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‘नरेंद्र मोदी से सवाल पूछने के लिए 25 साल की तपस्या चाहिए’, गोरखपुर में BJP की पदयात्रा; नितिन नवीन ने राहुल गांधी पर साधा निशाना!

गोरखपुर, उत्तर प्रदेश, 6 नवंबर 2026: उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में भारतीय जनता पार्टी की ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ पदयात्रा के दौरान सियासी बयानबाजी तेज हो गई। बुधवार, 4 नवंबर को आयोजित जनसभा में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी और समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव पर निशाना साधा। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के राजनीतिक जीवन और समर्पण का उल्लेख करते हुए कहा कि उनसे सवाल पूछने वालों को पहले उनके 25 वर्षों की तपस्या और कार्यों को समझना चाहिए। नितिन नवीन ने राहुल गांधी को ‘पार्ट टाइम नेता’ बताते हुए आरोप लगाया कि विपक्षी दल केवल चुनाव के समय सक्रिय होते हैं। गोरखपुर में BJP की ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ पदयात्रा भारतीय जनता पार्टी ने 4 नवंबर को गोरखपुर में ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ अभियान के तहत पदयात्रा का आयोजन किया। इस कार्यक्रम में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष पंकज चौधरी सहित एनडीए के कई वरिष्ठ नेता शामिल हुए। पदयात्रा से पहले महाराणा प्रताप इंटर कॉलेज मैदान में एक जनसभा आयोजित की गई, जिसमें भाजपा नेताओं ने कांग्रेस और समाजवादी पार्टी पर विभिन्न मुद्दों को लेकर राजनीतिक आरोप लगाए। भाजपा ने इस अभियान को संवैधानिक संस्थाओं के प्रति विश्वास और लोकतांत्रिक व्यवस्था के समर्थन से जुड़ा कार्यक्रम बताया। राहुल गांधी के सवाल पर नितिन नवीन का पलटवार जनसभा को संबोधित करते हुए नितिन नवीन ने राहुल गांधी द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बहस की चुनौती दिए जाने पर प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने लंबे राजनीतिक जीवन में लगातार जनता के बीच रहकर काम किया है। नितिन नवीन ने मोदी के 25 वर्षों के सार्वजनिक जीवन को तपस्या और समर्पण से जोड़ते हुए राहुल गांधी की राजनीतिक प्रतिबद्धता पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी प्रधानमंत्री की राजनीतिक दृष्टि और कार्यशैली का मुकाबला करने की स्थिति में नहीं हैं। भाजपा अध्यक्ष ने राहुल गांधी को ‘पार्ट टाइम पॉलिटिशियन’ और ‘पॉलिटिकल टूरिस्ट’ भी बताया। ये टिप्पणियां भाजपा अध्यक्ष के राजनीतिक बयान का हिस्सा थीं। राहुल गांधी और अखिलेश यादव को बताया ‘युवराज’ नितिन नवीन ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी और समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव को ‘युवराज’ कहकर संबोधित किया। उन्होंने दोनों नेताओं पर परिवारवादी राजनीति करने का आरोप लगाया। भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि राजनीति को पारिवारिक विरासत समझने वाले नेताओं को जनता चुनावों में जवाब देती रही है। उन्होंने दावा किया कि विपक्षी नेताओं की सक्रियता चुनावों के आसपास बढ़ जाती है, जबकि भाजपा कार्यकर्ता पूरे वर्ष जनता के बीच रहकर काम करते हैं। नितिन नवीन ने विपक्ष पर जनता की समस्याओं के बजाय राजनीतिक परिवारों के हितों को प्राथमिकता देने का भी आरोप लगाया। योगी आदित्यनाथ ने भी विपक्ष पर साधा निशाना मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी जनसभा में कांग्रेस और समाजवादी पार्टी की आलोचना की। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में बदलाव का अधिकार जनता के पास होता है। योगी आदित्यनाथ ने 2014 के लोकसभा चुनाव और 2017 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव का उल्लेख करते हुए कहा कि जनता ने अपने मताधिकार के जरिए राजनीतिक परिवर्तन किया था। मुख्यमंत्री ने विपक्ष पर इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (EVM) और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर भ्रम फैलाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में संवैधानिक संस्थाओं का सम्मान किया जाना चाहिए। महाराणा प्रताप इंटर कॉलेज से निकली पदयात्रा गोरखपुर में भाजपा की पदयात्रा महाराणा प्रताप इंटर कॉलेज मैदान से शुरू हुई। इसके बाद यात्रा कचहरी चौराहा, इंदिरा बाल विहार तिराहा और गोलघर काली मंदिर होते हुए सरदार वल्लभभाई पटेल की प्रतिमा तक पहुंची। पदयात्रा के रास्ते में भाजपा कार्यकर्ताओं ने कई स्थानों पर नेताओं का स्वागत किया। आयोजकों ने मार्ग में 18 स्वागत स्थल बनाए थे, जहां फूलों और ढोल-नगाड़ों के साथ पार्टी नेताओं का स्वागत किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में भाजपा कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने भाग लिया। भाजपा ने 40 हजार कार्यकर्ताओं को जुटाने का रखा था लक्ष्य पदयात्रा से पहले भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने बताया था कि कार्यक्रम में गोरखपुर क्षेत्र के 12 जिलों से करीब 40 हजार कार्यकर्ताओं और आम लोगों की भागीदारी का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। भाजपा ने इस आयोजन को प्रदेश में पार्टी के संगठनात्मक अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया। हालांकि कार्यक्रम में वास्तविक रूप से कितने लोग शामिल हुए, इसकी स्वतंत्र रूप से सत्यापित संख्या उपलब्ध नहीं है। पंकज चौधरी ने कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों पर संवैधानिक संस्थाओं को बदनाम करने का आरोप भी लगाया। चुनाव आयोग और EVM विवाद पर भी हुई बयानबाजी भाजपा नेताओं ने विपक्ष द्वारा चुनाव आयोग और इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों को लेकर उठाए जा रहे सवालों की आलोचना की। पंकज चौधरी ने आरोप लगाया कि विपक्षी दल चुनाव में हार मिलने के बाद संवैधानिक संस्थाओं की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हैं। दूसरी ओर, कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता तथा मतदाता सूची के पुनरीक्षण को लेकर लगातार सवाल उठाते रहे हैं। विपक्ष का कहना है कि मतदाता सूची से नाम हटाने और चुनावी प्रक्रियाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक जानकारी सार्वजनिक होनी चाहिए। इस मुद्दे पर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच राजनीतिक मतभेद बने हुए हैं। 2027 विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा की सक्रियता उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा अपने संगठनात्मक कार्यक्रमों और जनसंपर्क अभियानों को तेज कर रही है। गोरखपुर की पदयात्रा को भी पार्टी की इसी राजनीतिक और संगठनात्मक गतिविधि का हिस्सा माना जा रहा है। राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन का 4 और 5 नवंबर को गोरखपुर का दो दिवसीय दौरा निर्धारित था। इस दौरान पार्टी पदाधिकारियों, जनप्रतिनिधियों और संगठन के वरिष्ठ नेताओं के साथ बैठकों का कार्यक्रम भी रखा गया। इन बैठकों में संगठन को मजबूत बनाने और आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों पर चर्चा की जानी थी। जयंत चौधरी और एनडीए के अन्य नेता भी रहे मौजूद गोरखपुर में आयोजित कार्यक्रम में राष्ट्रीय लोकदल के अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी भी शामिल हुए। इसके अलावा निषाद पार्टी के अध्यक्ष संजय निषाद, केंद्रीय मंत्री कमलेश पासवान और भाजपा के कई वरिष्ठ पदाधिकारियों ने कार्यक्रम में भाग लिया। एनडीए के सहयोगी दलों की मौजूदगी को भाजपा ने राजनीतिक…

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अंकिता भंडारी के माता-पिता के साथ दिल्ली पुलिस की कार्रवाई पर विवाद, राजघाट पर मां सोनी देवी बेहोश; न्याय की मांग को लेकर प्रदर्शन

नई दिल्ली, 6 नवंबर 2026: उत्तराखंड के चर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड में न्याय की मांग कर रहे उनके माता-पिता के साथ दिल्ली पुलिस की कार्रवाई को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। बुधवार, 4 नवंबर को दिल्ली के राजघाट पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे अंकिता के पिता वीरेंद्र भंडारी और मां सोनी देवी को पुलिस ने धरनास्थल से हटा दिया। इस दौरान सोनी देवी की तबीयत अचानक बिगड़ गई और वह बेहोश हो गईं। उन्हें इलाज के लिए दिल्ली के बुराड़ी सरकारी अस्पताल ले जाया गया। घटना के वीडियो सामने आने के बाद कई राजनीतिक नेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। राजघाट पर बेटी के लिए न्याय मांग रहे थे माता-पिता अंकिता भंडारी के माता-पिता बुधवार शाम दिल्ली के राजघाट पहुंचे थे। उनके साथ सामाजिक कार्यकर्ता योगिता भयाना और कांग्रेस नेता मुमताज पटेल भी मौजूद थीं। परिजनों ने महात्मा गांधी की समाधि पर श्रद्धांजलि अर्पित की और इसके बाद राजघाट के सार्वजनिक प्रवेश द्वार के पास बैठकर विरोध प्रदर्शन शुरू किया। परिवार का कहना है कि वे अपनी बेटी की हत्या से जुड़े सभी पहलुओं की निष्पक्ष जांच और न्याय की मांग कर रहे हैं। प्रदर्शन के दौरान माता-पिता ने सरकार और संबंधित जांच एजेंसियों से अपनी मांगों पर कार्रवाई करने की अपील की। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को राजघाट से हटाया दिल्ली पुलिस के अनुसार, राजघाट राष्ट्रीय महत्व का स्मारक स्थल है और वहां धरना-प्रदर्शन करने की अनुमति नहीं है। पुलिस अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों से निर्धारित नियमों का हवाला देते हुए वहां से हटने के लिए कहा। हालांकि प्रदर्शनकारी अपनी मांगों को लेकर वहीं बैठे रहे। इसके बाद पुलिसकर्मियों ने उन्हें वहां से हटाने की कार्रवाई शुरू की। घटना के सामने आए वीडियो में पुलिसकर्मियों को अंकिता के पिता और अन्य प्रदर्शनकारियों को वहां से हटाते देखा जा सकता है। सामाजिक कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि पुलिस ने प्रदर्शनकारियों के साथ जबरदस्ती की। हालांकि दिल्ली पुलिस ने इन आरोपों से अलग अपना पक्ष रखा है। पुलिस कार्रवाई के दौरान बेहोश हुईं सोनी देवी प्रदर्शनकारियों को हटाए जाने के दौरान अंकिता की मां सोनी देवी की तबीयत अचानक बिगड़ गई। प्रत्यक्षदर्शियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के अनुसार, सोनी देवी पुलिस कार्रवाई का विरोध कर रही थीं। इसी दौरान वह बेहोश होकर गिर पड़ीं। इसके बाद उन्हें पुलिस वाहन से बुराड़ी सरकारी अस्पताल ले जाया गया। सामाजिक कार्यकर्ता योगिता भयाना ने सोशल मीडिया पर वीडियो साझा करते हुए आरोप लगाया कि सोनी देवी की तबीयत बिगड़ने के बावजूद उन्हें तत्काल उचित सहायता नहीं दी गई। हालांकि पुलिस सूत्रों के अनुसार, स्वास्थ्य संबंधी परेशानी की जानकारी मिलने के बाद उन्हें अस्पताल पहुंचाया गया। हिरासत में लेने के दावे पर पुलिस की सफाई घटना के बाद कुछ मीडिया रिपोर्टों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने दावा किया कि अंकिता भंडारी के माता-पिता को पुलिस ने हिरासत में लिया था। हालांकि दिल्ली पुलिस ने इस दावे का खंडन किया है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, प्रदर्शनकारियों को केवल राजघाट से हटाया गया था, क्योंकि वह प्रदर्शन के लिए निर्धारित स्थान नहीं है। पुलिस का कहना है कि किसी को औपचारिक रूप से हिरासत में नहीं लिया गया। पुलिस के अनुसार, सोनी देवी को मेडिकल जांच के लिए बुराड़ी अस्पताल ले जाया गया था, लेकिन माता-पिता ने मेडिकल परीक्षण कराने से इनकार कर दिया। बाद में आम आदमी पार्टी के विधायक संजीव झा अस्पताल पहुंचे और अंकिता के माता-पिता उनके साथ चले गए। डिंपल यादव और अन्य नेताओं ने उठाए सवाल अंकिता भंडारी के माता-पिता के साथ हुई पुलिस कार्रवाई की कई विपक्षी नेताओं ने आलोचना की है। समाजवादी पार्टी की सांसद डिंपल यादव ने सोशल मीडिया पर दिल्ली पुलिस के व्यवहार को लेकर नाराजगी जताई। उन्होंने सवाल उठाया कि अपनी बेटी के लिए न्याय मांग रहे माता-पिता के साथ इस तरह की कार्रवाई क्यों की गई। शिवसेना (यूबीटी) की सांसद प्रियंका चतुर्वेदी और कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनेत ने भी घटना पर प्रतिक्रिया दी। अभिनेत्री ऋचा चड्ढा ने भी सोशल मीडिया के जरिए अंकिता के परिवार के प्रति समर्थन जताया और पुलिस कार्रवाई की आलोचना की। क्या है अंकिता भंडारी हत्याकांड? उत्तराखंड की रहने वाली 19 वर्षीय अंकिता भंडारी ऋषिकेश के पास स्थित वनंतरा रिजॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट के तौर पर काम करती थीं। 18 सितंबर 2022 को उनकी हत्या कर दी गई थी। चार दिन बाद उनका शव चीला नहर से बरामद हुआ था। इस घटना के बाद उत्तराखंड सहित देश के विभिन्न हिस्सों में विरोध प्रदर्शन हुए थे। मामले में रिजॉर्ट मालिक पुलकित आर्य और उसके दो सहयोगियों को गिरफ्तार किया गया था। अदालत ने तीनों आरोपियों को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। हालांकि अंकिता का परिवार मामले में कथित वीआईपी की भूमिका की जांच की मांग लगातार करता रहा है। कथित वीआईपी की भूमिका को लेकर जारी है विवाद अंकिता भंडारी हत्याकांड में एक कथित वीआईपी की भूमिका को लेकर लंबे समय से राजनीतिक विवाद जारी है। परिवार और कुछ सामाजिक कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि मामले के सभी पहलुओं की पूरी तरह जांच नहीं की गई। अंकिता के माता-पिता इस मामले में निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं। हालांकि किसी विशेष व्यक्ति की कथित संलिप्तता से जुड़े आरोपों को अदालत द्वारा दोषसिद्धि के बराबर नहीं माना जा सकता। परिवार का कहना है कि सभी सवालों के स्पष्ट जवाब मिलने तक उनकी न्याय की लड़ाई जारी रहेगी। पहले भी दिल्ली में प्रदर्शन के दौरान हुई थी कार्रवाई यह पहली बार नहीं है जब अंकिता भंडारी के माता-पिता को दिल्ली में प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई का सामना करना पड़ा हो। 14 अक्टूबर 2026 को इंडिया गेट के पास प्रदर्शन करते समय भी उन्हें पुलिस ने हिरासत में लिया था। उस समय परिवार सिक्किम के राज्यपाल के रूप में दुष्यंत कुमार गौतम की नियुक्ति का विरोध कर रहा था। परिवार और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने मामले में कथित वीआईपी की भूमिका को लेकर आरोप लगाए थे। हालांकि इन आरोपों की न्यायिक पुष्टि नहीं हुई है। न्याय की मांग को लेकर जारी रहेगा संघर्ष राजघाट की घटना के बाद अंकिता भंडारी हत्याकांड एक बार फिर चर्चा में आ गया है। एक ओर परिवार अपनी बेटी की हत्या से जुड़े सभी पहलुओं की जांच और न्याय की मांग कर…

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देश में 3 करोड़ बांग्लादेशी घुसपैठियों के दावे पर भड़के संजय सिंह, केंद्र सरकार से पूछा- 12 साल में कितनों को बाहर निकाला?

अयोध्या, उत्तर प्रदेश, 6 नवंबर 2026: देश में तीन करोड़ बांग्लादेशी घुसपैठियों की मौजूदगी को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बयान पर राजनीतिक विवाद बढ़ गया है। आम आदमी पार्टी (AAP) के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने केंद्र सरकार से सवाल पूछा है कि यदि देश में तीन करोड़ अवैध घुसपैठिए मौजूद हैं, तो पिछले 12 वर्षों में उन्हें बाहर क्यों नहीं निकाला गया। बुधवार, 4 नवंबर को अयोध्या पहुंचे संजय सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह से देश में अवैध घुसपैठ तथा मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर जवाब मांगा। उन्होंने चुनाव आयोग से भी कथित तौर पर तीन करोड़ घुसपैठियों की पहचान सार्वजनिक करने की मांग की। अमित शाह के तीन करोड़ घुसपैठियों वाले बयान पर विवाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 2 नवंबर को हैदराबाद में एक जनसभा को संबोधित करते हुए मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर बड़ा दावा किया था। उन्होंने कहा था कि SIR प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची से हटाए गए लगभग 13 करोड़ नामों में तीन करोड़ ऐसे लोगों के नाम शामिल थे, जिनकी पहचान बांग्लादेशी घुसपैठियों के रूप में की जा रही है। अमित शाह ने दावा किया कि हटाए गए नामों में बड़ी संख्या ऐसे मतदाताओं की भी थी, जिनकी मृत्यु हो चुकी थी, जो दूसरे स्थानों पर चले गए थे या जिनकी प्रविष्टियां दोहराई गई थीं। गृह मंत्री ने कांग्रेस पर मतदाता सूची के पुनरीक्षण का विरोध करने का आरोप लगाते हुए कहा कि केवल भारतीय नागरिकों को ही देश के चुनावों में मतदान करने का अधिकार है। हालांकि तीन करोड़ लोगों को बांग्लादेशी घुसपैठिया बताने वाले दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। संजय सिंह ने पूछा- 12 साल में कितनों को बाहर निकाला? अयोध्या के महर्षि वाल्मीकि अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर पत्रकारों से बातचीत के दौरान संजय सिंह ने केंद्र सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह पिछले 12 वर्षों से केंद्र की सत्ता में हैं। यदि देश में वास्तव में इतनी बड़ी संख्या में अवैध घुसपैठिए मौजूद हैं, तो सरकार को यह बताना चाहिए कि इस दौरान कितने लोगों की पहचान की गई और कितनों को देश से बाहर भेजा गया। संजय सिंह ने सवाल उठाया कि सीमा सुरक्षा और अवैध घुसपैठ रोकने की जिम्मेदारी केंद्र सरकार की है। ऐसे में सरकार को इस मुद्दे पर स्पष्ट आंकड़े सार्वजनिक करने चाहिए। चुनाव आयोग से तीन करोड़ नाम सार्वजनिक करने की मांग आम आदमी पार्टी के सांसद ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पत्र लिखकर SIR प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों पर भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने मांग की कि जिन तीन करोड़ लोगों को घुसपैठिया बताया जा रहा है, उनकी पहचान और इससे संबंधित प्रमाण सार्वजनिक किए जाएं। संजय सिंह ने कहा कि मतदाता सूची से नाम हटाने की प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए और किसी भी पात्र नागरिक का मतदान अधिकार प्रभावित नहीं होना चाहिए। उन्होंने चुनाव आयोग से सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन सुनिश्चित करने की भी मांग की। SIR प्रक्रिया को लेकर विपक्ष के आरोप मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR चुनाव आयोग की एक प्रक्रिया है, जिसका उद्देश्य मतदाता सूची को अद्यतन करना है। इसके अंतर्गत मृत मतदाताओं, स्थायी रूप से स्थानांतरित लोगों, दोहराई गई प्रविष्टियों और अन्य अपात्र नामों की पहचान की जाती है। हालांकि विपक्षी दलों ने आरोप लगाया है कि इस प्रक्रिया में बड़ी संख्या में पात्र मतदाताओं के नाम भी सूची से हटाए गए हैं। संजय सिंह ने दावा किया कि देशभर में लगभग 13.37 करोड़ मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इस प्रक्रिया का इस्तेमाल विपक्षी दलों के समर्थक मतदाताओं को प्रभावित करने के लिए किया जा रहा है। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश लागू करने की मांग संजय सिंह ने चुनाव आयोग से उन मतदाताओं को आवश्यक अवसर देने की मांग की है, जिनके नाम SIR प्रक्रिया के दौरान हटाए गए या अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत अथवा दोहराई गई प्रविष्टियों की श्रेणी में रखे गए। उन्होंने कहा कि ऐसे पात्र मतदाताओं को गणना फॉर्म और आवश्यक आवेदन जमा करने की सुविधा मिलनी चाहिए। इसके लिए उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त को पत्र लिखकर न्यायालय के निर्देशों के अनुसार कार्रवाई करने की मांग की। उनका कहना है कि किसी भी पात्र भारतीय नागरिक को अपना नाम मतदाता सूची में शामिल कराने के कानूनी अधिकार से वंचित नहीं किया जाना चाहिए। कांग्रेस ने भी तीन करोड़ घुसपैठियों के दावे पर उठाए सवाल आम आदमी पार्टी के अलावा कांग्रेस नेताओं ने भी भाजपा के तीन करोड़ घुसपैठियों वाले दावे पर सवाल उठाए हैं। पूर्व केंद्रीय गृह मंत्री और कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम ने भाजपा नेतृत्व से पूछा कि जिन तीन करोड़ लोगों को घुसपैठिया बताया जा रहा है, उनकी पहचान किस आधार पर की गई है। उन्होंने यह भी जानना चाहा कि क्या केंद्र और राज्य सरकारों के पास इन लोगों की पहचान से संबंधित प्रमाण मौजूद हैं। कांग्रेस का कहना है कि यदि अवैध घुसपैठियों की पहचान हो चुकी है, तो उनके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। दूसरी ओर, भाजपा का कहना है कि मतदाता सूची से अपात्र नाम हटाना स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक है। क्या तीन करोड़ लोग वास्तव में बांग्लादेशी घुसपैठिए हैं? इस पूरे विवाद में सबसे महत्वपूर्ण सवाल तीन करोड़ लोगों की पहचान और उनसे संबंधित प्रमाणों का है। चुनाव आयोग की SIR प्रक्रिया के दौरान कुछ मतदाताओं को अनुपस्थित या पता नहीं चल पाने वाली श्रेणियों में रखा गया था। लेकिन केवल किसी व्यक्ति के अनुपस्थित होने या उसका नाम मतदाता सूची से हटने के आधार पर उसे विदेशी नागरिक या अवैध घुसपैठिया नहीं माना जा सकता। ऐसी पहचान के लिए नागरिकता और अन्य संबंधित कानूनी दस्तावेजों की जांच आवश्यक होती है। अब तक उपलब्ध सार्वजनिक जानकारी के आधार पर तीन करोड़ लोगों के बांग्लादेशी घुसपैठिए होने की आधिकारिक रूप से सत्यापित सूची सामने नहीं आई है। केंद्र सरकार और चुनाव आयोग के जवाब का इंतजार तीन करोड़ घुसपैठियों के दावे को लेकर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच राजनीतिक बयानबाजी…

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सोनम वांगचुक के डेजर्ट फ्लावर स्कूल की गतिविधियों पर रोक, पत्नी गीतांजलि आंग्मो को प्रशासन का नोटिस; हाई कोर्ट के फैसले तक बंद रहेंगी कक्षाएं

लेह, लद्दाख, 6 नवंबर 2026: पर्यावरण कार्यकर्ता और शिक्षाविद सोनम वांगचुक की संस्था से जुड़े डेजर्ट फ्लावर स्कूल को लेकर लद्दाख प्रशासन ने बड़ा कदम उठाया है। प्रशासन ने लेह के फ्यांग स्थित स्कूल में कक्षाएं और अन्य गतिविधियां रोकने का निर्देश दिया है। इस संबंध में वांगचुक की पत्नी और हिमालयन इंस्टीट्यूट ऑफ अल्टरनेटिव्स, लद्दाख (HIAL) की सह-संस्थापक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. गीतांजलि जे. आंग्मो को नोटिस जारी किया गया है। प्रशासन का कहना है कि आवश्यक मंजूरी के बिना स्कूल की गतिविधियां शुरू की गई थीं, जबकि संस्था से जुड़ा भूमि आवंटन विवाद जम्मू-कश्मीर और लद्दाख उच्च न्यायालय में विचाराधीन है। 1 नवंबर को जारी किया गया प्रशासनिक नोटिस लेह तहसीलदार कार्यालय ने 1 नवंबर 2026 को डॉ. गीतांजलि आंग्मो के नाम नोटिस जारी किया था। इस नोटिस में डेजर्ट फ्लावर स्कूल की गतिविधियों को लेकर आपत्ति जताई गई है। प्रशासन के अनुसार, संबंधित अधिकारियों से आवश्यक अनुमति और स्वीकृति प्राप्त किए बिना स्कूल में कक्षाएं तथा अन्य गतिविधियां शुरू की गईं। नोटिस में स्पष्ट किया गया है कि उच्च न्यायालय में लंबित मामले का अंतिम फैसला आने या कोई अन्य आदेश जारी होने तक स्कूल से संबंधित गतिविधियों को आगे नहीं बढ़ाया जाए। प्रशासन ने संस्था को मौजूदा स्थिति बनाए रखने के निर्देश भी दिए हैं। बिना मंजूरी कक्षाएं शुरू करने का आरोप लद्दाख प्रशासन के अनुसार, गीतांजलि आंग्मो ने 22 सितंबर 2026 को लेह के उपायुक्त को एक पत्र लिखा था। इस पत्र में उन्होंने HIAL के अंतर्गत संचालित होने वाले डेजर्ट फ्लावर स्कूल की प्रस्तावित प्रबंधन समिति के सदस्यों के लिए अनापत्ति प्रमाणपत्र (NOC) या आवश्यक मंजूरी देने का अनुरोध किया था। हालांकि प्रशासन का दावा है कि आवश्यक स्वीकृति मिलने से पहले ही स्कूल में पढ़ाई और अन्य गतिविधियां शुरू कर दी गईं। इसी आधार पर तहसीलदार कार्यालय ने संस्था को नोटिस भेजकर आगे की गतिविधियां रोकने का निर्देश दिया। जमीन आवंटन विवाद हाई कोर्ट में लंबित डेजर्ट फ्लावर स्कूल से जुड़ा विवाद हिमालयन इंस्टीट्यूट ऑफ अल्टरनेटिव्स को आवंटित जमीन के मामले से संबंधित है। लद्दाख प्रशासन ने अगस्त 2025 में HIAL को आवंटित लगभग 1,076 कनाल जमीन का आवंटन रद्द कर दिया था। प्रशासन के इस फैसले को संस्था ने जम्मू-कश्मीर और लद्दाख उच्च न्यायालय में चुनौती दी थी। फिलहाल यह मामला न्यायालय में विचाराधीन है। प्रशासन का कहना है कि भूमि विवाद का मामला लंबित होने के दौरान स्कूल की गतिविधियां आगे बढ़ाना कानूनी कार्यवाही को प्रभावित कर सकता है। सोनम वांगचुक और पत्नी ने कार्रवाई पर उठाए सवाल सोनम वांगचुक और उनकी पत्नी गीतांजलि आंग्मो ने प्रशासन की कार्रवाई पर नाराजगी जताई है। 4 नवंबर को मीडिया से बातचीत में दोनों ने आरोप लगाया कि उनकी शैक्षणिक संस्था को जानबूझकर निशाना बनाया जा रहा है। वांगचुक ने इस कार्रवाई को उत्पीड़न का हिस्सा बताया और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। गीतांजलि आंग्मो ने दावा किया कि स्कूल के पंजीकरण और आवश्यक मंजूरियों के लिए सभी दस्तावेज जमा किए गए थे, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर प्रक्रिया में देरी हुई। उन्होंने नोटिस के आधार को भी गलत बताया। हालांकि प्रशासन ने अपने नोटिस में स्पष्ट किया है कि आवश्यक मंजूरी के बिना गतिविधियां शुरू नहीं की जा सकतीं। स्कूल में इस वर्ष 50 छात्रों का दाखिला सोनम वांगचुक और गीतांजलि आंग्मो के अनुसार, डेजर्ट फ्लावर स्कूल में इस वर्ष लगभग 50 विद्यार्थियों का नामांकन किया गया है। स्कूल को HIAL परिसर की एक इमारत में शुरू किया गया है। इस शैक्षणिक पहल का उद्देश्य स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार बच्चों को शिक्षा उपलब्ध कराना और हिमालयी क्षेत्र की जरूरतों से जुड़ी शिक्षण व्यवस्था विकसित करना बताया गया है। वांगचुक और आंग्मो का कहना है कि वे बच्चों को बेहतर शिक्षा देना चाहते हैं और इसके लिए आवश्यक प्रक्रियाओं का पालन करने का प्रयास कर रहे हैं। क्या है हिमालयन इंस्टीट्यूट ऑफ अल्टरनेटिव्स? हिमालयन इंस्टीट्यूट ऑफ अल्टरनेटिव्स, लद्दाख (HIAL) एक शैक्षणिक और अनुसंधान आधारित पहल है। इस संस्था की स्थापना में सोनम वांगचुक और गीतांजलि आंग्मो की प्रमुख भूमिका रही है। HIAL का उद्देश्य हिमालयी क्षेत्रों की पर्यावरणीय, सामाजिक और आर्थिक चुनौतियों से संबंधित शिक्षा तथा अनुसंधान को बढ़ावा देना है। संस्था स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप नवाचार, टिकाऊ विकास और वैकल्पिक शिक्षा पद्धतियों पर काम करने के लिए जानी जाती है। डेजर्ट फ्लावर स्कूल इसी शैक्षणिक व्यवस्था का हिस्सा है। प्रशासन ने यथास्थिति बनाए रखने का दिया निर्देश लेह तहसीलदार कार्यालय ने नोटिस में कहा है कि संस्था ऐसा कोई कदम न उठाए, जिससे उच्च न्यायालय में लंबित मामले की कार्यवाही प्रभावित हो। इसका मतलब है कि अदालत के अंतिम निर्णय या अगले निर्देश तक स्कूल के संचालन और गतिविधियों को आगे बढ़ाने पर प्रशासनिक रोक लागू रहेगी। फिलहाल यह स्थायी बंदी का आदेश नहीं है, बल्कि लंबित कानूनी मामले और आवश्यक मंजूरियों से जुड़ा प्रशासनिक निर्देश है। स्कूल की गतिविधियां दोबारा कब शुरू होंगी, यह न्यायालय के आदेश और संबंधित प्रशासनिक मंजूरियों पर निर्भर करेगा। लद्दाख में शिक्षा और प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर बहस डेजर्ट फ्लावर स्कूल को जारी नोटिस के बाद लद्दाख में शैक्षणिक संस्थाओं के संचालन और प्रशासनिक अनुमति की प्रक्रिया को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। एक ओर प्रशासन का कहना है कि आवश्यक कानूनी मंजूरियों और न्यायालय में लंबित मामले को ध्यान में रखते हुए यह कार्रवाई की गई है। दूसरी ओर, सोनम वांगचुक और गीतांजलि आंग्मो ने आरोप लगाया है कि प्रशासनिक देरी के कारण उनके शैक्षणिक प्रयास प्रभावित हो रहे हैं। इस मामले में दोनों पक्षों के दावे अलग-अलग हैं और अंतिम कानूनी स्थिति न्यायालय की कार्यवाही से स्पष्ट होगी। हाई कोर्ट के फैसले का इंतजार डेजर्ट फ्लावर स्कूल की गतिविधियों पर लगी रोक फिलहाल जारी है। प्रशासन ने संस्था को निर्देश दिया है कि वह अदालत के निर्णय या अगले आदेश तक स्कूल के संचालन से संबंधित कोई नई गतिविधि शुरू न करे। वहीं, सोनम वांगचुक और गीतांजलि आंग्मो ने अपनी शैक्षणिक पहल का बचाव करते हुए प्रशासनिक कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। अब यह देखना होगा कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख उच्च न्यायालय में लंबित मामले में क्या फैसला आता है और स्कूल के संचालन को लेकर आगे क्या निर्देश जारी किए जाते हैं। स्रोत: प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया (PTI), दैनिक जागरण, इंडिया…

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दिल्ली के चावड़ी बाजार में तीन मंजिला इमारत ढही, 2 मजदूरों की मौत; कई के दबे होने की आशंका, तीन ठेकेदार गिरफ्तार

नई दिल्ली, 6 नवंबर 2026: राजधानी दिल्ली के चावड़ी बाजार इलाके में गुरुवार सुबह एक बड़ा हादसा हो गया। यहां निर्माणाधीन तीन मंजिला इमारत अचानक भरभराकर गिर गई। इस दर्दनाक हादसे में दो मजदूरों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य लोगों के मलबे में दबे होने की आशंका जताई गई। घटना चावड़ी बाजार मेट्रो स्टेशन के पास गली शीश महल इलाके में हुई। सूचना मिलते ही दिल्ली पुलिस, दमकल विभाग और राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) की टीमें मौके पर पहुंचीं। मामले में पुलिस ने तीन ठेकेदारों को गिरफ्तार किया है, जबकि दिल्ली नगर निगम (MCD) ने लापरवाही के आरोप में दो इंजीनियरों को निलंबित कर दिया है। सुबह करीब 9:50 बजे अचानक ढही इमारत घटना गुरुवार, 5 नवंबर की सुबह करीब 9:50 बजे हुई। पुरानी दिल्ली के व्यस्त चावड़ी बाजार इलाके में एक तीन मंजिला इमारत में निर्माण कार्य चल रहा था। इसी दौरान इमारत का एक हिस्सा अचानक गिर गया। देखते ही देखते पूरी जगह मलबे और धूल के गुबार से भर गई। हादसे के समय इमारत में कई मजदूर काम कर रहे थे। मलबे में लोगों के दबे होने की आशंका के बाद आसपास के लोगों ने तुरंत बचाव कार्य शुरू किया। घटना की सूचना दिल्ली अग्निशमन सेवा को दी गई, जिसके बाद दमकल की छह इकाइयों सहित अन्य बचाव दल मौके पर पहुंचे। हादसे में दो मजदूरों की मौत, कई घायल हादसे में दो मजदूरों की मौत की पुष्टि हुई है। मृतकों की पहचान किशोरी (40 वर्ष) और संजीत (45 वर्ष) के रूप में हुई है। दोनों दिल्ली के मंडावली इलाके की रेलवे कॉलोनी के निवासी बताए गए हैं। बचाव दल ने मलबे से दोनों मजदूरों को बाहर निकाला, लेकिन उनकी जान नहीं बचाई जा सकी। घायलों में 25 वर्षीय सहदेव चौधरी और 37 वर्षीय फिरोज भी शामिल हैं। पुलिस के अनुसार, दोनों को अस्पताल में भर्ती कराया गया और उनकी हालत खतरे से बाहर बताई गई। कुछ रिपोर्टों में घायलों की संख्या चार से पांच बताई गई है। अधिकारियों ने आशंका जताई कि हादसे के समय इमारत में करीब 10 से 15 मजदूर मौजूद थे। तंग गलियों के कारण बचाव कार्य में परेशानी चावड़ी बाजार पुरानी दिल्ली के सबसे व्यस्त और घनी आबादी वाले इलाकों में शामिल है। यहां की गलियां काफी संकरी हैं, जिसके कारण बड़ी मशीनों और भारी बचाव उपकरणों को घटनास्थल तक पहुंचाने में मुश्किल हुई। दिल्ली पुलिस, एनडीआरएफ, दमकल विभाग और एमसीडी की टीमों ने संयुक्त रूप से राहत एवं बचाव अभियान चलाया। बचावकर्मियों ने मलबे को हटाकर फंसे लोगों की तलाश की। पांच नवंबर की देर रात तक उपलब्ध जानकारी के अनुसार, मलबे में और लोगों के दबे होने की आशंका बनी हुई थी। आसपास की इमारतों को संभावित खतरे से बचाने के लिए प्रशासन ने कुछ स्थानों को खाली भी कराया। अवैध निर्माण की आशंका, बिना मंजूरी चल रहा था काम प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि जिस इमारत में हादसा हुआ, वहां निर्माण कार्य के लिए आवश्यक अनुमति नहीं ली गई थी। एमसीडी अधिकारियों के मुताबिक, इमारत लगभग 50 वर्ग मीटर के भूखंड पर बनाई जा रही थी। तीन मंजिलों का निर्माण हो चुका था और चौथी मंजिल से संबंधित काम चल रहा था। अधिकारियों ने आशंका जताई कि निर्माण के दौरान पर्याप्त सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया गया। बताया गया कि हादसे के समय मजदूर छत के नीचे लगे अस्थायी सहारों को हटाने का काम कर रहे थे। हालांकि इमारत गिरने के वास्तविक कारणों का पता विस्तृत तकनीकी जांच के बाद ही चलेगा। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने दिए जांच के आदेश दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने घटना की जानकारी मिलने के बाद घटनास्थल का दौरा किया और अधिकारियों से राहत एवं बचाव कार्य की जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने हादसे की जांच के आदेश दिए और निर्माण कार्य में लापरवाही बरतने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि निर्माण संबंधी सुरक्षा नियमों की अनदेखी करने वाले अधिकारियों और जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। दिल्ली नगर निगम ने मामले में संबंधित कनिष्ठ अभियंता (JE) और सहायक अभियंता (AE) को निलंबित कर दिया है। फरीदाबाद से तीन ठेकेदार गिरफ्तार दिल्ली पुलिस ने मामले में कार्रवाई करते हुए तीन ठेकेदारों को हरियाणा के फरीदाबाद से गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान सिराज, ताजुद्दीन और फुरकान के रूप में हुई है। पुलिस के अनुसार, तीनों आरोपी पुरानी दिल्ली के अजमेरी गेट इलाके के निवासी हैं और उन्हें फरीदाबाद के सिरोही गांव से पकड़ा गया। आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 105 के तहत मामला दर्ज किया गया है। यह धारा हत्या की श्रेणी में नहीं आने वाले गैर इरादतन मानव वध से संबंधित है। पुलिस अब निर्माण कार्य की अनुमति, सुरक्षा मानकों और हादसे के लिए जिम्मेदार परिस्थितियों की जांच कर रही है। पहले भी अवैध निर्माण की मिली थी जानकारी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, दिल्ली पुलिस ने जून 2026 में ही संबंधित संपत्ति पर कथित अवैध निर्माण को लेकर एमसीडी को जानकारी दी थी। इसके बावजूद निर्माण कार्य जारी रहने से संबंधित विभागों की निगरानी और कार्रवाई पर सवाल उठ रहे हैं। जांच के दौरान यह भी पता लगाया जाएगा कि पहले दी गई सूचना पर क्या कार्रवाई हुई और निर्माण कार्य को रोकने के लिए पर्याप्त कदम क्यों नहीं उठाए गए। पुराने भवनों की सुरक्षा पर उठे सवाल चावड़ी बाजार की घटना ने एक बार फिर पुरानी दिल्ली के घनी आबादी वाले इलाकों में भवन निर्माण और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ा दी है। पुरानी दिल्ली के कई इलाकों में संकरी गलियों के बीच पुराने भवनों के पुनर्निर्माण और अतिरिक्त मंजिलों के निर्माण का काम होता रहता है। ऐसी जगहों पर निर्माण के दौरान सुरक्षा मानकों की अनदेखी आसपास के निवासियों और मजदूरों के लिए गंभीर खतरा बन सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार, निर्माण कार्य शुरू करने से पहले भवन की संरचनात्मक क्षमता, स्वीकृत नक्शे और निर्माण सामग्री की गुणवत्ता की जांच बेहद जरूरी है। हादसे की जांच जारी, जिम्मेदार लोगों पर होगी कार्रवाई चावड़ी बाजार में हुए इस हादसे के बाद प्रशासन ने निर्माण से संबंधित दस्तावेजों और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की जांच शुरू कर दी है। फिलहाल दो मजदूरों की…

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लखनऊ से सऊदी अरब के लिए सीधी उड़ान शुरू, मदीना-जेद्दा और दम्माम जाना हुआ आसान; यात्रियों को बड़ी राहत!

लखनऊ, उत्तर प्रदेश, 6 नवंबर 2026: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से सऊदी अरब जाने वाले यात्रियों के लिए अच्छी खबर है। चौधरी चरण सिंह अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से सऊदी अरब के तीन प्रमुख शहरों मदीना, जेद्दा और दम्माम के लिए सीधी उड़ान सेवाओं का विस्तार किया गया है। सऊदी अरब की विमानन कंपनी फ्लाईएडील (Flyadeal) ने 4 नवंबर को जेद्दा और 5 नवंबर को मदीना के लिए नई सीधी उड़ान सेवा शुरू की। पहली बार लखनऊ से मदीना के लिए नियमित सीधी उड़ान उपलब्ध होने से उमरा यात्रियों और सऊदी अरब में काम करने वाले भारतीयों को विशेष सुविधा मिलेगी। लखनऊ से मदीना के लिए पहली सीधी उड़ान शुरू लखनऊ के चौधरी चरण सिंह अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से गुरुवार, 5 नवंबर को मदीना के लिए पहली सीधी विमान सेवा शुरू हुई। फ्लाईएडील एयरलाइंस की पहली उड़ान से 161 यात्री मदीना से लखनऊ पहुंचे, जबकि 71 यात्रियों ने लखनऊ से मदीना के लिए यात्रा की। इस नई सुविधा के शुरू होने से यात्रियों को मदीना पहुंचने के लिए दूसरे शहरों से कनेक्टिंग फ्लाइट लेने की जरूरत नहीं होगी। लखनऊ और आसपास के जिलों से धार्मिक यात्रा पर जाने वाले लोगों को इस सेवा का सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है। सप्ताह में दो दिन मिलेगी मदीना की फ्लाइट फ्लाईएडील ने लखनऊ और मदीना के बीच सप्ताह में दो दिन सीधी उड़ान संचालित करने का कार्यक्रम तय किया है। यह सेवा प्रत्येक गुरुवार और शनिवार को उपलब्ध होगी। एयरलाइन के निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, मदीना से लखनऊ आने वाली उड़ान संख्या F3-1827 सुबह 5:20 बजे रवाना होकर दोपहर 1:05 बजे लखनऊ पहुंचेगी। वहीं, लखनऊ से मदीना जाने वाली उड़ान संख्या F3-1828 दोपहर 2:05 बजे रवाना होकर शाम 7:20 बजे मदीना पहुंचेगी। उड़ानों के प्रस्थान और आगमन का समय संबंधित शहरों के स्थानीय समय के अनुसार है। जेद्दा के लिए सप्ताह में तीन दिन सीधी उड़ान लखनऊ से जेद्दा के लिए भी फ्लाईएडील की नई सीधी विमान सेवा 4 नवंबर से शुरू हो गई है। यह फ्लाइट प्रत्येक सोमवार, बुधवार और रविवार को संचालित होगी। लखनऊ से जेद्दा जाने वाली उड़ान संख्या F3-1824 दोपहर 2:05 बजे रवाना होगी और शाम 7:20 बजे जेद्दा पहुंचेगी। वापसी में उड़ान संख्या F3-1823 जेद्दा से रवाना होकर दोपहर 1:05 बजे लखनऊ पहुंचेगी। नई सेवा के पहले दिन जेद्दा से 176 यात्री लखनऊ पहुंचे, जबकि 144 यात्रियों ने लखनऊ से जेद्दा के लिए उड़ान भरी। दम्माम के लिए मंगलवार और शुक्रवार को फ्लाइट सऊदी अरब के प्रमुख औद्योगिक शहर दम्माम के लिए भी लखनऊ से सीधी हवाई सुविधा उपलब्ध है। फ्लाईएडील की उड़ानें प्रत्येक मंगलवार और शुक्रवार को संचालित होंगी। लखनऊ से दम्माम जाने वाली उड़ान संख्या F3-1826 दोपहर 2:05 बजे रवाना होकर स्थानीय समयानुसार शाम 6:50 बजे दम्माम पहुंचेगी। वापसी की उड़ान संख्या F3-1825 दोपहर 1:05 बजे लखनऊ पहुंचेगी। इस सुविधा से सऊदी अरब में नौकरी, व्यापार और अन्य कार्यों के लिए यात्रा करने वाले लोगों को अतिरिक्त विकल्प मिलेंगे। उमरा यात्रियों को मिलेगी बड़ी सुविधा सऊदी अरब के मक्का और मदीना शहर धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं। हर साल उत्तर प्रदेश सहित देश के विभिन्न हिस्सों से बड़ी संख्या में लोग उमरा के लिए सऊदी अरब जाते हैं। लखनऊ से मदीना की सीधी उड़ान शुरू होने से धार्मिक यात्रियों को विशेष लाभ मिलेगा। पहले मदीना जाने के लिए कई यात्रियों को जेद्दा या अन्य शहरों के रास्ते यात्रा करनी पड़ती थी। अब सीधे मदीना पहुंचने का विकल्प उपलब्ध होने से यात्रा की योजना बनाना आसान होगा और कनेक्टिंग फ्लाइट की आवश्यकता कम होगी। लखनऊ एयरपोर्ट की अंतरराष्ट्रीय कनेक्टिविटी मजबूत लखनऊ एयरपोर्ट प्रशासन के अनुसार, नई अंतरराष्ट्रीय उड़ान सेवाओं से उत्तर प्रदेश और सऊदी अरब के बीच हवाई संपर्क और मजबूत होगा। नई सेवाओं के शुभारंभ के अवसर पर मुख्य हवाई अड्डा अधिकारी दर्शन सिंह, फ्लाईएडील के हेड सेल्स मोहम्मद देसूकी और कंपनी के लखनऊ प्रतिनिधि नितिन डे मौजूद रहे। इन उड़ानों से धार्मिक पर्यटन के अलावा व्यापारिक यात्राओं, पारिवारिक मुलाकातों और रोजगार के सिलसिले में सऊदी अरब आने-जाने वाले यात्रियों को भी फायदा होगा। फ्लाइट का किराया कितना होगा? प्रकाशित शुरुआती कार्यक्रम में लखनऊ से मदीना की उड़ान का किराया लगभग ₹60,386 तक बताया गया था, जबकि मदीना से लखनऊ आने वाली उड़ान का किराया लगभग ₹32,774 दर्ज किया गया। हालांकि हवाई किराया यात्रा की तारीख, टिकट बुकिंग के समय, सीटों की उपलब्धता और एयरलाइन की नीतियों के अनुसार बदल सकता है। यात्रियों को टिकट बुक करने से पहले एयरलाइन की आधिकारिक वेबसाइट पर किराया और उड़ान का समय जांचना चाहिए। उत्तर प्रदेश के यात्रियों को मिलेगी राहत लखनऊ से सऊदी अरब के तीन प्रमुख शहरों के लिए सीधी उड़ानों का विस्तार उत्तर प्रदेश के यात्रियों के लिए महत्वपूर्ण सुविधा है। इससे लखनऊ के साथ कानपुर, बाराबंकी, अयोध्या, सीतापुर, रायबरेली और आसपास के जिलों से सऊदी अरब जाने वाले लोगों को भी अतिरिक्त यात्रा विकल्प मिलेंगे। आने वाले समय में यात्रियों की संख्या और मांग के आधार पर अंतरराष्ट्रीय हवाई सेवाओं में और विस्तार की संभावना बन सकती है। फिलहाल फ्लाईएडील की नई उड़ानों के शुरू होने से लखनऊ और सऊदी अरब के बीच हवाई यात्रा अधिक सुविधाजनक होने की उम्मीद है। स्रोत: अमर उजाला, दैनिक जागरण, प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया (PTI), यूनाइटेड न्यूज़ ऑफ इंडिया (UNI), लखनऊ एयरपोर्ट से संबंधित प्रकाशित जानकारी। जय राष्ट्र न्यूज़

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बैग खुलते ही GRP के उड़े होश! खड़गपुर रेलवे स्टेशन पर ₹1.40 करोड़ नकद बरामद, युवक गिरफ्तार

खड़गपुर, पश्चिम बंगाल, 6 नवंबर 2026: पश्चिम बंगाल के खड़गपुर रेलवे स्टेशन पर राजकीय रेलवे पुलिस (GRP) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए एक यात्री के बैग से ₹1 करोड़ 40 लाख की नकदी बरामद की है। स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर 7 पर संदिग्ध गतिविधियों के आधार पर एक युवक को रोककर उसकी तलाशी ली गई। इस दौरान उसके तीन बैगों से ₹500 के नोटों के 280 बंडल मिले। पकड़े गए युवक की पहचान हावड़ा निवासी 36 वर्षीय राहुल सोनी के रूप में हुई है। नकदी से संबंधित दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर पाने पर पुलिस ने रकम जब्त कर युवक को गिरफ्तार कर लिया। प्लेटफॉर्म नंबर 7 पर संदिग्ध हालत में मिला युवक घटना बुधवार, 4 नवंबर की है। खड़गपुर रेलवे स्टेशन पर जीआरपी की टीम नियमित गश्त कर रही थी। इसी दौरान प्लेटफॉर्म नंबर 7 पर एक युवक की गतिविधियां पुलिस को संदिग्ध लगीं। युवक के पास दो हैंडबैग और एक नीले रंग का बैकपैक था। पुलिसकर्मियों को अपनी ओर आते देखकर युवक ने कथित तौर पर वहां से निकलने का प्रयास किया। जीआरपी की टीम ने उसे रोककर पूछताछ की और उसके सामान की तलाशी ली। तीन बैगों से निकले ₹500 के नोटों के 280 बंडल पुलिस ने जब युवक के बैग खोले तो उनके अंदर बड़ी मात्रा में नकदी मिली। तीनों बैगों में ₹500 के नोटों के बंडल रखे हुए थे। इतनी बड़ी रकम मिलने के बाद पुलिस ने नोटों की गिनती के लिए मशीन मंगवाई। गिनती के दौरान कुल 280 बंडल मिले, जिनकी कुल कीमत ₹1 करोड़ 40 लाख निकली। पुलिस के अनुसार, तलाशी और जब्ती की प्रक्रिया स्वतंत्र गवाहों की मौजूदगी में पूरी की गई। टाटानगर से हावड़ा ले जाई जा रही थी नकदी पुलिस पूछताछ में युवक ने अपना नाम राहुल सोनी बताया। उसकी उम्र 36 वर्ष है और वह पश्चिम बंगाल के हावड़ा का निवासी है। प्रारंभिक पूछताछ में युवक ने बताया कि वह टाटानगर से हावड़ा की ओर यात्रा कर रहा था। हालांकि पुलिस ने जब उससे नकदी के स्रोत, रकम के मालिक और पैसे ले जाने के उद्देश्य के बारे में सवाल किए तो वह संतोषजनक जवाब नहीं दे सका। पुलिस के अनुसार, आरोपी इतनी बड़ी रकम से संबंधित आवश्यक दस्तावेज भी प्रस्तुत नहीं कर पाया। जीआरपी ने युवक को किया गिरफ्तार खड़गपुर जीआरपी थाने के अधिकारियों की मौजूदगी में नकदी जब्त करने की कार्रवाई पूरी की गई। पुलिस ने मामले में संबंधित कानूनी धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज कर युवक को गिरफ्तार कर लिया। जांच अधिकारी यह पता लगाने का प्रयास कर रहे हैं कि इतनी बड़ी रकम कहां से आई और इसे किस उद्देश्य से हावड़ा ले जाया जा रहा था। आयकर विभाग को भी दी गई जानकारी मामले की गंभीरता को देखते हुए आयकर विभाग को भी नकदी बरामदगी की जानकारी दी गई है। जांच एजेंसियां रकम के स्रोत और संभावित वित्तीय लेन-देन की पड़ताल कर रही हैं। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि क्या यह रकम किसी व्यावसायिक गतिविधि से संबंधित थी या इसके पीछे कोई अन्य मामला है। फिलहाल नकदी के वास्तविक मालिक और उसके स्रोत के बारे में आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। रेलवे स्टेशन पर बड़ी बरामदगी से हड़कंप खड़गपुर रेलवे स्टेशन पर ₹1.40 करोड़ की नकदी बरामद होने के बाद जांच एजेंसियां सक्रिय हो गई हैं। पुलिस आरोपी की यात्रा से जुड़ी जानकारी और संभावित संपर्कों की जांच कर रही है। यह भी पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि युवक अकेले इतनी बड़ी रकम लेकर यात्रा कर रहा था या इस मामले में अन्य लोग भी शामिल हैं। हालांकि बड़ी मात्रा में नकदी लेकर यात्रा करना अपने आप में अपराध नहीं है। इसकी वैधता और संभावित आपराधिक संबंधों का निर्धारण जांच के आधार पर होगा। जांच के बाद सामने आएगी रकम की सच्चाई खड़गपुर रेलवे स्टेशन पर हुई इस बरामदगी ने संदिग्ध नकदी के परिवहन को लेकर कई सवाल खड़े किए हैं। फिलहाल पुलिस और संबंधित जांच एजेंसियां नकदी से जुड़े दस्तावेजों तथा संभावित आर्थिक लेन-देन की जांच कर रही हैं। जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि बरामद ₹1.40 करोड़ का वास्तविक स्रोत क्या था और इसे किसके पास पहुंचाया जाना था। स्रोत: इंडिया टुडे, दैनिक जागरण, पीटीआई और अन्य प्रकाशित मीडिया रिपोर्ट्स। जय राष्ट्र न्यूज़

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दिल्ली में प्रदूषण का स्तर खतरनाक, AQI 377 पहुंचा; पंजाब में पराली जलाने पर CAQM सख्त, पांच जिलों के अधिकारियों को नोटिस

नई दिल्ली, 5 नवंबर 2026: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में वायु प्रदूषण लगातार बढ़ता जा रहा है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के अनुसार, बुधवार 4 नवंबर को दिल्ली का 24 घंटे का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 377 दर्ज किया गया, जो ‘बेहद खराब’ श्रेणी में आता है। यह पिछले 288 दिनों में दिल्ली का सबसे खराब वायु गुणवत्ता स्तर रहा। इसी बीच वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने पंजाब में पराली जलाने की घटनाओं को रोकने में लापरवाही को लेकर पांच जिलों के वरिष्ठ प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किए हैं। दिल्ली के कई इलाकों में AQI 400 के पार दिल्ली में बुधवार शाम तक प्रदूषण की स्थिति और गंभीर हो गई। राजधानी के कई निगरानी केंद्रों पर AQI 400 के पार पहुंच गया। आईआईटी दिल्ली में AQI 455, जहांगीरपुरी में 449, पंजाबी बाग में 446 और मुंडका में 439 दर्ज किया गया। इसके अलावा विवेक विहार में 436, रोहिणी में 432 तथा अलीपुर और नरेला में 429 AQI रिकॉर्ड हुआ। दिल्ली से सटे नोएडा और गुरुग्राम में भी वायु गुणवत्ता ‘बेहद खराब’ श्रेणी में रही। पंजाब के पांच जिलों के अधिकारियों को नोटिस वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने पंजाब के पांच जिलों में पराली जलाने की घटनाओं पर नियंत्रण नहीं होने के कारण अधिकारियों से जवाब मांगा है। इन जिलों में जालंधर, फरीदकोट, बठिंडा, बरनाला और फाजिल्का शामिल हैं। आयोग ने संबंधित उपायुक्तों और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की जवाबदेही तय करते हुए कारण बताओ नोटिस जारी किए हैं। अधिकारियों को 10 नवंबर तक जवाब देने के लिए कहा गया है। आयोग ने निगरानी और नियमों के पालन में कमियों पर सवाल उठाए हैं। चार दिनों में नौ जिलों पर कार्रवाई CAQM ने इससे पहले 1 नवंबर को अमृतसर और तरनतारन तथा 3 नवंबर को गुरदासपुर और कपूरथला जिलों के अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई शुरू की थी। नए नोटिस के बाद पंजाब के कुल नौ जिले आयोग की सीधी निगरानी और नियामकीय कार्रवाई के दायरे में आ गए हैं। आयोग ने स्पष्ट किया है कि पराली जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए स्थानीय प्रशासन को प्रभावी कदम उठाने होंगे। पंजाब में एक दिन में पराली जलाने की 151 घटनाएं भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI) के उपग्रह आधारित आंकड़ों के अनुसार, 4 नवंबर को छह राज्यों में पराली जलाने की कुल 467 घटनाएं दर्ज की गईं। इनमें मध्य प्रदेश में 157, पंजाब में 151 और राजस्थान में 111 घटनाएं सामने आईं। पंजाब में बठिंडा में सबसे अधिक 19 घटनाएं दर्ज हुईं। इसके बाद पटियाला में 17 तथा लुधियाना और तरनतारन में 13-13 घटनाएं रिकॉर्ड की गईं। 15 सितंबर से 4 नवंबर के बीच पंजाब में कुल 2,347 पराली जलाने की घटनाएं दर्ज हुईं, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह संख्या 2,839 थी। दिल्ली के प्रदूषण में पराली का कितना योगदान? भारतीय उष्णदेशीय मौसम विज्ञान संस्थान (IITM) की निर्णय सहायता प्रणाली के अनुमान के अनुसार, बुधवार को दिल्ली में पीएम2.5 प्रदूषण में क्षेत्रीय पराली जलाने का योगदान लगभग 16.28 प्रतिशत रहा। वहीं, स्थानीय परिवहन क्षेत्र का अनुमानित योगदान 18.17 प्रतिशत दर्ज किया गया। विशेषज्ञों के अनुसार, वाहनों से निकलने वाला धुआं, सड़क की धूल, औद्योगिक उत्सर्जन और प्रतिकूल मौसम परिस्थितियां भी प्रदूषण बढ़ने के प्रमुख कारण हैं। दिवाली से पहले और बिगड़ सकती है हवा वायु गुणवत्ता पूर्व चेतावनी प्रणाली के पूर्वानुमान के अनुसार, 5 नवंबर को दिल्ली की हवा ‘बेहद खराब’ श्रेणी में रहने की संभावना जताई गई है। वहीं, 6 और 7 नवंबर को AQI ‘गंभीर’ श्रेणी में पहुंच सकता है। कम हवा की गति और मौसम संबंधी परिस्थितियों के कारण प्रदूषक कण वातावरण में जमा हो सकते हैं, जिससे वायु गुणवत्ता और खराब होने का खतरा है। लोगों को प्रदूषण से बचने की सलाह खराब वायु गुणवत्ता के दौरान बच्चों, बुजुर्गों और सांस संबंधी बीमारियों से प्रभावित लोगों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। लोगों को अनावश्यक बाहरी गतिविधियां कम करने, अधिक प्रदूषित क्षेत्रों में अच्छी फिटिंग वाले एन95 मास्क का उपयोग करने और स्थानीय वायु गुणवत्ता की जानकारी लेते रहने की सलाह दी जाती है। दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण नियंत्रण के लिए ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) के दूसरे चरण के उपाय भी लागू हैं। जय राष्ट्र न्यूज़

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केंद्र सरकार का बड़ा फैसला: सरकारी आंकड़ों के आधुनिकीकरण के लिए ₹4,371 करोड़ मंजूर, AI और मशीन लर्निंग से बदलेगी डेटा व्यवस्था

नई दिल्ली, 5 नवंबर 2026: केंद्र सरकार ने देश की सरकारी सांख्यिकी और डेटा संग्रह प्रणाली को आधुनिक बनाने के लिए ₹4,371.10 करोड़ की योजना को मंजूरी दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में 4 नवंबर को हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में ‘विकसित भारत सांख्यिकीय परिवर्तन, विश्लेषण एवं अनुसंधान पहल’ (VISTAR) को स्वीकृति दी गई। इसके तहत सरकारी आंकड़ों के संग्रह, सत्यापन और विश्लेषण में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और मशीन लर्निंग (ML) जैसी आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया जाएगा। पांच वर्षों में खर्च होंगे ₹4,371 करोड़ केंद्र सरकार की VISTAR योजना वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक लागू रहेगी। इस योजना का उद्देश्य सरकारी आंकड़ों को अधिक सटीक, समयबद्ध और आसानी से उपलब्ध कराना है। केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि इस पहल से देश की सांख्यिकीय प्रणाली को आधुनिक बनाने और नीतिगत निर्णयों के लिए बेहतर डेटा उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी। यह योजना सरकार के विकसित भारत 2047 के लक्ष्य से भी जुड़ी हुई है। AI और मशीन लर्निंग से होगा सरकारी डेटा का विश्लेषण योजना के तहत सरकारी आंकड़ों को एकत्र करने से लेकर उनके सत्यापन, प्रसंस्करण और विश्लेषण तक आधुनिक डिजिटल तकनीकों का इस्तेमाल किया जाएगा। कृत्रिम बुद्धिमत्ता और मशीन लर्निंग की मदद से बड़े डेटा सेट का तेजी से विश्लेषण करने, संभावित गलतियों की पहचान करने और आंकड़ों की गुणवत्ता सुधारने पर जोर दिया जाएगा। सरकार सांख्यिकीय प्रक्रियाओं का व्यापक डिजिटलीकरण भी करेगी, जिससे आंकड़ों को प्रकाशित करने में लगने वाला समय कम हो सके। 43 की जगह अब 59 राष्ट्रीय सर्वेक्षण होंगे VISTAR योजना के तहत सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) ने 16वें वित्त आयोग की अवधि के दौरान 59 सर्वेक्षण करने का प्रस्ताव रखा है। इससे पहले की अवधि में 43 प्रमुख सर्वेक्षण किए गए थे। नए सर्वेक्षणों से रोजगार, व्यापार, उद्योग और अन्य आर्थिक गतिविधियों से संबंधित आंकड़ों में मौजूद कमियों को दूर करने का प्रयास किया जाएगा। इसके अलावा सरकार सेवा क्षेत्र के उत्पादन और असंगठित उद्यमों की गतिविधियों को बेहतर तरीके से मापने के लिए नए आर्थिक संकेतक विकसित करेगी। आठवीं आर्थिक गणना भी होगी योजना के अंतर्गत देश में आठवीं आर्थिक गणना कराने का प्रावधान किया गया है। इस गणना में कृषि से अलग आर्थिक गतिविधियों में लगे प्रतिष्ठानों और उनके कर्मचारियों की जानकारी जुटाई जाएगी। ग्राम पंचायत और वार्ड स्तर तक आंकड़े एकत्र करने की योजना है। इन आंकड़ों के आधार पर राष्ट्रीय सांख्यिकीय व्यापार रजिस्टर विकसित करने और असंगठित क्षेत्र के आर्थिक योगदान का बेहतर आकलन करने में मदद मिल सकती है। राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को भी मिलेगा सहयोग VISTAR योजना के तीन प्रमुख हिस्से होंगे। इनमें व्यापक सांख्यिकीय संचालन और प्रणाली को मजबूत करना, राज्यों की सांख्यिकीय क्षमता बढ़ाना तथा आर्थिक गणना शामिल हैं। केंद्र सरकार राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को बेहतर डेटा संग्रह और विश्लेषण के लिए वित्तीय एवं तकनीकी सहायता प्रदान करेगी। इससे जिला और स्थानीय स्तर पर अधिक विस्तृत आंकड़े उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है। मोबाइल और ई-कॉमर्स डेटा का भी हो सकता है इस्तेमाल सरकार पारंपरिक सर्वेक्षणों के अलावा वैकल्पिक डेटा स्रोतों का उपयोग बढ़ाने की तैयारी कर रही है। इनमें मोबाइल फोन से जुड़े डेटा, स्कैनर डेटा और ई-कॉमर्स गतिविधियों से प्राप्त जानकारी जैसे स्रोत शामिल हो सकते हैं। इनका इस्तेमाल सांख्यिकीय अनुमान बेहतर बनाने और आर्थिक गतिविधियों में बदलाव को अधिक समयबद्ध तरीके से समझने के लिए किया जाएगा। ऐसे डेटा के उपयोग में गोपनीयता और सुरक्षा मानकों का पालन महत्वपूर्ण रहेगा। सरकारी नीतियों और अर्थव्यवस्था को कैसे होगा फायदा? सटीक और समय पर उपलब्ध आंकड़े सरकार को रोजगार, उद्योग, व्यापार और आर्थिक विकास से जुड़ी नीतियां तैयार करने में मदद कर सकते हैं। VISTAR योजना का उद्देश्य सरकारी विभागों के बीच डेटा के उपयोग को आसान बनाना और नीति निर्माण में विश्वसनीय जानकारी की उपलब्धता बढ़ाना है। हालांकि योजना के वास्तविक परिणाम इसके प्रभावी क्रियान्वयन, डेटा की गुणवत्ता और तकनीकी व्यवस्थाओं पर निर्भर करेंगे। जय राष्ट्र न्यूज़

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दिवाली 2026 पर स्कूलों की छुट्टियों का राज्यवार कैलेंडर जारी, मुंबई में 5 से 23 नवंबर तक अवकाश; जानें कब खुलेंगे स्कूल

नई दिल्ली, 5 नवंबर 2026: दिवाली के त्योहार को लेकर देश के विभिन्न राज्यों में स्कूलों की छुट्टियों का कार्यक्रम सामने आ गया है। महाराष्ट्र, बिहार, राजस्थान, गोवा और अन्य राज्यों में स्कूलों के लिए अलग-अलग अवकाश निर्धारित किए गए हैं। मुंबई में बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) के शिक्षा विभाग ने नगरपालिका और अनुदानित प्राथमिक स्कूलों में 5 से 23 नवंबर तक दिवाली अवकाश घोषित किया है। वहीं, 24 नवंबर को गुरु नानक जयंती की छुट्टी के कारण ये स्कूल 25 नवंबर से दोबारा खुलेंगे। मुंबई में 5 से 23 नवंबर तक स्कूल बंद मुंबई महानगरपालिका के शिक्षा विभाग ने दिवाली अवकाश को लेकर आधिकारिक परिपत्र जारी किया है। इसके अनुसार, नगरपालिका और निजी अनुदानित प्राथमिक विद्यालयों में 5 नवंबर से 23 नवंबर 2026 तक अवकाश रहेगा। इस अवधि में तीन रविवार शामिल हैं। इन्हें छोड़कर कुल 16 दिनों की निर्धारित छुट्टी होगी। 24 नवंबर को गुरु नानक जयंती का सार्वजनिक अवकाश होने के कारण संबंधित स्कूल बुधवार, 25 नवंबर से खुलेंगे। हालांकि यह आदेश मुंबई के सभी निजी और माध्यमिक विद्यालयों पर समान रूप से लागू नहीं होता है। महाराष्ट्र में अलग-अलग जिलों का अलग कैलेंडर महाराष्ट्र में दिवाली की छुट्टियां सभी जिलों में एक समान नहीं हैं। पुणे के मान्यता प्राप्त निजी माध्यमिक विद्यालयों में 5 से 18 नवंबर तक अवकाश निर्धारित है। इन स्कूलों में 19 नवंबर से पढ़ाई शुरू होने की संभावना है। वहीं, नांदेड़, परभणी और हिंगोली जिलों में संबंधित शिक्षा विभागों ने 5 से 23 नवंबर तक छुट्टियां निर्धारित की हैं। कुछ अन्य जिलों में भी स्थानीय शिक्षा अधिकारियों द्वारा अलग-अलग अवकाश कार्यक्रम जारी किए गए हैं। दिवाली 2026: राज्यवार स्कूल छुट्टियों का कैलेंडर उपलब्ध राज्यवार कार्यक्रमों और प्रकाशित अवकाश सूचनाओं के अनुसार प्रमुख राज्यों में दिवाली की छुट्टियों की स्थिति इस प्रकार है: राज्य छुट्टियों की तारीख महाराष्ट्र (मुंबई के BMC प्राथमिक स्कूल) 5 से 23 नवंबर महाराष्ट्र (पुणे के संबंधित माध्यमिक स्कूल) 5 से 18 नवंबर गोवा 2 से 21 नवंबर राजस्थान 4 से 15 नवंबर बिहार 7 से 17 नवंबर छत्तीसगढ़ 6 से 11 नवंबर उत्तर प्रदेश 8, 9 और 11 नवंबर प्रमुख त्योहार अवकाश सिक्किम 9 से 11 नवंबर के आसपास पश्चिम बंगाल 8 और 11 नवंबर प्रमुख त्योहार अवकाश हरियाणा 9 नवंबर सहित अन्य निर्धारित छुट्टियां नोट: यह उपलब्ध राज्यवार और स्थानीय स्कूल कैलेंडरों का संकलन है, पूरे भारत के लिए जारी एक समान सरकारी आदेश नहीं। कुछ तारीखें सांकेतिक हैं और स्कूल तथा जिले के अनुसार बदल सकती हैं। दिवाली 2026 में कब मनाए जाएंगे प्रमुख त्योहार? इस वर्ष दिवाली का मुख्य त्योहार रविवार, 8 नवंबर 2026 को मनाया जाएगा। त्योहारों का प्रमुख कार्यक्रम इस प्रकार है: इन अवसरों पर राज्यों के अनुसार अलग-अलग स्कूल अवकाश लागू होंगे। बिहार और उत्तर प्रदेश में छठ पूजा की भी छुट्टियां बिहार में दिवाली के बाद छठ पूजा का विशेष महत्व है। राज्य के सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों के प्रकाशित कैलेंडर में 7 से 17 नवंबर तक त्योहारों से जुड़ा अवकाश दर्ज है। उत्तर प्रदेश में दिवाली, गोवर्धन पूजा और भाई दूज के अवसर पर निर्धारित छुट्टियां हैं। इसके अलावा छठ पूजा के कारण भी कुछ क्षेत्रों में स्थानीय स्तर पर स्कूलों का कार्यक्रम प्रभावित हो सकता है। छुट्टियों के बाद कब खुलेंगे स्कूल? मुंबई के BMC प्राथमिक स्कूलों में 25 नवंबर से नियमित कक्षाएं शुरू होने का कार्यक्रम है। गोवा में 2 से 21 नवंबर तक अवकाश के बाद सामान्य परिस्थितियों में 23 नवंबर से स्कूल खुलेंगे। पुणे के संबंधित माध्यमिक विद्यालयों में 19 नवंबर से पढ़ाई शुरू होने की संभावना है। अन्य राज्यों में स्कूल खुलने की तारीखें स्थानीय शिक्षा विभाग और संबंधित विद्यालयों के अवकाश कैलेंडर पर निर्भर करेंगी। अभिभावकों और विद्यार्थियों के लिए जरूरी सूचना दिवाली की छुट्टियों को लेकर अभिभावकों को अपने बच्चों के स्कूल से जारी आधिकारिक सूचना की जांच करनी चाहिए। विशेष रूप से निजी विद्यालयों, सीबीएसई और आईसीएसई से संबद्ध स्कूलों में छुट्टियों की अवधि राज्य सरकार के सामान्य कैलेंडर से अलग हो सकती है। इसलिए यात्रा या अन्य कार्यक्रम तय करने से पहले स्कूल की आधिकारिक वेबसाइट, नोटिस या शिक्षा विभाग के निर्देशों की पुष्टि करना जरूरी है। जय राष्ट्र न्यूज़

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