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भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स और डिजिटल विनिर्माण को बढ़ावा देने वाली नई परियोजनाओं पर काम तेज़, सरकार की कई निवेश योजनाएँ चर्चा में

नई दिल्ली: भारत सरकार ने इलेक्ट्रॉनिक्स और डिजिटल विनिर्माण क्षेत्र को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए कई नई परियोजनाओं और निवेश योजनाओं पर तेजी से काम शुरू किया है। हाल ही में मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग स्कीम (MPMS) और सेमिकॉन इंडिया 2.0 जैसी महत्वाकांक्षी योजनाओं को मंजूरी मिलने के बाद इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग में निवेश का माहौल और मजबूत हुआ है। सरकार का लक्ष्य भारत को वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग और सेमीकंडक्टर हब के रूप में विकसित करना है। केंद्र सरकार के अनुसार नई योजनाओं के माध्यम से घरेलू मूल्य संवर्धन (Value Addition), सप्लाई चेन को मजबूत करने, भारतीय ब्रांड विकसित करने और अनुसंधान एवं विकास (R&D) को बढ़ावा देने पर विशेष फोकस किया जा रहा है। इससे इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन, निर्यात और रोजगार के नए अवसर बढ़ने की उम्मीद है। इलेक्ट्रॉनिक्स डेवलपमेंट फंड से स्टार्टअप्स को मिला बढ़ावा इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने जानकारी दी है कि इलेक्ट्रॉनिक्स डेवलपमेंट फंड (EDF) के माध्यम से अब तक 128 कंपनियों और स्टार्टअप्स में ₹1,335 करोड़ से अधिक का निवेश किया जा चुका है। यह निवेश आठ वेंचर कैपिटल फंडों के जरिए किया गया है, जिससे डीप-टेक, इलेक्ट्रॉनिक्स डिजाइन और उन्नत विनिर्माण क्षेत्र में नवाचार को गति मिली है। मोबाइल और सेमीकंडक्टर सेक्टर पर बड़ा दांव सरकार ने हाल ही में ₹62,500 करोड़ की मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग स्कीम (MPMS) और ₹1,27,500 करोड़ की Semicon India 2.0 योजना को मंजूरी दी है। इन योजनाओं का उद्देश्य भारत में मोबाइल निर्माण, चिप डिजाइन, सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन, पैकेजिंग और इलेक्ट्रॉनिक्स सप्लाई चेन को मजबूत करना है। रोजगार और निवेश को मिलेगा लाभ विशेषज्ञों का मानना है कि इन योजनाओं से आने वाले वर्षों में अरबों रुपये का निवेश आकर्षित होगा और हजारों प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होंगे। सरकार का लक्ष्य इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन को अगले कुछ वर्षों में कई गुना बढ़ाना और भारत को वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात केंद्र के रूप में स्थापित करना है। आत्मनिर्भर भारत को मिलेगा बल इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण को बढ़ावा देने वाली ये परियोजनाएँ Make in India, Digital India और Atmanirbhar Bharat अभियान को नई गति देंगी। सरकार का मानना है कि मजबूत घरेलू विनिर्माण क्षमता से आयात पर निर्भरता कम होगी और भारत वैश्विक सप्लाई चेन में अधिक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। निष्कर्ष नई इलेक्ट्रॉनिक्स और डिजिटल विनिर्माण परियोजनाएँ भारत के तकनीकी और औद्योगिक विकास के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं। सरकार की निवेश योजनाएँ, स्टार्टअप समर्थन और सेमीकंडक्टर मिशन मिलकर भारत को वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन के प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में आगे बढ़ा रहे हैं। Source: Ministry of Electronics & Information Technology (MeitY) | Press Information Bureau (PIB) जय राष्ट्र न्यूज़

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केंद्र सरकार ने राज्यों को ₹1.09 लाख करोड़ की अतिरिक्त कर हिस्सेदारी जारी की, पूंजीगत खर्च और विकास कार्यों को मिलेगा बढ़ावा

नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने राज्यों की वित्तीय क्षमता को मजबूत करने और विकास परियोजनाओं को गति देने के उद्देश्य से ₹1,09,019 करोड़ की अतिरिक्त कर हिस्सेदारी (Tax Devolution) जारी की है। यह राशि 10 अगस्त को जारी होने वाली नियमित मासिक कर हिस्सेदारी के अतिरिक्त अग्रिम किस्त के रूप में दी गई है। वित्त मंत्रालय के अनुसार इस कदम से राज्यों को आधारभूत ढांचा (Infrastructure), पूंजीगत व्यय (Capital Expenditure) और जनकल्याणकारी योजनाओं पर तेजी से खर्च करने में मदद मिलेगी। सरकार ने कहा कि यह अग्रिम वितरण राज्यों को अधिक वित्तीय लचीलापन प्रदान करेगा ताकि वे मानसून, बुनियादी ढांचा परियोजनाओं और अन्य विकास कार्यों के लिए समय पर संसाधन उपलब्ध करा सकें। यह निर्णय सहकारी संघवाद (Cooperative Federalism) की भावना के अनुरूप राज्यों को अधिक वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने की दिशा में उठाया गया कदम है। राज्यों को मिलेगा विकास कार्यों में बल वित्त मंत्रालय के अनुसार अतिरिक्त कर हिस्सेदारी जारी करने का उद्देश्य राज्यों को— के लिए पर्याप्त वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराना है। पूंजीगत व्यय पर रहेगा फोकस विशेषज्ञों का मानना है कि अग्रिम कर वितरण से राज्यों को वित्तीय वर्ष की शुरुआत में ही बड़े विकास कार्यों को आगे बढ़ाने में सहायता मिलेगी। इससे निर्माण गतिविधियों, रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी गति मिलने की संभावना है। वित्त आयोग की सिफारिशों के अनुरूप व्यवस्था भारत में केंद्र द्वारा एकत्र किए गए करों का हिस्सा वित्त आयोग की सिफारिशों के अनुसार राज्यों को नियमित रूप से वितरित किया जाता है। वर्तमान व्यवस्था के तहत राज्यों को विभाज्य कर पूल (Divisible Tax Pool) का 41% हिस्सा दिया जाता है। निष्कर्ष ₹1.09 लाख करोड़ की अतिरिक्त कर हिस्सेदारी जारी करने का निर्णय राज्यों की विकास योजनाओं को गति देने और पूंजीगत निवेश बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे राज्यों को वित्तीय संसाधनों की समय पर उपलब्धता सुनिश्चित होगी और विभिन्न विकास परियोजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी आने की उम्मीद है। Source: Ministry of Finance | Department of Expenditure जय राष्ट्र न्यूज़

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जम्मू-कश्मीर के कुलगाम में आतंकवादी हमले में दो प्रवासी मजदूरों की मौत, सुरक्षा बलों का सर्च ऑपरेशन तेज

श्रीनगर: जम्मू-कश्मीर के कुलगाम जिले में एक ईंट-भट्ठे पर हुए आतंकवादी हमले में छत्तीसगढ़ के दो प्रवासी मजदूरों की मौत हो गई। आतंकियों ने शुक्रवार देर शाम गैर-स्थानीय मजदूरों पर गोलीबारी की थी, जिसमें एक मजदूर की मौके पर मौत हो गई थी जबकि दूसरा गंभीर रूप से घायल हो गया। बाद में अस्पताल में इलाज के दौरान उसने भी दम तोड़ दिया। यह घटना पिछले लगभग 21 महीनों में प्रवासी मजदूरों पर हुआ पहला बड़ा आतंकी हमला माना जा रहा है। घटना के बाद जम्मू-कश्मीर पुलिस, सेना और अन्य सुरक्षा एजेंसियों ने पूरे इलाके की घेराबंदी कर व्यापक तलाशी अभियान (Search Operation) शुरू कर दिया। हमलावरों की पहचान और गिरफ्तारी के लिए जांच जारी है। अधिकारियों ने आसपास के क्षेत्रों में सुरक्षा भी बढ़ा दी है। मुख्यमंत्री ने किया मुआवजे का ऐलान जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री ओमर अब्दुल्ला ने मृतकों के परिजनों के लिए ₹10 लाख की अनुग्रह राशि (Ex-Gratia) देने की घोषणा की। उन्होंने इस हमले की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि निर्दोष नागरिकों पर हमला मानवता के खिलाफ अपराध है और दोषियों को जल्द न्याय के कटघरे में लाया जाएगा। प्रवासी मजदूरों की सुरक्षा पर चिंता यह हमला ऐसे समय हुआ है जब कश्मीर में सेब सीजन के कारण बड़ी संख्या में दूसरे राज्यों से मजदूर काम करने आते हैं। घटना के बाद प्रवासी श्रमिकों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि सभी संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए जा रहे हैं। जांच जारी सुरक्षा एजेंसियां हमले में शामिल आतंकियों और उनके नेटवर्क की पहचान करने में जुटी हैं। प्रारंभिक जांच में इसे एक टार्गेटेड आतंकी हमला माना जा रहा है। अधिकारियों ने कहा है कि सभी पहलुओं की जांच की जा रही है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। निष्कर्ष कुलगाम में दो प्रवासी मजदूरों की हत्या ने एक बार फिर घाटी में सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। सरकार ने पीड़ित परिवारों को आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है, जबकि सुरक्षा बल हमलावरों की तलाश में लगातार अभियान चला रहे हैं। Source: Jammu & Kashmir Police | Office of the Chief Minister, Jammu & Kashmir जय राष्ट्र न्यूज़

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केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल ने दिल्ली के भलस्वा डंपसाइट के रिमेडिएशन कार्य की समीक्षा की, सितंबर तक सफाई पूरी करने के निर्देश

नई दिल्ली: केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल ने दिल्ली के भलस्वा डंपसाइट का दौरा कर वहाँ चल रहे लीगेसी वेस्ट रिमेडिएशन (Legacy Waste Remediation) कार्यों की समीक्षा की। यह उनका इस परियोजना का दूसरा स्थल निरीक्षण था। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि भलस्वा लैंडफिल की पूरी वैज्ञानिक सफाई (Remediation) सितंबर 2026 तक सुनिश्चित की जाए और भविष्य में नया लीगेसी कचरा बनने से रोका जाए। भलस्वा डंपसाइट को डंपसाइट रिमेडिएशन एंड एक्शन प्लान (DRAP) के तहत अपनाया गया है, जिसका उद्देश्य ‘लक्ष्य: ज़ीरो डंपसाइट’ हासिल करना है। यह कार्यक्रम स्वच्छ भारत मिशन-शहरी 2.0 के अंतर्गत संचालित किया जा रहा है। 43 एकड़ भूमि हुई पुनः प्राप्त अधिकारियों ने मंत्री को बताया कि जून 2022 में इस स्थल पर लगभग 73 लाख मीट्रिक टन कचरा मौजूद था। लगातार बायो-माइनिंग और वैज्ञानिक उपचार के बाद अब शेष कचरा घटकर लगभग 23.17 लाख मीट्रिक टन रह गया है। अब तक लगभग 70 एकड़ में फैले इस डंपसाइट में से 43 एकड़ भूमि पुनः प्राप्त (Reclaimed) की जा चुकी है। मंत्री ने दिए महत्वपूर्ण निर्देश निरीक्षण के दौरान मनोहर लाल ने बायो-माइनिंग, लीचेट प्रबंधन, आग से सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और भविष्य की कार्ययोजना की समीक्षा की। उन्होंने निर्देश दिया कि— स्वच्छ भारत मिशन को मिलेगा बल भलस्वा परियोजना दिल्ली के सबसे बड़े कचरा निस्तारण अभियानों में से एक है। सरकार का मानना है कि इसके पूरा होने से आसपास के क्षेत्रों में प्रदूषण कम होगा, भूमि का बेहतर उपयोग संभव होगा और नागरिकों के स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। यह परियोजना देशभर में पुराने डंपसाइट्स को समाप्त करने के राष्ट्रीय अभियान का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है। निष्कर्ष भलस्वा डंपसाइट की सफाई दिल्ली के पर्यावरण सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। केंद्र सरकार ने परियोजना को समयबद्ध तरीके से पूरा करने पर जोर दिया है ताकि राजधानी को पुराने कचरा पहाड़ों से मुक्त किया जा सके और पुनः प्राप्त भूमि का उपयोग जनहित में किया जा सके। Source: Ministry of Housing & Urban Affairs (MoHUA) | Press Information Bureau (PIB) | Municipal Corporation of Delhi (MCD) जय राष्ट्र न्यूज़

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इलेक्ट्रॉनिक्स डेवलपमेंट फंड के माध्यम से 128 टेक स्टार्टअप्स में ₹1,335 करोड़ से अधिक निवेश

नई दिल्ली: भारत सरकार ने देश में इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण और डीप-टेक नवाचार को बढ़ावा देने की दिशा में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। इलेक्ट्रॉनिक्स डेवलपमेंट फंड (EDF) के माध्यम से अब तक 128 टेक्नोलॉजी स्टार्टअप्स में ₹1,335 करोड़ से अधिक का निवेश किया जा चुका है। सरकार का कहना है कि इस पहल का उद्देश्य घरेलू इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण, सेमीकंडक्टर, एम्बेडेड सिस्टम, IoT, रोबोटिक्स और उन्नत हार्डवेयर तकनीकों को बढ़ावा देना है। EDF योजना का संचालन इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के तहत किया जा रहा है। यह फंड प्रत्यक्ष निवेश के बजाय Alternative Investment Funds (AIFs) के माध्यम से स्टार्टअप्स को पूंजी उपलब्ध कराता है, जिससे निजी निवेश भी आकर्षित हो रहा है। 128 स्टार्टअप्स को मिला लाभ सरकारी जानकारी के अनुसार EDF समर्थित स्टार्टअप्स आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर सुरक्षा, मेडिकल इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोटिव इलेक्ट्रॉनिक्स, ड्रोन तकनीक और चिप डिजाइन जैसे क्षेत्रों में काम कर रहे हैं। इन कंपनियों ने कई स्वदेशी तकनीकों का विकास किया है और रोजगार के नए अवसर भी पैदा किए हैं। आत्मनिर्भर भारत को मिलेगा बल विशेषज्ञों का मानना है कि EDF के माध्यम से किया गया निवेश भारत को इलेक्ट्रॉनिक्स आयात पर निर्भरता कम करने और वैश्विक सप्लाई चेन में मजबूत स्थान दिलाने में मदद करेगा। यह पहल Digital India, Make in India और Atmanirbhar Bharat अभियानों को भी गति दे रही है। निजी निवेश भी बढ़ा EDF मॉडल की खास बात यह है कि सरकारी निवेश के साथ-साथ निजी क्षेत्र की पूंजी भी आकर्षित हो रही है। इससे शुरुआती चरण (Early Stage) के स्टार्टअप्स को वित्तीय सहायता मिलने के साथ-साथ उद्योग विशेषज्ञों का मार्गदर्शन भी प्राप्त हो रहा है। इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण पर फोकस सरकार ने हाल के वर्षों में सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग और कंपोनेंट निर्माण को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएँ शुरू की हैं। EDF इन्हीं प्रयासों का महत्वपूर्ण हिस्सा है और भविष्य में अधिक स्टार्टअप्स को इससे जोड़ने की योजना है। निष्कर्ष 128 टेक स्टार्टअप्स में ₹1,335 करोड़ से अधिक निवेश भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स और डीप-टेक इकोसिस्टम के लिए एक बड़ी उपलब्धि है। इससे नवाचार, रोजगार और स्वदेशी तकनीक को बढ़ावा मिलेगा तथा भारत वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण क्षेत्र में अपनी स्थिति और मजबूत कर सकेगा. Source: Ministry of Electronics & Information Technology (MeitY) | Electronics Development Fund (EDF) जय राष्ट्र न्यूज़

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अमेरिका में राष्ट्रीय रक्त संकट घोषित, रक्तदान के लिए तत्काल अपील; अस्पतालों में उपचार प्रभावित होने की आशंका

वॉशिंगटन डी.सी.: अमेरिका में American Red Cross ने देश के इतिहास में दूसरी बार राष्ट्रीय रक्त आपूर्ति संकट (National Blood Supply Crisis) घोषित किया है। संस्था के अनुसार गर्मियों के दौरान रक्तदान में भारी गिरावट आने से देशभर में रक्त की उपलब्धता गंभीर स्तर तक पहुँच गई है। विशेष रूप से O पॉज़िटिव और O नेगेटिव रक्त समूह की कमी के कारण कई अस्पतालों में सर्जरी, ट्रॉमा उपचार और आपातकालीन सेवाओं पर दबाव बढ़ गया है। Red Cross के अनुसार जुलाई के दौरान रक्तदान चार वर्षों के सबसे निचले स्तर पर पहुँच गया। बढ़ती गर्मी, खराब वायु गुणवत्ता, मौसमी बीमारियों और छुट्टियों के कारण रक्तदान शिविरों में अपेक्षित संख्या में लोग नहीं पहुँच सके। परिणामस्वरूप कई अस्पतालों को रक्त की आपूर्ति सीमित करनी पड़ी है। मरीजों पर पड़ सकता है सीधा असर विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द पर्याप्त रक्तदान नहीं हुआ तो— तत्काल रक्तदान की अपील American Red Cross ने सभी योग्य नागरिकों से जल्द से जल्द रक्तदान करने की अपील की है। संस्था का कहना है कि यदि प्रत्येक रक्तदान शिविर में केवल तीन अतिरिक्त दाता भी पहुँच जाएँ, तो राष्ट्रीय रक्त आपूर्ति को स्थिर करने में बड़ी मदद मिल सकती है। विशेष रूप से O ग्रुप के दाताओं से तुरंत रक्तदान करने का अनुरोध किया गया है। स्वास्थ्य एजेंसियाँ भी हुईं सक्रिय Red Cross के साथ अन्य रक्त संग्रह संस्थाओं और स्वास्थ्य एजेंसियों ने भी लोगों से रक्तदान अभियान में भाग लेने की अपील की है। कई राज्यों में अतिरिक्त रक्तदान शिविर आयोजित किए जा रहे हैं ताकि अस्पतालों की जरूरतों को पूरा किया जा सके। निष्कर्ष अमेरिका में घोषित राष्ट्रीय रक्त संकट स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती बन गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि समय पर पर्याप्त रक्तदान होने पर ही अस्पतालों में उपचार सेवाओं को सामान्य बनाए रखा जा सकेगा। फिलहाल स्वास्थ्य एजेंसियाँ पूरे देश में रक्तदान बढ़ाने के लिए व्यापक अभियान चला रही हैं। Source: American Red Cross | U.S. Department of Health & Human Services जय राष्ट्र न्यूज़

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MCC जल्द जारी करेगा NEET UG 2026 काउंसलिंग शेड्यूल, लाखों अभ्यर्थियों का इंतजार अंतिम चरण में

नई दिल्ली: मेडिकल काउंसलिंग कमेटी (MCC) जल्द ही NEET UG 2026 काउंसलिंग का आधिकारिक शेड्यूल जारी करने वाली है। आधिकारिक पोर्टल पर काउंसलिंग सेक्शन अपडेट कर दिया गया है और “Schedule Will Update Soon” का संदेश प्रदर्शित हो रहा है। इसके साथ ही स्वास्थ्य मंत्रालय ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि इस वर्ष प्रवेश प्रक्रिया पारदर्शी, मेरिट-आधारित और छात्र-अनुकूल तरीके से पूरी की जाए। इस वर्ष MCC द्वारा 15% ऑल इंडिया कोटा (AIQ) सीटों के साथ-साथ केंद्रीय विश्वविद्यालयों, डीम्ड विश्वविद्यालयों, ESIC मेडिकल कॉलेजों और AFMC की MBBS एवं BDS सीटों के लिए ऑनलाइन काउंसलिंग आयोजित की जाएगी। शेष 85% राज्य कोटा की काउंसलिंग संबंधित राज्य प्राधिकरण अलग से करेंगे। जल्द शुरू हो सकती है काउंसलिंग प्रक्रिया मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, पहला राउंड अगस्त के पहले सप्ताह में शुरू होने की संभावना है। विस्तृत कार्यक्रम जारी होने के बाद उम्मीदवारों को ऑनलाइन पंजीकरण (Registration), कॉलेज एवं कोर्स विकल्प भरने (Choice Filling), विकल्प लॉक करने (Choice Locking) और सीट आवंटन (Seat Allotment) की प्रक्रिया पूरी करनी होगी। इस बार लागू होंगे नए नियम स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने NEET UG काउंसलिंग 2026 में कुछ महत्वपूर्ण बदलाव भी लागू किए हैं। इनमें सबसे बड़ा बदलाव One-Time Physical Reporting है। अब जिन अभ्यर्थियों को आगे के राउंड में सीट अपग्रेड मिलेगी, उन्हें बार-बार अलग-अलग मेडिकल कॉलेजों में रिपोर्ट करने की आवश्यकता नहीं होगी। इससे छात्रों का समय, खर्च और प्रशासनिक बोझ कम होने की उम्मीद है। अभ्यर्थियों को क्या तैयारी करनी चाहिए? MCC ने उम्मीदवारों को सलाह दी है कि वे आवश्यक दस्तावेज पहले से तैयार रखें, जिनमें— शामिल हैं। आधिकारिक शेड्यूल जारी होते ही पंजीकरण प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। वेबसाइट पर रखें नजर अभ्यर्थियों को सलाह दी गई है कि वे केवल MCC की आधिकारिक वेबसाइट mcc.nic.in पर जारी सूचना पर ही भरोसा करें और किसी भी अनौपचारिक या भ्रामक जानकारी से बचें। काउंसलिंग का पूरा कार्यक्रम, सीट मैट्रिक्स और पंजीकरण लिंक आधिकारिक पोर्टल पर ही उपलब्ध कराया जाएगा। निष्कर्ष NEET UG 2026 में सफल हुए लाखों छात्रों का इंतजार अब अंतिम चरण में है। MCC द्वारा काउंसलिंग शेड्यूल जारी होते ही देशभर में MBBS और BDS प्रवेश प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। इस वर्ष लागू किए गए नए नियमों से काउंसलिंग प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक सुव्यवस्थित और छात्र-अनुकूल होने की उम्मीद है। Source: Medical Counselling Committee (MCC) | Directorate General of Health Services (DGHS) | Ministry of Health & Family Welfare जय राष्ट्र न्यूज़

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कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में आज नीरज चोपड़ा, भारतीय बॉक्सिंग टीम और अन्य खिलाड़ियों पर रहेंगी पदक की उम्मीदें

ग्लासगो: कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 का आज का दिन भारत के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। भारतीय दल के कई स्टार खिलाड़ी विभिन्न पदक मुकाबलों में उतरेंगे, जिनमें सबसे अधिक नजरें ओलंपिक और विश्व चैंपियन नीरज चोपड़ा पर होंगी। इसके अलावा भारतीय बॉक्सिंग टीम, एथलेटिक्स, जूडो, ट्रैक साइक्लिंग और अन्य स्पर्धाओं में भी भारत के कई खिलाड़ी पदक जीतने की चुनौती पेश करेंगे। नीरज चोपड़ा पुरुष भाला फेंक (Javelin Throw) फाइनल में स्वर्ण पदक के प्रबल दावेदार माने जा रहे हैं। उनके साथ भारत के रोहित यादव और यश वीर सिंह भी इसी स्पर्धा में भाग लेंगे, जिससे भारत के पास एक से अधिक पदक जीतने की संभावना बनी हुई है। हाल ही में क्वालीफिकेशन दौर में नीरज ने चुनौतीपूर्ण मौसम के बावजूद आसानी से फाइनल में जगह बनाई थी। बॉक्सिंग में रिकॉर्ड पदकों की उम्मीद भारतीय मुक्केबाज़ों ने इस बार शानदार प्रदर्शन करते हुए कई भार वर्गों में पदक मुकाबलों तक जगह बनाई है। आज 10 भारतीय बॉक्सर स्वर्ण पदक के लिए रिंग में उतरेंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भारतीय खिलाड़ी अपना प्रदर्शन बरकरार रखते हैं तो बॉक्सिंग भारत के लिए इस संस्करण का सबसे सफल खेल बन सकता है। एथलेटिक्स और अन्य स्पर्धाओं में भी दांव एथलेटिक्स में भाला फेंक के अलावा भारत के खिलाड़ी कई अन्य स्पर्धाओं में भी चुनौती पेश करेंगे। वहीं जूडो में भारत का अभियान आज से शुरू होगा। ट्रैक साइक्लिंग और लॉन बाउल्स में भी भारतीय खिलाड़ी मैदान में उतरेंगे। दिनभर अलग-अलग समय पर होने वाले मुकाबलों में भारत की पदक संख्या बढ़ने की उम्मीद है। भारत की पदक तालिका पर नजर पिछले कुछ दिनों में भारतीय खिलाड़ियों ने वेटलिफ्टिंग, एथलेटिक्स और अन्य खेलों में महत्वपूर्ण पदक जीते हैं। अब टीम इंडिया की कोशिश होगी कि आज के मुकाबलों में अधिक से अधिक स्वर्ण पदक जीतकर पदक तालिका में अपनी स्थिति और मजबूत की जाए। भारतीय दल का आत्मविश्वास ऊंचा भारतीय ओलंपिक संघ (IOA) और कोचिंग स्टाफ ने खिलाड़ियों के प्रदर्शन पर भरोसा जताया है। उनका कहना है कि खिलाड़ियों ने अच्छी तैयारी की है और महत्वपूर्ण मुकाबलों के लिए पूरी तरह तैयार हैं। नीरज चोपड़ा समेत कई अनुभवी खिलाड़ी युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा बने हुए हैं। निष्कर्ष कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 का आज का दिन भारत के लिए पदकों के लिहाज से बेहद अहम है। नीरज चोपड़ा, भारतीय बॉक्सिंग टीम और अन्य खिलाड़ी शानदार प्रदर्शन कर भारत की झोली में नए पदक डालने की कोशिश करेंगे। पूरे देश की नजर अब इन मुकाबलों पर टिकी हुई है। Source: Commonwealth Sport | Indian Olympic Association (IOA) जय राष्ट्र न्यूज़

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अमेरिका ने भारत के निर्यात पर 25% टैरिफ लगाने की घोषणा की, वैश्विक व्यापार पर असर की आशंका

नई दिल्ली/वॉशिंगटन: अमेरिका ने भारत से आयात होने वाले कई उत्पादों पर 25% टैरिफ (आयात शुल्क) लगाने की घोषणा की है। अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि यह कदम व्यापार असंतुलन को कम करने और अमेरिकी उद्योगों की प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति मजबूत करने के उद्देश्य से उठाया गया है। इस फैसले के बाद भारत–अमेरिका व्यापार संबंधों और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर इसके प्रभाव को लेकर व्यापक चर्चा शुरू हो गई है। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार नई शुल्क व्यवस्था कुछ भारतीय निर्यात श्रेणियों पर लागू होगी, जबकि कुछ महत्वपूर्ण क्षेत्रों और उत्पादों को छूट भी दी गई है। भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर बातचीत जारी है और दोनों पक्ष समाधान निकालने के लिए संपर्क बनाए हुए हैं। किन क्षेत्रों पर पड़ सकता है असर? विशेषज्ञों का मानना है कि टैरिफ का प्रभाव मुख्य रूप से उन निर्यात क्षेत्रों पर पड़ सकता है जहाँ भारतीय उत्पाद अमेरिकी बाजार में बड़ी हिस्सेदारी रखते हैं। इनमें— शामिल हो सकते हैं। हालांकि दवाइयाँ, स्मार्टफोन, स्टील, एल्युमिनियम और कुछ अन्य प्रमुख उत्पादों को छूट मिलने से इन क्षेत्रों पर तत्काल प्रभाव सीमित रहने की संभावना है। भारत का रुख भारत सरकार ने कहा है कि वह अमेरिका के साथ व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के लिए लगातार बातचीत कर रही है। वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार भारत दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को मजबूत बनाए रखने के लिए रचनात्मक संवाद जारी रखेगा और भारतीय निर्यातकों के हितों की रक्षा करेगा। निवेशकों और उद्योग की प्रतिक्रिया उद्योग संगठनों का कहना है कि यदि दीर्घकालिक व्यापार समझौता जल्द हो जाता है तो अनिश्चितता कम होगी। शेयर बाजार में भी निवेशकों की नजर इस बात पर है कि दोनों देशों के बीच चल रही वार्ताओं का क्या परिणाम निकलता है और क्या भविष्य में शुल्क व्यवस्था में और बदलाव होते हैं। विशेषज्ञों की राय अर्थशास्त्रियों का मानना है कि अल्पकाल में कुछ निर्यात क्षेत्रों पर दबाव आ सकता है, लेकिन भारत की विविध निर्यात संरचना और वैकल्पिक बाजारों के कारण समग्र प्रभाव सीमित रह सकता है। उनका कहना है कि द्विपक्षीय व्यापार समझौता दोनों देशों के लिए दीर्घकालिक समाधान साबित हो सकता है। निष्कर्ष अमेरिका द्वारा भारतीय निर्यात पर 25% टैरिफ की घोषणा ने वैश्विक व्यापार जगत का ध्यान आकर्षित किया है। हालांकि दोनों देशों के बीच व्यापार समझौते पर बातचीत जारी है और आने वाले समय में नीति में बदलाव की संभावना बनी हुई है। उद्योग और निवेशक अब आगे की कूटनीतिक और व्यापारिक वार्ताओं पर नजर बनाए हुए हैं। Source: Ministry of Commerce & Industry | Office of the United States Trade Representative (USTR) जय राष्ट्र न्यूज़

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भारत की पहली वंदे भारत फ्रेट ट्रेन ने ट्रायल रन में 145 किमी/घंटा की रफ्तार हासिल की, तेज माल परिवहन की दिशा में बड़ी छलांग

कोटा: भारतीय रेलवे ने माल परिवहन के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए देश की पहली वंदे भारत फ्रेट (Freight EMU) ट्रेन का सफल ट्रायल पूरा किया। राजस्थान के कोटा मंडल में हुए शुरुआती परीक्षण के दौरान ट्रेन ने 145 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार हासिल की। यह भारत की अब तक की सबसे तेज मालगाड़ी परियोजनाओं में से एक मानी जा रही है और इसका उद्देश्य ई-कॉमर्स, एक्सप्रेस पार्सल तथा कोल्ड-चेन लॉजिस्टिक्स को नई गति देना है। यह अत्याधुनिक फ्रेट ट्रेन चेन्नई स्थित इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (ICF) द्वारा विकसित की गई है। इसमें 16 कोच हैं और लगभग 397 टन तक माल ढोने की क्षमता है। ट्रायल के दौरान रिसर्च डिज़ाइन एंड स्टैंडर्ड्स ऑर्गेनाइजेशन (RDSO) ने ट्रेन की गति, ब्रेकिंग सिस्टम, स्थिरता और भार वहन क्षमता का परीक्षण किया। ई-कॉमर्स और कोल्ड-चेन को मिलेगा बड़ा लाभ भारतीय रेलवे के अनुसार यह ट्रेन विशेष रूप से ई-कॉमर्स कंपनियों, एक्सप्रेस कार्गो, दवाइयों, कृषि उत्पादों और कोल्ड-चेन लॉजिस्टिक्स के लिए तैयार की गई है। तेज गति के कारण समय-संवेदनशील सामान देश के विभिन्न हिस्सों तक पहले की तुलना में काफी कम समय में पहुँचाया जा सकेगा। इससे सड़क परिवहन पर निर्भरता कम होगी और लॉजिस्टिक्स लागत में भी कमी आने की उम्मीद है। आधुनिक तकनीक से लैस वंदे भारत फ्रेट EMU में आधुनिक इलेक्ट्रिक मल्टीपल यूनिट (EMU) तकनीक का उपयोग किया गया है। यह पारंपरिक मालगाड़ियों की तुलना में तेज़ एक्सेलेरेशन, बेहतर ऊर्जा दक्षता और कम परिचालन समय प्रदान करेगी। भविष्य में इसका लक्ष्य उच्च गति वाले माल परिवहन नेटवर्क का हिस्सा बनना है। रेलवे की बड़ी योजना भारतीय रेलवे की योजना आने वाले वर्षों में ऐसी कई हाई-स्पीड फ्रेट ट्रेनों को नेटवर्क में शामिल करने की है। सरकार का लक्ष्य PM Gati Shakti और राष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स नीति के तहत रेल के माध्यम से माल परिवहन की हिस्सेदारी बढ़ाना है। इससे उद्योगों को तेज़ और भरोसेमंद परिवहन सुविधा मिलेगी तथा देश की सप्लाई चेन और अधिक मजबूत होगी। ट्रायल के बाद आगे की प्रक्रिया RDSO द्वारा सभी तकनीकी और सुरक्षा परीक्षण पूरे होने के बाद ट्रेन को अंतिम स्वीकृति दी जाएगी। इसके बाद इसे चरणबद्ध तरीके से व्यावसायिक संचालन में शामिल किया जा सकता है। रेलवे अधिकारियों का कहना है कि यह परियोजना भारत के माल परिवहन क्षेत्र में एक नई क्रांति साबित हो सकती है। निष्कर्ष 145 किमी/घंटा की सफल ट्रायल स्पीड हासिल करने के साथ भारत की पहली वंदे भारत फ्रेट ट्रेन ने रेलवे के आधुनिकीकरण और तेज़ माल परिवहन की दिशा में एक नया अध्याय शुरू किया है। यदि यह परियोजना सफल रहती है, तो देश में लॉजिस्टिक्स नेटवर्क और औद्योगिक आपूर्ति श्रृंखला को बड़ा लाभ मिलेगा। Source: Research Designs & Standards Organisation (RDSO) | Indian Railways | Integral Coach Factory (ICF) जय राष्ट्र न्यूज़

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