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चक्रवात ‘मुरासु’ ने आंध्र तट पर किया लैंडफॉल, 100–110 किमी/घंटा की रफ्तार से चली हवाएं; हजारों लोग सुरक्षित स्थानों पर भेजे गए

अमरावती/ओंगोल: बंगाल की खाड़ी में बना गंभीर चक्रवाती तूफान ‘मुरासु’ मंगलवार, 3 नवंबर 2026 की सुबह आंध्र प्रदेश के तट से टकरा गया। भारत मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार चक्रवात ने दक्षिण आंध्र प्रदेश के तट को ओंगोल के पास पार किया। लैंडफॉल के दौरान हवाओं की लगातार रफ्तार करीब 100 से 110 किलोमीटर प्रति घंटा रही, जबकि झोंके 120 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंचे। तड़के 3:30 से 5:30 बजे के बीच हुआ लैंडफॉल रॉयटर्स के मुताबिक मुरासु का लैंडफॉल मंगलवार तड़के करीब 3:30 बजे से 5:30 बजे के बीच हुआ। चक्रवात के तट से टकराने के साथ ही आंध्र प्रदेश के कई तटीय जिलों में भारी बारिश, तेज हवाएं और समुद्र में ऊंची लहरें देखने को मिलीं। ओंगोल के पास तट से टकराया चक्रवात IMD ने पहले ही अनुमान लगाया था कि मुरासु नेल्लोर और नरसापुर के बीच, ओंगोल के आसपास आंध्र तट को पार करेगा। 2 नवंबर की शाम तक तूफान ओंगोल से करीब 110 किलोमीटर दक्षिण-पूर्व में था और तेजी से उत्तर-पश्चिम दिशा में बढ़ रहा था। 100–110 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चली हवाएं लैंडफॉल के दौरान चक्रवात की अधिकतम लगातार हवा की गति 100–110 किमी प्रति घंटा दर्ज की गई। कुछ स्थानों पर तेज झोंकों की रफ्तार 120 किमी प्रति घंटा तक पहुंची। इतनी तेज हवाओं के कारण कई जगह पेड़ और बिजली के खंभे उखड़ने की खबरें सामने आई हैं। करीब 30 हजार लोगों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाने की तैयारी चक्रवात के खतरे को देखते हुए आंध्र प्रदेश प्रशासन ने सोमवार से ही निचले और तटीय इलाकों से लोगों को निकालना शुरू कर दिया था। राज्य में करीब 30,000 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की योजना बनाई गई थी। हजारों लोगों को राहत शिविरों और सुरक्षित भवनों में स्थानांतरित किया गया। स्कूल बंद, ट्रेन और उड़ान सेवाएं प्रभावित मुरासु के कारण प्रभावित क्षेत्रों में स्कूलों को बंद किया गया और कई रेल सेवाओं को निलंबित या परिवर्तित किया गया। कुछ उड़ानों पर भी असर पड़ा। प्रशासन ने लोगों से अनावश्यक यात्रा से बचने और तटीय इलाकों से दूर रहने की अपील की। निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा IMD और स्थानीय प्रशासन ने तटीय और निचले इलाकों में जलभराव तथा अचानक बाढ़ की आशंका जताई है। चक्रवात के साथ लगातार भारी बारिश होने के कारण सड़क और रेल संपर्क प्रभावित होने की संभावना बनी हुई है। समुद्र में 1.5 मीटर तक ऊंची लहरों की चेतावनी एसोसिएटेड प्रेस की रिपोर्ट के अनुसार कुछ तटीय हिस्सों में चक्रवाती तूफान के कारण समुद्र का स्तर सामान्य से करीब 1.5 मीटर तक ऊपर उठने का खतरा जताया गया था। इससे निचले तटीय क्षेत्रों में समुद्री पानी घुसने और बाढ़ का जोखिम बढ़ सकता है। पेड़ और बिजली के खंभे उखड़े तेज हवाओं की वजह से आंध्र प्रदेश के कुछ हिस्सों में पेड़ और बिजली के खंभे गिरने की जानकारी सामने आई है। राज्य आपदा प्रबंधन टीमें सड़कों को साफ करने और बिजली आपूर्ति बहाल करने में जुटी हैं। फिलहाल मौत या घायल होने की पुष्टि नहीं चक्रवात के लैंडफॉल के बाद शुरुआती आधिकारिक जानकारी में किसी मौत या घायल होने की पुष्टि नहीं हुई है। हालांकि प्रभावित क्षेत्रों से नुकसान का पूरा आकलन अभी जारी है और स्थिति बदलने पर प्रशासन नए आंकड़े जारी कर सकता है। तमिलनाडु में भी भारी बारिश मुरासु का असर केवल आंध्र प्रदेश तक सीमित नहीं रहा। पड़ोसी तमिलनाडु के उत्तरी हिस्सों में भी भारी बारिश और तेज हवाओं का असर देखने को मिला। IMD ने पहले ही आंध्र प्रदेश और उससे सटे उत्तरी तमिलनाडु के तट के लिए चक्रवात चेतावनी जारी की थी। एक सप्ताह में दूसरा बड़ा चक्रवात मुरासु आंध्र प्रदेश के तट पर एक सप्ताह के भीतर आने वाला दूसरा चक्रवाती तूफान है। इससे पहले चक्रवात ‘अरनब’ ने पिछले सप्ताह राज्य के कई हिस्सों में भारी बारिश और नुकसान पहुंचाया था। उस तूफान के कारण लोगों की मौत, मकानों और फसलों को नुकसान तथा बड़े पैमाने पर जलभराव की स्थिति बनी थी। कमजोर पड़ने की संभावना तट पार करने के बाद मुरासु के धीरे-धीरे कमजोर पड़ने की संभावना है। हालांकि इसके अवशेषों के कारण आंध्र प्रदेश और आसपास के राज्यों में अगले कई घंटों तक भारी बारिश जारी रह सकती है। प्रशासन हाई अलर्ट पर राज्य सरकार ने तटीय जिलों में आपदा प्रबंधन, पुलिस, स्वास्थ्य और बिजली विभाग की टीमों को हाई अलर्ट पर रखा है। लोगों से प्रशासन की चेतावनियों का पालन करने, समुद्र के पास न जाने और बारिश के दौरान निचले इलाकों से दूरी बनाए रखने की अपील की गई है। स्रोत – भारत मौसम विज्ञान विभाग, रॉयटर्स, एसोसिएटेड प्रेस जय राष्ट्र न्यूज़

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विशाखापत्तनम में HPCL रिफाइनरी में भीषण आग, धमाके जैसी आवाजों से मचा हड़कंप; कोई हताहत नहीं

विशाखापत्तनम: आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम स्थित हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (HPCL) की रिफाइनरी में 2 नवंबर 2026 की रात भीषण आग लग गई। आग के साथ ऊंची लपटें और घना काला धुआं उठता दिखाई दिया, जिससे आसपास के मलकापुरम और श्रीहरिपुरम इलाकों में अफरा-तफरी मच गई। राहत की बात यह रही कि इस घटना में किसी के घायल होने या मौत की सूचना नहीं है। रात करीब 10 बजे लगी आग HPCL के अनुसार आग रात करीब 10 बजे रिफाइनरी परिसर में लगी। कंपनी की अग्निशमन और सुरक्षा टीम ने तुरंत आपातकालीन प्रक्रिया शुरू कर दी और आग को सीमित क्षेत्र में रोकने की कोशिश की। सल्फर यूनिट के पिच टैंक में लगी थी आग प्रारंभिक जांच के अनुसार आग रिफाइनरी की सल्फर यूनिट के पिच इंटरमीडिएट स्टोरेज टैंक में लगी थी। यह पदार्थ बिटुमेन निर्माण की प्रक्रिया से जुड़ा एक मध्यवर्ती उत्पाद बताया गया है। आग इसी टैंक क्षेत्र तक सीमित रही और रिफाइनरी की दूसरी इकाइयों तक नहीं फैली। क्या वास्तव में हुआ था धमाका? घटना के बाद कई स्थानीय लोगों और मीडिया रिपोर्टों में धमाके जैसी तेज आवाज सुनाई देने की बात सामने आई। मलकापुरम पुलिस के एक अधिकारी ने भी इंडियन एक्सप्रेस से कहा कि टैंक में विस्फोट हुआ था। दूसरी ओर, शुरुआती HPCL सूत्रों ने बड़े टैंक विस्फोट की संभावना पर संदेह जताया था। इसलिए धमाके की प्रकृति और वास्तविक कारण की अंतिम पुष्टि तकनीकी जांच के बाद ही होगी। छह दमकल गाड़ियों ने संभाला मोर्चा आग पर काबू पाने के लिए छह दमकल गाड़ियों को लगाया गया। पुलिस के अनुसार आग करीब एक घंटे के भीतर नियंत्रित कर ली गई। आसमान में दिखीं ऊंची लपटें घटना के वीडियो में रिफाइनरी परिसर से ऊंची लपटें और घना धुआं उठता दिखाई दिया। आसपास की सड़कों से गुजर रहे लोगों ने वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर साझा किए, जिसके बाद घटना के दृश्य तेजी से वायरल हो गए। आसपास के इलाकों में मची हलचल मलकापुरम और श्रीहरिपुरम समेत आसपास के औद्योगिक इलाकों में घटना से लोगों में चिंता फैल गई। विशाल लपटें देखकर लोगों को शुरुआत में बड़े हादसे की आशंका हुई, लेकिन अधिकारियों ने बाद में स्थिति नियंत्रण में होने की जानकारी दी। कोई घायल या मौत नहीं HPCL और पुलिस दोनों ने पुष्टि की है कि इस घटना में किसी की मौत या घायल होने की सूचना नहीं है। रिफाइनरी की अन्य इकाइयां सुरक्षित बताई गई हैं और कंपनी के अनुसार संचालन भी सामान्य रूप से जारी है। आग एक ही टैंक तक सीमित रही HPCL ने अपने बयान में कहा कि आग को पिच टैंक क्षेत्र तक सीमित कर दिया गया था। तेजी से की गई कार्रवाई के कारण आग दूसरे महत्वपूर्ण हिस्सों तक नहीं पहुंची, जिससे बड़े औद्योगिक हादसे की आशंका टल गई। आग लगने का कारण अभी साफ नहीं अभी तक आग लगने के सटीक कारण की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। तकनीकी टीम घटना की परिस्थितियों की जांच कर रही है। टैंक में दबाव, उपकरण की खराबी या किसी अन्य तकनीकी कारण की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही होगी। HPCL की बड़ी रिफाइनरी है विशाखापत्तनम इकाई विशाखापत्तनम की HPCL रिफाइनरी देश की महत्वपूर्ण पेट्रोलियम प्रसंस्करण इकाइयों में शामिल है। ऐसे संयंत्रों में पेट्रोलियम और सल्फर से जुड़े उत्पादों के कारण अग्नि सुरक्षा और आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणाली बेहद महत्वपूर्ण होती है। जांच के बाद सामने आएगा वास्तविक कारण फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि आग पर नियंत्रण पा लिया गया और कोई जनहानि नहीं हुई। अब तकनीकी जांच से यह स्पष्ट होगा कि आग कैसे लगी और क्या प्रत्यक्षदर्शियों द्वारा सुनी गई धमाके की आवाज टैंक विस्फोट से जुड़ी थी या किसी अन्य कारण से। स्रोत – HPCL, विशाखापत्तनम पुलिस, इंडियन एक्सप्रेस, टाइम्स ऑफ इंडिया, द न्यूज मिनट जय राष्ट्र न्यूज़

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मणिकर्ण गुरुद्वारे के पास बड़ा हादसा टला, पार्वती नदी में बहे पंजाब के परिवार के तीन सदस्य; तीनों सुरक्षित बचाए गए

कुल्लू: हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले के मणिकर्ण क्षेत्र में 9 जून 2026 को बड़ा हादसा टल गया। पंजाब से आए एक ही परिवार के तीन सदस्य पार्वती नदी के तेज बहाव में बह गए। घटना उस समय हुई जब परिवार मणिकर्ण साहिब गुरुद्वारे के दर्शन करने के बाद नदी किनारे फोटो खिंचवा रहा था। स्थानीय लोगों और बचाव दल की तत्परता से तीनों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। मणिकर्ण साहिब के दर्शन करने आया था परिवार पुलिस के अनुसार पंजाब से आया यह परिवार धार्मिक यात्रा पर मणिकर्ण पहुंचा था। गुरुद्वारा मणिकर्ण साहिब में दर्शन करने के बाद परिवार पार्वती नदी के किनारे चला गया। यहां तीन सदस्य नदी के काफी करीब खड़े होकर फोटो और सेल्फी लेने लगे। इसी दौरान उनका संतुलन बिगड़ गया और वे तेज बहाव की चपेट में आ गए। तीनों अचानक नदी में बहे पार्वती नदी में पानी का बहाव काफी तेज था। तीनों लोगों के नदी में गिरते ही मौके पर मौजूद लोगों में हड़कंप मच गया। स्थानीय लोगों ने तुरंत शोर मचाकर आसपास के लोगों को बुलाया और बचाव की कोशिश शुरू की। दो लोग खुद किनारे तक पहुंचे रिपोर्टों के मुताबिक तीन में से दो सदस्य किसी तरह खुद किनारे की ओर पहुंचने में सफल रहे। वहां मौजूद स्थानीय लोगों ने उन्हें खींचकर सुरक्षित बाहर निकाला। तीसरा सदस्य तेज बहाव में फंस गया था, जिसे बाद में मौके पर पहुंची बचाव टीम ने सुरक्षित निकाला। तीनों की हालत स्थिर पुलिस ने बताया कि बचाव के बाद तीनों पर्यटकों की हालत स्थिर थी। किसी की मौत की सूचना नहीं मिली। इस तरह स्थानीय लोगों और बचाव दल की तेजी से एक बड़ा हादसा टल गया। सेल्फी और फोटो का जुनून पड़ा भारी घटना ने एक बार फिर पहाड़ी पर्यटन स्थलों पर नदी और झरनों के पास फोटो या सेल्फी लेने के दौरान बरती जाने वाली लापरवाही पर सवाल खड़े किए हैं। पार्वती नदी अपने तेज और अनिश्चित बहाव के लिए जानी जाती है। खासकर बारिश और बर्फ पिघलने के मौसम में पानी का स्तर तेजी से बदल सकता है। पुलिस और प्रशासन मौके पर पहुंचे घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस और प्रशासन की टीमें भी मौके पर पहुंचीं। अधिकारियों ने पर्यटकों से नदी, नालों और तेज बहाव वाले जलस्रोतों के बेहद करीब न जाने की अपील की। पर्यटकों के लिए जारी की गई एडवाइजरी घटना के बाद पुलिस ने पर्यटकों के लिए सुरक्षा एडवाइजरी जारी की। प्रशासन ने कहा कि फोटो और वीडियो बनाने के लिए किसी भी प्रकार का जोखिम न लें और नदी किनारे लगाए गए चेतावनी संकेतों का पालन करें। मणिकर्ण में बड़ी संख्या में आते हैं श्रद्धालु मणिकर्ण कुल्लू जिले की पार्वती घाटी में स्थित प्रमुख धार्मिक और पर्यटन स्थल है। यहां गुरुद्वारा मणिकर्ण साहिब और गर्म पानी के प्राकृतिक स्रोतों के कारण बड़ी संख्या में पर्यटक और श्रद्धालु आते हैं। पार्वती नदी के किनारे पहले भी हो चुके हादसे पार्वती घाटी में पहले भी नदी के तेज बहाव की वजह से हादसे हो चुके हैं। प्रशासन समय-समय पर पर्यटकों को नदी से सुरक्षित दूरी बनाए रखने की चेतावनी देता रहा है। ऐसे इलाकों में पानी शांत दिखाई देने के बावजूद बहाव अंदर से काफी तेज हो सकता है। स्थानीय लोगों की तत्परता से बची जान इस घटना में स्थानीय लोगों की भूमिका अहम रही। नदी में गिरते ही आसपास मौजूद लोग तुरंत मदद के लिए आगे आए, जिससे शुरुआती मिनटों में ही दो लोगों को बचाया जा सका। इसके बाद बचाव दल ने तीसरे सदस्य को भी सुरक्षित बाहर निकाल लिया। पर्यटकों से सावधानी बरतने की अपील प्रशासन ने पर्यटकों से खास तौर पर अपील की है कि वे सोशल मीडिया के लिए फोटो या वीडियो बनाते समय अपनी सुरक्षा से समझौता न करें। नदी, झरने, पहाड़ी किनारों और तेज बहाव वाली जगहों पर थोड़ी सी लापरवाही भी जानलेवा साबित हो सकती है। स्रोत – पीटीआई, कुल्लू पुलिस, दैनिक जागरण, टाइम्स ऑफ इंडिया जय राष्ट्र न्यूज़

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जन्मदिन पर मन्नत के बाहर शाहरुख खान का सिग्नेचर पोज, फैंस हुए खुश; 61वें बर्थडे पर उमड़ा प्रशंसकों का सैलाब

मुंबई: बॉलीवुड सुपरस्टार शाहरुख खान ने 2 नवंबर 2026 को अपना 61वां जन्मदिन प्रशंसकों के साथ खास अंदाज में मनाया। हर साल की तरह इस बार भी मुंबई स्थित उनके बंगले मन्नत के बाहर हजारों फैंस जमा हुए। शाम को शाहरुख खान प्रशंसकों के सामने आए और अपना मशहूर दोनों बाहें फैलाने वाला सिग्नेचर पोज देकर फैंस का दिल जीत लिया। शाहरुख को देखते ही गूंज उठा मन्नत के बाहर का इलाका शाहरुख खान के बाहर आते ही प्रशंसकों ने जोरदार तरीके से उनका स्वागत किया। लोग उनका नाम पुकारते दिखाई दिए और बड़ी संख्या में मोबाइल फोन से वीडियो बनाते रहे। शाहरुख ने भी हाथ हिलाकर, फ्लाइंग किस देकर और हाथ जोड़कर प्रशंसकों का अभिवादन किया। इसके बाद उन्होंने अपना मशहूर बाहें फैलाने वाला पोज दिया, जिस पर भीड़ ने जोरदार प्रतिक्रिया दी। सफेद टी-शर्ट में दिखे ‘किंग खान’ शाहरुख खान इस खास मौके पर बेहद साधारण अंदाज में नजर आए। उन्होंने सफेद टी-शर्ट और हल्के रंग की पैंट पहनी थी। कुछ तस्वीरों और वीडियो में वह टोपी और चश्मे में भी नजर आए। अपने जन्मदिन पर उन्होंने प्रशंसकों के साथ ज्यादा देर बातचीत नहीं की, लेकिन कुछ मिनट की उनकी मौजूदगी ही फैंस के लिए खास बन गई। कई घंटे पहले से पहुंचने लगे थे प्रशंसक शाहरुख खान की एक झलक पाने के लिए देश के अलग-अलग हिस्सों से फैंस मन्नत के बाहर पहुंचे थे। कुछ प्रशंसक तो एक दिन पहले शाम से ही इंतजार कर रहे थे। हाथों में पोस्टर, तस्वीरें और जन्मदिन के संदेश लिए लोगों ने मन्नत के बाहर उत्सव जैसा माहौल बना दिया। मन्नत में चल रहा है नवीनीकरण इस बार शाहरुख खान और उनका परिवार फिलहाल मन्नत में नियमित रूप से नहीं रह रहा है, क्योंकि बंगले में नवीनीकरण का काम चल रहा है। इसके बावजूद शाहरुख जन्मदिन पर विशेष रूप से मन्नत पहुंचे और प्रशंसकों को निराश नहीं किया। पिछले कुछ सालों में सुरक्षा बनी थी बड़ा मुद्दा शाहरुख खान के जन्मदिन पर हर साल मन्नत के बाहर भारी भीड़ जुटती है। पिछले कुछ वर्षों में सुरक्षा और भीड़ नियंत्रण को लेकर उनकी पारंपरिक मुलाकात सीमित की गई थी। इस बार भी सुरक्षा के कड़े इंतजाम रहे और उनकी मौजूदगी अपेक्षाकृत कम समय के लिए रही। सोशल मीडिया पर वायरल हुआ सिग्नेचर पोज शाहरुख के बाहर आते ही उनके वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल होने लगीं। खासकर बाहें फैलाकर किया गया उनका सिग्नेचर पोज प्रशंसकों के बीच सबसे ज्यादा चर्चा में रहा। यह पोज वर्षों से उनकी फिल्मों और सार्वजनिक कार्यक्रमों की पहचान बन चुका है। ‘किंग’ का प्रचार भी हुआ शुरू जन्मदिन के मौके पर शाहरुख खान की आने वाली फिल्म ‘किंग’ से जुड़ा प्रचार भी शुरू हुआ। मन्नत के बाहर बड़ी स्क्रीन पर फिल्म से जुड़े पोस्टर दिखाए गए। इसके साथ फिल्म का पहला गाना ‘तू मिल जाए’ भी जारी किया गया, जिसमें शाहरुख खान के साथ दीपिका पादुकोण नजर आ रही हैं। दिसंबर में रिलीज होगी ‘किंग’ शाहरुख खान की फिल्म ‘किंग’ को 24 दिसंबर 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज करने की योजना है। यह उनकी 2023 में आई ‘डंकी’ के बाद बड़े पर्दे पर प्रमुख वापसी होगी। फिल्म का निर्देशन सिद्धार्थ आनंद कर रहे हैं। फैंस के साथ रिश्ता फिर बना चर्चा का विषय शाहरुख खान का अपने प्रशंसकों के साथ रिश्ता लंबे समय से उनकी लोकप्रियता का अहम हिस्सा रहा है। हर साल जन्मदिन और ईद जैसे मौकों पर मन्नत के बाहर फैंस का जुटना इसी जुड़ाव का उदाहरण माना जाता है। इस बार उनका सिग्नेचर पोज एक बार फिर प्रशंसकों के लिए जन्मदिन का सबसे यादगार पल बन गया। स्रोत – हिंदुस्तान टाइम्स, इंडिया टुडे, द प्रिंट, फिल्मफेयर, आउटलुक जय राष्ट्र न्यूज़

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LA 2028 से पहले भारतीय हॉकी टीम में बड़े बदलाव के संकेत, कोच Craig Fulton ने दिए पुनर्गठन के संकेत

जालंधर: भारतीय पुरुष हॉकी टीम में आने वाले महीनों में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। मुख्य कोच Craig Fulton ने संकेत दिया है कि 2027 की प्रो लीग के लिए नई टीम चुनी जाएगी और इसी के साथ 2027-28 ओलंपिक चक्र की शुरुआत होगी। टीम प्रबंधन का लक्ष्य लॉस एंजिलिस ओलंपिक 2028 के लिए मजबूत और संतुलित टीम तैयार करना है। प्रो लीग के लिए चुनी जाएगी नई टीम Craig Fulton ने बताया कि अगले साल होने वाली प्रो लीग से पहले एक नई टीम का चयन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि खिलाड़ियों के अपने-अपने फ्रेंचाइजी कार्यक्रमों में लौटने के कारण प्रशिक्षण के लिए बहुत ज्यादा समय नहीं मिलेगा, इसलिए चयन प्रक्रिया और उपलब्ध अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों का खास महत्व होगा। 2027-28 चक्र की शुरुआत नए स्क्वॉड से फुल्टन के मुताबिक प्रो लीग के लिए चुनी जाने वाली नई टीम ही आगे चलकर 2027-28 चक्र की आधार टीम बनेगी। इसका मतलब है कि टीम प्रबंधन अब केवल अगले टूर्नामेंट पर नहीं, बल्कि सीधे LA 2028 ओलंपिक को ध्यान में रखकर खिलाड़ियों का चयन और विकास करेगा। फरवरी में इन बड़ी टीमों से भिड़ेगा भारत भारत को प्रो लीग के घरेलू चरण में: जैसी मजबूत टीमों का सामना करना है। ये मुकाबले भारत के नए खिलाड़ियों और संभावित कोर ग्रुप के लिए बड़ी परीक्षा साबित हो सकते हैं। न्यूजीलैंड दौरे से शुरू होगा बदलाव का दौर एशियन चैंपियंस ट्रॉफी के बाद भारतीय टीम इस महीने न्यूजीलैंड का दौरा करेगी। भारत वहां 19, 21 और 22 नवंबर को ऑकलैंड में तीन टेस्ट मैच खेलेगा। यह दौरा भारत और न्यूजीलैंड के बीच हॉकी संबंधों के 100 साल पूरे होने के अवसर पर आयोजित किया जा रहा है। न्यूजीलैंड दौरे के लिए भी बदली हुई टीम संभव फुल्टन ने कहा कि न्यूजीलैंड दौरे के लिए टीम अभी अंतिम रूप से तय नहीं हुई है। संकेत हैं कि इस दौरे में कई नए और युवा खिलाड़ियों को मौका दिया जा सकता है, जबकि कुछ वरिष्ठ खिलाड़ियों को आराम दिया जा सकता है। नए कोर ग्रुप पर होगा फैसला न्यूजीलैंड दौरे के बाद कोचिंग स्टाफ खिलाड़ियों के प्रदर्शन का आकलन करेगा। इसके बाद एक नया कोर ग्रुप और नई टीम तय की जाएगी, जो आगे प्रो लीग और LA 2028 की तैयारियों में अहम भूमिका निभाएगी। विश्व कप में आठवें स्थान पर रहा था भारत भारत का 2026 विश्व कप अभियान उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा था और टीम आठवें स्थान पर रही। फुल्टन ने माना कि बड़े मुकाबलों में टीम जरूरत के समय पर्याप्त गोल नहीं कर सकी और कुछ आसान गोल भी गंवाए। इसी वजह से आक्रमण और रक्षा दोनों में सुधार की जरूरत महसूस की जा रही है। एशियन गेम्स में शानदार वापसी विश्व कप के निराशाजनक प्रदर्शन के बाद भारतीय टीम ने एशियन गेम्स में शानदार वापसी की। भारत ने स्वर्ण पदक जीतकर अपना खिताब बरकरार रखा और इसके साथ ही LA 2028 ओलंपिक के लिए सीधा क्वालिफिकेशन भी हासिल कर लिया। यूरोपीय टीमों के खिलाफ सुधार की जरूरत फुल्टन का मानना है कि एशियाई टीमों के खिलाफ भारत का प्रदर्शन मजबूत रहता है, लेकिन यूरोप की शीर्ष और उच्च रैंकिंग वाली टीमों के खिलाफ अधिक निरंतरता की जरूरत है। उन्होंने कहा कि बड़े मुकाबलों में मानसिकता, दबाव से निपटने की क्षमता, गोल करने और गोल बचाने—चारों क्षेत्रों में सुधार जरूरी है। किसी एक खिलाड़ी पर नहीं, पूरी टीम पर फोकस कोच ने यह भी स्पष्ट किया कि फिलहाल बदलाव किसी एक खिलाड़ी को हटाने या चुनने तक सीमित नहीं हैं। टीम प्रबंधन खिलाड़ियों की मानसिकता, प्रदर्शन में निरंतरता, दबाव में निर्णय और बड़े मुकाबलों में प्रभाव को देखते हुए नए कोर ग्रुप का चयन करेगा। 2027 में 30 से 40 मैच खेलने की योजना फुल्टन चाहते हैं कि भारतीय टीम 2027 में करीब 30 से 40 अंतरराष्ट्रीय मुकाबले खेले। उनका मानना है कि LA 2028 से पहले ज्यादा से ज्यादा प्रतिस्पर्धी मैच खेलने से नए खिलाड़ियों को अनुभव मिलेगा और टीम को स्थायी संयोजन खोजने में मदद होगी। गोलकीपिंग में भी नए विकल्प तैयार PR Sreejesh के संन्यास के बाद गोलकीपिंग विभाग में भी नए विकल्प तैयार किए जा रहे हैं। Suraj Karkera, Krishan Bahadur Pathak और HS Mohith के साथ Prince Deep Singh और Pawan जैसे खिलाड़ियों को भी भविष्य के विकल्प के रूप में विकसित किया जा रहा है। पहले भी बदल चुकी है टीम फुल्टन ने कहा कि भारतीय टीम में बदलाव पहले से चल रहे हैं। उनके मुताबिक 2023 चेन्नई एशियन चैंपियंस ट्रॉफी और 2024 हुलुनबुइर टूर्नामेंट खेलने वाली टीम एक जैसी नहीं थी और पिछली टीम की तुलना में करीब 9 खिलाड़ी बदल चुके हैं। LA 2028 के लिए लंबी रणनीति भारत पहले ही ओलंपिक के लिए क्वालिफाई कर चुका है, इसलिए अब टीम के पास अगले लगभग दो वर्षों में खिलाड़ियों को आजमाने और सही संयोजन तैयार करने का समय है। प्रो लीग, न्यूजीलैंड दौरा और 2027 के अंतरराष्ट्रीय मुकाबले इसी लंबी तैयारी का हिस्सा होंगे। नए चेहरों के लिए बड़ा मौका टीम में संभावित बड़े बदलाव युवा खिलाड़ियों के लिए महत्वपूर्ण अवसर साबित हो सकते हैं। अच्छा प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ी सीधे 2028 ओलंपिक योजना का हिस्सा बन सकते हैं, जबकि मौजूदा वरिष्ठ खिलाड़ियों के लिए भी अपनी जगह बनाए रखने के लिए लगातार अच्छा प्रदर्शन करना जरूरी होगा। स्रोत – PTI, Hockey India, India Today, ThePrint, Outlook, Revsportz जय राष्ट्र न्यूज़

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₹1,200 करोड़ के कथित SD Pay घोटाले का खुलासा, 15 लाख उपयोगकर्ताओं से जुड़ा मामला

अहमदाबाद: गुजरात से संचालित डिजिटल वॉलेट ऐप SD Pay और उससे जुड़े कथित बहुस्तरीय विपणन नेटवर्क की जांच में बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। पुलिस जांच के मुताबिक इस नेटवर्क के जरिए ₹1,200 करोड़ से ज्यादा की रकम निवेश के रूप में जुटाई गई और ऐप से करीब 15 लाख उपयोगकर्ता जुड़े। 6.52 लाख बैंक खातों से ₹1,211 करोड़ का निवेश अमरेली पुलिस की विशेष जांच टीम के मुताबिक SD Pay से जुड़े 6,52,831 बैंक खातों से करीब ₹1,211 करोड़ का निवेश बैंकिंग चैनल के जरिए किया गया। पुलिस का कहना है कि यह आंकड़ा केवल दर्ज बैंक लेनदेन का है। आरोप है कि नेटवर्क में नकद लेनदेन भी हुआ, जिसकी पूरी मात्रा का अभी आकलन किया जा रहा है। 15 लाख लोगों तक पहुंचा नेटवर्क SD Pay या Apna Pay नाम से चलने वाला ऐप 2024 में शुरू हुआ था। शुरुआती चरण में इसे मोबाइल रिचार्ज और बिल भुगतान के डिजिटल मंच के रूप में पेश किया गया। पुलिस जांच में दावा किया गया है कि आकर्षक रिटर्न और रेफरल योजनाओं के जरिए ऐप तेजी से फैला और करीब 15 लाख लोगों ने इसे डाउनलोड या इस्तेमाल किया। रोज 0.15% से 0.30% तक रिटर्न का आरोप जांच एजेंसियों का आरोप है कि निवेशकों को निवेश राशि के आधार पर रोजाना 0.15% से 0.30% तक रिटर्न देने का वादा किया जाता था। पुलिस के मुताबिक कंपनियों के पास ऐसा कोई पर्याप्त उत्पादन, सेवा कारोबार या अन्य वैध आय स्रोत नहीं मिला जिससे इतने बड़े रिटर्न लंबे समय तक दिए जा सकें। आरोप है कि नए निवेशकों से आने वाली रकम से पुराने निवेशकों को भुगतान किया जा रहा था। रेफरल कैशबैक से बढ़ा नेटवर्क आरोप है कि SD Pay में लोगों को जोड़ने के लिए बहुस्तरीय रेफरल प्रणाली चलाई गई। पुलिस के अनुसार पहले स्तर पर रेफरल से 30% तक भुगतान और नीचे के कुछ स्तरों पर करीब 3% तक भुगतान की व्यवस्था बताई जाती थी। इससे निवेशक खुद भी नए लोगों को ऐप से जोड़ने लगे। ₹1,000 से ₹1 करोड़ कमाने का मामला भी जांच में पुलिस जांच में एक ऐसा मामला भी सामने आया है जिसमें सूरत के एक व्यक्ति ने कथित तौर पर ₹1,000 से शुरुआत की और रेफरल नेटवर्क के जरिए करीब ₹1 करोड़ तक कमाया। जांचकर्ताओं के अनुसार उसके नीचे करीब 1.6 लाख निवेशकों की श्रृंखला बनी। पुलिस अब यह समझने की कोशिश कर रही है कि नेटवर्क में कौन केवल निवेशक था और कौन सक्रिय एजेंट या प्रचारक की भूमिका में था। मार्च 2026 से भुगतान रुकने लगा रिपोर्ट के मुताबिक मार्च 2026 के आसपास निवेशकों को मिलने वाला दैनिक रिटर्न रुकने लगा। इसके बाद कुछ निवेशकों को नकद वापसी के बजाय कंपनी के कथित शेयर देने की बात कही गई और भविष्य में आईपीओ आने का दावा किया गया। पुलिस अब इन दावों और दस्तावेजों की भी जांच कर रही है। 18 FIR दर्ज, एक दर्जन आरोपी गिरफ्तार अब तक SD Pay नेटवर्क से जुड़े मामलों में 18 FIR दर्ज होने की जानकारी है। इनमें से 13 गुजरात, दो राजस्थान और अन्य मामले महाराष्ट्र, तमिलनाडु तथा दादरा और नगर हवेली में दर्ज बताए गए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक करीब एक दर्जन आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। 95 प्रमुख एजेंटों की पहचान जांच एजेंसियों ने करीब 95 प्रमुख एजेंट या मार्केटिंग लीडर चिह्नित किए हैं। इनका नेटवर्क गुजरात के अलावा राजस्थान, महाराष्ट्र, दिल्ली, मध्य प्रदेश और चंडीगढ़ तक फैला होने का दावा किया गया है। 876 लोगों ने ₹37.42 करोड़ के नुकसान की शिकायत की अक्टूबर की शुरुआत तक 573 लोगों ने करीब ₹24.42 करोड़ के नुकसान की शिकायत की थी। 31 अक्टूबर तक यह संख्या बढ़कर 876 शिकायतकर्ताओं तक पहुंच गई और उनके द्वारा बताए गए कुल नुकसान की रकम ₹37.42 करोड़ हो गई। राष्ट्रीय साइबर पोर्टल पर भी सैकड़ों शिकायतें राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर भी SD Pay से जुड़े बैंक खातों के खिलाफ बड़ी संख्या में शिकायतें दर्ज हुई हैं। पुलिस के मुताबिक छह कंपनियों के बैंक खातों से संबंधित 831 शिकायतें और आरोपियों द्वारा संचालित खातों से जुड़ी 15 अन्य शिकायतें दर्ज हैं। 38 कंपनी खाते और 72 निदेशकों के खाते जांच के दायरे में पुलिस ने SD Pay से जुड़ी छह कंपनियों के 38 बैंक खातों और 16 निदेशकों द्वारा संचालित 72 खातों की पहचान की है। जांच एजेंसियां इन खातों में हुए लेनदेन और धन के अंतिम इस्तेमाल का पता लगाने की कोशिश कर रही हैं। अब तक केवल ₹1.86 करोड़ की जब्ती इतने बड़े कथित घोटाले के मुकाबले अब तक जब्त रकम काफी कम है। रिपोर्ट के मुताबिक जांच एजेंसियों ने फिलहाल करीब ₹1.86 करोड़ की संपत्ति या रकम जब्त की है। अब आरोपियों की अचल संपत्तियों की पहचान कर उन्हें कानूनी प्रक्रिया के तहत संलग्न करने की तैयारी की जा रही है। शिक्षक, किसान, बैंककर्मी भी बताए गए पीड़ित पीड़ितों में शिक्षकों, किसानों, बैंककर्मियों और अन्य पेशों से जुड़े लोगों के होने की जानकारी सामने आई है। एक मामले में वडोदरा की एक शिक्षिका ने कथित तौर पर अपना फ्लैट बेचकर ₹9.5 लाख निवेश किए थे। ऐप में उनकी राशि बढ़कर बड़ी दिखाई देने लगी, लेकिन बाद में निकासी बंद हो गई। पुलिस जांच अभी जारी यह ध्यान रखना जरूरी है कि ₹1,200 करोड़ से अधिक की रकम, बहुस्तरीय विपणन मॉडल और अन्य अनियमितताओं से जुड़े दावे फिलहाल पुलिस जांच का हिस्सा हैं। आरोपियों की अंतिम आपराधिक जिम्मेदारी अदालत में साक्ष्यों के परीक्षण और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही तय होगी। स्रोत – अमरेली पुलिस विशेष जांच टीम, द इंडियन एक्सप्रेस जय राष्ट्र न्यूज़

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₹634 करोड़ कथित नौकरी घोटाला: सुप्रीम कोर्ट ने K. N. Nehru के खिलाफ FIR और जांच पर रोक से किया इनकार

नई दिल्ली/चेन्नई: तमिलनाडु के पूर्व मंत्री और डीएमके नेता K. N. Nehru को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। शीर्ष अदालत ने सोमवार, 2 नवंबर 2026, को उनकी उस याचिका को खारिज कर दिया जिसमें कथित ₹634 करोड़ के नौकरी के बदले पैसे मामले में मद्रास हाईकोर्ट के FIR दर्ज करने और जांच आगे बढ़ाने वाले आदेश को चुनौती दी गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने हस्तक्षेप से किया इनकार न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और शील नागू की पीठ ने कहा कि मद्रास हाईकोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप करने का कोई आधार नहीं बनता। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि हाईकोर्ट की टिप्पणियां केवल उस मामले के निपटारे के संदर्भ में मानी जाएंगी और आगे जांच या मुकदमे में नेहरू को अपना बचाव रखने का पूरा अधिकार रहेगा। 2,538 पदों की भर्ती से जुड़ा है मामला मामला तमिलनाडु के नगर प्रशासन एवं जल आपूर्ति विभाग में 2,538 पदों की भर्ती में कथित अनियमितताओं से जुड़ा है। आरोप है कि विभिन्न पदों पर नौकरी दिलाने के बदले बड़े पैमाने पर रिश्वत ली गई और इस कथित नेटवर्क का कुल आकार करीब ₹634 करोड़ था। ये आरोप अभी जांच और न्यायिक प्रक्रिया के अधीन हैं। ED ने पुलिस को भेजी थी जानकारी प्रवर्तन निदेशालय ने अक्टूबर 2025 में तमिलनाडु पुलिस को कथित नौकरी घोटाले से संबंधित सामग्री भेजी थी। ईडी ने दावा किया था कि तलाशी और डिजिटल उपकरणों की जांच के दौरान व्हाट्सऐप चैट, दस्तावेज और अन्य इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड मिले, जिनसे कथित रिश्वत और पदस्थापन नेटवर्क का संकेत मिलता है। पहले कार्रवाई न होने पर पहुंचा मामला हाईकोर्ट ईडी की ओर से सामग्री भेजे जाने के बाद तत्काल FIR दर्ज नहीं हुई थी। इसके बाद एआईएडीएमके सांसद I. S. Inbadurai समेत याचिकाकर्ताओं ने मद्रास हाईकोर्ट का रुख किया। फरवरी 2026 में हाईकोर्ट ने भ्रष्टाचार निरोधक निदेशालय यानी DVAC को FIR दर्ज कर मामले की जांच का निर्देश दिया। जून में दर्ज हुई FIR हाईकोर्ट के निर्देश के बाद 5 जून 2026 को DVAC ने मामला दर्ज किया। बाद में K. N. Nehru ने हाईकोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर करते हुए कहा कि उनके खिलाफ आदेश पारित करने से पहले उन्हें सुनवाई का उचित अवसर नहीं दिया गया। 26 अक्टूबर को हाईकोर्ट ने भी याचिका खारिज की मद्रास हाईकोर्ट ने 26 अक्टूबर 2026 को नेहरू की पुनर्विचार याचिका खारिज कर दी थी। हाईकोर्ट ने कहा था कि FIR दर्ज करना किसी व्यक्ति को दोषी घोषित करना नहीं है, बल्कि जांच शुरू करने का प्रारंभिक चरण है। अदालत ने यह भी कहा कि आरोपों की सच्चाई जांच के दौरान ही सामने आएगी। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट पहुंचे K. N. Nehru हाईकोर्ट से राहत नहीं मिलने के बाद नेहरू ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। उनकी ओर से दलील दी गई कि जिस मूल मामले में ईडी को सामग्री मिली थी, वह बाद में समाप्त हो चुका था, इसलिए उस दौरान एकत्र किए गए दस्तावेजों के आधार पर नई आपराधिक कार्रवाई आगे बढ़ाना उचित नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने यह दलील स्वीकार नहीं की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा? शीर्ष अदालत ने कहा कि इस स्तर पर हाईकोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप की जरूरत नहीं है। साथ ही अदालत ने यह भी सुनिश्चित किया कि हाईकोर्ट की टिप्पणियों को नेहरू के खिलाफ अंतिम निष्कर्ष न माना जाए और वह जांच या आगे की न्यायिक प्रक्रिया में अपना पक्ष रख सकें। ₹634 करोड़ का आंकड़ा कैसे सामने आया? मामले में आरोप है कि नगर प्रशासन एवं जल आपूर्ति विभाग की भर्तियों में उम्मीदवारों से कथित तौर पर बड़ी रकम ली गई। कुछ रिपोर्टों के अनुसार विभिन्न पदों के लिए ₹25 लाख से ₹35 लाख तक रिश्वत मांगे जाने का आरोप है। जांच एजेंसियों को कथित भुगतान से जुड़े डिजिटल रिकॉर्ड भी मिले हैं। इन दावों की अंतिम पुष्टि जांच और अदालत में साक्ष्यों के परीक्षण के बाद ही होगी। ₹10 के नोट से लेनदेन पहचानने का भी दावा जांच एजेंसियों ने दावा किया है कि कथित हवाला लेनदेन में भुगतान की पहचान या पुष्टि के लिए ₹10 के नोटों की तस्वीरों और क्रमांक का इस्तेमाल किया जाता था। यह दावा ईडी द्वारा तमिलनाडु पुलिस को भेजी गई सामग्री का हिस्सा बताया गया है। K. N. Nehru ने आरोपों से किया इनकार K. N. Nehru ने पहले इन आरोपों से इनकार किया है और जांच एजेंसियों की कार्रवाई को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया है। इसलिए खबर में यह स्पष्ट रखना जरूरी है कि ₹634 करोड़ का आंकड़ा और रिश्वत संबंधी आरोप अभी जांच एजेंसियों के दावे हैं, अदालत की ओर से दोष सिद्ध नहीं किया गया है। अब क्या होगा? सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं मिलने के बाद DVAC की जांच आगे जारी रह सकेगी। जांच एजेंसी अब उपलब्ध दस्तावेजों, डिजिटल रिकॉर्ड, कथित वित्तीय लेनदेन और संबंधित व्यक्तियों के बयानों की जांच करेगी। इसके बाद ही तय होगा कि आरोपपत्र दाखिल करने के लिए पर्याप्त साक्ष्य हैं या नहीं। तमिलनाडु की राजनीति में बढ़ी हलचल मामला राजनीतिक रूप से भी संवेदनशील बन गया है। डीएमके इसे राजनीतिक कार्रवाई बताती रही है, जबकि विपक्ष इसे कथित भ्रष्टाचार के गंभीर मामले के रूप में उठा रहा है। अब सुप्रीम कोर्ट के ताजा आदेश के बाद इस मामले में जांच की दिशा और आने वाले कानूनी कदमों पर नजर रहेगी। स्रोत – सुप्रीम कोर्ट कार्यवाही, मद्रास हाईकोर्ट, लाइव लॉ, बार एंड बेंच, इंडिया टुडे, इंडियन एक्सप्रेस जय राष्ट्र न्यूज़

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गुजरात में कक्षा 9 से 12 तक मानसिक स्वास्थ्य नियम लागू, 100 से ज्यादा छात्रों वाले स्कूलों में काउंसलर जरूरी

गांधीनगर: गुजरात सरकार ने कक्षा 9 से 12 तक पढ़ने वाले छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य और भावनात्मक सुरक्षा को मजबूत करने के लिए नए नियम लागू किए हैं। नए प्रावधानों के तहत राज्य के माध्यमिक और उच्च माध्यमिक स्कूलों में मानसिक स्वास्थ्य सहायता व्यवस्था अनिवार्य होगी। 100 या उससे अधिक छात्रों वाले स्कूलों में कम से कम एक योग्य काउंसलर, मनोवैज्ञानिक या बाल एवं किशोर मानसिक स्वास्थ्य में प्रशिक्षित सामाजिक कार्यकर्ता रखना जरूरी होगा। किन स्कूलों पर लागू होंगे नए नियम? ये नियम गुजरात माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक शिक्षा बोर्ड से संबद्ध उन स्कूलों पर लागू होंगे जहां कक्षा 9 से 12 तक की पढ़ाई होती है। सरकार ने इन प्रावधानों को गुजरात माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक शिक्षा विनियम, 1974 के तहत लागू किया है। 100 से ज्यादा छात्रों वाले स्कूलों में काउंसलर अनिवार्य नए नियमों का सबसे महत्वपूर्ण प्रावधान यह है कि 100 या उससे अधिक छात्रों वाले प्रत्येक स्कूल में कम से कम एक प्रशिक्षित मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ की नियुक्ति करनी होगी। यह विशेषज्ञ योग्य काउंसलर, मनोवैज्ञानिक या बाल एवं किशोर मानसिक स्वास्थ्य में प्रशिक्षित सामाजिक कार्यकर्ता हो सकता है। 100 से कम छात्रों वाले स्कूल क्या करेंगे? जिन स्कूलों में छात्रों की संख्या 100 से कम है, उन्हें भी मानसिक स्वास्थ्य सहायता की व्यवस्था करनी होगी। ऐसे स्कूलों को बाहरी मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों, नजदीकी सामुदायिक या प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, जिला मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम और टेली-मानस जैसी सेवाओं के साथ औपचारिक रेफरल व्यवस्था बनानी होगी। हर स्कूल में बनेगी ‘स्कूल वेलनेस टीम’ कक्षा 9 से 12 तक पढ़ाने वाले हर स्कूल को प्रत्येक शैक्षणिक वर्ष की शुरुआत में स्कूल वेलनेस टीम बनानी होगी। इस टीम के प्रमुख स्कूल के प्रधानाचार्य होंगे। काउंसलर या नामित शिक्षक समन्वयक की भूमिका निभाएगा। टीम में माध्यमिक और उच्च माध्यमिक विभाग से एक-एक शिक्षक, स्कूल प्रबंधन समिति का प्रतिनिधि, गैर-शिक्षण कर्मचारी और दो छात्र प्रतिनिधि भी शामिल होंगे। छात्रों को बनाया जाएगा ‘मनो-मित्र’ नए ढांचे के तहत स्कूलों में चुने गए छात्र ‘मनो-मित्र’ की भूमिका निभाएंगे। इनका उद्देश्य अपने साथियों को शुरुआती भावनात्मक सहायता देना और जरूरत पड़ने पर उन्हें शिक्षक, काउंसलर या अन्य सहायता सेवाओं तक पहुंचाने में मदद करना होगा। UMMEED दिशानिर्देश अपनाए गए गुजरात सरकार ने एनसीईआरटी द्वारा तैयार UMMEED दिशानिर्देशों को संदर्भ ढांचे के रूप में अपनाया है। UMMEED का उद्देश्य स्कूलों में छात्रों के तनाव, मानसिक परेशानी और आत्महत्या के जोखिम की पहचान करना तथा समय पर सहायता उपलब्ध कराना है। केंद्र सरकार के शिक्षा मंत्रालय के दस्तावेजों में भी इन दिशानिर्देशों को स्कूलों में समग्र मानसिक स्वास्थ्य व्यवस्था विकसित करने के लिए तैयार किया गया बताया गया है। परीक्षा के समय अतिरिक्त काउंसलिंग नए नियमों में बोर्ड परीक्षाओं, परिणाम घोषित होने और कक्षा बदलने जैसे संवेदनशील समय में छात्रों को अतिरिक्त परामर्श और मार्गदर्शन देने का प्रावधान है। विशेष रूप से कक्षा 8 से 9 और कक्षा 10 से 11 में जाने वाले छात्रों पर अतिरिक्त ध्यान देने की बात कही गई है। अंकों के आधार पर छात्रों को अलग करना प्रतिबंधित स्कूल अब परीक्षा के अंक या परिणाम के आधार पर छात्रों को अलग-अलग समूहों में बांटकर उनके बीच अस्वस्थ प्रतिस्पर्धा नहीं बढ़ा सकेंगे। छात्रों को सार्वजनिक रूप से अपमानित करने या उनकी तुलना दूसरे छात्रों से इस तरह करने पर भी रोक होगी जिससे उन्हें मानसिक या भावनात्मक दबाव महसूस हो। योग, संगीत और खेल भी होंगे मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम का हिस्सा स्कूलों को छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य के लिए नियमित रूप से योग, ध्यान, कला, संगीत, बागवानी, नृत्य और खेल जैसी गतिविधियों को बढ़ावा देना होगा। UMMEED दिशानिर्देशों में भी तनाव कम करने और छात्रों को अपनी चिंताएं व्यक्त करने के लिए ऐसी गतिविधियों और सुरक्षित माध्यमों की सिफारिश की गई है। शिकायत और मदद के लिए गोपनीय व्यवस्था छात्रों को अपनी समस्याएं काउंसलर या नामित शिक्षक तक सुरक्षित और गोपनीय तरीके से पहुंचाने का विकल्प देना होगा। स्कूलों में सुझाव पेटियां, बाल सहायता हेल्पलाइन नंबर और स्कूल वेलनेस टीम से संपर्क की जानकारी प्रमुख स्थानों पर प्रदर्शित करनी होगी। शिक्षकों को साल में दो बार प्रशिक्षण सभी शिक्षण और गैर-शिक्षण कर्मचारियों को प्रमाणित मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों द्वारा साल में कम से कम दो बार प्रशिक्षण देना होगा। इस प्रशिक्षण में मानसिक परेशानी के शुरुआती संकेत पहचानना, मनोवैज्ञानिक प्राथमिक सहायता देना और जरूरत पड़ने पर छात्र को विशेषज्ञ सहायता तक पहुंचाना शामिल होगा। आत्महत्या या खुद को नुकसान पहुंचाने के संकेत पर तुरंत कार्रवाई अगर किसी छात्र में खुद को नुकसान पहुंचाने, आत्महत्या के विचार या गंभीर मानसिक परेशानी के संकेत मिलते हैं तो स्कूल को तुरंत कार्रवाई करनी होगी। ऐसी स्थिति में छात्र को अकेला नहीं छोड़ा जाएगा और आवश्यक होने पर तत्काल चिकित्सकीय या आपात सहायता उपलब्ध करानी होगी। बुलिंग और भेदभाव पर भी निगरानी स्कूलों को बुलिंग, साइबर बुलिंग, रैगिंग, यौन उत्पीड़न और जाति, लिंग, धर्म, भाषा, आर्थिक स्थिति या दिव्यांगता के आधार पर भेदभाव से जुड़ी शिकायतों के लिए गोपनीय शिकायत निवारण व्यवस्था बनानी होगी। कार्रवाई न करने पर स्कूल की जवाबदेही यदि किसी स्कूल को किसी गंभीर जोखिम की जानकारी होने के बावजूद समय पर उचित कार्रवाई नहीं की जाती और बाद में छात्र को गंभीर नुकसान पहुंचता है, तो संस्थागत जवाबदेही तय की जा सकती है। ऐसे मामलों में लागू कानूनों के तहत अनुशासनात्मक या कानूनी कार्रवाई भी संभव होगी। जिला स्तर पर होगी निगरानी इन नियमों के पालन की निगरानी के लिए जिला स्तर पर समिति बनाई जाएगी, जिसकी अध्यक्षता जिला कलेक्टर करेंगे। यह समिति शिकायतों, गंभीर घटनाओं और नियमों के अनुपालन की समीक्षा करेगी और जरूरी सुधारात्मक कदम सुझाएगी। स्कूलों के लिए समिति के निर्देशों का पालन अनिवार्य होगा। क्यों लाए गए ये नियम? सरकार ने परीक्षा के दबाव, अंकों की प्रतिस्पर्धा, सोशल मीडिया के अत्यधिक इस्तेमाल, परिवार की अपेक्षाओं और भविष्य को लेकर चिंता को छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य पर असर डालने वाले प्रमुख कारणों में गिना है। नए नियमों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि स्कूलों में छात्रों के शैक्षणिक प्रदर्शन के साथ-साथ उनकी मानसिक और भावनात्मक भलाई को भी समान महत्व मिले। स्रोत – गुजरात सरकार, गुजरात माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक शिक्षा बोर्ड, एनसीईआरटी, पीटीआई जय राष्ट्र न्यूज़

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वाराणसी-दिल्ली और मुंबई-बेंगलुरु रूट पर आज से वंदे भारत स्लीपर की नियमित सेवा शुरू

नई दिल्ली: भारतीय रेलवे ने सोमवार, 2 नवंबर 2026 से दो महत्वपूर्ण मार्गों—वाराणसी-दिल्ली और मुंबई-बेंगलुरु—पर वंदे भारत स्लीपर ट्रेनों की नियमित सेवा शुरू कर दी है। इन ट्रेनों को लंबी दूरी की रात्रिकालीन यात्रा को तेज, आरामदायक और आधुनिक बनाने की दिशा में रेलवे के बड़े कदम के रूप में देखा जा रहा है। किन दो मार्गों पर शुरू हुई सेवा? नियमित सेवा शुरू होने वाले दो प्रमुख मार्ग हैं: दोनों मार्ग ऐसे बड़े शहरों को जोड़ते हैं जहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में यात्री रेल यात्रा करते हैं। लंबी दूरी के यात्रियों को मिलेगा फायदा वंदे भारत स्लीपर को खास तौर पर लंबी दूरी और रात की यात्रा के लिए तैयार किया गया है। इसमें यात्रियों को सोने के लिए बर्थ के साथ आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। रेलवे का लक्ष्य ऐसी ट्रेनों के जरिए पारंपरिक लंबी दूरी की एक्सप्रेस सेवाओं की तुलना में बेहतर यात्रा अनुभव देना है। तीन एसी श्रेणियों की सुविधा वंदे भारत स्लीपर में यात्रियों के लिए मुख्य रूप से: प्रथम वातानुकूलित,द्वितीय वातानुकूलित, औरतृतीय वातानुकूलित श्रेणियों की व्यवस्था की गई है। इससे अलग-अलग बजट वाले यात्रियों को ट्रेन में यात्रा का विकल्प मिलेगा। वाराणसी-दिल्ली मार्ग क्यों महत्वपूर्ण? वाराणसी देश के सबसे प्रमुख धार्मिक और पर्यटन शहरों में से एक है, जबकि दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी और बड़ा कारोबारी केंद्र है। दोनों शहरों के बीच बड़ी संख्या में श्रद्धालु, पर्यटक, छात्र और कारोबारी यात्रा करते हैं। वंदे भारत स्लीपर की नियमित सेवा शुरू होने से इस मार्ग पर यात्रियों को एक नया प्रीमियम रेल विकल्प मिलेगा। मुंबई-बेंगलुरु के बीच भी बढ़ेगी रेल संपर्क क्षमता मुंबई और बेंगलुरु देश के दो बड़े आर्थिक और तकनीकी केंद्र हैं। दोनों शहरों के बीच कारोबारी और पेशेवर यात्रियों की संख्या काफी अधिक रहती है। वंदे भारत स्लीपर शुरू होने से हवाई यात्रा के विकल्प के रूप में तेज और आरामदायक रात्रिकालीन रेल सेवा उपलब्ध होगी। आधुनिक सुविधाओं से लैस है ट्रेन वंदे भारत स्लीपर को मौजूदा वंदे भारत चेयर कार की तर्ज पर आधुनिक तकनीक के साथ तैयार किया गया है, लेकिन इसमें लंबी दूरी के लिए स्लीपर बर्थ दी गई हैं। ट्रेन में बेहतर प्रकाश व्यवस्था, आधुनिक शौचालय, स्वचालित दरवाजे, यात्रियों की जानकारी के लिए डिजिटल प्रणाली और बेहतर सुरक्षा सुविधाओं पर जोर दिया गया है। यात्रा समय कम करने पर भी जोर इन ट्रेनों का उद्देश्य केवल बेहतर सुविधाएं देना ही नहीं, बल्कि प्रमुख शहरों के बीच यात्रा समय कम करना भी है। हालांकि वास्तविक यात्रा अवधि मार्ग, ठहराव और रेलवे के परिचालन कार्यक्रम पर निर्भर करेगी। किराया सामान्य ट्रेनों से अधिक वंदे भारत स्लीपर को प्रीमियम श्रेणी की सेवा के रूप में संचालित किया जा रहा है, इसलिए इसका किराया सामान्य मेल और एक्सप्रेस ट्रेनों के मुकाबले अधिक रखा गया है। किराया यात्रा की श्रेणी और दूरी के अनुसार अलग-अलग होगा। वंदे भारत नेटवर्क का अगला चरण अब तक देश में ज्यादातर वंदे भारत ट्रेनें दिन के समय चलने वाली चेयर कार सेवाओं के रूप में संचालित होती रही हैं। स्लीपर संस्करण शुरू होने के साथ रेलवे अब इस ट्रेन श्रृंखला को उन मार्गों पर भी ले जा रहा है जहां यात्रियों को रातभर या लंबी दूरी की यात्रा करनी पड़ती है। दूसरे मार्गों पर भी बढ़ सकती है संख्या रेलवे आने वाले समय में अन्य लंबी दूरी वाले मार्गों पर भी वंदे भारत स्लीपर शुरू कर सकता है। यात्रियों की मांग, रेक उपलब्धता और परिचालन क्षमता के आधार पर नेटवर्क का विस्तार किए जाने की संभावना है। रेलवे के आधुनिकीकरण की दिशा में बड़ा कदम वाराणसी-दिल्ली और मुंबई-बेंगलुरु मार्गों पर नियमित सेवा शुरू होना भारतीय रेलवे की लंबी दूरी की यात्रा को आधुनिक बनाने की रणनीति का हिस्सा है। अब यह देखना अहम होगा कि यात्रियों से इन ट्रेनों को कैसी प्रतिक्रिया मिलती है और रेलवे कितनी तेजी से अन्य प्रमुख मार्गों पर स्लीपर वंदे भारत का विस्तार करता है। स्रोत – भारतीय रेलवे, टाइम्स ऑफ इंडिया जय राष्ट्र न्यूज़

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