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आज बाजार की नजर Bajaj Finance, Adani Enterprises, Marico और BPCL समेत कई प्रमुख शेयरों पर

मुंबई, 3 जुलाई। भारतीय शेयर बाजार के आज के कारोबारी सत्र में निवेशकों की नजर Bajaj Finance, Adani Enterprises, Marico, BPCL सहित कई प्रमुख कंपनियों के शेयरों पर रहेगी। वैश्विक बाजारों के संकेत, कॉर्पोरेट घोषणाएं, तिमाही कारोबारी अपडेट और सेक्टर-विशिष्ट गतिविधियां बाजार की चाल को प्रभावित कर सकती हैं। इन शेयरों पर रहेगा फोकस आज जिन प्रमुख कंपनियों के शेयर निवेशकों के रडार पर हैं, उनमें— के अलावा अन्य चुनिंदा कंपनियां भी शामिल हैं, जिनसे जुड़े कारोबारी अपडेट बाजार की धारणा को प्रभावित कर सकते हैं। कॉर्पोरेट अपडेट पर रहेगी नजर विश्लेषकों के अनुसार निवेशक कंपनियों की व्यावसायिक गतिविधियों, विस्तार योजनाओं, निवेश संबंधी घोषणाओं और आगामी तिमाही नतीजों से जुड़े संकेतों पर विशेष ध्यान देंगे। ऐसे अपडेट संबंधित शेयरों में उतार-चढ़ाव का कारण बन सकते हैं। वैश्विक संकेत भी रहेंगे अहम अंतरराष्ट्रीय बाजारों का रुख, कच्चे तेल की कीमतें, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की गतिविधियां और वैश्विक आर्थिक घटनाक्रम आज भारतीय शेयर बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। सेक्टर आधारित गतिविधियों पर नजर वित्तीय सेवाएं, ऊर्जा, एफएमसीजी, बुनियादी ढांचा और औद्योगिक क्षेत्रों से जुड़ी कंपनियों में निवेशकों की विशेष रुचि देखने को मिल सकती है। यदि इन क्षेत्रों से सकारात्मक खबरें आती हैं, तो संबंधित शेयरों में खरीदारी बढ़ सकती है। विशेषज्ञों की राय बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि निवेशकों को किसी भी शेयर में निवेश करने से पहले कंपनी के मूलभूत आंकड़ों, मूल्यांकन और जोखिम का आकलन करना चाहिए। अल्पकालिक उतार-चढ़ाव के बजाय दीर्घकालिक निवेश रणनीति अपनाना अधिक लाभकारी हो सकता है। आगे की राह विश्लेषकों के अनुसार आज के कारोबार में वैश्विक संकेत, कॉर्पोरेट समाचार और निवेशकों की धारणा प्रमुख भूमिका निभाएगी। दिनभर इन प्रमुख शेयरों की गतिविधियों पर बाजार सहभागियों की विशेष नजर बनी रहेगी। स्रोत:बीएसई (BSE), एनएसई (NSE) एवं कंपनियों द्वारा जारी सार्वजनिक कॉर्पोरेट अपडेट। मूल रिपोर्ट:3 जुलाई 2026 के कारोबारी सत्र से पहले उपलब्ध बाजार जानकारी और कॉर्पोरेट घटनाक्रम के आधार पर। जय राष्ट्र न्यूज़

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भारत-जापान निवेश, AI, सेमीकंडक्टर और हरित ऊर्जा सहयोग को नई गति, उद्योग जगत ने किया स्वागत

नई दिल्ली, 3 जुलाई। भारत और जापान ने द्विपक्षीय आर्थिक संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में निवेश, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), सेमीकंडक्टर, हरित ऊर्जा और डिजिटल प्रौद्योगिकी जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई है। इस पहल को दोनों देशों के बीच दीर्घकालिक आर्थिक और तकनीकी साझेदारी को नई दिशा देने वाला कदम माना जा रहा है। उद्योग जगत ने भी इन पहलों का स्वागत करते हुए इसे निवेश, नवाचार और रोजगार के लिए सकारात्मक बताया है। निवेश और औद्योगिक सहयोग पर जोर दोनों देशों ने विनिर्माण, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, इलेक्ट्रॉनिक्स और उच्च प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में निवेश को बढ़ावा देने पर बल दिया। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे भारत में नए औद्योगिक प्रोजेक्ट्स, रोजगार के अवसर और वैश्विक निवेश आकर्षित करने में मदद मिलेगी। AI और डिजिटल तकनीकों में साझेदारी भारत और जापान AI, मशीन लर्निंग, डेटा एनालिटिक्स, क्लाउड कंप्यूटिंग और डिजिटल नवाचार से जुड़े क्षेत्रों में संयुक्त अनुसंधान और तकनीकी सहयोग को आगे बढ़ाएंगे। इससे दोनों देशों के स्टार्टअप, अनुसंधान संस्थानों और तकनीकी कंपनियों को नई संभावनाएं मिल सकती हैं। सेमीकंडक्टर क्षेत्र को मिलेगा बढ़ावा सेमीकंडक्टर आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत बनाने, चिप डिजाइन और उन्नत इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण में सहयोग बढ़ाने पर भी विशेष जोर दिया गया है। विशेषज्ञों के अनुसार यह साझेदारी भारत को वैश्विक सेमीकंडक्टर उद्योग में अपनी भूमिका मजबूत करने में मदद कर सकती है। हरित ऊर्जा में संयुक्त पहल ग्रीन हाइड्रोजन, सौर ऊर्जा, ऊर्जा दक्षता और स्वच्छ प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर भी सहमति बनी है। दोनों देश सतत विकास और कार्बन उत्सर्जन में कमी लाने के लिए संयुक्त परियोजनाओं को प्रोत्साहित करने की दिशा में कार्य करेंगे। उद्योग जगत की सकारात्मक प्रतिक्रिया उद्योग संगठनों और विशेषज्ञों ने इस पहल का स्वागत करते हुए कहा है कि इससे विदेशी निवेश बढ़ेगा, तकनीकी नवाचार को गति मिलेगी और भारत के डिजिटल एवं औद्योगिक विकास को नई मजबूती मिलेगी। उनका मानना है कि उभरती तकनीकों में सहयोग से वैश्विक प्रतिस्पर्धा में भारत की स्थिति और मजबूत होगी। स्टार्टअप और रोजगार को मिलेगा लाभ विशेषज्ञों का कहना है कि AI, सेमीकंडक्टर और डिजिटल तकनीकों में बढ़ते निवेश से स्टार्टअप इकोसिस्टम को प्रोत्साहन मिलेगा। साथ ही उच्च कौशल वाले रोजगार के नए अवसर सृजित होने और अनुसंधान एवं विकास गतिविधियों में तेजी आने की संभावना है। आगे की राह विशेषज्ञों का मानना है कि भारत और जापान के बीच यह विस्तारित सहयोग दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को नई ऊंचाइयों तक ले जाएगा। यदि प्रस्तावित परियोजनाएं समयबद्ध तरीके से लागू होती हैं, तो निवेश, तकनीकी नवाचार, स्वच्छ ऊर्जा और उन्नत विनिर्माण के क्षेत्र में दीर्घकालिक सकारात्मक परिणाम देखने को मिल सकते हैं। स्रोत:भारत सरकार, जापान सरकार एवं दोनों देशों द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी। मूल रिपोर्ट:3 जुलाई 2026 को भारत-जापान आर्थिक एवं तकनीकी सहयोग से संबंधित आधिकारिक घोषणाओं और सार्वजनिक जानकारी के आधार पर। जय राष्ट्र न्यूज़

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सेंसेक्स 500 अंकों से अधिक उछला, निफ्टी 24,150 के पार; आईटी और बैंकिंग शेयरों में जोरदार खरीदारी

मुंबई, 2 जुलाई। भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार को मजबूत वैश्विक संकेतों और निवेशकों की खरीदारी के चलते शानदार तेजी दर्ज की गई। कारोबार के दौरान बीएसई सेंसेक्स 500 अंकों से अधिक चढ़ गया, जबकि एनएसई निफ्टी 50 24,150 के स्तर के ऊपर कारोबार करता दिखाई दिया। बाजार की इस तेजी में आईटी और बैंकिंग सेक्टर के शेयरों का महत्वपूर्ण योगदान रहा। आईटी और बैंकिंग शेयरों ने संभाला बाजार कारोबार के दौरान प्रमुख आईटी और बैंकिंग कंपनियों के शेयरों में अच्छी खरीदारी देखने को मिली। निवेशकों की सकारात्मक धारणा और मजबूत वैश्विक संकेतों के कारण इन सेक्टरों ने बाजार को मजबूती प्रदान की। बड़े बैंकों और प्रमुख आईटी कंपनियों के शेयरों में बढ़त से प्रमुख सूचकांक हरे निशान में बने रहे। वैश्विक संकेतों का मिला समर्थन विश्लेषकों के अनुसार अंतरराष्ट्रीय बाजारों से मिले सकारात्मक संकेत, विदेशी निवेशकों की सक्रियता और वैश्विक आर्थिक माहौल में सुधार की उम्मीद ने भारतीय बाजार में निवेशकों का भरोसा बढ़ाया। इससे बाजार में व्यापक खरीदारी देखने को मिली। किन सेक्टरों में रही तेजी? आज के कारोबार में विशेष रूप से— से जुड़े शेयरों में अच्छी तेजी दर्ज की गई। हालांकि कुछ रक्षात्मक सेक्टरों में सीमित उतार-चढ़ाव देखने को मिला। निवेशकों की रणनीति बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि वर्तमान तेजी के बावजूद निवेशकों को मजबूत बुनियादी कंपनियों पर ध्यान देना चाहिए। वैश्विक आर्थिक घटनाक्रम, कंपनियों के तिमाही नतीजे और विदेशी निवेशकों की गतिविधियां आने वाले दिनों में बाजार की दिशा तय कर सकती हैं। विदेशी निवेशकों की भूमिका विशेषज्ञों के अनुसार विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की खरीदारी और घरेलू निवेशकों के मजबूत भरोसे ने बाजार की तेजी को समर्थन दिया। यदि यह रुझान जारी रहता है तो आने वाले कारोबारी सत्रों में भी सकारात्मक माहौल देखने को मिल सकता है। आगे क्या? विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में कंपनियों के पहली तिमाही के वित्तीय परिणाम, वैश्विक ब्याज दरों से जुड़े संकेत, कच्चे तेल की कीमतें और अंतरराष्ट्रीय बाजारों का रुख भारतीय शेयर बाजार की चाल तय करेंगे। निवेशकों को सलाह दी गई है कि वे बाजार में उतार-चढ़ाव के दौरान सोच-समझकर निवेश संबंधी निर्णय लें। स्रोत:बीएसई (BSE), एनएसई (NSE) एवं बाजार से संबंधित आधिकारिक कारोबारी आंकड़े। मूल रिपोर्ट:2 जुलाई 2026 के कारोबारी सत्र के दौरान उपलब्ध बाजार आंकड़ों और प्रमुख सूचकांकों के प्रदर्शन के आधार पर। जय राष्ट्र न्यूज़

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भारत-जापान रणनीतिक आर्थिक साझेदारी को मिली नई रफ्तार, निवेश, AI और हरित ऊर्जा पर रहेगा विशेष फोकस

नई दिल्ली, 2 जुलाई। भारत और जापान ने अपनी रणनीतिक आर्थिक साझेदारी को और मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए निवेश, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), हरित ऊर्जा, सेमीकंडक्टर, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और उन्नत विनिर्माण जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई है। दोनों देशों का उद्देश्य नवाचार, सतत विकास और आर्थिक प्रगति को नई गति देना है। निवेश को मिलेगा बढ़ावा दोनों देशों ने भारत में जापानी निवेश बढ़ाने और औद्योगिक परियोजनाओं को गति देने पर जोर दिया। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे विनिर्माण, बुनियादी ढांचा, लॉजिस्टिक्स और उच्च प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में नए निवेश के अवसर पैदा होंगे तथा रोजगार सृजन को भी बढ़ावा मिलेगा। AI और डिजिटल तकनीकों पर सहयोग भारत और जापान ने AI, मशीन लर्निंग, सेमीकंडक्टर, डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन और अनुसंधान एवं विकास (R&D) के क्षेत्रों में संयुक्त परियोजनाओं को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया। दोनों देश उभरती तकनीकों के विकास और उनके सुरक्षित एवं जिम्मेदार उपयोग को भी बढ़ावा देंगे। हरित ऊर्जा पर विशेष जोर बैठक में ग्रीन हाइड्रोजन, सौर ऊर्जा, ऊर्जा दक्षता, स्वच्छ प्रौद्योगिकी और कार्बन उत्सर्जन में कमी जैसे विषयों पर सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी। दोनों देशों ने सतत विकास लक्ष्यों को हासिल करने के लिए संयुक्त प्रयास जारी रखने का संकल्प भी दोहराया। उन्नत विनिर्माण और सेमीकंडक्टर भारत को वैश्विक विनिर्माण केंद्र बनाने की दिशा में जापान ने उन्नत विनिर्माण, इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल, सेमीकंडक्टर और आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) को मजबूत करने में सहयोग बढ़ाने का भरोसा दिया। इससे भारत के औद्योगिक विकास को नई गति मिलने की उम्मीद है। इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में रणनीतिक सहयोग दोनों देशों ने स्वतंत्र, खुला और समावेशी इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। समुद्री सुरक्षा, आपूर्ति श्रृंखला की मजबूती और क्षेत्रीय स्थिरता को बढ़ावा देने पर भी विशेष जोर दिया गया। उद्योग जगत को मिलेगा लाभ विशेषज्ञों का मानना है कि इस रणनीतिक साझेदारी से भारतीय उद्योगों को नई तकनीकों तक पहुंच, विदेशी निवेश और वैश्विक बाजारों में प्रतिस्पर्धा बढ़ाने का अवसर मिलेगा। विशेष रूप से AI, इलेक्ट्रॉनिक्स, ऊर्जा और विनिर्माण क्षेत्रों में सकारात्मक प्रभाव देखने को मिल सकता है। आगे की राह भारत और जापान आने वाले वर्षों में इन समझौतों को चरणबद्ध तरीके से लागू करेंगे। दोनों देशों का लक्ष्य आर्थिक विकास, तकनीकी नवाचार और सतत ऊर्जा के क्षेत्र में दीर्घकालिक सहयोग को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाना है। इससे भारत-जापान संबंध और अधिक मजबूत होने के साथ-साथ वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में दोनों देशों की भूमिका भी सशक्त होने की उम्मीद है। स्रोत:भारत सरकार, जापान सरकार एवं दोनों देशों द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी। मूल रिपोर्ट:2 जुलाई 2026 को भारत-जापान रणनीतिक आर्थिक सहयोग से संबंधित आधिकारिक घोषणाओं के आधार पर। जय राष्ट्र न्यूज़

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1 जुलाई से पेट्रोल-डीजल बिक्री पर लगे अस्थायी प्रतिबंध हटे, देशभर में ईंधन आपूर्ति हुई सामान्य

नई दिल्ली, 1 जुलाई। केंद्र सरकार ने पेट्रोल और डीजल की बिक्री पर लगाए गए अस्थायी प्रतिबंध 1 जुलाई 2026 से वापस ले लिए हैं। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने कहा कि देश में पेट्रोलियम उत्पादों की उपलब्धता और आपूर्ति की समीक्षा के बाद यह पाया गया कि अब आपातकालीन प्रतिबंधों की आवश्यकता नहीं है। इसके साथ ही देशभर में ईंधन की सामान्य बिक्री और वितरण व्यवस्था बहाल हो गई है। क्यों लगाए गए थे प्रतिबंध? सरकार ने जून के मध्य में पश्चिम एशिया में बढ़े तनाव और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर पड़े असर को देखते हुए एहतियात के तौर पर कुछ अस्थायी प्रतिबंध लागू किए थे। इनका उद्देश्य पेट्रोल और डीजल की उपलब्धता बनाए रखना, जमाखोरी रोकना और आम उपभोक्ताओं के लिए पर्याप्त ईंधन सुनिश्चित करना था। अब क्या बदला? 1 जुलाई से लागू नए आदेश के तहत— आम उपभोक्ताओं पर क्या असर होगा? सरकार के अनुसार निजी वाहन चालकों के लिए पहले भी ईंधन उपलब्धता में कोई बड़ी बाधा नहीं थी। नए निर्णय का सबसे अधिक लाभ ट्रांसपोर्ट कंपनियों, उद्योगों, संस्थानों और अन्य व्यावसायिक उपभोक्ताओं को मिलेगा, जिन्हें अब ईंधन खरीदने में पहले जैसी पाबंदियों का सामना नहीं करना पड़ेगा। आपूर्ति सामान्य होने की वजह पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार पश्चिम एशिया में स्थिति अपेक्षाकृत सामान्य होने और कच्चे तेल एवं पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति में सुधार के बाद भारत में ईंधन वितरण भी स्थिर हो गया है। विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य से समुद्री परिवहन सामान्य होने से आपूर्ति संबंधी चिंताएं कम हुई हैं। उद्योग जगत को मिलेगी राहत विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से परिवहन, लॉजिस्टिक्स, निर्माण और औद्योगिक क्षेत्र को राहत मिलेगी। सामान्य ईंधन आपूर्ति से माल ढुलाई और उत्पादन गतिविधियों पर सकारात्मक प्रभाव पड़ने की संभावना है। सरकार रखेगी लगातार निगरानी सरकार ने स्पष्ट किया है कि वह अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार और घरेलू ईंधन आपूर्ति की स्थिति पर लगातार नजर रखेगी। यदि भविष्य में किसी प्रकार की आपूर्ति चुनौती उत्पन्न होती है तो आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। फिलहाल देश में पेट्रोल और डीजल की उपलब्धता पर्याप्त बताई गई है। स्रोत:पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय, भारत सरकार मूल रिपोर्ट:1 जुलाई 2026 से लागू केंद्र सरकार के आदेश और मंत्रालय द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी के आधार पर। जय राष्ट्र न्यूज़

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कमजोर मानसून के बीच राहत की उम्मीद, IMD ने अगले कुछ दिनों में बारिश बढ़ने का पूर्वानुमान जताया

नई दिल्ली, 30 जून। देश के कई हिस्सों में जून के दौरान सामान्य से कम वर्षा होने के कारण खरीफ फसलों की बुवाई प्रभावित हुई है। इसी बीच भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने राहत भरा पूर्वानुमान जारी करते हुए कहा है कि अगले कुछ दिनों में मानसून की गतिविधियों में तेजी आने की संभावना है। विभाग के अनुसार उत्तर, पूर्व, मध्य और पूर्वोत्तर भारत के कई क्षेत्रों में अच्छी बारिश हो सकती है, जिससे कृषि कार्यों को गति मिलने की उम्मीद है। खरीफ बुवाई पर पड़ा असर बारिश की कमी के कारण कई राज्यों में धान, दालें, तिलहन और अन्य खरीफ फसलों की बुवाई समय पर नहीं हो सकी। खेतों में पर्याप्त नमी नहीं होने से किसानों को बुवाई टालनी पड़ी, जिससे शुरुआती कृषि गतिविधियां प्रभावित हुई हैं। IMD का ताजा पूर्वानुमान मौसम विभाग के अनुसार बंगाल की खाड़ी और अरब सागर से आने वाली नमी के कारण मानसून के फिर से सक्रिय होने के संकेत हैं। इसके प्रभाव से अगले कुछ दिनों में कई क्षेत्रों में मध्यम से भारी वर्षा होने की संभावना है। विभाग ने स्थानीय मौसम बुलेटिन पर नजर रखने और आवश्यक सावधानी बरतने की सलाह भी दी है। किसानों के लिए राहत की उम्मीद यदि पूर्वानुमान के अनुसार पर्याप्त बारिश होती है तो खरीफ फसलों की बुवाई में तेजी आने की संभावना है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि जुलाई का पहला पखवाड़ा खरीफ सीजन के लिए बेहद महत्वपूर्ण होता है और इसी अवधि में अच्छी वर्षा होने पर शुरुआती नुकसान की काफी हद तक भरपाई की जा सकती है। कृषि विभाग की तैयारी राज्य सरकारें और कृषि विभाग किसानों को मौसम आधारित सलाह, गुणवत्तापूर्ण बीज और तकनीकी सहायता उपलब्ध कराने की दिशा में काम कर रहे हैं। किसानों से स्थानीय कृषि अधिकारियों और मौसम विभाग की सलाह के अनुसार खेती की योजना बनाने का आग्रह किया गया है। जलभराव और बिजली गिरने का भी खतरा जहां एक ओर अच्छी बारिश से खेती को लाभ मिलेगा, वहीं IMD ने कुछ क्षेत्रों में भारी वर्षा, आंधी और बिजली गिरने की संभावना भी जताई है। ऐसे इलाकों में लोगों को सतर्क रहने और प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करने की सलाह दी गई है। विशेषज्ञों की राय मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि मानसून की सक्रियता बढ़ने से कृषि क्षेत्र को राहत मिल सकती है, लेकिन वर्षा का वितरण भी उतना ही महत्वपूर्ण होगा। यदि बारिश संतुलित और समय पर होती है तो खरीफ उत्पादन पर सकारात्मक असर पड़ सकता है। आगे की स्थिति मौसम विभाग अगले कुछ दिनों तक मानसून की प्रगति पर लगातार नजर रखेगा और समय-समय पर नए पूर्वानुमान जारी करेगा। किसानों और आम लोगों को सलाह दी गई है कि वे केवल आधिकारिक मौसम बुलेटिन पर भरोसा करें और मौसम की बदलती परिस्थितियों के अनुसार आवश्यक सावधानी बरतें। स्रोत:भारतीय मौसम विभाग (IMD), कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय मूल रिपोर्ट:30 जून 2026 को जारी IMD के मौसम पूर्वानुमान और कृषि विभाग की उपलब्ध जानकारी के आधार पर। जय राष्ट्र न्यूज़

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नई रिपोर्ट में दावा: इस दशक के अंत तक 7 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बन सकता है भारत

नई दिल्ली, 30 जून। भारत की आर्थिक वृद्धि को लेकर जारी एक नई रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि यदि मौजूदा सुधारों की गति और उच्च विकास दर बनी रहती है, तो देश इस दशक के अंत तक 7 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में उल्लेखनीय प्रगति कर सकता है। रिपोर्ट में निवेश, विनिर्माण, डिजिटल अर्थव्यवस्था, बुनियादी ढांचे के विकास और घरेलू मांग को विकास के प्रमुख आधार बताया गया है। रिपोर्ट में क्या कहा गया? रिपोर्ट के अनुसार भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में बना हुआ है। मजबूत घरेलू खपत, सार्वजनिक निवेश, डिजिटल भुगतान प्रणाली, स्टार्टअप इकोसिस्टम और सेवा क्षेत्र का विस्तार आर्थिक वृद्धि को गति दे रहे हैं। यदि ये रुझान जारी रहते हैं तो आने वाले वर्षों में भारत का सकल घरेलू उत्पाद (GDP) तेजी से बढ़ सकता है। विकास के प्रमुख आधार रिपोर्ट में कई ऐसे क्षेत्रों का उल्लेख किया गया है जो भारत की आर्थिक वृद्धि को आगे बढ़ा सकते हैं: विनिर्माण और डिजिटल क्षेत्र पर जोर विशेषज्ञों का मानना है कि ‘मेक इन इंडिया’, उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (PLI) योजनाओं और डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना के विस्तार से भारत की उत्पादन क्षमता और वैश्विक प्रतिस्पर्धा में सुधार हो रहा है। इससे रोजगार सृजन और औद्योगिक विकास को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। वैश्विक चुनौतियां भी बनी हुई हैं रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि वैश्विक आर्थिक सुस्ती, भू-राजनीतिक तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और आपूर्ति श्रृंखला से जुड़ी चुनौतियां भारत की विकास दर को प्रभावित कर सकती हैं। इसलिए आर्थिक सुधारों की निरंतरता और नीति स्थिरता महत्वपूर्ण रहेगी। विशेषज्ञों की राय अर्थशास्त्रियों का कहना है कि 7 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था का लक्ष्य महत्वाकांक्षी जरूर है, लेकिन यदि निवेश, उत्पादकता, निर्यात और रोजगार में लगातार सुधार होता है तो भारत इस दिशा में मजबूत स्थिति बना सकता है। इसके लिए राज्यों और केंद्र सरकार के बीच बेहतर समन्वय भी आवश्यक माना गया है। निवेशकों का बढ़ता विश्वास हाल के वर्षों में भारत में घरेलू और विदेशी निवेशकों की रुचि बढ़ी है। वैश्विक कंपनियां विनिर्माण, प्रौद्योगिकी, इलेक्ट्रॉनिक्स, हरित ऊर्जा और डिजिटल सेवाओं में निवेश बढ़ा रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे दीर्घकालिक आर्थिक विकास को समर्थन मिलेगा। आगे की राह रिपोर्ट के अनुसार भारत के सामने अवसर और चुनौतियां दोनों मौजूद हैं। यदि आर्थिक सुधार, निवेश, कौशल विकास और बुनियादी ढांचे पर लगातार ध्यान दिया जाता है तो देश आने वाले वर्षों में वैश्विक अर्थव्यवस्था में अपनी स्थिति और मजबूत कर सकता है। हालांकि 7 ट्रिलियन डॉलर का लक्ष्य एक पूर्वानुमान है, न कि कोई आधिकारिक सरकारी घोषणा। स्रोत:अंतरराष्ट्रीय आर्थिक विश्लेषण एवं बाजार अनुसंधान रिपोर्ट मूल रिपोर्ट:30 जून 2026 को जारी आर्थिक विश्लेषणों और उपलब्ध बाजार रिपोर्टों के आधार पर। जय राष्ट्र न्यूज़

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29 जून को सोने की कीमतों में मामूली गिरावट, 22 कैरेट गोल्ड के दाम में हल्की नरमी

नई दिल्ली, 29 जून। घरेलू सर्राफा बाजार में सोमवार को सोने की कीमतों में मामूली गिरावट दर्ज की गई। 22 कैरेट और 24 कैरेट सोने के दाम में हल्की नरमी देखने को मिली। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार वैश्विक संकेतों, अमेरिकी डॉलर की चाल और अंतरराष्ट्रीय बुलियन बाजार में उतार-चढ़ाव का असर घरेलू कीमतों पर भी दिखाई दे रहा है। प्रमुख शहरों में क्या रहे भाव? 29 जून को दिल्ली, मुंबई, चेन्नई, कोलकाता, बेंगलुरु, हैदराबाद, पुणे और अहमदाबाद सहित कई प्रमुख शहरों में 22 कैरेट सोने की कीमतों में हल्की कमी दर्ज की गई। हालांकि अलग-अलग शहरों में टैक्स, परिवहन और स्थानीय शुल्क के कारण कीमतों में थोड़ा अंतर देखने को मिला। अंतरराष्ट्रीय बाजार का असर विशेषज्ञों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतें अमेरिकी डॉलर, ब्याज दरों की उम्मीदों, केंद्रीय बैंकों की नीतियों और भू-राजनीतिक घटनाक्रमों से प्रभावित होती हैं। इन वैश्विक कारकों का सीधा असर भारतीय बाजार पर भी पड़ता है। निवेशकों की बनी हुई है नजर बाजार विश्लेषकों के अनुसार निवेशक फिलहाल अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों, केंद्रीय बैंकों की आगामी नीतियों और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों पर नजर बनाए हुए हैं। यदि वैश्विक बाजार में अस्थिरता बढ़ती है तो सोने की कीमतों में फिर से तेजी देखने को मिल सकती है। ज्वेलरी बाजार में सामान्य कारोबार सर्राफा कारोबारियों के अनुसार कीमतों में मामूली नरमी के बावजूद बाजार में सामान्य खरीदारी जारी है। आगामी त्योहारों और विवाह सीजन को देखते हुए आने वाले महीनों में मांग बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। खरीदारी से पहले रखें इन बातों का ध्यान विशेषज्ञ ग्राहकों को सलाह देते हैं कि सोना खरीदते समय केवल BIS हॉलमार्क वाले आभूषण ही खरीदें। साथ ही बिल अवश्य लें और मेकिंग चार्ज, जीएसटी तथा अन्य शुल्क की जानकारी पहले ही प्राप्त कर लें। आगे कैसा रह सकता है बाजार? विश्लेषकों का मानना है कि निकट भविष्य में सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां, केंद्रीय बैंकों के फैसले और निवेशकों की धारणा बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। इसलिए निवेशकों को जल्दबाजी में निर्णय लेने के बजाय बाजार के रुझानों पर नजर रखने की सलाह दी जा रही है। प्रमुख शहरों में 22 कैरेट सोने के अनुमानित भाव (29 जून 2026) शहर 22 कैरेट (10 ग्राम) दिल्ली ₹92,350 मुंबई ₹92,200 चेन्नई ₹92,700 कोलकाता ₹92,200 बेंगलुरु ₹92,250 हैदराबाद ₹92,200 नोट: सोने के दाम शहर, ज्वेलर और स्थानीय करों के अनुसार बदल सकते हैं। खरीदारी से पहले अपने शहर के अधिकृत ज्वेलर से ताजा भाव की पुष्टि अवश्य करें। स्रोत:इंडियन बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (IBJA), प्रमुख सर्राफा बाजार मूल रिपोर्ट:29 जून 2026 के सर्राफा बाजार के उपलब्ध आंकड़ों और बाजार विश्लेषण के आधार पर। जय राष्ट्र न्यूज़

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Summer Fancy Food Show 2026 में भारत की अब तक की सबसे बड़ी भागीदारी, वैश्विक बाजार में भारतीय खाद्य उत्पादों को बढ़ावा

न्यूयॉर्क, 29 जून। उत्तर अमेरिका के प्रतिष्ठित Summer Fancy Food Show 2026 में भारत ने अपनी अब तक की सबसे बड़ी भागीदारी दर्ज कराते हुए वैश्विक खाद्य बाजार में मजबूत उपस्थिति का प्रदर्शन किया है। भारतीय पवेलियन में देशभर की दर्जनों कंपनियां और निर्यातक अपने उत्पादों का प्रदर्शन कर रहे हैं। इस पहल का उद्देश्य भारतीय खाद्य उत्पादों की अंतरराष्ट्रीय पहुंच बढ़ाना और नए निर्यात अवसरों को प्रोत्साहित करना है। भारतीय पवेलियन बना आकर्षण का केंद्र इस वर्ष भारतीय पवेलियन में मसाले, चाय, कॉफी, बासमती चावल, ऑर्गेनिक उत्पाद, रेडी-टू-ईट खाद्य पदार्थ, स्नैक्स, मिलेट आधारित उत्पाद, मिठाइयां और विभिन्न प्रसंस्कृत खाद्य वस्तुएं प्रदर्शित की गई हैं। वैश्विक खरीदारों और वितरकों ने भारतीय उत्पादों में विशेष रुचि दिखाई है। निर्यात बढ़ाने पर फोकस विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के अंतरराष्ट्रीय व्यापार आयोजनों से भारतीय खाद्य उद्योग को नए बाजारों तक पहुंचने का अवसर मिलता है। भारत सरकार और निर्यात संवर्धन एजेंसियां खाद्य निर्यात को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयास कर रही हैं। इसका उद्देश्य कृषि और खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र को वैश्विक स्तर पर अधिक प्रतिस्पर्धी बनाना है। मिलेट और ऑर्गेनिक उत्पादों की मांग बढ़ी वैश्विक स्तर पर स्वास्थ्यवर्धक और प्राकृतिक खाद्य उत्पादों की बढ़ती मांग के बीच भारतीय मिलेट, ऑर्गेनिक खाद्य पदार्थ और पारंपरिक सुपरफूड्स विशेष आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। कई अंतरराष्ट्रीय खरीदारों ने भारतीय कंपनियों के साथ संभावित व्यापारिक साझेदारी में रुचि दिखाई है। भारतीय कंपनियों को नए अवसर कार्यक्रम में भाग लेने वाली भारतीय कंपनियां विभिन्न देशों के आयातकों, खुदरा विक्रेताओं और वितरकों के साथ व्यापारिक बैठकों में शामिल हो रही हैं। उद्योग जगत का मानना है कि इससे निर्यात ऑर्डर बढ़ने और भारतीय ब्रांडों की वैश्विक पहचान मजबूत होने की संभावना है। खाद्य प्रसंस्करण उद्योग को मिलेगा लाभ भारत का खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र तेजी से विकसित हो रहा है। अंतरराष्ट्रीय मंचों पर बढ़ती उपस्थिति से इस क्षेत्र में निवेश, तकनीकी सहयोग और नए व्यापारिक अवसरों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक मांग के अनुरूप गुणवत्ता और पैकेजिंग पर ध्यान देकर भारतीय कंपनियां अपनी प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति और मजबूत कर सकती हैं। सरकार की पहल को मिली मजबूती भारतीय निर्यात संवर्धन एजेंसियों और संबंधित संस्थानों द्वारा आयोजित सामूहिक भागीदारी का उद्देश्य छोटे और मध्यम उद्यमों को भी वैश्विक मंच उपलब्ध कराना है। इससे भारतीय खाद्य उद्योग के विविध उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिल रही है। भविष्य की संभावनाएं विशेषज्ञों के अनुसार, भारत की बढ़ती भागीदारी यह संकेत देती है कि भारतीय खाद्य उत्पादों की वैश्विक मांग लगातार बढ़ रही है। यदि गुणवत्ता, नवाचार और आपूर्ति श्रृंखला को और मजबूत किया जाए तो आने वाले वर्षों में भारत खाद्य निर्यात के क्षेत्र में और बड़ी उपलब्धियां हासिल कर सकता है। स्रोत:APEDA, वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय, भारत सरकार मूल रिपोर्ट:Summer Fancy Food Show 2026 में भारतीय भागीदारी से संबंधित आधिकारिक जानकारी और व्यापारिक रिपोर्टों के आधार पर। जय राष्ट्र न्यूज़

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खरीफ बुवाई में 22.7% की गिरावट दर्ज, कमजोर मानसून से कई राज्यों में खेती प्रभावित

नई दिल्ली, 29 जून। देश में खरीफ सीजन की बुवाई इस वर्ष शुरुआती चरण में अपेक्षा से धीमी रही है। कृषि मंत्रालय के ताज़ा आंकड़ों के अनुसार, पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में खरीफ फसलों की बुवाई में 22.7% की गिरावट दर्ज की गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि कई क्षेत्रों में कमजोर मानसून और सामान्य से कम वर्षा के कारण किसानों को बुवाई शुरू करने में देरी हुई है। किन फसलों पर सबसे अधिक असर? शुरुआती आंकड़ों के अनुसार धान, दालें, तिलहन, मोटे अनाज और कुछ अन्य खरीफ फसलों की बुवाई प्रभावित हुई है। पर्याप्त वर्षा नहीं होने के कारण कई किसानों ने खेतों की तैयारी और बीज बोने का कार्य फिलहाल टाल दिया है। कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि यदि आने वाले दिनों में अच्छी बारिश होती है तो बुवाई की रफ्तार तेज हो सकती है। कमजोर मानसून बना प्रमुख कारण मौसम विशेषज्ञों के अनुसार देश के कई कृषि प्रधान क्षेत्रों में मानसून की प्रगति सामान्य से धीमी रही है। कुछ इलाकों में बारिश की कमी के कारण मिट्टी में पर्याप्त नमी नहीं बन पाई, जिससे किसानों को बुवाई शुरू करने में कठिनाई हुई। हालांकि मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में कई हिस्सों में वर्षा बढ़ने की संभावना जताई है। किसानों की बढ़ी चिंता बारिश में देरी का असर किसानों की लागत और उत्पादन दोनों पर पड़ सकता है। समय पर बुवाई न होने से फसलों की वृद्धि अवधि प्रभावित होती है, जिससे उपज कम होने का जोखिम बढ़ जाता है। कई किसान अब अगले मानसूनी दौर का इंतजार कर रहे हैं ताकि बुवाई का कार्य तेजी से पूरा किया जा सके। कृषि मंत्रालय की नजर स्थिति पर कृषि मंत्रालय लगातार राज्यों से बुवाई की प्रगति की जानकारी जुटा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि जहां आवश्यक होगा, वहां किसानों को बीज, तकनीकी सलाह और अन्य सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। राज्य सरकारों के साथ समन्वय बनाकर मानसून की स्थिति के अनुसार कृषि रणनीति तैयार की जा रही है। खाद्य उत्पादन पर क्या होगा असर? विशेषज्ञों का मानना है कि अभी खाद्यान्न उत्पादन को लेकर अंतिम निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी। यदि जुलाई के पहले और दूसरे सप्ताह में सामान्य या उससे अधिक वर्षा होती है तो बुवाई में आई शुरुआती कमी काफी हद तक पूरी हो सकती है। इसलिए आने वाले कुछ सप्ताह कृषि क्षेत्र के लिए बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। मौसम पूर्वानुमान से बढ़ी उम्मीद भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने कई राज्यों में आगामी दिनों में अच्छी बारिश की संभावना जताई है। यदि पूर्वानुमान के अनुरूप वर्षा होती है तो किसानों को राहत मिलेगी और खरीफ बुवाई की गति में तेजी आने की उम्मीद है। कृषि विशेषज्ञ किसानों को स्थानीय मौसम सलाह के अनुसार खेती की योजना बनाने की सलाह दे रहे हैं। आगे की राह सरकार और कृषि विशेषज्ञों की नजर अब मानसून की आगामी गतिविधियों पर टिकी है। समय पर पर्याप्त वर्षा होने पर बुवाई में आई कमी को काफी हद तक पूरा किया जा सकता है। फिलहाल किसानों, कृषि विभाग और मौसम एजेंसियों के बीच समन्वय बनाए रखने पर विशेष जोर दिया जा रहा है ताकि खरीफ सीजन पर मौसम का प्रभाव न्यूनतम रहे। स्रोत:कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार मूल रिपोर्ट:कृषि मंत्रालय द्वारा जारी खरीफ बुवाई के ताज़ा आंकड़ों एवं मौसम संबंधी आधिकारिक जानकारी के आधार पर। जय राष्ट्र न्यूज़

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