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दिल्ली में आज से सख्त प्रदूषण नियम लागू, पुराने वाहनों और प्रदूषण पर कड़ी निगरानी

नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली में बढ़ते वायु प्रदूषण से निपटने के लिए आज, 1 नवंबर 2026, से सख्त शीतकालीन प्रदूषण नियंत्रण नियम लागू हो गए हैं। दिल्ली सरकार की 10 सूत्रीय योजना के तहत पुराने और ज्यादा प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों पर कड़ी कार्रवाई, बिना वैध प्रदूषण प्रमाणपत्र वाले वाहनों को ईंधन न देना, कार्यालयों में घर से काम की व्यवस्था और निर्माण गतिविधियों पर प्रतिबंध जैसे कदम उठाए गए हैं। बिना प्रदूषण प्रमाणपत्र नहीं मिलेगा ईंधन दिल्ली के करीब 500 पेट्रोल पंपों पर स्वचालित नंबर प्लेट पहचान प्रणाली लगाई गई है। जिन वाहनों के पास वैध प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र नहीं होगा, उन्हें ईंधन नहीं दिया जाएगा। निर्धारित आयु पूरी कर चुके वाहनों पर भी यही नियम लागू होगा। पुराने बाहरी वाहनों के प्रवेश पर रोक आज से दिल्ली में बाहर से आने वाले उन पेट्रोल और डीजल वाहनों के प्रवेश पर रोक लगाई गई है जो बीएस-6 उत्सर्जन मानक पूरे नहीं करते। सीएनजी और इलेक्ट्रिक वाहनों को इस प्रतिबंध से छूट दी गई है। 50% कर्मचारियों के लिए घर से काम दिल्ली सरकार ने सरकारी और निजी कार्यालयों में यातायात और वाहन प्रदूषण कम करने के लिए 50% कर्मचारियों को घर से काम कराने या सप्ताह में दो दिन घर से काम की व्यवस्था लागू करने को कहा है। सरकारी कार्यालयों के समय में भी बदलाव किया गया है ताकि व्यस्त समय में यातायात का दबाव कम हो सके। निर्माण और तोड़फोड़ पर भी पाबंदी धूल पैदा करने वाली निर्माण और तोड़फोड़ गतिविधियों पर आज से सख्ती लागू हो गई है। सरकार की योजना के मुताबिक 1 नवंबर से 31 जनवरी तक धूल पैदा करने वाले बाहरी निर्माण और तोड़फोड़ कार्यों पर रोक रहेगी। वहीं 10 दिसंबर से 20 जनवरी के बीच व्यापक निर्माण प्रतिबंध लागू किया जाएगा। निर्माण स्थलों पर 100% सीसीटीवी जरूरी निर्माण स्थलों पर अब पूरी तरह सीसीटीवी निगरानी जरूरी होगी। भवन योजना की मंजूरी के लिए मलबा प्रबंधन से जुड़े सरकारी मंच पर पंजीकरण भी अनिवार्य किया गया है। इसका उद्देश्य निर्माण स्थलों से उड़ने वाली धूल और मलबे के गलत निपटान को रोकना है। पार्किंग शुल्क हुआ दोगुना निजी वाहनों के इस्तेमाल को कम करने के लिए अधिकृत पार्किंग स्थलों का शुल्क दोगुना कर दिया गया है। हालांकि दिल्ली मेट्रो की पार्किंग को इस बढ़ोतरी से बाहर रखा गया है। सरकार लोगों को ज्यादा से ज्यादा मेट्रो और बसों का इस्तेमाल करने के लिए प्रोत्साहित कर रही है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता से होगी निगरानी दिल्ली सरकार प्रदूषण नियमों के पालन की निगरानी के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित प्रणालियों का इस्तेमाल भी करेगी। वाहन नियम तोड़ने, प्रदूषण फैलाने वाली गतिविधियों और अन्य उल्लंघनों की पहचान के लिए स्वचालित निगरानी व्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है। प्रदूषण वाले 37 क्षेत्रों पर खास नजर दिल्ली के 37 प्रदूषण और यातायात वाले प्रमुख क्षेत्रों का हर सप्ताह निरीक्षण किया जाएगा। सांसद, विधायक, पार्षद और संबंधित अधिकारी इन क्षेत्रों की नियमित समीक्षा करेंगे और धूल, यातायात तथा स्थानीय प्रदूषण स्रोतों को नियंत्रित करने की कोशिश करेंगे। खुले में कचरा जलाने पर सख्ती सरकार ने खुले में कचरा और जैविक सामग्री जलाने के खिलाफ शून्य दहन अभियान चलाने की भी घोषणा की है। सड़कों की मशीन से सफाई, पानी का छिड़काव, कचरे के ढेर हटाना और धूल नियंत्रण के लिए अलग-अलग एजेंसियों को जिम्मेदारी दी गई है। हजारों प्रदूषणकारी इकाइयों पर कार्रवाई दिल्ली सरकार के मुताबिक 11 हजार से ज्यादा औद्योगिक इकाइयों के सर्वे के बाद 2,283 प्रदूषण फैलाने वाली इकाइयों को बंद या सील किया जा चुका है। नियमों का उल्लंघन करने वाली अन्य औद्योगिक इकाइयों पर भी सख्त कार्रवाई जारी रहेगी। 28 फरवरी तक लागू रहेगा शीतकालीन अभियान दिल्ली का यह शीतकालीन प्रदूषण नियंत्रण ढांचा 1 नवंबर 2026 से 28 फरवरी 2027 तक लागू रहेगा। सरकार का कहना है कि सर्दियों में प्रदूषण बढ़ने की समस्या को केवल आपातकालीन उपायों से नहीं, बल्कि लगातार निगरानी और पहले से तय नियमों से नियंत्रित करने की कोशिश की जा रही है। स्रोत – दिल्ली सरकार, दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति, इंडियन एक्सप्रेस, टाइम्स ऑफ इंडिया जय राष्ट्र न्यूज़

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INDIA गठबंधन की ‘चलो दिल्ली’ रैली आज, रामलीला मैदान में विपक्ष का बड़ा शक्ति प्रदर्शन

नई दिल्ली: INDIA गठबंधन आज, 1 नवंबर 2026, दिल्ली के रामलीला मैदान में अपनी बहुचर्चित ‘चलो दिल्ली’ रैली आयोजित कर रहा है। विपक्ष इस प्रदर्शन के जरिए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण और कथित चुनावी अनियमितताओं के मुद्दे पर केंद्र सरकार तथा चुनाव आयोग पर दबाव बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। रामलीला मैदान में जुटे हजारों समर्थक सुबह से ही रामलीला मैदान में विपक्षी दलों के कार्यकर्ता और समर्थक पहुंचने लगे। कांग्रेस समेत INDIA गठबंधन के दलों ने देशभर से समर्थकों को दिल्ली बुलाया है। कांग्रेस ने रैली के लिए बड़े जनसमर्थन का दावा किया है, जबकि दिल्ली पुलिस ने वास्तविक भीड़ के लिए अलग अनुमान के आधार पर सुरक्षा व्यवस्था की है। राहुल गांधी समेत बड़े विपक्षी नेता शामिल रैली में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और INDIA गठबंधन के कई वरिष्ठ नेताओं के शामिल होने की उम्मीद है। राहुल गांधी ने इससे पहले छात्रों, युवाओं, महिलाओं, किसानों और मजदूरों से रैली में शामिल होने की अपील की थी। मुख्य मुद्दा चुनाव आयोग और SIR विपक्ष मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर लगातार सवाल उठा रहा है। INDIA गठबंधन का आरोप है कि इस प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में वास्तविक मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए और चुनाव आयोग ने शिकायतों पर पर्याप्त कार्रवाई नहीं की। ये विपक्ष के आरोप हैं और चुनाव आयोग इन्हें स्वीकार नहीं करता है। ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग रैली का प्रमुख राजनीतिक मुद्दा मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग भी है। इससे एक दिन पहले INDIA गठबंधन ने मल्लिकार्जुन खरगे के आवास पर प्रतीकात्मक ‘पब्लिक इम्पीचमेंट’ कार्यक्रम आयोजित किया था, जिसमें विपक्षी नेताओं ने ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रस्ताव पारित किया था। यह वास्तविक संवैधानिक महाभियोग नहीं, बल्कि राजनीतिक विरोध कार्यक्रम था। मिंटो रोड से रामलीला मैदान तक मार्च कार्यक्रम के तहत मिंटो रोड और कनॉट प्लेस के पास से रामलीला मैदान तक पैदल मार्च की भी घोषणा की गई थी। दिल्ली पुलिस का कहना है कि रामलीला मैदान में रैली की अनुमति दी गई है, लेकिन प्रस्तावित पैदल मार्च के लिए अलग से अनुमति मांगी या दी नहीं गई। हालांकि पुलिस ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए मार्ग पर व्यापक व्यवस्था की है। हजारों पुलिसकर्मी तैनात रैली और मार्च को देखते हुए मध्य दिल्ली में बड़े पैमाने पर सुरक्षा व्यवस्था की गई है। अलग-अलग रिपोर्टों के मुताबिक दिल्ली पुलिस और केंद्रीय बलों के हजारों जवान तैनात किए गए हैं। रामलीला मैदान और आसपास के इलाकों में सीसीटीवी कैमरे, ड्रोन और शरीर पर लगाए जाने वाले कैमरों के जरिए भी निगरानी की जा रही है। रामलीला मैदान को 14 सुरक्षा क्षेत्रों में बांटा गया भीड़ नियंत्रण के लिए रामलीला मैदान को 14 सुरक्षा क्षेत्रों में बांटा गया है। प्रत्येक क्षेत्र की जिम्मेदारी वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को दी गई है। आपातकालीन स्थिति के लिए अलग नियंत्रण कक्ष भी स्थापित किया गया है। दिल्ली की कई सड़कों पर यातायात प्रतिबंध रैली के कारण आईटीओ, दिल्ली गेट, राजघाट, अजमेरी गेट और तुर्कमान गेट समेत कई प्रमुख स्थानों पर यातायात में बदलाव किया गया है। वाहन चालकों को बहादुर शाह जफर मार्ग, जवाहरलाल नेहरू मार्ग, मिंटो रोड और देशबंधु गुप्ता रोड से बचने की सलाह दी गई है। भाजपा ने भी खोला मोर्चा INDIA गठबंधन की रैली के जवाब में भाजपा ने भी दिल्ली में विरोध कार्यक्रम आयोजित करने की घोषणा की है। भाजपा ने विपक्ष की रैली को चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्था पर हमला बताया है और 1984 के सिख विरोधी दंगों के मुद्दे को उठाते हुए कांग्रेस पर पलटवार किया है। राहुल गांधी ने व्यापारियों के लिए भी की अपील दिल्ली के कुछ व्यापारिक संगठनों ने रैली से त्योहारों के मौसम में कारोबार प्रभावित होने की आशंका जताई थी। राहुल गांधी ने रैली में पहुंचे समर्थकों से अपील की कि वे केवल प्रदर्शन में हिस्सा न लें, बल्कि स्थानीय बाजारों में खरीदारी भी करें ताकि व्यापारियों को नुकसान न हो। 2027 से पहले विपक्ष का बड़ा शक्ति प्रदर्शन उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों में 2027 में होने वाले चुनावों से पहले यह रैली विपक्ष के लिए राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। INDIA गठबंधन की कोशिश चुनाव आयोग, मतदाता सूची और कथित ‘वोट चोरी’ के मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर बड़ा राजनीतिक अभियान बनाने की है। दूसरी ओर भाजपा विपक्ष पर संवैधानिक संस्थाओं को बदनाम करने का आरोप लगा रही है। रैली की भीड़ और राजनीतिक संदेश पर नजर अब सबसे ज्यादा नजर इस बात पर है कि रामलीला मैदान में वास्तविक भीड़ कितनी जुटती है और विपक्षी नेता मंच से आगे की रणनीति को लेकर क्या घोषणा करते हैं। रैली के बाद INDIA गठबंधन इस अभियान को राज्यों तक ले जाने की बात भी कर चुका है। स्रोत – दिल्ली पुलिस, हिंदुस्तान टाइम्स, टाइम्स ऑफ इंडिया, एनडीटीवी, इंडियन एक्सप्रेस जय राष्ट्र न्यूज़

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0-6 से 8-6 तक का ऐतिहासिक सफर! मनीषा भानवाला ने रचा विश्व कुश्ती में इतिहास

अस्ताना/नई दिल्ली: भारतीय पहलवान मनीषा भानवाला ने विश्व कुश्ती चैंपियनशिप के 59 किलोग्राम फ्रीस्टाइल वर्ग में ऐसा मुकाबला जीता, जिसे भारतीय खेल इतिहास लंबे समय तक याद रखेगा। फाइनल में एक समय 0-6 से पिछड़ने के बाद मनीषा ने शानदार वापसी करते हुए अमेरिका की अबीगैल नेटे को 8-6 से हराया और स्वर्ण पदक अपने नाम किया। इस जीत के साथ वह सीनियर विश्व कुश्ती चैंपियनशिप में स्वर्ण जीतने वाली पहली भारतीय महिला पहलवान बन गईं। शुरुआत में 0-6 से पिछड़ीं मनीषा फाइनल मुकाबले की शुरुआत मनीषा के लिए बेहद मुश्किल रही। अमेरिकी पहलवान अबीगैल नेटे ने शुरुआती दौर में चार अंक हासिल किए। भारतीय खेमे की चुनौती असफल होने पर नेटे को एक अतिरिक्त अंक मिला और मनीषा पर लगी चेतावनी के बाद स्कोर 6-0 हो गया। पहले दौर से पहले खोला खाता मनीषा ने हिम्मत नहीं छोड़ी और पहले दौर के खत्म होने से पहले प्रतिद्वंद्वी को बाहर धकेलकर अपना पहला अंक हासिल किया। इसके बाद स्कोर 6-1 हो गया और भारतीय पहलवान ने मुकाबले में वापसी की नींव रख दी। दूसरे दौर में बदला पूरा मुकाबला दूसरे दौर में मनीषा ने आक्रामक खेल दिखाया। उन्होंने नेटे को नीचे गिराकर अंक हासिल किए। अमेरिकी टीम ने इस फैसले को चुनौती दी, लेकिन चुनौती असफल रही और मनीषा को एक अतिरिक्त अंक भी मिला। इसके बाद उन्होंने लगातार दबाव बनाते हुए स्कोर को 6-6 तक पहुंचा दिया। आखिरी मिनट में निर्णायक दांव मुकाबले के अंतिम चरण में नेटे थकने लगीं। मनीषा के कोच ने पहले ही उनकी मुकाबले की शैली का अध्ययन किया था और अनुमान लगाया था कि अमेरिकी पहलवान पांचवें मिनट के बाद थकती हैं। मनीषा ने सही समय का इंतजार किया और आखिरी मिनट में निर्णायक दांव लगाकर दो अंक हासिल किए। इसके साथ ही स्कोर 8-6 हो गया। आखिरी सेकंड तक बचाई बढ़त 8-6 की बढ़त बनाने के बाद मनीषा ने आखिरी सेकंड तक मजबूत रक्षा की और प्रतिद्वंद्वी को वापसी का मौका नहीं दिया। अंतिम सीटी बजते ही मनीषा विश्व चैंपियन बन चुकी थीं। पहली भारतीय महिला विश्व चैंपियन इस जीत के साथ मनीषा ने भारतीय महिला कुश्ती के इतिहास में नया अध्याय लिखा। वह विश्व कुश्ती चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला बनीं। भारत को इससे पहले पुरुष वर्ग में सुशील कुमार ने 2010 में विश्व चैंपियन बनाया था। मनीषा की जीत ने भारत का 16 साल का विश्व खिताब का इंतजार भी समाप्त कर दिया। 16 साल की उम्र में शुरू की थी कुश्ती मनीषा का सफर पारंपरिक नहीं रहा। उन्होंने करीब 16 साल की उम्र में कुश्ती शुरू की, जो कई शीर्ष पहलवानों की तुलना में काफी देर मानी जाती है। जूनियर स्तर पर भी उन्हें कोई बड़ा पदक नहीं मिला, लेकिन लगातार अभ्यास और मेहनत के बल पर उन्होंने सीनियर स्तर पर अपनी पहचान बनाई। चार अलग-अलग भार वर्गों में खेल चुकी हैं सीनियर स्तर पर मनीषा ने चार अलग-अलग भार वर्गों में प्रतिस्पर्धा की है। वह 62 और 65 किलोग्राम वर्ग में भी खेल चुकी हैं और अब 59 किलोग्राम में विश्व विजेता बनीं। आने वाले टूर्नामेंटों में उनका लक्ष्य 57 किलोग्राम ओलंपिक भार वर्ग में उतरने का है। पिता का सपना किया पूरा विश्व खिताब जीतने के बाद मनीषा ने अपने दिवंगत पिता सुरेश भानवाला की तस्वीर वाली टी-शर्ट उठाकर उन्हें श्रद्धांजलि दी। उनके पिता ने ही करीब 13 साल पहले उन्हें कुश्ती अपनाने के लिए प्रेरित किया था और सपना देखा था कि उनकी बेटी एक दिन भारत के लिए विश्व स्वर्ण जीतेगी। सुरेश भानवाला का 2022 में निधन हो गया था। चार साल बाद मनीषा ने उनका सपना पूरा किया। मानसिक मजबूती बनी जीत की सबसे बड़ी ताकत मनीषा के कोचों के अनुसार उनकी सबसे बड़ी ताकत उनका मानसिक दृढ़ता और आखिरी क्षण तक मुकाबला करने की क्षमता है। पहले उनके आक्रामक खेल के कारण सहनशक्ति प्रभावित होती थी, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में इस कमजोरी पर खास काम किया गया। विश्व चैंपियनशिप का फाइनल इसका सबसे बड़ा उदाहरण बना, जहां छह अंक से पीछे होने के बावजूद उन्होंने मुकाबला नहीं छोड़ा। अब 2028 ओलंपिक पर नजर विश्व चैंपियन बनने के बाद मनीषा की नजर अब लॉस एंजिलिस ओलंपिक 2028 पर है। इसके लिए वह 57 किलोग्राम ओलंपिक भार वर्ग में उतरने की तैयारी करेंगी। मनीषा का कहना है कि वह चाहती हैं कि आने वाली भारतीय महिला पहलवान उनके रिकॉर्ड को भी तोड़ें और भारत के लिए ज्यादा विश्व और ओलंपिक स्वर्ण पदक जीतें। भारतीय महिला कुश्ती के लिए ऐतिहासिक क्षण 0-6 से पिछड़कर 8-6 से जीत हासिल करना केवल एक फाइनल मुकाबले की वापसी नहीं थी। इस जीत ने भारतीय महिला कुश्ती को उसका पहला विश्व चैंपियन दिया और आने वाली पीढ़ी के लिए नया मानक स्थापित किया। स्रोत – यूनाइटेड वर्ल्ड रेसलिंग, रॉयटर्स, इंडियन एक्सप्रेस जय राष्ट्र न्यूज़

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नासिक में सिंहस्थ महाकुंभ का भव्य शुभारंभ, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने किया धर्मध्वजारोहण

नासिक: महाराष्ट्र के नासिक में नासिक-त्र्यंबकेश्वर सिंहस्थ महाकुंभ 2027 का धार्मिक और सांस्कृतिक शुभारंभ भव्य समारोह के साथ हुआ। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने 31 अक्टूबर को ध्वज स्तंभ पूजन, ध्वजा पूजन और धर्मध्वजारोहण में भाग लिया। वैदिक मंत्रोच्चार, शंखनाद और हजारों श्रद्धालुओं की मौजूदगी के बीच आयोजित इस समारोह ने आने वाले सिंहस्थ महाकुंभ की औपचारिक शुरुआत का संकेत दिया। रामतीर्थ पर फहराया गया धर्मध्वज राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने नासिक के रामतीर्थ क्षेत्र में धर्मध्वज फहराया। इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार यह कार्यक्रम दोपहर करीब 12 बजकर 2 मिनट पर हुआ और इसमें संत-महात्माओं, राजनीतिक प्रतिनिधियों तथा बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया। बृहस्पति के सिंह राशि में प्रवेश के साथ शुभारंभ अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने कहा कि इसी दिन बृहस्पति के सिंह राशि में प्रवेश के शुभ अवसर पर सिंहस्थ महाकुंभ से जुड़े धर्मध्वजारोहण और अन्य पवित्र अनुष्ठानों में शामिल होने का उन्हें अवसर मिला। नासिक-त्र्यंबकेश्वर में सिंहस्थ परंपरा ज्योतिषीय स्थिति से गहराई से जुड़ी मानी जाती है। गोदावरी तट पर पूजा-अर्चना ध्वजारोहण से पहले राष्ट्रपति ने गोदावरी तट पर पूजा-अर्चना की और रामकुंड क्षेत्र में धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लिया। आकाशवाणी के मुताबिक नासिक में मुख्य ध्वजारोहण राष्ट्रपति ने किया, जबकि त्र्यंबकेश्वर में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कुशावर्त तीर्थ पर धर्मध्वज फहराया। राष्ट्रपति बोलीं—कुंभ भारत की सांस्कृतिक एकता का प्रतीक राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने अपने संबोधन में कहा कि कुंभ मेलों में असंख्य श्रद्धालुओं का एकत्र होना भारत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक एकता तथा परंपराओं की निरंतरता का जीवंत प्रमाण है। उन्होंने कहा कि हरिद्वार, प्रयागराज, उज्जैन और नासिक में सदियों से आयोजित होते आ रहे कुंभ भारत की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और सामाजिक परंपराओं की शक्ति को दर्शाते हैं। 2027 का सिंहस्थ बनेगा विरासत और आधुनिकता के बीच सेतु राष्ट्रपति ने उम्मीद जताई कि नासिक-त्र्यंबकेश्वर सिंहस्थ महाकुंभ 2027 भारत की प्राचीन विरासत और आधुनिक समय के बीच सेतु का काम करेगा। उन्होंने विशेष रूप से युवाओं को देश की सांस्कृतिक परंपराओं और जीवन मूल्यों से जोड़ने की आवश्यकता पर जोर दिया। स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण पर भी जोर राष्ट्रपति ने महाकुंभ की तैयारियों में स्वच्छता, कचरा प्रबंधन और पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता देने की अपील की। उन्होंने कहा कि प्रशासन और जनता की भागीदारी से नासिक महाकुंभ स्वच्छता तथा अपशिष्ट प्रबंधन के क्षेत्र में एक उदाहरण स्थापित कर सकता है। सूखे और किसानों की स्थिति का भी किया जिक्र अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने महाराष्ट्र समेत देश के कई हिस्सों में सूखे और चरम मौसम की घटनाओं से प्रभावित किसानों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारें किसानों तथा प्रभावित नागरिकों की सहायता के लिए प्रयास कर रही हैं। नासिक और त्र्यंबकेश्वर दोनों हैं सिंहस्थ के प्रमुख केंद्र सिंहस्थ महाकुंभ का आयोजन नासिक में गोदावरी नदी के तट और त्र्यंबकेश्वर क्षेत्र में किया जाता है। रामकुंड और कुशावर्त तीर्थ दोनों धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माने जाते हैं। आने वाले महीनों में प्रशासन की ओर से श्रद्धालुओं के लिए सड़क, यातायात, सुरक्षा, स्वच्छता, पेयजल और आवास समेत बड़े स्तर पर व्यवस्थाएं विकसित की जाएंगी। जुलाई 2028 तक चलेगा महाकुंभ से जुड़ा आयोजन क्रम इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक ध्वजारोहण के साथ शुरू हुआ नासिक-त्र्यंबकेश्वर सिंहस्थ महाकुंभ का आयोजन क्रम 2027 से आगे जुलाई 2028 तक विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमों और पर्व स्नानों के साथ जारी रहेगा। हजारों श्रद्धालुओं की मौजूदगी धर्मध्वजारोहण कार्यक्रम में बड़ी संख्या में संत, साधु और श्रद्धालु पहुंचे। वैदिक मंत्रों, शंखनाद और धार्मिक अनुष्ठानों के बीच नासिक का रामतीर्थ क्षेत्र पूरी तरह आध्यात्मिक वातावरण में रंगा नजर आया। सिंहस्थ 2027 की तैयारियों को मिली औपचारिक गति धर्मध्वजारोहण के साथ अब सिंहस्थ महाकुंभ 2027 की प्रशासनिक और धार्मिक तैयारियों को औपचारिक गति मिल गई है। आने वाले समय में लाखों श्रद्धालुओं और साधु-संतों के नासिक तथा त्र्यंबकेश्वर पहुंचने की संभावना को देखते हुए महाराष्ट्र सरकार बड़े पैमाने पर बुनियादी ढांचे और सुरक्षा व्यवस्था पर काम कर रही है। स्रोत – राष्ट्रपति सचिवालय, प्रेस सूचना ब्यूरो, आकाशवाणी समाचार, इंडियन एक्सप्रेस जय राष्ट्र न्यूज़

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जोशीमठ हेलीकॉप्टर हादसा: पायलट समेत सभी 6 की मौत, शव बरामद; जांच का दायरा बढ़ा

चमोली/देहरादून: उत्तराखंड के जोशीमठ क्षेत्र में 30 अक्टूबर को हुए भीषण हेलीकॉप्टर हादसे में पायलट समेत सभी 6 लोगों की मौत हो गई थी। अब 1 नवंबर 2026 की सुबह जिला प्रशासन ने पुष्टि की है कि सभी छह शव दुर्घटनास्थल से बरामद कर लिए गए हैं और उन्हें पोस्टमार्टम के लिए ऋषिकेश स्थित एम्स भेजने की व्यवस्था की जा रही है। बदरीनाथ से देहरादून लौट रहा था हेलीकॉप्टर हेलीकॉप्टर का संचालन ट्रांस भारत एविएशन कर रही थी। यह बदरीनाथ से पांच यात्रियों को लेकर देहरादून लौट रहा था, तभी जोशीमठ के पास दुर्घटनाग्रस्त हो गया। हादसे में पायलट हिमांशु सभरवाल और कर्नाटक से आए पांच यात्रियों की जान चली गई। दुर्गम इलाके के कारण शव निकालने में लगा समय दुर्घटनास्थल बेहद दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र में था और निकटतम सड़क से लगभग 20 से 22 किलोमीटर दूर था। सेना, आईटीबीपी, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, उत्तराखंड पुलिस, वन विभाग और राजस्व विभाग की संयुक्त टीमों ने कठिन परिस्थितियों में शवों को बाहर निकाला। ज्योतिर्मठ के अस्पताल लाए गए शव सभी शवों को दुर्घटनास्थल से निकालकर चाईं गांव के पास सड़क तक लाया गया और वहां से ज्योतिर्मठ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया गया। इसके बाद उन्हें पोस्टमार्टम के लिए एम्स ऋषिकेश भेजने की प्रक्रिया शुरू की गई। जांच में खराब मौसम के अलावा दूसरे कारण भी शुरुआती रिपोर्ट में हादसे के समय खराब मौसम का जिक्र किया गया था, लेकिन अब जांच का दायरा बढ़ा दिया गया है। अधिकारियों के मुताबिक दुर्घटनाग्रस्त हेलीकॉप्टर से पहले और बाद में भी उसी क्षेत्र से कुछ अन्य हेलीकॉप्टरों ने उड़ान भरी और वे सुरक्षित अपने गंतव्य तक पहुंच गए। इसलिए जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि हादसा केवल मौसम के कारण हुआ या इसके पीछे कोई अन्य तकनीकी या परिचालन कारण भी था। हादसे से आठ मिनट बाद भी उड़ा था एक हेलीकॉप्टर जांच से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक दुर्घटनाग्रस्त हेलीकॉप्टर के उड़ान भरने के सिर्फ आठ मिनट बाद एक अन्य हेलीकॉप्टर बदरीनाथ से रवाना हुआ था और वह सुरक्षित पहुंच गया। एक अन्य उड़ान करीब एक घंटे बाद हुई और वह भी सुरक्षित रही। इसी वजह से स्थानीय मौसम की स्थिति और दुर्घटनाग्रस्त विमान की तकनीकी अवस्था की विस्तार से जांच की जा रही है। जांच टीम पहुंची दुर्घटनास्थल विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो की टीम दुर्घटनास्थल पहुंच चुकी है। टीम हेलीकॉप्टर के बचे हुए हिस्सों को इकट्ठा कर दुर्घटना से पहले की घटनाओं का क्रम समझने का प्रयास कर रही है। अधिकारियों के मुताबिक मलबा काफी हद तक नष्ट हो चुका है और केवल पीछे का हिस्सा अपेक्षाकृत सुरक्षित मिला है। अभी नहीं मिला ब्लैक बॉक्स जांच अधिकारियों ने बताया कि अभी तक हेलीकॉप्टर का ब्लैक बॉक्स बरामद नहीं हुआ है। इसके मिलने पर उड़ान से जुड़े तकनीकी आंकड़ों और अन्य महत्वपूर्ण जानकारी की जांच की जा सकेगी। मौसम विभाग ने जारी किया था ऑरेंज अलर्ट 30 अक्टूबर को चमोली जिले के लिए मौसम विभाग ने ऑरेंज अलर्ट जारी किया था। इसमें कुछ स्थानों पर आंधी, बिजली, ओलावृष्टि और 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाओं की चेतावनी दी गई थी। चार्टर उड़ानों में अब सह-पायलट अनिवार्य हादसे के बाद नागरिक उड्डयन महानिदेशालय ने मौजूदा यात्रा सत्र के शेष समय के लिए चार्टर हेलीकॉप्टर उड़ानों में सह-पायलट को अनिवार्य करने का फैसला किया है। अब एक पायलट के साथ चार्टर हेलीकॉप्टर संचालन की अनुमति नहीं होगी। यह फैसला सुरक्षा समीक्षा के बाद लिया गया है। हादसे की असली वजह जांच के बाद होगी साफ फिलहाल खराब मौसम को शुरुआती संभावित कारणों में माना गया है, लेकिन जांच एजेंसियों ने किसी एक वजह को अंतिम नहीं माना है। अन्य हेलीकॉप्टरों के सुरक्षित उड़ान भरने, स्थानीय मौसम, विमान की तकनीकी स्थिति और पायलट के उड़ान संबंधी फैसलों समेत सभी पहलुओं की पड़ताल की जा रही है। स्रोत – जिला प्रशासन चमोली, विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो, नागरिक उड्डयन महानिदेशालय, इंडियन एक्सप्रेस जय राष्ट्र न्यूज़

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JEE Main 2027 आवेदन में गलती हुई तो भर सकेंगे नया फॉर्म, NTA ने दी राहत; 22 नवंबर तक मौका

नई दिल्ली: राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी यानी एनटीए ने जेईई मेन 2027 सत्र-1 के अभ्यर्थियों को बड़ी राहत दी है। जिन उम्मीदवारों से ऑनलाइन आवेदन पत्र भरते समय कोई गलती हो गई है, वे अब नया आवेदन पत्र जमा कर सकते हैं, भले ही उन्होंने पहले आवेदन संख्या बना ली हो या परीक्षा शुल्क का भुगतान कर दिया हो। एनटीए ने इस संबंध में 30 अक्टूबर 2026 को आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी किया है। 22 नवंबर तक भर सकेंगे नया आवेदन एनटीए के अनुसार नया आवेदन पत्र भरने की सामान्य अंतिम तारीख 22 नवंबर 2026 रात 11:50 बजे तक है। इसके बाद अभ्यर्थी अतिरिक्त शुल्क के साथ 23 से 26 नवंबर 2026 तक भी नया आवेदन जमा कर सकेंगे। पहले आवेदन कर चुके उम्मीदवार भी भर सकते हैं नया फॉर्म नए नियम के तहत उम्मीदवार पहले से आवेदन संख्या बना चुके हों या परीक्षा शुल्क जमा कर चुके हों, तब भी वे नया आवेदन भर सकते हैं। नया फॉर्म जमा करने पर उम्मीदवार को नई आवेदन संख्या मिलेगी और फोटो, हस्ताक्षर तथा सभी जरूरी दस्तावेज दोबारा अपलोड करने होंगे। कौन-सा आवेदन माना जाएगा वैध? अगर किसी उम्मीदवार ने एक से अधिक आवेदन पत्र जमा किए हैं तो सबसे आखिरी वह आवेदन वैध माना जाएगा जिसका परीक्षा शुल्क सफलतापूर्वक जमा हुआ हो और पुष्टि पृष्ठ तैयार हो गया हो। अगर नया फॉर्म भरने के बाद उम्मीदवार शुल्क जमा नहीं करता या पुष्टि पृष्ठ तैयार नहीं होता, तो उसका पहले वाला पूरा किया गया आवेदन ही मान्य रहेगा। पुराने आवेदन की फीस वापस नहीं मिलेगी एनटीए ने स्पष्ट किया है कि पहले आवेदन के साथ जमा किया गया परीक्षा शुल्क न तो वापस किया जाएगा और न ही नए आवेदन में समायोजित किया जाएगा। इसलिए जिन उम्मीदवारों को केवल कुछ जानकारियों में छोटा बदलाव करना है, उन्हें नया आवेदन भरने के बजाय सुधार सुविधा का इस्तेमाल करने की सलाह दी गई है। 27 से 29 नवंबर तक मिलेगा सुधार का मौका जेईई मेन 2027 सत्र-1 के आवेदन में चुनिंदा जानकारियां सुधारने के लिए 27 नवंबर से 29 नवंबर 2026 तक सुधार सुविधा उपलब्ध रहेगी। एनटीए ने कहा है कि जिन अभ्यर्थियों को केवल सीमित विवरण में बदलाव करना है, वे नया आवेदन जमा करने के बजाय इसी सुविधा का इस्तेमाल करें। एक ही सत्र में दो बार परीक्षा नहीं दे सकेंगे एनटीए ने साफ किया है कि एक से अधिक आवेदन संख्या होने का मतलब यह नहीं है कि उम्मीदवार एक ही सत्र में दो बार परीक्षा दे सकता है। अगर कोई अभ्यर्थी अलग-अलग आवेदन संख्याओं के जरिए एक ही सत्र में एक से अधिक बार परीक्षा देने या देने की कोशिश करता है तो इसे अनुचित साधन का इस्तेमाल माना जाएगा और उसके खिलाफ नियमों के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। सिर्फ दो आवेदन संख्या होना गलत नहीं एनटीए ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि किसी उम्मीदवार के पास एक से अधिक आवेदन संख्या हैं, लेकिन उसने उनसे एक से अधिक बार परीक्षा देने की कोशिश नहीं की है, तो केवल कई आवेदन संख्या होना अनुचित साधन नहीं माना जाएगा। जेईई मेन 2027 के आवेदन 24 अक्टूबर से शुरू जेईई मेन 2027 सत्र-1 की ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया 24 अक्टूबर 2026 से शुरू हुई थी। एनटीए की आधिकारिक वेबसाइट पर आवेदन पत्र उपलब्ध है। जनवरी 2027 में होगी पहले सत्र की परीक्षा एनटीए के कार्यक्रम के मुताबिक जेईई मेन 2027 का पहला सत्र जनवरी में आयोजित किया जाएगा, जबकि दूसरा सत्र अप्रैल 2027 में होगा। पहले सत्र की परीक्षा 20, 21, 22, 23, 24 और 28 जनवरी 2027 को प्रस्तावित है। अभ्यर्थियों को क्या करना चाहिए? जिन उम्मीदवारों के आवेदन में बड़ी गलती है और उन्हें पूरा नया फॉर्म भरने की जरूरत है, वे 22 नवंबर तक नया आवेदन जमा कर सकते हैं। वहीं केवल चुनिंदा जानकारियां बदलने वाले उम्मीदवारों के लिए 27 से 29 नवंबर तक सुधार सुविधा उपलब्ध रहेगी। अभ्यर्थियों को आवेदन जमा करने से पहले सभी विवरण, फोटो, हस्ताक्षर और दस्तावेज सावधानी से जांच लेने चाहिए। स्रोत – राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी, जेईई मेन आधिकारिक वेबसाइट जय राष्ट्र न्यूज़

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महाराष्ट्र में PET-CT स्कैन की अधिकतम दर ₹10,250 तय, कैंसर मरीजों को बड़ी राहत

मुंबई: महाराष्ट्र सरकार ने कैंसर मरीजों और अन्य गंभीर बीमारियों की जांच कराने वाले लोगों को राहत देते हुए सरकारी अस्पतालों और सार्वजनिक-निजी भागीदारी के तहत चलने वाले केंद्रों में PET-CT स्कैन की अधिकतम दर ₹10,250 तय कर दी है। यह दर FDG रेडियोट्रेसर और जरूरत पड़ने पर इस्तेमाल होने वाले कॉन्ट्रास्ट सहित होगी। पहले ₹20,500 का था पैकेज राज्य के चिकित्सा शिक्षा विभाग ने महात्मा ज्योतिराव फुले जन आरोग्य योजना और आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत निर्धारित ₹20,500 के पैकेज पर 50% छूट के आधार पर नई दर तय की है। इस तरह पात्र मरीजों के लिए PET-CT स्कैन की अधिकतम लागत ₹10,250 रखी गई है। कैंसर मरीजों के लिए क्यों जरूरी है PET-CT? PET-CT स्कैन कैंसर की पहचान, उसके फैलाव का पता लगाने, बीमारी की अवस्था तय करने और उपचार कितना प्रभावी है, यह जानने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। कई मरीजों को इलाज के दौरान एक से अधिक बार यह जांच करानी पड़ सकती है, इसलिए इसकी लागत कम होने से इलाज का आर्थिक बोझ घटने की उम्मीद है। योजनाओं में शामिल न होने वाले मरीजों को भी फायदा सरकार का फैसला केवल महात्मा ज्योतिराव फुले जन आरोग्य योजना या आयुष्मान भारत के लाभार्थियों तक सीमित नहीं है। जो मरीज इन योजनाओं के तहत मुफ्त इलाज के पात्र नहीं हैं, वे भी सरकारी या सार्वजनिक-निजी भागीदारी वाले अस्पतालों में ₹10,250 की निर्धारित दर पर PET-CT स्कैन करा सकेंगे। निजी अस्पतालों पर लागू नहीं होगा आदेश यह दर निजी अस्पतालों और निजी जांच केंद्रों पर लागू नहीं होगी। सरकार का आदेश केवल सरकारी संस्थानों और सार्वजनिक-निजी भागीदारी मॉडल के तहत संचालित जांच सेवाओं के लिए है। CT और MRI में इस्तेमाल होने वाले कॉन्ट्रास्ट की कीमत भी तय सरकार ने केवल PET-CT ही नहीं, बल्कि CT और MRI जांच में इस्तेमाल होने वाले कॉन्ट्रास्ट पदार्थों की दरें भी एक समान कर दी हैं। CT स्कैन के लिए 50 मिलीलीटर कॉन्ट्रास्ट की कीमत ₹420 और 100 मिलीलीटर की कीमत ₹830 तय की गई है। MRI में इस्तेमाल होने वाले 10 मिलीलीटर गैडोलिनियम आधारित कॉन्ट्रास्ट की दर ₹950 तय की गई है। अलग-अलग अस्पतालों में अलग शुल्क की शिकायत राज्य के चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान निदेशालय ने पाया था कि निर्धारित दर न होने के कारण अलग-अलग अस्पताल कॉन्ट्रास्ट सामग्री के लिए अलग शुल्क वसूल रहे थे। इसी के बाद सरकार ने पूरे राज्य में एक समान दर लागू करने का फैसला किया। पात्र मरीजों को जांच मुफ्त जो मरीज राज्य सरकार के नियमों के तहत मुफ्त चिकित्सा सेवाओं के पात्र हैं, उन्हें इन जांचों के लिए कोई शुल्क नहीं देना होगा। इसी तरह महात्मा ज्योतिराव फुले जन आरोग्य योजना और आयुष्मान भारत के पात्र लाभार्थियों के लिए संबंधित जांच योजना के नियमों के अनुसार मुफ्त रहेंगी। निजी संचालक सीधे नहीं ले सकेंगे पैसा सार्वजनिक-निजी भागीदारी वाले अस्पतालों में जांच सेवा देने वाला निजी संचालक मरीज या उसके परिजन से सीधे नकद या ऑनलाइन भुगतान नहीं ले सकेगा। मरीज को भुगतान केवल अस्पताल के अधिकृत बिलिंग काउंटर पर करना होगा। नियम तोड़ने वाले निजी संचालक के खिलाफ अनुबंध के अनुसार कार्रवाई की जा सकेगी। अस्पतालों को दरें सार्वजनिक रूप से दिखानी होंगी सरकार ने अस्पतालों के अधिष्ठाताओं को निर्देश दिया है कि नई दरों और भुगतान प्रक्रिया को मराठी और अंग्रेजी में प्रमुख स्थान पर प्रदर्शित किया जाए। मरीजों का अलग रिकॉर्ड रखना, डिजिटल निगरानी व्यवस्था तैयार करना और जांच से जुड़े दस्तावेज सुरक्षित रखना भी जरूरी होगा। पारदर्शिता बढ़ाने के लिए डिजिटल निगरानी अस्पतालों को अलग मरीज अभिलेख रखने और एक समर्पित डिजिटल डैशबोर्ड तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। जांच और भुगतान से जुड़े दस्तावेज इलेक्ट्रॉनिक और कागजी दोनों रूपों में सुरक्षित रखने होंगे ताकि बाद में उनका लेखा परीक्षण किया जा सके। कैंसर इलाज के खर्च में मिल सकती है बड़ी राहत कैंसर का इलाज लंबे समय तक चल सकता है और जांच, दवाओं, सर्जरी तथा अन्य उपचारों का खर्च परिवारों पर भारी आर्थिक दबाव डालता है। ऐसे में PET-CT जैसी महंगी जांच की कीमत को नियंत्रित करना मरीजों के लिए महत्वपूर्ण राहत माना जा रहा है। सरकार इससे सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में उन्नत जांच सेवाओं तक पहुंच बढ़ाने की उम्मीद कर रही है। स्रोत – महाराष्ट्र चिकित्सा शिक्षा विभाग, चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान निदेशालय, हिंदुस्तान टाइम्स जय राष्ट्र न्यूज़

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अदाणी एनर्जी सॉल्यूशंस को ₹3,050 करोड़ में इंटेलीस्मार्ट खरीदने की मंजूरी, 100% हिस्सेदारी होगी अधिग्रहित

नई दिल्ली: भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग ने अदाणी एनर्जी सॉल्यूशंस लिमिटेड को इंटेलीस्मार्ट इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड की 100% हिस्सेदारी खरीदने की मंजूरी दे दी है। इस सौदे का कुल मूल्य करीब ₹3,050 करोड़ है और इसके पूरा होने के बाद अदाणी एनर्जी सॉल्यूशंस की स्मार्ट मीटर कारोबार में मौजूदगी और मजबूत होने की उम्मीद है। किससे खरीदी जाएगी हिस्सेदारी? इंटेलीस्मार्ट इंफ्रास्ट्रक्चर में हिस्सेदारी फिलहाल नेशनल इन्वेस्टमेंट एंड इंफ्रास्ट्रक्चर फंड और एनर्जी एफिशिएंसी सर्विसेज लिमिटेड के पास है। मंजूर सौदे के तहत अदाणी एनर्जी सॉल्यूशंस इन दोनों संस्थाओं से कंपनी की पूरी इक्विटी हिस्सेदारी खरीदेगी। जून में हुआ था ₹3,050 करोड़ के सौदे का ऐलान अदाणी एनर्जी सॉल्यूशंस ने इस अधिग्रहण की घोषणा 9 जून 2026 को की थी। उस समय कंपनी ने इंटेलीस्मार्ट की 100% इक्विटी खरीदने के लिए बाध्यकारी समझौता किया था। सौदा पूरा करने के लिए प्रतिस्पर्धा आयोग समेत जरूरी नियामकीय मंजूरियों की आवश्यकता थी। ₹3,050 करोड़ में क्या-क्या शामिल? कंपनी के मुताबिक ₹3,050 करोड़ के कुल सौदे में इंटेलीस्मार्ट की 100% इक्विटी हिस्सेदारी का अधिग्रहण और एनआईआईएफ के पास मौजूद वैकल्पिक रूप से परिवर्तनीय ऋणपत्रों का भुगतान भी शामिल है। क्या करती है इंटेलीस्मार्ट? इंटेलीस्मार्ट भारत में उन्नत स्मार्ट मीटर ढांचा स्थापित और संचालित करने वाली प्रमुख कंपनियों में से एक है। कंपनी बिजली के स्मार्ट मीटर के साथ कुछ क्षेत्रों में स्मार्ट गैस मीटर भी तैनात करती है। 2.2 करोड़ से ज्यादा स्मार्ट मीटर का पोर्टफोलियो अदाणी समूह के अनुसार इंटेलीस्मार्ट के पास 2.2 करोड़ से अधिक स्मार्ट मीटरों का पोर्टफोलियो है। कंपनी उत्तर प्रदेश, गुजरात, मध्य प्रदेश, बिहार और असम जैसे राज्यों में काम कर रही है। अदाणी का स्मार्ट मीटर पोर्टफोलियो 4.7 करोड़ के पार इस अधिग्रहण के बाद अदाणी एनर्जी सॉल्यूशंस का कुल स्मार्ट मीटर पोर्टफोलियो 4.7 करोड़ से अधिक मीटरों तक पहुंचने की संभावना है। कंपनी का कहना है कि इससे वह भारत के सबसे बड़े स्मार्ट मीटर मंचों में शामिल हो जाएगी और बिजली वितरण क्षेत्र के डिजिटलीकरण में उसकी भूमिका बढ़ेगी। बिजली वितरण क्षेत्र में क्यों अहम है सौदा? भारत में पारंपरिक बिजली मीटरों की जगह स्मार्ट मीटर लगाने का काम तेजी से चल रहा है। स्मार्ट मीटर के जरिए बिजली की खपत का सटीक और तत्काल आंकड़ा मिल सकता है, बिलिंग में सुधार हो सकता है और बिजली वितरण कंपनियों को नुकसान कम करने में मदद मिल सकती है। इंटेलीस्मार्ट के अधिग्रहण से अदाणी एनर्जी सॉल्यूशंस को इस तेजी से बढ़ते क्षेत्र में बड़े पैमाने पर काम करने की क्षमता मिलेगी। अदाणी एनर्जी सॉल्यूशंस का कारोबार अदाणी एनर्जी सॉल्यूशंस बिजली पारेषण, वितरण और स्मार्ट मीटर जैसे क्षेत्रों में काम करती है। कंपनी देश की सबसे बड़ी निजी बिजली पारेषण कंपनियों में शामिल है और कई राज्यों में इसकी मौजूदगी है। कंपनी को बड़े स्तर पर तालमेल की उम्मीद अदाणी एनर्जी सॉल्यूशंस का कहना है कि इंटेलीस्मार्ट के जुड़ने से परिचालन खर्च कम करने, रखरखाव बेहतर करने और बड़े स्तर पर स्मार्ट मीटर परियोजनाओं को लागू करने में मदद मिलेगी। कंपनी इसे अपनी जैविक और अधिग्रहण आधारित विकास रणनीति का हिस्सा बता रही है। अब आगे क्या होगा? प्रतिस्पर्धा आयोग की मंजूरी मिलने से सौदा पूरा होने की एक बड़ी नियामकीय बाधा दूर हो गई है। हालांकि अंतिम समापन से पहले अन्य आवश्यक शर्तों और औपचारिकताओं को पूरा किया जाना बाकी हो सकता है। सौदा पूरा होने के बाद इंटेलीस्मार्ट पूरी तरह अदाणी एनर्जी सॉल्यूशंस के नियंत्रण में आ जाएगी। स्रोत – भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग, अदाणी एनर्जी सॉल्यूशंस, इकोनॉमिक टाइम्स, एनडीटीवी प्रॉफिट जय राष्ट्र न्यूज़

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मनीषा भानवाला ने विश्व कुश्ती चैंपियनशिप में रचा इतिहास, 59 किग्रा वर्ग में जीता स्वर्ण

अस्ताना/नई दिल्ली: भारतीय पहलवान मनीषा भानवाला ने विश्व कुश्ती चैंपियनशिप में इतिहास रचते हुए महिलाओं के 59 किलोग्राम फ्रीस्टाइल वर्ग में स्वर्ण पदक जीत लिया। इसके साथ ही वह सीनियर विश्व कुश्ती चैंपियनशिप में स्वर्ण जीतने वाली पहली भारतीय महिला पहलवान बन गई हैं। फाइनल में 0-6 से पिछड़ने के बाद शानदार वापसी फाइनल मुकाबले में मनीषा का सामना अमेरिका की अबीगैल नेटे से हुआ। शुरुआत भारतीय पहलवान के लिए बेहद कठिन रही और वह एक समय 0-6 से पीछे चल रही थीं। इसके बाद मनीषा ने जबरदस्त वापसी की और लगातार अंक जुटाते हुए मुकाबला 8-6 से जीत लिया। उनकी यह वापसी मैच का सबसे यादगार हिस्सा रही। पहली भारतीय महिला विश्व चैंपियन मनीषा की इस जीत से भारतीय महिला कुश्ती ने नया इतिहास लिखा। इससे पहले कोई भी भारतीय महिला पहलवान सीनियर विश्व चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक नहीं जीत सकी थी। कुल मिलाकर मनीषा, सुशील कुमार के बाद विश्व चैंपियन बनने वाली दूसरी भारतीय पहलवान भी बन गई हैं। 29 साल की उम्र में हासिल किया सबसे बड़ा मुकाम हरियाणा के जींद की रहने वाली 29 वर्षीय मनीषा लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व कर रही हैं। उन्होंने एशियाई स्तर पर कई पदक जीते हैं, लेकिन विश्व चैंपियन बनने का सपना अब जाकर पूरा हुआ। पिता को समर्पित किया स्वर्ण पदक स्वर्ण पदक जीतने के बाद मनीषा ने अपने दिवंगत पिता सुरेश भानवाला की तस्वीर वाली टी-शर्ट हाथ में लेकर जीत का जश्न मनाया। उनके पिता ने ही उन्हें कुश्ती अपनाने के लिए प्रेरित किया था और उनका सपना था कि बेटी एक दिन विश्व चैंपियन बने। 2022 में उनके पिता का निधन हो गया था। 13 साल पुराना सपना हुआ पूरा मनीषा के परिवार के मुताबिक उनके पिता ने करीब 13 साल पहले उन्हें कुश्ती में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया था। उनका लक्ष्य था कि मनीषा भारत के लिए विश्व स्तर पर स्वर्ण जीते। फाइनल जीतने के बाद मनीषा ने कहा कि वह 2022 से खुद को विश्व चैंपियन बनने के लक्ष्य के साथ तैयार कर रही थीं। सेमीफाइनल में भी दिखाया दबदबा फाइनल से पहले मनीषा ने सेमीफाइनल में कजाखस्तान की अल्टिन शगायेवा को हराया। इस मुकाबले में उन्होंने केवल दो अंक गंवाए और तकनीकी रूप से मजबूत प्रदर्शन करते हुए फाइनल में जगह बनाई। भारत का सर्वश्रेष्ठ महिला प्रदर्शन इस विश्व चैंपियनशिप में भारतीय महिला पहलवानों ने कुल चार पदक जीते। मनीषा के स्वर्ण के अलावा काजल ढोचक ने 76 किग्रा में रजत, नीलम सिरोही ने 50 किग्रा में रजत और तनु शर्मा ने 72 किग्रा में कांस्य पदक जीता। यह विश्व चैंपियनशिप में भारतीय महिला कुश्ती का अब तक का सर्वश्रेष्ठ पदक प्रदर्शन है। एशियाई खेलों की निराशा के बाद जोरदार वापसी 2026 एशियाई खेलों में मनीषा पदक जीतने से चूक गई थीं। इसके बाद उन्होंने अपनी सहनशक्ति और आखिरी मिनट तक आक्रामक बने रहने पर विशेष काम किया। उनके कोच के मुताबिक यही तैयारी विश्व चैंपियनशिप के फाइनल में निर्णायक साबित हुई, जहां उन्होंने 6 अंकों से पिछड़ने के बावजूद वापसी की। देशभर से मिल रही बधाइयां मनीषा की जीत के बाद खेल जगत और राजनीतिक नेतृत्व की ओर से उन्हें बधाइयां मिल रही हैं। उनकी जीत को भारतीय महिला कुश्ती के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि माना जा रहा है। अब नजर 2028 लॉस एंजिलिस ओलंपिक पर विश्व चैंपियन बनने के बाद मनीषा ने अब अपना अगला बड़ा लक्ष्य 2028 लॉस एंजिलिस ओलंपिक बताया है। उनका मकसद ओलंपिक पदक जीतकर भारत के लिए एक और ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करना है। स्रोत – यूनाइटेड वर्ल्ड रेसलिंग, इंडियन एक्सप्रेस, रॉयटर्स, इंडिया टुडे जय राष्ट्र न्यूज़

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महाराष्ट्र में सूखे के बीच बड़ा फैसला, चारे के लिए जिला योजना की कम से कम 5% राशि तय; 304 तहसीलें प्रभावित

मुंबई: महाराष्ट्र में सूखे की स्थिति और पशुओं के लिए चारे की संभावित कमी को देखते हुए राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने सभी संबंधित जिलों को निर्देश दिया है कि जिला वार्षिक योजना की कम से कम 5% राशि चारा उत्पादन, संरक्षण और वैकल्पिक चारा स्रोतों के विकास पर खर्च की जाए। राज्य की 304 तहसीलों को सूखा प्रभावित घोषित किया जा चुका है। जिला कलेक्टरों को दी गई जिम्मेदारी पशुपालन, डेयरी विकास और मत्स्य विभाग की ओर से जारी सरकारी आदेश के मुताबिक जिला कलेक्टर अभिभावक मंत्री की मंजूरी से जिला वार्षिक योजना की कम से कम 5% राशि चारा संबंधी योजनाओं के लिए उपलब्ध कराएंगे। इस रकम का इस्तेमाल चारा उत्पादन बढ़ाने, उपलब्ध चारे को संरक्षित करने, उसकी गुणवत्ता सुधारने और नए स्रोत विकसित करने में किया जाएगा। 304 तहसीलें सूखा प्रभावित राज्य सरकार ने 2026 के खरीफ मौसम में सूखे के निर्धारित मानकों के आधार पर 304 तहसीलों में सूखे की स्थिति घोषित की है। कम बारिश और जलसंकट के कारण सरकार को आने वाले महीनों में पशुओं के लिए चारे और पानी की कमी का खतरा दिखाई दे रहा है। चारा बैंक बनाए जाएंगे सरकार ने जिलों में चारा बैंक स्थापित करने का निर्देश दिया है। किसान उत्पादक संगठनों, किसान उत्पादक कंपनियों और स्वयंसेवी संस्थाओं की मदद से चारा जमा और वितरित किया जाएगा। कटाई के बाद खाली हुई कृषि भूमि का इस्तेमाल भी चारा फसल उगाने के लिए किया जा सकेगा। सूखे चारे की कीमत ₹12 प्रति किलो तक सरकार ने सूखे चारे के लिए ₹12 प्रति किलोग्राम और साइलेज के लिए ₹8 प्रति किलोग्राम तक की संदर्भ अधिकतम कीमत तय की है। इसमें परिवहन खर्च शामिल नहीं होगा। सरकार ने सूखे चारे को प्राथमिकता देने को कहा है क्योंकि इसे लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है। दूसरे राज्यों में चारा भेजने पर रोक सूखा प्रभावित सीमावर्ती इलाकों से महाराष्ट्र का चारा पड़ोसी राज्यों में भेजे जाने पर कानूनी रोक लगाने के निर्देश भी दिए गए हैं। अगर किसी जिले में चारे की कमी होती है तो आसपास के जिलों से चारा मंगाने की व्यवस्था की जाएगी। चारे का दूसरे कामों में इस्तेमाल नहीं होगा सूखे के दौरान पशु चारे के रूप में इस्तेमाल होने वाली सामग्री को पैकेजिंग, जैव ईंधन या बिजली उत्पादन जैसे दूसरे कामों में इस्तेमाल करने पर भी रोक लगाने की तैयारी है। सरकार का उद्देश्य उपलब्ध चारे को पहले पशुओं के लिए सुरक्षित रखना है। कम पानी वाली चारा फसलों को बढ़ावा कृषि विभाग को रबी मौसम के लिए पर्याप्त चारा बीज उपलब्ध कराने को कहा गया है। किसानों और पशुपालकों को ऐसी चारा फसलें उगाने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा जिन्हें कम पानी की जरूरत होती है और जिनकी एक से अधिक बार कटाई की जा सकती है। कृषि विश्वविद्यालयों, बीज उत्पादन केंद्रों और पशुपालन विभाग की जमीन पर भी चारा उत्पादन की योजना है। जंगलों में उपलब्ध घास भी की जाएगी सुरक्षित वन भूमि पर उपलब्ध घास और चारे को काटकर सुरक्षित रखने तथा जरूरत पड़ने पर पशुपालकों को उपलब्ध कराने की योजना बनाई गई है। सरकार का मानना है कि स्थानीय स्तर पर उपलब्ध हर संभावित स्रोत का इस्तेमाल कर चारे की कमी को नियंत्रित किया जा सकता है। पशु शिविरों में बायोमेट्रिक व्यवस्था पशु शिविरों की निगरानी के लिए राज्य स्तर पर चारा छावनी निगरानी एवं प्रबंधन प्रणाली विकसित की जाएगी। शिविरों में पशुओं और लाभार्थियों की मौजूदगी दर्ज करने के लिए बायोमेट्रिक या क्यूआर कोड आधारित व्यवस्था होगी। सीसीटीवी निगरानी भी अनिवार्य की जाएगी। जल संरक्षण पर भी जोर सरकार ने सूखा प्रभावित क्षेत्रों में जल संरक्षण के काम भी तेज करने के निर्देश दिए हैं। इसके तहत पानी रोकने वाले गड्ढे बनाना, जलाशयों से गाद निकालना और छोटे बांधों की मरम्मत जैसे काम किए जाएंगे। राज्य के 358 में से 304 तहसीलों में सूखे की स्थिति होने के कारण पानी और चारे दोनों को लेकर प्रशासन को पहले से तैयारी करने को कहा गया है। किसानों और पशुपालकों को राहत देने की कोशिश सरकार का कहना है कि समय रहते चारे का उत्पादन और भंडारण बढ़ाने से गर्मी के महीनों में पशुपालकों पर पड़ने वाला दबाव कम किया जा सकता है। अब इन उपायों की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि जिला स्तर पर चारा बैंक, उत्पादन योजनाएं और वितरण व्यवस्था कितनी तेजी और पारदर्शिता से लागू की जाती हैं। स्रोत – महाराष्ट्र सरकार, पशुपालन विभाग, पीटीआई, हिंदुस्तान टाइम्स जय राष्ट्र न्यूज़

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