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ज्ञानेश कुमार के खिलाफ INDIA गठबंधन का ‘पब्लिक इम्पीचमेंट’ आज, 1 नवंबर की रामलीला मैदान रैली पर सियासत तेज

नई दिल्ली: INDIA गठबंधन आज, 31 अक्टूबर 2026, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रतीकात्मक ‘पब्लिक इम्पीचमेंट’ कार्यक्रम आयोजित करने जा रहा है। यह कार्यक्रम कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के 10, राजाजी मार्ग स्थित आवास पर आयोजित होना है। विपक्ष ने इसे मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर अपने विरोध अभियान का हिस्सा बताया है। बारिश के कारण एक दिन टला कार्यक्रम यह कार्यक्रम पहले 30 अक्टूबर को होना था, लेकिन दिल्ली में लगातार बारिश के कारण इसे एक दिन आगे बढ़ाकर 31 अक्टूबर कर दिया गया। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने इसकी जानकारी देते हुए कहा था कि वरिष्ठ नेताओं को असुविधा से बचाने के लिए यह फैसला लिया गया। मीरा कुमार करेंगी कार्यवाही की अध्यक्षता INDIA गठबंधन ने इस प्रतीकात्मक कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए पूर्व लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार को चुना है। प्रस्तावित कार्यक्रम में मल्लिकार्जुन खरगे प्रस्ताव रखेंगे, जबकि राहुल गांधी चर्चा के समापन में अपनी बात रख सकते हैं। यह संवैधानिक महाभियोग नहीं यह स्पष्ट करना जरूरी है कि विपक्ष का यह कार्यक्रम वास्तविक संवैधानिक महाभियोग की कार्यवाही नहीं है। मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की संवैधानिक प्रक्रिया संसद से जुड़ी होती है। INDIA गठबंधन इसे जनता के सामने अपनी आपत्तियां और आरोप रखने के लिए प्रतीकात्मक ‘जन महाभियोग’ के रूप में आयोजित कर रहा है। विपक्ष के निशाने पर SIR प्रक्रिया INDIA गठबंधन मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर लगातार सवाल उठा रहा है। विपक्ष का आरोप है कि इस प्रक्रिया से वास्तविक मतदाताओं के नाम हटने का खतरा है और चुनाव आयोग ने उसकी आपत्तियों का पर्याप्त जवाब नहीं दिया। इन आरोपों को चुनाव आयोग स्वीकार नहीं करता और उसकी ओर से मतदाता सूची की शुद्धता और पात्र मतदाताओं को शामिल करने की प्रक्रिया का बचाव किया गया है। 1 नवंबर को रामलीला मैदान में बड़ी रैली ‘पब्लिक इम्पीचमेंट’ के अगले दिन, 1 नवंबर, INDIA गठबंधन दिल्ली के रामलीला मैदान में बड़ी रैली आयोजित करेगा। राहुल गांधी ने समर्थकों, छात्रों, किसानों, मजदूरों और आम नागरिकों से इसमें शामिल होने की अपील की है। रामलीला मैदान की रैली को मिली अनुमति दिल्ली पुलिस ने स्पष्ट किया है कि रामलीला मैदान में 1 नवंबर को होने वाली रैली की अनुमति वैध है। पुलिस के मुताबिक मैदान आयोजकों के लिए 25 अक्टूबर से 3 नवंबर तक बुक है और रैली के लिए जारी अनापत्ति प्रमाणपत्र वापस नहीं लिया गया है। लेकिन मार्च की अनुमति पर पेच राहुल गांधी ने कहा है कि 1 नवंबर को दोपहर में मिंटो रोड-कनॉट प्लेस क्षेत्र से रामलीला मैदान तक पैदल मार्च निकाला जाएगा। हालांकि दिल्ली पुलिस का कहना है कि इस मार्च के लिए न तो नई दिल्ली जिला पुलिस और न ही मध्य जिला पुलिस से अलग अनुमति मांगी गई है। पुलिस ने कहा—स्थिति पर नजर दिल्ली पुलिस अधिकारियों ने कहा है कि प्रस्तावित मार्च को लेकर स्थिति की निगरानी की जा रही है और जरूरत के अनुसार कानून-व्यवस्था से जुड़े कदम उठाए जाएंगे। फिलहाल पुलिस ने यह नहीं बताया है कि बिना अलग अनुमति के मार्च निकालने पर वह क्या कार्रवाई करेगी। राहुल गांधी ने लोगों से की शामिल होने की अपील राहुल गांधी ने सोशल मीडिया के जरिए लोगों से कहा है कि वे 1 नवंबर को दिल्ली पहुंचें और विपक्ष के अभियान में शामिल हों। उनका कहना है कि यह आंदोलन केवल किसी एक राजनीतिक दल का नहीं, बल्कि लोकतंत्र और मतदान के अधिकार से जुड़ा मुद्दा है। विपक्ष इसे बड़े शक्ति प्रदर्शन में बदलने की तैयारी में INDIA गठबंधन की कोशिश है कि 1 नवंबर की रैली को चुनाव आयोग और SIR के खिलाफ बड़े राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन में बदला जाए। विभिन्न विपक्षी दलों को समर्थकों को दिल्ली लाने और मैदान में भीड़ जुटाने की जिम्मेदारी दी गई है। चुनाव आयोग पर आरोप, अंतिम निष्कर्ष नहीं विपक्ष मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगा रहा है, लेकिन इन्हें राजनीतिक आरोप के रूप में ही प्रस्तुत किया जाना चाहिए। किसी भी तरह की व्यक्तिगत या संस्थागत गलत कार्रवाई का अंतिम निष्कर्ष संवैधानिक और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही तय होगा। स्रोत – इंडियन एक्सप्रेस, हिंदुस्तान टाइम्स, द न्यू इंडियन एक्सप्रेस, इकोनॉमिक टाइम्स, दिल्ली पुलिस जय राष्ट्र न्यूज़

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दिल्ली के मंगोलपुरी की जूता फैक्ट्री में भीषण आग, 4 लोगों की मौत; 2 घायल, मालिक को पुलिस ने तलब किया

नई दिल्ली: दिल्ली के मंगोलपुरी औद्योगिक क्षेत्र फेज-1 में शुक्रवार रात एक जूता बनाने वाली फैक्ट्री में भीषण आग लगने से चार लोगों की मौत हो गई, जबकि दो अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। आग फैक्ट्री के तहखाने में लगी थी और कुछ ही देर में घना धुआं ऊपरी मंजिलों तक फैल गया। दमकल और पुलिस की टीमों ने छह लोगों को बेहोशी की हालत में बाहर निकाला। रात करीब साढ़े नौ बजे लगी आग दिल्ली अग्निशमन सेवा को शुक्रवार रात करीब 9:30 बजे आग लगने की सूचना मिली। इसके बाद कई दमकल गाड़ियां मौके पर भेजी गईं और घंटों तक आग बुझाने तथा अंदर फंसे लोगों को निकालने का अभियान चलाया गया। तहखाने से शुरू हुई आग दमकल अधिकारी पारस कुमार के मुताबिक आग की शुरुआत फैक्ट्री के तहखाने से हुई। वहां जूते बनाए और रखे जाते थे। दमकलकर्मियों ने आग को मुख्य रूप से तहखाने तक सीमित करने में सफलता पाई, लेकिन भारी धुआं इमारत की ऊपरी मंजिलों तक पहुंच गया। छह लोग बेहोशी की हालत में मिले बचाव दल ने फैक्ट्री के अंदर से कुल छह लोगों को बेहोशी की हालत में निकाला। इनमें एक व्यक्ति तीसरी मंजिल की सीढ़ियों के पास मिला, जबकि पांच लोगों को चौथी मंजिल से बचाया गया। सभी को तुरंत संजय गांधी स्मारक अस्पताल ले जाया गया। चार लोगों को अस्पताल में मृत घोषित किया गया अस्पताल पहुंचने के बाद चार मजदूरों को मृत घोषित कर दिया गया। उनकी पहचान प्रेम चंद, हरिहर, अशोक और लाल बाबू के रूप में हुई है। दो अन्य घायल हरेंद्र और विकास का अस्पताल की गहन चिकित्सा इकाई में इलाज चल रहा है। दो घायलों की हालत गंभीर पुलिस अधिकारियों के अनुसार दोनों घायलों को आईसीयू में भर्ती कराया गया है। उनकी स्थिति पर डॉक्टर लगातार नजर रख रहे हैं। मृतकों के शव पोस्टमार्टम के लिए अस्पताल के शवगृह में रखे गए हैं। पुलिस ने फैक्ट्री मालिक को तलब किया बाहरी दिल्ली के पुलिस उपायुक्त विक्रम सिंह ने बताया कि फैक्ट्री मालिक को पूछताछ के लिए बुलाया गया है। पुलिस ठेकेदार और कर्मचारियों से भी पूछताछ कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि हादसे के समय फैक्ट्री में कुल कितने मजदूर मौजूद थे। गैर इरादतन हत्या का मामला दर्ज दिल्ली पुलिस ने इस हादसे के संबंध में भारतीय न्याय संहिता की धारा 105 के तहत गैर इरादतन हत्या का मामला दर्ज किया है। पुलिस अब यह जांच कर रही है कि फैक्ट्री में सुरक्षा नियमों का पालन किया गया था या नहीं और हादसे के लिए किसकी जिम्मेदारी बनती है। आग लगने की वजह अभी साफ नहीं आग का सही कारण अभी सामने नहीं आया है। पुलिस और अग्निशमन विभाग घटनास्थल की जांच कर रहे हैं। प्रारंभिक तौर पर किसी तकनीकी खराबी या अन्य कारण की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। भारी धुएं ने बढ़ाई मुश्किल अधिकारियों के मुताबिक आग से ज्यादा घना धुआं बचाव अभियान के लिए बड़ी चुनौती बना। ऊपरी मंजिलों पर मौजूद मजदूर धुएं में फंस गए थे और बाहर निकल नहीं पाए। यही वजह है कि कई लोगों को बेहोशी की हालत में निकाला गया। आग पर रात करीब एक बजे पाया गया काबू दमकल विभाग ने कई घंटे की मशक्कत के बाद आग को पूरी तरह बुझाया। इसके बाद इमारत में शीतलन और तलाशी अभियान चलाया गया ताकि किसी अन्य व्यक्ति के फंसे होने की संभावना को खत्म किया जा सके। सुरक्षा इंतजामों की भी होगी जांच पुलिस अब फैक्ट्री के अग्नि सुरक्षा इंतजाम, बाहर निकलने के रास्तों और श्रमिकों की मौजूदगी से जुड़े अभिलेखों की जांच कर रही है। हादसे में जिम्मेदारी तय होने के बाद आगे कानूनी कार्रवाई की जाएगी। स्रोत – दिल्ली पुलिस, दिल्ली अग्निशमन सेवा, पीटीआई, इंडियन एक्सप्रेस, हिंदुस्तान टाइम्स, एनडीटीवी जय राष्ट्र न्यूज़

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जोशीमठ में भीषण हेलीकॉप्टर हादसा, पायलट समेत सभी 6 लोगों की मौत

चमोली/देहरादून: उत्तराखंड के चमोली जिले में जोशीमठ के पास एक निजी हेलीकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त हो गया, जिसमें पायलट समेत सभी 6 लोगों की मौत हो गई। हेलीकॉप्टर बदरीनाथ धाम से देहरादून के सहस्त्रधारा हेलीपैड की ओर जा रहा था। हादसा चाईं गांव के पास वन क्षेत्र में हुआ। बदरीनाथ से देहरादून जा रहा था हेलीकॉप्टर नागरिक उड्डयन मंत्रालय के अनुसार हेलीकॉप्टर का पंजीकरण नंबर VT-HCX था और इसका संचालन ट्रांसभारत एविएशन प्राइवेट लिमिटेड कर रही थी। इसमें एक पायलट और पांच यात्री सवार थे। हेलीकॉप्टर ने 30 अक्टूबर को दोपहर करीब 1 बजकर 14 मिनट पर बदरीनाथ हेलीपैड से उड़ान भरी थी। उड़ान भरने के कुछ ही देर बाद टूटा संपर्क चमोली पुलिस के अनुसार हेलीकॉप्टर का संपर्क उड़ान भरने के कुछ ही समय बाद टूट गया। सेना की एक टीम ने जोशीमठ क्षेत्र में हेलीकॉप्टर से धुआं उठते और उसे तेजी से नीचे जाते देखा, जिसके बाद प्रशासन को सूचना दी गई। चाईं गांव के पास मिला मलबा हेलीकॉप्टर का मलबा जोशीमठ के पास चाईं गांव के पहाड़ी और वन क्षेत्र में मिला। दुर्गम इलाके और खराब मौसम के कारण राहत एवं बचाव अभियान में काफी दिक्कत आई। पायलट समेत सभी छह लोगों की मौत हादसे में पायलट कैप्टन हिमांशु सभरवाल, उम्र 48 वर्ष, समेत सभी छह लोगों की मौत हो गई। पांचों यात्री कर्नाटक से आए श्रद्धालु थे। प्रशासन ने सभी शव बरामद कर लिए हैं। पांचों यात्री कर्नाटक के थे मृत यात्रियों की पहचान एच.एस. नटराजा, सुदीर के., अरुण सालुंके, प्रताप निंगराजन और शंकरगौड़ा वी.बी. के रूप में हुई है। इनमें एक पुलिस अधिकारी भी शामिल था। सभी बदरीनाथ दर्शन के बाद लौट रहे थे। खराब मौसम और कम दृश्यता की भी जांच हादसे के समय क्षेत्र में बारिश और कम दृश्यता की स्थिति थी। शुरुआती रिपोर्टों में खराब मौसम को एक संभावित कारण माना जा रहा है, लेकिन दुर्घटना की वास्तविक वजह जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी। विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो करेगा जांच विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो ने हादसे की जांच शुरू कर दी है। नागरिक उड्डयन महानिदेशालय की टीम भी प्रारंभिक और नियामकीय जांच के लिए भेजी गई है। जांच में मौसम, उड़ान संबंधी निर्णय, तकनीकी स्थिति और संचालन प्रक्रियाओं की पड़ताल की जाएगी। ट्रांसभारत एविएशन का पूरा बेड़ा रोका गया हादसे के बाद एहतियात के तौर पर ट्रांसभारत एविएशन के हेलीकॉप्टर बेड़े की उड़ानें रोक दी गई हैं। यह कदम सुरक्षा समीक्षा पूरी होने तक उठाया गया है। चारधाम हेलीकॉप्टर सेवाओं की सुरक्षा पर फिर सवाल इस दुर्घटना के बाद उत्तराखंड में तीर्थ यात्रियों के लिए चलने वाली हेलीकॉप्टर सेवाओं की सुरक्षा पर एक बार फिर बहस शुरू हो गई है। ऊंचाई वाले पहाड़ी इलाकों, तेजी से बदलते मौसम और सीमित दृश्यता के कारण यहां हेलीकॉप्टर संचालन विशेष रूप से चुनौतीपूर्ण माना जाता है। जांच रिपोर्ट से साफ होगा हादसे का कारण फिलहाल प्रशासन ने मृतकों के परिजनों से संपर्क कर आगे की प्रक्रिया शुरू कर दी है। दुर्घटना के वास्तविक कारण का पता विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो की जांच के बाद ही चलेगा। तब तक खराब मौसम या तकनीकी खराबी से जुड़ी किसी भी वजह को अंतिम निष्कर्ष नहीं माना जा सकता। स्रोत – नागरिक उड्डयन मंत्रालय, विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो, पीटीआई, इंडियन एक्सप्रेस, एसोसिएटेड प्रेस जय राष्ट्र न्यूज़

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भारत की NavIC प्रणाली को मिली नई ताकत, ISRO ने सफलतापूर्वक लॉन्च किया NVS-03 उपग्रह

श्रीहरिकोटा/नई दिल्ली: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन यानी इसरो ने अगली पीढ़ी के नौवहन उपग्रह NVS-03 का सफल प्रक्षेपण कर भारत की स्वदेशी नेविगेशन प्रणाली NavIC को नई मजबूती दी है। उपग्रह को GSLV-F18 रॉकेट के जरिए श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से प्रक्षेपित किया गया और उसे निर्धारित भू-समकालिक स्थानांतरण कक्षा में सफलतापूर्वक स्थापित कर दिया गया। GSLV-F18 की 20वीं उड़ान इसरो के अनुसार यह भारत के भू-समकालिक उपग्रह प्रक्षेपण यान यानी GSLV की 20वीं उड़ान थी। मिशन को सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र के दूसरे प्रक्षेपण परिसर से अंजाम दिया गया। अगली पीढ़ी का तीसरा NavIC उपग्रह NVS-03 नई पीढ़ी की NavIC श्रृंखला का तीसरा उपग्रह है। इससे पहले NVS-01 को मई 2023 और NVS-02 को जनवरी 2025 में प्रक्षेपित किया गया था। इसरो का लक्ष्य नई पीढ़ी के NVS उपग्रहों के जरिए NavIC सेवाओं की निरंतरता और विश्वसनीयता को मजबूत करना है। स्वदेशी परमाणु घड़ी से लैस NVS-03 NVS-03 की सबसे महत्वपूर्ण विशेषताओं में इसकी स्वदेशी परमाणु घड़ी शामिल है। इसके साथ कुछ विदेशी परमाणु घड़ियां भी लगाई गई हैं। परमाणु घड़ियां उपग्रह नौवहन प्रणाली में बेहद सटीक समय उपलब्ध कराती हैं, जिससे स्थान और दिशा की सटीक गणना संभव होती है। L1 संकेत भी देगा उपग्रह NVS-03 में पहले से मौजूद L5 और S-बैंड संकेतों के साथ L1 संकेत की सुविधा भी जोड़ी गई है। इससे NavIC को ज्यादा उपकरणों और नागरिक उपयोगों के लिए अपनाना आसान हो सकता है। भारत और सीमा से 1,500 किलोमीटर बाहर तक सेवा NavIC भारत की स्वतंत्र क्षेत्रीय उपग्रह नौवहन प्रणाली है। इसकी सेवाएं पूरे भारत के साथ-साथ भारतीय भूभाग की सीमा से करीब 1,500 किलोमीटर बाहर तक उपलब्ध कराने के लिए डिजाइन की गई हैं। GPS पर निर्भरता कम करने में मदद NavIC को विकसित करने का उद्देश्य भारत को विदेशी उपग्रह नौवहन प्रणालियों पर निर्भरता कम करने में मदद करना है। इसका इस्तेमाल सड़क परिवहन, समुद्री नौवहन, विमानन, मानचित्रण, सर्वेक्षण, दूरसंचार, समय समन्वय और आपदा चेतावनी जैसी सेवाओं में किया जा सकता है। रक्षा क्षेत्र के लिए भी अहम NavIC का मजबूत होना भारत की रणनीतिक क्षमताओं के लिए भी महत्वपूर्ण माना जाता है। स्वतंत्र और सटीक नौवहन प्रणाली रक्षा बलों को उन परिस्थितियों में भी भरोसेमंद स्थान और समय संबंधी जानकारी उपलब्ध करा सकती है, जब विदेशी प्रणालियों पर निर्भरता जोखिम बन सकती है। NVS-02 के बाद महत्वपूर्ण मिशन जनवरी 2025 में प्रक्षेपित NVS-02 अपने निर्धारित अंतिम कक्षीय स्थान तक नहीं पहुंच सका था, हालांकि वह सीमित नौवहन सेवा देने में सक्षम रहा। ऐसे में NVS-03 का सफलतापूर्वक निर्धारित कक्षा में पहुंचना NavIC के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि है। प्रधानमंत्री मोदी ने दी बधाई प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसरो के वैज्ञानिकों और इंजीनियरों को सफल मिशन के लिए बधाई दी। उन्होंने कहा कि NVS-03 का सफल प्रक्षेपण भारत की स्वदेशी NavIC प्रणाली को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है और इससे महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिलेगा। आम लोगों को कहां मिलेगा फायदा? NavIC का इस्तेमाल भविष्य में मोबाइल फोन, वाहन नेविगेशन, रेलगाड़ियों की वास्तविक समय निगरानी, समुद्री जहाजों की स्थिति, भू-टैगिंग, आपातकालीन चेतावनी और अन्य स्थान आधारित सेवाओं में बढ़ सकता है। इसरो और सरकार इसे नागरिक तथा रणनीतिक दोनों क्षेत्रों में व्यापक रूप से अपनाने की दिशा में काम कर रहे हैं। आत्मनिर्भर अंतरिक्ष तकनीक की दिशा में बड़ा कदम NVS-03 का सफल प्रक्षेपण केवल एक उपग्रह मिशन नहीं, बल्कि भारत की स्वतंत्र नौवहन क्षमता को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम है। स्वदेशी परमाणु घड़ी और नई पीढ़ी की तकनीक से लैस यह उपग्रह NavIC को अधिक विश्वसनीय और उपयोगी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। स्रोत – भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन, प्रेस सूचना ब्यूरो, प्रधानमंत्री कार्यालय जय राष्ट्र न्यूज़

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वाराणसी में भाजपा की हार पर रवि किशन का बयान चर्चा में, शिक्षकों को लेकर छिड़ी बहस

लखनऊ/गोरखपुर: वाराणसी मंडल की शिक्षक और स्नातक विधान परिषद सीटों पर भाजपा की हार के बाद गोरखपुर से भाजपा सांसद रवि किशन का बयान चर्चा में है। उन्होंने कहा कि यह “शिक्षकों का चुनाव” था और इसे जनता के व्यापक चुनाव से नहीं जोड़ा जाना चाहिए। साथ ही उन्होंने दावा किया कि 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में भाजपा मजबूत प्रदर्शन करेगी। क्या बोले रवि किशन? रवि किशन ने एमएलसी चुनाव परिणाम पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र का चुनाव और विधानसभा चुनाव अलग प्रकृति के होते हैं। उन्होंने भोजपुरी अंदाज में कहा कि यह शिक्षकों का चुनाव था, जबकि 2027 में “जनता का चुनाव” होगा। उनका दावा है कि विधानसभा चुनाव में भाजपा के पक्ष में बेहतर माहौल रहेगा और पार्टी बड़ी जीत दर्ज करेगी। वाराणसी में दोनों सीटों पर भाजपा की हार वाराणसी मंडल की शिक्षक और स्नातक दोनों विधान परिषद सीटों पर भाजपा को हार का सामना करना पड़ा। समाजवादी पार्टी ने दोनों सीटें अपने नाम कीं। स्नातक सीट पर भाजपा की हार का अंतर भी पिछले चुनाव की तुलना में बढ़ा है, जिसके बाद पार्टी की रणनीति और प्रत्याशी चयन को लेकर संगठन के भीतर आत्ममंथन की चर्चा शुरू हो गई है। चुनाव से पहले रवि किशन ने किया था जीत का दावा खास बात यह है कि चुनाव से पहले रवि किशन ने दावा किया था कि शिक्षक भाजपा के साथ हैं। उन्होंने विपक्ष, विशेषकर समाजवादी पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा था कि उसका शिक्षा और शिक्षकों से कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने भाजपा प्रत्याशी के समर्थन में प्रचार करते हुए शिक्षकों से पार्टी के उम्मीदवारों के पक्ष में मतदान की अपील भी की थी। नतीजों के बाद इसी बयान पर उठे सवाल चुनाव परिणाम भाजपा के पक्ष में नहीं आने के बाद रवि किशन के पुराने दावों और नए बयान की तुलना की जा रही है। सोशल मीडिया पर भी यह सवाल उठ रहा है कि अगर चुनाव से पहले शिक्षकों को भाजपा की पहली पसंद बताया गया था, तो हार के बाद इसे केवल “शिक्षकों का चुनाव” बताना कितना उचित है। हालांकि यह राजनीतिक आलोचना है और इससे यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि सभी शिक्षक किसी एक पार्टी के पक्ष या विरोध में हैं। अखिलेश यादव ने भाजपा पर साधा निशाना समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने चुनाव नतीजों को शिक्षकों, छात्रों और शिक्षा से जुड़ी भाजपा की नीतियों के खिलाफ फैसला बताया। उन्होंने दावा किया कि पढ़े-लिखे बेरोजगार युवाओं ने भी भाजपा के खिलाफ अपनी राय जाहिर की है। 2027 से पहले क्यों अहम हैं नतीजे? उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले हुए इन विधान परिषद चुनावों को राजनीतिक दल अपने-अपने तरीके से देख रहे हैं। समाजवादी पार्टी के लिए वाराणसी में मिली जीत उत्साह बढ़ाने वाली है, जबकि भाजपा का कहना है कि विधान परिषद के सीमित मतदाता वाले चुनावों की तुलना सीधे विधानसभा चुनाव से नहीं की जा सकती। भाजपा का कुल प्रदर्शन मिला-जुला प्रदेश में भाजपा ने कई शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में जीत बरकरार रखी और कुल छह सीटें हासिल कीं। वहीं समाजवादी पार्टी ने पांच सीटें जीतीं और अपने विधान परिषद संख्या बल को मजबूत किया। वाराणसी की हार ने बढ़ाई राजनीतिक चर्चा वाराणसी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संसदीय क्षेत्र होने के कारण यहां भाजपा की हार को राजनीतिक रूप से ज्यादा अहम माना जा रहा है। हालांकि शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में सामान्य मतदाताओं के बजाय पंजीकृत शिक्षक और स्नातक ही वोट डालते हैं, इसलिए इन परिणामों को सीधे विधानसभा चुनाव का पूर्वानुमान मानना सही नहीं होगा। इसके बावजूद नतीजों ने भाजपा और सपा दोनों को 2027 से पहले अपनी रणनीतियों को लेकर नया राजनीतिक मुद्दा जरूर दे दिया है। स्रोत – नवभारत टाइम्स, इंडियन एक्सप्रेस, अमर उजाला, एबीपी न्यूज़ जय राष्ट्र न्यूज़

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यमुना में मनोज तिवारी की डुबकी पर विपक्ष का सवाल, सफाई को लेकर सियासत तेज; अगले दिन कालिंदी कुंज में दिखा सफेद झाग

नई दिल्ली: छठ पूजा से पहले दिल्ली में यमुना की सफाई एक बार फिर सियासी मुद्दा बन गई है। भाजपा सांसद मनोज तिवारी ने 29 अक्टूबर को सोनिया विहार घाट पर यमुना में डुबकी लगाई, आचमन किया और दावा किया कि नदी के प्रदूषण में काफी कमी आई है। उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी और आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल को भी यमुना में डुबकी लगाने की चुनौती दी। सोनिया विहार घाट पर लगाई डुबकी उत्तर-पूर्वी दिल्ली से भाजपा सांसद मनोज तिवारी सोनिया विहार घाट पहुंचे और यमुना में स्नान किया। उन्होंने कहा कि दिल्ली में यमुना के एक बड़े हिस्से की स्थिति पहले की तुलना में बेहतर हुई है और लोग यहां छठ पूजा कर सकते हैं। प्रदूषण आधा होने का किया दावा मनोज तिवारी ने दावा किया कि रेखा गुप्ता सरकार के कार्यकाल में पिछले करीब डेढ़ वर्ष में यमुना के प्रदूषण में लगभग आधी कमी आई है। भाजपा ने भी कहा कि दिल्ली में नदी के आधे से अधिक हिस्से की सफाई का काम पूरा हो चुका है। हालांकि सरकार की ओर से यह भी कहा गया है कि पूरी नदी को साफ करने में अभी समय लगेगा। राहुल गांधी और केजरीवाल को दी चुनौती डुबकी लगाने के बाद मनोज तिवारी ने राहुल गांधी और अरविंद केजरीवाल से सवाल किया कि वे यमुना में स्नान करने कब आएंगे। उन्होंने सोशल मीडिया पर अपने स्नान का वीडियो साझा करते हुए इसे नदी की सुधरी स्थिति का प्रमाण बताया। विपक्ष ने उठाए सफाई के दावों पर सवाल मनोज तिवारी के दावों पर विपक्ष ने सवाल उठाए। आम आदमी पार्टी के दिल्ली अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने कहा कि जिस पल्ला से वजीराबाद वाले ऊपरी हिस्से में तिवारी ने डुबकी लगाई, वह हिस्सा पहले से अपेक्षाकृत साफ रहा है। उन्होंने भाजपा नेताओं को कालिंदी कुंज और ओखला के आसपास नदी की स्थिति देखने की चुनौती दी, जहां प्रदूषण का स्तर कहीं अधिक गंभीर माना जाता है। अगले दिन कालिंदी कुंज में दिखा सफेद झाग मनोज तिवारी की डुबकी के एक दिन बाद कालिंदी कुंज क्षेत्र में यमुना की सतह पर मोटी सफेद झाग की परत दिखाई दी। इससे नदी की सफाई को लेकर राजनीतिक बहस और तेज हो गई। दिल्ली में सबसे प्रदूषित हिस्सा कौन-सा? यमुना दिल्ली में करीब 52 किलोमीटर तक बहती है। रिपोर्टों के मुताबिक वजीराबाद से ओखला के बीच करीब 22 किलोमीटर का हिस्सा सबसे ज्यादा प्रदूषित माना जाता है। यहीं नालों से बड़ी मात्रा में गंदा पानी नदी में पहुंचता है। जल मंत्री बोले- पूरी सफाई में लगेगा समय दिल्ली के जल मंत्री प्रवेश वर्मा पहले स्पष्ट कर चुके हैं कि सरकार ने पूरी यमुना के साफ हो जाने का दावा नहीं किया है। उनके अनुसार पल्ला से वजीराबाद तक के ऊपरी हिस्से में सुधार हुआ है, जबकि वजीराबाद से कालिंदी कुंज तक सफाई का काम अभी जारी है। ₹8,941 करोड़ की परियोजनाएं शुरू केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने हाल ही में यमुना की सफाई से जुड़ी 43 परियोजनाओं की शुरुआत की थी, जिनकी कुल लागत करीब ₹8,941 करोड़ बताई गई है। सरकार का लक्ष्य दिल्ली में यमुना के हिस्से को मई 2029 तक साफ करना है। छठ से पहले फिर केंद्र में यमुना छठ पूजा के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु नदी और घाटों पर पहुंचते हैं। ऐसे में हर वर्ष यमुना में प्रदूषण और झाग की स्थिति बड़ा राजनीतिक और प्रशासनिक मुद्दा बन जाती है। इस बार मनोज तिवारी की डुबकी ने सफाई के दावों को फिर से राष्ट्रीय चर्चा में ला दिया है। सफाई के दावों पर आंकड़ों की होगी असली परीक्षा यमुना की वास्तविक स्थिति का आकलन केवल किसी एक घाट या नदी के एक हिस्से को देखकर नहीं किया जा सकता। अलग-अलग स्थानों पर जल गुणवत्ता में बड़ा अंतर हो सकता है। इसलिए सरकार के सफाई संबंधी दावों की वास्तविक परीक्षा पूरे दिल्ली क्षेत्र में प्रदूषण के आंकड़ों और नालों से आने वाले गंदे पानी में कमी के आधार पर होगी। स्रोत – इंडियन एक्सप्रेस, पीटीआई, आज तक, एनडीटीवी, अमर उजाला, टाइम्स ऑफ इंडिया जय राष्ट्र न्यूज़

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“मेरा भगवान पर नहीं, प्रकृति पर विश्वास है” – राधिका आप्टे के बयान की चर्चा तेज

मुंबई: अभिनेत्री राधिका आप्टे अपने एक हालिया बयान को लेकर चर्चा में हैं। अपनी वेब सीरीज ‘अक्का’ के प्रचार के दौरान दिए गए एक साक्षात्कार में राधिका ने कहा कि वह भगवान में विश्वास नहीं करतीं और उनके लिए प्रकृति ही सर्वोच्च शक्ति है। उनका यह बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और इस पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। क्या बोलीं राधिका आप्टे? साक्षात्कार में राधिका से पूछा गया कि क्या वह किसी ऐसी सर्वोच्च शक्ति या ऊर्जा में विश्वास करती हैं जो जीवन का मार्गदर्शन करती है। इस पर उन्होंने कहा कि वह भगवान में विश्वास नहीं करतीं, बल्कि प्रकृति को सर्वोच्च शक्ति मानती हैं। उन्होंने यह भी कहा कि उनकी इच्छा है कि लोग मूर्तियों की जगह प्रकृति को अधिक महत्व दें। “प्रकृति ही मेरे लिए सर्वोच्च शक्ति” राधिका ने अपने विचार स्पष्ट करते हुए कहा कि उनके लिए प्रकृति ही सबसे बड़ी शक्ति है। उन्होंने शक्ति और प्रकृति के संबंध पर भी बात की और कहा कि शक्ति में अपार सुंदरता होती है, लेकिन उसके दुरुपयोग से विनाश भी हो सकता है। कीर्ति सुरेश की राय रही अलग इसी साक्षात्कार में अभिनेत्री कीर्ति सुरेश भी मौजूद थीं। उन्होंने राधिका से अलग राय रखते हुए कहा कि वह भगवान में विश्वास करती हैं और उन्हें लगता है कि कोई न कोई उच्च शक्ति जरूर मौजूद है। हालांकि उन्होंने खुद को धार्मिक व्यक्ति नहीं बताया। सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस राधिका के बयान के बाद सोशल मीडिया पर आस्था, धर्म और प्रकृति को लेकर बहस शुरू हो गई। कुछ लोग उनके विचारों का समर्थन करते हुए पर्यावरण और प्रकृति के संरक्षण की बात कर रहे हैं, जबकि कुछ उपयोगकर्ताओं ने मूर्ति पूजा को लेकर उनकी टिप्पणी पर आपत्ति जताई है। यह ध्यान रखना जरूरी है कि राधिका ने यह बयान अपने व्यक्तिगत विश्वास के तौर पर दिया है। ‘अक्का’ के प्रचार के दौरान दिया बयान राधिका आप्टे और कीर्ति सुरेश इन दिनों अपनी वेब सीरीज ‘अक्का’ के प्रचार में जुटी हुई हैं। इसी सिलसिले में दिए गए साक्षात्कार में उनसे आस्था और सर्वोच्च शक्ति को लेकर सवाल किया गया था। क्या है ‘अक्का’? ‘अक्का’ एक अपराध और सत्ता संघर्ष पर आधारित वेब सीरीज है। इसकी कहानी ऐसे माहौल के इर्द-गिर्द घूमती है जहां महिलाएं सत्ता के केंद्र में हैं और नियंत्रण तथा प्रभुत्व के लिए संघर्ष करती नजर आती हैं। सीरीज में राधिका आप्टे और कीर्ति सुरेश के अलावा तन्वी आजमी, महेश मांजरेकर, अंशुमन पुष्कर और मोनिका पंवार जैसे कलाकार भी प्रमुख भूमिकाओं में हैं। इसका लेखन और निर्देशन धर्मराज शेट्टी ने किया है। 30 अक्टूबर को हुई रिलीज ‘अक्का’ को 30 अक्टूबर 2026 को नेटफ्लिक्स पर जारी किया गया। सीरीज नेटफ्लिक्स और वाईआरएफ एंटरटेनमेंट की साझेदारी में तैयार की गई है। बेबाक बयानों के लिए जानी जाती हैं राधिका राधिका आप्टे पहले भी फिल्मों, समाज और मनोरंजन उद्योग से जुड़े मुद्दों पर खुलकर अपनी राय रखती रही हैं। इस बार आस्था और प्रकृति पर उनके बयान ने एक बार फिर उन्हें सार्वजनिक चर्चा के केंद्र में ला दिया है। फिलहाल उनका यह बयान सोशल मीडिया पर तेजी से साझा किया जा रहा है और इसे लेकर समर्थन तथा आलोचना दोनों देखने को मिल रहे हैं। स्रोत – लोकसत्ता, एबीपी माझा, सियासत, रेडिफ जय राष्ट्र न्यूज़

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सरकारी स्कूल में आसाराम से जुड़ी किताबें बांटने पर विवाद, प्राचार्य पद से हटाए गए; जांच जारी

रायपुर/बलरामपुर: छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले के एक सरकारी स्कूल में छात्रों को आसाराम से जुड़ी पुस्तिकाएं बांटे जाने के बाद विवाद खड़ा हो गया। अभिभावकों की शिकायत और शुरुआती जांच के बाद स्कूल के प्राचार्य महेश प्रजापति को पद से हटा दिया गया है और मामले की विस्तृत जांच जारी है। 26 अक्टूबर को बांटी गई थीं पुस्तिकाएं यह मामला बलरामपुर जिले के रघुनाथनगर स्थित स्वामी आत्मानंद शासकीय उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम विद्यालय का है। रिपोर्टों के अनुसार 26 अक्टूबर को आसाराम से जुड़े कुछ लोग स्कूल पहुंचे और मध्य विद्यालय के छात्रों को कई पुस्तिकाएं बांटी गईं। 25 से 30 बच्चों को दी गई सामग्री इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार स्कूल में 100 से अधिक विद्यार्थी हैं और इनमें से करीब 25 से 30 मध्य विद्यालय के छात्रों को पुस्तिकाएं दी गई थीं। बच्चों के घर पहुंचने के बाद अभिभावकों को इसकी जानकारी मिली और उन्होंने शिक्षा विभाग से शिकायत की। ‘संस्कार सरिता’ समेत कई पुस्तिकाओं का जिक्र अभिभावकों ने आरोप लगाया कि छात्रों को ‘संस्कार सरिता’, ‘व्रत नियम’ और ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ जैसी पुस्तिकाएं दी गई थीं। उनका आरोप था कि इनमें आसाराम और उनके अनुयायियों से जुड़ी सामग्री मौजूद थी। सोशल मीडिया पर वीडियो आने के बाद बढ़ा विवाद छात्रों के हाथों में पुस्तिकाएं दिखाने वाले वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद मामला तेजी से चर्चा में आया। अभिभावकों ने सवाल उठाया कि गंभीर आपराधिक मामलों में दोषी व्यक्ति से संबंधित सामग्री सरकारी विद्यालय के छात्रों में क्यों बांटी गई। प्राचार्य को पद से हटाया गया बलरामपुर के जिला शिक्षा अधिकारी नरेंद्र निरापुरे के अनुसार शुरुआती जांच के आधार पर प्राचार्य महेश प्रजापति को स्कूल से हटा दिया गया है। उन्हें प्रशासनिक कार्यालय से संबद्ध किया गया है, जबकि आगे की जांच जारी है। प्राचार्य ने क्या सफाई दी? प्राचार्य ने अधिकारियों को बताया कि उन्हें पुस्तिकाओं की सामग्री की पूरी जानकारी नहीं थी। उनका कहना है कि पुस्तकें बांटने आए लोगों ने इसे सामान्य शैक्षणिक सामग्री बताया था और इसी आधार पर अनुमति दी गई। इस दावे की भी जांच की जा रही है। परीक्षा लेने के आरोप की भी जांच कुछ रिपोर्टों में आरोप है कि विद्यार्थियों से पुस्तिकाएं पढ़ने और बाद में उनसे जुड़ी परीक्षा देने को कहा गया था। शिक्षा विभाग यह भी जांच रहा है कि क्या वास्तव में छात्रों को किसी परीक्षा या मूल्यांकन के लिए यह सामग्री पढ़ने का निर्देश दिया गया था। तीन दिन में रिपोर्ट देने के निर्देश जिला शिक्षा अधिकारी ने विकासखंड शिक्षा अधिकारी को मामले की जांच कर रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है। जांच में यह पता लगाया जाएगा कि पुस्तिकाओं के वितरण की अनुमति किसने दी, किस संस्था के लोग स्कूल आए थे और स्कूल प्रशासन की भूमिका क्या थी। आसाराम उम्रकैद की सजा काट रहा है आसाराम गंभीर यौन अपराधों के मामलों में दोषी ठहराया जा चुका है और उम्रकैद की सजा काट रहा है। इसी कारण उससे संबंधित सामग्री को बच्चों में बांटे जाने पर अभिभावकों ने कड़ी आपत्ति जताई। सरकारी स्कूलों में बाहरी सामग्री पर उठे सवाल इस घटना ने सरकारी विद्यालयों में बाहरी संस्थाओं या व्यक्तियों द्वारा शैक्षणिक सामग्री बांटने की प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े किए हैं। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि स्कूल स्तर पर निर्धारित नियमों का उल्लंघन हुआ या नहीं और आगे किस तरह की विभागीय कार्रवाई की जाएगी। स्रोत – इंडियन एक्सप्रेस, पीटीआई, नईदुनिया, टाइम्स ऑफ इंडिया जय राष्ट्र न्यूज़

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भूटान में ग्लेशियल झील फटने से अचानक बाढ़, बंगाल और असम में हाई अलर्ट; हजारों लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया

थिम्पू/नई दिल्ली: भूटान के शिंताफू ग्लेशियल झील में अचानक टूटने की घटना के बाद तेज पानी मो छू नदी से होते हुए संकोश नदी की ओर बढ़ा, जिससे भारत के पश्चिम बंगाल और असम में बाढ़ का खतरा पैदा हो गया। एहतियात के तौर पर उत्तर बंगाल और निचले असम के संवेदनशील इलाकों में प्रशासन ने हाई अलर्ट जारी कर दिया। 29 अक्टूबर की रात फटी ग्लेशियल झील यह घटना 29 अक्टूबर की रात भूटान के गासा जिले में स्थित शिंताफू झील में हुई। झील से अचानक भारी मात्रा में पानी निकला और मो छू नदी में तेज बाढ़ आ गई। इसका प्रवाह आगे चलकर पुनात्सांगछू और फिर भारत में संकोश नदी प्रणाली को प्रभावित कर सकता था। भूटान में सड़क और पुलों को नुकसान बाढ़ के कारण भूटान के प्रसिद्ध गासा त्शाछू गर्म जलस्रोत क्षेत्र में बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचा। सड़क के कुछ हिस्से बह गए और पुलों के क्षतिग्रस्त होने की भी सूचना मिली। राहत की बात यह रही कि भूटान में अब तक किसी मौत या घायल होने की पुष्टि नहीं हुई है। करीब 74 लाख घन मीटर पानी निकलने की रिपोर्ट शुरुआती रिपोर्टों में झील से करीब 74 लाख घन मीटर पानी बाहर निकलने का अनुमान लगाया गया। इसी वजह से संकोश नदी में जलस्तर अचानक बढ़ने की आशंका जताई गई और भारतीय प्रशासन ने सीमावर्ती इलाकों में तत्काल चेतावनी जारी की। बंगाल में हजारों लोगों को सुरक्षित स्थानों पर भेजा गया पश्चिम बंगाल के अलीपुरद्वार और कूचबिहार जिलों में नदी किनारे रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की कार्रवाई की गई। करीब 12 हजार लोगों को एहतियात के तौर पर स्थानांतरित किए जाने की रिपोर्ट सामने आई। असम के धुबरी और कोकराझार में विशेष निगरानी असम सरकार ने धुबरी और कोकराझार जिलों को विशेष निगरानी में रखा है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि राज्य सरकार संभावित प्रभाव की लगातार निगरानी कर रही है और राष्ट्रीय आपदा मोचन बल तथा अन्य एजेंसियों को तैयार रखा गया है। केंद्रीय जल आयोग ने जारी की चेतावनी केंद्रीय जल आयोग ने पश्चिम बंगाल के अलीपुरद्वार और असम के धुबरी जिलों में नदी का जलस्तर अचानक बढ़ने की आशंका को लेकर विशेष परामर्श जारी किया। संवेदनशील इलाकों में लोगों से नदियों और निचले क्षेत्रों से दूर रहने को कहा गया। बचाव दलों को तैयार रखा गया संभावित बाढ़ के खतरे को देखते हुए राष्ट्रीय और राज्य आपदा प्रतिक्रिया बलों को तैयार रखा गया। नदी किनारे के गांवों में लाउडस्पीकर के जरिए लोगों को चेतावनी दी गई और जरूरत पड़ने पर राहत शिविरों में जाने को कहा गया। आज सुबह तक बंगाल में स्थिति सामान्य 31 अक्टूबर की सुबह तक पश्चिम बंगाल के अलीपुरद्वार और कूचबिहार में हालात सामान्य बताए गए हैं। मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के अनुसार प्रशासन रातभर निगरानी करता रहा और संकट का स्तर फिलहाल सुरक्षित स्थिति में है। पहले लापता बताए गए 47 लोग भी सुरक्षित मिल गए हैं। संकोश नदी का जलस्तर भी घटा ताजा रिपोर्टों में संकोश नदी के जलस्तर में कमी आने की बात कही गई है। हालांकि भूटान में बाढ़ से बने नए जलभराव और संभावित द्वितीयक खतरे को देखते हुए अधिकारियों ने निगरानी जारी रखी है। क्यों खतरनाक होती है ग्लेशियल झील फटने की घटना? हिमालयी इलाकों में ग्लेशियर पिघलने से बनने वाली झीलों में भारी मात्रा में पानी जमा हो सकता है। प्राकृतिक बांध टूटने पर यह पानी अचानक नीचे की ओर बहता है और कुछ ही समय में तेज बाढ़ पैदा कर सकता है। इसे ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड कहा जाता है। हिंदू कुश हिमालय क्षेत्र में ऐसी घटनाओं को लेकर विशेषज्ञ लंबे समय से बेहतर निगरानी और प्रारंभिक चेतावनी व्यवस्था मजबूत करने की जरूरत पर जोर दे रहे हैं। फिलहाल खतरा कम, निगरानी जारी भारत में तत्काल बड़े नुकसान की सूचना नहीं है, लेकिन बंगाल और असम के संवेदनशील जिलों में प्रशासन सतर्क है। अधिकारियों ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और स्थानीय प्रशासन तथा आपदा प्रबंधन विभाग की आधिकारिक चेतावनियों का पालन करने की अपील की है। स्रोत – केंद्रीय जल आयोग, असम सरकार, रॉयटर्स, पीटीआई, आईसीआईएमओडी, इंडियन एक्सप्रेस जय राष्ट्र न्यूज़

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भारत के परमाणु विज्ञान के जनक डॉ. होमी जहांगीर भाभा को जयंती पर नमन, आधुनिक भारत की वैज्ञानिक नींव रखने में निभाई ऐतिहासिक भूमिका

नई दिल्ली: भारत के परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम के प्रमुख वास्तुकार डॉ. होमी जहांगीर भाभा की जयंती पर देश उनके वैज्ञानिक योगदान और दूरदर्शी नेतृत्व को याद कर रहा है। उनका जन्म 30 अक्टूबर 1909 को मुंबई में हुआ था। उन्होंने न केवल भारत के परमाणु कार्यक्रम की नींव रखी, बल्कि ऐसे वैज्ञानिक संस्थान खड़े किए जिन्होंने देश को अनुसंधान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। भारत के परमाणु कार्यक्रम के प्रमुख वास्तुकार डॉ. भाभा को व्यापक रूप से भारत के परमाणु कार्यक्रम का जनक माना जाता है। स्वतंत्रता से पहले ही उन्होंने यह समझ लिया था कि भविष्य में परमाणु ऊर्जा देश की अर्थव्यवस्था, उद्योग और ऊर्जा सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण होगी। उनकी सोच केवल बिजली उत्पादन तक सीमित नहीं थी। वे चाहते थे कि भारत परमाणु विज्ञान से जुड़ी तकनीक, अनुसंधान और मानव संसाधन में अपनी स्वतंत्र क्षमता विकसित करे। 1945 में स्थापित किया टाटा मूलभूत अनुसंधान संस्थान डॉ. भाभा ने 1945 में टाटा मूलभूत अनुसंधान संस्थान की स्थापना में केंद्रीय भूमिका निभाई। सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट के सहयोग से शुरू हुआ यह संस्थान आगे चलकर भारत में भौतिकी, गणित और अन्य आधुनिक वैज्ञानिक क्षेत्रों के प्रमुख अनुसंधान केंद्रों में शामिल हुआ। परमाणु ऊर्जा आयोग के पहले अध्यक्ष बने भारत सरकार ने 10 अगस्त 1948 को परमाणु ऊर्जा आयोग की स्थापना की और डॉ. भाभा इसके पहले अध्यक्ष बने। उन्होंने 1948 से 1966 तक आयोग का नेतृत्व किया। बाद में 1954 में परमाणु ऊर्जा विभाग की स्थापना की गई, जिसने भारत के दीर्घकालिक परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम को संस्थागत आधार दिया। भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र से जुड़ी विरासत डॉ. भाभा परमाणु ऊर्जा प्रतिष्ठान, ट्रॉम्बे के संस्थापक निदेशक भी रहे। उनके निधन के बाद इस संस्थान का नाम उनके सम्मान में भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र रखा गया। आज यह संस्थान परमाणु ऊर्जा, रिएक्टर प्रौद्योगिकी, परमाणु ईंधन, विकिरण तकनीक और वैज्ञानिक अनुसंधान के क्षेत्र में देश के सबसे महत्वपूर्ण संस्थानों में शामिल है। विश्व प्रसिद्ध वैज्ञानिक भी थे भाभा डॉ. भाभा केवल संस्थान निर्माता ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर के सैद्धांतिक भौतिक विज्ञानी भी थे। इलेक्ट्रॉन और पॉज़िट्रॉन के प्रकीर्णन पर उनके कार्य को आज भाभा प्रकीर्णन के नाम से जाना जाता है। उन्होंने ब्रह्मांडीय किरणों और कॉस्मिक शॉवर के सिद्धांत पर भी महत्वपूर्ण शोध किया। कैम्ब्रिज से शुरू हुआ वैज्ञानिक सफर डॉ. भाभा उच्च शिक्षा के लिए इंग्लैंड के कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय गए थे। वहां उन्होंने यांत्रिक विज्ञान और गणित में अध्ययन किया तथा आगे चलकर भौतिकी अनुसंधान को अपना प्रमुख क्षेत्र बनाया। भारत लौटने के बाद उन्होंने बेंगलुरु स्थित भारतीय विज्ञान संस्थान में सैद्धांतिक भौतिकी के क्षेत्र में काम किया। इसी दौर में भारतीय वैज्ञानिक अनुसंधान के लिए विश्वस्तरीय संस्थानों की आवश्यकता को लेकर उनकी सोच और मजबूत हुई। 1954 में मिला पद्म भूषण भारत सरकार ने डॉ. भाभा को 1954 में पद्म भूषण से सम्मानित किया। उन्हें 1941 में रॉयल सोसाइटी का फेलो भी चुना गया था। विज्ञान के क्षेत्र में उनके कार्य को भारत और विदेशों में व्यापक मान्यता मिली। कला और संस्कृति से भी था गहरा जुड़ाव डॉ. भाभा की रुचि केवल विज्ञान तक सीमित नहीं थी। उन्हें चित्रकला, संगीत, वास्तुकला और कला से भी गहरा लगाव था। TIFR की इमारतों, उद्यानों और कला संग्रह में उनकी सौंदर्य दृष्टि की छाप आज भी देखी जा सकती है। 1966 में विमान दुर्घटना में निधन 24 जनवरी 1966 को एयर इंडिया की उड़ान संख्या 101 की दुर्घटना में डॉ. होमी भाभा का निधन हो गया। उस समय उनकी उम्र 56 वर्ष थी। उनकी अचानक मृत्यु के बावजूद उनके बनाए संस्थान और वैज्ञानिक नीतियां आगे भी भारत के परमाणु कार्यक्रम की दिशा तय करती रहीं। 30 अक्टूबर को मनाया जाता है संस्थापक दिवस टाटा मूलभूत अनुसंधान संस्थान हर वर्ष 30 अक्टूबर को डॉ. भाभा के जन्मदिन के अवसर पर संस्थापक दिवस मनाता है। इस अवसर पर उन्हें श्रद्धांजलि दी जाती है और वैज्ञानिक व शैक्षणिक उपलब्धियों का सम्मान किया जाता है। आत्मनिर्भर भारत की वैज्ञानिक सोच के अग्रदूत डॉ. भाभा का मानना था कि आधुनिक राष्ट्र की प्रगति के लिए विज्ञान और तकनीक में अपनी क्षमता विकसित करना जरूरी है। भारत की परमाणु ऊर्जा, वैज्ञानिक अनुसंधान और उच्च प्रौद्योगिकी में आज दिखाई देने वाली आत्मनिर्भरता के पीछे उनके द्वारा तैयार की गई संस्थागत नींव की अहम भूमिका है। उनकी जयंती भारत को यह याद दिलाती है कि मजबूत वैज्ञानिक संस्थान और दीर्घकालिक शोध किसी भी राष्ट्र की प्रगति के सबसे महत्वपूर्ण आधारों में से हैं। स्रोत – परमाणु ऊर्जा विभाग, भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र, टाटा मूलभूत अनुसंधान संस्थान, आकाशवाणी समाचार जय राष्ट्र न्यूज़

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