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Drone Attack Odessa

Drone Attack Odessa: यूक्रेन के ओडेसा पर रूसी ड्रोन और मिसाइलों ने मचाया तांडव, कम पड़े फायर फाइटर्स

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) द्वारा सैन्य समर्थन रोकने के बाद से यूक्रेनी राष्ट्रपति जेलेंस्की कमजोर दिख रहे हैं। जेलेंस्की की इसी कमजोरी का फायदा उठाते हुए रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने यूक्रेन पर हमला बोल दिया है। बता दें कि यूक्रेन के ओडेसा पर रूसी ड्रोन और मिसाइलों के हमलों (Drone Attack Odessa) का कहर जारी है। बता दें कि पुतिन की नजर यूक्रेन की रणनीतिक पोर्ट सिटी ओडेसा पर है। योजनाबद्ध तरीके से ओडेसा पर पिछले 48 घंटों से रूसी सेना लगातार हमले कर रही है। रूसी ड्रोन और मिसाइलों की बौछार जारी।   रिपोर्ट्स के मुताबिक रुसी सेना अब तक 150 से अधिक ड्रोन हमले कर चुकी है। इन हमलों का मुख्य निशाना हथियारों के गोदाम और फैक्ट्रियों के साथ-साथ रिहायशी इमारतें हैं। अब तक 7 इमारतें और 2 स्कूल पूरी तरह नष्ट हो चुके हैं। इसके अलावा 3 हथियार डिपो और एक फैक्ट्री को भी तबाह कर दिया गया है। रूसी मिसाइलें इस कदर कहर बरपा रही हैं कि पूरे शहर में धमाकों की आवाज गूंज रही है। हमले की वजह से दक्षिणी यूक्रेन का ओडेसा शहर इस समय विनाशकारी हालात का सामना कर रहा है। जानकारी के मुताबिक इन हमलों में अब तक कई इमारतें मलबे में तब्दील हो चुकी हैं।  रूसी ड्रोन हमलों ने मचाई भीषण तबाही (Drone Attack Odessa)  बता दें कि ओडेसा के कई इलाकों में रूसी ड्रोन हमलों ने इस कदर भीषण तबाही मचाई  (Drone Attack Odessa) है कि कई रिहायशी इमारतें आग की लपटों में चुकी हैं। इस मिसाइलों के कहर का अंदाजा आप इसी से लगा सकते हैं कि हमले के बाद लगी आग की लपटों पर काबू पाने के लिए फायर फाइटर्स की संख्या कम पड़ रही है। प्राप्त जानकारी के मुताबिक दिन-रात फायर ब्रिगेड की गाड़ियां और जवान आग बुझाने में जुटे हुए हैं। इसके आलावा ओडेसा के पावर प्लांट और ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर भी रूस के ताबड़तोड़ हमले जारी हैं। इन हमलों का असर यह कि शहर के बड़े हिस्से की बिजली आपूर्ति ठप हो गई है और कई क्षेत्रों में ब्लैकआउट की स्थिति बन गई है। रूस ने अब तक लगभग 6 बिजली संयंत्रों को तबाह कर दिया है। इस वजह से तकरीबन 7000 घरों में बत्ती गुल हो गई है। रूसी हमलों की वजह से यूक्रेनी नागरिकों को अँधेरे में रहना पड़ रहा है।  इसे भी पढ़ें:-भारत समेत इन देशों के खिलाफ डोनाल्ड ट्रंप का सख्ती की घोषणा,  2 अप्रैल से होगा एक्शन रूस की टेढ़ी नजर है ओडेसा  (Drone Attack Odessa) पर  कहने की जरूरत नहीं कि पुतिन किसी भी हाल में इस शहर पर कब्जा करना चाहते हैं। कब्जा इसलिए कि ओडेसा पर नियंत्रण मिलते ही रूस दक्षिणी यूरोप के नजदीक पहुंच जाएगा। कहा तो यह भी जा रहा है कि इसके बाद पुतिन अपने यूरोप प्लान को सक्रिय कर सकते हैं। यूक्रेन के लुहांस्क से लेकर मेलितोपोल तक के क्षेत्र पर रूस पहले से ही कब्ज कर रखा है। और अब रूस की टेढ़ी नजर ओडेसा  (Drone Attack Odessa) पर है। गौर करने वाली बात यह कि ओडेसा, यूक्रेन का एकमात्र बंदरगाह शहर है जो कि काला सागर से जुड़ा है। अगर रूस इस पर कब्जा कर लेता है, तो यूक्रेन पूरी तरह से समुद्री मार्ग से कट जाएगा। दरअसल, ओडेसा को दक्षिणी यूरोप का प्रवेश द्वार माना जाता है। इसका एक हिस्सा मोलदोवा से सटा हुआ है और दूसरा हिस्सा ट्रांसनिस्ट्रिया से लगा हुआ है। महत्वपूर्ण बात यह कि यहाँ रूस समर्थकों की सरकार है। ऐसे में मोलदोवा रूसी सेना से दोनों ओर से घिर सकता है। ऐसी स्थिति में, पुतिन को इन दोनों यूरोपीय देशों पर दबाव बनाने और आक्रमण करने का मौका मिल जाएगा और फिर सीमाओं के रास्ते रूसी सेना का इन देशों में प्रवेश करना काफी आसान हो सकता है। यही नहीं, लुहांस्क से लेकर ओडेसा तक रूस का एक सुसंगठित क्षेत्र बन जाएगा। जो कि आगे चलकर एक तरह से बफर जोन की तरह काम करेगा। ओडेसा पर कब्जा करते ही पुतिन की यूरोप संबंधी योजनाएं सक्रिय हो जाएंगी। कहने की जरूरत नहीं, अमेरिकी सैन्य समर्थन कम होने के बाद से यूक्रेन में हालात बेहद गंभीर और नाजुक बने हुए हैं।  Latest News in Hindi Today Hindi news Drone Attack Odessa Donald Trump #RussiaUkraineWar #OdessaAttack #MissileStrike #UkraineUnderAttack #DroneStrike #UkraineNews #OdessaCrisis

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Bangladesh's interim leader

Muhammad Yunus statement on India: नरम पड़े मोहम्मद यूनुस के तेवर, भारत को लेकर अचानक दिया बयान, कही यह बड़ी बात

बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस (Muhammad Yunus) के सुर (Muhammad Yunus statement on India) भारत को लेकर बदलते जा रहे हैं। यूनुस भारत के खिलाफ लगातार हमलावर रहे हैं, लेकिन भारत का शिकंजा कसने पर अब उनके बोल बदल गए हैं। प्राप्त जानकारी के मुताबिक यूनुस ने एक इंटरव्यू में कहा कि “बांग्लादेश के पास भारत से अच्छे संबंध रखने के अलावा कोई और अन्य विकल्प नहीं है। ऐसा इसलिए, क्योंकि दोनों देश एक-दूसरे पर निर्भर हैं।” हालांकि इस बीच उन्होंने यह भी कहा कि “कुछ दुष्प्रचार ने दोनों देशों के बीच कुछ संघर्ष को जरूर पैदा कर दिया है।” बता दें कि बीबीसी बांग्ला को दिए एक इंटरव्यू में मोहम्मद यूनुस ने उन दुष्प्रचार के स्रोतों का नाम नहीं लिया। अपनी बात रखते हुए उन्होंने आगे कहा कि “बांग्लादेश भारत के साथ अपने संबंध में सुधार करने हेतु गलतफहमी को दूर करने की कोशिश कर रहा है। दरअसल, यूनुस का यह बयान 3-4 अप्रैल को थाईलैंड में बिम्सटेक शिखर सम्मेलन के आयोजन के एक महीने पहले आया है। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस के बीच एक द्विपक्षीय बैठक आयोजित हो सकती है।  मोहम्मद यूनुस ने बताया भारत-बांग्लादेश के रिश्तों को बहुत अच्छा (Muhammad Yunus statement on India)  इंटरव्यू के दौरान गौर करने वाली अहम बात यह कि मोहम्मद यूनुस ने भारत-बांग्लादेश के रिश्तों को बहुत अच्छा (Muhammad Yunus statement on India) बताया। उन्होंने कहा कि “दोनों देशों के रिश्तों में कोई कड़वाहट नहीं आई है। हमारे संबंध हमेशा अच्छे रहेंगे। वे अभी भी अच्छे हैं और भविष्य में भी अच्छे ही रहेंगे। इस बीच उन्होंने जोर देते हुए कहा कि बांग्लादेश और भारत के बीच अच्छे संबंध रखने के अलावा कोई और विकल्प नहीं है।” अपनी बात रखते हुए उन्होंने आगे कहा कि “हमारे संबंध बहुत करीबी हैं। हम एक-दूसरे पर बहुत निर्भर हैं। दोनों देश ऐतिहासिक, राजनीतिक और आर्थिक दृष्टिकोण से इतने करीब हैं कि हम कभी अलग-थलग नहीं रह सकते।” इस बीच मोहम्मद यूनुस ने यह भी कहा कि हालांकि, दोनों देशों के बीच कुछ संघर्ष हुए हैं, जो काफी हद तक दुष्प्रचार के कारण हुए हैं। अब दूसरे लोग यह तय करें कि दुष्प्रचार करने वाले कौन हैं। लेकिन इस दुष्प्रचार के नतीजा यह हुआ है कि दोनों देशों के बीच गलतफहमी पैदा हो गई। हम उन सभी गलतफहमियों को दूर करने की कोशिश कर रहे हैं।  इसे भी पढ़ें :– अमेरिका ने यूक्रेन को दिया बड़ा झटका, सैन्य सहायता पर लगाई गई रोक जब से भारत सरकार ने शिकंजा कसना शुरू किया है तब से सुर बदले-बदले (Muhammad Yunus statement on India) से नजर आ रहे हैं दरअसल, पिछले साल बांग्लादेश में हुए आरक्षण विरोधी उग्र छात्र आंदोलन के चलते बांग्लादेश की तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना को देश छोड़कर भारत में शरण लेनी पड़ी थी। उसके बाद से मोहम्मद यूनुस की अगुवाई में अंतरिम सरकार का गठन होता है। इसके बाद से मुट्ठीभर कट्टरपंथियों द्वारा बांग्लादेश में रह रहे अल्संख्यक के न सिर्फ घरों को बल्कि मंदिरों को जानबूझकर निशाना बनाया जाने लगा। इस बीच आगजनी और लूटमार की कई घटनाएं आये दिन घट रही हैं लेकिन मोहम्मद यूनुस की सरकार है कान में तेल डाले बैठी है। इस बीच जब से भारत सरकार ने शिकंजा कसना शुरू किया है तब से मोहम्मद यूनुस के सुर बदले-बदले (Muhammad Yunus statement on India) से नजर आ रहे हैं। यह कह लें कि भारत को लेकर उनकी अकड़ ढीली होती देखी है।  Latest News in Hindi Today Hindi news Muhammad Yunus statement on India #MuhammadYunus #BangladeshIndiaRelations #FairDiplomacy#NobelLaureate #SheikhHasina #SouthAsiaPolitics #YunusStatement #BangladeshInterimGovt #EquitableRelations #IndiaBangladesh

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USUkraineRelations

Trump suspends Ukraine aid: अमेरिका ने यूक्रेन को दिया बड़ा झटका, सैन्य सहायता पर लगाई गई रोक

पिछले 3 वर्षों से भी अधिक समय से रूस और यूक्रेन के बीच खूनी जंग जारी है। अमेरिका के राष्ट्रपति पद की शपथ लेने के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप हर हाल में जल्द से जल्द जंग को रुकवाना चाहते हैं। यही नहीं, वो इस हेतु हर संभव प्रयास भी कर रहे हैं। इसी सिलसिले में हाल ही में डोनाल्ड ट्रंप और यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की के बीच बैठक भी हुई थी। उम्मीद थी कि इस बैठक में कोई न कोई हल निकाल लिया जायेगा। हल तो निकलना दूर की बात दोनों में आपस में ही तू-तू, मैं-मैं हो गई। हैरत यह कि इस बैठक में राष्ट्रपति अमेरिकी डोनाल्ड ट्रंप, उपराष्ट्रपति जेडी वांस और वोलोडिमिर जेलेंस्की के बीच बुरी तरह से बहस हो गई थी। हालांकि विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने एक अमेरिकी चैनल को दिए एकसाक्षात्कार में ट्रंप के साथ अभद्र व्यवहार करने के लिए ज़ेलेंस्की से माफ़ी मांगने को कहा था। लेकिन उन्होंने से साफ इंकार कर दिया था। कहने की जरूरत नहीं, इस बहस के बाद डोनाल्ड ट्रंप बुरी तरह झल्लाए हुए हैं। अपनी इसी झल्लाहट के ही चलते यूक्रेन को सबक सिखाने के लिए उन्होंने यूक्रेन को बड़ा झटका दिया है। जानकारी के मुताबिक, अमेरिका ने यूक्रेन को दी जाने वाली सैन्य सहायता पर रोक (Trump suspends Ukraine aid) लगा दी है। दरअसल, एपी द्वारा प्राप्त जानकारी के मुताबिक अमेरिकी राष्ट्रपति ने यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की पर रूस के साथ शांति वार्ता में शामिल होने के लिए दबाव बनाने के उद्देश्य से ओवल ऑफ़िस की एक बुरी बैठक के बाद यूक्रेन को अमेरिकी सहायता पर रोक लगाने का निर्देश दिया है।” ज़ेलेंस्की के साथ हुई बहस के बाद अमेरिकी ने यूक्रेन को दी जाने वाली सैन्य सहायता रोकने (Trump suspends Ukraine aid) का दिया आदेश  अमेरिकी और यूक्रेन के तनाव के बीच सोमवार को व्हाइट हाउस के एक अधिकारी ने सीएनएन को बताया कि” राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को ओवल ऑफिस में यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की के साथ हुई बहस के बाद यूक्रेन को दी जाने वाली सैन्य सहायता रोकने का आदेश दिया है। व्हाइट हाउस के अधिकारी ने कहा कि “राष्ट्रपति ने साफ किया कि उनका ध्यान शांति पर है। अपने भागीदारों से भी उस लक्ष्य के प्रति प्रतिबद्ध होने की आवश्यकता है। हम यह सुनिश्चित करने के लिए अपनी सहायता रोक (Trump suspends Ukraine aid) रहे हैं। और इसकी समीक्षा कर रहे हैं कि यह पीस डील में मदद करेगा।” एक अन्य अधिकारी ने बताया कि “यह रोक उन सभी सैन्य उपकरणों पर लागू होगी जो अभी यूक्रेन को दिए नहीं गए हैं। जो हथियार यूक्रेन को अमेरिका की ओर से पहले मिल चुके हैं, अभी भी वह उनका इस्तेमाल कर सकता है।”  इसे भी पढ़ें :– भारत और यूरोपियन यूनियन के बीच मुक्त व्यापार समझौते पर बनी बात, साल के अंत तक होगा अमल यूक्रेन की सैन्य मदद रोकना (Trump suspends Ukraine aid) ट्रंप की यूक्रेन पर दबाव बनाने की रणनीति का है हिस्सा  बता दें कि ब्लूमबर्ग न्यूज और फॉक्स न्यूज ने सोमवार को ट्रंप प्रशासन के अधिकारियों के हवाले से बताया कि ट्रंप तब तक सभी सहायता रोक देंगे जब तक कि कीव शांति के लिए बात करने के लिए प्रतिबद्धता न दिखाए। ट्रंप ने ये आदेश अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट में ज़ेलेंस्की पर आरोप लगाने के कुछ घंटों बाद दिया है। ट्रंप ने आरोप लगाया था कि जेलेंस्की “जब तक अमेरिका का समर्थन उनके साथ है, वो शांति नहीं चाहते हैं।” सीएनएन के मुताबिक यूक्रेन की सैन्य मदद रोकना (Trump suspends Ukraine aid) ट्रंप की यूक्रेन पर दबाव बनाने की रणनीति का हिस्सा है। ट्रंप को लगता है कि सहायता रोकने के बाद जेलेंस्की फिर समझौता करने के लिए तैयार होंगे। एक तरफ अमेरिकी राष्ट्रपति ने यूक्रेन को दी जाने वाली मदद पर रोक लगा दी है तो वहीं दूसरी तरफ इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के वाशिंगटन दौरे के बाद अमेरिका ने इजराइल को दी जाने वाली मदद बढ़ा दी है। यही नहीं, बाइडेन प्रशासन में हथियारों की सप्लाई पर लगाए आर्जी प्रतिबंध को भी हटा दिया है। अमेरिका की इस पहल से गदगद नेतन्याहू ने ट्रंप का धन्यवाद किया है और अमेरिका को अपने सच्चा साथी बताया है।  Latest News in Hindi Today Hindi news Trump suspends Ukraine aid #TrumpUkraineAidPause #USMilitaryAidSuspension #ZelenskyPeaceTalks #USUkraineRelations #TrumpForeignPolicy #UkraineRussiaConflict #MilitaryAidReview#PeaceNegotiations #USForeignAssistance #GeopoliticalTensions

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US-Ukraine Tensions Rise

अमेरिका और यूक्रेन की रिश्तों में आ गई है दरार, क्या होगा इसका वैश्विक असर?

हाल ही में अमेरिका के व्हाइट हाउस में यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की (Ukraine President Volodymyr Zelensky) और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (US President Donald Trump) के बीच हुई तीखी बहस ने विश्व भर में राजनीति हलचल मचा दी है। रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच जेलेंस्की की आक्रामक रणनीति पर सवाल उठने लगे कि क्या इससे अमेरिकी मदद प्रभावित हो सकती है। हालांकि, अब ऐसा लग रहा है कि जेलेंस्की अपने रुख में नरमी लाने के संकेत दे रहे हैं। अमेरिका से जेलेंस्की की मांगें मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार वोलोडिमिर जेलेंस्की (Volodymyr Zelensky) ने अमेरिका से कुछ ठोस गारंटी की मांग की है। उन्होंने कहा कि अगर अमेरिका उनकी शर्तों को मान लेता है, तो वे राष्ट्रपति पद छोड़ने और मिनरल डील करने के लिए तैयार हैं। उनकी प्रमुख मांगों में यूक्रेन को नाटो की सदस्यता और सुरक्षा की गारंटी शामिल है। जेलेंस्की ने स्पष्ट किया कि वह रूस के साथ किसी भी शांति समझौते के तहत अपनी जमीन छोड़ने के लिए तैयार नहीं हैं। ट्रंप से दोबारा मुलाकात को लेकर जेलेंस्की का रुख वोलोडिमिर जेलेंस्की (Volodymyr Zelensky) ने संकेत दिए कि अगर अमेरिकी राष्ट्रपति उन्हें गंभीर चर्चा के लिए बुलाते हैं, तो वे फिर से बातचीत के लिए तैयार हैं। ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के अनुसार जेलेंस्की ने कहा कि वह वास्तविक समस्याओं का समाधान खोजने और निर्णायक निर्णय लेने के लिए हर तरह के संवाद के लिए तैयार हैं। व्हाइट हाउस (White House) में हुई थी बहस  पिछले शुक्रवार को व्हाइट हाउस के ओवल ऑफिस में दोनों नेताओं के बीच बहस काफी बढ़ गई थी। ट्रंप ने आरोप लगाया कि जेलेंस्की शांति वार्ता में रुचि नहीं रखते और अगर कोई समझौता नहीं होता, तो अमेरिका इस युद्ध से खुद को अलग कर लेगा। जवाब में जेलेंस्की ने कहा कि यूक्रेन बिना सुरक्षा गारंटी के युद्धविराम को स्वीकार नहीं कर सकता। मिनरल डील और आपसी तनाव वोलोडिमिर जेलेंस्की (Volodymyr Zelensky) की अमेरिका यात्रा का एक मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच खनिज संपदा को लेकर समझौता करना था। हालांकि, वार्ता में तनाव इस कदर बढ़ गया कि रिश्तों में खटास आ गई और अंततः जेलेंस्की को व्हाइट हाउस (White House) छोड़ना पड़ा। बातचीत के दौरान, जब अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा कि युद्ध का अंत कूटनीति से संभव है, तो जेलेंस्की ने तुरंत जवाब दिया और पूछा कि वे किस प्रकार की कूटनीति की बात कर रहे हैं। ट्रंप का कड़ा रुख डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने जेलेंस्की को स्पष्ट शब्दों में कहा कि यूक्रेन गंभीर संकट में है और अकेले यह युद्ध नहीं जीत सकता। उन्होंने कहा कि अमेरिका ने यूक्रेन को 350 अरब डॉलर की सहायता दी है, साथ ही सैन्य उपकरण भी प्रदान किए हैं। ट्रंप ने यह भी जोड़ा कि अगर अमेरिका की सैन्य सहायता न होती, तो यह युद्ध दो हफ्तों में खत्म हो सकता था। डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने यह भी आरोप लगाया कि जेलेंस्की पुतिन से नफरत करते हैं, लेकिन इसके बावजूद किसी ठोस रणनीति के बिना डील की उम्मीद कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि जेलेंस्की चाहते हैं कि अमेरिका सख्ती दिखाए, तो वे दुनिया में किसी भी व्यक्ति से ज्यादा सख्त हो सकते हैं, लेकिन इस तरह से कोई समझौता नहीं हो सकता। इसे भी पढ़ें :– भारत और यूरोपियन यूनियन के बीच मुक्त व्यापार समझौते पर बनी बात, साल के अंत तक होगा अमल वैश्विक असर इस बहस के बाद वैश्विक नेताओं की प्रतिक्रियाएँ सामने आईं। यूरोपीय देशों ने यूक्रेन के प्रति समर्थन जताया, जबकि कुछ अमेरिकी सांसदों ने डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) की नीतियों पर सवाल उठाए। इस घटनाक्रम के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि अमेरिका और यूक्रेन (America and Ukraine) के रिश्तों में तनाव बढ़ सकता है, खासकर अगर यूक्रेन को अपेक्षित सहायता न मिले। व्हाइट हाउस में ट्रंप और जेलेंस्की के बीच हुई तीखी बहस ने दोनों देशों के संबंधों पर गहरा प्रभाव डाला है। जेलेंस्की अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं, जबकि ट्रंप अमेरिका की स्थिति स्पष्ट कर चुके हैं। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि दोनों देश अपने संबंधों को किस दिशा में ले जाते हैं और रूस-यूक्रेन युद्ध का भविष्य क्या होता है। Latest News in Hindi Today Hindi news Ukraine President Volodymyr Zelensky #USUkraineRelations #GlobalTensions #UkraineCrisis #Geopolitics #RussiaUkraineWar #BidenZelensky #USForeignPolicy #NATO #WorldPolitics #DiplomaticCrisis

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US-Canada tension

US-Canada tensions : अमेरिका की धमकी से डरे जस्टिन ट्रूडो मदद के लिए पहुंचे किंग चार्ल्स के पास,करेंगे ट्रंप की शिकायत

कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो (Justin Trudeau) यूरोपीय संघ (ईयू) की बैठक में हिस्सा लेने के लिए इस समय ब्रिटेन यात्रा पर हैं। इस दौरान ट्रूडो सोमवार को ब्रिटेन के किंग चार्ल्स तृतीय (King Charles III) से भी मुलाकात करेंगे। कहा जा रहा है कि इस मुलाकात में जस्टिन ट्रूडो कनाडा और अमेरिका के बीच बढ़ते विवाद की जानकारी देते हुए किंग चार्ल्स से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) की शिकायत भी कर सकते हैं। ब्रिटिश मीडिया दावा कर रही है कि इस बैठक में जस्टिन ट्रूडो, ट्रंप के उस धमकी का मुद्दा उठाएंगे, जिसमें ट्रंप ने कनाडा को अमेरिका में मिलाने को कहा था। ब्रिटिश मीडिया के मुताबिक, प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो (Justin Trudeau) और किंग चार्ल्स तृतीय (King Charles III) की मुलाकात सोमवार को होने वाली है। इस दौरान वह किंग से डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) की शिकायत करते हुए उनकी उस धमकी पर चर्चा करेंगे, जिसमें ट्रंप ने कनाडा को अमेरिका का 51वां राज्य बनाने को कहा था। हालांकि, किंग चार्ल्स अभी तक ट्रंप की धमकियों पर चुप्प ही नजर आए हैं, ऐसे में कम ही उम्मीद है कि वो जस्टिन ट्रूडो का समर्थन करेंगे।  बैठक से पहले जस्टिन ट्रूडो ने भी दी जानकारी  किंग चार्ल्स तृतीय के साथ बैठक से पहले प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो (Justin Trudeau) ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि वह किंग के सामने कनाडाई लोगों से जुड़े महत्वपूर्ण मद्दों को उठाने वाले हैं। कनाडा के लोगों के लिए राष्ट्र की संप्रभुता और स्वतंत्रता से अधिक महत्वपूर्ण इस समय कुछ नहीं है। आज हमारे राष्ट्र को तोड़ने की कोशिश हो रही है, हमें धमकी दी जा रही। इसलिए हम कनाडा के राष्ट्र प्रमुख से इस संबंध में चर्चा करेंगे। हम अपने लिए सुरक्षा चाहते हैं।    इसे भी पढ़ें :– भारत और यूरोपियन यूनियन के बीच मुक्त व्यापार समझौते पर बनी बात, साल के अंत तक होगा अमल कनाडा के भी राष्ट्र प्रमुख हैं किंग चार्ल्स बता दें कि ब्रिटने के किंग चार्ल्स तृतीय (King Charles III) कनाडा के भी राष्ट्र प्रमुख हैं। क्योंकि कनाडा भी कई दूसरे देशों की तरह पूर्व उपनिवेशों के ब्रिटिश राष्ट्रमंडल का सदस्य है। कनाडा अभी इस राजशाही को स्वीकार्य करता है। वहां पर कभी भी इसका विरोध नहीं हुआ है। हालांकि, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) द्वारा कनाडा को अमेरिकी में मिला लेने की लगातार धमकी देने के बाद भी किंग चार्ल्स ने चुप्पी साध रखी है। जिसका कुछ लोग विरोध भी कर रहे हैं। अब देखना यह होगा कि क्या जस्टिन ट्रूडो से मुलाकात के बाद किंग चार्ल्स अमेरिका के विरोध में कोई बयान देते हैं या फिर वो पहले की तरह ही मौन धारण किए रहते हैं।    Latest News in Hindi Today Hindi news Justin Trudeau King Charles III #JustinTrudeau #KingCharlesIII #DonaldTrump #USCanadaTensions #TrudeauVsTrump #RoyalIntervention #Geopolitics #CanadaUK #PoliticalDrama #GlobalRelations

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food shortage in Pakistan

Pakistan food crisis: पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान में खाने के लाले, इफ्तारी का भी नहीं हो पा रहा है जुगाड़

1 मार्च से इस्लाम धर्म के पवित्र महीने रमजान की शुरुआत हो चुकी है। ऐसे में दुनिया भर करोड़ों लोग रोजा रखते हैं और शाम को इफ्तारी करते हैं। मुस्लिम देशों में बड़ी धूमधाम के साथ इफ्तारी मनाई जाती है। बता दें कि इफ्तारी में कई तरह के व्यंजन का समावेश होता है। लेकिन आप जानते हैं पड़ोसी मूल पाकिस्तान में लोगों की हालत इस कदर खस्ता (Pakistan food crisis) है कि वो इफ्तारी भी नहीं कर पा रहे हैं। दरअसल, पाकिस्तान में महंगाई अपने चरम पर है। पाकिस्तान में इफ्तारी के लिए जरूरी सामान की कीमतें आसमान छू रही है। आपको जानकार हैरानी होगी कि पाकिस्तान में सिर्फ फलों की कीमत ही नहीं बल्कि सब्जियों की कीमतें भी आसमान छू रही हैं। रमजान से पहले ही राशन की दुकानों में आटा, चावल, दाल और बेसन जैसे बुनियादी चीजों की कमी हो गई है। कारण यही जो पाकिस्तान के लिए इफ्तारी बड़ी महंगी पड़ रही है। वैसे भी त्योहारों के मौके पर देश भर महंगाई अपने आप बढ़ जाती है।  पिछले 6 महीने से स्थिति हो गई है बेहद खराब (Pakistan food crisis)  दुकानदारों के अनुसार पिछले 6 महीने से स्थिति बेहद खराब (Pakistan food crisis) हो गई है और ग्राहकों की लंबी कतारें लगी हैं। महंगाई की मार से बचने ग्राहक स्थानीय बड़े बाजारों की ओर रुख कर रहे हैं और अधिक कीमतों वाले सामान खरीदने के लिए मजबूर हो रहे हैं। अभी भी लोगों को कोई राहत की उम्मीद नहीं दिखाई दे रही है, क्योंकि सरकार ने कुछ बड़ा कदम नहीं उठाया है। इस बढ़ती महंगाई के खिलाफ लोगों के मन में रोष है। लोगों का कहना है कि सरकार हाथ पर हाथ धरे बैठी है। उसे लोगों की कोई परवाह नहीं है। आसमान छूती महंगाई के इस दौर में रोजेदार भला इफ्तारी करे भी तो कैसे करे? सरकार को हम गरीबों के बारे में सोचना चाहिए और जरूरी कदम उठाने चाहिए।  सब्जी, फल और मीट की कीमतों में काफी (Pakistan food crisis) हो चुकी है वृद्धि  जानकारी के लिए बता दें कि पाकिस्तान में रमजान से पहले ही सब्जी, फल और मीट की कीमतों में काफी वृद्धि (Pakistan food crisis) हो चुकी है। पाकिस्तान की न्यूज वेबसाइट समा टीवी के मुताबिक पिछले तीन दिनों की तुलना में कीमतों में काफी अंतर देखा गया है। रोजमर्रा की चीजें मसलन, टमाटर, केले लहसुन और सेब की कीमतें कई गुना बढ़ गई हैं। कीमतें सुनकर आप हैरत में पड़ जाएंगे। बात करें लाहौर की तो, लाहौर में सेब 335 रुपये प्रति किलो बिक रहा है। अंडे के दाम 200 रुपये से बढ़कर 290 रुपये हो गया है। यही नहीं, मीट की कीमतें भी आसमान छू रही हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक लाहौर में मीट 800 रुपये प्रति किलो बिक रहा है। इसे भी पढ़ें :–  चैंपियंस ट्राफी के बीच पाकिस्तान में आत्मघाती हमला, 5 की मौत पाकिस्तान के लोग हैं कि इफ्तारी का भी (Pakistan food crisis) नहीं कर पा रहे हैं जुगाड़  बता दें कि 1 मार्च को रमजान का चांद दिखने के साथ ही तरावीह शुरू हो गई है और इसी दिन से माहे रमजान की शुरुआत हो गई जबकि 2 मार्च से पहला रोजा रखा गया। इस्लामिक मान्यता के अनुसार पवित्र रमजान के महीने में अपनों ईमानदारी से कमाए गए पैसों से सहरी और इफ्तार की जाती है। गौर करने वाली बात यह कि रमजान के दौरान मुस्लिम समुदाय के लोग सूर्य उदय से पहले उठकर सहरी करते हैं और फिर नमाज पढ़ते हैं। इसके बाद दिनभर रोजेदार रोजा रखते हैं। सूर्यास्त होने के बाद वे खजूर खाकर अपना रोजा खोलते हैं। रोजा खोलने के बाद शाम को नमाज पढ़ी जाती है। उसके बाद इफ्तार शुरू होता है। इफ्तार के लिए स्वादिष्ट पकवान बनाए जाते हैं। लोग अपने परिजनों, दोस्तों और शुभ​ चिंतकों के साथ मिलकर इफ्तारी करते हैं। लेकिन पाकिस्तान के लोग हैं कि इफ्तारी का भी जुगाड़ (Pakistan food crisis) नहीं कर पा रहे हैं।  Latest News in Hindi Today Hindi news Pakistan food crisis #PakistanFoodCrisis #PakistanHunger #FoodShortage #RamadanCrisis #PakEconomy #InflationPakistan #PakCrisis #IftarStruggle #FoodInflation #PakistanNews

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Trump Zelensky conflict

Trump Zelensky conflict: ट्रंप हुई तीखी नोकझोंक के बाद जेलंस्की ने माफ़ी मानाने से किया इंकार, दंग रह गई दुनिया

28 फरवरी 2025 को ओवल ऑफिस में मीटिंग के दौरान यूक्रेन के राष्ट्रपति व्लादिमीर जेलेंस्की ने अमेरिका को पूरी दुनिया के सामने जमकर खरी-खोटी (Trump Zelensky conflict) सुनाई। दरअसल, ओवल ऑफिस में जब मीटिंग हो रही थी तभी जेलेंस्की और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप में जमकर बहस हुई। इस बहस का वीडियो अब जमकर वायरल हो रहा है। बहस के बाद जेलेंस्की ने साफ कर दिया है कि वह कतई माफी नहीं मांगेगे। जेलेंस्की ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि “यह स्थिति दोनों देशों के लिए ठीक नहीं थी। महत्वपूर्ण यह कि जेलेंस्की और ट्रंप के बीच यह बहस ओवल ऑफिस में कैमरों के सामने हुई। गौर करने वाली बात यह कि जब यह लड़ाई हुई तब अमेरिका में यूक्रेन की राजदूत ओक्साना मार्करोवा ने सिर पर हाथ रख लिया। यह वीडियो अब वायरल हो गया है। लगभग 46 मिनट चली प्रेस कॉन्फ्रेंस में आखिरी 8 मिनट तक तीखी नोकझोंक हुई। दरअसल, बैठक के दौरान ट्रंप और जेलेंस्की के बीच रूस-यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने के तरीकों पर मतभेद उभरे, जिससे बातचीत तनावपूर्ण हो गई। ट्रंप ने जेलेंस्की पर अपमानजनक व्यवहार का आरोप लगाया था, जबकि जेलेंस्की ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के वादों पर सवाल उठाए। इस विवाद के बाद ट्रंप ने बैठक को समाप्त कर दिया और जेलेंस्की से व्हाइट हाउस छोड़ने के लिए कहा गया।  जेलेंस्की ने अपनी गलती मानने से किया इनकार (Trump Zelensky conflict)  बहस बाद जेलेंस्की ने फॉक्स न्यूज के साथ हुए साक्षात्कार में जब शो के होस्ट ब्रेट बेयर ने जेलेंस्की से पूछा कि क्या वह इस मीटिंग में जो कुछ हुआ उसके लिए माफी मांगेंगे? इस प्रश्न पर जेलेंस्की ने किसी भी गलती से इनकार (Trump Zelensky conflict) कर दिया। उन्होंने कहा कि “नहीं, मैं राष्ट्रपति और अमेरिकी जनता का सम्मान करता हूं। हमें खुला और ईमानदार रहना चाहिए। मुझे नहीं लगता कि हमने कुछ गलत किया है। शायद कुछ चीजों पर मीडिया से अलग चर्चा करनी चाहिए।” खैर, जेलेंस्की से जब पूछा गया कि क्या यह बहस यूक्रेन के हित में रही? तो उन्होंने कहा कि “यह दोनों पक्षों के लिए सही नहीं थी। मैं स्पष्ट हूं कि अमेरिका और यूरोप हमारे सबसे अच्छे दोस्त हैं और रूस के राष्ट्रपति पुतिन हमारे दुश्मन हैं।” अपनी बात पर जोर देते हुए जेलेंस्की ने कहा कि “ट्रंप ही नहीं हम खुद इस युद्ध को रोकना चाहते हैं, क्योंकि हम इस युद्ध को लड़ रहे हैं और इससे पीड़ित हैं। ट्रंप पहले कहते रहे हैं कि वह इस युद्ध को रोक सकते हैं और हम चाहते हैं कि वह ऐसा करें। जेलेंस्की से जब पूछा गया कि क्या यह बातचीत बंद दरवाजों के पीछे होनी चाहिए थी और क्या उन्हें इसका अफसोस है? इसपर जेलेंस्की ने कहा कि “हां मुझे लगता है कि यह सही नहीं था।” ट्रंप यूक्रेन को दी जाने वाली सभी सैन्य सहायता बंद (Trump Zelensky conflict) करने पर विचार कर रहे हैं- ट्रंप  प्राप्त जानकारी के मुताबिक इस विवाद के बाद अमेरिकी अधिकारियों ने यूक्रेन को दी जा रही सहायता में संभावित धोखाधड़ी और दुरुपयोग की जांच तेज करने का निर्णय लिया है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी ने बताया कि एलन मस्क और उनकी डिपार्टमेंट ऑफ गवर्नमेंट एफिशिएंसी पहले से ही यूक्रेन को प्रदान की गई बड़ी आर्थिक और सुरक्षा सहायता में संभावित समस्याओं की जांच कर रहे थे, लेकिन अब इन प्रयासों में तेजी लाई जाएगी। इस अधिकारी ने यह भी कहा कि “वे पहले से ही समस्याएं खोज रहे हैं। यही नहीं, इसके अलावा ट्रंप यूक्रेन को दी जाने वाली सभी सैन्य सहायता बंद (Trump Zelensky conflict) करने पर विचार कर रहे हैं। हालांकि इस मीटिंग के बाद एलन मस्क ने भी इसकी जांच के संकेत दिए थे। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि यह पता लगाने का समय आ गया है कि यूक्रेन को भेजे गए सैकड़ों अरब डॉलर का वास्तव में आखिर क्या हुआ? इसे भी पढ़ें :– भारत और यूरोपियन यूनियन के बीच मुक्त व्यापार समझौते पर बनी बात, साल के अंत तक होगा अमल  लाखों लोगों के जीवन के साथ खिलवाड़ करने हेतु ट्रंप ने जेलेंस्की को लगाई कड़ी फटकार  बता दें कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप शुक्रवार को ओवल ऑफिस में एक मीटिंग के दौरान यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की पर जमकर (Trump Zelensky conflict) बरसे। उन्होंने लाखों लोगों के जीवन के साथ खिलवाड़ करने के लिए जेलेंस्की को फटकार लगाई। ट्रंप ने कहा कि “यूक्रेनी राष्ट्रपति की कार्रवाई तीसरा विश्व युद्ध भड़का सकती है। इसके बाद जेलेंस्की ने अमेरिका के साथ महत्वपूर्ण खनिज समझौते पर हस्ताक्षर किए बिना अचानक व्हाइट हाउस छोड़ दिया। ट्रंप ने इस समझौते की मांग की थी और कहा था कि “यह यूक्रेन को भविष्य के समर्थन के लिए एक शर्त है।” Latest News in Hindi Today Hindi news Trump Zelensky conflict #TrumpZelenskyConflict #ZelenskyTrumpClash #UkraineCrisis #TrumpVsZelensky #GlobalTensions #PoliticalShowdown #USUkraineRelations #WorldShocked #DiplomaticRift #BreakingNews

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