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भोपाल में शिक्षक अभ्यर्थियों का उग्र प्रदर्शन, नियुक्ति की मांग को लेकर सड़क पर उतरे मेरिट होल्डर

भोपाल: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में प्राथमिक शिक्षक वर्ग-3 के मेरिट होल्डर अभ्यर्थियों ने नियुक्ति पत्र और जॉइनिंग की मांग को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया। अभ्यर्थियों ने बोर्ड ऑफिस चौराहे पर सड़क जाम कर दी, थालियां बजाईं और नारेबाजी की। कुछ प्रदर्शनकारी सड़क पर लेट गए, जिसके बाद पुलिस और अभ्यर्थियों के बीच खींचतान की स्थिति भी बनी। बोर्ड ऑफिस चौराहे पर किया चक्काजाम प्रदर्शनकारी अभ्यर्थी गुरुवार दोपहर भोपाल के व्यस्त बोर्ड ऑफिस चौराहे पर पहुंचे और सड़क पर बैठकर विरोध शुरू कर दिया। प्रदर्शन के कारण करीब आधे घंटे तक यातायात गंभीर रूप से प्रभावित रहा। थालियां बजाकर जताया विरोध महिला और पुरुष अभ्यर्थियों ने हाथों में स्टील की थालियां लेकर उन्हें बजाया और सरकार के खिलाफ नारे लगाए। अभ्यर्थियों का कहना था कि मेरिट सूची में चयन होने के बावजूद लंबे समय से उन्हें नियुक्ति पत्र और पदस्थापना नहीं दी जा रही है। सड़क पर लेट गए प्रदर्शनकारी पुलिस ने जब अभ्यर्थियों को सड़क से हटाने की कोशिश की तो कई प्रदर्शनकारी सड़क पर लेट गए और एक-दूसरे का हाथ पकड़कर वहीं डटे रहे। इसके बाद पुलिस ने रास्ता खाली कराने के लिए कई लोगों को हटाया और कुछ प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया। हिरासत के दौरान गाया राष्ट्रगान पुलिस की कार्रवाई के दौरान कुछ प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रगान गाना शुरू कर दिया। इस घटनाक्रम के वीडियो और तस्वीरें भी सामने आई हैं। क्या है भर्ती विवाद? अभ्यर्थियों के अनुसार उनकी नियुक्ति नियम 49 और डीएलएड योग्यता से जुड़ी शर्तों के कारण अटकी हुई है। उनका दावा है कि चयन और मेरिट सूची में नाम होने के बावजूद दस्तावेज सत्यापन और पात्रता संबंधी विवाद के कारण उन्हें नियुक्ति पत्र नहीं दिया गया। 5 अक्टूबर से चल रहा था धरना टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक अभ्यर्थी 5 अक्टूबर से बोर्ड ऑफिस क्षेत्र में धरने पर बैठे थे। लंबे इंतजार के बाद 29 अक्टूबर को उन्होंने सड़क जाम कर प्रदर्शन तेज कर दिया। पहले भी कर चुके हैं प्रदर्शन शिक्षक अभ्यर्थी इससे पहले 7 अक्टूबर को भी चक्काजाम कर चुके हैं। उस समय करीब चार घंटे तक यातायात प्रभावित हुआ था। अधिकारियों से बातचीत और आश्वासन मिलने के बाद प्रदर्शन समाप्त किया गया था, लेकिन अभ्यर्थियों का कहना है कि समस्या का समाधान नहीं हुआ। पुलिस पर अभ्यर्थियों ने लगाए आरोप कुछ अभ्यर्थियों ने आरोप लगाया कि पुलिस ने प्रदर्शनकारियों, विशेषकर महिलाओं के साथ सख्ती की और उन्हें घसीटकर वाहनों में बैठाया। पुलिस ने इन आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि प्रदर्शनकारियों को सार्वजनिक सड़क अवरुद्ध करने की अनुमति नहीं थी और यातायात बहाल करने के लिए कार्रवाई की गई। नियुक्ति तक आंदोलन जारी रखने की चेतावनी प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे केवल आश्वासन नहीं, बल्कि नियुक्ति पत्र और जॉइनिंग की स्पष्ट तारीख चाहते हैं। उन्होंने चेतावनी दी है कि जब तक भर्ती प्रक्रिया पर ठोस फैसला नहीं होता, उनका आंदोलन जारी रहेगा। स्रोत – टाइम्स ऑफ इंडिया, नईदुनिया, अमर उजाला, हरिभूमि, पीपुल्स अपडेट जय राष्ट्र न्यूज़

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ओडिशा में चक्रवात ‘अर्नब’ के बाद भीषण बाढ़, 1,000 से अधिक गांव प्रभावित; हजारों लोग संकट में

भुवनेश्वर: चक्रवात ‘अर्नब’ के गुजरने के बाद ओडिशा के दक्षिणी जिलों में मूसलाधार बारिश और अचानक आई बाढ़ ने गंभीर स्थिति पैदा कर दी है। सबसे ज्यादा असर गंजाम और गजपति जिलों में हुआ है, जहां सरकारी आंकड़ों के अनुसार 1,000 से अधिक गांव प्रभावित हुए हैं। गंजाम जिले में करीब 2,000 लोगों के फंसे होने की सूचना है और बचाव अभियान लगातार जारी है। गंजाम और गजपति सबसे ज्यादा प्रभावित सरकारी आंकड़ों के मुताबिक गंजाम जिले के 22 विकासखंडों में 299 गांव, जबकि गजपति जिले के सात विकासखंडों में 711 गांव बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। इस तरह दोनों जिलों में कुल प्रभावित गांवों की संख्या 1,000 से अधिक हो गई है। करीब 2,000 लोग फंसे गंजाम के धराकोट, सनाखेमुंडी, सोराडा और पात्रपुर जैसे इलाकों में पानी भरने के कारण बड़ी संख्या में लोग फंस गए। अधिकारियों के अनुसार करीब 2,000 लोगों को निकालने के लिए बचाव अभियान चलाया गया और कुछ स्थानों पर भारतीय तटरक्षक बल के हेलीकॉप्टर की मदद भी ली गई। 59 हजार से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया राज्य प्रशासन के मुताबिक पिछले 72 घंटों में 59,000 से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया। राहत शिविरों में भोजन, पेयजल और जरूरी चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। पात्रपुर में 546 मिलीमीटर बारिश गंजाम जिले के पात्रपुर में 24 घंटे के दौरान 546 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। वहीं कंधमाल के जी. उदयगिरि में 462.4 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड हुई। इतनी भारी वर्षा के कारण नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ा और कई निचले इलाकों में पानी घुस गया। रुशिकुल्या और वंशधारा नदियां उफान पर अत्यधिक बारिश के चलते रुशिकुल्या और वंशधारा नदियां उफान पर आ गईं। कई इलाकों में नदियों का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर पहुंच गया, जिससे गांवों और कस्बों में पानी भर गया और सड़क संपर्क बाधित हुआ। सड़क और रेल यातायात प्रभावित बाढ़ और भूस्खलन के कारण कई सड़कों और पुलों को नुकसान पहुंचा है। दक्षिण ओडिशा में रेल सेवाओं पर भी असर पड़ा और कई ट्रेनों को रद्द करना पड़ा। कुछ इलाकों में रेल पटरियों के आसपास पानी भरने से यातायात बाधित हुआ। भूस्खलन से भी बढ़ी मुश्किल गजपति और आसपास के पहाड़ी इलाकों में भारी बारिश के कारण भूस्खलन की घटनाएं सामने आई हैं। कलिंगा घाट क्षेत्र में बड़े पत्थर और मलबा सड़कों पर गिरने से वाहनों की आवाजाही प्रभावित हुई। प्रशासन सड़कें साफ करने और संपर्क बहाल करने में जुटा है। 69 बचाव दल किए गए तैनात राज्य सरकार ने प्रभावित क्षेत्रों में 69 आपदा प्रतिक्रिया दल तैनात किए हैं। इनमें राष्ट्रीय आपदा मोचन बल की नौ टीमें और ओडिशा आपदा त्वरित कार्रवाई बल की 60 टीमें शामिल हैं। दमकल विभाग की टीमें भी राहत कार्यों में लगी हैं। मुख्यमंत्री करेंगे हवाई सर्वेक्षण ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी और राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री सुरेश पुजारी प्रभावित इलाकों का हवाई सर्वेक्षण करने वाले हैं। सरकार गंजाम और गजपति में हुए नुकसान का आकलन कर राहत और पुनर्वास कार्य तेज करने की तैयारी कर रही है। केंद्र ने दिया मदद का भरोसा केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी से बात कर स्थिति की जानकारी ली और केंद्र की ओर से हर संभव सहायता देने का भरोसा दिया। केंद्र सरकार की टीमें नुकसान का आकलन करने के लिए प्रभावित क्षेत्रों का दौरा भी कर सकती हैं। चक्रवात कमजोर, लेकिन बारिश का खतरा बरकरार भारत मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार चक्रवात अर्नब का अवशेष कमजोर होकर कम दबाव वाले क्षेत्र में बदल चुका है। हालांकि ओडिशा के कई इलाकों में भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना बनी हुई है। समुद्री तट पर भी सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। स्रोत – भारत मौसम विज्ञान विभाग, ओडिशा सरकार, द न्यू इंडियन एक्सप्रेस, इंडियन एक्सप्रेस जय राष्ट्र न्यूज़

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1 नवंबर की INDIA गठबंधन रैली की तैयारियां तेज, पवन खेड़ा बोले- उम्मीद से ज्यादा जुटेंगे लोग

नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली के रामलीला मैदान में 1 नवंबर 2026 को होने वाली INDIA गठबंधन की महारैली की तैयारियां अंतिम चरण में पहुंच गई हैं। कांग्रेस और सहयोगी दल मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण, कथित ‘वोट चोरी’ और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ इस रैली के जरिए बड़ा राजनीतिक संदेश देने की तैयारी में हैं। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने दावा किया है कि रैली में उम्मीद से ज्यादा लोग पहुंचेंगे और इसे लेकर विपक्षी दलों में व्यापक उत्साह है। रामलीला मैदान में तैयारियां तेज रामलीला मैदान में मुख्य मंच तैयार किया जा रहा है और INDIA गठबंधन के नेताओं के लिए अलग व्यवस्था भी की गई है। पुलिस ने कार्यक्रम स्थल पर बैरिकेडिंग, सामान की जांच के लिए उपकरण और धातु जांच यंत्र लगाने शुरू कर दिए हैं। रैली सुबह करीब 10 बजे से शाम 5 बजे तक प्रस्तावित है। प्रियंका गांधी ने लिया तैयारियों का जायजा कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने गुरुवार शाम रामलीला मैदान पहुंचकर तैयारियों की समीक्षा की। उनके साथ कांग्रेस संगठन महासचिव के.सी. वेणुगोपाल और सांसद पवन खेड़ा भी मौजूद रहे। पार्टी कार्यकर्ता बड़े स्तर पर मंच, बैठने और प्रवेश व्यवस्था को अंतिम रूप देने में जुटे हैं। 10 लाख लोगों को जुटाने का लक्ष्य कांग्रेस ने रैली में करीब 10 लाख लोगों को जुटाने का लक्ष्य रखा है। पार्टी के राज्यसभा सांसद नासिर हुसैन ने कहा है कि इसे सफल बनाना केवल कांग्रेस नहीं, बल्कि INDIA गठबंधन के सभी दलों की सामूहिक जिम्मेदारी है। समाजवादी पार्टी और वाम दलों सहित सहयोगी दलों को भी अलग-अलग जिम्मेदारियां दी गई हैं। पवन खेड़ा बोले- रैली होकर रहेगी पवन खेड़ा ने साफ किया है कि रैली स्थगित नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि छात्र, किसान, मजदूर, महिलाएं, युवा और लोकतंत्र को लेकर चिंतित नागरिक इसमें शामिल होंगे। कांग्रेस का दावा है कि भाजपा द्वारा रैली को लेकर उठाए जा रहे सवालों से उल्टा इसका प्रचार बढ़ा है और लोगों में कार्यक्रम को लेकर रुचि बढ़ी है। राहुल गांधी ने भी की शामिल होने की अपील लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पहले ही लोगों से ‘चलो दिल्ली’ का आह्वान कर चुके हैं। उन्होंने कहा है कि यह केवल एक राजनीतिक दल की रैली नहीं, बल्कि लोकतंत्र, संविधान और मताधिकार की रक्षा से जुड़ा आंदोलन है। कांग्रेस ने इसे ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ अभियान का हिस्सा बनाया है। मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग रैली का प्रमुख मुद्दा मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की भूमिका और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण में कथित अनियमितताएं हैं। कांग्रेस और INDIA गठबंधन का आरोप है कि मतदाता सूचियों से वास्तविक मतदाताओं के नाम हटाए जा रहे हैं। हालांकि चुनाव आयोग विपक्ष के इन आरोपों से सहमत नहीं है। दिल्ली पुलिस से मिली अनुमति 1 नवंबर की रैली को दिल्ली पुलिस की अनुमति मिल चुकी है। हालांकि आयोजकों को कानून-व्यवस्था बनाए रखने, रात में मैदान में रुकने से बचने और ऐसे भाषणों से परहेज करने के निर्देश दिए गए हैं जिनसे सामाजिक या सांप्रदायिक तनाव पैदा हो सकता है। प्रदूषण नियम बन सकते हैं चुनौती रैली के दिन दिल्ली में बाहरी राज्यों से आने वाले पुराने प्रदूषण मानकों वाले पेट्रोल और डीजल वाहनों पर प्रतिबंध लागू होने वाला है। कांग्रेस का आरोप है कि इससे पड़ोसी राज्यों से समर्थकों के दिल्ली पहुंचने में बाधा आ सकती है। दिल्ली सरकार ने इन नियमों में रैली के लिए विशेष छूट देने से इनकार किया है। व्यापारियों ने जताई चिंता दिल्ली के कुछ व्यापारी संगठनों ने रैली की तारीख बदलने की मांग की है। उनका कहना है कि दिवाली से पहले बड़ी संख्या में लोगों और वाहनों के पहुंचने से पुरानी दिल्ली और आसपास के बाजारों में कारोबार प्रभावित हो सकता है। चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री ने कांग्रेस नेतृत्व से रैली को दिवाली के बाद कराने का आग्रह किया है। 2027 से पहले विपक्ष का शक्ति प्रदर्शन उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों में आने वाले चुनावों से पहले यह रैली INDIA गठबंधन के बड़े शक्ति प्रदर्शन के रूप में देखी जा रही है। विपक्ष इसे मतदाता सूची और चुनाव आयोग से जुड़े मुद्दों पर जनता को लामबंद करने के अवसर के रूप में पेश कर रहा है। रैली में वास्तविक भीड़ कितनी जुटती है, इस पर सत्तापक्ष और विपक्ष दोनों की नजर रहेगी। स्रोत – इंडियन एक्सप्रेस, एनडीटीवी, कांग्रेस के सार्वजनिक बयान जय राष्ट्र न्यूज़

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विकास की आड़ में विनाश क्यों? भीमाशंकर के जंगल बचाने की मांग तेज, हजारों पेड़ों की कटाई पर बढ़ा विरोध

मुंबई/रायगढ़: महाराष्ट्र के कर्जत-भीमाशंकर क्षेत्र में प्रस्तावित जलविद्युत परियोजना को लेकर पर्यावरणीय विवाद लगातार तेज होता जा रहा है। परियोजना के लिए 32,490 पेड़ों की कटाई की मंजूरी दिए जाने की खबरों के बाद पर्यावरण कार्यकर्ता, स्थानीय लोग और विपक्षी नेता इसका विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि बिजली उत्पादन के नाम पर सह्याद्री के संवेदनशील जंगलों और वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास को नुकसान नहीं पहुंचाया जाना चाहिए। किस परियोजना को लेकर विवाद? यह विवाद रायगढ़ जिले के कर्जत तालुका में प्रस्तावित सैदोंगर-1 पंप्ड स्टोरेज जलविद्युत परियोजना को लेकर है। परियोजना की क्षमता लगभग 3,000 मेगावाट है और इसकी अनुमानित लागत करीब ₹13,505 करोड़ बताई गई है। परियोजना टॉरेंट पावर से जुड़ी है। 32 हजार से ज्यादा पेड़ों की कटाई की मंजूरी रिपोर्टों के मुताबिक परियोजना के लिए करीब 233 हेक्टेयर वन भूमि के इस्तेमाल और 32,490 पेड़ों को हटाने की अनुमति दी गई है। इसमें आरक्षित, निजी और संरक्षित वन क्षेत्र शामिल होने की बात सामने आई है। पर्यावरण प्रेमियों का विरोध क्यों? पर्यावरण कार्यकर्ताओं का कहना है कि सह्याद्री और पश्चिमी घाट जैव विविधता की दृष्टि से बेहद संवेदनशील क्षेत्र हैं। बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई से वन्यजीवों का आवास टूट सकता है, जल स्रोतों पर असर पड़ सकता है और मिट्टी के कटाव तथा भूस्खलन का जोखिम बढ़ सकता है। स्थानीय संगठनों ने परियोजना को किसी कम संवेदनशील क्षेत्र में स्थानांतरित करने की मांग की है। शेखरू समेत कई वन्यजीवों को लेकर चिंता भीमाशंकर क्षेत्र महाराष्ट्र के राज्य पशु शेखरू यानी भारतीय विशाल गिलहरी के लिए जाना जाता है। पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने तेंदुए, हिरण, जंगली सूअर, गौर और कई पक्षी प्रजातियों के प्राकृतिक आवास पर भी संभावित असर की आशंका जताई है। पनवेल में भी हुआ विरोध प्रदर्शन 29 अक्टूबर को पनवेल में प्रकृति प्रेमियों और सामाजिक संगठनों ने इस परियोजना के विरोध में प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि वे विकास के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन प्राकृतिक संसाधनों की कीमत पर होने वाला विकास स्वीकार नहीं किया जा सकता। वन विभाग ने क्या कहा? महाराष्ट्र वन विभाग ने उन दावों को खारिज किया है जिनमें कहा जा रहा था कि भीमाशंकर वन्यजीव अभयारण्य के भीतर अवैध कटाई हो रही है। विभाग के अनुसार परियोजना अभयारण्य से करीब 16 किलोमीटर और भीमाशंकर मंदिर से लगभग 20 किलोमीटर दूर है तथा परियोजना क्षेत्र अभयारण्य और उसके पर्यावरण संवेदनशील क्षेत्र के बाहर है। सरकार का दावा—सभी प्रक्रियाओं का पालन मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा है कि परियोजना के लिए करीब 18 महीने तक सुनवाई और आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी की गई। सरकार का दावा है कि यह परियोजना स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन, बिजली ग्रिड की स्थिरता और ऊर्जा सुरक्षा में मदद करेगी। 90 हजार पेड़ लगाने का दावा वन विभाग के मुताबिक परियोजना के बदले टॉरेंट पावर द्वारा करीब 60 हजार और वन विभाग द्वारा लगभग 30 हजार पेड़ लगाए जाने की योजना है। सरकार का यह भी दावा है कि परियोजना से कोयले पर निर्भरता और पानी की खपत कम होगी। सवाल सिर्फ पेड़ों की संख्या का नहीं पर्यावरण विशेषज्ञों का तर्क है कि एक पुराने प्राकृतिक जंगल की जगह केवल नए पौधे लगा देना समान पारिस्थितिकी तंत्र तैयार नहीं करता। पुराने जंगलों में मिट्टी, जल स्रोत, पेड़-पौधे, सूक्ष्म जीव और वन्यजीव मिलकर एक जटिल प्राकृतिक व्यवस्था बनाते हैं जिसे दोबारा विकसित होने में दशकों लग सकते हैं। विकास और पर्यावरण में संतुलन जरूरी इस विवाद का मूल सवाल यही है कि क्या ऊर्जा और बुनियादी ढांचे की परियोजनाओं के लिए पर्यावरणीय रूप से संवेदनशील इलाकों को नुकसान पहुंचाना जरूरी है। विरोध करने वाले संगठनों की मांग है कि परियोजना के पर्यावरणीय प्रभाव का दोबारा मूल्यांकन किया जाए और ऐसा विकल्प खोजा जाए जिसमें ऊर्जा जरूरतें भी पूरी हों और जंगल भी सुरक्षित रहें। स्रोत – महाराष्ट्र वन विभाग, टाइम्स ऑफ इंडिया, पीटीआई, लोकसत्ता, फ्री प्रेस जर्नल, पर्यावरण संगठनों की रिपोर्ट जय राष्ट्र न्यूज़

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राहुल गांधी का ‘चलो दिल्ली’ मार्च 1 नवंबर को, लोगों से शामिल होने की अपील

नई दिल्ली: लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने 1 नवंबर 2026 को दिल्ली के रामलीला मैदान में होने वाले ‘चलो दिल्ली’ मार्च में देशभर के लोगों से शामिल होने की अपील की है। उन्होंने विशेष रूप से छात्रों, किसानों, मजदूरों, महिलाओं, युवाओं और व्यापारियों से इस विरोध प्रदर्शन का हिस्सा बनने को कहा है। लोकतंत्र और संविधान की रक्षा का बताया मार्च राहुल गांधी ने अपने वीडियो संदेश में कहा कि यह मार्च किसी एक राजनीतिक दल का कार्यक्रम नहीं है। उनके मुताबिक इसका उद्देश्य लोकतंत्र और संविधान की रक्षा करना तथा कथित ‘वोट चोरी’ के खिलाफ आवाज उठाना है। उन्होंने इसे देश की “आत्मा” से जुड़ा आंदोलन बताया। 1 नवंबर को रामलीला मैदान में जुटने की अपील राहुल गांधी ने लोगों से 1 नवंबर को नई दिल्ली के रामलीला मैदान पहुंचने का आह्वान किया है। उन्होंने राजनीतिक विचारधारा से ऊपर उठकर छात्र संगठनों और आम नागरिकों से मार्च में शामिल होने की अपील की। SIR को लेकर विपक्ष का विरोध INDIA गठबंधन का यह आंदोलन चुनाव आयोग द्वारा मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर जारी विरोध का हिस्सा है। विपक्ष का आरोप है कि इस प्रक्रिया में वास्तविक मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं। चुनाव आयोग और सरकार इन आरोपों को लेकर अलग रुख रखते रहे हैं, इसलिए विपक्ष के दावों को आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर भी निशाना INDIA गठबंधन के नेता मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की भूमिका पर सवाल उठा रहे हैं और उनके खिलाफ जवाबदेही की मांग कर रहे हैं। विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और SIR प्रक्रिया को लेकर संसद से लेकर अदालत और सड़क तक विरोध तेज किया है। छात्रों को भी दिया विशेष संदेश राहुल गांधी ने छात्र संगठनों से कहा कि उनकी राजनीतिक विचारधारा चाहे जो भी हो, अगर वे लोकतंत्र और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लेकर चिंतित हैं तो उन्हें इस मार्च में शामिल होना चाहिए। उन्होंने लोगों से पुलिस कार्रवाई या लाठीचार्ज के डर से पीछे नहीं हटने की भी अपील की। ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ अभियान का हिस्सा यह मार्च विपक्ष के ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ अभियान का हिस्सा है। कांग्रेस ने पहले भी लोगों से 1 नवंबर को दिल्ली पहुंचने की अपील करते हुए आरोप लगाया था कि मतदाता सूचियों से नाम हटाए जा रहे हैं और चुनावी प्रक्रिया को लेकर सवाल उठ रहे हैं। INDIA गठबंधन की बड़ी लामबंदी की तैयारी कांग्रेस और INDIA गठबंधन इस कार्यक्रम के लिए अलग-अलग राज्यों से कार्यकर्ताओं और समर्थकों को दिल्ली लाने की तैयारी कर रहे हैं। विपक्ष इस रैली को चुनाव आयोग और केंद्र सरकार पर राजनीतिक दबाव बढ़ाने के बड़े मंच के रूप में देख रहा है। 2027 के चुनावों से पहले बढ़ी सियासी गर्मी उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों में आने वाले चुनावों और मतदाता सूची विवाद के बीच यह रैली राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। विपक्ष इसे लोकतंत्र और मताधिकार से जोड़ रहा है, जबकि आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर सत्ता पक्ष की प्रतिक्रिया पर भी नजर रहेगी। स्रोत – इंडियन एक्सप्रेस, हिंदुस्तान टाइम्स, द प्रिंट, इकोनॉमिक टाइम्स जय राष्ट्र न्यूज़

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पटना की खेमनीचक सब्जी मंडी में भीषण आग, 50 से अधिक दुकानें जलकर राख

पटना: बिहार की राजधानी पटना के रामकृष्ण नगर थाना क्षेत्र स्थित खेमनीचक बाजार में गुरुवार तड़के भीषण आग लग गई। आग इतनी तेजी से फैली कि सब्जी की दुकानों, मरम्मत की दुकानों और अन्य प्रतिष्ठानों समेत 50 से अधिक दुकानें जलकर राख हो गईं। घटना में कई मोटरसाइकिलें भी आग की चपेट में आ गईं। राहत की बात यह रही कि किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है। रात तीन बजे के बाद भड़की आग रिपोर्ट के अनुसार आग तड़के तीन बजे के बाद लगी। शुरुआत में कुछ दुकानों में आग दिखाई दी, लेकिन बाजार में दुकानें एक-दूसरे के काफी करीब होने और ज्वलनशील सामान मौजूद होने के कारण आग तेजी से फैलती चली गई। चार गैस सिलेंडरों में हुआ विस्फोट बाजार में बने एक अस्थायी होटल में रखे चार एलपीजी सिलेंडरों के फटने की बात भी सामने आई है। धमाकों से पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई और आग और अधिक फैल गई। स्थानीय लोगों के अनुसार सिलेंडर फटने की आवाज दूर तक सुनाई दी। 50 से ज्यादा दुकानें पूरी तरह जलीं अगलगी में सब्जी की दुकानों के साथ कई अन्य छोटे कारोबारियों की दुकानें भी जल गईं। व्यापारियों का सामान, उपकरण और रोजमर्रा का पूरा भंडार आग की भेंट चढ़ गया। कई दुकानदारों ने इसे अपनी वर्षों की कमाई खत्म हो जाने जैसा बताया है। 15 से 20 दमकल गाड़ियां मौके पर पहुंचीं आग की सूचना मिलते ही लोदीपुर, कंकड़बाग, सचिवालय, पटना सिटी और अन्य दमकल केंद्रों से करीब 15 से 20 अग्निशमन वाहन मौके पर भेजे गए। दमकलकर्मियों ने लगभग एक घंटे की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। रिहायशी इलाकों तक पहुंचने से रोकी गई आग खेमनीचक बाजार घनी आबादी वाले इलाके के पास स्थित है। दमकलकर्मियों की सबसे बड़ी चुनौती आग को आसपास की रिहायशी इमारतों तक पहुंचने से रोकना थी। समय रहते आग पर नियंत्रण पाने से बड़ा हादसा टल गया। कई मोटरसाइकिलें भी जलीं आग की चपेट में बाजार के आसपास खड़ी कई मोटरसाइकिलें भी आ गईं। आग इतनी तेज थी कि दुकानदारों को अपना सामान निकालने तक का पर्याप्त समय नहीं मिल सका। आग लगने की वजह अभी साफ नहीं अग्निशमन विभाग के अधिकारी अजीत कुमार के अनुसार आग लगने का सही कारण अभी पता नहीं चल सका है। घटना की जांच की जा रही है और नुकसान का आकलन भी शुरू कर दिया गया है। व्यापारियों को लाखों के नुकसान की आशंका दुकानों में रखा सामान, नकदी, उपकरण और अन्य सामग्री जलने के कारण कारोबारियों को भारी आर्थिक नुकसान हुआ है। प्रशासन की ओर से नुकसान का पूरा आकलन किए जाने के बाद ही वास्तविक राशि स्पष्ट हो पाएगी। जनहानि नहीं होना बड़ी राहत भीषण आग और सिलेंडर विस्फोटों के बावजूद किसी व्यक्ति की मौत या घायल होने की पुष्टि नहीं हुई है। घटना के समय बाजार में भीड़ कम होने के कारण बड़ी जनहानि टल गई। स्रोत – टाइम्स ऑफ इंडिया, प्रभात खबर जय राष्ट्र न्यूज़

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चक्रवात ‘अर्नब’ का कहर! आंध्र प्रदेश में मौतें, कई ट्रेनें और उड़ानें रद्द

अमरावती: चक्रवात ‘अर्नब’ के आंध्र प्रदेश तट से टकराने के बाद राज्य के कई हिस्सों में भारी तबाही की खबरें सामने आई हैं। तेज हवाओं, मूसलाधार बारिश, पेड़ गिरने और बिजली व्यवस्था प्रभावित होने के कारण कई लोगों की मौत हुई है। तटीय जिलों में जनजीवन अस्त-व्यस्त है और रेल व हवाई सेवाओं पर भी असर पड़ा है। आंध्र प्रदेश में कई लोगों की मौत चक्रवात से जुड़ी घटनाओं में आंध्र प्रदेश में कई लोगों की जान गई है। अलग-अलग जिलों में पेड़ गिरने, बिजली के करंट और अन्य दुर्घटनाओं के कारण मौतों की सूचना मिली है। प्रशासन ने प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव कार्य तेज कर दिए हैं। तेज हवाओं ने मचाई तबाही तटीय इलाकों में चक्रवात के दौरान बेहद तेज हवाएं चलीं। कई स्थानों पर पेड़ और बिजली के खंभे गिर गए, जिससे सड़कों पर आवाजाही बाधित हुई और बिजली आपूर्ति ठप हो गई। कई ट्रेनें रद्द और मार्ग बदले गए चक्रवात और भारी बारिश के कारण रेलवे ने कई ट्रेनों को रद्द, आंशिक रूप से रद्द या दूसरे मार्ग से चलाने का फैसला किया है। आंध्र प्रदेश और ओडिशा से गुजरने वाली कई लंबी दूरी की रेल सेवाएं भी प्रभावित हुई हैं। उड़ानों पर भी असर खराब मौसम और तेज हवाओं के कारण कुछ हवाई अड्डों पर उड़ानों का संचालन प्रभावित हुआ। कई उड़ानें रद्द या देरी से संचालित की गईं, जबकि यात्रियों को हवाई अड्डे जाने से पहले अपनी उड़ान की स्थिति जांचने की सलाह दी गई। भारी बारिश से जलभराव चक्रवात के बाद भी कई जिलों में भारी बारिश जारी रही। निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति बनी और कुछ ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क संपर्क प्रभावित हुआ। स्थानीय प्रशासन ने संवेदनशील इलाकों में निगरानी बढ़ा दी है। राहत शिविरों में पहुंचाए गए लोग चक्रवात से पहले और उसके दौरान तटीय तथा निचले क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोगों को सुरक्षित स्थानों और राहत शिविरों में पहुंचाया गया। इन शिविरों में भोजन, पानी और चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। फसलों को भी भारी नुकसान तेज बारिश और हवा से धान, बागवानी और अन्य फसलों को नुकसान पहुंचा है। राज्य सरकार ने प्रभावित कृषि क्षेत्रों का सर्वे कराने और नुकसान का आकलन करने के निर्देश दिए हैं। ओडिशा में भी अलर्ट चक्रवात के कमजोर होने के बावजूद इसके प्रभाव से ओडिशा और आसपास के राज्यों में भारी बारिश की संभावना बनी हुई है। मौसम विभाग ने कई जिलों में लोगों को सतर्क रहने और अनावश्यक यात्रा से बचने की सलाह दी है। यात्रियों के लिए जरूरी सलाह रेल और हवाई यात्रियों को यात्रा शुरू करने से पहले अपनी ट्रेन या उड़ान की स्थिति जांचने की सलाह दी गई है। मौसम की स्थिति के अनुसार सेवाओं में आगे भी बदलाव हो सकते हैं। स्रोत – भारत मौसम विज्ञान विभाग, भारतीय रेलवे, आंध्र प्रदेश सरकार, समाचार एजेंसियां जय राष्ट्र न्यूज़

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वाराणसी में सपा की जीत से INDIA गठबंधन उत्साहित, 2027 से पहले सियासी चर्चा तेज

वाराणसी: उत्तर प्रदेश विधान परिषद चुनाव में समाजवादी पार्टी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी की शिक्षक और स्नातक—दोनों MLC सीटें जीतकर भाजपा को बड़ा राजनीतिक झटका दिया है। सपा नेता इस नतीजे को 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले महत्वपूर्ण संकेत बता रहे हैं, जबकि विपक्षी खेमे में इसे भाजपा के खिलाफ बदलते राजनीतिक माहौल के रूप में पेश किया जा रहा है। स्नातक सीट पर आशुतोष सिन्हा की बड़ी जीत वाराणसी खंड स्नातक MLC सीट पर समाजवादी पार्टी के आशुतोष सिन्हा ने भाजपा प्रत्याशी केदारनाथ सिंह को 19,932 मतों से हराया। चुनाव अधिकारियों के अनुसार सिन्हा को 55,046 वोट, जबकि भाजपा उम्मीदवार को 35,114 वोट मिले। शिक्षक सीट भी सपा के खाते में इससे पहले वाराणसी खंड शिक्षक MLC सीट पर सपा के लाल बिहारी यादव ने लगातार दूसरी बार जीत दर्ज की। उन्होंने भाजपा उम्मीदवार डॉ. प्रमोद मिश्रा को 5,015 मतों से हराया। लाल बिहारी यादव को 11,612 वोट मिले, जबकि भाजपा प्रत्याशी को 6,597 मत प्राप्त हुए। प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र में भाजपा को झटका वाराणसी भाजपा के लिए राजनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण क्षेत्र है क्योंकि यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र है। ऐसे में विधान परिषद की दोनों सीटों पर सपा की जीत को विपक्ष राजनीतिक संदेश के रूप में पेश कर रहा है। हालांकि MLC चुनाव के मतदाता और विधानसभा चुनाव के मतदाता अलग होते हैं, इसलिए इन नतीजों को सीधे 2027 विधानसभा चुनाव का पूर्वानुमान मानना जल्दबाजी होगी। 2027 को लेकर सपा कार्यकर्ताओं में उत्साह जीत के बाद सपा कार्यकर्ताओं ने ढोल-नगाड़ों के साथ जश्न मनाया और दावा किया कि यह परिणाम 2027 के विधानसभा चुनाव में पार्टी की वापसी का संकेत है। विजयी उम्मीदवारों ने भी अखिलेश यादव के नेतृत्व और पार्टी की नीतियों पर मतदाताओं के भरोसे को जीत की वजह बताया। उत्तर प्रदेश में सपा ने जीतीं 5 MLC सीटें राज्य की 11 विधान परिषद सीटों के चुनाव में भाजपा ने 6 सीटें, जबकि समाजवादी पार्टी ने 5 सीटें जीतीं। वाराणसी की दोनों सीटें सपा के खाते में जाने से पार्टी ने विधान परिषद में अपनी स्थिति मजबूत की है। NDA को दूसरे राज्यों में मिली बड़ी सफलता वाराणसी में भाजपा को हार मिली, लेकिन चार राज्यों के विधान परिषद चुनावों की व्यापक तस्वीर में NDA ने मजबूत प्रदर्शन किया और कुल 16 सीटों पर जीत हासिल की। कर्नाटक में भाजपा-JD(S) गठबंधन ने सभी चार सीटें जीत लीं। इसलिए वाराणसी का परिणाम BJP के लिए स्थानीय झटका है, जबकि राष्ट्रीय स्तर पर चुनावी तस्वीर मिश्रित रही। INDIA गठबंधन के लिए कितना बड़ा संकेत? सपा INDIA गठबंधन का प्रमुख घटक है, इसलिए वाराणसी की जीत से विपक्षी खेमे को राजनीतिक नैरेटिव बनाने का मौका मिला है। हालांकि कांग्रेस इन MLC चुनावों में कोई सीट नहीं जीत सकी। ऐसे में वाराणसी के नतीजे को पूरे INDIA गठबंधन की संयुक्त चुनावी सफलता के बजाय सपा की मजबूत स्थानीय जीत के रूप में देखना अधिक सटीक होगा। 2027 से पहले भाजपा और सपा दोनों की नजर पूर्वांचल पर उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले पूर्वांचल दोनों दलों के लिए महत्वपूर्ण रहेगा। वाराणसी में मिली इस जीत के बाद सपा इसे भाजपा के गढ़ में अपनी बढ़ती पकड़ के प्रमाण के तौर पर पेश करने की कोशिश करेगी, जबकि भाजपा के सामने संगठन और शिक्षक-स्नातक मतदाताओं के बीच अपनी रणनीति की समीक्षा की चुनौती होगी। स्रोत – हिंदुस्तान टाइम्स, टाइम्स ऑफ इंडिया, इकोनॉमिक टाइम्स, आज तक, अमर उजाला, दैनिक जागरण जय राष्ट्र न्यूज़

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केरल में शिक्षक भर्ती की मांग, 114 दिन से प्रदर्शन जारी; महिला अभ्यर्थी ने मुंडवाया सिर

तिरुवनंतपुरम: केरल में लोअर प्राइमरी स्कूल टीचर यानी एलपीएसटी पदों पर नियुक्ति की मांग को लेकर अभ्यर्थियों का प्रदर्शन 114 दिन से जारी है। आंदोलन तेज करते हुए ऑल केरल एलपीएसटी रैंक होल्डर्स एसोसिएशन की सचिव एस. वलारमथी ने सार्वजनिक रूप से अपना सिर मुंडवा लिया और अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू कर दी। 114 दिन से सचिवालय के बाहर प्रदर्शन एलपीएसटी रैंक सूची में शामिल अभ्यर्थी तिरुवनंतपुरम के सचिवालय के बाहर लंबे समय से प्रदर्शन कर रहे हैं। उनका कहना है कि लोक सेवा आयोग की रैंक सूची में नाम होने के बावजूद बड़ी संख्या में उम्मीदवारों को नियुक्ति नहीं मिली है। 29 अक्टूबर तक आंदोलन 114 दिन पूरे कर चुका था। महिला अभ्यर्थी ने मुंडवाया सिर एसोसिएशन की सचिव एस. वलारमथी ने 26 अक्टूबर को विरोध के प्रतीक के रूप में अपना सिर मुंडवा लिया। इसके बाद उन्होंने नियुक्तियों की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू करने की घोषणा की। क्या हैं प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांगें? अभ्यर्थियों की प्रमुख मांगों में छात्र-शिक्षक अनुपात को 1:30 से घटाकर 1:25 करना, प्रधान शिक्षक के खाली पदों को लोक सेवा आयोग के दायरे में लाना, मौजूदा रैंक सूची की वैधता बढ़ाना और नई भर्ती अधिसूचना को फिलहाल टालना शामिल है। क्यों जरूरी है छात्र-शिक्षक अनुपात में बदलाव? प्रदर्शनकारियों का कहना है कि छात्र-शिक्षक अनुपात को 1:25 किए बिना मौजूदा रैंक सूची से पर्याप्त नियुक्तियां संभव नहीं होंगी। एस. वलारमथी ने कहा कि सरकार के पास नियुक्तियां करने का सबसे व्यावहारिक रास्ता यही है। सरकार पर वादा पूरा न करने का आरोप अभ्यर्थियों के मुताबिक सितंबर के अंत में शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने उनकी कई मांगों पर सहमति जताने का आश्वासन दिया था। लेकिन प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि लिखित आदेश जारी नहीं किए गए और नियुक्तियों पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई। बारिश में भी जारी रही भूख हड़ताल वलारमथी ने आरोप लगाया कि भूख हड़ताल कर रहे प्रदर्शनकारियों को अस्थायी छत लगाने की अनुमति नहीं दी गई, जिससे उन्हें बारिश में बैठना पड़ा। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे लिखित सरकारी आदेश मिलने तक आंदोलन जारी रखेंगे। 5,000 से ज्यादा अभ्यर्थियों का भविष्य दांव पर रिपोर्टों के मुताबिक मौजूदा रैंक सूची से जुड़े 5,000 से अधिक उम्मीदवार नियुक्ति का इंतजार कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों को आशंका है कि रैंक सूची की वैधता खत्म होने पर उनकी नौकरी की उम्मीद भी खत्म हो सकती है। सरकार पर बढ़ा दबाव लंबे समय से जारी आंदोलन और महिला अभ्यर्थी के सिर मुंडवाने के बाद यह मामला राज्य की राजनीति में भी चर्चा का विषय बन गया है। अब दबाव सरकार पर है कि वह भर्ती, रैंक सूची की वैधता और खाली पदों को लेकर स्पष्ट समयसीमा जारी करे। स्रोत – द न्यू इंडियन एक्सप्रेस, पीटीआई, आउटलुक इंडिया, केरल कौमुदी जय राष्ट्र न्यूज़

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राजनाथ सिंह ने एडीएमएम-प्लस में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का दिया हवाला, प्रायोजित आतंकवाद के खिलाफ भारत का रुख दोहराया

सेबू/नई दिल्ली: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने गुरुवार, 29 अक्टूबर 2026 को फिलीपींस के सेबू में आयोजित 13वीं आसियान रक्षा मंत्रियों की बैठक-प्लस में आतंकवाद के खिलाफ भारत का सख्त रुख दोहराया। उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर का उदाहरण देते हुए कहा कि भारत ने प्रायोजित आतंकवाद और सीमा पार आतंकी ढांचे के खिलाफ अपनी नीति को जमीन पर साबित किया है। ऑपरेशन सिंदूर का किया जिक्र राजनाथ सिंह ने कहा कि आतंकवाद से लड़ने का भारत का अनुभव केवल सैद्धांतिक नहीं है, बल्कि दशकों से सीमा पार सुरक्षा चुनौतियों का सामना करते हुए विकसित हुआ है। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत ने कई आतंकी ढांचों को नष्ट कर यह स्पष्ट संदेश दिया कि आतंकवाद को समर्थन देने वाले तंत्र को भी जवाबदेह ठहराया जाएगा। ‘प्रायोजित आतंकवाद’ पर कड़ा संदेश रक्षा मंत्री ने कहा कि आतंकवाद को किसी भी रूप में समर्थन, प्रशिक्षण, वित्तपोषण या सुरक्षित ठिकाना देना स्वीकार्य नहीं हो सकता। भारत लंबे समय से इस बात पर जोर देता रहा है कि आतंकवादी संगठनों और उन्हें संरक्षण देने वाली व्यवस्थाओं के बीच अंतर करके नहीं देखा जा सकता। भारत साझा करेगा ‘युद्ध-परीक्षित’ अनुभव राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत अपने व्यावहारिक और युद्ध-परीक्षित आतंकवाद-रोधी अनुभव को आसियान और एडीएमएम-प्लस साझेदार देशों के साथ साझा करने के लिए तैयार है। इसके लिए संयुक्त सैन्य अभ्यास, क्षमता निर्माण कार्यक्रम और खुफिया जानकारी साझा करने जैसे उपायों को बढ़ाने की जरूरत बताई गई। सुरक्षित हिंद-प्रशांत पर जोर रक्षा मंत्री ने एक स्वतंत्र, खुला, समावेशी और सुरक्षित हिंद-प्रशांत क्षेत्र का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में शांति और स्थिरता केवल घोषणा नहीं, बल्कि सामूहिक प्रयासों का परिणाम होनी चाहिए। आसियान की केंद्रीय भूमिका को बताया अहम भारत ने एक बार फिर क्षेत्रीय सुरक्षा व्यवस्था में आसियान की केंद्रीय भूमिका का समर्थन किया। राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत और आसियान के बीच रणनीतिक साझेदारी साझा हितों, आपसी सम्मान और व्यावहारिक सहयोग पर आधारित है। अमेरिका के साथ भी आतंकवाद पर चर्चा एडीएमएम-प्लस के दौरान राजनाथ सिंह ने अमेरिकी रक्षा नेतृत्व के साथ भी बैठक की। दोनों पक्षों ने आतंकवाद समाप्त करने की संयुक्त प्रतिबद्धता दोहराई। भारत ने आतंकवादी संगठनों को समर्थन देने वाले देशों के प्रति शून्य सहिष्णुता की नीति पर जोर दिया। आतंकवाद पर भारत की नीति में क्या बदलाव? भारत ने हाल के वर्षों में आतंकवाद के खिलाफ अपनी नीति को केवल रोकथाम तक सीमित न रखकर जवाबी कार्रवाई पर भी जोर दिया है। राजनाथ सिंह पहले भी कह चुके हैं कि भारत का दृष्टिकोण अब केवल हमलों को रोकने से आगे बढ़कर दोषियों और उनके समर्थन तंत्र को दंडित करने की दिशा में है। एडीएमएम-प्लस क्यों महत्वपूर्ण है? एडीएमएम-प्लस में आसियान के सदस्य देशों के अलावा भारत, अमेरिका, चीन, रूस, जापान, दक्षिण कोरिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड जैसे देश शामिल हैं। यह मंच क्षेत्रीय रक्षा सहयोग, आतंकवाद-रोधी रणनीति और हिंद-प्रशांत सुरक्षा पर चर्चा के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। स्रोत – रक्षा मंत्रालय, प्रेस सूचना ब्यूरो, इंडिया टुडे, मनीकंट्रोल, हिंदुस्तान टाइम्स जय राष्ट्र न्यूज़

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