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Benefits of Vrikshasana

Vrikshasana: तनाव से रहना चाहते हैं दूर तो कर सकते हैं वृक्षासन

टेँशन यानी तनाव ऐसी समस्या है, जो आजकल सामान्य होती जा रही है खासतौर पर युवाओं में। भविष्य में तनाव बड़ी परेशानी का कारण बन सकता है और इससे रोजाना का जीवन भी प्रभावित होता है। योगा को तनाव से छुटकारा पाने का बेहतरीन तरीका माना जाता है। हालांकि, माइंड ही नहीं बल्कि बॉडी के लिए भी योगा को कई तरह से फायदेमंद माना गया है। ऐसे कई योगासन (Yogasana) हैं, जिनका अभ्यास करना सम्पूर्ण स्वास्थ्य के लिए लाभदायक है। इन्हीं में से एक है वृक्षासन (Vrikshasana)। वृक्षासन (Vrikshasana) का दूसरा नाम ट्री पोज भी है। आइए जानें कि वृक्षासन के फायदे (Benefits of Vrikshasana) क्या हैं? इसके साथ ही इसे करने के तरीके के बारे में भी जानें। वृक्षासन के फायदे (Benefits of Vrikshasana) आर्ट ऑफ लिविंग (Art of living) के अनुसार वृक्षासन (Vrikshasana) एक संस्कृत शब्द है जिसमें वृक्ष का अर्थ है पेड़ और आसन का अर्थ है पोजीशन यानी इस योगासन (Yogasana) में करने वाले की पोजीशन वृक्ष की तरह लगती है। इसके फायदे इस प्रकार हैं:  इसे भी पढ़ें: World Environment Day 2025: प्रकृति से जुड़ने के लिए प्लास्टिक की जगह रिसाइकिल प्रोडक्ट का करें इस्तेमाल वृक्षासन (Vrikshasana) कैसे करें? इस योगासन (Yogasana)  को करना बेहद आसान है। वृक्षासन के फायदे (Benefits of Vrikshasana) क्या हैं, यह आप जान ही गए होंगे। इस आसन को इस तरह से किया जा सकता है: नोट:- यहां दी गई जानकारी केवल रिसर्च के आधार पर दी गई है। लेकिन अगर आप किसी भी शारीरिक समस्या से परेशान हैं, तो अपने हेल्थ एक्सपर्ट से सलाह लेना न भूलें। Latest News in Hindi Today Hindi Vrikshasana  #BenefitsofVrikshasana #Vrikshasana #Yogasana #Asanas #TreePose

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Tear Test Kit

Tear Test Kit से डिटेक्ट किए जा सकते हैं कई गंभीर बीमारी, जानिए क्या कहती है नई स्टडी?

आंसू (Tears) यानी टीयर्स हमारी फीलिंग्स को व्यक्त करने का बेहतरीन तरीका है। हर परिस्थिति में यह आंखों से खुद ही बाहर आ जाते हैं। कई बार बिना किसी कारण भी हमारी आंखों में आंसू आ जाते हैं। हमारे टीयर्स का स्ट्रक्चर स्लाइवा के जैसा ही होता है और यह पानी से बने होते हैं। हालांकि इनमें नमक, फैटी ऑयल्स और कई विभिन्न प्रोटीन्स होते हैं। इनमें सोडियम, क्लोराइड. बाइकार्बोनेट, पोटैशियम जैसे इलेक्ट्रोलाइट भी होते हैं। यही नहीं , इनमें कम मात्रा में मैग्नीशियम और कैल्शियम भी पाएं जाते हैं। लेकिन, क्या आप जानते हैं कि आंसू (Tears) केवल हमारे इमोशंस ही नहीं बल्कि कई बीमारियों को भी डिटेक्ट कर सकते हैं? आइए जानें आंसू (और बीमारियों के बीच कनेक्शन (Connection between tears and diseases) का पता लगाने वाली टियर टेस्ट किट (Tear test kit) के बारे में। आंसू और बीमारियों के बीच कनेक्शन (Connection between tears and diseases): पाएं जानकारी हेल्थलाइन (Healthline) के अनुसार हमारे आंसू आंखों को प्रोटेक्ट करने, इर्रिटेन्ट को साफ करने, भावनाओं को शांत करने का काम करते हैं। लेकिन, हाल ही में हुई एक स्टडी के अनुसार आंसू (Tears) केवल हमारे इमोशंस को ही नहीं दर्शाते बल्कि इससे बीमारियों का पता भी चल सकता है। यानी, आंसू और बीमारियों के बीच कनेक्शन (Connection between tears and diseases) है। इसके लिए टियर टेस्ट किट (Tear test kit) को डेवलप किया जा रहा है। ऐसा माना जा रहा है कि टियर टेस्ट किट (Tear test kit) से निम्नलिखित बीमारियों का पता चल सकता है: इसे भी पढ़ें: सत्तू शरबत: शरीर को मजबूत और स्वस्थ बनाने में फायदेमंद है यह देसी टॉनिक इस टियर टेस्ट किट में टेस्ट के लिए आंसू (Tears) को इकठ्ठा करने के लिए एक छोटे स्टाइलर पेपर का इस्तेमाल किया जाता है। इसका परिणाम लगभग 90 मिनटों में आ जाएगा। ऐसी उम्मीद है कि यह टियर टेस्ट किट (Tear test kit) 2026 तक इस्तेमाल के लिए बाजार में उपलब्ध होगी। यह रोगों को पहचाने का सस्ता तरीका कई लोगों के लिए बहुत फायदेमंद साबित होगा। यही नहीं, इससे स्वास्थ्य सुधार में भी मदद मिलेगी। नोट:- यहां दी गई जानकारी केवल रिसर्च के आधार पर दी गई है। लेकिन अगर आप किसी भी शारीरिक समस्या से परेशान हैं, तो अपने हेल्थ एक्सपर्ट से सलाह लेना न भूलें। Latest News in Hindi Today Hindi Tear Test Kit #connectionbetweentearsanddiseases #testkit #tears #dryeyes

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Superfoods for women

Superfoods For Women: हेल्दी, फिट और यंग रहने के लिए इन चीजों को करें अपने आहार में शामिल

यह तो हम सभी जानते हैं कि लम्बी और खुशहाल जीवन जीने के लिए जरूरी है हेल्दी रहना। हेल्दी रहने के लिए कोई खास मेहनत करने की आवश्यकता होती। सिर्फ अपनी जीवनशैली में हेल्दी बदलाव करना स्वस्थ रहने में मदद कर सकता है। इनमे सबसे जरूरी है सही डाइट। हेल्दी डाइट लेना हर किसी के लिए जरूरी है चाहे वो पुरुष हो या महिला। कुछ खास फूड महिलाओं को प्रभावित करने वाली समस्याओं से बचाने में सहायता करते हैं। यह सुपर फूड न्यूट्रिएंट्स से भरपूर होते हैं जो शरीर की सुरक्षा के साथ ही उस सही से कार्य करने में मदद करते हैं। आइए जानें महिलाओं के लिए सुपरफूड्स (Superfoods for women) के बारे में और करें इन्हें अपने आहार में शामिल। महिलाओं के लिए सुपरफूड्स (Superfoods for women): जानें कौन सी हैं यह चीजें? एक्सपर्ट्स की मानें तो हर दिन अलग-अलग पौष्टिक तत्वों का सेवन करना अच्छी सेहत को सपोर्ट करता है। महिलाओं के लिए सुपरफूड्स (Superfoods for women) इस प्रकार हैं: बेरीज (Berries)बेरीज जैसे ब्लूबेरी, स्ट्रॉबेरी महिलाओं के लिए सुपरफूड (Superfood) है क्योंकि इसमें बहुत से पावरफूल ओक्सिडेंट्स होते हैं जैसे विटामिन सी आदि। इनमें एंटी-कैंसर गुण भी होते हैं जिससे महिलाओं में कैंसर (Cancer) का जोखिम कम हो सकता है। यह बेरीज स्किन को यंग रखने में मदद करती हैं। इसके साथ ही इनसे यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शंस से बचाव में भी मदद मिलती है। अखरोट (Walnut)महिलाओं के लिए सुपरफूड्स (Superfoods for women) में अखरोट (Walnut) एक ऐसा मेवा है जिसमें सबसे अधिक पौष्टिक तत्व होते हैं। इससे महिलाओं में कोलेस्ट्रॉल लेवल कम करने और स्लीप क्वालिटी बढ़ाने में मदद मिलती है। इसके साथ ही कैंसर जैसी भयानक बीमारियों को बचाने में भी अखरोट (Walnut) को फायदेमंद माना गया है। बीन्स (Beans)बीन्स और फलियां कैल्शियम और प्रोटीन (Protein) से भरपूर होती हैं जैसे राजमा। यह दोनों मिनरल्स महिलाओं की सामान्य हेल्थ के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं। यही नहीं, इनमें रेसिस्टेंट स्टार्च होते हैं जो ब्लड शुगर रेगुलेशन और फैट बर्निंग में भी मदद कर सकते हैं। डार्क चॉकलेट (Dark chocolate)महिलाओं के लिए सुपरफूड्स (Superfoods for women) में डार्क चॉकलेट (Dark chocolate) भी शामिल है। इस सुपरफूड (Superfood) में पालीफेनोल्स होते हैं, जो टीऑक्सीडेंट है। यह न्यूरोलॉजिकल सिस्टम में ब्लड फ्लो को बढ़ाकर याददाश्त को सुधारने में मदद करते हैं। यही नहीं, डार्क चॉकलेट (Dark chocolate) से हार्ट डिजीज और कैंसर का जोखिम भी कम होता है। इसे भी पढ़ें: सत्तू शरबत: शरीर को मजबूत और स्वस्थ बनाने में फायदेमंद है यह देसी टॉनिक क्विनोआ (Quinoa)अगर बात की जाए सुपरफूड्स की तो, क्विनोआ (Quinoa) भी एक बेहतरीन आहार हैं जिसके कई हेल्थ बेनिफिट्स हैं। यह ग्लूटेनफ्री होता है। इसके साथ ही यह न्यूट्रिएंट्स से भरपूर होता है जैसे विटामिन बी, इ, कैल्शियम, मैग्नीशियम, पोटैशियम और फॉस्फोरस आदि। क्विनोआ (Quinoa) में फाइबर भी होता है जिससे वजन कम होने और पेट संबंधी समस्याओं को कम करने में मदद मिलती है। बालों और स्किन के लिए यह सुपरफूड (Superfood) बेहतरीन है। नोट:- यहां दी गई जानकारी केवल रिसर्च के आधार पर दी गई है। लेकिन अगर आप किसी भी शारीरिक समस्या से परेशान हैं, तो अपने हेल्थ एक्सपर्ट से सलाह लेना न भूलें। Latest News in Hindi Today Hindi Superfoods for women Superfoodsforwomen #superfoods #quinoa #walnuts #darkchocolate

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Acquired Immunity

क्या है एक्वायर्ड इम्युनिटी? क्या एक्वायर्ड इम्युनिटी के कारण COVID 19 खतरा होता है कम?

पिछले कुछ दिनों से भारत में कोरोना यानी कोविड-19 (covid-19) के मामलों में लगातार वृद्धि हो रही है। अब तक इसके लगभग 3400 मामले सामने आ चुके हैं। हालांकि, यह एक चिंता का विषय है लेकिन एक्सपर्ट्स के मुताबिक लोगों को इसको लेकर अधिक परेशान होने की जरूरत नहीं है। लोगों को सावधानियां बरतने की सलाह अवश्य दी जा रही है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक भारत के लोगों को कोविड-19  (covid-19) से डरने की जरूरत नहीं है और इसका कारण है एक्वायर्ड इम्युनिटी (Acquired Immunity) यानी विकसित इम्युनिटी। आइए जानें कि क्यों लोगों को एक्वायर्ड इम्युनिटी के कारण कोरोना से डरने की जरूरत नहीं है? यह भी जानें कि एक्वायर्ड इम्युनिटी (Acquired Immunity) किसे कहा जाता है और इम्युनिटी (Immunity) को कैसे बढ़ाएं? क्या एक्वायर्ड इम्युनिटी (Acquired Immunity) के कारण कोरोना से डरने की जरूरत नहीं है? एक्सपर्ट्स के मुताबिक अभी परेशानी का कारण हैं कोविड-19 (covid-19)  के ओमिक्रॉन स्ट्रेन के सबवेरिएंट्स, जिनमें अभी भी परिवर्तन हो सकते हैं। पहले हुए वैक्सीनेशन और बूस्टर डोज की वजह से लोगों में इम्युनिटी (Immunity) में वृद्धि हुई है। इसके कारण इसके लक्षण हल्के हो सकते हैं जैसे खांसी, बॉडी पेन, सिरदर्द आदि। लेकिन,कोरोना में अभी भी सावधानियां बरतना जरूरी है, जैसे जब सर्दी, जुकाम या बुखार हो, तो मास्क पहनें। उन लोगों को अधिक सावधानियां बरतने की जरूरत है, जिन्हें डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर आदि समस्याएं हैं। इसके साथ ही बुजुर्गों को भी सावधान रहने की आवश्यकता है। अब जानते हैं एक्वायर्ड इम्युनिटी (Acquired Immunity) के बारे में।  एक्वायर्ड इम्युनिटी (Acquired Immunity) क्या है? एक्वायर्ड इम्युनिटी (Acquired Immunity) इम्यून सिस्टम की पिछले इंफेक्शन (Infection) और वैक्सीनेशन के माध्यम से रोगाणुओं को पहचानने और रिस्पॉन्ड करने की एबिलिटी है। इस प्रकार की इम्युनिटी (Immunity) बी और टी लिम्फोसाइट्स द्वारा संचालित की जाती है, जो इम्यून सिस्टम का हिस्सा हैं। इन सेल्स में पुराने इंफेक्शंस को याद रखने और प्रभावी ढंग से रिस्पॉन्ड करने की एबिलिटी होती है। यह इम्युनिटी जन्मजात इम्युनिटी से पूरी तरह से विपरीत है, क्योंकि जन्मजात इम्युनिटी खास रोगाणुओं से नहीं लड़ पाती है। इसे भी पढ़ें: सत्तू शरबत: शरीर को मजबूत और स्वस्थ बनाने में फायदेमंद है यह देसी टॉनिक इम्युनिटी को कैसे बढ़ाया जा सकता है? हेल्थलाइन (Healthline) के अनुसार एक्वायर्ड इम्युनिटी (Acquired Immunity) के साथ ही इम्युनिटी (Immunity) को बढ़ाने के तरीकों के बारे में जानकारी होना भी आवश्यक है। जरूरी वेक्सीनेशन्स को लेना इम्यून सिस्टम को मजबूत करने का सबसे बेहतरीन तरीका है। उम्र, काम, जगह के अनुसार सही वैक्सीन्स लगवाएं। अधिकतर वयस्कों को निम्नलिखित समस्याओं के लिए वैक्सीनेशन का इस्तेमाल करना चाहिए: इसके लिए आप अपने डॉक्टर की सलाह ले सकते हैं। इसके साथ ही बैक्टीरिया के कारण होने वाली समस्याओं में एंटीबायोटिक्स लेने से भी इम्युनिटी (Immunity) बढ़ती है। यदि डॉक्टर आपको वायरल इंफेक्शन (Viral Infection) से लड़ने के लिए एंटीबायोटिक्स लेने की सलाह देते हैं, तो यह भी महत्वपूर्ण है कि आपको एंटीबायोटिक्स का पूरा कोर्स करना चाहिए। इसके साथ ही बैक्टीरियल इंफेक्शन की स्थिति में भी डॉक्टर के बताएं अनुसार इसका पूरा कोर्स करें। नोट:- यहां दी गई जानकारी केवल रिसर्च के आधार पर दी गई है। लेकिन अगर आप किसी भी शारीरिक समस्या से परेशान हैं, तो अपने हेल्थ एक्सपर्ट से सलाह लेना न भूलें। Latest News in Hindi Today Hindi Acquired Immunity #AcquiredImmunity #Immunity #Immunesystem #corona #covid-19

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Bubble tea benefits

Boba Tea: क्या है बोबा चाय? क्या सेहत के लिए फायदेमंद है ये चाय?

इनदिनों एक नया पेय पदार्थ तेजी से लोकप्रिय हो रहा है, जिसका नाम बोबा टी (Boba Tea) यानी बोबा चाय है। इसे बबल टी (Bubble Tea) के नाम से भी जाना जाता है। बोबा टी का चलन ताइवान से शुरू हुआ और अब यह एशिया, अमेरिका, यूरोप और भारत जैसे देशों में भी काफी प्रसिद्ध हो चुका है। आज हम रिसर्च के अनुसार बोबा टी (Boba Tea) क्या है, इसके फायदे (Boba Tea Benefits) क्या हैं और इसके संभावित दुष्प्रभाव क्या हो सकते हैं यह समझने कोशिश करेंगे। बोबा टी क्या है? बोबा टी एक ठंडा, मीठा पेय है जिसे चाय, दूध, शक्कर और टैपिओका पर्ल्स (Boba pearls) से बनाया जाता है। टैपिओका पर्ल्स काले रंग की छोटी-छोटी गोलियां होती हैं जो टैपिओका स्टार्च से बनता है। इस पेय पदार्थ चाय की तरह होता है लेकिन इसमें चबाने के लिए टैपिओका पर्ल्स मिलता है। बोबा टी या बबल टी अलग-अलग तरह के होते हैं। जैसे:  बोबा टी के फायदे (Benefits of Boba Tea) क्या हैं?  अलग-अलग रिसर्च के अनुसार बोबा टी के कई फायदे हैं जैसे: 1. एनर्जी बूस्टर बोबा टी में चाय और शक्कर की मौजूदगी से शरीर को त्वरित ऊर्जा मिलती है। इसमें मौजूद कैफीन मानसिक सतर्कता को भी बढ़ाने में सहायक माना गया है। 2. सकारात्मक मूड में मददगार NCBI के रिसर्च के अनुसार चाय में मौजूद एल-थेनाइन (L-theanine) और कैफीन होने की वजह से मूड अच्छा रहता है और तनाव कम हो सकता है।  3. एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर यदि बोबा टी को ग्रीन टी (Green Tea) या ब्लैक टी (Black Tea) के साथ बनाया जाए, तो उसमें मौजूद कैटेचिन (catechins) और पॉलीफेनॉल्स शरीर को फ्री रेडिकल्स से बचाते हैं, जो उम्र बढ़ने और कई बीमारियों से जुड़े होते हैं। 4. व्यक्तिगत पसंद के अनुसार अनुकूलन यह पेय कई प्रकार के स्वादों, मिल्क ऑप्शन जैसे सोया, बादाम, ओट्स और स्वीटनर के ऑप्शन के साथ मिलाकर तैयार किया जा सकता है। बोबा टी के संभावित साइडइफेक्ट्स अलग-अलग रिसर्च के अनुसार बोबा टी के कई साइडइफेक्ट्स हो सकते हैं। जैसे: 1. शक्कर की ज्यादा मात्रा बोबा टी में प्रयुक्त फ्लेवर सिरप और टैपिओका पर्ल्स में काफी मात्रा में शक्कर होती है। Harvard T.H. Chan School of Public Health के अनुसार अत्यधिक चीनी का सेवन मोटापा, टाइप-2 डायबिटीज़ और हृदय रोगों का कारण बन सकता है। 2. फाइबर की कमी टैपिओका पर्ल्स में फाइबर नहीं होता और यह मुख्यतः स्टार्च से बना होता है। इसके अत्यधिक सेवन से पेट में भारीपन या कब्ज की समस्या हो सकती है। 3. कैलोरीज का उच्च स्तर एक सामान्य बोबा टी कप में लगभग 300-500 कैलोरी हो सकती हैं। यह किसी एक समय के भोजन के बराबर हो सकता है। वजन नियंत्रित करने वालों के लिए यह चिंता का विषय हो सकता है। इसे भी पढ़ें: सत्तू शरबत: शरीर को मजबूत और स्वस्थ बनाने में फायदेमंद है यह देसी टॉनिक 4. कैफीन की मात्रा यदि कोई व्यक्ति कैफीन के प्रति संवेदनशील है, तो बोबा टी में मौजूद चाय कैफीन के कारण अनिद्रा, घबराहट या हृदय गति में तेजी जैसे लक्षण उत्पन्न कर सकती है। बोबा टी (Boba Tea) एक आधुनिक पेय पदार्थ है जो स्वाद और अनुभव दोनों के स्तर पर लोगों को आकर्षित करता है। यदि इसे संयम में और स्वस्थ विकल्पों (कम चीनी, लो-फैट दूध) के साथ लिया जाए तो यह सुरक्षित और आनंददायक हो सकता है। लेकिन इसका अत्यधिक सेवन न केवल वजन बढ़ा (Weight Gain) सकता है, बल्कि दीर्घकालिक स्वास्थ्य समस्याएं भी उत्पन्न कर सकता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सलाह है कि बोबा टी को कभी-कभी एक ट्रीट के रूप में लें, न कि नियमित पेय के रूप में।  नोट:– यहां दी गई जानकारी केवल रिसर्च के आधार पर दी गई है। लेकिन अगर आप किसी भी शारीरिक समस्या से परेशान हैं, तो अपने हेल्थ एक्सपर्ट से सलाह लेना न भूलें। Latest News in Hindi Today Hindi Boba Tea #BobaTea #BubbleTea #HealthyDrinks #TapiocaPearls #MilkTea #TeaLovers #NutritionFacts #IsBobaHealthy

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Monsoon and Respiratory Infections

मानसून और रेस्पिरेटरी इंफेक्शन में क्या है कनेक्शन? जानिए इसके कारणों और बचाव के तरीके

भयंकर गर्मी के मौसम के बाद मानसून (Monsoon) का आना राहत पहुंचाता है। लेकिन, मानसून (Monsoon) में कई हेल्थ प्रॉब्लम्स का रिस्क बढ़ जाता है। इस दौरान बढ़ती ह्यूमिडिटी, तापमान और नमी वाले वातावरण में वायरस व बैक्टीरिया के बढ़ने के कारण कई समस्याएं हो सकती हैं। इन्हीं में से एक है रेस्पिरेटरी इंफेक्शन (Respiratory Infections)। अगर बात की जाए रेस्पिरेटरी इंफेक्शन (Respiratory Infections) की, तो इसे रेस्पिरेटरी ट्रैक्ट इंफेक्शन भी कहा जाता है। यह वो समस्या है जिससे रेस्पिरेटरी सिस्टम प्रभावित होता है। इस सिस्टम में नाक, गला, एयरवेज और फेफड़े आदि शामिल हैं। इस समस्या के कारण इम्यूनिटी कमजोर होती है जिससे सर्दी-जुकाम, खांसी और अन्य समस्याओं का जोखिम बढ़ता है। जानिए मानसून और रेस्पिरेटरी इंफेक्शन (Monsoon and Respiratory Infections) के बारे में विस्तार से।  मानसून और रेस्पिरेटरी इंफेक्शन (Monsoon and Respiratory Infections): क्या हैं मानसून में रेस्पिरेटरी इंफेक्शन के कारण? नॉर्थवेस्टर्न मेडिसिन (Northwestern Medicine) के अनुसार रेस्पिरेटरी इंफेक्शन किसी को भी हो सकता है लेकिन स्मोकर्स, छोटे बच्चों, बुजुर्गों, रेस्पिरेटरी डिजीज से पीड़ित और कमजोर इम्यूनिटी वाले लोगों में इसकी संभावना अधिक रहती है। मानसून (Monsoon) में रेस्पिरेटरी इंफेक्शन (Respiratory Infections) के कारण इस प्रकार हैं:  इसे भी पढ़ें: COVID-19 और Dengue हैं दो अलग-अलग बीमारियां, इनके बीच के अंतर को समझें और रहें सुरक्षित मानसून और रेस्पिरेटरी इंफेक्शन (Monsoon and Respiratory Infections): कैसे बचें इस समस्या से? मानसून में रेस्पिरेटरी इंफेक्शन से बचाव के लिए कुछ चीजों का खास ख्याल रखना चाहिए, जैसे: नोट:- यहां दी गई जानकारी केवल रिसर्च के आधार पर दी गई है। लेकिन अगर आप किसी भी शारीरिक समस्या से परेशान हैं, तो अपने हेल्थ एक्सपर्ट से सलाह लेना न भूलें। Latest News in Hindi Today Hindi Monsoon and Respiratory Infections #MonsoonandRespiratoryInfections #Monsoon #RespiratoryInfections #infection

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COVID-19 and dengue

COVID-19 और Dengue हैं दो अलग-अलग बीमारियां, इनके बीच के अंतर को समझें और रहें सुरक्षित

एक बार फिर से कोरोना की दस्तक ने सबको चिंता में ड़ाल दिया है। अब तक देश में इसके एक हजार से भी अधिक मामले सामने आ चुके हैं। इस महामारी ने बड़ी संख्या में लोगों को प्रभावित किया है। ऐसे ही मच्छरों के कारण होने वाले रोग डेंगू (Dengue) के भी हर साल कई केस आते हैं। ये दोनों ऐसे इंफेक्शंस हैं, जो वायरस के कारण होते हैं। इन दोनों स्थितियों में रोगी बुखार और शरीर में दर्द जैसे लक्षणों का अनुभव करता है। यही कारण है कि कई बार इन दोनों के बीच कई बार अंतर समझने में समस्या हो सकती है। लेकिन, कोविड-19 और डेंगू के बीच में अंतर (Difference between COVID-19 and dengue) समझना बहुत जरूरी है, ताकि सही समस्या का निदान हो सके और सही उपचार संभव हो। आइए जानें कोविड-19 और डेंगू के बीच में अंतर (Difference between COVID-19 and dengue) के बारे में। कोविड-19 और डेंगू के बीच में अंतर (Difference between COVID-19 and dengue): क्या हैं दोनों के लक्षण?  सीडीसी (CDC) के अनुसार डेंगू (Dengue) को एक व्यक्ति से दूसरे तक फैलाने का काम करता है संक्रमित मछर। यह मछर कभी दिन या रात को कभी भी काट सकता है। ऐसे में इससे बचना इस रोग से बचाव का सबसे बेहतरीन तरीका है मच्छरों से बचाव। कोविड-19 (COVID-19) और डेंगू (Dengue) की कॉम्प्लीकेशन्स से बचाव के लिए जरूरी है कोविड-19 और डेंगू के बीच में अंतर (Difference between COVID-19 and dengue) को जानना। इसके लिए सबसे पहले इनके लक्षणों के बीच के अंतर को जान लेते हैं। कोविड-19 के लक्षण कोविड-19 (COVID-19) के लक्षण माइल्ड से लेकर सीरियस तक हो सकते हैं। इसके कुछ लक्षण इस प्रकार हैं:  कुछ रोगियों में ऊपर दिए गए लक्षणों के अलावा अन्य लक्षण भी नजर आ सकते हैं। लेकिन, इसके गंभीर लक्षण नजर आने पर तुरंत डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है, जो इस प्रकार हैं: डेंगू के लक्षण डेंगू (Dengue) के सामान्य लक्षण इस प्रकार हैं:  अगर डेंगू (Dengue) के निम्नलिखित लक्षणों का अनुभव किया जाता है, तो तुरंत मेडिकल हेल्प लेना जरूरी है: इसे भी पढ़ें: JN.1 variant of interest: WHO ने क्यों कहा JN.1 को वेरिएंट ऑफ इंट्रेस्ट? जानिए कोरोना वायरस JN.1 वेरिएंट के लक्षण और बचाव क्या हैं इनके बीच में अन्य अंतर? नोट:– यहां दी गई जानकारी केवल रिसर्च के आधार पर दी गई है। लेकिन अगर आप किसी भी शारीरिक समस्या से परेशान हैं, तो अपने हेल्थ एक्सपर्ट से सलाह लेना न भूलें। Latest News in Hindi Today Hindi COVID 19 and Dengue #DifferencebetweenCOVID19anddengue  #COVID-19  #dengue #COVID19anddengue

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Homemade Healthy Ice cream

Homemade Healthy Ice cream: न्यूट्रिशन से भरपूर आइसक्रीम बनाने का यह है आसान तरीका

समर सीजन आते ही जहां एक ओर गर्मी से हालत खराब होती है, वहीं दूसरी ओर गर्मी से बचने के लिए कई टेस्टी तरीके भी अपनाए जाते हैं। आइसक्रीम (Ice cream) एक ऐसी चीज है, जो बच्चों को तो पसंद आती ही हैं, लेकिन बड़े लोग भी इसे बड़े चाव से खाते हैं। गर्मी में आइसक्रीम खाने का मजा ही अलग है। क्या आप जानते हैं कि बाजार में मिलने वाली अधिकतर आइसक्रीम्स, आइसक्रीम (Ice cream) नहीं बल्कि फ्रोजन डेजर्ट होता है? इसमें प्रिजर्वेटिव्स ओर चीनी भरपूर मात्रा में होते हैं। संक्षेप में कहा जाए तो इन्हें खाना हमारी हेल्थ (Health) के लिए नुकसानदायक हो सकता है। लेकिन, आप घर पर भी आसानी से हेल्दी आइसक्रीम (Healthy ice cream) बना सकते हैं। आइए जानें होममेड हेल्दी आइसक्रीम (Homemade healthy ice cream) के बारे में।  हेल्दी आइसक्रीम (Healthy ice cream): इस तरह से बनाएं इन गर्मियों में अगर आपको लगता है कि होममेड आइसक्रीम (Ice cream) हेल्दी नहीं होगी या इनसे आपको बाजार वाला स्वाद नहीं मिलेगा तो आप बिलकुल गलत हैं। आप बिना चीनी और हानिकारक पदार्थों के भी आसानी से आइसक्रीम बना सकते हैं। इस तरह से बना सकते हैं आप होममेड हेल्दी आइसक्रीम (Homemade healthy ice cream)।  सामग्री विधि:  इसे भी पढ़ें: गर्मी के मौसम में अपना रखें खास ख्याल और बरते यह 6 सावधानियां आप इसे तरह से स्ट्राबेरी, मेंगो, कीवी आदि की हेल्दी आइसक्रीम (Healthy ice cream) बना सकते हैं। इनमें बस आप ड्राई चॉकलेट की जगह फ्रेश फलों का इस्तेमाल करें। यह आइसक्रीम (Ice cream) न केवल हेल्दी है बल्कि टेस्ट में भी बेहतरीन होगी। आपके बच्चों को यह अवश्य पसंद आएगी। अगर आप इस आइसक्रीम को और हेल्दी बनाना चाहते हैं तो इसमें सामान्य दूध की जगह कोकोनट मिल्क का इस्तेमाल भी कर सकते हैं। यह शुगर फ्री आइसक्रीम (Ice cream) डायबिटीज के रोगियों के सेवन के लिए भी अच्छी है। नोट:- यहां दी गई जानकारी रिसर्च के आधार पर दी गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया गूगल सर्च करें। Latest News in Hindi Today Hindi Healthy ice cream #Homemadehealthyicecream #healthyicecream #icecream #Homemadeicecream

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Coronavirus new variant 2025

JN.1 variant of interest: WHO ने क्यों कहा JN.1 को वेरिएंट ऑफ इंट्रेस्ट? जानिए कोरोना वायरस JN.1 वेरिएंट के लक्षण और बचाव

कोरोना वायरस के फैलने की खबर एक बार फिर सुर्खियों में है। पहले सिंगापूर, हॉन्गकॉन्ग और थाइलैंड में कोरोना वायरस फैलने की जानकारी मिली और अब धीरे-धीरे भारत में भी इस इंफेक्शन का खतरा एक बार फिर से बढ़ चुका है। कोरोना वायरस (Coronavirus) एक इंफेक्सियस डिजीज है और जब भी इस वायरस का नाम सामने आता है तो साल 2020 और 2021 की घटनाएं ना चाहते हुए हम सभी के जहन में आ जाता है।  ऐसे में फिर इंफेक्शन का फैलना की खबरे लोगों के मन में डर पैदा कर रही हैं। इस बार कोविड 19 का JN.1 वेरियंट (COVID 19 JN.1 Variant) काफी चर्चा में है। क्या है JN.1 वेरिएंट (JN.1 Variant), JN.1 के लक्षण (Symptoms of JN.1 Variant)  क्या हो सकते हैं और JN.1 से बचाव कैसे संभव है ये सब समझेंगे।  क्या है JN.1 वेरिएंट?  नेशनल सेंटर बायोटेक्नोलॉजी इन्फॉर्मेशन (NCBI) के अनुसार कोरोना वायरस का JN.1 वेरिएंट है। इस बार कोविड-19 इंफेक्शन का कारण ओमिक्रोन वेरिएंट JN.1 और इसके सब-वेरिएंट्स LF.7 और NB.1.8 को माना जा रहा है। JN.1 इंफेक्शन ओमिक्रोन के BA.2.86 फेमली से होने वाला एक नया वेरिएंट है। जॉन्स हॉपकिन्स मेडिसिन (John Hopkins Medicine) के रिसर्च रिपोर्ट के अनुसार JN.1 की पहचान पहली बार अगस्त 2023 में की गई थी। इस वेरिएंट में लगभग 30 म्यूटेशन पाए गए हैं, जो शरीर की इम्यून सिस्टम (Immune System) से बचने में सक्षम बनाते हैं। इसके अलावा इसमें कुछ अन्य म्यूटेशन भी होते हैं, जो इसके तेजी से फैलने की क्षमता को बढ़ाते हैं। हालांकि BA.2.86 वेरिएंट SARS-CoV-2 वेरिएंट्स में शामिल नहीं हुआ। क्या है JN.1 वेरिएंट के लक्षण? NCBI के अनुसार JN.1 वेरिएंट (Symptoms of JN.1 Variant) के लक्षण कोरोना वायरस के लक्षणों के समान हैं। जैसे: ऊपर बताए लक्षण JN.1 वेरिएंट के लक्षण  (Symptoms of JN.1 Variant) हो सकते हैं। इसलिए अगर ऊपर बताए लक्षणों में कोई भी लक्षण महसूस हो तो डॉक्टर से कंसल्ट करना चाहिए।  कितना खतरनाक है कोविड 19 का JN.1 वेरिएंट ( JN.1 Variant)? कोविड 19 का JN.1 वेरिएंट ( JN.1 Variant) कितना खतरनाक है, इसकी जानकारी अब तक शेयर नहीं की गई है और WHO इसपर नजर बनाए हुए है और इसे JN.1 को वेरिएंट ऑफ इंट्रेस्ट (JN.1 as a variant of interest) कहा है। लेकिन ये जरूर कहा जा रहा है कि कमजोर इम्मुनिटी वाले लोगों में कोविड 19 के JN.1 वेरिएंट (COVID 19  JN.1 Variant) का भी खतरा ज्यादा रहता है। इसलिए इम्मुनिटी को स्ट्रॉन्ग बनाए रखना बेहद जरुरी है।  इसे भी पढ़ें: गर्मी के मौसम में अपना रखें खास ख्याल और बरते यह 6 सावधानियां JN.1 वेरिएंट से बचाव कैसे संभव है?  JN.1 वेरिएंट से बचाव के लिए नीचे दिए पॉइंट्स को ध्यान रखें और फॉलो करें- इन ऊपर बताए बिंदुओं को फॉलो कर JN.1 वेरिएंट से बचने में मदद मिल सकती है।  ध्यान रखें कि किसी भी बीमारी या  इंफेक्शन से आसानी से बचा जा सकता है, लेकिन इसके लिए सतर्कता जरुरी है। इसलिए किसी भी तरह की शारीरिक परेशानी महसूस होने पर डरे नहीं और हेल्थ एक्सपर्ट से अपनी शारीरिक समस्या के बारे में बात करें। कोविड 19 के JN.1 वेरिएंट (COVID 19  JN.1 Variant) संक्रामक जरूर है लेकिन इससे आसानी से बचा जा सकता है।  Latest News in Hindi Today Hindi (NCBI) #JN1Variant #COVID19 #WHOAlert #CoronavirusUpdate #CovidSymptoms #JN1Symptoms #VirusPrevention #HealthAlert

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Foods eaten in lunch

लंच में खाए जानें वाले 5 फूड जो वजन को बढ़ा सकते हैं, इनके बारे में जानिए और खाने से बचें

हेल्दी रहने के लिए अपने आहार का ध्यान रखना बेहद जरूरी है। अगर हमारे द्वारा कंज्यूम कैलोरीज बर्न की गई कैलोरीज से अधिक है, तो  कोई भी आहार वजन के बढ़ने का कारण बन सकता है। लेकिन, लंच में खाये जाने वाले फूड्स में कुछ खाद्य पदार्थों का सेवन करने से वेट गेन (Weight Gain) की संभावना बढ़ सकती है, खासतौर पर अगर यह फूड हाई कैलोरी, फैट, चीनी और नमक से भरपूर हों। इसलिए, अपने लंच में आप क्या खा रहे हैं, इसके बारे में खास ध्यान देना जरूरी है। अपने लंच में हमें फल, सब्जियों, साबुत अनाज आदि को शामिल करना चाहिए। आइए पाएं जानकारी की कौन से हैं वो लंच में खाए जाने वाले फूड्स जो वजन बढ़ा सकते हैं (Foods eaten in lunch that can increase weight)?  लंच में खाए जाने वाले फूड्स जो वजन बढ़ा सकते हैं (Foods eaten in lunch that can increase weight) सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल और प्रिवेंशन (Centers for Disease Control and Prevention) के अनुसार हेल्दी फूड से न केवल हमारी इम्युनिटी बढ़ती है, हड्डियां मजबूत होती हैं, कई गंभीर बीमारियों का जोखिम कम रहता है और इसके साथ ही इससे वजन सही रहने में भी मदद मिल सकती है। जानिए कौन से हैं लंच में खाए जाने वाले फूड्स जो वजन बढ़ा सकते हैं (Foods eaten in lunch that can increase weight):  फ्राइड फास्ट फूड (Fried fast food) फ्राइड फास्ट फूड (Fried fast food) अनहेल्दी फूड का सबसे अच्छा उदाहरण है। यह फास्ट फूड जैसे फ्रेंच फ्राइड, बर्गर आदि में कैलोरीज बहुत अधिक होती हैं, जिससे यह वजन को बढ़ा सकते हैं। यह नहीं, इनको अधिक खाने से कई अन्य हेल्थ प्रॉब्लम्स भी हो सकती हैं। उदाहरण के लिए कुछ लोगों की पसंदीदा लंच की डिश छोले-भटूरे कार्बोहाइड्रेट्स और अनहेल्दी फैट्स से भरपूर होते हैं और इस फ्राइड फास्ट फूड (Fried fast food) से वजन बढ़ सकता है। शुगरी ड्रिंक्स (Sugary drinks) चीनी युक्त ड्रिंक्स जैसे सोडा, जूस और मीठे अन्य पेय पदार्थ में भी कैलोरीज और शुगर अधिक मात्रा में हो सकते हैं। बहुत से लोग लंच में इनका सेवन करना पसंद करते हैं। लेकिन इनके कारण वेट गेन (Weight Gain) हो सकता है और इसके साथ ही डायबिटीज, हार्ट रिलेटेड समस्याएं होने की संभावना भी बढ़ सकती हैं। क्रीमी पास्ता (Creamy Pasta) इसमें कोई शक नहीं है कि क्रीमी पास्ता (Creamy Pasta) खाने में बहुत स्वादिष्ट होता है लेकिन इसमें क्रीमी, सॉस, चीज और हाई फैट युक्त सामग्री होती हैं, जिनके कारण कैलोरीज बढ़ सकती हैं। यानी, यह भी वेट गेन (Weight Gain) का कारण बन सकता है। अगर आपको क्रीमी पास्ता (Creamy Pasta) पसंद है और आप अक्सर इसे खाना पसंद करते हैं, तो आपके लिए सतर्क रहना बेहद जरूरी है।  फ्लेवर्ड योगर्ट (Flavoured Yogurt) सादे योगर्ट यानि दही को स्वास्थ्य के लिए लाभदायक माना जाता है। लेकिन, फ्लेवर्ड योगर्ट में चीनी और आर्टिफिशियल इंग्रेडिएंट्स होते हैं। इन्हें खाने से कैलोरीज की मात्रा बढ़ जाती है और जिससे वेट गेन (Weight Gain)होता है।   इसे भी पढ़ें: गर्मी के मौसम में अपना रखें खास ख्याल और बरते यह 6 सावधानियां प्रोसेस्ड मीट (Processed Meat) प्रोसेस्ड मीट जैसे सलामी, सोसेजिज आदि में सोडियम, अनहेल्दी फैट्स और प्रिजरजेटिव होते हैं जिससे समय के साथ वॉटर रिटेंशन और वेट गेन (Weight Gain) हो सकता है। इनके अलावा कैंड सूप भी वजन के बढ़ने का कारण हो सकते हैं। इनमे सोडियम और चीनी की मात्रा अधिक होती है और नियमित रूप से इन्हें पीने से वजन बढ़ सकता है। इसलिए ऐसे किसी भी खाद्य पदार्थ को अपने लंच या आहार में शामिल न करें, जिन्हें खाना न केवल वेट गेन (Weight Gain) की वजह बने बल्कि आपके सम्पूर्ण स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो। अधिक जानकारी के लिए आप किसी डायटीशियन या एक्सपर्ट की सलाह ले सकते हैं। नोट:- यहां दी गई जानकारी रिसर्च के आधार पर दी गई है। लेकिन अगर आप किसी भी शारीरिक समस्या से परेशान हैं, तो अपने हेल्थ एक्सपर्ट से ज़रूर सलाह लें। Latest News in Hindi Today Hindi  #friedfastfood #CreamyPasta #Foodseateninlunchthatcanincreaseweight  #Weight Gain

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