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भारतीयों के लिए सुनहरा मौका: UAE का न्यू गोल्डन वीजा (New Golden Visa) मिलना हुआ आसान

संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने इंडियन सिटीजन के लिए एक बड़ी सौगात पेश की है। अब इंडियन प्रोफेशनल के लिए यूएई का वीजा (UAE Visa) पाना पहले से कहीं ज्यादा सरल हो गया है। यूएई सरकार (UAE Government) ने भारतीयों के लिए न्यू गोल्डन वीजा योजना की शुरुआत की है, जो खासकर योग्य प्रोफेशनल्स को आकर्षित करने के उद्देश्य से तैयार की गई है। इस योजना के तहत अब न केवल बड़े निवेशक और उद्योगपति, बल्कि सामान्य प्रोफेशनल्स, डिजिटल क्रिएटर्स, शिक्षक, प्रोफेशर और हेल्थकेयर से जुड़े लोग भी इस खास न्यू गोल्डन वीजा (New Golden Visa) का लाभ उठा सकते हैं। क्या है न्यू गोल्डन वीजा (New Golden Visa)? न्यू गोल्डन वीजा (New Golden Visa) एक लाइफटाइम रेजीडेंसी वीजा (Residence Visa) है, जिसका मतलब है कि वीजा धारक को बार-बार वीजा रिन्यू कराने की जरूरत नहीं होगी। यह वीजा UAE में स्थायी निवास, व्यवसाय और पारिवारिक सुविधाओं के साथ आता है। इसका उद्देश्य वैश्विक प्रतिभाओं को आकर्षित करना और UAE की अर्थव्यवस्था और सांस्कृतिक विकास में उनका योगदान सुनिश्चित करना है। किन-किन पेशों के लोगों को मिलेगा लाभ? इस योजना के अंतर्गत अब सिर्फ पैसे वाले व्यक्ति ही नहीं, बल्कि कई अन्य वर्गों के भारतीय नागरिक भी पात्र होंगे। जैसे-  इस प्रकार न्यू गोल्डन वीजा (New Golden Visa) सिर्फ अमीरों तक सीमित न रहकर अब वास्तविक कौशल और योग्यता रखने वाले भारतीय नागरिकों के लिए भी खुल गया है। भारत को क्यों मिली प्राथमिकता? भारत और UAE के बीच 2022 में CEPA (Comprehensive Economic Partnership Agreement) लागू हुआ था, जिसके चलते दोनों देशों के आर्थिक और सामाजिक संबंध और भी प्रगाढ़ हुए हैं। इसी सहयोग के तहत भारत को इस वीजा योजना के पायलट प्रोजेक्ट में प्राथमिकता दी गई है। यूएई सरकार (UAE Government) ने भारत को पहला ऐसा देश बनाया है जहां इस योजना को सबसे पहले लागू किया जा रहा है। वीजा अप्लाई करने का तरीका  इस पूरी प्रक्रिया को Rayad Group के माध्यम से संचालित किया जा रहा है। यह ग्रुप UAE सरकार द्वारा अधिकृत है और आवेदन की जांच कर उन्हें आगे भेजता है। Rayad Group आपकी प्रोफाइल को निम्नलिखित मापदंडों पर जांचता है: क्रिमिनल रिकॉर्ड और मनी लॉन्ड्रिंग स्टेटस सोशल मीडिया गतिविधियाँ और ऑनलाइन व्यवहार आपका UAE की अर्थव्यवस्था या संस्कृति में योगदान (जैसे स्टार्टअप, इनोवेशन, एजुकेशन, हेल्थकेयर आदि में) जांच प्रक्रिया के बाद, यदि आप योग्य पाए जाते हैं तो आपका आवेदन UAE सरकार को भेजा जाता है। Rayad Group का अनुमान है कि अगले तीन महीनों में 5,000 से ज्यादा भारतीय इस वीजा के लिए आवेदन कर सकते हैं। न्यू गोल्डन वीजा (New Golden Visa) के लिए आवेदन कैसे करें? आप निम्न माध्यमों से आवेदन कर सकते हैं: न्यू गोल्डन वीजा फीस कितनी है? इस वीजा के लिए आवेदकों को AED 1,00,000 यानी लगभग 23.3 लाख रुपये का भुगतान करना होगा। यह राशि लाइफटाइम रेजीडेंसी की सुविधा के साथ दी जाती है, जो दीर्घकालिक निवेश के इच्छुक पेशेवरों के लिए फायदेमंद साबित हो सकती है। इसे भी पढ़ें:- कौन सा रिचार्ज प्लान आपके लिए हो सकता है बेस्ट? क्या-क्या मिलेंगे फायदे? न्यू गोल्डन वीजा  (New Golden Visa) धारकों को निम्नलिखित प्रमुख लाभ मिलते हैं: पहले यह वीजा किनके लिए था? जब 2019 में गोल्डन वीजा (Golden Visa) लॉन्च किया गया था, तब यह केवल करोड़ों रुपये की प्रॉपर्टी में निवेश करने वाले अमीर व्यक्तियों के लिए था। लेकिन 2022 से इसमें बदलाव कर इसे ज्यादा समावेशी बना दिया गया है। अब सामान्य लेकिन योग्य प्रोफेशनल्स को भी इसमें जगह दी जा रही है। संयुक्त अरब अमीरात का न्यू गोल्डन वीजा (New Golden Visa) भारतीयों के लिए वैश्विक स्तर पर एक नई पहचान बनाने का अवसर है। यह न केवल पेशेवरों को अंतरराष्ट्रीय मंच पर लाने का माध्यम बनेगा, बल्कि भारत-UAE संबंधों को भी नई ऊंचाइयों तक पहुंचाएगा। यदि आप एक योग्य और मेहनती पेशेवर हैं, तो यह वीजा आपके सपनों को नई उड़ान देने का सुनहरा अवसर हो सकता है। लेकिन ध्यान रखें कि UAE गोल्डन वीजा (UAE Golden Visa) अप्लाई करने से पहले फेक वेबसाइट या फ्रॉड करने वाले लोगों की मदद ना लें। Latest News in Hindi Today Hindi New Golden Visa #uaegoldenvisa #goldenvisaforindians #uaevisa2025 #indiansinuae #uaeimmigration #uaeopportunity

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app-based cab services

App-based Cab Services अब होगी महंगी: क्या है केंद्र सरकार की नई गाइडलाइन्स? 

आज के डिजिटल दौर में ओला (Ola), उबर (Uber) और रैपिडो (Rapido) जैसी ऐप-आधारित कैब सेवाएं (App-based Cab Services) आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुकी हैं। ऑफिस जाना हो, स्टेशन पहुंचना हो या किसी भी जगह जाने के लिए कैब चाहिए तो इन अलग-अलग कैब सेवाओं (Cab Service) की मदद से कहीं भी आना-जानाआसान बना दिया है। लेकिन अब इन सेवाओं का उपयोग आपकी जेब पर पहले से ज्यादा बोझ डाल सकता है। हाल ही में केंद्र सरकार (Central Government)  द्वारा जारी की गई नई गाइडलाइन्स से यह साफ होता है कि आने वाले दिनों में कैब और बाइक, टैक्सी की सवारी महंगी हो सकती है। App-based Cab Services: क्या हैं नई गाइडलाइन्स? सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) ने राज्यों को निर्देश दिया है कि वे आगामी तीन महीनों में नई कैब एग्रीगेटर पॉलिसी (Cab Aggregator Policy) को लागू करें। इसके तहत ऐप-आधारित टैक्सी कंपनियों (App-based Cab Services) को पीक ऑवर्स (Peak Hours) के दौरान बेस फेयर का दो गुना तक किराया वसूलने की अनुमति दी गई है। इसे सर्ज प्राइजिंग कहा जाता है। अब तक यह सीमा 1.5 थी यानी अगर किसी शहर में बेस फेयर 100 रुपये है, तो कंपनियां 150 रुपये तक चार्ज कर सकती थीं। लेकिन अब यह सीमा 200 रुपये तक बढ़ सकती है, जिससे उपभोक्ताओं को अधिक भुगतान करना पड़ सकता है। क्यों लिया गया यह फैसला? सरकार का कहना है कि यह फैसला कैब एग्रीगेटर्स को पीक ऑवर्स में ज्यादा ड्राइवर उपलब्ध कराने के लिए प्रोत्साहित करेगा, जिससे यात्रियों को लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा। साथ ही कंपनियों को अधिक लचीलापन (Flexibility) मिलेगा ताकि वे मांग के अनुसार सेवाएं दे सकें। बाइक टैक्सी सेवा को मिली मंजूरी नई गाइडलाइन में एक और अहम फैसला लिया गया है। अब नॉन-ट्रांसपोर्ट व्हीकल्स (Non-Transport Vehicle) यानी सफेद नंबर प्लेट वाली निजी बाइक्स को भी शेयर्ड मोबिलिटी सर्विस देने की अनुमति दे दी गई है। पहले केवल येलो नंबर प्लेट वाली कमर्शियल बाइक्स (Commercial bike) ही टैक्सी सेवा (Taxi Service) दे सकती थीं, जिसके लिए भारी-भरकम टैक्स और रजिस्ट्रेशन की जरूरत होती थी। इस फैसले के तहत कोई भी आम नागरिक, जिसके पास निजी बाइक है अब वे ओला (Ola), उबर (Uber) या रैपिडो (Rapido) जैसे प्लेटफॉर्म पर ट्रेवलर्स को लिफ्ट दे सकते हैं जिससे उनकी अर्निंग भी हो सकती है। इससे रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। राज्य सरकारें अब इन सेवाओं पर रोजाना, एक सप्ताह या फिर 15 दिनों पर फीस लगा सकती है, जिससे राजस्व भी बढ़ेगा। राइड कैंसिलेशन पर कड़ा जुर्माना नई गाइडलाइन में एक और बड़ा बदलाव यह है कि बिना वजह राइड कैंसिल (Ride Cancellation) करने पर ड्राइवर या यूज़र, दोनों पर 10% या ज्यादा से ज्यादा 100 रुपये तक का जुर्माना लगाया जाएगा। इससे यात्रियों और ड्राइवरों दोनों की जिम्मेदारी तय होगी और सेवा की गुणवत्ता में सुधार आएगा। ड्राइवरों के लिए इंश्योरेंस और ट्रेनिंग जरूरी ड्राइवरों की सुरक्षा और कल्याण को ध्यान में रखते हुए सरकार ने सभी कैब ड्राइवरों के लिए अनिवार्य कर दिया है कि: उन्हें 5 रुपये लाख का हेल्थ इंश्योरेंस (Health Insurance) और 10 लाख रुपये का टर्म लाइफ इंश्योरेंस (Term Life Insurance) मिलेगा। इसके साथ ही उन्हें हर साल ट्रेनिंग लेना भी अनिवार्य होगा, जिससे न सिर्फ ड्राइवरों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी, बल्कि सर्विस भी बेहतर होगी। क्या कहना है सर्विस प्रोवाइडर का?  मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार रैपिडो (Rapido) ने इन गाइडलाइन्स को विकसित भारत की दिशा में मील का पत्थर कहा है और दावा किया है कि इससे कनेक्टिविटी बेहतर होगी। वहीं उबर ने भी इस फैसले का स्वागत किया है और उम्मीद जताई है कि सभी राज्य समय पर इस गाइडलाइन को लागू करेंगे। इसे भी पढ़ें:- कौन सा रिचार्ज प्लान आपके लिए हो सकता है बेस्ट? क्या होगा आम जनता पर असर? इन गाइडलाइन्स का मिला-जुला असर देखा जा सकता है: सरकार द्वारा लागू की गई यह नई कैब पॉलिसी उपभोक्ताओं, ड्राइवरों और कंपनियों के लिए कई तरह के बदलाव लेकर आई है। हालांकि इससे तत्काल प्रभाव में यात्रा महंगी हो सकती है, लेकिन क्या यह नीतियां स्मार्ट मोबिलिटी, पर्यावरण संरक्षण और रोजगार सृजन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती हैं या नहीं ये तो आने वाले समय में पता चलेगा।  Latest News in Hindi Today Hindi Rapido #cabfarehike2025 #appbasedcabs #govtrules #cabservicesindia #ridenews #taxihike #centralgovt #cabguidelines

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Maharashtra Made Liquor - MML

महाराष्ट्र में एल्कोहॉल की कीमतों में 30% से 50% तक की होगी बढ़त

महाराष्ट्र सरकार ने हाल ही में एक बड़ा और प्रभावशाली कदम उठाते हुए राज्य की आबकारी नीति में महत्वपूर्ण बदलाव किया है। नए निर्णय के तहत शराब पर उत्पाद शुल्क (Excise duty) में भारी बढ़ोतरी की गई है, जिसका सीधा असर शराब की खुदरा कीमतों पर पड़ेगा। इस बदलाव का उद्देश्य सरकारी राजस्व बढ़ाना और स्थानीय शराब उद्योग को प्रोत्साहन देना है, लेकिन इसके साथ-साथ इससे उपभोक्ताओं और स्थानीय व्यापारियों के सामने नई चुनौतियाँ भी खड़ी हो सकती हैं। उत्पाद शुल्क में भारी बढ़ोतरी कैबिनेट के इस नए फैसले के अनुसार भारत में बनी अंग्रेजी शराब (Indian Made Foreign Liquor – IMFL) पर अब उत्पाद शुल्क को उसकी विनिर्माण लागत के तीन गुना से बढ़ाकर 4.5 गुना कर दिया गया है। इसका सबसे अधिक असर उन ब्रांड्स पर पड़ेगा जिनकी विनिर्माण लागत लगभग 260 रुपये प्रति बल्क लीटर है। साथ ही देशी शराब पर भी शुल्क बढ़ा दिया गया है, जो पहले 180 रुपये प्रति प्रूफ लीटर था, उसे अब 205 रुपये प्रति प्रूफ लीटर कर दिया गया है। इस बदलाव के कारण शराब की कीमतों में औसतन 30-50% तक की बढ़ोतरी हो सकती है। उदाहरण के लिए, देशी शराब की 180 ml बोतल अब 60-70 रुपये की बजाय 80 रुपये में बिकेगी। IMFL की सामान्य श्रेणी की बोतल 115-130 रुपये से बढ़कर 205 रुपये की हो सकती है, जबकि प्रीमियम विदेशी शराब की कीमत 210 रुपये से बढ़कर 360 रुपये तक पहुंचने की संभावना है। नई शराब श्रेणी – महाराष्ट्र निर्मित शराब (MML) सरकार ने एक नई श्रेणी की घोषणा भी की है, जिसे “महाराष्ट्र निर्मित शराब” (Maharashtra Made Liquor – MML) नाम दिया गया है। यह श्रेणी देशी और अंग्रेजी शराब के बीच की कड़ी के रूप में विकसित की जाएगी। इसका निर्माण केवल अनाज आधारित शराब से किया जाएगा, और केवल वे उत्पाद ही इसमें शामिल होंगे जो महाराष्ट्र के भीतर निर्मित और पंजीकृत हैं। इससे राज्य के स्थानीय उद्योगों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है, जबकि इसमें विदेशी या राष्ट्रीय ब्रांडों को शामिल नहीं किया जाएगा। सरकार का मानना है कि इससे एक नई बाजार श्रेणी विकसित होगी, जिससे उत्पादों की विविधता बढ़ेगी और उपभोक्ताओं के पास स्थानीय विकल्प उपलब्ध होंगे। सरकार की उम्मीदें और संभावित लाभ सरकार को इस नई नीति से सालाना आबकारी संग्रह में 14,000 करोड़ रुपये (Maharashtra Made Liquor – MML) की बढ़ोतरी की उम्मीद है। इसके अलावा, MML श्रेणी से अलग से 3,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त राजस्व जुटाए जाने की संभावना भी जताई गई है। एक अन्य लाभ स्थानीय किसानों को हो सकता है, क्योंकि MML श्रेणी के तहत अनाज आधारित शराब का उत्पादन बढ़ेगा। इससे कृषि उत्पादों की मांग बढ़ेगी और किसानों की आय में भी इज़ाफा हो सकता है। इसके अलावा राज्य में जिन 38 शराब निर्माण इकाइयों की गतिविधियाँ फिलहाल ठप हैं, उन्हें भी इस नई नीति के माध्यम से पुनर्जीवित किया जा सकता है। इसे भी पढ़ें:- कौन सा रिचार्ज प्लान आपके लिए हो सकता है बेस्ट? आलोचना और चुनौतियाँ हालांकि सरकार इस नीति को राजस्व और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए फायदेमंद मान रही है, लेकिन उद्योग विशेषज्ञ और कई व्यापारिक संगठनों ने इसकी आलोचना की है। उनका कहना है कि इतनी बड़ी दर से उत्पाद शुल्क बढ़ाने से शराब की तस्करी बढ़ सकती है, खासकर पड़ोसी राज्यों से, जहां शराब सस्ती है। इससे राज्य को राजस्व में अपेक्षित लाभ नहीं मिलेगा और स्थानीय व्यवसायों को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। इसके अतिरिक्त, उपभोक्ताओं पर भी इसका नकारात्मक असर पड़ेगा। मध्यम और निम्न आय वर्ग के लोग, जो पहले ही महंगाई से जूझ रहे हैं, उनके लिए शराब अब और अधिक महंगी हो जाएगी। इससे अवैध शराब की बिक्री या उत्पादन बढ़ने का खतरा भी है, जो जनस्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन सकता है। महाराष्ट्र सरकार की नई आबकारी नीति दूरगामी आर्थिक लक्ष्यों और राजस्व बढ़ाने की दिशा में एक साहसिक कदम है। हालांकि इससे राज्य को वित्तीय रूप से लाभ मिल सकता है और स्थानीय उद्योगों को नई ऊर्जा मिल सकती है, लेकिन इसके साथ जुड़ी चुनौतियों को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता। यह आवश्यक है कि सरकार इस नई नीति के क्रियान्वयन के दौरान तस्करी, अवैध व्यापार और उपभोक्ता हितों पर विशेष ध्यान दे। साथ ही, शराब के दुरुपयोग को रोकने के लिए सामाजिक जागरूकता और स्वास्थ्य सेवाओं को भी मजबूत करना होगा। केवल राजस्व बढ़ाना ही नहीं, बल्कि संतुलित और जिम्मेदार नीति ही इस बदलाव को सफल बना सकती है। Latest News in Hindi Today Hindi Maharashtra Made Liquor – MML #maharashtra #alcoholpricehike #liquornews #taxincrease #2025news #alcoholnews #maharashtranews

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इजरायल-ईरान और रूस-यूक्रेन तनाव के बीच शेयर बाजार में भारी गिरावट, सेंसेक्स 511 अंक लुढ़का

देश और दुनिया में बढ़ते तनावों के बीच सोमवार यानी 23 जून को भारतीय शेयर बाजार (Stock Market) में भारी गिरावट दर्ज की गई। खासकर इजरायल-ईरान (Israel-Iran) और रूस-यूक्रेन (Russia-Ukraine) के बीच जारी संघर्ष और इसके बीच अमेरिका द्वारा ईरान के परमाणु ठिकानों पर किए गए अचानक हमले ने वैश्विक बाजारों में अस्थिरता पैदा कर दी, जिसका सीधा असर भारतीय शेयर बाजार पर पड़ा। बाजार का हाल सोमवार को कारोबार के अंत में बीएसई सेंसेक्स (BSE Sensex) 511.38 अंकों की गिरावट के साथ 81,896.79 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं एनएसई निफ्टी 50 (NSE Nifty 50) 140.5 अंक गिरकर 24,971.90 पर बंद हुआ, जो कि 25,000 के अहम स्तर से नीचे है। यह गिरावट हाल के हफ्तों में भारतीय शेयर बाजार (Stock Market) में आई सबसे बड़ी गिरावटों में से एक मानी जा रही है। वैश्विक तनाव और कच्चे तेल के दाम बीते सप्ताह अमेरिका द्वारा ईरान के परमाणु प्रतिष्ठानों पर किए गए हवाई हमले ने वैश्विक स्तर पर तनाव को और बढ़ा दिया। इसके चलते कच्चे तेल की कीमतों में तेज़ उछाल देखा गया, जिससे ब्रेंट क्रूड की कीमत $90 प्रति बैरल के पार चली गई। भारत, जो अपनी ज़रूरत का 85% से अधिक कच्चा तेल आयात करता है, के लिए यह स्थिति बेहद चिंताजनक बन गई है। इससे न केवल व्यापार घाटा बढ़ सकता है बल्कि मुद्रास्फीति (महंगाई) भी ऊंचाई पकड़ सकती है। किन सेक्टरों पर पड़ा असर भारतीय शेयर बाजार (Stock Market) में सोमवार को आई गिरावट में अधिकांश सेक्टर्स लाल निशान में बंद हुए। सबसे ज्यादा नुकसान बैंकिंग, आईटी, ऑटो और रियल एस्टेट सेक्टर्स में देखा गया। निफ्टी बैंक इंडेक्स में 1% से अधिक की गिरावट दर्ज हुई, जिसमें HDFC बैंक, ICICI बैंक, और Axis बैंक जैसे दिग्गज शेयरों में गिरावट देखी गई। आईटी सेक्टर की बड़ी कंपनियां जैसे Infosys और TCS भी वैश्विक अनिश्चितता और क्लाइंट खर्चों में संभावित गिरावट के चलते प्रभावित हुईं। तेल और गैस सेक्टर में मिली-जुली प्रतिक्रिया रही — जहाँ ONGC जैसी अपस्ट्रीम कंपनियों को फायदा हुआ, वहीं रिफाइनरी और डिस्ट्रीब्यूशन कंपनियों पर दबाव बना रहा। महंगाई की चिंता कच्चे तेल के दामों में बढ़ोतरी ने एक बार फिर से आयातित महंगाई को लेकर चिंता बढ़ा दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर कच्चा तेल ऊंचे स्तर पर बना रहता है, तो इससे घरेलू ईंधन की कीमतें बढ़ सकती हैं, जिसका असर आम उपभोक्ताओं पर पड़ना तय है। इस समय भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) महंगाई को लेकर सतर्क रुख अपनाए हुए है। ऐसे में तेल की कीमतों में उछाल उसकी नीतियों के सामने नई चुनौती खड़ी कर सकता है। विशेषज्ञों की राय बाजार विश्लेषकों का मानना है कि सोमवार को शेयर बाजार (Stock Market) में जो गिरावट आई, वह मुख्यतः भावनात्मक प्रतिक्रिया थी। शेयर बाजार (Stock Market) से जुड़े जानकारों के अनुसार बाजार की गिरावट फिलहाल डर और अनिश्चितता के कारण है। अगर वैश्विक तनाव कम होता है, तो बाजार में तेज़ रिकवरी भी देखने को मिल सकती है। इसे भी पढ़ें:- कौन सा रिचार्ज प्लान आपके लिए हो सकता है बेस्ट? निवेशकों के लिए सलाह ऐसे अस्थिर माहौल में विशेषज्ञ निवेशकों को धैर्य और विवेक से काम लेने की सलाह दे रहे हैं। उनके अनुसार: ईरान, इजरायल और रूस-यूक्रेन के बीच बढ़ते संघर्षों ने वैश्विक बाज़ारों की स्थिरता को चुनौती दी है, और भारतीय शेयर बाजार भी इससे अछूता नहीं रहा। हालांकि देश की अर्थव्यवस्था और कंपनियों की मौलिक स्थिति मजबूत बनी हुई है, लेकिन निकट भविष्य में बाजार की चाल पूरी तरह से वैश्विक घटनाओं और कच्चे तेल की कीमतों पर निर्भर करेगी। Latest News in Hindi Today Hindi  RBI NSE Nifty 50 #sensex #stockmarket #marketcrash #israeliran #russiaukraine #globaltensions #sharemarketnews #nifty #bse #nse

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wiper blade replacement

Car wiper and windshield: कार की विंडशील्ड और वाइपर की मानसून में मेंटेनेंस गाइड

भारत में मानसून का मौसम एक तरफ जहां राहत और हरियाली लेकर आता है, वहीं यह कार चालकों के लिए कुछ गंभीर चुनौतियाँ भी पैदा करता है। तेज़ बारिश, फिसलन भरी सड़कें और लो विजिबिलिटी के कारण कार ड्राइव करने वालों के सामने कई परेशानियां खड़े कर देती है। बारिश के मौसम में सबसे अहम भूमिका निभाते हैं कार के वाइपर और विंडशील्ड (Car wiper and windshield) क्योंकि यही दो चीज़ें आपको बारिश के दौरान सामने साफ देखने में मदद करती है। अगर इनकी देखभाल समय रहते नहीं की गई, तो ये न केवल आपकी सुरक्षा के लिए खतरा बन सकते हैं बल्कि आपकी कार को भी नुकसान पहुंचा सकते हैं। भारत में मानसून का मौसम जून से सितंबर तक रहता है। खासतौर पर मुंबई, केरल, असम, उत्तराखंड और कोलकाता जैसे इलाकों में भारी बारिश होती है। ऐसे में ड्राइविंग के दौरान सामने ठीक से ना दिखना परेशानी पैदा करती है। इसीलिए विंडशील्ड का अच्छा  होना बेहद ज़रूरी है। भारतीय मौसम विभाग के अनुसार हर साल सड़कों पर बारिश की वजह से हजारों एक्सीडेंट दर्ज किए जाते हैं, जिनमें से अधिकतर सामने साफ ना देखपाना और गाड़ी की ख़राब स्थिति की वजह से होते हैं। Car wiper and windshield: कार की विंडशील्ड और वाइपर से जुड़ी जरूरी बातें  साफ़ और स्क्रैच-फ्री विंडशील्ड  (Car wiper and windshield) इसे भी पढ़ें:- कौन सा रिचार्ज प्लान आपके लिए हो सकता है बेस्ट? वाइपर की देखभाल  कुछ अतिरिक्त कार केयर टिप्स मानसून के लिए मानसून में कार की विंडशील्ड और वाइपर (Car wiper and windshield) का मेंटेनेंस कोई ऐच्छिक काम नहीं, बल्कि एक आवश्यक सुरक्षा कदम है। जैसे-जैसे भारतीय सड़कों पर बारिश तेज़ होती है, वैसे-वैसे इन दो भागों की भूमिका और भी अहम हो जाती है। साफ़ विंडशील्ड और सही वाइपर न केवल आपको एक बेहतर दृश्य देते हैं, बल्कि आपके और आपके परिवार की सुरक्षा भी सुनिश्चित करते हैं। Latest News in Hindi Today Hindi  Car wiper and windshield #MonsoonCarCare #WiperMaintenance #WindshieldCare #RainySeasonTips #SafeDriving

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Indian Railways changes waiting ticket system

Railway waiting ticket: रेलवे ने बदला वेटिंग टिकट सिस्टम, जानिए क्या है नया नियम 

भारतीय रेलवे (Indian Railway) ने यात्रियों की सुविधा और ट्रेनों में भीड़भाड़ को नियंत्रित करने के लिए एक बड़ा और महत्वपूर्ण कदम उठाया है। अब रेलवे ने यह तय किया है कि किसी भी ट्रेन में कुल सीटों या बर्थ की संख्या का अधिकतम 25% हिस्सा ही वेटिंग टिकट (Railway waiting ticket) के रूप में जारी किया जाएगा। यह नई व्यवस्था यात्रियों को बेहतर यात्रा अनुभव देने, टिकट कन्फर्मेशन को लेकर स्पष्टता लाने और ओवरबुकिंग जैसी समस्याओं को कम करने के मकसद से लागू की जा रही है। क्या है नया नियम? रेल मंत्रालय के अनुसार अब राजधानी, शताब्दी, दुरंतो, मेल/एक्सप्रेस और सुपरफास्ट ट्रेनों सहित सभी कैटेगरी की ट्रेनों में वेटिंग टिकटों की सीमा तय कर दी गई है। इसे  अगर आसान शब्दों में समझें तो किसी ट्रेन में कुल 1,000 बर्थ या सीटें हैं, तो केवल 250 यात्रियों को ही वेटिंग टिकट (Waiting ticket confirm) दिए जाएंगे। इससे पहले यात्रियों को आखिरी समय तक यह चिंता रहती थी कि उनका टिकट कन्फर्म होगा या नहीं। अब इस नियम से यात्रियों को पहले से अंदाजा लग सकेगा कि उनका टिकट कन्फर्म (Ticket confirm) होगा या नहीं। किन-किन श्रेणियों में होगा यह लागू? यह नियम सभी प्रमुख श्रेणियों— रेलवे का मानना है कि दिव्यांगजनों, वरिष्ठ नागरिकों और महिलाओं के लिए आरक्षित सीटों को भी ध्यान में रखते हुए यह व्यवस्था लागू की जा रही है। अभी तक क्या थी स्थिति? जनवरी 2013 के एक सर्कुलर के अनुसार रेलवे प्रत्येक श्रेणी में एक फिक्स संख्या तक वेटिंग टिकट जारी करता था। जैसे: इस कारण कई बार यात्रियों को आरक्षित टिकट (Reserved ticket) होने के बावजूद यात्रा में खासी असुविधा होती थी। आखिरी समय तक कन्फर्म टिकट (Confirm ticket) का इंतजार करना पड़ता था और कई बार वे जबरदस्ती आरक्षित कोचों में चढ़ जाते थे, जिससे अव्यवस्था फैलती थी। इसे भी पढ़ें:- कौन सा रिचार्ज प्लान आपके लिए हो सकता है बेस्ट? रेलवे का डेटा क्या कहता है? रेलवे अधिकारियों के मुताबिक चार्ट तैयार होने तक आमतौर पर 20 से 25 फीसदी वेटिंग टिकट कन्फर्म (Waiting ticket confirm) हो जाते हैं। इसी अनुभव के आधार पर रेलवे ने यह 25% वेटिंग लिमिट तय की है। इसका मकसद है कि यात्रियों को साफ जानकारी मिल सके और वो बिना कन्फर्म टिकट यात्रा करने से बचें। नए नियमों के संभावित फायदे क्या है यात्रियों की राय? रेलवे द्वारा जारी इस निर्णय को कई यात्रियों ने सराहा है। खासकर त्योहारी सीजन में टिकट मिलना बेहद मुश्किल होता है, ऐसे में वेटिंग टिकट (Waiting ticket) की संख्या सीमित करना यात्रियों को सही दिशा में योजना बनाने में मदद करेगा। वहीं कुछ यात्री यह भी मानते हैं कि अगर वेटिंग टिकट (Waiting ticket) की संख्या सीमित होगी तो ज्यादा लोग तत्काल या डायनेमिक प्राइसिंग की ओर जाएंगे, जिससे टिकट महंगे हो सकते हैं। भारतीय रेलवे (Indian Railway) द्वारा वेटिंग टिकट की सीमा को 25% तक सीमित करने का फैसला यात्री सुविधा की दिशा में एक बड़ा कदम है। यह न केवल टिकट कन्फर्मेशन प्रक्रिया को पारदर्शी बनाएगा, बल्कि ट्रेनों में अनावश्यक भीड़ और अव्यवस्था को भी रोकने में मदद करेगा। यह निर्णय उस दिशा में एक प्रयास है, जिसमें रेलवे सिर्फ अधिक से अधिक लोगों को यात्रा सुविधा देना नहीं बल्कि उन्हें गुणवत्तापूर्ण अनुभव भी सुनिश्चित करना चाहता है। रेलवे की यह नई नीति अगले कुछ महीनों में ट्रेनों में भीड़ और टिकट व्यवस्था में कैसा सुधार लाती है, यह देखना दिलचस्प होगा।  Latest News in Hindi Today Hindi Waiting ticket confirm #IndianRailways #WaitingTicketUpdate #TrainRules2025 #IRCTC #RailwayNews #TravelIndia

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FASTag Annual Pass

FASTag Annual Pass: जानिए फास्टैग एनुअल पास के क्या हैं फायदे?

देश में हाईवे यात्रा को सस्ती और आसान बनाने के लिए केंद्र सरकार ने एक नई पहल की है। केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी (Union Minister for Road Transport and Highways, Nitin Gadkari) ने ऐलान किया है कि अब कार, जीप और वैन जैसे निजी वाहनों के लिए एक खास फास्टैग एनुअल पास (FASTag Annual Pass) उपलब्ध कराया जाएगा। इस पास की कीमत 3000 रुपये होगी और यह सालभर के लिए वैध होगा, जिससे वाहन मालिक 7000 रुपये से भी अधिक की बचत कर सकेंगे। क्या है फास्टैग एनुअल पास? इस योजना के तहत वाहन चालक एक निर्धारित शुल्क चुकाकर एक वर्ष या 200 टोल ट्रिप तक की यात्रा कर सकते हैं। यह पास 15 अगस्त 2025 से लागू होगा और सिर्फ राष्ट्रीय राजमार्गों (National Highway) पर ही मान्य होगा। यानी यदि आप रोज़ाना हाईवे से आते-जाते हैं तो यह योजना आपके लिए बहुत ही उपयोगी है। सफर बनेगा सरल और किफायती नितिन गडकरी (Nitin Gadkari) ने बताया कि यह सुविधा लोगों की जेब पर बोझ कम डालेगी और टोल प्लाजा पर लगने वाली भीड़ व समय की बर्बादी को भी रोकेगी। फास्टैग एनुअल पास (FASTag Annual Pass) की मदद से टोल पर तेज और झंझट-मुक्त लेन-देन संभव होगा। कैसे होगी बचत? मान लीजिए किसी टोल पर शुल्क 50 रुपये है और आप सालभर में 200 बार वहां से गुजरते हैं, तो कुल खर्च 10,000 रुपये तक पहुंच सकता है। लेकिन यदि आपके पास यह एनुअल पास है तो आप सिर्फ 3000 रुपये में वही 200 ट्रिप कर सकते हैं। यानी लगभग 7000 रुपये की सीधी बचत। पास कहां से मिलेगा? सरकार जल्द ही राजमार्ग यात्रा ऐप (Highway Travel App), एनएचएआई (NHAI) की वेबसाइट और मंत्रालय की आधिकारिक साइट पर इस पास को खरीदने की सुविधा शुरू करेगी। जो लोग पहले से फास्टैग (Fastag) का उपयोग कर रहे हैं, उन्हें नया टैग लेने की जरूरत नहीं होगी। वे अपना मौजूदा टैग ही उपयोग में ला सकते हैं, यदि वह सभी मानदंडों को पूरा करता हो। यह पास जरूरी है या विकल्प? सरकार ने साफ किया है कि यह पास पूरी तरह से वैकल्पिक है। यदि कोई व्यक्ति नियमित फास्टैग भुगतान ही करना चाहता है, तो वह पहले की तरह टोल शुल्क अदा कर सकते हैं। यह सुविधा केवल उन लोगों के लिए है जो लंबी दूरी या बार-बार यात्रा करते हैं और पैसे की बचत करना चाहते हैं। इसे भी पढ़ें:- कौन सा रिचार्ज प्लान आपके लिए हो सकता है बेस्ट? वैधता समाप्त होने पर क्या? अगर किसी ने 200 ट्रिप पूरे कर लिए हैं, लेकिन वर्ष समाप्त नहीं हुआ है, तो वे चाहें तो दूसरा एनुअल पास खरीद सकते हैं। इस तरह साल में ज़्यादा ट्रिप करने वालों को भी इसका पूरा लाभ मिलेगा। FASTag एनुअल पास (FASTag Annual Pass) योजना सरकार की एक आधुनिक और दूरदर्शी पहल है, जिसका उद्देश्य देशभर में टोल भुगतान को आसान, तेज़ और किफायती बनाना है। इस योजना के तहत नॉन-कमर्शियल वाहनों जैसे कार, जीप और वैन के लिए केवल 3000 रुपये में सालभर या 200 ट्रिप (जो पहले पूरी हो) के लिए एक एनुअल पास उपलब्ध कराया जाएगा। इससे यात्रियों को हर बार टोल प्लाजा पर रुकने की जरूरत नहीं होगी, जिससे समय और ईंधन दोनों की बचत होगी। यह पास 15 अगस्त 2025 से प्रभावी होगा और सिर्फ राष्ट्रीय राजमार्गों (National Highways) पर मान्य होगा। इसके जरिए एक औसतन 50-100 रुपये की टोल यात्रा महज 15 रुपये में पूरी की जा सकेगी, जिससे सालाना लगभग 7000 रुपये तक की बचत संभव है। यह पहल खासतौर पर मेट्रो शहरों और टोल ज़ोन से गुज़रने वाले डेली कम्यूटर्स के लिए फायदेमंद साबित होगी। यह योजना डिजिटल इंडिया अभियान (Digital India Campaign) के तहत टोल सिस्टम (Toll System) को अधिक पारदर्शी, स्मार्ट और विवादरहित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो देश की सड़क यात्रा प्रणाली को भविष्य के लिए तैयार कर रहा है। Latest News in Hindi Today Hindi Highway Travel App FASTag Annual Pass #FASTagAnnualPass #FASTagBenefits #TollSavings #NHAIFASTag #HighwayTravel #DigitalIndia

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BSNL

कौन सा रिचार्ज प्लान आपके लिए हो सकता है बेस्ट?

भारत में टेलीकॉम बाजार में रिलायंस जियो, भारती एयरटेल और BSNL के बीच रिचार्ज प्लान्स को लेकर कॉम्पटीशन तेजी से चल रही है। हालांकि जियो और एयरटेल बड़े पैमाने पर आकर्षक डेटा और कॉलिंग पैक ग्राहकों के लिए पेश कर रहे हैं, लेकिन सरकारी कंपनी BSNL ने अपनी सस्ती और सुविधाजनक योजनाओं के ज़रिए अपनी अलग पहचान बनाई है। आइए जानते हैं BSNL, जियो और एयरटेल के अलग-अलग प्लान्स के बारे में।  BSNL, जियो और एयरटेल का आकर्षक डेटा और कॉलिंग पैक 1. BSNL ₹198—40 दिन अनलिमिटेड डेटा BSNL ने हाल ही में 198 रुपये का एक पैक लॉन्च किया है, जिसमें 40 दिनों के लिए 2GB/दिन डेटा और अनलिमिटेड कॉलिंग की सुविधा दी जा रही है। जबकि जियो या एयरटेल में 40 दिन की वैलिडिटी वाले कोई प्लान उपलब्ध नहीं है।  2. BSNL ₹107—50 दिनों के लिए 3GB डेटा और कॉलिंग BSNL का दूसरा आकर्षक ऑफर 107 रुपये का है। इस प्लान के अंतर्गत आपको 50 दिनों की वैधता के साथ 3GB डेटा और अनलिमिटेड कॉलिंग की सुविधा दी जाती है। यह किसी अन्य कंपनी की तुलना में बेहतर है, क्योंकि जियो और एयरटेल में 50 दिनों की वैधता तक के ऐसे बजट-फ्रेंडली प्लान उपलब्ध नहीं हैं। 3. जियो ₹579—56 दिन, 1.5GB/डेटा रिलायंस जियो 56 दिनों वाला सबसे किफायती लोकप्रिय प्लान देता है 579 रुपये में 1.5GB/दिन डेटा, 100 SMS/दिन और अनलिमिटेड कॉलिंग के साथ-साथ JioTV, JioCinema आदि ऐप्स का सब्सक्रिप्शन भी वैलिडिटी और बेनिफिट के मामले में यह प्लान कॉम्पिटिशन जरूर दे रहा है। 4. एयरटेल ₹579—56 दिन, 1.5GB/दिन और अनलिमिटेड कॉलिंग एयरटेल में भी 579 रुपये का प्लान उपलब्ध है। 56 दिनों के लिए 1.5GB/दिन डेटा, 100 SMS/दिन, अनलिमिटेड कॉलिंग और साथ में Apollo 24|7 और Wynk Music जैसे प्रीमियम बेनिफिट।  BSNL के अन्य प्लान  485 रुपये में 80 दिन के लिए 2GB/दिन डेटा की सुविधा मिलती है। BSNL 2025 ने चार हजार से अधिक 4G टावर लगाए हैं और 5G के लिए भी तैयारी शुरू हो चुकी है। क्या करें ग्राहक? कम खर्च में डेटा उपयोग करने वाले यूजर्स के लिए BSNL 107 या 198 रुपये का प्लान बेहतर साबित हो सकता है। डेटा, कॉलिंग और ऐप्स की जरूरत वाले यूजर्स के लिए जियो/एयरटेल के 579 रुपये का प्लान बेहतर ऑप्शन हो सकते हैं। खासकर उन लोगों के लिए जो वीडियो स्ट्रीमिंग, OTT और ऐप्स का उपयोग करते हैं। BSNL के 40 और 50‐दिनों की वैलिडिटी वाले 198 और 107 रुपये के प्लान निश्चित रूप से किफायती हैं। दूसरी ओर जियो और एयरटेल 56‑दिनों वाले प्लान्स के जरिए डेटा, कॉलिंग, SMS और डिजिटल ऐप्स का पूरा पैकेज मिल जाता है, जो अधिक मल्टीमीडिया उपयोगकर्ताओं के अनुकूल हैं। भारतीय टेलीकॉम बाजार में तेजी से बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच BSNL , जियो और एयरटेल जैसी कंपनियां अपने-अपने टारगेट यूजर्स के अनुसार रिचार्ज प्लान्स पेश कर रही हैं। जहां जियो और एयरटेल मल्टीमीडिया सुविधाओं, OTT सब्सक्रिप्शन और हाई-स्पीड डेटा के साथ डिजिटल युग के लिए तैयार प्लान्स लेकर आते हैं, वहीं BSNL सीमित बजट वाले यूजर्स के लिए कम कीमत में बेसिक डेटा और कॉलिंग सुविधाएं उपलब्ध कराता है। इसे भी पढ़ें:- अहमदाबाद से लंदन जा रही एयर इंडिया की फ्लाइट हुई क्रैश, पूर्व मुख्यमंत्री समेत 242 यात्री थे सवार BSNL का 198 रूपये वाला प्लान 40 दिन की वैधता के साथ अनलिमिटेड डेटा सुविधा देता है, जो कि बाजार में मौजूद अन्य कंपनियों के प्लान्स की तुलना में अनूठा है। इसके अलावा, ₹107 वाले 50-दिन के प्लान में भी अनलिमिटेड कॉलिंग और 3GB डेटा जैसी सुविधाएं काफी किफायती हैं। वहीं दूसरी तरफ जियो और एयरटेल के ₹579 प्लान 56 दिन की वैधता के साथ प्रतिदिन 1.5GB डेटा, 100 SMS और OTT जैसे अतिरिक्त फायदे भी देते हैं, जो डिजिटल सुविधा चाहने वालों के लिए फायदेमंद हैं। इसलिए अगर आप बेसिक कॉलिंग और सीमित डेटा उपयोगकर्ता हैं, तो BSNL के प्लान आपकी जरूरतों को कम कीमत में पूरी तरह संतुष्ट कर सकते हैं। वहीं, यदि आप OTT प्लेटफॉर्म, सोशल मीडिया, गेमिंग और वीडियो स्ट्रीमिंग के लिए अधिक डेटा और सुविधाएं चाहते हैं, तो एयरटेल और जियो जैसे विकल्प आपके लिए बेहतर होंगे। इस तरह कहा जा सकता है कि भारत के टेलीकॉम बाजार में सभी वर्गों के उपयोगकर्ताओं के लिए उपयुक्त प्लान्स मौजूद हैं लेकिन, लेकिन आप अपनी जरूरतों के अनुसार इनका फायदा उठा सकते हैं।  Latest News in Hindi Today Hindi BSNL #BestRechargePlan2025 #MobilePlansIndia #JioRecharge #AirtelOffers #BSNLPlans #UnlimitedData #PrepaidVsPostpaid

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₹100 ₹200 withdrawal from ATM

RBI Enables ₹100 & ₹200 Notes Withdrawal via ATMs: RBI के इस आदेश के बाद अब आसानी से एटीएम से निकलेंगे 100 और 200 रुपये के नोट

अक्सर जब हम एटीएम से कैश न‍िकालते हैं, तो अमूमन 500-500 रुपये के ही नोट न‍िकलते हैं। 500 रुपये के नोट न‍िकलने पर लोगों की आमतौर पर छोटे नोटों को लेकर श‍िकायत रहती थी। भारतीय रिजर्व बैंक ने आम लोगों की इन्हीं समस्याओं पर गौर करते हुए एटीएम से 100 और 200 रुपये नोटों की संख्या को बढ़ाने हेतु 30 सितंबर 2025 की गाइडलाइन दी (RBI Enables ₹100 & ₹200 Notes Withdrawal via ATMs) थी। इस गाइडलाइन जिसमें कहा गया था 30 सितंबर 2025 तक देश के 75 प्रतिशत ATM से 100 और 200 रुपये के नोट निकलने चाहिए। करने की जरूरत नहीं, आरबीआई के इस फैसले का अब धरातल पर असर दिखाई दे रहा है। जानकारी के मुताबिक देश के तकरीबन 73 प्रतिशत एटीएम के एक कैसेट से 100-200 रुपये के नोट निकलना शुरू हो गए हैं।  60% लोग अभी भी अपनी रोजमर्रा की जरूरत का खर्च नकद में ही (RBI Enables ₹100 & ₹200 Notes Withdrawal via ATMs) करते हैं भारत की सबसे बड़ी नकदी प्रबंधन कंपनी सीएमएस इन्फो सिस्टम्स के अनुसार, यह दिसंबर 2024 में 65 प्रतिशत से बढ़ोतरी को (RBI Enables ₹100 & ₹200 Notes Withdrawal via ATMs) दर्शाता है। बता दें कि सीएमएस इन्फो सिस्टम्स देश में 215,000 एटीएम में से 73,000 का संचालन करती है। यही नहीं इकोनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, सीएमएस इंफो सिस्टम्स के नकदी प्रबंधन के अध्यक्ष अनुष राघवन ने कहा 60% लोग अभी भी अपनी रोजमर्रा की जरूरत का खर्च नकद में ही करते हैं। खासकर छोटे शहरों और गांवों में 100 से 200 रुपये के नोट छोटे-मोटे लेनदेन के लिए बहुत जरूरी हैं। इन नोटों की उपलब्धता बढ़ने से लोगों को रोजमर्रा के कामों में आसानी होगी। खासतौर पर गांव और कस्बों में 100 और 200 रुपये के नोटों की उपलब्धता से दिन-प्रतिदिन की लेन-देन संबंधी जरूरतें सीधे तौर पर पूरी हो रही हैं।   बैंकों की तरफ से तय लक्ष्य का 73% हास‍िल कर लिया (RBI Enables ₹100 & ₹200 Notes Withdrawal via ATMs) गया है बता दें कि आरबीआई की तरफ से इस साल अप्रैल 2025 में बैंकों को निर्देश दिया गया था क‍ि वे अपने एटीएम में 100 या 200 के नोटों की उपलब्धता बढ़ाएं। गौरतलब हो कि अप्रैल 2025 के अंत में जारी किए गया सर्कुलर में, आरबीआई ने सभी बैंक्स को ऑर्डर दिया कि 30 सितंबर, 2025 तक कम से कम 75% एटीएम में कम से कम एक कैसेट से 100 या 200 रुपये के नोट्स डिस्पेंस होने (RBI Enables ₹100 & ₹200 Notes Withdrawal via ATMs) चाहिए। इस निर्देश का लक्ष्य आमजन तक छोटे नोट्स को बढ़ाना था। बड़ी बात यह कि डेडलाइन को पूरा होने में तीन महीने से ज्‍यादा का समय बचा है और बैंकों की तरफ से तय लक्ष्य का 73% हास‍िल कर लिया गया है। सीएमएस (CMS) इंफोस‍िस्‍टम्‍स के डाटा से जानकारी म‍िली है क‍ि बैंकों ने इस पर काफी तेजी से प्रगति की है। आरबीआई के मुताबिक 30 सितंबर 2025 तक 75% एटीएम में 100 और 200 रुपये के छोटे नोट होने चाह‍िए। इसके बाद 31 मार्च 2026 तक 90% एटीएम में छोटे नोट देने का लक्ष्य रखा गया है।  इसे भी पढ़ें:- अहमदाबाद से लंदन जा रही एयर इंडिया की फ्लाइट हुई क्रैश, पूर्व मुख्यमंत्री समेत 242 यात्री थे सवार तीन फ्री ट्रांजैक्शंस के बाद आपको एक्स्ट्रा पे करना पड़ सकता है खैर, इसके साथ आरबीआई से जुड़ी एक और खबर (RBI Enables ₹100 & ₹200 Notes Withdrawal via ATMs) है। यह खबर आपकी जेब हल्की कर सकती है। दरअसल, आरबीआई ने एटीएम इंटरचेंज फीस बढ़ा दी है। इसके बढ़ने से 1 मई, 2025 से कैश निकालना महंगा साबित हो सकता है। ये खासकर उन लोगों के लिए अधिक नुकसानदायक होगा जो हर महीने फ्री ट्रांजैक्शंस की लिमिट क्रॉस करते हैं। बता दें कि इंटरचेंज फीस वो चार्ज है जो एक बैंक दूसरे बैंक को एटीएम ट्रांजैक्शंस प्रोसेस करने के लिए पे करता है। और ये चार्ज यूजली यूजर पर डाल दिया जाता है। एक उदाहरण से यदि समझे तो, मान लो अगर आईसीआईसीआई बैंक का यूजर तीन फ्री मंथली ट्रांजैक्शंस के बाद बैंक ऑफ़ इंडिया के एटीएम से कैश निकालता है, तो आईसीआईसीआई  एक्स्ट्रा विड्रॉल के लिए फीस चार्ज कर सकता है। यही कि तीन फ्री ट्रांजैक्शंस के बाद आपको एक्स्ट्रा पे करना पड़ सकता है। Latest News in Hindi Today Hindi #RBI #ATMUpdate #200RupeeNote #100RupeeNote #CashWithdrawal #BankingNews #IndiaFinance

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National Savings Certificate

National Savings Certificate: निवेश का एक विकल्प NSC भी है

अगर आप निवेश करते समय जोखिम से बचना चाहते हैं और चाहते हैं कि आपका पैसा पूरी तरह सुरक्षित रहे, साथ ही अच्छा रिटर्न भी मिले, तो पोस्ट ऑफिस की नेशनल सेविंग्स सर्टिफिकेट (National Saving Certificate) स्कीम आपके लिए एक बेहतरीन विकल्प हो सकती है। यह एक गारंटीड रिटर्न वाली योजना है, जिसे भारत सरकार द्वारा समर्थित किया गया है, और इसमें टैक्स छूट (Tax Rebate) जैसी अतिरिक्त सुविधाएं भी शामिल हैं। क्या है NSC स्कीम? नेशनल सेविंग्स सर्टिफिकेट (National Savings Certificate) भारतीय डाक विभाग द्वारा चलाई जा रही एक छोटी बचत योजना है, जिसे खासकर उन निवेशकों के लिए डिज़ाइन किया गया है जो कम जोखिम और निश्चित लाभ को प्राथमिकता देते हैं। यह स्कीम एक 5 साल की फिक्स्ड टेन्योर सेविंग स्कीम है, जिसमें आप न्यूनतम ₹1,000 से निवेश की शुरुआत कर सकते हैं। कौन खोल सकता है NSC अकाउंट? भारत सरकार द्वारा तय मानकों के अनुसार, निम्नलिखित व्यक्ति NSC  (National Saving Certificate) अकाउंट खोल सकते हैं: निवेश की राशि और शुरुआत इस स्कीम की सबसे खास बात यह है कि निवेश की कोई अधिकतम सीमा नहीं है। आप ₹1,000 से शुरुआत करके, ₹100 के गुणज (multiples) में अपनी सुविधा अनुसार राशि जमा कर सकते हैं। यह उन लोगों के लिए भी उपयुक्त है जो छोटे-छोटे निवेश करके एक बड़ी बचत बनाना चाहते हैं। मिल रहा है 7.7% ब्याज वर्तमान में NSC पर 7.7% सालाना ब्याज दर मिल रही है, जो तुलनात्मक रूप से FD और अन्य बचत योजनाओं से बेहतर है। यह ब्याज तिमाही चक्रवृद्धि (compound) रूप में बढ़ता है, लेकिन भुगतान मैच्योरिटी पर ही होता है। इस स्कीम की सबसे खास बात यह है कि यह भारत सरकार द्वारा समर्थित है, यानी पूंजी पूरी तरह सुरक्षित रहती है। टैक्स बचत का भी फायदा NSC  (National Saving Certificate) में निवेश करने पर आयकर अधिनियम की धारा 80C के तहत ₹1.5 लाख तक की टैक्स छूट का लाभ लिया जा सकता है। यह टैक्सपेयर्स के लिए एक बहुत बड़ा लाभ है, क्योंकि उन्हें एक ही निवेश में दो फायदे मिल जाते हैं – सुरक्षित बचत और टैक्स में कटौती। NSC अकाउंट को बंद कब किया जा सकता है? सामान्य स्थिति में NSC (National Savings Certificate) को 5 वर्ष की अवधि पूरी होने से पहले बंद नहीं किया जा सकता। हालांकि, कुछ विशेष परिस्थितियों में अकाउंट को समय से पहले बंद किया जा सकता है: NSC अकाउंट (NSC Account) को केवल कुछ विशिष्ट परिस्थितियों में एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में ट्रांसफर किया जा सकता है: खाताधारक की मृत्यु होने पर नॉमिनी या कानूनी उत्तराधिकारी को संयुक्त खाते के एक धारक की मृत्यु पर अन्य धारक को कोर्ट के आदेश या नामित प्राधिकारी को गिरवी रखने की स्थिति में NSC बनाम अन्य निवेश विकल्प अगर आप NSC (National Saving Certificate) की तुलना बैंक एफडी (Bank FD), पीपीएफ (PPF) या सुकन्या समृद्धि योजना (Sukanya Samriddhi Yojana) जैसे विकल्पों से करें, तो NSC में कम अवधि, सरकार की गारंटी और टैक्स में छूट जैसी खूबियाँ इसे काफी प्रतिस्पर्धी बनाती हैं। विशेष रूप से वेतनभोगी वर्ग, वरिष्ठ नागरिक और टैक्स बचत चाहने वालों के लिए यह स्कीम एक भरोसेमंद विकल्प मानी जाती है। क्यों लिया जा सकता है NSC? अगर आपकी प्राथमिकता बिना परेशानी के निवेश, सरकार द्वारा गारंटी और टैक्स बचत है, तो NSC स्कीम आपके लिए बिल्कुल उपयुक्त है। यह स्कीम आपको छोटे निवेश से बड़ी बचत करने का अवसर देती है, वह भी बिना किसी जटिल प्रक्रिया के।  Latest News in Hindi Today Hindi National Savings Certificate #NSC #NationalSavingsCertificate #SecureInvestment #TaxSaving #SmallSavings #IndiaInvestment

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