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SIR में इस्तेमाल सॉफ्टवेयर का नाम-वर्जन बताने से चुनाव आयोग का इनकार, RTI में ‘ट्रेड सीक्रेट’ और बौद्धिक संपदा का दिया हवाला

नई दिल्ली, 25 अक्टूबर 2026: चुनाव आयोग ने स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के दौरान मतदाता सूची में गड़बड़ियां और असंगतियां पहचानने के लिए इस्तेमाल किए गए सॉफ्टवेयर का नाम और वर्जन सार्वजनिक करने से इनकार कर दिया है। आयोग ने RTI कानून की धारा 8(1)(d) का हवाला देते हुए कहा कि यह जानकारी “commercial confidence, trade secrets और intellectual property” से जुड़ी है और इसके खुलासे से किसी तीसरे पक्ष की प्रतिस्पर्धी स्थिति प्रभावित हो सकती है।

किसने मांगी थी जानकारी?

तेलंगाना के करीमनगर निवासी सामाजिक कार्यकर्ता एम.ए. मुजीब अय्यूब ने RTI आवेदन के जरिए चुनाव आयोग से पूछा था कि SIR में मतदाता डेटा की गलतियां पकड़ने के लिए कौन-सा software, application या AI platform इस्तेमाल किया गया। उन्होंने उसका नाम, version और काम करने के तरीके की जानकारी भी मांगी थी।

चुनाव आयोग ने क्या जवाब दिया?

16 अक्टूबर को दिए जवाब में आयोग ने कहा कि software का नाम और version बताना RTI Act की धारा 8(1)(d) के तहत exempt है। यह धारा commercial confidence, trade secrets और intellectual property से जुड़ी कुछ जानकारियों को सार्वजनिक करने से छूट देती है।

क्या SIR के लिए नया software बनाया गया था?

चुनाव आयोग ने साफ किया कि SIR के लिए कोई नया software विकसित या खरीदा नहीं गया था। हालांकि आयोग ने यह नहीं बताया कि पहले से मौजूद किस system या platform का इस्तेमाल किया गया।

AI और Machine Learning के इस्तेमाल पर भी स्पष्ट जवाब नहीं

RTI में यह भी पूछा गया था कि क्या voter records को flag करने में AI, machine learning, predictive analytics या automated decision-support tools का इस्तेमाल हुआ। आयोग ने इन सवालों को “clarification” बताते हुए कहा कि ये RTI Act की धारा 2(f) के तहत “information” की परिभाषा में नहीं आते। इसलिए यह स्पष्ट नहीं हुआ कि automated tools या AI का इस्तेमाल हुआ था या नहीं।

गलत तरीके से नाम flag होने से बचाने के क्या safeguards हैं?

RTI आवेदक ने पूछा था कि genuine voters को गलती से flag या delete होने से बचाने के लिए कौन-से safeguards हैं। इस सवाल पर भी आयोग ने विस्तृत तकनीकी जानकारी नहीं दी। यही वजह है कि SIR के software और verification process की transparency को लेकर अब नई बहस शुरू हो गई है।

अंतिम फैसला ERO का होता है

चुनाव आयोग ने कहा कि मतदाता का नाम शामिल या बाहर करने का अंतिम निर्णय software नहीं, बल्कि संबंधित विधानसभा क्षेत्र के Electoral Registration Officer (ERO) द्वारा तथ्य और रिकॉर्ड देखने के बाद लिया जाता है। आयोग ने Representation of the People Act, 1950 की धाराओं 13B(1) और 13B(2) का हवाला दिया।

समीक्षा कौन करता है, इस पर भी सीमित जानकारी

जब पूछा गया कि software द्वारा flag किए गए records की समीक्षा कौन करता है, आयोग ने RTI Act की धारा 8(1)(g) का हवाला दिया। यह प्रावधान ऐसी जानकारी को रोकने की अनुमति देता है जिससे किसी व्यक्ति की सुरक्षा प्रभावित हो सकती है या confidential source की पहचान उजागर हो सकती है।

पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त ने अपील की सलाह दी

पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त ओ.पी. रावत ने कहा कि RTI आवेदक को इस जवाब के खिलाफ सक्षम प्राधिकारी के सामने अपील करनी चाहिए। उनके मुताबिक मामला कानूनी व्याख्या से जुड़ा है और अपील के जरिए अधिक जानकारी मांगी जा सकती है।

SIR पर पहले से जारी है विवाद

SIR प्रक्रिया पहले से ही मतदाता सूची में बड़ी संख्या में नाम हटने और data verification को लेकर राजनीतिक विवाद के केंद्र में है। ऐसे में software की technical details सार्वजनिक न किए जाने से पारदर्शिता को लेकर नए सवाल खड़े हुए हैं। हालांकि चुनाव आयोग का कहना है कि अंतिम निर्णय statutory अधिकारियों द्वारा ही लिया जाता है और SIR के लिए कोई अलग नया software तैयार नहीं किया गया।

जय राष्ट्र न्यूज़

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