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रहमान डकैत: कराची के ल्यारी इलाके का क्रूर अपराधी साम्राज्य

परिचयसर्दार अब्दुल रहमान बलोच, जिन्हें दुनिया रहमान डकैत के नाम से जानती है, पाकिस्तान के सबसे कुख्यात गैंगस्टरों में से एक थे। 1975 में कराची के ल्यारी इलाके में जन्मे रहमान ने अपराध की दुनिया में कम उम्र से ही कदम रखा और जल्द ही ल्यारी को अपने खौफनाक साम्राज्य का केंद्र बना लिया। ल्यारी, जो कराची का एक घनी आबादी वाला बलोच बहुल इलाका है, गरीबी, बेरोजगारी और राज्य की लापरवाही के कारण अपराध का गढ़ बन चुका था। रहमान ने यहां के गैंग वॉर को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया, जहां हत्याएं, जबरन वसूली और ड्रग तस्करी आम बात हो गई। उनकी कहानी न केवल हिंसा की है, बल्कि राजनीतिक संरक्षण और जनता के बीच एक छवि बनाने की भी है। हाल ही में बॉलीवुड फिल्म ‘धुरंधर’ में अक्षय खन्ना द्वारा निभाए गए उनके किरदार ने दुनिया भर में उनकी क्रूरता को फिर से चर्चा में ला दिया है। View this post on Instagram A post shared by Ranveer Singh (@ranveersingh) प्रारंभिक जीवन और अपराध में प्रवेशरहमान का जन्म 1975 में ल्यारी में एक अपराधी परिवार में हुआ। उनके पिता अबू मुहम्मद (जिन्हें दादल के नाम से भी जाना जाता था) और चाचा शेरू 1964 से ड्रग तस्करी में लिप्त थे। परिवार की इस पृष्ठभूमि ने रहमान को बचपन से ही अपराध की दुनिया से जोड़ दिया। मात्र 13 साल की उम्र में उन्होंने अपनी पहली हिंसक घटना को अंजाम दिया, जब उन्होंने किसी व्यक्ति को चाकू मार दिया। किशोरावस्था में ही वे ड्रग्स बेचने लगे और ल्यारी की गलियों में अपनी पहचान बनाने लगे। उनके पिता की हत्या के बाद परिवार का बदला लेने की आग ने रहमान को और उग्र बना दिया। 1990 के दशक में अरशद पप्पू के पिता द्वारा उनके पिता की हत्या और कब्र की बेइज्जती ने एक लंबे गैंग वॉर को जन्म दिया, जो वर्षों तक चला। 19 साल की उम्र में रहमान ने एक ऐसी घटना की, जो उनकी क्रूरता का प्रतीक बन गई—उन्होंने अपनी मां खदीजा बीबी को गला घोंटकर मार डाला। कथित तौर पर, उनकी मां का किसी अन्य गैंगस्टर इकबाल से संबंध था, जिसने उनके पिता की हत्या की थी। इस घटना के बाद रहमान ने अपनी मां का शव पंखे से लटका दिया, जो उनकी बेरहम छवि को अमर कर गई। गैंग लीडर के रूप में उदय1990 के अंत में रहमान हाजी लालू के गैंग में शामिल हुए, जो ल्यारी का प्रमुख ड्रग लॉर्ड था। 2001 में लालू की गिरफ्तारी के बाद रहमान ने गैंग की कमान संभाली। उन्होंने अपने चचेरे भाई उजैर बलोच और सहयोगी बाबा लाडला के साथ मिलकर ल्यारी को अपना किला बना लिया। 2001 से 2009 तक का दौर रहमान के साम्राज्य का स्वर्णिम काल था। वे जबरन वसूली, अपहरण, ड्रग तस्करी, अवैध हथियारों की बिक्री और हत्या जैसे अपराधों में लिप्त रहे। रहमान ने ‘पीपुल्स अमन कमिटी’ (पीएसी) नामक संगठन की स्थापना की, जो सतह पर शांति का प्रतीक था, लेकिन वास्तव में उनका अपराधी साम्राज्य था। वे ल्यारी में एक फ्यूडल लॉर्ड की तरह शासन करते थे—राजनीतिक संरक्षण के साथ। पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) से उनके गहरे संबंध थे। कथित तौर पर, उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री बेनजीर भुट्टो की जान कई बार बचाई, खासकर 2007 के हमलों के दौरान। जब बेनजीर का काफिला क्लिफ्टन में विस्फोटों से घिर गया, तो रहमान के आदमियों ने उन्हें सुरक्षित निकाला। बदले में, पीपीपी ने उन्हें राजनीतिक छत्रछाया दी। उनकी क्रूरता की मिसालें कांपने वाली हैं। गैंग वॉर के दौरान वे दुश्मनों के सिर काटकर फुटबॉल की तरह खेलते थे। अरशद पप्पू के साथ उनके संघर्ष में सैकड़ों मौतें हुईं, जिनमें सिर काटना, कब्रें खोदना और सार्वजनिक हिंसा शामिल थी। 2012 के ल्यारी गैंग वॉर में 800 से अधिक मौतें हुईं, जो रहमान के दौर की देन थीं। राजनीतिक संबंध और जनता की छविरहमान केवल अपराधी नहीं थे; वे एक चतुर रणनीतिकार भी थे। वे खुद को ‘सर्दार अब्दुल रहमान बलोच’ कहलवाते थे, जो उनकी बलोच पहचान को मजबूत करता था। ल्यारी में वे रोबिन हुड की तरह देखे जाते थे—गरीबों की मदद करते, लेकिन बदले में वफादारी मांगते। उनके अंतिम संस्कार में हजारों लोग शामिल हुए, जो उनकी लोकप्रियता दर्शाता है। हालांकि, पाकिस्तानी पुलिस के अनुसार, वे केवल ल्यारी तक सीमित थे और शहर के अन्य हिस्सों में उतने प्रभावशाली नहीं थे। उनके राजनीतिक संबंधों ने उन्हें लंबे समय तक बचाए रखा। बेनजीर भुट्टो के अलावा, वे अन्य पीपीपी नेताओं से जुड़े थे। लेकिन यह संरक्षण उनके पतन का कारण भी बना। मौत और विरासत9 अगस्त 2009 को कराची पुलिस के साथ मुठभेड़ में रहमान की मौत हो गई। यह ऑपरेशन कराची के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी एसएसपी चौधरी असलम खान के नेतृत्व में किया गया था, जो पाकिस्तान के ‘सुपर कॉप’ के रूप में जाने जाते थे। पुलिस का दावा था कि यह एक वैध गोलीबारी थी, जिसमें रहमान और उनके दो सहयोगियों को मार गिराया गया। हालांकि, कई विवादास्पद रिपोर्ट्स में इसे ‘फर्जी एनकाउंटर’ करार दिया गया, क्योंकि रहमान को करीब से गोली मारी गई थी। पूर्व गृह मंत्री जुल्फिकार मिर्जा ने दावा किया कि उन्होंने खुद रहमान को मारा था, लेकिन बाद में पछतावा जताया। कुछ स्रोतों के अनुसार, रहमान कथित रूप से बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी को हथियार बेचने में लिप्त थे, जिसके कारण उनकी हत्या एक सौदे के खराब होने का नतीजा हो सकती है। हालांकि, भारतीय जासूसों के शामिल होने का कोई पुष्ट साक्ष्य नहीं मिला। फिल्म ‘धुरंधर’ में रणवीर सिंह द्वारा निभाए गए भारतीय जासूस ‘हामजा’ के किरदार ने काल्पनिक रूप से रहमान के गिरोह में घुसकर उनकी कमजोरी उजागर की और अप्रत्यक्ष रूप से उनके पतन में भूमिका निभाई, लेकिन वास्तविकता में यह पूरी तरह काल्पनिक है। रहमान की मौत के बाद उजैर बलोच ने कमान संभाली, लेकिन 2016 में उनकी गिरफ्तारी के साथ पीएसी कमजोर पड़ गया। रहमान की विरासत ल्यारी के गैंग वॉर और अपराध संस्कृति में बसी है, जो आज भी पाकिस्तान की शहरी समस्याओं को दर्शाती है। हाल ही में रिलीज हुई फिल्म ‘धुरंधर’ में अक्षय खन्ना ने रहमान डकैत का किरदार निभाया है, जो उनकी क्रूरता को स्क्रीन पर जीवंत करता है। फिल्म ने न केवल बॉक्स ऑफिस पर धमाल मचाया (पहले वीकेंड में…

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RSS के तीसरे सरसंघचालक बालासाहब देवरस के जयंती पर अमित शाह ने किया नमन

आज RSS के तृतीय सरसंघचालक बालासाहब देवरस की जयंती है इस अवसर पर अमित शाह ने उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए कोटि-कोटि नमन किया। गृह मंत्री अमित शाह सोशल मीडिया एक्स पर उनके योगदान को याद करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। बालासाहब के अमूल्य योगदान को किया याद केद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने अपने आधिकारिक एक्स हेंडल पर लिखा, ‘ संघ के तृतीय सरसंघचालक, सामाजिक समरसता के प्रतीक बालासाहब देवरस जी की जयंती पर उन्हें कोटि-कोटि नमन।’ उन्होंने बालासाहब के योगदानों को याद करते हुए आगे लिखा कि संघ की शुरुआत से लेकर उसे एक विशाल संगठन बनाने और देशभर में विस्तार देने में बालासाहब देवरस जी का अमूल्य योगदान रहा। उन्होंने आपातकाल का डटकर मुकाबला किया। वो युवाओं को चरित्र निर्माण और राष्ट्र प्रथम के लिए प्रेरित करते रहे है। अमित शाह ने आगे कहा कि सामाजिक भेदभाव के विरुद्ध आजीवन संघर्ष करने वाले बालासाहब जी का स्पष्ट मानना था कि यदि दुनिया में अस्पृश्यता पाप नहीं है, तो फिर कुछ भी पाप नहीं है। देश के राष्ट्रीय-सामाजिक जीवन में वे सदैव एक दीपस्तंभ के समान प्रकाशमान रहेंगे। कौन है बालासाहब देवरस? बालासाहब देवरस ने राष्ट्रीय स्वंयसेवक संगठन के प्रमुख श्रीगुरू के स्वर्गवास के बाद सरसंघचालक के दायित्व को ग्रहण किया। इस पद पर नियुक्ति होने के बाद वो संघठन के तीसरे प्रमुख के तौर पर सामने आए। उन्होंने 1973 से 1994 तक संगठन का नेतृत्व कर देश में उसके विस्तार को बढ़ाया. वे केवल एक विचारक ही नहीं, बल्कि एक दूरदर्शी नेता और समाजिक समरसता के प्रतीक रहे हैं। इसके अलावा, 1975 में लगे अपातकाल में जब संघ पर प्रतिबंध तो इन्होंने संघ को एक नई दिशा दी और एक विशाल सत्याग्रह चलाया। यही नहीं, उन्होंने सामाजिक भेदभाव और कुरीतियों के खिलाफ संघर्ष किया और युवाओं को देश की सेवा के लिए प्रेरित किया।

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OMG! विक्रम भट्ट गिरफ्तार – 30 करोड़ का IVF घोटाला, पत्नी भी जेल, बॉलीवुड में भूचाल!

मुंबई/उदयपुर, 8 दिसंबर 2025: बॉलीवुड के प्रसिद्ध फिल्ममेकर विक्रम भट्ट और उनकी पत्नी श्वेतांबरी भट्ट को राजस्थान पुलिस ने 30 करोड़ रुपये के एक बड़े फ्रॉड केस में गिरफ्तार कर लिया है। यह मामला IVF (इन विट्रो फर्टिलाइजेशन) से जुड़ा एक निवेश घोटाले का है, जिसमें उदयपुर के प्रमुख डॉक्टर अजय मुर्दिया को धोखा देकर पैसे ऐंठे गए। गिरफ्तारी के बाद उदयपुर पुलिस ने दोनों को ट्रांजिट रिमांड पर लिया है, और वे 9 दिसंबर तक हिरासत में रहेंगे। यह खबर बॉलीवुड सर्कल में भूचाल ला रही है, क्योंकि विक्रम भट्ट जैसी हस्ती का नाम ऐसे विवाद में जुड़ना किसी के लिए चौंकाने वाला है। IVF फ्रॉड केस का पूरा मामला: कैसे हुआ धोखा? कहानी की शुरुआत तब हुई जब डॉ. अजय मुर्दिया, इंदिरा IVF हॉस्पिटल के फाउंडर, ने विक्रम भट्ट की एक फिल्म प्रोजेक्ट में निवेश करने का फैसला किया। आरोप है कि भट्ट दंपति ने डॉ. मुर्दिया को लुभाने के लिए झूठे वादे किए और IVF टेक्नोलॉजी से जुड़े एक कथित प्रोजेक्ट में 30 करोड़ रुपये निवेश करवाए। लेकिन पैसा मिलने के बाद न तो फिल्म बनी और न ही IVF प्रोजेक्ट आगे बढ़ा। डॉ. मुर्दिया ने जब पैसे वापस मांगे, तो उन्हें आश्वासन के सिवा कुछ नहीं मिला। उदयपुर पुलिस के अनुसार, यह ठगी का केस पिछले कई महीनों से चल रहा था। डॉ. मुर्दिया की शिकायत पर FIR दर्ज हुई, जिसमें विक्रम भट्ट, उनकी पत्नी श्वेतांबरी और छह अन्य लोगों के नाम शामिल हैं। पुलिस ने पहले ही दो अन्य आरोपी को गिरफ्तार कर चुकी है। लुकआउट नोटिस जारी होने के बाद भट्ट दंपति को विदेश यात्रा पर रोक लगा दी गई थी, और उन्हें 8 दिसंबर तक पेश होने का आदेश दिया गया था। लेकिन वे मुंबई में छिपे हुए थे, जहां राजस्थान और मुंबई पुलिस की संयुक्त टीम ने उनकी सिस्टर-इन-लॉ के घर पर छापा मारा। बॉलीवुड कनेक्शन: विक्रम भट्ट कौन हैं? विक्रम भट्ट हिंदी सिनेमा के दिग्गज निर्देशक-निर्माता हैं, जिन्होंने ‘राज़’, ‘1920’, ‘हॉन्टेड’ जैसी हिट हॉरर फिल्में बनाई हैं। वे भट्ट फैमिली के हिस्सा हैं, जिसमें मकड़ भट्ट और पूजा भट्ट जैसे नाम शामिल हैं। उनकी पत्नी श्वेतांबरी भी प्रोडक्शन से जुड़ी हुई हैं। इस गिरफ्तारी ने पूरे इंडस्ट्री को हिलाकर रख दिया है। सोशल मीडिया पर #VikramBhattArrested ट्रेंड कर रहा है, और कई सितारे चुप्पी साधे हुए हैं। पुलिस की अगली कार्रवाई: क्या होगा कोर्ट में? बांद्रा कोर्ट से ट्रांजिट रिमांड मिलने के बाद विक्रम भट्ट और श्वेतांबरी को उदयपुर ले जाया जाएगा, जहां आगे की पूछताछ होगी। पुलिस का दावा है कि फ्रॉड के सबूत मजबूत हैं, जिसमें बैंक ट्रांजेक्शन और कॉन्ट्रैक्ट्स शामिल हैं। अगर आरोप साबित हुए, तो दोनों को लंबी सजा हो सकती है। उदयपुर SP ने कहा, “यह केस मनी लॉन्ड्रिंग और चीटिंग से जुड़ा है, हम पूरी सख्ती से जांच करेंगे।” प्रभाव: IVF इंडस्ट्री पर असर? यह मामला न केवल बॉलीवुड बल्कि IVF सेक्टर को भी प्रभावित कर सकता है। डॉ. मुर्दिया जैसे बड़े नाम का फंसना निवेशकों के बीच अविश्वास पैदा कर रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे घोटाले स्वास्थ्य क्षेत्र में निवेश को हतोत्साहित करेंगे। सोशल मीडिया पर रिएक्शन: फैंस स्तब्ध ट्विटर (X) पर यूजर्स विक्रम भट्ट की पुरानी फिल्मों के क्लिप शेयर कर रहे हैं, साथ ही सवाल उठा रहे हैं कि “क्या हॉरर फिल्मों के बाद असली हॉरर उनकी जिंदगी में आ गया?” कई मीम्स वायरल हो रहे हैं, जो इस घटना को सिनेमा से जोड़ रहे हैं। यह ब्रेकिंग न्यूज लगातार अपडेट हो रही है। अगर आपके पास कोई अतिरिक्त जानकारी है, तो कमेंट्स में शेयर करें। विक्रम भट्ट गिरफ्तार केस की लेटेस्ट अपडेट्स के लिए हमसे जुड़े रहें। कीवर्ड्स: विक्रम भट्ट गिरफ्तार, IVF फ्रॉड केस, 30 करोड़ ठगी, उदयपुर पुलिस, बॉलीवुड न्यूज, ब्रेकिंग न्यूज 8 दिसंबर 2025

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मेरठ में सनसनीखेज वारदात, जीजा ने साले को गोली मारकर मौत के घाट उतारा

उत्तर प्रदेश के मेरठ के सदर बाजार इलाके में गुरुवार देर रात एक सनसनीखेज वारदात हुई. यहां एक युवक ने अपने ही साले को उसकी मां के सामने गोली मार दी. 23 वर्षीय मृतक केशव सोनकर एलएलबी का छात्र था. पुलिस ने मुख्य आरोपी जीजा अंश और उसके साथी आयुष को गिरफ्तार कर लिया है. उनके पास से तमंचा और स्कूटी भी बरामद की गई है. परिवारिक विवाद बना वजह वेस्टर्न रोड निवासी राधेश्याम सोनकर एमडीए में कर्मचारी हैं. उनका बेटा केशव एलएलबी की पढ़ाई कर रहा था. राधेश्याम की बेटी टीना ने जनवरी 2025 में फाजलपुर निवासी अंश से कोर्ट मैरिज की थी. परिवार इस शादी के खिलाफ था और उस समय अपहरण का केस भी दर्ज कराया गया था. करीब तीन महीने पहले टीना को परिजन घर वापस ले आए थे, जिसके बाद उसका अंश से संपर्क टूट गया. इसी बात को लेकर दोनों परिवारों में तनाव बढ़ गया था. परिजनों का आरोप है कि कुछ दिन पहले अंश और उसके साथियों ने केशव को धमकी भी दी थी. सीने में मारी गोली गुरुवार रात अंश ने फोन कर केशव को घर के बाहर बुलाया. जैसे ही वह बाहर आया, अंश अपने साथियों के साथ पहले से मौजूद था. बहस के दौरान अंश ने अचानक तमंचा निकालकर केशव के सीने में गोली मार दी. मां सोनू यह सब अपनी आंखों के सामने देख रही थीं. घायल केशव को तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया. इलाके में तनाव और विरोध हत्या की सूचना फैलते ही माहौल गरम हो गया. शुक्रवार को परिजन और स्थानीय लोग बड़ी संख्या में फाजलपुर स्थित आरोपियों के घर पहुंच गए. भीड़ ने वाहनों में तोड़फोड़ की और आग लगाने की कोशिश भी की. पुलिस ने मौके पर पहुंचकर हालात को नियंत्रित किया. परिजनों ने वेस्टर्न रोड पर जाम भी लगाया और आरोपियों के खिलाफ बुलडोजर कार्रवाई की मांग की. पुलिस की कार्रवाई परिजनों का कहना है कि पहले भी अंश ने तमंचा दिखाकर धमकी दी थी लेकिन पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की. वहीं, SSP मेरठ डॉ. विपिन ताडा ने बताया कि मुख्य आरोपी अंश और आयुष को गिरफ्तार कर लिया गया है. पूछताछ में अंश ने स्वीकार किया कि विवाद और गाली-गलौज के चलते उसने गोली चलाई. फिलहाल इलाके में भारी पुलिस बल तैनात है और मामले की जांच जारी है.

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ऊर्जा नीति में ऐतिहासिक बदलाव

भारत ने अक्टूबर 2025 में रूसी तेल आयात 38% घटाया: ऊर्जा नीति में ऐतिहासिक बदलाव

जय राष्ट्र न्यूज़ | नई दिल्ली | 5 दिसंबर 2025 भारत ने अक्टूबर 2025 में रूस से कच्चे तेल का आयात मूल्य के हिसाब से 38 प्रतिशत और मात्रा के हिसाब से 31 प्रतिशत तक कम कर दिया। यह 2022 के यूक्रेन युद्ध के बाद से रूस पर सबसे ज़्यादा निर्भरता दिखाने वाले भारत के लिए अब तक की सबसे बड़ी एकमुश्त कटौती है। पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल (PPAC) के ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक, अक्टूबर में कुल क्रूड आयात में भी करीब 5 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। रूस अभी भी भारत का सबसे बड़ा तेल आपूर्तिकर्ता है, लेकिन उसका हिस्सा सितंबर 2025 के 40 प्रतिशत से घटकर अक्टूबर में करीब 35 प्रतिशत रह गया। दूसरी तरफ इराक, सऊदी अरब, UAE और अमेरिका से आयात में तेज़ उछाल देखा गया है। पिछले तीन साल का ट्रेंड उलट गया 2022 के बाद से रूस भारत को औसतन 1.5 से 2 मिलियन बैरल प्रतिदिन कच्चा तेल बेच रहा था। उस समय पश्चिमी प्रतिबंधों के कारण रूसी उराल ग्रेड क्रूड ब्रेंट से 20-30 डॉलर प्रति बैरल सस्ता मिल रहा था। भारतीय रिफाइनरियों (खासकर रिलायंस जामनगर और नायरा वाडिनार) ने इसका भरपूर फायदा उठाया था। लेकिन अक्टूबर 2025 में यह तस्वीर पूरी तरह बदल गई। गिरावट के पांच बड़े कारण रिफाइनरियों पर क्या असर? रिलायंस इंडस्ट्रीज़ और इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन ने बताया कि रूसी भारी-खट्टा क्रूड (उराल) की जगह अब वे इराकी बसरा हेवी, सऊदी अरेबियन मीडियम और अमेरिकी WTI मिडलैंड क्रूड ले रहे हैं। इनमें सल्फर कम है और रिफाइनिंग मार्जिन 1.5-2 डॉलर प्रति बैरल बेहतर मिल रहा है। नायरा एनर्जी (रूस की रोसनेफ्ट में हिस्सेदार) ने भी कहा कि वह अब स्पॉट मार्केट से मध्य-पूर्व का तेल खरीद रही है। रोसनेफ्ट से लंबे अनुबंध अभी भी जारी हैं, लेकिन मात्रा में 25-30 प्रतिशत की कटौती कर दी गई है। अर्थव्यवस्था को फ़ायदा भारत-रूस संबंधों पर असर? विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने स्पष्ट किया है कि यह फैसला “100 प्रतिशत व्यावसायिक” है। रूस के साथ 15 अरब डॉलर का सालाना व्यापार लक्ष्य अभी भी बरकरार है। हाल ही में राष्ट्रपति पुतिन की भारत यात्रा में S-400 की अतिरिक्त रेजीमेंट, ब्रह्मोस मिसाइल निर्यात और न्यूक्लियर पावर प्लांट के समझौते हुए हैं। तेल की मात्रा कम होने से द्विपक्षीय संबंधों पर कोई ठेस नहीं पहुँची है। आगे की राह: हरित ऊर्जा और विविधीकरण सरकार ने 2030 तक 500 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा और 5 मिलियन टन ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन का लक्ष्य रखा है। इसी साल गुजरात और राजस्थान में 50 गीगावाट के सोलर पार्क और 30 गीगावाट के ग्रीन हाइड्रोजन हब को मंजूरी मिली है। लेकिन अभी भी तेल भारत की कुल ऊर्जा मांग का 33 प्रतिशत पूरा करता है। इसलिए अगले 10-15 साल तक विविधीकरण ही एकमात्र रास्ता है। पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने पिछले हफ्ते कहा था,“हमारा लक्ष्य है कि 2035 तक किसी एक देश से 25 प्रतिशत से ज़्यादा तेल न लें।” निष्कर्ष अक्टूबर 2025 की 38 प्रतिशत कटौती कोई अस्थायी घटना नहीं है। यह भारत की नई ऊर्जा रणनीति का पहला ठोस संकेत है। सस्ता तेल चाहिए, लेकिन सुरक्षित और विविध स्रोतों से। आने वाले महीनों में यदि वैश्विक कीमतें 65 डॉलर से नीचे चली गईं, तो फिर रूसी तेल की वापसी हो सकती है। लेकिन तब भी पुरानी मात्रा शायद ही लौटे। भारत अब ऊर्जा के खेल में सिर्फ़ खरीदार नहीं, एक स्मार्ट रणनीतिकार बनकर उभरा है। जय राष्ट्र न्यूज़ – भारत की खबर, भारत की आवाज़Instagram: @jairashtranewsYouTube: @JaiRashtraNewsवेबसाइट: jairashtranews.com RussianOilCut #IndiaEnergyPolicy #JaiRashtraNews

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इंदौर

इंदौर में एकादशी पूजा के दौरान केमिकल फैक्ट्री में आग लगने से दो महिलाओं की मौत, एक घायल

इंदौर में शनिवार शाम एक दुखद हादसा हुआ. राऊ पुलिस स्टेशन इलाके में एक रासायनिक गोदाम में आग लग गई. इस हादसे में दो महिलाओं की दर्दनाक मौत हो गई और एक व्यक्ति घायल हो गया. गोदाम में रखे बड़ी मात्रा में थिनर की वजह से आग और भड़क गई. थिनर एक बहुत ज्यादा ज्वलनशील सॉल्वेंट है जो आमतौर पर पेंट और केमिकल इंडस्ट्री में इस्तेमाल होता है. पुलिस के अनुसार, दमकल विभाग ने तुरंत कार्रवाई की, लेकिन आग पर काबू पाने में डेढ़ घंटे का समय लग गया. आग बुझने के बाद, इमरजेंसी स्टाफ गोदाम के अंदर प्रवेश किया. इस दौरान दो महिलाओं के शव मिले. महिलाओं की पहचान रामकली (50) और ज्योति नीम (34) के रूप में हुई. वहीं, एक अन्य व्यक्ति सूरज भगनानी (34) के दोनों हाथों में जलने से चोटें आईं और उन्हें इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया. मामले में लाइसेंस से संबंधित जांच कर रही है पुलिस इंदौर के जोन-1 के डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस कृष्णा लालचंदानी ने बताया कि पीड़ित लोग एकादशी पूजा कर रहे थे. उन्होंने पत्थर की मिट्टी के दीये जलाए थे, जो पास में रखे थिनर के पास थे. इससे आग लग गई. आग ने वह सामान पकड़ लिया, जिससे बड़ा हादसा हो गया और दो लोगों की जान चली गई. उन्होंने आगे कहा कि शुरुआती जांच में पता चला है कि यह जगह भैयालाल मुकाती नाम के एक व्यक्ति ने किराए पर ली थी. हालांकि, इस जगह को आम तौर पर फैक्ट्री कहा जाता है, लेकिन पुलिस को अभी यह कन्फर्म करना बाकी है कि यह मैन्युफैक्चरिंग यूनिट के तौर पर काम कर रही थी या सिर्फ एक स्टोरेज गोदाम था. अधिकारी अब इस बात की जांच कर रही हैं कि क्या उस फैसिलिटी के पास ऐसे खतरनाक पदार्थों को स्टोर करने के लिए लाइसेंस थे और क्या इस घटना में किसी लापरवाही का हाथ था. स्थानीय लोगों ने जोर की आवाजें सुनीं और जगह से घना धुआँ उठता देखा. इससे आसपास डर फैल गया. पास की कुछ इकाइयों को सावधानी से खाली कराया गया. अब तक कोई और चोट नहीं आई है. अधिकारी पूरी जांच करने और जिम्मेदारी तय करने तथा भविष्य में ऐसी घटनाएं रोकने का वादा कर रहे हैं

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उत्तर में सर्दी की दस्तक, दक्षिण में भारी बारिश का अलर्ट, जानें IMD का ताजा पूर्वानुमान

अक्टूबर का आखिरी हफ्ता आते-आते मौसम ने पूरे देश में करवट ले ली है. जहां उत्तर भारत में सुबह-शाम की ठंड अब खुलकर महसूस की जाने लगी है, वहीं दक्षिण भारत के कई राज्यों में बादल भारी पड़ने को तैयार हैं. भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने 30 अक्टूबर के लिए जो ताजा अपडेट जारी किया है, उसके मुताबिक देश के दक्षिणी हिस्सों में चक्रवाती असर के चलते कई इलाकों में भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना जताई गई है. उत्तर भारत में सर्दी की दस्त दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में अब सर्दी की शुरुआती दस्तक महसूस हो रही है. सुबह और देर शाम हल्की ठंडक के साथ ठंडी हवाएं चल रही हैं. दिल्ली-एनसीआर में आज सुबह हल्का कोहरा या धुंध देखने को मिल सकता है. हालांकि दिन में आसमान साफ रहेगा और मौसम शुष्क बना रहेगा. मौसम विभाग के अनुसार, दिल्ली का अधिकतम तापमान 29 से 31 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम 17 से 19 डिग्री सेल्सियस के आसपास रह सकता है. हवा की गुणवत्ता “खराब” श्रेणी में रहने की संभावना जताई गई है, इसलिए सुबह की वॉक या आउटडोर गतिविधियों के दौरान सतर्क रहना बेहतर रहेगा. दक्षिण भारत में भारी बारिश का अलर्ट दूसरी तरफ दक्षिण भारत में मौसम पूरी तरह उलट गया है. तमिलनाडु, केरल, आंध्र प्रदेश और कर्नाटक के तटीय इलाकों में भारी बारिश के आसार हैं. समुद्र के ऊपर बन रहे चक्रवाती सिस्टम के कारण अगले 24 घंटे इन राज्यों के लिए चुनौती भरे साबित हो सकते हैं. कई इलाकों में बिजली कड़कने और तेज़ हवाओं के साथ बारिश होने की संभावना है. पहाड़ों में बर्फबारी हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के ऊंचे इलाकों में लगातार बर्फबारी का दौर जारी है. इससे वहां के पर्यटक स्थलों की खूबसूरती तो बढ़ी है, लेकिन इसके साथ तापमान में भी गिरावट दर्ज की जा रही है. इस बर्फबारी का असर अब मैदानी इलाकों में भी दिखने लगा है सुबह और रात के समय ठंडक बढ़ने लगी है. यूपी और पूर्वोत्तर में बारिश की संभावना उत्तर प्रदेश के पूर्वी जिलों में आज हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है. कुछ इलाकों में गरज-चमक और तेज़ हवाएं (30-40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से) चलने की संभावना भी जताई गई है. वहीं, पूर्व और पूर्वोत्तर राज्यों जैसे असम, मेघालय और नागालैंड में भी बिजली गिरने और बरसात की गतिविधियां बनी रहेंगी.

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महाराष्ट्र में फिर छिड़ा भाषा विवाद, MNS ने मेट्रो स्टेशन पर हिंदी को लेकर जताया विरोध

महाराष्ट्र में फिर छिड़ा भाषा विवाद, MNS ने मेट्रो स्टेशन पर हिंदी को लेकर जताया विरोध

महाराष्ट्र में एक बार फिर भाषा को लेकर विवाद सामने आया है. इस बार मामला मुंबई के अंधेरी मेट्रो स्टेशन का है, जहां सिर्फ हिंदी में विज्ञापन लिखे जाने पर महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) के कार्यकर्ताओं ने जोरदार विरोध किया. उन्होंने स्टेशन के नाम पर कालिख पोत दी और नारेबाजी की. उनका कहना था कि मराठी को नजरअंदाज करना महाराष्ट्र की अस्मिता का अपमान है. पहले भी विवाद ये कोई पहली बार नहीं है जब भाषा को लेकर विवाद हुआ हो. जुलाई में मीरा रोड पर एक मिठाई दुकानदार को सिर्फ इसलिए पीटा गया क्योंकि उसने मराठी बोलने से इनकार किया था. इस घटना का वीडियो वायरल हुआ और सात लोगों के खिलाफ FIR दर्ज हुई थी. इनमें से तीन को नोटिस भी जारी किया गया. इसके बाद सैकड़ों MNS कार्यकर्ता सड़क पर उतर आए और मराठी गौरव की रक्षा के लिए विरोध मार्च निकाला. पुलिस ने कई कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया ताकि माहौल बिगड़ने से रोका जा सके. वीरार और पालघर में मारपीट भाषाई विवाद यहीं नहीं रुका. जुलाई 2025 में ही वीरार और पालघर में एक ऑटो-रिक्शा चालक को मराठी न बोलने पर पीटा गया. इस बार हमला शिवसेना (UBT) के कार्यकर्ताओं ने किया. वीडियो में देखा गया कि चालक ने कहा, “हिंदी या भोजपुरी बोलना मेरा हक है.” लेकिन ऐसा कहने पर उसे थप्पड़ मारे गए और सार्वजनिक माफी मांगने को मजबूर किया गया. महाराष्ट्र बैंक की शाखा में मारपीट लोनावाला के महाराष्ट्र बैंक की एक शाखा में भी ऐसा ही मामला सामने आया. वहां MNS कार्यकर्ताओं ने मैनेजर से मराठी में बात करने की मांग की. जब एक कर्मचारी ने हिंदी के इस्तेमाल का समर्थन किया, तो उसे भी पीटा गया. इन घटनाओं से साफ है कि महाराष्ट्र में भाषा को लेकर तनाव बढ़ता जा रहा है. मराठी को लेकर भावनाएं गहरी हैं लेकिन हिंसा और जबरदस्ती से समाधान नहीं निकलता. भाषा का सम्मान जरूरी है लेकिन साथ ही हर नागरिक को अपनी पसंद की भाषा बोलने का अधिकार भी मिलना चाहिए.

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कमाए 241 करोड़…प्रशांत किशोर का बड़ा दावा, कहा- 98 करोड़ पार्टी को किए डोनेट

राज्य में चुनावी माहौल गरम है और आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है. इसी बीच जन सुराज अभियान चला रहे प्रशांत किशोर (Prashant Kishore) ने अपनी पार्टी जनसुराज को लेकर बड़ा खुलासा किया है. पिछले साल 2 अक्टूबर को उन्होंने जनसुराज को राजनीतिक पार्टी के रूप में लॉन्च किया था और अब बिहार की सभी 243 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी में हैं. प्रशांत किशोर ने तोड़ी चुप्पी प्रशांत किशोर (Prashant Kishore) पर कई नेता आरोप लगा रहे हैं कि वो बीजेपी के एजेंट हैं. साथ ही उनकी बड़ी टीम और प्रचार को देखकर लोग सवाल उठा रहे हैं कि इतना पैसा कहां से आ रहा है. अब प्रशांत किशोर ने इन सवालों पर चुप्पी तोड़ते हुए प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा,आरोप पर पीके ने क्या कहा? पीके (Prashant Kishore) ने आगे कहा कि उन्होंने देश के कई नेताओं को राजनीतिक सलाह दी है और अब 2022 से वो इसके लिए फीस भी लेते हैं.प्रशांत किशोर (Prashant Kishore) ने यह भी कहा कि उनके पास सरस्वती से पैसा आता है. उन्होंने कहा कि पहले वो फीस नहीं लेते थे लेकिन अब उन्होंने इसे प्रोफेशनल तरीके से करना शुरू किया है. सत्ता पक्ष और विपक्ष पर निशाना बिहार में घूम-घूमकर जनसभाएं कर रहे प्रशांत किशोर (Prashant Kishore) सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों पर निशाना साध रहे हैं. विपक्ष का कहना है कि वो बीजेपी की B टीम की तरह काम कर रहे हैं जबकि प्रशांत का दावा है कि जनसुराज (Jan Suraaj) बिहार के लोगों को एक नया और साफ विकल्प देने की कोशिश कर रही है.

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दुर्गा पूजा में 'काबा-मदीना' की गूंज, बंगाल में सनातन पर चोट

दुर्गा पूजा में ‘काबा-मदीना’ की गूंज, बंगाल में सनातन पर चोट

दुर्गा पूजा में ‘काबा-मदीना’ की गूंज, बंगाल में सनातन पर चोट कोलकाता के भवानीपुर 75 पल्ली दुर्गा पूजा पंडाल में इस बार कुछ ऐसा हुआ जिसने लाखों हिंदू समाज के लोगों को भीतर तक झकझोर दिया. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पंडाल का उद्घाटन किया, तालियां बजाईं. वहीं उनके करीबी नेता मदन मित्रा मंच पर गाते हुए कहा कि मेरे दिल में काबा है और आँखों में मदीना है. मुद्दे की बातअब सवाल ये उठता है कि दुर्गा पूजा जैसे सनातन पर्व पर इस तरह के गीतों का क्या काम? क्या ये जानबूझकर सनातन भावनाओं को ठेस पहुंचाने की कोशिश नहीं है? क्या ये एक सांस्कृतिक अतिक्रमण नहीं है जहां देवी दुर्गा की आराधना के बीच इस्लामी प्रतीकों की बात की जा रही है? वोट के लिए आस्था से खिलवाड़ममता बनर्जी का ये कदम कोई पहली बार नहीं है. इससे पहले भी उन्होंने पितृ पक्ष के दौरान दुर्गा पूजा पंडालों का उद्घाटन कर हिंदू परंपराओं को नजरअंदाज किया था. जबकि शास्त्रों के अनुसार पितृ पक्ष में कोई नया कार्य या उत्सव शुरू करना अशुभ माना जाता है लेकिन बंगाल की राजनीति में वोट बैंक की मजबूरी शायद आस्था से बड़ी हो गई है. सबसे बड़ी चिंता की बात तो ये है कि इस सबके खिलाफ कोई आवाज नहीं उठती है. न कोई बड़ा संत बोलता है, न कोई संगठन सड़कों पर उतरता है. सोशल मीडिया पर कुछ लोग जरूर नाराजगी जताते हैं लेकिन जमीनी स्तर पर विरोध न के बराबर है. पश्चिम बंगाल में सनातन धर्म ना के बराबरक्या बंगाल में सनातन धर्म अब सिर्फ एक मौन दर्शक बनकर रह गया है? क्या दुर्गा पूजा जैसे पर्व अब राजनीतिक मंच बनते जा रहे हैं जहां देवी की आराधना से ज़्यादा नेताओं की पीआर चलती है? इसे भी पढ़ें-अगर अब भी हम चुप रहे, तो आने वाले वर्षों में दुर्गा पूजा में देवी के स्थान पर कोई और प्रतीक खड़ा मिलेगा। ये समय है जागने का, बोलने का और अपनी आस्था की रक्षा करने का वरना इतिहास हमें माफ नहीं करेगा.

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