Rakshas Tal mystery

Rakshas Tal: वैज्ञानिकों का भी दिमाग चकराया: आखिर एक ही स्थान पर होने के बावजूद मानसरोवर झील और राक्षस ताल में क्यों है इतना भयानक अंतर?

इस साल यानी 30 जून 2025 से कैलाश मानसरोवर यात्रा (Kailash Yatra) की शुरुआत होने जा रही है। भारी तादाद में श्रद्धालु कैलास मानसरोवर के दर्शन हेतु जाते हैं। इस दौरान कैलाश दर्शन के साथ ही लोग मानसरोवर झील (Mansarovar Lake) और राक्षस ताल (Rakshas Tal) के भी दर्शन करते हैं। यह दोनों झीलें 2-3 किलोमीटर की दूरी पर स्थिति हैं। सबसे बड़ी और महत्वपूर्ण बात यह कि मानसरोवर झील और राक्षस ताल एक ही वातावरण, एक जैसी ऊंचाई पर होने के बावजूद भी दोनों एक दूसरे से बिल्कुल अलग हैं। कारण यही जो सदियों से लोग जानना चाहते हैं कि एक स्थान पर होने के बावजूद भी ये दोनों झीलें इतनी अलग क्यों हैं। महत्वपूर्ण बात यह कि धार्मिक शास्त्रों में बताए गए तथ्यों को विज्ञान नहीं मानता। यह तो ठीक, लेकिन विज्ञान भी इस बात का जवाब नहीं दे पाया है कि आखिर एक स्थान पर होने के बावजूद भी ये मानसरोवर और राक्षस ताल में इतना फर्क क्यों है? ऐसे में आइये जानते हैं दोनों में क्या है अंतर?   राक्षस ताल (Rakshas Tal) एक तरह से खारे पानी की झील है बता दें कि राक्षस ताल (Rakshas Tal) एक अर्धचंद्राकार खारे पानी की झील है। अर्धचंद्राकार आकार अंधेरे का प्रतीक है। पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक यह वही स्थान है, जहां राक्षस राजा रावण ने भगवान शिव की तपस्या और उनकी आराधना की थी। कहा जाता है कि भगवान शिव के अनन्य भक्त रावण ने खुद राक्षस ताल का निर्माण किया था। रावण अपनी इच्छा पूरी करने हेतु कैलाश पर्वत गया था। कैलाश जाने से पहले उसने राक्षस ताल में स्नान किया और वहीं ध्यान लगाया। इस बीच जब रावण ने राक्षस ताल में डुबकी लगाई, तो झील आसुरी शक्तियों के कब्जे में आ गई और नकारात्मकता से भर गई। कहते हैं कि राक्षस झील का पानी इतना खारा कि इसके अंदर मछली या कोई दूसरा जानवर रह ही नहीं सकता। झील का हल्के धूसर रंग का है। लोगों का दावा तो यहाँ तक है कि कुछ महीनों बाद राक्षस झील के पानी का रंग बदल जाता है।  इसे भी पढ़ें:-  इस National Infertility Awareness week जानिए क्यों जरूरी है यंग महिलाओं में फर्टिलिटी टेस्टिंग? किसी को भी राक्षस ताल (Rakshas Tal) के पास जाने की नहीं है इजाजत  यही नहीं, राक्षस ताल (Rakshas Tal) के ठीक करीब एक छोटी नदी भी है। जिसे गंगचु नदी कहते हैं। यह नदी मानसरोवर झील (Mansarovar Lake) और राक्षस ताल को जोड़ती है। ऐसी मान्यता है कि मानसरोवर से पवित्र जल ले जाने हेतु इस नदी को ऋषियों द्वारा बनाया गया था। राक्षस ताल का पानी खारा होने के साथ-साथ विषैला भी है। जानकारों की माने तो इसमें स्नान करने अथवा इसका पानी पीने से जान तक जा सकती है। कारण यही जो राक्षस ताल के इर्द गिर्द चीन सरकार ने बाड़ लगाकर राक्षस ताल के क्षेत्र को घेर रखा है। किसी को भी इस झील के पास जाने की इजाजत नहीं है। इसे सिर्फ दूर से ही देखा जा सकता है। बता दें कि राक्षस ताल, कैलाश पर्वत के पश्चिम में तकरीबन 50 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। इस ताल के आसपास डोला, लाचतो, तोपसरमा और दोशर्बा नामक 4 द्वीप हैं। तिब्बती भाषा में इसे लांगगर चो या ल्हानाग त्सो के नाम से जाना जाता है। इसका है जहर की काली झील। ऐसा इसलिए कि तिब्बतियों का ऐसा मानना है कि इसका पानी शापित है। इसे छूने मात्र से भी बड़ा नुकसान हो सकता है। इसलिये लोग इसके आसपास भी नहीं भटकते।  Latest News in Hindi Today Hindi Mansarovar Lake #RakshasTal #MansarovarLake #MysteryLake #TibetMystery #HimalayanSecrets #ScienceVsMyth #NatureWonder #HolyLake #StrangePhenomena #MythicalLakes

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मोलस्कम कंटेजियोसम: सेकंड हैंड कपड़े पहनने से पहले जान लें इस व्यक्ति का दर्दनाक अनुभव

अपने भाई-बहनों के पुराने कपड़े (Clothes) पहनना हर भारतीय परिवार में एक रिवाज की तरह है। लेकिन, आजकल आप ऑफलाइन ही नहीं बल्कि ऑनलाइन भी सेकंड हैंड कपड़े (Second hand clothes) खरीद और बेच सकते हैं। ऐसी कई वेबसाइट्स हैं, जिनसे आप इस सुविधा का आनंद ले सकते हैं। पुराने कपड़े (Clothes) खरीदने के कई फायदे हैं जैसे यह सस्ते होते हैं, एनवायरनमेंट के लिए फायदेमंद हैं, कम कीमत में अच्छी क्वॉलिटी मिल जाती है। लेकिन, इसके कई नुकसान भी हो सकते हैं। सेकंड हैंड कपड़े (Second hand clothes) खरीदना महंगा पड़ा एक व्यक्ति को, जिसे इसके कारण एक बड़ी स्किन प्रॉब्लम का सामना करना पड़ा। आइए जानें इस बारे में विस्तार से। सेकंड हैंड कपड़े (Second hand clothes) के अन्य नुकसानों के बारे में भी जानें। सेकंड हैंड कपड़े (Second hand clothes) पहनना पड़ा भारी: पाएं जानकारी सोशल मीडिया आजकल एक ऐसा प्लेटफॉर्म बन चुका है, जहां लोग हर एक चीज शेयर कर सकते हैं। हाल ही में एक व्यक्ति ने शेयर किया कि उसने सेकंड हैंड कपड़े (Second hand clothes) खरीद कर पहने और उसकी वजह से उसे वायरल स्किन इंफेक्शन हुआ। उस व्यक्ति के अनुसार इन कपड़ों की वजह से उसे  मोलस्कम कंटेजियोसम (Molluscum Contagiosum) जैसी समस्या का सामना करना पड़ा। मोलस्कम कॉन्टैगिओसम एक स्किन इंफेक्शन है। आइए जानें कि मोलस्कम कंटेजियोसम (Molluscum Contagiosum) क्या है और यह कितना खतरनाक हो सकता है? मोलस्कम कंटेजियोसम (Molluscum Contagiosum) मोलस्कम कंटेजियोसम (Molluscum Contagiosum) एक वायरल स्किन इंफेक्शन है ,जिसका कारण होता है मोलस्कम कंटेजियोसम वायरस। इसके कारण स्किन पर छोटे, गोल और ऊपर उठे हुए मस्से हो सकते हैं। यह मस्से दर्दभरे नहीं होते हैं लेकिन इनमे खुजली हो सकती है। यह समस्या आमतौर पर हानिरहित हैं लेकिन इसके कारण रोगी को परेशानी हो सकती है। इसके लक्षण नजर आने पर तुरंत डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए। यह तो थी पुराने कपड़े (Clothes) पहनने से होने वाली समस्या के बारे में जानकारी। अब जानिए कि सेकंड हैंड कपड़े (Second hand clothes)पहनने से और क्या समस्याएं हो सकती हैं? इसे भी पढ़ें: महामारी की आशंका: अमेरिका में H5N1 के नए मामले, दुनिया भर में चिंता सेकंड हैंड कपड़े (Second hand clothes) पहनने से और क्या समस्याएं हो सकती हैं?  सेकंड हैंड कपड़े (Second hand clothes) पहनने से मोलस्कम कंटेजियोसम (Molluscum Contagiosum) ही नहीं बल्कि कई अन्य समस्याएं भी हो सकती हैं। यह समस्याएं इस प्रकार हैं: नोट:- यहां दी गई जानकारी केवल रिसर्च के आधार पर दी गई है। लेकिन अगर आप किसी भी शारीरिक समस्या से परेशान हैं, तो अपने हेल्थ एक्सपर्ट से सलाह लेना न भूलें। Latest News in Hindi Today Hindi Second hand clothes #clothes #Secondhandclothes #skinproblems #MolluscumContagiosum

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H5N1

महामारी की आशंका: अमेरिका में H5N1 के नए मामले, दुनिया भर में चिंता

एच5एन1 (H5N1) यानी एवियन इन्फ्लुएंजा (Avian Influenza) वो वायरल इन्फेक्शन है, जो पक्षियों, गायों और अन्य जानवरों में सबसे पहले फैलता है। मनुष्यों में इसके फैलने की संभावना भी होती है। इसके कारण रोगी हल्की से लेकर गंभीर सांस संबंधी समस्याओं का अनुभव कर सकते हैं। अमेरिका में हाल ही में डेयरी गायों और लोगों में एच5एन1 (H5N1) इंफेक्शन के कुछ मामले सामने आएं हैं। इन मामलों के कारण इस वायरस की महामारी फैलने का खतरा बढ़ गया है। इसके साथ ही जंगली पक्षियों और अन्य पक्षियों में भी यह फैल रहा है। यानी, यह एक गंभीर स्थिति हो सकती है। आइए जानें एच5एन1 का नया खतरा (H5N1 new threat) क्या है? इससे बचने के तरीकों के बारे में भी जानें। एच5एन1 का नया खतरा (H5N1 new threat): पाएं जानकारी एच5एन1 (H5N1) या एवियन इन्फ्लुएंजा (Avian Influenza) एक गंभीर समस्या है जिसके हाल ही में अमेरिका में बहुत से मामले सामने आएं हैं। यह मामले अभी डेयरी गायों और मनुष्यों में सामने आएं हैं। इसके कारण चिंताएं बहुत अधिक बढ़ गयी हैं। ग्लोबल वायरस नेटवर्क (GVN) जो एक अंतरराष्ट्रीय संगठन है। इसका मुख्य उद्देश्य वायरस से होने वाली बीमारियों के बारे में जागरूकता बढ़ाना, अनुसंधान को बढ़ावा देना और वैश्विक स्वास्थ्य सुरक्षा में सुधार करना है। ग्लोबल वायरस नेटवर्क ने पूरी दुनिया के देशों की सरकारों से यह निवेदन किया है कि जल्दी इस रोग को लेकर कोई बड़ा फैंसला लें ताकि इससे निपटा जा सके। इससे एच5एन1 का नया खतरा (H5N1 new threat) बचा जा सकता है। आइए जानें की इस रोग के सिम्पटम्स क्या हो सकते हैं? एच5एन1 (H5N1) के सिम्पटम्स इस रोग के बारे में इन्फोर्मशन होना बेहद आवश्यक है। कुछ लोगों में एच5एन1 (H5N1) या एवियन इन्फ्लुएंजा (Avian Influenza) निम्नलिखित लक्षण नजर आ सकते हैं: क्लेवलैंडक्लिनिक (Clevelandclinic) के अनुसार रोगी में नजर आने वाले एच5एन1 या एवियन इन्फ्लुएंजा (Avian Influenza) के लक्षण गंभीर भी हो सकते हैं। इसके लक्षण नजर आने पर तुरंत डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए। इसे भी पढ़ें: इस National Infertility Awareness week जानिए क्यों जरूरी है यंग महिलाओं में फर्टिलिटी टेस्टिंग? H1N1 से कैसे बचें? एच5एन1 (H5N1) जैसे रोग से बचना जरूरी है। इसके बचाव के तरीके इस प्रकार हैं:  नोट:– यहां दी गई जानकारी केवल रिसर्च के आधार पर दी गई है। लेकिन अगर आप किसी भी शारीरिक समस्या से परेशान हैं, तो अपने हेल्थ एक्सपर्ट से सलाह लेना न भूलें। Latest News in Hindi Today Hindi H5N1 #Birdflu #H5N1newthreat #AvianInfluenza #H5N1

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World Immunization Week

World Immunization Week: इस वर्ल्ड इम्यूनाइजेशन वीक जानें बच्चों के लिए कौन सी वैक्सीन्स हैं जरूरी?

इम्यूनाइजेशन यानी प्रतिरक्षीकरण उस प्रोसेस को कहा जाता है, जिसमें वैक्सीन (Vaccine) के माध्यम से व्यक्ति किसी रोग के प्रति रेजिस्टेंस बन सकता है। यानी, इससे रोगों से बचाव में मदद मिलती है। वैक्सीन (Vaccine) से शरीर का इम्यून सिस्टम को स्टिमुलेट किया जा सकता है ताकि भविष्य में किसी भी तरह के इन्फेक्शन्स और रोगों से बचाव हो सके। हर साल 24 अप्रैल से 30 अप्रैल को वर्ल्ड इम्यूनाइजेशन वीक (World Immunization week) के रूप में मनाया जाता है ताकि लोगों को टीकाकरण के बारे में बताया जा सके। इससे लोगों को गंभीर बीमारियों से बचने में मदद मिलेगी। आइए जानें वर्ल्ड इम्यूनाइजेशन वीक (World Immunization week) के बारे में और अधिक। यह भी जानें कि बच्चों को कौन सी वैक्सीन्स लगवानी चाहिए (Which vaccines should children get)?  वर्ल्ड इम्यूनाइजेशन वीक (World Immunization week) की थीम  इस साल वर्ल्ड इम्यूनाइजेशन वीक (World Immunization week) की थीम है  “सभी के लिए वैक्सीनेशन (Vaccination) मानवीय रूप से संभव है’। इस थीम के माध्यम से वैक्सीनेशन (Vaccination) के महत्व और प्रयासों को हाईलाइट किया गया है। वैक्सीनेशन (Vaccination) से बीमारियों से बचाव और जीवन को बचाने में मदद मिली है। इससे यह संदेश भी मिलता है कि हर व्यक्ति चाहे वो किसी भी उम्र का हो, वैक्सीनेशन (Vaccination) करा सकता है। बच्चों को कौन सी वैक्सीन्स लगवानी चाहिए (Which vaccines should children get)? डब्ल्यूएचओ (WHO) का कहना है की हर साल अप्रैल के अंतिम हफ्ते में इस दिन को मनाने का उद्देश्य है वैक्सीन (Vaccine) के इस्तेमाल को बढ़ाना देना ताकि हर उम्र के लोग बीमारियों से बच सकें। जानिए बच्चों को कौन सी वैक्सीन्स लगवानी चाहिए (Which vaccines should children get)? जन्म के बाद शिशु के जन्म लेते ही उसे बैसिलस कैलमेट-गुएरिन, ओरल पोलियो वैक्सीन और हेपेटाइटिस बी बर्थ डोज दी जाती है। 6 हफ्ते की उम्र के शिशु 6  हफ्ते की उम्र के शिशु को ओरल पोलियो वैक्सीन, पेंटावेलेंट, रोटावायरस वैक्सीन, न्यूमोकोकल कंजुगेट वैक्सीन और इनएक्टिवेटेड पोलियो वैक्सीन दी जाती है। 10 हफ्ते के उम्र के शिशु इस उम्र के शिशु को पेंटावलेंट की दूसरी डोज, ओरल पोलियो वैक्सीन (Vaccine) की तीसरी डोज और रोटावायरस की दूसरी डोज दी जाती है। 14 हफ्ते के उम्र के शिशु 14 हफ्ते के शिशु को पेंटावलेंट की अंतिम डोज के साथ ही ओरल पोलियो वैक्सीन की अंतिम डोज और न्यूमोकोकल कंजुगेट वैक्सीन (Vaccine) की डोज दी जाती है। इसके साथ ही इनएक्टिव पोलियो वैक्सीन की अंतिम डोज भी इसी उम्र में दी जाती है। 9-12 महीने के शिशु इस उम्र के शिशु को मीसल्स और रूबेला के साथ न्यूमोकोकल कंजुगेट वैक्सीन का बूस्टर दिया जाना चाहिए। इसके साथ ही उन्हें जापानी इंसेफेलाइटिस की डोज भी दी जाती है। इसे भी पढ़ें: इस National Infertility Awareness week जानिए क्यों जरूरी है यंग महिलाओं में फर्टिलिटी टेस्टिंग? 16-24 महीने के शिशु इस उम्र के शिशु को मीसल्स और रूबेला की दूसरी डोज, जापानी इंसेफेलाइटिस की अंतिम डोज, डीपीटी (DPT) यानी डिप्थीरिया, टेटनस और पर्टुसिस (काली खांसी) का बूस्टर और ओरल पोलियो वैक्सीन का बूस्टर दिया जाता है। यह तो थी बच्चों में वैक्सीन (Vaccine) की लिस्ट और वर्ल्ड इम्यूनाइजेशन वीक (World Immunization week) के बारे में जानकारी। इसके साथ ही कुछ अन्य वैक्सीन्स भी हैं जो बच्चों को लगवानी चाहिए। इसके बारे में आप अपने डॉक्टर से बात करें और सलाह लें। नोट:– यहां दी गई जानकारी केवल रिसर्च के आधार पर दी गई है। लेकिन अगर आप किसी भी शारीरिक समस्या से परेशान हैं, तो अपने हेल्थ एक्सपर्ट से सलाह लेना न भूलें। Latest News in Hindi Today Hindi World Immunization week #Whichvaccinesshouldchildrenget #Vaccination #vaccine #WorldImmunizationweek

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Hill Station Dharchula

गर्मियों के लिए बेस्ट जगह: भारत-नेपाल के बीच बसा हिल स्टेशन “धारचूला”

गर्मियां आते ही हीट से बचाव के लिए लोग पहाड़ों की तरफ रुख करते हैं। पहाड़ों में अधिकतर लोग मसूरी, नैनीताल, मनाली, शिमला आदि जाना पसंद करते हैं। लेकिन, आजकल यह हिल स्टेशंस भीड़-भाड़ वाले हो गए हैं। ऐसे में ऐसे हिल स्टेशंस को एक्सप्लोर करना चाहिए, जो न केवल आपको खूबसूरत अनगिनत यादें दें बल्कि भीड़ व जाम से भी आप बचें रहें। ऐसा ही एक हिल स्टेशन (Hill station) है धारचूला (Dharchula)। धारचूला उत्तराखंड (Uttarakhand) राज्य का एक सुन्दर हिल स्टेशन (Hill station) है, जो भारत और नेपाल के बीच में स्थित है। अगर आप गर्मियों में हिल स्टेशन (Hill station) विजिट करना चाहते हैं, तो आप धारचूला (Dharchula) को अपनी लिस्ट में शामिल कर सकते हैं। जानिए इस स्थान के बारे में विस्तार से। धारचूला (Dharchula): पर्यटकों के लिए एक नयी डेस्टिनेशन धारचूला (Dharchula) उत्तराखंड (Uttarakhand) राज्य के पिथौराखंड डिस्ट्रिक में मौजूद एक कस्बा है। यह हिल स्टेशन (Hill station) इंडो-नेपाल बॉर्डर पर स्थित है और मानसरोवर यात्रा रूट का एक जरूरी स्टॉप है। यह स्थान प्रसिद्ध है अपने खूबसूरत दृश्यों, ट्रेडिशनल कल्चर और कई ट्रैकिंग व धार्मिक स्थानों की वजह से। अगर आप इस स्थान पर विजिट करना चाहते हैं, तो मार्च से जून और सितम्बर से अक्टूबर तक यहां जानें का सबसे अच्छा समय है। इस समय आसमान सुहाना रहता है और ट्रैकिंग के लिए भी यह समय बेहतरीन है। जुलाई से अगस्त तक यहां बारिशों की वजह से लैंडस्लाइड का खतरा रहता है। इसलिए, इस समय धारचूला (Dharchula) और अन्य पहाड़ी स्थानों को विजिट करने की सलाह नहीं दी जाती है। धारचूला के मुख्य आकर्षण धारचूला (Dharchula) के आसपास कई आकर्षक स्थान हैं जैसे ओम पर्वत, नारायण आश्रम, छिरकिला डैम और अस्कोट वाइल्डलाइफ सैंक्चुअरी आदि। यही नहीं, यहां से कैलाश मानसरोवर और आदि कैलाश के लिए भी जाया जा सकता है। यहां आप लोकल कल्चर और ट्रेडिशन को भी एक्सप्लोर कर सकते हैं।  इसके अलावा आप यहां से पिथौरागढ़, मुंसियारी, मानसरोवर लेक, पटल भुवनेस्वर आदि भी जा सकते हैं। नेपाल भी यहां से नजदीक है, आप वहां की यात्रा भी कर सकते हैं।\ इसे भी पढ़े: बिहार में स्टाफ नर्स की भर्ती: 11 हजार से अधिक पदों के लिए कर सकते हैं आवेदन कैसे पहुंचा जा सकता है धारचूला (Dharchula)? धारचूला (Dharchula) में कोई भी रेलवे स्टेशन नहीं है। इससे सबसे नजदीक रेलवे जंक्शन है टनकपुर जो यहां से 240 किलोमीटर दूर है। यहां से आपको आसानी से अन्य बड़ी सिटीज के लिए ट्रेन मिल जायेगी। लेकिन धारचूला (Dharchula) एनएच9 के माध्यम से बड़ी सिटीज से जुड़ा हुआ है जैसे अल्मोड़ा, टनकपुर, हल्द्वानी, देहरादून नयी दिल्ली, नॉएडा आदि। उत्तराखंड (Uttarakhand) राज्य के इस हिल स्टेशन (Hill station) से आपको इन सिटीज के लिए बस भी आसानी से मिल जायेगी या आप कैब भी हायर कर सकते हैं। अगर बात की जाए फ्लाइट की, तो धारचूला (Dharchula) से सबसे नजदीक एयरपोर्ट है पंतनगर जो यहां से 336 किलोमीटर दूर है। आप बाय रोड और ट्रेन इस हिल स्टेशन (Hill station) तक आसानी से पहुंच सकते हैं। तो इन गर्मियों में आप भीड़भाड़ वाले हिल स्टेशंस को छोड़ कर धारचूला (Dharchula) विजिट करना न भूलें। Latest News in Hindi Today Hindi news Hill Station Dharchula #Dharchula #hillstation #hillstations #Uttarakhand #HillStations #Almora #Tanakpur #Haldwani

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Power packed flour

Power packed flour: न्यूट्रिएंट्स और कई फायदों से भरपूर हैं यह 5 आटे, जो हर मौसम के लिए है बेस्ट

आटा (Flour) वो मुख्य इंग्रेडिएंट है जिसका इस्तेमाल कई व्यंजनों को बनाने के लिए किया जाता है। हम भारतीयों  का कोई भी आहार रोटी के बिना पूरा नहीं होता। अगर बात की जाए आटे के फायदे की, तो यह ऊर्जा और न्यूट्रिएंट्स का एक महत्वपूर्ण स्त्रोत है। आटा (Flour) पाचन में मदद करता है, वजन को सही रखने में मददगार है और यही नहीं हार्ट के लिए भी इसे फायदेमंद माना गया है। आटा (Flour) कई तरह का होता है और कुछ तरह के आटे के प्रकार अन्य से हेल्दी होते हैं क्योंकि इनमें अधिक फाइबर और अन्य न्यूट्रिएंट्स होते हैं। आपको यह जानकार हैरानी हो सकती है कि कुछ आटे अनाज से नहीं बनते हैं बल्कि उन्हें नट्स और सीड्स से बनाया जाता है। आइए जानें इन शक्ति से भरपूर आटा (Power packed flour) के बारे में। शक्ति से भरपूर आटा (Power packed flour): पाएं जानकारी हेल्थलाइन (Healthline) के अनुसार ट्रेडिशनल आटा (Flour) को गेहूं से बनाया जाता है लेकिन अन्य तरह के आटे को नट्स और नेचुरली ग्लूटेन फ्री अनाज से बनाया जाता है जैसे कोकोनट, बादाम, बकविट आदि। शक्ति से भरपूर आटा (Power packed flour) इस प्रकार है:  1. गेहूं का आटा (Wheat flour) गेहूं के आटे को सबसे अधिक खाया जाता है। इससे रोटी, पूरी और परांठा आदि बनाया जाता है। मैदे की तुलना में यह अधिक हेल्दी होता है। इसे चोकर और पूरे गेहूं के दाने को पीस के बनाया जाता है। प्रोटीन, फाइबर के अलावा इसमें कई अन्य जरुरी मिनरल्स होते हैं जैसे सेलेनियम, मैंगनीज, फोलेट, कॉपर आदि। अधिक फाइबर युक्त होने के कारण डायजेस्टिव सिस्टम के लिए यह फायदेमंद है। इसके अलावा भी इस आटे के कई हेल्थ बेनेफिट्स हैं।  2. चावल का आटा (Rice flour) चावल का आटा (Rice flour) एक ग्लूटेन फ्री विकल्प है, जिसे ग्लूटोन इनटॉलेरेंस और सेलिएक डिजीज से पीड़ित लोग भी आसानी से खा सकते हैं। यह आसानी से पच जाता है और फाइबर, प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, मैग्नीशियम, कॉपर का अच्छा स्त्रोत हैं। इसे खाने के बाद जल्दी भूख नहीं लगती जिससे वजन को सही रखने में मदद मिलती है। यही नहीं चावल का आटा (Rice flour) में फैट और कोलेस्टेरोल कम होता है, यानी यह हार्ट फ्रेंडली है।  3. रागी आटा (Ragi flour) रागी आटा (Ragi flour) को न्यूट्रिशनल पावरहाउस कहा जाता है, क्योंकि इसके कई हेल्थ बेनेफिट्स हैं। इसमें कैल्शियम, आयरन, मैग्नीशियम, पोटैशियम और जिंक होता है। इसके कारण हड्डियों के स्वास्थ्य, मसल्स के फंक्शन आदि के लिए इसे बेहतरीन माना जाता है। इस आटे का ग्लिसेमिक इंडेक्स कम होता है जिससे ब्लड ग्लूकोज लेवल (Blood Glucose Level) सही रहता है। यानी, यह डायबिटीज से पीड़ित लोगों के लिए बेहतरीन माना गया है। रागी आटा (Ragi flour) को रोटी, इडली और कूकीज आदि को बनाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है।    4. मल्टीग्रैन आटा (Multigrain flour) मल्टीग्रैन आटा भी कई न्यूट्रिएंट्स प्रदान करता है। यह गेहू, ओट्स, मिलेट, जौ आदि का मिश्रण है। कई आटे का यह कॉम्बिनेशन फाइबर, विटामिन और मिनरल्स से भरपूर है। यही नहीं, यह सामान्य आटे से अधिक हेल्दी माना जाता है। इससे बने आहार को बनाने से एनर्जी मिलती है और इसके साथ ही अधिक समय तक भूख नहीं लगती। इसमें फाइबर भी अधिक होता है जिससे गट सही रखने में मदद मिलती है। इसे भी पढ़ें: इस National Infertility Awareness week जानिए क्यों जरूरी है यंग महिलाओं में फर्टिलिटी टेस्टिंग? 5. ज्वार का आटा (Sorghum flour) ज्वार का आटा (Sorghum flour) भी एक ग्लूटेन फ्री विकल्प है, जो फाइबर, विटामिन और मिनरल्स, जिंक और आयरन से भरपूर होता है। इसमें मौजूद हाई फाइबर कंटेंट से ब्लड फ्लो रेगुलेट रहता है और डाइजेशन को सही रखने में मदद मिलती है। ज्वार का आटा (Sorghum flour) रोटी, चपाती, इडली, परांठा आदि बनाने में इस्तेमाल होता है। न्यूट्रिशंस से भरपूर होने के कारण इन्हें आप आसानी से अपनी डायट में शामिल कर सकते हैं। नोट:– यहां दी गई जानकारी केवल रिसर्च के आधार पर दी गई है। लेकिन अगर आप किसी भी शारीरिक समस्या से परेशान हैं, तो अपने हेल्थ एक्सपर्ट से सलाह लेना न भूलें। Latest News in Hindi Today Hindi Fortified flour #Fortifiedflour #Riceflour #Sorghumflour #Ragiflour #flour

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Benefits of Asafoetida in Ayurveda

हींग के आयुर्वेदिक फायदे: पाचन से लेकर श्वसन तक फायदेमंद है यह मसाला

हींग (Asafoetida) को असाफोटीडा के नाम से भी जाना जाता है। यह भारतीय रसोईघर में मिलने वाले सबसे महंगे मसलों में से एक है। इसे फेरूला असाफोटीडा नाम के पौधे की जड़ से प्राप्त किया जाता है। यह एक चिपचिपा पदार्थ होता है, जिसमें सल्फर कंपाउंड होते हैं। हींग (Asafoetida) को अपनी तेज खुशबु के लिए जाना जाता है।इसका अनोखा स्वाद खाने को और स्वादिष्ट बनाता है। आयुर्वेद (Ayurveda) में भी हींग का इस्तेमाल हेल्थ के लिए बेनेफिशियल माना गया है। इस मसाले का इस्तेमाल खाना पकाने, मेडिसिन्स को बनाने और आयुर्वेद (Ayurveda) में किया जाता है। इसके कई हेल्थ बेनेफिट्स हैं। आइए जानें कि आयुर्वेद में हींग के बेनेफिट्स (Benefits of Asafoetida in Ayurveda) क्या हैं? आयुर्वेद में हींग के बेनेफिट्स (Benefits of Asafoetida in Ayurveda): पाएं जानकारी हेल्थलाइन (Healthline) के अनुसार आयुर्वेद (Ayurveda) मेडिसिन में हींग (Asafoetida) को गैस और अच्छे पाचन के लिए इस्तेमाल किया जाता है। इसके अलावा ब्रोंकाइटिस और किडनी स्टोन्स के उपचार में इसे फायदेमंद माना गया है। पाएं जानकारी आयुर्वेद में हींग के बेनेफिट्स (Benefits of Asafoetida in Ayurveda) के बारे में। डायजेस्टिव हेल्थ के लिए फायदेमंद आयुर्वेद (Ayurveda) में हींग (Asafoetida) को एक महत्वपूर्ण औषधि माना जाता है, जिनसे कई हेल्थ प्रॉब्लम्स का इलाज संभव है। ऐसा माना गया है कि इसके सेवन से पाचन तंत्र सही रहता है और कई पेट सम्बन्धी समस्याओं से आराम मिलता है जैसे गैस, एसिडिटी और अपच आदि। सांस समस्याओं से राहत  हींग (Asafoetida) को सांस से जुडी समस्याओं से राहत पाने में भी फायदेमंद पाया गया है जैसे अस्थमा। इसके साथ ही इसे इस्तेमाल से सर्दी-जुकाम में होने वाली परेशानियों से राहत पाने में मदद मिलती है। दर्द से मिली आराम: हींग (Asafoetida) में दर्द को दूर करने कि प्रॉपर्टीज होती हैं। ऐसा माना गया है कि इसके इस्तेमाल से जॉइंट्स और मसल्स को कम करने में सहायता मिलती है। इम्युनिटी हो मजबूत हींग में अन्य गुणों के साथ ही एंटीमाइक्रोबियल प्रॉपर्टीज होती हैं, जिससे इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाने में मदद मिलती है। यही नहीं, हींग (Asafoetida) को कफ और वात दोषों को बैलेंस करने में फायदेमंद माना गया है। इसे भी पढ़ें: इस National Infertility Awareness week जानिए क्यों जरूरी है यंग महिलाओं में फर्टिलिटी टेस्टिंग? आयुर्वेद में हींग के बेनेफिट्स (Benefits of Asafoetida in Ayurveda) के बारे में आप जान गए होंगे। हींग से बना चूर्ण डायजेस्टिव सिस्टम को सही बनाए रखने और सांस सम्बन्धी समस्याओं को दूर करने में फायदेमंद है। हींग (Asafoetida) की जेली को दर्द दूर करने में इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके अलावा इसके तेल के प्रयोग से जॉइंट्स और बॉडी पेन आदि से आराम पाने में मदद मिलती है। ऐसा भी माना गया है कि हींग (Asafoetida) एंटीऑक्सीडेंट्स (Antioxidant) का अच्छा स्त्रोत हैं, लेकिन इसके बारे में अभी लिमिटेड रिसर्च की गयी हैं और अधिक रिसर्च की जानी जरूरी है। आप दाल, सब्जी, सूप आदि में ड़ाल कर हींग (Asafoetida) का इस्तेमाल कर के इसके फायदों को पा सकते हैं। नोट:– यहां दी गई जानकारी केवल रिसर्च के आधार पर दी गई है। लेकिन अगर आप किसी भी शारीरिक समस्या से परेशान हैं, तो अपने हेल्थ एक्सपर्ट से सलाह लेना न भूलें। Latest News in Hindi Today Hindi Asafoetida Benefits #Asafoetida #Ayurveda #BenefitsofAsafoetidainAyurveda #BenefitsofAsafoetida

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Insurance policy

क्या आतंकी हमलों में पीड़ित परिवार को मिलता है इंशोरेंस?

कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले (Terrorist attacks) ने हर भारतीय को झिंझोर कर रख दिया है। इस हमले में लगभग 28 पर्यटकों की मौत हुई और कई लोग घायल हुए हैं। आतंकवादियों ने इसमें केवल पुरुषों को ही टारगेट किया। इसमें से अधिकतर पुरुष अपने परिवार का एकमात्र सहारा यानी कमाई करने वाले थे। जिस भी परिवार ने अपने घर में सदस्यों को खोया है, उनकी भरपाई तो कोई नहीं कर सकता। लेकिन, एक सबसे बड़ी परेशानी यह है कि इन परिवारों को अपने भविष्य के लिए नए सिरे से संघर्ष करना होगा और अपने परिवार का पालन-पोषण करना होगा। ऐसे में एक सवाल यह भी है कि क्या आतंकी हमलों में इंशोरेंस मिलता है (Is there insurance available in case of terrorist attacks) या नहीं? आइए जानें इसके बारे में। क्या आतंकी हमलों में इंशोरेंस मिलता है (Is there insurance available in case of terrorist attacks)? पहलगाम में हुए आतंकी हमले (Terrorist attacks) में कई निर्दोष लोगों की जान गई लेकिन यह कश्मीर यात्रा उनके लिए पूरी जिंदगी के लिए न भूलने वाला गम दे गई है। अन्य संकटों के साथ ही जो एक बड़ा संकट पीड़ित परिवारों पर मंडरा रहा है वो हे आर्थिक संकट। हालांकि, सरकार और समाज को इन परिवारों की मदद करनी चाहिए और उन्हें आर्थिक और भावनात्मक स्पोर्ट देना चाहिए। लेकिन, आपको बता दें कि आतंकी हमलों में इंशोरेंस (Insurance) भी मिलता है। हालांकि, यह सब इंशोरेंस पॉलिसी (Insurance policy) के टाइप और अन्य शर्तों पर निर्भर करता है। कुछ इंशोरेंस पॉलिसी (Insurance policy) आतंकी हमलों के लिए कवरेज प्रदान करती हैं: इसे भी पढ़ें:- सरकारी स्कीम से पाएं 20 लाख तक का लोन, कारोबार को दें नई दिशा आपको इस सवाल का उत्तर मिल गया होगा कि  क्या आतंकी हमलों में इंशोरेंस मिलता है (Is there insurance available in case of terrorist attacks)? लेकिन, इससे जुड़ी कुछ खास चीजें भी जिनके बारे में आपको पता होना चाहिए। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इस पॉलिसी की शर्तें आतंकी हमलों के लिए कवरेज निर्धारित करती हैं। इसलिए, इंशोरेंस पॉलिसी लेने से पहले इनकी शर्तों के बारे में जानकारी होना जरूरी है। इसके साथ ही आतंकी हमले (Terrorist attacks) के बारे में क्लेम प्रोसेस थोड़ी मुश्किल हो सकती हैं और इसमें बहुत अधिक समय भी लग सकता है।  Latest News in Hindi Today Hindi news  #Insurance #insurancepolicy #Isthereinsuranceavailableincaseofterroristattacks #terroristattacks #attacks

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World Malaria day 2025

World Malaria Day: जानिए कैसे करें मलेरिया से बचाव?

मलेरिया (Malaria) पैरासाइट्स के कारण होने वाला रोग है। जब इंफेक्टेड मच्छर मनुष्यों को काटते हैं, तो यह पैरासाइट मनुष्यों के शरीर तक पहुंचते हैं और मलेरिया का कारण बनते हैं। यह बीमारी घातक हो सकती है। हर साल 25 अप्रैल को वर्ल्ड मलेरिया डे (World Malaria Day) के रूप में मनाया जाता है। इस दिन को मनाने का उद्देश्य है मलेरिया (Malaria) के प्रति लोगों को जागरूक करना। ताकि, मलेरिया (Malaria) के लक्षणों को लोग पहचाने, इस रोग के रोकथाम और उपचार के बारे में और अधिक जानें। इस दिन पूरी दुनिया में सरकार, लोग और ऑर्गनाइजेशन मिल कर कई कार्यक्रमों का आयोजन करते हैं। आइए जानें वर्ल्ड मलेरिया डे 2025 (World malaria day 2025) के बारे में विस्तार से। मलेरिया से बचाव (Malaria prevention) के बारे में भी जानें। वर्ल्ड मलेरिया डे का क्या है उद्देश्य? वर्ल्ड हेल्थ आर्गेनाईजेशन (World Health Organization) के अनुसार वर्ल्ड मलेरिया डे (World malaria day) वो समय है जब मलेरिया से बचाव (Malaria prevention) और कंट्रोल के बारे में लोगों को जागरूक किया जाता है। इस दिन को मनाये जाने का उद्देश्य इस प्रकार है:  वर्ल्ड मलेरिया डे 2025 (World malaria day 2025) की थीम वर्ल्ड मलेरिया डे 2025 (World Malaria day 2025) की थीम हैं “मलेरिया हमारे साथ समाप्त होता है: पुनर्निवेश, पुनर्कल्पना, पुनः सक्रिय”। यानी, मलेरिया को खत्म करने के लिए एक नए दृष्टिकोण और प्रयास को बढ़ावा देना जरूरी है, जिसमें नए संसाधनों में निवेश, नए तरीके अपनाना और लोगों के बीच उत्साह को फिर से बढ़ाना आदि शामिल है। इसे भी पढ़ें: इस National Infertility Awareness week जानिए क्यों जरूरी है यंग महिलाओं में फर्टिलिटी टेस्टिंग? मलेरिया से बचाव (Malaria prevention) के क्या हैं तरीके? मलेरिया (Malaria) एक जानलेवा बीमारी है जो मच्छरों से मनुष्यों तक फैलती है। इस बीमारी से बचाव के तरीके इस प्रकार हैं:  नोट:- यहां दी गई जानकारी केवल रिसर्च के आधार पर दी गई है। लेकिन अगर आप किसी भी शारीरिक समस्या से परेशान हैं, तो अपने हेल्थ एक्सपर्ट से सलाह लेना न भूलें। Latest News in Hindi Today Hindi World Malaria Day 2025 #Worldmalariaday #Malaria #Worldmalariaday2025 #Malariaprevention

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Benefits of okra for hair

सेहत ही नहीं बालों के लिए भी फायदेमंद है भिंडी, जानें क्या है इसके इस्तेमाल का तरीका?

भिंडी (Okra) एक ऐसी सब्जी है, जो भारतीय रसोईघरों में अधिकतर बनती है और कई लोगों को पसंद होती है। आमतौर पर भिंडी (Okra) को सब्जी के रूप में खाया जाता है या सांभर आदि में ड़ाल कर इसका सेवन किया जाता है। भिंडी में कई जरूरी विटामिन्स और मिनरल्स होते हैं जैसे विटामिन सी, इ और के आदि। यही नहीं इनमें आयरन, कॉपर, मैग्नीशियम, फोलेट आदि मिनरल्स भी होते हैं। आपको यह जानकर हैरानी हो सकती है कि भिंडी केवल सेहत ही नहीं बल्कि बालों के लिए भी बहुत लाभदायक है। इसका इस्तेमाल करने से बालों में नयी जान आ जाती हैं। जानिए भिंडी के बालों के लिए बेनेफिट्स (Benefits of okra for hair) के बारे में। इसका बालों पर कैसे इस्तेमाल करें, यह भी जानें। बालों के लिए भिंडी के बेनेफिट्स (Benefits of okra for hair) हेल्थलाइन (Healthline) के अनुसार भिंडी (Okra) हार्ट हेल्थ, ब्लड शुगर आदि को सही रखने के लिए फायदेमंद है। इसके साथ ही प्रेग्नेंट महिलाओं के लिए भी इसे फायदेमंद माना गया है। भिंडी के बालों के लिए बेनेफिट्स (Benefits of okra for hair) इस प्रकार हैं:  इसे भी पढ़ें: इस National Infertility Awareness week जानिए क्यों जरूरी है यंग महिलाओं में फर्टिलिटी टेस्टिंग? भिंडी का बालों पर कैसे करें इस्तेमाल?  आप कई तरह से भिंडी का बालों के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं। इनमें से कुछ इस प्रकार हैं:  नोट:– यहां दी गई जानकारी केवल रिसर्च के आधार पर दी गई है। लेकिन अगर आप किसी भी शारीरिक समस्या से परेशान हैं, तो अपने हेल्थ एक्सपर्ट से सलाह लेना न भूलें। Latest News in Hindi Today Hindi Benefits of okra for hair #Benefitsofokraforhair #Benefitsofokra #okra #hair #scalp

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