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One Nation, One Election पर सुप्रीम कोर्ट ने संसदीय समिति के साथ बैठक रद्द की, संभावित Judicial Review का दिया हवाला

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने One Nation, One Election से जुड़े विधेयकों की जांच कर रही संयुक्त संसदीय समिति के साथ प्रस्तावित बैठक को रद्द कर दिया है। यह बैठक 6 अक्टूबर को प्रस्तावित थी, जिसमें Chief Justice of India और अन्य सुप्रीम कोर्ट जजों के साथ informal interaction की योजना थी। सुप्रीम कोर्ट प्रशासन ने कहा कि प्रस्तावित संवैधानिक संशोधन भविष्य में न्यायिक समीक्षा के दायरे में आ सकता है, इसलिए इस मुद्दे पर प्रशासनिक स्तर पर चर्चा करना उचित नहीं होगा। 6 अक्टूबर को प्रस्तावित थी बैठक Joint Parliamentary Committee ने 6 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट का दौरा प्रस्तावित किया था। एजेंडा में इसे “Local Study Visit” बताया गया था, जिसमें CJI और अन्य न्यायाधीशों से informal discussion का भी उल्लेख था। बाद में यह कार्यक्रम रद्द कर दिया गया। सुप्रीम कोर्ट ने Judicial Review का दिया हवाला सुप्रीम कोर्ट के Secretary General’s Office ने संसदीय समिति को बताया कि वरिष्ठ न्यायाधीशों ने प्रस्ताव पर विचार किया। इसके बाद यह राय बनी कि प्रस्तावित संवैधानिक संशोधन आगे चलकर सुप्रीम कोर्ट के सामने judicial review के लिए आ सकता है, इसलिए इस विषय पर administrative side पर चर्चा करना “expedient or desirable” नहीं होगा। किन विधेयकों की जांच कर रही है समिति? संसदीय समिति Constitution (129th Amendment) Bill, 2024 और Union Territories Laws (Amendment) Bill, 2024 की जांच कर रही है। इन विधेयकों का उद्देश्य लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के चुनाव एक साथ कराने के लिए संवैधानिक और कानूनी ढांचा तैयार करना है। PP Chaudhary की अध्यक्षता में बनी है JPC One Nation, One Election से जुड़े Bills की जांच करने वाली Joint Parliamentary Committee की अध्यक्षता BJP सांसद और पूर्व केंद्रीय कानून मंत्री P P Chaudhary कर रहे हैं। समिति में कुल 39 सदस्य शामिल हैं और इसे दिसंबर 2024 में गठित किया गया था। समिति प्रमुख ने कहा- Bill पर चर्चा उद्देश्य नहीं था P P Chaudhary ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट दौरे का उद्देश्य विधेयक पर औपचारिक चर्चा करना नहीं था। उनके मुताबिक यह visit समिति के सदस्यों को सुप्रीम कोर्ट और उसकी कार्यप्रणाली से परिचित कराने के लिए थी, खासकर उन सदस्यों के लिए जो पहले वहां नहीं गए थे। कपिल सिब्बल ने उठाई थी आपत्ति राज्यसभा सांसद और वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने प्रस्तावित बैठक पर आपत्ति जताई थी। उन्होंने कहा कि संसद कानून बनाएगी और यदि उस कानून की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी जाती है तो वही मामला सुप्रीम कोर्ट के सामने आ सकता है। ऐसे में sitting judges के साथ पहले से चर्चा separation of powers को लेकर सवाल खड़े कर सकती है। यह सिब्बल का संवैधानिक तर्क था। चार पूर्व CJI समिति के सामने दे चुके हैं राय समिति के सामने चार पूर्व Chief Justices of India भी अपनी राय रख चुके हैं। इनमें J S Khehar, Ranjan Gogoi, D Y Chandrachud और U U Lalit शामिल हैं। रिपोर्टों के अनुसार उन्होंने constitutional amendments के बाद simultaneous elections की संभावित वैधता पर विचार रखा, साथ ही Election Commission को मिलने वाली व्यापक शक्तियों को लेकर कुछ चिंताएं भी जताईं। One Nation, One Election क्या है? One Nation, One Election का उद्देश्य लोकसभा और राज्य विधानसभा चुनावों को एक ही समय पर या एक coordinated cycle में कराना है। इसके समर्थकों का तर्क है कि इससे बार-बार चुनाव कराने का खर्च और Model Code of Conduct के कारण प्रशासनिक रुकावट कम हो सकती है। दूसरी ओर आलोचक संघीय ढांचे, राज्यों की विधानसभाओं की अवधि और संवैधानिक जटिलताओं को लेकर सवाल उठाते हैं। अब समिति अपनी प्रक्रिया जारी रखेगी सुप्रीम कोर्ट के साथ प्रस्तावित interaction रद्द होने के बावजूद संसदीय समिति विधेयकों की जांच जारी रखेगी। समिति अलग-अलग संवैधानिक विशेषज्ञों, पूर्व न्यायाधीशों, राजनीतिक दलों और संबंधित संस्थानों की राय लेकर अपनी रिपोर्ट तैयार करेगी। भविष्य में सुप्रीम कोर्ट के सामने आ सकता है मामला अगर संसद भविष्य में One Nation, One Election से जुड़े संवैधानिक संशोधन पारित करती है और उन्हें अदालत में चुनौती दी जाती है, तो उनकी संवैधानिक वैधता पर सुप्रीम कोर्ट को फैसला करना पड़ सकता है। इसी संभावित स्थिति को देखते हुए शीर्ष अदालत ने मौजूदा informal interaction से दूरी बनाए रखने का फैसला किया। source – Supreme Court of India / The Indian Express / Hindustan Times / Bar & Bench जय राष्ट्र न्यूज़

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केरल के कासरगोड में borewell rig घर पर पलटा, दो प्रवासी मजदूरों की मौत; परिवार बाल-बाल बचा

कासरगोड: केरल के कासरगोड जिले के वेस्ट एलेरी स्थित वरक्कड़ इलाके में शनिवार तड़के एक borewell drilling rig से लैस वाहन अनियंत्रित होकर एक घर पर पलट गया, जिससे दो प्रवासी मजदूरों की मौत हो गई। हादसे में घर का एक हिस्सा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया, लेकिन अंदर मौजूद परिवार के सदस्य सुरक्षित बच गए। तड़के करीब 1 से 2 बजे हुआ हादसा पुलिस और स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार हादसा 3 अक्टूबर की तड़के हुआ। वाहन एक खड़ी ढलान से नीचे उतर रहा था, तभी चालक ने कथित तौर पर नियंत्रण खो दिया और rig-mounted truck सड़क से हटकर नीचे बने घर पर जा गिरा। दो प्रवासी मजदूरों की मौत मृतकों की पहचान देवेंद्र, निवासी मध्य प्रदेश, और मनासर, निवासी छत्तीसगढ़, के रूप में हुई है। दोनों borewell वाहन के साथ काम कर रहे थे। हादसे के बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। घर में मौजूद परिवार सुरक्षित बचा जिस घर पर वाहन पलटा, उसमें एक परिवार रह रहा था। तेज टक्कर से मकान का एक कमरा और छत का हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया, लेकिन अंदर मौजूद लोगों को चोट नहीं आई। स्थानीय लोगों ने इसे बड़ी दुर्घटना के बीच राहत की बात बताया। बिजली का खंभा भी हुआ क्षतिग्रस्त हादसे के दौरान वाहन ने एक बिजली के खंभे को भी टक्कर मारी। इससे इलाके में कुछ समय के लिए बिजली आपूर्ति प्रभावित हुई। rig और वाहन भी टक्कर में बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए। खड़ी ढलान और मोड़ पर उठे सवाल स्थानीय निवासियों का कहना है कि दुर्घटनास्थल के पास सड़क काफी खड़ी और संकरी है। कुछ लोगों ने सड़क के पास लगे transformer और मोड़ की बनावट को भी सुरक्षा के लिहाज से समस्या बताया है। स्थानीय लोगों का दावा है कि वे इस इलाके में road widening और transformer shifting की मांग पहले भी उठा चुके हैं। driver inattention की भी जांच एक स्थानीय अधिकारी ने शुरुआती तौर पर driver inattention को संभावित कारण बताया है। हालांकि पुलिस अभी यह जांच कर रही है कि दुर्घटना वाहन की तकनीकी खराबी, सड़क की स्थिति, चालक की गलती या किसी अन्य वजह से हुई। अंतिम कारण जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा। पुलिस ने मामला दर्ज किया घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और rescue personnel मौके पर पहुंचे। वाहन को हटाने और क्षेत्र को सुरक्षित करने की कार्रवाई की गई। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। शव पोस्टमार्टम के लिए भेजे गए दोनों मृत मजदूरों के शवों को आगे की कानूनी प्रक्रिया और पोस्टमार्टम के लिए Kanhangad District Hospital भेजा गया। वाहन मालिक को भी घटना की सूचना दे दी गई है। स्थानीय लोगों ने infrastructure सुधार की मांग की हादसे के बाद क्षेत्र में सड़क सुरक्षा को लेकर एक बार फिर सवाल उठे हैं। स्थानीय लोगों ने सड़क चौड़ी करने, transformer को सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट करने और steep stretch पर अतिरिक्त सुरक्षा उपाय करने की मांग की है ताकि भविष्य में ऐसी दुर्घटनाओं को रोका जा सके। source – PTI / The Indian Express / Onmanorama / The New Indian Express / Deccan Chronicle जय राष्ट्र न्यूज़

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पंजाब कांग्रेस में बड़ा बदलाव, अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग की जगह परगट सिंह बने प्रदेश अध्यक्ष

चंडीगढ़: कांग्रेस ने पंजाब में बड़ा संगठनात्मक बदलाव करते हुए पूर्व भारतीय हॉकी कप्तान और जालंधर कैंट से विधायक परगट सिंह को पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी का नया अध्यक्ष नियुक्त किया है। उन्होंने अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग की जगह ली है, जिन्होंने राहुल गांधी से मुलाकात के बाद अपना इस्तीफा सौंप दिया। यह बदलाव 2027 के पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी की संगठनात्मक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने दिया इस्तीफा अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने दिल्ली में राहुल गांधी से मुलाकात के बाद पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष पद से औपचारिक रूप से इस्तीफा दे दिया। वड़िंग अप्रैल 2022 से पंजाब कांग्रेस की कमान संभाल रहे थे और करीब साढ़े चार साल तक इस पद पर रहे। परगट सिंह को मिली नई जिम्मेदारी कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने परगट सिंह को पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी का नया अध्यक्ष नियुक्त किया। पार्टी ने उनकी नियुक्ति तत्काल प्रभाव से लागू कर दी है। वह अब 2027 विधानसभा चुनाव से पहले संगठन को मजबूत करने की जिम्मेदारी संभालेंगे। कौन हैं परगट सिंह? परगट सिंह पूर्व भारतीय हॉकी कप्तान और Olympian हैं। वह जालंधर कैंट विधानसभा सीट से तीन बार विधायक रह चुके हैं। राजनीति में आने से पहले उन्होंने भारतीय हॉकी टीम का नेतृत्व किया और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का प्रतिनिधित्व किया। पहले अकाली दल में थे परगट सिंह परगट सिंह ने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत Shiromani Akali Dal से की थी। उन्होंने 2012 में पहली बार जालंधर कैंट से विधानसभा चुनाव जीता। बाद में वह कांग्रेस में शामिल हुए और पंजाब सरकार में Sports और Education Minister भी रह चुके हैं। अंदरूनी गुटबाजी के बीच हुआ बदलाव पंजाब कांग्रेस में पिछले कुछ महीनों से वरिष्ठ नेताओं के बीच मतभेद और गुटबाजी की खबरें सामने आती रही थीं। कांग्रेस हाईकमान ने संगठन की स्थिति पर रिपोर्ट और आंतरिक consultations के बाद नेतृत्व में बदलाव का फैसला किया। सचिन पायलट की रिपोर्ट भी रही अहम पंजाब मामलों के AICC प्रभारी सचिन पायलट ने राज्य के नेताओं और कार्यकर्ताओं से बातचीत के बाद पार्टी नेतृत्व को संगठनात्मक स्थिति पर रिपोर्ट सौंपी थी। इसी प्रक्रिया के बाद प्रदेश अध्यक्ष बदलने का निर्णय लिया गया। वड़िंग ने इस्तीफा देने के बाद यह भी कहा कि उन्हें लगा कि सचिन पायलट नेतृत्व में बदलाव चाहते थे। 2027 चुनाव से पहले संगठन मजबूत करने की कोशिश पंजाब में अगला विधानसभा चुनाव 2027 में होना है। कांग्रेस नेतृत्व परगट सिंह के जरिए संगठन के अलग-अलग गुटों के बीच बेहतर समन्वय और चुनावी तैयारियों को गति देने की कोशिश कर रहा है। जातीय और क्षेत्रीय समीकरण भी महत्वपूर्ण परगट सिंह जाट सिख समुदाय से आते हैं और पार्टी में उनके चयन को पंजाब के सामाजिक और राजनीतिक समीकरणों के संदर्भ में भी देखा जा रहा है। उनका नाम पूर्व मंत्री विजय इंदर सिंगला समेत कई अन्य नेताओं के साथ प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए चर्चा में था। अब संगठनात्मक फेरबदल पर नजर परगट सिंह की नियुक्ति के बाद पंजाब कांग्रेस में आगे और संगठनात्मक बदलाव होने की संभावना पर भी नजर रहेगी। पार्टी के सामने सबसे बड़ी चुनौती आंतरिक मतभेद कम करने और 2027 विधानसभा चुनाव के लिए एकजुट संगठन तैयार करने की होगी। source – The Indian Express / Hindustan Times / The Times of India जय राष्ट्र न्यूज़

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गुजरात UCC को राष्ट्रपति की मंजूरी, शादी-तलाक से लेकर उत्तराधिकार और live-in तक एक समान कानूनी ढांचा

अहमदाबाद: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने Gujarat Uniform Civil Code (UCC) Bill, 2026 को मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही गुजरात में शादी, तलाक, उत्तराधिकार, गोद लेने और live-in relationships जैसे निजी नागरिक मामलों के लिए एक समान कानूनी ढांचे का रास्ता साफ हो गया है। हालांकि कानून तुरंत लागू नहीं होगा; इसके लिए राज्य सरकार को अलग से commencement notification जारी करनी होगी। राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद अंतिम विधायी बाधा पार गुजरात विधानसभा ने UCC Bill को मार्च 2026 में पारित किया था। राष्ट्रपति की मंजूरी 17 सितंबर को मिली और कानून को 1 अक्टूबर की extraordinary gazette में प्रकाशित किया गया। अब राज्य सरकार इसके लागू होने की तारीख तय करेगी। शादी और तलाक के लिए common framework नए कानून के तहत marriage और divorce से जुड़े मामलों के लिए समान statutory rules लागू किए जाएंगे। कानून में विवाह पंजीकरण को महत्वपूर्ण बनाया गया है और पुरुषों के लिए न्यूनतम विवाह आयु 21 वर्ष तथा महिलाओं के लिए 18 वर्ष तय रखी गई है। धार्मिक विवाह परंपराएं जारी रह सकती हैं, लेकिन विवाह को कानूनी नियमों का पालन करना होगा। एक से ज्यादा शादी पर रोक नए framework के तहत किसी व्यक्ति को पहली शादी कायम रहते दूसरी शादी करने की अनुमति नहीं होगी। Marriage registration के जरिए marital status का आधिकारिक record तैयार किया जाएगा, जिसका इस्तेमाल maintenance, inheritance और अन्य वैवाहिक विवादों में किया जा सकेगा। Live-in relationship का registration जरूरी गुजरात UCC में live-in relationships के लिए भी formal legal mechanism बनाया गया है। ऐसे रिश्ते में रहने वाले couples को designated Registrar के सामने joint statement जमा करना होगा। Relationship खत्म होने पर भी तय प्रक्रिया के तहत इसकी जानकारी देनी होगी। Live-in से जन्मे बच्चों को कानूनी अधिकार कानून में live-in relationship से जन्मे बच्चों को भी कानूनी पहचान और अधिकार दिए गए हैं। इन बच्चों को inheritance और family rights के मामलों में समान कानूनी दर्जा देने का प्रावधान किया गया है। बेटा-बेटी को समान inheritance rights उत्तराधिकार के मामले में भी बड़ा बदलाव किया गया है। अगर किसी व्यक्ति की बिना वसीयत मृत्यु होती है, तो spouse, children और parents को तय हिस्से के अनुसार संपत्ति में अधिकार मिलेगा। बेटा और बेटी दोनों को समान inheritance rights दिए गए हैं। Adoption और family rights भी दायरे में कानून marriage और divorce तक सीमित नहीं है। Adoption, succession, family rights और inheritance जैसे नागरिक मामलों को भी common statutory framework में शामिल किया गया है। धार्मिक रीति-रिवाज जारी रहेंगे UCC लागू होने के बाद Nikah, Saptapadi, Anand Karaj और अन्य customary marriage ceremonies पर रोक नहीं होगी। हालांकि इन धार्मिक या पारंपरिक विवाहों को statutory requirements और registration rules का पालन करना होगा। Scheduled Tribes को मिली छूट गुजरात UCC सभी नागरिकों पर समान रूप से लागू नहीं होगा। Scheduled Tribes और संविधान के Part XXI के तहत संरक्षित customary rights वाले समूहों को इसके दायरे से बाहर रखा गया है। राज्य से बाहर रहने वाले गुजरातियों पर भी लागू हो सकता है कानून कानून का दायरा गुजरात की सीमा तक ही सीमित नहीं रहेगा। Eligibility rules के तहत गुजरात के कुछ residents जो राज्य से बाहर रहते हैं, वे भी इसके प्रावधानों के दायरे में आ सकते हैं। अब implementation notification का इंतजार राष्ट्रपति की मंजूरी और gazette publication के बाद UCC अब enacted law बन चुका है। लेकिन practical implementation की तारीख, detailed rules और registration procedures राज्य सरकार की अगली notification से स्पष्ट होंगे। source – The Indian Express / The New Indian Express / Gujarat Government Gazette जय राष्ट्र न्यूज़

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जम्मू-कश्मीर | बडगाम में सुरक्षाबलों और आतंकियों के बीच मुठभेड़, शीर्ष लश्कर कमांडर हाशिम मूसा मारा गया

श्रीनगर: जम्मू-कश्मीर के बडगाम जिले में सुरक्षाबलों के साथ मुठभेड़ में लश्कर-ए-तैयबा का शीर्ष कमांडर मोहम्मद आसिफ उर्फ हाशिम मूसा मारा गया। भारतीय सेना के अनुसार यह ऑपरेशन खांसाहिब-यूसमर्ग क्षेत्र में चलाया गया और बाद में उसका शव हथियारों व अन्य सैन्य सामग्री के साथ बरामद किया गया। सुरक्षा एजेंसियां उसे जम्मू-कश्मीर में कई बड़े आतंकी हमलों से जोड़ती रही हैं। खांसाहिब-यूसमर्ग इलाके में हुआ एनकाउंटर सेना के मुताबिक खुफिया सूचना मिलने के बाद बडगाम के ऊंचाई वाले इलाके में संयुक्त अभियान शुरू किया गया। संदिग्ध गतिविधि दिखने पर सुरक्षाबलों ने आतंकियों को चुनौती दी, जिसके बाद गोलीबारी शुरू हो गई। जवाबी कार्रवाई में हाशिम मूसा मारा गया। सुबह तलाशी में मिला शव मुठभेड़ के बाद सुबह Palmaidan क्षेत्र में तलाशी अभियान चलाया गया। सेना की 15 Corps ने बताया कि इसी दौरान हाशिम मूसा का शव बरामद हुआ। मौके से “war-like stores” यानी हथियार और सैन्य सामग्री भी मिली। कौन था हाशिम मूसा? हाशिम मूसा का असली नाम मोहम्मद आसिफ बताया गया है। वह Asif Fauji नाम से भी जाना जाता था। भारतीय सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक वह पाकिस्तान आधारित लश्कर-ए-तैयबा का वरिष्ठ कमांडर था और 2022 के बाद जम्मू-कश्मीर में सक्रिय रहा। कई हमलों से जुड़ा था नाम अधिकारियों ने हाशिम मूसा के समूह को Halan, Dehra Ki Gali, Kandi, Shiv Khori, Gagangir, Bootapathri और Baisaran समेत कई हमलों से जोड़ा है। इन घटनाओं में सुरक्षाकर्मियों और नागरिकों की मौत हुई थी। ये संबंध सुरक्षा एजेंसियों के आरोपों और जांच पर आधारित हैं। पहलगाम हमले की जांच में भी आया था नाम सुरक्षा एजेंसियों ने मूसा को 2025 के पहलगाम आतंकी हमले से जुड़े नेटवर्क से भी जोड़ा था। वह सुलेमान शाह का करीबी सहयोगी बताया गया, जिसे एजेंसियां पहलगाम हमले की साजिश से जोड़ती रही हैं। चार सदस्यीय LeT समूह का आखिरी सदस्य था भारतीय सेना के मुताबिक हाशिम मूसा उस चार सदस्यीय लश्कर समूह का अंतिम सक्रिय सदस्य था, जो 2022 से जम्मू-कश्मीर में काम कर रहा था। समूह के अन्य तीन सदस्य अलग-अलग अभियानों में पहले ही मारे जा चुके थे। सेना ने कहा कि मूसा की मौत के साथ पूरा समूह निष्क्रिय हो गया है। महीनों से चल रही थी तलाश रिपोर्टों के अनुसार सुरक्षा एजेंसियां मई 2026 से मूसा को ट्रैक कर रही थीं। तकनीकी और मानवीय खुफिया जानकारी के आधार पर चलाए गए इस लंबे अभियान को कुछ रिपोर्टों में Operation Sheruwali कहा गया है। पूर्व पाकिस्तानी SSG कमांडो होने का दावा कुछ सुरक्षा अधिकारियों ने दावा किया कि मूसा पाकिस्तान सेना की Special Services Group यानी SSG में रह चुका था। यह दावा भारतीय सुरक्षा अधिकारियों और मीडिया रिपोर्टों पर आधारित है और इसकी स्वतंत्र सार्वजनिक पुष्टि सीमित है। सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी सफलता सुरक्षा बलों ने हाशिम मूसा के मारे जाने को लश्कर नेटवर्क के खिलाफ बड़ी कार्रवाई बताया है। इसके बाद भी आसपास के जंगलों और संवेदनशील इलाकों में तलाशी तथा निगरानी जारी रखी गई ताकि किसी अन्य आतंकी की मौजूदगी की संभावना को खारिज किया जा सके। जम्मू-कश्मीर में आतंक विरोधी अभियान जारी बडगाम मुठभेड़ के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने स्पष्ट किया है कि आतंकवादी नेटवर्क और उनके सहयोगियों के खिलाफ intelligence-based operations जारी रहेंगे। हाशिम मूसा के खिलाफ लगाए गए अलग-अलग मामलों और हमलों से जुड़े आरोप सुरक्षा एजेंसियों के दावों पर आधारित हैं, जबकि अंतिम कानूनी निष्कर्ष संबंधित जांच और न्यायिक प्रक्रिया पर निर्भर करेंगे। source – Indian Army / The Indian Express / Hindustan Times / The Times of India जय राष्ट्र न्यूज़

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जंतर-मंतर पर छात्र प्रदर्शन के बीच AISA की नेहा बोरा हिरासत में, CEC के खिलाफ प्रदर्शन में सैकड़ों डिटेन

नई दिल्ली: दिल्ली के जंतर-मंतर पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ 2 अक्टूबर को हुए प्रदर्शन के दौरान All India Students’ Association यानी AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में लिया। उनके साथ पूर्व दिल्ली मुख्यमंत्री आतिशी, AAP नेता सौरभ भारद्वाज, कार्यकर्ता योगेंद्र यादव और कई छात्र व राजनीतिक कार्यकर्ता भी हिरासत में लिए गए। प्रदर्शनकारी SIR और मतदाता सूची से जुड़े कथित अनियमितताओं को लेकर CEC के इस्तीफे की मांग कर रहे थे। जंतर-मंतर पहुंचने की कोशिश के दौरान हिरासत प्रदर्शनकारी जंतर-मंतर की ओर बढ़ने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन पुलिस ने उन्हें कई स्थानों पर रोक दिया। नेहा बोरा और AISA के अन्य कार्यकर्ता भी प्रदर्शन स्थल की ओर बढ़ रहे थे, तभी पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया। करीब 500 से 700 लोगों को हिरासत में लेने की रिपोर्ट अलग-अलग मीडिया रिपोर्टों में हिरासत में लिए गए लोगों की संख्या अलग बताई गई है। The Indian Express ने करीब 500 लोगों को हिरासत में लिए जाने की जानकारी दी, जबकि अन्य रिपोर्टों में यह संख्या लगभग 700 बताई गई। हिरासत में लिए गए प्रदर्शनकारियों को बसों के जरिए विभिन्न पुलिस स्टेशनों पर ले जाया गया। नेहा बोरा ने प्रदर्शन जारी रखने की अपील की हिरासत में लिए जाने के बाद भी नेहा बोरा ने प्रदर्शनकारियों से आंदोलन जारी रखने की अपील की। उन्होंने समर्थकों से जंतर-मंतर लौटने और कथित मतदाता अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन जारी रखने को कहा। आतिशी और सौरभ भारद्वाज भी डिटेन पुलिस कार्रवाई में केवल छात्र संगठन के सदस्य ही नहीं बल्कि कई राजनीतिक नेता भी हिरासत में लिए गए। पूर्व दिल्ली मुख्यमंत्री आतिशी, AAP दिल्ली प्रमुख सौरभ भारद्वाज और सामाजिक कार्यकर्ता योगेंद्र यादव भी उन प्रमुख लोगों में शामिल थे जिन्हें पुलिस ने डिटेन किया। SIR विवाद बना प्रदर्शन का मुख्य मुद्दा प्रदर्शनकारी Special Intensive Revision यानी SIR और मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं को लेकर सवाल उठा रहे थे। उनकी प्रमुख मांगों में CEC ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा और मतदाता सूची संशोधन प्रक्रिया को लेकर जवाबदेही शामिल थी। ये प्रदर्शनकारियों के आरोप और मांगें हैं; चुनाव आयोग का इन आरोपों पर अलग आधिकारिक रुख है। दिल्ली पुलिस ने पहले नहीं दी थी अनुमति दिल्ली पुलिस ने प्रस्तावित प्रदर्शन के लिए पहले अनुमति देने से इनकार कर दिया था। इसके बावजूद विभिन्न छात्र संगठनों और राजनीतिक समूहों से जुड़े लोग जंतर-मंतर और आसपास के क्षेत्रों में पहुंचे। पुलिस ने दस या उससे अधिक लोगों के समूहों को रोकते हुए कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया। AISA और अन्य छात्र संगठन रहे सक्रिय AISA के अलावा SFI, NSUI और दूसरे छात्र संगठनों से जुड़े कार्यकर्ता भी प्रदर्शन में शामिल हुए। छात्र संगठनों ने इसे मतदाता अधिकार और लोकतांत्रिक प्रक्रिया से जुड़ा मुद्दा बताया, जबकि पुलिस ने कानून-व्यवस्था और बिना अनुमति जुटने को कार्रवाई का आधार बताया। हिरासत के खिलाफ वाम दलों ने जताई नाराजगी वाम दलों ने छात्रों और युवा प्रदर्शनकारियों की हिरासत की आलोचना की। CPM ने बयान जारी कर हिरासत में लिए गए प्रदर्शनकारियों को लेकर आपत्ति जताई और SIR तथा CEC के खिलाफ उठाई जा रही मांगों का समर्थन किया। 3 अक्टूबर को भी जंतर-मंतर पर हलचल 2 अक्टूबर की पुलिस कार्रवाई के बाद 3 अक्टूबर को भी प्रदर्शनकारी और कार्यकर्ता जंतर-मंतर लौटते दिखाई दिए। इसके चलते दिल्ली पुलिस फिर सतर्क रही और इलाके में सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखी गई। SIR विवाद पर जारी है राजनीतिक टकराव SIR और चुनाव आयोग की भूमिका को लेकर विपक्षी दलों, छात्र संगठनों और सामाजिक समूहों का विरोध जारी है। वहीं इन आरोपों की तथ्यात्मक और कानूनी स्थिति संबंधित संस्थाओं और अदालतों में उपलब्ध रिकॉर्ड तथा आगे की प्रक्रिया से तय होगी। source – The Indian Express / The Times of India / PTI / The Week जय राष्ट्र न्यूज़

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Asian Games में Nethra Kumanan ने sailing में bronze जीता, भारत को sailing से मिले तीन पदक

आइची-नागोया: भारतीय sailor Nethra Kumanan ने Asian Games 2026 में women’s dinghy sailing event में bronze medal जीत लिया। यह उनके Asian Games career का पहला medal है। Nethra ने अपने चौथे Asian Games appearance में यह उपलब्धि हासिल की और भारत के sailing अभियान को मजबूत किया। उनके bronze के साथ भारत ने इन Games में sailing से कुल तीन पदक जीते। Women’s dinghy में Nethra का bronze Nethra Kumanan ने women’s dinghy event में शानदार प्रदर्शन करते हुए bronze medal अपने नाम किया। Final standings में उनका मुकाबला Hong Kong की Stephanie Louise Norton से बेहद करीबी रहा। दोनों समान points पर रहीं, लेकिन बेहतर head-to-head result के आधार पर Nethra को bronze मिला। चौथे Asian Games में मिला पहला पदक Nethra के लिए यह उपलब्धि खास रही क्योंकि वह पहले तीन Asian Games में medal नहीं जीत सकी थीं। 2026 में उन्होंने आखिरकार podium finish हासिल की और Asian Games sailing में अपना पहला medal जीता। भारत को sailing से तीन पदक Asian Games 2026 में भारत ने sailing से कुल तीन medals हासिल किए। Men’s skiff में Prince Noble Kurisinkal और Manu Francis ने silver जीता, जबकि women’s skiff में Harshita Tomar और Shital Verma की जोड़ी को bronze मिला। Nethra का women’s dinghy bronze भारत का तीसरा sailing medal बना। Women’s skiff में भी भारत को bronze Harshita Tomar और Shital Verma की जोड़ी शुरुआत में चौथे स्थान पर रही थी। लेकिन Chinese team के disqualification के बाद भारतीय जोड़ी तीसरे स्थान पर पहुंची और bronze medal मिला। Men’s skiff में आया silver Men’s skiff event में Prince Noble Kurisinkal और Manu Francis ने भारत के लिए silver medal जीता। इस performance के साथ sailing ने भारत की overall medal tally में महत्वपूर्ण योगदान दिया। Final race में मजबूत वापसी Nethra की शुरुआत उम्मीद के मुताबिक नहीं रही, लेकिन second and final race में उन्होंने जोरदार वापसी की। इसी strong finish ने उन्हें medal contention में बनाए रखा और अंत में bronze सुनिश्चित हुआ। Vishnu Saravanan पदक से चूके पुरुष dinghy event में भारतीय sailor Vishnu Saravanan podium के बेहद करीब पहुंचे लेकिन चौथे स्थान पर रहे। उनका medal बहुत कम अंतर से छूटा, जबकि Nethra ने women’s event में भारत के लिए podium finish सुनिश्चित की। भारत की medal tally में भी इजाफा Nethra के bronze समेत 2 अक्टूबर को भारत ने archery, boxing, sailing और sepaktakraw में कई medals जीते। दोपहर तक भारत की कुल medal tally 72 तक पहुंच चुकी थी, जिसमें 12 gold, 25 silver और 35 bronze शामिल थे। भारतीय sailing के लिए अहम उपलब्धि Nethra का medal भारतीय sailing के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उनका podium finish लंबे इंतजार के बाद आया और इससे international multi-sport events में भारतीय sailors की बढ़ती competitiveness फिर सामने आई। source – Olympics.com / India Today / DD India / The Times of India जय राष्ट्र न्यूज़

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वित्त मंत्रालय ने सितंबर तिमाही में भारतीय अर्थव्यवस्था की growth 7.3% रहने का अनुमान जताया

नई दिल्ली: वित्त मंत्रालय ने चालू वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही यानी जुलाई-सितंबर अवधि में भारतीय अर्थव्यवस्था की वास्तविक GDP growth करीब 7.3% रहने का अनुमान जताया है। मंत्रालय के Monthly Economic Review में कहा गया कि पहली तिमाही की तुलना में growth थोड़ी धीमी हो सकती है, लेकिन घरेलू मांग और आर्थिक गतिविधियां अभी भी मजबूत बनी हुई हैं। पहली तिमाही में रही थी 7.8% growth अप्रैल-जून 2026 की पहली तिमाही में भारतीय अर्थव्यवस्था ने 7.8% की वास्तविक GDP growth दर्ज की थी। वित्त मंत्रालय के अनुमान के मुताबिक दूसरी तिमाही में growth 7.3% रह सकती है, यानी गति कुछ कम होगी लेकिन expansion मजबूत स्तर पर बनी रहेगी। Nowcasting model से आया अनुमान वित्त मंत्रालय ने दूसरी तिमाही की growth का आकलन अपने nowcasting model के आधार पर किया है। इस मॉडल को इस साल के Economic Survey में पेश किया गया था और इसका इस्तेमाल उपलब्ध high-frequency indicators के आधार पर GDP growth का अनुमान लगाने के लिए किया जाता है। सितंबर में manufacturing activity रही मजबूत सितंबर 2026 में भारत की factory activity सात महीने के उच्च स्तर पर पहुंची। एक निजी सर्वे के अनुसार मजबूत घरेलू और विदेशी मांग की वजह से manufacturing sector में नई तेजी देखने को मिली और hiring तथा business confidence में भी सुधार हुआ। GST collection ₹2 लाख करोड़ के पार सितंबर में GST collection सालाना आधार पर 14.7% बढ़कर ₹2 लाख करोड़ से ऊपर पहुंच गया। Auto dispatch, UPI transactions और private equity तथा venture capital investments में भी मजबूती दर्ज की गई, जिससे घरेलू आर्थिक गतिविधियों में momentum का संकेत मिला। वैश्विक जोखिम अभी भी बने हुए वित्त मंत्रालय ने मजबूत growth outlook के साथ कई जोखिमों की ओर भी ध्यान दिलाया है। भू-राजनीतिक तनाव, महंगा crude oil, वैश्विक financial conditions में tightening और imported inflation भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए चुनौती बने हुए हैं। रुपये और महंगाई पर भी नजर ऊंची crude oil prices और मजबूत डॉलर के कारण रुपये तथा inflation पर दबाव बढ़ सकता है। मंत्रालय की रिपोर्ट में कहा गया कि बाहरी झटकों के बावजूद services exports, remittances और विदेशी मुद्रा भंडार भारतीय अर्थव्यवस्था को कुछ सुरक्षा प्रदान कर रहे हैं। दूसरी तिमाही के आधिकारिक GDP आंकड़े बाद में 7.3% का आंकड़ा फिलहाल वित्त मंत्रालय का अनुमान है, आधिकारिक GDP growth figure नहीं। सांख्यिकी मंत्रालय के release calendar के मुताबिक जुलाई-सितंबर 2026 तिमाही के आधिकारिक GDP estimates 30 नवंबर 2026 को जारी किए जाने हैं। मजबूत घरेलू मांग से मिल रहा सहारा सरकार का मानना है कि consumption, manufacturing और services में activity के कारण भारतीय अर्थव्यवस्था की underlying momentum मजबूत बनी हुई है। हालांकि आने वाले महीनों में crude prices, inflation, global interest rates और external demand growth की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे। source – Ministry of Finance / Ministry of Statistics & Programme Implementation / Reuters / The Times of India जय राष्ट्र न्यूज़

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ताइवान को मिले पहले नए F-16V Block 70 फाइटर जेट, चीन के साथ तनाव के बीच बढ़ेगी वायु रक्षा क्षमता

ताइपे: ताइवान को अमेरिका से खरीदे गए नए F-16V Block 70 लड़ाकू विमानों की पहली खेप मिल गई है। शुक्रवार को पहले दो विमान ताइवान के पूर्वी तट पर स्थित Chihhang Air Base पहुंचे। ये विमान 66 नए F-16V जेट की उस डील का हिस्सा हैं, जिसे अमेरिका ने 2019 में मंजूरी दी थी। ताइवान इस खरीद को चीन की बढ़ती सैन्य गतिविधियों के बीच अपनी वायु रक्षा क्षमता मजबूत करने के लिए अहम मान रहा है। पहले दो F-16V पहुंचे ताइवान पहले दो नए F-16V Block 70 लड़ाकू विमान 2 अक्टूबर को Taitung के Chihhang Air Base पर उतरे। विमान Hawaii और Guam के रास्ते ताइवान पहुंचे। आने वाले महीनों में इस बेड़े के और विमान पहुंचने की उम्मीद है। 66 फाइटर जेट की है पूरी डील ताइवान ने अमेरिका से कुल 66 नए F-16V Block 70 विमान खरीदने का फैसला किया था। 2019 में मंजूर इस सौदे की अनुमानित कीमत करीब 8 अरब डॉलर है। सभी विमान शामिल होने के बाद ताइवान के F-16 बेड़े की संख्या 200 से अधिक हो जाएगी। चीन की बढ़ती सैन्य गतिविधियों के बीच डिलीवरी यह डिलीवरी ऐसे समय हुई है जब ताइवान के आसपास चीन की सैन्य गतिविधियां लगातार चर्चा में हैं। ताइवान की वायुसेना को अक्सर चीनी सैन्य विमानों की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए अपने लड़ाकू विमान भेजने पड़ते हैं। बीजिंग ताइवान को अपना हिस्सा मानता है, जबकि ताइवान की सरकार अपनी अलग राजनीतिक व्यवस्था संचालित करती है। राष्ट्रपति लाई चिंग-ते ने बताया अहम कदम ताइवान के राष्ट्रपति लाई चिंग-ते ने नए विमानों के आगमन को देश की air-defence capability मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने अमेरिका के समर्थन के लिए धन्यवाद भी दिया। महीनों की देरी के बाद पहुंची पहली खेप F-16V विमानों की डिलीवरी पहले ही होनी थी, लेकिन कार्यक्रम में कई बार देरी हुई। रिपोर्टों के अनुसार software issues, production-line transition और supply-chain disruptions इसकी प्रमुख वजहों में शामिल रहे। कितना आधुनिक है F-16V Block 70? F-16V Block 70 पुराने F-16 प्लेटफॉर्म का आधुनिक संस्करण है। इसमें AN/APG-83 AESA radar, आधुनिक electronic-warfare system, बेहतर avionics और advanced targeting capabilities दी गई हैं। ये सिस्टम विमान को multiple targets track करने और लंबी दूरी की combat situations में बेहतर प्रदर्शन करने में मदद करते हैं। चीन के J-20 के मुकाबले क्षमता बढ़ाने की कोशिश ताइवान के लिए इन विमानों का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि चीन के पास आधुनिक J-20 stealth fighters समेत बड़ा लड़ाकू बेड़ा है। F-16V stealth fighter नहीं है, लेकिन इसका आधुनिक radar, electronic warfare suite और weapons integration ताइवान की मौजूदा combat capability को मजबूत करेगा। अमेरिका-ताइवान रक्षा संबंध फिर चर्चा में अमेरिका के ताइवान के साथ औपचारिक राजनयिक संबंध नहीं हैं, लेकिन वह ताइवान का प्रमुख हथियार आपूर्तिकर्ता है। नई F-16V डिलीवरी ने एक बार फिर Washington और Taipei के रक्षा संबंधों को चर्चा में ला दिया है। अमेरिका का कहना है कि वह ताइवान की self-defence capability को समर्थन देता रहेगा। चीन करता रहा है अमेरिकी हथियार बिक्री का विरोध बीजिंग लंबे समय से ताइवान को अमेरिकी हथियारों की बिक्री का विरोध करता रहा है। चीन का कहना है कि इस तरह की रक्षा डील क्षेत्रीय तनाव बढ़ाती हैं, जबकि ताइवान का तर्क है कि बढ़ते सैन्य दबाव को देखते हुए अपनी रक्षा क्षमता मजबूत करना जरूरी है। आने वाले महीनों में और विमानों की डिलीवरी ताइवान के रक्षा मंत्री Wellington Koo ने कहा कि आने वाले समय में और नए F-16V विमान ताइवान पहुंचेंगे। हालांकि उन्होंने अगली खेप की सटीक संख्या और तारीख नहीं बताई। source – Reuters / Focus Taiwan / Taiwan Defence Ministry जय राष्ट्र न्यूज़

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CBI ने पोर्ट ब्लेयर नगर निकाय के 3 पूर्व अधिकारियों पर ₹2.08 करोड़ property-tax नुकसान के मामले में केस दर्ज किया

पोर्ट ब्लेयर: केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी CBI ने Port Blair Municipal Council के तीन पूर्व अधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितताओं के आरोप में FIR दर्ज की है। एजेंसी का आरोप है कि करीब 252 hotels और bars को बकाया property tax पर interest वसूले बिना no-dues certificates जारी किए गए, जिससे सरकारी खजाने को लगभग ₹2.08 करोड़ का नुकसान हुआ। तीन पूर्व अधिकारियों पर मामला CBI की Anti-Corruption Branch, Port Blair ने एक पूर्व Revenue Officer, Assistant Revenue Officer और Tax Inspector को मामले में आरोपी बनाया है। एजेंसी के अनुसार इन अधिकारियों की भूमिका 2020 से 2023 के बीच हुई कथित अनियमितताओं से जुड़ी है। 252 No-Dues Certificates पर सवाल जांच में सामने आया कि नगर निकाय के revenue section ने करीब 252 no-dues certificates जारी किए। CBI का आरोप है कि इन certificates को जारी करते समय overdue property tax पर देय interest की सही तरीके से वसूली नहीं की गई। ₹2.08 करोड़ का कथित नुकसान एजेंसी के शुरुआती आकलन के अनुसार इन कथित अनियमितताओं की वजह से सार्वजनिक खजाने को करीब ₹2.08 करोड़ का नुकसान हुआ। यह रकम उन ब्याज भुगतानों से जुड़ी बताई गई है जिन्हें समय पर वसूल किया जाना चाहिए था। Preliminary Inquiry के बाद FIR CBI ने सीधे FIR दर्ज नहीं की, बल्कि पहले मामले में preliminary inquiry की। प्रारंभिक जांच में वित्तीय रिकॉर्ड, tax calculations और no-dues certificates से जुड़े दस्तावेजों की समीक्षा की गई। इसके बाद एजेंसी ने नियमित मामला दर्ज किया। पुराने property-tax रिकॉर्ड में भी गड़बड़ी का आरोप CBI की जांच में यह भी सामने आया कि municipal records में 2011 से लंबित principal और interest की स्पष्ट गणना उपलब्ध नहीं थी। एजेंसी के अनुसार इससे यह तय करना मुश्किल हो रहा था कि अलग-अलग properties पर वास्तविक बकाया राशि कितनी थी। High Court के पुराने निर्देश का भी जिक्र मामला 2015 के Calcutta High Court के एक निर्देश से भी जुड़ा है, जिसके बाद property tax calculation की नई methodology अपनाने की अनुमति मिली थी। इसके बाद 2016 में municipal council ने resolution पास किया और 2017 में public notice भी जारी किया, लेकिन CBI का आरोप है कि इसे प्रभावी तरीके से लागू नहीं किया गया। होटल और बार मालिकों को मिला कथित फायदा एजेंसी का आरोप है कि interest की पूरी वसूली के बिना no-dues certificates जारी होने से संबंधित hotels और bars को आर्थिक लाभ मिला। फिलहाल यह CBI का आरोप है और मामले की जांच जारी है। आरोपियों की जिम्मेदारी अंतिम रूप से न्यायिक प्रक्रिया में तय होगी। भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितता की जांच जारी CBI अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कथित irregularities व्यक्तिगत स्तर की थीं या इसमें किसी व्यापक मिलीभगत की भूमिका थी। जांच के दौरान municipal records, tax files और संबंधित approvals की भी जांच की जा सकती है। source – CBI / The Indian Express जय राष्ट्र न्यूज़

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