुख विषय
बैठकों में उच्च शिक्षा संस्थानों के बीच साझेदारी, छात्र एवं शोधार्थी विनिमय कार्यक्रमों और संयुक्त अनुसंधान परियोजनाओं को बढ़ावा देने पर सहमति बनी। दोनों देशों का मानना है कि शिक्षा और कौशल विकास के क्षेत्र में सहयोग भविष्य की आर्थिक साझेदारी को और मजबूत करेगा।
इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में साझा दृष्टिकोण
भारत और ऑस्ट्रेलिया ने स्वतंत्र, सुरक्षित और नियम-आधारित इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। समुद्री सुरक्षा, आपूर्ति श्रृंखला की मजबूती, साइबर सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता को लेकर दोनों देशों ने सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया।
रक्षा सहयोग को मिलेगा विस्तार
दोनों देशों ने संयुक्त सैन्य अभ्यास, रक्षा उद्योग सहयोग, समुद्री निगरानी और रक्षा तकनीक के क्षेत्र में साझेदारी को और मजबूत बनाने की इच्छा व्यक्त की। विशेषज्ञों का मानना है कि यह सहयोग हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सुरक्षा संतुलन को भी मजबूती देगा।
स्वच्छ ऊर्जा और तकनीकी सहयोग
वार्ता के दौरान हरित हाइड्रोजन, नवीकरणीय ऊर्जा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), सेमीकंडक्टर, डिजिटल अवसंरचना और उभरती प्रौद्योगिकियों में संयुक्त निवेश और अनुसंधान पर भी चर्चा हुई। दोनों देशों ने जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए सहयोग बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया।
भारतीय समुदाय की अहम भूमिका
ऑस्ट्रेलिया में बसे भारतीय समुदाय के योगदान की दोनों नेताओं ने सराहना की। उन्होंने कहा कि भारतीय मूल के लोग शिक्षा, विज्ञान, उद्योग और व्यापार सहित अनेक क्षेत्रों में दोनों देशों के संबंधों को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
भविष्य की दिशा
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच बढ़ता सहयोग केवल आर्थिक लाभ तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह रक्षा, शिक्षा, तकनीक और क्षेत्रीय स्थिरता के क्षेत्रों में भी दीर्घकालिक रणनीतिक साझेदारी को नई मजबूती देगा। दोनों देशों ने नियमित उच्चस्तरीय संवाद जारी रखने और सहयोग के नए क्षेत्रों की पहचान करने पर सहमति व्यक्त की।
स्रोत:
भारत सरकार, ऑस्ट्रेलिया सरकार तथा दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों के आधिकारिक वक्तव्य।
मूल रिपोर्ट:
10 जुलाई 2026 तक उपलब्ध आधिकारिक जानकारी एवं विश्वसनीय अंतरराष्ट्रीय समाचार स्रोतों के आधार पर।
जय राष्ट्र न्यूज़






