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रुपये पर फिर दबाव, डॉलर के मुकाबले 96 के करीब पहुंचने की आशंका; कच्चे तेल और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड का असर

मुंबई: भारतीय रुपया एक बार फिर दबाव में है और 1 अक्टूबर 2026 के कारोबार में डॉलर के मुकाबले 95.96 से 95.98 के आसपास खुलने का अनुमान जताया गया। एक दिन पहले रुपया 95.83 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था। ऊंची कच्चे तेल की कीमतें, अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में तेजी और मजबूत डॉलर रुपये पर दबाव बढ़ा रहे हैं। बाजार की नजर इस बात पर भी है कि Reserve Bank of India यानी RBI 96 के स्तर के आसपास कितनी मजबूती से हस्तक्षेप करता है। 96 के स्तर के करीब पहुंच सकता है रुपया फॉरेक्स बाजार के अनुमान के अनुसार गुरुवार को रुपया 95.96 से 95.98 प्रति डॉलर के दायरे में खुल सकता है। बुधवार को भारतीय मुद्रा ने कुछ सुधार दिखाते हुए 95.83 पर कारोबार बंद किया था, लेकिन वैश्विक संकेत फिर इसके खिलाफ जाते दिखाई दे रहे हैं। कच्चे तेल की कीमतें बनी सबसे बड़ी चिंता भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चा तेल आयात करता है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होने का सीधा असर डॉलर की मांग और रुपये पर पड़ता है। Brent crude में बुधवार को करीब 2 फीसदी की तेजी आई, जबकि सितंबर में तेल की कीमतों में लगभग 14 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई। ऊंचा तेल आयात बिल रुपये पर अतिरिक्त दबाव पैदा करता है। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेज उछाल अमेरिका की 10 साल की Treasury yield 2007 के बाद के उच्च स्तरों के करीब पहुंच गई है। ऊंची अमेरिकी यील्ड से डॉलर आधारित assets निवेशकों के लिए ज्यादा आकर्षक हो सकते हैं, जिससे emerging markets की currencies पर दबाव बढ़ता है। डॉलर इंडेक्स भी तीन महीने के ऊंचे स्तर पर पहुंच गया। Fed से राहत की उम्मीद भी रुपये को नहीं संभाल पा रही अमेरिकी Federal Reserve द्वारा अक्टूबर में ब्याज दर बढ़ाने की संभावना पिछले एक सप्ताह में घटी है। इसके बावजूद रुपये को ज्यादा राहत नहीं मिली क्योंकि बाजार का फोकस फिलहाल तेल की कीमतों और लंबी अवधि की अमेरिकी बॉन्ड यील्ड पर अधिक है। 29 सितंबर को 96 के पार गया था रुपया भारतीय मुद्रा हाल ही में 96 प्रति डॉलर का स्तर पार कर चुकी है। 29 सितंबर को रुपया कारोबार के दौरान 96.1450 प्रति डॉलर तक गिरा था, जो लगभग दो महीने का निचला स्तर था। बाद में RBI के संभावित हस्तक्षेप से नुकसान कुछ कम हुआ। RBI के हस्तक्षेप पर बाजार की नजर मार्केट डीलर्स के अनुसार सरकारी बैंकों के जरिए डॉलर की बिक्री को RBI के संभावित हस्तक्षेप के रूप में देखा जा रहा है। हाल के सत्रों में 96 के आसपास रुपये की गिरावट सीमित होती दिखाई दी है, जिससे बाजार में धारणा बनी है कि केंद्रीय बैंक इस स्तर पर अत्यधिक उतार-चढ़ाव नहीं चाहता। हालांकि RBI आमतौर पर किसी निश्चित exchange-rate level को आधिकारिक लक्ष्य घोषित नहीं करता। एक दिन पहले रुपये ने की थी वापसी 30 सितंबर को रुपये ने कमजोरी से वापसी करते हुए 95.83 प्रति डॉलर पर कारोबार बंद किया था। उस दिन कच्चे तेल की कीमतों में नरमी, एशियाई मुद्राओं में सुधार और संभावित RBI intervention ने भारतीय मुद्रा को समर्थन दिया था। विदेशी निवेश की निकासी भी बढ़ा रही दबाव भारतीय बाजारों से विदेशी पूंजी की निकासी भी रुपये के लिए चुनौती बनी हुई है। तेल की ऊंची कीमतें, मजबूत डॉलर और वैश्विक बॉन्ड बाजार में बढ़ती यील्ड विदेशी निवेशकों के risk appetite को प्रभावित कर सकती हैं, जिससे emerging markets से पूंजी बाहर जाने का खतरा बढ़ता है। भारत के आयात बिल पर पड़ सकता है असर अगर रुपया कमजोर रहता है और तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं तो भारत का आयात बिल महंगा हो सकता है। इसका असर पेट्रोलियम उत्पादों, औद्योगिक कच्चे माल और डॉलर में भुगतान किए जाने वाले अन्य आयात पर पड़ सकता है। इससे महंगाई और चालू खाते पर भी दबाव बढ़ने की आशंका रहती है। RBI की अगली मौद्रिक नीति भी अहम बाजार की नजर अब RBI की आगामी Monetary Policy Committee बैठक पर भी है। कुछ वित्तीय संस्थानों का अनुमान है कि ऊंची तेल कीमतों और महंगाई जोखिम को देखते हुए केंद्रीय बैंक ब्याज दरों पर सख्त रुख अपना सकता है। हालांकि अंतिम फैसला RBI की MPC ही करेगी। रुपये की आगे की चाल इन संकेतों पर निर्भर आने वाले दिनों में रुपये की दिशा कच्चे तेल की कीमतों, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड, डॉलर इंडेक्स, विदेशी निवेश प्रवाह और RBI की बाजार में गतिविधियों पर निर्भर करेगी। फिलहाल 96 प्रति डॉलर का स्तर बाजार के लिए अहम बना हुआ है और इसमें होने वाली हलचल पर निवेशकों की नजर बनी हुई है। source – Reuters / The Economic Times / Financial Times जय राष्ट्र न्यूज़

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पाकिस्तान की अफगानिस्तान में एयरस्ट्राइक, काबुल का दावा 9 नागरिकों की मौत; इस्लामाबाद बोला- आतंकियों को बनाया निशाना

काबुल/इस्लामाबाद: पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के हेलमंद और कुनार प्रांतों में हवाई हमले किए हैं। अफगान अधिकारियों का दावा है कि इन हमलों में 9 नागरिकों की मौत हुई और 11 लोग घायल हुए, जिनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं। दूसरी ओर पाकिस्तान ने कहा है कि कार्रवाई में आतंकवादी ठिकानों को निशाना बनाया गया और 22 कथित आतंकियों को मार गिराया गया। दोनों देशों के दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। हेलमंद और कुनार में हुए हवाई हमले पाकिस्तान की ओर से गुरुवार को अफगानिस्तान के हेलमंद और कुनार प्रांतों में एयरस्ट्राइक की गई। अफगान प्रशासन के मुताबिक हमलों में रिहायशी इलाकों को भी नुकसान पहुंचा और कई नागरिक हताहत हुए। काबुल ने इसे अपनी संप्रभुता का उल्लंघन बताया है। काबुल का दावा- 9 नागरिकों की मौत अफगान अधिकारियों ने दावा किया कि पाकिस्तानी हमलों में 9 नागरिक मारे गए और 11 अन्य घायल हुए। अफगान पक्ष के अनुसार मृतकों में महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं। हालांकि पाकिस्तान ने इन दावों को स्वीकार नहीं किया है। पाकिस्तान ने नागरिकों की मौत से किया इनकार पाकिस्तान के सूचना मंत्रालय ने कहा कि उसकी कार्रवाई विशेष रूप से आतंकवादी ठिकानों के खिलाफ थी। इस्लामाबाद का दावा है कि हवाई हमलों में 22 कथित आतंकवादी मारे गए और हथियारों के भंडार नष्ट किए गए। पाकिस्तान ने कहा कि उसकी कार्रवाई में किसी नागरिक की मौत नहीं हुई। TTP को लेकर दोनों देशों में बढ़ा विवाद पाकिस्तान लंबे समय से आरोप लगाता रहा है कि Tehrik-e-Taliban Pakistan यानी TTP के लड़ाके अफगानिस्तान की जमीन का इस्तेमाल पाकिस्तान में हमलों की योजना बनाने के लिए कर रहे हैं। अफगानिस्तान की तालिबान सरकार इन आरोपों से इनकार करती रही है और कहती है कि वह किसी भी समूह को पड़ोसी देशों के खिलाफ अपनी जमीन इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं देती। हाल के दिनों में लगातार बढ़ा तनाव पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच हाल के हफ्तों में सीमा पर झड़पें और हवाई हमले लगातार बढ़े हैं। 24 सितंबर को भी पाकिस्तान ने अफगानिस्तान में कई ठिकानों पर एयरस्ट्राइक की थी। उस समय पाकिस्तान ने दावा किया था कि उसने ड्रोन लॉन्च करने वाले ठिकानों को निशाना बनाया, जबकि अफगान अधिकारियों ने नागरिकों की मौत की बात कही थी। अफगानिस्तान ने पाकिस्तान पर लगाए गंभीर आरोप अफगान सरकार ने पाकिस्तान की कार्रवाई को आक्रामक कदम बताया है और कहा है कि इस तरह के हमले अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन हैं। काबुल ने यह भी कहा है कि अगर इस तरह के हमले जारी रहे तो जवाबी कार्रवाई की जा सकती है। सीमा पार हिंसा में बढ़ रहा नागरिक नुकसान संयुक्त राष्ट्र के आंकड़ों के मुताबिक इस साल पाकिस्तान-अफगानिस्तान सीमा पर हिंसा में बड़ी संख्या में नागरिक प्रभावित हुए हैं। AP की रिपोर्ट के अनुसार इस साल सीमा पार हिंसा से अफगानिस्तान में 1,100 से ज्यादा नागरिक हताहत हुए हैं। आतंकवादी समूहों को लेकर आमने-सामने पाकिस्तान और अफगानिस्तान पाकिस्तान का कहना है कि अफगानिस्तान में मौजूद TTP और अन्य समूह उसकी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा हैं। दूसरी ओर अफगानिस्तान भी पाकिस्तान पर ऐसे लड़ाकों को समर्थन देने का आरोप लगा रहा है जो उसकी सीमा में घुसपैठ करते हैं। हाल ही में अफगान रक्षा मंत्रालय ने दावा किया कि पाकिस्तान की ओर से सीमा पार करने वाले दर्जनों लड़ाकों को मार गिराया गया। दोनों देशों के बीच और बढ़ सकता है तनाव ताजा एयरस्ट्राइक के बाद पाकिस्तान और अफगानिस्तान के रिश्तों में तनाव और बढ़ने की आशंका है। दोनों देशों की ओर से एक-दूसरे पर आतंकवादी समूहों को संरक्षण देने के आरोप लगाए जा रहे हैं। फिलहाल नागरिक मौतों और आतंकियों के मारे जाने से जुड़े आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। source – Associated Press / Reuters जय राष्ट्र न्यूज़

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Meerut Blue Drum Murder Case: मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला दोषी करार, सौरभ राजपूत हत्याकांड में 14 अक्टूबर को सजा

मेरठ: चर्चित Blue Drum Murder Case में मेरठ की जिला एवं सत्र अदालत ने मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को सौरभ राजपूत की हत्या का दोषी ठहराया है। अदालत ने दोनों को हत्या और सबूत मिटाने से जुड़े आरोपों में दोषी माना। सजा का ऐलान 14 अक्टूबर 2026 को किया जाएगा। मामले की सुनवाई 100 से ज्यादा तारीखों तक चली और 22 गवाहों के बयान दर्ज किए गए। पत्नी और प्रेमी को कोर्ट ने ठहराया दोषी मेरठ के जिला एवं सत्र न्यायाधीश अरविंद कुमार मिश्रा की अदालत ने मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को सौरभ राजपूत की हत्या में दोषी करार दिया। दोनों ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अदालत की कार्यवाही में हिस्सा लिया। अभियोजन पक्ष ने कोर्ट के सामने गवाहों के बयान, फॉरेंसिक साक्ष्य और अन्य सबूत पेश किए। 14 अक्टूबर को होगा सजा का ऐलान दोषसिद्धि के बाद अब अदालत दोनों की सजा तय करेगी। अदालत ने 14 अक्टूबर 2026 की तारीख सजा सुनाने के लिए तय की है। अभियोजन पक्ष ने संकेत दिया है कि वह कठोरतम सजा की मांग करेगा। मार्च 2025 में हुई थी सौरभ राजपूत की हत्या मामला मार्च 2025 का है। सौरभ राजपूत अपनी पत्नी और बेटी के साथ समय बिताने के लिए विदेश से मेरठ लौटे थे। अभियोजन के अनुसार मुस्कान ने साहिल के साथ मिलकर सौरभ की हत्या की योजना बनाई। कोर्ट ने ट्रायल के बाद दोनों को अपराध में दोषी पाया। ब्लू ड्रम में मिला था शव हत्या के बाद सौरभ के शव के टुकड़े कर उन्हें एक नीले प्लास्टिक ड्रम में रखा गया था। ड्रम को सीमेंट और रेत से भरकर शव छिपाने की कोशिश की गई थी। इसी वजह से यह मामला देशभर में Blue Drum Murder Case के नाम से चर्चित हुआ। हत्या के बाद हिमाचल चले गए थे दोनों जांच के दौरान सामने आया था कि वारदात के बाद मुस्कान और साहिल हिमाचल प्रदेश चले गए थे। बाद में पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार किया और मामले में विस्तृत जांच शुरू हुई। पुलिस ने हत्या, आपराधिक साजिश और सबूत मिटाने से जुड़े पहलुओं को चार्जशीट में शामिल किया। 126 सुनवाई और 22 गवाह इस हाई-प्रोफाइल मामले की सुनवाई करीब 13 महीने चली। रिपोर्टों के अनुसार कोर्ट में कुल 126 सुनवाई हुईं और अभियोजन पक्ष की ओर से 22 गवाहों के बयान दर्ज कराए गए। इसके बाद अदालत ने दोनों आरोपियों को दोषी ठहराया। करीब 1000 पन्नों की चार्जशीट पुलिस ने इस मामले में विस्तृत चार्जशीट दाखिल की थी। रिपोर्टों के मुताबिक चार्जशीट करीब 1000 पन्नों की थी, जिसमें हत्या की योजना, घटनास्थल से जुड़े साक्ष्य, फॉरेंसिक रिपोर्ट और आरोपियों की गतिविधियों से जुड़ी जानकारी शामिल थी। परिवार ने फैसले पर जताया संतोष दोषसिद्धि के बाद सौरभ राजपूत के परिवार ने फैसले पर प्रतिक्रिया दी। परिवार ने कहा कि लंबे इंतजार के बाद न्याय की दिशा में बड़ा कदम सामने आया है। अब परिवार की नजर 14 अक्टूबर को होने वाली सजा की घोषणा पर है। अब सजा पर टिकी निगाहें अदालत ने फिलहाल केवल दोषसिद्धि का फैसला सुनाया है। दोनों दोषियों को कितनी सजा मिलेगी, इसका फैसला 14 अक्टूबर को होगा। मामले की गंभीरता और अपराध के तरीके को देखते हुए अभियोजन पक्ष कठोर सजा की मांग कर रहा है, जबकि अंतिम निर्णय अदालत करेगी। source – The Indian Express / The Times of India / Hindustan Times / India Today / NDTV जय राष्ट्र न्यूज़

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केरल में कांग्रेस-BJP टकराव तेज, पार्टी कार्यालयों और नेताओं पर हमले के आरोप; तिरुवनंतपुरम में बढ़ा तनाव

तिरुवनंतपुरम: केरल में कांग्रेस और BJP के बीच राजनीतिक तनाव बढ़ गया है। तिरुवनंतपुरम में कांग्रेस के जिला कार्यालय पर पथराव और एक अन्य पार्टी कार्यालय में आग लगाने की घटना सामने आई, जबकि BJP ने आरोप लगाया कि उसके प्रदेश नेताओं और कार्यकर्ताओं पर कांग्रेस समर्थकों ने हमला किया। पुलिस ने अलग-अलग घटनाओं की जांच शुरू कर दी है और राजधानी के संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा बढ़ाई गई है। कांग्रेस के DCC कार्यालय पर पथराव तिरुवनंतपुरम स्थित District Congress Committee यानी DCC कार्यालय पर तड़के कथित तौर पर पत्थर फेंके गए। हमले में कार्यालय की खिड़कियों के शीशे टूट गए। पुलिस CCTV फुटेज की जांच कर हमलावरों की पहचान करने की कोशिश कर रही है। कांग्रेस ने BJP कार्यकर्ताओं पर लगाया आरोप कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि पार्टी कार्यालयों पर हुए हमलों के पीछे BJP से जुड़े कार्यकर्ता थे। हालांकि पुलिस जांच पूरी होने से पहले हमलावरों की पहचान को अंतिम रूप से स्थापित नहीं किया गया है। कांग्रेस ने दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। अनावूर कांग्रेस कार्यालय में आग लगाने का मामला अनावूर स्थित कांग्रेस मंडलम समिति कार्यालय में आग लगाने की भी घटना सामने आई। इस मामले में पुलिस ने एक BJP कार्यकर्ता को गिरफ्तार किया है। रिपोर्टों के अनुसार कार्यालय परिसर में लगे पोस्टरों और अन्य सामग्री को नुकसान पहुंचा। BJP ने कांग्रेस पर लगाए जवाबी आरोप दूसरी ओर BJP ने आरोप लगाया कि उसके तिरुवनंतपुरम दक्षिण जिला अध्यक्ष मूकम्पलमूडु बीजू पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने हमला किया। BJP प्रदेश अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर ने घटना की निंदा करते हुए पुलिस से आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। यह BJP का आरोप है और मामले की पुलिस जांच जारी है। BJP नेता की गाड़ी पर भी हमले का आरोप BJP ने यह भी आरोप लगाया कि पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य पी के कृष्णदास की गाड़ी को नेय्याट्टिनकारा इलाके में नुकसान पहुंचाया गया। पार्टी का दावा है कि घटना में कांग्रेस कार्यकर्ता शामिल थे। इसके बाद BJP ने राज्यव्यापी विरोध कार्यक्रम की घोषणा की। अमित शाह के खिलाफ प्रदर्शन के बाद बढ़ा विवाद राजनीतिक तनाव की शुरुआत केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ काले झंडे दिखाने से जुड़े विरोध प्रदर्शनों के बाद तेज हुई। इसके बाद BJP और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच कई स्थानों पर झड़प और विरोध प्रदर्शन की घटनाएं सामने आईं। दोनों दल एक-दूसरे पर राजनीतिक हिंसा को बढ़ावा देने का आरोप लगा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने हिंसा की निंदा की केरल के मुख्यमंत्री वी डी सतीशन ने राजनीतिक कार्यालयों पर हमलों की निंदा करते हुए कहा कि इस तरह की घटनाओं का राज्य की लोकतांत्रिक राजनीतिक संस्कृति में स्थान नहीं होना चाहिए। उन्होंने DCC कार्यालय का दौरा कर नुकसान का जायजा भी लिया। गृह मंत्री ने दिया कार्रवाई का भरोसा राज्य के गृह मंत्री रमेश चेन्निथला ने भी कांग्रेस कार्यालय पर हुए हमले की निंदा की। उन्होंने कहा कि पुलिस CCTV फुटेज और अन्य साक्ष्यों की जांच कर रही है और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। Youth Congress और SFI के बीच भी झड़प इसी राजनीतिक तनाव के बीच तिरुवनंतपुरम में Youth Congress और SFI कार्यकर्ताओं के बीच भी हिंसक झड़प हुई। दोनों पक्षों की ओर से पत्थर और अन्य वस्तुएं फेंके जाने के बाद पुलिस ने लाठीचार्ज और आंसू गैस का इस्तेमाल किया। एक SFI कार्यकर्ता और एक पुलिसकर्मी के घायल होने की सूचना दी गई। पुलिस ने बढ़ाई सुरक्षा लगातार राजनीतिक घटनाओं को देखते हुए तिरुवनंतपुरम के University College, पार्टी कार्यालयों और अन्य संवेदनशील स्थानों पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है। पुलिस अलग-अलग हमलों और झड़पों की जांच कर रही है। फिलहाल दोनों राजनीतिक दलों की ओर से लगाए गए कई आरोप जांच के अधीन हैं। source – PTI / The Times of India / The Indian Express जय राष्ट्र न्यूज़

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INDIA Bloc की बैठक में विपक्षी एकता पर जोर, राहुल गांधी और ममता बनर्जी समेत नेताओं ने आगे की रणनीति पर चर्चा की

नई दिल्ली: SIR और चुनाव आयोग को लेकर जारी राजनीतिक विवाद के बीच INDIA Bloc के शीर्ष नेताओं ने दिल्ली में बैठक कर विपक्षी एकता और आगे की संयुक्त रणनीति पर चर्चा की। बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, सोनिया गांधी, राहुल गांधी और ममता बनर्जी समेत कई विपक्षी दलों के नेता शामिल हुए। बैठक का मुख्य फोकस चुनावी प्रक्रिया, मतदाता सूची में बदलाव और संयुक्त विरोध कार्यक्रमों पर रहा। दिल्ली में हुई विपक्षी दलों की अहम बैठक INDIA Bloc की इस बैठक में कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, CPI, CPI(M), NCP(SP), शिवसेना (UBT), RJD, JMM और अन्य विपक्षी दलों के प्रतिनिधि शामिल हुए। बैठक का उद्देश्य चुनाव आयोग और SIR से जुड़े विवाद पर एक साझा राजनीतिक रणनीति तैयार करना और विपक्षी दलों के बीच समन्वय मजबूत करना था। राहुल गांधी और ममता बनर्जी रहे प्रमुख चेहरों में कांग्रेस नेता राहुल गांधी और तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी बैठक के प्रमुख नेताओं में शामिल रहे। दोनों नेताओं ने मतदाता सूची और चुनावी प्रक्रिया को लेकर अपनी-अपनी चिंतियां सामने रखीं और विपक्षी दलों के संयुक्त अभियान की जरूरत पर जोर दिया। विपक्ष द्वारा लगाए गए आरोपों को चुनाव आयोग और सत्तारूढ़ पक्ष ने स्वीकार नहीं किया है। SIR बना बैठक का मुख्य मुद्दा Special Intensive Revision यानी SIR को लेकर विपक्ष लगातार सवाल उठा रहा है। INDIA Bloc के नेताओं ने आरोप लगाया है कि मतदाता सूची में नाम हटाने और जोड़ने की प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी रही है। विपक्ष ने pre-SIR electoral rolls बहाल करने और बाहर हुए मतदाताओं के लिए प्रभावी appeal mechanism की मांग भी रखी। Paper Ballot की मांग फिर उठी बैठक में विपक्षी दलों ने EVM की जगह paper ballot से चुनाव कराने की मांग भी दोहराई। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि बैठक में शामिल दलों के बीच इस मुद्दे पर व्यापक सहमति बनी। विपक्ष इसे चुनावी पारदर्शिता से जोड़ रहा है, जबकि भारत में EVM की वैधता और उपयोग पर चुनाव आयोग का अलग आधिकारिक रुख रहा है। 2 अक्टूबर से देशव्यापी विरोध की रणनीति बैठक के बाद INDIA Bloc ने 2 अक्टूबर से देशव्यापी विरोध अभियान शुरू करने की घोषणा की। विपक्ष ने अलग-अलग राज्यों और जिलों में प्रदर्शन, जनसभाएं और मार्च आयोजित करने की योजना बनाई है। इन कार्यक्रमों का केंद्र SIR और चुनाव आयोग से जुड़े मुद्दे रहेंगे। चुनाव आयोग तक मार्च की तैयारी INDIA Bloc के सांसदों ने दिल्ली में चुनाव आयोग मुख्यालय तक मार्च करने की भी योजना बनाई है। इस कार्यक्रम के जरिए विपक्ष अपने सवाल और मांगें सीधे चुनाव आयोग के सामने रखने की तैयारी कर रहा है। विपक्ष की रणनीति आने वाले दिनों में SIR विवाद को राष्ट्रीय राजनीतिक बहस के केंद्र में बनाए रखने की है। CEC ज्ञानेश कुमार को लेकर भी चर्चा बैठक में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर विपक्षी दलों ने कड़ा रुख अपनाया। कुछ विपक्षी नेताओं ने उनके इस्तीफे की मांग की, जबकि इससे पहले उनके खिलाफ संसदीय कार्रवाई की संभावना पर भी चर्चा हुई थी। हालांकि कुछ रिपोर्टों के अनुसार विपक्ष इस विकल्प को फिलहाल टाल भी सकता है। विपक्षी एकता दिखाने की कोशिश बैठक को INDIA Bloc के लिए राजनीतिक एकता दिखाने के प्रयास के रूप में भी देखा जा रहा है। अलग-अलग राज्यों में विपक्षी दलों के बीच सीट बंटवारे और स्थानीय राजनीतिक मतभेद मौजूद हैं, लेकिन SIR और चुनाव आयोग से जुड़े मुद्दे पर कई दल साझा मंच पर दिखाई दिए। आगे भी जारी रह सकता है संयुक्त अभियान INDIA Bloc ने संकेत दिया है कि उसका अभियान केवल एक दिन के प्रदर्शन तक सीमित नहीं रहेगा। आने वाले हफ्तों में विपक्ष अलग-अलग राज्यों में कार्यक्रम आयोजित कर सकता है और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों को राजनीतिक एजेंडे में प्रमुखता से उठाने की तैयारी कर रहा है। source – The Indian Express / Hindustan Times / Times of India / India Today जय राष्ट्र न्यूज़

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SIR विवाद पर INDIA गठबंधन का बड़ा ऐलान, 2 अक्टूबर से देशव्यापी प्रदर्शन; 6 अक्टूबर को चुनाव आयोग तक मार्च

नई दिल्ली: मतदाता सूची के Special Intensive Revision यानी SIR को लेकर विपक्षी INDIA गठबंधन ने बड़ा आंदोलन शुरू करने का ऐलान किया है। गठबंधन ने 2 से 8 अक्टूबर तक देशभर में ‘Save Democracy’ अभियान चलाने का फैसला किया है। इसके तहत जिला स्तर पर प्रदर्शन होंगे और 6 अक्टूबर को विपक्षी सांसद दिल्ली में चुनाव आयोग मुख्यालय तक मार्च करेंगे। 2 अक्टूबर से शुरू होगा देशव्यापी अभियान INDIA गठबंधन ने तय किया है कि 2 अक्टूबर से 8 अक्टूबर तक अलग-अलग राज्यों और जिलों में विरोध प्रदर्शन आयोजित किए जाएंगे। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन किए जाएंगे और विपक्षी दल SIR प्रक्रिया तथा चुनाव आयोग के हालिया फैसलों को लेकर अपनी आपत्तियां जनता के बीच ले जाएंगे। 6 अक्टूबर को चुनाव आयोग तक मार्च आंदोलन के सबसे बड़े कार्यक्रमों में से एक 6 अक्टूबर को दिल्ली में होगा। INDIA गठबंधन के सांसद चुनाव आयोग मुख्यालय तक मार्च करेंगे और SIR प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों को आयोग के सामने उठाएंगे। विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची में बदलावों को लेकर सवाल उठाए हैं। SIR को लेकर विपक्ष ने उठाए सवाल INDIA गठबंधन का आरोप है कि Special Intensive Revision की प्रक्रिया में मतदाता सूची से नाम हटाने और नए मतदाताओं के पंजीकरण से जुड़े फैसलों में पारदर्शिता की कमी रही है। विपक्ष ने हाल में सामने आई उन रिपोर्टों का भी उल्लेख किया है जिनमें दावा किया गया कि चुनाव आयोग के दो सदस्यों ने SIR से जुड़े कुछ फैसलों पर आपत्तियां दर्ज की थीं। चुनाव आयोग की ओर से विपक्ष के इन राजनीतिक आरोपों को स्वीकार नहीं किया गया है। INDIA गठबंधन ने रखीं छह प्रमुख मांगें बैठक के बाद विपक्षी दलों ने छह प्रमुख मांगों और आगे की राजनीतिक रणनीति की घोषणा की। इनमें SIR और कथित चुनावी अनियमितताओं से जुड़े मामलों की सुप्रीम कोर्ट में जल्द सुनवाई की मांग, चुनाव आयोग के सामने विरोध प्रदर्शन और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मिलने की योजना भी शामिल है। राष्ट्रपति से मिलने की भी तैयारी INDIA गठबंधन के नेताओं ने अक्टूबर के दूसरे सप्ताह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात के लिए समय मांगने की बात कही है। विपक्षी नेता चुनाव और संवैधानिक संस्थाओं से जुड़े अपने सवाल राष्ट्रपति के सामने रखने की योजना बना रहे हैं। राहुल गांधी ने विपक्षी एकता पर दिया जोर बैठक के दौरान कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कहा कि INDIA गठबंधन के नेता मिलकर चुनावी प्रक्रिया और लोकतांत्रिक संस्थाओं से जुड़े मुद्दों को उठाते रहेंगे। उन्होंने विपक्ष की इस लड़ाई को किसी एक नेता या दल के बजाय लोकतांत्रिक व्यवस्था से जुड़ा मुद्दा बताया। यह विपक्ष का राजनीतिक पक्ष है और इन आरोपों पर संबंधित संस्थाओं तथा सत्तारूढ़ पक्ष की अलग प्रतिक्रिया रही है। ममता बनर्जी ने भी चुनाव आयोग पर साधा निशाना पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी SIR को लेकर चुनाव आयोग की आलोचना की और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की। उन्होंने कहा कि विपक्ष इस मुद्दे पर एकजुट है और आंदोलन को आगे बढ़ाया जाएगा। BJP ने विपक्ष के अभियान पर किया पलटवार INDIA गठबंधन की घोषणा के बाद BJP नेताओं ने विपक्ष के आरोपों को खारिज किया और आंदोलन को राजनीतिक बताया। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने विपक्ष के ‘Save Democracy’ अभियान पर कटाक्ष करते हुए इसे राजनीतिक परिवारों को बचाने की कोशिश बताया। यह BJP का राजनीतिक जवाब है, जबकि विपक्ष इसे चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता से जुड़ा आंदोलन बता रहा है। अक्टूबर-नवंबर में बड़ी रैलियों की भी योजना INDIA गठबंधन सिर्फ एक सप्ताह के प्रदर्शन तक सीमित नहीं रहेगा। विपक्ष ने अक्टूबर और नवंबर में अलग-अलग स्थानों पर बड़ी रैलियां आयोजित करने की भी योजना बनाई है। इन कार्यक्रमों में मतदाता सूची, SIR और विपक्ष द्वारा लगाए जा रहे कथित ‘vote chori’ के आरोप प्रमुख मुद्दे रहेंगे। SIR विवाद पर बढ़ सकता है राजनीतिक टकराव 2 अक्टूबर से शुरू होने वाले कार्यक्रमों और 6 अक्टूबर के चुनाव आयोग मार्च के चलते SIR विवाद आने वाले दिनों में राष्ट्रीय राजनीति का बड़ा मुद्दा बना रह सकता है। विपक्ष जहां मतदाता सूची में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग कर रहा है, वहीं इस मुद्दे पर लगाए गए आरोपों की सत्यता और कानूनी स्थिति संबंधित संस्थाओं तथा अदालतों की प्रक्रिया से तय होगी। source – Reuters / India Today / The Statesman / The Economic Times जय राष्ट्र न्यूज़

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PM मोदी ने भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मच्छर की बहादुरी की तारीफ की, Flydubai विमान में कथित crash attempt से टली बड़ी त्रासदी

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने Flydubai के भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मच्छर की बहादुरी की प्रशंसा की है। दुबई से तेल अवीव जा रहे विमान में उनके सह-पायलट ने कथित तौर पर उन पर हमला किया और विमान को दुर्घटनाग्रस्त करने का प्रयास किया। गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद कैप्टन मच्छर ने cockpit का दरवाजा खोलने में सफलता हासिल की, जिसके बाद यात्रियों और अन्य चालक दल के सदस्यों ने स्थिति को नियंत्रित करने में मदद की। विमान में 174 यात्री सवार थे। PM मोदी ने कैप्टन स्मित को बताया ‘हीरो’ प्रधानमंत्री मोदी ने 1 अक्टूबर को कैप्टन स्मित मच्छर की बहादुरी की तारीफ करते हुए कहा कि गंभीर खतरे और घायल होने के बावजूद उन्होंने दूसरों की जान बचाने का साहस दिखाया। प्रधानमंत्री ने कहा कि उनके साहस से सैकड़ों लोगों की जान बची और एक बड़ी त्रासदी टल गई। उन्होंने कैप्टन मच्छर के जल्द स्वस्थ होने की कामना भी की। दुबई से तेल अवीव जा रहा था विमान Flydubai का विमान दुबई से इजरायल के तेल अवीव जा रहा था। उड़ान के दौरान cockpit में दोनों पायलटों के बीच हिंसक घटना हुई। प्रारंभिक रिपोर्टों और अधिकारियों के बयानों के अनुसार सह-पायलट ने कथित तौर पर कैप्टन मच्छर पर धारदार हथियार से हमला किया। इसी दौरान विमान तेजी से नीचे आने लगा, जिससे यात्रियों में अफरा-तफरी मच गई। गंभीर रूप से घायल हुए कैप्टन स्मित हमले में कैप्टन स्मित मच्छर गंभीर रूप से घायल हो गए। इसके बावजूद उन्होंने cockpit का दरवाजा खोलने में सफलता हासिल की। दरवाजा खुलने के बाद यात्रियों, crew members और विमान में मौजूद off-duty pilots को cockpit तक पहुंचने का मौका मिला। इसके बाद हमलावर को काबू में किया गया और विमान का नियंत्रण संभाला गया। तेजी से नीचे आया विमान घटना के दौरान Boeing 737 विमान ने बहुत तेजी से ऊंचाई खोई। अलग-अलग शुरुआती रिपोर्टों में गिरावट की मात्रा को लेकर अलग आंकड़े सामने आए हैं, इसलिए इसकी सटीक तकनीकी स्थिति आधिकारिक जांच के बाद ही स्पष्ट होगी। हालांकि विमान के अचानक नीचे आने और cockpit में संघर्ष होने की पुष्टि कई अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों में की गई है। 174 यात्रियों की जान बची विमान में कुल 174 यात्री सवार थे। स्थिति पर नियंत्रण पाने के बाद विमान को सुरक्षित रूप से सऊदी अरब के ताबुक में emergency landing कराई गई। यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाला गया, जबकि गंभीर रूप से घायल कैप्टन स्मित मच्छर को अस्पताल में भर्ती कराया गया। बाद में उनकी हालत स्थिर बताई गई। यात्रियों और off-duty pilots ने भी की मदद घटना के दौरान विमान में मौजूद कुछ यात्रियों और off-duty pilots ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। Cockpit का दरवाजा खुलने के बाद उन्होंने कथित हमलावर को काबू करने और विमान को स्थिर करने में crew की मदद की। इसके बाद विमान को सुरक्षित लैंड कराया गया। मुंबई के रहने वाले हैं कैप्टन स्मित मच्छर कैप्टन स्मित मच्छर मुंबई के रहने वाले हैं और उन्हें लंबा flying experience है। रिपोर्टों के अनुसार उन्होंने करीब 9,750 घंटे की उड़ान पूरी की है। Flydubai से जुड़ने से पहले वह करीब 11 वर्षों तक SpiceJet में भी काम कर चुके थे। अस्पताल में चल रहा इलाज घटना के बाद कैप्टन मच्छर को सऊदी अरब के अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनकी surgery हुई। भारतीय अधिकारियों ने उनके परिवार से संपर्क बनाए रखा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार उनकी हालत स्थिर है और उनका इलाज जारी है। आरोपी सह-पायलट हिरासत में रिपोर्टों के अनुसार कथित हमलावर सह-पायलट को सऊदी अधिकारियों ने हिरासत में लिया है और घटना की जांच की जा रही है। हमले के पीछे का मकसद अभी आधिकारिक जांच का विषय है। इसलिए इसे आतंकवादी हमला या किसी अन्य निश्चित उद्देश्य से जोड़ना जांच पूरी होने से पहले स्थापित तथ्य नहीं माना जा सकता। दुनियाभर में हो रही बहादुरी की चर्चा कैप्टन स्मित मच्छर की कार्रवाई की भारत के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा हो रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अलावा इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भी उनकी बहादुरी की तारीफ की और यात्रियों की जान बचाने में उनकी भूमिका का उल्लेख किया। जांच के बाद स्पष्ट होगी पूरी घटना फिलहाल सामने आई जानकारी प्रत्यक्षदर्शियों, अधिकारियों और प्रारंभिक रिपोर्टों पर आधारित है। विमान के तेजी से नीचे आने, cockpit में हुए संघर्ष और सह-पायलट के कथित इरादे से जुड़े सभी पहलुओं की अंतिम स्थिति आधिकारिक जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी। source – The Indian Express / Reuters / Associated Press / The Guardian / Flydubai जय राष्ट्र न्यूज़

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मस्तीपुर, बिहार | बाढ़ के बीच खुले में लगाए गए अस्थायी शौचालय, निजता पर उठे सवाल

मस्तीपुर, बिहार: बाढ़ से प्रभावित इलाकों में लोगों को राहत पहुंचाने के लिए अस्थायी व्यवस्थाएं की जा रही हैं, लेकिन मस्तीपुर से सामने आई खुले स्थान पर लगाए गए अस्थायी शौचालयों की तस्वीरों ने निजता और सम्मान से जुड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। बाढ़ जैसी आपदा के बीच शौचालय की व्यवस्था बेहद जरूरी है, लेकिन पर्याप्त पर्दा और सुरक्षित स्थान नहीं होने पर विशेष रूप से महिलाओं और किशोरियों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। खुले स्थान पर शौचालय की व्यवस्था पर सवाल सामने आए दृश्यों में अस्थायी शौचालय खुले इलाके में स्थापित दिखाई देते हैं। ऐसे में इनके आसपास पर्याप्त घेराबंदी और गोपनीयता की व्यवस्था को लेकर सवाल उठ रहे हैं। राहत शिविरों और बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में शौचालय उपलब्ध कराना जरूरी है, लेकिन केवल ढांचा खड़ा कर देना पर्याप्त नहीं माना जाता। लोगों की निजता, सुरक्षा और स्वच्छता भी राहत व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा होती है। महिलाओं के लिए सबसे बड़ी चुनौती निजता बाढ़ के दौरान घरों में पानी भरने के बाद बड़ी संख्या में परिवार सड़कों, तटबंधों या ऊंचे स्थानों पर शरण लेने को मजबूर होते हैं। ऐसी परिस्थितियों में महिलाओं के लिए शौच, स्नान और कपड़े बदलने जैसी सामान्य जरूरतें भी बड़ी समस्या बन जाती हैं। बिहार के बाढ़ प्रभावित इलाकों पर पहले की रिपोर्टों में भी महिलाओं ने सुरक्षित और निजी शौचालयों की कमी को गंभीर परेशानी बताया है। अस्थायी शौचालय के साथ पर्दे की व्यवस्था जरूरी आपदा प्रभावित क्षेत्रों में बनाए जाने वाले अस्थायी शौचालयों के आसपास उचित घेराबंदी, दरवाजे और पर्याप्त निजी स्थान की व्यवस्था महत्वपूर्ण होती है। महिलाओं और पुरुषों के लिए अलग-अलग सुविधाएं, पर्याप्त रोशनी और सुरक्षित रास्ता उपलब्ध होने से ऐसी व्यवस्थाओं का इस्तेमाल अधिक सुरक्षित तरीके से किया जा सकता है। बाढ़ में स्वच्छता भी बनती है बड़ी चुनौती बाढ़ का पानी उतरने या लंबे समय तक जमा रहने के दौरान साफ पानी और शौचालय जैसी सुविधाओं की कमी से स्वास्थ्य संबंधी खतरे भी बढ़ सकते हैं। गंदे पानी के संपर्क, खुले में शौच और अस्वच्छ वातावरण के कारण संक्रमण और जलजनित बीमारियों का जोखिम बढ़ जाता है। इसलिए राहत कार्यों में भोजन और आश्रय के साथ स्वच्छता की सुविधाओं को भी प्राथमिकता देना जरूरी होता है। बिहार में पहले भी सामने आई है ऐसी समस्या बिहार के अलग-अलग बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में शौचालय की कमी पहले भी सामने आती रही है। सितंबर 2026 में पूर्णिया के कुछ प्रभावित क्षेत्रों में अस्थायी शौचालय बनाए गए थे, लेकिन स्थानीय स्तर पर उनकी संख्या जरूरत के मुकाबले कम होने की बात सामने आई थी। वहीं मुंगेर के बाढ़ प्रभावित इलाकों में भी महिलाओं के लिए शौचालय और निजता की समस्या की रिपोर्ट सामने आई है। महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान से जुड़ा मुद्दा बाढ़ के दौरान स्वच्छता व्यवस्था केवल स्वास्थ्य का सवाल नहीं है। महिलाओं और किशोरियों के लिए यह सुरक्षा और सम्मान से भी सीधे जुड़ा हुआ मुद्दा है। अगर अस्थायी शौचालय ऐसी जगह लगाए जाते हैं जहां पर्याप्त पर्दा या सुरक्षा नहीं है, तो कई महिलाएं उनका इस्तेमाल करने से बच सकती हैं। इससे उन्हें रात होने का इंतजार करने या अन्य असुरक्षित विकल्प अपनाने की मजबूरी हो सकती है। राहत व्यवस्था में Privacy-Friendly Toilets की जरूरत आपदा प्रबंधन के दौरान ऐसे अस्थायी शौचालयों की जरूरत होती है जिन्हें सुरक्षित और निजी तरीके से इस्तेमाल किया जा सके। शौचालय के चारों ओर पूरी घेराबंदी, अंदर से बंद होने वाला दरवाजा, पर्याप्त रोशनी, महिलाओं के लिए अलग सुविधा और नजदीक सुरक्षित पानी की व्यवस्था राहत शिविरों में बुनियादी जरूरतों का हिस्सा होनी चाहिए। स्थानीय घटना की स्वतंत्र पुष्टि अभी सीमित मस्तीपुर से जुड़े इस विशेष मामले को लेकर विस्तृत आधिकारिक जानकारी सार्वजनिक स्रोतों में सीमित है। इसलिए तस्वीरों या वीडियो के आधार पर यह स्पष्ट नहीं कहा जा सकता कि ये शौचालय किस विभाग या एजेंसी द्वारा लगाए गए अथवा बाद में इनके आसपास अतिरिक्त पर्दे या अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं या नहीं। हालांकि बिहार में बाढ़ के दौरान स्वच्छता और महिलाओं की निजता की समस्या कई रिपोर्टों और अध्ययनों में पहले भी दर्ज की जा चुकी है। source – बिहार आपदा प्रबंधन विभाग / Hindustan / Dainik Jagran / Down To Earth / UNICEF जय राष्ट्र न्यूज़

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उमर खालिद और शरजील इमाम को दिल्ली हाईकोर्ट से जमानत नहीं, 2020 दिल्ली दंगा साजिश मामले में याचिका खारिज

नई दिल्ली: दिल्ली हाईकोर्ट ने 30 सितंबर 2026 को उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिकाएं खारिज कर दीं। दोनों 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों से जुड़े कथित बड़ी साजिश मामले में आरोपी हैं और उनके खिलाफ गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम यानी UAPA समेत अन्य धाराओं के तहत मामला दर्ज है। अदालत ने कहा कि वह सुप्रीम कोर्ट द्वारा पहले तय की गई शर्तों से बंधी है। दिल्ली हाईकोर्ट ने नहीं दी राहत जस्टिस प्रतिभा एम सिंह और जस्टिस दिनेश भट्ट की पीठ ने दोनों की अपीलें खारिज करते हुए निचली अदालत के 4 जुलाई 2026 के आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया। उमर खालिद और शरजील इमाम ने ट्रायल कोर्ट द्वारा जमानत से इनकार किए जाने के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। सुप्रीम कोर्ट के जनवरी के आदेश का दिया हवाला हाईकोर्ट ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने 5 जनवरी 2026 को जमानत से इनकार करते हुए दोनों को कुछ निर्धारित परिस्थितियों में दोबारा जमानत मांगने की स्वतंत्रता दी थी। इन परिस्थितियों में संरक्षित गवाहों की गवाही पूरी होना या सुप्रीम कोर्ट के आदेश से एक वर्ष का समय पूरा होना शामिल था, जो भी पहले हो। हाईकोर्ट ने कहा कि वह इन शर्तों में बदलाव नहीं कर सकता। ‘Judicial Discipline’ का किया उल्लेख अदालत ने अपने फैसले में कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश को देखते हुए हाईकोर्ट न्यायिक अनुशासन से बंधा हुआ है। पीठ ने माना कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा दी गई स्वतंत्रता स्पष्ट और शर्तों से जुड़ी हुई थी, इसलिए वर्तमान परिस्थितियों में हाईकोर्ट उन शर्तों को संशोधित नहीं कर सकता। सह-आरोपियों से समानता का दावा भी खारिज उमर खालिद और शरजील इमाम की ओर से सह-आरोपी तस्लीम अहमद और खालिद सैफी को मिली राहत के आधार पर समानता का दावा किया गया था। हालांकि हाईकोर्ट ने कहा कि दोनों सह-आरोपियों की कथित भूमिका उमर खालिद और शरजील इमाम की कथित भूमिका से अलग है, इसलिए केवल समान मामले में आरोपी होने के आधार पर जमानत का दावा नहीं किया जा सकता। जुलाई में ट्रायल कोर्ट ने भी खारिज की थी जमानत इससे पहले 4 जुलाई 2026 को कड़कड़डूमा कोर्ट ने भी दोनों की जमानत याचिकाएं खारिज कर दी थीं। ट्रायल कोर्ट ने उस समय सुप्रीम कोर्ट के जनवरी के आदेश का उल्लेख करते हुए कहा था कि वह शीर्ष अदालत द्वारा तय शर्तों से अलग जाकर राहत नहीं दे सकता। लंबे समय से जेल में हैं दोनों आरोपी शरजील इमाम को जनवरी 2020 में गिरफ्तार किया गया था, जबकि उमर खालिद को सितंबर 2020 में गिरफ्तार किया गया। दोनों पर दिल्ली पुलिस ने फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए दंगों से जुड़ी कथित बड़ी साजिश का हिस्सा होने का आरोप लगाया है। दोनों ने आरोपों का विरोध किया है और लंबे समय से चल रही हिरासत तथा मुकदमे में देरी को जमानत के आधार के रूप में अदालतों के सामने रखा है। दिल्ली दंगों में 53 लोगों की हुई थी मौत फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में नागरिकता संशोधन कानून को लेकर विरोध और समर्थन प्रदर्शनों के बीच हिंसा भड़क गई थी। इन दंगों में 53 लोगों की मौत हुई थी और सैकड़ों लोग घायल हुए थे। इसके बाद दिल्ली पुलिस ने कथित बड़ी साजिश को लेकर अलग मामला दर्ज किया था, जिसमें कई लोगों को आरोपी बनाया गया। फिलहाल जेल में ही रहेंगे उमर खालिद और शरजील इमाम दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले के बाद दोनों को फिलहाल जमानत नहीं मिली है। अदालत का यह आदेश केवल जमानत के मुद्दे से संबंधित है। मामले में लगाए गए आरोपों पर अंतिम फैसला ट्रायल की प्रक्रिया और अदालत में पेश साक्ष्यों के आधार पर होगा। source – Delhi High Court / Hindustan Times / The Indian Express / NDTV जय राष्ट्र न्यूज़

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क्या बिहार में बाढ़ का स्थायी समाधान नहीं हो पा रहा? हर साल तबाही के पीछे नेपाल की नदियां, गाद और अधूरी परियोजनियां

पटना: बिहार में बाढ़ दशकों से बड़ी चुनौती बनी हुई है। खासकर उत्तर बिहार में कोसी, गंडक, बागमती, कमला और महानंदा जैसी नदियां हर मानसून में लाखों लोगों की जिंदगी प्रभावित करती हैं। सरकारें तटबंध, बैराज, जल निकासी और बाढ़ नियंत्रण परियोजनियों पर काम करती रही हैं, लेकिन अब तक ऐसा कोई एक उपाय सामने नहीं आया है जिससे राज्य को बाढ़ से पूरी तरह मुक्त किया जा सके। नेपाल में भारी बारिश से बढ़ता है बिहार की नदियों का जलस्तर उत्तर बिहार की कई प्रमुख नदियों का ऊपरी जलग्रहण क्षेत्र नेपाल में स्थित है। वहां भारी बारिश होने पर इन नदियों में अचानक पानी बढ़ जाता है और इसका असर बिहार के मैदानी इलाकों तक पहुंचता है। केंद्रीय जल आयोग ने भी संसद में बताया है कि उत्तर बिहार में बाढ़ का एक प्रमुख कारण नेपाल में स्थित ऊपरी जलग्रहण क्षेत्रों में भारी बारिश के बाद गंडक, बूढ़ी गंडक, बागमती, कमला, कोसी और महानंदा में बढ़ने वाला जलप्रवाह है। केवल तटबंध बनाना क्यों नहीं है पर्याप्त? बिहार में लंबे समय से बाढ़ नियंत्रण के लिए तटबंधों का इस्तेमाल किया जा रहा है। तटबंध कई क्षेत्रों को सामान्य बाढ़ से सुरक्षा देते हैं, लेकिन अत्यधिक जलप्रवाह, कटाव या संरचनात्मक नुकसान की स्थिति में समस्या गंभीर हो सकती है। इसके अलावा नदियों में लगातार गाद जमा होने से नदी तल ऊंचा होने और जल निकासी क्षमता प्रभावित होने की चुनौती भी बनी रहती है। इसलिए विशेषज्ञ लंबे समय से केवल तटबंधों के बजाय नदी बेसिन, ड्रेनेज और जल प्रबंधन को एक साथ देखने की जरूरत बताते रहे हैं। नेपाल में बड़े बांधों की योजना लंबे समय से चर्चा में भारत और नेपाल के बीच सप्तकोसी बहुउद्देशीय परियोजना और सुनकोसी-कमला डायवर्जन जैसी परियोजनियों पर वर्षों से अध्ययन चल रहा है। सितंबर 2026 से पहले उपलब्ध सरकारी जानकारी के अनुसार इन परियोजनाओं से जुड़े टोपोग्राफिकल, हाइड्रोलॉजिकल, भूकंपीय और अन्य कई तकनीकी अध्ययन पूरे किए जा चुके हैं, लेकिन परियोजनियां अभी उस स्तर तक नहीं पहुंची हैं जहां उन्हें बिहार की बाढ़ समस्या का तत्काल समाधान माना जा सके। भारत-नेपाल समन्वय क्यों है जरूरी? बिहार की बाढ़ केवल राज्य की सीमा के भीतर पैदा होने वाली समस्या नहीं है। कई नदियों का प्रवाह नेपाल से आता है, इसलिए दीर्घकालिक समाधान के लिए दोनों देशों के बीच जल प्रबंधन, बांध, बाढ़ पूर्वानुमान और नदी नियंत्रण पर सहयोग जरूरी है। भारत और नेपाल के बीच बाढ़ पूर्वानुमान, कोसी-गंडक परियोजनियों और जल संसाधन प्रबंधन के लिए कई द्विपक्षीय समितियां मौजूद हैं। जुलाई 2026 में केंद्र सरकार ने संसद को बताया था कि इन व्यवस्थाओं के माध्यम से दोनों देशों के बीच नदी और बाढ़ प्रबंधन से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की जाती है। 2025-26 में संयुक्त समिति की बैठक नहीं हुई हालांकि बाढ़ प्रबंधन में भारत-नेपाल सहयोग को महत्वपूर्ण माना जाता है, लेकिन सरकारी जानकारी के अनुसार वर्ष 2025-26 में संबंधित भारत-नेपाल संयुक्त समिति की कोई बैठक नहीं हुई। इसी जवाब में केंद्र सरकार ने यह भी कहा था कि स्थायी कोसी-गंडक बेसिन प्राधिकरण बनाने का कोई प्रस्ताव फिलहाल विचाराधीन नहीं है। पिछले तीन वर्षों में बाढ़ प्रबंधन और सीमावर्ती क्षेत्र कार्यक्रम के तहत बिहार को 206.77 करोड़ रुपये की केंद्रीय सहायता जारी की गई। बैराज और नदी परियोजनियों पर भी चल रहा काम बिहार में बाढ़ नियंत्रण के लिए केवल तटबंध ही नहीं, बल्कि बैराज, नदी लिंक और सिंचाई परियोजनियों पर भी काम करने की योजना है। 2024 के केंद्रीय बजट में कोसी-मेची इंट्रा-स्टेट लिंक सहित कई सिंचाई और बाढ़ नियंत्रण योजनाओं के लिए वित्तीय सहायता की घोषणा की गई थी। इसके साथ कोसी से जुड़ी बाढ़ नियंत्रण और सिंचाई परियोजनियों के सर्वेक्षण और जांच का भी प्रस्ताव रखा गया था। क्या नदियों की सफाई और गाद हटाना समाधान है? नदियों में गाद जमा होना बिहार की बाढ़ समस्या का एक महत्वपूर्ण पहलू है, लेकिन केवल बड़े पैमाने पर ड्रेजिंग करना हर नदी के लिए स्थायी समाधान नहीं माना जा सकता। नदी की प्रकृति, पानी का प्रवाह, गाद की मात्रा, पर्यावरण और लागत का अध्ययन करने के बाद ही अलग-अलग क्षेत्रों के लिए उपयुक्त कदम तय करने पड़ते हैं। साथ ही गांवों के तालाब, प्राकृतिक जल निकासी मार्ग और जलभराव वाले क्षेत्रों को सुरक्षित रखना भी जरूरी माना जाता है। बाढ़ को पूरी तरह रोकना मुश्किल, नुकसान कम करना संभव विशेषज्ञ दृष्टिकोण से बिहार में बाढ़ को पूरी तरह समाप्त करना व्यावहारिक रूप से कठिन है क्योंकि यह राज्य प्राकृतिक रूप से गंगा और उसकी हिमालयी सहायक नदियों के विशाल मैदानी क्षेत्र में स्थित है। लेकिन बेहतर बांध और बैराज प्रबंधन, मजबूत तटबंध, ड्रेनेज सुधार, बाढ़ पूर्वानुमान, जलाशय प्रबंधन, गाद पर वैज्ञानिक अध्ययन और भारत-नेपाल सहयोग के जरिए नुकसान को काफी कम किया जा सकता है। स्थायी समाधान के लिए एकीकृत रणनीति की जरूरत बिहार की बाढ़ समस्या का समाधान किसी एक बांध, तटबंध या नदी की सफाई से संभव नहीं दिखता। इसके लिए पूरे नदी बेसिन को ध्यान में रखते हुए दीर्घकालिक रणनीति की जरूरत है। इस रणनीति में नेपाल के साथ जल प्रबंधन समझौते, आधुनिक बाढ़ पूर्वानुमान व्यवस्था, नदी और ड्रेनेज नेटवर्क का वैज्ञानिक प्रबंधन, संवेदनशील तटबंधों की निगरानी और बाढ़ प्रभावित आबादी के लिए बेहतर पुनर्वास व्यवस्था शामिल करनी होगी। इसलिए सवाल यह नहीं है कि बिहार में बाढ़ को हमेशा के लिए पूरी तरह खत्म किया जा सकता है या नहीं, बल्कि यह है कि हर साल होने वाली तबाही और जान-माल के नुकसान को कितना कम किया जा सकता है। source – केंद्रीय जल आयोग / जल शक्ति मंत्रालय / गृह मंत्रालय / भारत सरकार जय राष्ट्र न्यूज़

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